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प्रधानमंत्री मोदी 17 सितंबर को MP में देंगे बड़ी रोजगार सौगात

भोपाल धार जिले के बदनावर क्षेत्र स्थित भैंसोला गांव में स्थापित हो रहे देश के पहले पीएम मित्रा पार्क में अपनी इकाइयां लगाने के लिए टेक्सटाइल क्षेत्र की कंपनियां उत्साहित हैं। वर्धमान, ट्रांइडेट सहित 91 कंपनियों को 1,294 एकड़ भूमि आवंटित भी कर दी गई है। ये कंपनियां 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक निवेश करेंगी, जिससे 72 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। पार्क में निवेश करने के लिए 114 कंपनियों के प्रस्ताव अभी तक प्राप्त हुए हैं। लाखों परिवारों के जीवन में आने वाला है ठोस बदलाव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश की बड़ी टेक्सटाइल कंपनियां पीएम मित्रा पार्क में अपनी इकाइयां लगाना चाहती हैं। सरकार निवेशकों को हर तरह की सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है। पार्क के पूर्ण विकसित होने पर रोजगार का आंकड़ा तीन लाख तक पहुंचने का अनुमान है। यह केवल संख्या नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन में आने वाला ठोस बदलाव है।   अभी तक 23 हजार करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव कंपनियां दे चुकी हैं। इन प्राप्त निवेशों से यार्न, फैब्रिक और गारमेंट उत्पादन की संपूर्ण वैल्यू चेन यहीं विकसित होगी, जिससे प्रदेश का टेक्सटाइल उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेगा। यहां कुल 2158 एकड़ भूमि है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 17 सितंबर को भूमिपूजन करने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। किसान मेले किए जाएंगे आयोजित मुख्यमंत्री ने कृषि और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को बैठक में निर्देश दिए कि कृषि आधारित उद्योगों के प्रचार-प्रसार के लिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग बहुउद्देशीय कृषि मेले आयोजित करें। इनमें किसानों को उनकी फसल सहित अन्य सहायक उत्पादों के विक्रय एवं मार्केटिंग की जानकारियां भी जाएं। पीएम मित्रा पार्क से प्रदेश के कपास और रेशम उत्पादक किसानों की जीवन रेखा बदल जाएगी। छह लाख से अधिक कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा। कपास की खपत स्थानीय स्तर पर ही हो जाएगी। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा और कच्चे माल की सप्लाई की एक पूरी चैन तैयार होगी। 

हंगामा के बाद ग्वालियर की सड़कें बनीं प्राथमिकता, पेच रिपेयरिंग और निगरानी तेज

ग्वालियर ग्वालियर की सड़कों से लेकर जलजमाव को लेकर भोपाल तक बदहाली की रिपोर्ट पहुंचने के बाद अब सड़कों की पेच रिपेयरिंग का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। शनिवार को कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त की ओर से मॉनीटरिंग शुरू की गई और अधिकारियेां को जिम्मे बांट दिए गए। ग्वालियर की बदहाली को लेकर हाल में ऊर्जा मंत्री और प्रभारी मंत्री ने सीएम के सामने स्थिति रखी थी और कहा था कि ग्वालियर में हालात ठीक नहीं है। इसके बाद भी मैदानी स्तर पर काम नहीं दिख रहा था लेकिन शनिवार से सरकारी अमला सक्रिय होकर काम करने लगा। निगम आयुक्त ने अब प्रतिदिन की रिपोर्ट मांगी वहीं कलेक्टर और निगम आयुक्त ने अब प्रतिदिन की रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि नईदुनिया ने शनिवार के अंक में यह प्रमुखता से प्रकाशित किया था कि ऊर्जा मंत्री और प्रभारी मंत्री द्वारा ग्वालियर की बदहाली भोपाल तक पहुंचाने के बाद हलचल मच गई। इसके बाद भी ग्वालियर शहर में सुधार कार्य नहीं दिख रहे हैं। यह मामला सामने आने के बाद शनिवार से नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियाें सबसे पहले सड़कों के गड्ढों को दुरूस्त करने का काम शुरू किया है। कलेक्टर रुचिका चौहान एवं नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय द्वारा मॉनीटरिंग की जा रही है।   कार्यों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग करें नगर निगम एवं अन्य विभागों द्वारा सड़क बनाने के लिए डामर के सभी हॉट प्लांट प्रारंभ कर दिए गए हैं तथा शहर की सभी सड़कों को दुरुस्त करने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। कलेक्टर रुचिका चौहान द्वारा नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय एवं जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि नगर निगम, पीडब्लूडी एवं स्मार्ट सिटी सहित अन्य संबंधित विभागों द्वारा सड़कों की मरम्मत के लिए किया जा रहे कार्यों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग करें तथा प्रतिदिन की रिपोर्ट दें। सड़क रिपेयरिंग कार्य का निरीक्षण इसके साथ ही नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने विधानसभा बार अपर आयुक्तओं को निर्देश दिए गए हैं कि वह प्रतिदिन अपने-अपने क्षेत्र में सड़क रिपेयरिंग कार्य का निरीक्षण करें तथा फोटो ग्रुप पर साझा करें। इसके साथी सभी क्षेत्र के सहायक यंत्री एवं क्षेत्राधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में सड़क रिपेयरिंग का कार्य गुणवत्ता पूर्वक तेजी से कराए।  

मध्य प्रदेश: फर्जी दुष्कर्म आरोप साबित, हाई कोर्ट ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए

जबलपुर हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता के विरुद्ध दो वर्ष की मासूम के साथ दुष्कर्म की एफआईआर को झूठा पाया। कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता महिला पहले भी ब्लैकमेल की नीयत से इस तरह की कई झूठी रिपोर्ट दूसरों के विरुद्ध दर्ज करा चुकी है। कोर्ट ने अधिवक्ता के विरुद्ध दर्ज एफआईआर निरस्त कर दी। साथ ही रीवा एसपी को निर्देश दिए कि फर्जी शिकायत करने वाली महिला के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट की धारा 22(1) व बीएनएस की धाराओं 240 व 248 के तहत कार्रवाई की जाए। क्या है पूरा मामला? दरअसल, रीवा निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश उपाध्याय की ओर से यह याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया कि रीवा निवासी महिला उनके ऑफिस में 15 मई, 2024 को एक आपराधिक मुकदमा दायर करने के लिए आई। मुकदमा तैयार करते समय याचिका कर्ता को रिकॉर्ड के अवलोकन से पता चला कि महिला ने पहले भी कई व्यक्तियों के विरुद्ध शिकायतें की थीं। वह झूठी शिकायत दर्ज करा कर लोगों को ब्लैकमेल करने की आदी थी।   महिला ने झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई यह देखते हुए उन्होंने उसके केस की पैरवी करने से इनकार कर दिया। इस पर महिला ने 30 नवंबर, 2024 को कि याचिका कर्ता के विरुद्ध लज्जा भंग करने की झूठी एफआईआर दर्ज कर दी। 27 दिसंबर, 2024 को महिला ने दूसरी एफआईआर दर्ज कराई । जिसमें कहा गया कि 20 दिसंबर, 2024 को हाई कोर्ट के कोर्ट रूम नंबर-15 के सामने याचिका कर्ता ने उसकी दो वर्ष की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। दोनों मामलों की जांच के बाद पुलिस ने झूठा पाया। इसके बाद 11 जून, 2025 को सिविल लाइन थाना रीवा में महिला ने एक और झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई। झूठी एफआईआर दर्ज करने की आदी है महिला इस बार उसने आरोप लगाया कि उसके पति की अनुपस्थिति में याचिका कर्ता ने रात को उसके घर में घुसकर दो साल की बच्ची से दुष्कर्म किया। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता महिला लोगों को ब्लैकमेल करने के लिए इस तरह की झूठी एफआईआर दर्ज करने की आदी है। कोर्ट ने रिकॉर्ड के अवलोकन से पाया कि महिला पहले भी अपनी बच्चियों व स्वयं के नाम से इस तरह की कई फर्जी एफआईआर दर्ज करा चुकी है। इस मत के साथ कोर्ट ने याचिका कर्ता के विरुद्ध दर्ज की गई एफआईआर निरस्त कर दी। कोर्ट ने कहा कि भविष्य में शिकायतकर्ता महिला अगर ऐसी कोई शिकायत करती है, तो कोई कठोर कार्रवाई करने से पहले प्रारंभिक जांच कर संतुष्टि कर ली जाए।

गरबा के दौरान अनुशासन बनाये रखने के लिए जबलपुर पुलिस ने जारी की नई गाइडलाइन

जबलपुर नवरात्र व दशहरा पर्व पर सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के उद्देश्य से पुलिस कंट्रोल रूम में बैठक आयोजित की गई। जिलेभर से आए अधिकारियों को पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि धार्मिक पर्वों के दौरान सुरक्षा व शांति व्यवस्था में किसी तरह की ढिलाई न होने पाए। गरबा आयोजकों की बैठक लेकर स्पष्ट कर दें कि खुले स्थान में आयोजन न करें। पर्वों के दौरान कुछ विघ्न संतोषी तत्व सक्रिय हो जाते हैं। जो अशांति व आपराधिक घटनाओं का कारण बन सकते हैं। लिहाजा ऐसे तत्वों को अभी से चिह्नित करते हुए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। विशेष सतर्कता बरतने के दिए निर्देश पुलिस अधीक्षक ने आगे कहा कि आने वाले दिन कानून व्यवस्था की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं। संस्कार धानी में दुर्गा उत्सव पर्व बड़े ही धूमधाम एवं वृहत स्तर पर मनाया जाता है, जिसकी ख्याति पूरे प्रदेश में है। सप्तमी, अष्टमी एवं नवमी को शाम से ही श्रद्धालु शहर में जगह-जगह सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित दुर्गा जी की प्रतिमाओं के दर्शन हेतु निकलते हैं, जिसको लेकर विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बैठक में मिले निर्देशों से सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र की दुर्गा उत्सव समितियों आदि को समय रहते अवगत करा दें।   बैठक में एसपी के निर्देश पारंपरिक स्थान पर ही स्थापित हों मां दुर्गा की प्रतिमा। पंडाल इस प्रकार बनाए जाएं कि आवागमन अवरुद्ध न हो। पंडालों में आग बुझाने के प्रर्याप्त इंतजाम हों। चारों तरफ कनात भी लगाएं। पंडाल अथवा जुलूस मार्ग पर डीजे प्रतिबंधित रहेगा। पंडाल की दानपेटी की जिम्मेदार समिति के अध्यक्ष व कोषाध्यक्ष की रहेगी। जहां पूर्व में विवाद हुए, वहां विशेष नजर रखी जाए। विद्युत साजसज्जा में कटे तारों का उपयोग न किया जाए। पंडालों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाना समितियां सुनिश्चित करें। विसर्जन स्थलों पर होमगार्ड व स्थानीय गोताखोर तैनात किए जाएं। मंदिरों की सुरक्षा के लिए नियमित पेट्रोलिंग की जाए। रास्तों पर प्रकाश व्यवस्था बेहतर हो। पुलिस वाहनों में बलवा ड्रिल सामाग्री, टियर गैस, टार्च, वीडियो कैमरा, आवश्यक रूप से रखें। बैठक में ये रहे मौजूद बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर आयुष गुप्ता (आइपीएस), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जोन-2 पल्लवी शुक्ला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सूर्यकांत शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) अंजना तिवारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अपराध जितेन्द्र सिंह, सहित समस्त राजपत्रित अधिकारी, थाना प्रभारी तथा चौकी प्रभारी उपस्थित रहे।

कपास और रेशम उत्पादक किसानों की तकदीर बदल देगा पीएम मित्रा पार्क

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषि आधारित उद्योगों के प्रचार-प्रसार के लिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग द्वारा आपसी तालमेल से बहुउद्देशीय कृषि मेले आयोजित किए जाएं। इन मेलों में किसानों को उनकी फसल सहित अन्य सहायक उत्पादों के लाभयुक्त विक्रय एवं मार्केटिंग की जानकारियां भी दी जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार जिले के भैंसोला गांव में निर्मित हो रहे पीएम मित्रा पार्क से प्रदेश के कपास और रेशम उत्पादक किसानों की जीवन रेखा बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि पीएम मित्रा पार्क से प्रदेश के 6 लाख से अधिक कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलने के साथ 1 लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं 2 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि पीएम मित्रा पार्क में निवेश करने के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियों ने रुचि व्यक्त की है। जिस तेजी से पीएम मित्रा पार्क में निवेश के लिए कंपनियां आ रही हैं, यह हमें और बेहतर करने के लिए उत्साहित करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार की देर रात मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग की गतिविधियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीएम मित्रा पार्क बनने से मालवा क्षेत्र के किसानों द्वारा उत्पादित कपास की खपत लोकल लेवल पर ही हो जाएगी। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा और रॉ-मैटेरियल सप्लाई की एक पूरी चैन तैयार होगी। पीएम मित्रा पार्क प्रदेश के किसानों के लिए वरदान की तरह है। प्रदेश में निवेश करने के इच्छुक सभी निवेशकों का सरकार पलक पावड़े बिछाकर स्वागत करेगी। हम निवेशकों को सभी जरूरी मदद और सहयोग भी उपलब्ध कराऐंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सार्वजनिक/लोक उपक्रमों में निजी भागीदारी से ही देश का विकास संभव है। पीएम मित्रा पार्क में निवेशकों द्वारा किए जाने वाले पूंजी निवेश से जितनी उच्च कोटि के परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं, हर संभव प्रयास कर हम यह करके दिखाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीएम मित्रा पार्क का प्रचार-प्रसार इस तरह किया जाए कि प्रदेश में मौजूद सभी प्रकार के कृषि आधारित उद्योग को भी भरपूर प्रोत्साहन मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में कुल 7 पीएम मित्रा पार्क मंजूर किए गए हैं। जहां दूसरे राज्य पीएम मित्रा पार्क की स्थापना के लिए प्राथमिक तैयारियां ही कर रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से हमारी सरकार 17 सितंबर को धार जिले के भैंसोला गांव में देश के पहले और सबसे बड़े पीएम मित्रा पार्क का भूमिपूजन कराने जा रही है। उन्होंने कहा कि हम इसे देश का मॉडल पीएम मित्रा पार्क बनायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीएम मित्रा पार्क प्रदेश की कॉटन इंडस्ट्री को पुनर्स्थापित करेगा। यहां कपास से धागा, धागे से कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स, होजियरी आइटम्स सहित ऑल वेदर वियरिंग्स तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीएम मित्रा पार्क की स्थापना के बारे में प्रदेश के किसानों को हर तरीके से जानकारी दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि देश के सबसे बड़े इंडस्ट्रियल पार्क (पीएम मित्रा पार्क) में भूमिपूजन होने से पहले ही लैंड एलॉटमेंट की कार्रवाई पूरी कर ली गई है। पीएम मित्रा पार्क में भूमि आवंटन के लिए 114 कंपनियों के आवेदन मिले थे। इन कंपनियों ने पीएम मित्रा पार्क में निवेश करने की प्रबल रुचि व्यक्त कर लैंड अलॉटमेंट के लिए के लिए आवेदन किया है। आवेदन करने वाली कंपनियों में से 91 कंपनियों के आवेदन मंजूर कर इन्हें लैंड एलॉटमेंट कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पीएम मित्रा पार्क में लैंड अलॉटमेंट कमेटी द्वारा विभिन्न कंपनियों और निर्माण इकाइयों को कुल 1294.19 एकड़ भूमि आवंटित करने की अनुशंसा कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मित्रा पार्क में अधोसंरचना विकास के लिए सभी जरूरी निर्माण कार्य जारी हैं। इन निर्माण कार्यों के साथ लैंड अलॉटमेंट पाने वाली कंपनियों द्वारा अपने कारखाने और निर्माण इकाइयां भी समानांतर रूप से निर्मित की जाएंगी। इससे आने वाले एक से डेढ़ साल के दौरान ही निवेशक कंपनियों की निर्माण इकाइयों में उत्पादन भी प्रारंभ हो जाएगा। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव वन, पर्यावरण श्री अशोक वर्णवाल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय एवं ऊर्जा श्री नीरज मंडलोई, सचिव किसान कल्याण एवं कृषि विकास श्री निशांत बरवड़े, आयुक्त जनसंपर्क श्री दीपक कुमार सक्सेना सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।  

सिंहस्थ 2028 में हर दिन लाखों श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे बाबा महाकाल के द्वार

भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने 2028 सिंहस्थ महाकुंभ के लिए तैयारियों को गति देते हुए उज्जैन और खंडवा जिलों का सुरक्षा ऑडिट करवाया है। इसमें सामने आया है कि उस दौरान उज्जैन में प्रतिदिन एक लाख श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल का दर्शन कराया जा सकेगा। इससे अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने पर प्रशासन उनके ठहरने की व्यवस्था करेगा और अगले दिन दर्शन कराया जाएगा। सुरक्षा ऑडिट के माध्यम से दोनों जिलों की स्थानीय पुलिस ने यह पता लगाया कि भीड़ की दृष्टि से कौन-कौन से स्थान संवेदनशील हैं? सुरक्षा के कहां क्या प्रबंध किए जाने हैं? सीसीटीवी कैमरे कहां लगाए जाएंगे? इनका डिस्प्ले किस-किस जगह पर होगा? इसी रिपोर्ट के आधार पर अब विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। 60 हजार पुलिसकर्मी होंगे तैनात पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि उज्जैन और खंडवा जिलों की आडिट रिपोर्ट मुख्यालय को मिल गई है। इसमें पिछले सिंहस्थ में किए गए प्रबंध और इस सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की संभावित संख्या को देखते हुए प्रबंध के उपाय सुझाए गए हैं। शाही स्नान के दिनों में सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में अलग से ऑडिट कर जरूरतों के बारे में बताया गया है। सभी जगह मिलाकर लगभग 60 हजार पुलिसकर्मियों को पदस्थ किया जाएगा। दूसरे राज्यों के पुलिस बल की भी मदद ली जा सकती है। सेटेलाइट रेलवे स्टेशन और बस स्टैंडों के आसपास पार्किंग की व्यवस्था और जरूरी सुरक्षा प्रबंध का भी आकलन किया गया है। उज्जैन आएंगे, तो ओंकारेश्वर में भी करेंगे दर्शन उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं में 15 से 20 प्रतिशत के खंडवा जिले के ओंकारेश्वर दर्शन के लिए पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए ओंकारेश्वर का भी ऑडिट कराया गया है। इसमें श्रद्धालुओं की संभावित संख्या, आने-जाने के रास्ते, प्रतिदिन दर्शन की क्षमता, नर्मदा में स्नान के लिए घाटों की उपलब्धता और क्षमता, पार्किंग व्यवस्था, खंडवा में श्रद्धालुओं को ठहराने की सुविधा और सभी जगह के लिए सुरक्षा प्रबंध की रूपरेखा बताई गई है। सिंहस्थ से जुड़े सभी कार्य समय सीमा में पूरा करें : मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार रात अपने आवास स्थित समत्व भवन में उज्जैन में वर्ष 2028 में होने जा रहे सिंहस्थ की तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने घाटों के विस्तार,सड़क निर्माण, शिप्रा को निर्मल बनाने के लिए किए जा रहे कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए कहा है। उन्होंने निर्माण कार्यों के अतिरिक्त अन्य तैयारियां जैसे सुरक्षा, शाही स्नान के दिन की जाने वाली व्यवस्थाओं की अद्यतन जानकारी अधिकारियों से ली। बैठक में उज्जैन के जनप्रतिनिधि वर्चुअली शामिल हुए। उन्होंने भी आयोजन के संबंध में कई सुझाव दिए और सिंहस्थ से जुड़े पुराने अनुभव साझा किए।

एमपी ट्रांसको के 412 सब स्टेस्शन में कैपेसिटर बैंक क्रियाशील : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि विद्युत उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) अपने अधिकांश एक्स्ट्रा हाईटेंशन सबस्टेशनों में कैपेसिटर बैंकों की स्थापना कर चुकी है। कंपनी के 417 सबस्टेशन में से 412 सबस्टेशन में विभिन्न क्षमताओं के कैपेसिटर बैंक क्रियाशील हैं। इसके अतिरिक्त पुराने सबस्टेशनों में भी आवश्यकता अनुसार नए कैपेसिटर बैंकों की स्थापना के साथ मौजूदा क्षमता में वृद्धि की जा रही है। उन्होंने एमपी ट्रांसको के इस अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज की गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। 9278.5 एम.व्ही.ए.आर.की स्थापित क्षमता वर्तमान में राज्य में स्थित एम.पी. ट्रांसको के 220 के.व्ही. सबस्टेशनों पर 145 के.व्ही. स्तर के 32 कैपेसिटर बैंक एवं 132 के.व्ही. सबस्टेशनों पर 36 के.व्ही. स्तर के 719 कैपेसिटर बैंक क्रियाशील हैं। कुल मिलाकर प्रदेश में एम.पी. ट्रांसको 751 कैपेसिटर बैंकों तथा 9278.5 एम.व्ही.ए.आर. की संयुक्त स्थापित क्षमता के साथ उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज पर उच्च गुणवत्ता की विद्युत आपूर्ति उपलब्ध करा रही है। 52 पुराने कैपेसिटर बैंकों की क्षमता वृद्धि ट्रांसमिशन कंपनी ने प्रदेश में 52 ऐसे पुराने कैपेसिटर बैंकों की पहचान की है, जिनकी समयावधि आयु पूर्ण हो चुकी है और वे अब अपेक्षित कैपेसिटिव लोड प्रदान करने में सक्षम नहीं हैं। इन सबस्टेशनों में अधिक एमवीएआर क्षमता के कैपेसिटर बैंकों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इस आवश्यकता की पूर्ति के लिये कंपनी ने अभियान चलाकर इन स्थानों पर कैपेसिटर बैंकों का प्रतिस्थापन एवं क्षमता वृद्धि की जा रही है, ताकि एमपी ट्रांसकों के सभी सबस्टेशनों से गुणवत्तापूर्ण और मानक वोल्टेज में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। कैपेसिटर बैंक से मिलता है लाभ एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों से विद्युत आपूर्ति के दौरान पॉवर ट्रांसफार्मर्स पर प्रायः इंडक्टिव लोड (सिंचाई मोटरें एवं घरेलू उपकरण) होता है, जिससे वोल्टेज में कमी आती है और विद्युत गुणवत्ता प्रभावित होती है। इस समस्या के समाधान के लिये कैपेसिटर बैंक लगाए जाते हैं, जो अपने कैपेसिटिव लोड के माध्यम से उस इंडक्टिव प्रभाव को संतुलित कर देते हैं। इसके परिणामस्वरूप पॉवर फैक्टर में सुधार होता है और उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज पर विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति होती है।  

प्रदेश में कचरे के निष्पादन के लिये नगरीय निकायों को किया जा रहा है प्रोत्साहित

भोपाल में बेकार कपड़े को रिसायकल करके उच्च गुणवत्ता का तैयार किया जा रहा है फाइबर पीपीपी मॉडल पर तैयार किया गया है अत्याधुनिक प्लांट भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास विभाग नगरीय निकायों को कचरे के उचित निष्पादन के लिये लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। प्रदेश के अनेक नगरीय निकायों ने इस दिशा में अभिनव पहल भी की है। इसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। भोपाल नगर निगम ने कपड़े के रूप में अपशिष्ट प्रबंधन के लिये पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी मॉडल) टेक्सटाइल रिकवरी फेसिलिटी (टीआरएफ) सेंटर स्थापित किया है। यह पहल वस्त्र अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण (रिसायकल) को बढ़ावा देने दी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नगर निगम भोपाल की इस परियोजना का संपूर्ण खर्च कंपनी द्वारा वहन किया गया है और लगभग 2 करोड़ रूपये की लागत से यह अत्याधुनिक प्लांट तैयार किया गया है। निगम को इसके एवज में प्रति माह 22 हजार रूपये की रायल्टी प्राप्त होगी। यह टीआरएफ यूनिट प्रति घंटा एक टन बेकार कपड़ा अपशिष्ट प्रोसेस करने की क्षमता रखता है। इस यूनिट में एकत्रित पुराने कपड़ों को छटाई और 7-स्टेज डीथ्रेडिंग यूनिट की आधुनिक प्रक्रिया से गुजार कर उच्च गुणवत्ता का कॉटन और फाइबर तैयार किया जा रहा है। इस प्लांट के सॉफ्ट टायज, किक बैग्स, क्रिकेट पैड्स, रंगीन कॉटन, सफेद कॉटन और पॉलीएस्टर फाइबर जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं। इससे न केवल राजधानी भोपाल में केवल कपड़ा अपशिष्ट का पुन: उपयोग संभव हुआ है, बल्कि अनेक लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। पर्यावरण संरक्षण फाइबर सायकल टेक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड की यह पहल पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह परियोजना भोपाल को स्वच्छ और हरित शहर बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। यह यूनिट प्रदेश के अन्य नगरों के लिये भी एक प्रेरक मॉडल बन गयी है। इस इकाई की कुल क्षमता 10 टन प्रति दिन है। भोपाल नगर निगम महापौर श्रीमती मालती राय ने भी इकाई का दौरा कर इसकी कार्यप्रणाली की जानकारी प्राप्त की है। इस इकाई को नगर निगम ने सिर्फ जमीन उपलब्ध कराई है। सारा निवेश कंपनी की तरफ से किया गया है।  

शिक्षा किसी भी समाज की प्रगति और विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर दी शुभकामनाएं भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की प्रगति और विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटक है। ऐसे में जीनगर समाज द्वारा विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के लिये किए जा रहे कार्य प्रशंसनीय और सराहनीय हैं। समाजहित में किये जा रहे इस कार्य में राज्य सरकार आपके साथ है। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने रविवार को भोपाल में अखिल भारतीय जीनगर समाज द्वारा आयोजित प्रतिभावान विद्यार्थी सम्मान समारोह में सहभागिता की। उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया एवं उपस्थित विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा समाज बंधुओं को संबोधित किया। सामाजिक बंधुओं ने उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा का भी सम्मान किया। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि समाज के बच्चों से मैं यह विशेष तौर पर कहना चाहता हूँ कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा के लिए पूर्ण समर्पित और संकल्पित है। उन्होंने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।  

विद्यालयों को अकादमिक दृष्टि से मजबूत करने के लिये विमर्श पोर्टल

भोपाल  स्कूल शिक्षा विभाग प्रदेश में सरकारी स्कूलों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को अकादमिक रूप से मजबूत करने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिये डिजिटल प्लेटफार्म के रूप में विमर्श पोर्टल का संचालन कर रहा हैं। विमर्श पोर्टल में संभाग, जिला, विकासखंड और विद्यालयों के लॉगइन उपलब्ध है। विद्यालयों द्वारा दर्ज जानकारी के आधार पर संभाग, जिला और राज्य स्तर पर रिपोर्ट से मॉनिटरिंग की जा रही है। विमर्श पोर्टल पर विद्यार्थियों का विषयवार नामांकन, ब्रिज कोर्स, स्कूल एमआईएस इन्फ्रास्ट्रक्चर संबंधित जानकारी, विषयमान से अध्यापन करने वाले शिक्षकों और प्राचार्यों की जानकारी, त्रैमासिक, अर्द्धवार्षिक परीक्षा परिणाम और स्थानीय परीक्षा की जानकारी विद्यालयों द्वारा अपने लॉगइन से प्रत्येक सत्र में दर्ज की जाने की सुविधा है। आईसीटी@स्कूल अंतर्गत विद्यालयों में स्थापित की गई आईसीटी लैब, मॉनिटरिंग सिस्टम और विद्यालयों में कार्यरत व्यावसायिक शिक्षकों की मॉनिटरिंग संबंधित जानकारी प्रत्येक माह में विमर्श पोर्टल पर दर्ज की जा रही है।