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8th Pay Commission: 1 जनवरी 2026 से लागू होगा आठवां वेतन आयोग, कर्मचारियों की सैलरी में होगी जबरदस्त बढ़ोतरी

भोपाल  नए साल की शुरुआत केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकती है। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर बड़ी अपडेट सामने आ रही है। चर्चाओं के मुताबिक, यह वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू किया जा सकता है, जिससे देशभर के करीब एक करोड़ से अधिक कर्मचारी और पेंशनर्स सीधे लाभान्वित होंगे। हालांकि, अभी तक आयोग की आधिकारिक सिफारिशें सार्वजनिक नहीं की गई हैं, लेकिन शुरुआती अनुमानों और रिपोर्ट्स ने कर्मचारियों की उम्मीदें काफी बढ़ा दी हैं। क्या होता है वेतन आयोग और क्यों है यह अहम? केंद्र सरकार हर 10 साल में वेतन आयोग का गठन करती है, ताकि कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों को महंगाई, जीवन-यापन की लागत और आर्थिक हालात के अनुसार संशोधित किया जा सके। 7वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2016 से लागू हुआ था और अब उसकी अवधि पूरी होने के बाद 8वें वेतन आयोग की बारी है। इस बार आयोग की सिफारिशों में बढ़ती महंगाई, DA का असर और कर्मचारियों की वास्तविक आय में आई गिरावट को प्रमुख आधार माना जा रहा है। क्या है डिटेल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर फिटमेंट फैक्टर ऊपरी स्तर पर तय होता है तो मौजूदा ₹18,000 की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर करीब ₹51,480 तक पहुंच सकती है। हालांकि, सरकार ने अभी सैलरी बढ़ोतरी के प्रतिशत पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, देश में करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी (रक्षा कर्मियों सहित) और लगभग 65 लाख पेंशनभोगी हैं, जिन्हें 8वें वेतन आयोग का फायदा मिलेगा। सरकार हर 10 साल में वेतन आयोग बनाकर कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन की समीक्षा करती है। DA पर सरकार ने दी सफाई इस बीच महंगाई भत्ते (DA) को लेकर फैल रही अफवाहों पर भी सरकार ने सफाई दी है। 13 दिसंबर 2025 को सरकार ने सोशल मीडिया पर साफ किया कि यह दावा गलत है कि नए फाइनेंस एक्ट 2025 के बाद पेंशनभोगियों को DA नहीं मिलेगा। सरकार ने कहा कि DA और अन्य रिटायरमेंट लाभ जारी रहेंगे, जब तक किसी कर्मचारी को गंभीर अनुशासनहीनता के कारण बर्खास्त न किया गया हो। CCS पेंशन नियमों में बदलाव केवल ऐसे मामलों पर लागू होता है। फिटमेंट फैक्टर पर एनालिस्ट की राय फिटमेंट फैक्टर को लेकर एनालिस्ट्स की राय है कि सरकार महंगाई, वेतन में आई गिरावट, और सरकारी वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखेगी। शुरुआती अनुमान बताते हैं कि फिटमेंट फैक्टर 1.83 से 2.57 के बीच हो सकता है। टैक्स एक्सपर्ट सीए चांदनी आनंदन के अनुसार, अभी कोई अंतिम आंकड़ा तय नहीं हुआ है। गौरतलब है कि 7वें वेतन आयोग में भी फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सैलरी उतनी ही गुना बढ़ेगी। अंतिम फैसला आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा। Fitment Factor क्या है? क्यों इसी पर टिकी है पूरी सैलरी बढ़ोतरी वेतन आयोग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है Fitment Factor। इसी फैक्टर से मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.83 से 2.57 के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है। अगर 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो कर्मचारियों की सैलरी में रिकॉर्डतोड़ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। कितनी बढ़ेगी आपकी Basic Pay? समझिए पूरा कैलकुलेशन अगर फिटमेंट फैक्टर 2.57 लागू होता है, तो मौजूदा 7वें वेतन आयोग की बेसिक सैलरी सीधे 2.57 गुना हो जाएगी। कर्मचारियों की निगाहें सरकार के फैसले पर फिलहाल केंद्रीय कर्मचारी संगठनों की निगाहें सरकार के आधिकारिक ऐलान पर टिकी हुई हैं। अगर समय पर आयोग लागू होता है, तो 2026 की शुरुआत कर्मचारियों के लिए आर्थिक रूप से बेहद मजबूत साबित हो सकती है।

सुविधाओं के कारण महाकाल दर्शन की संख्या बढ़ी, पांच जनवरी तक दस लाख श्रद्धालुओं की उम्मीद

उज्जैन  नए साल के प्रथम प्रभात में देवदर्शन की आस लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन, ओंकारेश्वर और नलखेड़ा पहुंच रहे हैं। दो ज्योतिर्लिंगों और मां बगलामुखी मंदिर में नव वर्ष के स्वागत की तैयारी नव्य-भव्य रूप में हो रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महाकाल मंदिर प्रशासन ने प्रोटोकाल दर्शन व्यवस्था बंद कर रखी है। भीड़ बढ़ने पर नंदी हाल में भी प्रवेश बंद किया जा रहा है। जरूरत पड़ी तो नए साल के पहले दिन सामान्य श्रद्धालुओं के लिए शीघ्र दर्शन टिकट व्यवस्था को भी स्थगित किया जा सकता है। ओंकारेश्वर और मां बगलामुखी मंदिर में भी प्रोटोकाल दर्शन व्यवस्था बंद कर दी गई है। मालूम हो कि चार दिनों में साढ़े 8 लाख लोग भगवान महाकाल के दर्शन कर चुके हैं। 5 जनवरी तक 10 लाख दर्शनार्थियों के आने का अनुमान है। श्रद्धालु चारधाम मंदिर पार्किंग से शक्तिपथ के रास्ते त्रिवेणी संग्रहालय द्वार से भक्त प्रवेश करेंगे। वाहन पार्किंग के लिए चार जगह कर्कराज, भील समाज की धर्मशाला, कार्तिक मेला ग्राउंड, हरिफाटक ब्रिज के नीचे व्यस्था की गई है। भीड़ बढ़ने पर वाहन पहले भी रोके जा सकते हैं। प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि महाकाल मंदिर में साल 2025 में दर्शनार्थियों की संख्या का नया रिकॉर्ड बना है। साल के आखिरी पखवाड़े में अब तक 15 लाख से अधिक भक्तों ने दर्शन कर लिए हैं। भक्तों को कम समय में सुविधा से भगवान के दर्शन कराए जा रहे हैं। देशभर से आने वाले दर्शनार्थी उपलब्ध सुविधा का लाभ रहे रहे हैं। 4 दिन में 84 हजार भक्तों ने 250 रुपये के शीघ्र दर्शन टिकट खरीदकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। इससे मंदिर समिति को 2 करोड़ 10 लाख रुपये की आय हुई है। इसके अलावा चार दिन में 2500 किलो लड्डू प्रसाद की बिक्री हुई है। इससे मंदिर समिति को 10 लाख रुपये से अधिक राशि मिली है। आधे घंटे में हुए दर्शन शनिवार, रविवार की तुलना में सोमवार को दर्शनार्थियों की संख्या कम रही। दर्शनार्थियों को 25 से 30 मिनट में भगवान महाकाल के दर्शन हुए। कम समय में सुविधा पूर्वक दर्शन से श्रद्धालु खुश नजर आए। मंदिर प्रशासन ने दर्शन की कतार में खड़े भक्तों के लिए पेजयल आदि के इंतजाम भी कर रखे हैं। बगलामुखी मंदिर प्रोटोकाल व्यवस्था एक सप्ताह के लिए बंद आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में स्थित मां बगलामुखी मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। नववर्ष पर संख्या और बढ़ने की संभावना है। मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष व तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव ने बताया कि एक सप्ताह के लिए प्रोटोकाल व्यवस्था बंद की है। एक सप्ताह बाद दर्शनार्थियों की संख्या की समीक्षा के बाद इसे लेकर निर्णय लिया जाएगा। ओंकारेश्वर मंदिर प्रोटोकाल दर्शन प्रतिबंधित     खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है। प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट द्वारा भीड़ नियंत्रण से लेकर मंदिर में सुचारु दर्शन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। यहां भी प्रोटोकाल दर्शन व्यवस्था बंद कर दी गई है। नाव संचालन भी ठप रहेगा। दर्शन के लिए झूला पुल से प्रवेश बंद कर व्यवस्था को एकांगी कर दिया है। जेपी चौक पर बेरिकेडिंग कर दर्शनार्थियों की भीड़ को नियंत्रित किया जा रहा है। ये सभी बदलाव पांच जनवरी तक लागू रहेंगे। पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा ने बताया कि पांच जनवरी तक ओंकारेश्वर में लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। प्रोटोकाल के तहत दर्शन व्यवस्था को फिलहाल बंद किया गया है। विशेष दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को पोर्टल पर ऑनलाइन निर्धारित शुल्क जमा करना होगा।  

असद खान ने काशी में अपनाया सनातन धर्म, शुद्धिकरण के बाद बने अथर्व त्यागी, बोले- ‘बचपन से मंदिर जाता था’

सागर  गंगा के बीच में नाव पर 21 ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चारण के बीच मध्य प्रदेश से आए असद खान ने सनातन धर्म में घर वापसी की और शुद्धिकरण प्रक्रिया के बाद अथर्व बन गए। असद यानी अथर्व ने सोशल मीडिया के माध्यम से काशी के ब्राह्मणों से अपनी घर वापसी संस्कार के लिए संपर्क किया था। असद की घर वापसी का अनुष्ठान कराने वाले आलोक योगी ने बताया कि पहले असद का शुद्धिकरण किया गया। उसके बाद पूजन करा कर उनके घर वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई और उनका नामकरण किया गया। उन्हें नया नाम अथर्व त्यागी प्रदान किया गया। अथर्व ने बताया कि वह इंजीनियर हैं और मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहने वाले हैं। सागर में उसका पूरा परिवार रहता है जो अब भी इस्लाम का अनुयायी है। शुद्धिकरण के बाद असद का नामकरण कर उन्हें ‘अथर्व त्यागी’ नाम दिया गया। अथर्व ने कहा- मेरा मन उस समय सबसे ज्यादा आहत हो गया, जब मैं अपने दोस्तों के साथ महाकाल मंदिर जा रहा था। उस दौरान हमें वहां कुछ लोग पहचान गए और मंदिर में जाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद मैंने काशी के ब्राह्मणों से मुलाकात की और आज हमने काशी की पवित्र धरती पर घर वापसी की। अब पढ़िए पूरा मामला मध्य प्रदेश के सागर के रहने वाले असद खान पेशे से इंजीनियर हैं। उन्होंने एमटेक की पढ़ाई की है। असद के घर में माता-पिता और एक भाई और एक बहन है। असद को शुरुआत से ही हिंदू धर्म पंसद था। उन्हें बचपन से ही मंदिर जाना और पूजा पाठ करना पंसद था। लेकिन मुस्लिम होने की वजह से कई बार मंदिर जाने में उनको परेशानी होती थी। असद के सारे दोस्त भी हिंदू हैं। असद बजरंग बली के भक्त हैं। सोमवार को असद खान वाराणसी पहुंचे। इसके बाद गंगा नदी में नाव पर 21 ब्राह्मणों की मौजूदगी में वैदिक विधि-विधान से शुद्धिकरण और पूजन किया गया। इस दौरान उनके बाल भी उतारे गए। तिलक लगाकर असद खान ने हिंदू धर्म अपनाया। उन्होंने अब अपना घर भी छोड़ दिया है। वह अब अकेले ही जीवन यापन करेंगे। असद खान अब अथर्व त्यागी बन गए है। असद ने 20 रुपए के स्टाम्प में अपना शपथनामा भी लिखा है। सागर ने बताया कि वह बचपन से ही मंदिरों में जाते थे और पूजा-पाठ करते थे लेकिन बड़े होने के बाद उनका नाम असद होने के कारण उसे मंदिरों में जाने में परेशानी होने लगी। असद बजरंग बली के भक्त हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ मारपीट से उनका मन काफी आहत हुआ और उसके बाद यह निर्णय लिया। अब पढ़िए अथर्व का शपथनामा     मैंने आज काशी में अस्सी घाट में आकर पंचगव्य स्नान ग्रहण कर मुस्लिम से सनातन हिन्दू धर्म ग्रहण किया।     मैं पूर्ण आस्था जताकर घर वापसी कर रहा हूं। काशी के विद्वान पंडा और पुरोहितों के पावन सानिध्य में पूरा कार्यक्रम आयोजित किया गया है।     मैं छोर कर्म कर पंचगव्य से गंगा स्नान करके 21 वैदिक ब्राह्मणों वैदिक मंत्रों से पवित्र किया गया हूं।     मैंने हवन पूजन कर बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन किए, फिर शिवलिंग पर अभिषेक करा कर शाम को गंगा आरती कराई जाएगी।     मुझे विधि विधान से अथर्व त्यागी हिन्दी नाम दिया गया। मैं अपना मजहब त्याग कर आया हूं। इसलिए आज से त्यागी हो गया। मेरा गौत्र कश्यप है।     मेरी निजी जानकारी में सब सच व सही है। कोई बात झूठ व छिपाई नही गई है। पूजन कराने वाले ब्राह्मण आलोक योगी ने बताया- घर वापसी से पूर्व शुद्धिकरण संस्कार किया गया। उसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन कर नामकरण हुआ। यह पूरी प्रक्रिया शास्त्रीय विधि के अनुसार संपन्न कराई गई। 'मंदिरों में कई बार असहजता का सामना करना पड़ा' अथर्व त्यागी ने बताया- मैं अपनी इच्छा से सनातन धर्म में घर वापसी कर रहा हूं। मैं पेशे से इंजीनियर हूं। सागर जिले में मेरा पूरा परिवार रहता है, जो अभी भी मुस्लिम धर्म का पालन करता है। बचपन से ही मुझे मंदिरों में जाना और पूजा-पाठ करना पसंद था। लेकिन बड़े होने के बाद नाम के कारण कई बार मंदिरों में प्रवेश और पूजन में असहजता का सामना करना पड़ा। अथर्व ने स्वयं को बजरंग बली का भक्त बताया। कहा कि अपनी आस्था के अनुरूप जीवन जीने के लिए मैंने यह निर्णय लिया।

इंदौर में साफ-सफाई की मिसाल, लेकिन भागीरथपुरा में गंदा पानी पीकर बुजुर्ग की मौत, 150 लोग बीमार; सीएम ने लिया संज्ञान

इंदौर मध्य प्रदेश का इंदौर शहर लगातार 8 साल से देश का सबसे स्वच्छ शहर होने का खिताब अपने नाम करता आया है। अब इसी शहर में गंदा पानी पीने की वजह से 150  से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए हैं। पानी पीने के बाद इन लोगों को उल्टी, दस्त और शरीर में पानी की कमी जैसी दिक्कतें हुईं और वे अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। लोगों का शिकायत है कि वे नगर निगम की ओर से सप्लाई किए जाने वाला पानी पीने के बाद बीमार पड़े हैं। मामला गंभीर होने के बाद पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है। इस मामले में इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्हव ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। भागीरथपुरा में डायरिया से मौत के बाद मचा हड़कंप, CM ने लिया संज्ञान. गंदे पानी की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संज्ञान लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम डॉ. मोहन यादव ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सभी मरीजों का सही इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सीएम ने कहा कि इलाज में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरी दवाएं, एक्सपर्ट और संसाधन तुरंत उपलब्ध कराए जाएं। वहीं इलाज के लिए भर्ती एक बुर्जुग व्यक्ति की मौत हो गई। उल्टी और दस्त के कारण उसे कमजोरी आ गई थी। सुबह कुछ मरीजों को परदेशीपुरा के अस्पताल से छुट्टी भी हो गई है। दूषित पेयजल की आशंका के चलते नगर निगम ने टैंकरों से मंगलवार को बस्ती में जलापूर्ति की। अफसरों ने भी बस्ती का दौरा किया है। बस्ती से पानी के जो नमूने लिए हैं, उनकी रिपोर्ट मंगलवार को आएगी। पांच दिन में डेढ़ सौ से ज्यादा लोग बीमार हुए हैं। फिलहाल 15 लोग अलग-अलग अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें उल्टी दस्त और कमजोरी की शिकायत है। इस घटना को लेकर स्वास्थ्य विभाग भी देरी से जागा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रशासन को जरूरी निर्देश दिए हैं। सोमवार रात मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के दौरे के बाद डाॅक्टर मरीजों की जानकारी जुटाने अस्पताल पहुंचे। इलाज के लिए वर्मा अस्पताल में भर्ती नंदलाल पाल की मौत हुई। उनकी उम्र 80 वर्ष थी। उनकी मौत की पुष्टि क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला ने भी की है। बस्ती में भी स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात की गई है। जिन लोगों को दस्त और उल्टी की शिकायत हो रही है। उन्हें दवाएं दी जा रही हैं। मंगलवार सुबह मेयर पुष्य मित्र भार्गव, पार्षद कमल वाघेला के साथ बस्ती पहुंचे और जलापूर्ति की स्थिति देखी। नर्मदा विभाग के अफसरों का कहना है कि पानी की जांच की गई है। प्रारंभिक तौर पर पानी दूषित नहीं पाया गया। बस्ती में डायरिया किस वजह से फैला। इसकी जांच के लिए पानी के सैंपल लिए गए हैं। रहवासियों का कहना है कि बस्ती में दूषित पेयजल की सप्लाई हो रही है। नलों में पहले गंदा पानी आता है। फिर कुछ देर के लिए साफ पानी मिलता है। कई बार गंदे पानी की शिकायत अफसरों से की गई, लेकिन समस्या का हल नहीं हुआ। मरीजों का इलाज कर रहे डाक्टरों का कहना है कि पांच दिन से बस्ती के लोग आ रहे हैं। पतले दस्त और उल्टी ज्यादा होने से शरीर में कमजोरी आ गई है। रोज पांच-सात मरीज आ रहे हैं। सभी में डायरिया के लक्षण पाए गए हैं, हालांकि खतरे की बात नहीं है। देर रात नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, MLA रमेश मेंदोला और मेयर पुष्यमित्र भार्गव वर्मा ने अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने मरीजों से बात की और स्थिति का जायजा लिया। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि सभी मरीजों का इलाज पूरी तरह से फ्री होगा और जिन लोगों ने इलाज के लिए पैसे जमा किए हैं, उन्हें वापस कर दिए जाएंगे। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि जब तक स्थिति सामान्य न हो जाए, वे उबला हुआ पानी पिएं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि शिकायत मिलते ही मेडिकल और प्रशासनिक टीमों को मौके पर भेज दिया गया था। पूरे इलाके पर लगातार नजर रखी जा रही है, और स्वास्थ्य विभाग को इलाज का रेगुलर रिव्यू करने के निर्देश दिए गए हैं। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर वार्ड ऑफिस पर विरोध प्रदर्शन किया। विधानसभा क्षेत्र 2 के जोन नंबर 8 के कार्यकर्ताओं ने शंख और घंटियां बजाकर और मटके फोड़कर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि वार्ड 30, 37 और 28 में लंबे समय से गंदे पानी, जाम ड्रेनेज लाइनों, कूड़े के ढेर और सफाई की अनदेखी की समस्या है, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई। भागीरथपुरा की घटना ने एक बार फिर शहरी इलाकों में पीने के पानी की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन के अगले कदम पर हैं।  

धीरेंद्र शास्त्री बोले – “अगर ‘आई लव मोहम्मद’ से कोई दिक्कत नहीं, तो ‘आई लव महादेव’ से क्यों होनी चाहिए?”

 मुरैना  बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के जौरा कस्बे में आयोजित आशीर्वचन कार्यक्रम में कहा कि "हमें ‘आई लव मोहम्मद’ से कोई तकलीफ़ नहीं है, लेकिन जब ‘आई लव महादेव’ गूंजे तो किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि लोग हमें भड़काऊ कहते हैं, लेकिन हम किसी मुस्लिम या ईसाई के खिलाफ नहीं हैं। “हम कट्टर सनातनी हैं। दुख इस बात का है कि तमिलनाडु में भगवान राम का पोस्टर जलाया गया और देश में किसी ने आवाज़ तक नहीं उठाई। ऐसा करने वाले रावण के वंशज हैं और इन्हें फांसी होनी चाहिए।” "हमें सरकारी कागज़ों में नहीं, हर हिंदू के दिल में हिंदू राष्ट्र चाहिए" पंडित शास्त्री ने कहा कि हिंदू अब डरने वाला नहीं रहा। “हमें सरकार के कागजों में हिंदू राष्ट्र नहीं चाहिए, बल्कि हर सनातनी के दिल में हिंदू राष्ट्र की भावना चाहिए। उन्होंने जात-पात और क्षेत्रवाद पर भी चिंता जताई और कहा कि अगर हिंदू एकजुट नहीं हुए तो हालात कश्मीर जैसे हो जाएंगे। “अपने बच्चों को कार-व्यापार नहीं, संस्कार देकर जाओ। तभी धर्मविरोधी ताकतें हमारे बच्चों का मतांतरण नहीं करवा पाएंगी।” "33 करोड़ देवता हैं, नया भगवान बना लो लेकिन" उन्होंने कहा “हमारे पास 33 करोड़ देवता हैं। कम पड़ें तो नया भगवान बना लो, लेकिन किसी मजार पर चादर चढ़ाने मत जाओ।” सफाई कर्मियों से कराई आरती, 7 नवंबर से पदयात्रा प्रवचन से पहले उन्होंने जौरा नगर पालिका के 13 सफाई कर्मचारियों से हनुमानजी की आरती करवाई। उन्होंने बताया कि 7 नवंबर को दिल्ली के कात्यायिनी मंदिर से सनातन हिंदू एकता पदयात्रा निकाली जाएगी, जो 16 नवंबर को वृंदावन में पूर्ण होगी।  

रेलवे को 34 लाख रुपये का नुकसान, चादर और टॉवल ले जाने वाले यात्रियों की बढ़ती चोरी

भोपाल  रेलवे में यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं पर चोरी की मार लगातार बढ़ती जा रही है। बीते दो वर्षों में ट्रेनों से लिनन सामान की चोरी के कारण रेलवे को 34 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा चोरी सफेद बेडशीट की हुई है, जिससे अकेले इसी एक आइटम में 20 लाख रुपये से ज्यादा की क्षति दर्ज की गई है। दो साल में हजारों लिनन आइटम गायब वित्तीय वर्ष 2024-25 में सफेद बेडशीट, पिलो कवर, कंबल और तकिये समेत कुल 11,709 लिनन आइटम चोरी हुए, जिससे रेलवे को 23.01 लाख रुपये का नुकसान हुआ। इसमें सफेद बेडशीट की चोरी सबसे ज्यादा हुई। वहीं, अप्रैल 2025 से नवंबर 2025 के बीच भी 11,682 लिनन आइटम गायब पाए गए, जिनकी कीमत 11.74 लाख रुपये से अधिक आंकी गई। पीक सीजन में बढ़ती हैं चोरी की घटनाएं रेलवे सूत्रों के अनुसार पीक सीजन, यानी विंटर और समर सीजन में चोरी की घटनाएं ज्यादा होती हैं। खासतौर पर स्पेशल ट्रेनों में नियमित चेकिंग की कमी के कारण चोरों को मौका मिल जाता है। बिहार रूट की ट्रेनों में चोरी की शिकायतें अधिक बिहार रूट की ट्रेनों में चोरी की शिकायतें अधिक सामने आती हैं, जबकि अगरतला एक्सप्रेस और हमसफर ट्रेनों में भी ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं। लंबे रूट की ट्रेनों में भीड़ और सफर की अवधि ज्यादा होने से चोरी की आशंका बढ़ जाती है। नियमित अभियान के बावजूद नुकसान चोरी रोकने के लिए रेलवे द्वारा नियमित अभियान चलाए जाते हैं। प्रत्येक कोच में अटेंडेंट की तैनाती की जाती है, जिससे काफी हद तक चोरी पर नियंत्रण रहता है। इसके बावजूद यदि चोरी होती है तो संबंधित अटेंडेंट से वसूली की जाती है। साथ ही स्टॉफ पूरी सतर्कता से काम करता है, लेकिन यात्रियों की भीड़ और पीक सीजन में चुनौती बढ़ जाती है।     रेलवे द्वारा कंबल धुलाई और यात्रियों में वितरण की जाने वाली लिनन व्यवस्था का ठेका निजी कंपनी को दिया गया है। रेलवे बोर्ड की ओर से लिनन सामान उपलब्ध कराए जाने के बाद यदि किसी प्रकार की चोरी होती है, तो उसकी कटौती संबंधित ठेकेदार के बिल से की जाती है। इसके साथ ही यात्रियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे रेलवे की लिनन सामग्री उपयोग करने के बाद उसे ट्रेन में ही छोड़कर जाएं, ताकि अन्य यात्रियों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सके और सरकारी संपत्ति सुरक्षित रह सके।     – नवल अग्रवाल, पीआरओ, भोपाल मंडल  

नागदा में टीआई की बहादुरी, फंदे से लटके युवक को सीपीआर देकर बचाई जान, VIDEO; स्वस्थ होकर अस्पताल से निकला

नागदा  मध्य प्रदेश (MP) के उज्जैन (Ujjain) जिले के नागदा (Nagda) से इंसानियत और पुलिस (Police) की मुस्तैदी की एक दिल जीत लेने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ नागदा थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी ने एक युवक के लिए ‘देवदूत’ बनकर उसकी जान बचाई, जिसे उसके परिवार ने मृत मान लिया था। गश्त के दौरान मिली सूचना घटना रविवार-सोमवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे की है। थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी अपनी टीम के साथ मिर्ची बाजार क्षेत्र में नियमित गश्त पर थे। इसी दौरान एक बुजुर्ग व्यक्ति बदहवास हालत में दौड़ते हुए उनके पास पहुंचा और रोते हुए बताया कि उसके बेटे ने घर के अंदर फांसी लगा ली है। बंद दरवाजा तोड़कर युवक को फंदे से उतारा सूचना मिलते ही टीआई गवरी बिना एक पल गंवाए घटनास्थल पर पहुंचे। घर का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे पुलिस ने तुरंत तोड़ दिया। अंदर जाकर देखा तो युवक धैर्य यादव फांसी के फंदे पर लटका हुआ था। परिवार के सदस्य उसे देखते ही यह मान चुके थे कि धैर्य की मौत हो चुकी है और घर में कोहराम मच गया था। ट्रेनिंग आई काम: CPR से वापस लौटीं सांसें जहाँ परिवार हिम्मत हार चुका था, वहीं थाना प्रभारी ने अपना धैर्य नहीं खोया। उन्होंने तुरंत युवक को फंदे से नीचे उतारा और उसकी नब्ज जांची। युवक की हालत गंभीर थी, जिसे देखते हुए टीआई गवरी ने अपनी पुलिस ट्रेनिंग के दौरान सीखी गई CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) तकनीक का इस्तेमाल किया। लगातार कुछ मिनटों तक सीने को पंप करने और जीवन रक्षक प्रयास करने के बाद, युवक के शरीर में हलचल हुई और उसकी सांसें वापस लौट आईं। यह देख परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। डॉक्टर बोले- सीपीआर से बची युवक की जान घटना नागदा में जनमेजय मार्ग स्थित पानी की टंकी के पास सोमवार रात करीब डेढ़ बजे की है। थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। तभी युवक के पिता उनके पास पहुंचे थे। टीआई बिना देरी किए युवक के घर पहुंच गए। उन्होंने अपनी पुलिस ट्रेनिंग के दौरान सिखाई गई सीपीआर तकनीक का उपयोग किया। युवक की सांसें लौटी तो अपने वाहन से उसे एमपी-13 अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने तत्काल जांच कर उपचार शुरू किया और बताया कि समय पर सीपीआर मिलने के कारण युवक की जान बच गई। युवक की जान बचाने में नगर सुरक्षा समिति के राजेश मोरवाल ने भी पुलिस का सहयोग किया। अस्पताल में भर्ती, परिजनों ने जताया आभार सांसें लौटने के बाद पुलिस ने बिना देरी किए युवक को तुरंत रतलाम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उसका उपचार जारी है। टीआई अमृतलाल गवरी की इस तत्परता और सूझबूझ की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है। परिजनों ने पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अगर आज साहब नहीं होते, तो हमने अपना बेटा खो दिया होता। क्या होता है CPR और क्यों है यह जरूरी? CPR एक आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया है जिसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति की सांस या दिल की धड़कन रुक जाती है। यह मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह बनाए रखने में मदद करता है।

मध्य प्रदेश के कई शहरों में कड़ाके की ठंड, नौगांव में तापमान 3.1 डिग्री, डिंडौरी में ओस जमी

भोपाल  मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में अब कड़ाके की ठंड ने लोगों की कंपकंपी बढ़ा दी है। सोमवार-मंगलवार की रात प्रदेश के कई जिलों में तापमान अचानक गिर गया। छतरपुर का नौगांव सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ठंडी हवाओं, शीतलहर और घने कोहरे ने जनजीवन के साथ-साथ रेल यातायात को भी प्रभावित किया है। मौसम विभाग के अनुसार, उमरिया में 3.1 डिग्री, खजुराहो में 4.4 डिग्री, राजगढ़ में 4.6 डिग्री, पचमढ़ी में 4.8 डिग्री, मंडला-रीवा में 5 डिग्री, सतना में 5.2 डिग्री, दतिया में 5.7 डिग्री और मलाजखंड में तापमान 5.8 डिग्री सेल्सियस रहा। भोपाल में यह 5.6 डिग्री, इंदौर-ग्वालियर में 6.6 डिग्री, उज्जैन में 9.2 डिग्री और जबलपुर में 7 डिग्री दर्ज किया गया। प्रदेश के करीब 25 शहरों में तापमान 10 डिग्री के नीचे ही रहा। इधर, दतिया और खजुराहो में घने कोहरे की वजह से विजिबिलिटी 50 से 200 मीटर के बीच रही। सतना, नौगांव, रीवा, सीधी, खरगोन और मंडला में भी घना कोहरा दर्ज किया गया। इससे ट्रेनों की टाइमिंग पर भी असर पड़ा। पूर्वी MP में सबसे ज्यादा असर मौसम विभाग के मुताबिक, जेट स्ट्रीम की रफ्तार 287 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने से उत्तर भारत से सर्द हवाएं मध्य प्रदेश में प्रवेश कर रही हैं। इसका सबसे ज्यादा असर पूर्वी जिलों में देखने को मिला है।     नौगांव (छतरपुर): 3°C     उमरिया: 3.1°C     खजुराहो: 4.4°C     राजगढ़: 4.6°C     पचमढ़ी: 4.8°C डिंडौरी में नर्मदा किनारे खड़ी गाड़ियों पर सुबह ओस की मोटी परत जम गई, जबकि पचमढ़ी झील क्षेत्र में हल्की धुंध देखी गई। घना कोहरा, ट्रेनों पर असर दतिया, खजुराहो, सतना, रीवा, सीधी, नौगांव और मंडला में घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी 50 से 200 मीटर तक सिमट गई। इसका असर रेल यातायात पर पड़ा और दिल्ली की ओर से आने वाली कई ट्रेनें 4 से 5 घंटे तक लेट रहीं। मौसम विभाग की मानें तो जेट स्ट्रीम की रफ्तार 287 Kmph पहुंच गई है। इस वजह से प्रदेश के कई शहर दिन-रात कांप रहे हैं। बीते 24 घंटे में भोपाल, राजगढ़, इंदौर और शहडोल में शीतलहर का असर देखा गया। मंगलवार को भी सर्द हवाओं का असर बना रहेगा। ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, भोपाल, शाजापुर, रायसेन, विदिशा समेत कई जिलों में कोहरे का असर रहा। इस वजह से दिल्ली से आ रही ट्रेनें 4 से 5 घंटे तक लेट है। 25 शहरों में 10 डिग्री से नीचे तापमान इधर, रात के तापमान में भी गिरावट हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, रविवार-सोमवार की रात में भोपाल में 5.6 डिग्री, इंदौर में 6.4 डिग्री, ग्वालियर में 9 डिग्री, जबलपुर में 8 डिग्री और उज्जैन में पारा 9.5 डिग्री रहा। इसी तरह कल्याणपुर के बाद राजगढ़ प्रदेश का दूसरा सबसे ठंडा रहा। यहां तापमान 4 डिग्री पहुंच गया। छतरपुर के नौगांव-उमरिया में 5 डिग्री, पचमढ़ी में 5.2 डिग्री, मलाजखंड में 5.3 डिग्री, मंडला में 5.8 डिग्री, खजुराहो-शिवपुरी में 6 डिग्री, रायसेन में 6.4 डिग्री, दमोह में 6.8 डिग्री, छिंदवाड़ा में 8 डिग्री, टीकमगढ़ में 8.5 डिग्री, दतिया-गुना में 8.6 डिग्री, बैतूल में 8.7 डिग्री, बैतूल, खरगोन, रीवा-रतलाम में 9 डिग्री, सागर में 9.4 डिग्री, सीधी और सतना में 9.7 डिग्री दर्ज किया गया। ग्वालियर में पारा 15.9 डिग्री, एक दिन में 7 डिग्री लुढ़का इधर, सोमवार को दिन में भी ठंड का दौर बना रहा। ग्वालियर में तो एक ही दिन में तापमान 7 डिग्री लुढ़ककर 15.9 डिग्री पर आ गया। वहीं, नौगांव में 19.5 डिग्री, खजुराहो में 20.1 डिग्री, रीवा में 20.2 डिग्री, टीकमगढ़ में 21 डिग्री, सतना, मलाजखंड-सीधी में 21.2 डिग्री, दमोह में 22.6 डिग्री, नरसिंहपुर में 23 डिग्री रहा। दूसरी ओर, जबलपुर में 24.8 डिग्री, भोपाल में 27.2 डिग्री, इंदौर में 28.1 डिग्री, उज्जैन में 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के करीब 25 शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया।     भोपाल: 5.6°C     इंदौर: 6.6°C     ग्वालियर: 6.6°C     जबलपुर: 7°C     उज्जैन: 9.2°C दिन में भी नहीं मिली राहत ठंड का असर दिन के तापमान पर भी दिखा। ग्वालियर में एक ही दिन में अधिकतम तापमान 7 डिग्री गिरकर 15.9°C पहुंच गया। नौगांव, खजुराहो, रीवा और टीकमगढ़ जैसे शहरों में दिन का पारा 20-21 डिग्री के आसपास रहा।

नुसरत भरूचा ने बाबा महाकाल के दरबार में किया मत्था टेक, भस्म आरती में लिया हिस्सा

उज्जैन   अभिनेत्री नुसरत भरूचा मंगलवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने पुत्रदा एकादशी के पावन अवसर पर महाकाल के दर्शन किए। दिव्य भस्म आरती में शामिल होकर नुसरत ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। इस दौरान वह भक्ति में लीन दिखीं। यह नुसरत भरूचा की बाबा महाकाल के दरबार में दूसरी यात्रा थी। भस्म आरती के दौरान वह नंदी हॉल में बैठीं और शिव भक्ति में पूरी तरह डूब गईं। मंदिर के पुजारियों ने उन्हें प्रसाद स्वरुप महाकाल अंकित दुपट्टा भेंट किया, जिसे पाकर वह गदगद नजर आईं।  दर्शन के बाद नुसरत ने मंदिर की व्यवस्थाओं की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इतनी भारी भीड़ होने के बावजूद सब कुछ बहुत सुगम और व्यवस्थित था। खास तौर पर उन्होंने जल पात्र व्यवस्था की प्रशंसा की। इस व्यवस्था में पाइप के जरिए सीधे ज्योतिर्लिंग पर जल चढ़ाया जाता है, जिससे भक्तों को लाइन में लगे बिना जल अर्पित करने की सुविधा मिलती है। नुसरत ने बताया कि बाबा महाकाल के दर्शन से उन्हें शांति और ऊर्जा मिलती है। भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे विशेष आरती है, जो ब्रह्म मुहूर्त में होती है जिसमें भस्म से भगवान शिव का श्रृंगार किया जाता है। महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती लोकप्रिय है और इसमें शामिल होने के लिए दुनियाभर से श्रद्धालु उज्जैन आते हैं। भस्म आरती का काफी पौराणिक महत्व है। आरती में श्मशान से लाई गई चिता की भस्म से भगवान शिव का श्रृंगार किया जाता है। चिता भस्म के अलावा इसमें गोहरी, पीपल, पलाश, शमी और बेल की लकड़ियों के राख को भी मिलाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म आरती के दौरान महिलाएं सिर पर घूंघट या ओढ़नी डाल लेती हैं। मान्यता है कि उस वक्त महाकालेश्वर निराकार स्वरूप में होते हैं, इसलिए महिलाओं को आरती में शामिल न होने और न ही देखने की अनुमति होती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, भागवत कथा और सत्संग से समाज में समरसता की भावना मजबूत होती है

भागवत कथा और सत्संग से समाज में सदाचार, नैतिकता और समरसता की भावना होती है मजबूत: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रसिद्ध संत कमल किशोर नागर महाराज की कथा में हुए शामिल भागवत कथा वचनों का श्रवण किया इंदौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भागवत कथा और सत्संग से समाज में सदाचार, नैतिकता और समरसता की भावना मजबूत होती है। कथा और सत्संग आध्यात्मिक अनुभूति और सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम भी है। कथा श्रवण और सत्संग से मन तृप्त होता है और जीवन संवरता है। भगवान की भक्ति, कथा श्रवण और सत्संग से वह तृप्ति मिलती है जो भौतिक सुख, वैभव और छप्पन भोग में भी नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को इंदौर के ग्राम चित्तौड़ा में संत कमल किशोर नागर महाराज की कथा के समापन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुरुवर कमल किशोर नागर जी का नाम ही हमारे लिए सौभाग्य का प्रतीक है। वर्षों से आपके प्रवचनों के माध्यम से हम भगवान की भक्ति में स्वर्ग लोक का अनुभव कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कथा एवं सत्संग के श्रवण से स्वर्ग लोक सहित सभी तीर्थों का आनंद प्राप्त हो जाता है। उन्होंने भक्ति और सत्संग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भौतिक सुख-साधन और 56 भोग भी मन को तृप्त नहीं कर सकते, लेकिन भगवान की भक्ति और सत्संग मन को पूर्ण तृप्ति प्रदान करते है और सफल जीवन का मार्ग प्रशस्त करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गौ माता की सेवा के लिए महाराज कमल किशोर नागर जी द्वारा किए जा रहे कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि गौ माता की सेवा जीवन का सबसे बड़ा पुण्य है। महाराज जी ने समाज को यह चेतना दी है कि केवल प्रवचन ही नहीं, बल्कि संस्कार और सेवा भी उतनी ही आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार बनने के बाद गौशालाओं के विकास के लिए लगातार विशेष प्रयास किए जा रहे हैं और मध्यप्रदेश को गौ-सेवा का मॉडल राज्य बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। घर-घर गोपाल की भावना को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि जहां गाय है, वहीं गोपाल का वास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सनातन संस्कृति की परंपराओं, कुंभ और सिंहस्थ स्नान के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जल केवल शारीरिक शुद्धि का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन की उत्पत्ति और परंपरा का आधार है। मुख्यमंत्री ने शिप्रा नदी के शुद्धिकरण और जल संरक्षण के प्रयासों से आगामी सिंहस्थ को ऐतिहासिक और भव्य बनाने का संकल्प भी दोहराया। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में धर्म, संस्कृति और विकास तीनों को साथ लेकर आगे बढ़ने का संकल्प साकार हो रहा है। प्रदेश में हर गाँव और शहर में गीता भवन बनाये जा रहे हैं। मंत्री सिलावट ने कहा कि शिप्रा नदी के शुद्धिकरण के संकल्प को पूर्ण करने का कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में तेजी से किया जा रहा है। शिप्रा के 29–30 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण, बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान 24 घंटे में करोड़ों श्रद्धालुओं के स्नान की व्यवस्थाएँ— सहित सभी ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कार्य हैं। उन्होंने कहा कि नर्मदा और शिप्रा का निरंतर प्रवाह बना रहे, जिससे आचमन और यज्ञ-स्नान जैसे पवित्र कर्म निर्बाध हो इसके लिए तेजी से कार्य हो रहे हैं। संत कमल किशोर नागर जी महाराज ने कहा कि नीति और धर्म से सुसज्जित शासन ही सच्चे विकास की नींव है। जब शासन नीति और धर्म के साथ चलता है, तभी प्रजा की वास्तविक भलाई होती है और विकास एवं प्रगति को नई दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि नीति के बिना राज अधूरा है और धर्म के बिना धन भी अधूरा है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सराहना करते हुए कहा कि आज मुख्यमंत्री ने आम नागरिकों की तरह जमीन पर बैठकर सरलता और सादगी के साथ कथा का श्रवण किया। यह आचरण उनकी भक्ति भावना, विनम्रता और सहज व्यक्तित्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब किसी प्रदेश में धार्मिक आयोजन होते हैं और उनके साथ नीति एवं धर्म दोनों एक साथ खड़े होते हैं, तब वह प्रदेश स्वतः ही सुशोभित और समृद्ध बनता है। व्यस्ततम कार्यक्रमों के बावजूद मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा ऐसे आयोजनों को समय देना उनकी संवेदनशीलता और आध्यात्मिक रुचि का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव केवल राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रदेश के तीर्थों, मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहरों के भी गहरे जानकार हैं, उनके पास गहरा और समृद्ध अनुभव है। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीना सतीश मालवीय, विधायक रमेश मेंदोला, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा, एसपी ग्रामीण श्रीमती यांगचेन डोलकर भूटिया, सुमित मिश्रा, श्रवण चावड़ा, रणजीत सिंह आंजना सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।