samacharsecretary.com

गोल्फ कार्ट सेवा, किराया तय इस महीने से वन विहार में निजी वाहनों की एंट्री बंद, गोल्फ कार्ट सेवा से होगी सुविधा

भोपाल  राजधानी भोपाल स्थित नेशनल पार्क वन विहार में अब आप अपना निजी वाहन लेकर प्रवेश नहीं कर पाएंगे। वन विभाग इसी महीने निजी वाहनों पर रोक लगा देगा। इसकी तैयारी लगभग पूरी हो गई है। दरअसल वन विहार नेशनल पार्क को पॉल्यूशन फ्री करने की तैयारी की जा रही है। वन विहार के अधिकारियों के अनुसार यहां पर अब 40 गोल्फ कार्ट चलाया जाए। जिनका पर्यटकों से 50 से 60 रुपए तक किराया वसूला जाएगा। जानकारी के लिए बतादें कि वन विहार नेशनल पार्क नेट जीरो पॉल्यूशन वाला प्रदेश का पहला नेशनल पार्क बनने जा रहा है।    जानवरों के प्रजनन क्षमता पर पड़ता है असर वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि निजी वाहनों की तेज रफ्तार और हॉर्न की आवाज से जानवरों के व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ता है। जिससे उनके प्राकृतिक रहवास में भी व्यवधान होता है। वाहनों के शोर की वजह से वन जीवों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिससे वो तनाव ग्रस्त होते हैं और इसका असर उनकी प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। इसीलिए अब वन विहार में पेट्रोल-डीजल वाले निजी वाहनों में प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि वन विहार में सिंगल यूज पालीथिन और प्लास्टिक बोतलें पहले से प्रतिबंधित है। पर्यटक यहां खाने-पीने का सामान नहीं ले जा सकते हैं। अब वन विहार में वन्य प्राणियों और परिसर में निकलने वाले कचरे का 100 प्रतिशत निष्पादन किया जाएगा।  मुख्यमंत्री करेंगे गोल्फ कार्ट का शुभारंभ  वन विहार के 40 ई गोल्फ कार्ट का संचालन किया जाएगा। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक बाइक और साइकिल भी वन विहार की सफारी के लिए पर्यटकों को दी जाएगी। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गोल्फ कार्ट वन विहार में चलने को तैयार है। इसके शुभारंभ के लिए सीएम डॉ.मोहन यादव से समय मांगा गया है। संभवतः सितंबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह में ई गोल्फ कार्ट को सीएम डॉ. यादव हरी झंडी दिखा सकते हैं। वन विहार की असिस्टेंट डायरेक्टर डायरेक्टर डॉ.रुही हक ने बताया कि विभाग वन विहार में पेट्रोल-वाहनों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए निजी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रहा है। लेकिन इससे नेशनल पार्क में पर्यटकों की संख्या प्रभावित न हो और उन्हें मामूली शुल्क में सफारी कराई जा सके। इसके लिए गोल्फ कार्ट मंगवाए गए हैं। पर्यटकों के लिए ऐसी रहेगी व्यवस्था डॉ.रुही हक ने बताया कि पर्यटकों को एक ही स्थान पर इंतजार न करना पड़े, इसके लिए गोल्फ कार्ट का संचालन ऐसे किया जाएगा, जिससे हर 10 मिनट में वन विहार के सभी बाड़े के सामने गोल्फ कार्ट पहुंच सके। वन विहार में 4 पहिया वाहनों से आने वाले पर्यटकों के लिए गेट नंबर दो पर पार्किंग बनाई जा रही है। जबकि दो पहिया वाहन चालकों के लिए एक और दो दोनों गेट पर पार्किंग स्थल बनाया जा रहा है। पर्यटकों को पार्किंग स्थल के सामने से ही नेशनल पार्क की सफारी के लिए गोल्फ कोर्ट मिलेंगे। 

प्राकृतिक खेती से सजेगा नर्मदा का किनारा, MP सरकार ने बनाई नई कार्ययोजना

 भोपाल  नर्मदा नदी के जल को प्रदूषण से बचाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने कई कदम उठाने की योजना बनाई है। नदी के दोनों किनारों के पांच-पांच किमी तक प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे कीटनाशक व अन्य रसायनों के नर्मदा नदी में जाने से रोकने में मदद मिलेगी। नदी के दोनों ओर स्थित जनजातीय बहुल क्षेत्र में साल और सागौन का पौधारोपण और जड़ी-बूटियों की खेती को प्राथमिकता दी जाएगी। समृद्ध बायोडायवर्सिटी के संरक्षण व प्रोत्साहन गतिविधियों में वनस्पति शास्त्र और प्राणी शास्त्र के विशेषज्ञों को जोड़ते हुए विविध गतिविधियां संचालित की जाएंगी। नर्मदा तट पर बसे धार्मिक नगरों और स्थलों के आसपास मांस-मदिरा का उपयोग कड़ाई से प्रतिबंधित किया जाएगा। इसके अलावा अमरकंटक में उद्गम स्थल से दूर भूमि चिह्नित कर सैटेलाइट सिटी विकसित की जाएगी। ड्रोन के जरिए रखी जाएगी नजर बता दें कि बीते दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने एक समीक्षा बैठक में यह विषय आया था। मुख्यमंत्री ने वन एवं पर्यावरण विभाग को नोडल विभाग बनाने के निर्देश दिए थे। यही विभाग योजना बनाएगा और क्रियान्वित करेगा। इसके तहत पर्यावरण संरक्षण के लिए नर्मदा के आसपास चलने वाली गतिविधियों पर सैटेलाइट इमेजरी व ड्रोन टेक्नोलॉजी के माध्यम से भी नजर रखी जाएगी। एमपी में 1079 किमी लंबी है नर्मदा नदी विभिन्न शासकीय विभागों के साथ स्वयंसेवी संगठनों, आध्यात्मिक मंचों और जनसामान्य की सक्रिय सहभागिता से कार्ययोजना को धरातल पर उतारा जाएगा। मप्र में अमरकंटक से आंरभ होकर खम्बात की खाड़ी(अरब सागर) में मिलने वाली 1312 किलोमीटर लंबी नर्मदा नदी की प्रदेश में लंबाई 1079 किलोमीटर है। नर्मदा के किनारे 21 जिले, 68 तहसीलें, 1138 ग्राम और 1126 घाट हैं। नर्मदा किनारे 430 प्राचीन शिव मंदिर और दो शक्तिपीठ विद्यमान हैं।

माँ और अफ़सर: 20 दिन की बेटी के साथ आत्मविश्वास से DSP बनी वर्षा की कहानी

सतना मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीएससी 2024) की चयन सूची ने इस बार सतना और मैहर के होनहारों की चमक बढ़ा दी है। लेकिन इनमें सबसे प्रेरणादायक कहानी है मैहर जिले की वर्षा पटेल की, जिन्होंने गोद में 20 दिन की मासूम बेटी लेकर साक्षात्कार दिया और सीधे डीएसपी पद पर चयनित होकर महिला वर्ग में प्रदेश में पहली रैंक हासिल की। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ जिले ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन गई है। 20 दिन की बेटी को गोद में लेकर साक्षात्कार रामनगर क्षेत्र के बाबूपुर गांव की रहने वाली वर्षा पटेल की परीक्षा यात्रा आसान नहीं रही। यह उनका तीसरा प्रयास था। जब इंटरव्यू का कॉल आया, उस वक्त उनकी बेटी श्रीजा सिर्फ 20 दिन की थी। लेकिन मातृत्व की जिम्मेदारी और प्रशासनिक सेवा का सपना, दोनों को साथ लेकर वर्षा इंटरव्यू में पहुंचीं। बेटी को गोद में लेकर उन्होंने हर सवाल का आत्मविश्वास से जवाब दिया। बाहर निकलते ही उन्हें महसूस हुआ कि अब सफलता तय है और नतीजों ने भी यही साबित कर दिया।   पति ने छोड़ी नौकरी, दिया हौसला वर्षा ने अपनी पढ़ाई दमोह से की और बीएससी बायो से उच्च शिक्षा हासिल की। तैयारी के दौरान उन्होंने मात्र छह माह इंदौर से कोचिंग ली, बाकी मेहनत खुद पर भरोसा कर की। इस पूरे संघर्ष में उनके पति संजय कुमार सबसे बड़ा सहारा बने। इंजीनियर होने के बावजूद उन्होंने पत्नी के सपनों को पूरा करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी और मैहर में रहकर व्यवसाय शुरू किया। वर्षा मानती हैं कि उनकी सफलता में पति का त्याग और सहयोग सबसे अहम है।   आशीष पाण्डेय ने भी बढ़ाया सतना का मान इसी सूची में सतना जिले के रैगांव क्षेत्र के इटौरा गांव के आशीष पाण्डेय का चयन ट्रेज़री ऑफिसर पद पर हुआ है। उनके पिता उमेश पाण्डेय गुजरात में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। आशीष ने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की है। साधारण परिवार से निकलकर यह मुकाम पाने वाले आशीष युवाओं के लिए मिसाल हैं।

2050 करोड़ का बड़ा प्रोजेक्ट: एमपी के किसानों को मिलेगा मालामाल होने का मौका

भोपाल मध्यप्रदेश के किसानों की किस्मत संवरनेवाली है। खासतौर पर प्रदेश के 18 जिलों के किसान जल्द ही मालामाल हो सकते हैं। ये जिले कपास उत्पादन में अग्रणी हैं। यहां के कपास किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए धार में पीएम मित्रा पार्क की स्थापना की जा रही है। 2050 करोड़ का यह प्रोजेक्ट कपास उत्पादक किसानों के लिए समृद्धि के द्वार खोल देगा। ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादन में मध्यप्रदेश देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध‍ि पा चुका है। यही वजह है कि इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है। वस्त्र उद्योग में निवेश के लिए मध्यप्रदेश सबसे उपयुक्त राज्य साबित हो रहा है। ऐसे में किसानों का कपास न केवल हाथों हाथ बिकेगा बल्कि इसकी कीमत भी अच्छी मिलेगी। राज्य सरकार का दावा है कि कपास आधारित उद्योगों के विस्तार से किसानों को उनकी फसल का दोगुना मूल्य मिलेगा। पीएम मित्रा पार्क प्रोजेक्ट गांव-गांव तक आर्थिक गतिविधियों को गति देगा और स्थानीय बाजारों से लेकर निर्यात तक नई संभावनाएं पैदा करेगा। प्रदेश के मालवा अंचल के डेढ दर्जन जिलों में सबसे ज्यादा कपास होता है। इनमें प्रमुख रूप से इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगौन, बड़वानी, खण्डवा और बुरहानपुर शामिल हैं। पिछले 3 वर्षों में यहां खासा कपास हुआ है। वर्ष 2022-23 में 8.78 लाख मीट्रिक टन, 2023-24 में 6.30 लाख मीट्र‍िक टन और 2024-25 में 5.60 लाख मीट्र‍िक टन कपास उत्पादन हुआ।‍ सीएम डॉ. मोहन यादव बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 सितंबर को धार के पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास करेंगे। इससे मध्यप्रदेश देश की काटन कैपिटल बन जाएगा। कपास उत्पादक किसानों का अंतर्राष्ट्रीय बाजार से सीधा संपर्क हो जाएगा। किसान वैश्व‍िक बाजार से जुड़ जाएंगे। इस तरह धार का पीएम मित्रा पार्क कपास उत्पादक किसानों के लिए समृद्धि के द्वार खोलेगा। धार का पार्क 2158 एकड़ जमीन पर करीब ₹ 2050 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है। फर्स्ट फेज के अधोसंरचना विकास के लिए 773 करोड़ रुपए की लागत के टेंडर 30 जून 2025 को जारी किए गए। यह पार्क विश्व स्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित है। यहां 20 MLD का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, 10 MVA का सौर ऊर्जा संयंत्र, पानी और बिजली की पुख्ता आपूर्ति, आधुनिक सड़कें और 81 प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। 18 जिलों की धरती कपास की फसल से लहलहाती बता दें कि मध्यप्रदेश लंबे समय से कपास उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता है। प्रदेश के करीब 18 जिलों की धरती कपास की फसल से लहलहाती है। करीब 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी बोवनी की जाती है। हर साल करीब 24 लाख टन कपास पैदा होता है। 27 हजार 109 करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव इतना ही नहीं, देश में जितना ऑर्गेनिक कॉटन पैदा होता है, उसका करीब 40 प्रतिशत अकेले मध्यप्रदेश से आता है। यही वजह है कि वस्त्र उद्योग के लिए मध्यप्रदेश सबसे उपयुक्त गंतव्य साबित हुआ है। इस प्रोजेक्ट के लिए निवेशकों का भरोसा भी साफ दिखाई देता है। अब तक कुल 27 हजार 109 करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। पार्क “फार्म से फाइबर, फैक्ट्री से फैशन और विदेश” की संपूर्ण वैल्यू चेन को साकार करेगा। यहां किसानों से प्राप्त कच्चे कपास का उद्योगों में धागा बनेगा, वहीं से वस्त्र-परिधान तैयार होंगे और यही उत्पाद विदेशों तक जाएंगे। इस तरह पूरी वैल्यू चेन एक ही स्थान पर पूरी होगी। पीएम मित्रा पार्क से करीब 3 लाख रोजगार सृजित होंगे। इसमें एक लाख प्रत्यक्ष और दो लाख अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल होंगे। वस्त्र क्षेत्र के बड़े संगठन और उद्योग समूह यहां आकर निवेश की रुचि दिखा चुके हैं। इससे न केवल प्रदेश को औद्योगिक लाभ मिलेगा, बल्कि निर्यात को भी नई दिशा मिलेगी। धार से तैयार वस्त्र और परिधान अब सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचेंगे और मध्यप्रदेश वैश्विक टेक्सटाइल हब के रूप में अपनी अलग पहचान बनाएगा।

महाराष्ट्र सरकार के सूचना और जनसम्पर्क अधिकारियों का अध्ययन दल म.प्र. आया

अधिकारियों ने मध्यप्रदेश जनसम्पर्क की कार्यप्रणाली को सराहा भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य सरकार की विभिन्न जनहितकारी योजनाओं को राज्य के नागरिकों तक पहुँचाने के लिए मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग आधुनिक तकनीक का उपयुक्त उपयोग कर रहा है। यहाँ पारंपरिक माध्यमों के साथ नवीनतम डिजिटल और सोशल मीडिया का भी प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार के सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अध्ययन दल ने जनसंपर्क विभाग और म.प्र. माध्यम संस्थान का दौरा किया और विभाग एवं माध्यम संस्थान के कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। अध्ययन दल में सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय के उपसंचालक (प्रशासन) श्री गोविंद अहंकारी, वरिष्ठ सहायक संचालक (सूचना) श्री नंदकुमार वाघमारे, सहायक संचालक (सूचना) श्री गजानन पाटील, सहायक संचालक (सूचना) श्री सचिन ढवण, सहायक संचालक (सूचना) श्री धोंडिराम अर्जुन शामिल थे। उप संचालक श्री अहंकारी ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी में हो रही प्रगति से मीडिया में लगातार नए परिवर्तन हो रहे हैं। इन परिवर्तनों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश का जनसंपर्क विभाग उसी प्रकार से अद्यतन है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से ऐसी नई तकनीकों को अपनाने का निरंतर प्रयास किया जाएगा। इस प्रक्रिया में यह जानना जरूरी है कि अन्य राज्यों में सूचना और प्रचार के लिए किस प्रकार आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है और क्या उससे हम कुछ नया सीख सकते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी के नए युग में हो रहे परिवर्तनों का सामना करने के लिए महाराष्ट्र सरकार के सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय द्वारा अन्य राज्यों के जनसंपर्क विभाग के कार्यप्रणाली की जानकारी लेने हेतु अध्ययन दौरे आयोजित किए गए हैं। इसी क्रम में उप संचालक श्री गोविंद अहंकारी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग का दौरा किया।  

लोकसेवकों के लिए सर्वाधिक डिजिटल प्रशिक्षण कोर्स तैयार करने वाला पहला राज्य बना मध्यप्रदेश

डिजिटल लर्निंग प्लेटफार्म iGOT पोर्टल पर दो सौ से अधिक हिंदी के प्रशिक्षण कार्यक्रम भोपाल  मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत प्रदेश के सभी विभागों में कार्यरत लोक सेवकों की कार्यदक्षता बढ़ाने उन्हें डिजिटल लर्निंग प्लेटफार्म iGOT पोर्टल पर पंजीकृत कर लिया गया है। अभी तक 3 लाख 34 हजार लोक सेवकों को आवश्यक विषयों में प्रशिक्षण भी आवंटित किया गया जा चुका है। मध्यप्रदेश सर्वाधिक डिजिटल प्रशिक्षण iGOT पोर्टल पर निर्मित करने वाला पहला राज्य बन गया है और सबसे अधिक लोकसेवकों को iGOT पोर्टल पर पंजीकृत करने वाला तीसरा राज्य है। सभी राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण अकादमियों में म.प्र. की आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन अकादमी अपने प्रयासों में अग्रणी अकादमी है। आईगाट – iGOT पोर्टल पर 1800 से अधिक अंग्रेजी तथा आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल द्वारा तैयार 200 से अधिक हिंदी के प्रशिक्षण कार्यक्रम उपलब्ध हैं। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर केन्द्र सरकार द्वारा लोकसेवकों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उनको नागरिक केन्द्र‍ित होकर कर्मयोगी के रूप में दक्षतापूर्वक अपनी भूमिका निभाने मिशन कर्मयोगी वर्ष 2020 में लागू किया गया था। यह आनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त करने का ऐसा प्लेटफार्म है जिसके माध्यम से सरकारी अधिकारी-कर्मचारी कहीं भी – कभी भी – किसी भी स्थान से अपनी सुविधानुसार स्व-प्रशिक्ष‍ित हो सकते हैं। वे अपनी दक्षता और ज्ञान बढ़ाने अपने विभाग से संबंधित विषयों पर उपलब्ध पाठयक्रमों में प्रशिक्ष‍ित हो सकते हैं। इसके अलावा अपनी रूचि अनुसान अन्य विभागों के लिए बने पाठयक्रमों में भी प्रशिक्ष‍ित हो सकते हैं। 15 से 19 सितम्बर तक कर्मयोगी iGOT पर सीखें सप्ताह का आयोजन यह प्रशिक्षण सभी विभागों में कार्यरत विभिन्न कैडर्स के लोक सेवकों के लिए प्रासंगिक है। इनमें NPS, सिविल सेवा आचरण नियम, यात्रा भत्ता नियम, भंडार क्रय नियम, RTI, E-office, जैसे अन्य कई विषयों पर पाठ्यक्रम बनाए गए हैं, जिन पर लोक सेवक प्रशिक्षित हो सकते हैं। साथ ही सभी विभागों की कार्यप्रणाली से संबंधित महत्वपूर्ण योजनाओं और कार्यों पर विभिन्न डिजिटल पाठ्यक्रम निर्मित किए गए हैं, जिनसे अधिकारी एवं कर्मचारी कार्यस्थल पर ही प्रशिक्षण प्राप्त कर दक्ष हो सकें। अकादमी के महानिदेशक, श्री सचिन सिन्हा के नेतृत्व में आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी द्वारा 15 से 19 सितम्बर तक सभी विभागों में कर्मयोगी iGOT पर सीखें सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 15 सितम्बर को इसका शुभारंभ किया जाना प्रस्तावित है। क्षमता निर्माण नीति लागू करने में मध्यप्रदेश आगे क्षमता निर्माण आयोग से मिले इनपुट को शामिल कर बनी क्षमता निर्माण नीति लागू करने में मध्यप्रदेश अग्रणी है। सभी विभागों में क्षमता निर्माण इकाइयाँ स्थापित हो गई हैं और प्रशिक्षण की आवश्यकता का विश्लेषण करने के बाद कैडर-वार क्षमता निर्माण कार्य योजनाएँ तैयार की जा रही हैं। विभागों में क्षमता निर्माण प्रबंधकों की सेवाएँ लेने का भी प्रावधान है। उन्हें क्षमता निर्माण इकाइयों द्वारा सहयोग दिया जायेगा। क्षमता निर्माण प्रबंधकों द्वारा वार्षिक क्षमता निर्माण योजनाएं तैयार की जाएंगी। विभिन्न विभागों में कार्यरत मानव संसाधन की दक्षता दर्शाने वाला एक डैशबोर्ड तैयार किया गया है, जिससे माध्यम से मुख्यमंत्री कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता की स्थिति जान सकेंगे। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एक समिति हर 6 महीने में कर्मचारियों के प्रशिक्षण के संबंध में विभागों के प्रदर्शन पर निगरानी रखेगी, जबकि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति क्षमता निर्माण परिषद हर वर्ष इसकी समीक्षा करेगी। मिशन कर्मयोगी का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के कौशल को बढ़ाना और उनकी क्षमता में निरंतर सुधार करना है। कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश क्षमता निर्माण नीति के अनुसार पदोन्नति के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। क्षमता निर्माण नीति 2023 प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक विभाग में वेतन बजट का एक प्रतिशत अनिवार्य रूप से कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर खर्च किया जायेगा। यदि अधिक आवश्यकता हुई तो वित्त विभाग की अनुमति से इसे 2.5 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। इससे प्रत्येक कर्मचारी को आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त होगा। कर्मचारी से कर्मयोगी की ओर बदलाव की यह पहल है। इससे नियम आधारित मॉडल से भूमिका आधारित माडल बनाने की यात्रा शुरू हो गई है। यह एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। प्रशिक्षण की निरंतर आवश्यकता के मूल्यांकन के साथ वार्षिक क्षमता निर्माण प्लान बनाना आवश्यक हैं। कर्मचारियों के लिए भूमिकाओं, गतिविधियों और दक्षताओं की रूपरेखा बनाना अब अनिवार्य है। सेल्फ लर्निंग पोर्टल आईगाट के अधिकाधिक उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। नई क्षमता निर्माण योजना में कर्मचारियों की भूमिका को अधिक सार्थक और उपयोगी बनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश ने अपनी क्षमता निर्माण नीति को डिजाइन करने और लागू करने में अग्रणी भूमिका निभाई है, जिसमें क्षमता निर्माण आयोग के इनपुट शामिल हैं।  

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग का हुआ 31वाँ स्थापना दिवस समारोह

भोपाल  लोकायुक्त न्यायमूर्ति श्री सत्येन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि डिजिटल स्पेस में मानव अधिकार संरक्षण एक बड़ी चुनौती है। साइबर स्पेस की व्यापकता एवं पहचान छुपाने की तकनीक ने डिजिटल स्पेस में मानवाधिकारों के उल्लंघन को निवारित करने और उन्हें दण्डित करने को अत्यंत दुष्कर बना दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मानव अधिकारों को साइबर सुरक्षा के माध्यम से संरक्षित कर डिजिटल क्रांति का लाभ समाज को व्यापक रूप से उपलब्ध कराने की चुनौती हमारे समक्ष है। श्री सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा इस चुनौती को स्वीकार कर "साइबर सुरक्षा एवं मानव अधिकार'' विषय पर संगोष्ठी का आयोजन कर प्रशंसनीय कार्य किया गया है। श्री सिंह प्रशासन अकादमी भोपाल में मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के 31वें स्थापना दिवस समारोह में "साइबर सुरक्षा एवं मानव अधिकार'' की संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष श्री राजीव कुमार टण्डन ने कहा कि साइबर सुरक्षा व मानव अधिकार एक प्रासंगिक विषय है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में मानव अधिकार आयोग की स्थापना 13 सितम्बर, 1995 को की गयी थी। मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा विगत 30 वर्षों में की गयी अनुशंसाओं के अनुरूप शासन एवं संबंधित विभागों की कार्य-प्रणाली में आवश्यक परिवर्तन कर सुशासन की दिशा में प्रयास किये गये हैं। उन्होंने कहा कि आयोग में विगत 5 वर्षों में 45 हजार 900 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 44 हजार 551 शिकायतों का निपटारा किया गया। श्री टण्डन ने कहा कि आयोग द्वारा नवाचार करते हुए "आयोग आपके द्वार" कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसमें जिला स्तर पर मानव अधिकारों से संबंधित शिकायतों का जन-सुनवाई के माध्यम से स्थानीय स्तर पर निराकरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक प्रदेश के 34 जिलों में जन-सुनवाई की गयी है। "साइबर सिक्योरिटी और मानव अधिकार इंटरसेक्शन'' विषय पर हुआ मंथन "साइबर सिक्योरिटी और मानव अधिकार इंटरसेक्शन'' के मंथन में विशेषज्ञों ने डिजिटल युग में बढ़ती चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज मानव अधिकार केवल भौतिक जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑनलाइन दुनिया में भी उनकी सुरक्षा उतनी ही आवश्यक है। साइबर अपराध, डेटा चोरी, फेक न्यूज और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसी समस्याएँ नागरिकों के निजता के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई है। विषय-विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल प्लेटफार्म पर सुरक्षा और स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्षरता और जिम्मेदार उपयोग के लिये जागरूक होना जरूरी है। विशेषज्ञों ने यह संदेश दिया कि डिजिटल युग में मानव अधिकार और साइबर सिक्योरिटी एक-दूसरे के पूरक हैं, विरोधी नहीं। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली सुश्री एन.एस. नप्पिनाई ने कहा कि साइबर डोमेन में सब एक-दूसरे की नजर में हैं। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा की आवश्यकता है, डरने की नहीं। कार्यकारी निदेशक, पीडब्ल्यूसी इण्डिया, हैदराबाद श्री कृष्ण शास्त्री पेड्ंयाला ने कहा कि डी-कॉमर्स के समय में मानव अधिकारों का संरक्षण आवश्यक है। निदेशक राजीव गाँधी लॉ सेंटर एन.एल.आई.ई.यू., भोपाल प्रो. अतुल पाण्डे ने कहा कि प्रगति के 5वें सौपान में डिजिटल सुरक्षा के उपाय जरूरी हैं। सभी विशेषज्ञों ने "साइबर सुरक्षा एवं मानव अधिकार'' विषय पर पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से उद्बोधन दिया और साइबर सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जानकारी साझा की। कार्यक्रम में मानव अधिकार आयोग द्वारा "साइबर सुरक्षा एवं मानव अधिकार'' विषय पर आधारित स्मारिका का विमोचन हुआ और आयोग की नवीन वेबसाइट www.hrc.mp.gov.in का लोकार्पण किया गया। मानव अधिकार आयोग के प्रमुख सचिव श्री मुकेश चंद गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया। आयोग के उप सचिव श्री डी.एस. परमार ने आभार प्रदर्शन किया। मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष श्री टण्डन ने सभी अति‍थियों को स्मृति-चिन्ह भेंट किये। कार्यक्रम में आयोग के पूर्व पदाधिकारी, विभाग/संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, सेवानिवृत्त न्यायाधीश, वरिष्ठ प्रशासनिक, पुलिस अधिकारी, विधि संकाय के प्राध्यापक, विधि संकाय के विद्यार्थी और आयोग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। 

आरक्षक संवर्ग की सीधी भरती हेतु चयन परीक्षा-2025

ऑनलाइन आवेदन 15 सितम्बर से, परीक्षा 30 अक्टूबर को भोपाल  मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा पुलिस मुख्यालय, गृह विभाग (पुलिस) के अंतर्गत पुलिस आरक्षक के 7500 पदों के लिए "आरक्षक संवर्ग की सीधी भरती हेतु चयन परीक्षा-2025" का विज्ञापन 14 सितम्बर 2025 को प्रकाशित किया जा रहा है। परीक्षा के आवेदन-पत्र 15 सितम्बर से 29 सितम्बर 2025 तक ऑनलाईन लिये जायेंगे। परीक्षा का आयोजन 30 अक्टूबर 2025 से प्रदेश के संभावित 11 शहरों- भोपाल, इंदौर, जबलपुर, खंडवा, नीमच, रीवा, रतलाम, सागर, सतना, सीधी और उज्जैन में किया जायेगा। परीक्षा की नियम पुस्तिका मंडल की वेबसाईट www.esb.mp.gov.in पर प्रदर्शित की गई है। आवेदक इसे डाउनलोड कर प्रावधान अनुसार अपना आवेदन पत्र भर सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की घोषणा पर शुरू हुआ अमल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वतंत्रता दिवस पर पुलिस आरक्षकों की भर्ती संबंधी घोषणा पर अमल शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर 22 हजार 500 पुलिस आरक्षकों की भर्ती का निर्णय लिया। उन्होंने कहा था कि ये सभी भर्तियां आगामी 3 साल में कर दी जाएंगी। प्रत्येक वर्ष 7500 भर्तियां का लक्ष्य रखा गया है। पहले वर्ष में की जाने वाली भर्ती कर्मचारी चयन मंडल से और आगामी 2 वर्षों की भर्तियां म.प्र. पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा की जाएँगी। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में आरक्षक भर्ती के लिये पुलिस भर्ती बोर्ड गठन की भी घोषणा की है।  

मुख्यमंत्री ने इंदौर में जैन श्वेतांबर मालवा महासंघ के अधिवेशन में की सहभागिता

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि समाज को अनुशासित रखने में संत महात्माओं और मुनियों की महती भूमिका रही है। धर्म गुरुओं के संदेश, उपदेशों से भारतीय संस्कृति अक्षुण्ण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को इंदौर में आयोजित जैन श्वेतांबर मालवा महासंघ के 14 वें अधिवेशन एवं श्रीसंघ मिलन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से प्रदेश में "सेवा पखवाड़ा अभियान" शुरू किया जा रहा है। अभियान सभी जिलों में विभिन्न गतिविधियाँ और कार्यक्रम आयोजित होंगे। उन्होंने सभी से अभियान में सहभागिता का आहवान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उद्योग विकास, निवेश और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। गौमाताओं, गौशालाओं का संरक्षण, दुग्ध संघ के माध्यम से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में बेहतर कार्य हुए हैं। इन सब प्रयासों से प्रदेश आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहा है। संघ मिलन समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आचार्य विश्वरत्न सागर का शुभाशीष प्राप्त किया। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मंगल कलश और शुभ अक्षतों की वर्षा कर स्वागत किया गया। इस दो दिवसीय समारोह में अन्य राज्यों व जिलों से धर्मावलंबी शामिल हुए। इस दौरान आचार्य विश्वरत्न सागर ने आशीष वचनों से उपस्थितजन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के मुखिया अपने सरल, सहज और समन्वय भाव से प्रदेश को विकास की ओर ले जा रहे हैं। नए उद्योग और रोजगार, धार्मिक न्यास को लेकर प्रदेश में जो कार्य हुए है वे अतुल्यनीय है। सरकार ने जन हितैषी कार्यों बढ़ावा दिया है। समारोह में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, विधायक श्री गोलू शुक्ला, श्रीमती मालिनी गौड़, श्री मधु वर्मा, श्री रमेश मेंदोला, श्वेतांबर मालवा महासंघ के पदाधिकारी, सदस्य, एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- भारतीय न्याय व्यवस्था का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय न्याय व्यवस्था का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। सम्राट विक्रमादित्य भारतीय न्याय व्यवस्था के महान पुरोधा थे, जिनके निर्णयों की मिसाल आज भी दी जाती है। न्याय के क्षेत्र में उनकी पहचान विश्व स्तर पर अद्वितीय थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को इंदौर में विश्व हिंदू परिषद विधि प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित अखिल भारतीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के अनेक कानूनों में समयानुकूल बदलाव किए गए हैं, जो समय की आवश्यकता भी थे। न्याय व्यवस्था में मन की पवित्रता और पंचों का निष्पक्ष निर्णय ही असली न्याय है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी भारतीय संस्कृति और न्याय परंपरा पर गर्व है और न्यायालयों के निर्णयों का सबको समान रूप से पालन करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में कोलाहल नियंत्रण अधिनियम का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। साथ ही खुले में मांस विक्रय पर प्रतिबंध लगाया गया है और उसका भी सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए समान है और उसके साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लव जिहाद के विषय में स्पष्ट कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्ति की गरिमा के विरुद्ध है। प्रदेश में लव जिहाद करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा और उनके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि न्याय और कानून व्यवस्था में किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो। समाज के प्रत्येक वर्ग को समान न्याय मिले और जनता को यह विश्वास रहे कि मध्यप्रदेश में कानून सर्वोपरि है। कार्यक्रम को स्वामी श्री जितेंद्रानंद जी महाराज ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल, परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आलोक जी, संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन, राष्ट्रीय संयोजक विधि प्रकोष्ठ डॉ. अभिषेक अत्रे एवं विधि प्रकोष्ठ के संरक्षक न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री व्ही.एस. कोकजे विशेष रूप मौजूद थे।