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होली पर्व पर उप मुख्यमंत्री ने भगवान जगन्नाथ के किये दर्शन

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने होली पर्व पर भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर आशिर्वाद प्राप्त किया तथा प्रदेश वासियों की सुख, समृद्धि एवं मंगल कामना की। उन्होंने भगवान जगन्नाथ के महाप्रसाद कढ़ी-भात एवं खीर का श्रृद्धालुओं को वितरण कर पुण्य कार्य में सेवाभाव से सहभागिता की। उप मुख्यमंत्री ने भगवान भैरवनाथ के दर्शन किये उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने होली महापर्व पर गुढ़ स्थित भैरवनाथ लोक पहुंचकर भगवान भैरवनाथ के दर्शन किये तथा लोक कल्याण की कामना की। 

दूषित पानी मामले में हाईकोर्ट सख्त, निगम को 10 दिन में न्यायिक आयोग को रिकॉर्ड देने के निर्देश

इंदौर भागीरथपुरा में रहवासियों को मल-मूत्र युक्त पानी पिलाने वाले नगर निगम की एक और लापरवाही सामने आई है। कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद निगम ने मामले की जांच कर रहे न्यायिक आयोग को अब तक भागीरथपुरा क्षेत्र में बिछाई गई पाइप लाइनें, टेंडर से जुड़े दस्तावेज, दूषित पानी की वजह से जान गंवाने वालों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं सौंपे। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और आदेश दिया कि निगम दस दिन के भीतर पूरे दस्तावेज आयोग को सौंप दे। मामले को लेकर हाई कोर्ट में चल रही पांच अलग-अलग याचिकाओं पर गुरुवार को एक साथ सुनवाई हुई। दस्तावेज न मिलने से जांच के अंतिम निष्कर्ष में बाधा आयोग ने गुरुवार को अंतरिम जांच रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की। इसमें कहा है कि चूंकि निगम से पूरे दस्तावेज नहीं मिले हैं, इसलिए जांच के अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच पाना संभव नहीं है। कोर्ट ने आयोग को रिपोर्ट पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दे दिया। अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी। इस जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि वे कौन अधिकारी थे जिनकी लापरवाही की वजह से भागीरथपुरा दूषित पानी कांड हुआ और 36 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। सीवेज मौत पर 30 लाख, भागीरथपुरा कांड में सिर्फ 2 लाख सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि सीवेज लाइन में उतरे दो लोगों की मृत्यु पर उनके परिजनों को तो 30-30 लाख रुपये का मुआवजा दे दिया, लेकिन भागीरथपुरा कांड में सिर्फ दो-दो लाख रुपये दिए गए। इस पर कोर्ट ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट सामने आने दीजिए, इस बारे में भी विचार करेंगे। गुरुवार दोपहर ठीक 2.30 बजे न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष भागीरथपुरा मामले की सुनवाई शुरू हुई। दस्तावेज सौंपने में देरी पर कोर्ट सख्त, आयोग में कर्मचारी तैनात करने के निर्देश एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसे पढ़ने के बाद कोर्ट ने निगम के वकील से कहा कि निगम को दस्तावेज सौंपने में क्या दिक्कत है। निगम के वकील ने कहा – हम दस्तावेज दे रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि आयोग ने अंतरिम रिपोर्ट दो मार्च को तैयार की है और इसमें साफ लिखा है कि दस्तावेज नहीं मिले हैं। सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि आमजन आयोग के पास भागीरथपुरा मामले में दस्तावेज, साक्ष्य, शिकायत लेकर पहुंच तो रहे हैं, लेकिन वहां कोई कर्मचारी ही नहीं है जो उनकी शिकायत या दस्तावेज ले सके। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि आयोग में इस कार्य के लिए कर्मचारी तैनात किए जाएं। क्या पानी में मिलाया गया था जानलेवा केमिकल? सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कहा कि शहर में 110 टंकियां हैं, लेकिन सिर्फ भागीरथपुरा टंकी से वितरित हुए पानी से ही मौतें हुई हैं। जांच इस बात की भी होनी चाहिए कि कहीं ऐसा तो नहीं कि भागीरथपुरा टंकी में कुछ ऐसा मिलाया गया जो जानलेवा साबित हुआ। उन्होंने कोर्ट को बताया कि यह बात भी सामने आई है कि भागीरथपुरा टंकी में केमिकल की कुछ अतिरिक्त मात्रा मिलाई गई थी। उन्होंने इस संबंध में एक पेन ड्राइव भी कोर्ट में प्रस्तुत की मुआवजे की राशि पर एडवोकेट मनीष यादव की दलील एडवोकेट मनीष यादव ने मृतकों के परिजनों को दिए जाने वाले मुआवजे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि तीन दिन पहले शहर में सीवेज में उतरने से हुई दो लोगों की मौत के मामले में शासन ने उनके परिजनों को 30-30 लाख रुपये की सहायता की, जबकि भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में जान गंवाने वालों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये दिए गए। यह राशि भी शासन ने नहीं दी बल्कि रेडक्रास सोसायटी से दी गई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि न्यायिक आयोग ने अंतरिम रिपोर्ट में इसे लेकर कहा है कि अंतिम रिपोर्ट में इस बिंदु को शामिल करेंगे। आयोग नियुक्त करेगा शिकायत अधिकारी कोर्ट ने न्यायिक आयोग से कहा है कि वह आमजन की शिकायत, सुझाव, दस्तावेज, साक्ष्य आदि दर्ज कराने के लिए एक व्यक्ति की नियुक्ति करे ताकि आमजन सुविधाजनक तरीके से इस मामले में साक्ष्य दे सकें। आयोग ने कोर्ट को यह भी बताया कि कार्यकाल बढ़ा दिया गया है। सुनवाई के दौरान एडवोकेट अनिल ओझा, एडवोकेट विभोर खंडेलवाल, निगम की ओर से एडवोकेट ऋषि तिवारी आदि ने पैरवी की। अदालत में हुई जिरह के कुछ अंश     कोर्ट: आप यह बताओ पूरा रिकॉर्ड कब देंगे?     निगम के वकील: रिकॉर्ड दे दिया था, आयोग ने दो मार्च को पत्र जारी कर कुछ और रिकॉर्ड मांगा है।     कोर्ट: रिकॉर्ड देने में क्या दिक्कत है?     निगम के वकील: कुछ रिकॉर्ड आईडीए से संबंधित है। वहां से बुलवाना पड़ेगा, जैसे ही रिकॉर्ड वहां से मिलेगा हम सौंप देंगे।     कोर्ट: आप दस दिन में अनिवार्य रूप से रिकॉर्ड उपलब्ध करवा दें।  

सतपुड़ा, अमरकंटक और सिंगाजी ने 100% से अधिक उपयोगिता दर से स्थापित किया नया मानक

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) ने विद्युत उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि अर्जित की है। कंपनी के सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी, सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया व अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई को फ्लाई ऐश के वैज्ञानिक, सुनियोजित एवं अधिकतम उपयोग के लिये किए जा रहे सतत् प्रयास करने के लिए गोवा में आयोजित 15 वें फ्लाई ऐश उपयोगिता पुरस्कार 2026 समारोह में चार प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया। ऊर्जा एवं पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों को प्रोत्साहित करने वाली एक प्रतिष्ठित संस्था मिशन एनर्जी फाउंडेशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय समारोह में यह सम्मान प्रदान किए गए। सिंगाजी ताप विद्युत गृह को मिले दो पुरस्कार समारोह में सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी को स्टेट सेक्टर 500 से 1500 मेगावाट तक वर्ग में और अमरकंटक ताप विद्युत गृह को स्टेट सेक्टर पब्लिक यूटिलिटी 500 मेगावाट से कम वर्ग में फ्लाई ऐश के उत्कृष्ट व असाधारण उपयोग करने करने के लिए पुरस्कृत किया गया। वहीं सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना को दो सर्वोच्च सम्मान फ्लाई ऐश के उत्कृष्ट व असाधारण उपयोग करने और ओवरऑल चैंपियन-फ्लाई ऐश मैनेजमेंट एक्सीलेंस के लिए प्रदान किए गए। एक करोड़ से अधिक मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का निस्तरण सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया (खंडवा) द्वारा वित्तीय वर्ष 2024–25 के दौरान कुल 61,21,066 मीट्रिक टन ऐश का सफलतापूर्वक निस्तारण एवं उपयोग सुनिश्चित किया गया। यह उपलब्धि 161 प्रतिशत उपयोगिता दर को दर्शाती है। यह न केवल वर्तमान फ्लाई ऐश के शत-प्रतिशत उपयोगिता का प्रमाण है, बल्कि पूर्व में संचित (लीगेसी) ऐश के बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक निस्तारण को भी रेखांकित करती है। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी ने वित्तीय वर्ष 2023 से 2025 तक के निर्धारित किए गए लक्ष्य को 119 प्रतिशत की संचयी उपयोगिता दर से आसानी से हासिल कर 34,12,785 मीट्रिक टन रख को निष्पादित किया। अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 204 प्रतिशत की उपयोगिता दर से 6,66,438 मीट्रिक टन राख का निस्तारण किया। इस प्रकार तीन ताप विद्युत गृहों द्वारा 1,02,00,289 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का निस्तारण किया।  

प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में है पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी अपर मुख्य सचिव खाद्य शमी ने की समीक्षा

भोपाल  प्रदेश में पेट्रोल,डीजल एवं एलपीजी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। यह जानकारी ऑयल कम्पनियों के प्रतिनिधियों ने अपर मुख्य सचिव खाद्य  रश्मि अरुण शमी द्वारा गुरुवार को मंत्रालय में की गयी पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता की समीक्षा के दौरान दी। उल्लेखनीय है कि वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता की समीक्षा के निर्देश दिये थे। समीक्षा बैठक में ऑयल कम्पनियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्तमान खपत को देखते हुए पेट्रोलियम पदार्थों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। अपर मुख्य सचिव ने ऑयल कम्पनियों को जिलावार अपने फील्ड ऑफिसर तथा डिपो प्रभारी को संभागायुक्त एवं कलेक्टर से सम्पर्क करने तथा नियमित रूप से स्टॉक की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिये कि डीजल, पेट्रोल एवं एलपीजी की जमाखोरी एवं कालाबाजारी किसी भी स्थिति में न हो। डीलर स्तर पर प्रतिदिन स्टॉक की समीक्षा की जाए। बैठक में कमिश्नर खाद्य  कर्मवीर शर्मा, एमडी नागरिक आपूर्ति निगम  अनुराग वर्मा और ऑयल कम्पनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

कटनी में तनाव: पुरानी दुश्मनी में चली बमबाजी, 9 जख्मी, पुलिस ने संभाला मोर्चा

कटनी  माधव नगर बंगला लाइन में गुरुवार को बमबाजी की घटना से क्षेत्र में दहशत फैल गई। पुरानी रंजिश पर कुछ लोगों ने कई देशी बम फेंके, जिसमें झुलसने से 9 लोग घायल हुए हैं और उनमें बच्चे भी शामिल हैं। क्या है मामला जानकारी के अनुसार माधव नगर थाना क्षेत्र के बंगला लाइन कैंप में गुरुवार को पुरानी रंजिश के चलते अचानक हिंसक झड़प हो गई। बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान करीब 10 देशी बम फेंके गए, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। 9 लोग घायल इस घटना में महिला, पुरुष और नाबालिग सहित 8 से 9 लोग घायल हो गए हैं। सभी घायलों को तुरंत उपचार के लिए जिला अस्पताल कटनी में भर्ती कराया गया है। पुलिस बल तैनात घटना की सूचना मिलते ही माधव नगर पुलिस मौके पर पहुंची और इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बुधवार को बंगला लाइन के काली, मिठ्ठू और अड्डा नामक युवकों का कुछ लोगों से विवाद हुआ था और उसी के चलते आज वाहनों से युवक पहुंचे और क्षेत्र में बम पटककर दहशत फैलाते हुए भाग निकले। पुलिस ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है और मामले की जांच जारी है।

प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: महू के कोदरिया में अवैध आलू चिप्स फैक्ट्रियां पकड़ी गईं, तीन यूनिट सील

महू क्षेत्र के कोदरिया गांव में बिना अनुमति संचालित हो रहे आलू चिप्स कारखानों से निकलने वाले दूषित पानी और अपशिष्ट को लेकर प्रशासन ने गुरुवार को सख्त कार्रवाई की। महू एसडीएम राकेश परमार के नेतृत्व में दोपहर करीब 2 बजे प्रशासनिक दल ने कोदरिया पहुंचकर कारखानों का निरीक्षण किया और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तीन कारखानों को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान तहसीलदार विवेक सोनी, तहसीलदार राधा बल्लभ धाकड़, पटवारी विजय भावसार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। टीम ने क्षेत्र में संचालित कई चिप्स कारखानों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई स्थानों पर कारखानों से निकलने वाला कचरा और दूषित पानी खुले में खेतों में फैलता हुआ पाया गया, जिससे आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण फैलने की स्थिति बन रही थी। निरीक्षण के दौरान एक कारखाने में नाबालिग से काम कराए जाने का मामला भी सामने आया। तहसीलदार विवेक सोनी ने मौके पर एक नाबालिग को काम करते हुए पाया। इस पर अधिकारियों ने कारखाना संचालकों को कड़ी फटकार लगाई और संबंधित संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी। ग्रामीणों के अनुसार, लंबे समय से इन कारखानों से निकलने वाला अपशिष्ट और गंदा पानी खुले में छोड़ा जा रहा था, जिससे खेतों और आसपास के जल स्रोतों के प्रदूषित होने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। ग्रामीणों ने बदबू और गंदगी फैलने की भी शिकायत की थी, जिसका खेती और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। एसडीएम राकेश परमार ने बताया कि जांच में तीन आलू चिप्स कारखाने बिना अनुमति के संचालित पाए गए, जिन्हें तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है। मौके पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे और संयुक्त रूप से कार्रवाई की गई। प्रशासन द्वारा क्षेत्र के अन्य कारखानों की भी जांच की जा रही है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दमोह में खौफनाक मर्डर: जेल से रिहा आरोपी ने युवक को रॉड-हथौड़े से पीट-पीटकर मार डाला

दमोह दमोह जिले के दमोह देहात थाना अंतर्गत ग्राम सम्मना में गुरुवार की दोपहर पत्नी की हत्या के मामले में जेल से रिहा हुए एक युवक ने बाइक सवार युवक पर लोहे की रॉड और हथौड़े से हमला कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने हत्या के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का क्या कहना घटना के संबंध में नगर पुलिस अधीक्षक एच.आर. पांडेय ने बताया कि देहात थाना अंतर्गत ग्राम सम्मना में गुरुवार की दोपहर भरत पुत्र रामगोपाल विश्वकर्मा (20) निवासी अर्थखेड़ा चौकी इमलिया अपनी बहन से टीका लगवाने के लिए ग्राम सम्मना आया हुआ था और टीका लगवाने के लिए जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में बैठे युवक गुड्डा पटैल (58) ने अचानक बाइक सवार रामगोपाल पर लोहे की रॉड और हथौड़े से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी मौके से भाग गया। पुलिस मौके पर पहुंची घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। इस दौरान आरोपी खेत में भाग गया और रॉड घुमाने लगा। गांव के लोग भी लाठी आदि लेकर उसे पकड़ने दौड़े और उसे घेर लिया। उसी समय पुलिस पहुंच गई, अन्यथा ग्रामीण उसकी हत्या कर देते। खून पीने और मांस खाने की बात पुलिस के अनुसार आरोपी का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें खून पीने और मांस खाने की बात कही जा रही है। नगर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपी दो वर्ष पूर्व अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काटकर जेल से रिहा हुआ था। पुलिस के अनुसार आरोपी के मानसिक रूप से असामान्य होने की भी जानकारी सामने आई है।  

वेतन कटौती विवाद: MP में 1 लाख कर्मचारियों को बड़ा झटका, मोहन सरकार सुप्रीम कोर्ट में ले जाएगी केस; 400 करोड़ रु. बकाया

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों से जुड़ा प्रोबेशन पीरियड वेतन कटौती मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में बड़ा फैसला सुनाते हुए तत्कालीन कमलनाथ सरकार के 12 दिसंबर 2019 के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसमें नए नियुक्त कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि के दौरान पूरा वेतन देने के बजाय 70%, 80% और 90% वेतन देने का प्रावधान किया गया था। अदालत ने इसे भेदभावपूर्ण और अवैध करार देते हुए स्पष्ट कहा था कि प्रभावित कर्मचारियों को काटी गई राशि एरियर सहित लौटाई जाए। इस निर्णय से करीब 1 लाख कर्मचारियों में उम्मीद जगी थी कि उन्हें लगभग 400 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान मिल सकेगा। अब सर्वोच्च अदालत की शरण में जाने की तैयारी हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मामला थमता नजर आ रहा था, लेकिन अब मोहन सरकार ने इसे चुनौती देने की तैयारी कर ली है। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने की योजना बना रही है। यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है तो एरियर भुगतान पर फिलहाल रोक लग सकती है, जिससे कर्मचारियों की आर्थिक उम्मीदों को बड़ा झटका लगेगा। इस कदम को लेकर कर्मचारी संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। वेतन कटौती केस, SC जाएगी सरकार मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा अवधि) के दौरान वेतन कटौती का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचने वाला है। जबलपुर हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तत्कालीन कमलनाथ सरकार के 12 दिसंबर 2019 के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें नए कर्मचारियों को प्रोबेशन पीरियड के दौरान शत-प्रतिशत वेतन न देकर 70%, 80% और 90% वेतन देने का प्रावधान था। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि प्रभावित कर्मचारियों को काटा गया वेतन एरियर्स समेत लौटाया जाए। हालांकि, अब मोहन सरकार इस फैसले को मानने के बजाय इसे चुनौती देने का मन बना चुकी है। एमपी हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला  बीजेपी ने कमलनाथ सरकार की तरफ से लागू किए गए इस नियम को बदलने का वादा किया था. लेकिन, एमपी सरकार की तरफ से अब तक यह नियम नहीं बदला गया है. ऐसे में कर्मचारी संगठनों ने एमपी का हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और प्रोबेशन पीरियड 2 साल ही करने और पूरी सैलरी देने को लेकर याचिका लगाई. जहां एमपी हाईकोर्ट ने मामले में बड़ा फैसला सुनाया. जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोत की डिवीजन बेंच ने मामले में कहा कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह से न केवल भेदभावपूर्ण है. बल्कि कर्मचारियों को वेतन कम देना भी नियम नहीं है. क्योंकि जब कर्मचारियों से काम पूरा लिया जा रहा है तो फिर उन्हें वेतन भी पूरा देना चाहिए. हाईकोर्ट ने इसे समानता के अधिकार का खुला उल्लंघन मानते हुए कर्मचारियों को सामान वेतन और एरियर देना का फैसला सुनाया.  सु्प्रीम कोर्ट जाएगी एमपी सरकार  अब इस मामले में एमपी सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है. क्योंकि एमपी हाईकोर्ट ने एमपीपीएससी का हवाला दिया था. जिसमें कहा गया था कि एमपीपीएससी के तहत होने वाली नियुक्तियों में दो साल का प्रोबेशन पीरियड और सैलरी भी पूरी दी जाती है. तो फिर कर्मचारी चयन मंडल में यह अंतर क्यों हो रहा है. अब सरकार का कहना है कि एमपीपीएससी और कर्मचारी चयन मंडल की भर्ती प्रक्रियाओं में अंतर है. एमपीपीएससी में प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार होता है, जबकि कर्मचारी चयन मंडल में केवल एक परीक्षा होती है. ऐसे में दोनों की चयन प्रक्रिया अलग है.  400 करोड़ मामला अगर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है तो इस अवधि में चयनित 1 लाख सरकारी कर्मचारियों को हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक एरियर के जो 400 करोड़ रुपए मिलने थे. वह फिलहाल अटक सकते हैं. क्योंकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जो फैसला आएगा यह एरियर उस फैसले पर मायने रखेगा.   सरकार के वादे और कर्मचारियों का संघर्ष साल 2019 में कमलनाथ सरकार ने प्रोबेशन पीरियड को 2 साल से बढ़ाकर 4 साल कर दिया था और वेतन में कटौती लागू की थी। 2020 में सत्ता परिवर्तन के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कई बार सार्वजनिक मंचों से इस नियम को खत्म करने का वादा किया था, लेकिन यह कभी लागू नहीं हो सका। शिवराज सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो थक-हारकर कर्मचारियों ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 2019 का आदेश और बढ़ी परिवीक्षा अवधि का प्रभाव विवाद की जड़ 2019 का वह शासनादेश है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार ने प्रोबेशन अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 4 वर्ष कर दी थी। साथ ही इस अवधि में पूर्ण वेतन के स्थान पर चरणबद्ध वेतन देने का नियम लागू किया गया था। नए कर्मचारियों को पहले वर्ष 70%, दूसरे वर्ष 80% और तीसरे वर्ष 90% वेतन दिया जाता था। चौथे वर्ष के बाद ही उन्हें नियमित वेतनमान का लाभ मिलता था। इस नीति का तर्क वित्तीय भार कम करना बताया गया था, लेकिन कर्मचारियों ने इसे अन्यायपूर्ण माना। सत्ता परिवर्तन के बाद अधूरे रहे वादे 2020 में सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई मंचों से इस वेतन कटौती नियम को समाप्त करने का आश्वासन दिया था। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि नई सरकार इस प्रावधान को खत्म कर देगी, लेकिन व्यवहार में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। लंबे इंतजार और अनदेखी के बाद कर्मचारी संगठनों ने न्यायिक हस्तक्षेप का रास्ता चुना और हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 1 लाख कर्मचारियों की उम्मीदों पर असमंजस हाईकोर्ट के फैसले के बाद कर्मचारियों को राहत की उम्मीद बंधी थी। अनुमान है कि लगभग 1 लाख कर्मचारियों को मिलाकर करीब 400 करोड़ रुपये का एरियर बनता है। यदि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित रहता है तो भुगतान प्रक्रिया अनिश्चित काल तक टल सकती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह केवल वेतन का मामला नहीं, बल्कि सम्मान और समानता का प्रश्न भी है। आगे क्या? कानूनी और राजनीतिक दोनों दांव अब यह मामला कानूनी लड़ाई के अगले चरण में प्रवेश कर सकता है। यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश पर स्थगन देता है … Read more

श्रद्धालु ध्यान दें: मैहर मां शारदा मंदिर का रोपवे 10 दिनों के लिए बंद, दर्शन का नया तरीका अपनाएं

मैहर मध्य प्रदेश के मैहर जिले में त्रिकुट पर्वत पर विराजमान मां शारदा के दरबार में हाजिरी लगाने की योजना बना रहे भक्तों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी है। आगामी चैत्र नवरात्रि के मद्देनजर मंदिर प्रबंधन ने बड़ा निर्णय लेते हुए रोपवे सेवा को 10 दिनों के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया है। आज 5 मार्च 2026 से 14 मार्च 2026 तक रोपवे का संचालन जरूरी मेंटेनेंस कार्य के चलते पूर्णतः स्थगित रहेगा। प्री-नवरात्रि मेंटेनेंस किया जा रहा दरअसल, इस साल चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च (गुरुवार) से प्रारंभ होकर 27 मार्च (शुक्रवार) तक चलेगा। मैहर की एसडीएम दिव्या पटेल ने बताया कि नवरात्रि के इन नौ दिनों में देशभर से लाखों की तादाद में दर्शनार्थी मैहर पहुंचते हैं। इस भारी भीड़ के कारण रोपवे पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा में कोई भी चूक न हो, इसी को ध्यान में रखते हुए यह प्री-नवरात्रि मेंटेनेंस किया जा रहा है। सीढ़ियों से चढ़कर करने होंगे दर्शन रोपवे बंद रहने के इन 10 दिनों के दौरान माता रानी के दर्शन के लिए भक्तों को 1063 सीढ़ियों का सफर तय करना होगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शारदा एक्सप्रेस वैन सेवा लगातार उपलब्ध रहेगी। लेकिन, भक्तों को यह ध्यान रखना होगा कि वैन से जाने के बाद भी अंतिम हिस्से की कुछ दूरी उन्हें पैदल ही तय करनी पड़ेगी। NDRF की हरी झंडी के बाद शुरू होगी सेवा एसडीएम दिव्या पटेल ने बताया कि 10 दिन के इस व्यापक मरम्मत कार्य के बाद सुरक्षा मानकों की कड़ी टेस्टिंग होगी। इसके लिए एनडीआरएफ की विशेष टीम रोपवे की बारीकी से जांच करेगी। टीम द्वारा सभी मानकों को सुरक्षित पाए जाने और क्लीयरेंस (हरी झंडी) मिलने के बाद ही 15 मार्च 2026 से रोपवे सेवा श्रद्धालुओं के लिए पुनः बहाल कर दी जाएगी। दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील मंदिर प्रबंधन ने सभी दर्शनार्थियों से अपील की है कि वे अपनी मैहर यात्रा की रूपरेखा इसी जानकारी को ध्यान में रखकर तय करें। किसी भी तरह की असुविधा से बचने के लिए प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

सौरभ शर्मा का 100 करोड़ का सोना और नकद जब्त होगा, मुंबई प्राधिकरण ने किया बेनामी लेनदेन का खुलासा

भोपाल  आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उसके सहयोगी चेतन सिंह गौर से जुड़े करीब 100 करोड़ रुपए के सोना और नकदी को अब जब्त किया जाएगा।आयकर विभाग की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने भोपाल स्थित बेनामी निषेध इकाई (बीपीयू) की कार्रवाई को सही ठहराया है। वहीं, सौरभ शर्मा को सोने का वास्तविक मालिक बताया गया है। भोपाल के मेंडोरी में 18 और 19 दिसंबर की दरम्यानी रात एक इनोवा कार से 51.8 किलोग्राम सोना और 11.6 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए थे। इस मामले में आयकर विभाग ने जांच के बाद कार्रवाई शुरू की थी। पूरा मामला क्या है? यह मामला 18 और 19 दिसंबर 2025 की रात का है। भोपाल के मेंडोरी इलाके में एक इनोवा कार से 51.8 किलोग्राम सोना और 11.6 करोड़ रुपए नकद बरामद किए गए थे। इस मामले की जांच आयकर विभाग ने शुरू की थी। आयकर विभाग की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने भोपाल स्थित बेनामी निषेध इकाई (बीपीयू) की कार्रवाई को सही बताया है। साथ ही, सौरभ शर्मा को सोने का असली मालिक भी घोषित किया गया है। अस्थायी कुर्की का फैसला आयकर विभाग की बेनामी निषेध इकाई ने अगस्त 2025 में पीबीपीटी अधिनियम, 1988 के तहत इस संपत्ति की अस्थायी कुर्की की थी। उस समय इन संपत्तियों की कीमत करीब 52 करोड़ रुपए बताई गई थी, लेकिन अब इनकी कीमत 100 करोड़ रुपए के आसपास हो गई है। जानकारी के अनुसार, अब इस संपत्ति को पूरी तरह जब्त किया जाएगा। चेतन सिंह गौर को बेनामीदार घोषित किया गया जांच एजेंसी ने यह पाया कि चेतन सिंह गौर को बेनामीदार और सौरभ शर्मा को वास्तविक मालिक के रूप में पहचाना गया है। इस मामले में आयकर विभाग ने बेनामी लेनदेन के तहत कार्रवाई की है। संपत्तियों की जांच जारी आयकर विभाग अब सौरभ शर्मा, चेतन सिंह गौर और उनके रिश्तेदारों से जुड़ी 32 से अधिक संपत्तियों और बैंक खातों की जांच कर रहा है। इस मामले में अभी और फैसले आना बाकी हैं। ED और IT की कार्रवाई इस मामले में पहले लोकायुक्त ने ( सौरभ शर्मा संपत्ति जांच) और बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (IT) ने भी जांच शुरू की थी। ED ने फरवरी 2025 में सौरभ शर्मा और उनके करीबियों को गिरफ्तार किया था और उनकी संपत्तियों को अटैच करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बावजूद, एमपी विधानसभा में सरकार का यह कहना कि 'जानकारी एकत्रित की जा रही है', विपक्षी खेमे को हमलावर होने का मौका दे रहा है।इस कार्रवाई के बाद, यह सौरभ शर्मा भ्रष्टाचार मामला अब और भी चर्चा में आ गया है और लोगों के बीच कई सवाल उठने लगे हैं।