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मुख्यमंत्री के छोटे बेटे का विवाह सामूहिक सम्मेलन में सम्पन्न, जानें कौन-कौन बने गवाह

उज्जैन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के बेटे डॉक्टर अभिमन्यु यादव आज विवाह बंधन में बंध गए। उन्होंने अन्य जोड़ों के साथ एक सामूहिक विवाह समारोह में डॉक्टर इशिता पटेल के साथ सात फेरे लिए। कार्यक्रम में राज्यपाल मंगूभाई पटेल, योग गुरु बाबा रामदेव और बागेश्वर धाम सरकार के आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी शामिल हुए।   धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और बाबा रामदेव ने दिया दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, "हमने हमारी पदयात्रा में नारा दिया था कि जातपात की करो विदाई और आज यहां सब एक ही छत के नीचे हर जाति, धर्म के लोग फेरे ले रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह बेहद ही प्रशंसनीय कदम है। जहां एक तरफ ड्राइवर की शादी हो रही है तो दूसरी तरफ प्रदेश को ड्राइव करने वाले के बेटे की भी शादी हो रही है।" बाबा बागेश्वर ने कहा कि पदयात्रा में हमने नारा दिया था 'भेदभाव की करो विदाई, हम सब हिन्दू भाई भाई' मुख्यमंत्री जी ने इसे प्रैक्टिकल करके दिखा दिया। योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा, "इस तरह की शादी एक नजीर बनेगी। मेरा तो मानना है कि बाकी मुख्यमंत्रियों, नेताओं, उद्योगपतियों को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए कि महंगी शादी में होने वाले खर्च को कम करो। अब हमको डेस्टिनेशन वेडिंग से डिवाइन वेडिंग की ओर जाना है।"   दूल्हा-दुल्हन के लिए कितना शगुन? अखाड़ा परिषद की ओर से प्रत्येक दंपति को एक-एक लाख रुपए का शगुन घोषित किया गया है। पतंजलि योगपीठ की ओर से बाबा रामदेव ने भी प्रत्येक दंपति को एक-एक लाख रुपए देने की घोषणा की है। पहले 21 जोड़े थे, एक बाद में जुड़ा है, इसलिए अब 22 जोड़े हो गए हैं। सीएम मोहन ने सादगी से करवाई बेटे की शादी, दिया सामाजिक संदेश सीएम मोहन यादव ने अपने छोटे बेटे की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में करवाकर समाज को ये संदेश देने की कोशिश की, कि विवाह समारोह को सादगी के साथ भी मनाया जा सकता है। इससे काफी लोगों को प्रेरणा मिलेगी। 

दूल्हा-दुल्हन संग चमका मंडप: सामूहिक विवाह में सीएम के बेटे का अनोखा विवाह समारोह

उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन में आज सामूहिक विवाह सम्मेलन के मंच पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव और डॉ. इशिता यादव पारंपरिक रस्मों के साथ विवाह बंधन में बंध रहे हैं. दूल्हा-दुल्हन पूरी शाही पारंपरिक वेशभूषा में वरमाला और अन्य रस्मों के बीच सामूहिक विवाह के मंच पर हैं. इनके साथ अन्य जोड़े भी शादी की रस्में निभा रहे हैं. फूलों से सजे मंच पर गर्मजोशी और उत्साह का माहौल है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने बेटे की शादी किसी आलीशान होटल, रिसॉर्ट या विदेशी लोकेशन पर न करके 21 अन्य जोड़ों के साथ एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में कराने का फैसला लिया. इससे उन्होंने बड़ा सामाजिक संदेश दिया है कि अनावश्यक वैभव और दिखावे से ज्यादा महत्व परिवार, संस्कार और सामाजिक समानता का होता है. शादी की फोटो भी सामने आई है, जिसमें देखा जा सकता है कि दूल्हा शेरवानी और साफे में है, जबकि दुल्हन गहरे लाल रंग की कढ़ाईदार लहंगे में है. दोनों के चेहरे पर रस्मों के दौरान स्वाभाविक खुशी झलक रही है. उज्जैन के सांवरा खेड़ी में आयोजित इस सामूहिक विवाह सम्मेलन में कुल 21 जोड़े शामिल हैं. दोपहर से लेकर शाम तक फेरे, कन्यादान, विदाई सहित सभी पारंपरिक विधियां एक-एक करके संपन्न की जा रही हैं. सीएम परिवार की सादगी और आमजन के बीच बैठकर शादी करने का यह निर्णय कई परिवारों के लिए प्रेरणा है. 'हमें तो यह शादी ही सबसे भव्य लग रही है' आजतक से बातचीत में सीएम के बेटे दूल्हा डॉ. अभिमन्यु यादव ने कहा था कि यह शादी बिल्कुल साधारण नहीं है. मेरे लिए यह बहुत लैविश है. इतने लोग हमारे साथ हैं, सब खुश हैं. यही हमारे पिता और हमारी इच्छा थी कि शादी किसी दिखावे में नहीं, समाज के साथ जुड़े हुए तरीके से हो. निमंत्रण कार्ड से लेकर बैलगाड़ी तक… कई चीजें बनीं चर्चा का विषय शादी से एक दिन पहले आयोजित कार्यक्रम में अभिमन्यु और इशिता दोनों बैलगाड़ी में बैठे हुए नजर आए, हाथ में चश्मा और चेहरे पर मुस्कान… यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा. बिना किसी शाही तामझाम, साधारण छपाई और सीधी-सादी भाषा में छापा गया शादी का कार्ड भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. साधारण प्रिंट वाला निमंत्रण कार्ड, दूल्हा-दुल्हन का बैलगाड़ी में प्री-वेडिंग कार्यक्रम में शामिल होना और सामाजिक समानता के साथ संयुक्त विवाह का मंच… इन सबने इस शादी को चर्चा में ला दिया. उज्जैन में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और आयोजन समितियां मौजूद हैं. बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ को ध्यान में रखकर यातायात और सुरक्षा की अलग से व्यवस्थाएं की गई हैं.

शादी में दिखा भव्य नज़ारा: अभिमन्यु-इशिता के फेरे, रामदेव का मंत्रोच्चार और मोहन यादव का डांस

उज्जैन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के छोटे बेटे डॉ अभिमन्यु यादव और डॉ इशता पटेल हमेशा एक दूजे के हो गए. उज्जैन में रविवार को आयोजित भव्य आयोजन में दोनों ने एक दूसरे को वरमाला पहनाकर सात फेरे लिए. शादी की रस्मों के दौरान बाबा रामदेव ने मंत्रोच्चार किया. अभिमन्यु और इशता को यह शादी हमेशा याद रहेगी क्योंकि मोहन यादव ने इस शादी के माध्यम से समाज को एक खास संदेश दिया. सीएम मोहन यादव ने अपने बेटे के साथ ही इस शादी में अलग-अलग समाज के 21 जोड़ों की शादी भी करवाई और इसका पूरा खर्च मुख्यमंत्री के परिवार ने ही उठाया. किसी से इस आयोजन में उपहार भी नहीं लिया गया. अभिमन्यु संग 21 दूल्हे अपनी दुल्हनों को लेने पहुंचे इस शादी की सबसे खास बात ये रही कि अभिमन्यु अकेले घोड़ी पर सवार नहीं थे बल्कि उनके साथ 21 और दूल्हे भी घोड़ी पर सवार थे. एक साथ 21 दूल्हे अपनी अपनी दुल्हनों को लेने बारात लेकर पहुंचे. जिसने भी इतनी लंबी बारात देखी वह देखते ही रह गया. बारात में सीएम के परिवार के साथ रिश्तेदार और दोस्तों ने जमकर डांस किया साथ ही वहां मौजूद 21 दूल्हों के परिजन भी जमकर थिरके. भव्य बारात में जितना उत्साह देखा गया उतना ही उत्साह विवाह पंडाल में भी देखा गया. बाबा रामदेव ने किया मंत्रोच्चार 21 जोड़ों की शादी के भव्य आयोजन में जैसे ही वरमाला और सात फेरों की रस्में शुरू हुईं उस दौरान बाबा रामदेव और बाबा बागेश्वर मंत्रोच्चार करते रहे. बाबा रामदेव ने मंत्र पढ़े और इसी दौरान शादी की रस्में चलती रहीं. सभी रस्मों के बाद कई राज्यों के सीएम वर-वधू से मिले और उन्हें आशीर्वाद दिया. यहां पहुंचे कई संतों ने नवविवाहित जोड़ों को मंत्रोच्चार के साथ आशीर्वाद दिया और उनके वैवाहिक जीवन के खुशहाल होने की कामना की. बाबा रामदेव ने इस दौरान बाबा बागेश्वर से कहा कि महाराज आपका भी ब्याह ऐसे ही करेंगे. पकवान नहीं सादगी वाले व्यजंन बने वैसे तो वीवीआईपी की शादी में तरह तरह के व्यंजन बनते हैं लेकिन मोहन यादव की शादी में तरह तरह के पकवान नहीं देखे गए. 3 प्रकार का मीठा, 2 प्रकार का नमकीन, सब्जी-पूरी, दाल-रोटी और चावल इस आयोजन में बना और सभी ने खाने के स्वाद की सराहना की. इस आयोजन से यह भी संदेश दिया गया कि शादी विवाह के कार्यकम में आम आदमी को फिजूलखर्ची से बचना चाहिए. कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने दिया आशीर्वाद 11 राज्यों के मुख्यमंत्री, 8 राज्यों के राज्यपाल, 25 संत-महात्मा और कुल 42 परिवार को मिलाकर लगभग 30 हजार मेहमान इस शादी के साक्षी बने. जो भी वीआईपी और वीवीआईपी यहां पहुंचे सभी मुख्यमंत्री मोहन यादव की तारीफ करते दिखे. तारीफ इसलिए कि इस शादी में मोहन यादव के बेटे के साथ-साथ हर जोड़े के लिए शादी की एक समान व्यवस्था थी. शादी में ज्योतिरादित्य सिंधिया डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल, मप्र विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी वर वधू को आशीर्वाद दिया. राज्यपाल और संतों ने भी दिया आशीर्वाद मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल समेत कई राज्यों के राज्यपाल समेत बाबा रामदेव, बाबा बागेश्वर, अवधेशानंद, कैलाशानंद, रविंद्रपुरी, हरिगिरि, आचार्य विश्वात्मानंद जैसे ख्यातिनाम संतों ने पहुंचकर सभी वर-वधु को आशीर्वाद दिया. अखाड़ा परिषद और बाबा बागेश्वर देंगे नगद राशि इस भव्य आयोजन में किसी भी मेहमान से उपहार नहीं लिया गया. बल्कि सीएम के परिवार ने ही सभी नवविवाहित जोड़ों को उपहार स्वरूप गृहस्थी शुरू करने के लिए सभी जरुरी सामान दिए. एक और खास बात यह रही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और मनसा देवी ट्रस्ट हरिद्वार के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी महाराज और जूना अखाड़ा के मुख्य संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री स्वामी हरि गिरि महाराज ने सभी नव दंपति को आशीर्वाद स्वरूप सवा-सवा लाख रुपये देने की घोषणा की. इसके अलावा बाबा रामदेव ने भी अपनी ओर से वर माला के दौरान 1-1 लाख रुपए प्रत्येक जोड़े को देने की घोषणा की और मंत्रोच्चार करते हुए आशीर्वाद दिया. गीता कॉलोनी स्थित घर में हुईं शादी की रस्में शादी का ये कार्यक्रम वैसे तो 5 दिन पहले से ही शुरू हो गया था. मुख्यमंत्री के परिवार ने अपने बेटे-बहू की सभी रस्मों को शहर के गीता कॉलोनी स्थित अपने घर और वीवीआईपी बंगले से पूरा किया. वहीं अन्य सभी जोड़ों ने भी अपने शहर और अपने घरों से रस्मों को पूरा किया. वाकणकर ब्रिज के पास क्षिप्रा तट पर हुआ आयोजन यह वैवाहिक आयोजन सांवराखेड़ी स्थित वाकणकर ब्रिज के पास क्षिप्रा तट पर हुआ. इस कार्यक्रम में 5 विशेष डोम बनाए गए थे. इसके साथ ही एक विशाल मंच बनाया गया जो 40/100 साइज का और एक मंच 50/25 का बनाया गया. ये डोम भोपाल और उज्जैन के कुछ कारीगरों द्वारा तैयार किए गए.

सामूहिक विवाह समारोह में सीएम के बेटे ने लिए सात फेरे, बाबा रामदेव और बागेश्वर धाम सरकार की मौजूदगी

नई दिल्ली उज्जैन के पावन शिप्रा तट पर रविवार को परोपकार और परंपरा का अद्वितीय संगम देखा गया, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने पुत्र डॉ. अभिमन्यु और डॉ. इशिता के साथ 21 कन्याओं का सामूहिक विवाह सम्पन्न कर समाज के सामने मानवीय मूल्यों की मिसाल प्रस्तुत की। विवाह परिसर दिनभर मंगलध्वनियों, उत्साह और आशीर्वादों से सराबोर रहा। सुबह आठ बजे इम्पीरियल चौराहा से बरात रवाना हुई। ढोल–ताशों और लोकनृत्य की रौनक के बीच शोभायात्रा में मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट सहित कई मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधि और गणमान्य अतिथि शामिल रहे। विवाह स्थल पहुंचते ही आकर्षक मंच पर सभी नवयुगलों की वरमाला रस्म सम्पन्न कराई गई, जिसके बाद पूरा परिसर तालियों और शुभकामनाओं से गूंज उठा।   योग गुरु बाबा रामदेव रहे उपस्थित आशीर्वाद समारोह में मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल तथा योग गुरु बाबा रामदेव की विशेष उपस्थिति रही। राज्यपाल और बाबा रामदेव ने इस आयोजन को सामाजिक उत्तरदायित्व, संस्कार और संवेदनशीलता का प्रेरक उदाहरण बताया। इसके बाद 22 विशेष रूप से निर्मित मंडपों में एक साथ पाणिग्रहण और सप्तपदी की रस्में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न हुईं। यादव परिवार ने प्रत्येक नवविवाहित दंपती को संपूर्ण गृहस्थी सामग्री और मोटरसाइकिल भेंट कर नया जीवन शुरू करने के लिए सहयोग का भाव व्यक्त किया। बिना उपहार के केवल आशीर्वाद स्वीकार करने का निवेदन आयोजन की सबसे विशेष भावनात्मक पहचान बना। मोहन यादव बोले- हमारा सनातन संस्कृति से जुड़ाव सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था और सटीक प्रबंधन के बीच समारोह सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। शिप्रा तट पर हुआ यह अनोखा आयोजन सामाजिक सद्भाव, संवेदना और साझा उल्लास की अमिट याद छोड़ गया। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा- 16 संस्कारों से हमारा सनातन संस्कृति से जुड़ाव है। ये प्रधानमंत्री के मूल भाव सबका साथ, सबका विकास की अवधारणा पर हम काम कर रहे। यहां कोई बड़ा नहीं, कोई छोटा नहीं। सब दूल्हा- दुल्हन महाराज समान है। सब आज लखपति हो गए। 'देश का धन देश में ही खर्च होना चाहिए' बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा- संपूर्ण भारत में आज नवाचार हुआ। सामाजिक समरसता का संदेश आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ी ही सहजता से दिया है। ये अभूतपूर्व कार्य है। ऐसे कार्य से समरसता आएगी, बेटी के पिता पर ना कर्ज होगा ना विवाह पर ज्यादा खर्च। बाबा रामदेव ने कहा- वेडिंग डेस्टिनेशन का कांसेप्ट सराहनीय है। देश का धन देश में ही खर्च होना चाहिए। मध्य प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र गिरी महाराज, हरीगिरी महाराज, नरोत्तम मिश्र भी समारोह में शामिल हुए।  

नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता: बालाघाट में सुरक्षाबलों ने पकड़ा हथियारों का बड़ा जखीरा

बालाघाट MP के बालाघाट के किरनापुर थाना क्षेत्र के दो अलग-अलग जंगल इलाकों से सुरक्षा बलों ने माओवादियों द्वारा छिपाया गया बड़ा डंप बरामद (Security Forces Recover Maoist Dump) किया है। माओवादियों ने जमीन के भीतर दैनिक उपयोग की वस्तुएं, मेडिकल उपकरण, दवाइयां, बीजीएल (बैरल ग्रेनेड लांचर) के सेल समेत कई सामग्री छिपाकर रखी थी। ये डंप बोरबन सिरका मोजालडेरा और आलीटोला के जंगलों से प्राप्त हुए हैं। इस कार्रवाई की पुष्टि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (IPS) आदर्शकांत शुक्ला ने की है। सूत्रों के अनुसार, हाकफोर्स के जवानों को जंगल में माओवादियों की सक्रियता की जानकारी मिली थी। इसी आधार पर सर्चिंग के दौरान उठी हुई जमीन को BDDS टीम की मदद से जांचा गया। जांच में नीले रंग का एक ड्रम जमीन में दबा हुआ मिला। उसमें दैनिक जरूरत की सामग्री, माओवादी साहित्य, विभिन्न दवाएं (टैबलेट), इंजेक्शन, ओआरएस, कॉटन, सीरिंज, मल्टीविटामिन, ब्लड प्रेशर मॉनिटर और बीजीएल के सेल बरामद हुए। इस बरामदगी के बाद मलाजखंड दलम के एक दर्जन से ज्यादा नामजद माओवादियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

धीरेंद्र शास्त्री की शादी तय? बाबा रामदेव के एक बयान से मचा हलचल, सब हंस पड़े!

उज्जैन  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के बेटे की आज शादी है, लेकिन शादी से ज्यादा विवाह की जगह चर्चा का विषय बनी हुई है। तामाझाम से दूर मोहन यादव अपने बेटे की शादी सामूहिक कन्या विवाह समारोह में करा रहे हैं। लोग उनकी इस पहल की खूब तारीफ कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में पधारे पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भी शादी की चर्चा शुरू हो गई। और तो और बाबा बागेश्वर शादी कहां करेंगे,इसका फैसला बाबा रामदेव ने कर दिया है। बाबा रामदेव और बाबा बागेश्वर के बीच ये जुगलबंदी के दौरान ठहाके भी खूब लगे। सीएम मोहन यदव ने अपने बेटे की शादी सामूहिक विवाह समारोह में हो रही है। इसमें एमपी के राज्यपाल,विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, तमाम साधु संतों के साथ योग गुरु बाबा रामदेव और पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी पधारे। इस बीच धीरेंद्र शास्त्री ने कार्यक्रम में आए सभी वर-वधुओं को आशीर्वाद देने के साथ कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के इस कदम से एक संदेश जाएगा कि जब मेरे अति प्रिय और यशस्वी मुख्यमंत्री अपने बालक की शादी यहां कर रहे, इससे बड़ी-बड़ी जगहों में डेस्टिनेशन वेडिंग कर लाखें-करोड़ों खर्च करने वालों का खर्चा बचेगा और एक नया चलन होगा और लोग कहेंगे कि मैं भी अपने बालक का विवाह सामूहिक कन्या विवाह समारोह में कराउंगा। इसके बाद बाबा बागेश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि आप लोग कहें कि आप भी कर लो। इसके बाद परिसर में जोर के ठहाके लगने लगे। तभी बाबा रामदेव उठे और कहा कि चिंता मत करो महाराज आपका भी विवाह यहीं सामूहिक कन्या विवाह समारोह में ही कराएंगे। इतना सुनते ही बाबा बागेश्वर भी जोर से हंस पड़े और कहा कि पूज्य स्वामी जी आशीर्वाद ही देते हैं। बाबा बागेश्वर ने एक और जरूरी चीज कही कि यह बहुत शुभ है कि एक ही जगह सीएम का बेटा भी फेरे ले रहा और एक ड्राइवर का बेटा भी फेरे ले रहा।  

पारिवारिक रिश्तों में दरार: जेठ और बहू का अफेयर बना मौत का कारण? डेम में शव मिलने से हड़कंप

बालाघाट रामपायली थाना के अंतर्गत ग्राम सालेबर्डी में सनसनी फैली गई, जब जेठ-बहू के शव नाले पर बने डेम में पाए गए। इसकी जानकारी जैसे ही लोगों को मिलते गई वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। रामपायली पुलिस ने सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर शव बरामद कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है। बताया गया कि शनिवार की शाम से ही ये दोनों घर से लापता थे और रविवार को सुबह येरवाटोला के डेम से उनका शव पुलिस ने बरामद किया है। बताया जा रहा हैं कि उन दोनों के बीच प्रेम प्रसंग था। यह हत्या है या फिर आत्महत्या यह पुलिस जांच उपरांत ही कहा जा सकता है। महिला का नाम सीमा पति अजय राहंगडाले 40 वर्ष और प्रकाश पिता रोशनलाल राहंगडाले 45 वर्ष ग्राम सालेबर्डी निवासी है।   देर रात दोनों को येरवाटोला में देखा गया था जानकारी के अनुसार, प्रकाश राहंगडाले नल जल मिशन के कार्य में ठेकेदार के पास सुपरवाइजर का काम करता रहता था। शनिवार को प्रकाश और सीमा दोनों घर से लापता थे। बताया जा रहा है कि देर रात को येरवाटोला में देखा गया था। ग्रामीणों ने रविवार सुबह येरवाटोला के नाले पर बने डेम किनारे में बाइक, चप्पल दिखाई दिए। डेम में देखा गया तो महिला और पुरुष के शव दिखाई दिए। जिसके बाद ग्रामीणों का हुजूम लग गया। पुलिस को जानकारी दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने डेम में डूबे शव को बरामद किया। जहां पहचान प्रकाश राहंगडाले और सीमा राहंगडाले के रूप में हुई। जहां शव मिला वहां अधिक पानी नहीं था। ग्रामीणों ने कहा कि दोनों शनिवार से लापता थे। दोनों एक ही परिवार के हैं और आपस में जेठ और बहू का रिश्ता हैं। येरवाटोला रोड़ में डेम में दोनों का शव पाया गया हैं। बताया गया कि कीटनाशक की एक बोतल भी मिली है।  

IAS संतोष वर्मा को ‘बरी’ करने वाले न्यायाधीश पर संकट, सरकार कर सकती है बड़ी कार्रवाई

इंदौर  ब्राह्मण बेटियों पर असभ्य टिप्पणी करने वाले विवादित आइएएस अधिकारी (IAS) व मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) के अध्यक्ष संतोष वर्मा पर दर्ज फर्जीवाड़ा केस की फाइल खुल गई है। इस मामले में पुलिस एक न्यायाधीश पर कड़ी कार्रवाई कर सकती है। पुलिस ने हाई कोर्ट की अनुमति के बाद न्यायाधीश से पूछताछ के लिए 50 सवालों की सूची तैयार की है। फर्जी आदेश दिखाकर पदोन्नति का रास्ता साफ किया दरअसल वर्मा ने कूटरचित न्यायालय आदेश के जरिए आइएएस कैडर में पदोन्नति प्राप्त की थी। उनके खिलाफ एक महिला ने शारीरिक शोषण का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मामले में उन्होंने बरी होने का फर्जी आदेश दिखाकर आइएएस कैडर में पदोन्नति का रास्ता साफ किया था। मामला खुला तो इसमें स्पेशल जज विजेंद्र सिंह रावत की भूमिका भी संदिग्ध मिली। तब उनका तबादला कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।   हाई कोर्ट ने विधि अनुसार कार्रवाई की अनुमति दी मामला हाई कोर्ट में चल रहा था। चार वर्ष पुराने इस केस में पुलिस अभी तक हाई कोर्ट की अनुमति का इंतजार कर रही थी। एसीपी विनोद दीक्षित ने हाई कोर्ट से मिली अनुमति की पुष्टि करते हुए कहा है कि कोर्ट ने पुलिस के प्रतिवेदन पर विधि अनुसार कार्रवाई की अनुमति दे दी है। न्यायाधीश का निलंबन हुआ तो एसआइटी सक्रिय हुई न्यायालय का फर्जी आदेश बनाए जाने के मामले में जांच में पता चला था कि मास्टरमाइंड स्वयं न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत हो सकते हैं जो वर्ष 2021 में जिला कोर्ट में पदस्थ रहे हैं। संदेह के आधार पर हाई कोर्ट ने उनका तबादला कर दिया, लेकिन गिरफ्तारी की अनुमति नहीं दी। न्यायाधीश को नोटिस जारी कर बुलाया जाएगा उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद हाल ही में विवादित न्यायाधीश का निलंबन हुआ तो पुलिस की एसआइटी सक्रिय हुई और अग्रिम कार्रवाई की अनुमति मांगी। हाई कोर्ट ने 20 नवंबर को विधि अनुसार कार्रवाई करने की हरी झंडी दे दी। जांच में शामिल एक अफसर के अनुसार न्यायाधीश को नोटिस जारी कर बुलाया जाएगा। गौरतलब है कि वर्मा को भी चार वर्ष पूर्व इसी तरह बुलाकर गिरफ्तार किया था। हार्ड डिस्क रिकवर करवाने पर मिले फर्जी फैसले के सबूत पुलिस को जांच की शुरुआत से ही न्यायाधीश पर शक था। पुलिस ने उनकी कोर्ट से कंप्यूटर जब्त किया तो फैसला डिलीट मिला। हार्ड डिस्क जब्त कर फोरेंसिक लैब में जांच करवाई गई। हार्ड डिस्क में दो फैसले मिले, जिसमें एक राजीनामा और दूसरा बरी का बनाया गया था। न्यायाधीश ने खुद को छुट्टी पर बताया था, लेकिन मोबाइल टावर लोकेशन निकालने पर कोर्ट में ही उनकी मौजूदगी मिली। इसके बाद साक्ष्य एकत्र हो गए। पुलिस को वर्मा की चैटिंग से भी अहम सबूत मिला है। वर्मा को एक अन्य मजिस्ट्रेट ने न्यायाधीश के पास भेजा था। उसकी वर्मा से लेनदेन संबंधित चैटिंग हो रही थी। जय युवा आदिवासी संगठन संतोष वर्मा के समर्थन में आया जय युवा आदिवासी संगठन (जयस) संतोष वर्मा के समर्थन में आया है। जयस प्रमुख लोकेश मुजाल्दा ने बताया कि उनका संगठन और अजाक्स की तरफ से संतोष वर्मा के पक्ष में रविवार को इंदौर में कलेक्टर के नाम ज्ञापन दिया जाएगा, जिसमें संतोष वर्मा को शासन की ओर से दिया गया नोटिस वापस लेने की मांग की जाएगी। इधर, जयस के संरक्षक विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने कहा उनके संगठन के नाम से ही मिलता-जुलता एक अन्य संगठन भी है। इस संगठन से उनका कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि संतोष वर्मा का बयान असभ्य है जो अस्वीकार है।  

आध्यात्मिक सुरों से गूँजा विश्वरंग 2025, अनिरुद्ध जोशी व मनोज पाटीदार की मनमोहक प्रस्तुति

भोपाल  रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित विश्वरंग 2025 के तीसरे और अंतिम दिन की शुरुआत एक आध्यात्मिक, सौम्य और मन को शांत करने वाली संगीत साधना के साथ हुई। प्रातः आयोजित मंगलाचरण में मध्यप्रदेश के युवा और लोकप्रिय सितार वादक अनिरुद्ध जोशी ने अपनी मनोहारी प्रस्तुति से पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके सितार से निकलती स्वरलहरियों ने न केवल वातावरण को पवित्र बनाया, बल्कि प्रतिभागियों और दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराइयों से जोड़ दिया। उनका साथ दे रहे प्रसिद्ध तबला वादक मनोज पाटीदार ने अपनी ताल और लय की अद्भुत संगति से इस प्रस्तुति को और ऊँचे सौंदर्य तक पहुँचाया, जिससे विश्वरंग के अंतिम दिन का प्रारंभ एक सांस्कृतिक उत्सव में बदल गया और आगे के सत्रों के प्रति उत्साह और अपेक्षाएँ और अधिक बढ़ गईं। प्रज्ञान ब्रह्म की सोच को सौरभ द्विवेदी ने किया रेखांकित संगीत की इस सुगंधित शुरुआत के बाद पहले वैचारिक सत्र में इंडिया टुडे मैगज़ीन और लल्लनटॉप के संपादक तथा सुविख्यात वक्ता सौरभ द्विवेदी ने अपनी बात एक गहरे सवाल से शुरू की—क्या हम वही बनकर रह जाते हैं, जहाँ से आते हैं, या हम स्वयं को निरंतर नए साँचों में ढाल सकते हैं? उन्होंने कहा कि मनुष्य तब तक आगे बढ़ता है, जब तक वह सीखता रहता है; सीखना रुकते ही ठहराव शुरू हो जाता है। इस संदर्भ में उन्होंने श्वेतकेतु के सूत्र ‘प्रज्ञानं ब्रह्म’ का उल्लेख किया और समझाया कि जो भीतर है, वही बाहर प्रकट होता है; और सरल बनना ही मनुष्य का सबसे कठिन लक्ष्य है। उन्होंने वेदांत के महावाक्य ‘तत्वमसि’ के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि मनुष्य का आंतरिक अस्तित्व उसी परम चेतना से अभिन्न है, जिससे सृष्टि संचालित है। सौरभ ने विद्यार्थियों को समझाया कि सीखने के लिए सुनना उतना ही जरूरी है जितना बोलना या पढ़ना, और इसी संदर्भ में आर्यभट्ट और आइंस्टीन के उदाहरण दिए। उन्होंने डिंडोरी के उस व्यक्ति की मार्मिक घटना भी साझा की जिसे मानव तस्करी के कारण बीस वर्षों तक तेलंगाना में बंधक बनाकर रखा गया था, और बताया कि दुनिया में कई लोग ऐसे कष्टों से गुजरते हैं जिनकी कल्पना भी कठिन है। उन्होंने कहा कि छात्र का मन एक रीते घड़े जैसा होता है, जिसकी क्षमता ब्लैक होल से भी अधिक विस्तृत है—जितना ज्ञान उसमें भरा जाए, वह और अधिक ग्रहण करने को तैयार रहता है। उन्होंने यह सवाल रखा कि अच्छा इंसान होना इतना मुश्किल क्यों है और साथ ही भारतीय संस्कृति के संरक्षणवादी स्वभाव पर प्रकाश डाला। विचारों की विविधता, मित्रता, संगीत, सिनेमा और पुस्तक-पठन को उन्होंने युवाओं के सीखने और संवर्धन के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि भारत को वैज्ञानिक चेतना विकसित करने की अत्यंत आवश्यकता है, ताकि समाज बाहरी दिखावे से अधिक मानवीय गुणों को महत्व दे सके। अंत में उन्होंने सलाह दी कि मनुष्य को जीवन के अंत में खालीपन नहीं, बल्कि ‘मुदित भावना’ के साथ विदा होना चाहिए। उनका पूरा संबोधन ज्ञान, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण रहा। सान्या ने दिए कैरेक्टर को बेहतर बनाने के टिप्स दोपहर के सत्र में फ़िल्म अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा के साथ हुआ संवाद छात्र-युवाओं और कला प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना। रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की प्रो–चांसलर एवं विश्वरंग की सह-निदेशक डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स और विकास अवस्थी ने सान्या से उनकी फ़िल्मी यात्रा, कलात्मक अनुशासन और अभिनय की तैयारी पर गहन बातचीत की। सान्या ने कहा कि अभिनय उनके लिए केवल पेशा नहीं, बल्कि एक सतत साधना है, जिसमें पात्र के मनोवैज्ञानिक आयामों का अध्ययन सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने बताया कि किसी भी भूमिका को भीतर तक महसूस करने के लिए वे पटकथा को बार-बार लिखती हैं और पात्र से जुड़ी जगहों और लोगों से संवाद स्थापित करती हैं, ताकि किरदार की वास्तविकता भीतर उतर सके। उन्होंने कहा कि अभ्यास ही कलाकार को परिपक्वता देता है, और यही कारण है कि वे लगातार वर्कशॉप करती रहती हैं। अपनी तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी फिल्मों पर उन्होंने कहा कि कोई भी सम्मान पहले से सुनिश्चित नहीं होता, लेकिन जब ईमानदारी और मेहनत से किए गए काम की सराहना होती है, तो वह कलाकार के लिए सबसे बड़ा प्रोत्साहन बन जाता है। उन्होंने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि ऑडिशन और अस्वीकृति कलाकार को मजबूत बनाते हैं। युवाओं को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि अभिनय में करियर बनाने से पहले शिक्षा पूरी करना जरूरी है, क्योंकि पढ़ाई व्यक्ति को आत्मविश्वास और गहरी दृष्टि प्रदान करती है, जो कलाकार को जीवन और किरदार—दोनों को समझने में मदद करती है। माइथोलॉजी को शंकाओं के साथ पढ़े, तभी भीतर का ज्ञान समझ पाएंगे : देवदत्त पटनायक  मैं जब भी पौराणिक कथाओं पर बात करता हूं, टी9 एक शब्द का इस्तेमाल करता हूं मायथोलॉजी, और लोग मुझसे गुस्सा हो जाते हैं। लेकिन, क्या आपको पता है, जब तक आप उत्तेजित नहीं होंगे तो सरस्वती नहीं आएंगी। बहुत से लोग मानते हैं कि मायथोलॉजी शब्द मिथ्या से बना है, जो गलत है। संस्कृति में मिथ्या का मतलब incomplete truth। जगत मिथ्या, ब्रह्म सत्य…। मिथ्या असल में सच और झूठ से बिल्कुल अलग अधूरा सच है। आज हर आदमी के पास अपनी दुनिया का ज्ञान तो है, मगर संपूर्ण ज्ञान नहीं है। संपूर्ण ज्ञानी सिर्फ ईश्वर है। जबकि, मायथोलॉजी शब्द आया है ग्रीक के माइथोज से , यानि आख्यान।  दुनिया की हर संस्कृति  सभ्यता का अपना अलग आख्यान है  चीन, जापान, वियतनाम की अपनी अपनी माइथोलॉजी है। सब अपने संस्कृति के दृष्टिकोण को बताने के लिए आख्यानों का इस्तेमाल करते हैं। असल में, दुनिया को समझने का एक माध्यम है आख्यान, यानि माइथोलॉजी। जो विवाद करते हैं, वो जिज्ञासु नहीं होते, योद्धा होते हैं, उनके पास ज्ञान नहीं होता। पहले के जमाने में शास्त्रार्थ होते थे, जिसका मतलब होता था शास्त्रों का अर्थ निकलना। जबकि, टीवी पर और हमारे सीरियल्स में शास्त्रार्थ को सिर्फ बहस और अहंकार की लड़ाई की तरह दिखाते हैं। मगर, जहां सर्द बहस होती है, वहां से सरस्वती चली जाती है। याद रखिए, श्रद्धा ज्ञान का द्वार नहीं खोलती, जिज्ञासा ज्ञान का द्वार खोलती है। गुरु जो कहता है वो ही सही है, यदि आप मान लें तो यही आपकी श्रद्धा की शुरुआत हो जाएगी और फिर … Read more

गीता जयंती पर मध्यप्रदेश में 3 लाख गीता पाठी एक साथ करेंगे श्रीमद्भगवद्‌गीता का पाठ

इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में श्रीमद्भगवद्‌गीता ज्ञान प्रतियोगिता के विजेताओं नामों की घोषणा भोपाल माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गीता जयंती 1 दिसंबर 2025 को अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के 313 विकासखंड, 55 जिला मुख्यालय तथा 10 संभागों में श्रीकृष्ण परंपरा के आचार्यों की सन्निधि में 3 लाख से अधिक गीताभक्तों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा प्रदत्त श्रीमद्भगवद्‌गीता के 15वें अध्याय का सामूहिक सस्वर पाठ किया जायेगा। इस मौके पर विशेष आयोजन उज्जैन, भोपाल एवं इंदौर में आयोजित किये गये है। जिसमें इंदौर के राजवाड़ा स्थित गोपाल मंदिर में मध्यप्रदेश के पहले गीता भवन का लोकार्पण हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी एवं माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थित में होगा। इस अवसर पर मध्यप्रदेश में 16 से 28 नवंबर 2025 तक आयोजित हुई श्रीमद्भगवद्‌गीता ज्ञान प्रतियोगिता के विजेताओं के नामों की घोषणा भी की जायेगी। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव को लेकर माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संस्कृति सलाहकार एवं वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि गीता जयंती 1 दिसंबर 2025 को मध्यप्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव भव्य स्तर पर मनाया जा रहा है यह महोत्सव न केवल आध्यात्मिक उत्कर्ष के प्रतीक हैं, बल्कि सांस्कृतिक जागरण का भी व्यापक साधन होगा। उन्होंने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन जीने की कला सिखाती है। माननीय मुख्यमंत्रीजी के आह्वान पर गीता का संदेश प्रदेश के हर नागरिक तक पहुँचे ऐसे प्रयास किये जा रहे हैं। यह महोत्सव समाज में ज्ञान, कर्तव्य, अनुशासन और सकारात्मकता का वातावरण बनाने का माध्यम बनेगा। उज्जैन में तीन दिवसीय भव्य आयोजन, पहले दिन अभिनेता पुनीत इस्सर की प्रस्तुति संस्कृति सलाहकार ने बताया कि उज्जैन के दशहरा मैदान पर 1 से 3 दिसंबर सांस्कृतिक आयोजन किये जा रहे है। जिसमें पहले दिन अभिनेता पुनीत इस्सर द्वारा निर्देशित नृत्य नाटिका जय श्रीकृष्णा का मंचन होगा। दूसरे दिन नई दिल्ली की वैष्णवी शर्मा का काव्यपाठ विराटजयी तथा मुंबई के मोहित शेवानी एवं दल द्वारा कृष्णायन की सांगीतिक प्रस्तुति होगी। अंतिम दिन उमेश तरकसवार द्वारा निर्देशित विश्ववंदनीय एवं बैंगलोर के डॉ. सलाउद्दीन पाशा द्वारा निर्देशित गीता ऑन व्हील्स की प्रस्तुति होगी। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर लघु चित्र शैली में माधव दर्शनम् प्रदर्शनी को प्रदर्शित किया जा रहा है। भोपाल के रवीन्द्र भवन में दिव्यांग कलाकारों द्वारा गीता ऑन व्हील्स का मंचन भोपाल के रवीन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार मोहित शेवानी के निर्देशन में कृष्णायन की प्रस्तुति होगी। यह प्रस्तुति भगवान श्रीकृष्ण और मध्यप्रदेश की कहानी पर केंद्रित है। आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए इस प्रस्तुति को आकर्षक एवं रोचक बनाने का प्रयास किया गया है। इसके पूर्व बैंगलोर के डॉ. सलाउद्दीन पाशा के निर्देशन में गीता ऑन व्हील्स जिसमें दिव्यांग कलाकार गीता के प्रसंगों को मंचित करेंगे तथा विश्व गीता प्रतिष्ठानम् की ओर से श्रीमद्भगवद्‌गीता नृत्य नाटिका की प्रस्तुति होगी। इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्रीजी डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में दोपहर 1 बजे श्रीमद्भगवद्‌गीता के 15वें अध्याय का सस्वर पाठ एवं प्रदर्शनी का लोकार्पण होगा। प्रस्तुतियाँ शाम 6 बजे शुरू होंगी। इंदौर के गोपाल मंदिर में होंगे आयोजन संस्कृति सलाहकार ने जानकारी देते हुए कहा कि गीता जयंती पर माननीय मुख्यमंत्रीजी डॉ. मोहन यादव एवं हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इंदौर के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे। माननीय मुख्यमंत्रीजी के आतिथ्य में मध्यप्रदेश के पहले गीता भवन-गोपाल मंदिर का लोकार्पण किया जायेगा तथा मध्यप्रदेश में 16 से 28 नवंबर 2025 तक आयोजित हुई श्रीमद्भगवद्‌गीता ज्ञान प्रतियोगिता के विजेताओं के नामों की घोषणा की जायेगी। पुरस्कारों का वितरण गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 के मौके पर होगा। इस अवसर पर संजीव मालवीय निर्देशित नृत्य नाटिका कृष्णायन की प्रस्तुति होगी। इसके पूर्व माननीय मुख्यमंत्रीजी श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे।