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अब साबित करना होगा काबिलियत! सुप्रीम कोर्ट ने कहा– 3 लाख शिक्षक दो साल में TET पास करें

भोपाल  सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को लेकर नये नियम का फैसला सुना दिया है। जिसके बाद अकेले एमपी में तीन लाख शिक्षकों की चिंता बढा़ दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि जिनकी सेवा अवधि पांच साल से ज्यादा बाकी है, उन्हें दो साल में TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की परीक्षा पास करनी होगी। अगर इस नियम को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो इनके प्रमोशन से लेकर नौकरी तक का अधिकार संकट में पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का सबसे ज्यादा असर भी मध्य प्रदेश के शिक्षकों पर पड़ेगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए ये निर्देश जारी किए हैं। बता दें कि इससे पहले नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने शिक्षकों को TET परीक्षा पास करने के लिए पांच साल का समय दिया था। इसे बाद में 4 साल के लिए और बढ़ाया गया था। NCTE के इस निर्णय के खिलाफ उम्मीद्वारों ने कोर्ट का रुख किया था। एमपी के शिक्षकों पर क्यों लटकी तलवार? दरअसल, 1984-1990 तक एमपी में शिक्षकों की भर्ती (Teachers Appointment) मिनी पीएससी के माध्यम से की जाती थी। बाद में इनकी नियुक्ति का अधिकार नगर निगम और पंचायतों को मिल गया। इस प्रक्रिया के तहत नियुक्त किए गए शिक्षकों को तब शिक्षाकर्मी कहा जाने लगा। वहीं 2018 में इनका संविलियन अध्यापकों के रूप में हुआ। लेकिन इनमें से किसी ने भी टेट पात्रता परीक्षा पास नहीं की है। 2018 के बाद से प्रदेशभर के शिक्षकों की भर्ती कर्मचारी चयन मंडल कर रहा है। इस नियुक्ति के तहत ही TET परीक्षा पास करना अनिवार्य किया गया। TET नहीं तो जाएगी नौकरी, नहीं होगा प्रमोशन बता दें कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शिक्षकों को सेवा में बने रहने और प्रमोशन पाने के लिए TET परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा जिन शिक्षकों की सेवाएं अभी पांच साल से ज्यादा अवधि तक बची हैं, वे सभी इस दायरे में आते हैं। जो भी शिक्षक इस परीक्षा को पास नहीं करेगा, उसे कंपलसरी रिटायरमेंट लेना होगा या इस्तीफा देना होगा। कोर्ट ने टीईटी को दो साल में पास करने की समय सीमा तय कर दी है। इन्हें मिली राहत हालांकि बेंच ने ऐसे शिक्षकों को राहत दी है, जिनकी नौकरी 5 साल की बची है। लेकिन इन्हें प्रमोशन का अधिकार नहीं मिलेगा। लेकिन यदि ये शिक्षक प्रमोशन चाहते हैं, तो इन्हें TET परीक्षा पास करनी होगी। अल्पसंख्यक संस्थानों का मामला बड़ी बेंच को सौंपा इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यक संस्थानों को लेकर फिलहाल इस नियम को लागू करने से राहत दी है। इन संस्थानों के लिए ये मामला बड़ी बेंच को सौंप दिया गया है। 2014 के फैसले में अल्पसंख्यक स्कूलों को आरटीई से बाहर रखने पर सवाल उठाया गया। कोर्ट ने कहा कि इससे समान और समावेशी शिक्षा को नुकसान पहुंचा है। कई दस्तावेजों से यह जानकारी मिली है कि स्कूल छूट पाने के लिए खुद को अल्पसंख्यक घोषित कर रहे हैं। जिससे बच्चों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। क्यों बदला नियम? अब तक कई राज्यों में, खासकर अल्पसंख्यक स्कूलों में, टीईटी की अनिवार्यता को दरकिनार किया जाता रहा था। 2014 में सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश ने अल्पसंख्यक स्कूलों को आरटीई (शिक्षा का अधिकार कानून) से बाहर रखा था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश में साफतौर पर कहा गया है कि आरटीई की छूट अब खत्म, यानी सभी स्कूलों को एक ही मानक पर खड़ा होना होगा। इस फैसले का सीधा मतलब है कि शिक्षण की गुणवत्ता पर अब कोई समझौता नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि 'बच्चों का शिक्षा पाने का अधिकार सर्वोपरि है। शिक्षकों को यह साबित करना होगा कि वे इस जिम्मेदारी के योग्य हैं।' किस पर लागू होगा फैसला?       जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से ज्यादा बची है, उन्हें अगले दो साल में टीईटी पास करना ही होगा।     जिनकी सेवा पांच साल से कम बची है, उन्हें छूट दी गई है। लेकिन प्रमोशन पाना है तो TET पास करना होगा।     नगर निगम, पंचायत और अल्पसंख्यक स्कूलों के शिक्षक, सभी को इस दायरे में लाया गया है।     लेकिन फिलहाल अल्पसंख्यक स्कूलों में इसे लागू नहीं किया गया है। अल्पसंख्यक स्कूल मामलों को बड़ी बेंच को सौंपा गया है। तीन लाख शिक्षकों पर संकट मध्यप्रदेश में ही करीब 3 लाख शिक्षक इस आदेश से सीधे प्रभावित हो रहे हैं। इनमें से कई ऐसे हैं जो दो दशक से ज्यादा समय से पढ़ा रहे हैं, लेकिन कभी पात्रता परीक्षा देने की जरूरत महसूस नहीं की। अब वही शिक्षक नौकरी बचाने की चुनौती के सामने खड़े हैं। अब नौकरी बचाने पास करनी होगी TET भोपाल की एक शिक्षिका वंदना सिंह का कहना है कि हमने वर्षों तक बच्चों को पढ़ाया है, जब यहां TET पास करना अनिवार्य किया, तभी TET परीक्षा पास कर ली थी। अब ऐसे शिक्षक जिन्होंने TET पास नहीं की उन्हें नौकरी बचाने के लिए परीक्षा देनी पड़ेगी। यह आसान नहीं है, लेकिन मजबूरी है। गुणवत्ता सुधार की पहल -सरकार और शिक्षा विशेषज्ञ इस फैसले को गुणवत्ता सुधार के नजरिए से देख रहे हैं। -अब हर शिक्षक को अपनी योग्यता साबित करनी होगी। -पढ़ाई में प्रोफेशनलिज़्म बढ़ेगा। -बच्चों को प्रशिक्षित और दक्ष शिक्षक मिलेंगे। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भले ही शिक्षकों के लिए मुश्किल हो, लेकिन लंबे समय में यह स्कूल शिक्षा की रीढ़ को मजबूत करेगा। शिक्षक समुदाय की चिंता फैसले के बाद कई शिक्षक संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहले से सेवा कर रहे शिक्षकों को अचानक परीक्षा में झोंकना अन्यायपूर्ण है। वे मांग कर रहे हैं कि सरकार इसके लिए विशेष ट्रेनिंग, कोचिंग और सपोर्ट सिस्टम उपलब्ध कराए ताकि, वे दोबारा पढ़ाई में सक्षम हो सकें। फेल हुए तो जाएगी नौकरी, सफल हुए तो नई पहचान यह फैसला अब सिर्फ नियम नहीं, बल्कि नौकरी और भविष्य की लड़ाई बन गया है। जिन शिक्षकों ने सालों तक बिना टीईटी पढ़ाया, उन्हें अब परीक्षा देनी होगी। असफल होने पर उन्हें रिटायरमेंट तक नौकरी का अवसर नहीं … Read more

इंदौर-उज्जैन रोड पर सिंहस्थ की दृष्टि से तैयार होगा नया ग्रीन फील्ड मार्ग

भोपाल मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में अहम फैसले लिए गए। तय हुआ कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में नल से शुद्ध जल पहुंचने के लिए लागू जल जीवन मिशन में अब पुनरीक्षित परियोजनाओं के लिए केंद्रांश ना मिलने के कारण पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। 8,358 पुनरीक्षित परियोजनाओं के लिए 2,813 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे इन परियोजनाओं से जुड़े सात लाख परिवारों को लाभ मिलेगा। यह प्रस्ताव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने रखा था, जिसके स्वीकृति दी गई। 87 हजार करोड़ से अधिक की मिल चुकी है स्वीकृति 26 सितंबर 2023 को प्रदेश के संपूर्ण ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन का निर्णय लिया गया था। अब तक प्रदेश में 20,765 करोड़ रुपये की लागत की 27,990 एकल ग्राम नल जल योजना और 60,786 करोड़ रुपये लागत वाली 148 समूह जल प्रदाय योजनाओं की स्वीकृति दी गई हैं।   15,947 एकल ग्राम योजनाएं पूरी हो चुकी हैं और शेष 12,043 के काम विभिन्न चरणों में हैं। विभिन्न कारणों से 8,358 योजनाओं के पुनरीक्षण की आवश्यकता हुई है। यदि पुनरीक्षण नहीं किया जाता है तो सात लाख परिवार घरेलू नल कनेक्शन से वंचित रह जाएंगे। इसे देखते हुए पुनरीक्षित लागत 9,027 करोड़ रुपये की स्वीकृति देने की अनुशंसा स्थायी वित्त समिति ने की। मूल स्वीकृत लागत 6,213.76 करोड़ रुपये है और जो वृद्धि हो रही है, वह राशि केंद्र सरकार से प्राप्त नहीं होगी, इसलिए 2,813.21 करोड़ रुपये का भार प्रदेश सरकार वहन करेगी।   इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग पर फोरलेन, सर्विस रोड भी दिसंबर 2024 में स्वीकृत     इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग (48.05 किमी) अब सर्विस रोड के साथ बनेगा। इसमें 34 अंडर पास, दो फ्लाइ ओवर, एक रेलवे ओवर ब्रिज, सात मध्यम पुल के साथ दो बड़े जंक्शन बनाए जाएंगे।     परियोजना की लागत 2935.15 करोड़ रुपये आएगी। निर्माणकर्ता एजेंसी को 15 साल तक इसका रखरखाव करना होगा। यह मार्ग 2028 में होने वाले सिंहस्थ की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है।     साथ ही उज्जैन शहर में हरिफाटक रेलवे क्रासिंग पर 980 मीटर लंबाई के नए फोर लेन रेलवे ओवर ब्रिज (लागत 371 करोड़) निर्माण की स्वीकृति भी दी गई। दो लेन का बनेगा नर्मदापुरम-टिमरनी मार्ग नर्मदापुरम-टिमरनी (72.18 किलोमीटर) मार्ग का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी माडल पर करने की स्वीकृति दी गई। परियोजना में दो अंडर पास, चार बड़े पुल, 37 मध्यम पुल, 14 वृहद और 52 मध्यम जंक्शन निर्माण प्रस्तावित हैं। मार्ग निर्माण की लागत 972 करोड़ आएगी। कंपनी को 17 वर्ष तक रखरखाव का काम करना भी होगा।

नई बजटिंग प्रणाली से होगा मध्यप्रदेश का सर्वांगीण विकास

शून्य आधारित बजटिंग और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट वाला पहला राज्य बनेगा मध्यप्रदेश निवेश एवं सर्वांगीण विकास पर होगा फोक्स भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश तेजी से औद्योगिकीकरण और विकास की नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार का फोकस केवल आर्थिक वृद्धि पर ही नहीं, बल्कि रोज़गार सृजन, आधारभूत संरचना निर्माण और सामाजिक न्याय पर भी है। इसी दिशा में सरकार ने मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिये बजट को अगले 5 वर्ष में दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इससे हर क्षेत्र में निवेश और जनकल्याणकारी योजनाओं को गति मिलेगी। साथ ही बढ़ते बजट   प्रावधान में विभागों के बजट पर अनुशासन लगाने की महत्वपूर्ण पहल भी की जा रही है। इसी कड़ी में अब राज्य सरकार ने वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक विकास की ठोस रणनीति तैयार करते हुए शून्य आधारित बजटिंग (Zero Based Budgeting) और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि यह पहल “विकसित मध्यप्रदेश 2047” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में ठोस आधार बनेगी और देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श साबित होगी। श्री देवड़ा ने कहा “शून्य आधारित बजटिंग और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट से न केवल प्रदेश की योजनाओं का ठोस मूल्यांकन होगा, बल्कि प्रत्येक खर्च का सीधा संबंध समाज की आवश्यकताओं और राज्य की प्राथमिकताओं से जोड़ा जा सकेगा। यह कदम मध्यप्रदेश को विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश 2047 की दिशा में सबसे मजबूत आधार प्रदान करेगा।” महत्वपूर्ण है यह पहल अब तक अधिकांश राज्यों में पारंपरिक बजटिंग पद्धति लागू होती रही है, जिसमें पिछले वर्षों का व्यय आधार बनते थे। इसके विपरीत 'जीरो बेस्ड बजटिंग' में हर योजना को शून्य से शुरू कर उसकी उपयोगिता सिद्ध करनी होगी। इससे अप्रभावी योजनाएँ स्वतः समाप्त होंगी और संसाधनों का इष्टतम उपयोग संभव होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने इस प्रणाली को अपनाया है, जहाँ इससे गुड गवर्नेंस और फाइनेंशियल डिसिप्लिन को मजबूती मिली है। अब मध्यप्रदेश इस दिशा में भारत में अग्रणी राज्य बनकर अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल पेश कर रहा है। रोलिंग बजट से लगातार “फॉरवर्ड लुकिंग” दृष्टि रोलिंग बजट पद्धति से 2026-27, 2027-28 और 2028-29 के लिए बजट बनेगा और हर वर्ष इसकी समीक्षा कर नए अनुमानों को जोड़ा जाएगा। इससे योजनाएँ हमेशा आगे की ओर देखने वाली होगी और अल्पकालिक दबाव से मुक्त होकर दीर्घकालिक विकास को गति मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मॉडल कॉर्पोरेट जगत में पहले से सफल साबित हो चुका है, और राज्य शासन में इसे लागू करना नीतिगत दूरदर्शिता का प्रतीक है। वित्तीय अनुशासन और सामाजिक न्याय वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 16% और अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 23% बजट सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही वेतन, पेंशन , भत्तों की गणना में पारदर्शिता हेतु नई गाइडलाइन लागू होंगी। इसके अतिरिक्त ऑफ-बजट व्यय और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के वित्तीय प्रभाव को भी अब राज्य बजट में समाविष्ट किया जाएगा। यह व्यवस्था वित्तीय अनुशासन के साथ जनहित में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में महत्व देश के अन्य राज्यों में अभी भी पारंपरिक बजटिंग पद्धति पर निर्भरता बनी हुई है। मध्यप्रदेश का यह निर्णय वित्तीय सुधारों की दिशा में गेम-चेंजर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो आने वाले वर्षों में केंद्र और अन्य राज्य भी इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

मंत्री सारंग ने की राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ की गतिविधियों की समीक्षा

भोपाल  सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने मंगलवार को मध्यप्रदेश राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए कहा कि उपभोक्ता संघ को आर्थिक रूप से सशक्त और प्रासंगिक बनाने के लिये अभिनव कदम उठाने होंगे। संघ को पुनर्जीवित करने के लिये सीपीपीपी (को-ऑपरेटिव पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल को अपनाया जाए, जिससे संघ की व्यावसायिक गतिविधियों में आधुनिकता और प्रतिस्पर्धात्मकता आ सकेगी। मंत्री श्री सारंग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि उपभोक्ता संघ को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने की दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। इसके अंतर्गत बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के साथ कार्य करने की संभावनाओं को तलाशा जाए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता संघ द्वारा संचालित उपभोक्ता केंद्रों को बहुउद्देशीय बनाया जाए, क्योंकि ये केंद्र शहरों की प्रमुख लोकेशन्स पर स्थित हैं और बड़े ब्रांड्स को जोड़ने के लिये आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। बैठक में मंत्री श्री सारंग ने उपभोक्ता संघ की वर्तमान आर्थिक स्थिति, व्यवसाय, मानव संसाधन, और व्यवसाय वृद्धि की संभावनाओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिये कि उपभोक्ता संघ को ‘सहकारिताओं से सहकार’ के सिद्धांत पर कार्य करते हुए प्रदेश की अन्य सहकारी संस्थाओं के साथ व्यवसायिक गतिविधियों को जोड़ने की रूपरेखा तैयार करनी चाहिए। खाद्यान्न उपार्जन से संबंधित आवश्यक सामग्रियों के प्रदाय के लिए उपभोक्ता संघ को नोडल एजेंसी नियुक्त करने के विषय पर भी चर्चा हुई। सुझाव दिया गया कि पैक्स और विपणन समितियों द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदी के दौरान उपार्जन में उपयोग होने वाली सामग्रियां विभिन्न जिलों में उनकी मांग के अनुसार उपभोक्ता संघ उपलब्ध कराए। इससे संघ को प्राप्त होने वाला मार्जिन उसकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा और साथ ही उपार्जन करने वाली समितियों को पूरे प्रदेश में गुणवत्ता युक्त सामग्रियां न्यूनतम मूल्य पर उपलब्ध हो सकेंगी। मंत्री श्री सारंग ने विस्तृत कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिये। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि सहकारी उपभोक्ता संघ को पुनः सक्रिय और प्रगतिशील बनाने के लिये हर स्तर पर ठोस और दूरगामी कदम उठाए जाएं। बैठक में प्रमुख सचिव सहकारिता श्री डी.पी. आहूजा, आयुक्त सहकारिता श्री मनोज पुष्प, प्रबंध संचालक उपभोक्ता संघ श्री ऋतुराज रंजन, प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक श्री मनोज गुप्ता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित करने पर कैबिनेट के सदस्यों ने माना आभार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मुख्यमंत्री निवास में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित किए जाने पर मंत्रि-परिषद के सदस्यों ने शॉल और पुष्प-गुच्छ भेंट कर आभार व्यक्त किया। मंत्रियों ने कहा कि यह पहल भारतीय परंपरा, वैदिक गणना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाली है, जो प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करेगी। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम है। यह घड़ी केवल समय बताने तक सीमित नहीं है, बल्कि सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल, अभिजीत मुहूर्त और चंद्रमा की स्थिति जैसी जानकारी भी उपलब्ध कराती है। इसमें वैदिक समय के साथ-साथ भारतीय मानक समय और ग्रीनविच मानक समय का तुलनात्मक अध्ययन भी संभव है। इस अनूठी घड़ी के साथ मोबाइल एप भी तैयार किया गया है, जो 189 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है और विश्वभर के 7000 से अधिक स्थानों के लिए समय व पंचांग की जानकारी देता है। मंत्रियों ने कहा कि उज्जैन की वैदिक और सांस्कृतिक परंपरा से प्रेरित यह घड़ी मुख्यमंत्री निवास में स्थापित होना गर्व की बात है। यह पहल प्रदेश की गौरवशाली धरोहर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने के साथ युवाओं को वैदिक विज्ञान और गणना प्रणाली से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी। इस अवसर पर परिवहन, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान, ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री नारायण सिंह पवार सहित अन्य मंत्री शामिल थे।  

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई सिंहस्थ-2028 के लिए गठित मंत्रीमंडलीय समिति की बैठक

धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते हों सुनिश्चित भीड़ प्रबंधन, आवागमन, पार्किंग और पदयात्रियों की सुविधा का रखे विशेष ध्यान कचरा प्रबंधन के लिए अद्यतन तकनीक का हो उपयोग भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ-2028 महापर्व के सुव्यवस्थित संचालन के लिए दीर्घकालीन कार्ययोजना का समय-सीमा में क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाये। संबंधित विभाग उनके कार्यक्षेत्र में जारी गतिविधियों की निरंतर समीक्षा कर यह सुनिश्चित करें कि सभी निर्माण कार्य दिसम्बर 2027 तक अनिवार्यत: पूर्ण हों। साथ ही भीड़ प्रबंधन तथा समस्त प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक आयोजनों के लिए आवश्यक समन्वय भी इस अवधि तक सुनिश्चित कर लिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में सिंहस्थ-2028 के लिए गठित मंत्रीमंडलीय समिति की चतुर्थ बैठक में ये निर्देश दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सम्पतिया उइके, खाद्य, नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर (स्वतंत्र प्रभार), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप, संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टैटवाल, नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव उपस्थित थे। निर्माण कार्यों और व्यवस्थाओं में स्थानीय निवासियों को बनाएं सहभागी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ संबंधी निर्माण कार्यों तथा नगर के भीतर के मार्गों के चौड़ीकरण कार्य व अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन में स्थानीय निवासियों को सहभागी बनाया जाए और उनके अभिमत को भी महत्व दिया जाए। सिंहस्थ के दौरान पदयात्रियों की सुविधा और वाहनों की पार्किंग का विशेष ध्यान रखा जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इसके संबंध में सूचनाओं की सरल, सहज उपलब्धता सभी तक हो। सिंहस्थ अवधि में स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कचरा प्रबंधन के लिए अद्यतन तकनीक का उपयोग किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बेहतर प्रबंधन के लिए उज्जैन को सात जोन में विभाजित करते हुए पेयजल, स्वच्छता, आवागमन, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य, आवास आदि का प्रबंधन किया जाए। नगर निगम और विकास प्राधिकरण सहित अन्य संबंधित संस्थाओं की क्षमता विकास के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएं। उज्जैन सहित खण्डवा, मंदसौर और खरगोन में भी होंगे कार्य बैठक में कुल 2675 करोड़ रूपए लागत के 33 कार्य स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किए गए। इनमें 25 कार्य उज्जैन, 3 खण्डवा, 2 मंदसौर और 3 खरगोन में होने हैं। इनमें नगरीयविकास एवं आवास विभाग के 21, लोक निर्माण के 6, रेलवे के 2 एवं पर्यटन, गृह, एमपीआरडीसी और जल संसाधन विभाग के एक-एक कार्य शामिल हैं। 12 किलोमीटर लंबे 6 लेन मार्ग से सभी घाटों को जोड़ा जाएगा मंत्री-मण्डलीय समिति की चतुर्थ बैठक में क्षिप्रा नदी के पश्चिमी भाग पर सिंहस्थ बायपास से मेला क्षेत्र को आने वाले सभी मार्गों को कनेक्ट करते हुए नदी के पास स्थित मंदिरों और सभी घाटों को जोड़ने वाले एमआर-22 को स्वीकृति प्रदान की गई। लगभग 194 करोड़ रूपए लागत से बनने वाले 12 किलोमीटर लंबे 6 लेन मार्ग से सभी घाटों को जोड़ा जाएगा और सिंहस्थ के दौरान इसका बस रैपिट ट्रांजिट के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। इसी प्रकार सिंहस्थ बायपास से रामघाट तक पहुंचने के लिए बड़नगर रोड के विकल्प के रूप में कार्तिक मेला ग्राउण्ड से नईखेड़ी मार्ग को अनुमोदन प्रदान किया गया। लगभग 3 किलोमीटर लंबे 36.59 करोड़ रूपए लागत के इस फोरलेन मार्ग से सिंहस्थ बायपास से शंकराचार्य चौराहे तक के ट्रैफिक कंजेशन में कमी आएगी। इसी प्रकार इंदौर उज्जैन रोड से क्षिप्रा नदी के पश्चिम भाग को जोड़ने के लिए शनि मंदिर से जीवनखेड़ी रोड, इंदौर रोड से आने वाले श्रद्धालुओं को त्रिवेणी घाट और शनि मंदिर तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में उपयोग किए जाने वाले शांतिधाम चौराहा से शनि मंदिर रोड और महाकाल मंदिर को रामघाट से सीधे जोड़ने व महाकाल आने वालों को चौड़ा मार्ग उपलब्ध कराने के लिए महाराज वाडा चौराहा से हरसिद्धि मंदिर चौराहा क्षिप्रा नदी तक के रोड को समिति ने अनुमोदन प्रदान किया। सुगम यातायात के लिए हो रही है पुख्ता व्यवस्था मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में नरसिंहघाट रोड से दत्त अखाड़ा जोन, भूखीमाता मंदिर और नदी के पश्चिमी भाग को जोड़ने में वैकल्पिक रोड के रूप में उपयोग होने वाले कर्कराज पार्किंग से भूखीमाता मार्ग, लालपुल से एमआर-22 तक की 1.5 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग, भृतहरीगुफा से ऋणमुक्तेश्वर के बीच सुगम यातायात प्रबंधन के लिए 2 लेन मार्ग, गढ़कालिका मंदिर से पीर मत्स्येंद्रनाथ समाधि तक 2 लेन मार्ग को स्वीकृति प्रदान की गई। इसी प्रकार सुगम यातायात की पुख्ता व्यवस्था के लिए जूना सोमवारिया से पिपली नाका, अंकपात चौराहा मार्ग तक फोरलेन मार्ग, पिपली नाका से गढ़कालिका मंदिर ओखलेश्वर शमशान तक 6 लेन और सर्विस लेन, भैरवगढ़ जेल चौराहा से पिपलीना का 6 लेन सर्विस लेन, महाकाल पार्किंग से चौबीस खंबा सड़क तक फोरलेन, हरसिद्धि पाल से रामघाट रोड चौड़ीकरण, नीलकंठ द्वार से महाकाल चौराहा तक सड़क चौड़ीकरण और मकाड़िया आम चौराहा से विराट नगर होते हुए कानीपुरा-तराना मार्ग तक सड़क निर्माण कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई। पर्यटन विभाग को सौंपा जाएगा ग्रांड होटल परिसर बैठक में क्षिप्रा नदी पर 122 करोड़ रूपए लागत से लगभग 9 किलोमीटर लंबाई के घाटों के उन्नयन कार्य, छत्री चौक स्थित रीगल टॉकीज पर पार्किंग, प्लाजा व दुकानों के निर्माण कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके साथ ही ग्रांड होटल परिसर को पर्यटन विभाग को हस्तांतरित करने के उद्देश्य से अधिकारियों और स्टाफ क्वार्टर निर्माण तथा शहर के प्रमुख मार्गों के सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित परिवारों के लिए पंवासा में भूखंड आवंटन के लिए अधोसंरचना विकास के उद्देश्य से आवश्यक अधोसंरचना सुविधाएं विकसित करने के लिए 10 करोड़ 34 लाख रूपए की स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में उज्जैन में रेलवे स्टेशन पर सुगम आवागमन के लिए पुल निर्माण, नईखेड़ी रेलवे स्टेशन, पंवासा फ्लैग स्टेशन, चिंतामन गणेश रेलवे स्टेशन कनेक्टिविटी के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। ओंकारेश्वर में वर्तमान झूला पुल के समांतर होगा नए पुल का निर्माण बैठक में ओंकारेश्वर … Read more

नागरिक आपूर्ति निगम के कर्मचारियों को भी मिलेगा चतुर्थ समयमान वेतनमान

राज्य शासन द्वारा घोषित ग्रह भाड़ा भत्ता भी मिलेगा खाद्य मंत्री श्री राजपूत की अध्यक्षता में संचालक मण्डल की बैठक में हुआ निर्णय भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में नागरिक आपूर्ति निगम और भण्डार गृह निगम के संचालक मण्डल की बैठक में कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। अब नागरिक आपूर्ति निगम के कर्मचारियों को भी चतुर्थ समयमान वेतनमान मिलेगा। साथ ही गृह भाड़ा भत्ते भी राज्य शासन द्वारा घोषित दरों के अनुसार दिये जायेंगे। खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि कर्मचारियों के हितों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। कर्मचारियों को भी विभाग के हित में बेहतर से बेहतर कार्य कर अपनी उपयोगिता सिद्ध करनी होगी। अनुग्रह राशि हुई दोगुनी से भी अधिक बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि कॉर्पोरेशन के कर्मियों की सेवा में रहते हुए मृत्यु होने पर परिवार को अनुग्रह राशि दोगुनी से भी अधिक दी जायेगी। वर्तमान में 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि दी जाती है। अब अधिकतम एक लाख 25 हजार रुपये तक अनुग्रह राशि दी जायेगी। निगम में सेवा पदोन्नति नियम-2025 का भी प्रावधान किया जायेगा। ऐप के माध्यम से होगी भण्डार गृहों की मॉनीटरिंग भण्डार गृह निगम की संचालक मण्डल की बैठक में निर्णय लिया गया कि भण्डार गृहों की मॉनीटरिंग के लिये ऐप बनाया जायेगा। इस ऐप के माध्यम से भण्डारित अनाज की मात्रा, उसकी क्वालिटी आदि का सत्यापन किया जा सकेगा। अधिकारी भण्डार गृह का निरीक्षण करने का फोटो ऐप में अपलोड करेंगे। जियो टेगिंग भी रहेगी। समय पर करायें भण्डार गृहों का मेंटिनेंस खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि धान का उपार्जन शुरू होने के पहले सभी भण्डार गृहों का मेंटीनेंस करवाना सुनिश्चित करें। शहरों के पास स्थित भण्डार गृहों को खाली होने की स्थिति में प्रायवेट कम्पनियों को किराये में देने की नीति बनायें। मंत्री श्री राजपूत ने रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया को समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों का परीक्षण गंभीरता से होना चाहिये। बैठक में निर्णय लिया गया कि उपार्जन कार्य में सक्रिय योगदान के आधार पर निगम के अधिकारी और कर्मचारियों को एक माह का मूल वेतन प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जाये। श्री राजपूत ने थर्ड पार्टी इन्सपेक्शन की कार्यवाही समय पर नहीं करने पर संबंधित महाप्रबंधक को नोटिस देने के निर्देश दिये। खाद्य भवन के निर्माण में लायें तेजी मंत्री श्री राजपूत ने प्रमुख अभियंता को निर्देश दिये कि खाद्य भवन के निर्माण कार्य में तेजी लायें। समय-सीमा में निर्माण कार्य पूरा करायें। साथ ही गुणवत्ता की सतत मॉनीटरिंग करें। बैठक में अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरुण शमी, एमडी श्री अनुराग वर्मा एवं संचालक मण्डल के सदस्य उपस्थित थे। 

नई दिल्ली में 3 सितम्बर को इन्वेस्टमेन्ट अपॉर्च्यूनिटीज इन पीएम मित्रा पार्क का इंटरैक्टिव सेशन होगा

बदनावर धार में 2158 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 2000 करोड़ रूपए की अनुमानित लागत से विकसित हो रहा है टेक्सटाइल हब भूमि आवंटन के लिए 11 सितम्बर तक कर सकेंगे आवेदन मध्यप्रदेश ट्रेवल मार्ट का 11 से 13 अक्टूबर की अवधि में भोपाल में होगा आयोजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले किया संबोधित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में वंदे मातरम के सामूहिक गान के साथ आरंभ हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मन की बात कार्यक्रम की 125वीं कड़ी में प्रदेश की खेल उपलब्धियों का दो बार उल्लेख करने पर प्रधानमंत्री का आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि श्रीनगर की डल झील में हुए पहले खेलो इंडिया वॉटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल में मध्यप्रदेश को सबसे ज्यादा मैडल जीतेने पर बधाई दी। साथ ही शहडोल जिले के फुटबॉल के क्रेज से जुड़े एक गांव का उल्लेख करते हुए जर्मनी के खिलाड़ी एवं फुटबॉल कोच श्री डिडमार बायर्स डार्फर द्वारा शहडोल के कुछ खिलाड़ियों को जर्मनी की एकेडमी में ट्रेनिंग की पेशकश देने के संबंध में बताया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने फुटबॉल प्रेमियों से कहा कि जब भी अवसर मिले, वे शहडोल जरूर जायें और वहां हो रहे स्पोर्टिंग रेवेल्यूशन को करीब से देखें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हमारे लिये गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी अपने इस महत्वूपर्ण कार्यक्रम में समय-समय पर मध्यप्रदेश से जुड़े विषयों का उल्लेख करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर में संपन्न टूरिज्म कॉन्क्लेव में 3200 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनसे ग्वालियर, चंबल के साथ सागर संभाग में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विषय विशेष पर निवेश प्रोत्साहन के लिए हो रही समिट का प्रदेश को लाभ मिल रहा है। इसी क्रम में 11 से 13 अक्टूबर की अवधि में भोपाल में मध्यप्रदेश ट्रेवल मार्ट आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 3 सितम्बर को नई दिल्ली में "इन्वेस्टमेन्ट अपॉर्च्यूनिटीज इन पीएम मित्रा पार्क का इंटरैक्टिव सेशन होगा। इसमें केन्द्रीय टैक्सटाइल मंत्री श्री गिरिराज सिंह भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बदनावर धार में 2158 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 2000 करोड़ रूपए से अधिक की अनुमानित लागत से विकसित हो रहे टेक्सटाइल हब-पीएम मित्रा पार्क से पश्चिम मध्यप्रदेश में मेट्रोपॉलिटन एरिया विकास के स्वप्न को साकार करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वस्त्र उद्योग पर केंद्रित पीएम मित्रा पार्क के विकास को विशेष महत्व दिया है। पार्क में भूमि आवंटन के लिए आवेदन 22 अगस्त से 11 सितम्बर 2025 तक खुले रहेंगे। मात्र 1 रूपये प्रति वर्ग मीटर-प्रीमियम तथा 120 रुपये प्रति वर्ग फ़ीट विकास शुल्क पर भूमि आवंटन किया जा रहा है, जो देश में समस्त पीएम मित्रा पार्कों में सबसे कम है। यह पार्क लगभग तीन लाख नौकरियों का सृजन करेगा, जिनमें एक लाख प्रत्यक्ष और दो लाख अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के अनावरण और उसके ऐप के संबंध में बताया कि वैदिक घड़ी भारतीय पंचांग और कालगणना को आधुनिक तकनीक से जोड़ती है। इसे 189 से अधिक भाषाओं में देखा जा सकेगा। साथ ही पंचांग तिथि, नक्षत्र योग आदि की जानकारी भी उपलब्ध रहेगी। भारतीय काल गणना पर आधारित यह विश्व की पहली घड़ी है। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के मोबाइल ऐप में व्रत एवं त्यौहारों की दुर्लभ जानकारियां समाहित की गई हैं। धार्मिक कार्यों, व्रत और साधना के लिए 30 अलग-अलग शुभ-अशुभ मुहूर्त की जानकारी एवं अलार्म की सुविधा भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन को कार्यकाल में एक वर्ष की वृद्धि पर मंत्रि-परिषद की ओर से बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुख्य सचिव श्री जैन का दीर्घ प्रशासनिक अनुभव, उनकी पहल और नवाचार प्रदेश की विकास यात्रा में निरंतर नए प्रतिमान स्थापित करते रहेंगे, ऐसी कामना है। मुख्य सचिव श्री जैन ने मंत्रि-परिषद का आभार माना।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भारत सरकार के अधिकारियों ने की भेंट

प्रदेश के दौरे पर दिल्ली से आया अवर सचिवों का दल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मंगलवार को मंत्रालय में प्रधानमंत्री कार्यालय के अवर सचिव श्री विनोद बिहारी सिंह के नेतृत्व में अधिकारियों के 38 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधि मंडल में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में कार्यरत अवर सचिव शामिल थे। यह सभी अवर सचिव इस मिड कैरियर कोर्स के उपरान्त उप सचिव के पद पर पदोन्नत होंगे और अलग-अलग मंत्रालयों में उनकी पदस्थापना की जाएगी। प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने तीन दिवसीय मध्यप्रदेश यात्रा में विश्व धरोहर स्मारक सांची (जिला रायसेन) और हिल स्टेशन पचमढ़ी (जिला नर्मदापुरम) का भ्रमण भी किया। भारत सरकार के अधिकारियों ने बताया कि वे मध्यप्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक विरासत से प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के हृदय प्रदेश में सभी का स्वागत है। मध्यप्रदेश अनेक नवाचारों को अपनाते हुए विभिन्न क्षेत्रों में विकास के पैमानों पर कार्य कर रहा है। नागरिकों को स्वास्थ्य क्षेत्र में विभिन्न सुविधाएं दी जा रही हैं। आयुष्मान कार्डधारी और अन्य नागरिकों को आपातकाल में जीवन रक्षा के लिए एयर एम्बुलेंस सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है। इसी तरह मेडिकल कॉलेजों की स्थापना का कार्य निरंतर हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत सरकार के अधिकारियों को जानकारी दी कि पीपीपी मॉडल के आधार पर जिला अस्पतालों का मेडिकल कॉलेज के रूप में उन्नयन कर आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इस मॉडल की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि मेडिकल कॉलेज के लिए मात्र एक रुपए में 25 एकड़ भूमि के आवंटन, चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध करवाने और मेडिकल कॉलेज का प्रबंधन, प्राप्त शुल्क राशि से किए जाने की व्यवस्था की गई है। इस पहल का नागरिकों को व्यापक स्तर पर लाभ प्राप्त होगा। मध्यप्रदेश के स्मारकों और मंदिरों की संरचना पर केंद्रित हैं नई दिल्ली के महत्वपूर्ण भवन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि जहां राष्ट्रपति भवन का सेंट्रल डोम(मुख्य गुम्बद) सांची के स्तूप से प्रेरित है। वहीं पुरानी संसद भवन का आकल्पन मुरैना जिले के मितावली- पड़ावली स्थित 64 योगिनी मंदिर की तरह किया गया था। नए संसद भवन की डिजाइन भी प्रदेश के विदिशा स्थित विजयपुर मंदिर की संरचना से मिलती जुलती है। इस तरह राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में महत्वपूर्ण भवनों के निर्माण में मध्यप्रदेश के स्मारकों और मंदिरों के अनुरूप आकल्पन प्रदेश के लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई ने कहा कि भारत सरकार के यह सभी अधिकारी जनकल्याण की दृष्टि से विभिन्न मंत्रालयों में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।  

धार का पीएम मित्रा पार्क बनेगा भारत का सबसे बड़ा टेक्सटाइल हब : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश का नया विज़न – फार्म टू फैशन 3 सितम्बर को दिल्ली में पीएम मित्रा पार्क में निवेश पर "इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीस्" भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश अब देश का सबसे बड़ा पीएम मित्रा (मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल) पार्क स्थापित करने जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की 5F रणनीति – "फार्म टू फाइबर टू फैक्ट्री टू फैशन टू फॉरेन'' को मूर्त रूप देने वाला यह पार्क न केवल प्रदेश बल्कि पूरे भारत के टेक्सटाइल सेक्टर की औद्योगिक तस्वीर बदलने वाला साबित होगा। इसी सिलसिले में 3 सितम्बर 2025 को नई दिल्ली के होटल आईटीसी मौर्य में “इंटरएक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन पीएम मित्रा पार्क” का आयोजन होगा। इसमें केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरीराज सिंह मुख्य वक्तव्य देंगे और भारत के वस्त्र उद्योग की वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डालेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विशेष संबोधन देंगे और उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग कर निवेश प्रस्तावों पर चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “पीएम मित्रा पार्क मध्यप्रदेश को ‘फार्म टू फैशन’ की पूरी वैल्यू चेन में अग्रणी बनाएगा। यह पार्क न केवल रोजगार और निवेश का केंद्र बनेगा, बल्कि ‘Made in MP – Wear Across the World’ के विज़न को भी साकार करेगा।” बड़ा निवेश अवसर धार जिले में प्रस्तावित यह पार्क 2,158 एकड़ विकसित औद्योगिक भूमि पर बसाया जा रहा है। राज्य और केंद्र सरकार की आकर्षक प्रोत्साहन नीतियों का लाभ निवेशकों को मिलेगा। भूमि प्रीमियम मात्र 1 रुपये प्रति वर्ग मीटर, डेवलपमेंट चार्ज 120 रुपये प्रति वर्ग फुट, बिजली 4.5 रुपये प्रति यूनिट और पानी 25 रुपये प्रति किलोलीटर की दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा। अधोसंरचना और कनेक्टिविटी पार्क को वर्ल्ड क्लास इंडस्ट्रियल हब के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसमें 2,063 करोड़ रुपये की लागत से कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है, जिसमें 60 और 45 मीटर चौड़ी सड़कें, सीवरेज और ड्रेनेज नेटवर्क, अंडरग्राउंड केबल, लॉजिस्टिक्स बे, पार्किंग, CETP, सोलर प्लांट, प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स और सेंट्रलाइज्ड स्टीम बॉयलर शामिल हैं। पूरी यूटिलिटीज को CCTV, IoT और SCADA से मॉनिटर किया जाएगा। साथ ही 60 मीटर चौड़ा 6-लेन अप्रोच रोड, 220 केवी बिजली लाइन, और 20 एमएलडी जलापूर्ति का निर्माण तेजी से चल रहा है। पार्क राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 47) से केवल 40 किमी, इंदौर हवाई अड्डे से 110 किमी और निकटतम रेलवे स्टेशन से 16 किमी की दूरी पर स्थित है। यह डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (रतलाम – 55 किमी) और ड्राई पोर्ट (पिथमपुर/तिही – 90 किमी) से भी जुड़ा रहेगा। सामाजिक और अनुसंधान सुविधाएँ पार्क में केवल औद्योगिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक व सहयोगी अधोसंरचना भी विकसित की जा रही है। इसमें आवासीय टावर, कामकाजी महिलाओं के लिए आवास, अस्पताल, चाइल्ड केयर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर और टेस्टिंग लैब्स शामिल होंगे। इससे यह पार्क इंडस्ट्री-फ्रेंडली ही नहीं बल्कि वर्कर-फ्रेंडली भी बनेगा। वैश्विक निवेशकों का भरोसा कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांड जैसे HanesBrands, PVH Corp, Puma और Mothercare पहले ही मध्यप्रदेश की संभावनाओं में रुचि जता चुके हैं। बायर सोर्सिंग लीडर्स (BSL) के साथ एमओयू से डिजाइन, लॉजिस्टिक्स और स्किल डेवेलपमेंट का एकीकृत नेटवर्क भी तैयार होगा। राष्ट्रीय दृष्टि से महत्व विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में कई राज्य टेक्सटाइल पार्क विकसित कर रहे हैं, लेकिन मध्यप्रदेश का पीएम मित्रा पार्क अपने आकार, नीतिगत सहयोग और वैश्विक स्तर की अधोसंरचना के कारण सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली होगा। यह राज्य के औद्योगिकीकरण की नई पहचान बनेगा और भारत की निर्यात क्षमता को भी नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।