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वर्ष 2026 को कृषि आधारित उद्योगों के विकास वर्ष के रूप में मनायेंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

शुभागमन – 2026 पर प्रदेशवासियों को बधाई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2026 के शुभ आगमन पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कैलेंडर वर्ष 2026 नई ऊर्जा, समृद्धि और आत्मनिर्भरता का संकल्प लेकर आया है। इसे हम मध्यप्रदेश में कृषि आधारित उद्योगों के समग्र विकास वर्ष के रूप में मनायेंगे। उन्होंने कहा कि बीते वर्ष 2025 में उद्योग और निवेश के क्षेत्र में हमें जो उपलब्धियां मिलीं, वे प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। वर्ष 2026 इसी बुनियाद को और भी मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार, समाज और जवाबदेह प्रशासन सबके संयुक्त प्रयासों से मध्यप्रदेश विकास, संस्कृति, नवाचार और कल्याण के पथ पर निरंतर अग्रसर है। विरासतों को सहेजकर हम किसानों, युवाओं, माताओं-बहनों और गरीब वर्ग के सशक्तिकरण के साथ 'विकसित मध्यप्रदेश' के संकल्प को साकार करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से आहवान करते हुए कहा है कि आइए, हम सब एकजुट होकर मध्यप्रदेश की विकास यात्रा को नये क्षितिज और नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।  

हर किसान के खेत तक पहुँचेगा सिंचाई के लिए जल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर करने का लक्ष्य सिंचाई के रकबे में हो रही है निरंतर वृद्धि भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की किसानों की खुशहाली की परिकल्पना को साकार करते हुए मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा प्रदेश को दी गई तीन बड़ी परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर तक करने में सफलता मिलेगी। साथ ही प्रदेश की अन्य निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाऍ भी लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होंगी। प्रदेश में गत दो वर्षों में सिंचाई क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। किसानों की तरक्की और खुशहाली हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कृषि के अतिरिक्त पेयजल, उद्योगों, विद्युत उत्पादन आदि के लिए जल की उपलब्धता कराये जाने के प्रयास निरंतर जारी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह मध्यप्रदेश का सौभाग्य है कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई के नदी जोड़ो अभियान के सपने को साकार करने का कार्य प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ। इस परियोजना से पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र की तस्वीर एवं तकदीर बदल जाएगी। इस परियोजना से न केवल सिंचाई अपितु पेयजल एवं विद्युत उत्पादन का लाभ भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की दूसरी महत्वपूर्ण पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना है। इससे प्रदेश के बड़े हिस्से में सिंचाई, पेयजल, उद्योगों आदि के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध हो सकेगा। प्रदेश में आकार ले रही तीसरी महत्वपूर्ण परियोजना तापी बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना है, जो कि विश्व में अपने आप में एक अनूठा प्रयास है। इस परियोजना अंतर्गत वर्षा के दौरान ताप्ती नदी के अतिरिक्त जल को नियंत्रित तरीके से भू-जल भरण के लिए उपयोग किया जाकर भू-जल स्तर में वृद्धि की जाएगी। परियोजना के क्रियान्वयन के लिये मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र राज्यों के मध्य सहमति बन चुकी है। मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री श्री मोदी की "पर ड्रॉप मोर क्रॉप" की अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। सिंचाई प्रबंधन में मध्यप्रदेश देश में सर्वोच्च स्थान पर है। प्रदेश में सिंचाई के रकबे में निरंतर वृद्धि हो रही है। माइक्रो सिंचाई पद्धति में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्य है। जल संरक्षण एवं संवर्धन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिये म.प्र. को राष्ट्रीय जल अवार्ड भी मिला है। केन-बेतवा राष्ट्रीय परियोजना परियोजना की लागत 44 हजार 605 करोड़ रूपये है। इससे सिंचाई 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर में हो सकेगी। परियोजना से बुन्देलखण्ड के 10 जिले छतरपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ, निवाडी, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा एवं सागर के लगभग 2 हजार ग्रामों के 7 लाख 25 हजार किसान परिवार लाभान्वित होंगे। साथ ही 44 लाख आबादी को पेयजल मुहैया हो सकेगा। परियोजना से 103 मेगावॉट विद्युत (जल विद्युत) और 27 मेगावॉट सौर उर्जा का उत्पादन होगा। भू-जल की स्थिति में सुधार, औद्योगीकरण, पर्यटन एवं रोजगार के अवसर में भी वृद्धि होगी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने परियोजना का भूमि-पूजन पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती 25 दिसम्बर 2024 को किया। परियोजना का कार्य प्रांरभ हो चुका है। पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय परियोजना परियोजना की कुल लागत 72 हजार करोड़ रूपये है। इसमें मध्यप्रदेश का हिस्सा 35 हजार करोड़ रूपये का है। परियोजना से मालवा एवं चंबल क्षेत्र के 13 जिले गुना, शिवपुरी, मुरैना, उज्जैन, सीहोर, मंदसौर, देवास, इंदौर, आगर मालवा, शाजापुर, श्योपुर, ग्वालियर एवं भिण्ड में 6.16 लाख हेक्टेयर में नवीन सिंचाई एवं चंबल नहर प्रणाली के आधुनिकीकरण से भिण्ड, मुरैना एवं श्योपुर के 3.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा हो सकेगी। साथ ही लगभग 2 हजार 94 ग्रामों की 40 लाख आबादी लाभान्वित होगी। मध्यप्रदेश की 19 सिंचाई परियोजनायें इसमें शामिल की गई हैं। मेगा तापी रीचार्ज परियोजना पारंपरिक जल भंडारण के स्थान पर भू-गर्भ जल पुनः भरण वाली इस परियोजना की कुल लागत 19 हजार 244 करोड़ रूपये है। इसे 10 मई 2025 को महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश के मध्य राष्ट्रीय परियोजना के रूप में निर्मित किये जाने की सहमति प्रदान की गई। परियोजना से बुरहानपुर एवं खण्डवा जिले की 1 लाख 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी। अटल भू-जल योजना से भू-जल संरक्षण एवं संवर्धन हेतु प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के 06 जिलों सागर- दमोह छतरपुर- टीकमगढ़-पन्ना एवं निवाडी के 09 विकासखंडों की 670 ग्राम पंचायत क्षेत्रों में जन सहभागिता से जल सुरक्षा योजना तैयार करने हेतु भारत सरकार की सहायता से 314.44 करोड़ राशि की योजना 2020 से अक्टूबर 2025 तक क्रियान्वित की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन सभी राष्ट्रीय एवं राज्यीय परियोजनाओं से प्रदेश में सिंचाई के रकबे को बढ़ाने और हर खेत तक पानी पहुँचाने में सफलता मिलेगी। राज्य सरकार ने सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए आगामी 3 वर्ष की कार्य योजना भी बनाई है, जिसे अमल में लाना शुरू कर दिया है।  

जबलपुर की गन कैरिज फैक्टरी का नया कदम: पेश होगी 52 कैलिबर धनुष माउंटेन गन तोप

 जबलपुर  देश की एकमात्र रक्षा क्षेत्र में तोप का निर्माण करने वाली फैक्ट्री जीसीएफ नए साल में सेना को अत्याधुनिक नई धनुष तोप 52 कैलिबर में माउंटेन गन में बना कर देगी। इस तोप के उत्पादन के साथ धनुष की मारक क्षमता तीन से पांच किलोमीटर बढ़ जाएगी। अभी गन कैरिज फैक्टरी (जीसीएफ) 45 कैलिबर में धनुष तोप का उत्पादन कर रही है जिसकी मारक क्षमता 40 से 42 किलोमीटर है। महत्वपूर्ण है कि जीसीएफ नई अत्याधुनिक धनुष तोप के निर्माण में तेजी लाने जा रही है और ट्रायल के बाद 300 गन बनाने का प्रस्ताव है। रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी के बाद प्रतिस्पर्धा में टिके रहने निर्माणी नए प्रोजेक्ट पर तेजी लाने जा रही है। 42 किमी तक हमला किया जा सकता है इससे पूर्व जीसीएफ में बनी धनुष तोप को पाकिस्तान और चीन की सीमा पर तैनात किया गया है। यह तोप अभी 38 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। इसमें 52 कैलिबर की बैरल लगने के बाद इससे आसानी से 42 किलोमीटर तक हमला किया जा सकता है। अब नई तोप 52 कैलिबर में माउंटेन गन के रूप में कार्य करेगी। जिससे इसकी मारक क्षमता में 5 किलोमीटर तक इजाफा हो जाएगा। निर्माणी के इस बेहतरीन प्रयास से सेना की ताकत में और इजाफा होगा और दुश्मन पर अधिक सटीक वार करने में सफलता मिल सकेगी। 1600 करोड़ के रक्षा उत्पादन पर फोकस जीसीएफ इस साल 1600 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन पर तेजी से कार्य कर रही है। जिसमें धनुष तोप का नया वर्जन सहित एलएफजी, प्रमुख गन के कलपुर्जे शामिल हैं। पूर्व के मुकाबले निर्माणी की ताकत में बढ़ी है। हरेक साल रक्षा उत्पादन में वृद्धि से उसकी साख भी कायम है। माउंटेन गन की प्रमुख बातें माउंटेन गन व्हीकल के ऊपर लोड होगी। जबकि पूर्व की तोप जमीन के ऊपर 360 डिग्री में घूमकर वार करती थी। माउंटेन गन व्हीकल का उत्पादन नगर के ही वीएफजे कर सकता है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन ने माउंटेड गन सिस्टम तैयार किया है। यह सिर्फ 80 सेकंड में फायरिंग के लिए तैयार हो जाती है। एक मिनट में यह छह गोले दाग सकती है। धनुष की खूबियों को जानें धनुष तोप जो कि बोफोर्स गन का उन्नत और स्वदेशी वर्जन है। इसे जीसीएफ में तैयार किया जा रहा है और यह पूरी तरह ‘मेक इन इंडिया’ प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसकी मारक क्षमता भी ज्यादा है और यह हाई-एंगल फायरिंग, इनबिल्ट नेविगेशन सिस्टम, इलेक्ट्रानिक गन अलाइनमेंट और आटोमैटिक फायर कंट्रोल जैसे अत्याधुनिक फीचर्स से लैस है।

टाइगर रिज़र्व सफारी के लिए धोखाधड़ी से बचने के लिए करें MPOnline.gov.in से बुकिंग

भोपाल  वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के टाइगर रिजर्व में सफारी टिकटों की बुकिंग केवलMPOnline के माध्यम से ही अधिकृत है। इसके अलावा किसी भी निजी वेबसाइट, मोबाइल ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म को सफारी बुकिंग की अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे किसी भी प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जा रही बुकिंग अवैध है। विभाग ने पर्यटकों से अपील की है कि वे अत्यंत सतर्क रहें और केवल अधिकृत MPOnline पोर्टल के माध्यम से ही सफारी बुकिंग करें। विभाग की अपील है कि यदि किसी पर्यटक ने इन अनधिकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सफारी बुक कराई है और वह धोखाधड़ी का शिकार हुआ है, इससे किसी प्रकार का नुकसान हुआ है अथवा बुकिंग संबंधी कोई अन्य शिकायत है, तो वह तत्काल संबंधित कार्यालय को इसकी सूचना दे। शिकायतों को आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिये राज्य साइबर पुलिस सेल को भेजा जाएगा। विभाग इस प्रकार की अनियमित और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाये जाने के लिए तत्पर है। मध्यप्रदेश के टाइगर रिज़र्व में सफारी बुकिंग के लिये कुछ वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म मिलते जुलते भ्रामक नामों से सेवाएं देने का दावा कर रहे हैं। मध्यप्रदेश वन विभाग ने चेतावनी दी है कि ये वेबसाइट्स अनधिकृत हैं। इनसे बुकिंग कराने पर पर्यटकों को धोखाधड़ी और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। विभाग ने कहा है कि पर्यटकों के हितों की सुरक्षा और पारदर्शी, सुरक्षित एवं वैधानिक सफारी बुकिंग व्यवस्था सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।  

मध्य प्रदेश सरकार ने सोयाबीन के लिए भावांतर योजना के तहत मॉडल रेट 4345 रुपए किया घोषित

भावांतर योजना में सोयाबीन का मॉडल रेट 4345 रुपए जारी भोपाल भावांतर योजना 2025 के अंतर्गत  सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए मॉडल रेट प्रतिदिन जारी किया जा रहा है। बुधवार 31 दिसंबर को 4345 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपनी सोयाबीन की उपज मंडी प्रांगणों में विक्रय की है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी। मॉडल रेट और न्यूनतम समर्थन मूल्य के भावांतर की राशि राज्य सरकार द्वारा दी जा रही है। सोयाबीन का पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया था। इसी तरह 8 नवंबर को 4033 रुपए, 9 और 10 नवंबर को 4036 रुपए, 11 नवंबर को 4056 रुपए, 12 नवंबर को 4077 रुपए, 13 नवंबर को 4130 रुपए, 14 नवंबर को 4184 रुपए, 15 नवंबर को 4225 रुपए, 16 नवंबर को 4234 रुपए, 17 नवंबर को 4236 रुपए, 18 नवंबर को 4255 रुपए, 19 नवंबर को 4263 रुपए, 20 नवंबर को 4267 रुपए, 21 नवंबर को 4271 रुपए, 22 नवंबर को 4285 रुपए, 23 एवं 24 नवंबर को 4282 रुपए, 25 नवंबर को 4277 रुपए, 26 नवंबर को 4265 रुपए, 27 नवंबर को 4252 रुपए, 28 नवंबर को 4260 रुपए, 29 नवंबर को 4240 रुपए और 30 नवंबर को 4237 रुपए प्रति क्विंटल  का मॉडल रेट जारी किया गया था। इसी तरह 1 दिसंबर को 4239 रुपए, 2 दिसंबर को 4235 रुपए, 3 दिसंबर को 4240 रुपए, 4 दिसंबर को 4235 रुपए, 5 दिसंबर को 4230 रुपए, 6 दिसंबर को 4217 रुपए, 7 दिसंबर को 4222 रुपए, 8 दिसंबर को 4219 रुपए, 9 दिसंबर को 4217 रुपए और 10 दिसंबर को 4210 रुपए प्रति क्विंटल  का मॉडल रेट जारी हुआ था। इसी प्रकार 11 दिसंबर को 4207 रुपए , 12 दिसंबर को 4202 रुपए , 13 दिसंबर को 4204 रुपए , 14 दिसंबर को 4208 रुपए , 15 दिसंबर को 4208 रुपए , 16 दिसंबर को 4209 रुपए , 17 दिसंबर को 4205 रुपए , 18 दिसंबर को 4195 रुपए , 19 दिसंबर को 4201 रुपए , 20 दिसंबर को 4191 रुपए , 21 दिसंबर को 4193 रुपए , 22 दिसंबर को 4194 रुपए , 23 दिसंबर को 4209 रुपए और 24 दिसंबर को 4213 रुपए , 25 दिसंबर को 4235 रुपए , 26 दिसंबर को 4257 रुपए , 27 और 28 दिसंबर को 4271 रुपए , 29 दिसंबर को 4267 रुपए और 30 दिसंबर को 4296 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया था। राज्य सरकार की गारंटी है कि किसानों को हर हाल में सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य की 5328 रुपए  प्रति क्विंटल की राशि मिलेगी।  

मध्य प्रदेश में मातृत्व सुरक्षा की सफलता: संस्थानों में डिलीवरी दर हुई 88%

भोपाल। कभी प्रसव के लिए दाईयों और घर के पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने वाला मध्य प्रदेश अब संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में प्रसव) के मामले में देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-पांच की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में अब 88.5 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में हो रहे हैं। साल 2005-06 में यहां संस्थागत प्रसव का स्तर महज 26.2 प्रतिशत था। यानी अधिकांश प्रसव घरों के असुरक्षित वातावरण में होते थे, जिससे मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और शिशु मृत्यु दर (आइएमआर) का जोखिम बना रहता था। पिछले दो दशकों में सरकार की सजगता और आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं की मेहनत ने इस तस्वीर को बदल दिया है। योजनाओं ने दिया संबल, 16 हजार रुपये तक की मदद रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 में संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 80 प्रतिशत था, जो अब 90 प्रतिशत के लक्ष्य को छूने के करीब है। हालांकि, इस मामले में प्रदेश अभी देश में 17वें स्थान पर आता है। सफलता के पीछे जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को अस्पताल में प्रसव पर मिलने वाली 1,400 रुपये की नकद राशि है। वहीं, मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना भी गरीब और श्रमिक परिवारों के लिए वरदान साबित हुई। इसमें प्रसूता को पोषण और देखरेख के लिए 16,000 रुपये की बड़ी आर्थिक सहायता दी जाती है। जननी एक्सप्रेस बनी जीवनरेखा दुर्गम इलाकों से गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने में जननी एक्सप्रेस (108/102) ने अहम भूमिका निभाई है। निश्शुल्क एंबुलेंस सेवा के कारण देरी की वजह से होने वाली घटनाएं काफी कम हो गई हैं। प्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ, अलीराजपुर और बड़वानी जिलो में भी महिलाएं प्रसव के लिए अस्पताल पहुंच रही हैं। पहले जीवित बच्चे के जन्म पर गर्भवती महिलाओं को तीन किस्तों में 5,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। आधुनिक सुविधाओं का हुआ विस्तार प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के लेबर रूम को लक्ष्य कार्यक्रम के तहत हाईटेक बनाया गया है। नर्सिंग स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। परिणामस्वरूप, रतलाम और उज्जैन जिलों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) ने शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव के लक्ष्य को हासिल कर लिया। वहीं इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव का दर 95% से अधिक रहा। जबकि झाबुआ, धार और बड़वानी जिलों में घर पर प्रसव की दर में 40% तक की कमी आई है। देश में संस्थागत प्रसव में शीर्ष राज्य – केरल – 99.8% – तमिलनाडु – 99.7% – गोवा – 99.5% – तेलंगाना – 97.0% – आंध्र प्रदेश – 96.3% मध्य प्रदेश के शीर्ष पांच जिले – इंदौर – 98.2% – भोपाल – 97.6% – ग्वालियर – 96.4% – जबलपुर – 95.8% – रतलाम – 94.5% वर्तमान चुनौतियां – कठिन भौगोलिक क्षेत्र – डिंडोरी, मंडला और झाबुआ जैसे आदिवासी अंचलों में सुदूर वनांचल होने के कारण एंबुलेंस का पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है। – सामाजिक मान्यताएं – कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पारंपरिक दाइयों से घर पर प्रसव कराने का चलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जागरूकता का अभाव हालांकि, सरकार 16,000 रुपये तक की सहायता दे रही है, लेकिन शिक्षा की कमी के कारण अभी भी लगभग 11% प्रसव अस्पतालों से बाहर हो रहे हैं। इनका कहना है कि जननी सुरक्षा और प्रसूति सहायता जैसी सरकारी योजनाओं ने महिलाओं में अस्पताल के प्रति विश्वास जगाया है। हम ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से निरंतर मानिटरिंग कर रहे हैं, ताकि कोई भी गर्भवती महिला स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे। आधुनिक लेबर रूम और बेहतर एंबुलेंस सेवा के समन्वय से हम मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए संकल्पित हैं – डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल

अंतर्राष्ट्रीय रैपिड शतरंज टूर्नामेंट का आयोजन हरदा में, शतरंज प्रेमियों के लिए सुनहरा अवसर

भोपाल  अंतर्राष्ट्रीय शतरंज टूर्नामेंट का भव्य आयोजन हरदा जिले में होने जा रहा है। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट हरदा जिला शतरंज संगठन के तत्वाधान में इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के अनुरूप संपन्न होगा, जिसमें देश-प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों के ख्याति प्राप्त और रेटेड खिलाड़ी अपने खेल का जौहर दिखाएंगे। इस टूर्नामेंट की तिथि शतरंज फेडरेशन द्वारा 24 जनवरी शनिवार निर्धारित की गई है। यह टूर्नामेंट कलेक्टर निवास के सामने, इंदौर रोड हरदा डिग्री कॉलेज में होगा, जिसमें देश-विदेश के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। यह इंटरनेशनल चेस टूर्नामेंट 24 जनवरी राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बालिकाओं को समर्पित रहेगा। इसमें बड़ी संख्या में बालिकाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए जिले एवं आसपास के विद्यालयों और महाविद्यालयों से संपर्क कर उन्हें प्रेरित किया जाएगा। साथ ही खिलाड़ियों के खेल स्तर को बेहतर बनाने हेतु पूर्व में प्रशिक्षण-सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। कलेक्टर श्री सिद्धार्थ जैन ने बताया कि शतरंज के शौकीनों और खिलाड़ियों के लिए यह एक बेहतरीन मौका है, जहां वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। टूर्नामेंट में कुल 1 लाख 51 हजार रुपये की इनामी राशि और ट्रॉफियां रखी गई है। यह एक रेपिड टूर्नामेंट होगा, जिसमें प्रत्येक खिलाड़ी को 15 मिनट और प्रति चाल 5 सेकंड का अतिरिक्त समय मिलेगा। उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट के लिये ओपन श्रेणी हेतु 750 रुपये तथा हरदा के स्थानीय खिलाड़ियों के लिये 500 रूपये एन्ट्री फीस निर्धारित की गई है। जीएम/डब्ल्यूजीएम/डब्ल्यूआईएम खिताब धारकों और 2300 से ऊपर रेटेड खिलाड़ियों के लिए प्रवेश निःशुल्क है। इसके अलावा दिव्यांग खिलाड़ियों को एंट्री फीस में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इच्छुक खिलाड़ी ब्रोशर लिंक https://circlechess.com/brochure?id=49722 व पंजीकरण लिंक https://circlechess.com/registration?id=49722 के माध्यम से टूर्नामेंट के आयोजन के संबंध में जानकारी प्राप्त कर अपना पंजीयन करा सकते हैं।  

दतिया में अनुपयोगी एंबुलेंस का नया रूप, अस्पताल आने वाले परिजनों के लिए रैन बसेरा तैयार

दतिया: मध्य प्रदेश के दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े नवाचार के लिए जाने जाते हैं। इस बार जिला अस्पताल में उन्होंने ऐसा काम करवाया है, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। वर्षों से कबाड़ में पड़ी अनुपयोगी एंबुलेंस को उन्होंने रैन बसेरा के रूप में विकसित करवा दिया है। अब अस्पताल आने वाले लोगों को एक नया ठिकाना मिला जाएगा। खुले आसमान के नीचे सोते थे परिजन दरअसल, दतिया अस्पताल परिसर में उपचार के दौरान मरीजों के परिजन अक्सर ठंडी रातों में खुले आसमान के नीचे या फर्श पर सोने को मजबूर रहते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने कबाड़ संसाधनों के रचनात्मक उपयोग का यह अनूठा मॉडल तैयार किया है। मरम्मत और आवश्यक सुधार के बाद तैयार की गई प्रत्येक एंबुलेंस में चार लोगों के आराम से सोने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। अंदर साफ-सफाई, रोशनी और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया गया है, जिससे परिजनों को सम्मानजनक आवासीय सुविधा मिल सके। अनुपयोगी एंबुलेंस बनी रैन बसेरा फिलहाल एक एंबुलेंस को पूरी तरह रैन बसेरा के रूप में तैयार कर लिया गया है, जबकि तीन से चार अतिरिक्त एंबुलेंसों को भी जल्द ही इसी उद्देश्य से विकसित करने की प्रक्रिया चल रही है। यह पहल न केवल कम लागत में अधिक लाभ देने वाली है, बल्कि प्रशासन की संवेदनशील सोच और सेवा भावना का भी परिचायक है। इस संबंध में कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने बताया कि प्रशासन का निरंतर प्रयास है कि अनुपयोगी या कबाड़ हो चुके संसाधनों का जनहित में रचनात्मक उपयोग किया जाए, ताकि आम नागरिकों को सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था खासतौर पर उन गरीब और दूर-दराज से आने वाले परिवारों के लिए राहत का माध्यम बनेगी, जिनके पास ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं होती। दतिया प्रशासन की यह पहल अस्पताल आने वाले सैकड़ों मरीजों के परिजनों के लिए सहारा बनेगी और मानवीय शासन, संवेदनशील प्रशासन और संसाधनों के सदुपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कोतमा थाना में सौंपा ज्ञापन, पुलिस अधीक्षक को किए गए क्षेत्रीय मुद्दों के प्रति जागरूक

कोतमा आज भारतीय जनता पार्टी विधानसभा क्षेत्र कोतमा, जिला अनूपपुर के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं द्वारा कोतमा थाना पहुंचकर माननीय पुलिस अधीक्षक अनूपपुर के नाम ज्ञापन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदय को सौंपा गया। यह ज्ञापन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं कोतमा विधायक आदरणीय श्री दिलीप जायसवाल जी के विरुद्ध सोशल मीडिया पर की गई अमर्यादित, आपत्तिजनक तथा अशोभनीय टिप्पणियों के विरोध में सौंपा गया। पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर की गई यह टिप्पणी न केवल जनप्रतिनिधि के सम्मान को ठेस पहुँचाने वाली है, बल्कि समाज में वैमनस्य एवं अशांति फैलाने का भी प्रयास है। इस प्रकार की गतिविधियाँ लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध हैं। ज्ञापन के माध्यम से यह मांग की गई कि—     •    आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले सर्वोच्च सत्ता नाम के अख़बार की जांच की जाए कि यह नियम अनुसार चल रहा है या नहीं      •    रामबाबू चौबे जो कि सर्वोच्च सत्ता का संपादक बताता है अपने आप को उसके विरुद्ध FIR दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए     •    भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु सख्त कदम उठाए जाएँ भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की सोशल मीडिया पोस्ट से कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है, इसलिए दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई अपेक्षित है।

IAS नागार्जुन बी. गौड़ा के नेतृत्व में खंडवा में जल संरक्षण की मिसाल, साइकिल पर पानी ढोने वाले बच्चे की कहानी

खंडवा  राष्ट्रीय जल पुरस्कार मिलने से मध्यप्रदेश के खंडवा जिले का नाम रोशन हुआ है। यह सफलता सिर्फ एक सरकारी योजना का नतीजा नहीं, बल्कि जिला पंचायत सीईओ IAS डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा के व्यक्तिगत संघर्ष और बचपन के अनुभवों का परिणाम है। कर्नाटक के सूखाग्रस्त तिप्तूर से आए नागार्जुन गौड़ा ने पानी की किल्लत को करीब से देखा है, जिसने उन्हें जल संरक्षण को अपना मिशन बनाने के लिए प्रेरित किया। कौन हैं नागार्जुन गौड़ा IAS नागार्जुन गौड़ा का जन्म 5 मई 1992 को कर्नाटक के तुमकुरु जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके माता-पिता शिक्षक हैं। उनके गांव में पानी की कमी एक बड़ी समस्या थी, जिसे उन्होंने बचपन में खुद झेला। यही अनुभव उन्हें जल संरक्षण के प्रति समर्पित करने का कारण बना। नतीजा यह निकला कि खंडवा को 'सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला जिला' घोषित किया गया और 2 करोड़ रुपये का राष्ट्रीय जल पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के वर्षा जल संचयन कार्यक्रम के तहत दिया गया। 18 नवंबर 2025 को दिल्ली में राष्ट्रपति से पुरस्कार लेते हुए IAS नागार्जुन गौड़ा ने कहा था, 'जब जल संचय, जन भागीदारी योजना शुरू हुई, तो यह मेरे लिए व्यक्तिगत हो गया।' पानी के लिए करना पड़ता था संघर्ष नागार्जुन गौड़ा बताते हैं कि उन्हें अपने बचपन में पानी के लिए बोरवेल से कुछ बाल्टी पानी लाने के लिए साइकिल से लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। वे कहते हैं, “कभी-कभी मैं उस बोरवेल के लीवर को 10 मिनट तक खींचता था, तब जाकर एक-दो बाल्टी पानी मिल पाता था।” उन्होंने चित्रदुर्ग जैसे सूखे इलाकों का भी जिक्र किया, जो दशकों से सूखे की मार झेल रहे हैं। पत्नी भी हैं आईएएस डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद नागार्जुन गौड़ा ने UPSC की परीक्षा दी और 2019 बैच के IAS अधिकारी बने। उनकी पत्नी सृष्टि जयंत देशमुख ने भी UPSC में अच्छी रैंक हासिल की थी। बाद में नागार्जुन गौड़ा का कैडर मध्य प्रदेश ट्रांसफर हो गया। खंडवा में जिला पंचायत सीईओ के पद पर रहते हुए, नागार्जुन गौड़ा ने 'जल संचय, जन भागीदारी' (JSJB) अभियान को एक बड़े आंदोलन का रूप दिया। इस अभियान में गांव के कर्मचारियों से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों तक, सभी ने मिलकर किसानों, स्कूलों और आम लोगों को वर्षा जल संचयन अपनाने के लिए प्रेरित किया। जिले में 1.25 लाख से अधिक काम इस अभियान के कारण खंडवा जिले में 1.25 लाख से अधिक जल संरक्षण के काम हुए, जिनमें रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, रिचार्ज पिट और ट्रेंच जैसे 40 हजार से ज्यादा काम शामिल थे। इसी मेहनत के दम पर खंडवा को राष्ट्रीय जल पुरस्कार मिला। एआई तस्वीरों को लेकर विवाद हालांकि, हाल ही में यह पुरस्कार AI-जनरेटेड तस्वीरों को लेकर विवादों में आ गया है। सोशल मीडिया पर IAS नागार्जुन गौड़ा को ट्रोल भी किया जा रहा है। इस पर उन्होंने और खंडवा जिला प्रशासन ने सफाई दी है कि JSJB पोर्टल और ‘कैच द रेन' (CTR) पोर्टल अलग-अलग हैं। खंडवा जिला प्रशासन के अनुसार, JSJB अवार्ड के मूल्यांकन में केवल असली तस्वीरों का ही इस्तेमाल हुआ था, जबकि CTR पोर्टल पर कुछ AI तस्वीरें शैक्षणिक उद्देश्य से अपलोड की गई थीं, जिनका राष्ट्रीय जल अवार्ड से कोई लेना-देना नहीं है। एक मीडिया रिपोर्ट में गलत खबरें छापी गई थीं, जिसका खंडवा जिला प्रशासन ने खंडन किया है।