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नवरात्रि मेले में स्टॉल हटाने पर विवाद, BJP विधायक ने किया सख्त एक्शन, ID चेकिंग हुई

इंदौर  इंदौर के कनकेश्वरी मेला मैदान में ठेके को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. विधायक रमेश मेंदोला ने महेश पालीवाल उर्फ गुड्डू नाम के एक व्यक्ति को मेला, झूले और अन्य मनोरंजन साधनों का ठेका दिया था, लेकिन उसने यह ठेका आगे बढ़ाकर किसी फिरोज नाम के लड़के को सौंप दिया. इसकी जानकारी विधायक को नहीं थी. मामला सामने आते ही हिंदू जागरण मंच ने इसका पुरजोर विरोध किया. संगठन ने इसे हिंदू भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताते हुए तुरंत कार्रवाई की मांग कर दी. इसके बाद विधायक ने एक्शन लिया. फिरोज और महेश, दोनों से ही ठेके की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है और अब आईडी देखकर दुकानें और झूले हटवा दिए गए हैं. हिंदू संगठन ने विधायक से की शिकायत दरअसल, हिन्दू जागरण मंच को जैसे ही इस बात की जानकारी लगी, कार्यकर्ताओं ने विधायक रमेश मेंदोला से जाकर इसकी शिकायत कर दी. हिंदू संगठन के आक्रोश को देखते हुए रमेश मेंदोला ने तुरंत प्रभाव से निर्देश दिए कि फिरोज से ठेका वापस लिया जाए और गैर-हिंदुओं की दुकानें और सामान मेले से हटवाए जाएं. 'ठेका लेने के बाद मुसलमानों को दीं दुकानें' इस बीच, रमेश मेंदोला समर्थक जीतू यादव ने कहा, "मेला जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़े ठेके गैर-हिंदू व्यक्तियों को दिए जाने पर समाज में असंतोष फैलता है, जो किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है. फिरोज़ नाम के युवक ने महेश पालीवाल के नाम से ठेका लिया और फिर मुस्लिम समाज के लोगों को मेले में दुकान और झूले लगाने की परमिशन दी गई." जीतू यादव ने बताया कि उन्होंने सभी आईडी चेक कर मुस्लिम समाज से जुड़े सभी दुकानदारों को हटाया है. कुछ महिलाएं हिंदू बहनों की दुकान लगी है. उन्हें परमिशन है कि वह अपनी दुकान चलाएं. महेश उर्फ गुड्डू को सजा देते हुए उससे ठेका भी वापस ले लिया गया है. कैलाश विजयवर्गीय के समर्थक हैं विधायक रमेश मेंदोला बता दें कि रमेश मेंदोला बीजेपी के विधायक हैं और कैलाश विजयवर्गीय के कट्टर समर्थक माने जाते हैं. वह कनकेश्वरी गरबा आयोजन के आयोजक भी हैं. साथ ही, प्रदेश में सबसे ज्यादा वोटों से विधानसभा चुनाव जीतने का तमगा भी रमेश मेंदोला के नाम है.

हाई कोर्ट में पत्नी का अनोखा बयान: पति को छोड़ दूंगी, बिल्ली को नहीं

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक अनोखा तलाक का मामला सामने आया है, जहां पति-पत्नी के बीच पालतू जानवरों की वजह से रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच गया है। शादी के महज 9 महीने बाद ही दंपती ने तलाक के लिए आवेदन दे दिया है। इस अनोखे मामले की वजह है पति का कुत्ता और पत्नी की बिल्ली, जिनके बीच का झगड़ा अब कोर्ट तक जा पहुंचा है। पत्नी का आरोप, कुत्ता करता है बिल्ली को परेशान पत्नी का कहना है कि पति का कुत्ता उनकी प्यारी बिल्ली को बार-बार परेशान करता है। इतना ही नहीं, कुत्ते ने कई बार बिल्ली पर हमला भी किया, जिससे घर में तनाव का माहौल बन गया है। पत्नी का आरोप है कि पति अपने कुत्ते को नियंत्रित करने में नाकाम रहे हैं, जिसके चलते उनकी बिल्ली असुरक्षित महसूस करती है। पति की दलील, पहले ही दी थी चेतावनी दूसरी ओर, पति का कहना है कि शादी से पहले ही उन्होंने पत्नी को साफ बता दिया था कि सभी पालतू जानवरों को एक साथ रखना मुश्किल होगा। पति के मुताबिक, उनके घर में पहले से एक कुत्ता और मछलियां हैं, जिन्हें पत्नी की बिल्ली परेशान करती है। पति का दावा है कि पत्नी ने उनकी बात को अनसुना कर मायके से अपनी बिल्ली ला लिया, जो अब घर में रखी मछलियों के एक्वेरियम के आसपास मंडराती रहती है। पालतू जानवर बने घरेलू कलह की वजह यह मामला भोपाल के पारिवारिक कोर्ट में पहुंच चुका है, जहां दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें पेश कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि पालतू जानवरों को लेकर पति-पत्नी के बीच असहमति कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस तरह तलाक तक पहुंचने का मामला बेहद असामान्य है। अब कोर्ट इस अनोखे मामले में क्या फैसला सुनाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

बिहार के बाद अब MP में भी वोटर लिस्ट विशेष पुनरीक्षण शुरू, नाम जुड़वाने के लिए जरूरी होंगे 3 डॉक्युमेंट

भोपाल  जिनके नाम वर्ष-2003 की मतदाता सूची में नहीं हैं, उन्हें नई सूची में अपना नाम कटने से बचाने के लिए पहचान के तीन दस्तावेज पेश करने पड़ेंगे। वहीं जिन लोगों के पिता का नाम इस मतदाता सूची में है, उन्हें पिता से संबंध का प्रमाण पेश करने के साथ पहचान का एक दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। यह कवायद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) का हिस्सा है। दरअसल बिहार चुनाव के पहले 65 लाख मतदाता के नाम काटने के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने मध्यप्रदेश में भी सूची के गहन पुनरीक्षण की तैयारी शुरु कर दी है। जिसे एसआइआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) नाम दिया गया है। इस तरह की कवारयद यहां 22 साल बाद होने जा रही है। इससे पहले वर्ष 2003 में विशेष गहन पुनरीक्षण हुआ था। उस समय भोपाल में केवल चार विधानसभा क्षेत्र थे, जिसमें गोविंदपुरा, दक्षिण-पश्चिम, उत्तर और बैरसिया शामिल थे। गहर परीक्षण के बाद ही अंतिम सूची जारी होगी इन विधानसभाओं में 11 लाख 81 हजार 531 मतदाता थे। निर्वाचन आयोग ने इन मतदाता का गहन परीक्षण करने के बाद ही अंतिम सूची जारी की थी। वर्तमान में राजधानी में सात विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें बैरसिया, उत्तर, नरेला, दक्षिण-पश्चिम, मध्य, गोविंदपुरा और हुजूर हैं। यहां वर्तमान में की 21 लाख 18 हजार 364 मतदाता हैं। यह संख्या 22 साल पुरानी मतदाता सूची से दोगुना से भी ज्यादा है, सूची का एसआइआर होने से यहां भी भारी संख्या में नाम काटे जा सकते हैं। निर्वाचन आयोग ने फिलहाल 2025 की मतदाता सूची का 2003 की मतदाता सूची से मिलान का काम शुरू कर दिया है। इसके लिए बूथ स्तर के अधिकारियों को काम पर लगाया गया है। मिलान का काम पूरा होने के बाद जिनके नाम 2003 की सूची में नहीं होंगे, उनको बीएलओ सूचना देगा। उसी के आधार पर मतदाता को दस्तावेज पेश करना होगा। 2003 की सूची में जिनके नाम उन्हें नहीं देने होंगे दस्तावेज अधिकारियों का कहना है कि जिन मतदाता के नाम वर्ष-2003 की सूची में दर्ज होगा, उन्हें किसी भी तरह का दस्तावेज देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्हें सिर्फ 2003 में दर्ज नाम का रिकॉर्ड पेश करना पड़ेगा। जिन लोगों के पिता का नाम दर्ज है, उन्हें भी पिता के नाम का ब्यौरा अपने फार्म में दर्ज करना पड़ेगा। इस अभियान के तहत 1987 के पहले जन्म लेने वाले मतदाता को एक दस्तावेज देना पड़ेगा। इसके साथ 1987 से 2003 के बीच जन्म लेने वाले मतदाता को पहचान के दो दस्तावेज पेश करना पड़ेंगे। जबकि 2003 से अब तक वालों को तीन दस्तावेज देना अनिवार्य किया गया है। हर मतदाता को दिए जाएंगे न्यूमेरेशन फार्म मतदाता सूची का गहन परीक्षण होने के साथ ही बीएलओ को न्यूमेरेशन फार्म दिए जाएंगे। यह फार्म बीएलओ घर-घर जाकर मतदाता को दो कापी में देंगे, जिसमें एक कापी पर पावती भी ली जाएगी। इस फार्म को तय समय में भरने के साथ दस्तावेज भी पेश करना अनिवार्य होगा। आयोग इस फार्म की व्यवस्था ऑनलाइन भी रखेगा, जिससे मतदाता ऑनलाइन भी इस फार्म को भर सकेंगे। 77 बीएलओ और चार सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस नरेला विधानसभा क्षेत्र के रजिस्ट्रीकरण अधिकारी रवीश श्रीवास्तव ने 77 बीएलओ और चार बीएलओ सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने मतदाता सूचीयों के मिलान का काम शुरू नहीं किया है। सभी को निर्देशित किया है कि वह जल्द से जल्द निर्वाचन संबंधी कार्य शुरू करें और अपना जवाब भी पेश करें। यदि जवाब नहीं दिया जाता है तो एक पक्षीय कार्रवाई की जाएगी। लापरवाही बरतने वालों पर होगी कार्रवाई     जिले के सभी विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के मिलान का कार्य किया जा रहा है। इसकी जिम्मेदारी सभी रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को सौंपी गई है, यदि बीएलओ द्वारा निर्वाचन के काम में लापरवाही बरती जाती है, तो उन पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी  

हाईकोर्ट की टिप्पणी: MPPSC शेड्यूल को अभी मंजूरी नहीं, सभी पक्षों की सुनवाई जरूरी

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष मंगलवार को एमपी-पीएससी मुख्य परीक्षा-2025 के मामले की सुनवाई हुई। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से हाई कोर्ट में मुख्य परीक्षा का शेड्यूल पेश कर इसे मंजूर करने का आग्रह किया गया। हाई कोर्ट ने उसे फिलहाल मंजूरी नहीं दी। कोर्ट ने कहा कि दूसरे पक्ष को भी सुनना जरूरी है। इसी के साथ मामले की सुनवाई नौ अक्टूबर तक के लिए स्थगित की दी गई। दरअसल, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों भोपाल निवासी सुनीत यादव, नरसिंहपुर निवासी पंकज जाटव व बैतूल निवासी रोहित कावड़े की ओर से याचिका दायर की गई है। उनकी ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि एमपीपीएससी द्वारा कुल 158 पदों की भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम पांच मार्च को घोषित किए गए। लेकिन परिणाम में वर्गवार कट ऑफ अंक जारी नहीं किए गए। जबकि पूर्व की सभी परीक्षाओं में वर्गवार कट ऑफ अंक जारी किए जाते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों को बायपास करने का आरोप याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के विभिन्न फैसलों को बायपास करते हुए आयोग ने अनारक्षित पदों के विरुद्ध आरक्षित वर्ग के प्रतिभावान अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए चयनित नहीं किया। समस्त अनारक्षित पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित कर प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट जारी किया गया। आयोग ने अपनी इस असंवैधानिक त्रुटि को छुपाने के उद्देश्य से 2025 के प्रारंभिक परीक्षा में कट ऑफ मार्क्स भी जारी नहीं किए हैं। जबकि नियमानुसार प्रत्येक चरण की परीक्षा में वर्गवार कट आफ अंक जारी किए जाने का प्रविधान है। इसके चलते याचिकाकर्ताओं को मुख्य परीक्षा में चयन से वंचित कर दिया गया है। विगत 21 जुलाई को शासन से जवाब के लिए समय मांगा गया था।

गरबा को लेकर रतलाम के शहर काज़ी की अपील, धार्मिक दृष्टिकोण से बताई आपत्ति

रतलाम  नवरात्रि के दौरान गरबा आयोजनों को लेकर रतलाम शहर के काजी अहमद अली ने मुस्लिम समाजजनों के नाम एक पत्र जारी किया है. काजी ने अपील की है कि अपने बच्चों को गरबा आयोजनों में जाने से रोकें, क्योंकि यह धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं है. काजी के पत्र में लिखा है, "जैसा कि आप सभी हज़रात को मालूम है कि हिंदू भाइयों का एक अहम और बड़ा नवरात्रि पर्व चल रहा है, जिसमें गरबे का आयोजन किया जाता है. कई बार ऐसा वाज़े तौर पर देखा गया है कि मुस्लिम लड़के-लड़कियां गरबा आयोजन में जाने से आयोजकों को कड़ी आपत्ति होती है और दो समाजों में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जो हिंदुस्तान की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे पर बुरा असर डालती है." 'गैर-हिन्दुओं का आना सख्त मना है', रतलाम में गरबा पंडालों के बाहर लगे बैनर रतलाम में नवरात्रि पर्व की शुरुआत के साथ ही रतलाम के कालिका माता परिसर में बने गरबा पंडालों पर बैनर चर्चा का विषय बन गया है. बैनर में साफ लिखा गया है- 'गैर-हिन्दुओं का गरबा प्रांगण में आना सख्त मना है'. गरबा पंडालों के आयोजकों का कहना है कि पंडाल में प्रवेश केवल पास और आईडी चेक करने के बाद ही मिलेगा. साथ ही, तिलक लगाने के बाद ही एंट्री दी जाएगी.  प्रदेश भर में नवरात्रि के गरबा पंडालों में गैर-हिन्दुओं की 'नो एंट्री' के पोस्टर बैनर लगाए गए हैं. आयोजकों का कहना है कि सामाजिक तत्वों से बचाव के लिए गरबा समितियों ने यह फैसला लिया है, बालिकाओं के लिए सुरक्षा के मद्देनजर देखा जा रहा है.  दूसरी ओर, गरबा पंडालों में आए लोगों ने भी इस पहल की सराहना की है. उनका कहना है कि दूसरे धर्म के लोगों की एंट्री बैन करना महिला और बच्चियों के हित में अच्छी पहल है.  काजी ने तमाम घर के बड़ों-बुजुर्गों से गुजारिश की है कि अपने बच्चों को गरबा आयोजनों में जाने से रोकें, क्योंकि यह दीनी लिहाज से भी कतई दुरुस्त नहीं है. उधर, रतलाम के गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है. पंडालों पर लगे बैनर पर लिखा है, "गरबा प्रांगण में गैर हिंदू का आना सख्त मना है. मूर्ति पूजा को न मानने वाले मूर्तिपूजा से दूर रहे." मध्य प्रदेश के भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने गैर-हिंदुओं के नवरात्रि उत्सव और गरबा नृत्य कार्यक्रमों में भाग लेने का स्वागत किया है, बशर्ते वे फिर से सनातन धर्म अपनाएं और माथे पर तिलक लगाने व आरती करने जैसे नियमों का पालन करें.  भोपाल की हुजूर सीट से विधायक शर्मा ने कहा कि अगर कुछ लोगों को लगता है कि उनके माता-पिता ने हिंदू धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाकर गलती की है और वे फिर से हिंदू बनना चाहते हैं, तो वे अब ऐसा कर सकते हैं, क्योंकि सभी का DNA हिंदू है.  पता हो कि देवी दुर्गा और उनके रूपों की पूजा को समर्पित नवरात्रि उत्सव 22 सितंबर से शुरू हुआ है. इस उत्सव के दौरान गुजरात का एक नृत्य गरबा खेला जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागी शामिल होते हैं.

ई-केवायसी में खुली पोल: मृतकों के नाम पर हुआ करोड़ों का राशन घोटाला, 1570 फर्जी लाभार्थी हटाए गए

खंडवा  जो इस दुनिया में नहीं रहे परिजन उनके नाम से भी तीन साल में 8.64 करोड़ रुपए का 27 लाख किलो राशन खा गए। विभाग ने जब ई-केवायसी कराई तो हकीकत सामने आई। विभाग ने अब ऐसे नाम गरीबों की राशन सूची से बाहर कर दिए हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जिले में शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित कंट्रोल दुकानों से गरीब परिवारों सहित चयनित कैटेगरी के पात्र हितग्राही परिवार के सदस्यों को पांच किलो मुफ्त राशन का वितरण किया जाता है। योजना का लाभ पात्र हितग्राहियों को ही मिले इसके लिए शासन ने कंट्रोल दुकान, पंचायत सहित अन्य माध्यमों से राशन लेने वाले प्रति परिवार के एक-एक सदस्य की ई-केवायसी कराई। ऐसे लोग भी सामने आए जिनकी आय सालाना 6 लाख रुपए से अधिक है, वे आयकरदाता हैं, शासकीय नौकरी में हैं, अधिकारी व कर्मचारी हैं। विभाग ने ऐसे लोगों को तत्काल नोटिस दिए और राशन की सूची से बाहर कर दिया। 15 हजार मृतक के परिजन ले रहे थे राशन विभाग के अनुसार ई-केवायसी के दौरान 15 हजार सदस्य ऐसे थे जो दो से तीन साल पहले मृत हो चुके हैं, परिजन उनके नाम से अब तक राशन ले रहे थे। जबकि 110 उपभोक्ता ऐसे थे जिनकी आयु 18 साल से कम थी, इनमें 25 नहीं मिले, इन्हें भी राशन की सूची से बाहर किया गया। 35 नाबालिग ऐसे थे, जिन्हें राशन नहीं मिल रहा था। विभाग ने उनके नाम परिवार के साथ जोड़े। 50 हजार सदस्य कम हुए ई-केवायसी में जिले की 487 राशन दुकानों से 50 हजार उपभोक्ता कम हुए हैं। खाद्य विभाग के अनुसार जिले में ई-केवायसी से पहले गरीबों का राशन लेने वाले सदस्यों की संख्या 10 लाख 33 हजार थी। जबकि अब इनकी संख्या घटकर 9.88 लाख हो गई है। ^जिले में 10 लाख 33 हजार उपभोक्ताओं की ई-केवायसी का काम पूरा हो गया है। इनमें 1570 परिवार ऐसे थे जो आयकरदाता होकर राशन की पात्रता नहीं रखते थे, उन्हें नोटिस देकर राशन की सूची से बाहर किया गया है। -अरुण तिवारी, जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी 

आगर मालवा: 2 ड्रग तस्कर पकड़े गए, 14 लाख रुपये की मादक पदार्थ जब्त

आगर मालवा  मध्य प्रदेश के आगर मालवा में एक ड्रग तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया और  14 लाख रुपये मूल्य की ड्रग जब्त की है.  साथ ही मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है. फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और तस्करी के नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास कर रही है.  एक एजेंसी के मुताबिक मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में पुलिस ने 14 लाख रुपये मूल्य की एमडी ड्रग जब्त की है और इस सिलसिले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सिंह ने मंगलवार को बताया कि बड़ौद नगर पालिका के सामने एक पुलिया के पास एक व्यक्ति अवैध ड्रग्स के साथ खड़ा था. दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है पुलिस व्यक्ति पर शक होने के बाद मौके पर पहुंचे सुरक्षाकर्मियों की एक टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया. सुनील शर्मा नाम के व्यक्ति से पूछताछ के बाद पुलिस ने संजय सूर्यवंशी नाम के एक अन्य व्यक्ति को भी गिरफ्तार कर लिया. अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने उनके पास से 140 ग्राम एमडी (मेफेड्रोन) बरामद किया, जिसकी अनुमानित कीमत 14 लाख रुपये से अधिक है. दोनों आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है. मामले में दोनों से पूछताछ की जा रही है, ताकि ताकी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का भी पता लगाया जा सके. 

अवैध कॉलोनियों को लेकर महापौरों की चेतावनी: सख्त कानून नहीं बना तो बढ़ेगी परेशानी

भोपाल   देर रात तक पहली बार मंत्रालय में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे और आयुक्त संकेत भौंडवे की मौजूदगी में बैठक हुई।इंदौर की सड़कों पर हो रहे गड्ढों को लेकर बड़ी चर्चा है। इंदौर के अलावा प्रदेश के अन्य शहरों में भी यह मुद्दा गरमाया हुआ है। इसे लेकर भोपाल में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्रदेश के नगरीय निकाय मेयरों के साथ बैठक की। तय हुआ कि बारिश के बाद जो पेंचवर्क सड़कों पर किए जाते हैै। उनकी गुणवत्ता की भी जांच की जाना चाहिए। इसकी जांच एक राज्य स्तरीय दल करेगा। जिसका गठन भी हो चुका है। इस बैठक में इंदौर के मेयर पुष्य मित्र भार्गव भी शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि चुंगी का पैसा समय पर और पूरा मिले। इससे नगर निगम के संचालन में मदद मिलेगी और विकास कार्य तेजी से होंगे। बैठक में मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली को और पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। नगरीय निकायों को आधुनिक तकनीकों और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से जनता को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करानी होंगी। बैठक में तय हुआ कि प्रदेश के सभी नगर निगमों द्वारा एनर्जी ऑडिट कराया जाएगा।प्रत्येक सप्ताह महापौर-परिषद (एमआईसी) की बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित होगी। शहर की सड़कों की रिस्टोरेशन की गुणवत्ता की सघन जांच होगी, जिसके लिए राज्यस्तरीय दल निरीक्षण करेगा।बिल्डिंग परमिशन से संबंधित डेटा फॉर्मेट को सरल बनाकर सीधे निर्देश जारी होंगे। इसके अलावा  प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नवीन तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।डीजल बचत के लिए डिजिटलाइजेशन और कर्मचारियों के लिए फेस अटेंडेंस सिस्टम लागू किया जाएगा।नगरीय निकायों का खर्च कम करने और आकलन की नई व्यवस्था तकनीक के माध्यम से विकसित की जाएगी। निकाय स्तर पर रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएगी। बैठक में राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी एसीएस संजय दुबे और विभागीय अधिकारी भी उपस्थित रहे। अवैध कॉलोनियों पर सख्ती से कार्रवाई हो बैठक में जबलपुर महापौर जगत बहादुर सिंह ने कहा, अवैध कॉलोनियां जिस तरह से बढ़ रहीं हैं वो हम सबके लिए चिंता का विषय है। यदि समय रहते अवैध कालोनियों को रोकने के लिए सख्त कानून बनाकर कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में ये बहुत बड़ी मुसीबत बन जाएगी। जबलपुर मेयर यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा, अवैध कॉलोनियों पर जिस तरह की सख्त कार्रवाई होनी चाहिए वैसा एक्शन नहीं होता। ये सुनकर दूसरे महापौरों ने भी कहा इस मुद्दे पर वास्तव में कड़े फैसले लेने की जरूरत है। गरीब लोग सस्ते रेट के लालच में प्लॉट या मकान खरीद लेते हैं। कॉलोनी काटने वाला वहां कोई सुविधाएं विकसित नहीं करता। बाद में निगम और सरकार से मूलभूत सुविधाएं देने की मांग होने लगती है। और ये अवैध कॉलोनियां काटने की परंपरा बढ़ती चली जाती है। महापौर बोले- आयुक्त सुनते नहीं बैठक में सिंगरौली महापौर रानी अग्रवाल ने कहा कि जनता की समस्याएं हमारे पास आतीं हैं। कई बार ऐसा होता है कि निगम आयुक्त हमारी सुनते नहीं, ऐसे में काम कैसे हों। रानी की बात में दूसरे महापौरों ने भी हामी भरी। फिर मंत्री विजयवर्गीय ने कहा- ऐसी व्यवस्था बनाएंगे कि 10 दिन में महापौर और निगम आयुक्त नियमित रूप से बैठकर निगम से जुडे़ विषयों पर चर्चा करें और समस्याओं का त्वरित समाधान हो। छिंदवाड़ा मेयर बोले- राजस्व की भूमि निगम के अधिपत्य में हो बैठक में छिंदवाड़ा मेयर विक्रम अहके ने कहा, नगर निगम क्षेत्र में राजस्व की कई ऐसी जमीनें हैं। जो निगम जनोपयोगी कामों उपयोग कर सकता है। लेकिन वे जमीनें नजूल के नाम पर दर्ज होने की वजह से निगम को शासन की परमिशन लेनी पड़ती है। राजस्व की ऐसी जमीनों का अधिपत्य नगर निगम के पास होना चाहिए। रतलाम महापौर ने कहा- अमृत परियोजना के फेज 1 में कराए गए कामों में कई गड़बडियों की शिकायतें लगातार आ रहीं हैं। अमृत 1 में कराए गए कामों की बारीकी से जांच करानी चाहिए। कॉमर्शियल बिल्डिंग से आश्रय शुल्क लेना बंद हो जबलपुर मेयर ने कहा रेजिडेंशियल बिल्डिंग में तो बिल्डर ईडब्यूल्एस के मकान बनाकर देता है। उससे आश्रय शुल्क लेना ठीक भी है लेकिन, कॉमर्शियल बिल्डिंग में जो 7% आश्रय शुल्क लिया जाता है वहां ये ठीक नहीं हैं। इस शुल्क को खत्म किया जाना चाहिए। खत्म न हो सके तो कुछ कम होना चाहिए। कर्मचारियों की भर्ती के अधिकार मिलें एक महापौर ने कहा कि नगर निगम में कर्मचारियों की भर्तियों के अधिकार महापौर को मिलने चाहिए। बैठक में ये निर्णय लिए गए     चुंगी का पैसा समय पर और पूरी तरह से मिले।     प्रदेश के सभी नगर निगमों द्वारा एनर्जी ऑडिट कराया जाएगा।     प्रत्येक हर हफ्ते महापौर-परिषद (एमआईसी) की बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित होगी।     शहर की सड़कों की रेस्टोरेशन की गुणवत्ता की बारीकी से जांच होगी, जिसके लिए राज्यस्तरीय दल निरीक्षण करेगा।     बिल्डिंग परमिशन से संबंधित डेटा फॉर्मेट को सरल बनाकर सीधे निर्देश जारी होंगे।     लीज से जुड़े लंबित प्रकरणों को सूचीबद्ध कर शीघ्र निराकरण किया जाएगा।     प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नवीन तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।     डीजल बचत के लिए डिजिटलाइजेशन और कर्मचारियों के लिए फेस अटेंडेंस सिस्टम लागू किया जाएगा।     नगरीय निकायों का खर्च कम करने और आकलन की नई व्यवस्था तकनीक के माध्यम से विकसित की जाएगी।     निकाय स्तर पर रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।

जल समृद्धि रणनीति पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मंत्री पाटिल के बीच अहम बैठक

जल समृद्धि रणनीति पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मंत्री पाटिल के बीच अहम बैठक मुख्यमंत्री और जल शक्ति मंत्री की मुलाकात: जल समृद्धि को लेकर बनी रणनीति गुजरात के मुख्यमंत्री  पटेल भी हुए बैठक में शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली प्रवास के दौरान राज्य हित के विषयों पर उच्च स्तरीय बैठक में मंत्रणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल एवं गुजरात के मुख्यमंत्री  भूपेन्द्र पटेल के साथ बैठक में सहभागिता कर विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। जलशक्ति मंत्री ने मध्यप्रदेश के कार्यों को सराहा केंद्रीय मंत्री  पाटिल ने मध्यप्रदेश द्वारा केंद्रीय योजनाओं का लाभ लेने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में मध्यप्रदेश ने अच्छा काम किया है। प्रदेश में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था और हर घर जल पहुंचाने का भी प्रशंसनीय कार्य हुआ है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा जल समृद्धि बढ़ाने के मध्यप्रदेश के प्रयासों को पूरा सहयोग देने की बात की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की नई रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की और केंद्र सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। बैठक में जनहित के महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा की गई। इस अवसर पर संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

स्वस्थ नारी अभियान में निजी और सामाजिक संगठनों की भागीदारी पर जोर : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

स्वस्थ नारी अभियान में निजी और सामाजिक संगठनों की भागीदारी पर जोर : उप मुख्यमंत्री शुक्ल सशक्त परिवार के लिए जरूरी है निजी व सामाजिक सहभागिता : उप मुख्यमंत्री उप मुख्यमंत्री शुक्ल का आह्वान – ‘स्वस्थ नारी’ अभियान में सभी की हो सक्रिय भूमिका स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विषयों की वृहद समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान सहित लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान’ की प्रगति की समीक्षा की और मिशन मोड में संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह अभियान महिला स्वास्थ्य सशक्तिकरण और सुदृढ़ पारिवारिक संरचना के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसमें निजी संस्थानों और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए जिससे इसकी पहुँच और प्रभावशीलता बढ़े। बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  तरुण राठी, संचालक  नीरज कुमार सिंह तथा एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने एएनएम और नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की और अधिकारियों को इन प्रक्रियाओं को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की मज़बूती के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराना अनिवार्य है। तकनीकी पदों एवं फ़ार्मासिस्ट-टेक्नीशियन भर्ती प्रक्रिया को भी तेजी से आगे बढ़ाया जाए। चिकित्सा शिक्षा अधोसंरचना से जुड़े कार्यों की समीक्षा की और समयबद्ध रूप से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्योपुर और सिंगरौली मेडिकल कॉलेज के विस्तार के पुनरीक्षित प्रस्ताव शीघ्र तैयार किए जाएँ। उन्होंने सुपरस्पेशलिटी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने बांड डॉक्टर्स को एनओसी ऑनलाइन जारी करने की व्यवस्था पर चर्चा की और निर्देश दिए कि यह प्रणाली शीघ्र पूर्ण की जाए जिससे डॉक्टर्स को पारदर्शी और त्वरित सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि 30 सितम्बर को पोर्टल की समीक्षा की जायेगी। उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उन्नयित चिकित्सा संस्थानों में पदों की स्वीकृति के लिए आवश्यक औपचारिकताओं की पूर्ति शीघ्र की जाए। ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान’ में 10 लाख से अधिक स्क्रीनिंग एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि 17 से 22 सितम्बर 2025 के बीच ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान’ में 10 लाख से अधिक स्क्रीनिंग की जा चुकी हैं। प्रदेश स्तर पर इस अवधि में 66,201 महिलाओं एवं किशोरियों की एचबी जाँच, 33,753 एएनसी जाँच, 1,29,918 सिकल-सेल स्क्रीनिंग, 1,15,636 एमसीपी कार्ड वितरण और 1,29,687 एनसीडी स्क्रीनिंग की गई है। महिला एवं किशोरी हीमोग्लोबिन (Hb) जाँच में बालाघाट (4138), खरगोन (3106) और मंदसौर (2932) शीर्ष पर रहे। गर्भवती महिलाओं की एएनसी जाँच में सीधी (3437), जबलपुर (2835) और मंदसौर (2645) ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सिकल-सेल स्क्रीनिंग में इंदौर (5283), धार (4807) और सागर (4533) अग्रणी रहे। एमसीपी कार्ड वितरण की श्रेणी में बालाघाट (12706), बैतूल (9777) और सिवनी (8871) शीर्ष रहे, वहीं एनसीडी स्क्रीनिंग में भोपाल (12448), इंदौर (11372) और ग्वालियर (9787) ने सर्वश्रेष्ठ प्रगति दर्ज की है।