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विद्युत कंपनियों के मुख्यालय शक्त‍िभवन में हुआ अग्न‍िशमन प्रशिक्षण और मॉकड्रि‍ल

भोपाल  एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी के सुरक्षा विभाग और सिविल संभाग शक्त‍िभवन के द्वारा विद्युत कंपनियों के मुख्यालय शक्त‍िभवन जबलपुर के विभिन्न ब्लॉक में अग्न‍िशमन यंत्रों का प्रशिक्षण देते हुए मॉकड्रि‍ल की गई। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम व मॉकड्रि‍ल में विद्युत कंपनियों में कार्यरत अभियंता, महिला-पुरूष कार्मिक व सुरक्षा सैनिक शामिल हुए। मॉकड्रि‍ल में कॉर्बन डॉइऑक्साइडयुक्त (co2) अग्न‍िशमन यंत्र का जीवंत उपयोग करते हुए उसे संचालित करने का तरीका बताया गया। समय-समय पर दिया जाता है कार्मिकों को प्रशिक्षण अधीक्षण अभियंता सिविल मुख्यालय धर्मेन्द्र वर्मा ने जानकारी दी कि शक्त‍िभवन के प्रत्येक कार्यालय में co2 युक्त अग्न‍िशमन यंत्र उपुयक्त स्थान में लगाए गए हैं। इन यंत्रों की प्रतिवर्ष जांच कर के भरा जाता है। उन्होंने जानकारी दी कि समय-समय पर शक्त‍िभवन में कार्यरत कार्मिकों को इन अग्न‍िशमन यंत्र का उपयोग करने के तरीके का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे कि वे आपातकालीन परि‍स्थि‍ति में स्वत: इसका उपयोग कर पाएं। क्यों किया जाता है कार्बन डॉइऑक्साइड का उपयोग अधीक्षण अभियंता सि‍विल धर्मेन्द्र वर्मा ने जानकारी दी कि वर्तमान में अग्न‍िशमन यंत्र में कार्बन डॉइऑक्साइड का उपयोग आग बुझाने में किया जाता है। यह न तो जलती है और न ही जलने में मदद करती है। यह हवा से भारी भी होती है। यह ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद करके जलने वाले पदार्थ को रोकती है।  

समाधान योजना का प्रथम चरण 31 दिसंबर तक, सरचार्ज में सौ फीसदी तक छूट का अंतिम दिन

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि विगत 3 नवंबर से शुरू हुई समाधान योजना 2025-26 में सौ फीसदी तक छूट का लाभ लेने के लिए आज अंतिम दिन है। योजना का लाभ लाखों बकायादार उपभोक्‍ता उठा रहे हैं। उन्होंने उपभोक्‍ताओं से अपील की है कि तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्‍ता योजना के प्रथम चरण में अंतिम दिन अपना बकाया बिल एकमुश्‍त जमा करके सौ फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठा सकते हैं। मध्य प्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 का प्रथम चरण चल रहा है, जो‍कि 31 दिसंबर 2025 को समाप्‍त हो रहा है, अभी आज का दिन शेष है। इस दौरान बकायादार उपभोक्‍ताओं को सरचार्ज में अधिकतम छूट का लाभ मिल रहा है। हालांकि 1 जनवरी से 28 फरवरी 2026 तक दूसरा चरण चलेगा, लेकिन उसमें सरचार्ज माफी का प्रतिशत कम हो जाएगा इसलिए प्रथम चरण में आज ही योजना में शामिल होकर अधिकतम लाभ उठाएं। अब तक मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 2 लाख 90 हजार 786 बकायादार उपभोक्‍ताओं ने अपना पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 304 करोड़ 62 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है,  जबकि  161  करोड़  39 लाख का सरचार्ज माफ किया गया है। समाधान योजना 2025-26 : एक नजर में समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्‍त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। इस योजना में उपभोक्ता को प्रथम चरण में एकमुश्‍त भुगतान करने पर सबसे अधिक लाभ होगा जबकि द्वितीय चरण के दौरान छूट का प्रतिशत क्रमशः कम होता जाएगा। यह योजना दो चरणों में प्रारंभ होकर प्रथम चरण की शुरुआत 3 नवंबर से 31 दिसंबर 2025 तक रहेगी जिसमें 60 से लेकर 100 प्रतिशत तक सरचार्ज माफ किया जाएगा। इसी तरह द्वितीय और अंतिम चरण में जो कि एक जनवरी से 28 फरवरी 2026 तक लागू रहेगी, इसमें 50 से 90 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जाएगा। प्रथम चरण में एकमुश्‍त राशि जमा कराने पर अधिकतम लाभ होगा। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल हेतु portal.mpcz.in पर पंजीयन कराना होगा। कंपनी के उपाय एप एवं कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) तथा एमपी ऑनलाइन पर भी पंजीयन की सुविधा उपलब्‍ध है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। विस्तृत विवरण तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखा जा सकता है साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।

विद्युत के क्षेत्र में प्रदेश ने नए-नए आयाम किए हैं स्थापित : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

ग्राम रानीखेड़ी में 33/11 के.व्ही. विद्युत उप केन्द्र निर्माण का भूमि पूजन किया भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने मंगलवार को मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रानीखेड़ी में 33/11 के.व्ही. विद्युत उप केन्द्र निर्माण कार्य का भूमि पूजन किया। यह विद्युत उप केन्द्र लगभग 3 करोड़ 25 लाख रुपए की लागत से निर्मित किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा विद्युत के क्षेत्र में निरंतर नवाचार करते हुए नए-नए आयाम स्थापित किए गए हैं। विद्युत उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि की जा रही है, जिससे प्रदेश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए नए विद्युत ग्रिड एवं उप केन्द्रों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि सरकार नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी विशेष रूप से कार्य कर रही है। सौर ऊर्जा सहित अन्य नवीकरणीय स्रोतों से विद्युत उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों को सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन के लिए विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है, जिससे किसान अपनी खेती के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन में भी सहभागी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेतों पर सौर पंप एवं सौर संयंत्रों के माध्यम से किसानों को लगातार विद्युत आपूर्ति उपलब्ध हो रही है, जिससे सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ हुई है और कृषि उत्पादन में वृद्धि हो रही है। इससे किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हो रही है। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि ग्राम रानीखेड़ी में प्रस्तावित 33/11 के.व्ही. विद्युत उप केन्द्र के निर्माण से आसपास के ग्रामों में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार होगा, वोल्टेज की समस्या से राहत मिलेगी तथा ग्रामीणों को निर्बाध और पर्याप्त विद्युत आपूर्ति उपलब्ध हो सकेगी। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा विजय पाटीदार, जनपद पंचायत अध्यक्ष सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।  

अनुसूचित जाति वर्ग के समग्र कल्याण के लिए सरकार कर रही प्रभावी कार्य : मंत्री चौहान

छात्रवृत्ति योजनाओं से मिल रही शिक्षा को मजबूती स्वरोजगार योजनाओं से हो रहा आर्थिक सशक्तिकरण शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना की जाएगी प्रारंभ योजनाओं के ऑनलाइन संचालन के लिए एकीकृत विभागीय पोर्टल किया जाएगा विकसित भोपाल अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के समग्र कल्याण के लिये शिक्षा, रोजगार, अधोसंरचना विकास एवं सामाजिक न्याय के क्षेत्र में निरंतर प्रभावी कार्य कर रही है। ऐतिहासिक असमानताओं से उत्पन्न घटनाओं की रोकथाम एवं त्वरित निराकरण के लिए भी राज्य सरकार सतत प्रयासरत है। मध्यप्रदेश में लगभग 15.6 प्रतिशत (1 करोड़ 13 लाख) जनसंख्या अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित है। प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग की 48 जातियाँ सूचीबद्ध हैं। मंत्री श्री चौहान मंगलवार को अनुसूचित जाती कल्याण विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजना पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।इस दौरान प्रमुख सचिव श्री ई. रमेश कुमार, आयुक्त श्री सौरभ के सुमन सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। छात्रावास संचालन प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 1913 छात्रावास संचालित हैं, जिनमें 95,317 सीटें निर्धारित हैं। पूर्व में जहां छात्रावासों की उपयोगिता 80 प्रतिशत से कम थी, वहीं वर्तमान में 86,356 सीटें (90 प्रतिशत से अधिक) भरी जा चुकी हैं। आगामी समय में 100 प्रतिशत सीट उपयोग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। छात्रावास भवन निर्माण प्रदेश में 326 भवन-विहीन छात्रावासों में से 63 नवीन भवन स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 33 भवनों का निर्माण पूर्ण हो चुका है तथा 30 भवन निर्माणाधीन हैं।इस वित्तीय वर्ष में 80 से अधिक नए छात्रावास भवन स्वीकृत करने की योजना है। आगामी 3 वर्षों में सभी भवन-विहीन छात्रावासों का निर्माण कार्य पूर्ण कराया जाएगा। सभी छात्रावासों को आदर्श छात्रावास के रूप में विकसित किया जाएगा, जिनमें वाई-फाई, ई-लाइब्रेरी, उन्नत रसोईघर तथा रेस्को मॉडल पर सोलर सिस्टम की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। छात्रवृत्ति कक्षा 1 से उच्च शिक्षा तक अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा ₹8 लाख वार्षिक आय सीमा तक के विद्यार्थियों को योजना का लाभ दिया जा रहा है। शासकीय संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए आय सीमा का बंधन समाप्त कर दिया गया है। पिछले दो वर्षों में 49.47 लाख विद्यार्थियों को 2224 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की गई है। राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों आईआईएम,आईआईटी,ऐनआईटी एवं एनएलआईयू में अध्ययनरत 1819 विद्यार्थियों को 6.26 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति विदेश में अध्ययन के लिए भी छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है जिसमें प्रतिवर्ष 50 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए चयनित किए जाने का प्रावधान है। वर्तमान में अनुसूचित जाति वर्ग के 24 विद्यार्थी इस योजना के अंतर्गत विदेशों में अध्ययनरत हैं। इस वर्ष में 31 नवीन विद्यार्थियों का चयन किया गया है, जबकि 12 विद्यार्थी प्रतीक्षा सूची में हैं। योजना को अधिक सरल, प्रभावी एवं उपयोगी बनाने के उद्देश्य से इसके नियमों में सुधार किया जा रहा है तथा चयन प्रक्रिया को और अधिक वस्तुनिष्ठ एवं पारदर्शी बनाया जा रहा है।इस योजना में प्रति विद्यार्थी प्रति वर्ष अधिकतम 50,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 45 लाख रुपये) तक की राशि शुल्क एवं भत्तों के रूप में प्रदान की जाती है। दो वर्ष की अवधि में प्रति विद्यार्थी लगभग 90 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। आवास सहायता योजना घर से बाहर अध्ययनरत अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को आवास सहायता प्रदान की जा रही है। गत वर्ष 1.48 लाख से अधिक आवेदकों को लगभग राशि 130 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। वर्ष 2025-26 में योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। दिल्ली में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए दिल्ली छात्र गृह योजना के अंतर्गत सीट क्षमता 50 से बढ़ाकर 300 प्रति वर्ष तथा शिष्यावृत्ति राशि 10,000 रुपये प्रतिमाह की जाएगी। ज्ञानोदय विद्यालय अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए प्रदेश के 10 संभागीय मुख्यालयों में ज्ञानोदय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जहां सीबीएसई पाठ्यक्रम के अंतर्गत शिक्षा दी जा रही है। प्रत्येक विद्यालय में 640 विद्यार्थियों की क्षमता है। इसके अतिरिक्त 4 नए ज्ञानोदय विद्यालय स्वीकृत कर उनके भवन निर्माण प्रारंभ किए जाएँगे। परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र एवं सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना अनुसूचित जाति वर्ग के युवाओं को सिविल सेवा सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 07 परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं जिसमे निशुल्क कोचिंग दी जा रही है। पिछले दो वर्ष में इन केन्द्रों में 168 अभ्यर्थी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित हुए।साथ ही प्रदेश में पिछले वर्ष में विभिन्न स्तरों पर चयनित 271 अभ्यर्थियों को राशि 41 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई। स्वरोजगार योजनाएँ संत रविदास स्वरोजगार योजना एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना के अंतर्गत 10 हजार से 50 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जा रहा है, जिस पर ब्याज अनुदान की सुविधा दी जाती है। पिछले दो वर्षों में दस हजार से अधिक युवाओं को लगभग 164 करोड़ रुपये का बैंक ऋण उपलब्ध कराया गया है। आगामी 3 वर्षों में 21 हजार से अधिक युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।  

हनुवंतिया में नववर्ष का उल्लास, ‘एक्वा सेरेनेड’ थीम पर जल महोत्सव का हुआ भव्य शुभारंभ

मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड एवं ईज़ माय ट्रिप डॉट कॉम का संयुक्त आयोजन बुकिंग एवं जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 7834985081 पर करे संपर्क भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हनुवंतिया को वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के विजन अनुसार पर्यटन विभाग सतत प्रयास कर रहे है। इसी क्रम मे प्रसिद्ध जल पर्यटन स्थल हनुवंतिया में जल महोत्सव का भव्य शुभारंभ मंगलवार, 30 दिसंबर को हुआ। नर्मदा बैकवॉटर के सुरम्य और शांत वातावरण में आयोजित यह महोत्सव नववर्ष के स्वागत के साथ पर्यटन, संस्कृति और उत्सव का अद्भुत संगम बनकर सामने आया। पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी के मार्गदर्शन और अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति, गृह एवं धार्मिक न्यास और धर्मस्व श्री शिव शेखर शुक्ला के कुशल नेतृत्व में ‘एक्वा सेरेनेड इन हनुवंतिया’ थीम आधारित नववर्ष उत्सव की औपचारिक शुरुआत की गई। इस अवसर पर खंडवा जिले की अतिरिक्त कलेक्टर श्रीमती सृष्टि देशमुख ने फीता काटकर जल महोत्सव का शुभारंभ किया। इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र को उल्लास, आनंद और उत्सव के रंगों से सराबोर कर दिया। हनुवंतिया क्षेत्र प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। लगभग 95 वर्ग किलोमीटर में फैला विशाल जलाशय, 90 से अधिक द्वीप, शांत वातावरण और जैव विविधता इसे विशिष्ट बनाते हैं। यही कारण है कि हनुवंतिया आज पर्यटन, निवेश और नवाचार का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। 17 एकड़ में फैली टेंट सिटी, 104 स्विस कॉटेज जल महोत्सव के अंतर्गत विकसित टेंट सिटी लगभग 17 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है, जिसमें कुल 104 स्विस कॉटेज टेंट स्थापित किए गए हैं। इनमें डीलक्स एवं लग्ज़री श्रेणी के टेंट शामिल हैं, जो पर्यटकों को प्रकृति के बीच सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक ठहराव का अनुभव प्रदान कर रहे हैं। 100 दिनों तक चलेंगी रोमांचक गतिविधियां इस वर्ष भी 30 दिसंबर से प्रारंभ हुए जल महोत्सव के अंतर्गत 100 दिनों तक निरंतर विभिन्न रोमांचक गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। जल महोत्सव के दौरान पर्यटकों के लिए भूमि, जल और वायु आधारित गतिविधियों की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध कराई गई है, जिनमें स्पीड बोटिंग, जेट स्की, कयाकिंग, वाटर पैरासेलिंग, बनाना राइड, ज़िपलाइन, एटीवी राइड, साइकलिंग, ट्रेकिंग और टेथर्ड हॉट एयर बैलून जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। इसके साथ ही योग, नेचर वॉक, वेलनेस गतिविधियां और परिवारों के लिए सुरक्षित मनोरंजन विकल्प भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे यह आयोजन हर आयु वर्ग के पर्यटकों के लिए उपयुक्त बन गया है। लोक कला, संस्कृति और स्थानीय स्वादों का मंच जल महोत्सव मध्य प्रदेश की लोक कला, लोक संगीत, जनजातीय संस्कृति, शिल्प और पारंपरिक व्यंजनों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है। स्थानीय शिल्पकारों, कलाकारों, स्वयं सहायता समूहों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी इस आयोजन की आत्मा रही, जिससे स्थानीय समुदाय को प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिला। नववर्ष पर एक्वा सेरेनेड का विशेष आकर्षण नववर्ष अवसर पर हनुवंतिया में एक्वा सेरेनेड इन हनुवंतिया (Aqua Serenade in Hanuwantiya) थीम के अंतर्गत विशेष आयोजन किया गया, जिसमें 30 दिसंबर से सांस्कृतिक संध्याएं, गाला नाइट, लाइट एंड साउंड शो, जल आधारित प्रस्तुतियां और उत्सवपूर्ण वातावरण ने पर्यटकों को आकर्षित किया। सुरक्षा और सुविधाओं की व्यवस्था जल महोत्सव में पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती, वाटर सेफ्टी उपकरण, लाइफ जैकेट्स, मेडिकल सुविधा, फायर सेफ्टी, सीसीटीवी निगरानी और नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था सुनिश्चित की गई। पर्यटक अपनी सुविधा अनुसार विभिन्न पैकेज विकल्पों में बुकिंग कर सके। बुकिंग एवं जानकारी के लिए मोबाइल क्रमांक +91 78349 85081 पर संपर्क किया जा सकता है।  

देश को ऊंचाई पर बनाए रखने का कार्य नई पीढ़ी करेगी : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

विद्यार्थियों को साइकिल का किया वितरण भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि आज के बच्चे कल का भविष्य हैं। हमारा देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश को ऊंचाई पर बनाए रखने का कार्य नई पीढ़ी को ही करना है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने शासकीय मार्तण्ड क्रमांक दो विद्यालय में कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों को साइकिल का वितरण किया। उन्होंने दो करोड़ रुपए की लागत से बनाए जाने वाले 12 अतिरिक्त कमरों के निर्माण कार्य का भूमिपूजन भी किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि गुरूजनों का दायित्व है कि वह बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार दें। शिक्षकों में प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए कि उनके विद्यार्थी आगे बढ़ें। बच्चों की प्रतिभा को पहचानें और उनको विकसित करने में अपनी भूमिका का निर्वाह करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास की भावना जागृत करना आवश्यक है। इसके साथ उन्हें संवेदनशील भी बनाना चाहिए ताकि देश व समाज के लिए वह अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर सके। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं व कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। नगर निगम अध्यक्ष श्री व्यंकटेश पाण्डेय सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री ने प्रबुद्ध महिलाओं, आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं और ड्रोन दीदीयों से की आत्मीय चर्चा

भाई के घर (मुख्यमंत्री निवास) आई बहनों को मिला सम्मान भाई के साथ बहनें मनायेंगी आगामी त्योहार जमीन से आसमान तक सफलतापूर्वक बहनें हैं नंबर वन भाई का वादा, बहनों को मिलेगा और भी ज्यादा सरगम के सुरों ने बांधा समां, मुख्यमंत्री ने दिये 51 हजार रूपये  राज्य सरकार की प्राथमिकता मातृ शक्ति का सशक्तिकरण मुख्यमंत्री निवास पर हुआ "सशक्त और समर्थ नारी" संवाद कार्यक्रम भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश की सभी माताओं-बहनों के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रही है। केंद्र सरकार ने देश की संसद में आधी आबादी को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया है। प्रदेश के नगरीय निकायों और शासकीय सेवाओं में भी 35 प्रतिशत स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में बहनें आज भारतीय सेनाओं में भी शीर्ष पद प्राप्त करते हुए आगे बढ़ रही हैं। प्रदेश की बहनें आर्थिक-सामाजिक रूप से संपन्न और आत्मविश्वास से भरी हों, इस उद्देश्य से हमारी सरकार ने अनेक कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं को उद्योग स्थापित करने के लिए सब्सिडी दी जाती है। साथ ही अधिक से अधिक बहनें संपत्ति की मालिक बनें, इसके लिए रजिस्ट्री में अतिरिक्त 2 प्रतिशत छूट का लाभ प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को 'सशक्त नारी-समर्थ नारी' संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्यमंत्री निवास पधारी प्रबुद्ध महिलाओं, आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं तथा ड्रोन दीदीयों से आत्मीय चर्चा में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहनों के साथ समूह चित्र भी खिंचवाया। बालिका सरगम कुशवाह ने मधुर देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेटी सरगम को 51 हजार रूपए की राशि सम्मान और प्रोत्साहन स्वरूप देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बहन-बेटियों से इस प्रकार संवाद का क्रम आगामी माहों में भी जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज महिलाएँ नहीं बहने मेरे घर आयी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की आत्मीयता ने बहनों को भाव विभोर कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी सफलता के लिये बड़ी बहन श्रीमती कलावती यादव को श्रेय देते हुए कहा कि बड़ी बहन ने ही उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित करने के साथ आवश्यक सहयोग व प्रोत्साहन प्रदान किया। मां और बहन के संस्कार, प्रेम और उनके द्वारा दी गई हिम्मत ही उनके आगे बढ़ने का आधार बनी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे परिवार में बहू भी बेटी समान है, और दोनों ही दुलार, स्नेह और सम्मान की बराबर की हकदार हैं। सनातन संस्कृति मातृ सत्ता पर आधारित संस्कृति है। मां ही हम सभी के जीवन मे पहली गुरु होती है। विश्व में भारत ही ऐसा राष्ट्र है, जहां देश को माता के भाव से जोड़ा जाता है। जैसे मां के आंचल में सुख और सुरक्षा का भाव आता है, वैसे ही देश की सत्ता से भी आम आदमी को सुख और सुरक्षा का एहसास हो, यही हमारा उद्देश्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विकास के साथ विरासत को संरक्षण प्रदान करते हुए गतिविधियां संचालित की जा रही है। राज्य में औद्योगिक विकास के साथ-साथ चिकित्सा सुविधाओं को विस्तार दिया जा रहा है। प्रदेश में जन-निजी भागीदारी (पीपीपी मोड) पर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल खोलने के लिए लीज पर 25 एकड़ भूमि तक उपलब्ध कराई जा रही है। मध्यप्रदेश देश में यह नवाचार करने वाला पहला राज्य है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।। राज्य सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों की एमबीबीएस की 70 से 80 लाख रुपए तक फीस भर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में देहदान और अंगदान को प्रोत्साहन देने के लिए गार्ड ऑफ ऑनर देने की परंपरा शुरू की गई है। इसका सकारात्मक प्रभाव हुआ है। हमारी सरकार ने ऐलोपैथी के साथ-साथ आयुर्वेदिक एवं पैरामेडिकल क्षेत्र में शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों को बढ़ाया है।    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में महिला उद्यमियों के स्टार्ट-अप में उपलब्ध अवसरों पर चर्चा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश वह राज्य है, जो औद्योगिक विकास में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश स्टार्ट-अप्स शुरू करने में अग्रणी हैं। राज्य सरकार ने बीते 2 वर्षों से लगातार स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित कर रही है। इनमें अधिकांश का नेतृत्व प्रदेश की महिला उद्यमी कर रही हैं। राज्य सरकार सूक्ष्म उद्योग, लघु एवं कुटीर उद्योग से लेकर हैवी इंडस्ट्री तक महिलाओं को हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है। प्रदेश में लागू की गईं 18 नई नीतियों में महिलाओं को केंद्र में रखा गया है। गुजरात मॉडल पर औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भोपाल में पहली बार जीआईएस का आयोजित की गई। उससे पहले संभाग स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की गईं। इन सभी प्रयासों से राज्य को मिले बंपर निवेश और औद्योगिक विकास की संभावनाओं का लाभ महिलाओं को भी मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विगत 2 वर्षों में राज्य सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक कार्य किए हैं। इसका प्रभाव सभी क्षेत्रों में दिख रहा है। लाड़ली बहना योजना से घरों के वातावरण में बदलाव आया है। महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) का दायित्व महिलाएं निभा रही हैं।   अनूठा आयोजन – सीधा संवाद प्रदेश की विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही बहनों से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीधा संवाद किया। इस अनूठे आयोजन में स्वास्थ्य, शिक्षा, टेक्सटाइल, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय बहनों ने अपने अनुभव, चुनौतियां और नवाचार साझा किए। संवाद की शुरुआत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह केवल संवाद नहीं, बल्कि समाज की उस जीवंत परंपरा का विस्तार है जिसमें बहनें जमीन से आसमान तक हर कदम आगे बढ़ते हुए सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आज नारी शक्ति केवल भागीदार नहीं, बल्कि नेतृत्व की सक्रिय भूमिका में है। माँ के दिये संस्कार हैं हमारी धरोहर मुख्यमंत्री डॉ.  यादव ने बहनों से … Read more

श्रीराम जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर हमारी सदियों की आस्था, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीराम मंदिर की प्रतिकृति को किया नमन श्री अयोध्या धाम में श्रीरामलला के विराजमान की द्वितीय वर्षगांठ पर हुआ कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राजधानी भोपाल में प्रदेश का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गौरव शामिल करने के उद्देश्य से राजधानी के प्रमुख मार्गों पर द्वारों का निर्माण किया जा रहा है। यह द्वार भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण, सम्राट विक्रमादित्य और राजाभोज को समर्पित होंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सांस्कृतिक पुर्नउत्थान का पर्व जारी है। बनारस, अयोध्या हो या उज्जैन सभी ओर हमारी आस्था और भावना के अनुरूप समृद्ध संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं का प्रकटीकरण हो रहा है। प्रदेश में गीता जयंती पर बड़े पैमाने पर श्रीमद्भगवतगीता पर केंद्रित कार्यक्रम आयोजित किए गए। सभी जिलों में गीता भवन का निर्माण कराया जा रहा है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर हमारी सदियों की आस्था, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव श्री अयोध्या धाम में पुनर्निमित भव्य श्रीराम मंदिर में श्रीरामलला के विराजमान की द्वितीय वर्षगांठ (तिथि अनुसार) पर मालवीय नगर स्थित युवा सदन के पास निर्मित श्रीराम मंदिर की प्रतिकृति पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां पहुंचकर श्रीराम मंदिर की प्रतिकृति को नमन किया तथा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विधायक श्री रामेश्वर शर्मा विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम स्थल पर संत समुदाय तथा स्थानीय जन उपस्थित थे।  

सुशासन, संवेदना और महिला सशक्तिकरण : मध्यप्रदेश में ‘मोहन मॉडल’ का सजीव अनुभव: संपतिया उइके

भोपाल  जब आज से दो वर्ष पूर्व डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी, तभी यह आभास होने लगा था कि उनका नेतृत्व केवल प्रशासनिक स्थिरता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह शासन को एक 'नैतिक, सामाजिक और मानवीय दिशा' देने का प्रयास करेगा। सत्ता की बागडोर संभालने के कुछ ही दिनों के भीतर यह स्पष्ट संकेत मिलने लगे थे कि वे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विश्वासपात्र मुख्यमंत्रियों की सूची में शीघ्र ही अपना विशिष्ट स्थान सुनिश्चित करेंगे। इसका कारण केवल राजनीतिक सामंजस्य नहीं, बल्कि नीति, नीयत और क्रियान्वयन का संतुलन था। मैं स्वयं एक साधारण श्रमिक पृष्ठभूमि से आती हूँ। जीवन में संघर्ष, अभाव और श्रम का अनुभव मेरे व्यक्तित्व का हिस्सा रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा मुझे मंत्रीमंडल का हिस्सा बनाना केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था, बल्कि यह उस समावेशी सोच का प्रमाण था, जिसमें पृष्ठभूमि नहीं, प्रतिबद्धता और कार्यक्षमता को महत्व दिया जाता है। मंत्रीमंडल में उन्होंने सभी साथियों के साथ समभाव और समानता का व्यवहार रखा और व्यवहार में उस लोककथन को चरितार्थ किया। “मुखिया मुख सो चाहिए, खान-पान सब एक” यह केवल कहावत नहीं, बल्कि उनके शासन का स्वभाव बन चुका है।आज डॉ. मोहन यादव की पहचान केवल एक मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि “सबके भैया” के रूप में बन चुकी है। मेरे मंडला जिले में आयोजित एक सामूहिक कार्यक्रम के दौरान मैंने सहज भाव से कहा था “हमारे भैया आज सब बहनों के भाई बन गए हैं।” आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो गर्व होता है कि वह नारा प्रदेश की लाखों बहनों की भावना बन गया। यह पहचान किसी प्रचार अभियान से नहीं बनी, बल्कि उनके व्यवहार, संवाद और संवेदना से निर्मित हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यकाल के आरंभ में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि महिला सशक्तिकरण उनकी सरकार के लिए केवल एक योजनागत प्राथमिकता नहीं, बल्कि नैतिक प्रतिबद्धता है। यही कारण है कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा प्रारंभ की गई योजनाओं को न केवल निरंतरता दी गई, बल्कि उन्हें और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और व्यापक स्वरूप प्रदान किया गया। साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विशेष आग्रह पर कई नई योजनाओं की शुरुआत की गई, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक स्तरों पर सशक्त बनाना था। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा लिखे गए ब्लॉग में यह दृष्टि स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए यह भरोसा दिलाया कि सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और गरिमा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनका यह कथन अत्यंत महत्वपूर्ण है कि जब महिलाएँ आर्थिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से सशक्त होंगी, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र मजबूत होंगे। लाड़ली बहना योजना आज मध्यप्रदेश सरकार की पहचान बन चुकी है। लगभग 1.26 करोड़ महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1500 रुपये की राशि का नियमित अंतरण न केवल आर्थिक सहायता है, बल्कि राज्य और नागरिक के बीच विश्वास का सेतु भी है। इस राशि को चरणबद्ध रूप से 3 हजार रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार इस योजना को अल्पकालिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सामाजिक निवेश के रूप में देख रही है। इस योजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इससे महिलाएँ डिजिटल लेन-देन से जुड़ रही हैं और वित्तीय निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ी है। हाल ही में योजना की 31वीं किश्त जारी करते हुए मुख्यमंत्री का यह कहना कि “बहनों का आशीर्वाद हमारी सबसे बड़ी ताकत है”, उनके नेतृत्व की भावनात्मक गहराई को दर्शाता है। महिला सशक्तिकरण को केवल प्रत्यक्ष सहायता तक सीमित न रखते हुए सरकार ने महिलाओं को उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करने पर विशेष ध्यान दिया है। लखपति दीदी योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए प्रति वर्ष एक लाख रुपये की आय का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री उद्यम शक्ति योजना महिलाओं को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराकर स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। आज यह तथ्य अत्यंत उत्साहवर्धक है कि प्रदेश में 47 प्रतिशत स्टार्टअप्स महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। रेडीमेड गारमेंट उद्योग में कार्यरत महिलाओं को 5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देना और “एक बगिया माँ के नाम” योजना के अंतर्गत फलदार पौधरोपण- ये सभी पहल इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक भागीदार बनाना चाहती है। महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण के साथ सुरक्षा और अवसर भी उतने ही आवश्यक हैं। इसी सोच के तहत राज्य सरकार की नौकरियों में महिलाओं के लिए आरक्षण को 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत किया गया है। संपत्ति पंजीयन शुल्क में एक प्रतिशत की छूट और कामकाजी महिलाओं के लिए 'सखी निवास' के रूप में सुरक्षित आवास सुविधाओं का विस्तार, ये सभी निर्णय महिला हितों के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा अपने पुत्र का विवाह सार्वजनिक सामूहिक विवाह समारोह में संपन्न कराना आज के समय में एक विरल उदाहरण है। जब विवाह सामाजिक प्रदर्शन का माध्यम बनते जा रहे हों, तब यह कदम उन परिवारों के लिए आशा का संदेश है, जो सीमित साधनों में बच्चों के भविष्य की चिंता करते हैं। यह उदाहरण सिद्ध करता है कि मुख्यमंत्री की कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है। मध्यप्रदेश में पिछले दो वर्षों में महिला सशक्तिकरण की दिशा में जो कार्य हुए हैं, वे अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। फिर भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव कहते हैं कि उन्हें प्रशंसा नहीं केवल बहनों का आशीर्वाद चाहिए।

कला और साहित्य मन को प्रदान करते हैं आत्मिक अनुभूति : पटेल

राज्यपाल ने दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय के स्थापना पर्व पर किया साहित्यकारों को सम्मानित, शोध केन्द्र का उद्घाटन भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि कला और साहित्य मन को आत्मिक अनुभूति प्रदान करते हैं। अंतर्मन को प्रसन्नता और सुकून से भरते हैं। साहित्यकार अपनी लेखनी से जहां समकालीन समाज की विसंगतियों को उजागर करता है, वही भावी पीढ़ियों के लिए दिशा और दृष्टि भी प्रदान करता है। वे समाज और देश की सच्ची सेवा करते हैं। उनका सम्मान देश का सम्मान है। राज्यपाल श्री पटेल मंगलवार को दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय भोपाल के स्थापना पर्व के अवसर पर दुष्यन्त शोध केन्द्र के उद्घाटन और अलंकरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने वरिष्ठ साहित्यकार श्री उदयप्रकाश को राष्ट्रीय दुष्यन्त अलंकरण सम्मान- 2025 से सम्मानित किया। श्रीमती कांति शुक्ला को दुष्यन्त सुदीर्घ साहित्य साधना सम्मान-2025 और डॉ. बहादुर सिंह और दुष्यन्त आंचलिक भाषा सम्मान- 2025 से सम्मानित किया। राज्यपाल पटेल ने साहित्यकार श्री अरुण तिवारी, श्री जवाहर कर्नाट और श्री विजय वाजपेयी को भी सम्मानित किया। सभी सम्मानित साहित्यकारों को बधाई और शुभकामनाएं दी। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि स्थापना पर्व पर साहित्य सेवियों का सम्मान केवल संस्थान का उत्सव नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य की जीवंत परंपरा का उत्सव है। यह इसलिए भी विशेष है क्योंकि अपनी लेखनी से भाषा, समाज और संवेदना को समृद्ध करने और महान दुष्यंत जी की विरासत को आगे बढ़ाने वाले साहित्य सेवियों का आज सम्मान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल शब्दों का संकलन नहीं होता, वह समाज का दर्पण होता है। हमारी सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण भी होता है। महान दुष्यंत कुमार ऐसे ही रचनाकार थे, जिन्होंने जन-सरोकारों से जुड़ी रचनाओं के माध्यम से आम आदमी की पीड़ा, उसकी आकांक्षाओं और संघर्षों को अत्यंत सशक्त स्वर दिया। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ केवल पढ़ी नहीं जातीं, बल्कि महसूस की जाती हैं। वे आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी अपने समय में थीं। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि साहित्य को केवल मनोरंजन का साधन मात्र नहीं बल्कि समाज के परिष्कार का माध्यम बनाना होगा। क्षेत्रीय भाषाओं, बोलियों तथा लोक कलाओं में बसी माटी की सुगंध और लोक धड़कन को रचनाओं में शामिल करना होगा। उन्होंने कहा कि साहित्य साधकों को प्राचीन विरासत और आधुनिक नवाचार के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में आगे आना होगा, जिसमें परंपरा और प्रगति दोनों साथ चल सकें। राज्यपाल श्री पटेल का कार्यक्रम का प्रारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया। दुष्यन्त शोध केन्द्र का उद्घाटन किया। संग्रहालय का अवलोकन किया। राज्यपाल श्री पटेल का पुष्पगुच्छ से स्वागत और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। उन्होंने संग्रहालय की पत्रिका “प्रेरणा” के विशेषांक का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन संग्रहालय की सचिव श्रीमती करूणा राजुरकर ने दिया। विश्वरंग के निदेशक श्री संतोष चौबे ने हिन्दी गजल के प्रणेता दुष्यन्त कुमार का पुण्य स्मरण किया। उन्होंने सभी सम्मानित साहित्यकारों को बधाई दी। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के सिकल सेल जागरूकता प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती विशाखा ने किया। आभार संग्रहालय के अध्यक्ष श्री रामराव वामनकर ने माना। कार्यक्रम में संग्रहालय के सदस्य और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।