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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़वानी जिले में 60 करोड़ के निर्माण कार्यों का वर्चुअली किया लोकार्पण और शिलान्यास

प्रधानमंत्री मोदी के नशामुक्त भारत अभियान को सफल बना रहा है मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़वानी जिले में 60 करोड़ के निर्माण कार्यों का वर्चुअली किया लोकार्पण और शिलान्यास भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नशामुक्त भारत अभियान के माध्यम से लोगों को नशे से दूर करने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के संकल्प को सफल बनाने के लिए मध्यप्रदेश में नशामुक्ति अभियान का क्रियान्वयन हो रहा है। प्रदेश के 19 धार्मिक नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में मदिरा की दुकानों और बार का संचालन प्रतिबंधित किया गया है। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक जनजीवन में बाधा बनने वाले शराब दुकानों के अहाते बन्द कर दिए जाएंगे। मध्यप्रदेश नशामुक्त भारत अभियान के क्रियान्वयन में अग्रणी प्रदेश है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार की रात्रि मुख्यमंत्री निवास से बड़वानी में जिले 60 करोड़ रुपये की लागत के निर्माण कार्यों का वर्चुयली उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें 23 करोड़ लागत के दो विकास कार्य शामिल हैं। ग्राम पाटी में गोई नदी पर 19 करोड़ की लागत से उच्च स्तरीय पुल और पाटी में 4 करोड़ की लागत से जनजातीय सीनियर उत्कृष्ट बालक छात्रावास का निर्माण हुआ है। साथ ही 37 करोड़ की लागत से सिलावाद-पाटी मार्ग के उन्नयन सहित 7 विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिवपंथ सत्संग मेला बड़वानी के जनजातीय समुदाय का प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जो गुरु शिष्य परंपरा, आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक जागरुकता को बढ़ाने का प्रतीक है। शिवपंथ समुदाय की सहभागिता से नशामुक्ति और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है। यह समुदाय प्रकृति का संरक्षण भी है। युवाओं और महिलाओं को जोड़कर जनजातीय क्षेत्रों में नशामुक्ति अभियान संचालित है जिसमें मध्यप्रदेश सहित महाराष्ट्र के कई गुरुजन सत्संग और नशामुक्ति शिविर के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार और समाज की सहभागिता से ऐसे कार्य भी संभव हो जाते हैं जिन्हें असंभव माना गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सार्थक जीवन के लिए तैयार करने में यह अभियान महत्वपूर्ण है। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित सुरेखानंद जी महाराज और पहाड़ सिंह बापुजी सहित संतजन का अभिवादन किया। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, सांसद श्री गजेन्द्र सिंह पटेल और श्री सुमेर सिंह सोलंकी के अलावा जनजातीय आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अंतरसिंह आर्य, श्री अजय यादव, श्री प्रेम सिंह पटेल आदि उपस्थित थे।  

मध्यप्रदेश: भावांतर योजना में अब तक 61,000+ किसानों का पंजीकरण, आवेदन की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर

भोपाल  सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,328 रुपये प्रति क्विंटल है। मंडियों में अभी दर चार से साढ़े चार हजार रुपये के बीच है। किसानों को नुकसान न हो, इसके लिए सरकार ने भावांतर योजना लागू की है। इसमें समर्थन मूल्य से कम दर पर उपज बिकती है तो अंतर की राशि सरकार देगी। यह सुविधा योजना में पंजीकृत किसानों को मिलेगी। अभी तक इसके लिए 61 हजार 970 किसानों ने ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराया है। भावांतर योजना के लिए ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन 17 अक्टूबर तक होगा। भावांतर की अवधि 24 अक्टूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक निर्धारित की है। इस अवधि में पंजीकृत किसानों द्वारा मंडियों में उपज समर्थन मूल्य से कम पर बिकती है तो सरकार भावांतर देगी। योजना लागू करने का दायित्व जिला प्रशासन को सौंपा गया है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा कि जिस तरह धान और गेहूं का उचित मूल्य दिलाया गया, वैसे ही सोयाबीन उत्पादक किसानों की चिंता की गई है। धान, ज्वार, बाजरा उपार्जन के लिए 4.69 लाख पंजीयन उधर, समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा के उपार्जन के लिए अभी तक 4.69 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है। यह 10 अक्टूबर तक होगा। पिछले वर्ष 7.84 लाख किसानों ने पंजीयन कराया था। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि केवल पंजीकृत किसानों से ही उपार्जन किया जाएगा, इसलिए समय पर पंजीयन करा लें। 5328 रुपए प्रति क्विंटल है सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5328 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। प्रदेश सरकार किसानों को उनके उत्पादन का मूल्य दिलवाने के लिए प्रतिबद्ध है। जिस तरह धान और गेहूं पर किसानों को उनके परिश्रम की कीमत दिलवाने का कार्य किया गया है, उसी तरह सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी लाभ दिलवाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि सोयाबीन उत्पादक किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलवाने के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें और हितग्राही को सीधा लाभ मिलना चाहिए। मात्र तीन दिन में ही 61,970 किसानों ने कराया पंजीयन भावांतर योजना के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रदेश में ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन का कार्य 3 अक्टूबर से 17 अक्टूबर 2025 तक चलेगा। भावांतर की अवधि 24 अक्टूबर 2025 से प्रारंभ होकर 15 जनवरी 2026 तक रहेगी। पंजीकृत कृषक और उनके रकबे के सत्यापन की प्रक्रिया राजस्व विभाग के माध्यम से होगी। भावांतर की राशि पंजीयन के समय दर्ज किसान के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित की जाएगी। उलेखनीय है कि प्रदेश में सोयाबीन खरीफ भावांतर भुगतान योजना अंतर्गत किसानों का पंजीयन ई-उपार्जन पोर्टल पर 3 से 17 अक्टूबर तक होगा। पंजीयन PACS /CSC/ MP किसान ऐप के माध्यम से कराए जाएंगे। योजना अंतर्गत सोयाबीन विक्रय अवधि दिनांक 24 अक्टूबर से 15 जनवरी 2026 तक रहेगी। किस जिले में कितने पंजीयन प्रदेश में सोयाबीन फसल के उपार्जन के लिए इंदौर जिले के 12 हजार 207, शाजापुर जिले के 11 हजार 731, उज्जैन जिले के 8 हजार 221, राजगढ़ जिले के 5 हजार 468, आगर मालवा जिले के 3540, देवास जिले के 2894, सीहोर जिले के 2331, विदिशा जिले के 2207, बड़वानी जिले के 1543, हरदा जिले के 1318, रतलाम जिले के 1241, खरगौन जिले के 1207, मंदसौर जिले के 999, दमोह जिले के 992, धार जिले के 899, रायसेन जिले के 801, सागर जिले के 799, बैतूल जिले के 748, नीमच जिले के 461, गुना जिले के 421, खंडवा जिले के 368, नरसिंहपुर जिले के 319, अशोक नगर जिले के 269, झाबुआ जिले के 215,‍छिंदवाड़ा जिले के 199, नर्मदापुरम जिले के 132, भोपाल जिले के 102, बुरहानपुर जिले के 75, शिवपुरी जिले के 49, उमरिया जिले के 44, अनूपपुर जिले के 41, छतरपुर जिले के 27, ग्वालियर जिले के 22, श्योपुर जिले के 20, बालाघाट जिले के 17, अलीराजपुर जिले के 16 किसानों ने पंजीयन कराया है।

सोयाबीन किसानों को नहीं होना पड़ेगा निराश, मुख्यमंत्री ने दिया भावांतर मूल्य का भरोसा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की मेहनत का सम्मान दिलाने के लिए उन्हें हर हाल में सोयाबीन फसल का उचित दाम दिलाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भावान्तर योजना के अंतर्गत किसानों का पंजीयन 17 अक्टूबर 2025 तक जारी रहेगा। फसल बिक्री के 15 दिन के भीतर भावमें अंतर की राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में अंतरित कर दी जाएगी।  

राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय का भोपाल में कैंपस, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल फोरेंसिक के नए कोर्स हुए लॉन्च

भोपाल  एजुकेशन हब भोपाल को अब राष्ट्रीय सुरक्षा शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान मिलने जा रही है। राजधानी में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर (आरआरयू) का क्षेत्रीय कैंपस शुरू हो गया है। यह आरआरयू का छठा कैंपस है, जो फिलहाल राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में संचालित हो रहा है। मध्य प्रदेश शासन द्वारा आरआरयू की स्थापना के लिए आरजीपीवी कैंपस में ही दस एकड़ भूमि आवंटित की गई है। यहां अगले दो-तीन साल में आरआरयू का अपना कैंपस होगा। दो कोर्सों की शुरुआत इसी सत्र से कर दी गई है और दो कोर्स अगले सत्र से शुरू होंगे। तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से आरआरयू भोपाल केंद्र के संचालन और प्रशासनिक समन्वय के लिए आरजीपीवी के डिप्टी रजिस्ट्रार को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। भोपाल में कैंपस की स्थापना के साथ ही सत्र 2025-2026 में चार वर्षीय बीटेक इन कंप्यूटर साइंस (साइबर सिक्योरिटी स्पेशलाइजेशन) और एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा इन साइबर सिक्योरिटी एंड डिजिटल फोरेंसिक कोर्स का संचालन शुरू हो गया है। अगले सत्र से पीजी डिप्लोमा इन स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग और पीजी डिप्लोमा इन पुलिस साइंस एंड मैनेजमेंट कोर्स शुरू किए जाएंगे। इन पाठ्यक्रमों में जेईई और अन्य मेरिट योग्यताओं के आधार पर प्रवेश होगा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बीटेक इन कंप्यूटर साइंस को छोड़कर अन्य कोर्स में केवल 20- 20 सीटें रखी गई हैं। आरआरयू का क्षेत्रीय कैंपस शुरू होने से मध्य प्रदेश के युवाओं को सुनहरा अवसर मिलेगा, वे भारत की आंतरिक सुरक्षा में योगदान दे सकेंगे। साथ ही मप्र पुलिस व सुरक्षा बलों और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े सभी संस्थानों के अधिकारियों के स्किल डेवलपमेंट में भी यह सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सितंबर से शैक्षणिक गतिविधियों की शुरुआत हो गई है। दो कोर्स में देशभर के विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। -डॉ. राकेश सिंह कुंवर, निदेशक, आरआरयू भोपाल कैंपस।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाल्मीकि जयंती पर महान ऋषि को किया नमन, प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

वाल्मीकि समाज ने मुख्यमंत्री का किया अभिनंदन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में आदिकवि, महाकाव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की जयंती पर महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उनका नमन किया। साथ ही सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम के आदर्शों एवं मूल्यों को पवित्र रामायण के माध्यम से उन्होंने समूची दुनिया को मनुष्यता एवं मर्यादा की नई राह दिखाई। उनकी शिक्षाएं समर्थ समाज और राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रेरणास्रोत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने  राम और रामायण को देश के घर-घर पहुंचाकर अमर कर दिया। इस अवसर पर वाल्मीकि समाज के वरिष्ठजन भी उपस्थित थे। समाजजनों ने मुख्यमंत्री डॉ यादव का पुष्प गुच्छ, शाल फल, रामायण और महर्षि वाल्मीकि जी का चित्र भेंटकर स्वागत अभिनन्दन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी समाज-जनों से कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामभक्ति से आत्म विभोर होकर रामायण की रचना की। वही रामायण आज देश की जीवनधारा है। समाजजनों ने मुख्यमंत्री का आभार जताया।  

Deadly Cough Syrup केस: बच्चों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, CBI जांच की मांग

भोपाल  मध्यप्रदेश में कफ सिरप ‘कोल्ड्रिफ़’ पीने से 16 बच्चों की मौत के मामले एसआईटी जांच के बाद अब सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है।एक वकील द्वारा दायर जनहित याचिका में दूषित कफ सिरप के निर्माण, विनियमन, परीक्षण और वितरण की सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच और पूछताछ की मांग की गई है। अब तक की कार्रवाई में कफ सिरप पीने से 16 बच्चों की मौत मामले में डॉ. प्रवीन सोनी को गिरफ्तार कर निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि प्रवीण ने ही ज्यादातर बच्चों को ये कफ सिरप लिखा था। साथ ही कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को निलंबित किया और ड्रग कंट्रोलर का तबादला कर दिया। इसके साथ ही पुलिस ने जांच के लिए 12 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार विषैले सिरप बनाने वाली कंपनियों के लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएं, उन्हें बंद किया जाए और उनके उत्पादों को बाजार से वापस मंगाने का इंतजाम किया जाए. साथ ही, देश में एक सख्त 'ड्रग रिकॉल पॉलिसी' बनाई जाए. दवाओं में प्रयुक्त खतरनाक रसायन डाई इथीलीन ग्लाइकॉल और एथलीन ग्लाइकॉल की बिक्री और निगरानी के लिए सख्त नियम बनाए जाएं.बच्चों की मौत के मामले में विभिन्न राज्यों में दर्ज सभी एफआईआर को एक जगह ट्रांसफर करके जांच कराई जाए, ताकि जांच में समन्वय बना रहे.याचिका में कहा गया है कि यह मामला केवल कुछ कंपनियों की गलती का नहीं, बल्कि देश की ड्रग रेगुलेटरी सिस्टम की विफलता का है, जिसकी वजह से कई राज्यों में मासूमों की जान गई है. औषधि निरीक्षक छिंदवाड़ा गौरव शर्मा, औषधि निरीक्षक जबलपुर शरद कुमार जैन और राज्य के उप संचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन शोभित कोस्टा को निलंबित और आईएएस अधिकारी ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य को अन्यत्र स्थानांतरित किया गया है। मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा प्रकरण के संबंध में सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर उच्च स्तरीय बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।   जब्त किए जाए मौजूदा कफ सिरफ का स्टॉक वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर जनहित याचिका में राष्ट्रीय न्यायिक आयोग/विशेषज्ञ समिति से जांच की मांग की गई है। जगह-जगह बैन किए गए मौजूदा कोल्ड्रिफ कफ सिरफ के सभी स्टॉक को जब्त करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में हो जांच इसके साथ ही याचिका में कहा गया कि सभी FIR की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। कफ सिरप के निर्माण, रेगुलेशन, टेस्टिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की जांच और पूछताछ सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में की जाए। सबसे ज्यादा एमपी के छिंदवाड़ा में बच्चों की गई जान बता दें कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक दोनों राज्यों में कुल 18 बच्चों की जान जा चुकी है, जिनमें से 16 मौतें मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में और 2 राजस्थान के भरतपुर व सीकर में दर्ज की गई हैं।  जांच में सिरप में 48.6% डाईएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीला रसायन पाया गया, जो किडनी फेलियर का कारण बन रहा है।  जानिए अब तक क्या हुआ एक्शन? केंद्र सरकार ने छह राज्यों में 19 दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर जोखिम आधारित निरीक्षण शुरू कर दिया है, जबकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी कर तत्काल जांच और नकली दवाओं पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है।

खगोलशास्त्री महर्षि वाल्मीकि, जब ‘शोक’ से ‘श्लोक’ जन्मा और विज्ञान झुका श्रद्धा से

भोपाल भारतभूमि की यह विशेषता रही है कि यहाँ अध्यात्म और विज्ञान कभी परस्पर विरोधी नहीं रहे, ज्ञान के हर रूप का उद्गम ऋषियों के चिंतन से हुआ। इसी परंपरा में एक ऐसा नाम अमर है, महर्षि वाल्मीकि। वे केवल आदि कवि नहीं थे, बल्कि भारत के प्रथम खगोलशास्त्री भी थे, जिन्होंने आकाश की नक्षत्रीय गतियों को साहित्य के छंदों में पिरो दिया। वाल्मीकि जयंती के इस पावन अवसर पर यह जानना रोमांचक है कि ‘रामायण’ केवल धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि खगोलीय दस्तावेज़ भी है, एक ऐसा दस्तावेज़ जिसमें हर ग्रह, नक्षत्र और तिथि वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ आज भी सत्य सिद्ध होती है। महर्षि वाल्मीकि का खगोलबोध, जब कविता बनी विज्ञान की भाषा ‘रामायण’ में श्रीराम के जन्म का वर्णन महर्षि वाल्मीकि ने जिस सटीकता से किया है, वह आधुनिक खगोलशास्त्र की कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरती है। जब कौशल्या ने श्रीराम को जन्म दिया, उस समय सूर्य, मंगल, शनि, बृहस्पति और शुक्र, ये पाँचों ग्रह अपने-अपने उच्च स्थानों में थे, और लग्न में चंद्रमा बृहस्पति के साथ स्थित थे। भारतीय वेदों पर वैज्ञानिक शोध संस्थान की पूर्व निदेशक सुश्री सरोज बाला ने प्लैनेटेरियम गोल्ड सॉफ्टवेयर 4.1 के माध्यम से इस गणना की पुष्टि की। उन्होंने पाया कि यदि यह आकाशीय स्थिति 27° उत्तर और 82° पूर्व (अयोध्या के अक्षांश, रेखांश) पर डाली जाए, तो यह 10 जनवरी 5114 ईसा पूर्व, दोपहर 12 से 2 बजे के बीच का समय बताती है, अर्थात श्रीराम का जन्मकाल! विज्ञान ने दी वाल्मीकि को पुष्टता की मुहर सरोज बाला और उनके दल ने ‘रामायण की कहानी, विज्ञान की जुबानी’ शीर्षक से 16 वर्षों के गहन शोध में यह सिद्ध किया कि वाल्मीकि के खगोलीय संदर्भ पूर्णतः प्रामाणिक हैं। उन्होंने Stellarium, Sky Guide, और Planetarium Simulation जैसे सॉफ्टवेयरों से तुलना की, परिणाम अद्भुत रहे। हर ग्रह की गति, हर नक्षत्र की स्थिति और हर खगोलीय घटना, रामायण में बताए क्रम के अनुरूप मिली। इन सॉफ्टवेयर परीक्षणों के साथ-साथ पुरातत्व, भूविज्ञान, समुद्रविज्ञान, पुरावनस्पति विज्ञान और उपग्रह चित्रों ने भी वाल्मीकि के वर्णनों की पुष्टि की। यह अपने आप में एक अनूठा संगम है, जहाँ श्रद्धा और विज्ञान एक दूसरे को प्रमाणित करते हैं। सत्य का साक्ष्य, रामायण की कालगणना और भू-साक्ष्य महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम के वनवास के दौरान सूर्यग्रहण, चंद्रमा की कलाएँ, और ऋतुओं का सूक्ष्म वर्णन किया है। डॉ. राम अवतार शर्मा ने इन स्थलों का प्रत्यक्ष अध्ययन किया, अयोध्या से लेकर रामेश्वरम् तक। उन्होंने पाया कि हर स्थान, हर आकाशीय स्थिति, और हर ऋतु-वर्णन वास्तविक भू-परिस्थितियों से मेल खाता है। नासा द्वारा प्रकाशित पाक जलडमरूमध्य में डूबे मानव-निर्मित पुल के उपग्रह चित्र भी इस बात का समर्थन करते हैं कि रामसेतु एक वास्तविक संरचना थी, वही पुल जिसे रामायण में ‘सेतुबंध’ कहा गया है। वाल्मीकि, साहित्य से विज्ञान तक का सेतु वाल्मीकि केवल ‘रामायण’ के रचयिता नहीं थे, वे ज्ञान और सृजन के अद्वितीय संयोग थे। उन्होंने एक क्रौंच पक्षी के शोक से ‘श्लोक’ की रचना कर दी, और वहीं से काव्य का जन्म हुआ। यह वही संवेदना थी जो आकाश की गति और जीवन की गति को एक सूत्र में बाँध देती है। माता सीता उनके आश्रम में रही, लव-कुश उनके शिष्य बनकर बड़े हुए, यह दिखाता है कि समाज-व्यवस्था से परे ज्ञान का कोई जातिगत बंधन नहीं होता। शूद्र वर्ण से आने वाले इस महर्षि ने दिखा दिया कि महानता कर्म से होती है, जन्म से नहीं।  ऋषि का विज्ञान आज भी प्रासंगिक है आज जब आधुनिक विज्ञान जेम्स वेब टेलिस्कोप से ब्रह्मांड के रहस्य खोज रहा है, तब भी महर्षि वाल्मीकि का ज्ञान एक ज्योति-स्तंभ की तरह सामने आता है। वे हमें बताते हैं कि कविता केवल भावना नहीं, ब्रह्मांड की गति का अनुभव भी हो सकती है। ‘रामायण’ केवल कथा नहीं, बल्कि खगोलशास्त्र का काव्य है, जहाँ हर श्लोक में आकाश का सत्य निहित है। आदि कवि महर्षि वाल्मीकि को उनके प्राकट्य पर्व पर शत-शत नमन, जिन्होंने “शोक” को “श्लोक” में बदलकर यह दिखाया कि जब हृदय में वेदना हो और दृष्टि में ब्रह्मांड, तब कविता विज्ञान बन जाती है। आप सभी को महर्षि वाल्मीकि जयंती की सादर आत्मीय शुभकामनाएं   – *डॉ विश्वास चौहान ( प्राध्यापक विधि  , शासकीय स्टेट लॉ कॉलेज भोपाल )

MP में अब मानसून की विदाई की तैयारी, अगले 2 दिन हल्की बारिश के आसार

भोपाल  मध्यप्रदेश में रिकॉर्ड तोड़ बारिशों का दौर अब थमने जा रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में तेज बारिश ने जहां गर्मी से राहत दी, वहीं अब मौसम साफ होने की ओर है। मौसम विभाग की मानें तो 10 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से मानसून विदा हो जाएगा, और इसके बाद राज्य में सुहावना और साफ मौसम लौटेगा। अगले दो दिनों तक हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन कहीं भी भारी बारिश का खतरा नहीं है। यानी अब लोगों को न जलभराव की चिंता होगी, न ही अचानक आने वाली तेज बारिश की। इन जिलों में हुई बारिश सोमवार को श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, टीकमगढ़, सागर, दमोह, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, सिवनी, बालाघाट, मंडला, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नरसिंहपुर, रतलाम, मंदसौर, धार, बड़वानी, इंदौर, देवास, शाजापुर, आगर, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, सीहोर, रायसेन, भोपाल, राजगढ़ और विदिशा जिलों में आंधी के साथ बारिश हुई थी। इनमें से भोपाल, रायसेन, गुना और हरदा भारी बारिश दर्ज की गई थी।   आज इन जिलों में बारिश का अलर्ट     भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, सिवनी, बालाघाट, पांढुर्णा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, झाबुआ, इंदौर, देवास, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, आगर, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, सागर, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, शहडोल, उमरिया, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पन्ना, दमोह, मंडला, डिंडोरी, मैहर, छिंदवाड़ा, अनूपपुर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और मैहर     सीहोर, राजगढ़, उज्जैन, देवास, शाजापुर, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, मुरैना और श्योपुर कलां में 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती है। वर्तमान में सक्रिय है कई मौसम प्रणालियां     अगले 3-4 दिनों के दौरान मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों तथा महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की और वापसी के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं। चक्रवातीय तूफान “शक्ति” वर्तमान में 19.6° उत्तरी अक्षांश और 60.5° पूर्वी देशांतर के पास केंद्रित है। यह मसीरा (ओमान) से लगभग 210 किमी दक्षिण-पूर्व, रास अल हद्द (ओमान) से 310 किमी दक्षिण-दक्षिण-पूर्व, कराची (पाकिस्तान) से 900 किमी दक्षिण-पश्चिम, द्वारका से 940 किमी पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम और नलिया से 960 किमी पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।     इसके पूर्व- दक्षिण-पूर्व की ओर पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम अरब सागर पर बढ़ने और 7अक्टूबर की सुबह तक एक निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना है। उत्तरी अफगानिस्तान के ऊपर चक्रवातीय परिसंचरण के रूप में स्थित पश्चिमी विक्षोभ अब उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान और उससे सटे पाकिस्तान के ऊपर 3.1 से 5.8 किमी की ऊँचाई तक समुद्र तल से ऊपर स्थित है, और ऊपरी क्षोभमंडलीय पछुआ हवाओं में एक ट्रफ 7.6 किमी की ऊँचाई तक समुद्र तल से ऊपर देशांतर 69° पूर्व से अक्षांश 23° उत्तर तक फैली हुई है।     एक चक्रवातीय परिसंचरण उत्तर पाकिस्तान और आसपास के क्षेत्र के ऊपर स्थित है, जो समुद्र     तल से 1.5 किमी की ऊँचाई तक फैला हुआ है। एक चक्रवातीय परिसंचरण पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्र के ऊपर भी स्थित है, जो समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊँचाई तक फैला हुआ है। मध्य प्रदेश : अबतक 12 जिलों से मानसून विदा अबतक मध्य प्रदेश के 12 जिलों से मानसून विदा हो चुका है। इसमें उज्जैन, राजगढ़,अशोकनगर ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर, रतलाम और उज्जैन शामिल हैं।आमतौर पर मानसून 6 अक्टूबर तक विदा हो जाता है लेकिन इस बार नया वेदर सिस्टम बनने से मानसून की वापसी में देरी हो रही है। हालांकि 10-12 अक्टूबर से पूरे प्रदेश से मानसून की विदाई संभव है। इस वर्ष मानसून ने प्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। 1 जून से 6 अक्टूबर तक कहां कितनी हुई वर्षा     मध्य प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 21% अधिक वर्षा हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 17% और पश्चिमी मध्य प्रदेश 25% अधिक वर्षा हुई है। एमपी में अब तक 47 इंच बारिश हो चुकी है वैसे 37.3 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.8 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.2 इंच है। अब तक 122 प्रतिशत बारिश हो चुकी है पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी।     गुना में सबसे ज्यादा 65.5 इंच बारिश हुई। मंडला-रायसेन में 62 इंच और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। हालांकि शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार में सबसे कम बारिश हुई।सबसे कम बारिश खरगोन में 27.3 इंच , शाजापुर में 28.7 इंच, खंडवा में 29.1 इंच, बड़वानी में 30.9 इंच और धार में 32.8 इंच हुई है।     ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया में बारिश का कोटा फुल हो चुका है।

69वें आधारशिला दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे नामकरण पट्टिका अनावरण का सम्मान समारोह

उज्जैन  सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय अपने 69वें आधारशिला दिवस की तैयारी कर रहा है। यह कार्यक्रम 10 अक्टूबर को आयोजित होगा, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री विश्वविद्यालय की नामकरण पट्टिका का अनावरण भी करेंगे।  इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में कार्यपरिषद के सदस्य, विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहेंगे। विश्वविद्यालय का नामकरण हाल ही में सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29वें दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल की उपस्थिति में यह घोषणा की थी। प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद मध्य प्रदेश के राजपत्र में भी इस नामकरण का प्रकाशन हो चुका है। विश्वविद्यालय की आधारशिला 23 अक्टूबर 1956 को तत्कालीन गृहमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने रखी थी। इसके बाद विश्वविद्यालय की स्थापना 1 मार्च 1957 को हुई थी।  

सरकारी प्रयासों में संगठनों की सहभागिता से हो रहा स्थितियों में सुधार

स्थितियों के सुधार के लिये किये जा रहे प्रयासों में सभी संगठन सरकार के साथ वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञों, इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स के सदस्यों-पदाधिकारियों के साथ औषधियों के उपयोग पर हुआ विमर्श केंद्र व राज्य सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करें भोपाल  राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, राज्य कार्यालय में आहूत बैठक में वर्तमान परिस्थियों के परिपेक्ष्य में शिशुओ व बच्चों को चिकित्सकों द्वारा लिखे जा रहे तथा बाजार में उपलब्ध विभिन्न औषधियों विशेषकर संयोजन औषधियों (काम्बिनेशन मेडिसिन्स) के उपयोग में बरती जाने वाली सावधानियों केंद्र व राज्य सरकार तथा विभिन्न चिकित्सा संगठनो यथा इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा जारी दिशा निर्देशों के पालन के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों तथा शिशु रोग विशेषज्ञों ने प्रदेश में हुई बच्चों की दुखद मृत्यु पर दुख व्यक्त किया। शिशु रोग विशेषज्ञों ने कहा कि सरकार द्वारा स्थितियों के सुधार के किये जा रहे प्रयासो में सभी संगठन सरकार के साथ हैं। उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने सभी सुझावो को ध्यान से सुनते हुए शासकीय दिशा निर्देशो में आवश्यकतानुसार उन्हे शामिल किये जाने की बात कही। उन्होने छिंदवाडा की घटना पर दुख व्यक्त करते हुये तथा पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना अत्यंत हृदयविदारक है। इस घटना के सभी पहलुओ की जांच करवाई जा रही हैं और सभी दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी। साथ ही उन्होने यह भी कहा कि केंद्रीय व राज्य शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशो का पालन करवाने में इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जैसे संस्थाओ की मदद से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचा जा सकता हैं। इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जैसे संस्थाओ में शामिल तकनीकी विशेषज्ञ सुदूर इलाकों में मेडिकल प्रैक्टिस कर रहे चिकित्सकों को प्रशिक्षित कर इस तरह की घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता हैं। प्रमुख सचिव  संदीप यादव ने बताया कि छिदवाडा में बच्चों की दुखद मृत्यु के सभी कारणों का गहन परीक्षण करवाया गया है। इसमें भोज्य पदार्थो, पेय जल के साथ साथ विभिन्न औषधियों की जांचे शामिल हैं। जैसा कि बच्चो के रीनल बायोप्सी रिर्पोट से ज्ञात हुआ है कि बच्चो की मृत्यु एक्यूट टयूबुलर नेक्रोसिस के कारण हुये एक्यूट रीनल फेल्योर के कारण हुई है जो किसी रासायनिक टाक्सीसिटी की ओर इशारा करती हैं। इसके बावजूद बच्चों में किसी बैक्टीरियल-वायरल-अन्य संक्रमणों के कारण एक्यूट रीनल फेल्योर की आशंकाओ की भी विस्तृत जांच करवाई गई। घटना में यह पाया गया कि विषाक्त रसायन कफ सीरप में उपस्थित था जिसका विक्रय अपना मेडिकल स्टोर, स्टेशन रोड, परासिया द्वारा किया जा रहा था। यह मेडिकल स्टोर मती ज्योति सोनी के नाम पर पंजीकृत था। यह भी पाया गया कि मेडिकल स्टोर में औषधियों के विक्रय हेतु कोई पंजीकृत फार्मासिस्ट भी उपलब्ध नहीं था इससे स्पष्ट हैं कि बिना किसी औषधि भण्डारण व वितरण के जानकारी वाले तकनीकी व्यक्ति के स्थान पर अनाधिकृत व तकनीकी तौर पर इसके लिये अप्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा औषधियों का भण्डारण व वितरण किया जा रहा था। दोषी पाये जाने से इस मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निरस्त कर इसे सील कर दिया गया है। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि यह पूरा परिसर डा प्रवीण सोनी के आधिपत्य में था तथा उनकी सहमति से यह अवैधानिक कार्य जारी था अत: उनके विरूद्ध भी विधिसम्मत कार्यवाही की जा रही हैं। बैठक में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा विगत दो वर्षो में जारी निर्देशो की वृहद जानकारी दी गयी। बताया गया कि भारत शासन के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय द्वारा दिसम्बर 2023 में क्लोरफेनरामीन मैलिएट 2 एमजी + फेनिलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड 5 एमजी के संयोजन औषधि (काम्बिनेशन मेडिसिन) को वर्ष 2023 में ही 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त्त भारत शासन के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय द्वारा अक्टूबर 2025 में पत्र जारी कर बच्चों में कफ सीरप के उपयोग में सावधानी बरतने की सलाह दी है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की शिशु रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा मलिक द्वारा चिंता व्यक्त करते हुये कहा गया कि औषधियों के काउंटर विक्रय को नियंत्रित किये जाने की आवश्यकता हैं। शिडयूल एच ड्रग केवल चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त किसी भी फार्मेसी में बनने वाली औषधियों के प्रत्येक बैच की जांच होनी आवश्यक है। डॉ. राकेश मिश्रा द्वारा 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चो में संयोजन औषधि (काम्बिनेशन मेडिसिन) के प्रतिबंध को पूर्ण तौर पर पालन करवाने पर बल दिया गया। इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. महेश माहेश्वरी द्वारा जानकारी दी गई कि संयोजन औषधि (काम्बिनेशन मेडिसिन) और अन्य औषधियों के तर्कसंगत प्रयोग हेतु इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स की राष्ट्रीय एवं राज्य शाखा द्वारा पूर्व से ही निर्देश जारी किये जा चुके हैं। समय-समय पर आवश्यकतानुसार इनमें संशोधन किया जाता रहा हैं। इन्होने भरोसा दिलाया कि यदि शासन अपने दिशा निर्देशो में संशोधन हेतु तकनीकी सहायता चाहेगा तो इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स इसके लिये सहर्ष तैयार हैं। उन्होने इस हेतु केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा जारी सर्कुलर्स का समर्धन किया तथा इसके क्रियान्वयन में सहयोग का आश्वासन भी दिया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। शिशु रोग विशेषज्ञो में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान से डॉ. शिखा मलिक, इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डा महेश माहेश्वरी, सचिव डॉ. दिनेश मेकले, डॉ. अम्बर कुमार, डॉ. भुपेश्वरी पटेल, गांधी चिकित्सा महाविद्वलय के डॉ. मंजूशा गुप्ता, डॉ. राकेश टिक्कस और निजी चिकित्सक डॉ. राकेश मिश्रा, राकेश सुखेजा, डॉ. श्रुति सरकार, डॉ. गुफरान अहमद, डॉ. राहुल खरे समेत बड़ी संख्या में शिशु रोग विशेषज्ञ शामिल हुए।