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मैहर को मिलेगी सीवरेज समस्या से राहत, जल्द पूरी होगी परियोजना, 75 हजार लोग होंगे लाभान्वित

 मैहर नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से माता शारदा की नगरी मैहर में सीवरेज परियोजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। यह परियोजना शहर के समग्र विकास के साथ जनस्वास्थ्य में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। परियोजना के अंतर्गत 15 हजार से अधिक घरों को सीवरेज नेटवर्क से जोड़े जाने का कार्यक्रम है, जिससे लगभग 75 हजार से अधिक की आबादी को सीधा लाभ पहुंचेगा। इसके साथ ही मैहर में माता शारदा दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुजन भी इस सुविधा से लाभान्वित होंगे। इस परियोजना से शहर की स्वच्छता और पर्यावरण में सकारात्मक बदलाव आएगा। एशियन डेवलपमेंट बैंक की 160 करोड़ 34 लाख रुपये लागत वाली परियोजना में 10 वर्षों के संचालन और संधारण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। शहर में करीब 130 किलोमीटर सीवरेज लाइन बिछाई जा रही है, इसमें से अब तक 104 किलोमीटर लाइन का कार्य पूरा हो चुका है। कार्य की तेज गति को देखते हुए यह अनुमान है कि शेष कार्य भी तय समय-सीमा में पूरा होगा। परियोजना के पूर्ण होने पर न सिर्फ मल-जल के शोधन की आधुनिक व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि इससे जल जनित बीमारियों में कमी, स्वास्थ्य में सुधार और सड़कों व नालियों की स्वच्छता सुनिश्चित होगी। नालियों में गंदा पानी बहने की समस्या समाप्त होगी और वातावरण अधिक स्वच्छ व सुरक्षित बन सकेगा। यह सीवरेज परियोजना स्वच्छ भारत मिशन और सतत नगरीय विकास की दिशा में एक ठोस पहल है, जो मैहर को एक आधुनिक, स्वच्छ और स्वस्थ नगरी के रूप में विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।  

मोहन यादव ने भाईदूज पर दी खास सौगात, लाड़ली बहनों को मिलेगा 1500 रुपए

भोपाल  मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस को कोसते हुए लाड़ली बहनों के लिए भाईदूज से 1500 रुपए देने का एलान किया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेसी कुछ भी कहें लेकिन बहनों चिंता करो, दिवाली के बाद इसी भाईदूज से आपको 1500 रुपए मिलना चालू हो जाएगा. कांग्रेसी रोते रहेंगे और हमारे पास इतने पैसे हैं कि हम अपनी बहनों को देते रहेंगे.  भाईदूज से लाड़ली बहनों को 1500 रुपए का एलान  मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव ने कहा कि "लाड़ली बहनों हाथ खड़े करो, जिन जिनको पैसे मिल रहा है. आप बताओ बहन को भी मिल रहा है और भाई को भी मिल रहा है. हमारे पास कोई पैसे की कमी नहीं है, किसानों की जिंदगी जितनी बेहतर कर सकते हैं, हम लगातार उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और बहनों चिंता मत करो. ये कांग्रेसी कुछ भी कहें, लेकिन इसी दिवाली के बाद भाईदूज से आपको भी 1500 रुपए महीने मिलना चालू हो जाएगा. ये कांग्रेसी रोते रहेंगे… रोते रहेंगे… रोते रहेंगे और हमारे पास पैसे इतने हैं कि हम अपनी बहनों को देते रहेंगे..देते रहेंगे… देते रहेंगे. बहनें भी अपने एक-एक पैसे का उपयोग अपने बच्चों को पढ़ाई, बुजुर्गों की दवाई और घर के परिवार के सदस्यों के लिए सब की चिंता के लिए इस्तेमाल करती हैं. ऐसे में उनकी चिंता अगर हम नहीं करेंगे, तो कौन करेगा,यह काम हमारा है. मोहन यादव बोले- हमारे पास पैसे की कमी नहीं मुख्यमंत्री ने विशाल जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि "विकास योजनाएं चलाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के पास पैसे की कमी नहीं है.हम अपने किसान भाईयों और लाड़ली बहनों को किसी तरह की कमी नहीं आने देंगे. किसान भाईयों को केंद्र और राज्य सरकार की किसान सम्मान निधि मिलेगी, तो लाड़ली बहनों के लिए दीपावली के बाद भाईदूज को 1500 रुपए मिलेंगे. लाड़ली बहना योजना का महत्व  लाड़ली बहना योजना महिलाओं की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे महिलाओं को विभिन्न प्रकार की योजनाओं का फायदा मिल सकेगा। सीएम ने इस योजना के माध्यम से महिलाओं को सीधे वित्तीय सहायता प्रदान करने का वादा किया है। कांग्रेस पर तंज  सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस पर तंज करते हुए कहा कि कांग्रेस गोमांस और गोवंश को लेकर बातें करती है, जबकि उनकी सरकार ने 2004 के बाद मध्यप्रदेश में गोवंश को लेकर कानून बनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति यदि गोमाता को परेशान करेगा, तो उसे जेल भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि उनकी सरकार के द्वारा गोशालाओं की संख्या बढ़ाई गई है और दूध उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

बाघों की छठी गिनती में मध्य प्रदेश करेगा कमाल, अन्य राज्यों के एक्सपर्ट्स ने दिया उच्च दर्जा

भोपाल  टाइगर स्टेट मप्र अब 6वीं बार बाघों की गिनती (अखिल भारतीय बाघ आकलन) के लिए तैयार है। उसके पहले विशेषज्ञों का अनुमान है कि प्रदेश में 1000 से अधिक बाघ है। यदि अनुमान सही साबित होता है तो मप्र टाइगर स्टेट का दर्जा बचाने में सफल होगा और कर्नाटक जैसे राज्यों को और मेहनत करनी पड़ सकती है। अभी प्रदेश में 785 बाघ है, यह संया वर्ष 2022 में हुए अखिल भारतीय बाघ आकलन रिपोर्ट में सामने आई थी। अब यह आकलन वर्ष 2026 में होना है। पांच राज्यों के विशेषज्ञों ने पेंच में किया मंथन बाघों का आकलन करने से पहले देशभर में इसकी तैयारी की जा रही है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण इसका नेतृत्व कर रहा है। उसी के नेतृत्व में वन्यजीव संस्थान देहरादून में बीते महीने राष्ट्रीय स्तर की बैठक हो चुकी है। इसके बाद मध्यप्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व में कार्यशाला हुई है, जिसमें पांच राज्यों के विशेषज्ञ जुटे थे। इनके बीच बाघों के आकलन से जुड़ी तैयारियों को लेकर बिंदुवार चर्चा हुई और तैयारियों में की जाने वाली सुधारात्मक प्रक्रिया पर बातचीत हुई। 2026 में शुरू होगी बाघों की गिनती बाघों (Tigers in MP) का आकलन 2026 में होगा। यह रिपोर्ट काफी अध्ययन व सत्यापन के बाद ही जारी होती है। ताकि आंकड़ों में कोई दोहरा व छूट न हो। इस पूरी प्रक्रिया को करने में लंबा समय लग जाता है। साक्ष्यों से मिलान के बाद ही फाइनल रिपोर्ट का प्रकाशन शासन के द्वारा किया जाता है। 2027 में आएगी रिपोर्ट बाघ आकलन 2026 की रिपोर्ट एक साल बाद जुलाई 2027 में आएगी, जो विश्व बाघ दिवस पर जारी की जाएगी। हर बार इस दिन रिपोर्ट जारी की जाती रही है। हालांकि तब प्राथमिक रिपोर्ट ही जारी होगी, विस्तृत रिपोर्ट आने में और एक से डेढ़ वर्ष लग जाएंगे। वनाधिकारियों का कहना है कि बाघ आंकलन की प्रक्रिया बहुत जटली है, इसमें कई स्तर पर साक्ष्य जुटाने पड़ते हैं। सभी साक्ष्यों का अध्ययन बड़ी चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया होती है, फिर उसे दूसरे अन्य साक्ष्यों से मिलान करना पड़ता है। मप्र में सबसे अच्छे रहवास स्थल प्रदेश में बाघों के लिए सबसे अच्छे और अनुकूल रहवास स्थल है। इसमें बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगल सबसे आगे रहे हैं, जिसकी पुष्टि भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून भी अपनी विभिन्न रिपोर्टों में कर चुका है। रिजर्व की संया भी बढ़ी है। कुछ सामान्य वन क्षेत्रों में भी बाघों की मौजूदगी दिखाई दे रही है। इन सबकुछ आधार पर कहा जा सकता है कि 2022 में जब 785 बाघ थे तो इनकी संया अब तक बढ़कर 1000 तक पहुंच जानी चाहिए। – आरके दीक्षित, वन्यप्राणी विशेषज्ञ

मध्य प्रदेश में प्रमोशन प्रक्रिया को मिल सकती है रफ्तार, हरी झंडी मिली तो दिसंबर तक होंगे प्रमोशन

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए नए पदोन्नति नियम को लेकर हाई कोर्ट जबलपुर की सुनवाई में सरकार का जोर इस बात पर है कि नौ वर्ष से प्रदेश में पदोन्नतियां बंद हैं। इससे कर्मचारी हतोत्साहित हैं। सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन प्रकरण को ध्यान में रखते हुए जब तक अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक सशर्त पदोन्नति दी जाएगी। यदि सब-कुछ ठीक रहा और निर्णय सरकार के पक्ष में आया तो दिसंबर तक सभी पात्र कर्मचारियों को एक-एक पदोन्नतियां दे दी जाएंगी। हाई कोर्ट जबलपुर में सरकार की ओर से गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन की अनुपस्थिति को आधार बनाकर सुनवाई की तिथि आगे बढ़ाने का आग्रह किया, जिसे स्वीकार किया गया। सरकार का जोर इस बात पर है कि सशर्त ही सही पर नौ वर्ष से बंद पदोन्नति का सिलसिला प्रारंभ हो जाए। वैसे भी सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है, इसलिए पदोन्नति दी भी जाती है तो वह अंतिम निर्णय के अधीन ही रहेगी। सभी वर्ग के कर्मचारी हो रहे प्रभावित इसमें किसी को कोई परेशानी भी नहीं होनी चाहिए क्योंकि प्रभावित तो सभी वर्ग के कर्मचारी हो रहे हैं। वहीं, सामान्य वर्ग के याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका को वापस ना लेने पर प्रश्न खड़ा कर रहे हैं। सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संस्था (सपाक्स) का कहना है कि जब सरकार ने यह मान लिया है कि पुराने नियम दोषपूर्ण थे और हाई कोर्ट ने उन्हें जो निरस्त किया वह सही था तो फिर याचिका वापस लेने में आपत्ति क्या है। जब नियम ही गलत थे तो जो पदोन्नतियां उससे हुईं वे वापस ली जानी चाहिए यानी पदोन्नत अधिकारियों-कर्मचारियों को पदावनत करके वरिष्ठता सूची तैयार की जाए और फिर पदोन्नतियां हों। अभी जो स्थिति है, उसमें तो सामान्य वर्ग का नुकसान ही नुकसान है।ये पहले ही विसंगतिपूर्ण पदोन्नति नियम के कारण पिछड़ गए हैं और अब फिर वही स्थिति बनाने का प्रयास हो रहा है। जो नए नियम हैं वे भी सामान्य वर्ग के हितों का संरक्षण नहीं करते हैं। विभागों ने शुरू कर दी थी पदोन्नति की तैयारियां विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के नियमित साढ़े सात लाख अधिकारियों-कर्मचारियों में से साढ़े तीन से चार लाख कर्मचारी पदोन्नति के पात्र होंगे। नए नियम बनाने के साथ ही इन्हें पदोन्नति देने की तैयारियां भी विभागों ने प्रारंभ कर दी थी। विभागीय पदोन्नति समिति के गठन के साथ कर्मचारियों के सेवा अभिलेख के आधार पर प्रस्ताव भी तैयार हो चुके हैं। नगरीय विकास एवं आवास, लोक निर्माण सहित अन्य विभागों और विधानसभा सचिवालय ने तैयारी करके रखी है। यदि जल्द ही नियम को हरी झंडी मिल जाती है तो दिसंबर तक पात्र अधिकारियों-कर्मचारियों को एक पदोन्नति दे दी जाएगी। यथास्थिति भी होगी स्पष्ट सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट में यथास्थिति को भी स्पष्ट करने के लिए कहा है। दरअसल, सपाक्स का कहना है कि भले ही नए नियम बना दिए गए हैं लेकिन जब तक यथास्थिति है, तब तक पदोन्नति नहीं हो सकती है। वहीं, सरकारी पक्ष का कहना है कि यथास्थिति संदर्भ में है जिसमें पदोन्नत कर्मचारियों को पदावनत करने की बात उठाई जा रही है।

भोपाल की अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन की सुस्ती, बिना अनुमति फल-फूल रही 250 बस्तियां

भोपाल  भोपाल जिले में अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह ठप हो गई है, यही कारण है कि भूमाफिया बिना अनुमतियों के प्लाट बेचकर मोटा लाभ कमा रहे हैं। जबकि पिछले दिनों ईंटखेड़ी के घासीपुरा इलाके की अवैध कॉलोनी स्थित मकान में ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा हो चुका है। इसके बाद भी जिम्मेदारों ने अवैध कॉलोनियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की है। जबकि छह महीने पहले कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने अवैध कॉलोनियों को चिह्नित कर कार्रवाई करने के निर्देश सभी एसडीएम को दिए थे, जिसके बाद एसडीएम द्वारा करीब 250 अवैध कॉलोनियों को चिह्नित तो किया था, लेकिन इसके आगे कार्रवाई नहीं बढ़ सकी और मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। अधिकारियों की अनदेखी के चलते यहां बीते दो से तीन महीने की बात करें, तो अन्य तहसील/सर्कल में कोई भी बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। दरअसल, प्रशासन ने जिले में 250 ऐसी जमीनें चिह्नित की थीं, जहां अवैध कॉलोनियों का निर्माण जारी है। इन कॉलोनियों के निर्माण के लिए शासकीय अनुमति नहीं ली गई है। एसडीएम ने ऐसी कॉलोनियों को नोटिस तो जारी किए, लेकिन इसके बाद एक्शन नहीं लिया। सूत्रों की मानें तो राजनीतिक संरक्षण की वजह से अधिकारियों द्वारा अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई नहीं की गई है। जिले में कोलार, हुजूर, गोविंदपुरा व बैरसिया क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों जमकर फल-फूल रही हैं। कोलार में अवैध कॉलोनियों का जाल कोलार तहसील के आसपास ही अवैध कॉलोनियों का जाल बुना जा रहा है। रतनपुर सड़क, पिपलिया केशो, सेमरी, सोहागपुर, गेहूखेड़ा, राजहर्ष सहित अन्य क्षेत्रों में कृषि भूमि पर कॉलोनियों का निर्माण किया जा रहा है। यह सभी गांव नगर निगम क्षेत्र में आते हैं। यहां पर कृषि भूमि पर सड़क बनाकर प्लाट बेचे जा रहे हैं। इसके लिए बकायदा कॉलोनाइजरों ने बोर्ड लगा रखे हैं। इसमें से किसी ने भी न तो टीएनसीपी से और न ही नगर निगम से अनुमति ली है। हुजूर से बैरसिया तक काटे जा रहे अवैध प्लाट जिले की हुजूर तहसील से लेकर बैरसिया तक भूमाफिया अवैध कॉलोनियों में जमकर प्लाट बेच रहे हैं। यहां पर भोपाल बायपास से लगे नगर निगम सीमा के पास वाले ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलोनियों काटी गई हैं, जिनमें से किसी के पास भी अनुमतियां नहीं हैं। लांबाखेड़ा से लेकर बैरसिया तक 35 किलोमीटर के मार्ग पर कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग की जा रही है। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इस तरह लोगों को फंसा रहे भूमाफिया लोगों को फंसाकर अवैध कॉलोनियों में प्लाट बेचने के लिए भूमाफिया नए-नए तरीके अपना रहे हैं। यह विकसित कॉलोनियों की तर्ज पर कवर्ड कैंपस बनाकर दे रहे हैं। वो जमीन के चारों तरफ बाउंड्री बनाते हैं। इसके बाद रोड, बिजली के पोल व सीवेज लाइन बिछाते हैं। ऐसे में जब कोई व्यक्ति प्लाट लेने आता है, तो वो यह देखकर आकर्षित हो जाता है। ऐसी एक-दो नहीं, करीब 50 से अधिक अवैध कॉलोनियां बन रही हैं। हालांकि, एक बार कॉलोनी में प्लाट बेचने के बाद तथा कथित बिल्डर कभी वहां पलटकर नहीं देखते हैं। एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जिले में अवैध कॉलोनियों को चिह्नित कर कार्रवाई करने के निर्देश सभी एसडीएम को दिए गए हैं। पिछले महीनों में अवैध कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद जिन कॉलोनाइजरों ने दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए हैं, उन पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।  -कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर

अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक जारी, MP हाईकोर्ट में 29 अक्टूबर को होगी सुनवाई

 जबलपुर  हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष गुरुवार को लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो के दुरुपयोग को चुनौती के मामले में सुनवाई हुई। मेटा कंपनी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी वर्चुअल पैरवी की। उन्होंने माना कि इंटरनेट मीडिया के कई प्लेटफार्म्स पर हाई कोर्ट प्रकरणों की सुनवाई के वीडियो का दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें आपत्तिजनक वीडियो के यूआरएल लिंक उपलब्ध करा दिए जाएं तो उन वीडियो को हटा दिया जाएगा। 29 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उक्त लिंक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने अंतरिम आदेश के तहत सभी क्रिमिनल कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक अगली सुनवाई तक बरकरार रखी है। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी। कोर्ट की बातों को मिर्च मसाला लगाकर करते हैं वायरल जबलपुर निवासी अधिवक्ता अरिहंत तिवारी और विदित शाह ने याचिका दायर कर बताया कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर मीम्स या शार्ट्स के माध्यम से डाली जाती है। यह आपत्तिजनक है। कई बार न्यायाधीशों द्वारा ओपन कोर्ट में कही बातों को मिर्च मसाला लगाकर उन्हें वायरल किया जाता है। यह अदालत की अवमानना है। गतिविधियों की मानिटरिंग करें आईटी याचिका में मांग की गई कि यूट्यूब के स्थान पर वेबेक्स आधारित प्लेटफॉर्म के जरिए प्रकरणों की लाइव स्ट्रीमिंग की जाए, जो कि कुछ हद तक सुरक्षित है। यह मांग भी की गई कि रजिस्ट्रार आईटी भी इस तरह की गतिविधियों पर मानिटरिंग करें और नियंत्रण सुनिश्चित करें।

गोविंदगढ़ किला पर दंपती के साथ दरिंदगी, दो आरोपी गिरफ्तार, रीवा में सनसनी

रीवा   रीवा जिले में करीब एक साल पहले न्यू कपल के साथ हुई दरिंदगी जैसी ही खौफनाक घटना फिर हुई. इस बार ये घटना गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र में हुई. यहां भी बदमाशों ने हैवानियत की हदें पार की. गोविंदगढ़ किला घूमने गए पति-पत्नि को बदमाशों ने पहले तो उनके साथ बेरहमी मारपीट की और फिर दोनों को खंभे से बांधकर बंधक बनाया. इसके बाद दोबारा लोहे के पाइप से पीटा. कपल के कपडे़ फाड़कर महिला के साथ अश्लील हरकतें की. कपल को लूटकर बंधा हुआ मौके से बदमाश फरार हो गए. गोविंदगढ़ किला घूमने गया था कपल ये भयावह घटना 24 सितंबर  शाम तकरीबन 5 बजे की है. गोविंदगढ़ निवासी कपल घूमने के लिए गोविंदगढ़ किला पहुंचे. इसी दौरान पति-पत्नि तालाब किनारे जाकर बैठ गए. अचानक दो बदमाश वहां आ धमके और बदसलूकी करने लगे. ये देखकर महिला के पति ने परिजनों को फोन करके सूचना दी. इसके बाद बदमाशों ने दंपती के मोबाइल फोन छीन लिए और फिर मारपीट शुरू कर दी. खंभे से बांधकर पीटा, पति-पत्नी के कपड़े फाड़े दोनों बदमाश यहीं नहीं रुके. पति-पत्नी को खंडहर में ले गए और बंधक बना लिया. दोनों को अलग-अलग खंभों से रस्सी से बांध दिया. बदमाशों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए दोबारा लोहे के पाइप से पति-पत्नी की जमकर पिटाई की और महिला के कपडे फाड़ दिए. उसके साथ ही अश्लील हरकतें भी की. बदमाश अपने मंसूबों मे कमयाब हो पाते, इससे पहले ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई. पुलिस के आने भनक लगते ही बदमाशों ने पति-पत्नी से पर्स और नगदी छीनी और जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए. बदमाशों के घेरते ही युवक ने परिजनों को किया कॉल चूंकि बदमाशों द्वारा घेरते ही महिला के पति ने परिजनों को फोन करके सारा वाकया बता दिया. इसके बाद जब अचानक पति-पत्नी के फोन बंद हुए तो परिजनों को बड़ी अनहोनी होने की आशंका हुई. परिजनों ने तत्काल घटना की सूचना पुलिस को दी. इस पर थाना प्रभारी अरविन्द राठौर पुलिस टीम के साथ गोविंदगढ़ किला पहुंचे. पुलिस ने पति-पत्नी को बंधन से मुक्त कराया. गंभीर रूप से घायल दंपती को अस्पताल में भर्ती कराया. इसके बाद पुलिस बदमाशो की तलाश मे जुट गई. घटना के 24 घंटे के अंदर दोनों बदमाश गिरफ्तार एसडीओपी उदित मिश्रा ने बताया "पति-पत्नी की शिकायत पर गोविंदगढ़ थाने मे मामला दर्ज किया गया. दंपती को के सथ दो बदमाशों ने मारपीट कर रस्सी के जरिए खंभे से बांधा. महिला के साथ छेड़खानी की गई है. अलग -अलग टीम गठित कर बदमाशों की तलाश शुरू की गई. घटना के अगले दिन गुरुवार को थाना क्षेत्र मे दबिश देते हुए कुछ संदेहियों को पकड़कर पुलिस की टीम ने पूछताछ की तो दो आरोपियों ने वारदात करना कबूल लिया." दंपती से लूटे गए मोबाइल, नगदी बरामद एसडीओपी उदित मिश्रा ने बताया "इस वारदात के दो आरोपी शिव कुमार मिश्रा और महेन्द्र कुमार लोनिया को गिरफ्तार किया गया है. इनके पास से लूटे हुए 3 मोबाइल फोन, पर्स, और नगदी बरामद की गई है. इसके आलावा लोहे वारदात मे मारपीट के लिए इस्तेमाल की गई लोहे की पाइप भी बरामद किए गए है. आरोपियों से पूछताछ की जा रही, जो भी तथ्य निकलेंगे उसके आधार पर आगे के कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ 309[6], 74 BNS 351 [3]के तहत अपराध दर्ज किया गया है." एक साल पहले गुढ़ थाना क्षेत्र में भी हुई थी दरिंदगी रीवा जिले के गुढ़ थाना क्षेत्र में 22 अक्टूबर 2024 में भी ऐसी ही दरिंदगी की वारदात सामने आई थी. सामूहिक दुष्कर्म के मामले ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था. दरिंदों ने ऐसी घिनौनी वारदात की थी, जिसे सुनकर लोग अंदर तक कांप गए. इस वारदात के 6 माह बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आठों दरिंदों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. मामले के अनुसार पति और पत्नी एक-दूसरे की फोटो खींच रहे थे कि इसी दौरान समीप मे ही शराब पार्टी कर रहे बदमाशों की नजर दंपती पर पड़ी. शराब के नशे मे धुत दरिंदों ने पति-पत्नि के साथ मारपीट शुरू कर दी. पति का मोबाइल छीना और उसे बंधक बना लिया. इसके बाद पति के सामने ही नवविवाहिता से सामूहिक दुष्कर्म किया. 

‘साड़ीज़ ऑफ़ इंडिया’ प्रदर्शनी, नई दिल्ली में बाग प्रिंट बना आकर्षण का केन्द्र

भोपाल दिल्ली क्राफ्ट्स काउंसिल द्वारा नई दिल्ली में प्रतिष्ठित ‘साड़ीज़ ऑफ़ इंडिया’ प्रदर्शनी में कला और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला। इस भव्य प्रदर्शनी में देशभर के चुनिंदा और श्रेष्ठ शिल्पकारों को आमंत्रित किया गया है, जहाँ भारत की विविधता और समृद्ध हस्तकला परंपरा को एक ही छत के नीचे देखने का अवसर मिल रहा है। मध्यप्रदेश का बाग प्रिंट आयोजन का विशेष आकर्षण बना हुआ है। प्रदर्शनी 27 सितम्बर तक चलेगी। प्रदर्शनी के दूसरे दिन बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री और सांसद सुश्री कंगना रनौत ने मध्यप्रदेश के बाग प्रिंट शिल्पकार श्री मोहम्मद आरिफ खत्री की कलाकृतियों की जमकर तारीफ़ की और विस्तार से बाग प्रिंट की तकनीक और प्राकृतिक रंगों के महत्व पर बातचीत की। श्री खत्री ने सुश्री रनौत को मध्यप्रदेश बाग प्रिंट कला के उद्गम स्थल बाग गांव आने का आमंत्रिण दिया। उन्होंने कहा कि हमारी पीढ़ियाँ इस धरोहर को संभालती आई हैं और आज भी यह गाँव कला की जीवंत पाठशाला है। प्रदर्शनी में उपस्थित जानी-मानी क्राफ्ट रिवाइवलिस्ट मंजीरी नेरोला, कामियानी जलन और दिल्ली क्राफ्ट्स काउंसिल की अध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा राय ने भी बाग प्रिंट साड़ियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि परंपरा और आधुनिकता का बाग प्रिंट सुंदर संगम हैं, जिनमें प्राकृतिक रंगों की चमक और हस्तकला की शान झलकती है। गौरतलब है कि श्री खत्री को उनके नवाचार और बाग प्रिंट को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए कई सम्मान प्राप्त हुए हैं। कला-प्रेमियों और दर्शकों के लिए यह प्रदर्शनी केवल साड़ियों का नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के विविध रंगों का उत्सव है।

स्वदेशी उत्पादों को अपनाना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने शुक्रवार को उप नगर ग्वालियर के घासमंडी से कपूर बाबा तक के बाजार में कारोबार करने वाले छोटे-मझौले कारोबारियों से संवाद करते हुए स्वदेशी अपनाने तथा जीएसटी की नई दरों के बारे में चर्चा की। ऊर्जा मंत्री तोमर ने दुकानदारों एवं स्थानीय नागरिकों से बातचीत कर उन्हें स्वदेशी उत्पादों के उपयोग के लाभों और कर प्रणाली में हाल ही में लागू की गई नई दरों के संबंध में जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने चुनरी तथा अन्य किराने की सामग्री भी खरीदी। ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि स्वदेशी उत्पादों को अपनाना न केवल आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह स्थानीय कारीगरों, लघु उद्योगों और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि दैनिक जीवन में अधिक से अधिक स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करें और विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम करें। ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि दरों में किए गए संशोधन का उद्देश्य आम जनता की सुविधा और व्यापारिक गतिविधियों को सरल बनाना है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और सरल कर प्रणाली के माध्यम से प्रदेश की अर्थ व्यवस्था को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि जन-जागरूकता और लोगों की सक्रिय भागीदारी से ही स्वदेशी अपनाओ अभियान को व्यापक सफलता मिलेगी और देश, राज्य तथा ग्वालियर शहर की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी। उन्होंने “वोकल फॉर लोकल” का मंत्र अपनाकर “मेक इन इंडिया” उत्पादों को बढ़ावा देने का संकल्प लेने का आग्रह किया। रक्तदान शिविर में हुए शामिल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर संत रविदास मंडल द्वारा कोणार्क हॉस्पिटल, शिंदे की छावनी, ग्वालियर में आयोजित रक्तदान शिविर में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल जीवन बचाने का कार्य नहीं, बल्कि समाज के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी और मानवता की सेवा है। उन्होंने आव्हान किया कि हम सभी इस नेक पहल में आगे आएं और इस जीवनदायिनी सेवा का हिस्सा बनें।  

मध्यप्रदेश को रेलवे में बड़ी सौगात: 2500 करोड़ की लागत से तैयार हो रही तीसरी लाइन

भोपाल  मध्य प्रदेश में रेलवे ढांचे को मजबूती देने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया गया है। इटारसी–आमला सेक्शन (Itarsi–Amla Third Line) पर तीसरी रेल लाइन का काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। करीब 130 किलोमीटर लंबे इस रूट पर मिट्टी का बेस तैयार होने के बाद अब अन्य निर्माण कार्य शुरू हो गए हैं। हालांकि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में देरी की वजह से नर्मदापुरम और बैतूल जिले में यह प्रोजेक्ट लेट से शुरू हो पाया। किसानों की जमीन अधिग्रहित तीसरी रेल लाइन बिछाने के लिए बैतूल जिले के 3 तहसीलों के लगभग 40 गांव प्रभावित हुए हैं। यहां करीब 290 किसानों की 16 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन अधिग्रहित की गई है। अधिकारियों का कहना है कि लाइन पूरी तरह तैयार होने के बाद इस रूट पर ट्रेन संचालन और सुगम हो जाएगा। घाट सेक्शन बना चुनौती यह पूरा रेल मार्ग घाट सेक्शन से होकर गुजरता है। ऐसे में अभी ट्रेनों के संचालन में कई दिक्कतें आती हैं। इसी कारण परियोजना में चार स्थानों पर सुरंग भी बनाई जाएगी, जिनकी कुल लंबाई 1.40 किलोमीटर होगी। प्रोजेक्ट का दायरा इटारसी से नागपुर तक 267 किलोमीटर लंबे सेक्शन पर तीसरी लाइन बिछाई जाएगी। इस पूरे ट्रैक पर 27 रेलवे स्टेशन और 361 पुल-पुलिया शामिल होंगे। पीपलढ़ाना और मरामझिरी इलाके में अंडरपास का निर्माण पहले ही किया जा चुका है। क्यों जरूरी है तीसरी लाइन? अभी नागपुर–इटारसी सेक्शन में केवल दो लाइनें हैं। इन पर एक साथ यात्री और मालगाड़ियां चलाई जाती हैं। कई बार यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता देने के लिए मालगाड़ियों को घंटों तक रोकना पड़ता है। तीसरी लाइन के बाद दोनों तरह की ट्रेनों का संचालन बिना बाधा के हो सकेगा और यात्रियों को समय पर ट्रेनें मिलेंगी। लागत और प्रगति पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 2525 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। भोपाल–इटारसी सेक्शन पर तीसरी लाइन का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब इटारसी–नागपुर सेक्शन पर समानांतर लाइन बिछाने का कार्य तेजी से चल रहा है। यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद न सिर्फ यात्रियों को समय की बचत होगी, बल्कि मालगाड़ियों की आवाजाही भी ज्यादा प्रभावी ढंग से हो पाएगी।