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एआई आधारित वॉइस चैटबॉट और ई-जनसुनवाई व्यवस्था का अवलोकन कर अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

जयपुर अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रशिक्षण एवं एचसीएम रीपा की महानिदेशक श्रेया गुहा ने राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन 181 एवं संपर्क पोर्टल की कार्यप्रणाली का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने राज्य स्तरीय डैशबोर्ड का बारीकी से अवलोकन करते हुए आमजन की समस्याओं के पारदर्शी, त्वरित एवं प्रभावी समाधान के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। एआई आधारित वॉइस चैटबॉट की कार्यप्रणाली परखी निरीक्षण के दौरान महानिदेशक ने संपर्क पोर्टल पर संचालित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित वॉइस चैटबॉट की कार्यप्रणाली को परखा। उन्होंने कहा कि चैटबॉट के माध्यम से मिल रहे ग्रीवेंस रिस्पॉन्स सराहनीय हैं। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि वॉइस चैटबॉट के जरिए ग्रीवांस रिड्रेसल व्यवस्था में और अधिक सकारात्मक एवं गुणात्मक सुधार लाया जाए, ताकि परिवादियों को सहजता से अपनी बात रखने और त्वरित समाधान का लाभ मिल सके। केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए पृथक श्रेणीकरण का सुझाव गुहा ने समीक्षा के दौरान सुझाव दिया कि भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित एवं केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के लाभ से संबंधित प्राप्त होने वाली परिवेदनाओं को अलग से श्रेणीबद्ध किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे योजनाओं से जुड़े प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो सकेगी और पात्र लाभार्थियों तक उनका हक समयबद्ध रूप से पहुंच सकेगा। ई-जनसुनवाई में सीधे सुनीं आमजन की समस्याएं महानिदेशक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित ई-जनसुनवाई व्यवस्था का भी प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उन्होंने जनसुनवाई के माध्यम से जुड़े परिवादियों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुना और संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। निरीक्षण के दौरान विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं आईटी विंग के तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

एआई गर्लफ्रेंड और डेटिंग ऐप फ्रॉड के जाल में फंसे लोग, जयपुर साइबर पुलिस ने जारी की चेतावनी

जयपुर भाई, ये AI का जमाना है। इसमें बहुत होशियार रहना पड़ेगा, वरना दिल भी ठग जाएगा और जेब भी। सोचो, डेटिंग ऐप पर कोई प्यारी सी लड़की रोज बात करती है, पसंद पूछती है, धीरे-धीरे दिल की बातें करने लगती है… और तुम सोचते हो कि सामने असली इंसान है। लेकिन असल में वो ClaudeAI का चैटबॉट है। AI कंपनी एंथ्रोपिक की ताजा रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। चीन के ऐप स्टूडियो ने 20 से ज्यादा डेटिंग ऐप्स बनाकर 4700 नकली AI प्रोफाइल चलाए। सिर्फ दो हफ्तों में 25 हजार लोग इनसे बात कर बैठे और 23.6 लाख से ज्यादा मैसेज आए। लोग सोच रहे थे कि सामने कोई असली लड़की है, लेकिन असल में Claude अलग-अलग किरदार बनकर चैट कर रहा था। ये कोई कहानी या मजाक नहीं, एंथ्रोपिक की रिपोर्ट में आई हकीकत है। अब समझ लो, AI के जमाने में प्यार भी फेक हो सकता है। कैसे चल रहा था पूरा सिस्टम? ऐप स्टूडियो ने Claude से ही ऐप्स बनाने में मदद ली और फिर उसे नकली प्रोफाइल्स के पीछे बैठा दिया। यूजर्स को मैच फीड में करीब 75 प्रतिशत AI प्रोफाइल और 25 प्रतिशत असली लोग दिखाए जाते थे। असली gig वर्कर्स सिर्फ वीडियो कॉल या सोशल मीडिया फॉलोबैक के लिए इस्तेमाल होते थे, ताकि शक न हो। Claude को साफ निर्देश था कि वह कभी न बताए कि वह AI है। फोटो या वीडियो कॉल की मांग पर बात घुमा दे। प्रोफाइल फोटो AI इमेज एडिटिंग मॉडल से बनाई जाती थीं। ऐप स्टोर की जांच से बचने के लिए इंटरफेस भी चालाकी से डिजाइन किया गया था। कमाई का तरीका और पकड़ा कैसे गया? यूजर जब मैसेज करता या बात आगे बढ़ाता तो फ्री कोटा खत्म हो जाता। फिर ऐप के कॉइन खरीदने पड़ते थे। जितनी देर AI यूजर को फंसाए रखता, उतनी कमाई। कुछ यूजर्स ने गंभीर बीमारी या खराब मानसिक हालत बताई, फिर भी Claude बात जारी रखता रहा। इन्हीं संदिग्ध बातचीत से एंथ्रोपिक को शक हुआ और सर्विलांस बढ़ा। कंपनी ने जुड़े अकाउंट्स बैन कर दिए और अन्य AI कंपनियों के साथ मिलकर नेटवर्क तोड़ा। डोरा, डोनी, रोमी जैसे तमाम नाम रिपोर्ट में डोरा, डोनी, रोमी, लूमा, जोविया, किरा, ग्रेसचैट, हेवन, नालो और लोविया जैसे ऐप नाम दिए गए हैं। राजस्थान में भी डेटिंग ऐप फ्रॉड के मामले राजस्थान में बिल्कुल ऐसा Claude वाला बड़ा नेटवर्क तो नहीं मिला, लेकिन डेटिंग और मैट्रिमोनियल ऐप्स पर फर्जी प्रोफाइल से ठगी के कई मामले सामने आए हैं। जयपुर साइबर पुलिस ने चेतावनी जारी की है कि ठग आकर्षक तस्वीरों (अब AI से भी बनाई जा रही) वाली फर्जी प्रोफाइल बनाकर भरोसा जीतते हैं, फिर पैसे ऐंठते हैं। रिवर्स इमेज सर्च करें, पैसे कभी न भेजें फरवरी 2026 में राजस्थान पुलिस ने बताया कि कई प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रोफाइल से इमोशनल अटैचमेंट बनाकर क्रिप्टो या निवेश के नाम पर ठगी हो रही है। मई 2026 में करौली से पांच आरोपी गिरफ्तार हुए, जिन्होंने डेटिंग ऐप से वीडियो कॉल रिकॉर्ड कर ब्लैकमेल किया। जयपुर में क्लब आधारित डेटिंग स्कैम भी पकड़ा गया। साइबर एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अनजान प्रोफाइल पर भरोसा न करें, रिवर्स इमेज सर्च करें और पैसे कभी न भेजें।यह मामला साफ दिखाता है कि AI अब सिर्फ मददगार नहीं, ठगी का नया हथियार भी बन गया है। यूजर्स को सतर्क रहना होगा।

शहरी निकाय चुनाव का रिपोर्ट कार्ड: दिग्गजों के लिए कितनी आसान रही राह? जानिए जीत-हार का पूरा गणित

जयपुर राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के नतीजों ने सोमवार को शहरी राजस्थान का राजनीतिक मूड साफ कर दिया। भाजपा ने वार्डों की जीत और स्पष्ट बहुमत वाले निकायों की संख्या में बढ़त बनाई है, लेकिन कांग्रेस भी कई जगह मजबूत स्थिति में रही। कुल मत प्रतिशत में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच करीब एक फीसदी का ही अंतर रहा। भाजपा को 35.30 और कांग्रेस को 34.36 फीसदी मत मिले। नतीजों ने भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की जमीनी पकड़ का भी इम्तिहान ले लिया। कई नेताओं के अपने बूथ और वार्ड में ही पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, तो कुछ के प्रभाव क्षेत्र में पार्टी ने मजबूत प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री, प्रदेशाध्यक्ष, मंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और नेता प्रतिपक्ष तक किसी का गढ़ बचा तो किसी के इलाके में सियासी जमीन खिसकती नजर आई। खास यह रही कि कई जगह व्यक्तिगत प्रभाव और पार्टी के सामूहिक प्रदर्शन के बीच भी बड़ा अंतर दिखाई दिया। ऐसे में निकाय चुनाव के नतीजे दिग्गजों के लिए स्थानीय पकड़ का रिपोर्ट कार्ड भी बन गए हैं। मुख्यमंत्रीभजनलाल शर्मा: इनके बगरू विधानसभा के वार्ड 64 में भाजपा जीती। खुद के सांगानेर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के प्रदर्शन का स्ट्राइक रेट 71% रहा। गृह जिले भरतपुर में वार्ड 41 में भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है। उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा: जयपुर के सांगानेर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 50 में भाजपा के प्रत्याशी प्रहलाद चांवला जीते। बैरवा का मतदान क्षेत्र दूदू के ग्रामीण क्षेत्र में है, लेकिन निवास सुमेर नगर में रहते हैं। मंत्री राज्यवर्धन राठौड़: झोटवाड़ा क्षेत्र वार्ड 28 का खुद का वार्ड हार गए। यहां से कांग्रेस प्रत्याशी विजयी हुए। वार्ड में नतीजा पार्टी के पक्ष में नहीं रहा, जिसने स्थानीय स्तर पर सियासी समीकरणों में अलग संकेत दिया। मंत्री कन्हैयालाल चौधरी: मालपुरा विधानसभा क्षेत्र के टोडारासिंह नगर पालिका के वार्ड 5 और बूथ संख्या पांच दोनों पर भाजपा प्रत्याशी जीते। चारों निकायों में पार्टी बोर्ड बनाने में सफल रही, स्पष्ट बहुमत मिला। वन मंत्री संजय शर्मा: अपने बूथ के साथ ही खुद के वार्ड में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। वार्ड 50 में कांग्रेस की रजनी सैनी की जीत से पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल खड़े हुए। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे: झालावाड नगर परिषद के वार्ड 5 में भाजपा प्रत्याशी ने निर्विरोध जीत दर्ज की। नगर परिषद में कांग्रेस ने 29 सीटें को जीतकर चौंकाया। पिछली बार यहां भाजपा का बोर्ड था। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी: वार्ड 141 के सिटी पैलेस स्थित बूथ पर मतदान किया था, यहां भाजपा प्रत्याशी विजयी हुए। विद्याधर नगर विधानसभा में भाजपा को 22 में से 12 सीटें मिली, दो के परिणाम बाकी हैं। मंत्री किरोड़ीलाल मीना: सवाईमोधापुर परिषद में भाजपा का पूर्ण बहुमत आया है। चुनाव के दौरान स्वाइन फ्लू से ग्रसित रहे, इस बीच दो दिन नगर परिषद में चुनाव प्रचार में रहे। उनका खुद का मत पंचायत क्षेत्र में है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर: वार्ड 52 के बूथ पर भाजपा को बढ़त मिली, लेकिन वार्ड से हार का सामना करना पड़ा। उनके विधानसभा क्षेत्र के छह वार्डों में नतीजों ने स्थानीय पकड़ की अलग तस्वीर दिखाई। स्पीकर वासुदेव देवनानी: अपने वार्ड 37 के बूथ के साथ ही खुद के वार्ड में भी भाजपा ने जीत दर्ज की। यहां भाजपा प्रत्याशी विजयी रहीं। अजमेर नगर निगम में भाजपा बहुमत हासिल नहीं कर पाई। कांग्रेस ने बढ़त बनाई। कांग्रेस के दिग्ग्जों का रिपोर्ट कार्ड पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत: गृह वार्ड 88 में भाजपा ने कांग्रेस को झटका दिया। सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र में कुल 26 वार्ड हैं। हालांकि, जोधपुर निगम में भाजपा-कांग्रेस का मुकाबला बराबरी पर टिका हुआ है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह: ये अपना वोट पंचायत में डालेंगे, लेकिन अपने निवास क्षेत्र सीकर में पार्टी का प्रदर्शन मजबूत रहा। सीकर में कांग्रेस की जीत ने पार्टी के प्रभाव को निकाय चुनाव में भी कायम रखा। विधायक प्रमोद जैन भाया: बारां के वार्ड 34 के निवासी है, जहां कांग्रेस तीसरे नम्बर पर रही। यहां आप प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। भाया का वोट ग्रामीण क्षेत्र में है, लेकिन यहां निवासी करते हुए पार्टी को जीता नहीं पाए। पूर्व मंत्री बीडी कल्ला: बूथ महेश सदन में कांग्रेस आगे रही और वार्ड में भी कांग्रेस की सरिता व्यास ने जीत दर्ज की। उनके विधानसभा क्षेत्र के 39 वार्डों में से कांग्रेस ने 23 सीटें जीती हैं। विश्वेन्द्र सिंह: खुद के वार्ड 48 से कांग्रेस प्रत्याशी रामेश्वर सैनी हार गए। जबकि निर्दलीय प्रत्याशी मानवेंद्र सिंह जीते हैं। निर्दलीय की जीत पार्टी से नाराजगी या वोटों के बिखराव, पार्टी में इसकी चिंता शुरू हो गई। विधायक सचिन पायलट: खुद के वार्ड 97 को जीता नहीं पाए। यहां से भाजपा प्रत्याशी विजयी हुए। हालांकि, टोंक विधायक के रूप में कांग्रेस ने मजबूत प्रदर्शन किया। टोंक परिषद में काग्रेस को बहुमत मिला। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली: अपने ही प्रभाव क्षेत्र में झटका लगा। वार्ड 29 से भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। न तो बूथ जीता पाए और न ही वार्ड को। भाजपा की जीत से स्थानीय स्तर पर सियासी समीकरणों पर चर्चा चल रही है। विधायक शांति धारीवाल: कोटा में वार्ड 41 में कांग्रेस के मंगल तम्बोली विजयी रहे, लेकिन बूथ जीता नहीं पाए। बूथ पर भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। इनके विधड्डानसभा क्षेत्र में कुल 30 वार्ड हैं। पूर्व स्पीकर डॉ. सी.पी. जोशी: नाथद्वारा के वार्ड 21 से आते हैं, लेकिन अपने ही वार्ड में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। यहां भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज कर कांग्रेस के मजबूत माने जाने वाले इलाके में सेंध लगा दी।  

कौन बनेगा जयपुर का नया मेयर? सुनील कोठारी समेत 5 नामों पर चर्चा

जयपुर जयपुर नगर निगम चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद अब गुलाबी नगरी की सियासत का केंद्र मेयर की कुर्सी बन गया है। 150 वार्डों वाली जयपुर नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 78 सीटों पर शानदार जीत हासिल करते हुए स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। बहुमत का आंकड़ा 76 का था, जिसे पार करते ही भाजपा के खेमे में जश्न का माहौल है। वहीं कांग्रेस को इस चुनाव में 53 सीटों से ही संतोष करना पड़ा है और 15 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत का परचम लहराया है। बहुमत हासिल करने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के अंदर नए मेयर के नाम को लेकर बैठकों और राजनीतिक लामबंदी का दौर बेहद तेज हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार 21 सितंबर 2026 को मेयर पद के लिए अप्रत्यक्ष मतदान होगा, लेकिन उससे पहले शहर के सियासी गलियारों में 5 प्रमुख नामों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। जयपुर नगर निगम की मेयर सीट इस बार अनारक्षित श्रेणी में है, जिसका मतलब है कि किसी विशेष वर्ग या जाति का कानूनी बंधन नहीं है। यही वजह है कि संगठन में मजबूत पैठ रखने वाले अनुभवी नेताओं से लेकर संघ पृष्ठभूमि के दिग्गजों तक का दावा काफी मजबूत माना जा रहा है। सुनील कोठारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से सीधे जुड़े सुनील कोठारी को इस समय पार्टी का सबसे प्रबल और फ्रंटरनर दावेदार माना जा रहा है। संगठन के प्रति उनकी निष्ठा, बेदाग छवि और निर्विवाद व्यक्तित्व के कारण पार्टी आलाकमान किसी भी प्रकार की आंतरिक गुटबाजी को रोकने के लिए उनके नाम पर अंतिम मुहर लगा सकता है। पुनीत कर्णावत मेयर पद की इस दौड़ में दूसरा सबसे बड़ा और स्वाभाविक नाम निवर्तमान डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावत का है। कर्णावत ने वार्ड 76 से एक बार फिर शानदार जीत दर्ज की है। उनके पास नगर निगम के प्रशासनिक तंत्र और शहर के विकास कार्यों को संचालित करने का पुराना और व्यावहारिक अनुभव मौजूद है। यदि प्रदेश नेतृत्व अनुभव और शहर के पुराने सियासी समीकरणों को प्राथमिकता देता है तो पुनीत कर्णावत का पलड़ा काफी भारी हो सकता है। विमल अग्रवाल तीसरे नंबर पर वरिष्ठ भाजपा नेता विमल अग्रवाल हैं, जिन्होंने वार्ड 135 से 7,115 वोटों के रिकॉर्ड मार्जिन से जीत हासिल की है। जयपुर के व्यापारिक और वैश्य समुदाय में उनकी गहरी पकड़ है, जिसके चलते उनका दावा भी काफी मजबूत बनकर उभरा है। शैलेंद्र भार्गव चौथे दावेदार के रूप में पूर्व शहर अध्यक्ष शैलेंद्र भार्गव का नाम चर्चा में है, जिन्होंने वार्ड 43 से कड़े मुकाबले में जीत हासिल की है। संगठन में लंबे समय तक काम करने का उनका अनुभव और पार्टी नेतृत्व के साथ बेहतर तालमेल उनके पक्ष में जाता है। सरप्राइज चेहरा पांचवें विकल्प के रूप में पार्टी किसी सरप्राइज महिला चेहरे को भी आगे कर सकती है। हालांकि जयपुर की पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल चुनाव हारकर इस रेस से बाहर हो चुकी हैं, लेकिन यदि पार्टी आलाकमान किसी युवा या वरिष्ठ महिला पार्षद को मौका देकर चौंकाना चाहे तो किसी वरिष्ठ महिला पार्षद के नाम पर विचार किया जा सकता है। किसे और क्यों मिल सकती है तरजीह? जयपुर का मेयर कौन बनेगा, इसका अंतिम फैसला भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय और प्रादेशिक नेतृत्व पार्षदों के रुख को ध्यान में रखकर करेगा। जयपुर में भाजपा की राजनीति में हमेशा से संगठन और संघ लॉबी का बड़ा प्रभाव रहा है। सुनील कोठारी को संघ का समर्थन प्राप्त होने के कारण उनकी दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है। वहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार शहर के विकास कार्यों को गति देने के लिए प्रशासनिक रूप से सक्षम और अनुभवी चेहरे के रूप में पुनीत कर्णावत पर भी दांव लगा सकती है। दूसरी ओर वैश्य और व्यापारी वोट बैंक जयपुर में भाजपा की रीढ़ माना जाता है। इस वर्ग को साधे रखने के लिए रिकॉर्ड वोटों से जीतने वाले विमल अग्रवाल का नाम भी प्रमुखता से विचारधीन है। फिलहाल सभी 78 निर्वाचित भाजपा पार्षदों को एकजुट रखने और किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग को रोकने के लिए पार्टी ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है। 21 सितंबर को होने वाली वोटिंग के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि जयपुर की कमान अगले पांच सालों के लिए किस दिग्गज के हाथों में सौंपी जाती है। जयपुर में कैसे होगा मेयर का चुनाव? राजस्थान में आम जनता सीधे तौर पर मेयर का चुनाव नहीं करती है। यहां नगर निगम के निर्वाचित पार्षद ही अपने मताधिकार का प्रयोग करके मेयर का चुनाव करते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार यह पूरी अप्रत्यक्ष चुनाव प्रक्रिया इस प्रकार संचालित होगी: अधिसूचना और नामांकन (15-16 सितंबर): निर्वाचन आयोग द्वारा 15 सितंबर को चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। मेयर पद के लिए उम्मीदवारी पेश करने वाले प्रत्याशी 16 सितंबर तक अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं। नामांकन पत्रों की जांच और वापसी (18 सितंबर): 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की संवीक्षा होगी और 18 सितंबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। इसके तुरंत बाद चुनाव मैदान में डटे अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जाएगी। पार्षदों की वोटिंग (21 सितंबर): मेयर पद के लिए मुख्य मतदान 21 सितंबर 2026 को आयोजित होगा। इस दिन नगर निगम मुख्यालय पर रिटर्निंग ऑफिसर की देखरेख में सभी 150 निर्वाचित पार्षदों की विशेष बैठक बुलाई जाएगी। वोटिंग का समय और मतगणना: मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक बैलेट पेपर के जरिए गुप्त रूप से कराया जाएगा। दोपहर 2 बजे वोटिंग खत्म होते ही वोटों की गिनती शुरू होगी और 21 सितंबर की शाम तक जयपुर के नए मेयर के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। क्या किसी 'बाहरी' व्यक्ति को भी मेयर बना सकती है BJP? जयपुर के राजनीतिक हलकों में इस बात की भी चर्चा चल रही है कि क्या भाजपा किसी ऐसे नेता को मेयर बना सकती है जो इस बार पार्षद का चुनाव नहीं जीता है। कानूनी और तकनीकी दृष्टिकोण से इसका जवाब 'हाँ' है। राजस्थान नगर पालिका (संशोधन) नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो वार्ड पार्षद नहीं है या … Read more

राजस्थान के चार निकायों में अटके मेयर चुनाव, 16 सितंबर को दस बूथों पर होगी रिपोलिंग

जयपुर सोमवार को हुई मतगणना के दौरान कुछ बूथों की EVM में तकनीकी खराबी सामने आई। इसके चलते इन बूथों के वोटों का रिजल्ट घोषित नहीं हो सका। परिणाम अधूरे रहने की वजह से संबंधित निकायों में पार्षदों की अंतिम स्थिति भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अब मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव पर भी ब्रेक लग गया है। जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम समेत चार नगरीय निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव फिलहाल स्थगित कर दिए गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि इन निकायों में 21 सितंबर को प्रस्तावित प्रमुख पदों के चुनाव अब नहीं होंगे। आयोग इन चुनावों के लिए नए सिरे से कार्यक्रम जारी करेगा। EVM ने अटका दिया पूरा चुनावी गणित दरअसल, सोमवार को हुई मतगणना के दौरान कुछ बूथों की EVM में तकनीकी खराबी सामने आई। इसके चलते इन बूथों के वोटों का रिजल्ट घोषित नहीं हो सका। परिणाम अधूरे रहने की वजह से संबंधित निकायों में पार्षदों की अंतिम स्थिति भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक जब तक सभी वार्डों के परिणाम घोषित नहीं हो जाते, तब तक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव कराना संभव नहीं है। यही वजह है कि आयोग ने जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के साथ सुकेत नगरपालिका में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव आगामी आदेश तक स्थगित कर दिए हैं। 21 सितंबर को नहीं होगी मेयर-डिप्टी मेयर की वोटिंग निकाय चुनाव के बाद सभी की नजरें अब मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव पर थीं। खासकर जयपुर में बहुमत के आंकड़े तक पहुंची बीजेपी के मेयर बनने की राह लगभग साफ मानी जा रही थी। लेकिन EVM में आई तकनीकी खराबी ने पूरा कार्यक्रम ही बदल दिया। अब 21 सितंबर को इन निकायों में मेयर, डिप्टी मेयर, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव नहीं होंगे। पहले अटके हुए वार्डों के परिणाम घोषित होंगे और उसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग नए सिरे से चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा। 10 बूथों पर 16 सितंबर को फिर से मतदान EVM की तकनीकी खराबी के कारण जिन बूथों पर परिणाम अटके हैं, वहां अब दोबारा मतदान कराया जाएगा। आयोग ने चारों निकायों के कुल 10 बूथों पर 16 सितंबर को रिपोलिंग कराने के आदेश दिए हैं। इन बूथों पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान होगा। इसके बाद 17 सितंबर को सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू की जाएगी। रिपोलिंग के बाद ही इन वार्डों का अंतिम परिणाम सामने आएगा और निकायों की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी। जयपुर के 5 बूथों पर दोबारा वोटिंग जयपुर नगर निगम में सबसे ज्यादा पांच बूथों पर रिपोलिंग होगी। इनमें वार्ड-9 का बूथ संख्या 111, वार्ड-18 का बूथ संख्या 235, वार्ड-25 का बूथ संख्या 343, वार्ड-34 के बूथ संख्या 477 और 484 शामिल हैं। इन बूथों पर दोबारा मतदान होने के बाद संबंधित वार्डों के परिणाम जारी किए जाएंगे। इसके बाद ही जयपुर नगर निगम की पूरी तस्वीर आधिकारिक रूप से स्पष्ट होगी। जोधपुर और कोटा में भी EVM का पेच जोधपुर नगर निगम के वार्ड-50 के बूथ संख्या 338 पर भी रिपोलिंग होगी। वहीं कोटा नगर निगम में तीन बूथों पर दोबारा मतदान कराया जाएगा। इनमें वार्ड-87 का बूथ 99, वार्ड-44 का बूथ 448 और वार्ड-11 का बूथ 576 शामिल हैं। इसके अलावा सुकेत नगरपालिका के वार्ड-4 के बूथ संख्या 5 पर भी 16 सितंबर को फिर से मतदान होगा। 17 सितंबर को साफ होगी तस्वीर, फिर तय होगा मेयर का चुनाव अब इन 10 बूथों के मतदाताओं को एक बार फिर मतदान करना होगा। 16 सितंबर को वोटिंग और 17 सितंबर को काउंटिंग के बाद अटके हुए परिणाम सामने आएंगे। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग सभी संबंधित निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नया कार्यक्रम घोषित करेगा। यानी निकाय चुनाव का रिजल्ट आने के बाद जिस मेयर-डिप्टी मेयर के चुनाव की तैयारी शुरू हो गई थी, उस पर फिलहाल EVM की खराबी ने ब्रेक लगा दिया है। अब पहले 10 बूथों का फैसला होगा, फिर मेयर की कुर्सी का खेल शुरू होगा।

दाहिनी सूंड वाले गणेश जी का अनोखा मंदिर, जयपुर के नहर वाले गणेश के दर्शन को जुटते हैं श्रद्धालु

देशभर में वैसे तो भगवान गणेश के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन जयपुर के नहर वाले गणेश मंदिर की खास मान्यता है. यह मंदिर ब्रह्मपुरी क्षेत्र में नाहरगढ़ की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है. मंदिर करीब 250 साल पुराना बताया जाता है. यह देश के उन दुर्लभ मंदिरों में से एक है जहां गणपति जी की दाहिनी ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा विराजमान है. गणेश चतुर्थी के अवसर पर इस मंदिर के दर्शन करने श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं. सिंजारा उत्सव में सजते हैं बप्पा जयपुर में नहर वाले गणपति के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले सिंजारा उत्सव मनाया जाता है. इस अवसर पर भगवान गणेश को विशेष पोशाक और साफा अर्पित करने की परंपरा है. इस दौरान मंदिर में असंख्य मोदकों की झांकी सजाई जाती है. मोदकों से सजी यह झांकी भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहती है. सिंजारा उत्सव दौरान भगवान गणेश को मेहंदी और सिंदूर भी अर्पित किया जाता है. इसके बाद ये मेहंदी और सिंदूर श्रद्धालुओं में भी बांटा जाता है. नहर वाले गणेश मंदिर के महंत पंडित जय शर्मा ने बताया कि मंदिर में सिंदूर और मेहंदी लेने दूर-दूर से भक्तगण यहां आते हैं. मान्यता है कि यहां का सिंदूर और मेहंदी मांगलिक कार्यों में आने वाली समस्याओं को दूर करता है. भगवान गणेश की कृपा से विवाह या प्रेम संबंधों में आ रही अड़चनें यह सिंदूर और मेहंदी रचाने के बाद दूर हो जाती हैं. मंदिर के महंत ने बताया कि राजस्थान में वैसे तो कई ऐसे मंदिर है, जहां मेहंदी और सिंदूर बांटने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. लेकिन जयपुर के तीन मंदिर इसके लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं. इनमें नहर वाले गणपति के अलावा, मोती डूंगरी गणेश मंदिर और श्री गढ़ गणेश मंदिर शामिल हैं. इन मंदिरों में भी अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन के लिए लोग सिंदूर-मेहंदी लेने आते हैं. दाहिनी ओर सूंड वाले गणपति का रहस्य पंडित जय शर्मा के अनुसार, गणेश पुराण में कुल तीन तरह के गणपति का वर्णन मिलता है. बाई ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति को वाममुखी गणपति कहा जाता है. जबकि दाहिनी ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति को दक्षिणाभिमुखी गणपति कहा जाता है जो कि सिद्धिविनायक का स्वरूप माने जाते हैं. यानी भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करने वाले वाले गणपति. सांसारिक सुखों की प्राप्ति के लिए दक्षिणाभिमुखी गणपति की पूजा सबसे ज्यादा लाभकारी मानी जाती है. धन, वैभव, यश, सफलता की कामना के लिए इन्हीं गणपति की फलदायी होती है. जबकि तंत्र-मंत्र साधना और संत समाज के लिए सीधी सूंड वाले गणपति की पूजा लाभकारी होती है

मॉडल स्कूलों में शत-प्रतिशत नामांकन और बेहतर परीक्षा परिणाम पर सरकार का फोकस

जयपुर स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव ने सोमवार को शासन सचिवालय में स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल योजना सहित विभिन्न आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को अध्यापकों एवं विद्यार्थियो की उपस्थिति, विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, विद्यार्थियों के नामांकन,मानव संसाधन,आधारभूत सुविधाओं तथा निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए। अतिरिक्त मुख्य सचिव यादव ने प्रदेश के मॉडल स्कूलों में रिक्त पदों की स्थिति की समीक्षा करते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने मॉडल स्कूलों के परीक्षा परिणामों में और सुधार के लिए विषयवार विश्लेषण एवं आवश्यक शैक्षणिक गतिविधियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने निर्माणाधीन भवनों में भूमि, बिजली, पानी एवं अन्य लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करते हुए कार्यों को निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए भवन निर्माण के साथ आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। एसीएस ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी), नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय, स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल छात्रावास, पीएम-जनमन एवं डीएजेजीयूए के अंतर्गत संचालित एवं निर्माणाधीन छात्रावासों की प्रगति की भी समीक्षा की। केजीबीवी में कुल 51 हजार 950 विद्यार्थियों की क्षमता के विरुद्ध 46 हजार 668 बालिकाएं नामांकित हैं। वहीं नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों सहित अन्य आवासीय संस्थानों में भी नामांकन की स्थिति की समीक्षा की गई। उन्होंने अधिकारियों को शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रयास करने के निर्देश दिए गए। बैठक में वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना के तहत स्वीकृत किए गए आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों की प्रगति पर भी चर्चा हुई। नए आवासीय विद्यालयों/छात्रावासों के लिए कार्य स्वीकृत है, जिनमें से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होकर विद्यार्थी रह रहे हैं। छात्रावासों में वॉशिंग मशीन एवं स्वचालित रोटी मेकर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा केजीबीवी में थ्री-फेज विद्युत कनेक्शन से संबंधित कार्यों की भी समीक्षा की गई। विद्यालयों में आधुनिक सुविधाएं मॉडल स्कूलों में स्मार्ट एवं वर्चुअल कक्षाएं, 20 कम्प्यूटर वाले कम्प्यूटर लैब, सीसीटीवी कैमरे, छात्राओं के लिए सेनेटरी नैपकिन, डिस्पेंसरी एवं इन्सीनेरेटर सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य परीक्षण, मासिक अभिभावक-शिक्षक बैठक, स्काउट-गाइड, कला एवं शिल्प, विज्ञान मेले, गणित ओलंपियाड, योग ओलंपियाड, स्कूल बैंड एवं अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं। प्रदेश के 27 शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े जिलों के 134 ब्लॉकों में 134 स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल संचालित हैं। इन विद्यालयों में कुल 57 हजार 565 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 28 हजार 957 बालक एवं 28 हजार 608 बालिकाएं हैं। विद्यालयों में बालिकाओं के लिए 55 प्रतिशत तथा बालकों के लिए 45 प्रतिशत सीटों का प्रावधान है। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत कुल 514 छात्रावास/आवासीय इकाइयां स्वीकृत हैं, जिनमें 422 संचालित हैं तथा 92 निर्माणाधीन अथवा लंबित हैं। केजीबीवी के 389 में से 377 संचालित हैं, जबकि 12 पर कार्य प्रगति पर है। स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूलों के 25 छात्रावासों में 22 संचालित हैं और 3 निर्माणाधीन हैं।  

राजस्थान निकाय चुनाव में चौंकाने वाले नतीजे, एक प्रत्याशी को नहीं मिला एक भी वोट

जयपुर  चुनावी मैदान में कई बार ऐसे हैरान कर देने वाले नतीजे सामने आ जाते हैं, जिन पर यकीन करना मुश्किल होता है। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में भी कुछ परिणामों ने प्रत्याशियों के साथ-साथ राजनीतिक दलों को चौंका दिया। कहीं राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रत्याशी को एक भी वोट नहीं मिला, तो कहीं भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के खाते में महज एक वोट आया। बालोतरा जिले के सिणधरी नगरपालिका के वार्ड संख्या 3 का यह चुनावी परिणाम कुछ ऐसा ही अनूठा किस्सा लेकर आया है, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। इस वार्ड में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के उम्मीदवार ओम प्रकाश को एक भी वोट नहीं मिला। ओमप्रकाश खुद इस वार्ड के मतदाता नहीं हैं, इसलिए खुद का वोट भी नहीं मिल सका। वहीं नोटा का बटन दबाने वाला एक मतदाता जरूर मिल गया। यानी यहां नोटा आरएलपी से आगे निकल गया। इस वार्ड में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच रहा, जहां बीजेपी के खेमाराम को 93 वोट मिले और कांग्रेस के भंवरा राम ने 133 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। कुल डाले गए मतों की संख्या 226 रही, जिसमें कांग्रेस उम्मीदवार ने बाजी मार ली। एक वोट वाले नतीजे ने खड़े किए कई सवाल परबतसर नगर पालिका चुनाव के इन दोनों नतीजों ने राजनीतिक दलों के सामने प्रत्याशी चयन और स्थानीय संगठन की स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।  BJP जैसी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी के प्रत्याशी का एक वोट तक सीमित रहना इसलिए ज्यादा चर्चा में है, क्योंकि उम्मीदवार खुद भी उस वार्ड का मतदाता नहीं था. वहीं, RLP प्रत्याशी के खाते में भी सिर्फ एक वोट आना पार्टी के स्थानीय जनाधार और उम्मीदवार चयन पर चर्चा का कारण बन रहा है।  फिलहाल परबतसर नगर पालिका चुनाव का यह 'एक वोट' वाला मामला स्थानीय राजनीति से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा में है. खासकर BJP प्रत्याशी कैलाश चंद्र का खुद को वोट नहीं दे पाना इस पूरे चुनावी नतीजे को और दिलचस्प बना रहा है।  परबतसर में BJP प्रत्याशी को सिर्फ एक वोट दूसरा हैरान करने वाला नतीजा डीडवाना-कुचामन जिले की परबतसर नगरपालिका के वार्ड नंबर 13 से सामने आया। यहां भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी कैलाशचंद को महज एक वोट मिला। वहीं कांग्रेस की प्रत्याशी हिना खानम ने 376 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की। निर्दलीय प्रत्याशी रसीद खां को भी 195 वोट मिले। यानी निर्दलीय प्रत्याशी भी भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी से 194 वोट आगे रहा। इस वार्ड में कुल 573 वोट पड़े। खास बात यह रही कि भाजपा प्रत्याशी कैलाशचंद के खाते में एक वोट आया और नोटा को भी एक वोट मिला। पत्नी और माता-पिता भी नहीं दे पाए वोट! कैलाशचंद के लिए यह नतीजा इसलिए और चौंकाने वाला है क्योंकि उनके मुताबिक उनका परिवार जिस वार्ड में रहता है, वहां परिवार के 12 वोट थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें वार्ड नंबर 13 से टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा। ऐसे में उनके परिवार के सदस्य भी उन्हें वोट नहीं दे सके।

उदयपुर नगर निगम में फिर खिला कमल, BJP ने जीती 53 सीटें; कांग्रेस को 23 पर संतोष

उदयपुर उदयपुर नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। भाजपा ने 41 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को 17 सीटों पर सफलता मिली। वहीं, एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहा। इस जीत के साथ उदयपुर नगर निगम में बीजेपी लगातार सातवीं बार अपना बोर्ड बनाने की स्थिति में पहुंच गई है। बहुमत का आंकड़ा पार होते ही भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल है। पार्टी खेमे में जश्न शुरू हो गया है। परिणामों ने उदयपुर में भाजपा की मजबूत पकड़ को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। बताते चलें कि उदयपुर नगर निगम चुनाव की मतगणना सूरजपोल स्थित राजस्थान कृषि महाविद्यालय में सुबह 8 बजे से कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुई थी। शुरुआती दौर में सबसे पहले डाक मतपत्रों की गणना की गई। निगम के सभी 80 वार्डों की मतों की गिनती के लिए 5 अलग-अलग गणना कक्ष बनाए गए थे, जहां अधिकतम 8 टेबल पर तेजी से गिनती चली। चुनाव के शुरुआती रुझानों और परिणामों में बड़े उलटफेर और कड़े मुकाबले देखने को मिले। महापौर पद के लिए भाजपा के सबसे प्रबल दावेदार प्रमोद सामर ने वार्ड नंबर 51 से शानदार जीत हासिल की। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के गजेंद्र सिंह को शिकस्त दी। वहीं दूसरी ओर, वार्ड 17 से कांग्रेस के शहर जिला अध्यक्ष फतेह सिंह राठौर की पत्नी पूनम कंवर (डॉ. पूनम राठौड़) ने जीत का परचम लहराया है। उदयपुर नगर निगम परिणाम कुल सीट 80 भाजपा-53 कांग्रेस-23 निर्दलीय-3 माकपा-1 कानोड़ नगर पालिका परिणाम कुल सीट 20 कांग्रेस-14 भाजपा-6 भींडर नगर पालिका परिणाम कुल सीट 25 कांग्रेस-13 भाजपा-12 मावली नगर पालिका परिणाम कुल सीट 20 कांग्रेस-10 भाजपा-9 निर्दलीय-1 उदयपुर नगर निगम में जीतने वाले प्रत्याशियों की लिस्ट वार्ड नंबर    जीतने वाला उम्मीदवार    पार्टी 1         2         3    अरुण टांक     4    स्नेहलता टांक     कांग्रेस 5    आकाश वागरेचा     भाजपा 6    अजीत चौधरी     कांग्रेस 7         8         9         10    सतीश शर्मा    भाजपा 11         12    बाबूलाल नागौरी    भाजपा 13         14         15    प्रतीक नागर    कांग्रेस 16    सुमित्रा नागदा    भाजपा 17         18    कुलदीप मेहता     बीजेपी 19    कुंदन चौहान     भाजपा 20    साजिद खान     कांग्रेस 21    राहुल माली     कांग्रेस 22    हिदायतुल्ला    कांग्रेस 23         24    पारस सिंघवी    भाजपा 25    लोकेश साहू    भाजपा 26    राजेंद्र परिहार    भाजपा 27         28         29    वैभव भंडारी     भाजपा 30    रोहित मेघवाल    कांग्रेस 31    हिना कौसर    कांग्रेस 32         33         34    अलका गुर्जर     भाजपा 35    मीनल कंठालिया     बीजेपी 36    डिम्पल कुंवर     भाजपा 37    लक्ष्मी नारायण मेघवाल    कांग्रेस 38         39    जितेंद्र सिंह शक्तावत    भाजपा 40    सुमन अग्रवाल    भाजपा 41    सोहनलाल गमेती    भाजपा 42    खुशी गमेती    कांग्रेस 43    शंकरलाल गमेती    कांग्रेस 44    अशीष कोठारी    भाजपा 45         46    तिलक मेनारिया    भाजपा 47    लता नायक    भाजपा 48    महेश पुरी गोस्वामी    भाजपा 49         50    किरण कुमार जैन     बीजेपी 51    प्रमोद सामर     भाजपा 52    तारा सुहालका     बीजेपी 53    यशवंत आंचलिया    भाजपा 54    राजेंद्र खगरेजा    भाजपा 55    विशाखा खवास    भाजपा 56         57    निर्मला पालीवाल    भाजपा 58         59         60    खुशबू कमल मेहता    निर्दलीय 61    इंद्रा डांगी    निर्दलीय 62    सविता गमेती    कांग्रेस 63         64         65         66    उमेश मनवानी     बीजेपी 67         68    वंदना प्रजापत       भाजपा 69    रचना शर्मा           भाजपा 70    वीरेंद्र सिंह सिसोदिया    भाजपा 71    योगेश कुमावत     भाजपा 72         73    हितांशी शर्मा    कांग्रेस 74    पंकज बोराणा    भाजपा 75    महेंद्र सिंह शेखावत    भाजपा 76         77         78    अतुल चंडालिया    भाजपा 79         80       

वायरल रील्स का असर: 3500 किलो मेहंदी लेने जयपुर पहुंचे श्रद्धालु

जयपुर मेहंदी से जुड़ी शादी की बड़ी आस… यही आस्था रविवार को मोतीडूंगरी गणेशजी मंदिर तक देशभर से श्रद्धालुओं को खींच लाई। गणेश चतुर्थी पर्व से पहले रविवार को सिंजारा महोत्सव में गणेशजी को अर्पित मेहंदी लेने के लिए मंदिर के बाहर लंबी कतारें लगीं और भीड़ गणेश चतुर्थी के लक्खी मेले सी जैसी नजर आई। सोशल मीडिया पर वायरल रील ने इस बार मेहंदी उत्सव की उत्सुकता और बढ़ा दी। सोशल मीडिया पर रील्स से बढ़ी भीड़ सोशल मीडिया पर वायरल रीलों में मेहंदी लगाने से कुंवारे युवक-युवतियों का विवाह होने की मान्यता के दावे ने उत्सुकता और बढ़ा दी। दिल्ली, चंडीगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, फरीदाबाद, मध्यप्रदेश, पुणे, इंदौर, भोपाल, आगरा और उत्तर प्रदेश सहित कई जगहों से लोग एक दिन पहले ही जयपुर पहुंच गए। तेज धूप और उमस के बीच कतारों में लोग छह से सात घंटे मेहंदी के लिए खड़े रहे। सात बजे मंदिर प्रबंधन को मेहंदी खत्म होने की घोषणा करनी पड़ी। रात में पहुंचे युवा, मंदिर के बाहर सोए श्रद्धालुओं की भीड़ शनिवार रात से ही मंदिर के बाहर जुटने लगी थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई लोग रात में ही मंदिर के बाहर आकर सो गए। दिन चढ़ने के साथ भीड़ लगातार बढ़ती गई। जेएलएन मार्ग तक श्रद्धालुओं की कतारें नजर आईं। कई जगह धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। महाराष्ट्र से आई एक महिला तेज गर्मी से बेहोश हो गई। आगरा से आए दीपक ने कहा कि यहां की मेहंदी लगाने से शादी हो जाती है। यह रील देखकर जयपुर आया हूं। इंदौर से राधिका शर्मा अपने बेटे के लिए मेहंदी लेने आई हैं। इतनी भीड़ की उम्मीद नहीं थी। कई युवक अपने लिए तो माता-पिता बच्चों के लिए मेहंदी लेने पहुंचे। खेतड़ी से आए राधेश्याम और शैफाली ने बताया कि मैंने यहां की मेहंदी लेने वाले युवाओं की शादी होते भी देखी है, इसलिए लेने आया हूं। मंदिर के पास दुकान लगाने वाले रोशन शर्मा ने बताया कि उन्होंने 40 साल में ऐसी भीड़ नहीं देखी। 3500 किलो मेहंदी, प्रसाद के रूप में वितरण मंदिर के महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि दो शताब्दी पहले महज सवा किलो मेहंदी से शुरू हुआ उत्सव आज मेहंदी उत्सव के रूप में देशभर में ख्यात हो गया। शाम 7.30 बजे सिंजारा पूजन के बाद मेहंदी वितरित की जानी थी, लेकिन भीड़ को देखकर शाम पांच बजे से वितरित की गई। सिंजारा के लिए सोजत से करीब 3500 किलो मेहंदी मंगवाई गई थी। पहली बार मेहंदी में ही लाखों की संख्या में उमड़े श्रद्धालु गणेश चतुर्थी पर मोती डूंगरी गणेश मंदिर में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन इस बार पहली बार गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले मेहंदी के अवसर पर ही लाखों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। भीड़ को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल पहले से तैनात किया गया था। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल भी बुलाया गया। श्रद्धालु शांतिपूर्वक कतार में लगकर व्यवस्था बनाए रखते हुए गणेशजी के दर्शन कर रहे हैं।