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प्रधानमंत्री मोदी के हरित ऊर्जा विज़न से प्रेरित मध्यप्रदेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम–2026 में शामिल होने पहुँचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "डी-रीस्किंग द ग्रीन लीप: सब नेशनल ब्लू प्रिंट फॉर यूटिलिटी स्केल एनर्जी ट्रांजीशन" विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय राउंड टेबल मीटिंग में भागीदारी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य की ऊर्जा यात्रा में नवकरणीय ऊर्जा की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा मध्यप्रदेश के समावेशी और टिकाऊ विकास की आधारशिला है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन को प्रेरणा बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य स्वच्छ, सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की दूरदर्शी सोच से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश ने हरित ऊर्जा को विकास की मुख्य धारा में शामिल किया है। उन्होंने बताया कि अन्तर्राज्यीय सहयोग और बेहतर समन्वय से राज्य में बिजली और जल आपूर्ति में स्थिरता आई है। इससे आम उपभोक्ताओं के साथ उद्योगों को भी लाभ मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य में सौर ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण से जुड़ी नई नवकरणीय परियोजनाओं की प्रगति और आगामी योजनाओं की जानकारी भी दी। राउण्ड टेबल मीटिंग के समापन-सत्र में केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रहलाद जोशी ने भारत और प्रधानमंत्री श्री मोदी के हरित ऊर्जा विज़न को साझा किया। उन्होंने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नीति स्थिरता के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि यह उपभोक्ताओं और ऊर्जा क्षेत्र के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। केन्द्रीय मंत्री श्री जोशी ने सुधारोन्मुख राज्यों, विशेषकर मध्यप्रदेश की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की सौर ऊर्जा संबंधित उपलब्धियाँ वैश्विक स्तर पर साझा की जा सकती हैं। उन्होंने श्रम, भूमि और ऊर्जा के बेहतर समन्वय से स्वच्छ ऊर्जा में जोखिम कम करने के मध्यप्रदेश मॉडल को उल्लेखनीय बताया और प्रौद्योगिकी निवेश और ब्लेंडेड फाइनेंस पर ज़ोर दिया। राउण्ड टेबल मीटिंग में मध्यप्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, महानिदेशक, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन श्री अशोक खन्ना, अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार श्री मनीष सिंह, प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैया राजा टी, आयुक्त जनसम्पर्क श्री दीपक कुमार सक्सेना एवं एमडी एमपीआईडीसी श्री चन्द्रमौली शुक्ला उपस्थित रहे। मीटिंग में नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिये एक ड्रॉफ्ट फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया। विदेश में म.प्र. की नवकरणीय ऊर्जा नीति की हुई सराहना इंडोनेशिया के ईस्ट जावा प्रांत के उप-राज्यपाल श्री एमिल एलेस्टियान्तो डार्डक ने कहा कि उप-राष्ट्रीय सरकारें भी राष्ट्रीय नीतियों में परिवर्तन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की प्रगतिशील नीतियों की सराहना की। राउंड टेबल मीटिंग में प्रतिभागियों में वैश्विक और घरेलू कंपनियों के कॉरपोरेट प्रतिनिधि और निवेशक शामिल थे, जिन्होंने राज्य की नीतियों, हरित ऊर्जा की उपलब्धता, तथा डेटा सेंटर जैसी नई प्रौ‌द्योगिकी एवं नवाचारों के संबंध में जानकारी ली। चर्चाओं में नियामकीय आवश्यकताओं और जमीनी वास्तविकताओं के बीच संतुलन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। साथ ही यह भी चर्चा हुई कि किस प्रकार से मध्यप्रदेश जैसे क्षेत्रीय या उप-राष्ट्रीय सरकारें इस क्षेत्र में नवाचार का नेतृत्व कर सकती हैं।  

मंत्री भूरिया की वर्ल्ड बैंक अधिकारियों के साथ बैठक हुई

भोपाल महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया की अध्यक्षता में वर्ल्ड बैंक के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में महिला सशक्तिकरण, पोषण, बाल विकास तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन एवं उनके प्रभाव पर विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने वर्ल्ड बैंक के सहयोग से संचालित परियोजनाओं को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया। बैठक में पोषण अभियान, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, किशोरी बालिकाओं के सशक्तिकरण, क्षमता निर्माण एवं नवाचारों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। वर्ल्ड बैंक के अधिकारियों ने राज्य सरकार द्वारा सामाजिक क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा तकनीकी सहयोग, और भविष्य की कार्य-योजनाओं को लेकर अपने सुझाव साझा किए। उन्होंने राज्य के साथ निरंतर समन्वय एवं सहयोग की प्रतिबद्धता व्यक्त की। बैठक में विभागीय सचिव श्रीमती जीवी रश्मि, उप सचिव श्रीमती माधवी नागेंद्र, आयुक्त श्रीमती निधि निवेदिता, वर्ल्ड बैंक की दक्षिण एशिया की प्रैक्टिस मैनेजर, सुश्री अपर्णा सोमनाथन, सीनियर हेल्थ स्पेशलिस्ट सुश्री दीपिका चौधरी, साउथ एशिया रीजन के लीड हेल्थ स्पेशलिस्ट श्री सोमिल नागपाल एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

भागीरथपुरा मामला: हाई कोर्ट का बड़ा निर्देश, टेंडर प्रक्रिया और प्रदूषण बोर्ड के दस्तावेज होंगे संरक्षित

इंदौर भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में हाई कोर्ट का आदेश जारी हो गया है। कोर्ट ने कलेक्टर और निगमायुक्त से कहा है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने का संपूर्ण रिकॉर्ड (टेंडर प्रक्रिया सहित) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट की सुरक्षा सुनिश्चित करें। इन दस्तावेजों में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से भी कहा कि उन्हें नगर निगम और शासन द्वारा 20 जनवरी को प्रस्तुत रिपोर्ट को लेकर अगर किसी तरह की आपत्ति है तो प्रस्तुत कर दें। कोर्ट ने इस मामले में कलेक्टर के साथ बनाई जाने वाली स्वतंत्र कमेटी के लिए याचिकाकर्ताओं से नाम मांगे हैं। अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर हाई कोर्ट में पांच अलग-अलग याचिकाएं चल रही हैं। इन याचिकाओं में मंगलवार 20 जनवरी को करीब डेढ घंटे सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था जो बुधवार दोपहर जारी हुआ। तीन पेज के आदेश में कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ताओं को आशंका है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने के लिए हुई टेंडर प्रक्रिया के दस्तावेजों के साथ छोड़छाड़ की जा सकती है।   कोर्ट ने दिया दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का निर्देश याचिकाकर्ता ने ऐसी ही आशंका प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की उस रिपोर्ट के साथ होने की आशंका भी व्यक्त की है जिसमें पानी के नमूने दूषित पाए गए थे। ऐसी स्थिति में इन दस्तावजों को सुरक्षित रखा जाना आवश्यक है। कोर्ट ने कलेक्टर और निगमायुक्त से कहा है कि वे इन दोनों दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। याचिकाकर्ता सुझाएं नाम सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने शासन द्वारा गठित समिति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें इस पर विश्वास नहीं है। शासन ने भागीरथपुरा मामले के लिए दोषी अधिकारियों का पता लगाने के लिए अधिकारियों की कमेटी बना दी है। यह जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने के लिए सिर्फ दिखावा है। कोर्ट ने आदेश में याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे कलेक्टर के साथ इस मामले की स्वतंत्र निगरानी के लिए बनाई जाने वाले कमेटी के लिए सदस्यों के नाम प्रस्तावित करें। 27 से पहले दे दें आपत्ति शासन ने 20 जनवरी को हुई सुनवाई में स्टेटस रिपोर्ट पेश की थी। बताया था कि मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। बुधवार को जारी आदेश में कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि उन्हें अगर इस रिपोर्ट को लेकर किसी तरह की आपत्ति है तो वे इसे 27 जनवरी से पहले पेश कर दें।

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में अनुभूति कार्यक्रम का आयोजन

भोपाल वन विभाग द्वारा अनुभूति कार्यक्रम वर्ष 2025-26 का आयोजन वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में किया गया। अनुभूति कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूली विद्यार्थियों को वन, वन्य-प्राणी एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति अनुभूति कराकर उनके संरक्षण के लिये जागरूक एवं सहभागिता के लिये प्रेरित करना है। साथ ही वन विभाग के कार्यों, उत्तरदायित्वों एवं चुनौतियों से विद्यार्थियों को अवगत कराने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड के समन्वय से अनुभूति शिविर का आयोजन किया जा रहा है। अनुभूति शिविर में गत वर्ष में "मैं भी बाघ" एवं "हम है बदलाव'' को जोड़ते हुये नई थीम "हम हैं धरती के दूत" के माध्यम से संदेश पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित प्रशिक्षण-सह-जागरूकता शिविर वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में आज बुधवार को अंतिम शिविर आयोजित किया गया। शिविर में शासकीय माध्यमिक शाला, अब्बास नगर, भोपाल के 59 छात्र-छात्राओं एवं 4 शिक्षकों ने भाग लिया। अनुभूति कार्यक्रम के मास्टर ट्रेनर के रूप में सेवानिवृत उप वन संरक्षक श्री ए.के. खरे उपस्थित रहे। इस अवसर पर सेवानिवृत उप वन संरक्षक श्री राजीव श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संचालक वन विहार श्री विजय कुमार, सहायक संचालक वन विहार श्री वीरेन्द्र सिंह एवं अन्य अधिकारी कर्मचारी भी उपस्थित रहे। शिविर में शामिल हुए प्रत्येक बच्चे को अनुभूति बुक, अनुभूति बैग, केप, हर्बल किट, बटन वडी, पेन, वन विहार के ब्रोशर के साथ जलीय पक्षी, स्थलीय पक्षी, तितली प्रजाति और गिद्ध कुंजी के ब्रोशर भी प्रदान किये गये। विद्यार्थियों को मास्टर ट्रेनर एवं नवीन प्रेरकों द्वारा पक्षी दर्शन, वन्य-प्राणी दर्शन, प्रकृति पथ भ्रमण, स्थल पर विद्यमान वानिकी गतिविधियों एवं फूड चैन की जानकारी प्रदान की गई। वन, वन्य-प्राणी व पर्यावरण से संबंधित रोचक गतिविधियों कराई गई एवं जानकारी प्रदान कर उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया गया। छात्र-छात्राओं को वन्य-प्राणियों को कैसे रेस्क्यू किया जाता है, इसके सम्बंध में वन विहार में उपलब्ध रेस्क्यू वाहन के माध्यम से रेस्क्यू टीम द्वारा अवगत कराया गया। इसका प्रतिभागियों ने गंभीरता के साथ भरपूर आनंद लिया। शिविर में वन, वन्य-जीव एवं पर्यावरण के प्रति जागरूकता के लिये बच्चों को शपथ दिलाई गई एवं पुरस्कार तथा प्रमाण-पत्र भी वितरित किये गये।  

कलेक्टर समन्वय कर बेहतर परिणाम दें : मुख्य सचिव जैन

कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस में मुख्य बिंदुओं की समीक्षा कृषि वर्ष की कार्ययोजना पर भी हुआ विमर्श योजनाओं और कार्यक्रमों के लक्ष्य को समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश भोपाल मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन नेकलेक्टर्स से कहा है कि वे जिलों में सरकार के प्रतिनिधि है और शासन की प्रत्येक योजना और कार्यक्रम के क्रियान्वयन में सभी विभागों के अमले के साथ लीडर की भूमिका निभाकर सर्वश्रेष्ठ परिणाम दें। उन्होंने ग्रामीण विकास के लिए जिला पंचायत और नगरीय क्षेत्र के विकास योजनाओं के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ उत्कृष्ट समन्वय बनाकर कार्य करने की जरूरत बताईं। मुख्य सचिव ने कहा कि टीम के रूप में काम करने में ही परिणाम आयेंगे और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सेक्टर बनाकर माह में कम से कम दो बैठक कर लंबित योजनाओं और कार्यक्रम के क्रियान्वयन में शतप्रतिशत उपलब्धि सुनिचिश्त करें। मुख्य सचिव श्री जैन ने बुधवार को मंत्रालय में कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस के पालन प्रतिवेदन पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में समीक्षा की। कलेक्टर कमिश्र्नर और पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारी वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सम्मिलित हुए। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाये जाने के दृष्टिगत संबंधित विभागों को आगामी एक वर्ष की कार्य योजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गए है। मुख्य सचिव श्री जैन ने सुशासन को मध्यप्रदेश शासन का मूल्य मंत्र बताया उन्होंने कहा कि नामांतरण, बटवारा और सीमांकन जैसे प्रकरणों में सौ-सौ दिन की पेंडेंसी असंतोषजनक है। उन्होंने सम्पूर्ण राजस्व प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बावजूद इस तरह की कार्यप्रणाली को समन्वय के साथ दुरूस्त करने को कहा है। नामांतरण में मुरैना-भिंड, बटवारा के प्रकरणों में अनूपपूर और रीवा, भूमि के सीमांकन प्रकरणों में विदिशा और सतना, खसरा अपडेट में रीवा और इंदौर तथा अवैध कब्जा हटाने के मामले में भिंड और विदिशा जिलों की स्थिति अपेक्षाकृत असंतोषजनक पायी गयी है। राजस्व संग्रहण में कम वसूली को भी मुख्य सचिव ने गम्भीरता से लिया और निर्देश दिए कि टेक्नोलॉजी का लाभ लेकर राजस्व संग्रहण बढाये। उन्होंने राजस्व प्रकरणो में बटांकन के बाद रिकार्ड दुरूस्त होने के पश्चात ही प्रकरण को निराकृत मानने को कहा है। बैठक में समग्र पोर्टल में केवाईसी को इस वर्ष के अन्त तक शत-प्रतिशत करने के निर्देश दिये है। मुख्य सचिव श्री जैन ने एमपीई सेवा पोर्टल को प्रदेश के नागरिकों के लिए सेवाओं और सुविधा की दृष्टि से रिफार्म बताते हुए कलेक्टर्स और अन्य विभागों से कहा कि मार्च अंत तक सभी 1700 सेवाएं जुड़ जाए जिससे नागरिक इस पोर्टल के माध्यम से सेवाएं प्राप्त कर सकें। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन और लोक सेवा गांरटी अधिनियम के प्रकरणों की समीक्षा की। बैठक मे बताया गया कि लोक सेवा गारंटी के तहत प्राप्त 1 करोड़ 9 लाख आवेदनों में से 1 करोड़ का निराकरण किया गया है इस मामले में निवाड़ी और बड़वानी टॉप पर जबकि मऊगंज और शिवपुरी निचले पायदान पर हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि कलेक्टर संवेदनशीलता बरतें और समयअवधि बैठक में हर सप्ताह समीक्षा करें। उन्होंने निवास और आय प्रमाण पत्र, सीमांकन, अविवादित नामांतरण और जन्म के एक वर्ष पश्चात पंजीयन जैसी सेवाएं समय अवधि में निराकृत करने के निर्देश दिये। वर्तमान में 735 सेवाएं लोक सेवा गारंटी अधिनियम में अधिसूचित हैं जिनमें से 602 ऑनलाइन है शेष 133 सेवाओं को भी ऑनलाइन करने के निर्देश दिए है। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन की कई शिकायतों को अटेंड नहीं किये जाने पर बैतूल, मऊगंज, शहडोल और भोपाल जिलों को सुधार करने की हिदायत दी। उन्होंने भूमि विवाद के मामलों में समय पर एफआईआर दर्ज नही करने पर सेवा में कमीं बताया और आमजन को राहत पहुंचाने वाले इन कार्यों को सर्वोच्च्प्राथमिकता से करने के निर्देश दिये। मुख्य सचिव ने कलेक्टर्स से कहा कि वे टीम भावना से काम करें और जन प्रतिनिधियों सहित आम आदमी से संवेदनशील व्यवहार रखें और यह उनकी कार्य संस्कृति में भी दिखना चाहिए । उन्होंने वन ग्राम से राजस्व ग्राम कार्य की धीमी गति पर अंसतोष व्यक्त किया तथा वन भूमि का दावा कार्य में भी कम प्रगति पर कलेक्टर्स को राजस्व और वन अमले के साथ बेहतर समन्वय कर 31 मार्च तक सभी प्रकरण निराकृत करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव श्री जैन ने कृषि वर्ष 2026 के विभिन्न 10 आयाम की समीक्षा की और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर कृषि विकास के विभिन्न पहलूओं पर रणनीति बनाने के लिए कहा है। उन्होंने मिट्टी, पानी और मौसम को सटीक तकनीकी से जोड़ने और जिला स्तर पर प्लान बनाने को कहा है। उन्होंने सिंचाई सुविधाओं के निर्माण के समय आकल्पित सिंचाई क्षमता और वास्तविक सिंचाई क्षमता में अंतर होने को गम्भीरता से लिया और कहा कि राजस्व कृषि तथा जल संसाधान विभाग इस दिशा में सटीक योजना बनाकर क्रियान्वयन करें। बैठक में पराली/नरवाई जलाने पर रोक लगाने के लिए किसानों के बीच वैज्ञानिक तकनीकों के प्रसार करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रेसराईज्ड सिंचाई, परड्राप, मोरक्राप, उद्यानिकी क्लस्टर , खाद्य प्रसंस्करण, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना एक बगिया माँ के नाम, डॉ. भीमराव कामधेनु योजना की भी समीक्षा की गयी। मुख्य सचिव ने कलेक्टरर्स कों सभी योजनाओं का उत्कृष्ट क्रियान्वयन के निर्देश दिए है। स्वास्थ्य एवं पोषण अभियान की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम किये जाने के लिए कलेक्टर को निर्देश दिए कि वे माह में स्वास्थ्य विभाग के साथ कम से कम दो बार बैठक करें और स्वास्थ्य मापदंडों के अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चित करें। बैठक में गर्भवती महिलाओं की एएनसी जाँच पूरी गुणवत्ता से करने और असत्य आकँडें प्रस्तुत नहीं करने के लिए निर्देश दिये हैं। 

बाघ संरक्षण की वैश्विक मिसाल बना मध्यप्रदेश

नवाचार, सुशासन, जन-सहभागिता और सतर्क निगरानी तंत्र से ‘टाइगर स्टेट’ की पहचान हुई सशक्त भोपाल मध्यप्रदेश भौगोलिक दृष्टि से भारत का हृदय प्रदेश है। जैव-विविधता और वन्यप्राणी संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश राष्ट्रीय के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सशक्त पहचान बना चुका है। प्रदेश का लगभग एक-तिहाई भू-भाग वनाच्छादित है, यही कारण है कि यहां वन्यजीवों, विशेषकर बाघ, तेंदुआ, चीता जैसी बिग-कैट प्रजाति के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास उपलब्ध हैं। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2022 में कराई गई बाघ गणना के अनुसार देश में कुल 3,682 बाघ पाए गए हैं, जिनमें से 785 बाघ मध्यप्रदेश में दर्ज किए गए। यह संख्या देश में सर्वाधिक है। इसी के आधार पर मध्यप्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ का गौरव प्राप्त हुआ है। मध्यप्रदेश में बाघों की बढ़ती संख्या, वैज्ञानिक प्रबंधन, पारदर्शी आंकड़े और सख्त निगरानी यह प्रमाणित करती है कि प्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में देश का नेतृत्व कर रहा है। यदि यही निरंतरता बनी रही, तो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश न केवल ‘टाइगर स्टेट’ बल्कि वैश्विक संरक्षण मॉडल के रूप में भी स्थापित होगा। संरक्षित क्षेत्रों का सशक्त नेटवर्क मध्यप्रदेश में बाघ संरक्षण के लिए एक मजबूत और सुव्यवस्थित संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क विकसित किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में 11 राष्ट्रीय उद्यान, 26 वन्यप्राणी अभयारण्य और 09 टाइगर रिजर्वहैं। इन संरक्षित क्षेत्रों में वैज्ञानिक पद्धति से निगरानी, आवास प्रबंधन, शिकार की रोकथाम और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। अंतरराज्यीय बाघ पुनर्स्थापना में ऐतिहासिक भूमिका मध्यप्रदेश को यह गौरव भी प्राप्त है कि यहां विश्व की पहली अंतर्राज्यीय बाघ पुनर्स्थापना परियोजना को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। कान्हा एवं पेंच टाइगर रिजर्व से बाघों को अन्य प्रदेशों में स्थानांतरित कर वहां बाघ आबादी को पुनर्जीवित किया गया है। मध्यप्रदेश की यह पहल पूरे देश के लिए एक मॉडल बन चुकी है। राष्ट्रीय औसत से दोगुनी वृद्धि आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2018 से 2022 के बीच देश में बाघों की संख्या में 24.10 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि मध्यप्रदेश में यह वृद्धि 49.24 प्रतिशत रही। वार्षिक आधार पर देश में बाघों की औसत वृद्धि लगभग 6.02 प्रतिशत रही। मध्यप्रदेश में यह दर 12.31 प्रतिशत तक पहुंच गई जो राष्ट्रीय औसत से दोगुने से भी अधिक हैं। इससे सिद्ध हुआ है कि प्रदेश की संरक्षण रणनीतियां प्रभावी रही हैं। मृत्यु दर पर वैज्ञानिक और पारदर्शी दृष्टिकोण बाघ संरक्षण रणनीतियों में केवल संख्या बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि मृत्यु दर का विश्लेषण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से 2025 तक देश में बाघ मृत्यु दर औसतन 5 प्रतिशत से कम रही, जबकि मध्यप्रदेश में यह दर लगभग 6 से 7 प्रतिशत रही। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में बाघों की अधिक संख्या और बेहतर निगरानी प्रणाली के कारण मृत्यु की घटनाएं अधिक सटीकता से दर्ज होती हैं। इसे संरक्षण में विफलता नहीं, बल्कि बेहतर डिटेक्शन रेट के रूप में देखा जाना चाहिए। वर्ष 2025 में 55 बाघ मृत्यु घटनाओं का विश्लेषण वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश में दर्ज 55 बाघ मृत्यु घटनाओं का विस्तृत अध्ययन किया गया। इनमें प्राकृतिक कारणों से 38 बाघों की मृत्य हुई, जो कुल मौतों का 69 प्रतिशत है।इनमें आपसी संघर्ष, बीमारी, वृद्धावस्था, दुर्घटनाएं, रेल और सड़क हादसे शामिल हैं। शिकार से 11 बाघों की मृत्यु हुई है, जो कुल मृत्यु संख्या का 20 प्रतिशत है।इनमें से अधिकांश मामलों में विद्युत करंट के उपयोग की पुष्टि हुई। उल्लेखनीय है कि इन प्रकरणों में अवैध शिकार की मंशा सिद्ध नहीं हुई, बल्कि फसलों और पशुधन की रक्षा का प्रयास प्रमुख कारण रही है। व्याघ्र अंगों की तस्करी के लिये 6 बाघों का शिकार हुआ, जो कुल मौतों का 11% है।इन मामलों में बाघ के अवयव जब्त कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इससे वन अमले की सक्रियता और सजगता सिद्ध हुई है। आधुनिक तकनीक और सख्त कानूनों से प्रभावी बाघ संरक्षण बाघ संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा रियल-टाइम निगरानी, संवेदनशील क्षेत्रों में विद्युत विभाग की टीम के साथ विद्युत लाइन के आसपास संयुक्त गश्त, फील्ड इंटेलिजेंस नेटवर्क, स्थानीय समुदायों की सहभागिता और विद्युत अधिनियम 2003 के अंतर्गत सख्त कार्रवाई जैसे उपाय निरंतर अपनाए जा रहे हैं। बाघ संरक्षण का सकारात्मक प्रभाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। टाइगर रिजर्व आधारित पर्यटन से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता है। गाइड, वाहन चालक, होम-स्टे संचालकों को आजीविका के अवसर मिल रहे हैं। इससे प्रदेश की पर्यटन आय में वृद्धि हो रही है। जनसहभागिता से प्रभावी वन और वन्य-जीव संरक्षण वन विभाग ने आम नागरिकों, संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि बाघ संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में लें। किसी भी सूचना, शिकायत या सुझाव के लिए विभागीय माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है।  

प्रदेश में बनेगी पहली सहकारी क्षेत्र की अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला

आम उपभोक्ता भी करा सकेंगे दूध व दुग्ध उत्पादों की जांच नेशनल डेयरी प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट अंतर्गत किया जा रहा है प्रयोगशाला का निर्माण भोपाल प्रदेश में पहली सहकारी क्षेत्र की अत्याधुनिक केन्द्रीय राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला भोपाल में स्थापित की जा रही है, जिसका अधिकांश निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। यह प्रयोगशाला केन्द्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत की गई है। मध्यप्रदेश राज्य में मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन, भोपाल में सहकारिता क्षेत्र की यह पहली राज्य स्तरीय प्रयोगशाला होगी। राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला में आम उपभोक्ता भी दूध एवं दुग्ध उत्पादों की जांच करा सकेंगे। यदि आपके घर में आने वाले दूध या उससे बने उत्पादों में मिलावट की आशंका है, तो अब जांच के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, जहां आम उपभोक्ता के साथ देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं भी दूध और दुग्ध उत्पादों का परीक्षण करा सकेंगी। उपभोक्ताओं को मिलेगा शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद परियोजना का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाला दूध एवं दुग्ध उत्पाद उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। प्रदेश में अब तक दूध एवं दुग्ध उत्पादों की जांच एक बड़ी चुनौती रही है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। NABL और FSSAI से मान्यता प्राप्त होगी प्रयोगशाला यह प्रयोगशाला केंद्र शासन के मार्गदर्शन एवं वित्तीय सहयोग से स्थापित की जा रही है, जिसे (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) तथा (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) से मान्यता प्राप्त होगी। अत्याधुनिक मशीनें स्थापित प्रयोगशाला के निर्माण के लिये भारत सरकार द्वारा 12 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। इसके अंतर्गत अत्याधुनिक सात मशीनों की खरीदी पूरी हो चुकी है, जबकि शेष मशीनों, केमिकल्स एवं ग्लासवेयर की खरीदी प्रक्रिया जारी है। शीघ्र ही दूध एवं दुग्ध पदार्थों के परीक्षण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। 100 से अधिक मानकों पर होगा परीक्षण राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स, अफ्लाटॉक्सिन, वसा की शुद्धता, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ यूरिया, आयोडीन, माल्टोज, शुगर, नमक एवं अन्य प्रकार की मिलावटों की जांच शामिल होगी। आम उपभोक्ता और खाद्य उत्पादक संस्थाओं को सीधा लाभ इस प्रयोगशाला की सुविधा आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ देश की विभिन्न खाद्य उत्पादक संस्थाओं को भी उपलब्ध होगी। इसके स्थापित होने से दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा, शुद्धता के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और प्रदेश के उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।  

पौधरोपण कार्य में स्थानीय प्रजातियों को दी जाए प्राथमिकता : आयुक्त भोंडवे

पौधरोपण एवं पौध संरक्षण पर संभाग स्तरीय कार्यशाला हुई भोपाल नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा वर्ष 2026 में प्रस्तावित व्यापक पौधरोपण अभियान की तैयारियों के अंतर्गत “पौधरोपण एवं पौध संरक्षण” विषय पर संभाग स्तरीय कार्यशाला का आयोजन बुधवार को स्वर्ण जयंती सभागार, आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी, भोपाल में किया गया। नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2026 का पौधरोपण केवल औपचारिक लक्ष्य पूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पौधों के संरक्षण, जीवित रहने की दर तथा दीर्घकालीन पर्यावरणीय लाभ पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि “पौधा लगाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक आवश्यक उनका संरक्षण करना है। जब तक पौधे सुरक्षित नहीं रहेंगे, तब तक पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य पूर्ण नहीं हो सकता।” आयुक्त श्री भोंडवे ने बताया कि प्रदेश स्तर पर सुनियोजित एवं वैज्ञानिक पद्धति से पौधारोपण सुनिश्चित करने के लिए संभाग स्तरीय कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। शहडोल, ग्वालियर, इंदौर, रीवा, उज्जैन, जबलपुर एवं सागर संभाग में कार्यशालाओं के आयोजन के बाद भोपाल संभाग में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पौधरोपण कार्य में स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाए, नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जाए तथा नागरिक सहभागिता को भी अभियान से जोड़ा जाए, जिससे नगरीय क्षेत्रों में स्थायी हरित विकास को गति मिल सके। एक दिवसीय प्रशिक्षण सह क्षमतावर्धन कार्यशाला में भोपाल संभाग अंतर्गत नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, पौधरोपण प्रभारी, नोडल अधिकारी, उद्यान अधिकारी, माली वर्ग एवं स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सहभागिता की। कार्यशाला का उद्देश्य पौधरोपण कार्य से जुड़े मैदानी अमले को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना, पौधों के संरक्षण की प्रभावी रणनीति तैयार करना तथा नगरीय क्षेत्रों में हरित आवरण को सुदृढ़ करना रहा।  

अपराधियों पर ऐसी कार्यवाही करें जिससे उनके हौसले पस्त हों : मुख्य सचिव जैन

संवेदनशील होकर कानून व्यवस्था बनायें कलेक्टर-एसपी कांफ्रेंस के पालन प्रतिवेदन पर समीक्षा भोपाल मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने सभी जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिये है कि वे अवैध खनिज कारोबार सहित समाज विरोधी अन्य गतिविधियों को सख्ती से रोके और ऐसी कार्रवाई करें जिससे इस तरह की गतिविधियों में संलग्न लोगों के हौसले पस्त हों और भविष्य में इस तरह के अपराध नहीं हो। मुख्य सचिव श्री जैन ने भिंड मुरैना शहडोल जबलपुर और नरसिंहपुर जिलों को विशेष अभियान चलाकर इस तरह की गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाने को कहा है। मुख्य सचिव ने कलेक्टर और एस.पी को संयुक्त बैठक करने और प्रदेश में कानून व्यवस्था ठीक बनायें रखने के लिए लक्ष्य निर्धारित कर एक्शन लेने निर्देशित किया। कलेक्टर-पुलिस अधीक्षक कान्फ्रेंस के पालन प्रतिवेदन की समीक्षा बैठक बुधवार को मंत्रालय में हुई। कांन्फ्रेंस में पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना, जिलों के कलेक्टर और एस.पी तथा अन्य पुलिस और प्रशासनिक वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कान्फ्रेसिंग से सम्मिलित हुए। बैठक में बताया गया कि कानून व्यवस्था के दृष्टिगत ऐसी बस्तियां, जहां संकरी सड़कें हैं और मूवमेंट में समस्या आती है, ऐसे स्थानों वाले 24 जिलों में अब तक जोनल प्लान तैयार किया गया है। ऐसी 1343 गलियों और बस्तियों को संवेदेनशील माना गया है और 23 जिलो में जीआईएस मैप पर अंकित किया है। शेष जिलों के अधिकारियों को आगामी 3 माह में सम्पूर्ण कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए, जिससे बेहतर पुलिसिंग हो सके। डीजीपी श्री मकवाना ने बताया कि प्रदेश में 1900 से अधिक गुम बालिकाओं को बरामद किया गया है और महिला अपराध की रोकथाम के लिए विद्यालयीन स्तर पर भी में जागरूकता अभियान चलाया गया है। मुख्य सचिव श्री जैन ने महिला अपराधों की रोकथाम के लिए जिला और पुलिस प्रशासन को संयुक्त रूप से अभियान चलाने के लिए निर्देश दिये हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि ड्रग फ्री इंडिया अभियान के तहत अगले 3 वर्षों का एक्शन प्लान तैयार किया गया है। ड्रग एवं अन्य नशीले पदार्थ के उपयोग पर सख्ती से रोक लगाने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष मुहिम चलाने के निर्देश दिये गए है। मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि कलेक्टर और एस.पी संयुक्त बैठक करें और फोकस बिंदु पर कार्रवाई करें। बैठक में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विरूद्ध अपराधों की सख्ती से रोकथाम और ऐसे मामलों में पीड़ित पक्षकारों को निर्धारित अवधि में राहत राशि वितरित किये जाने के निर्देश दिये है। लंबित प्रकरणों में सागर के कलेक्टर और एस.पी. सहित लंबित प्रकरणों में असंतोषजनक प्रदर्शन करने वाले जिलों को संवेदनशील होकर प्रकरणों के निराकरण के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव श्री जैन ने पूरी गम्भीरता से निराकरण की समय अवधि निर्धारित करते हुए एस.ओ.पी जारी करने के निर्देश दिये। मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि व्यापक प्रचार-प्रसार, जागरूकता अभियान, ब्लैक स्पॉट कम करने जैसी गतिविधियां संचालित कर सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों की संख्या में 45 से 50 प्रतिशत तक कमी लायी जा सकती है। उन्होंने गुना, डिंडौरी, मैहर मुरैना श्योपुर जैसे जिलों को और अधिक कार्य करने के निर्देश दिये। प्रदेश में 481 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किये गए है और इन्हें ठीक करने के प्रयास जारी है। बैठक में जीरो फेटिलिटी डिस्ट्रिक्ट, कैशलेस उपचार योजना पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव श्री जैन ने बताया कि कैशलेस योजना में देश के मध्यप्रदेश सहित 6 राज्य शामिल हैं और प्रधानमंत्री जल्द ही इस योजना का शुभारंभ करेंगे। परिवहन सचिव ने बताया कि प्रदेश में अब तक इस योजना में 1600 अस्पताल पंजीकृत हुए है, जिनमें सड़क दुर्घटना में पीड़ित को एक सप्ताह तक डेढ़ लाख रूपये तक इलाज मुफ्त मिलेगा। जिला स्तर पर इस योजना के क्रियान्वयन के लिए विशेषज्ञ, ट्रैफिक, स्वास्थ्य एवं एन.आई.सी के साथ संयुक्त टीम गठित करने के निर्देश दिये गए है। मुख्य सचिव श्री जैन ने निर्देश दिए कि 15 साल से अधिक पुराने शासकीय वाहनों को तत्काल हटाया जाये। बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह श्री शिवशेखर शुक्ला ने भारतीय न्याय सहिता के सभी पहलूओं के प्रशिक्षण के लिए की गयी कार्यवाही की जानकारी दी।  

गणतंत्र दिवस पर शासकीय भवनों एवं महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों पर रोशनी करने के निर्देश

भोपाल राज्य शासन ने 26 जनवरी 2026 गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में समस्त शासकीय भवनों एवं महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों पर 25 एवं 26 जनवरी 2026 को रात्रि में प्रकाश की व्यवस्था करने के दिशा-निर्देश दिये। उक्त व्यवस्था पर होने वाला व्यय संबंधित प्रशासकीय विभाग अपने विभागीय बजट से वहन करेंगे।