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क्राइम ब्रांच इंदौर की तत्पर कार्रवाई से ऑनलाइन फ्रॉड मामलों में मिली सफलता

ऑनलाइन फ्रॉड शिकायतों में क्राइम ब्रांच इंदौर की प्रभावी कार्यवाही वर्ष 2025 में 12 करोड़ से अधिक राशि कराई गई आवेदकों को वापस भोपाल इंदौर कमिश्नरेट क्षेत्र में ऑनलाइन ठगी और आर्थिक अपराधों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश पुलिस आयुक्त नगरीय इंदौर श्री संतोष कुमार सिंह द्वारा दिए गए हैं। इन निर्देशों के तहत क्राइम ब्रांच इंदौर की साइबर फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन टीम को ऑनलाइन शिकायतों पर त्वरित व प्रभावी कार्रवाई के लिए लगाया गया है।इस क्रम में उल्लेखनीय सफलताएँ प्राप्त करते हुए—वर्ष 2025 में क्राइम ब्रांच इंदौर पुलिस की फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन टीमों ने ऑनलाइन फ्रॉड से प्रभावित आवेदकों को कुल ₹12 करोड़ 61 लाख 18 हजार 340 की राशि सफलतापूर्वक वापस कराई है। जनवरी से अक्टूबर 2025 तक क्राइम ब्रांच को लगभग 4,500 साइबर फ्रॉड शिकायतें प्राप्त हुईं, जिन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए अधिकांश मामलों में ठगी की रकम रिकवर कर आवेदकों को लौटाई गई।टीम द्वारा 1,500 से अधिक फर्जी बैंक खातों को फ्रीज कराया गया, 200 से अधिक हैक किए गए सोशल मीडिया अकाउंट (Facebook, Instagram आदि) को रिकवर कराया गया और 250 से अधिक फर्जी अकाउंट जो आवेदकों के नाम व फ़ोटो पर बनाए गए थे, ब्लॉक कराए गए। प्रमुख प्रकार के ऑनलाइन फ्रॉड इन्वेस्टमेंट ऑनलाइन फ्रॉड (जैसे टास्क, ट्रेडिंग आदि)बैंक अधिकारी बनकर KYC अपडेट, रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम, क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने के नाम पर ठगी, सेक्सटॉर्शन एवं रोमांस स्कैम के माध्यम से आर्थिक धोखाधड़ी। साथ हीसाइबर जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों नागरिकों को साइबर अपराध से बचाव के उपाय बताकर सतर्क किया गया है। मध्‍यप्रदेश पुलिस ने आमजन से अ‍पील की है कि ऑनलाइन माध्यम से होने वाले किसी भी प्रकार के फ्रॉड से सतर्क रहें।यदि आपके साथ किसी प्रकार की ठगी होती है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.inतथा हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें।  

किसानों को निर्बाध 10 घंटे बिजली देने का संकल्प बिजली कंपनी ने दोहराया

किसानों को 10 घंटे विद्युत आपूर्ति के लिए बिजली कंपनी कृत संकल्पित भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने स्पष्ट किया है कि राज्य शासन के संकल्प की पूर्ति के लिए कंपनी कार्यक्षेत्र के 16 जिलों में किसानों को कृषि फीडरों पर 10 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। यह देखने में भी आया है कि असामाजिक तत्वों के प्रभाव में निर्धारित घंटे एवं घोषित समयानुसार से अधिक विद्युत प्रदान किये जाने से कृषि फीडरों पर विद्युत से होने वाली दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही इससे घरेलू फीडरों पर 24X7 विद्युत प्रदाय किये जाने में भी बाधा उत्पन्न होती है।इन घंटों से अधिक आपूर्ति के लिए संबंधित अधिकारियों पर कुछ दंड के प्रावधान किये गये हैं। इन्हीं प्रावधानों के अंतर्गत कहा गया है कि यदि विद्युत प्रदाय के घंटों में किसी कारण से वृद्धि होती है तो इसके परिणाम बिजली कंपनी के आर्थिक समंकों में गिरावट के रूप में दर्ज होते हैं। इससे एक ओर जहॉं तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों में वृद्धि होती है वहीं दूसरी ओर इन आर्थिक समंकों में गिरावट होने से विद्युत वितरण के क्षेत्र में चल रही परियोजनाओं एवं निर्माण कार्यों की पात्रता की शर्तें बदल जाती हैं और कंपनी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में 09 लाख 92 हजार 171 कृषि उपभोक्ताओं को निर्बाध रूप से 10 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। वर्ष 2024-25 में कृषि उपभोक्ताओं को 6465 करोड़ की सब्सिडी प्रदान की गई है। इसी प्रकार वर्ष 2025-26 में कृषि उपभोक्ताओं को 2535 करोड़ की सब्सिडी प्रदान की गई है। विद्युत प्रदाय के घंटों की समय अवधि की गणना के लिये मीटर की तकनीकी विशिष्टता की स्पष्टता के लिए उक्त परिपत्र पुनरीक्षित किया गया है। यहॉ यह उल्लेखनीय है कि पुनरीक्षित प्रपत्र में कृषि फीडरों में निर्धारित 10 घंटे विद्युत प्रदाय के नियम में किसी प्रकार का परिवर्तन/कमी नहीं की गई है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के संज्ञान में यह बात आई कि उक्त निर्देशों को लेकर सोशल मीडिया पर यह गलत एवं भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है कि किसानों को बिजली उपलब्ध कराने में कंपनी एवं विभाग को कठिनाई आ रही है। यह बात वास्तविकता से परे होकर असत्य है।  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा उक्त निर्देशों को पुनः रेखांकित करते हुए 3 नवंबर 2025 को एक परिपत्र जारी किया है, जिसमें उपरोक्त अनुसार राज्य शासन के निर्देशानुसार कृषि फीडर पर 10 घंटे विद्युत प्रदाय करने की प्रतिबद्धता एवं निर्देश दोहराए गए हैं। इन्हीं निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया है की विभिन्न क्षेत्र को विभिन्न समूह में बांटा गया है, जिससे 10 घंटे विद्युत प्रदाय का कार्यक्रम कृषि प्रयोजन हेतु सुनिश्चित रहे। किसी भी ग्रुप को 10 घंटे से अधिक विद्युत प्रदायक करने का कृषि फीडर पर प्रावधान नहीं होने के कारण विभागीय अधिकारियों को उक्त निर्देश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह स्पष्ट किया जाता है की ऊर्जा विभाग एवं विद्युत वितरण कंपनियां कृषि कार्य हेतु 10 घंटे विद्युत प्रदाय करने के लिए प्रतिबद्ध है एवं उसकी पूर्ति करने के लिए लगातार कार्यरत है।  

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने किया करोड़ों की लागत से विकास परियोजनाओं का शुभारंभ

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने करोड़ों के विकास कार्यों का किया भूमि-पूजन पेयजल के लिए बिछेगी 120 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन, 9 ओवरहेड टैंक भी बनेंगे भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि पेयजल आपूर्ति को अधिक सुचारू और सुगम बनाने के लिए गोविंदपुरा क्षेत्र में 65 करोड़ रुपए की लागत से 9 ओवरहेड टैंक और 120 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाने के कार्य किए जाएंगे। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि क्षेत्र के लोगों की भविष्य में पानी की जरूरत को ध्यान में रखकर यह निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। इससे जनता की बहुप्रतिक्षित मांग पूरी होगी और नर्मदा का पानी घर-घर पहुंचेगा। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार जनता से किये गए वादों को प्रतिबद्धता के साथ पूरा कर रही है। उन्होंने कहा कि अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत 65 करोड़ रुपए की लागत से 9 पानी की टंकियों के निर्माण का कार्य किया जाएगा, जिनकी क्षमता 20 से 25 लाख लीटर होगी और 120 किलोमीटर की पेयजल पाइप लाइन को बिछाने का कार्य किया जाएगा। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से क्षेत्रवासियों को स्वच्छ एवं नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने वार्ड 55 स्थित अमराई परिसर में 1 करोड़ 75 लाख रुपए की लागत के 20 लाख लीटर क्षमता वाले ओवरहेड टैंक के साथ ही वार्ड 60 में 1 करोड़ 55 लाख की लागत से प्रस्तावित पेयजल पाइप लाइन निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया। उन्होंने वार्ड 56 के साकेत नगर स्थित पंचवटी मार्केट परिसर में 1 करोड़ 74 लाख की लागत की पानी की टंकी के और पेयजल पाइप लाइन के निर्माण कार्य को भी क्षेत्रवासियों को सौगात दी। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने लहारपुर में 1.75 लाख रुपए की लागत से निर्मित होने वाली पेयजल टंकी एवं पेयजल पाइप लाइन कार्य के साथ साथ सोनागिरी ए सेक्टर, वार्ड 64 में 2 करोड़ 3 लाख रुपए की लागत से प्रस्तावित पेयजल टंकी निर्माण एवं पाइप लाइन बिछाने के कार्य का भी भूमि-पूजन किया। कार्यक्रम में श्रीमती मोनिका ठाकुर, श्रीमती शीला पाटीदार, श्रीमती छाया ठाकुर, श्रीमती अर्चना परमार, श्री संतोष ग्वाला, श्री जितेंद्र शुक्ला, श्री प्रताप वारे, श्री प्रताप सिंह बैस, श्री बी शक्तीराव, श्री गणेश राम नागर, श्री प्रदीप पाठक, श्री सुरेंद्र घोटे, श्री किशन बंजारे सहित जनप्रतिनिधि और सैकड़ों की संख्या स्थानीय रहवासी मौजूद रहे। 

इंदौर में 13 नवंबर को होगी टेकग्रोथ कॉन्क्लेव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंदौर के ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में 13 नवंबर को आयोजित होने वाला 'मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0' प्रदेश को तकनीक, नवाचार और निवेश का वैश्विक केंद्र बनायेगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किये जा रहे इस आयोजन से राज्य की तकनीकी और औद्योगिक प्रगति के अगले चरण की रूपरेखा तय की जायेगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जायेगा कि मध्यप्रदेश टियर-2 भारत की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व कर सके। कॉन्क्लेव में राज्य सरकार का टेक्नोलॉजी-फर्स्ट इकोनॉमी विजन भी प्रस्तुत किया जायेगा। इसमें दर्शाया जाएगा की मध्यप्रदेश नवाचार, कौशल और उद्यमिता के समन्वय से समावेशी आर्थिक विकास की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कॉन्क्लेव के प्रतिभागी उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से वन-टू-वन बैठक भी करेंगे। कॉन्क्लेव की थीम 'पॉवरिंग टियर-2, प्रोपेलिंग इंडिया' रखी गई है। कॉन्क्लेव 2.0 का उद्देश्य राज्य के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र में नवाचार, निवेश और सहयोग के माध्यम से नई गति लाना है। कॉनक्लेव की थीम इस तथ्य को रेखांकित करेगी कि भारत की विकास यात्रा में अब टियर-2 शहर अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। मध्यप्रदेश इस परिवर्तन का केंद्र बन रहा है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जौसे शहर तेजी से टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और उद्यमिता के नए हब के रूप में उभर रहे हैं।’ टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0' नीति-निर्माताओं, वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के प्रमुख नेतृत्वकर्ता उद्यमियों का संगम होगा। कॉनक्लेव में इस बार 500 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। कॉन्क्लेव का शुभारंभ "एमपी जीसीसी लीडरशिप कनेक्ट" सत्र से होगा। इस सत्र में देशभर के 30 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसीएस) के प्रतिनिधि भाग लेंगे। यह संवाद सत्र मध्यप्रदेश को पसंदीदा जीसीसी गंतव्य के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर केंद्रित रहेगा। इस दौरान "एमपी जीसीसी विज़न डॉक्यूमेंट" तैयार किया जाएगा, जो राज्य की दीर्घकालिक टेक्नोलॉजी रणनीति का आधार बनेगा। मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में “ड्रोन राउंडटेबल” का आयोजन भी होगा।इसमें नीति-निर्माता, उद्योग विशेषज्ञ और ड्रोन इनोवेशन कंपनियाँ भाग लेंगी। सत्र में राज्य के ड्रोन ईकोसिस्टम, विनिर्माण अवसरों, सरकारी सेवाओं और औद्योगिक उपयोगों में ड्रोन तकनीक के विस्तार पर केंद्रित रहेगा। मुख्य सत्र में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे संबोधित करेंगे। उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि जीसीसी, ड्रोन, एवीजीसी-एक्सआर, सेमीकंडक्टर, ईएसडीएम, स्पेसटेक, डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में निवेश और नवाचार की दिशा में अपने विचार साझा करेंगे।मुख्य सत्र में नई डिजिटल अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन, आईटी पार्कों और स्किल सेंटर्स की आधारशिला, नए निवेशकों को लेटर ऑफ अलॉटमेंट का वितरण और एमओयू व साझेदारी समझौतों पर हस्ताक्षर किये जायेंगे। मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 से राज्य में तकनीकी निवेश और रोजगार सृजन को नई दिशा मिलेगी। कॉन्क्लेव के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से नई डिजिटल नीतियों और तकनीकी पहलों की घोषणाएँ की जाएँगी। इन नीतियों का उद्देश्य प्रदेश में नवाचार को प्रोत्साहन, निवेश को आकर्षित करना और स्किल डेवलपमेंट को सशक्त बनाना है। कॉन्क्लेव में आईटी-आईटीईएस, सेमीकंडक्टर, ईएसडीएम, ड्रोन, स्पेसटेक, एवीजीसी-एक्सआर, डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स से जुड़े अग्रणी उद्योग, निवेशक, शिक्षण संस्थान, और उद्योग संगठन शामिल होंगे। यह आयोजन राज्य में नवाचार-आधारित निवेश वातावरण और मजबूत सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) को बढ़ावा देगा। 'मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 1.0' में अप्रैल 2025 में आयोजित उल्लेखनीय सफलता मिली। कॉनक्लेव में 20 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे और 75 हजार से अधिक रोजगार के अवसरों का सृजन हुआ था। इस सफलता के आधार पर 'टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0' को और भी व्यापक, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाया जाएगा। आयोजन में भाग लेने के इच्छुक संगठन और उद्यमी https://mpsedc.mp.gov.in/mptgc2025/Registration पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए इच्छुक प्रतिभागी इन्वेस्टमेंट प्रमोशन सेल की प्रभारी अधिकारी सुश्री अवंतिका वर्मा, मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन से दूरभाष 0755- 2518704 अथवा ईमेल ipcell-mp@mpsedc.com पर सम्पर्क कर सकते हैं। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले — संस्कार ही जीवन परिवर्तन की कुंजी हैं

संस्कार से ही जीवन में आता है बदलाव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने बीएपीएस के दो बड़े शिक्षा प्रकल्पों का किया शुभारंभ इंटीग्रेटेड पर्सनालिटी डेवलपमेंट कोर्स आईपीडीसी का हुआ एमओयू भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संस्कार से ही जीवन में बदलाव आता है। हमारी सनातन संस्कृति अद्भुत है। भारत को सदैव विश्व गुरू के रूप में दुनिया देखती आई है। भारत में ही अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाने की समस्त संभावनाएं निहित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बीएपीएस संस्था के वैश्विक प्रयासों की सराह करते हुए कहा कि अबूधाबी में बना भव्य बीएपीएस हिंदू मंदिर अद्भुत है। उनके प्रमुख महंत का जबलपुर का होना हम सभी प्रदेशवासियों के लिये गौरव की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को जबलपुर में बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था द्वारा आयोजित जीवन उत्कर्ष महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने महोत्सव में बीएपीएस के 2 पाठयक्रम 'चलो बनें आदर्श' और 'इंटीग्रेटेड पर्सनालिटी डेवलपमेंट कोर्स' (आईपीडीसी) का शुभारंभ किया। इन पाठयक्रमों का उद्देश्य स्कूली बच्चों और युवाओं को संस्कार और जीवन मूल्यों की शिक्षा देना है। महोत्सव में मंगलायन यूनिवर्सिटी और रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर्स ने कोर्स से संबंधित एमओयू का आदान-प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देवालयों में दिव्य कल्पनाओं को साकार होते देखा जा सकता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बीएपीएस जैसी संस्थाएं हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। मुख्यामंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामीनारायण संस्था दुनिया को पहचानने और स्वयं को जानने के लिये आम व्यक्ति का प्रशंसनीय मार्गदर्शन कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बीएपीएस का "परिवर्तन की यात्रा" का मध्यप्रदेश से शुभारंभ करने के लिए संस्था का अभिनंदन करते हुए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि संस्कारधानी जबलपुर को ईश्वर और माँ नर्मदा ने परम सौभाग्य दिया है, जिसकी बदौलत आज संस्था के द्वारा महत्वपूर्ण कार्यों की शुरूआत यहां से की जा रही है। यहाँ आने से केवल एक दैवीय आशीर्वाद ही नहीं मिलता, बल्कि यहाँ से जाने वाले जन्म-जन्मांतर तक महंत स्वामियों से भी दुनिया भर के संतों का आशीर्वाद मिलता है। यहाँ के वातावरण में एक ऐसी ऊर्जा है जो हमें निरंतर प्रेरित करती है। साथ ही कहा कि आज़ादी के अमृत काल में हमें वही आत्मविश्वास मिला है जो आत्मबल हमारे भीतर भगवान ने रखा था, वही अब पुनः प्रकट हो रहा है। अब मध्यप्रदेश में भी हुई शुरुआत बीएपीएस संस्था के वरिष्ठ संत पूज्य ज्ञानानंद स्वरूप स्वामी जी ने प्रकल्पों की जानकारी देते हुए बताया कि 'चलो बनें आदर्श' प्रकल्प वीडियो के माध्यम से प्राथमिक शाला के विद्यार्थियों में बचपन से ही जीवन मूल्यों की सुदृढ़ आधारशिला रखता है। यह प्रोजेक्ट पहले से ही गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान सहित पांच राज्यों की 23 हजार शालाओं में सफलतापूर्वक चल रहा है, जिसका लाभ 45 लाख से अधिक विद्यार्थी ले रहे हैं। बीएपीएस संस्था के वरिष्ठ संत पूज्य ज्ञानानंद स्वरूप स्वामी जी ने कहा कि कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए 'इंटीग्रेटेड पर्सनालिटी डेवलपमेंट कोर्स' (आईपीडीसी) का भी शुभारंभ किया है। यह कोर्स युवाओं को नकारात्मकता, मोबाइल की लत, नशीले पदार्थों और डिप्रेशन जैसे संकटों से निकालकर उन्हें भारतीय सनातन मूल्यों से जोड़ने का काम करेगा। इस अवसर पर संतगण, लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह और जबलपुर के महापौर  जगत बहादुर सिंह, संभागायुक्त  धनंजय सिंह, आईजी  प्रमोद वर्मा, कलेक्ट्र  राघवेन्द्र सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वामी नारायण मंदिर में गुरु पूजन विधि में हुये शामिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव रसल चौक के समीप स्थित  स्वामी नारायण मंदिर में गुरु पूजन विधि में शामिल हुये। मुख्यमंत्री ने परब्रह्म भगवान स्वामी नारायण के छठें आध्यात्मिक अनुगामी ब्रह्मस्वरूप महंत स्वामी जी महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित किये। गुरु पूजन विधि ब्रह्म बिहारी स्वामी जी ने संपन्न कराई।  

महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ में बढ़े आत्मसमर्पण का असर अब MP में, सुनीता के बाद कई माओवादी होंगे सरेंडर

भोपाल  बालाघाट में 31 अक्टूबर को 22 वर्ष की महिला माओवादी सुनीता सियाम के समर्पण के बाद मध्य प्रदेश में कुछ और माओवादी जल्द ही आत्मसमर्पण कर सकते हैं। दरअसल, बालाघाट और मंडला में सक्रिय कुछ माओवादी दलम छोड़ चुके हैं। वे लगभग एक माह से दिखाई नहीं दिए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि ये भी आत्मसमर्पण कर सकते हैं। सुनीता ने पुलिस को बताया है कि महाराष्ट्र में समर्पण करने वाले सोनू और भूपेश से प्रभावित होकर उसने यह कदम उठाया है। महाराष्ट्र में ही समर्पण करने वाले भूपति ने वीडियो जारी कर माओवादियों को समर्पण करने की अपील की है। वीडियों में उसने कहा कि अब परिस्थितियां बदल गई हैं, इसलिए हमें कानून के दायरे में रहकर अब काम करना होगा। माना जा रहा है कि इसका माओवादियों पर बड़ा असर हुआ है। इसका बड़ा कारण यह भी है कि माओवादियों ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को एक जोन (एमएमएसी) में रखा है। और भी माओवादी कर सकते हैं समर्पण बता दें कि माओवादियों के संगठन में सबसे नीचे श्रेणी में गांव या एरिया कमेटी होती है। सुनीता इसकी सदस्य थी। वह सेंट्रल कमेटी सदस्य (सीसीएम) रामदेर के गार्ड के रूप में काम कर रही थी। रामदेर ने सुनीता को बताया था कि सोनू दादा, रुपेश दादा व उनके साथियों ने छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में पुलिस के सामने समर्पण कर दिया है। इसके बाद से ही मप्र में सक्रिय माओवादी समर्पण करने पर विचार कर रहे हैं। पुलिस से पूछताछ में सुनीता ने यह जानकारी दी है। मध्य प्रदेश में 60 महिला माओवादी सक्रिय बता दें कि पहली बार प्रदेश में किसी महिला माओवादी ने समर्पण किया है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर की रहने वाली सुनीता वर्ष 2022 में माओवादी संगठन से जुड़ी थी। उस पर 14 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस की खुफिया जानकारी के अनुसार, प्रदेश में लगभग 60 माओवादी सक्रिय हैं, जिनमें आधे से अधिक महिलाएं हैं। इस वर्ष पुलिस मुठभेड़ में नौ महिला माओवादी मारी जा चुकी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश से माओवादी समस्या को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। इस कारण माओवादियों की चौतरफा घेराबंदी की जा रही है। अब आगे क्या सुनीता से पुलिस पूछताछ कर रही है। इसके बाद उसका प्रकरण राज्य की समर्पण नीति 2023 के अनुसार राज्य स्तरीय समिति के पास भेजा जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि उस पर दर्ज प्रकरण के अनुसार समर्पण की पात्रता है या नहीं। दरअसल, समर्पण नीति के अपराधों को माफ करने का नियम नहीं है। सरकार की तरफ से उसे सुरक्षा देने के साथ ही पुनर्वास के प्रबंध भी नीति के अनुसार किए जाएंगे।

CM मोहन यादव का निर्देश: उत्तर प्रदेश की भूमि अधिग्रहण नीति का करेंगे अध्ययन अधिकारी

भोपाल मध्य प्रदेश उद्योग विभाग के अधिकारी उत्तर प्रदेश सरकार की औद्योगिक विकास से जुड़े कार्यों के लिए भूमि अधिग्रहण नीति का अध्ययन करने उत्तर प्रदेश जाएंगे। उन नीतियों का अध्ययन कर मध्य प्रदेश में भी उसका अनुपालन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए। मुख्यमंत्री से समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में उत्तर प्रदेश सरकार में औद्योगिक विकास, निर्यात संवर्धन, एनआरआई और निवेश प्रोत्साहन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री ने मंत्री गुप्ता सहित मध्य प्रदेश के औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की है। बैठक में मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के उद्योग मंत्री गुप्ता को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा तैयार की गई 18 प्रकार की नई औद्योगिक नीतियों की प्रतियां भी भेंट की। बैठक में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – देश का पहला हाई-टेक वन्य जीव कैप्चर अभियान सेवा भाव और संरक्षण का प्रतीक

सेवा भाव और वन्य जीव संरक्षण का प्रतीक है देश का पहला हाई-टेक वन्य जीव कैप्चर अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव हेलीकॉप्टर और बोमा तकनीक से पकड़े गए 846 कृष्णमृग और 67 नीलगाय किसानों की फसल बचाने दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों की मदद से हुआ अभिनव प्रयोग मुख्यमंत्री के निर्देश पर चलाया गया सफलतापूर्वक अभियान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर किसानों की फसलों को नुकसान से बचाने के लिये शाजापुर, उज्जैन और आस-पास के इलाकों हेलीकॉप्टर और बोमा तकनीक का सफल प्रयोग वन्य जीवों को सुरक्षित पकड़ कर स्थानांतरित करने के लिए किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एक बार फिर संवेदनशीलता दर्शाते हुए लंबे समय से कृष्णमृगों और नीलगायों द्वारा फसलों को पहुंचाये जा रहे भारी नुकसान से बचाने के लिये जारी किये थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में किसानों की इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए देश में अपनी तरह का पहला प्रयास किया गया। अभियान के अंतर्गत वन्य जीवों को बिना हानि पहुँचाए अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से पकड़ कर सुरक्षित क्षेत्रों में छोड़ा गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, “यह अभियान वन्य जीव संरक्षण और किसानों की सुरक्षा, दोनों के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। मध्यप्रदेश में हम ऐसा संतुलन स्थापित करना चाहते हैं जहाँ प्रकृति, वन्य जीव और किसान, तीनों सामंजस्य के साथ आगे बढ़ें।” उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा टीम ने दीपावली के दौरान भी इस अभियान में हिस्सा लिया, जो उनके सेवा और वन्य जीव संरक्षण के प्रति समर्पण भाव का प्रतीक है। हेलीकॉप्टर और बोमा तकनीक का अभिनव प्रयोग अभियान में दक्षिण अफ्रीका की ‘कंजरवेशन सॉल्यूशंस’ कंपनी के 15 विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने प्रदेश में वन विभाग की टीम को प्रशिक्षित किया और उनके सहयोग से 10 दिन तक लगातार अभियान चलाया गया। अभियान में रॉबिन्सन-44 हेलीकॉप्टर का उपयोग किया गया। इसे इस तरह के अभियानों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है। हेलीकॉप्टर से पहले खेतों और खुले क्षेत्रों में वन्य जीवों की लोकेशन का सर्वे किया गया। इसके बाद रणनीतिक रूप से ‘बोमा’ बनाया गया। हेलीकॉप्टर की सहायता से फिर धीरे-धीरे हांका लगाकर जानवरों को सुरक्षित रूप से एक फनल (शंकु) आकार की बाड़ में प्रवेश कराया गया, जो जानवरों को भयभीत होने से बचाने के लिए घास और हरे जाल से ढंकी होती है। बोमा में आये वन्य जीवों को वाहनों से सुरक्षित रूप से अभयारण्य तक पहुँचाया गया। अभियान में अनुभवी दक्षिण अफ्रीकी पायलट के साथ भारतीय पायलट को शामिल किये गये। अभियान में सफलता पूर्वक 913 वन्य जीवों का किया गया सुरक्षित पुनर्वास लगभग दस दिनों तक चले इस अभियान में कुल 913 वन्य जीवों को सफलतापूर्वक पकड़कर पुनर्वास कराया गया। इनमें 846 कृष्णमृग और 67 नीलगाय शामिल हैं। सभी नीलगायों को गांधीसागर अभयारण्य के 64 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में छोड़ा गया। कृष्णमृगों को गांधीसागर, कूनो और नौंरादेही अभयारण्यों के उपयुक्त स्थानों पर पुनर्स्थापित किया गया। अभियान में वन्य जीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। सभी वन्य जीव अब अपने नए आवासों में स्वच्छंद होकर विचरण कर रहे हैं। अभियान के अंतिम दिन भी 142 कृष्णमृग पकड़े गए। प्रशासनिक और विशेषज्ञों की निगरानी में चला अभियान अभियान की हर गतिविधि की सतत् निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य जीव अभिरक्षक शुभरंजन सेन, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक (चीता प्रोजेक्ट) उत्तम शर्मा और मुख्य वन संरक्षक उज्जैन एम.आर. बघेल स्वयं अभियान स्थल पर उपस्थित रहे। इस अभियान में वाइल्ड लाइफ एवं फॉरेस्ट्री सर्विस के डॉ. कार्तिकेय ने तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे इससे पहले गौर (बाइसन) ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट में भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। शाजापुर विधायक अरुण भीमावद ने भी अभियान स्थल पर पहुंचकर इस अभिनव पहल की सराहना की। अभियान की सफलता पर एसीएस फॉरेस्ट अशोक बर्णवाल और वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्हीएन अम्बाडे भी टीम को बधाई दी गई। प्रशिक्षण और भविष्य की रणनीति वन विभाग ने वन्य जीवों के पुनर्वास के चलाये गये अभियान में एक विशेष प्रशिक्षित दल तैयार किया है, जो दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर चुका है। यह दल भविष्य में राज्य के अन्य जिलों में भी इस प्रकार के कैप्चर ऑपरेशन्स संचालित करेगा। जिला प्रशासन और ग्रामीण समुदाय ने इस अभियान में सक्रिय सहभागिता की। अभियान के दौरान यह स्पष्ट रूप से देखा गया कि इस तकनीक से किसी भी वन्य जीव को बेहोश (ट्रैंक्युलाइज) करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। वन्य जीवों को पकड़ने की यह जिससे पूरी प्रक्रिया और अधिक सुरक्षित और प्राकृतिक बनी रही। अभियान से किसानों को मिली राहत नील गायों और कृष्णमृग के पुनर्वास अभियान के परिणामस्वरूप शाजापुर और आसपास के क्षेत्रों के किसानों ने राहत की सांस ली है। कृष्णमृग और नीलगायों द्वारा फसलों को रौंदने और खाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। इससे किसानों की आर्थिक हानि में कमी आयेगी और वन्य जीव-मानव के बीच सह-अस्तित्व की भावना भी सशक्त होगी। अभियान न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे भारत के लिए एक नवीन उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह सिद्ध करता है कि आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञता और जनसहयोग से मानव-वन्य जीव संघर्ष को मानवीय और वैज्ञानिक तरीकों से हल किया जा सकता है। भविष्य में वन विभाग ऐसे और अभियानों को अन्य जिलों में भी चलाने की योजना बना रहा है, जिससे किसानों को राहत मिले, वन्य जीव सुरक्षित रहें और पर्यावरणीय संतुलन कायम रहे। अभियान को सफल बनाने में वन विभाग, दक्षिण अफ्रीका की ‘कंजरवेशन सॉल्यूशंस’ टीम, स्थानीय प्रशासन, पुलिस विभाग, और ग्रामीणों का अभूतपूर्व सहयोग रहा।  

पेपर कप में चाय पीना है हानिकारक, IIT खड़गपुर ने किया खतरनाक माइक्रोप्लास्टिक रिसर्च में खुलासा

भोपाल  लोगों को ऐसा लगता है कि पेपर कप का हमारी सेहत पर कोई असर नहीं होता, लेकिन डॉक्टर्स ऐसा नहीं मानते. बता दें की पेपर कप्स को बनाने में मोम या प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है और जब इसमें गर्म चीज डाली जाती है, तो इसमें कैमिकल्स मिल जाते हैं. ऐसे में अगर आप भी इन कप का इस्तेमाल करते हैं, तो सावधान हो जाइए. आइए पेपर कप से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से जानते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, एक व्यक्ति जो दिन में तीन कप चाय पीता है, वह हर दिन लगभग 75,000 सूक्ष्म प्लास्टिक कण निगल रहा है। जो न केवल शरीर के लिए हानिकारक हैं, बल्कि कैंसर, हार्मोनल और नर्वस सिस्टम से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इस रिसर्च के सामने आने के बाद भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे मिट्टी (कुल्हड़), स्टील या कांच के कप का इस्तेमाल करें और अपनी सेहत को इन ‘साइलेंट टॉक्सिन्स’ से बचाएं। अब जानते हैं शोध में क्या बताया गया… हाइड्रोफोबिक फिल्म है हानिकारक– आईआईटी खड़गपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुधा गोयल और उनके शोध सहयोगी वेद प्रकाश रंजन और अनुजा जोसेफ द्वारा किए गए इस अध्ययन में यह साबित किया गया कि पेपर कप की भीतरी परत में इस्तेमाल होने वाली पतली हाइड्रोफोबिक फिल्म, जो तरल को कप में रोकने के लिए लगाई जाती है। गर्म तरल के संपर्क में आते ही टूटने लगती है। यह फिल्म पॉलीइथिलीन या अन्य को-पॉलिमर से बनी होती है और जब इसमें गर्म पानी (85–90°C) डाला जाता है, तो 15 मिनट के भीतर यह सूक्ष्म कणों में बदलकर पेय पदार्थ में घुल जाती है। गंभीर बीमारी का बनते हैं कारण- रिसर्च के अनुसार, हर 100 मिलीलीटर गर्म तरल में लगभग 25,000 माइक्रो प्लास्टिक कण मिल जाते हैं। ये इतने छोटे होते हैं कि आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन शरीर में जाकर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रिसर्च में पाया गया कि ये कण भारी धातुओं जैसे पैलेडियम, क्रोमियम और कैडमियम के वाहक के रूप में काम करते हैं। जब ये शरीर में प्रवेश करते हैं, तो वे अंगों में जमा होकर हार्मोन असंतुलन, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर और इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं। पेपर कप के नुकसान  पेपर कप बनाने में केमिकल्स और माइक्रोप्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है. ये कप गर्म चीज के संपर्क में आकर घुल जाते हैं, जिससे थायरॉइड और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है. इन कप में बिसफेनोल और बीपीए केमिकल भारी मात्रा में मौजूद होते हैं. जब इनमें गर्म चाय या कॉफी डाली जाती है, तो उसमें मौजूद केमिकल इनमें घुलने लगते हैं और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं पेपर कप न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक हैं. इन्हें डिस्पोज करना मुश्किल होता है और जलाने पर ये हार्मफुल केमिकल्स छोड़ते हैं.  पेपर कप के इस्तेमाल से एसिडिटी और पेट की अन्य समस्याएं हो सकती हैं, क्योंकि गर्म चीज के संपर्क में आने पर ये छोटे-छोटे कणों में टूटकर घुल जाते हैं. क्या करें इस्तेमाल? अगर आप इन बीमारियों से दूर रहना चाहते हैं, तो पेपर कप के इस्तेमाल से बचें. इसकी बजाय आप चीनी मिट्टी या स्टेनलेस स्टील कप को इस्तेमाल कर सकते हैं. यह न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा होगा बल्कि अपके स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होगा. पेपर कप बढ़ाता है कैंसर की संभावना एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब कोई व्यक्ति कैंसर से ग्रसित पाया जाता है तो उसका सिर्फ कोई एक कारण नहीं होता है। व्यक्ति के शरीर में मौजूद रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट आना, खराब दिनचर्या, शरीर में टाक्सीसिटी का लेवल बढ़ाना, कैंसर कॉजिंग सेल्स की तेज ग्रोथ जैसे कई फैक्टर शामिल होते हैं। पेपर कप और प्लास्टिक कब से निकलने वाला माइक्रो प्लास्टिक इन्हीं फैक्टर को बढ़ावा देते हैं। जिससे कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। भोपाल स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी आईआईटी खड़गपुर की इस रिपोर्ट के बाद भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने नागरिकों से अपील की है कि वे पेपर कप में गर्म पेय पदार्थों का सेवन बंद करें। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए घर से अपना कप साथ लाएं। इसके अलावा बाजार में मिट्टी (कुल्हड़), कांच या स्टील के कप का उपयोग करें। प्लास्टिक या पेपर लाइनिंग वाले डिस्पोजेबल कप का उपयोग न करें। भोपाल में ही रोजाना 15 लाख पेपर कप इस्तेमाल होते पेपर कप का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। भोपाल के थोक विक्रेता रविकांत द्विवेदी के अनुसार राजधानी भोपाल में ही अकेले रोजाना लगभग 15 लाख पेपर कप यूनिट की खपत होती है। यह अनुमानित आंकड़ा है। दरअसल, चाय-दुकान, फूड कोर्ट, रेलवे स्टेशन आदि में होने वाला उपयोग अधिक हो सकता है। इन कप्स में इस्तेमाल होने वाली कोटिंग में 100% पेपर नहीं ये पेपर कप पूरी तरह पेपर के नहीं होते। उनके अंदरूनी हिस्से को लीक-रोधी बनाने के लिए एक प्लास्टिक फिल्म या वैक्स कोटिंग लगाई जाती है। यह भी पाया गया कि जब गर्म पेय पेपर कप में दिया जाता है, तो इस कोटिंग से माइक्रोप्लास्टिक और अन्य रसायन निकलते हैं। अब जानिए माइक्रोप्लास्टिक हमारे शरीर में कैसे असर डालते हैं? हाल के अध्ययनों से संकेत मिलता है कि पेपर कप से माइक्रोप्लास्टिक (छोटे-छोटे प्लास्टिक कण) पेय में मिल सकते हैं। पूर्व सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव बताते हैं कि शरीर में माइक्रोप्लास्टिक जमा होने से ऑक्सीडेटिव तनाव, जीन में बदलाव, सूजन (inflammation) आदि हो सकते हैं। जिससे कैंसर, न्यूरोलॉजिकल और हारमोंस से जुड़ी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है। प्लास्टिक और फोम कप भी खतरनाक प्लास्टिक कप ये सीधे प्लास्टिक सामग्री से बने होते हैं। इनमें BPA (Bisphenol-A), PFAS और अन्य रसायन पाए जाते हैं, जो गर्म पेय आने पर निकलकर हमारे शरीर में पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक इन रसायनों के संपर्क से हार्मोनल असंतुलन, लिवर-किडनी पर असर और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। यह कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। फोम कप ये कप Styrene नामक रसायन से बनते हैं, … Read more

मध्य प्रदेश में इतिहास रचा सुनीता ने किया नक्सली सरेंडर, जानें क्यों मिली 4 लाख रुपये

बालाघाट मध्य प्रदेश में नक्सल विरोधी अभियानों के लिए यह एक बहुत बड़ी सफलता है. 33 साल में पहली बार, राज्य में किसी नक्सली ने आधिकारिक तौर पर आत्मसमर्पण किया है. 31 अक्टूबर को बालाघाट में 23 साल की नक्सली सुनीता ने हॉक फोर्स (Hawk Force) के सामने हथियार डाल दिए.यह घटना इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि आखिरी ऐसा सरेंडर साल 1992 में हुआ था, जब छत्तीसगढ़ राज्य, मध्य प्रदेश का ही हिस्सा था. नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ बनने के बाद से अब तक मध्य प्रदेश में एक भी नक्सली ने आत्मसमर्पण नहीं किया था. महिला नक्सली ने सुरक्षा बलों के सामने अपने आप को समर्पित कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया. इस आत्मसमर्पण के बदले उसे कुल 4 लाख 10 हजार रुपये का इनाम दिया गया है.इससे पहले बालाघाट की पांच महिला नक्सलियों ने आत्मसमर्पण तो किया था, लेकिन उनमें से किसी ने भी हथियार नहीं सौंपे थे. इस बड़ी कामयाबी को हॉक फोर्स की बड़ी सफलता माना जा रहा है. वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी X पर पोस्ट कर जानकारी दी है कि आत्मसमर्पण नीति के तहत यह पहला नक्सली सरेंडर है. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बालाघाट के ग्राम चोरिया में स्थापित हो रहे नए हॉक फोर्स कैंप में 22 वर्षीय महिला नक्सली सनीला उर्फ सुनीता आयाम ने आत्मसमर्पण किया. सनीला वर्ष 2024 से नक्सल संगठन के एमएमसी जोन प्रभारी और सीसी मेंबर रामदेर की हथियारबंद गार्ड के रूप में सक्रिय थी. वह मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल थी. बताया जा रहा है कि सीसी मेंबर रामदेर पर तीनों राज्यों की ओर से मिलाकर लगभग 3 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है. ऐसे में उसकी गार्ड रही सनीला का आत्मसमर्पण नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. उसने आत्मसमर्पण के समय इंसास राइफल, तीन मैगजीन में 30 जिंदा कारतूस, एक बीजीएल और अन्य सामग्री पुलिस को सौंपी. कुल मिलाकर मिला 4 लाख का इनाम आत्मसमर्पण नीति के तहत, सुनीता को तुरंत 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई. इसके अलावा, इंसास राइफल के लिए साढ़े तीन लाख रुपये और तीन मैगजीन के लिए दस हजार रुपये का इनाम दिया गया है. इस तरह कुल मिलाकर उसे 4 लाख 10 हजार रुपये का इनाम मिला है. समाज के विकास में योगदान देना चाहती है पुलिस ने बताया कि सुनीता के पिता भी पहले छत्तीसगढ़ में नक्सल संगठन से जुड़े थे, जिन्होंने हाल ही में सितंबर 2025 में आत्मसमर्पण किया था. पूछताछ के दौरान सुनीता ने बताया कि वह राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहती थी. उसने यह भी कहा कि जंगलों में हिंसा और भय का जीवन छोड़कर अब वह समाज के विकास में योगदान देना चाहती है. इसके साथ ही सुनीता का कहना है कि वह अपने पिछले कल में लौटना नहीं चाहती न हीं उसे दोहराना. और भी नक्सली कर सकते हैं आत्मसमर्पण हॉक फोर्स के डीएसपी अखिलेश गौर ने महिला नक्सली से पूछताछ की जिसमें उसने बताया कि उसने कुछ हथियार जंगल में छिपा रखे हैं. इसके बाद सेनानी शियाज के नेतृत्व में सहायक सेनानी अखिलेश गौर और रूपेंद्र धुर्वे की टीम ने गोपनीय सर्च ऑपरेशन चलाकर जंगल से छिपाए गए हथियार बरामद कर लिए. इस प्रकार यह आत्मसमर्पण अभियान पूर्णतः सफल रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि सुनीता के सरेंडर के बाद बालाघाट क्षेत्र में सक्रिय अन्य नक्सली भी आने वाले दिनों में आत्मसमर्पण कर सकते हैं. इस सफलता के बाद पुलिस महानिरीक्षक संजय सिंह और पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने हॉक फोर्स की सराहना की और टीम को इनाम देने की घोषणा की. सीएम मोहन यादव ने किया एक्स पर पोस्ट इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अपने एक्स पर पोस्ट करते हुए इस आत्मसमर्पण की प्रशंसा की. उन्होंने लिखा- प्रभावी आत्मसमर्पण नीति के तहत पहला नक्सली सरेंडर है. यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राज्य नक्सल नियंत्रण के लक्ष्य की ओर अग्रसर है. मध्य प्रदेश पुलिस को नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण में लगातार सफलता मिल रही है. 1 नवंबर को बालाघाट जिले के लांजी थाने अंतर्गत चोरिया कैंप में 14 लाख की इनामी महिला नक्सली सुनीता ने हथियारों सहित आत्मसमर्पण किया. यह प्रदेश की प्रभावी आत्मसमर्पण नीति के तहत पहला समर्पण है. पूर्व में भी नक्सलियों के समर्पण और मुठभेड़ों में पुलिस को सफलता मिलती रही है. साल 2022 में जुड़ी थी माओवादी संगठनों से हॉक फोर्स के डीएसपी अखिलेश गौर ने बताया कि सशस्त्र हार्डकोर की 22 वर्षीय महिला नक्सली छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के गोमवेटा भैरमगढ की रहने वाली है. उसका नाम सलीना उर्फ सुनीता पिता बिसरु ओयाम है. यह महिला नक्सली एसीएम के पद पर रहते हुए सेंट्रल कमेटी के प्रमुख सदस्य सीसीएम रामदेर नक्सली की सुरक्षा गार्ड रह चुकी है. जो वर्ष 2022 में माओवादी संगठनों से जुड़ी थी, जिसने माड़ क्षेत्र में 06 महीने का प्रशिक्षण लिया और फिर सेंट्रल कमेटी के सदस्य रामदेर के सुरक्षा गार्ड के रूप में माड़ क्षेत्र में काम करना शुरू किया. ऐसे पहुंची आत्मसमर्पण के लिए सुनीता सुनीता, रामदेर की 11 सदस्यी टीम के साथ एमएमसी जोन दर्रेकसा क्षेत्र पहुंची जहां जीआरबी डिवीजन में सक्रिय थी और मलाजखंड दर्रेकसा दल में एसीएम के पद पर थी, जिस पर कुल 14 लाख का ईनाम घोषित था. सुनीता इंसास राइफल, विंडोरी बैग, पिट्ठू बैग और वर्दी के साथ दलम से अलग होकर निकल गई. इसके बाद उसने जंगल में इंसास राइफल, विंडोरी बैग, पिट्ठू बैग और वर्दी को डंप में छिपाया, फिर आत्मसमर्पण करने के उद्देश्य से पुलिस कैंप चौरिया पहुंची.