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राजस्थान वन विभाग का बड़ा फैसला: लेपर्ड को मारने से पहले DNA जांच जरूरी

जयपुर  राजस्थान में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच राज्य वन विभाग ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब किसी भी लेपर्ड को 'आदमखोर' घोषित कर उसे मारने की अनुमति देना आसान नहीं होगा। चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन के.सी.ए. अरुणप्रसाद द्वारा जारी की गई नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर में स्पष्ट किया गया है कि लेपर्ड को 'आदमखोर' श्रेणी में डालने के लिए अब पुख्ता वैज्ञानिक और कानूनी साक्ष्यों की आवश्यकता होगी। बिना फॉरेंसिक जांच नहीं होगा फैसला नई गाइडलाइन के अनुसार, यदि किसी लेपर्ड पर इंसानों पर हमला करने या उन्हें खाने का संदेह है, तो केवल अनुमान के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। विभाग को अब निम्नलिखित प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी-     डीएनए विश्लेषण: घटनास्थल पर मिले बालों, लार या अन्य नमूनों का मिलान संदिग्ध जानवर से करना होगा।     फॉरेंसिक साक्ष्य: हमले के निशान और अन्य फॉरेंसिक एविडेंस की जांच अनिवार्य कर दी गई है।     वैज्ञानिक निगरानी: हमले वाले क्षेत्र में ट्रैप कैमरे और ड्रोन के जरिए लेपर्ड के व्यवहार की निगरानी की जाएगी। मारना नहीं, पकड़ना होगी पहली प्राथमिकता SOP में यह भी साफ किया गया है कि अगर किसी लेपर्ड को 'आदमखोर' मान भी लिया जाता है, तब भी पहली प्राथमिकता उसे जीवित पकड़ने की होगी। उसे मारने का आदेश केवल अंतिम विकल्प के रूप में और चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन की लिखित अनुमति के बाद ही दिया जा सकेगा। भीड़ पर लगेगी लगाम अक्सर रेस्क्यू के दौरान उमड़ने वाली भीड़ लेपर्ड को हिंसक बना देती है। अब ऐसे संवेदनशील ऑपरेशन्स के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (पूर्व में 144) लागू की जाएगी। पुलिस को भीड़ हटाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि वैज्ञानिक तरीके से जांच पूरी की जा सके। हर जिले में रैपिड रिस्पांस टीमें होगी तैनात वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि हैबिटेट के विखंडन के कारण लेपर्ड आबादी के करीब आ रहे हैं। इस नई नियमावली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी बेगुनाह जानवर को महज लोगों के गुस्से या डर के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े। अब हर जिले में रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात रहेंगी, जो आधुनिक उपकरणों और वैज्ञानिक डेटा के आधार पर ऐसे संकटों का समाधान करेंगी।

कपास का अच्छा भाव भी नहीं लुभा पा रहा किसान, 60% तक घट सकता रकबा

 ढिगावा मंडी  हरियाणा में कपास की खेती करने में किसान रूचि नहीं दिखा रहे हैं। मार्केट में अच्छा भाव मिलने के बावजूद भी किसानों का कपास से मोह भंग हो चुका है। मार्केट में नरमा कपास इस समय आठ से 10 हजार रुपये क्विंटल बिक रही है। इसके बावजूद किसान कपास की फसल की बिजाई करने में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे। जिसके कारण पिछले साल से 60 से 65 प्रतिशत तक कपास का रकबा घट सकता है। कपास की फसल से किसानों का मोह भंग होने का कारण गुलाबी सुंडी है। गुलाबी सुंडी ने पिछले साल कपास की फसल में कहर ढाया था। जिसके कारण किसानों ने समय से पहले कपास की फसल काटकर अगली फसल की बिजाई कर दी थी। सरकार और कृषि विभाग को भी पहले से ही इस बार कपास का रकबा घटने का अंदेशा था। जिसके चलते गुलाबी सुंडी पर नियंत्रण पाने के लिए खरीफ सीजन से पहले ही प्रयास शुरू कर दिए गए थे। अधिकारियों ने किया था किसानों से संपर्क कृषि विभाग के अधिकारियों ने काटन मिल में जाकर निरीक्षण किया और वहां रखे बिनौले को ढक कर रखने के आदेश दिए थे, ताकि बिनौले से निकल कर गुलाबी सुंडी का फैलाव ना हो। वहीं खेतों में रखे कपास के फसल अवशेष (लकड़ी) भी उठाने या नष्ट करने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से संपर्क किया। ताकि फसल अवशेष में अगर गुलाबी सुंडी है, तो वो भी नष्ट हो जाए और कपास की अगली फसल में जाए। लेकिन कृषि विभाग के प्रयासों के बावजूद कपास की फसल की बिजाई करने में किसान कम रुचि ले रहे हैं। पिछले साल एक लाख 52 हजार एकड़ में कपास की फसल थी भिवानी जिले का लोहारू, बहल क्षेत्र कपास उत्पादन के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यहां के किसान बाजरा, ग्वार, मूंग की फसलों का रुख कर रहे हैं। दैनिक जागरण टीम ने किसानों से इस बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि भूजल स्तर तेजी से गिरना, समर्थन मूल्य पर अनिश्चितता, गुलाबी सुंडी व सफेद मक्खी का प्रकोप किसानों ने कपास की खेती छोड़ने का प्रमुख कारण बताया। बता दें की भिवानी जिले में पिछले साल एक लाख 52 हजार एकड़ में कपास की फसल थी। 15 मई तक कपास की बिजाई के लिए अनुकूल समय माना जाता है, लेकिन अभी तक नाममात्र एकड़ पर ही कपास की बिजाई हो पाई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में आठ से 10 हजार एकड़ में और कपास की बिजाई हो सकती है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगले पांच दिन मौसम कपास फसल बिजाई के लिए अनुकूल है। क्योंकि वर्षा से तेजी से बढ़ रहे तापमान में गिरावट आई है।

टाइगर सफारी फर्जीवाड़ा: रणथंभौर में गाइडों पर सख्ती, वनकर्मी पर नरमी से विवाद

 सवाई माधोपुर  विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) में फर्जी टिकट के जरिए टाइगर सफारी कराने के गंभीर मामले में वन प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. डीएफओ मानस सिंह ने जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए गए दो नेचर गाइडों के पार्क में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. हालांकि, इस पूरी कार्रवाई में वन विभाग के ही एक कर्मचारी को मिली 'राहत' ने विभाग की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. 30 मार्च को हुआ था फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ यह पूरा मामला 30 मार्च 2026 की सुबह की पारी का है. जोन नंबर 1 में गश्ती दल ने जब कैंटर नंबर RJ-25-TA-1862 की जांच की, तो उसमें दो पर्यटक बिना किसी वैध टिकट के सफारी करते पाए गए. डीएफओ मानस सिंह के निर्देश पर एसीएफ महेश शर्मा ने जब मौके पर जांच की, तो पर्यटकों ने खुलासा किया कि उन्होंने एक एजेंट को 8000 रुपये देकर सफारी बुक की थी और उसकी रसीद भी पेश की. जांच में सामने आया कि इन पर्यटकों को फर्जी तरीके से पार्क में प्रवेश कराया गया था. गाइडों पर एक्शन, गार्ड पर मेहरबानी? सहायक वन संरक्षक (ACF) निखिल शर्मा की जांच रिपोर्ट में नेचर गाइड हरविंदर सिंह और जगदीश को वाइल्डलाइफ नियमों की अनदेखी और फर्जीवाड़े का दोषी माना गया. इसके आधार पर डीएफओ ने दोनों पर पार्क में प्रवेश का प्रतिबंध लगा दिया. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इसी जांच में दोषी पाए गए फॉरेस्ट गार्ड भीम सिंह चौधरी को महज 17 सीसी (17CC) की चार्जशीट देकर छोड़ दिया गया. इतना ही नहीं, दोषी गार्ड को रणथंभौर के महत्वपूर्ण 'जोगी महल' प्रवेश द्वार पर तैनात कर अतिरिक्त चार्ज भी सौंप दिया गया है. विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल फर्जी टिकट जैसे गंभीर भ्रष्टाचार के मामले में नेचर गाइडों पर तो सख्त गाज गिरी है, लेकिन विभाग के अपने कर्मचारी पर दिखाई गई इस 'मेहरबानी' से अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं. सवाल यह है कि जब जांच में गार्ड द्वारा 'सिंह द्वार' से पर्यटकों को अवैध रूप से बैठाने की बात साबित हो चुकी है, तो उसे दंडित करने के बजाय इनाम के तौर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों दी गई?

जयपुर: ई-चालान व्यवस्था सख्त, नकद भुगतान पूरी तरह खत्म

जयपुर  राजस्थान की सड़कों पर गाड़ी चलाने वालों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। प्रदेश के परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग ने ट्रैफिक चालान के भुगतान को लेकर एक क्रांतिकारी बदलाव किया है। 27 अप्रैल को जारी एक गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, अब राजस्थान में ट्रैफिक चालान का नकद भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अब अगर आपका चालान कटता है, तो आपको अनिवार्य रूप से ऑनलाइन माध्यम से ही जुर्माना भरना होगा। भ्रष्टाचार पर लगाम और पारदर्शिता पर जोर सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य चालान प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और मैनुअल हैंडलिंग को खत्म करना है। अक्सर सड़कों पर पुलिसकर्मी और वाहन चालकों के बीच लेन-देन को लेकर होने वाले विवाद और भ्रष्टाचार की शिकायतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। अब हर ट्रांजेक्शन का एक डिजिटल रिकॉर्ड होगा, जिससे विभाग के पास सटीक डेटा रहेगा कि कितना जुर्माना वसूला गया और किस उल्लंघन के लिए वसूला गया। ITMS पोर्टल पर होगा भुगतान परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'वाहन मालिकों और चालकों को अब अपने ई-चालान का भुगतान सीधे ITMS (Intelligent Traffic Management System) पोर्टल के माध्यम से करना होगा।' इस ऑनलाइन सिस्टम से न केवल जुर्माना जमा करना आसान होगा, बल्कि अधिकारियों के लिए भी इसकी निगरानी करना सरल हो जाएगा। किसे मिला चालान काटने का अधिकार? नए नियमों के तहत अधिकारियों की शक्तियों में भी फेरबदल किया गया है। अब पुलिस विभाग में हेड कांस्टेबल और उससे ऊपर के रैंक के पुलिसकर्मी ही ट्रैफिक उल्लंघन पर चालान काटने के लिए अधिकृत होंगे। उनके साथ परिवहन विभाग के अधिकृत अधिकारी भी यह कार्रवाई कर सकेंगे। शिकायत निवारण के लिए नए प्रावधान अक्सर लोग गलत चालान कटने की शिकायत करते हैं, लेकिन उन्हें समाधान नहीं मिलता था। नई व्यवस्था में इसका भी ध्यान रखा गया है। अधिकारी ने बताया कि यदि किसी को अपने चालान को लेकर कोई आपत्ति या शिकायत है, तो इसके लिए नामित अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। ये अधिकारी शिकायतों की सुनवाई करेंगे, जिससे जनता के लिए विवाद सुलझाना आसान हो जाएगा। क्या अब राजस्व की चोरी रुकेगी? यह आदेश केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167 के तहत लागू किया गया है। विभाग का मानना है कि इस डिजिटल शिफ्ट से न केवल राजस्व की चोरी रुकेगी, बल्कि जनता को भी रसीद कटवाने और दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी। तो अब अगली बार जब आप घर से बाहर निकलें, तो सुनिश्चित करें कि आपके मोबाइल में डिजिटल पेमेंट की सुविधा चालू हो, क्योंकि अब राजस्थान की सड़कों पर 'नकद' की रसीद नहीं कटेगी।  

राजस्थान शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, नागौर स्कूल में बच्चे कर रहे थे सफाई का काम

 नागौर  राजस्थान के नागौर जिले के एक सरकारी स्कूल से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां छोटे बच्चों से मिड-डे मील के बर्तन उठवाने और धुलवाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने संज्ञान लिया है और संबंधित स्कूल के खिलाफ आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। यह घटना रियांबी उपखंड के दासावास गांव में स्थित सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुई। मिड-डे मील के ब्रेक के दौरान आराम करने या खाना खाने के बजाय, कई बच्चों को भारी स्टील के बर्तन उठाते और एक जगह से दूसरी जगह ले जाते देखा गया। इस फुटेज ने स्कूल में निगरानी और छात्रों के कल्याण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कमरे में सोते दिखें शिक्षक चिंता की बात यह भी है कि उसी समय चार शिक्षक एक कमरे में सोते हुए पाए गए। स्कूल में कुल आठ शिक्षक हैं, जिनमें से घटना वाले दिन सात शिक्षक मौजूद थे। इसके बावजूद, बर्तनों को संभालने की जिम्मेदारी छात्रों पर ही आती दिखी। प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और वीडियो से यह भी पता चलता है कि प्रधानाध्यापक सोहनलाल फडोदा वहां मौजूद थे और अपनी कुर्सी पर बैठे थे, जबकि बच्चे काम कर रहे थे। उन्होंने न तो कोई दखल दिया और न ही कर्मचारियों को बच्चों को रोकने का कोई निर्देश दिया। कुछ बच्चों ने दावा किया कि यह कोई एक बार हुई घटना नहीं है, बल्कि यह उनके रोजाना के काम का ही एक हिस्सा है। मामले की जांच शुरू वीडियो वायरल होने के बाद, स्थानीय अधिकारियों ने इस मामले का संज्ञान लिया है। घटना की जांच करने और दोषियों की पहचान करने के लिए एक जांच समिति का गठन किया गया है। SDM सूर्यकांत शर्मा ने कहा कि हमें एक शिकायत मिली है और पूरे मामले की जांच की जाएगी। मुख्य विकास अधिकारी रामलाल कराड़ी ने बताया कि यह मामला मीडिया रिपोर्टों के जरिए सामने आया है और उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

पूछताछ के दौरान हड़कंप: बाड़मेर में आरोपी ने खुद को किया घायल, पुलिस ने कराया इलाज

बाड़मेर बाड़मेर महिला अपराध एएसपी कार्यालय में पॉक्सो एक्ट के आरोपी ने गला काटकर आत्महत्या करने का प्रयास किया. पुलिस उसको आनन-फानन में बाड़मेर मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल लेकर पहुंची, जहां पर उसका इलाज कराया. आरोपी खून से लथपथ हो गया था. आरोपी ने भी कुछ नहीं बताया. पुलिस ने आरोपी का इलाज कराया, इसके बाद जेल भेज दिया. पॉक्सो का आरोपी गिरफ्तार जानकारी के अनुसार, बाड़मेर की महिला थाने में दर्ज पॉक्सो के मामले में नरेश को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, और महिला अपराध अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रभुराम इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं. आज एएसपी कार्यालय में जांच में पूछताछ के दौरान युवक ने अपना गला काट लिया. उसके बाद पुलिस के हाथ पांव फूल गए, और तुरंत उसको घायल अवस्था में बाड़मेर मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल ले गए. चिकित्सकों ने उसका इलाज किया, उसके बाद पुलिस ने उसे अस्पतावापस ASP कार्यालय लेकर आ गई है. कुछ बोलने से पुलिस का इनकार इस पूरे मामले को लेकर अस्पताल पहुंचे महिला अपराध अनुसंधान सेल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रभु राम ने किसी भी प्रकार की जानकारी देने से इनकार कर दिया. आरोपी युवक भी मीड‍िया के सामने कुछ नहीं बोला.   बाड़मेर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक निर्देश आर्य का कहना है कि महिला थाने में दर्ज पॉक्सो के मामले में नरेश कुमार पुत्र दालाराम निवास गांधीनगर को गिरफ्तार किया था, जिसको आज फिंगरप्रिंट लेने के दौरान टेबल पर रखे पेपर कटर से खुद की गर्दन पार वार कर दिया था. उसके बाद जाब्ते ने उसे अस्पताल ले जाकर ईलाज करवाया, अब उसको जेल भेज दिया है. लापरवाही बरतने वाले के खिलाफ जांच करवाई जा रही है.

राजस्थान में वन्यजीव सर्वे का नया तरीका, चांदनी रात और कैमरा ट्रैप से होगी गिनती

चित्तौड़गढ़ राजस्थान में पड़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव का असर अब केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि सरकारी नियमों और परंपराओं पर भी दिखने लगा है. चित्तौड़गढ़ जिले के जंगलों में इस साल 1 मई से शुरू होने वाली वन्यजीव गणना (Wild Life Census) बेहद खास होने वाली है, क्योंकि वन विभाग ने दशकों से चली आ रही परंपरा को बदलते हुए गणना के समय में बड़ा बदलाव किया है. सुबह नहीं, शाम से होगी शुरुआत आमतौर पर वन्यजीवों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू होती थी, लेकिन इस बार झुलसा देने वाली गर्मी को देखते हुए वन विभाग ने नया प्लान तैयार किया है. चित्तौड़गढ़ की जिला उप वन संरक्षक मृदुला सिन्हा ने बताया कि पहली बार यह गणना सुबह के बजाय 1 मई को शाम 5 बजे से शुरू होगी और अगले दिन 2 मई को शाम 5 बजे तक लगातार 24 घंटे चलेगी. यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक विचरण का सटीक डेटा मिल सके, क्योंकि गर्मी के कारण जानवर दिन में बाहर निकलने से कतरा रहे हैं. चांदनी रात में 'वॉटरहॉल' तकनीक का सहारा यह गणना बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित की जा रही है. पूर्णिमा की दूधिया चांदनी में वन कर्मियों को बिना किसी कृत्रिम रोशनी या टॉर्च के वन्यजीवों को देखने में आसानी होती है. इसके लिए दो मुख्य तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. पहली वॉटरहॉल तकनीक. चूंकि गर्मी में जानवर पानी पीने जलस्रोतों पर जरूर आते हैं, इसलिए सीतामाता सेंचुरी में 47 और बस्सी सेंचुरी में 24 पानी के कुंड चिह्नित किए गए हैं. वहीं दूसरी, हाई-टेक निगरानी तकनीक. रात के अंधेरे में सक्रिय रहने वाले पैंथर और दुर्लभ उड़न गिलहरी की सटीक पहचान के लिए सीतामाता में 22 और बस्सी में 14 अत्याधुनिक 'कैमरा ट्रैप' लगाए गए हैं. मचान पर 24 घंटे 'पहरा' जंगल के नालों और केनाल के पास विशेष मचान बनाए गए हैं, जहां वन विभाग की टीमें तैनात रहेंगी. एसीएफ राम मोहन मीणा और एसीएफ यशवंत कंवर के निर्देशन में कर्मचारियों को पदचिह्नों (Pugmarks) की पहचान और कैमरा ट्रैप प्रबंधन की विशेष ट्रेनिंग दी गई है. मचान पर बैठने वाले स्टाफ के लिए भोजन और पानी का इंतजाम भी विभाग द्वारा किया गया है.

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर कार में आग, राजस्थान में एक ही परिवार के पांच लोग जिंदा जल गए

अलवर   राजस्थान के अलवर में कार में आलग लगने से एक ही परिवार के 5 लोग जिंदा गए। यह घटना बुधवार रात अलवर जिले में लक्ष्मणगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुई। बताया जा रहा है कि यह आग सीएनजी लीक होने की वजह से लगी। पुलिस के अनुसार, पीड़ित मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के चैनपुरा गांव के रहने वाले थे। यह परिवार वैष्णो देवी मंदिर के दर्शन करके घर लौट रहा था और उन्होंने इस यात्रा के लिए एक टैक्सी किराए पर ली थी। जब गाड़ी मौजपुर पहुंची, तो अचानक सीएनजी गैस लीक होने की खबर मिली, जिससे तुरंत आग लग गई और पूरी कार लपटों की चपेट में आ गई। आग इतनी तेजी से फैली कि यात्रियों को बचने का कोई मौका ही नहीं मिला। इस भयानक घटना में तीन महिलाएं, एक पुरुष और एक छोटी बच्ची जिंदा जल गए। आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि शव जलकर राख हो गए। गाड़ी का ड्राइवर बड़ी मुश्किल से बच निकला, लेकिन उसे गंभीर रूप से जलने की चोटें आई हैं। उसे पहले स्थानीय स्तर पर इलाज दिया गया और बाद में जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां उसका अभी इलाज चल रहा है। सूचना मिलते ही, लक्ष्मणगढ़ पुलिस दमकल की गाड़ियों के साथ मौके पर पहुंची। आग बुझाने वाली एक गाड़ी तैनात की गई और आग पर काबू पाने की कोशिशें की गईं। हालांकि, जब तक आग बुझाई गई, तब तक पांचों यात्री आग की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके थे। लक्ष्मणगढ़ पुलिस थाना प्रभारी नेकी राम ने पुष्टि की कि गाड़ी सीएनजी और पेट्रोल दोनों पर चल रही थी और आग लगने का कारण गैस लीक होना माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि सीएनजी से लगी आग की तीव्रता बहुत ज्यादा होती है। आग से शव पूरी तरह से नष्ट हुए, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया। पीड़ितों की पहचान के लिए डीएनए जांच करने के लिए मौके पर एक मेडिकल टीम बुलाई गई। परिवार के सदस्यों को इस घटना के बारे में सूचित कर दिया गया।पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी भी देर रात स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर पहुंचे।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसा, वैष्णो देवी से लौट रहा परिवार खत्म

अलवर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ पुलिस थाना अंतर्गत मौजपुर के चैनल नंबर 115/300 के पास चलती कार में सीएनजी लीकेज होने से लगी आग में एक ही परिवार के 5 लोग जिंदा जलकर राख हो गए. इस घटना में चालक भी बुरी तरह झुलस गया, जिसे जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल में इलाज कराया गया है. यह घटना रात देर रात करीब 11 बजे हुई. सूचना पर मौके पर पहुंची लक्ष्मणगढ़ पुलिस और दमकल गाड़ी से आग पर काबू पाने की प्रयास किए गए. आग कि सूचना के बाद अलवर से पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी और डीएसपी कैलाश जिंदल मौके पर पहुंचे.  वैष्णो देवी से लौट रहा था परिवार पुलिस ने बताया कि मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के चैनपुरा गांव निवासी एक परिवार वैष्णो देवी के दर्शन करके वापस अपने घर लौट रहे थे. परिवार इस गाड़ी को किराए पर लेकर आया था, जैसे ही यह अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र के मौजपुर में पहुंचे. वहां अचानक सीएनजी गैस का रिसाव हो गया और रिसाव इतना तेज था कि तुरंत ही आग लग गई और आग के चलते गाड़ी में सवार सभी लोग जिंदा जल गए. घटना के समय सभी सो रहे थे आग का गोला बनने के बाद किसी भी सवार को बचाने का मौका नहीं दिया. बताया जा रहा है गाड़ी में सवार परिवार नींद में थे. अगर जगे हुए होते तो शायद चालक की तरह वो बाहर निकल पाते. श्योपुर निवासी चालक विनोद कुमार बड़ी मुश्किल से उसमें निकाल पाया. वो भी काफी जल गया. जिसे पुलिस द्वारा एसएमएस हॉस्पिटल जयपुर के लिए रेफर किया गया. जहां उसका इलाज चल रहा है. रात 11 बजे हुआ हादसा लक्ष्मणगढ़ की थाना प्रभारी नेकी राम ने बताया कि यह बीती रात करीब 11 बजे के आसपास हुई. टैक्सी पर यह परिवार गाड़ी लेकर आया था. ये श्योपुर के चैनपुर निवासी हैं. सीएनजी और पेट्रोल से चलने वाली इस गाड़ी में गैस रिसाव के कारण यह आग लगी. आग इतनी भयानक थी कि इसमें किसी को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला. इस हादसे में दो महिलाए, एक पुरुष और दो बच्ची जिंदा जलकर राख हो गए. उनके कंकाल भी नहीं बचे हैं. चालक गरीब 80 फ़ीसदी झुलस गया है, उसे पहले पिनान के अस्पताल ले लाया गया. जहां से हालत खराब होने पर उसे तुरंत जयपुर के लिए रेफर कर दिया गया. मौके पर ही मेडिकल टीम को बुलाया गया है, जिससे डीएनए सैंपल ले लिया गया. उनकी पहचान की गई. DNA टेस्ट में शवों की होगी पहचान मृतकों में परिवार का मुखिया संतोष ( 35 साल) उसकी पत्नी शशि, सास पार्वती और पुत्री रागिनी पुत्री संतोष व साक्षी पुत्री संतोष के रूप में हुई है. पुलिस ने बताया कि परिवार जनों को सूचना दे दी गई है. रात को ही दो दमकल मौके पर बुलाई गई थी. जिसे आग पर काबू पाया आग बुझाने से पहले ही चालक को छोड़कर सभी सवार आग की भेंट चढ़ गए. लक्ष्मणगढ़ सीएचसी के डॉक्टर अमित गुप्ता ने बताया कि डीएनए टेस्ट से मृतकों की पहचान होगी. शव पूरी तरह से राख़ बन चुके हैं. मेडिकल बोर्ड से परिजनों के आने के बाद उनके पोस्टमार्टम में आगे की प्रक्रिया की जाएगी.

SOG की बड़ी कार्रवाई: अजमेर में फर्जी डिग्री के जरिए सरकारी नौकरी का रैकेट फेल

 अजमेर अजमेर में फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी पाने के चर्चित मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मेवाड़ यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रेसिडेंट कौशल किशोर चन्द्रूल को गिरफ्तार कर लिया है. इससे पहले इस मामले में पूर्व डीन ध्वज कीर्ति शर्मा को भी पकड़ा जा चुका है, जिनसे पूछताछ के आधार पर यह कार्रवाई की गई. अब तक 11 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार एसओजी के एडिशनल एसपी श्याम सुंदर विश्नोई के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. बताया जा रहा है कि आरोपी को जयपुर से पकड़कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन के रिमांड पर भेजा गया है.. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फर्जी डिग्रियों पर अंतिम साइन भी आरोपी ही करता था और वह कमीशन के आधार पर इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था. पुलिस अब पूरे गिरोह की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. RPSC भर्ती में फर्जी डिग्री का खेल मामले की जांच लोकसेवा आयोग की शिकायत के बाद शुरू हुई थी. आयोग ने बताया था कि स्कूल लेक्चरर (हिंदी) प्रतियोगी परीक्षा-2022 में चयनित दो युवतियों ने आवेदन के समय वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय की डिग्री बताई, लेकिन बाद में मेवाड़ यूनिवर्सिटी की डिग्री प्रस्तुत की. जांच में सामने आया कि दोनों ने एमए की फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी हासिल की. पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि उन्हें ये डिग्रियां उनके परिजनों के माध्यम से उपलब्ध कराई गई थीं. इसके बाद एसओजी ने सरकारी शिक्षक दलपत सिंह और डॉक्टर सुरेश विश्नोई सहित अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया. पुलिस के अनुसार, यह एक संगठित गिरोह है जो फर्जी डिग्रियों के जरिए सरकारी नौकरियां दिलाने का काम कर रहा था. मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है.