samacharsecretary.com

‘गालियां देने से नहीं बनेगा हिंदू राष्ट्र’, धीरेंद्र शास्त्री का संदेश साफ

बांदा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बांदा में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में हिंदू समाज को महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को गाली देने या किसी दूसरे समुदाय को निशाना बनाने से भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बन सकता। अपने संबोधन में शास्त्री ने कहा कि पहले हिंदुओं को अपनी कुरीतियों और आंतरिक खामियों को सुधारने की जरूरत है। तभी समाज में शांति, एकता और सौहार्द स्थापित हो सकता है। दिव्य हनुमंत कथा के दस दिन बाद एक बार फिर से धीरेंद्र शास्त्री शुक्रवार को बांदा पहुंचे। वह खुरहंड स्टेशन स्थित सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी के आवास पर आयोजित सुंदरकांड व हनुमान चालीसा पाठ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा, 'हिंदू मेरी एक बात नोट कर लें, मुसलमानों को गालियां देकर हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा। हिंदुओं को अपनी कुरितियां सुधारी पड़ेंगी, तभी भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा। जो हमारे सनातन में कमियां है उसे दूर करेंगे तभी बनेगा और भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का एक ही उपाय है। वह है, जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई।' हमारे यहां 25 बार पेशी न हो तब तक नहीं होता तलाक बागेश्वरधाम ने कहा कि उनके यहां तो तीन बार हूं.. हूं.. और तलाक, हमारे यहां तो जब तक 20 से 25 बार पेशी न हो जाए तब तक तलाक नहीं होता है। उनमें कोई बुराई नहीं है। अच्छी बात है कायदे में रहेंगे तो फायदे में रहेंगे। चादर चढ़ाओगे कभी कैंडिल जलाओगे तो कैसे होगी कृपा? धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हमारा काम है दर पर जाना, उनका काम है बिगड़ी बनाना और परमात्मा का काम है सब कुछ संभालना। एक बात याद रखना, अगर तुम भगवान पर भरोसा रखोगे तो वह तुम्हारा भरोसा कभी टूटने नहीं देगा। अगर तुम बीच में अलीउल्लाह वालों के पास चले जाओ, कभी चादर चढ़ाने लगो, कभी कैंडिल जलाने लगो और फिर कहो कि हनुमान कृपा नहीं कर रहे। पूरी तरह भगवान पर छोड़ दो या फिर सच में भगवान पर ही छोड़ दो।

किसानों का जीवन संवारना हमारा कर्तव्य, कृषक कल्याण वर्ष का करें प्रभावी क्रियान्वयन

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जो हम सबके अन्नदाता हैं, उनके दुख-दर्द की चिंता करना हमारा कर्तव्य है। किसानों का समग्र कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। यह सरकार के लिए एक मिशन है। सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। किसानों का जीवन संवारने और इनकी बेहतरी के लिए पूर्ण समर्पित भाव से मिशन मोड में कृषक कल्याण वर्ष का बेहद प्रभावकारी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रदेश के सभी कमिश्नर्स-कलेक्टर्स को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के दौरान किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। किसान रथ चलाये जाएं। इनका शुभारंभ स्थानीय सांसद/विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से ही कराएं। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में किसानों से विभिन्न स्थानों पर को निरंतर संवाद करें। उन्हें ग्रीष्मकालीन मूंग के स्थान पर अधिकाधिक रकबे/मात्रा में मूंगफली और उड़द की फसल लेने के लिए प्रोत्साहित करें। प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करें। जलवायु, ऊर्जा एवं सतत् कृषि को बढ़ावा देने के लिए ई-विकास पोर्टल एवं किसानों को संतुलित मात्रा में भी उर्वरकों का उपयोग के लिए जागरूक किया जाए। आकांक्षी जिलों में चल रही प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना से अधिकाधिक किसानों को लाभान्वित किया जाए। दलहनी और तिलहनी फसलों का उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में कृषि आधारित उद्योगों के विकास के लिए हर जरूरी प्रयास किए जाएं। कृषि से जुड़े विभागों और इस क्षेत्र में प्रगतिशील स्वयं सेवी संगठनों एवं संस्थाओं के साथ मिलकर किसानों के कल्याण के लिए सरकार हर जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष मनाने में किसान कल्याण एवं कृषि विकास के नेतृत्व में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन एवं डेयरी, मत्स्य पालन, जल संसाधन, सहकारिता, ऊर्जा, राजस्व, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कुटीर एवं ग्रामोद्योग सहित 15 से अधिक विभाग सक्रिय भूमिका निभायेंगे। पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर लगाएं रोक, किसानों को जागरूक किया जाए कि वे खेत का भूसा गौशालाओं में पहुंचाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स अपने-अपने जिले में पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर सख्ती से अकुंश लगाएं। अपने-अपने जिले का नरवाई प्रबंधन प्लान बनाएं। खेतों से निकलने वाली पराली/भूसे का समुचित उपयोग होना चाहिए। फसलों के अवशेष से गोबर से कंपोजिट बायोगैस संयंत्रों की स्थापना की जाए। सभी कलेक्टर्स यह तय करें कि किसानों द्वारा खेत से निकली पराली और भूसा निकटतम छोटी-बड़ी गौशालाओं में ही पहुंचाया जाए। इससे गौवंश को लाभ मिलेगा। दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए करें समन्वित प्रयास – पशुपालकों के लिए तैयार हो रहा एक ऐप मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे अपने जिले में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए समन्वित प्रयास करें। पशुपालकों को नस्ल सुधार, पशु पोषण एवं पशु स्वास्थ्य पर ध्यान देने से होने वाले आर्थिक लाभों के बारे में जागरूक करें। मत्स्य बीज उत्पादन के लिए जिला स्तर पर अधिकाधिक मत्स्य प्रक्षेत्र विकसित किए जाएं। हर नगरीय निकाय क्षेत्र में फिश पार्लर स्थापित किए जाएं और यह सुनिश्चित करें कि मछली विक्रेता तय फिश पार्लर/मार्केट में ही मछली बेंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के नगरीय निकायों में फिश पार्लर बनाये जायेंगे। इसके लिए पृथक से राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कलेक्टर्स किसानों से लगातार संवाद करते रहें। कृषक कल्याण वर्ष की तय गतिविधियों की नियमित रूप से मॉनिटरिंग करें। रोस्टर तैयार कर कृषि उपज मंडियों का सतत् निरीक्षण करें और कृषि उत्पादों पर विपणन पर विशेष ध्यान देकर इनके मूल्य संवर्धन के लिए पूरी कमर्शियल चेन का निर्माण करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि के लिए विभाग को नवाचार अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुपालकों को दुग्धोत्पादन बढ़ाने के सभी नए-नए तरीके और उपाय बताएं जाएं। प्रमुख सचिव पशुपालन ने बताया कि पशुपालकों के ज्ञान संवर्धन के लिए एक ऐप तैयार किया जा रहा है। यह ऐप पशुपालकों को बताएगा कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए किस प्रकार की गाय/भैंस को कैसा आहार खिलाना चाहिए। इससे पशुपालक सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। कृषक कल्याण वर्ष की कार्य योजना पर करें अमल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स को निर्देशित करते हुए कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के लिये तय की गई कार्य योजना का फील्ड में बेहतर तरीके से अमल किया जाए। इस अवधि में विशेष अभियान चलाया जाए। छोटे-बड़े कार्यक्रम भी किए जाएं। निचले स्तर पर किसानों से सघन सम्पर्क स्थापित किया जाए। सभी हितग्राहियों का सत्यापन एवं सहयोग भी लिया जाए। नए हितग्राहियों का चयन भी इस दौरान किया जाए। प्रचलित सभी योजनाओं, नीति-नियम एवं निर्देशों का सरलीकरण एवं सुधार की कार्यवाही की जाए। विभाग या संस्था की जरूरत के अनुसार नई योजना या कार्यक्रम भी इस दौरान प्रारंभ किए जाएं। विभिन्न प्रकार की नवाचारी गतिविधियां भी की जाएं। कृषि सेक्टर के विकास के लिए नए वित्तीय स्त्रोतों जैसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी), पुनर्घत्वीकरण एवं कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर फंड) का उपयोग भी किया जाए। केन्द्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं से अनुदान या मंजूरी पाने के लिए भी कृषक कल्याण वर्ष में विशेष प्रयास किए जाएं। फरवरी में डिण्डोरी में होगा कोदो-कुटकी बोनस वितरण कार्यक्रम, मार्च में होगा राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन मुख्यमंत्री ने कृषक कल्याण वर्ष में होने वाली मासिक गतिविधियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि फरवरी के पहले सप्ताह में डिंडोरी जिले में कोदो-कुटकी का बोनस वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रदेश के 16 से अधिक जिलों में कोदो-कुटकी उत्पादन होता है। वर्ष 2025 में 2800 टन कोदो-कुटकी की शासकीय खरीदी की गई है। दूसरे सप्ताह में गुलाब महोत्सव आयोजित होगा। तीसरे सप्ताह में शत-प्रतिशत किसानों के आईडी पंजीयन तथा किसान उन्मुखी योजनाओं के एग्रीस्टैक से एकीकरण के लिए निमाड़ क्षेत्र के किसी जिले में राज्यस्तरीय एग्रीस्टैक एवं डिजिटल कृषि प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इसी तरह इस माह के अंतिम सप्ताह में कृषि मंथन के नाम से अलग-अलग जिलों में दो बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मार्च में राज्यस्तरीय सहकारिता सम्मेलन के जरिए किसानों को नये कृषि ऋण देने के अलावा कृषक न्याय मित्र योजना के अंतर्गत लाभान्वित किया जाएगा। इस … Read more

राज्य मंत्री श्री पटेल बोले—बकरी पालन और जीरो वेस्टेज मॉडल है बेहतर विकल्प

भोपाल. पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने धार जिले की तहसील धमरपुरी के अंतर्गत आने वाले ग्राम सुंदरैल स्थित गोटवाला फार्म का भ्रमण किया। यह मध्यप्रदेश की सबसे पुरानी बकरी पालन एवं प्रजनन केंद्र इकाई है। बकरी पालन के क्षेत्र में फार्म के संस्थापक दीपक पाटीदार को भारत सरकार द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। राज्यमंत्री पटेल ने पाटीदार द्वारा संचालित उन्नत नस्लों की इकाइयों का अवलोकन किया। उन्होंने सिरोही, सोजत, बीटल, करौली, बरबरी सहित अन्य नस्लों की गुणवत्ता, प्रजनन प्रणाली एवं प्रबंधन मॉडल की जानकारी प्राप्त की। साथ ही फार्म पर विकसित जीरो वेस्टेज मॉडल का भी निरीक्षण किया, जिसमें बकरी के मल से वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर ऑर्गेनिक सब्जी उत्पादन सहित संसाधनों के समुचित उपयोग की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मंत्री पटेल ने संस्थापक दीपक पाटीदार से प्रदेश में बकरी पालन की संभावनाओं, इसके विस्तार, उद्यमिता विकास तथा शासन एवं उद्यमियों के संयुक्त सहयोग से पीपीपी मॉडल विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद उन्होंने शिव नर्सरी का भी भ्रमण किया, जहां संस्थापक शिवजी पाटीदार द्वारा नर्सरी की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही यहां पर टमाटर, मिर्च, पपीता, तरबूज सहित विभिन्न फसलों की जा रही खेती का भी अवलोकन किया। ग्राम पंचायत द्वारा विकसित पशु बाजार में गिर नस्ल की उन्नत गायों का अवलोकन कर राज्यमंत्री पटेल ने पंचायत एवं व्यापारी बंधुओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने दीपक पाटीदार के कार्यों की प्रशंसा करते हुए बकरी पालन एवं ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। इस दौरान उपसंचालक पशुपालन डॉ. आर.एस. सिसोदिया सहित विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।  

राज्यस्तरीय समारोह में उच्च शिक्षा विभाग की झांकी को दूसरा स्थान, मंत्री परमार ने दी शुभकामनाएं

भोपाल. उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने, गणतंत्र दिवस के अवसर पर भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा "शोध एवं अनुसंधान, समृद्ध मध्यप्रदेश की पहचान" थीम पर प्रस्तुत आकर्षक झांकी को राज्य स्तर पर द्वितीय स्थान अर्जित करने की महत्वपूर्ण उपलब्धि मिलने पर, उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों को बधाई दी है। अनुसंधान, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमता पर आधारित रही उच्च शिक्षा विभाग की झांकी राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा रविंद्र भवन में आयोजित लोकरंग कार्यक्रम के दौरान, गणतंत्र दिवस के अवसर पर भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तुत "शोध एवं अनुसंधान, समृद्ध मध्यप्रदेश की पहचान" थीम पर आकर्षक झांकी को द्वितीय स्थान मिलने पर सम्मानित किया गया। ज्ञातव्य है कि राज्य स्तरीय समारोह में प्रस्तुत 23 विभागों की झांकियों में, उच्च शिक्षा विभाग की झांकी ने राज्य स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। उच्च शिक्षा विभाग की यह झांकी प्रदेश को अनुसंधान, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमता आधारित ज्ञान-व्यवस्था के अग्रणी राज्य के रूप में प्रस्तुत कर रही थी। इसका मूल भाव यह प्रतिपादित करता है कि उच्च शिक्षा में शोध, तकनीकी नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही समृद्ध, आत्मनिर्भर और सतत विकासशील मध्यप्रदेश की सुदृढ़ आधारशिला हैं। प्रदेश की प्रगति का मार्ग ज्ञान-सृजन, नवाचार और अनुसंधान आधारित समाधानों से होकर गुजरता है, यही इस झांकी का केन्द्रीय संदेश रहा है। झांकी के अग्र भाग में रिसर्च एवं एआई इनोवेशन जोन का सजीव चित्रण किया गया, जहाँ अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमता, रोबोटिक्स, डेटा एनालिक्स और डिजीटल डैशबोर्ड के माध्यम से विद्यार्थी एवं शोधकर्ता नवाचार करते हुए दिखाई दे रहे थे। यह दृश्य, उच्च शिक्षा संस्थानों में विकसित होती अनुसंधान संस्कृति, स्टार्टअप इकोसिस्टम और तकनीक आधारित समाधान निर्माण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को प्रभावी रूप से रेखांकित करता दिखाई दिया। झांकी का मध्य भाग प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के प्रतीकात्मक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया। स्मार्ट कक्षाएँ, डिजीटल प्रयोगशालाएँ, इनोवेशन हब, सोलर पैनल और हरित संरचनाएँ यह दर्शाती दिखीं कि राज्य में उच्च शिक्षा को शोध-आधारित, कौशल-उन्मुख और सतत विकास से जोड़ा जा रहा है। झांकी के अगले भाग में व्यावहारिक अनुप्रयोगों को दर्शाया गया, जहाँ ड्रोन तकनीक, स्मार्ट कृषि, डेयरी विकास और जल-प्रबंधन जैसे दृश्य स्पष्ट करते हैं कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में विकसित शोध सीधे ग्रामीण विकास और किसान सशक्तीकरण से जुड़ रहा है। झांकी के साथ चलते विद्यार्थी, युवा वैज्ञानिक और भावी उद्यमी, यह स्पष्ट संदेश देते दिखे कि ये ही राज्य की युवा शक्ति का प्रतीक हैं, जो ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से प्रदेश को विकास के नए शिखर पर ले जाने के लिए संकल्पित है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुढ़ के बाबा भैरवनाथ लोक और 17.13 करोड़ लागत के विकास कार्यों का किया लोकार्पण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नेa कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार विरासत का संरक्षण करते हुए धार्मिक पर्यटन में नए आयाम स्थापित कर रही है। उज्जैन में बाबा महाकाल के महालोक, मंदसौर में भगवान श्रीपशुपतिनाथ लोक, ओरछा में राजा श्रीराम लोक और चित्रकूट धाम सहित 13 भव्य लोक आकार ले रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विंध्य क्षेत्र के रीवांचल की पवित्रता ऐसी है कि भगवान श्रीराम ने अयोध्या छोड़ने के बाद अपने जीवन के महत्वपूर्ण 11 वर्ष से अधिक का समय चित्रकूट में बिताया। चित्रकूट धाम को भव्य और दिव्य रूप प्रदान करना मध्यप्रदेश सरकार का संकल्प है। यहां तीन हजार करोड़ की लागत के विकास कार्य होंगे और आगे भी समुचित राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं के रोजगार के लिए गुढ़ क्षेत्र में 100 एकड़ का नया औद्योगिक क्षेत्र बनाने की महत्वपूर्ण घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को रीवा जिले के गुढ़ विधानसभा क्षेत्र के बाबा भैरवनाथ मंदिर परिसर में आयोजित लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। गुढ़ क्षेत्रवासियों को मिलीं सौगातें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा भैरवनाथ मंदिर के नए भवन सहित 17 करोड़ 13 लाख लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि भगवान भैरवनाथ मंदिर प्रांगण में विकास कार्यों के लिए 2 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि दी जाएगी। मंदिर प्रांगण में पुलिस चौकी और भैरवनाथ सरोवर का निर्माण भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुढ़ में तीर्थयात्रियों के लिए विश्राम गृह और नई गौशाला बनाए जाने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व-सहायता समूह की महिलाओं को 2 करोड़ रूपये के हितलाभ वितरित किये। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजनांतर्गत डेयरी शुरू करने के लिए आवश्यक राशि के चेक हितग्राही को सौंपे गये और मेधावी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये। प्रधानमंत्री श्री मोदी के कार्यकाल में बढ़ रही मंदिरों की भव्यता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाहरी आक्रांताओं ने 1000 साल पहले गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त किया था। आजादी के बाद तत्कालीन केन्द्रीय गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसका जीर्णोद्धार कराया और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में सोमनाथ मंदिर की प्रतिष्ठा और भव्यता में वृद्धि हो रही है। अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मस्थली पर ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण हो चुका है। गरीब, किसान, युवा और महिलाओं का कल्याण सर्वोपरि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने माता-बहनों के कल्याण के लिए अनेक निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री लाड़ली बहन योजना की राशि बढ़ाकर 1500 रुपए की गई है। बहनों के हाथ में जब धन आता है तो वह मायके और ससुराल दोनों की चिंता करती हैं। वर्तमान में राज्य और केंद्र सरकार के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहन राशि के रूप में 12 हजार रुपए सालभर में मिल रहे हैं। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए प्रदेशभर में आधुनिक और भव्य सांदीपनि विद्यालय खोले गए हैं। प्रदेश का हर-घर अब सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन की ओर बढ़ रहा है। विंध्य क्षेत्र के लिए वरदान बनी रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव उप-मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संकल्प के बल पर रीवा जैसे स्थान पर भी रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित हुई। अब देशभर के निवेशक अपने उद्योग लगाने के लिए विंध्य की धरती पर आ रहे हैं। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। रीवा जिले के संजय गांधी अस्पताल में 322 करोड़ की लागत से नई कैंसर यूनिट खोली जा रही है। क्षेत्रीय सांसद श्री जर्नादन मिश्र ने कहा कि राज्य सरकार भैरव बाबा की कृपा से प्रदेश से गरीबी, बेरोजगारी खत्म कर रही है। राज्य के अनेक जिलों को सिंचाई परियोजनाओं के साथ औद्योगिक क्षेत्र की सौगात मिल रही है। विकास की यह रफ्तार आगे भी जारी रहेगी। गुढ़ मंदिर में स्थापित है भगवान भैरवनाथ की अद्भुत प्रतिमा स्थानीय विधायक श्री नागेंद्र सिंह ने कहा कि गुढ़ के मंदिर में विराजमान भगवान भैरवनाथ की यह प्रतिमा अद्भुत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विशेष सहयोग और मार्गदर्शन से भैरवनाथ मंदिर परिसर में विकास कार्यों को मूर्त रूप देना संभव हो पाया है। कार्यक्रम में विधायक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री गिरीश गौतम, विधायक श्री सिद्धार्थ तिवारी, विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में स्थानीयजन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने पौधे रोपित कर दिया पर्यावरण-संरक्षण का संदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत गुढ़ के समीप ग्राम खामडीह में मध्यप्रदेश शासन की एलएडी योजनांतर्गत भैरव बाबा मंदिर के जीर्णोद्धार एवं सामुदायिक भवन निर्माण कार्य पूर्ण होने पर भैरवनाथ लोक परिसर का भव्य लोकार्पण किया गया। इसकी कुल लागत 2 करोड़ 19 लाख है। मुख्यमंत्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भैरव बाबा का विधिवत पूजन-अर्चन एवं हवन किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति एवं जनकल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में ध्वज का आरोहण कर धार्मिक आस्था को नई ऊँचाई दी। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर परिसर में त्रिवेणी बरगद, पीपल एवं नीम के पौधे रोपे और धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। मंदिर परिसर पहुंचने पर मुख्यमंत्री का लक्ष्मी स्वरूपा नारियों ने मंगल कलश और पुष्पवर्षा से स्वागत किया। इस अवसर पर 51 बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार कर वातावरण को गरिमा और धर्ममय बनाया।  

महंगा सोना-चांदी बना मुसीबत, जेवर छुड़ाने ग्राहकों की भीड़ सालों बाद व्यापारियों के पास

देवास  सोने-चांदी के दामों में जारी उठापटक से सराफा व्यापारी वर्ग पशोपेश में हैं. शुक्रवार को चांदी-सोने के दामों में हुई भारी गिरावट ने कारोबारियों में चिंता बढ़ा दी है. इस अस्थिरता से सर्राफा एसोसिएशन से जुड़े व्यापारियों को समझ नहीं आ रहा है कि वे दुकानों को खोलकर जेवर को बेचकर व्यापार करें या फिर दुकानों को बंद कर रेट के स्थिर होने का इंतजार करें. शुक्रवार को देवास में सराफा कारोबारियों ने अपनी दुकानों के बाहर एकत्रित होकर प्रदर्शन कर नाराजगी जताई है. सोने-चांदी अस्थिरता से कारोबारी परेशान सोने-चांदी के रेट में बेतहाशा वृद्धि ने आभूषणों की खरीद और बिक्री पर रोक लगा दिया है. ज्वेलरी की दुकानों पर सन्नाटा पसर गया है. कारोबारी और कारीगरों की चिंता बढ़ा दी है. रोज बढ़-घट रहे भाव के चलते ग्राहकों ने खरीदारी से दूरी बना ली है. शादी का सीजन शुरू होने वाला है, ऐसे बढ़ घट रहे सोने-चांदी के दामों से शादी वाले घरों के लोगों को चिंता बढ़ रही है. शुक्रवार को सोने-चांदी के भाव में भारी गिरावट देखने को मिली है. इससे कुछ ग्राहकों ने जहां राहत की सांस ली, वहीं सराफा कारोबारियों की परेशानी बढ़ गई हैं. मिल रही धमकियों से डरे सराफा कारोबारी देवास में सराफा व्यापारियों के खिलाफ सीएम हेल्पलाइन नंबर (181) पर कॉल कर लोग शिकायत दर्ज करवा रहे हैं. इससे परेशान होकर सराफा व्यापारी एसोसिएशन ने कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपा है. साथ ही सालों बाद गिरवी जेवर वापस लेने आए लोगों से मिल रही धमकियों की शिकायत पुलिस से की है. सराफा व्यापारी दिलीप चौधरी का कहना है कि "कई लोग 5 से 10 साल पुराने गिरवी रखे सोना चांदी के मामलों को लेकर अब लोग शिकायत कर रहे हैं. इन शिकायतों पर बिना पूरी जांच के पुलिस व्यापारियों को थाने बुला रही है, जिससे उन्हें मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है और कामकाज भी प्रभावित हो रहा है." सालों बाद गिरवी जेवर छुड़ाने पहुंच रहे लोग व्यापारियों ने बताया कि जेवर गिरवी रखने के समय एक ग्राहक आता है, अब बाद में कई ग्राहक एक साथ आ रहे है. ग्राहकों को नियम, समय-सीमा और भुगतान की पूरी जानकारी दी जाती है. अगर तय समय पर पैसे नहीं चुकाए जाते, तो नियमों के अनुसार गिरवी सामान का निपटारा कर दिया जाता है. इसके बावजूद सालों बाद ग्राहक शिकायत कर रहा है, जो कि गलत है. एसोसिएशन ने मांग की है कि ऐसे मामलों को आपसी लेन-देन का मामला मानकर पुलिस दबाव न बनाया. साथ ही सराफा व्यापारियों ने सुरक्षा के लिए पुलिस गश्त भी बढ़ाने की मांग की है. सराफा कारोबारियों ने मांगी पुलिस सुरक्षा एडिशनल एसपी जयवीर सिंह भदौरिया ने कहा, "सराफा व्यापारियों ने अनावश्यक परेशान किए जाने को लेकर ज्ञापन दिया है. साथ ही उन्होंने सुरक्षा की मांग की है. ज्ञापन में उनका कहना है कि 5-6 साल पहले सोने-चांदी के जेवर गिरवी रख गए ग्राहक अब आ रहे हैं और हम पर बेमतलब जेवर वापस करने का दबाव बना रहे हैं. तय समय में ब्याज और मूलधन वापस नहीं करने आए थे. सभी गायब हो गए थे. जब से जेवर के दामों उछाल आई है, लोग जेवर वापस लेने आ रहे हैं. हम सराफा व्यापारियों को धमकियां मिल रही है. हमारी प्रशासन से मांग है कि किसी सराफा कारोबारी पर बेवजह कार्रवाई न की जाए."

मप्र अपडेट: आज रात से भारी बारिश की संभावना, लोगों को सतर्क रहने की सलाह

भोपाल  मध्य प्रदेश का मौसम आज रात से बदल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के चलते शनिवार रात से मौसम करवट ले सकता है और आसमान से पानी बरसने की संभावना है। मौसम विभाग का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के असर से शनिवार रात से मौसम करवट ले सकता है।  बादल छाने से अगले दिन  कहीं-कही बारिश भी हो सकती है। बारिश का ये सिलसिला संडे और मंडे को तक जारी रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके चलते आज शाम या रात से मौसम करवट बदल सकता है। आईएमडी के मुताबिक, आज उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। आज 3000 मीटर या इससे अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के भी आसार हैं। आईएमडी के मुताबिक कल यानी एक फरवरी से उत्तराखंड में बारिश का दौर तेज हो सकती है। एक से तीन फरवरी तक राज्य के सभी जिलों में बारिश के आसार हैं। साथ ही 2800 मीटर ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की भी संभावना है। चार फरवरी को उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिले में बारिश-बर्फबारी का अनुमान है। पांच फरवरी को समूचे प्रदेश में मौसम शुष्क रह सकता है। छह फरवरी को फिर से तीन पर्वतीय जिलों में बारिश-बर्फबारी की संभावना बन रही है। पश्चिमी विक्षोभ के असर के चलते शनिवार से बादल छाने लगेंगे और  इससे ठंड से भी राहत मिल सकती है। रविवार-सोमवार को प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में हल्की बारिश होने की संभावना है। बारिश कराने वाले सिस्टम हैं एक्टिव मौसम विभाग का कहना है कि  पूर्वोत्तर असम पर हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात बना हुआ है जबकि एक पश्चिमी विक्षोभ ईरान के उत्तर-पूर्वी भाग पर चक्रवात के तौर पर एक्टिव है। 2 फरवरी यानि सोमवार को एक नए पश्चिमी विक्षोभ से मौसम के  प्रभावित होने भी संभावना है। लिहाजा इस  बारिस से जहां प्रदेश के लोगों को ठंड से निजात मिलेगी वहीं फसलों के लिए भी ये बारिश लाभ पहुंचा सकती है। तीन दिन के लिए यलो अलर्ट मौसम विभाग के मुताबिक एक से तीन फरवरी तक समूचे राज्य में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार हैं। एक फरवरी को देहरादून, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल, यूएस नगर जिलों में कहीं-कहीं गर्जना के साथ आकाशीय बिजली कड़कने और 30 से 40 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का यलो अलर्ट जारी किया है। तीन फरवरी तक विभिन्न इलाकों के लिए यलो अलर्ट जारी हुआ है। बता दें कि साल 2022 में भी फरवरी पहले सप्ताह में मौसम काफी खराब रहा था। तब भी तीन फरवरी को उत्तराखंड में भारी बर्फबारी हुई थी। 

प्रत्येक पात्रता पर्चीधारी परिवार को राशन दुकान से मिल रहा खाद्यान्न: खाद्य मंत्री राजपूत

अंत्योदय योजना में 35 किलो प्रति परिवार मिल रहा खाद्यान्न : खाद्य मंत्री  राजपूत प्रत्येक पात्रता पर्चीधारी परिवार को राशन दुकान से मिल रहा खाद्यान्न: खाद्य मंत्री  राजपूत भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में प्रदेश की लगभग 5.37 करोड़ अबादी को प्रतिमाह निःशुल्क खा‌द्यान्न का वितरण किया जा रहा है। इसमें अंत्योदय अन्न योजना में 35 किलोग्राम प्रति परिवार एवं प्राथमिकता श्रेणी के परिवारों को 5 किलोग्राम प्रति सदस्य खाद्यान्न दिया जा रहा है। प्रत्येक पात्रता पर्चीधारी परिवार को राशन दुकान से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। पात्र परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा "वन नेशन-वन राशन कार्ड" अन्तर्गत प्रदेश एवं देश की किसी भी उचित मूल्य दुकान से बायोमेट्रिक सत्यापन/ओटीपी/नॉमिनी के माध्यम से खाद्यान्न प्राप्त किया जा सकता है। प्रदेश के 15 लाख से अधिक पात्र परिवारों द्वारा पोर्टेबिलिटी से अपनी सुविधा अनुसार अन्य दुकान से प्रतिमाह राशन प्राप्त किया जा रहा है। पात्र परिवारों को पूरे माह उचित मूल्य दुकान से राशन का वितरण किया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा पात्र परिवारों की पहचान सुनिश्चित करने एवं वास्तविक गरीब परिवारों को निःशुल्क खा‌द्यान्न वितरण करने तथा अपात्र एवं 2 बार नाम वाले हितग्राहियों को हटाकर नवीन हितग्राहियों को लाभांवित करने के लिये eKYC करना अनिवार्य किया गया है। इसमें 05 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को छोडकर, पात्र हितग्राहियों के eKYC उचित मूल्य दुकान पर लगाई गई POS मशीन के साथ ही भारत सरकार के मेरा eKYC मोबाईल ऐप से हितग्राही के फेस अथेंटिकेशन द्वारा किया जा सकता है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत सम्मिलित 29 पात्रता श्रेणी के अंतर्गत नवीन हितग्राहियों को जोड़ने की कार्यवाही नियमित रूप से की जा रही है। इन नवीन आवेदकों द्वारा POS मशीन / फेस अथेंटिकेशन से eKYC के बाद 3 दिवस की अवधि में पात्रता पर्ची जारी करने की व्यवस्था की गई है। विगत एक वर्ष में लगभग 20 लाख नवीन हिग्राहियों को पात्रता पर्ची जारी की गई है। हितग्राही द्वारा eKYC कराने के बाद पात्रता पर्ची जारी की जा रही है। किसी भी पात्रता पर्चीधारी परिवार का राशन रोकने की शिकायत पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश भी दिये गए हैं। पात्रता पर्ची के लिये आवेदनकर्ताओं को eKYC करने के लिए SMS के साथ ही उचित मूल्य दुकान विक्रेताओं एवं स्थानीय निकाय के माध्यम से भी सूचित किया जा रहा है।  

किसानों का जीवन संवारना हमारा कर्तव्य, कृषक कल्याण वर्ष का करें प्रभावी क्रियान्वयन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों के कल्याण के लिए मिशन मोड में करें काम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों का जीवन संवारना हमारा कर्तव्य, कृषक कल्याण वर्ष का करें प्रभावी क्रियान्वयन किसान रथ निकालें, उड़द और मूंगफली के अधिकाधिक उत्पादन को दें प्रोत्साहन कृषि वर्ष की गतिविधियों की करें नियमित मॉनिटरिंग मंडियों का करें भ्रमण, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर दें विशेष ध्यान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषक कल्याण वर्ष के लिए सभी कमिश्नर्स-कलेक्टर्स को वीसी से दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जो हम सबके अन्नदाता हैं, उनके दुख-दर्द की चिंता करना हमारा कर्तव्य है। किसानों का समग्र कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। यह सरकार के लिए एक मिशन है। सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। किसानों का जीवन संवारने और इनकी बेहतरी के लिए पूर्ण समर्पित भाव से मिशन मोड में कृषक कल्याण वर्ष का बेहद प्रभावकारी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रदेश के सभी कमिश्नर्स-कलेक्टर्स को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के दौरान किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। किसान रथ चलाये जाएं। इनका शुभारंभ स्थानीय सांसद/विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से ही कराएं। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में किसानों से विभिन्न स्थानों पर को निरंतर संवाद करें। उन्हें ग्रीष्मकालीन मूंग के स्थान पर अधिकाधिक रकबे/मात्रा में मूंगफली और उड़द की फसल लेने के लिए प्रोत्साहित करें। प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करें। जलवायु, ऊर्जा एवं सतत् कृषि को बढ़ावा देने के लिए ई-विकास पोर्टल एवं किसानों को संतुलित मात्रा में भी उर्वरकों का उपयोग के लिए जागरूक किया जाए। आकांक्षी जिलों में चल रही प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना से अधिकाधिक किसानों को लाभान्वित किया जाए। दलहनी और तिलहनी फसलों का उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में कृषि आधारित उद्योगों के विकास के लिए हर जरूरी प्रयास किए जाएं। कृषि से जुड़े विभागों और इस क्षेत्र में प्रगतिशील स्वयं सेवी संगठनों एवं संस्थाओं के साथ मिलकर किसानों के कल्याण के लिए सरकार हर जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष मनाने में किसान कल्याण एवं कृषि विकास के नेतृत्व में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन एवं डेयरी, मत्स्य पालन, जल संसाधन, सहकारिता, ऊर्जा, राजस्व, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कुटीर एवं ग्रामोद्योग सहित 15 से अधिक विभाग सक्रिय भूमिका निभायेंगे। पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर लगाएं रोक, किसानों को जागरूक किया जाए कि वे खेत का भूसा गौशालाओं में पहुंचाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स अपने-अपने जिले में पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर सख्ती से अकुंश लगाएं। अपने-अपने जिले का नरवाई प्रबंधन प्लान बनाएं। खेतों से निकलने वाली पराली/भूसे का समुचित उपयोग होना चाहिए। फसलों के अवशेष से गोबर से कंपोजिट बायोगैस संयंत्रों की स्थापना की जाए। सभी कलेक्टर्स यह तय करें कि किसानों द्वारा खेत से निकली पराली और भूसा निकटतम छोटी-बड़ी गौशालाओं में ही पहुंचाया जाए। इससे गौवंश को लाभ मिलेगा। दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए करें समन्वित प्रयास – पशुपालकों के लिए तैयार हो रहा एक ऐप मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे अपने जिले में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए समन्वित प्रयास करें। पशुपालकों को नस्ल सुधार, पशु पोषण एवं पशु स्वास्थ्य पर ध्यान देने से होने वाले आर्थिक लाभों के बारे में जागरूक करें। मत्स्य बीज उत्पादन के लिए जिला स्तर पर अधिकाधिक मत्स्य प्रक्षेत्र विकसित किए जाएं। हर नगरीय निकाय क्षेत्र में फिश पार्लर स्थापित किए जाएं और यह सुनिश्चित करें कि मछली विक्रेता तय फिश पार्लर/मार्केट में ही मछली बेंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के नगरीय निकायों में फिश पार्लर बनाये जायेंगे। इसके लिए पृथक से राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कलेक्टर्स किसानों से लगातार संवाद करते रहें। कृषक कल्याण वर्ष की तय गतिविधियों की नियमित रूप से मॉनिटरिंग करें। रोस्टर तैयार कर कृषि उपज मंडियों का सतत् निरीक्षण करें और कृषि उत्पादों पर विपणन पर विशेष ध्यान देकर इनके मूल्य संवर्धन के लिए पूरी कमर्शियल चेन का निर्माण करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि के लिए विभाग को नवाचार अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुपालकों को दुग्धोत्पादन बढ़ाने के सभी नए-नए तरीके और उपाय बताएं जाएं। प्रमुख सचिव पशुपालन ने बताया कि पशुपालकों के ज्ञान संवर्धन के लिए एक ऐप तैयार किया जा रहा है। यह ऐप पशुपालकों को बताएगा कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए किस प्रकार की गाय/भैंस को कैसा आहार खिलाना चाहिए। इससे पशुपालक सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। कृषक कल्याण वर्ष की कार्य योजना पर करें अमल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स को निर्देशित करते हुए कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के लिये तय की गई कार्य योजना का फील्ड में बेहतर तरीके से अमल किया जाए। इस अवधि में विशेष अभियान चलाया जाए। छोटे-बड़े कार्यक्रम भी किए जाएं। निचले स्तर पर किसानों से सघन सम्पर्क स्थापित किया जाए। सभी हितग्राहियों का सत्यापन एवं सहयोग भी लिया जाए। नए हितग्राहियों का चयन भी इस दौरान किया जाए। प्रचलित सभी योजनाओं, नीति-नियम एवं निर्देशों का सरलीकरण एवं सुधार की कार्यवाही की जाए। विभाग या संस्था की जरूरत के अनुसार नई योजना या कार्यक्रम भी इस दौरान प्रारंभ किए जाएं। विभिन्न प्रकार की नवाचारी गतिविधियां भी की जाएं। कृषि सेक्टर के विकास के लिए नए वित्तीय स्त्रोतों जैसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी), पुनर्घत्वीकरण एवं कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर फंड) का उपयोग भी किया जाए। केन्द्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं से अनुदान या मंजूरी पाने के लिए भी कृषक कल्याण वर्ष में विशेष प्रयास किए जाएं। फरवरी में डिण्डोरी में होगा कोदो-कुटकी बोनस वितरण कार्यक्रम, मार्च में होगा राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन मुख्यमंत्री ने कृषक कल्याण वर्ष में होने वाली मासिक गतिविधियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि फरवरी के पहले सप्ताह में डिंडोरी जिले में कोदो-कुटकी का बोनस वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रदेश के 16 से अधिक जिलों में कोदो-कुटकी उत्पादन होता है। वर्ष 2025 में 2800 टन कोदो-कुटकी की शासकीय खरीदी की गई है। दूसरे सप्ताह में गुलाब महोत्सव आयोजित होगा। तीसरे सप्ताह में शत-प्रतिशत … Read more

पूर्व CM गोविंद नारायण सिंह की सतना जमीन के स्वामित्व पर हाईकोर्ट ने जताया संदेह

सतना  हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे गोविन्द नारायण सिंह द्वारा अपने ही बेटे शिव बहादुर सिंह को बेची गई सतना की 11.57 एकड़ जमीन के स्वामित्व को संदेहास्पद माना है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गोविन्द नारायण सिंह ने अपंजीकृत और अपर्याप्त स्टाम्प पर बनी सेल डीड के आधार पर विवादित जमीन बेची थी। ऐसे दस्तावेजों के आधार पर न तो जमीन का स्वामित्व मिलता है और न ही अस्थाई निषेधाज्ञा। हाईकोर्ट ने अधीनस्थ अपीलीय अदालत के उस आदेश को उचित निरूपित किया, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई अस्थायी रोक को निरस्त कर दिया गया था। इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री के वारिसों की ओर से दायर याचिका निरस्त कर दी। याचिकाकर्ता अंबिकापुर, छत्तीसगढ़ निवासी नर्मदेश्वर प्रताप सिंह, रामेश्वर प्रताप सिंह और सतना निवासी माधवी सिंह की ओर से पक्ष रखा गया। दलील दी गई कि उनके पिता शिव बहादुर सिंह ने वर्ष 1992 में अपने पिता गोविन्द नारायण सिंह से अपंजीकृत सेल डीड के जरिए 11.57 एकड़ भूमि खरीदी थी। वह भूमि वर्षों से उनके कब्जे में है। इसी आधार पर स्थायी निषेधाज्ञा चाही गई। अधीनस्थ अदालत ने पांच फरवरी, 2025 को उनके पक्ष में अस्थायी निषेधाज्ञा दे दी थी। विवादित जमीन के असली मालिक सेठ मनोहर लाल थे। मनोहर लाल की कथित पावर आफ अटार्नी के आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री गोविन्द नारायण सिंह ने 11.57 एकड़ जमीन अपने बेटे शिव बहादुर सिंह को आठ दिसंबर, 1992 को बेची थी। वर्ष 1998 में जमीन का नामांतरण भी हुआ। ट्रायल कोर्ट द्वारा पांच फरवरी, 2025 को पूर्व मुख्यमंत्री के वारिसों को दी गई अस्थाई निषेधाज्ञा के विरुद्ध सेठ मनोहर लाल के वारिसों ने जिला अदालत में अपील दायर की। जिला अदालत ने 13 अक्तूबर 2025 को ट्रायल कोर्ट का आदेश निरस्त करके अस्थाई निषेधाज्ञा हटा दी थी। इस पर यह मामले पूर्व मुख्यमंत्री गोविन्द नारायण सिंह के वारिसों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।