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‘फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2026’ में बेहतर वित्तीय प्रबंधन की झलक

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने कहा कि दूसरी वार्षिक रिपोर्ट में मध्यप्रदेश के राजस्व प्रदर्शन का सकारात्मक आकलन राज्य की वित्तीय अनुशासन और विकासोन्मुख नीतियों का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में अधोसंरचना विकास को नई गति मिली है और निवेश का माहौल लगातार बेहतर हुआ है। मध्यप्रदेश की राजकोषीय स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। नीति आयोग द्वारा जारी दूसरी वार्षिक “Fiscal Health Index 2026” रिपोर्ट में राज्य के वित्तीय प्रबंधन और राजस्व प्रदर्शन का सकारात्मक मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश ने वर्ष 2021-22 से लगातार राजस्व अधिशेष बनाए रखा है, जो मजबूत कर-संग्रह और राज्य के अपने राजस्व स्रोतों में वृद्धि का परिणाम है। दूसरी वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य की राजस्व प्राप्तियाँ सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ी हैं। यह वृद्धि मुख्य रूप से जीएसटी, आबकारी और व्यापार करों की प्रभावी वसूली के कारण संभव हुई है। फिस्कल हेल्थ इंडेक्स राज्यों के राजकोषीय प्रदर्शन का व्यापक और तुलनात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को प्रोत्साहित करता है। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि राज्य सरकार विकास को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अधोसंरचनात्मक विकास के लिए पूंजीगत व्यय 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है, जो एक नया कीर्तिमान होगा। वर्तमान में पूंजीगत व्यय राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 4.8 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि राज्य में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों, पेयजल और सिंचाई परियोजनाओं जैसी अधोसंरचनाओं के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में पूंजीगत व्यय 57,348 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 2025-26 के पुनरीक्षित अनुमान में 74,662 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। यह वृद्धि 30 प्रतिशत से अधिक है और दीर्घकालिक विकास की मजबूत नींव तैयार करती है। दूसरी वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों में 58.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में राज्य के कर राजस्व में 62.52 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें स्टेट जीएसटी, व्यापार एवं बिक्री कर तथा राज्य आबकारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही पेंशन और ब्याज देनदारियों में वृद्धि के कारण प्रतिबद्ध व्यय कुल राजस्व व्यय का 43 प्रतिशत से अधिक हो गया है। राज्य सरकार ने पूंजीगत व्यय पर लगातार ध्यान बनाए रखा है, जो पिछले 5 वर्षों में लगभग दोगुना हो गया है। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि राज्य सरकार बुनियादी ढाँचे के निर्माण और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को प्राथमिकता दे रही है। उल्लेखनीय है कि राज्य का ऋण स्तर अभी भी वैधानिक सीमाओं में है, जो वित्तीय अनुशासन और संतुलित राजकोषीय प्रबंधन को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मजबूत राजस्व आधार और अधोसंरचना में बढ़ते निवेश से मध्यप्रदेश की आर्थिक वृद्धि को दीर्घकालिक गति मिल सकती है और राज्य निवेश तथा औद्योगिक विकास के लिए और अधिक आकर्षक गंतव्य बन सकता है। 

वर्षा जल की एक-एक बूंद का हो संरक्षण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'जल गंगा संवर्धन अभियान-2026' के माध्यम से प्रदेश की जल-संस्कृति को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन की वह महती आवश्यकता है जिसे हमें भावी पीढ़ियों को उपलब्ध कराने के लिये सहेजकर रखना है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि इस अभियान में जल संरक्षण की पारंपरिक पद्धतियों के साथ नवीन तकनीकी नवाचारों को अपनाया जाए और प्रदेश के प्रत्येक जल स्रोत की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि इस वर्ष "वर्षा जल की एक-एक बूंद का संचयन और संरक्षण" ही हमारा परम ध्येय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 19 मार्च से पूरे प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरूआत होगी। भविष्य की चुनौतियों का समाधान: जल-समृद्ध मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों के बीच जल-सुरक्षा ही विकास का मूल मंत्र है। 'जल गंगा संवर्धन अभियान' में प्रदेश जल संरचनाओं की नदियों, तालाबों, बावड़ियों और कुओं का पुनरुद्धार एक मिशन मोड में किया जायेगा। जन-भागीदारी से बनेगा जन आंदोलन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपील की है कि जल गंगा संवर्धन अभियान से जन-जन को जोड़कर एक 'जन-आंदोलन' का रूप दिया जाए। उन्होंने समाज के हर वर्ग, स्वयंसेवी संस्थाओं और युवाओं से इस पुनीत कार्य में आगे बढ़कर श्रमदान करने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब समाज का हर व्यक्ति जल संरचनाओं की सुरक्षा का प्रहरी बनेगा, तभी हम "परम वैभवशाली और जल-समृद्ध मध्यप्रदेश" के स्वप्न को साकार कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि अभियान में प्रत्येक जिले में जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता सुनिश्चित की जाए और जल गुणवत्ता परीक्षण के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। अभियान की प्रमुख गतिविधियां              जल संरचनाओं का कायाकल्प।              नवीन जल स्त्रोतों का निर्माण।              भू-जल स्तर बढ़ाने भवनों पर रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग।              पुराने जल स्त्रोतों का संधारण।              जल स्त्रोतों के पास साफ-सफाई।              सोक पिट का निर्माण।              पेयजल की टेस्टिंग और टंकियों की सफाई।              पुराने तालाबों का गहरीकरण।              स्टॉप डेम का संधारण एवं नवीन निर्माण।              पेयजल पाइप लाइनों का संधारण।              जल स्त्रोतों के पास वृहद पौध-रोपण।              जल संरक्षण के लिए जन-भागीदारी बढ़ाना।  

प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं घरेलू एलपीजी सिलेंडर : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि प्रदेश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर, पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, पीएनजी की सुचारू रूप से वितरण हो रहा है। इनकी पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता है एवं लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। आयुक्त खाद्य  कर्मवीर शर्मा ने बताया है कि वाणिज्यिक एलपीजी गैस उपयोग के लिए शैक्षणिक संस्थान एवं चिकित्सकीय संस्थान को छूट दी गई है, जो जारी रहेगी, जिससे शैक्षणिक गतिविधि एवं चिकित्सकीय व्यवस्था निर्बाध रूप से जारी रह सके। एलपीजी की जमाखोरी एवं कालाबाजारी रोकने के लिए जिलों को निर्देश दिये गये हैं। जिलों द्वारा इस क्षेत्र में लगातार कार्यवाही की जा रही है। एलपीजी के वैकल्पिक साधनों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही ऐसी गतिविधियों, जिनमें एलपीजी का अधिक उपयोग होता है, उन्हें नियंत्रित करने पर भी जोर दिया गया है। 

जीपीएफ संबंधी समस्या के निराकरण के लिए जबलपुर में लगेगा 16 मार्च को शिविर

भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मण्डल की विभिन्न उत्तरवर्ती कंपनियों से सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों के सामान्य भविष्यनिधि भुगतान या अंतिम या अनंतिम आहरण आदि से संबंधित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के संबंध में एक शिविर का आयोजन 16 मार्च को किया गया है। शिविर का आयोजन विद्युत कंपनियों के मुख्यालय शक्तिभवन जबलपुर में स्थित केन्द्रीय पुस्तकालय में प्रात: 11 बजे से प्रारंभ होगा। शिविर में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों व कार्मिकों द्वारा सामान्य भविष्यनिधि के अंतिम भुगतान की प्रक्रिया एवं उससे संबंधित समस्याओं का निराकरण और जीपीएफ पार्ट फाइनल एवं ऋण (लोन) आहरण के प्रकरण की प्रक्रिया एवं उससे संबंधित समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। कंपनी ने समस्त उत्तरवर्ती विद्युत कंपनियों के कार्मिकों से अनुरोध किया गया है कि वे इस शिविर का लाभ उठायें।  

मध्यप्रदेश में पैरामेडिकल-नर्सिंग स्टाफ के लिए निकली वैकेंसी, ऐसे करें आसानी से आवेदन

भोपाल मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर प्रदान किया है। बोर्ड ने 'ग्रुप-5' के तहत पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में 291 रिक्त पदों को भरा जाएगा। भर्ती का विवरण और पद नोटिफिकेशन के तहत स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी (AVFO) और अन्य तकनीकी पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं। यह भर्ती उन युवाओं के लिए एक बड़ा मौका है जो चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से समाज की सेवा करना चाहते हैं। पदों की संख्या और आरक्षण का विवरण आधिकारिक नोटिफिकेशन में दिया गया है, जिसे उम्मीदवार बोर्ड की वेबसाइट पर देख सकते हैं। कौन कर सकता है आवेदन? (पात्रता मानदंड) शैक्षणिक योग्यता: आवेदक ने संबंधित विषय में 12वीं (साइंस स्ट्रीम) पास की हो। इसके साथ ही, पद के अनुसार संबंधित ट्रेड में डिप्लोमा या डिग्री (जैसे- GNM, B.Sc Nursing, B.Pharma, या लैब टेक्नोलॉजी डिप्लोमा) होना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन: उम्मीदवार का मध्य प्रदेश के संबंधित काउंसिल (जैसे- नर्सिंग या फार्मेसी काउंसिल) में रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है। आयु सीमा: आवेदकों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। हालांकि, मध्य प्रदेश के मूल निवासी आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC) और महिलाओं को सरकारी नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी। महत्वपूर्ण तिथियां आवेदकों को समय सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा ताकि अंतिम समय की तकनीकी समस्याओं से बचा जा सके। भर्ती के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने की प्रक्रिया 13 मार्च 2026 से आधिकारिक पोर्टल पर शुरू होगी। भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 27 मार्च 2026 है। आवेदन शुल्क सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए परीक्षा शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि मध्य प्रदेश के आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC/दिव्यांग) के लिए यह 250 रुपये है। इसके अतिरिक्त, पोर्टल शुल्क का भुगतान भी करना होगा। चयन प्रक्रिया और परीक्षा केंद्र चयन पूरी तरह से लिखित परीक्षा के आधार पर होगा। परीक्षा में दो भाग होंगे। सामान्य भाग में सामान्य ज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और रगजनिंग से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे।तकनीकी भाग उम्मीदवार के संबंधित विषय (जिस पद के लिए आवेदन किया है) पर आधारित होगा। परीक्षा का आयोजन मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और अन्य जिला केंद्रों पर किया जाएगा। आवेदन कैसे करें?     सबसे पहले MPESB की आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाएं। 2. 'Online Form' सेक्शन में जाकर 'Group-5 Paramedical & Nursing Recruitment 2026' के लिंक पर क्लिक करें। 3. अपना प्रोफाइल रजिस्ट्रेशन (MP Online Profile) पूरा करें। 4. आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी सावधानीपूर्वक भरें और आवश्यक डॉक्यूमेंट अपलोड करें। 5. आवेदन शुल्क का भुगतान कर फॉर्म सबमिट करें और उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।

जल संरक्षण में जनसहभागिता पर जोर, मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल से बढ़ा अभियान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये प्रभावी रूप से जनभागीदारी की पहल की गई है। प्रदेश में “जल महोत्सव-2026” आयोजित किया जा रहा है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत यह अभियान केवल पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन के लिये समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक दूरदर्शी प्रयास है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति व्यवस्था को दीर्घकालिक, उत्तरदायी और आत्मनिर्भर बनाने की अवधारणा को सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रदेश के चयनित ग्रामों में 8 मार्च से 22 मार्च 2026 के बीच जल महोत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव का उद्देश्य उन ग्रामों की उपलब्धियों को सामने लाना है जहाँ हर घर तक नल से जल की सुविधा सुनिश्चित हो चुकी है और पेयजल योजनाओं का संचालन, प्रबंधन तथा रख-रखाव ग्राम पंचायतों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से सफलतापूर्वक किया जा रहा है। जल महोत्सव ग्रामीण समुदाय को जल प्रबंधन की जिम्मेदारी के प्रति और अधिक जागरूक एवं सहभागी बनाने का अवसर भी प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में जल जीवन मिशन को एक व्यापक जनभागीदारी आधारित पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। जल महोत्सव के माध्यम से ग्राम पंचायतों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों, स्वयं सहायता समूहों तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय भूमिका को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे जल स्रोतों के संरक्षण, पेयजल प्रणालियों के सुचारु संचालन और सामुदायिक स्वामित्व की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। प्रदेश में जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिये निरंतर उल्लेखनीय कार्य किये जाते रहे है। देश का पहला “जल अर्पण दिवस” राजगढ़ जिले में गोरखपुरा समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत 23 दिसम्बर 2025 को आयोजित किया गया था, जिसने जल प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता का एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। जल महोत्सव के लिए ऐसे ग्रामों का चयन किया गया है जहाँ हर घर जल की स्थिति सत्यापित हो चुकी है और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति द्वारा पेयजल आपूर्ति व्यवस्था का संचालन प्रभावी रूप से किया जा रहा है। प्रत्येक जिले से ऐसे 2 ग्राम चिन्हित किए गए हैं जहाँ जल जीवन मिशन के मानकों के अनुरूप जल प्रदाय की व्यवस्था सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। इन ग्रामों में कार्यक्रमों का आयोजन कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिला पंचायत तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के समन्वय से किया जा रहा है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले होंगे सम्मानित महोत्सव में ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वाल्वमैन, स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्य तथा ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सक्रिय सदस्यों को चिन्हित किया जाएगा। जिला जल एवं स्वच्छता समिति की बैठक में कलेक्टर के द्वारा इनका सम्मान किया जाएगा, जिससे समुदाय आधारित जल प्रबंधन के उत्कृष्ट प्रयासों को प्रोत्साहन मिल सके। कार्यक्रम के आयोजन के लिए प्रत्येक चयनित ग्राम में परियोजना क्रियान्वयन इकाई स्तर पर उपलब्ध मद से अधिकतम 25 हजार रु. तक की राशि व्यय की जा सकेगी। प्रदेश की विभिन्न परियोजना क्रियान्वयन इकाइयों के अंतर्गत आने वाले जिलों में यह आयोजन किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से भोपाल, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, इंदौर, रतलाम, नीमच, छिंदवाड़ा, शहडोल, अनूपपुर, रीवा, सीधी, छतरपुर, दमोह, पन्ना, उज्जैन तथा बड़वानी सहित अन्य जिलों के चयनित ग्राम शामिल हैं। जल महोत्सव-2026 के माध्यम से प्रदेश में सुरक्षित पेयजल उपलब्धता की दिशा में प्राप्त उपलब्धियों को रेखांकित करने के साथ जल प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता को और अधिक सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति व्यवस्था को स्थायी और प्रभावी रूप से संचालित किया जा सके।  

दिल की धड़कन थमने के बाद डॉक्टरों का कमाल, 120 जूल शॉक से महिला की बची जान

शहडोल जिला अस्पताल के आईसीयू में डॉक्टरों की तत्परता से एक महिला को नई जिंदगी मिली। दिल की धड़कन रुकने के बाद डिफिब्रिलेटर शॉक देने पर मरीज का हृदय दोबारा धड़कने लगा। इस सफल उपचार के बाद डॉक्टरों और परिजनों ने राहत की सांस ली। गंभीर हालत में भर्ती करवाया गया था सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ ने बताया कि हृदय रोग से पीड़ित महिला को गंभीर हालत में जिला अस्पताल के फीमेल वार्ड में भर्ती कराया गया था। उस समय मरीज का ब्लड प्रेशर रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा था और उसकी स्थिति बेहद नाजुक थी। डिफिब्रिलेटर शॉक देने का निर्णय मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सक डॉ. वसीम खान ने बिना देर किए महिला को आईसीयू में शिफ्ट कर डिफिब्रिलेटर शॉक देने का निर्णय लिया। उपचार शुरू करने से पहले परिजनों को मरीज की स्थिति और संभावित जोखिम के बारे में जानकारी दी गई और लिखित सहमति ली गई। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने आपातकालीन उपचार शुरू किया। उपचार के दौरान महिला को इलेक्ट्रिक शॉक दिया गया और जरूरी इमरजेंसी दवाओं के साथ उसकी लगातार निगरानी की गई। कुछ ही देर बाद डिफिब्रिलेटर शॉक का असर हुआ और मरीज का दिल, जो कुछ समय के लिए रुक गया था, फिर से धड़कने लगा।  

खंडवा में सनसनीखेज वारदात, बदमाशों ने मजदूरों को बनाया बंधक; 12 बोर बंदूक और कैश लूटा

खंडवा नर्मदानगर थाना क्षेत्र के ग्राम पामाखेड़ी में गुरुवार सुबह दिनदहाड़े डकैती की वारदात से क्षेत्र में दहशत फैल गई। काले रंग की कार से आए सात से आठ नकाबपोश बदमाशों ने जयंती माता मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष ललित-वासुदेव सोलंकी के खेत पर बने मकान में धावा बोल दिया। बदमाशों ने घर पर मौजूद तीन मजदूरों को रस्सी से बांधकर कमरे में बंद कर दिया और इत्मीनान से वारदात को अंजाम दिया। बदमाश घर से 12 बोर की लायसेंसी बंदूक और 1.60 लाख रुपये नकदी ले गए। जानकारी के अनुसार घटना सुबह करीब छह से साढ़े छह बजे के बीच की है।उस समय मकान मालिक ललित सोलंकी अपने परिवार के साथ देवास जिले के सतवास में एक विवाह समारोह में शामिल होने गए हुए थे।घर पर दो खेतीहर मजदूर मौजूद थे।इसी दौरान काले रंग की कार से आए नकाबपोश बदमाशों ने घर में घुसकर मजदूरों को पकड़ लिया और रस्सी से बांध दिया। तीसरा मजदूर तो आया तो उसे बना लिया बंधक इसी बीच ललित सोलंकी का एक नौकर पशुओं का दूध निकालने के लिए वहां पहुंचा तो बदमाशों ने उसे भी पकड़कर बांध दिया। तीनों मजदूरों को मकान के पीछे बने कमरे में बंद कर दिया गया।इसके बाद बदमाशों ने घर के अंदर तलाशी ली और सामान अस्त-व्यस्त कर दिया। बदमाश अपने साथ एक 12 बोर की लाइसेंसी बंदूक और करीब एक लाख साठ हजार रुपये नकद लेकर फरार हो गए। चौथा मजदूर पहुंचा तब लगी डकैती की सूचना     घटना की जानकारी तब सामने आई जब सोलंकी का एक अन्य मजदूर पशुओं को खोलकर खेत ले जाने के लिए पहुंचा।     उसने बंधे मजदूरों को देखा और तुरंत इसकी सूचना ललित सोलंकी को दी।     इसके बाद सोलंकी ने नर्मदानगर थाने में डकैती की सूचना दी।     सूचना मिलते ही थाना प्रभारी विकास खींची पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की।     खंडवा से एफएसएल टीम को भी बुलाया गया है, जिसने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए।     पुलिस आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच कर रही है। सात-आठ माह पहले भी लूट का प्रयास बताया जा रहा है कि ललित सोलंकी अपने खेत में बने मकान में परिवार के साथ रहते हैं। करीब सात-आठ महीने पहले भी अज्ञात बदमाशों ने यहां लूट का असफल प्रयास किया था। सुबह के समय हुई इस डकैती की घटना से पामाखेड़ी और आसपास के गांवों में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की है।पुलिस का कहना है कि आरोपितों की तलाश के लिए टीम गठित कर दी गई है और जल्द ही बदमाशों को पकड़ लिया जाएगा।  

अप्रैल माह में पैक्स से 10 लाख किसानों को जोड़ने के लिए चलाया जाएगा वृहद सदस्यता अभियान

भोपाल सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर विभाग की वर्तमान गतिविधियों एवं आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में मंत्री  सारंग ने निर्देश दिए कि प्रदेश में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) और विपणन सहकारी समितियों के सुदृढ़ीकरण के लिए एक विशेष कमेटी गठित की जाए। यह कमेटी सहकारी संस्थाओं की वर्तमान स्थिति का अध्ययन कर उनके संचालन, संरचना और कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में सुझाव देगी तथा 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। मंत्री  सारंग ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को “कृषि कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, ऐसे में सहकारिता क्षेत्र की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कृषि वर्ष को ध्यान में रखते हुए सहकारिता संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। मंत्री  सारंग ने कहा कि पैक्स को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत इकाई के रूप में विकसित करना आवश्यक है। इसके लिए पैक्स की सदस्यता बढ़ाने के उद्देश्य से अप्रैल माह में प्रदेशभर में वृहद सदस्यता अभियान चलाया जाए, जिसके तहत लगभग 10 लाख किसानों को सहकारिता से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया जाए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक किसानों को सहकारिता से जोड़ने से ग्रामीण स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और किसानों को संस्थागत सुविधाओं का लाभ प्राप्त होगा। मंत्री  सारंग ने खाद वितरण व्यवस्था की भी समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि डबल लॉक की स्थिति में नगद भुगतान के माध्यम से पैक्स के जरिए खाद वितरण की व्यवस्था को प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को समय पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बन सकेगी। बैठक में प्रमुख सचिव सहकारिता  डी.पी. आहूजा, आयुक्त सहकारिता  मनोज पुष्प सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मोनालिसा की शादी से मचा विवाद, डायरेक्टर का आरोप — ‘यह लव जिहाद है, मेरे साथ धोखा हुआ’

खरगोन महाकुंभ में वायरल होने के बाद चर्चा में आई मोनालिसा भोंसले के आज प्रेमी फरमान खान से विवाह को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह कोई बगावत नहीं बल्कि 'लव जिहाद' का मामला है। उन्होंने दावा किया कि मोनालिसा के करियर को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की थी, लेकिन घटनाक्रम ने उन्हें मानसिक रूप से आहत कर दिया है। केरल में पुलिस सुरक्षा और मंदिर में शादी अभिनेत्री बनने की राह पर चल रही मोनालिसा ने अपने प्रेमी फरमान खान के साथ केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित थम्पानूर पुलिस स्टेशन पहुंचकर पुलिस से मदद मांगी और बाद में मंदिर में जाकर आज उससे शादी कर ली। बताया जा रहा है कि मोनालिसा और फरमान खान के बीच करीब डेढ़ साल पहले फेसबुक के माध्यम से बातचीत शुरू हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उनका रिश्ता प्रेम संबंध में बदल गया। महाकुंभ से लेकर फिल्म 'द डायरी ऑफ मणिपुर' तक का सफर मिश्रा ने सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा कि महाकुंभ के दौरान मोनालिसा का वीडियो वायरल होने के बाद उन्होंने उसकी सादगी और व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उसे अपनी फिल्म में अभिनेत्री बनाने का फैसला किया था। उन्होंने बताया कि उस समय देश-दुनिया में इस निर्णय का स्वागत हुआ था। हालांकि, उनके अनुसार कुछ विरोधियों को यह बात पसंद नहीं आई और उन पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें जेल भेज दिया गया। निर्देशक का संघर्ष और व्यक्तिगत निवेश उन्होंने कहा कि जेल में रहते हुए भी उन्होंने अपनी फिल्म की कहानी लिखी और बाद में फिल्म पूरी की। मिश्रा का दावा है कि मोनालिसा के करियर को बनाने के लिए उन्होंने काफी आर्थिक और व्यक्तिगत प्रयास किए, यहां तक कि फिल्म को पूरा करने के लिए उन्होंने बड़ा कर्ज भी लिया। मिश्रा ने यह भी कहा कि मोनालिसा का पारिवारिक जीवन काफी जटिल रहा है और उसने कई बार अपने निजी संघर्षों के बारे में उनसे चर्चा की थी। उनके अनुसार मोनालिसा अपने परिवार की परिस्थितियों को लेकर भावुक रहती थी और कई बार उसने अपनी भावनाएं उनसे साझा की थीं। विश्वासघात और षड्यंत्र का दावा निर्देशक ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने मोनालिसा को उनके प्रभाव से दूर करने की कोशिश की और उसे अलग दिशा में प्रभावित किया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को उन्होंने मोनालिसा की पढ़ाई और प्रशिक्षण के लिए जोड़ा था, उनमें से कुछ ने बाद में उनके विश्वास को तोड़ा। मिश्रा के अनुसार वर्तमान घटनाक्रम ने उन्हें गहरा आघात पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि जिस लड़की को उन्होंने आगे बढ़ाने की कोशिश की, आज उसी के फैसले ने उन्हें जवाब देने की स्थिति में नहीं छोड़ा है। पारदी समुदाय से इंटरनेट सेंसेशन बनने की कहानी मोनालिसा भोंसले मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर के वार्ड नंबर 9 में अपने परिवार के साथ रहती हैं। वह पारदी समुदाय से संबंध रखती हैं, जो पारंपरिक रूप से अलग-अलग जगहों पर घूमकर रुद्राक्ष और पत्थर की मालाएं बेचने का काम करता है। इस समुदाय को करीब चार दशक पहले इस वार्ड में बसाया गया था। प्रयागराज के महाकुंभ में रुद्राक्ष की माला बेचते समय उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसके बाद वह इंटरनेट सेंसेशन बन गईं। उनकी लोकप्रियता से प्रभावित होकर फिल्म निर्माता सनोज मिश्रा ने उन्हें अपनी नई फिल्म 'द डायरी ऑफ मणिपुर' में मुख्य अभिनेत्री के रूप में साइन किया। उन्होंने जी-जान लगाकर मोनालिसा को अभिनय सीखने में भी भरपूर मदद की।