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प्रदेश में उद्योग धंधों से रोजगार पाने वालों का भी हो सम्मेलन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

अधिकाधिक औद्योगिक निर्माण इकाइयों का करायें सामूहिक भूमिपूजन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में उद्योग धंधों से रोजगार पाने वालों का भी हो सम्मेलन बायो-टेक्नालॉजी सेक्टर में है बड़ा स्कोप, इस दिशा में आगे बढ़ें 8.57 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों पर धरातल पर काम है जारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट–2025 के संदर्भ में लिए निर्णयों एवं विभागवार मिले निवेश प्रस्तावों की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश की पुण्यधरा में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट–2025 में सरकार को 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इन सभी निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन के लिए निवेशकों से सतत संवाद करें, उनके प्रश्नों का समाधान करें, जिससे वे जल्द से जल्द अपने निवेश प्रस्ताव को जमीन पर अमलीजामा पहनाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिसम्बर में वर्तमान सरकार के दो वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसलिए नवम्बर माह अंत तक अधिक से अधिक औद्योगिक निर्माण इकाइयों का सामूहिक भूमिपूजन कराएं। उन्होंने कहा कि दो से ढ़ाई लाख करोड़ रुपए के कामों के एक साथ भूमिपूजन से प्रदेश का औद्योगिक परिदृश्य तेजी से बदलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में निवेश संबंधी बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में फरवरी 2025 में भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्राप्त निवेश प्रस्तावों के संबंध में राज्य सरकार द्वारा लिये गए निर्णयों एवं विभागवार मिले निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन की अद्यतन प्रगति की गहनता से विस्तारपूर्वक समीक्षा की। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने समिट के दौरान प्राप्त निवेश प्रस्तावों, एमओयू के क्रियान्वयन और वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। बैठक में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव मनु वास्तव, अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव संदीप यादव, प्रमुख सचिव मनीष सिंह सहित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट–2025 में प्राप्त उत्साहजनक निवेश प्रस्तावों से मध्यप्रदेश में उद्योग और अधोसंरचना विकास को नई दिशा मिलेगी और हमारा राज्य तेज गति से प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि निवेश से जुड़े सभी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की समय-सीमा निर्धारित कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और उद्योगों के अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ें और आर्थिक विकास को गति मिले। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि जिन निवेश प्रस्तावों पर काम प्रारंभ हो चुका है, उनकी नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जाए। मुख्यमंत्री ने निवेश प्राप्त करने वाले सभी विभागों को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश पर्यटन (एमपीटी) अब एक ब्रांड बन चुका है। इसका लाभ प्रदेश में उद्योग -धंधों और पर्यटन के विकास पर भी लिया जाए। उन्होंने कहा कि सम्पर्ण पर्यटन क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की दिशा में आगे बढ़ें, इससे पर्यटन क्षेत्र में कोई बड़ा निवेश आने पर सरकार निवेशक को उद्योग विभाग द्वारा दी जा रही सब्सिडी प्रोत्साहन योजना का भी लाभ दे सकेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी अधिकारियों को निदेर्शित किया कि उद्योग एवं रोजगार वर्ष के समापन पर सरकार की निवेश प्रोत्साहन योजनाओं के कारण प्रदेश में ही रोजगार और स्वरोजगार प्राप्त करने वाले लोगों का राज्यस्तरीय एवं संभागस्तरीय सम्मेलन आयोजित करें। उन्होनें बताया कि सरकार की रोजगार प्रोत्साहन नीतियों से प्रदेश के 7.85 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के समापन से पहले सरकार के कामों का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए। लोगों की सफलता की कहानियां समाज के सामने भी आनी चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बायो-टेक्नालाजी सेक्टर में बहुत स्कोप है। इस दिशा में आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी दिनों में हैदराबाद में आयोजित होने वाले निवेशक संवाद सम्मेलन में बायो-टेक्नालाजी सेक्टर की कम्पनियों और निवेशकों को भी आमंत्रित किया जाए। मध्यप्रदेश में निवेश के लिए उनसे आग्रह किया जाएगा। प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट–2025 में सरकार को मिले 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों में से वर्तमान में 8.57 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रस्तावों पर धरातल पर काम जारी है। उद्योग विभाग को कुल 12.70 लाख करोड़ रुपए के 889 निवेश प्रस्ताव मिले थे। इनमें से 397 निवेश प्रस्तावों पर भूमि आवंटित कर लेटर आफ इंट्रेस्ट भी जारी कर दिया गया है। इसके अलावा 5.13 लाख करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले 190 निवेश प्रस्ताव ऐसे हैं, जिनमें निवेशकों ने साइट विजिट भी पूरा कर लिया है। विभाग द्वारा 302 निवेशकों से लगातार चर्चा की जा रही है। उन्होंने बताया कि 2.48 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों पर विभाग द्वारा भूमि आवंटन एवं निवेश आवेदनों की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। इस बड़े निवेश से प्रदेश में 2.85 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग करीब 2 लाख करोड़ रुपए की औद्योगिक इकाइयों का सामूहिक भूमिभूजन कराने में सहभागिता करेगा। उन्होंने बताया कि ग्वालियर में टेलिकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की स्थापना के लिए केंद्र सरकार से चर्चा की जा रही है। इसके अलावा यहां प्रमुख निवेशकों को आकर्षित करने के लिए आईसीईए के साथ भी लगातार समन्वय किया जा रहा है। बैठक में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, खनिज, नगरीय विकास एवं आवास, ऊर्जा, लोक निर्माण, पर्यटन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा, उच्च शिक्षा, विमानन और सहकारिता विभाग सहित अन्य विभागों को प्राप्त निवेश प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई।    

राज्यपाल पटेल बोले—उत्तराखण्ड और झारखण्ड को प्रकृति ने दिए हैं अनोखे वरदान

उत्तराखण्ड और झारखण्ड को प्रकृति का विशेष उपहार : राज्यपाल  पटेल राजभवन में मनाया गया दोनों राज्यों का स्थापना दिवस राज्यों की लोक संस्कृति पर केन्द्रित प्रस्तुतियों ने बटोरी तालियां भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि उत्तराखण्ड और झारखण्ड को प्रकृति का विशेष उपहार मिला है। यहां पर समृद्ध वन्य जीव और प्राकृतिक संपदा भरपूर मात्रा में है। राज्यपाल  पटेल सोमवार को एक भारत-श्रेष्ठ भारत संकल्पना के तहत उत्तराखण्ड और झारखण्ड राज्य स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल  पटेल ने दोनों राज्यों के स्थापना दिवस की सभी को बधाई दी। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए कलाकारों की सराहना की। इस अवसर पर उत्तराखण्ड के राज्यपाल ले.ज. गुरमीत सिंह और झारखण्ड के राज्यपाल  संतोष गंगवार के शुभकामना संदेश और दोनों राज्यों की लघु फिल्म का प्रसारण किया गया। राजभवन के सांदीपनि सभागार में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि जहां एक ओर उत्तराखण्ड प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। उसी प्रकार झारखण्ड भी समृद्ध खनिज सम्पदा और लोक संस्कृति के लिए विश्व विख्यात है। महान जनजातीय नायक और क्रांतिसूर्य भगवान बिरसा मुंडा की कर्म भूमि झारखण्ड, हम सभी के लिए प्रेरक है। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस दोनों राज्यों के गठन की ऐतिहासिक यात्रा का प्रतीक है। भारत की विविधता, संघीय संरचना और एकता की उस शक्ति का भी स्मरण है, जिसने हमारे देश को दुनिया में विशेष पहचान दी है। यह सांस्कृतिक समारोह नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक विकास यात्रा में हमारी सक्रिय भागीदारी का प्रमाण है। हम सभी यहाँ अतिथि बनकर नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के समर्पित सहभागी के रूप में उपस्थित हैं।  राज्यपाल  पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के सभी राज्यों के स्थापना दिवस को राजभवन में मनाए जाने की पहल अनुकरणीय है। ऐसे आयोजन विविधता में एकता की संवैधानिक भावना को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में गुजरात के केवडिया स्थित स्टेच्यू ऑफ यूनिटी में 01 से 15 नवंबर तक विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और धरोहर को करीब से जानने का अभूतपूर्व और दर्शनीय आयोजन था। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के दूरदर्शी प्रयासों ने राष्ट्रीय विकास को जन-भागीदारी, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सामूहिक उत्तरदायित्व के साथ जोड़कर नए युग की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता केवल सीमाओं के विस्तार से नहीं, बल्कि विचारों, संस्कृतियों और समाज के हर वर्ग के सम्मान से सुदृढ़ होती है। इसी भावना का साकार रूप आज का यह संयुक्त समारोह है। ‘एक भारत—श्रेष्ठ भारत’ अभियान इस राष्ट्रीय भावना की उन्नत अभिव्यक्ति है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि यह आयोजन उत्तर और दक्षिण, पूर्व और पश्चिम के बीच केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक सेतु स्थापित करता है। राज्यपाल  पटेल का उत्तराखण्ड कुमायूं समाज भोपाल के अध्यक्ष  सुरेश कर्नाटक, गढ़वाली समाज ट्रस्ट भोपाल के अध्यक्ष विजय सिंह नेगी और बिहार सांस्कृतिक परिषद भोपाल के अध्यक्ष  राजेश कुमार सिंह ने स्मृति चिन्ह, पुष्प और अंग वस्त्र भेंट कर स्वागत और अभिनंदन किया गया। समारोह में उत्तराखण्ड के कलाकारों ने कुमायूं लोक नृत्यों और महादेव स्तुति की प्रस्तुति दी। झारखण्ड के कलाकारों ने मगही गीत और विभिन्न लोक नृत्यों की सामूहिक प्रस्तुति दी। आकर्षक प्रस्तुतियों का दर्शकों ने जोरदार तालियां बजाकर अभिवादन किया। मध्यप्रदेश राज्य पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का संचालन सु सृष्टि वास्तव और आभार गढ़वाली समाज भोपाल के अध्यक्ष विजय सिंह नेगी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर राजभवन के अधिकारी-कर्मचारी और उत्तराखण्ड एवं झारखण्ड राज्यों के मध्यप्रदेश में निवासरत नागरिक उपस्थित रहें।       

औषधीय फसलों की खेती में मध्यप्रदेश सबसे आगे, ईसबगोल और अश्वगंधा का उत्पादन बढ़ा

औषधीय फसलों के उत्पादन में देश में अग्रणी राज्य मध्यप्रदेश  46 हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होती ईसबगोल, अश्वगंधा की खेती भोपाल  मध्यप्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश में 46 हजार 837 हैक्टेयर क्षेत्र में औषधीय फसलों ईसबगोल, सफेद मूसली, कोलियस व अन्य फसलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में लगभग सवा लाख मीट्रकि टन औषधीय फसलों का उत्पादन  हुआ है। देश और विदेश में औषधीय फसलों की बढ़ती मांग के कारण किसानों का भी आकर्षण इन फसलों के उत्पादन की ओर बढ़ा है। प्रदेश में वर्ष 2022-23 में 44 हजार 324 हैक्टेयर में औषधीय फसलों की बोनी की गई थी । जो 2024-25 में बढ़कर 46 हजार 837 हैक्टेयर हो गया यानिकी 2 हजार 512 हैक्टेयर की वृद्धि हुई है। इन फसलों का वर्ष 2021-22 में उत्पादन   एक लाख 16 हजार 848 मीट्रिक टन था जो 2024-25 में बढ़कर एक लाख 24 हजार 199 मीट्रिक टन हो गया है। उल्लेखनीय है कि भारत में औषधीय और सुगंधित फसलों के उत्पादन में मध्यप्रदेश की सर्वाधिक भागीदारी है। एक अनुमान के अनुसार देश में औषधीय फसलों का 44 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश में उत्पादित होता है। राज्य सरकार औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अनुदान और अन्य प्रोत्साहन दे रही है। औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए 20 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान करती है। सरकार पारंपरिक फसलों के अलावा औषधीय पौधों जैसी वाणिज्यिक फसलों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे किसानों को उनकी उपज का अच्छा मूल्य मिल सके। औषधीय पौधों की खेती और संग्रह से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।  मध्यप्रदेश में प्रमुख फसलें अश्वगंधा, सफेद मूसली, गिलोय, तुलसी और कोलियस जैसी कई औषधीय फसलों का उत्पादन होता है। प्रदेश में 13 हजार हैक्टेयर में ईसवगोल, 6 हजार 626 हैक्टेयर अश्वगंधा, 2 हजार 403 हैक्टेयर में सफेद मूसली, 974 हैक्टेयर में कोलियस तथा 23 हजार 831 हैक्टेयर में अन्य औषधी फसल की बोनी की गई है। मध्यप्रदेश सरकार राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूह का औषधीय पौधों की खेती आकर्षित कर रही है। राज्य सरकार द्वारा डाबर, वैद्यनाथ जैसी आयुर्वेद कम्पनियों, संजीवनी क्लिनिक में विंध्यवैली जैसे ब्रांड के माध्यम से औषधीय उत्पादन को बाजार मुहैया करा रही है।  

बिल्डिंग का बड़ा खर्च, लेकिन मीटिंग हॉल नहीं बना; अब अतिरिक्त 10 करोड़ से निर्माण होगा

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी में खराब इंजीनियरिंग का एक और नमूना सामने आया है। लिंक रोड नंबर-1 पर भोपाल नगर निगम ने 5 एकड़ में करीब 40 करोड़ रुपए से 8 मंजिला बिल्डिंग तो बना दी, लेकिन जिम्मेदार मीटिंग हॉल बनाना भूल गए।  यह एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि ऐसे 2 प्रोजेक्ट और हैं, जिनमें खराब इंजीनियरिंग के नमूने सामने आ चुके हैं। 90 डिग्री एंगल वाले ऐशबाग ब्रिज को लेकर पहले ही भोपाल सुर्खियों में रह चुका है। फिर मेट्रो के 2 स्टेशन भी सुर्खियां बटोर चुके हैं। इन नमूनों को सिलसिलेवार जानिए…। सबसे पहले निगम मुख्यालय का ताजा मामला लिंक रोड नंबर-1 पर ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर नगर निगम का नया मुख्यालय भवन बना है। इसके बाद 10 से ज्यादा लोकेशन पर बने ऑफिस एक ही छत पर आ जाएंगे। करीब 40 करोड़ रुपए से बन रही बिल्डिंग में सिर्फ सोलर पैनल लग रहे हैं तो गार्डनिंग, फोन, इंटरनेट केबल और कुछ फ्लोर पर फर्नीचर का काम चल रहा है। कई मायनों में बिल्डिंग खास है। जब तक नया हॉल नहीं बनेगा, तब तक आईएसबीटी में होंगी बैठकें इन सब अच्छी बातों में एक बड़ी गलती भी हो गई। इस बिल्डिंग में परिषद का मीटिंग हॉल ही नहीं बना है। इसलिए 10 करोड़ रुपए खर्च कर परिषद हॉल बनाने का प्लान है, लेकिन जब तक यह नहीं बन जाता, तब तक आईएसबीटी में ही परिषद की बैठकें होंगी। पड़ताल की गई तो पता चला कि जब बिल्डिंग बनी थी, तब मीटिंग हॉल ही उसमें शामिल नहीं था। जिम्मेदारों का कहना है कि शुरुआत में बिल्डिंग की कुल लागत 22 करोड़ रुपए थी, लेकिन बाद में लागत बढ़ती गई। अब यह 40 करोड़ में आ गई। हॉल में ही परिषद की बैठक होती है। स्ट्रक्चरल इंजीनियर सुयश कुलश्रेष्ठ का कहना है कि जब भी कोई निर्माण कार्य कराया जाता है तो उसकी डिजाइन समेत कई पैमानों पर नजर रखी जाती है। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया होती है। नगर निगम अपनी ही बिल्डिंग में मीटिंग हॉल जैसा निर्माण करना ही भूल गया। अब मीटिंग हॉल को लेकर दूसरी बिल्डिंग बनेगी, लेकिन पैसा तो जनता का ही लगेगा, जो टैक्स के रूप में वसूला गया है। एक बिल्डिंग, 3 कमिश्नर बिल्डिंग की पूरी डिजाइन निगम कमिश्नर केवीएस चौधरी कोलसानी ने बनवाई थी। उनकी मौजूदगी में बिल्डिंग का आधे से ज्यादा काम हुआ, जबकि बाकी काम हरेंद्र नारायण के समय हुआ। अब संस्कृति जैन के समय फिनिशिंग हो रही है। 40% बिजली उत्पादन को लेकर बिगाड़ा फ्रंट मुख्यालय के ठीक सामने परिसर में ही पार्किंग बनाई गई है, जिस पर शेड है। इन्हीं शेड के ऊपर सोलर पैनल लगा दिए गए, ताकि 40 प्रतिशत बिजली निगम खुद ही बना सके, लेकिन ये ऐसी जगह लगाए गए हैं, जिनसे पूरी बिल्डिंग ही छिप गई, यानी बिल्डिंग का फ्रंट ही बदल गया है। इस मामले में निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी का कहना है कि डिजाइन गलत नहीं है। उस समय आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। हालांकि, इसके बाद इस्टीमेट कॉस्ट बढ़ी है। यह भी सही है कि पुरानी डिजाइन में परिषद हॉल नहीं था। अभी और जमीन लेकर पास में ही परिषद का हॉल बनवा रहे हैं, ताकि यहां बैठकें हो सकें। पार्किंग की जगह पर आपत्ति जताई है। इस वजह से फ्रंट ढंक गया है। सोलर पैनल छत पर लगाए जा सकते हैं।

डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर को 19वाँ राष्ट्रीय पुरस्कार, पद्मश्री श्री मठपाल करेंगे सम्मानित

19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार से पद्मश्री श्री मठपाल होंगे सम्मानित "पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्रों में हालिया प्रगति" पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, 09 से 11 जनवरी, 2026 तक भोपाल में राष्ट्रीय संगोष्ठी में संक्षेप (Abstract) जमा करने की अंतिम तिथि 20 नवंबर 2025 तक भोपाल  19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार से पद्मश्री श्री यशोधर मठपाल को सम्मानित किया जाएगा। संस्कृति विभाग के संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय द्वारा दिये जाने वाले राष्ट्रीय सम्मान में श्री मठपाल को प्रशस्ति पत्र, सम्मान पट्टिका और 2 लाख रुपये प्रदान किए जायेगे। यह पुरस्कार किसी सक्रिय भारतीय नागरिक या संस्था को पुरातत्व के क्षेत्र में उनकी सृजनात्मक, रचनात्मक और विशिष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। आयुक्त पुरातत्व श्रीमती उर्मिला शुक्ला ने बताया कि डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के योगदान को स्मरण करने के लिए, पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय निदेशालय, भोपाल 09 से 11 जनवरी, 2026 तक कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में "पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्रों में हालिया प्रगति" पर एक राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है। इसी दौरान 19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किया जाएगा। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में, पूरे भारत से प्रशासकों, नीति निर्माताओं, क्षेत्रीय पदाधिकारियों, प्रख्यात वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और छात्रों की भागीदारी होगी, जो पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालयों के क्षेत्रों में विभिन्न उभरते मुद्दों पर चर्चा करेंगे और पुरातात्विक खजानों के प्रभावी संरक्षण, प्रबंधन और विकास के लिए साक्ष्य-आधारित रणनीतियों की सिफारिश करेंगे।  आयुक्त पुरातत्व श्रीमती शुक्ला ने बताया कि राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्देश्य को 3 विषयों पर प्रस्तुति और चर्चा के माध्यम से संबोधित किया जाएगा। इन विषयों में पुरातत्व, नृवंश-पुरातत्व (ethnoarchaeology), पुरातत्वमिति (archaeometry), कलाकृति विश्लेषण, सांस्कृतिक संसाधन प्रबंधन आदि में नई सफलताएँ,  हाइब्रिड सिस्टम सहित अभिलेखागार और रिकॉर्ड प्रबंधन में उभरती प्रौद्योगिकियाँ और मूर्त और अमूर्त विरासतों (tangible and intangible heritages) के संग्रह, भंडारण, पहुँच और संरक्षण में नवीनतम विकास और डिजिटल क्यूरेशन के रुझान शमिल है।  सार-संक्षेप जमा करने की अंतिम तिथि 20 नवंबर तक बढ़ाई गई राष्ट्रीय संगोष्ठी के विषयों या संबंधित क्षेत्रों में से किसी पर भी सार-संक्षेप (Abstracts) आमंत्रित हैं। सार-संक्षेप जमा करने की अंतिम तिथि 10 नवंबर 2025 थी, जिसे अब 20 नवंबर 2025 तक बढ़ा दिया गया है। स्वीकृत सार-संक्षेप के पूर्ण पर्चों (full papers) का मूल्यांकन, संपादन किया जाएगा और उन्हें संगोष्ठी की कार्यवाही पुस्तक (seminar proceeding book) में प्रकाशित किया जाएगा। प्रत्येक विषय क्षेत्र पर सर्वश्रेष्ठ पर्चा प्रस्तुति (best paper presentation) के लिए पुरस्कार भी दिए जाएंगे। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट www.archaeology.mp.gov.in को देखा जा सकता है।  उल्लेखनीय है कि डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर (1919-1988), जिन्हें 'हरिभाऊ' के नाम से जाना जाता है और भारतीय शैल कला (rock art) अध्ययन के "पितामह" के रूप में संदर्भित किया जाता है, एक प्रख्यात भारतीय पुरातत्वविद्, कला इतिहासकार, मुद्राशास्त्री, पुरालेखविद् और सांस्कृतिक शोधकर्ता थे। उनका जीवन और कार्य भारत के समृद्ध प्राचीन इतिहास और प्रागैतिहासिक कला को उजागर करने और संरक्षित करने के लिए समर्पित था। उन्हें जनवरी 1975 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक, पद्म श्री से सम्मानित किया गया। डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार, जिसे वाकणकर सम्मान भी कहा जाता है, मध्यप्रदेश के भोपाल में पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय निदेशालय द्वारा (वर्ष के आधार पर) वार्षिक या द्विवार्षिक रूप से प्रस्तुत किया जाने वाला एक राष्ट्रीय पुरस्कार है।  

राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का शुभारंभ 18 नवंबर को, करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 18 नवम्बर को करेंगे राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदशर्नी का शुभारंभ प्रदशर्नी में 31 प्रदेशों के 900 विद्यार्थी कर रहे हैं सहभागिता 23 नवम्बर तक होंगी विज्ञान पर केन्द्रित गतिविधियां भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल में 18 नवम्बर मंगलवार को प्रात: 9:45 पर 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे। शुभारंभ समारोह में जनजातीय कार्य मंत्री  कुंवर विजय शाह एवं स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह भी मौजूद रहेंगे। प्रदशर्नी  का आयोजन राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, श्यामला हिल्स, भोपाल में किया जा रहा है। प्रदर्शनी के आयोजन में स्कूल शिक्षा विभाग सहभागिता कर रहा है। प्रदर्शनी में 31 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के लगभग 900 विद्यार्थी एवं शिक्षक विज्ञान पर केन्द्रित प्रोजेक्ट एवं मॉडल प्रदर्शित करेंगे। बच्चों में प्रोत्साहित की जायेगी विज्ञान के प्रति रूचि कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करना और वैज्ञानिक विचार विकसित करना है। इस कार्यक्रम में देश के समस्त प्रदेश एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के स्कूली विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में प्रतिदिन प्रात: 9 बजे से विभिन्न वैज्ञानिक संस्थाओं जैसे आंचलिक विज्ञान केन्द्र, आईसर, मैनिट, आईसेक्ट एवं ग्लोबल स्किल पार्क के वैज्ञानिक सहभागी विद्यार्थियों के साथ वैज्ञानिक वार्ता में विशेष व्याख्यान देंगे। इसके बाद 30 मिनट विद्यार्थियों के साथ प्रश्नोत्तरी भी होगी। विज्ञान प्रदर्शनी का 2025-26 का विषय सतत् भविष्य के लिये विज्ञान प्रौद्योगिकी रखा गया है। प्रदशर्नी के दौरान मुख्य रूप से खाद्य, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, परिवहन एवं संचार, प्राकृति खेती, आपदा प्रबंधन, गणितीय मॉडलिंग और कंप्यूटेशनल थिंकिंग के साथ अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष रूप से चर्चा की जायेगी। विज्ञान प्रदशर्नी में शाम को प्रतिदिन विभिन्न राज्यों के विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। विभिन्न राज्यों से आये विद्यार्थियों को राजधानी भोपाल के आसपास ऐतिहासिक स्थलों, संग्रहालयों, विज्ञान केन्द्र, शिल्प केन्द्र आदि का भ्रमण भी कराया जायेगा। प्रदशर्नी की विशेषताएं प्रदर्शनी में प्रतिदिन 2 हजार विद्यार्थी एवं नागरिक अवलोकन करने पहुंचेंगे। प्रदर्शनी में 240 साइंस मॉडल का प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदशर्नी में प्रतिभागी विद्यालयों की संख्या 229 है। यह प्रदर्शनी देश के विभिन्न भागों के युवाओं एवं बच्चों को विज्ञान, गणित तथा पर्यावरण संबंधी मुद्दों के विभिन्न पहलुओं के विषय में जानकारी प्राप्त करने और एक-दूसरे के साथ अपनी विविध संस्कृतियों को साझा करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगी। भोपाल में 6 दिवसीय प्रदर्शनी का समापन 23 नवम्बर को दोपहर 3:30 बजे होगा।  

मसूरी में IAS अफसरों की ट्रेनिंग, 39 कलेक्टरों का सिलेक्शन और प्रशासनिक तैयारियां

भोपाल  लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA) मसूरी में मिड करियर ट्रेनिंग आयोजित करेगा। यह ट्रेनिंग 5 जनवरी से 30 जनवरी तक चलेगी। इसमें 122 आईएएस अफसर शामिल होंगे। इसके साथ ही, इसमें एमपी के 39 कलेक्टरों समेत अन्य अधिकारियों को बुलाया गया है। मुख्य सचिव अनुराग जैन को पत्र भेजकर रजिस्ट्रेशन कराने को कहा गया है। हालांकि, प्रदेश के 39 कलेक्टरों को लेकर पेंच फंस गया है। क्या है कारण… चलिए बताते हैं। चुनाव आयोग के आदेशों से बनी परेशानी     इस ट्रेनिंग के दौरान चुनाव आयोग के सख्त निर्देशों की वजह से 39 कलेक्टरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चुनाव आयोग ने SIR के कारण प्रशासनिक फेरबदल पर रोक लगा दी है।     इससे इन कलेक्टरों को ट्रेनिंग में शामिल होने की मंजूरी मिलने की संभावना कम हो गई है। इसलिए, इन 39 कलेक्टरों का मिड करियर ट्रेनिंग में शामिल होना अब मुश्किल नजर आ रहा है। प्रदेश के 39 कलेक्टरों का सिलेक्शन लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशिक्षण अकादमी मसूरी में मिड करियर ट्रेनिंग के लिए किया गया है इसमें उज्जैन संभागायुक्त के अलावा भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, सागर, रीवा जैसे बड़े शहरों के कलेक्टर शामिल है इसके साथ ही मंत्रालय और अलग-अलग विभागों में विभाग प्रमुख के उप सचिव और सचिव के रूप में काम करने वाले आईएएस अधिकारियों को भी ट्रेनिंग के लिए सिलेक्ट किया गया है 24वें मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम के शेड्यूल जारी करते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखा है पांच जनवरी 2026 से 30 जनवरी तक चलने वाले मिड करियर प्रशिक्षण कार्यक्रम के फेज थ्री के लिए 2010 बैच के अधिकारियों का चयन मामला दर मामला के आधार पर किया गया है जबकि 2016 बैच के अधिकारियों के लिए यह तीसरा और अंतिम अवसर है 2017 बैच के अफसरों के लिए दूसरा और वर्ष 2018 बैच के अफसरों के लिए पहला प्रशिक्षण अवसर है ये कलेक्टर ट्रेनिंग के लिए चयनित जिन कलेक्टरों का चयन ट्रेनिंग के लिए किया गया है उसमें भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, ग्वालियर कलेक्टर रूचिका चौहान, धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल, बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह, झाबुआ कलेक्टर नेहा मीना, अलीराजपुर कलेक्टर कलेक्टर नीतू माथुर, खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता, बुरहानपुर कलेक्टर हर्ष सिंह, उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह शामिल है साथ ही देवास कलेक्टर ऋतु राज, शाजापुर कलेक्टर रितु बाफना, आगर मालवा कलेक्टर प्रीति यादव, मंदसौर कलेक्टर अदिति गर्ग, नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा, दतिया कलेक्टर स्वन्प्रिल जी वानखेड़े, मुरैना कलेक्टर लोकेश रामचंद्र जांगिड़, श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा को ट्रेनिंग के लिए चुना गया है इसके अलावा रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल, सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी, सतना कलेक्टर सतीश कुमार एस, अनूपपुर कलेक्टर हर्षल पंचोली, उमरिया कलेक्टर धरणेंद्र कुमार जैन, सागर कलेक्टर संदीप जी आर दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर, छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल निवाड़ी कलेक्टर जमुना भिडे सीहोर कलेक्टर बालागुरू के रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा राजगढ़ कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता नर्मदापुरम कलेक्टर सोनिया मीना हरदा कलेक्टर सिद्थार्थ जैन बैतूल कलेक्टर नरेंद्र कुमार सोमवंशी नरिसंहरपुर कलेक्टर रजनी सिंह छिंदवाड़ा कलेक्टर हरेंद्र नारायण सिवनी कलेक्टर शीतला पटले बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना, और पांढ़ुर्णा कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ का भी चयन किया गया है 12 दिसंबर तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा इसमें कहा गया है कि ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए सिलेक्ट किए गए अधिकारियों का रजिस्ट्रेशन 12 दिसंबर तक ऑनलाइन कराने की कार्रवाई कराएं। साथ ही अधिकारियों से कहा गया है कि 19 दिसंबर तक प्रस्तावित प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए संबंधित अधिकारियों के नामांकन की स्वीकृति भेंजे सभी अफसरों को 4 जनवरी को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी मसूरी के लिए भेजना सुनिश्चित करें इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए उन अधिकारियों का चयन किया गया है जो 31 दिसंबर 2029 के पहले सेवानिवृत्त नहीं हो रहे है भोपाल कलेक्टर, उज्जैन कमिश्नर को भी बुलाया मिड करियर ट्रेनिंग के लिए 2010 बैच के एमपी कैडर को दो आईएएस अधिकारी चुने गए है इनमें भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, उज्जैन कमिश्नर आशीष सिंह शामिल है वीएस चौधरी कोलसानी रुचिका चौहान हरिजिंदर सिंह बी विजय दत्ता अनुग्रह पी चंद्रमौलि शुक्ला नीरज कुमार सिंह पंकज जैन अजय कटेसरिया निधि निवेदिता स्वरोचिष सोमवंशी प्रवीण सिंह अधयक अनुराग वर्मा प्रतिभा पाल फटिंग राहुल हरिदास राजीव रंजन मीना बक्की कार्तिकेयन अवधेश शर्मा कुमार पुरुषोत्तम सुभाष कुमार द्विवेदी धरणेंद्र कुमार जैन नरेंद्र कुमार सोमवंशी राजेश बाथम संतोष कुमार वर्मा अरूण कुमार परमार गिरीश कुमार मिश्रा शिवम वर्मा ,सोनिया मीना हर्ष दीक्षित रजनी सिंह प्रियंक मिश्रा मयंक अग्रवाल अनूप कुमार सिंह संतीष कुमार एस नीरज कुमार वशिष्ठ अमर बहादुर सिंह संदीप जीआर पवन कुमार जैन रिजु बाफना आशीष वशिष्ठ साकेत मालवीय शीतला पटले रिषव गुप्ता लोकेश रामचंद्र जांगिड़ अंकित अष्ठाना नेहा मीना अरुण कुमार विश्वकर्मा भव्या मित्तल क्षितिज सिंघल दीलीप कुमार कापसे बुध्देश कुमार वैद्य अभय कुमार बेडेकर सुधीर कुमार कोचर नीतू माथुर जमुना भिडे अंजू अरुण कुमार परीक्षित संजयराव झाड़े सौरभ संजय सोनवड़े भारसत योगेश तुकाराम राहुल नामदेव धोटे अंकिता धाकरे शेर सिंह मीना अभिलाष मिश्रा देंवेंद्र कुमार नागेंद्र गुरु प्रसाद कुमार सत्यम संजय कुमार जैन राखी सहाय हर्ष सिंह अदिति गर्ग हर्षल पंचोली रितु राज संस्कृति जैन मृणाल मीना पार्थ जायसवाल हिमांशु चंद्रा अर्पिता वर्मा बालागुरू के जे रीभा रौशन कुमार मनोज कुमार सरियाम हरेंद्र नारायण प्रीति यादव जयति सिंह सिध्दार्थ जैन अंशुल गुप्ता स्वन्प्रिल वानखेड़े संजना जैन जगदीश कुमार गोमे अनुराग सक्सेना प्रताप नारायण यादव संघमित्रा गौतम कीर्ति खुरासिया अजीजा सरसार जफर संपना पंकज सोलंकी आशीष सांगवान राजेश कुमार जैन सुचिस्मिता सक्सेना दिशा प्रणय नागवंशी गजेंद्र सिंह नागेश मलिका निगम नागर मंजूषा विक्रांत राय संघ प्रिय शिशिर गेमावत अभिषेक चौधरी तपस्या परिहार सिध्दार्थ जैन प्रथम कौशिक श्याम वीर अमन वैष्णव हरसिमरन प्रीत कौर अंजलि जोसेफ अक्षय कुमार तेम्रवाल रामप्रकाश अहिरवार अर्चना सोलंकी संदीप केरकट्टा अभय सिंह ओहरिया वंदना वर्मा रेखा राठौर नवीन कुमार ध्रुर्वे

सुरक्षा बलों का अभियान तेज, नक्सलियों के लिए प्रोत्साहन योजनाओं के साथ पहली प्राथमिकता सरेंडर

मंडला  नक्सलियों को जड़ से खत्म करने के लिए व्यापक और सख्त अभियान शुरू किया गया है. मार्च 2026 तक नक्सल समस्या पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है. इसके साथ ही राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए कई आकर्षक योजनाओं की घोषणाएं भी की हैं. मंडला जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है. नक्सलवाद खत्म करने का रोडमैप तैयार एसपी रजत सकलेचा ने बताया "नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का रोडमैप तैयार है. इसके तहत पुलिस और सुरक्षा बल लगातार जंगल के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. इस बार अभियान में सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की ताकत भी जुड़ गई है." राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए लुभावनी पुनर्वास नीति लागू की है. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को 20 हज़ार से लेकर 4 लाख 50 हज़ार रुपए तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी. सरेंडर करने वाले नक्सलियों को आर्थिक मदद एसपी रजत सकलेचा ने बताया "सरेंडर करने वाले नक्सलियों को जमीन खरीदने के लिए 20 लाख रुपए तक की मदद दी जाएगी. प्रोत्साहन राशि के रूप में न्यूनतम 5 लाख रुपए, नए जीवन की शुरुआत के लिए 1 लाख 50 हज़ार रुपए,और विवाह करने पर 50 हज़ार रुपए की विशेष सहायता राशि प्रदान की जाएगी. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को फ्री खाद्यान्न भी दिया जाएगा ताकि वे समाज की मुख्यधारा में दोबारा जुड़ सकें. राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए लुभावनी पुनर्वास नीति लागू की है." अन्य नक्सलियों की जानकारी देने पर सरकारी जमीन मिलेगी अगर कोई नक्सली पुलिस को दूसरे नक्सली के आत्मसमर्पण या मूवमेंट की जानकारी देता है, तो उसे सरकारी नौकरी देने पर भी विचार किया जा सकता है. हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा नक्सली हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें. मार्च 2026 तक मंडला को नक्सल मुक्त बनाने का हमारा लक्ष्य है. इस योजना की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने मीडिया, सोशल मीडिया और स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से व्यापक प्रचार अभियान शुरू कर दिया है. सरकार की योजनाएं नक्सलियों तक पहंचाने की अपील सरकार का उद्देश्य साफ है कि जंगलों में छिपे हर नक्सली तक यह संदेश पहुंचे कि अब सरकार सज़ा नहीं, सुधार का मौका दे रही है. मंडला पुलिस और प्रशासन का मानना है कि अगर यह अभियान सफल रहा तो न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश में शांति और विकास की राह और मजबूत होगी.  

डॉ. यादव ने की डॉ. खट्टर के साथ सौजन्य मुलाकात, बढ़ाई आपसी संवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री डॉ. खट्टर से की सौजन्य भेंट डॉ. यादव ने की डॉ. खट्टर के साथ सौजन्य मुलाकात, बढ़ाई आपसी संवाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री की सौजन्य भेंट, दोनों नेताओं ने की महत्वपूर्ण बातचीत सिंहस्थ-2028 से जुड़ी तैयारियों एवं परियोजनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार की शाम नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री डॉ. मनोहर लाल खट्टर से उनके आवास पर सौजन्य भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय मंत्री डॉ. खट्टर को सिंहस्थ-2028 आयोजन से जुड़ी तैयारियों एवं अन्य प्रमुख परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ क्षेत्र में अधोसंरचनात्मक विकास कार्यो और इसके विस्तार प्रस्तावों, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता, शुचिता, नदी संरक्षण, पेयजल व्यवस्था, अस्थायी आवास निर्माण आदि विषयों के संबंध में केंद्रीय मंत्री को विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का सर्वोत्कृष्ट आयोजन बनाने के लिए राज्य सरकार विभिन्न बहुआयामी योजनाओं पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं —स्वच्छ भारत अभियान, अमृत मिशन, स्मार्ट सिटी पहल, विद्युत परियोजनाओं और शहरी आधारभूत ढांचे से संबंधित अन्य योजनाओं की प्रगति की भी जानकारी दी। बैठक में अपर मुख्य, (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई, केंद्रीय विद्युत, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के प्रमुख अधिकारी तथा राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

रॉबर्ट वाड्रा बोले- लोग चाहेंगे तो राजनीति में आएंगे, बिहार चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद उठी मांग

इंदौर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के पति और बिज़नेसमैन रॉबर्ट वाड्रा ने अपनी राजनीतिक पारी को लेकर बड़ा बयान दिया हैं. इंदौर में उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए राजनीति में आने के संकेत दिए. इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखा हमला किया.  रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि मैं राजनीति में आऊंगा तो लोग परिवारवाद कहने लगेंगे लेकिन अगर लोग चाहेंगे तो में राजनीति में आएंगे, अगर हम संसद में होंगे तो लोगों की बात को और बात को मजबूत करेंगे. वहीं बेटे रेहान के राजनीति में एंट्री के सवाल पर उन्होंने हा कि अभी ये सही समय नहीं है.   प्रियंका गांधी के पति और कांग्रेस नेता रॉबर्ट वाड्रा ने बिहार चुनाव परिणामों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता हालिया चुनाव नतीजों से किसी भी तरह खुश नहीं है। उन्होंने कहा कि जो परिणाम सामने आए हैं, वे जनता की मर्जी नहीं बल्कि चुनाव आयोग की भूमिका का नतीजा हैं। वाड्रा ने कहा कि बिहार में दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए, क्योंकि मौजूदा परिणामों पर भरोसा करना मुश्किल है। जनता का फैसला इससे अलग होता  इंदौर में मीडिया से बातचीत करते हुए वाड्रा ने कहा कि चुनाव आयोग की मदद से यह परिणाम सामने लाए गए हैं और जनता का असली फैसला इससे अलग होता। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ देशभर के युवा लगातार जुड़ रहे हैं। रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए बड़े स्तर पर आंदोलन भी खड़ा किया जाएगा। उनके मुताबिक, अगर बिहार में दोबारा चुनाव कराए जाते हैं तो नतीजे बिल्कुल बदल जाएंगे। एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया वाड्रा ने कहा कि इस समय रेहान को राजनीति में डालने का सही समय नहीं है. रेहान राजनीति देखी है सीखा है और गांधी परिवार के संघर्ष को भी महसूस किया है. रॉबर्ट वाड्रा ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि रेहान ने यह भी देखा है कि किस हद तक बीजेपी एजेंसी का प्रयोग करती है.  बीजेपी हर एक चुनाव में हमारे नाम का प्रयोग करती है. बिहार के रिजल्ट से लोग हैरान है खुश नहीं है. चुनाव आयोग ने चुनाव प्रक्रिया में मदद की जिसकी वजह से ऐसे नतीजे आए हैं. बिहार में जो हुआ वो लोकतंत्र के लिए सही नहीं है. एनडीए वाले अपने वादे को पूरा नहीं कर पाएगी.  बिहार में फिर चुनाव कराने की माँग इससे पहले रॉबर्ट वाड्रा ने बिहार के नतीजों पर सवाल उठाते हुए दावा किया था कि बिहार में चुनाव सही तरीके से नहीं कराए गए. अगर राड्य में दोबारा चुनाव कराए जाएंगे तो नतीजे पूरी तरह से बदल जाएंगे. युवा इन दिनों एनडीए सरकार की योजनाओं से परेशान हैं और सरकार को बदलना चाहते हैं.  आपको बता दें कि रॉबर्ट वाड्रा इन दिनों इंदौर और उज्जैन में धार्मिक यात्रा पर है. इस दौरान उन्होंने बिहार चुनाव को लेकर पत्रकारों से बात करते हुए अपनी राय भी रखी है.  महाकाल के दर्शन करने पहुंचे थे वाड्रा इंदौर प्रवास के दौरान वाड्रा ने अपने धार्मिक कार्यक्रमों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वे दो दिनों तक मध्य प्रदेश में रहेंगे और इस दौरान उज्जैन एवं ओंकारेश्वर में ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगे। बिहार की जनता इससे खुश नहीं रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि बिहार की जनता वास्तव में इन नतीजों से खुश नहीं है। जो कुछ हुआ है, वह पूरी तरह चुनाव आयोग की वजह से हुआ है। आयोग ने जिस तरह मदद की, उसके बाद जो परिणाम आए हैं, उनसे कोई भी सहमत नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के साथ अब बड़ी संख्या में युवा जुड़ रहे हैं और सभी मिलकर लोकतंत्र के लिए आंदोलन खड़ा करेंगे। यह चुनाव किसी भी तरह निष्पक्ष नहीं था, इसलिए बिहार में दोबारा मतदान होना चाहिए। अगर फिर से चुनाव हुए तो नतीजे पूरी तरह बदल जाएंगे।