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नगरीय विकास परियोजनाओं को विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप किया जाए क्रियान्वित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनहित में नगरों में निजी निवेश को प्रोत्साहन, सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग और अन्य गतिविधियों को करें प्राथमिकता से मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कंपनी के संचालक मंडल की हुई बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में नगरीय विकास परियोजनाओं को विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए क्रियान्वित किया जाए। नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति को सुधारने, नगरीय क्षेत्रों में निजी निवेश को बढ़ाने, नागरिक सेवा में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों के अधिकाधिक उपयोग, अर्बन मोबिलिटी तथा ई-वाहन के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। 'नमामि गंगा अभियान' के समान ही 'नमामि नर्मदे परियोजना' पर कार्य आरंभ कर नर्मदा नदी तट की नगरीय बसाहटों के ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय सुधार और उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए कार्य योजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी नगरीय निकायों में जलापूर्ति और सीवरेज व्यवस्थाओं के प्रति विशेष रूप से सजगता और सतर्कता बरती जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड के संचालक मंडल की 11वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन तथा संचालक मंडल के पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक में कंपनी के प्रबंधकीय, वित्तीय और लेखा परीक्षा तथा अंकेक्षण संबंधी विषयों पर विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश में शहरी विकास के लिए म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कंपनी में 4 स्वतंत्र व्यावसायिक प्रभागों के गठन के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गई। इसमें परिसंपत्ति प्रबंधन और पीपीपी मोड, सूचना प्रौद्योगिकी, शहरी गतिशीलता और नमामि नर्मदे तथा हरित एवं नदी संरक्षण के लिए प्रभागों का गठन प्रस्तावित है। परिसंपत्ति प्रबंधन और पीपीपी प्रभाग के अंतर्गत नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने, जन हित कार्यों में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने, वित्तीय अनुशासन, नीति आयोग तथा अन्य संबद्ध विभागों से समन्वय तथा मेट्रोपोलिटन एरिया डेवलपमेंट प्लानिंग को प्राथमिकता से लिया जाएगा। इसमें सोलर प्रोजेक्ट्स, हरित बांड, अप्रयुक्त परिसंपत्तियों के वैकल्पिक उपयोग जैसे नवाचार भी प्रस्तावित हैं। सूचना प्रौद्योगिकी प्रभाग के अंतर्गत ई-नगर पालिका प्रणाली, सीसीटीवी-जीआईएस आधारित निगरानी व्यवस्था, नागरिक सेवा प्लेटफार्म के उन्नयन, टोल संग्रह ई-पोर्टल एवं ऑनलाइन राजस्व संग्रहण जैसी स्मार्ट सिटी प्रणालियां संचालित की जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के नगरीय निकायों के आस-पास के क्षेत्रों के नियोजित विकास के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने नर्मदा और तापी नदी के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए नदियों के समग्र और सर्वांगीण विकास के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि 'नमामि गंगे' के समान 'नमामि नर्मदे परियोजना' का क्रियान्वयन सभी संबंधित विभाग समन्वित रूप से करें। इसमें नगरीय विकास एवं आवास विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विभाग, उद्योग विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। बैठक में बताया गया कि शहरी गतिशीलता प्रभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश ईवी पॉलिसी क्रियान्वयन, मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब, रोपवे, मल्टी लेवल पार्किंग, सार्वजनिक साइकिल सेवा, सिटी मोबिलिटी प्लान तथा ई-वाहन चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जाएगा। बैठक में अपर मुख्‍य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, श्री संजय दुबे, श्रीमती दीपाली रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्री सुखबीर सिंह, श्री पी. नरहरि, आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं आवास श्री संकेत भोंडवे तथा कंपनी के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।  

मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्री-परिषद सदस्यों को मिले टैबलेट

पारदर्शिता और समय की बचत के लिए सभी मंत्री नई व्यवस्था का लें लाभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश में ई-कैबिनेट एप्लीकेशन के संबंध में हुआ महत्वपूर्ण प्रेजेंटेशन ई-प्रशासन में नवाचार से प्रसन्न हुए मंत्रि-परिषद सदस्य भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में एक नए नवाचार करते हुए आज मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्रि-परिषद के सभी सदस्यों को टैबलेट वितरण किया। उन्होंने बताया कि मंत्रि-परिषद से संबंधित संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी। मंत्रालय में मंगलवार को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में कैबिनेट के सदस्यों और मंत्रि-परिषद के भारसाधक सचिवों को टैबलेट प्रदाय करने की शुरूआत हुई। कैबिनेट के सदस्यों ने टैबलेट प्राप्त किए और प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैबिनेट सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत ई-कैबिनेट की पहल हुई है। ई-कैबिनेट एप्लीकेशन के संबंध में संबंधितों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यह एप्लीकेशन आधुनिक तकनीक, पेपरलैस, सुरक्षित और ऐसी गोपनीय प्रणाली है, जिसे मंत्रि-परिषद सदस्य कभी भी और कहीं भी अपनी सुविधा के अनुसार अवलोकन कर सकते हैं। मुख्य रूप से मंत्रि-परिषद की कार्य सूची देखने, ई-कैबिनेट एप्लीकेशन द्वारा पूर्व की बैठकों में लिए गए निर्णयों का पालन-प्रतिवेदन देखने में सुविधा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पारदर्शिता और समय की बचत के लिए मंत्रि-परिषद सदस्य नई व्यवस्था का पूरा लाभ लेंगे। प्रारंभ में मंत्रि-परिषद बैठक का एजेण्डा भौतिक एवं डिजिटल रूप दोनों फार्मेट में भेजा जाएगा, बाद में यह पूर्णता डिजिटल रूप में भेजा जाएगा। इस पेपरलैस व्यवस्था अर्थात ई-कैबिनेट एप्लीकेशन प्रारंभ होने से भौतिक रूप से होने वाले फोल्डर वितरण, कागज एवं समय की बचत हो सकेगी। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने बताया कि वर्ष 1960 से लेकर अब तक लिए गए मंत्रि-परिषद के निर्णयों को डिजिटलाइज किया गया है। गत 2 वर्ष के मंत्रि-परिषद के निर्णय एक क्लिक पर देखे जा सकते हैं। मंत्रि-परिषद की बैठक के अंत में एक प्रेजेंटेशन द्वारा मंत्रियों को टैबलेट के उपयोग को प्रारंभ करने के उद्देश्य, व्यापक उपयोगिता और टैबलेट के कार्य संचालन की बुनियादी जानकारी दी गई।  

खनन क्षेत्र में मध्यप्रदेश बना अग्रणी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक से पहले मंत्रीगण को किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक प्रारंभ होने के पहले मंत्रीगण को राज्य सरकार की प्राथमिकताओं, गत पखवाड़े की प्रमुख उपलब्धियों और कार्यक्रमों की जानकारी दी। साथ ही सरकार के आने वाले तीन वर्ष के प्रमुख लक्ष्यों से भी अवगत करवाया। वर्ष-2026 की मंत्रिपरिषद की प्रथम बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने पुष्प-गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। कैलेंडर वर्ष 2026 की बधाई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी मंत्रियों को कैलेंडर वर्ष 2026 प्रारंभ होने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन अनुसार जनकल्याण के कार्य किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश राष्ट्र की प्रगति में भागीदार बनेगा और नागरिकों के हित में योजनाओं और परियोजनाओं के व्यवस्थित क्रियान्वयन में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य सरकार के 2 वर्ष के सफल कार्यकाल के लिए बधाई भी दी। खनन क्षेत्र में अग्रणी बना मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद के सदस्यों को बताया कि वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश 32 खनिज ब्लॉकों की नीलामी कर देश में अग्रणी रहा है। यह उपलब्धि प्रदेश की पारदर्शी नीतियों, त्वरित निर्णय प्रक्रिया और निवेश-अनुकूल वातावरण का प्रमाण है। खनिज नीलामी वर्ष 2025 में देशभर में नीलाम किए गए 141 खनिज ब्लॉकों में से 32 खनिज ब्लॉकों की नीलामी मध्यप्रदेश में हुई, जो देश में सर्वाधिक है। खान एवं खनिज विकास (एमएमडीआर) संशोधन अधिनियम, 2025 और इससे जुड़े नियमों में किए गए बदलावों से खनिज अन्वेषण, नीलामी, निवेश और स्थानीय विकास को अभूतपूर्व गति मली है। चूना, पत्थर, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे प्रमुख खनिजों की नीलामी से सीमेंट, स्टील और संबद्ध उद्योगों को मजबूती मिली है। अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने गत 25 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न से सम्मानित स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर ग्वालियर में अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट का शुभारंभ किया।इसमें 2 लाख करोड़ रूपए से अधिक लागत से विभिन्न औद्योगिक और निर्माण इकाइयों के भूमि-पूजन हुआ है। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने 5,810 करोड़ रूपए की परियोजनाओं का लोकार्पण किया। यही नहीं, 860 वृहद औद्योगिक इकाईयों के लिए 725 करोड़ की निवेश प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। इसी अवसर पर विशेष प्रदर्शनी में 'निवेश से रोजगार-अटल संकल्प' विषय पर चित्रों का संयोजन किया गया। मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति और आर्थिक विकास की झलक प्रदर्शनी में देखने को मिली। पोखरण परमाणु परीक्षण जैसी ऐतिहासिक उपलब्धि को भी प्रदर्शित किया गया। प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी के संबोधनों और उनकी जीवन यात्रा और विचारधारा को भी प्रदर्शित किया गया। वर्ष-2026 कृषि वर्ष मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष-2026 – कृषि वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। वर्ष 2025 उद्योग और रोजगार वर्ष के रूप में मनाया गया। प्रदेश में किसान कल्याण, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, सहकारिता, पशुपालन, डेयरी विकास, पंचायत और ग्रामीण विकास, राजस्व, ऊर्जा, नवकरणीय ऊर्जा से जुड़े आयामों पर विशेष कैलेंडर आगामी 11 जनवरी को राज्य स्तरीय कार्यक्रम में जारी किया जाएगा। इसी दिन 1100 ट्रैक्टरों की रैली भी निकलेगी। जनवरी से दिसम्ब्र तक सभी विभागों की गतिविधियों का निर्धारण कर जिला एवं संभाग स्तर पर कार्यक्रम होंगे। आगामी तीन वर्ष का लक्ष्य निर्धारित कर गतिविधियां संचालित की जाएंगी। जबलपुर में अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन रहा ऐतिहासिक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जबलपुर में गत 2 जनवरी को जहां गीता भवन का लोकार्पण हुआ, वहीं अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन में देश-दुनिया से आए करीब 125 विद्वानों के व्याख्यान भी हुए। पद्मभूषण स्वामी रामभद्राचार्य सहित अनेक संत और विद्वतजन सम्मेलन में शामिल हुए। सुंदरकांड से सम्मानित पाठ में व्यापक भागीदारी रही। प्रदेश में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने का सिलसिला मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने गत 23 दिसम्बर को पीपीपी मॉडल पर प्रदेश के धार और बैतूल में बनने वाले मेडिकल कॉलेजों का शिलान्यास किया। देश में ये मेडिकल कॉलेज इस मॉडल पर निर्मित होने वाले प्रथम मेडिकल कॉलेज होंगे। नवाचार का सिलसिला निरंतर चलेगा। आगामी 23 जनवरी को कटनी और पन्ना में मेडिकल कॉलेज के शिलान्यास की तैयारी की जा रही है। प्रदेश में चिकित्सा जगत में यह नई उपलब्धि है। गत 2 वर्ष में 6 शासकीय मेडिकल कॉलेज प्रारंभ हुए। इसके पहले वर्ष 2002-03 तक प्रदेश में मात्र 5 मेडिकल कॉलेज थे। वर्तमान में इनकी संख्या 33 हो गई है। राष्ट्रीय पेसा सम्मेलन और मध्यप्रदेश के व्यंजनों का प्रचार-प्रसार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि विशाखापटनम में हाल ही में राष्ट्रीय पेसा दिवस पर पेसा सम्मेलन का आयोजन किया गया। मध्यप्रदेश के चयनित 9 जिलों की 20 महिला सरपंच प्रतिनिधियों ने पेसा महोत्सव में हिस्सा लिया। प्रदेश के 20 जनजातीय बहुल क्षेत्रों से चयनित 9 जिलों अलीराजपुर, झाबुआ, धार, बैतूल, छिंदवाड़ा, बालाघाट, अनूपपुर, उमरिया एवं डिंडोरी से कुल 152 सदस्य पेसा महोत्सव में शामिल हुए। इस सम्मेलन में प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में उपयोग में लिए जाने वाले पारम्परिक व्यंजनों का प्रचार-प्रसार भी हुआ। खासतौर पर मोटे अनाज ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी, रागी के ताजा शुद्ध और स्वादिष्ट पकवान सम्मेलन में पसंद किए गए। विभिन्न प्रांतों से आए प्रतिभागियों ने मध्यप्रदेश के तिल, गुड और महुए के लड्डू भी प्रसंद किए।  

पीएम जनमन योजना की निरंतरता के लिए 795 करोड़ 45 लाख रुपये की स्वीकृति

ग्रामीण सड़कों का नवीनीकरण एवं उन्नयन के लिए 10 हजार 196 करोड़ 42 लाख रुपये की स्वीकृति सिंचाई परियोजनाओं को नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स कंपनी लिमिटेड के माध्यम से वित्त पोषित करने की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ.यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा बुरहानपुर जिले की खकनार तहसील की झिरमिटी मध्यम सिंचाई परियोजना लागत 922 करोड़ 91 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गयी है। परियोजना से खकनार तहसील के 42 ग्रामों की 17 हजार 700 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई उपलब्ध होगी, जिससे 11 हजार 800 कृषक परिवार लाभांवित होंगे। मंत्रि-परिषद द्वारा बुरहानपुर जिले की नेपानगर तहसील की नावथा वृहद सिंचाई परियोजना लागत 1,676 करोड़ 6 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इस परियोजना से खकनार तहसील के 90 ग्रामों की 34 हजार 100 हैक्टेयर भूमि में सिंचाई उपलब्ध होगी और 22 हजार 600 कृषक परिवारों को लाभ मिलना अनुमानित है। पीएम जनमन योजना की निरंतरता की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन) योजना की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2028 तक निरंतरता की स्वीकृति प्रदान की गई। योजना में अनुमानित व्यय 795 करोड़ 45 लाख रुपये होगा। इसके तहत 1,039 किमी सड़क का निर्माण एवं 112 पुल निर्माण किया जायेगा। यह योजना 22 जिलों में निवासकरने वाली 3 विशेष जनजाति बैगा, भारिया एवं सहरिया के लिए लागू है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की निरंतरता की स्वीकृति मंत्रि- परिषद ‌द्वारा मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतरता की स्वीकृति प्रदान की गई। योजनांतर्गत अनुमानित व्यय 17,196 करोड़ 21 लाख रुपये होगा। इसके तहत 20 हजार किमी सड़क और 1200 पुल का निर्माण किया जायेगा। ग्रामीण सड़कों का नवीनीकरण एवं उन्नयन की स्वीकृति मंत्रि- परिषद द्वारा मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना अंतर्गत निर्मित सड़कों का नवीनीकरण एवं उन्नयन के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता की स्वीकृति प्रदान की गई। योजनांतर्गत अनुमानित व्यय 10 हजार 196 करोड़ 42 लाख रुपये है। योजना में 88 हजार 517 किमी मार्गों का नवीनीकरण एवं उन्नयन किया जाएगा। सिंचाई परियोजनाओं को नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स कंपनी लिमिटेड के माध्यम से वित्त पोषित करने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ‌द्वारा नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अंतर्गत सिंचाई परियोजनाओं को त्वरित क्रियान्वयन के लिए नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स कंपनी लिमिटेड के माध्यम से वित्त पोषित करने की स्वीकृति प्रदान की गयी। स्वीकृति अनुसार नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा आरंभ की गई वे परियोजनाएँ जिनका निर्माण कार्य नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स कंपनी लिमिटेड द्वारा वित्तीय व्यवस्था कर पूर्ण कराया जा रहा हैं। उसका सम्पूर्ण स्वामित्व नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स कंपनी लिमिटेड का होगा। इन परियोजनाओं में राज्य शासन द्वारा बजट प्रावधान के माध्यम से व्यय की गई राशि के समतुल्य अंश पूजी कंपनी द्वारा राज्य शासन को जारी किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर प्राप्त राजस्व, कंपनी की आय के रूप में ग्रहण किया जाएगा। कंपनी द्वारा वर्तमान में 2 परियोजनाएं वित्त पोषित की जा रही है, जिसमें नर्मदा क्षिप्रा बहुउद्‌देशीय परियोजना लागत 2,489 करोड़ 65 लाख रुपये और बदनावर माइक्रो लिफ्ट इरिगेशन परियोजना लागत 1,520 करोड़ 92 लाख रूपये शामिल है। बैठक में मंत्रि-परिषद के सदस्यों और उनके भारसाधक सचिवों को ई-कैबिनेट के लिए टैबलेट प्रदान किये गये एवं प्रशिक्षण दिया गया।  

5142 करोड़ की अमृत 2.0 योजना फेल? MP के बड़े शहरों में आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर लोग

भोपाल मध्य प्रदेश के चार बड़े शहरों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए केंद्र सरकार ने पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक धनराशि उपलब्ध कराई लेकिन यहां के नगरीय निकाय लोगों को शुद्ध पानी नहीं दे सके। अमृत 2.0 (अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन 2.0) योजना के तहत पेयजल आपूर्ति पर 5,142 करोड़ रुपये खर्च कर दिए, फिर भी दूषित जल से इंदौर में 17 लोगों की मौत अलग ही कहानी कह रही है। पेयजल की पाइपलाइन और सीवरेज लाइन का क्रॉस कनेक्शन इन शहरों में जमीन के नीचे बिछी वर्षों पुरानी पेयजल की पाइपलाइन और सीवरेज लाइन का क्रॉस कनेक्शन है। कहीं-कहीं तो पेयजल की लाइन नाले-नालियों से होकर गुजर रही है। चार साल पहले शुरू हुई अमृत 2.0 योजना के तहत न तो जलप्रदाय का काम पूरा हुआ और न ही सीवरेज परियोजनाएं पूरी हो पाई हैं। इस वर्ष अमृत 2.0 की समयावधि समाप्त हो जाएगी लेकिन काम की गति को देखकर नहीं लगता कि इस वर्ष लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा।   अमृत 2.0 योजनाः एक नजर में एक अक्टूबर, 2021 से प्रारंभ, अवधि पांच वर्ष प्रदेश के समस्त 413 नगरीय निकाय एवं पांच छावनी परिषद सम्मिलित ये कार्य लंबित 4585.91 करोड़ रुपये के 253 जलप्रदाय के कार्य 205.88 करोड़ रुपये के 273 वॉटर बॉडी रिजुविनेशन के कार्य 52.11 करोड़ रुपये के हरित क्षेत्र विकास के कार्य 1941.72 करोड़ रुपये के सीवरेज के कार्य ये कार्य पूर्ण 29.88 करोड़ रुपये के जलप्रदाय के आठ कार्य 66.69 करोड़ रुपये के वाटर बाडी रिजुविनेशन के 118 कार्य 39.07 करोड रुपये के हरित क्षेत्र विकास के 182 कार्य बड़े शहरों का यह है हाल इंदौर: नगर निगम ने 550 किमी पुरानी पेयजल लाइन को चिह्नित कर बदलने की योजना अमृत 2.0 प्रोजेक्ट के तहत बनाई लेकिन अभी तक इस कार्य के लिए कोई एजेंसी निर्धारित नहीं की गई है। इसी तरह पाइप लाइन और टंकी निर्माण के तीन पैकेज के लिए टेंडर जारी किए गए हैं, लेकिन इसमें भी एजेंसी का चयन नहीं किया जा सका है। जबलपुर: शहर में 80 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति लाइन नाले-नालियों के नीचे से होकर गुजर रही है। पानी की डिस्ट्रीब्यूशन लाइन की उम्र 40 से 50 वर्ष तक हो चुकी है। सालों से लगातार नाली-नालियों के क्षारीय पानी, धूल, मिट्टी के संपर्क में रहने से पाइपलाइनों में क्षरण चुका है। जिससे जल वितरण पाइपलाइन में लीकेज के कारण गंदगी घुल रही है। ग्वालियर: जिले के ग्रामीण अंचल में करीब 410 नल-जल योजनाओं में से 115 ही चालू हैं। पानी के ट्रीटमेंट के लिए क्लोरीन डालने का प्रावधान है, लेकिन पंचायत स्तर पर इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं है। उज्जैन: जिले में जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 569 नल-जल योजनाओं में से 561 योजनाएं पूर्ण बताई जा रही हैं, जबकि 489 योजनाओं का पंचायतों को हस्तांतरण हो चुका है। इसके बावजूद कई गांवों में नियमित जल सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। नर्मदा-गंभीर समूह जल प्रदाय परियोजना की देरी से जिले के 914 गांवों को नर्मदा जल मिलने में कम से कम एक साल और लगेगा। तकनीकी बाधाएं और अधूरा टी-कनेक्शन कार्य मिशन की गति पर भारी पड़ रहा है। देवास: जिले में जल जीवन मिशन के तहत 645 एकल ग्राम योजना में से 418 योजनाएं ग्राम पंचायतों को सौंपी जा चुकी हैं। इन कार्यों में भी ठेकेदारों द्वारा लेटलतीफी की गई। गुणवत्ताहीन कार्य की शिकायतें आई। अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। इस कारण योजना अब तक पूर्ण नहीं हो सकी।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा: बायो मेडिकल वेस्ट का सुनियोजित और नियमानुसार प्रबंधन करें सुनिश्चित

बायो मेडिकल वेस्ट का सुनियोजित और नियमानुसार प्रबंधन करें सुनिश्चित: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की। प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने, चिकित्सा अधोसंरचना के विस्तार से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा कर उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने रीवा, सिंगरौली, ग्वालियर, सागर एवं बुधनी मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता, मानव संसाधन की नियुक्ति और शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय गतिविधियों के सुचारु संचालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने बायो मेडिकल वेस्ट के वैज्ञानिक एवं सुनियोजित प्रबंधन सुनिश्चित के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाये, पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन एवं निस्तारण की व्यवस्था को प्रभावी बनाने और पर्यावरण संरक्षण के मानकों का पालन करने के निर्देश दिए। बैठक में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और जिला चिकित्सालयों के उन्नयन से संबंधित प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता और गुणवत्ता में सुधार शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने उन्नयन प्रस्तावों को व्यावहारिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने ऐसे सभी विषयों एवं प्रस्तावों, जिनके लिए सक्षम समिति अथवा मंत्रि-परिषद की स्वीकृति अपेक्षित है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र अग्रेषित करने के निर्देश दिए, जिससे निर्णय प्रक्रिया में विलंब न हो और योजनाओं का लाभ आमजन तक समय पर पहुंच सके। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, आयुक्त श्री तरुण राठी उपस्थित थे।  

सतना पुलिस में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, 56 पुलिसकर्मियों के तबादले

सतना  सतना जिले की पुलिस व्यवस्था में कसावट लाने के लिए बड़ा फेरबदल किया गया है। एसपी हंसराज ने जिले के थानों, चौकियों और शाखाओं में पदस्थ 56 पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं। तबादला सूची में एसआई, एएसआइ, हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल शामिल है। कई पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन, यातायात शाखा, महिला थाना, अजाक, कंट्रोल रूम, साइबर सेल एवं थानों में नई पदस्थापना दी गई है। 30 पुलिसकर्मियों को थाने भेजा गया कई कर्मचारियों को प्रशासनिक शाखाओं से हटाकर मैदानी थानों में भेजा गया है। जबकि लंबे समय से थानों में पदस्थ कर्मियों को पुलिस लाइन और अन्य शाखाओं में स्थानांतरित किया गया है। पुलिस लाइन से 30 कर्मचारियों को थानों में भेजा गया है। इसमें उन आठ पुलिसकर्मी को भी शामिल किया गया है। जो कि पूर्व में शिकायत के आधार पर थानों से लाइन अटैक किए गए थे। चार महीने हुआ बड़ा बदलाव जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद दोबारा थाना में पदस्थ कर दिया गया। सतना पुलिस की कमान संभालने के चार माह बाद एसपी ने बड़ा बदलाव किया है। आगामी दिनों में जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए निरीक्षक स्तर में तबादले हो सकते हैं। एसआई नेहा ठाकुर को पुलिस लाइन से सिविल लाइन थाना, एसआइ मकरध्वज पांडेय को महिला थाना से डीएसपी अजाक कार्यालय, एएसआइ रामकेश सिंह अजाक से मझगवां, एएसआइ कल्लू रावत को पुलिस लाइन से कोलगवां, एएसआइ प्रदीप लढ़िया को पुलिस लाइन से यातायात, एएसआइ रावेंद्र मिश्रा को अजाक से रामपुर बाघेलान व रामायण सिंह को पुलिस लाइन से उचेहरा थाना भेजा गया है। इनके अलावा 49 पुलिसकर्मियों के नाम सूची में हैं।

नितिन गडकरी की बड़ी घोषणा, MP में 60 हजार करोड़ की परियोजनाएं, भोपाल से जबलपुर तक ग्रीन फील्ड हाईवे

भोपाल भोपाल से जबलपुर के बीच 255 किमी लंबा नया ग्रीन फील्ड हाईवे बनाया जाएगा, जिसकी लागत 15 हजार करोड़ रुपए होगी। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण होने पर अप्रैल-मई 2026 से हाईवे निर्माण शुरू हो जाएगा। लखनादौन से रायपुर के बीच 220 किमी लंबा 4 लेन हाईस्पीड कॉरिडोर 10 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाएगा, यह रायपुर विशाखापट्टनम कॉरिडोर से जुड़ेगा। मध्यप्रदेश सीधे विशाखापट्टनम बंदरगाह से जुड़ेगा। इंदौर से भोपाल 160 किमी ग्रीन फील्ड कॉरिडोर को मंजूरी दी जा रही है, जिसकी लागत 12 हजार करोड़ रुपए होगी। मध्यप्रदेश के लिए 4250 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली 174 किमी लंबी 9 सड़क परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम में केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यह बात कही। कार्यक्रम में गडकरी ने मध्यप्रदेश के लिए 60 हजार करोड़ से अधिक लागत की विभिन्न सड़क परियोजनाओं की घोषणाएं भी की। इनके पूरे होने से जहां कई क्षेत्र आपस में जुड़ेंगे, वहीं यात्रा समय में भी कमी आएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में कहा कि केंद्रीय मंत्री गडकरी ने महाकौशल सहित प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों के निवासियों की रोड नेटवर्क संबंधी आकांक्षा व अपेक्षा को पूर्ण किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सौगातों के लिए प्रदेशवासियों की ओर से गडकरी का आभार माना। सबकी समृद्धि के लिए हमारी सरकार सक्रिय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुगम संपर्क, तेज विकास, बेहतर सुरक्षा और सबकी समृद्धि सुनिश्चित करने के प्रण को पूरा करने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्धता के साथ अद्यतन अधोसंरचना निर्माण के लिए निरंतर सक्रिय है।

स्कूल में पीटी करते समय गिरी छठी की छात्रा, 13 साल की बच्ची की हार्ट अटैक से मौत की आशंका

धार   धार जिले के बदनावर इलाके में पिछले कई दिनों से कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। इसका दुष्प्रभाव बच्चों पर दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में आज सुबह यहां नवोदय विद्यालय मुलथान में छात्रा की स्कूल के मैदान में खड़े-खड़े हार्ट अटैक आने से मौत हो गई। बच्ची का नाम निशा पिता राहुल सूर्यवंशी निवासी ग्राम मुलथान बताया जा रहा है। हैरानी की बात ये है कि, जिस छात्रा की साइलेंट अटैक से मौत हुई है, उसकी उम्र महज 13 साल थी और वो स्कूल की 6वीं कक्षा में पढ़ती थी। मिली जानकारी के अनुसार, छात्रा रोजाना की तरह सुबह पीटी के लिए मैदान में अन्य बच्चों के साथ गई थी। तभी 7:15 बजे वो अचानक गिरी तो बच्चों के साथ-साथ मैदान में मौजूद शिक्षकों ने उसे संभाला लेकिन बच्ची में कोई हलचल मेहसूस न होने से उसे तत्काल बदनावर के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण कर उसे मृत घोषित कर दिया। निशा रोज की तरह सुबह पीटी के लिए बाकी बच्चों के साथ ग्राउंड पर गई थी। सुबह करीब सवा 7 बजे वह पीटी करते-करते अचानक गिर पड़ी। ग्राउंड पर मौजूद बच्चों और टीचर्स ने उसे संभाला। शरीर में कोई हलचल नहीं होने पर उसे फौरन सिविल अस्पताल, बदनावर ले गए। अस्पताल में डॉक्टरों ने चेकअप के बाद निशा को मृत घोषित कर दिया। तहसीलदार सुरेश नागर भी सिविल अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया। अस्पताल की सूचना पर पहुंची पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिया।   पोस्टमार्टम रिपोर्ट खोलेगी मौत का राज बाद में अस्पताल की सूचना पर पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद शव को परिजन के सुपुर्द कर दिया। हालांकि, अभी मौत के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल सका है, लेकिन कड़ाके की ठंड में अल सुबह खुले मैदान में खेलने से उसकी मौत होने का शक है। इस असामयिक घटना के बाद स्कूल में हड़कंप मच गया। फिलहाल, स्कूल में शोक की लहर है। बच्चों को लेकर माता-पिता रखें ये ध्यान ठंड में बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है। इससे बचने के लिए बुजुर्गों की तरह बच्चों को भी गर्म कपड़ों में रखें। घर के अंदर खेलने या हल्की-फुल्की कसरत (जैसे योग) कराएं। भरपूर तरल पदार्थ (गुनगुना पानी, सूप) पिलाएं। पौष्टिक आहार दें और ज्यादा ठंड में बाहर निकलने से रोकें, ताकि रक्त वाहिकाएं सिकुड़ें नहीं और हृदय पर अतिरिक्त दबाव न पड़े, खासकर अगर बच्चे को पहले से कोई हृदय संबंधी समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है। बच्चों को सुरक्षित रखने के उपाय -गर्म और परतदार कपड़े पहने : बच्चे को हमेशा गर्म, ऊनी कपड़े, मोज़े, दस्ताने और टोपी पहनाएं, खासकर बाहर जाते समय। -घर के अंदर रखें : बहुत ज़्यादा ठंड या कोहरे के दौरान बच्चों को घर के अंदर ही खेलने दें। बाहर की गतिविधियां (जैसे मॉर्निंग वॉक) बहुत अधिक ठंड में टालें। -हाइड्रेटेड रखें : ठंड में भी शरीर को पानी की ज़रूरत होती है। उन्हें गुनगुना पानी, सूप, हर्बल चाय पिलाएं। -पौष्टिक आहार : फल, सब्जियां, फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर भोजन दें। तैलीये और ज़्यादा नमक/चीनी वाले खाने से बचाएं। -शारीरिक गतिविधि (घर के अंदर) : हल्के व्यायाम, स्ट्रेचिंग या योग कराएं, जो घर के अंदर किए जा सकें। -तनाव से बचाएं : बच्चों को तनावमुक्त रखें। उनका मनपसंद काम करने दें और सकारात्मक माहौल दें। -बीमारियों से बचाव : सर्दी-खांसी-जुकाम होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें. फ्लू और अन्य संक्रमणों से बचाने के लिए टीका लगवाएं। किन लक्षणों पर ध्यान दें (अगर बच्चा बीमार हो) -सांस लेने में तकलीफ -सीने में दर्द या बेचैनी -बहुत ज़्यादा थकान -होंठों या उंगलियों का नीला पड़ना -तेज़ धड़कन नोट- अगर ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। माता-पिता के लिए अतिरिक्त सलाह -बच्चों को समय पर दवा दें (यदि कोई दवा चल रही है)। -ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं, खासकर अगर जोखिम हो।

इंदौर में दूषित पानी से 17 मौतें, MP में 211 नदियां और 353 जल स्रोत दूषित, इको सिस्टम बिगड़ने की चिंता

भोपाल  मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पानी से 17 लोगों की असमय मौत और 1400 से ज्यादा लोगों में दूषित पानी के बेक्टीरिया पाए जाने के मामले ने देश के सबसे स्वच्छ शहर की पेयजल गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यही नहीं, सामने आई इस गंभीर लापरवाही ने प्रदेशभर के हालातों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। ऐसे में आनन फानन में जांच पड़ताल शुरु हुई है, जिसमें बेहद चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। दरअसल, पेयजल आपूर्ति में बड़ा योगदान नदियों और जलाशयों को माना जाता है। लेकिन, गंभीर चिंतन की बात ये है कि, इन्हीं नदियों और जलाशयों में उद्योगों का रसायनयुक्त पानी मिलने से आम लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। हालिया खुलासे के अनुसार, राज्य में 2,515 उद्योग ऐसे हैं, जो जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहे हैं। इन उद्योगों ने प्रदूषित जल के ट्रीटमेंट के भी कोई उपाय नहीं किए और दूषित जल सीधे जल स्रोतों में छोड़ दिए। ऐसे लाल (रेड) केटेगिरीके उद्योगों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तक का कोई बस नहीं चल पा रहा है। अनियंत्रित प्रदूषण और नियमों की अनदेखी आपको बता दें, उद्योगों की स्थापना और संचालन के लिए जल प्रदूषण नियंत्रण समेत अन्य पर्यावरण संबंधी अनुमतियां जरूरी होती हैं। प्रदेश में चल रहे 5,961 उद्योगों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से समेकित सहमति और प्राधिकरण (कंसोलिडेटेड कंसेंट एंड अथाराइजेशन-सीसीए) रिन्युएशन ही नहीं कराया है। ये अनियंत्रित प्रदूषण फैला रहे हैं, इनसे निकलने वाला अपशिष्ट नदियों का जल तक जहरीला कर रहा है। इनके अपशिष्ट से नदियों का इको सिस्टम बिगाड़ रहे हैं। CCA रिनिवल न कराने वाले उद्योगों की जानकारी -लाल (Red) कैटेगरी के उद्योग: कुल 2,515 उद्योग (इनमें 2,311 लघु, 153 मध्यम और 51 वृहद उद्योग शामिल हैं)। -नारंगी (Orange) कैटेगरी के उद्योग: कुल 1,398 उद्योग (इनमें 1,295 लघु, 80 मध्यम और 23 वृहद उद्योग शामिल हैं)। -हरा (Green) कैटेगरी के उद्योग: कुल 2,048 उद्योग (इनमें 2,022 लघु, 20 मध्यम और 6 वृहद उद्योग शामिल हैं)। -कुल अनियंत्रित उद्योग: इस तरह प्रदेश में कुल 5,961 उद्योगों ने अपना जरूरी रिनिवल ही नहीं कराया है। अमृत मित्र और प्रदूषित जल स्रोत हालात ये हैं कि, प्रदेशभर में 7 हजार अमृत मित्र हैं, फिर भी यहां 305 नदियां, तालाब और जलाशय प्रदूषण की चपेट में हैं। मध्य प्रदेश में 7 हजार अमृत मित्र जल गुणवत्ता परीक्षण का कार्य कर रहे हैं। इसके लिए भारत सरकार द्वारा अमृत 2.0 योजना के तहत 3.70 करोड़ रुपए बजट प्रदेश को दिया गया और अमृत मित्र अंतर्गत 184 परियोजनाएं भारत सरकार द्वारा स्वीकृत की गई हैं। इसके बावजूद यहां 305 नदियां, तालाब और जलाशय प्रदूषण की चपेट में हैं। योजनाओं पर करोड़ों खर्च प्रदेश में अमृत मित्र योजना के अंतर्गत जल गुणवत्ता परीक्षण की 55 परियोजनाएं, हरित क्षेत्र की 10 परियोजनाएं, अर्बन फारेस्ट्री में 501 परियोजनाएं बनाई गई हैं। इनमें से 184 परियोजनाएं भारत सरकार द्वारा स्वीकृत की जा चुकी हैं, शेष 317 परियोजनाएं भारत सरकार की समीक्षा में हैं। राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम में एमपी के चिह्नित दूषित स्रोत -नदियां: 211 -झीलें: 20 -तालाब: 11 -टैंक: 01 -भूजल स्रोत: 353 -जलाशय: 08 क्या कहता है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड? मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव अचुत्य ए. मिश्रा का कहना है कि, प्रदेश में रेड (लाल) श्रेणी के उद्योग प्रदूषणकारी हैं। समय-समय पर इनकी मानीटरिंग की जाती है। इनसे निकलने वाला अपशिष्ट नदियों के जल को प्रदूषित करता है। हालांकि कुछ उद्योगों में रियल टाइम मानीटरिंग सिस्टम भी लगाए गए हैं, लेकिन कुछ उद्योग ऐसे भी है जो अधिक प्रदूषणकारी हैं, उन्हें नोटिस देकर कार्रवाई भी की जाती है।