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वृद्धजनों की देखभाल के लिए केयर गिवर्स प्रशिक्षण शुरू, 53 युवा सीख रहे हैं सेवा के गुर

वृद्धजनों की देखभाल के लिये केयर गिवर्स प्रशिक्षण प्रारंभ, 53 युवा जन सीख रहे है वृद्धों की देखभाल के गुर भोपाल  वृद्धजनों की देखभाल कैसे की जाए, इस विषय पर 75 दिवसीय केयर गिवर्स प्रशिक्षण राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान (निमहर) सीहोर में प्रारंभ किया गया है। दिव्यांजन सशक्तिकरण विभाग, सामाजिकन्याय और अधिकारिका मंत्रालय भारत सरकार द्वारा अटल वयों अभ्यूदय योजनांतर्गत यह प्रशिक्षण शिविर 5 जनवरी से 26 मार्च 2026 तक संचालित किया जा रहा है। इसमें 53 युवा वृद्धों की देखभाल, उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है। प्रमुख सचिव, सामाजिकन्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने बताया कि अटल वयो अभ्यूदय योजना के अंतर्गत स्टेट एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इसमें (NISD) नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल डिफेंस तथा लक्ष्मी बेन सुरजी फाउंडेशन मुंबई के संयुक्त तत्वाधान वरिष्ठजनों की देखभाल के लिये युवाओं को तैयार किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों द्वारा युवाजनों को बुर्जुगों की देखभाल के तरीकों, उनके अनुभव को साझा करने की प्रक्रिया और बुर्जुगों के साथ संवेदनशील बरताओं के लिय तैयार किया जाएगा। यह अपने तरह का प्रथम प्रशिक्षण है जो प्रदेश में आयोजित किया जा रहा है।  

स्मार्ट सिटी की ओर कदम, AI कैमरों से रियल-टाइम ट्रैफिक जाम की मिलेगी जानकारी

भोपाल  आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियों का समाधान अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), सेंसर और डेटा आधारित तकनीकें के माध्यम से होगा। मैनिट और ट्रिपल आइ‌टी के छात्रों द्वारा विकसित नवाचार शहरों की ट्रैफिक व्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक बड़े बदलाव की नींव रख रहे हैं। स्मार्ट कैमरों और सेंसर की मदद से यह तकनीक समझ सकेगी कि किस दिशा में वाहनों का दबाव अधिक है, जिससे ट्रैफिक सिग्नल स्वत: उसी अनुसार संचालित हो सकेंगे और जाम की समस्या कम होगी। वहीं डिजिटल हेल्थ ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म के जरिए मरीज के शरीर से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा को रियल-टाइम में रिकॉर्ड किया जाएगा। जिसे डॉक्टर दूर बैठे भी देख सकेंगे। इससे समय पर इलाज संभव होगा और अस्पतालों पर दबाव भी घटेगा। स्मार्ट इंडिया हैकथॉन (एसआइएच) 2025 में छह से अधिक टीमों के आइडिया राष्ट्रीय स्तर पर चयनित हुए हैं। इन आइडियाज की खास बात यह है कि ये सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की दिक्कतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए है। वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम स्मार्ट सेंसर आधारित वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम कचरा पात्रों में लगे सेंसर से नगर निगम को अलर्ट भेजेगा कि कहां कचरा भर चुका है। इससे समय पर सफाई होगी और शहर साफ रहेंगे। वहीं, डाक विभाग के लिए विकसित एआइ आधारित समाधान से पार्सल और पत्रों की प्रोसेसिंग तेज होगी। फेक न्यूज और देशविरोधी प्रचार की पहचान मैनिट की एक टीम ने ऐसा टूल बनाया है, जो सोशल मीडिया डेटा का विश्लेषण कर संदिग्ध पोस्ट, ट्रेंड और कैंपेन को चिन्हित करेगा। यह सिस्टम पैटर्न पहचानकर बताएगा कि कौन सा कंटेंट संगठित तरीके से फैलाया जा रहा है, जिससे समय रहते कार्रवाई की जा सके। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में क्या बदलेगा ट्रिपल आईटी की टीम ने ग्रामीण इलाकों के लिए डिजिटल हेल्थ ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म बनाया है। इसमें मरीज का इलाज, जांच और दवाओं का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। इससे बार-बार फाइल ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी और डॉक्टर दूर बैठे भी मरीज की स्थिति समझ सकेंगे। साइबर ठगी से आम लोगों की सुरक्षा डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ फर्जी ऐप्स का खतरा भी बढ़ा है। छात्रों ने फेक बैंकिंग एपीके डिटेक्शन सिस्टम तैयार किया है, जो ऐप के कोड, परमिशन और व्यवहार का विश्लेषण कर यह बताएगा कि ऐप सुरक्षित है या नहीं। स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल मैनिट की टीम ने एआइ आधारित स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम विकसित किया है। मौजूदा सिस्टम में सिग्नल तय समय पर बदलते हैं, चाहे सड़क खाली हो या जाम से भरी। नया सिस्टम रीयल-टाइम डेटा, कैमरों और सेंसर की मदद से यह समझेगा कि किस दिशा में ज्यादा वाहन हैं। उसी आधार पर सिग्नल का समय अपने आप बदलेगा। इससे जाम कम होगा, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड को रास्ता मिलेगा और ईंधन की बर्बादी भी रुकेगी।

देश का पहला ऐतिहासिक महाभारत समागम 16 से 24 जनवरी तक भारत भवन में, CM डॉ. मोहन होंगे शामिल

 भोपाल  राजधानी भोपाल के भारत भवन से शांति का संदेश दिया जाएगा। दरअसल, 16 से 24 जनवरी तक ऐतिहासिक महाभारत समागम का आयोजन होगा। नौ दिवसीय आयोजन में CM डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे।  भारत सहित इंडोनेशिया, श्रीलंका और जापान के रंग समूह लेंगे भाग वीर भारत न्यास के आयोजन में भारत सहित इंडोनेशिया, श्रीलंका और जापान के प्रतिष्ठित रंग समूह भाग लेंगे। नौ दिवसीय आयोजन में नाटक, नृत्य-नाट्य, कठपुतली कार्यशालाएं, लोक एवं शास्त्रीय प्रस्तुतियां, अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और इमर्सिव डोम थिएटर के माध्यम से युद्ध के विरुद्ध शांति और संवाद का सशक्त संदेश दिया जाएगा।  शांति और संवाद का मंच बनेगा भोपाल का भारत भवन वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध, हिंसा और सभ्यताओं के टकराव के दौर में भोपाल का भारत भवन शांति और संवाद का मंच बनेगा। महाभारत समागम देश का पहला और अब तक का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन है। जो महाभारत को केवल युद्ध कथा नहीं, बल्कि मानवता, विवेक और करुणा की महागाथा के रूप में प्रस्तुत करेगा।  युद्ध कभी समाधान नहीं नौ दिवसीय आयोजन में नाटक, नृत्य-नाट्य, लोक एवं शास्त्रीय प्रस्तुतियों के माध्यम से यह बताया जाएगा कि युद्ध कभी समाधान नहीं होता। श्रीकृष्ण के संवाद आधारित प्रयास आज की वैश्विक परिस्थितियों में भी प्रासंगिक हैं। नेपथ्य कला, अस्त्र-शस्त्र, चक्रव्यूह और पताकाओं की प्रदर्शनी दर्शकों को महाभारत के दृश्य संसार से परिचित कराएगी। महाभारत आधारित चित्र प्रदर्शनी और भारतीय कठपुतली कला भी आयोजन का अहम हिस्सा होंगी। इसके साथ ‘सभ्यताओं की सांस’ और ‘भूली बिसरी सभ्यताएं’ पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा। 

रुद्राक्ष महोत्सव: कुबेरेश्वर धाम में मंच साझा करेंगे प्रदीप मिश्रा–धीरेंद्र शास्त्री, जानें वितरण होगा या नहीं

सीहोर  कुबेरेश्वर धाम 17 फरवरी को एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक गौरव का साक्षी बनने जा रहा है। धाम पर आयोजित होने वाले भव्य रुद्राक्ष महोत्सव के अवसर पर बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आगमन होगा। विट्ठलेश सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित यह महोत्सव महादेव की भक्ति और आध्यात्मिक चेतना को समर्पित है। इस साल महोत्सव का स्वरूप दिव्य होगा। पंडित प्रदीप मिश्रा के सानिध्य में लाखों भक्त एक साथ महादेव का पूजन और अभिषेक करेंगे। विट्ठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित समीर शुक्ला सहित अन्य ने बागेश्वर धाम पर पहुंचकर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से भेंट की और रुद्राक्ष महोत्सव पर चर्चा की। पंडित शास्त्री ने कहा कि 17 फरवरी को कुबेश्वरधाम पर होने वाले भव्य महोत्सव में वह शामिल रहेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक लाख 80 हजार वर्ग फीट में विशाल पंडाल तैयार किया गया है। इसके अलावा लगभग 10 एकड़ भूमि पर भोजनशाला का निर्माण भी किया जा रहा है, ताकि महोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। रुद्राक्ष से शिवलिंग का निर्माण किया जाएगा महोत्सव के दौरान शिव तत्व और सनातन धर्म की महिमा पर विशेष सत्संग सत्र आयोजित किए जाएंगे। मंदिर परिसर में लाखों रुद्राक्ष से एक भव्य शिवलिंग का निर्माण किया जाएगा, जिसका श्रद्धालुओं के बीच नियमित अभिषेक किया जाएगा। विट्ठलेश सेवा समिति के जनसंपर्क प्रभारी मनोज दीक्षित ने बताया कि 17 फरवरी का दिन कुबेरेश्वर धाम के इतिहास में विशेष महत्व रखेगा, जब दोनों प्रमुख कथावाचक एक मंच पर उपस्थित रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि महोत्सव के दौरान रुद्राक्ष का वितरण नहीं किया जाएगा और पूरा आयोजन महादेव की आराधना तथा संतों के सानिध्य पर केंद्रित रहेगा। 80 हजार स्क्वायर फीट में बन रहा पंडाल: सालों से होने वाले ऐतिहासिक रुद्राक्ष महोत्सव में लाखों की संख्या में देश और विदेश के श्रद्धालु शामिल होते हैं। आयोजन के लिए एक लाख 80 हजार स्क्वायर फीट का भव्य पंडाल बनाया गया है। इसके अलावा 10 एकड़ में भोजन शाला का निर्माण किया जा रहा है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री होंगे शामिल विट्ठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित समीर शुक्ला समेत अन्य ने बागेश्वर धाम पर पहुंचकर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से भेंट कर आगामी ऐतिहासिक रुद्राक्ष महोत्सव को लेकर चर्चा की। वहीं पंडित शास्त्री ने कहा कि आगामी 17 फरवरी को कुबेरेश्वर धाम पर होने वाले भव्य महोत्सव में वह शामिल रहेंगे। गौरतलब है कि बीते कई सालों से होने वाले ऐतिहासिक रुद्राक्ष महोत्सव में लाखों की संख्या में देश और विदेश के श्रद्धालु शामिल होते है। भव्य आयोजन को लेकर एक लाख 80 हजार स्कावयर फीट का भव्य पंडाल का निर्माण किया गया है। इसके अलावा 10 एकड़ में भोजन शाला का निर्माण किया जा रहा है। शिव महापुराण एवं सत्संग महोत्सव के दौरान शिव तत्व और सनातन धर्म की महिमा पर विशेष सत्संग सत्र आयोजित होंगे। लाखों रुद्राक्ष से मंदिर परिसर में भव्य शिवलिंग का निर्माण किया जाएगा। जिसका नियमित रूप से लाखों श्रद्धालुओं के मध्य अभिषेक किया जाएगा। विशाल धार्मिक समागम यह आयोजन देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा और विश्वास का प्रमुख केंद्र बनेगा। दो महान विभूतियों का महामिलन विट्ठलेश सेवा समिति के जनसंपर्क प्रभारी मनोज दीक्षित ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि 17 फरवरी का दिन कुबेरेश्वर धाम के इतिहास में अविस्मरणीय होगा। इस दिन अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा महाराज और पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक ही मंच पर उपस्थित रहेंगे। देश के इन दो सबसे लोकप्रिय आध्यात्मिक व्यक्तित्वों का मिलन सनातन संस्कृति की एकजुटता और वैचारिक शक्ति का परिचायक होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि महोत्सव के दौरान रुद्राक्ष का वितरण नहीं किया जाएगा, बल्कि पूरा कार्यक्रम महादेव की आराधना और संतों के सानिध्य पर केंद्रित रहेगा। श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए समिति की ओर से आवास, पेयजल और सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। ताकि भक्तों को सुलभ दर्शन और सत्संग का लाभमिल सके। समिति समस्त धर्मप्रेमी जनता से इस गौरवशाली और भक्तिमय अवसर पर सादर पधारने की अपील की है।

भोपाल में शुरू होगा बिना चीरफाड़ वाला पोस्टमॉर्टम, आधे घंटे में पूरी होगी प्रक्रिया, एम्स को मिली मंजूरी

भोपाल   डिजिटल अटॉप्सी ' सेंटर अपनी योजना के अनुसार कामयाब रहा तो यह सामाजिक और मानवीय दृष्टिकोण से क्रांतिकारी कदम होगा। इसके तहत बिना चीर-फाड़ किए पोस्टमॉर्टम किया जा सकेगा। इससे शव को सम्मान दिया जा सकेगा और अंतिम समय में लोग अपने प्रियजन के शरीर को बगैर क्षत-विक्षत हुए विदाई दे सकेंगे।  भोपाल जल्द ही देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो सकता है, जहां बिना चीरफाड़ के पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। जापान और अन्य विकसित देशों की तर्ज पर एम्स भोपाल में वर्चुअल ऑटोप्सी शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया गया है।  एम्स भोपाल प्रबंधन ने भारत सरकार की स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की बैठक में इसका औपचारिक प्रस्ताव रखा है। खास बात यह है कि इस प्रस्ताव को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी थी। अब इसे वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि मंडल के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि प्रस्ताव पर रिस्पॉन्स सकारात्मक रहा है और जल्द ही इसके लिए फंड जारी होने की संभावना है। यह परियोजना मंजूर होती है तो एम्स भोपाल मध्यप्रदेश का पहला ऐसा अस्पताल होगा, जहां वर्चुअल ऑटोप्सी की सुविधा शुरू होगी। शिलॉन्ग स्थित एनईआईजीआरआईएचएमएस द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि फांसी के मामलों में वर्चुअल ऑटोप्सी और पारंपरिक ऑटोप्सी के नतीजों में 90 प्रतिशत तक समानता रही। डिजिटल एविडेंस होते हैं तैयार विशेषज्ञों के अनुसार, वर्चुअल ऑटोप्सी से तैयार होने वाली रिपोर्ट डिजिटल साक्ष्य के रूप में बेहद मजबूत होती है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति की मौत नस में ब्लॉकेज के कारण हुई है, तो रिपोर्ट में उस नस की 3डी तस्वीर होगी। यह तस्वीर तीन स्तरों में होगी- पहले पूरे शरीर में ब्लॉकेज की स्थिति, फिर संबंधित अंग और अंत में उस खास नस की क्लोज-अप इमेज। इन डिजिटल साक्ष्यों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और अदालत में भी प्रमाण के तौर पर पेश किया जा सकता है। परिजनों के आक्रोश का नहीं करना होगा सामना कई मामलों में परिजन धार्मिक या सामाजिक कारणों से शव की चीरफाड़ नहीं चाहते। इसे लेकर अस्पतालों में विवाद की स्थिति भी बन जाती है। जिसका सामना कई बार मौजूद डॉक्टरों को करना पड़ता है। पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम कराती है, लेकिन इससे परिवार मानसिक रूप से आहत होता है। वर्चुअल ऑटोप्सी इस समस्या का समाधान बन सकती है, क्योंकि इसमें शरीर को बिना नुकसान पहुंचाए जांच पूरी की जाती है। इससे परिजनों को शव सही अवस्था में सौंपा जा सकेगा। आधा घंटे में पूरी प्रक्रिया एम्स के फॉरेंसिक विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जहां पारंपरिक पोस्टमॉर्टम में कई घंटे लग जाते हैं, वहीं वर्चुअल ऑटोप्सी की प्रक्रिया लगभग आधे घंटे में पूरी हो सकती है। यह तकनीक विशेष रूप से ट्रॉमा केस, सड़क हादसों और संक्रामक बीमारियों से जुड़ी मौतों में बेहद उपयोगी मानी जा रही है। कोविड जैसी महामारियों के दौरान यह स्टाफ के लिए संक्रमण के खतरे को भी कम करती है। देश में 38 वर्चुअल ऑटोप्सी सेंटर बनाने का टारगेट भारत में सबसे पहले 2021 में एम्स दिल्ली में वर्चुअल ऑटोप्सी की शुरुआत हुई थी। अब 2026 की शुरुआत तक देशभर में 38 से अधिक विशेष वर्चुअल ऑटोप्सी लैब स्थापित करने की योजना है। एम्स दिल्ली के अलावा शिलॉन्ग स्थित एनईआईजीआरआईएचएमएस में भी वर्चुअल ऑटोप्सी की सुविधा मौजूद है। इसके अलावा एम्स ऋषिकेश में भी यह सेटअप तैयार करने की मंजूरी दी गई है। कम होगा भार  एक अधिकारी ने बताया कि पारंपरिक तरीके से किए जाने वाले पोस्टमॉर्टम में काफी समय जाता है। इस तरीके से किए जाने वाले पोस्टमॉर्टम रात में नहीं किए जाते हैं। पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल आने वाले 70 प्रतिशत मामले सामान्य मौत के होते हैं। यानी केवल इनकी मौत का कारण पता करना होता है। हालांकि 30 प्रतिशत ऐसे मामले होते हैं, जिनमें कानूनी अड़चनें होती हैं। इस मशीन के जरिए 70 प्रतिशत सामान्य पोस्टमॉर्टम को करने में काफी मदद मिलेगी।  पश्चिमी देशों में इस तकनीकी का बहुत इस्तेमाल किया जाता है। डिजिटल अटॉप्सी के जरिए 30 मिनट के अंदर पोस्टमॉर्टम हो जाता है, जबकि पारंपरिक तरीके से होने वाले पोस्टमॉर्टम में 1-2 घंटे या उससे भी अधिक समय लग सकता है। बता दें कि नायर अस्पताल में सालाना 2000-2500 पोस्टमॉर्टम होते हैं। इनमें से तकरीबन 400 कानूनी मामलों से जुड़े पोस्टमॉर्टम होते हैं। ऐसे करेगा काम सामान्य मौत के मामलों में यह वर्चुअल अटॉप्सी मशीन काफी फायदेमंद साबित होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, एमआरआई की तरह इस मशीन में उच्च क्वॉलिटी का स्कैनर लगा होता है। शव को मशीन के अंदर भेजा जाता है, जिससे शरीर के अंदर प्रभावित हुए अंगों के बारे में पता चलता है। स्कैन के जरिए कंप्यूटर पर शरीर के अंदर की चीजों को आसानी से रेडियोलॉजिस्ट और फरेंसिक विशेषज्ञ देखते हैं और मौत के कारणों का पता लग सकता है। दुर्घटनाग्रस्त मामलों या ‘मास कैज्युअलिटी’ के दौरान इस तरह की मशीन से काफी मदद मिल सकती है।

इंदौर में रियल एस्टेट गतिविधियों में तेजी, विजयनगर और बायपास में रजिस्ट्री में उछाल

 इंदौर  शहर में रियल एस्टेट गतिविधियां लगातार गति पकड़ रही हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में संपत्ति की खरीदी-बिक्री का रुझान बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में 2.28 प्रतिशत बढ़ा है। इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान विजय नगर स्थित इंदौर-3 पंजीयन कार्यालय का रहा, जहां पंजीयन में 16.51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यहां वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में 4320 अधिक दस्तावेज पंजीकृत हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार विजय नगर, बायपास और देवास नाका क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों की खरीदी-बिक्री बढ़ी है। दस्तावेजों के पंजीयन में इजाफा इंदौर जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 में अप्रैल से दिसंबर तक नौ माह की अवधि में पंजीयन कार्यालयों में कुल 1 लाख 26 हजार 328 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष इसी अवधि में 1 लाख 23 हजार 512 दस्तावेज दर्ज हुए थे। इस तरह कुल 2816 दस्तावेज अधिक पंजीकृत हुए। हालांकि, दस्तावेज पंजीयन बढ़ने के बावजूद राजस्व लक्ष्य हासिल करने में विभाग पीछे रहा। राजस्व संग्रहण और वार्षिक लक्ष्य इंदौर पंजीयन कार्यालय को 3500 करोड़ रुपये का वार्षिक लक्ष्य दिया गया था, जिसमें नौ माह में 2328 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया जाना था। लेकिन अब तक विभाग केवल 1730 करोड़ रुपये ही एकत्र कर सका है। फिर भी यह राशि वर्ष 2024 की समान अवधि में जुटाए गए 1659 करोड़ रुपये से अधिक है। पंजीयन कार्यालयवार आंकड़ों पर नजर डालें तो नौ माह में इंदौर-4 कार्यालय में सर्वाधिक 34,632 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जबकि सबसे अधिक राजस्व 479.08 करोड़ रुपये इंदौर-3 कार्यालय से प्राप्त हुआ। पुराने क्षेत्रों में मांग कमजोर मोती तबेला स्थित पंजीयन कार्यालय में दस्तावेज पंजीयन में 15.30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो शहर के कुछ पुराने क्षेत्रों में संपत्तियों की मांग कमजोर होने का संकेत देती है।

एम्स दिल्ली की तर्ज पर भोपाल में ट्रामा सेंटर, रोबोटिक सर्जरी से मिलेगा इलाज

भोपाल  एम्स भोपाल में करीब एक हजार करोड़ रुपये के विस्तार की योजना को लेकर सोमवार को दिल्ली में भारत सरकार की स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी (एसएफसी) की बैठक हुई। भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव को विस्तार का पूरा प्लान सौंपा। इस महायोजना के तहत एम्स परिसर में ही हेलीपैड बनाया जाएगा, जिससे एयर एम्बुलेंस का संचालन सुलभ हो सकेगा। कैंसर अस्पताल और ट्रामा सेंटर का निर्माण सांसद शर्मा ने बताया कि एम्स में 200 बेड का अत्याधुनिक अपेक्स आन्कोलॉजी सेंटर (कैंसर अस्पताल) बनाया जाएगा। आंकड़ों के अनुसार, एम्स भोपाल में हर साल 36 हजार से ज्यादा कैंसर मरीज आते हैं, जिनमें से 60 प्रतिशत मरीज भोपाल के बाहर के जिलों जैसे आगर मालवा, रायसेन और विदिशा से होते हैं। इसके साथ ही एम्स दिल्ली के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा 'लेवल-1 अपेक्स ट्रामा सेंटर' भी भोपाल में तैयार होगा। 150 बेड वाले इस सेंटर के पहले चरण के लिए 295 करोड़ रुपये का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया है। रोबोटिक सर्जरी और हाई-टेक सुविधाएं एम्स भोपाल का यूरोलॉजी विभाग अब दुनिया की सबसे उन्नत 'द विंची रोबोट 4.0' प्रणाली से लैस होगा। लगभग 30 करोड़ की लागत वाले इस सिस्टम के लगने के बाद एम्स भोपाल सेंट्रल इंडिया का पहला सरकारी संस्थान बनेगा, जहां रोबोटिक तकनीक से प्रोस्टेट कैंसर और किडनी ट्यूमर जैसे जटिल ऑपरेशन न्यूनतम चीर-फाड़ के साथ हो सकेंगे। इसके अलावा वर्चुअल ऑटोप्सी और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सुविधाओं के विस्तार पर भी प्रेजेंटेशन दिया गया। मरीजों की बढ़ती संख्या और बजट की उम्मीद बता दें कि एम्स में मरीजों का भार तेजी से बढ़ रहा है। साल 2022 में जहां 36 हजार मरीज आए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 85 हजार से अधिक हो गई है। बैठक में एम्स निदेशक डॉ. माधवानंद कर और डिप्टी डायरेक्टर संदेश जैन सहित मंत्रालय के आला अधिकारी मौजूद रहे। इन प्रोजेक्ट्स के लिए बजट जल्द ही स्वीकृत हो जाएगा, जिससे मध्य प्रदेश सहित पूरे मध्य भारत के मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज मिल सकेगा।  

बिरसिंगपुर की यूनिट नंबर 4 ने वित्तीय वर्ष में किया लगातार दूसरी बार 100 दिन उत्पादन

चचाई की यूनिट बिना ट्रि‍पिंग और ज़ीरो तेल खपत के पूर्ण रूप से चली एक कैलेंडर वर्ष भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी(MPPGCL) के दो ताप विद्युत गृहों ने नए वर्ष की शुरुआत में ही नए रिकार्ड बनाए हैं। संजय गांधी ताप विद्युत गृह की 210 मेगावॉट क्षमता की यूनिट नंबर 4 ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इस वित्तीय वर्ष में जहां दूसरी बार लगातार 100 दिन तक विद्युत उदत्पादन किया, वहीं अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की 210 मेगावॉट क्षमता की यूनिट ने बिना ट्रिपिंग और ज़ीरो तेल की खपत के एक कैलेंडर वर्ष पूर्ण कर लिए। यह यूनिट 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक निर्बाध रूप से संचालित रही। वर्तमान में इस यूनिट ने लगातार संचालन के 462 दिन पूर्ण कर लिए। संजय गांधी ताप विद्युत गृह की यूनिट नंबर 4 MPPGCL की 11 वीं यूनिट है जिसने 100 दिन लगातार विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया है। यूनिट नंबर 4 ने वित्तीय वर्ष में लगातार दूसरी बार किया 100 दिन सतत् विद्युत उत्पादन संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर की 210 मेगावॉट क्षमता की यूनिट नंबर 4 ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगातार दूसरी बार 100 दिन सतत् व निर्बाध विद्युत उत्पादन करने का कीर्तिमान बनाया। इस यूनिट ने इस दौरान 88.83 फीसदी प्लांट अवेलेबिलिटी फेक्टर (पीएएफ), 81.98 फीसदी प्लांट यूटिलाइजेशन फेक्टर (पीएलएफ) व 9.25 प्रतिशत ऑक्जलरी खपत को हासिल कर ऑपरेशनल विश्वसनीयता व दक्षता का प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन इंडेक्स संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर की यूनिट नंबर 4 में ऑपरेटिंग, मेंटेनेंस व सपोर्ट टीमों के समर्प‍ित प्रयास, तकनीकी क्षमता व प्रभावी समन्वय को दर्शाते हैं।  

जिला स्तर पर समितियों का गठन कर, करें सक्रिय : राज्य मंत्री पटेल

डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना एवं स्वावलंबी गोशाला निवास नीति-2025 का प्रभावी रूप से संचालन सुनिश्चित करें मध्यप्रदेश राज्य पशु कल्याण सलाहकार मंडल के सदस्यों के साथ की बैठक भोपाल पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने मंगलवार को मंत्रालय स्थित कक्ष में मध्यप्रदेश राज्य पशुकल्याण सलाहकार मंडल के सदस्यों के साथ बैठक की। राज्य मंत्री श्री पटेल ने मंडल द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तांर से समीक्षा की। साथ ही समस्त जिलों में जिला स्त्र पर समितियों का गठन कर सक्रि‍य रूप से कार्य करने के निर्देश दि‍ए। राज्यमंत्री श्री पटेल ने विभाग द्वारा संचालित डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना एवं स्वावलंबी गोशाला निवास नीति-2025 के क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने योजनाओं के प्रभावी संचालन, गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा पशुपालकों को अधिकाधिक लाभ पहुंचाने के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव, संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ. पी.एस. पटेल सहित मध्यएप्रदेश राज्य पशु कल्याण सलाहकार मंडल के सदस्य उपस्थि‍त रहे। प्रदेश का कुल दुग्ध उत्पादन 22.60 मिलियन मीट्रिक टन प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव ने जानकारी दी कि 20वीं पशु संगणना के अनुसार प्रदेश में कुल 187.52 लाख गौवंशीय पशु हैं, जो देश में तीसरे स्थान पर है। प्रदेश में देश के कुल गौवंश का 9.73 प्रतिशत हिस्सा है। इसी प्रकार प्रदेश में 103.07 लाख भैंसवंशीय पशु हैं, जो देश में चौथे स्थान पर है तथा देश के कुल भैंसवंश का 9.38 प्रतिशत मध्यप्रदेश में है। प्रदेश का कुल दुग्ध उत्पादन 22.60 मिलियन मीट्रिक टन है, जिसमें प्रदेश का देश में तीसरा स्थान है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दुग्ध उपलब्धता 707 ग्राम है, जो कि राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम से अधिक है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत प्रदेश के गौ-भैंसवंशीय पशुओं में एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) टीकाकरण किया गया है। प्रदेश में 3 लाख 83 हजार पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान किए गए हैं दूसरे चरण में अब तक 6 लाख से अधिक पशुपालकों से की गई भेंट प्रमुख सचिव श्री उमराव ने बताया कि प्रदेश में किसानों को पशु स्वास्थ्य, पशु पोषण एवं नस्ल सुधार की जानकारी देने के लिए दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का पहला चरण 3 से 9 अक्टूबर 2025 के बीच संचालित किया गया था, जबकि दूसरा चरण 17 दिसंबर 2025 से प्रारंभ हुआ है। अब तक 6 लाख 20 हजार पशुपालकों के घर जाकर उन्हें पशु पोषण, नस्ल सुधार एवं पशु स्वास्थ्य के विषय में जागरूक किया जा चुका है। प्रदेश में तीन चरणों में क्षीरधारा ग्राम योजना का किया जाएगा क्रियान्वयन प्रदेश के कई ग्रामों में संस्थागत एवं व्यक्तिगत प्रयासों से नस्ल सुधार कार्यक्रम प्रभावी रूप से क्रियान्वित हो रहे हैं, जिससे पशुपालक उन्नत पशुपालन कर अधिक दुग्ध उत्पादन कर रहे हैं। ऐसे ग्रामों को आदर्श उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने तथा अन्य ग्रामों को प्रेरित करने के उद्देश्य से क्षीरधारा ग्राम योजना लागू की जाएगी। इस योजना के माध्यम से दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने, उन्नत पशुपालन को प्रोत्साहित करने तथा पशु स्वास्थ्य एवं पोषण सुनिश्चित करते हुए ग्राम स्तर पर समग्र दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए पशुपालकों को जागरूक किया जाएगा। योजना को तीन वर्षों में चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जाएगा। इसके अंतर्गत जिलों के समस्त ग्रामों को पशुपालन के स्तर, उन्नत पशुपालकों की उपलब्धता, नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य, टीकाकरण एवं टैगिंग की स्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा।  

बौद्धिक सम्पदा अधिकारों की दूसरे दिन की यात्रा भी सुखद

भोपाल भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के द्वारा सीएसआई – एमपीरी में आयोजित दो दिवसीय "आईपी यात्रा" के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में रिसर्चरस, स्टार्टअप्स एवं एमएसएमई के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यात्रा आयोजक एमएसएमई विकास कार्यालय इंदौर के सहायक निदेशक श्री निलेश त्रिवेदी ने अपने आरम्भिक सम्बोधन में जानकारी दी कि आईपी यात्रा के प्लेटफार्म से हम अनुसंधानकर्ता विभागों की नवीनतम तकनीकों को एमएसएमई इकाईयों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को प्रकाश में लाने में सफल हुए हैं। आईपी यात्रा समाप्त नहीं होगी अपितु इसके बाद भी एमएसमएमई विकास कार्यालय इंदौर छोटे उद्योगों और अनुसंधान करने वाली संस्थाओं के मध्य तकनीकी हस्तातरण और उनके आईपी अधिकारों के संरक्षण की प्रक्रिया में सदैव सहयोग, समन्वय और सेतु की भूमिका के लिए तत्पर रूप से सक्रिय रहेगी। आईपी यात्रा के तकनीकी सत्र में सीएसआईआर- एमपीरी के श्री संदीप सिंघई ने सीएसआईआर में उपलब्ध नवीन तकनीकों एवं इनके हस्तातरण की प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी प्रदान की एवं प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने सीएसआईआर में उपलब्ध तकनीकों की अत्यंत उपयोगी जानकारी साझा की। विषय विशेषज्ञ श्री राकेश सोनी ने बौद्धिक सम्पदा के पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, ट्रेड सीक्रेट, डिजाइन प्रमाणन प्राप्त करने के बाद उनके व्यवसायिकरण की प्रक्रिया की चरणबद्ध रुपरेखा की विस्तार से जानकारी प्रदान की एवं इसके अंतर्गत संबंधित नियमों की जानकारी भी प्रदान की. उन्होंने विभिन्न प्रकरणों के उदाहरण देकर केस स्टडी भी प्रस्तुत की। एमएसएमई के श्री निलेश त्रिवेदी ने अपने प्रस्तुतिकरण में ट्रेडमार्क, पेटेंट, कॉपीराइट, के विवादित ओद्योगिक और सेलिब्रेटी से संबंधित विवादित न्यायिक प्रकरणों की विस्तार से जानकारी बहुत ही रोचक रूप से प्रस्तुत की। आईपी यात्रा कार्यक्रम के प्रतिभागियों ने कार्यक्रम पश्चात प्रतिक्रिया में बहुत ही उत्कृष्ट श्रेणीकरण और सकारात्मक प्रतिक्रिया प्रस्तुत की एवं ऐसे उपयोगी कार्यक्रमों को सभी विश्वविद्यालय स्तर पर आयोजित करने का अनुरोध किया। आईपी यात्रा के प्रतिभागियों को आईपी विषय पर पाठ्य सामग्री भी वितरित की गई। आईपी यात्रा में आईपी फेसिलिटेशन सेंटर में उपलब्ध की सुविधाओं की जानकारी आआईटी इंदौर के श्री आदित्य व्यास ने प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में आईपी अधिकारों और तकनीकी हस्तातरण से लाभ प्राप्त करने वाले सफल उद्यमियों ने अपनी सफलता की कहानी प्रस्तुत की और प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान भी किया।