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40-40 हजार रुपये में स्क्रैप सर्टिफिकेट की धांधली, MP में बढ़ा धोखाधड़ी का खतरा

ग्वालियर कंडम और समय सीमा पूरी कर चुके वाहनों को आफ रोड करने को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने स्क्रैप पॉलिसी में बदलाव करने की घोषणा की है। उपभोक्ताओं को नए वाहन खरीदते समय पुराने वाहन को स्क्रैप कराने पर रोड टैक्स में 25 के बजाय 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी। इस फैसले का फायदा उठाने के लिए आसपास के राज्यों के वेंडर सक्रिय हो गए हैं। ये वेंडर गाड़ी को अपने यहां स्क्रैप होना बताकर सर्टिफिकेट 40-40 हजार रुपये में बेच रहे हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार दूसरे राज्यों में वाहन स्क्रैप का काम करने वाले वेंडर मप्र में सक्रिय होकर स्क्रैप सर्टिफिकेट का कारोबार कर रहे हैं, इससे मध्य प्रदेश की स्क्रैप पॉलिसी का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है। इसका अर्थ है कि स्क्रैप पालिसी के तहत पुराने वाहनों के नष्ट होने का फायदा प्रदेश को मिलना चाहिए, वह इस प्रकार से स्क्रैप सर्टिफिकेट बेचे जाने से नहीं मिलेगा। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक वेंडर ने बताया कि वह मप्र में हर माह 300 स्क्रैप सर्टिफिकेट उपलब्ध कराते हैं और प्रति सर्टिफिकेट 40 हजार लेते हैं, उनका काम मप्र ही नहीं दिल्ली, हरियाणा, उप्र जैसे राज्यों में हैं। ग्वालियर में हर माह 100 से ज्यादा स्क्रैप सर्टिफिकेट दिए जा रहे हैं, जबकि इतने वाहन स्क्रैप हो रहे या नहीं यह पता नहीं। ऑटोमोबाइल शोरूम पर नेटवर्क सक्रिय स्क्रैप सर्टिफिकेट को लेकर वेंडरों का नेटवर्क प्रदेशभर में ऑटोमोबाइल शोरूमों पर है, यहां नया वाहन खरीदने जाने वाले अगर शोरूम पर स्क्रैप सर्टिफिकेट की मांग करते हैं तो उन्हें आसानी से उपलब्ध कराने की बात बताई जाती है, इसके बाद स्क्रैप सर्टिफिकेट की कीमत बताकर बेच दिया जाता है। बड़े लग्जरी वाहनों पर स्क्रैप सर्टिफिकेट की छूट अधिक ली जा रही है। बड़ा सवाल : दनादन बिक रहे स्क्रैप सर्टिफिकेट प्रदेश में बड़े महानगरों में स्क्रैप सेंटर भी बनाए गए हैं, यहां वाहन स्क्रैप किए जाते हैं। बाहरी वेंडर बाहर के वाहनों के सर्टिफिकेट अधिक खपा रहे हैं, ये वाहन स्क्रैप हो भी रहे हैं या नहीं, इसका कुछ पता नहीं है। यह भी आशंका है कि बाहरी दूर दराज के राज्यों से पुराने वाहन का स्क्रैप सर्टिफिकेट जनरेट करा लिया जाता हो और वह सड़क पर दौड़ भी रहा हो।

मेट्रो परियोजना को रफ्तार: भोपाल में 100 एकड़ भूमि का अधिग्रहण शुरू

भोपाल भोपाल में मेट्रो रेल लाइन का काम तेजी से किया जा रहा है।जहां एक तरफ सुभाष नगर से एम्स तक मेट्रो जल्द से जल्द शुरू करने की कवायद तेज हो गई है तो वहीं करोंद से एम्स के बीच भी मेट्रो की आरेंज लाइन का काम भी तेजी से शुरू कर दिया गया है। बैरसिया रोड स्थित करोंद चौराहा पर ऑरेंज लाइन के पिलर तेजी से खड़े हो रहे हैं तो वहीं अब बोगदा पुल ऐशबाग से कृषि उपज मंडी करोंद तक मेट्रो लाइन बिछाने के लिए लगभग 100 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इसके लिए मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस दौरान भूमि स्वामियों से आपसी क्रय नीति के तहत जमीन ली जाएगी। जानकारी के अनुसार बोगदा पुल ऐशबाग, भोपाल रेलवे स्टेशन, नादरा बस स्टैंड, सिंधी कालोनी, डीआईजी बंगला और कृषि उपज मंडी करोंद के बीच भी मेट्रो रेल लाइन के मार्ग में करीब 100 प्रापर्टी की करीब 100 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। अब तक 30 लोगों ने आपसी क्रय नीति से जमीन देने की सहमति पेश की है। इनकी प्रापर्टी का मूल्यांकन कर उन्हें वर्तमान कलेक्टर गाइडलाइन दाम से दोगुना राशि दी जाएगी। जिसके तहत जमीन मालिक सीधे मेट्रो रेल कंपनी के नाम रजिस्ट्री करा देगा। एसडीएम स्तर पर प्रक्रिया शुरू ऐसा करने से अधिग्रहण की प्रक्रिया में लगने वाला एक साल से अधिक का समय बचाया जा सकेगा। वहीं ऐसे लोग जो आपसी सहमति से जमीन देने के लिए तैयार नहीं है, उनकी जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। जिसके लिए एसडीएम स्तर पर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नोटिफिकेशन जारी होने के बाद 60 दिन का समय दिया गया था, जो कि पूरा होने वाला है।इसके बाद से अगले दो महीने में अधिग्रहण की कार्रवाई शुरु होगी। इन जमीनों का किया जाएगा अधिग्रहण समा फारेजी कंपनी लिमिटेड नई दिल्ली, हर हाईनेस मेहताज नवाब शाजिया सुल्तान बेगम, कृषि उपज मंडी समिति सहित प्राइवेट जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। रेलवे, शमशान, नाला, कब्रिस्तान, आबादी, जीएस आइल मिल, नवाब साजिदा सुल्तान बेगम, औकाफ, नर्मदा बैली प्रोडक्शन कंपनी, पुद्रा मिल, अलका गृह निर्माण सहकारी समिति, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, मैदा मिल, परमाली वेलेस प्राइवेट लिमिटेड और पीडब्ल्यूडी की जमीन शामिल है।

पासपोर्ट बनवाना हुआ आसान: पोस्ट ऑफिस स्टाफ करेंगे आपके घर विज़िट : सिंधिया

मुरैना शनिवार को पासपोर्ट सेवा केंद्र भवन के भूमिपूजन अवसर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि अब पासपोर्ट के लिए आपको कहीं चक्कर नहीं लगाना होगा, बल्कि पोस्ट ऑफिस के कर्मचारी आपके चक्कर लगाएंगे। अभी लोकसभा मुख्यालय पर सुविधा शुरू हो रही है, जल्द ही हर जिले में पासपोर्ट बनना शुरू होंगे। बता दें कि मुरैना में तीन माह में भवन बनकर तैयार होगा। यहां पासपोर्ट के 40 स्लाट मिलेंगे। सिंधिया ने इस दौरान आयोजित सुकन्या समृद्धि योजना सम्मेलन में 27 सुकन्या हितग्राहियों को उपहार आदि भेंट करते हुए कहा कि एक मई 2025 से एक मई 2026 तक उनके संसदीय क्षेत्र गुना, शिवपुरी व अशोक नगर में जितनी बेटियां जन्म लेंगी, उनके सुकन्या खातों में सिंधिया परिवार राशि जमा कराएगा। सिंधिया ने मुरैना सांसद शिवमंगल सिंह तोमर, कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंषाना, प्रभारी मंत्री करण सिंह वर्मा्, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर व पूर्व विधायकों से भी कहा कि वह भी अपने-अपने क्षेत्र की सुकन्याओं के खातों में राशि जमा कराने का बीड़ा उठाएं। पत्रकारों से चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस की आदत बन गई है कि देश को कैसे नीचा दिखाना है। सेना को कैसे नीचा दिखाना है। चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट पर कैसे प्रश्न उठाएं, उप राष्ट्रपति का कैसे असम्मान करें? यह कांग्रेस की नियति बन गई है।  

देवास पुलिस का ऑपरेशन क्लीन: 21 थानों में कांबिंग गश्त, 275 बदमाशों पर निगरानी

देवास देवास जिले में शनिवार देर रात 21 थानों की पुलिस कांबिंग गश्त की है। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने 150 से ज्यादा वारंट तामिल और 260 से ज्यादा निगरानीशुदा, जिला बदर और अन्य बदमाश चेक किए गए है। पुलिस ने इस दौरान जुआ और आबकारी एक्ट में 20 केस भी दर्ज किए। कई माह के अंतराल के बाद शनिवार देर रात पुलिस ने पूरे जिले में एक साथ कांबिंग गश्त की। पुलिस अधीक्षक से लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी, डीएसपी, टीआई सहित 200 से अधिक जवान गश्त पर निकले। इस दौरान 130 से अधिक स्थाई और गिरफ्तारी वारंट तामिल किए गए। वहीं जिलाबदर, निगरानीशुदा और गुंडा सूची में शामिल 275 से अधिक बदमाशों को चेक किया गया। जिस समय पुलिस इनकी चेकिंग करने पहुंची अधिकांश गहरी नींद में थे अचानक पुलिस आने से कुछ चौंक गए, बाद में पता चला चेकिंग करने के लिए टीम आई है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 200 से अधिक पुलिस अधिकारी, कर्मचारी रात 12 बजे से सुबह 5 बजे तक लगातार गश्त में सक्रिय रहे। पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद स्वयं विभिन्न स्थानों पर मौजूद रहे, उन्होंने निगरानी बदमाशों की जांच की, नाकाबंदी प्वाइंट्स का निरीक्षण, रेलवे एवं बस स्टैंड्स की चेकिंग तथा डायल-112 वाहनों का निरीक्षण किया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर जयवीर सिंह भदौरिया ने बताया 57 स्थायी वारंट, 78 गिरफ्तारी वारंट तामिल किए गए। 12 आबकारी प्रकरण व 8 जुआ एक्ट प्रकरण दर्ज किये गए। इसके अलावा 15 जिलाबदर, 97 निगरानी बदमाश, 166 गुंड़े- बदमाश चेक किए गए।  

पीएम मित्रा पार्क से मध्यप्रदेश बनेगा देश की कॉटन कैपिटल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जैविक कपास उत्पादन में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में है। देश में जितना जैविक कपास उत्पादन होता है उसमें मध्यप्रदेश का योगदान लगभग 40 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा धार जिले में प्रथम पीएम मित्रा पार्क के शिलान्यास से मध्यप्रदेश देश की कॉटन कैपिटल बन जायेगा। कपास उत्पादक किसानों का सीधा संपर्क अंतर्राष्ट्रीय बाजार से हो जायेगा। पीएम मित्रा पार्क किसानों की मेहनत को वैश्विक पहचान दिलाने वाला ऐतिहासिक क्षण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे प्रदेश के औद्योगिक भविष्य की आधारशिला और किसानों के लिए नई संभावनाओं का द्वार बताया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्ट‍ि से किसानों की उपज खेतों से सीधे वैश्विक बाजार तक पहुँच जायेगी। इसमें मध्यप्रदेश की कपास उत्पादक धरती सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी। इस पार्क से कपास उत्पादक किसानों की समृद्धि के नये द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि पीएम मित्रा पार्क किसानों, श्रमिकों, महिलाओं और युवाओं का जीवन बदलने वाली औदयोगिक परियोजना है। कपास उत्पादक किसान अब सीधे कपास आधारित उद्योगों से जुड़ जायेंगे, जिससे मध्यप्रदेश का कपास केवल फसल न रहकर प्रदेश की औद्योगिक पहचान बनेगा। मध्यप्रदेश कपास उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश के मालवा अंचल के जिलों में सबसे ज्यादा कपास उत्पादन होता है। इनमें प्रमुख रूप से इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगौन, बड़वानी, खण्डवा और बुरहानपुर शामिल हैं। पिछले तीन वर्षों में कपास उत्पादन की स्थ‍िति अच्छी रही है। वर्ष 2022-23 में 8.78 लाख मीट्रिक टन, 2023-24 में 6.30 लाख मीट्र‍िक टन और 2024-25 में 5.60 लाख मीट्र‍िक टन कपास उत्पादन हुआ।‍ इसके अतिरिक्त प्रदेश के अन्य जिलों में भी कपास की अच्छी फसल ली जाती है। देश में ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादन में मध्यप्रदेश प्रसिद्ध‍ि पा चुका है। यही वजह है कि वस्त्र उद्योग के लिए मध्यप्रदेश सबसे उपयुक्त राज्य साबित हुआ है। इसी पृष्ठभूमि के आधार पर धार को पीएम मित्रा पार्क की स्थापना के लिए चुना गया है। सर्व-सुविधायुक्त होगा पीएम मित्रा पार्क करीब 2,158 एकड़ में विकसित हो रहा पार्क विश्व स्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित है। यहां 20 MLD का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, 10 MVA का सौर ऊर्जा संयंत्र, पानी और बिजली की पुख्ता आपूर्ति, आधुनिक सड़कें और 81 प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स जैसी व्यवस्थाएँ विकसित की जा रही हैं। श्रमिकों और महिला कर्मचारियों के लिए आवास और सामाजिक सुविधाएं इसे केवल औद्योगिक क्षेत्र नहीं, बल्कि आदर्श औद्योगिक नगर का रूप देती हैं। निवेशकों ने जताया भरोसा निवेशकों ने भी भरोसा जताते हुए पीएम मित्रा पार्क में अब तक 27 हजार 109 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव दिये हैं। यह निवेश उद्योगों की स्थापना के साथ स्थानीय लोगों के लिए नए रोजगार का मार्ग प्रशस्त करेगा। वस्त्र क्षेत्र के बड़े संगठनों और उद्योग समूहों ने यहां निवेश करने की इच्छा जताई है। इससे न केवल प्रदेश को औद्योगिक लाभ मिलेगा, बल्कि निर्यात भी बढ़ेगा। धार से तैयार वस्त्र और परिधान अब सीधे ग्लोबल मार्केट में पहुंचेंगे। जल्दी ही मध्यप्रदेश की पहचान अब टेक्सटाइल हब के रूप में होने लगेगी। प्रधानमंत्री के विजन पर केन्द्रित है पार्क की थीम प्रधानमंत्री श्री मोदी के विज़न के अनुरूप यह पार्क “फार्म से फाइबर, फैक्ट्री से फैशन और विदेश” की संपूर्ण वैल्यू चैन बनायेगा। किसानों से प्राप्त कच्चा कपास उद्योगों में धागा बनेगा, वहीं से वस्त्र और परिधान तैयार होंगे और यही उत्पाद विदेशों तक जाएंगे। इस तरह पूरी वैल्यू चैन एक ही स्थान पर पूरी होगी। यही इस पार्क की विशिष्टता होगी और अन्य पार्कों में आदर्श बनायेगी। पीएम मित्रा पार्क से लगभग 3 लाख रोजगार सृजित होंगे। इसमें एक लाख प्रत्यक्ष और दो लाख अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल होंगे। कपास आधारित उद्योगों के विस्तार से किसानों को उनकी फसल का दोगुना मूल्य मिलेगा। यह अवसर केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांव-गांव तक आर्थिक गतिविधियों को गति देगा और स्थानीय बाजारों से लेकर निर्यात तक नई संभावनाएँ पैदा करेगा।  

पीएम मोदी 17 सितंबर को धार में मनाएंगे जन्मदिन, करेंगे सेवा पर्व और सुमन सखी चैटबॉट का शुभारंभ

धार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने जन्मदिन पर 17 सितंबर को धार जिले के बदनावर में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री पीएम मित्र पार्क का शिलान्यास करने के साथ ही स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान, सुमन सखी चैटबॉट का शुभारंभ करेंगे। इस दौरान पोषण माह का राष्ट्रीय स्तर पर उद्घाटन और लाभार्थियों को पीएमएमवीवाई की किस्त का हस्तांतरण किया जाएगा। जनजातीय क्षेत्रों में आदि सेवा पर्व का शुभारंभ भी किया जाएगा, जो 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। प्रधानमंत्री के इस दौरे को ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार धार जिले से इतने बड़े पैमाने पर जनकल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत होगी। इन अभियानों से ग्रामीण और आदिवासी समाज की भागीदारी बढ़ेगी तथा महिलाओं को स्वास्थ्य और पोषण संबंधी अधिक जानकारी मिलेगी।   साथ ही, जनजातीय पंचायतों में विकास की ठोस योजना तैयार होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और शिक्षा के अवसर बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह कार्यक्रम न केवल सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का भी आधार बनेगा। डिजिटल इंडिया के विजन को आगे बढ़ाते हुए मध्यप्रदेश सरकार अब स्वास्थ्य सेवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ने जा रही है। सुमन सखी चैटबाॅट इसी का हिस्सा है, इसके जरिये महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान देखभाल, जोखिम कारकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। खास बात यह है कि यह चैटबाॅट हिंदी भाषा में होगा और वाट्सऐप पर आसानी से उपयोग किया जा सकेगा।आदि सेवा पर्व के दौरान सभी जनजातीय बहुल गांव के लोग अपनी-अपनी ग्राम पंचायत में गांव के विकास के बारे में चर्चा-परिचर्चा करेंगे। गांव की विकास योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार जनजातीय बहुल ग्राम पंचायतों में आदि सेवा केंद्र बनाए जाएंगे।प्रधानमंत्री इसके साथ ही प्रधानमंत्री एक बगिया मां के नामअभियान में भागीदारी के प्रतीक के रूप में महिला लाभार्थियों को पौधों का वितरण, सिकल सेल स्क्रीनिंग काउंसलिंग कार्ड का वितरण करेंगे।

रैगिंग रोकने के लिए सख्ती, आरजीपीवी में स्थापित होगी स्थायी पुलिस चौकी

भोपाल  अक्सर अपराध पर नियंत्रण के लिए शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में पुलिस चौकी बनाई जाती है, लेकिन अब राजधानी के एक विश्वविद्यालय में रैगिंग पर रोकथाम के लिए पुलिस की चौकसी बढ़ाई जाएगी। भोपाल का राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में रैगिंग व मारपीट जैसे विवादों का गढ़ बनते जा रहा है। पिछले साल सात मामले यूजी की रैगिंग हेल्पलाइन में दर्ज हुए हैं। वहीं इस साल अब तक आठ माह में आठ से अधिक मामले दर्ज हो गए। इस पर अंकुश लगाने के लिए आरजीपीवी के कुलगुरु ने पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर विवि में पुलिस चौकी बनाने के लिए कहा है।साथ ही विवि ने यूजीसी से रैगिंग के रोकथाम के लिए जारी की गई गाइडलाइन को हर जगह चस्पा किया जा रहा है।साथ ही कनिष्ठ व वरिष्ठ विद्यार्थियों को रैगिंग में शामिल होने पर उसके दुष्परिणाम को समझाया जा रहा है। इस साल राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय(एनएलआइयू) में दो अौर बरकतउल्लाह विवि में चार मामले सामने आए हैं। राजधानी के शैक्षणिक संस्थानों में बीते आठ माह में करीब 15 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। विद्यार्थियों को अलग-अलग छात्रावास में रखा जाए यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को छात्रावास में इस सत्र से जूनियर और सीनियर विद्यार्थियों को अलग-अलग रखने के लिए निर्देश दिए हैं। विश्वविद्यालयों ने इसका पालन भी इस सत्र से करना शुरू कर दिया है। आरजीपीवी, बीयू, एनएलआइयू व मैनिट सभी संस्थानों में जूनियर को अलग छात्रावास में रखा जा रहा है। आरजीपीवी विद्यार्थियों को दंडित भी कर रहा है। इसके अलावा सभी विद्यार्थियों से एंटी-रैगिंग की अंडरटेकिंग लेकर जमा कराया जा रहा है। इन संस्थानों में हाल में हुई रैगिंग की घटनाएं     आरजीपीवी में 24 जुलाई को जूनियर छात्र के साथ मारपीट हुई। आरोपित विद्यार्थियों पर कार्रवाई की गई।     दो अगस्त को आरजीपीवी के यूआइटी और छात्रावास के विद्यार्थियों के बीच विवाद हिंसक हुआ।छह विद्यार्थियों को छात्रावास से निष्कासित किया गया।     आठ सितंबर को जूनियर छात्राओं प्रथम वर्ष की छात्राओं के साथ रैगिंग किया।मामले में दो छात्राओं को छात्रावास से निष्कासित और तीन छात्राओं पर अर्थ दंड लगाया गया।     बीयू के छात्रावास में 20 जुलाई को जूनियर को शराब पिलाकर कैबरे डांस कराया गया।आरोपिताें को छात्रावास से निष्कासित किया गया।     एनएलआइयू में बीते 15 दिन के अंदर दूसरी बार मारपीट और रैगिंग की घटनाएं हुई हैं।दोनों मामलों में संस्थान की एंटी रैगिंग कमेटी ने कोई कार्यवाही नहीं की है। यह भी है रैगिंग     विद्यार्थी को रंग-रूप या पहनावे पर टिप्पणी कर प्रताड़ित करना     नस्ल, पारिवारिक पृष्ठभूमि, आर्थिक स्थिति, क्षेत्रीयता, भाषा या जाति को लेकर अपमानित करना     मौखिक रूप से अपमान करना, सामाजिक बहिष्कार का डर पैदा करना भी रैगिंग     वॉट्सएप ग्रुप बनाना भी रैगिंग मानी जाएगी     जूनियर को धमकाने पर भी कार्यवाही की जाएगी।     किसी भी तरह का शारीरिक या मानसिक तनाव भी रैगिंग है। रैगिंग करने पर यह मिलेगी सजा     कक्षा में उपस्थित होने और शैक्षिक अधिकारियों से निलंबन।     छात्रवृत्ति सहित अन्य लाभों से वंचित किया जाएगा।     किसी टेस्ट या परीक्षा सहित अन्य मूल्यांकन प्रक्रिया से अनुपस्थित किया जाएगा।     रिजल्ट रोका जाएगा।     छात्रावास से निष्कासित कर प्रवेश भी रद किया जाएगा।     संस्था से चार सत्रों तक के लिए निष्कासन करना। यहां करें शिकायत     यूजीसी का टोल फ्री नंबर 1800-180-5522     कुलगुरु का फोन नंबर- 0755-2742001     कुलसचिव का फोन नंबर- 0755-2734913,2734913     फैक्स नंबर-0755-2742006, ईमेल आईडी-registrar@rgtu.net     अधिष्ठाता छात्र कल्याण फोन नंबर-2678870, ईमेल आईडी-dsw@rgtu.net रात में हॉस्टल में किसी को नहीं मिलेगा प्रवेश     रैगिंग की घटनाओं पर रोकने के लिए रात में छात्रावाओं व परिसर सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। फ्लाइंग स्क्वायड छात्रावासों की गतिविधियों पर नजर रखने और निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। छात्रावास में रात में किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जाएगा। – सुधीर भदौरिया, डायरेक्टर, यूआईटी आरजीपीवी दो-दो घंटे की शिफ्ट में निरीक्षण करेगें     एंटी रैगिंग कमेटी की ओर से वरिष्ठ विद्यार्थियों को रैगिंग के दुष्परिणाम समझाए जा रहे हैं। छात्रावास में रात को दो-दो घंटे की शिफ्ट में टीम निरीक्षण करेगी। – डॉ. शैलेंद्र जैन, डीन स्टूडेंट वेलफेयर, मैनिट  

निगम व्यवस्था में बदलाव: भोपाल में बनेंगी चार नई बिल्डिंग परमिशन सेल्स

भोपाल  भोपाल को मेट्रोपॉलिटन रीजन (metropolitan region) बनाने की दिशा में नगरीय प्रशासन संचालनालय ने एक कदम और आगे बढ़ाया है। संचालनालय ने नगर निगम कमिश्नर को पत्र जारी कर शहर में मौजूद बीएमसी के सभी प्रकार के इंजीनियर्स की लिस्ट तैयार करने कहा है। इंजीनियर वर्ग को मेट्रोपॉलिटन रीजन में अलग-अलग जिम्मेदारी दी जानी हैं। एमपीआर में चार बिल्डिंग परमिशन सेल (metropolitan region) बनाई जानी हैं जिसके लिए सिविल केडर से चार सिटी प्लानर बनेंगे। सीवेज, पार्किंग, रोड, ट्रैफिक, लाइटिंग जैसे कामों के लिए अलग-अलग कार्यपालन यंत्री निर्धारित किए जाएंगे जिनके निर्देशन में टीम काम करेगी। अभी नगर निगम 85 वार्ड में काम चलाउ व्यवस्था पर टिका हुआ है। एक इंजीनियर के भरोसे तमाम काम एक इंजीनियर के भरोसे तमाम काम छोड़ दिए गए हैं। उसमें भी योग्यता का ध्यान नहीं रखा गया है। निगम के सभी विभागों में बरसों से काम करने वाले इंजीनियरों के विभाग आपस में बदल दिए गए हैं। आदेश में स्वच्छ भारत, सीवेज प्रबंधन, झील संरक्षण, सिविल डिपार्टमेंट, भवन अनुज्ञा शाखा, वाटर सप्लाई डिपार्टमेंट, हाउङ्क्षसग फॉर ऑल, सड़क, बिजली पानी से जुड़े अन्य विभागों के इंजीनियरों को आपस में बदला है। बिजली वालों को सीवेज का काम भोपाल नगर निगम में आरके त्रिवेदी मूलपद(उपयंत्री) विद्युत थे। इन्हें प्रभारी कार्यपालन यंत्री, सीवेज एवं एसबीएम शाखा बनाया गया। अजय मालवीय, मूलपद उपयंत्री मेकेनिकल को प्रभारी कार्यपालन यंत्री जलकार्य, सुरेश कुमार राजेश सिविल इंजीनियर हैं लेकिन इन्हें हुजूर विधानसभा में बिजली प्रभार दिया गया है। एनके डेहरिया कार्यपालन यंत्री उखार विस में सिविल इंजीनियर हैं। डेहरिया से अभी भी भवन अनुज्ञा शाखा में सहायक यंत्री का काम जी टू कंसोल के जरिए करवा रहे हैं। अनिल कुमार साहनी, सिविल इंजीनियर हैं।

14 सितंबर से MP में मॉनसून फिर होगा सक्रिय, मौसम विभाग ने दिया भारी बारिश का चेतावनी संदेश

भोपाल मध्यप्रदेश में मॉनसून एक बार फिर से जोर पकड़ने को तैयार है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में बारिश का दौर थम सा गया है। आज से मध्यप्रदेश फिर से बारिश में भीगने वाला है। मौसम विभाग का कहना है कि कल से 17 सितंबर तक मध्यप्रदेश में बारिश का दौर जारी रहेगा।। मौसम विभाग की भविष्यवाणी मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 14-15 सितंबर से मध्यप्रदेश में मॉनसून फिर से रफ्तार पकड़ेगा। इंदौर, जबलपुर और नर्मदापुरम संभागों में तेज बारिश की संभावना है, जिसके लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा रीवा, सागर और शहडोल संभागों में भी भारी बारिश हो सकती है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे निम्न दबाव क्षेत्र के कारण यह बारिश का दौर 17 सितंबर तक जारी रह सकता है। इस साल जमकर बरस रहा मॉनसून आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश में इस साल मॉनसून ने उम्मीद से ज्यादा मेहरबानी दिखाई है। 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 36.3 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य 33.4 इंच से 9% अधिक है। पूर्वी मध्यप्रदेश में 6% और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 12% ज्यादा बारिश हुई है। मंडला जिला 47.56 इंच बारिश के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जबकि भोपाल में 43 इंच से अधिक बारिश हो चुकी है।

सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम रिपोर्ट 2023: मध्य प्रदेश में 0-9 वर्ष के बच्चों का अनुपात घटकर 42.2% से 24.2% हुआ

भोपाल  मध्य प्रदेश में 14 वर्ष तक के बच्चों की संख्या में तेजी से गिरावट हो रही है. बीते 52 सालों में प्रदेश में बच्चों की जनसंख्या में 42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि बच्चों की संख्या में यह गिरावट अचानक से नहीं है. मध्य प्रदेश में 0-9 साल तक के बच्चों की संख्या में गिरावट का दौर 1971 से चल रहा है. इसका खुलासा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम स्टेटिकल रिपोर्ट 2023 में हुआ है. साल 1991 के बाद तेजी से कम हो रही संख्या एसआरएस की रिपोर्ट में बताया गया है कि मध्य प्रदेश में 0 से 14 साल के बच्चों की जनसंख्या में क्रमिक रूप से गिरावट आ रही है. साल 1971 में इस उम्र वर्ग के बच्चों की संख्या कुल जनसंख्या की 42.2 प्रतिशत थी. वहीं साल 1981 में कुल जनसंख्या की 38.1 प्रतिशत पर पहुंच गई. 1991 में 0 से 14 साल तक के बच्चों की जनसंख्या 36.3 प्रतिश थी, लेकिन साल 2023 में ऐसे बच्चों की संख्या 24.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है. यानि कि 1971 से 2023 के बीच में 0 से 9 साल तक के बच्चों की जनसंख्या में 42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. युवाओं और बुजुर्गों की संख्या में बढ़ोत्तरी एसआरएस 2023 की रिपोर्ट में भले ही मध्य प्रदेश में बच्चों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. लेकिन युवाओं और बुजुर्गों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है. 15 से 59 वर्ष के आर्थिक रूप से सक्रिय जनसंख्या का अनुपात साल 1971 में 53.4 प्रतिशत था, जो साल 1981 में बढ़कर 56.3 प्रतिशत हो गया. वहीं साल 1991 से 2023 के दौरान ऐसे आर्थिक रूप से सक्रिय जनसंख्या का प्रतिशत 57.7 से बढ़कर 66.1 हो गया है. वहीं 60 प्लस और 65 वर्ष या इससे अधिक आयु वर्ग के बुजुर्गों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. महिला-पुरुष दोनों की जनसंख्या में सुधार यदि 15 से 59 साल तक के महिला और पुरुष की बात करें तो दोनों की जनसंख्या में सुधार देखा गया है. ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों का प्रतिशत साल 2022 में 7.7 की तुलना में साल 2023 में बढ़कर 7.8 हो गया है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का प्रतिशत साल 2022 में 8.2 था, जो साल 2023 में 9.0 प्रतिशत हो गया है. इसी तरह शहरी क्षेत्रों में 15 से 59 साल तक के पुरुषों की संख्या साल 2022 में 8 प्रतिशत की तुलना में साल 2023 में 8.5 प्रतिशत बढ़ गई है. जबकि इसी आयु वर्ग की महिलाओं की संख्या में साल 2022 की तुलना में 2023 में 8.6 की तुलना में 9.5 प्रतिशत हो गई है. बच्चों के मामले में मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश में भले ही क्रमिक रूप से 0 से 14 वर्ष के बच्चों की संख्या में गिरावट हो रही है. इसके बावजूद मध्य प्रदेश बच्चों की संख्या के मामले में देश में उत्तर प्रदेश के साथ सयुंक्त रूप से तीसरे स्थान पर है. देश में सबसे अधिक बच्चों की संख्या बिहार में 11.3 प्रतिशत, दूसरे नंबर पर राजस्थान में 9.5 प्रतिशत और मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में बच्चों की जनसंख्या का प्रतिशत 9.2 है. वहीं मध्य प्रदेश के बाद तमिलनाडु में 5.7 प्रतिशत, पंजाब में 6 प्रतिशत और केरल में 0 से 14 वर्ष तक के बच्चों की संख्या का प्रतिशत 6.2 है.