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सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर बनाएंगे सिंहस्थ को भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक आयोजन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उज्जैन आने वाले श्रद्धालु सिर्फ मेहमान नहीं, महाकाल के अतिथि हैं, उनके सत्कार में संवेदना भी हो : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर बनाएंगे सिंहस्थ को भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक आयोजन पुराने हॉकी स्टेडियम में आधुनिक एस्ट्रोटर्फ लगाया जाएगा चिंतामण गणेश बनेगा मुख्य स्टेशन, मोहनपुरा में भी होगा रेलवे स्टेशन, उज्जैन में बन रहा एयरपोर्ट मुख्यमंत्री ने उज्जैन में किया करीब 129 करोड़ रुपए के 12 कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले सभी श्रद्धालुओं का स्वागत है, अभिनंदन है। बीते तीन-चार दिनों के अंदर ही 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। उज्जैन आने वाले सभी श्रद्धालु सिर्फ हमारे मेहमान नहीं, स्वयं बाबा महाकाल द्वारा आमंत्रित अतिथि हैं। महाकाल ने उन्हें दर्शन देने के लिए बुलाया है। इसलिए सभी श्रद्धालुओं के सत्कार से जुड़ी हर व्यवस्था में संवेदना और आत्मीयता भी होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से ही उज्जैन नगरी सिर्फ भारत नहीं, सम्पूर्ण विश्व की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनी हुई है। उज्जैन के नागरिकों का सहयोग ही बाबा महाकाल की सच्ची सेवा है। सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर सिंहस्थ-2028 को सबसे भव्य, दिव्य और अनुशासित के साथ एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक आयोजन बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को उज्जैन के नानाखेड़ा स्टेडियम में विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने यहां लगभग 129 करोड़ रुपए की लागत के 12 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री ने उज्जैन में युवाओं को केंद्र में रखकर तैयार की गई तीन महत्वपूर्ण पहलों का एक साथ लोकार्पण एवं शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रोजेक्ट स्वाध्याय (Coding for All) का शुभारंभ किया। इस प्रोजेक्ट के जरिए विद्यार्थियों को कम उम्र से ही कोडिंग और डिजिटल सोच से जोडा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने UtkarshUjjain.com वेब पोर्टल का भी शुभारंभ किया। यह पोर्टल युवाओं के लिए सीखने, मार्गदर्शन और अवसरों का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनेगा। साथ ही कौशल सेतु इंडस्ट्री-लीड स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम का भी आगाज किया। कौशल सेतु शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को पाटते हुए युवाओं को वास्तविक इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप तैयार करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह तीनों पहले उज्जैन के युवाओं को केवल डिग्री तक ही सीमित नहीं रखेंगी, बल्कि उन्हें जॉब-रेडी, स्टार्टअप-रेडी और फ्यूचर-रेडी बनाने का आधार तैयार करेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन शहरी क्षेत्र में 124 करोड़ रुपए लागत से बनने वाले 11 विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया। इसमें करीब 102 करोड़ रुपए लागत से विभिन्न सड़कों का चौड़ीकरण कार्य, 9.50 करोड़ रुपए लागत से कपिला गौशाला (3000 गौ-वंश क्षमता वाली) का संवर्धन एवं विकास कार्य, 8.75 करोड़ रुपए लागत से पंवासा क्षेत्र में ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में विकास कार्य, 3.47 करोड़ रुपए लागत से कानीपुरा में स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स का निर्माण तथा लगभग 5 करोड़ रुपए लागत से नवीन जनपद पंचायत भवन निर्माण कार्य का भूमिपूजन भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों के अलावा 45 करोड़ लागत के अन्य काम भी प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि उज्जैन के इस पुराने हॉकी स्टेडियम में आधुनिक एस्ट्रोटर्फ लगाया जाएगा, जिससे यहां इंटरनेशनल हॉकी मैच हो सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में भारतीय खिलाड़ी लगभग सभी खेलों में पदक विजेता बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मध्यप्रदेश के युवाओं को नौकरी लेने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनाने का प्रयास कर रहे हैं। आज की गई पहलें कल इसी दिशा में हमारी मदद करेंगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सीखो-कमाओ योजना, स्किल इंडिया मिशन और प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम जैसी पहलें युवाओं को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव देकर उन्हें बाजार और उद्योगों के लिए तैयार कर रही हैं। यही सही अवसर है कि उज्जैन के युवा स्वयं को आने वाले बेहतर कल के लिए अभी से तैयार करें। अद्भुत होगा सिंहस्थ – 2028 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। यह भारतीय धर्म, संस्कृति, आध्यात्म और पर्यटन का अद्भुत समागम है। सिंहस्थ को देखते हुए सरकार ने भी सभी तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। हमारी कोशिश है कि 30 किलोमीटर लम्बे घाटों में 24 घंटे में 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु शिप्रा के शुद्ध जल में स्नान/आचमन कर लें। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ को बेहतर बनाने के लिए हमने उज्जैन में 2675 करोड़ रुपए की लागत से 33 प्रमुख कार्यों को मंजूरी दे दी है। इन कामों पर क्रियान्वयन भी शुरू हो चुका है। सिंहस्थ के दौरान क्राउड मैनेजमेंट पर हमारा विशेष ध्यान रहेगा। इसीलिए संपूर्ण मेला क्षेत्र को फोर लेन और सिक्स लेन मार्गों से जोड़कर निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा रही है। श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उज्जैन को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी दिशा में उज्जैन में आधुनिक मेडिसिटी का निर्माण प्रगति पर है। यहां एक नया इंडस्ट्रियल पार्क भी बनाया जा रहा है। इंजीनियरिंग कॉलेज के पुराने कैम्पस में नया आईटी पार्क और साइंस सिटी बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज प्रोजेक्ट स्वाध्याय के लिए 3 हजार युवाओं के लिए निनौरा और मक्सी के पास 2 हजार युवाओं के लिए कौशल विकास केंद्र शुरू किए हैं। इंदौर-उज्जैन के बीच भविष्य में मेट्रो भी दौड़ेगी, लेकिन उससे पहले वंदे भारत मेट्रो ट्रेन की सौगात मिलेगी। शहर के चिंतामण गणेश स्टेशन को भी मुख्य स्टेशन के तौर पर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मोहनपुरा में भी एक नया रेलवे स्टेशन बनेगा। उज्जैन के समीप ही एक बड़ा एयरपोर्ट भी बनाया जा रहा है, जिससे श्रद्धालु सीधे उज्जैन में ही उतर सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में शनि लोक का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 140 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। यह शनि लोक आस्था और पर्यटन के क्षेत्र में उज्जैन की एक और नई पहचान स्थापित करेगा। उज्जैन को दूसरे शहरों से जोड़ने के लिए यहां चारों दिशाओं में फोरलेन बन रहे हैं। यहां करीब 12-13 नए पुल भी निर्माणाधीन हैं। इससे आवागमन बेहतर होगा। … Read more

भोपाल का रुतबा बढ़ेगा, 1756 गांव और तहसीलों का होगा विकास, ग्रेटर भोपाल में होगा अहमदाबाद जैसा बदलाव

 भोपाल  नए साल में भोपाल सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक विशाल महानगर (मेट्रोपॉलिटन रीजन) के रूप में अपनी पहचान दर्ज कराएगा। गुजरात के अहमदाबाद की सेप्ट (सीईपीटी) यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर एक ऐसा सुपर मैप तैयार किया जा रहा है, जो भोपाल के साथ सीहोर, रायसेन, विदिशा और राजगढ़ की सीमाओं को एक सूत्र में पिरो देगा। भोपाल की धड़कन इन जिलों में एक साथ सुनाई देगी अब भोपाल की धड़कन सीहोर, रायसेन, विदिशा और राजगढ़ में एक साथ सुनाई देगी। मेट्रोपालिटन अथॉरिटी ने हर शहर को उसकी ताकत के अनुसार एक नया रोल दिया है। पांच शहर, पांच अलग पहचान     भोपाल : सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और एडमिनिस्ट्रेटिव हब।     सीहोर व रायसेन : भोपाल के नए इंडस्ट्रियल पावरहाउस।     विदिशा : दुनिया के नक्शे पर चमकता हेरिटेज हब।     राजगढ़ : खेती और उद्योग का एक अनोखा संगम। पहले चरण में 8,791 वर्ग किमी क्षेत्र फाइनल फिलहाल पहले चरण में 8,791 वर्ग किमी का क्षेत्रफल फाइनल किया गया है। जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 10 हजार वर्ग किमी किया जाएगा। बीडीए के अधिकारी इस प्रोजेक्ट को नए साल में राकेट की रफ्तार देने वाले हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा वॉटर मैनेजमेंट और कमर्शियल लैंड के सर्वे से होगा, जिससे भविष्य में पानी की किल्लत नहीं होगी और उद्योगों के लिए पर्याप्त जमीन मिलेगी। विकास के साथ ग्रीन कवच भी भोपाल अपनी हरियाली के लिए जाना जाता है। इसलिए मेट्रोपॉलिटन रीजन में उपजाऊ जमीन और पर्यावरण से कोई समझौता नहीं होगा। प्रदूषण नियंत्रण और हरियाली के लिए अलग से कैपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान बनाया जा रहा है। कनेक्टिविटी: अब सिर्फ सड़कें नहीं, बल्कि सैटेलाइट टाउन्स और ग्रोथ सेंटर भोपाल को जोड़ेंगे। रोजगार के अवसर : पांच जिलों के जुड़ने से आइटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लाखों नौकरियां पैदा होंगी। रियल एस्टेट : आसपास के क्षेत्रों में जमीन की कीमतों और निवेश में उछाल की संभावना। इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (IMR) के विस्तार पर विचार, भविष्य में होगा बड़ा बदलाव इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (आइएमआर) के विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज है। माना जा रहा है कि इससे औद्योगिकीकरण, निवेश, रोजगार और निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी, लेकिन विशेषज्ञों का साफ कहना है कि विस्तार से पहले सुधार जरूरी है, वरना यह महत्वाकांक्षी योजना शहर के लिए भारी पड़ सकती है। शहर का क्षेत्रफल बढ़ने से आसपास के ग्रामीण इलाके शहरी दायरे में आएंगे, जिससे नए औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और रोजगार के अवसर बन सकते हैं। इंदौर के कई उत्पाद पहले से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान रखते हैं, जिन्हें मेट्रोपॉलिटन रीजन का फायदा मिल सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार इंदौर को एक बड़े मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित कर रही है, जिसमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार और शाजापुर जिलों के लगभग 1756 गांवों और कई तहसीलें शामिल होंगी, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र का समग्र विकास, औद्योगीकरण और बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है एक्सपर्ट बोलेः योजना के बिना विस्तार विनाशकारी अर्थशास्त्री एवं डीएवीवी के प्रोफेसर कन्हैया आहूजा का कहना है कि सिर्फ क्षेत्रफल बढ़ाने से कोई शहर स्मार्ट या विकसित नहीं बनता। ट्रांसपोर्ट, जल आपूर्ति, स्वास्थ्य व इंफ्रास्ट्रक्चर की दीर्घकालिक योजना नहीं बनी तो शहर अव्यवस्थित शहर में बदल जाएगा। अवसर बड़े लेकिन चुनौतियां उससे भी बड़ी विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान हालात में इंदौर बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। यदि इन समस्याओं को दूर किए बिना मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार किया गया, तो शहरी दबाव कई गुना बढ़ जाएगा। क्या होना चाहिए प्राथमिक एजेंडा ? -पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मजबूत नेटवर्क -मेट्रो परियोजना को पूर्ण क्षमता से चालू करना -बस परिवहन को फिर से सशक्त बनाना -जल आपूर्ति और सीवरेज सिस्टम का विस्तार -स्वास्थ्य और शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश -औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संतुलन मेट्रोपोलिटन रीजन का विस्तार इंदौर को औद्योगिक, आर्थिक और निर्यात के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है, लेकिन यह तभी संभव है, जब विस्तार से पहले सुधार और सपनों के साथ सिस्टम पर भी बराबर काम किया जाए, वरना मेट्रोपोलिटन रीजन का सपना, शहरी संकट में बदल सकता है। कहां-कहां पिछड़ रहा है इंदौर ? 1- इंफ्रास्ट्रक्चर शहर की सड़कों, फ्लाईओवर, ड्रेनेज और शहरी ढांचे का विकास बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के अनुपात में नहीं हो पाया है। कई इलाकों में ट्रैफिक जाम और जलभराव आम समस्या बन चुके हैं। 2- पब्लिक ट्रांसपोर्ट सबसे कमजोर कड़ी मेट्रो परियोजना अब भी अधूरी, बीआरटीएस बंद हो चुका है और सरकारी बस परिवहन सीमित है। नतीजा यह है कि शहर के अधिकांश नागरिक निजी वाहनों पर निर्भर हैं, जिससे ट्रैफिक और प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। 3- सड़कों और कनेक्टिविटी की कमी नईकॉलोनियों और बाहरी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी कमजोर है। सड़कों की गुणवत्ता और क्षमता दोनों ही जरूरत से कम हैं, जिससे रोजमर्रा की आवाजाही चुनौती बन गई है। 4- पानी बना सबसे बड़ा नर्मदा जल योजना का तीसरा चरण अधूरा है। वर्तमान में शहर की 35-40 प्रतिशत आबादी तक नर्मदा का पानी नहीं पहुंच रहा। यदि मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार हुआ तो जल आपूर्ति की मांग कई गुना बढ़ेगी, जो भविष्य के लिए बड़ा खतरा है। 5- स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ेगा बोझ क्षेत्र विस्तार के साथ आबादी बढ़ेगी। ऐसे में अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ना तय है। अभी से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना अनिवार्य होगा।

2500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली तीसरी रेल लाइन निर्माण में तेजी, 361 पुल और 4 टनल होंगे शामिल

 इटारसी भोपाल-इटारसी के बाद अब इटारसी-आमला के बीच तीसरी रेल लाइन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। आमला से इटारसी के बीच 130 किमी क्षेत्र में तीसरी रेल लाइन बिछाने के लिए मिट्टी का बेस तैयार किया जा रहा है। जिसके बाद आगे काम होगा। 40 गांवों से ली गई 16 हेक्टेयर जमीन नर्मदापुरम और बैतूल जिले में जमीन अधिग्रहण में हुई देरी की वजह से इटारसी-आमला (Itarsi-Amla third railway line) सेक्शन में निर्माण कार्य देरी से शुरू हुआ। तीसरी रेल लाइन प्रोजेक्ट के लिए बैतूल जिले के 3 तहसीलों के 40 गांवों में रहने वाले 290 किसानों की 16.036 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई है। तीसरी रेलवे लाइन का काम पूरा होने के बाद रेल यातायात ओर बेहतर होने की उम्मीद है। खास बात यह भी है कि इस रेल रूट पर घाट सेक्शन होने की वजह से भी यातायात में परेशानी आती है। तीसरी लाइन बनने के बाद राहत मिलने की उम्मीद है। चार स्थानों पर बनेंगे टनल तीसरी लाइन के लिए मरामझिरी-धाराखौह घाट सेक्शन में चार स्थानों पर कुल 1.40 किमी लंबी सुरंग बनाई जाएगी। इटारसी से नागपुर के बीच 267 किलोमीटर की लंबाई में तीसरी लाइन बिछाई जाना है। जिसके बीच 27 रेलवे स्टेशन आएंगे। साथ ही 361 पुल-पुलियाओं का निर्माण भी किया जाएगा। प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 2525 करोड़ से अधिक भोपाल से इटारसी तक तीसरी लाइन बिछाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। रेलवे द्वारा इटारसी से नागपुर के बीच तीसरी लाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। प्रोजेक्ट पर 2525.73 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। वर्तमान में जो रेलवे लाइन मौजूद है, उसके समानांतर ही तीसरी लाइन बिछाने के लिए मिट्टी का बेस बनाया जा रहा है। इसलिए जरूरी तीसरी लाइन वर्तमान में रेलवे के पास नागपुर-इटारसी सेक्शन में केवल दो लाइन हैं। इन लाइनों से यात्री और और गुड्स ट्रेनों का संचालन किया जाता है। यात्री गाड़ियों को निकालने के लिए अक्सर गुड्स ट्रेनों को घंटों तक कहीं भी रोक दिया जाता है। इन्हीं समस्याओं के चलतेतीसरी लाइन बिछाई जा रही है. ताकि यात्री ट्रेनों के लिए गुड्स ट्रेनों को न रोकना पड़े और वे भी सही समय पर पहुंच सके। (MP News) बेहतर होगा रेल यातायात… रेल यातायात को बेहतर बनाने के लिए निर्माण कार्य हो रहे हैं। भोपाल-इटारसी के में तीसरी लाइन के बाद इटारसी से नागपुर के बीच भी तीसरी रेल लाइन का काम कराया जा रहा है। – नवल अग्रवाल, पीआरओ रेल मंडल भोपाल

इंदौर में आयुर्वेदिक कॉलेज ने 220 कैंसर मरीजों को दी ओजोन थेरेपी, स्वास्थ्य में सुधार

इंदौर  इंदौर के शासकीय अष्टांग आयुर्वेदिक कॉलेज में ओजोन थेरेपी के माध्यम से देशभर के कैंसर मरीजों को लाभ मिल रहा है। गत पांच महीनों में 220 से अधिक मरीजों को यह थेरेपी दी जा चुकी है। ओजोन थेरेपी शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाकर कैंसर मरीजों को ऊर्जा प्रदान करती है। विशेषज्ञों के अनुसार ऑक्सीजन मानव शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक है। दूषित पर्यावरण, फेफड़ों की बीमारियों और अन्य कारणों से शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ओजोन थेरेपी शरीर में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है। अस्पताल में हर वर्ष एक हजार से अधिक मरीज कैंसर का इलाज करवाने के लिए आते हैं। इनमें कई मरीज देश के विभिन्न राज्यों से होते हैं। ओजोन थेरेपी द्वारा शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाकर बीमारियों को समाप्त किया जा सकता है, जिससे स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिलती है। आयुर्वेदिक इलाज से मिला लाभ     सुदामा नगर निवासी 66 वर्षीय महिला लाइपोसार्कोमा कैंसर से पीड़ित हैं। उन्होंने ऑपरेशन करवाया और फिर कीमोथेरेपी भी करवाई, लेकिन समस्या कम नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने आयुर्वेदिक इलाज लेना शुरू किया और अब तक 15 ओजोन थेरेपी ले चुकी हैं, जिससे वे स्वस्थ महसूस कर रही हैं। नवीन आर्य को आंत का कैंसर है। ऑपरेशन हो चुका है और कीमोथेरेपी भी ले चुके हैं। ओजोन थेरेपी के बाद उन्हें आराम मिला है। बैतूल निवासी 55 वर्षीय महिला को स्तन कैंसर है, जिसमें गांठ बनी हुई है। उन्होंने ऑपरेशन नहीं करवाया है और इंदौर में रहकर ओजोन थेरेपी ले रही हैं, जिससे वे स्वस्थ महसूस कर रही हैं। इंदौर के 53 वर्षीय शिवदत्त जोशी को जीभ का कैंसर है। वे पिछले कुछ समय से ओजोन थेरेपी ले रहे हैं, जिससे उन्हें कैंसर की समस्या में राहत मिल रही है। पिछले पांच माह में ओजोन थेरेपी लेने वाले मरीज माह     मरीज अगस्त     41 सितंबर     102 अक्टूबर     46 नवंबर     24 दिसंबर     19 (अब तक) अन्य बीमारियों में भी सहायक यह थेरेपी अन्य बीमारियों में भी सहायक है। थेरेपी द्वारा शरीर की कोशिकाएं अधिक आक्सीजन अवशोषित करती हैं, जिससे शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। अस्पताल की यूनिट में डॉ. श्वेता वर्मा, डॉ. शेखर पटेल, भारत प्रजापति, कमलेश पटेल एवं निशा मालवीय मरीजों का इलाज कर रहे हैं। तीन हजार वर्ष पुरानी पद्धति विशेषज्ञों का कहना है कि यह चिकित्सा पद्धति नई नहीं है। लगभग तीन हजार वर्ष पहले पतंजलि योग सूत्रों में भी प्राणायाम के माध्यम से शरीर में ऑक्सीजन बढ़ाने की बात कही गई थी। आधुनिक यूरोपीय देशों में ओजोन थेरेपी का लंबे समय से उपयोग किया जा रहा है और इसे विज्ञानी रूप से लाभकारी माना गया है। सप्ताह में दो दिन की जाती है थेरेपी     ओजोन, ऑक्सीजन का एक सक्रिय रूप है, जो शरीर के रक्त, लसिका और ऊतकों में जाकर कोशिकाओं से जुड़ता है। इस थेरेपी में एक विशेष मशीन के माध्यम से शरीर में ऑक्सीजन प्रवाहित की जाती है। इससे कैंसर कोशिकाओं को समाप्त करने, शरीर को डिटॉक्स करने और घावों को भरने में सहायता मिलती है। यह थेरेपी सप्ताह में दो दिन दी जाती है। – डॉ. अखिलेश भार्गव, विभागाध्यक्ष, शल्य तंत्र विभाग  

महाकाल महालोक बनने के बाद महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं और दान की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी, 5.5 करोड़ भक्तों ने किए दर्शन

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर साल 2025 मे भी देश-विदेश के आस्थावानों का प्रमुख केंद्र रहा। एक जनवरी 2025 से अब तक 5.5 करोड़ दर्शनार्थियों ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। इसी के साथ मंदिर में 100 करोड़ रुपये से अधिक का दान भी आया। करीब 13 करोड़ रुपये का सोना-चांदी भी भेंट के रूप में प्राप्त हुआ है। कुल मिलाकर यह गत वर्ष की तुलना में अधिक है। बीते वर्ष 92 करोड़ रुपये दान के रूप में प्राप्त हुए थे। 12 ज्योतिर्लिंग में से एक बाबा महाकाल का धाम लाखों करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का खास केंद्र है। वर्ष 2025 में बाबा महाकाल के धाम में धन वर्षा का हैरान कर देने वाला आंकड़ा सामने आया है। एक अरब रुपये से अधिक का दान मंदिर समिति को वर्ष भर में अलग-अलग माध्यमों से मिला है। मंदिर समिति के अनुसार एक जनवरी 2025 से 15 दिसंबर 2025 तक 5.50 करोड़ श्रद्धालुओं ने साल भर में यह दान राशि अलग-अलग माध्यमों से दी है। प्रत्येक वर्ष श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति के द्वारा यह आंकड़ा मंदिर समिति द्वारा जारी किया जाता है। महाकाल महालोक बनने के बाद से लगातार दान में भी बढ़ोतरी हुई है। यह सभी दान राशि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुविधा सुगम दर्शन व्यवस्थाओं में उपयोग में ली जाती है। बाबा महाकाल का दरबार मंदिर समिति अध्यक्ष और कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया की साल भर में जो सावन का महीना था। उसी में लगभग 30 करोड़ का दान मंदिर समिति को मिला है। जिससे समझ में आता है कि प्रत्येक वर्ष दान राशि मंदिर में बढ़ रही है, क्योंकि पिछले वर्ष सावन के महीने में यह आंकड़ा 21-22 करोड़ का था। ऐसे में साल भर का जो आंकड़ा आया है। वह वाकई हैरान करता है। मंदिर समिति इसी दान राशि से अपनी तमाम व्यवस्थाओं को संचालित करती है। पिछले साल 2024 में जो दान राशि थी, वह लगभग 92 करोड़ रुपये की थी इस बार अधिक है। पिछले वर्ष की तुलना में 15 करोड़ अधिक दान मिला है। यानि इस बार 1 अरब 07 करोड़ 93 लाख है। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि बीते 11 महीने 15 दिनों में कुल 107 करोड़ 93 लाख की आय दान पेटी और शीघ्र दर्शन, आभूषणों के माध्यम से हुई है। जिसमें 592.366 किलो चांदी, 1483.621 ग्राम सोना, जिनकी कीमत लगभग 13 करोड़ से अधिक है। साल भर में अभी 2 दिन शेष है, ऐसे में उम्मीद है कि यह आंकड़ा और बढ़ेगा। प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया की 2025 में 1483.621 ग्राम सोना जो 2024 में 1533 ग्राम था, 592.366 ग्राम चांदी 2025 में जो 2024 में 399 किलो थी। यानी इस वर्ष चांदी का दान ज्यादा मिला है। 13 करोड़ से अधिक के आभूषण हैं। ऐसे ही नकद राशि 43 करोड़ 43 लाख, शीघ्र दर्शन से 64 करोड़ 50 लाख की राशि मिली है। महाकाल महालोक बनने के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या महाकाल मंदिर में श्री महाकाल महालोक बनने और अक्तूबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसका लोकार्पण करने के बाद से ही यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। पहले मंदिर में रोजाना 35 से 40 हजार श्रद्धालु आते थे। श्री महाकाल महालोक के बाद संख्या 80 हजार से एक लाख प्रतिदिन पहुंच गई। पर्व त्योहार जैसे श्रावण सोमवार, महाशिवरात्रि आदि पर ये संख्या दो लाख के पार हो जाती है। अनुमान है कि आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ेगी। एक नजर इस साल के आंकड़ों पर     5.5 करोड़ दर्शनार्थियों ने किए महाकाल दर्शन।     43 करोड़ रुपये विभिन्न दानपेटियों से भेंट के रूप में प्राप्त हुए।     64 करोड़ रुपये शीघ्र दर्शन व्यवस्था (टिकट) से मंदिर समिति को प्राप्त हुए।     13 करोड़ रुपये का सोना-चांदी भी भेंट स्वरूप मंदिर को मिला है। क्या शामिल क्या नहीं….? मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि 1 अरब से अधिक के दान में शीघ्र दर्शन, दान पेटी, लड्डू प्रसादी, नगद और आभूषणों को जोड़ा गया है। दान राशि में भस्म आरती बुकिंग, अभिषेक पूजन, अन्न क्षेत्र, धर्मशाला बुकिंग, फोटोग्राफी मासिक शुल्क, भांग एवं ध्वज बुकिंग उज्जैन दर्शन बस सेवा से होने वाली आय को शामिल नहीं किया गया है।  

गांव के आत्मनिर्भर होने से देश होगा आत्मनिर्भर: उप मुख्यमंत्री देवड़ा, 21 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण

गांव के आत्मनिर्भर होने से देश होगा आत्मनिर्भर : उप मुख्यमंत्री देवड़ा ग्राम पिपलिया कराड़िया में 21 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया लोकार्पण मंदसौर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सोमवार को मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पिपलिया कराड़िया में लगभग 21 करोड़ रुपये की लागत से किए गए विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि गांव जब आत्मनिर्भर बनेंगे, तभी देश आत्मनिर्भर बनेगा। उन्होंने ग्रामीणों से स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने, बच्चों एवं अभिभावकों को स्वच्छता अभियान में सहभागी बनाने तथा अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि आज मल्हारगढ़ क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में सड़कों का व्यापक विकास हुआ है। सिंचाई, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, भवन एवं बिजली सहित प्रत्येक क्षेत्र में निरंतर विकास कार्य हो रहे हैं, जिससे प्रदेश तेजी से प्रगति की ओर बढ़ रहा है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने 01 करोड़ 7 लाख रुपये की लागत से निर्मित पिपलिया कराड़िया गांव से हाईस्कूल पहुंच मार्ग एवं 01 करोड़ 77 लाख रुपये की लागत से निर्मित खण्डेरियामारू से नावनखेड़ी मार्ग का लोकार्पण किया। उन्होंने 7 करोड़ 86 लाख रुपये की लागत से लिलदा से नाहरगढ़ पित्याखेड़ी मार्ग का भूमि-पूजन किया। इसके साथ ही 6 करोड़ 90 लाख 97 हजार रुपये की लागत से निर्मित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सुरी तथा 1 करोड़ 99 लाख 90 हजार रुपये की लागत से निर्मित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल पिपलिया कराड़िया का भी लोकार्पण किया। उप मुख्यमंत्री ने ग्राम पाल्यामारु एवं ग्राम लीलदा में 65-65 लाख रुपये की लागत से निर्मित 2 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर जिला योजना समिति सदस्य राजेश दीक्षित, जनपद अध्यक्ष एवं अन्य जनप्रतिनिधि के साथ जिले के अधिकारी भी उपस्थित रहे।  

भोपाल में पांच राज्यों की शैक्षिक लीडरशिप कार्यशाला का आयोजन, संचालक लोक शिक्षण ने किया शुभारम्भ

पांच राज्यों की शैक्षिक लीडरशिप कार्यशाला का आयोजन भोपाल में संचालक लोक शिक्षण ने किया कार्यशाला का शुभारम्भ भोपाल राष्ट्रीय शैक्षिक नेतृत्व परिषद (एनसीएसएल) नीपा द्वारा 5 राज्यों बिहार, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरियाणा तथा मध्यप्रदेश की लीडरशिप एकेडमी की समीक्षा एवं योजना निर्माण कार्यशाला का आयोजन भोपाल में एनसीएसल (नेशनल लीडरशिप एकेडमी) नीपा द्वारा जा रहा है। यह कार्यशाला समग्र शिक्षा अभियान, एससीईआरटी तथा सीमेट के योजना निर्माण तथा लीडरशिप संबंधी कार्यो के राज्यों में संपादित कार्यों का रिव्यू एवं आगामी योजना निर्माण के संबंध में आयोजित की जा रही है। भोपाल के अशोका लेकव्यू में 29 से 31 दिसम्बर 2025 तक संचालित होने वाली क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ संचालक लोकशिक्षण डी.एस. कुशवाह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश सीमेट के संचालक एवं उप सचिव प्रमोद सिंह, नीपा नई दिल्ली की कार्यशाला प्रभारी डॉ. तृप्ति सिंह, डॉ. योगेश पहाड़िया, डॉ. पंकज सिंह भी उपस्थित थे। कार्यशाला में विभिन्न आमंत्रित राज्यों द्वारा अपने अपने राज्यों में संपादित अनुकरणीय कार्यो (बेस्ट प्रेक्टिसेस) का प्रस्तुतीकरण किया जा रहा है। कार्यशाला में प्रत्येक प्रदेश से 5 से 6 अधिकारियों की सहभागिता की जा रही है। एनसीएसएल नीपा द्वारा मध्यप्रदेश लीडरशिप एकेडमी की स्थापना वर्ष 2016 में की गई थी। वर्तमान में यह लीडरशिप एकेडमी, सीमेट के माध्यम से संचालित है। इसका नामांकन वर्ष 2023-24 में किया गया था। लीडरशिप एकेडमी के माध्यम से स्कूल शिक्षा विभाग में प्रधानाध्यापक से लेकर राज्य स्तरीय अधिकारियों के लीडरशिप कार्यक्रमों, मॉड्यूल निर्माण और प्रशिक्षण आदि का संचालन संपादित किया जाता है। इसमें लोक शिक्षण संचालनालय, राज्य शिक्षा केन्द्र एवं जनजातीय कार्य विभाग के द्वारा उपलब्ध कराये गये कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा बायपास निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा, विकास की दिशा में अहम कदम

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा बायपास निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में रीवा बायपास निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में 6-लेन बायपास के अंतर्गत रतहरा चौराहा मार्ग के चौड़ीकरण और कैनाल क्रॉसिंग से जुड़े तकनीकी विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि रीवा बायपास निर्माण कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा जाए और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण किया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि निर्माण के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी तकनीकी अथवा प्रशासनिक समस्या को तत्काल उच्च स्तर में अग्रेषित किया जाए, ताकि समय पर समाधान सुनिश्चित किया जा सके और परियोजना में किसी प्रकार की देरी न हो। बैठक में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मॉर्थ) के क्षेत्रीय अधिकारी रविन्द्र कुमार तथा मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमपीआरडीसी) के मुख्य अभियंता  राकेश जैन उपस्थित रहे।  

मंत्री कुशवाहा का बयान: समावेशी विकास के लिए सामाजिक न्याय से लेकर कृषि-उद्यानिकी तक मजबूत नींव रखी

विकास एवं सेवा के दो वर्ष सामाजिक न्याय से लेकर कृषि–उद्यानिकी तक, समावेशी विकास की रखी मजबूत नींव : मंत्री कुशवाहा म.प्र. उद्यानिकी के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य 2 वर्षों में उद्यानिकी रकबे में हुई सवा 3 लाख हैक्टेयर की वृद्धि भोपाल  सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन कल्याण एवं उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन–2047 और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को कृषि एवं उद्यानिकी के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। सामाजिक न्याय से लेकर कृषि–उद्यानिकी तक, समावेशी विकास की मजबूत नींव है। उन्होंने प्रदेश में गत 2 वर्षों में उद्यानिकी और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में हुए उपलब्धियों, नवाचारों और आगामी 3 वर्षों में विभाग की कार्य योजनाओं के संबंध में अवगत कराया। उद्यानिकी में रिकॉर्ड वृद्धि गत दो वर्षों में उद्यानिकी फसलों का रकबा 25.12 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 28.29 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसी अवधि में उत्पादन 389.10 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 425.68 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया है। प्रदेश की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 15.08 मीट्रिक टन, राष्ट्रीय औसत से अधिक है। मध्यप्रदेश मसाला उत्पादन में प्रथम, पुष्प उत्पादन में द्वितीय, सब्जी उत्पादन में तृतीय और फल उत्पादन में चतुर्थ स्थान पर है। जीआई टैग और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस रीवा का सुंदरजा आम और रतलाम का रियावन लहसुन जीआई टैग प्राप्त कर चुके हैं। प्रदेश की 15 फसलों का जीआई पंजीयन कराया गया है। इजराइल के तकनीकी सहयोग से मुरैना में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है, जबकि छिंदवाड़ा और हरदा में नए सीओई विकसित किए जा रहे हैं। खाद्य प्रसंस्करण और नवाचार प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के अंतर्गत 8,198 ऋण प्रकरण स्वीकृत किए गए हैं और 3,113 उद्यमियों को 108.64 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई है। सेंसर आधारित स्वचलित फर्टिगेशन, मखाना क्षेत्र विस्तार, एग्जोटिक सब्जी क्लस्टर, हाईटेक नर्सरी और इंक्यूबेशन सेंटर जैसे नवाचार लागू किए जा रहे हैं। आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना आगामी तीन वर्षों में उद्यानिकी फसलों का रकबा 33.39 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने, 15 हजार सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और 25 फसलों को जीआई टैग दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2026: कृषि वर्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2026 को कृषि वर्ष घोषित किया गया है। इसके अंतर्गत उद्यानिकी को बढ़ावा, खाद्य प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धन और रोजगार सृजन के माध्यम से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। सामाजिक न्याय और दिव्यांग कल्याण के क्षेत्र में अभिनव प्रयास मंत्री कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने गत दो वर्षों में सामाजिक और शारीरिक रूप से कमजोर वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई अभिनव और प्रभावी पहल की हैं। दिव्यांगजनों की क्षमताओं को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से विभाग निरंतर कार्य कर रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 6 लाख 97 हजार दिव्यांगजनों को प्रतिमाह 41.87 करोड़ रुपये की पेंशन वितरित की जा रही है। साथ ही 9 लाख 89 हजार से अधिक दिव्यांगजनों को यूडीआईडी कार्ड प्रदान किए जा चुके हैं, जिससे उन्हें विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन सशक्तिकरण और कृषि–उद्यानिकी के क्षेत्र में किए गए ये प्रयास प्रदेश को समावेशी, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश @2047 की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। शिक्षा, तकनीक और रोजगार पर विशेष फोकस दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए प्रदेश के 17 जिलों में शासकीय एवं अशासकीय विशेष विद्यालयों के तीन-तीन कक्षों को स्मार्ट क्लास के रूप में विकसित किया गया है। श्रवणबाधित दिव्यांगजनों की संवाद संबंधी कठिनाइयों को दूर करने के लिए क्यूआर कोड आधारित लाइव इंटरप्रेटर सुविधा प्रारंभ की गई है। अब तक 34 हजार 649 दिव्यांगजनों को 59 हजार से अधिक सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। रोजगार सृजन के क्रम में 2,589 दिव्यांगजनों को शासकीय सेवाओं में नियुक्ति दी गई है। निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर केन्द्र सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था एटिपिकल एडवांटेज के साथ 2 दिसंबर 2025 को एमओयू किया गया है। इसके माध्यम से दिव्यांगजनों को उनकी योग्यता के अनुसार निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक संस्था द्वारा 5 दिव्यांगजनों को रोजगार दिया जा चुका है। खेल, विवाह प्रोत्साहन और विशेष उपलब्धियां दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 958 दंपत्तियों को लाभ दिया गया है। खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। तैराकी प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए सत्येन्द्र लोहिया, रामबरन पाल एवं सद्दाम खान को पाँच–पाँच लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। वृद्धजनों का सम्मान: सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन प्रदेश में 81 वृद्ध आश्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें राज्य, केंद्र और जनसहयोग से संचालन हो रहा है। प्रति हितग्राही 2,200 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण सहायता सहित अन्य आवश्यक व्ययों का वहन किया जा रहा है। मंत्री कुशवाहा ने बताया कि राजधानी भोपाल में आधुनिक सुविधाओं से युक्त पेड ओल्ड एज होम का संचालन सेवा भारती मध्य भारत प्रांत द्वारा किया जा रहा है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन: 100 प्रतिशत ई-केवाईसी प्रदेश की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत 54 लाख से अधिक हितग्राहियों का 100 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण किया गया है। प्रतिमाह 325 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से सीधे खातों में अंतरित की जा रही है। नशामुक्त भारत अभियान: जनभागीदारी से जागरूकता “विकसित भारत का मंत्र, भारत हो नशे से स्वतंत्र” अभियान के तहत प्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके लिए 12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स तैयार किए गए हैं। मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह सहायता योजना: बड़ा सामाजिक संबल विगत 2 वर्षों में इस योजना के अंतर्गत 1 लाख 52 हजार हितग्राहियों को 838.44 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। पात्रता और आयोजन प्रक्रिया को सरल एवं प्रभावी बनाने के लिए योजना में संशोधन किया गया है, जिससे अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवार लाभान्वित हो सकें।  

कृषि मंत्री कंषाना ने की मंडी प्रांगणों को कृषि उन्मुख बनाने की प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने की अपील

मंडी प्रांगणों को कृषि उन्मुख बनाने की प्रभावी कार्ययोजना करें तैयार : कृषि मंत्री कंषाना मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के संचालक मंडल की 144वीं बैठक भोपाल  किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि मंडी प्रांगणों को कृषक उन्मुख बनाये जाने के लिये प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाये। किसानों को मंडियों में बेहतर सुविधाएं, पारदर्शी विपणन व्यवस्था एवं फसलों का उचित मूल्य दिलाना भी सुनिश्चित किया जाये। कृषि मंत्री कंषाना मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के संचालक मंडल की 144वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में सभी प्रस्ताव सर्व सम्मति से पारित किये गये। बैठक में सचिव किसान कल्याण तथा कृषि विकास निशांत बरबड़े, प्रबंध संचालक मंडी बोर्ड कुमार पुरुषोत्तम, पंजीयन सहकारी संस्था तथा मंडी बोर्ड के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में पारित प्रमुख प्रस्ताव     किराये के वाहनों के देयक भुगतान की संचालक मंडल से स्वीकृति।     म.प्र. राज्य कृषि विपणन बोर्ड के आवंटित वाहनों में माह अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक अवधि में पात्रता से अधिक डीजल/पेट्रोल व्यय की स्वीकृति।     भारत सरकार की प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान अंतर्गत प्राईस डिफिसिट पेमेंट स्कीम में खरीफ वर्ष 2025 के लिये सोयाबीन भावांतर भुगतान।     योजना के सतत् क्रियान्वयन के लिये ऋण लिये जाने की स्वीकृति बावत्।     राष्ट्रीय कृषि बाजार योजनांतर्गत / राष्ट्रीय कृषि विकास योजना / बोर्ड निधि मद अंतर्गत स्वीकृत प्रोजेक्ट एपीएमसी में क्लीनिंग, ग्रेडिंग और पैकेजिंग फेसिलिटी के संबंध में।     किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग सह अध्यक्ष मंडी बोर्ड से प्राप्त प्रस्ताव के अनुक्रम में बोर्ड निधि मद स्वीकृत सड़क निर्माण कार्यों का अनुसमर्थन।     प्रदेश अंतर्गत विभिन्न मण्डी समितियों में बोर्ड निधि से स्वीकृत निर्माण कार्यों का अनुसमर्थन।     प्रदेश की कृषि उपज मंडी समितियों में अपशिष्ट प्रबंधन के लिये वित्तपोषण बोर्ड निधि मद से करने सम्बन्धी अनुमोदन।