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दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे पर बड़ा सड़क हादसा, ट्राले से टकराई कार; सूरत के परिवार के कई सदस्य घायल

रतलाम दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर शनिवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया। शिवगढ़ थाना क्षेत्र के काजलिया पाड़ा स्थित जामण नदी के पास सुबह करीब 09 बजे आगे चल रहे ट्राले में पीछे से एक तेज रफ्तार कार (जीजे 05 आर क्यू 1421) जा घुसी। जोरदार टक्कर में कार सवार दंपति और उनके दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में 4 लोग घायल सूचना मिलते ही शिवगढ़ थाना पुलिस और एनएचएआई की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। टीम ने क्षतिग्रस्त कार में फंसे घायलों को बाहर निकाला। सभी घायलों को पुलिस और एनएचएआई की एम्बुलेंस की मदद से रतलाम मेडिकल कालेज पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। टक्कर इतनी तेज थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। एयर बैग समय पर खुलने से घायलों की जान बच गई।   शादी समारोह में शामिल होने जा रहा था परिवार पुलिस के अनुसार कार में गुजरात के सूरत के सिल्क कपड़े के व्यापारी और उनका परिवार सवार था। घायलों की पहचान 38 वर्षीय साहिल कुमार पुत्र संजय कुमार साध, उनकी पत्नी 35 वर्षीय स्वेनका, बेटा 15 वर्षीय शनय और छोटा बेटा 04 वर्षीय श्यान के रूप में हुई है। यह परिवार सूरत से नोएडा एक शादी समारोह में शामिल होने जा रहा था। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। ट्राले के चालक से भी पूछताछ की जा रही है।

बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने MP सिविल जज परीक्षा का रिज़ल्ट दोबारा जारी करने को कहा, 191 पद खाली—एक भी ST उम्मीदवार चयनित नहीं

जबलपुर  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सिविल जज जूनियर डिवीजन  भर्ती परीक्षा-2022 के परिणाम पर बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) अभ्यर्थियों के चयन पर पुनर्विचार किया जाए। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकल पीठ ने “एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस” की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।  याचिका में भर्ती के नियम 194 में संशोधन को चुनौती दी गई थी। दरअसल, सिविल जज भर्ती-2022 में कुल 199 पदों के लिए विज्ञापन निकला था, जिसमें बैकलॉग के पद भी शामिल थे। इसमें अनारक्षित वर्ग: 48 में से 17 बैकलॉग,  SC: 18 में से 11 बैकलॉग , ST: 121 में से 109 बैकलॉग ,  OBC: 10 में से 1 बैकलॉग है।  वहीं हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मुख्य परीक्षा में एससी उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 45% और एसटी के लिए 40% अंक मानें जाएं. वहीं इंटरव्यू में भी 20 अंकों की बाध्यता में राहत देने के निर्देश दिए गए हैं. कोर्ट का कहना है कि पात्र उम्मीदवारों को मौका देना न्याय की मूल भावना है. अब एक्जाम सेल को जल्द ही नई सूची कोर्ट में पेश करनी होगी. यह फैसला कई परिवारों की उम्मीदें फिर से जगा रहा है. मेन्स और इंटरव्यू के बाद अंतिम रूप से 89 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए। हैरानी की बात यह रही कि इन 89 चयनित अभ्यर्थियों में ओबीसी वर्ग के 15 अभ्यर्थी तो शामिल थे, लेकिन SC वर्ग के केवल 3 और ST वर्ग का एक भी अभ्यर्थी जगह नहीं बना पाया। याचिकाकर्ता का कहना था कि इतनी बड़ी संख्या में बैकलॉग पद होने के बावजूद SC-ST अभ्यर्थियों का इतना कम प्रतिनिधित्व संवैधानिक आरक्षण के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़े करता है।  साथ ही नियम 194 में किए गए संशोधन को भी असंवैधानिक बताया गया। हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए अंतिम निर्णय तक सुरक्षित रखा है, लेकिन फिलहाल SC-ST अभ्यर्थियों के चयन पर पुनर्विचार करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि कोई अभ्यर्थी योग्य पाया जाता है तो उसे नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाए।  दों के खाली रहने को 'अत्यंत गंभीर' बताया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और पुष्पेंद्र शाह ने तर्क दिया कि परीक्षा सेल ने आरक्षण नीति का सही ढंग से पालन नहीं किया। बैकलॉग पदों को अनारक्षित वर्ग को देना, न्यूनतम योग्यता में छूट न देना और साक्षात्कार में कम अंक देना भेदभाव को दर्शाता है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि सिविल जज परीक्षा के परिणामों में 191 पदों के बदले केवल 47 अभ्यर्थियों का चयन व्यवस्था की गंभीर त्रुटि को दर्शाता है। अजजा वर्ग के निर्धारित पदों को भरा ही नहीं जा सका। एक राज्य के तौर पर यह निराशाजनक है। सरकार वंचित वर्ग के उत्थान में पूरी तरह विफल साबित हुई है। हम न्यायपालिका या आरक्षण पर प्रश्न नहीं उठा रहे, किंतु परिणाम बताते हैं कि आरक्षित वर्ग को आज भी सीखने और तैयारियों के संसाधन और अवसर उपलब्ध नहीं हैं। राज्य को इस बात के प्रयास बढ़ाने होंगे, जिसमें वंचित समुदाय को बेहतर अवसर मिल सकें। लगातार हो रहा विरोध सबसे बड़ी चिंता यह रही कि 191 सीटों में से एसटी वर्ग का एक भी उम्मीदवार चयनित नहीं हुआ, जबकि 121 सीटें एसटी वर्ग की खाली रह गईं. एससी वर्ग से भी केवल एक ही अभ्यर्थी का चयन हुआ. कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर माना. वहीं परिणाम आने के बाद दलित, आदिवासी व ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार लगातार विरोध कर रहे थे. अब संशोधित सूची आने से इस विवाद पर बड़ा असर पड़ सकता है और डिजर्विंग उम्मीदवारों को न्याय मिल सकता है. सिलेक्शन नहीं हो पाने की एक वजह यह बताई एडवोकेट मोहर सिंह बताते हैं कि इस बार का एग्जाम काफी कठिन था। कानूनों से ज्यादा सवाल कोर्ट के जजमेंट्स से जुड़े हुए थे। इस कारण अभ्यर्थियों को जवाब देने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वैकल्पिक एग्जाम भी कठिन था, जिसके कारण कम अभ्यर्थी ही मुख्य परीक्षा तक पहुंच पाए। मुख्य परीक्षा में भी 50% अंक लाना जरूरी था। अधिकतर स्टूडेंट 50% का आंकड़ा नहीं छू पाए और पहले ही बाहर हो गए। इस तरह का था परीक्षा पैटर्न प्रारंभिक परीक्षा     प्रारूपः वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्यीय प्रश्न)     अवधि: 2 घंटे     कुल अंकः 150 (150 प्रश्न, प्रत्येक 1 अंक का) मुख्य परीक्षा     प्रारूपः वर्णनात्मक (निबंध-आधारित)     अवधिः प्रत्येक पेपर के लिए 3 घंटे     कुल पेपर: 4     कुल अंक: 400 (प्रत्येक पेपर 100 अंकों का) विषय : भारत का संविधान, सिविल प्रक्रिया संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, लेखन कौशल और न्यायालयीन अभ्यास जैसे विषय शामिल थे। अनिवार्यता : सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 200 अंक और अन्य वर्गों के लिए 190 अंक लाना जरूरी। मौखिक साक्षात्कार कुल अक: 50 चयनः अंतिम चयन के लिए मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के कुल अंकों को जोड़ा गया।

भोपाल, इंदौर और जबलपुर में कोहरे ने घेरा, दृश्यता सिर्फ 1 किलोमीटर तक सीमित

भोप्ला  मध्य प्रदेश में इस बार नवंबर की शुरुआत से ही ठंड का मौसम सामान्य से पहले सक्रिय हो गया है। प्रदेश के कई हिस्सों में सुबह-शाम ठंड के साथ घना कोहरा छाया रहा, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पचमढ़ी में सबसे कम तापमान 6.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। घना कोहरा और विजिबिलिटी शनिवार की सुबह कई शहरों में कोहरे का असर देखा गया। शाजापुर में घना कोहरा छाया, जबकि अकोदिया और शुजालपुर में विजिबिलिटी केवल 100 मीटर तक सीमित रही।  मध्य प्रदेश में बर्फीली हवाओं की वजह से ठंड का तेज असर जारी है. प्रदेश के हर हिस्से में कड़ाके की सर्दी देखने को मिल रही है. शीतलहर का असर देखने को मिल रहा है. प्रदेश के 8 शहरों भोपाल, राजगढ़, इंदौर, खंडवा, शाजापुर, नरसिंहपुर और खरगोन में शुक्रवार को शीतलहर का असर देखने को मिला. राजधानी में शनिवार (22 नवंबर) की सुबह कोहरा देखने को मिला. पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा शहर पहाड़ी राज्यों जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी का दौर जारी है. इस वजह से प्रदेश में कंटीली हवाएं चल रही हैं. पचमढ़ी में शुक्रवार को तापमान 5.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इसके साथ ही पचमढ़ी राज्य का सबसे ठंडा शहर रहा. इसके अलावा राजगढ़ में 8 डिग्री, शाजापुर जिले के गिरवर में 8.3 डिग्री, इंदौर में 8.4 डिग्री और छतरपुर जिले के नौगांव में न्यूनतम तापमान 8.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. शहर/क्षेत्र विजिबिलिटी (मीटर) शाजापुर घना कोहरा अकोदिया, शुजालपुर 100 भोपाल, दतिया, इंदौर, जबलपुर 1000 गुना, ग्वालियर, सतना, रीवा, खजुराहो 500–1000 न्यूनतम तापमान शुक्रवार-शनिवार की रात में कई शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे रहा। शहर/स्थान न्यूनतम तापमान (°C) पचमढ़ी 6.2 भोपाल, इंदौर 9.4 ग्वालियर 13 उज्जैन, जबलपुर 11.8 राजगढ़ 8.2 खरगोन 8.6 नौगांव 8.8 नरसिंहपुर 9.4 उज्जैन में पुलिस कर्मियों के लिए चाय की व्यवस्था उज्जैन पुलिस अधीक्षक ने ठंड को देखते हुए रात में गश्त करने वाले पुलिस कर्मियों के लिए चाय उपलब्ध कराने का इंतजाम किया है। एक स्थान पर चाय बनाई जा रही है और गश्त पर तैनात कर्मियों तक पहुंचाई जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का क्या कहना है? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, हाल ही में विंड पैटर्न बदला है। उत्तरी हवाओं के प्रभाव से पहले तेज ठंड थी, लेकिन अब राहत मिलने की संभावना है। इस बार नवंबर के पहले सप्ताह से ही ठंड सक्रिय है, जबकि आम तौर पर दूसरे सप्ताह में कड़ाके की ठंड पड़ती है। अक्टूबर में बारिश का रुझान माह औसत बारिश (इंच) सामान्य बारिश (इंच) प्रतिशत वृद्धि अक्टूबर 2.8 1.3 121% मध्य प्रदेश के लोगों को अगले कुछ दिनों में ठंड और कोहरे के चलते सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से ड्राइवरों को सीमित विजिबिलिटी वाले इलाकों में धीमी गति से वाहन चलाने की चेतावनी दी गई है। जबलपुर और नर्मदापुरम में धुंध और कोहरा देखने को मिला. नर्मदापुरम में विजिबिलिटी 500 मीटर रह गई थी. बड़े शहरों में सर्वाधिक न्यूनतम तापमान ग्वालियर में 12.8 डिग्री सेल्सियस मापा गया. जबलपुर में 11.1 और उज्जैन में 11.5 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा. प्रदेश का सर्वाधिक तापमान उज्जैन में 29.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. 8 शहरों में कोल्ड वेव का अलर्ट मौसम विभाग ने प्रदेश के 8 शहरों भोपाल, सीहोर, राजगढ़, इंदौर, शाजापुर, खंडवा, खरगोन और नरसिंहपुर में कोल्ड वेव का यलो अलर्ट जारी किया है. आगामी चार दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की जाएगी. शेष सभी जिलों में मौसम शुष्क बना रहेगा. जानिए, नवंबर में 5 बड़े शहरों का मौसम… भोपाल: इस बार टूट गया ओवरऑल रिकॉर्ड नवंबर में भोपाल में रात का तापमान 9 से 12 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है। पिछले 10 साल से ऐसा ही ट्रेंड रहा है। इस बार पहले सप्ताह से ही तेज ठंड का असर रहा। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल में नवंबर में रात का तापमान 6.1 डिग्री तक पहुंच चुका है। यह 30 नवंबर 1941 को दर्ज किया गया था, लेकिन इस साल 16 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री रहा। इस तरह नवंबर की सर्दी का ओवरऑल रिकॉर्ड बन गया है। यहां इस महीने बारिश होने का ट्रेंड भी है। 10 साल में तीन बार बारिश हो चुकी है। साल 1936 में महीने में साढ़े 5 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है। इंदौर: 5.6 डिग्री तक जा चुका न्यूनतम पारा इंदौर में नवंबर में ठंड का असर रहता है। खासकर दूसरे सप्ताह से पारा तेजी से गिरता है। इस वजह से रातें ठंडी हो जाती हैं और टेम्प्रेचर 10 से 12 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। 25 नवंबर 1938 को पारा 5.6 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है। इंदौर में कभी-कभार बारिश भी हो जाती है। दिन में 31 से 33 डिग्री के बीच तापमान रहता है। ग्वालियर: 1927 में 3 इंच पानी गिरा था पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो नवंबर में ग्वालियर में पारा 8 डिग्री तक पहुंच चुका है। 54 साल पहले वर्ष 1970 में टेम्प्रेचर 3 डिग्री गया था। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। 2 नवंबर 2001 को दिन का तापमान 37.3 डिग्री तक रहा, जबकि यह सामान्य तौर पर 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। ग्वालियर में इस महीने बारिश भी होती है। 1927 में पूरे महीने 3 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। 10 साल में 3 बार ऐसा ही मौसम रह चुका है। जबलपुर: 1946 में 6 इंच से ज्यादा बारिश जबलपुर में पिछले 10 साल में 2022 में न्यूनतम पारा 7.8 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है। ओवरऑल रिकॉर्ड 12 नवंबर 1989 को दर्ज किया गया था, तब टेम्प्रेचर 3.9 डिग्री तक पहुंच गया था। 1946 में पूरे महीने 6 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। 10 साल में दो बार बारिश हो चुकी है। दिन में 30 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान रहता है। उज्जैन: न्यूनतम तापमान 10-11° के बीच उज्जैन में 30 नवंबर 1974 को रात का तापमान 2.8 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 6 नवंबर 2008 को दिन का तापमान 36.5 डिग्री रहा था। पिछले 10 साल की बात करें तो न्यूनतम तापमान 10-11 … Read more

स्थानीय चुनाव: उम्मीदवारों के लिए नई नियमावली, शपथ पत्र में दर्ज करनी होगी अपने खिलाफ आपराधिक प्रकरण की जानकारी

भोपाल  महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष के साथ पार्षद पद का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अब अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण की पूरी जानकारी शपथ पत्र में देनी होगी। इतना ही नहीं, लोकसभा व विधानसभा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की तरह प्रतिदिन का चुनावी खर्च का ब्यौरा देना होगा।  राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी बदलाव का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। उम्मीदवारों के चुनाव खर्च की लिमिट नगरीय विकास एवं आवास विभाग के परामर्श से तय की जाएगी। प्रदेश के नगर निकायों में महापौर, नगर पालिका एवं नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षद पद के चुनाव पांच साल में होते हैं। कुछ नगरपालिका और नगर परिषदों को छोड़ 90 फीसदी निकायों में यह चुनाव वर्ष 2027 में होंगे। इसके पहले 2022 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निकायों में चुनाव कराए गए थे। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव दीपक सिंह ने आदेश जारी किया है। जिसके तहत पार्षद पद के उपचुनाव भी नई व्यवस्था से होंगे। कितने केस दर्ज, चल-अचल संपत्ति कितना बताना होगा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि चुनाव लड़ने वाले महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष, पार्षद पद के उम्मीदवार को अपनी खुद, पत्नी या पति और तीन बच्चों की आमदनी और चुकाए जाने वाले टैक्स की जानकारी भी देना होगी। यह भी बताना होगा कि उसकी आय का साधन क्या है? लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार जिस तरह से सोशल मीडिया अकाउंट, ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर की डिटेल देते हैं, उसी तरह इन्हें भी जानकारी देना होगा। राज्य निर्वाचन आयोग को बताना होगा कि दो साल या अधिक समय की सजा वाले कितने आपराधिक मामले उन पर दर्ज हैं। इसकी थाने में दर्ज एफआईआर, थाना और जिला का ब्यौरा बताने के साथ न्यायालय में चल रहे केस और अन्य ब्यौरे देने होंगे। इसके साथ ही संयुक्त स्वामित्व वाली चल और अचल संपत्ति की जानकारी भी शपथ पत्र में देना तय किया गया है। साथ ही उम्मीदवार द्वारा शेयर और कंपनियों में किए गए निवेश का ब्यौरा भी देना होगा। साथ ही कितना कर्ज लिया और दिया गया है तथा किन सरकारी एजेंसियों का कितना बकायादार उम्मीदवार है, इसकी जानकारी देने का प्रावधान भी इसमें किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी साफ किया है कि उम्मीदवार अपने घर पर लगे फ्लश शौचालय और जलवाहित शौचालय की भी लिखित जानकारी देंगे। चुनाव में कितना खर्च होगा, इसकी लिमिट होगी तय आयोग ने कहा है कि चुनाव में किस तरह से धन बल का उपयोग किया जाता है, राज्य निर्वाचन आयोग इससे वाकिफ है। इसलिए नगरीय विकास और आवास विभाग द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग के साथ चर्चा कर चुनाव में होने वाले खर्च की अधिकतम सीमा भी तय की जाएगी। आयोग के उम्मीदवारों द्वारा जो खर्च किया जाएगा और उसका भुगतान किया जाएगा उसकी पूरी डिटेल दी जाएगी। इसके साथ ही चुनाव खर्च का एक अलग रजिस्टर बनाया जाएगा। चुनाव खर्च की जानकारी तीस दिन के भीतर देना भी अनिवार्य किया गया है। इसमें यह व्यवस्था भी की गई है कि प्रत्याशी के चुनावी खर्च की जानकारी कोई भी व्यक्ति दस रुपए की फीस जमा करके ले सकेगा।  

हेलिकॉप्टर सेवा के नए नियम: 80 किलो से ऊपर वजन वालों को देना होगा अतिरिक्त शुल्क

उज्जैन मध्यप्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इंदौर से उज्जैन और ओंकारेश्वर के लिए हेलिकॉप्टर सेवा शुरू कर दी गई है। सेवा शुरू होते ही यह चर्चा में आ गई है क्योंकि इसे संचालित करने वाली एविएशन कंपनी ने यात्रियों के वजन के अनुसार अतिरिक्त शुल्क देने का नियम लागू किया है। कंपनी के अनुसार 80 किलो तक के यात्रियों को टिकट शुल्क के अलावा कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होगा, जबकि 80 से 100 किलो तक वजन वाले यात्रियों को प्रति किलो 150 रुपए अतिरिक्त देने होंगे। वहीं 100 किलो से अधिक वजन वाले यात्रियों को दो सीटों का किराया देना होगा। गुरुवार को पर्यटन विभाग द्वारा इंदौर, उज्जैन और ओंकारेश्वर के लिए हेलिकॉप्टर सेवा का औपचारिक शुभारंभ किया गया। पहली उड़ान को मंत्री तुलसी सिलावट और अन्य जनप्रतिनिधियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मंत्री सिलावट और विधायकगण इंदौर से हेलिकॉप्टर द्वारा उज्जैन पहुंचे, जहां साधु-संतों को भी हवाई सैर कराई गई। अब यह सेवा आम यात्रियों के लिए भी शुरू हो चुकी है। इंदौर से उज्जैन तक किराया 5,000 और इंदौर से ओंकारेश्वर तक 6,500 रुपये किराया देय होगा। हेलिपैड पर हर यात्री का वजन अनिवार्य होगा। कंपनी की वेबसाइटों www.flyola.in, https://air.irctc.co.in/flyola और https://transbharat.in/ पर यात्रियों के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। कंपनी ने यात्रियों के साथ ले जाने वाले सामान पर भी सीमा तय की है। प्रत्येक यात्री को अधिकतम 4 किलो सामान ले जाने की अनुमति होगी। अतिरिक्त सामान के लिए कंपनी ने कोई स्पष्ट नीति नहीं बताई है। हालांकि यह सेवा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है लेकिन इसका किराया सामान्य यात्रियों की पहुंच से बाहर है। इंदौर-उज्जैन-ओंकारेश्वर रूट की एक दिन की यात्रा का अनुमानित खर्च प्रति व्यक्ति 17,000 तक होगा। दो या अधिक सदस्यों वाले परिवार के लिए यह राशि और भी अधिक हो जाएगी। ऐसे में माना जा रहा है कि यह सेवा मुख्य रूप से अमीर तबके के यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी।  

15 दिसंबर से शुरू होगा तानसेन समारोह 2025, इन कलाकारों को मिला प्रतिष्ठित तानसेन सम्मान

ग्वालियर  राष्ट्रीय तानसेन सम्मान और राष्ट्रीय राजा मानसिंह तोमर सम्मान की घोषणा शुक्रवार को संस्कृति विभाग ने की। ये सम्मान 15-19 दिसंबर तक ग्वालियर में तानसेन समारोह में दिए जाएंगे। संस्कृति संचालक एनपी नामदेव ने बताया, 2024 के लिए तानसेन सम्मान पं. राजा काले मुंबई, 2025 के लिए पं. तरुण भट्टाचार्य, कोलकाता को दिया जाएगा। तोमर सम्मान 2024 के लिए साधना परमार्थिक संस्थान समिति, खरगोन व 2025 के लिए रागायन, ग्वालियर को दिया जाएगा। सम्मानित कलाकार एवं संस्था को 5 लाख की सम्मान राशि एवं सम्मान पट्टिका भेंट की जाती है। संतूर वादक पं. भट्टाचार्य से पत्रिका की विशेष बातचीत पत्रिका से विशेष बातचीत में संतूर वादक पं. भट्टाचार्य ने कहा, यह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है। उन्होंने कहा, ग्वालियर के तानसेन समारोह (Tansen Samaroh) वह मंच है, जहां से हम अपने संगीत को पूरी दुनिया तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा, वे समारोह में अब तक चार बार प्रस्तुति दे चुके हैं। मप्र के श्रोता बेहद सटीक और हार्डकोर हैं, वे हर स्वर व ताल समझते हैं। शांति और अमन का संदेश फैला सकते हैं शास्त्रीय संगीत की महत्ता पर पं. भट्टाचार्य ने कहा, इसके जरिए हम दुनिया में शांति का संदेश फैला सकते हैं। 10 साल तक शास्त्रीय संगीत सिखाने से बच्चों का मन पूरी तरह से बदल सकता है। संतूर के बारे में कहा, यह वीणा की तरह सततंरी वाद्य है। उल्लेख वेद-पुराणों में भी मिलता है। संतूर में मैंने कई प्रयोग किए हैं। शास्त्रीय संगीत (Tansen Samaroh) का आकर्षण कायम है। स्कूल-कॉलेज के बच्चों में रुचि बढ़ी है।

GRP ने शुरू की सराहनीय सेवा, अब ऑटो चालक की जानकारी पाएं बस एक कोड स्कैन से

उज्जैन  धार्मिक नगरी उज्जैन आने वाले यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे पुलिस ने एक सराहनीय पहल शुरू की है। अब उज्जैन में महिलाएं और देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्री निश्चिंत होकर ऑटो में यात्रा कर सकेंगे। इंदौर में सफल शुरुआत के बाद अब उज्जैन में भी भरोसे वाली सवारी नाम से सुरक्षित ऑटो सेवा शुरू की जा रही है। इसके तहत करीब 350 ऑटो चालकों का पुलिस द्वारा वेरिफिकेशन पूरा किया जा रहा है और सत्यापन के बाद उनके ऑटो पर विशेष क्यूआर कोड लगाया जाएगा। यात्री इस कोड को स्कैन कर ऑटो चालक की पहचान, वाहन विवरण और रूट जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य अपराधों पर रोक लगाना, यात्रियों में विश्वास बढ़ाना और ऑटो सेवा को पारदर्शी बनाना है। विशेष रूप से देर रात स्टेशन से आने-जाने वाले यात्रियों, महिलाओं और अकेले सफर करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह कदम अत्यंत उपयोगी माना जा रहा है। आज  पुलिस अधीक्षक इंदौर रेल पद्म विलोचन शुक्ल ने ऑटो चालकों को हमारी भरोसे की सवारी योजना की विस्तृत जानकारी दी और सुरक्षित व जिम्मेदार परिवहन के लिए दिशा-निर्देश भी प्रदान किए। जल्द ही उज्जैन रेलवे स्टेशन और शहर के प्रमुख स्थानों पर क्यूआर कोड वाले ऑटो दिखाई देने लगेंगे।  उन्होंने बताया कि ऑटो में QR कोड लगाने की शुरूआत दिसंबर के पहले हफ्ते से हो सकती है। एसपी ने बताया कि यात्री अपनी यात्रा पूर्ण होने के बाद इसी क्यूआर कोड से फीडबैक भी दे सकेंगे। वहीं क्यूआर कोड लगाने वाले ऑटो चालकों में से बेस्ट को सम्मानित भी किया जाएगा। एसपी ने ऑटो चालकों से कहा कि सभी ऑटो चालकों को QR कोड लगवाना अनिवार्य नहीं है, जिसकी मर्जी होगी उसके ऑटो पर QR कोड लगाया जाएगा। एसपी शुक्ल ने बताया कि शासकीय रेलवे पुलिस द्वारा हमारी सवारी, भरोसे वाली टैग के साथ वाहन चालकों को सत्यापित वाहन चालक का QR कोड मिलेगा। इस QR कोड में ऑटो चालक का नाम, पता, मोबाइल नंबर, कोई केस तो दर्ज नहीं के साथ ही ऑटो के रजिस्ट्रेशन नंबर का भी पता चल सकेगा।    

निमाड़ उत्सव का शुभारंभ, महेश्वर में अहिल्या घाट पर होगी भव्य लाइट शो और भजन संध्या

महेश्वर  मां अहिल्या की नगरी महेश्वर में 22 से 24 नवंबर तक निमाड़ उत्सव 2025 आयोजित किया जा रहा है। इसमें तीन दिनों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ अहिल्या घाट पर लाइट एंड साउंड शो होगा। पहले दिन 22 नवंबर की शाम 7 बजे उत्सव का शुभारंभ होगा। उद्घाटन के बाद सुप्रसिद्ध गायक लखविंदर लख्खा और साथी भक्ति संगीत की प्रस्तुति देंगे। इसी दिन अत्याधुनिक तकनीक से तैयार लाइट एंड साउंड शो का लोकार्पण किया जाएगा। महेश्वर के अहिल्या घाट पर लाइट एंड साउंड शो तकनीक और परंपरा का अद्वितीय संयोजन साबित होने जा रहा है। महेश्वर का यह शो अत्याधुनिक तकनीक नवाचार, सटीक इंजीनियरिंग कौशल और विरासत धरोहर संवर्द्धन  संरक्षण को एक साथ समाहित करने वाला देश के चुनिंदा प्रोजेक्ट्स में शुमार हो गया है। यह प्रोजेक्ट कई अभूतपूर्व चुनौतियों को पार कर तैयार किया गया है, जो इसे देश का सबसे अनोखा और जटिल शो बनाता है। नदी के बदलते जलस्तर के बीच हाइड्रॉलिक सिस्टम का विकास घाट के किनारे प्रोजेक्टर इंस्टॉल करने में सबसे बड़ी बाधा नर्मदा का लगातार बदलता जलस्तर रहा। प्रोजेक्टर की ऊंचाई अधिक रखने से नाविकों और पर्यटकों को किले का स्पष्ट दृश्य प्रभावित होता, ऐसे में पहली बार नदी की स्थिति के अनुरूप कस्टम हाइड्रॉलिक सिस्टम तैयार किया गया। यह सिस्टम पानी के दबाव, लहरों और जलस्तर में होने वाले उतार-चढ़ाव के बावजूद प्रोजेक्टर को स्थिर रखने में सक्षम है। वॉटर-कोरोजन रेजिस्टेंट डिजाइन, प्रेशर कंट्रोल तकनीक और प्रोजेक्शन की सटीकता बनाए रखना इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं। महेश्वर किले की ऐतिहासिक संरचना को देखते हुए टीम ने बिना कील या ड्रिलिंग के लाइटिंग, लेजर, साउंड और वायरिंग का पूरा सेटअप तैयार किया। कमिश्नर दीपक सिंह की रही अहम भूमिका नर्मदा तट पर इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को मूर्त रूप देने में इंदौर संभाग के कमिश्नर दीपक सिंह की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उनकी निरंतर मॉनिटरिंग, समयबद्ध समीक्षा और फील्ड स्तर पर की गई मार्गदर्शन ने टीम को कठिन परिस्थितियों में भी योजना को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद की। पर्यटन को नई दिशा देने की तैयारी किले की भव्यता, नर्मदा की लहरों और तकनीक का यह अनूठा संगम महेश्वर पर्यटन को नए आयाम देने जा रहा है। शो के शुरू होने के साथ ही महेश्वर का इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत आधुनिक प्रकाश एवं ध्वनि तकनीक के माध्यम से दर्शकों के सामने नए रूप में प्रस्तुत होगी। महेश्वर के लिए यह आयोजन एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। 23 नवंबर के कार्यक्रम 23 नवंबर को लोकनृत्यों और निमाड़ी काव्य का दौर चलेगा। पुरी का प्रसिद्ध गोटिपुआ नृत्य चंद्रमणि प्रधान एवं साथी, बड़ौदा का राठ नृत्य विजय भाई राठवा एवं साथी, तथा निमाड़ी कवि— मोहन परमार खरगोन, दिलीप काले महेश्वर, राम शर्मा परिंदा मनावर,जितेंद्र यादव कसरावद, धनसिंह सेन जलकोटा और बिहारी पाटीदार करौंदिया—अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री जगदीश जोशीला गोगांव करेंगे। 24 नवंबर को लोकनृत्य श्रृंखला में कथक नृत्य गौरी शर्मा एवं साथी खरगोन, खंडवा का गणगौर अनुजा जोशी एवं साथी और काठी नृत्य रामदास साकल्ले एवं साथी खंडवा प्रस्तुत किया जाएगा। इस दिन राष्ट्रीय कवि सम्मेलन भी आयोजित होगा, जिसमें सुदीप भोला, डॉ. शंभूसिंह सिंह मनहर, डॉ भुवन मोहिनी, नरेंद्र श्रीवास्तव ‘अटल’ महेश्वर और राम भदावर ‘ओज’ काव्य पाठ करेंगे। कार्यक्रम के सूत्रधार बुद्धि प्रकाश दाधीच रहेंगे। 

डॉ. रोहिणी ने लगाया सांसद चंद्रशेखर पर गंभीर आरोप, बुजुर्ग माता-पिता को जेल की धमकी देने का मामला

इंदौर  उत्तर प्रदेश की नगीना सीट से सांसद चंद्रशेखर और इंदौर की रहने वाली उनकी कथित पूर्व प्रेमिका डॉ. रोहिणी घावरी के बीच का विवाद अब और उग्र हो गया है। डॉ. रोहिणी ने सांसद पर अपने बुजुर्ग माता-पिता को जेल भिजवाने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक के बाद एक कई पोस्ट करते हुए रोहिणी ने चंद्रशेखर को खुला चैलेंज दिया है। माता-पिता को लेकर दी चेतावनी स्विट्जरलैंड में रह रहीं डॉ. रोहिणी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि मेरे मम्मी-पापा मेरे लिए भगवान समान हैं। उन्हें थोड़ी भी तकलीफ पहुंचाने की कोशिश मत करना, वरना मैं इंडिया आकर अपनी ताकत दिखाऊंगी। उन्होंने अपने गुस्से का इजहार करते हुए लिखा कि फिर अमित शाह भी तुम्हें बचा नहीं पाएंगे। रोहिणी ने साफ कहा कि लड़ाई मुझसे है तो मुझसे लड़ो, पूरे देश में मेरे खिलाफ एफआईआर करवाओ या मेरी हत्या करवा दो, लेकिन परिवार को बीच में मत लाओ। जानी दुश्मन बनने का ऐलान एक अन्य पोस्ट में रोहिणी ने तल्ख तेवर दिखाते हुए लिखा कि मैं तुम्हारी दुश्मन नहीं थी, लेकिन अब जानी दुश्मन बन गई हूं। अब तुझे पूरी तरह से खत्म करूंगी। उन्होंने लिखा कि जब बात माता-पिता पर आती है तो बच्चे हर मर्यादा लांघ देते हैं। रोहिणी ने भारत वापस आने का संकेत देते हुए चंद्रशेखर को इंतजार करने की चेतावनी दी है। इंदौर के साधारण परिवार से हैं रोहिणी डॉ. रोहिणी घावरी इंदौर के बीमा अस्पताल में काम करने वाली एक सफाईकर्मी की बेटी हैं। उन्होंने अपनी मेहनत से मुकाम हासिल किया और 2019 में उच्च शिक्षा के लिए स्विट्जरलैंड गईं। वहां पढ़ाई के दौरान ही वह चंद्रशेखर के संपर्क में आईं और दोनों कथित तौर पर तीन साल तक रिलेशनशिप में रहे। बाद में रोहिणी ने चंद्रशेखर पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। वर्तमान में वह स्विट्जरलैंड में नौकरी करने के साथ एनजीओ भी चलाती हैं। पहले भी दे चुकी हैं सुसाइड की धमकी यह विवाद नया नहीं है। करीब दो महीने पहले भी डॉ. रोहिणी ने सोशल मीडिया पर सुसाइड करने की धमकी दी थी। उन्होंने चार घंटे के भीतर तीन पोस्ट किए थे, जिनमें से एक में चंद्रशेखर, उनकी पत्नी और बच्चे की तस्वीर साझा की थी। उन्होंने लिखा था कि मेरा जीवन बर्बाद करके खुशियां मना रहे हो, आज ही तेरे नाम पर जहर खाऊंगी। उस समय उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए अपनी लाश भी भारत न लाने की बात कही थी। 

भोपाल में SMD और BLO के लिए खास योजना, टारगेट पूरा करने पर ट्रॉफी-सर्टिफिकेट और हर दिन सम्मान

भोपाल  भोपाल में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में अब टारगेट पूरा करने पर इनाम भी मिलेंगे। एसडीएम, तहसीलदार और बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) हर दिन 'स्टार ऑफ द डे' भी बनेंगे। बकायदा, उनकी उपलब्धि की जानकारी ऑफिस के सूचना पटल पर लगाई जाएगी।  4 नवंबर से एसआईआर सर्वे शुरू हुआ है। अब तक की स्थिति में भोपाल जिले की स्थिति काफी खराब है। सात विधानसभा सीटों में 21 लाख 25 हजार 908 वोटर हैं। इनमें से 20.87 लाख फॉर्म बांटे जा चुके हैं, लेकिन, वापस 4.15 लाख फॉर्म ही आए हैं। यह 20% से भी कम हैं, जबकि सर्वे को आधा महीना से ज्यादा बीत चुका है। इसलिए अब वोटर्स की सुविधा के लिए नए पोर्टल की लॉन्चिंग हो या सख्ती करना, सब कुछ हो रहा है। अब ईआरओ, एईआरओ और बीएलओ को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसकी शुरुआत शनिवार से ही हो जाएगी। हर रोज का टारगेट तय किया भोपाल में 7 विधानसभा- बैरसिया, भोपाल उत्तर, नरेला, भोपाल दक्षिण-पश्चिम, भोपाल मध्य, गोविंदपुरा और हुजूर है। इनमें कार्य करने वाले 2029 बीएलओ, सभी ईआरओ यानी एसडीएम, एईआरओ यानी तहसीलदारों को प्रोत्साहन के दायरे में शामिल किया गया है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने यह पहल की है। इसके तहत 22 से 28 नवंबर तक हर रोज का टारगेट फिक्स किया गया है। जैसे- 22 नवंबर को बीएलओ को 50% फॉर्म डिजिटाइजेशन करना है तो एसडीएम-तहसीलदारों को प्रति बीएलओ से औसत 75 गणना पत्र डिजिटाइजेशन करवाना होगा। दूसरे-तीसरे दिन यह टारगेट बढ़ेगा। इसके पीछे मकसद यह है कि फॉर्म लेने और फिर उनका डिजिटाइजेशन करने के काम में तेजी आए। हर रोज 10 बजे के आंकड़ों के हिसाब से प्रोत्साहन मिलेगा उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया, हर रोज सुबह 10 बजे की स्थिति में लक्ष्य प्राप्त करने वालों को ऑनलाइन रिपोर्ट के आधार पर पुरस्कार के रूप में प्रमाण पत्र और प्रतीक चिह्न दिया जाएगा। इसके साथ स्टार ऑफ द डे का नाम संबंधित एसडीएम और तहसीलदार के ऑफिस में चस्पा किया जाएगा। ताकि, अन्य कर्मचारियों को भी प्रोत्साहन मिले और वे भी अच्छा काम करें। भोपाल में डाटा खोजने के लिए पोर्टल भी बना भोपाल में 2003 के डाटा को खोजने के लिए पोर्टल बनाया गया है। इसमें सभी विधानसभा की वोटर लिस्ट अपडेट है। वोटर पोर्टल पर जाकर सूची देख सकेंगे। इससे उन्हें एसआईआर फॉर्म भरने में आसानी होगी। इस पोर्टल के जरिए मतदाता मोहल्ले के नाम के आधार पर भी 2003 की मतदाता सूची खोज सकते हैं। कलेक्टर सिंह ने बताया कि भोपाल के मतदाताओं के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य को सरल एवं सुगम बनाने की सुविधा दी गई है। https://sirbhopal.com पोर्टल के माध्यम से मतदाता साल 2003 की वोटर लिस्ट में अपना नाम खोज सकते हैं। वहीं, मध्यप्रदेश के किसी भी जिले के किसी भी विधानसभा की सूची डाउनलोड कर सकते हैं। मतदान केंद्र BLO की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।