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RPSC भर्ती परीक्षाओं का बड़ा शेड्यूल जारी, दिसंबर में RAS प्री समेत होंगी कई अहम परीक्षाएं

अजमेर  राजस्थान लोक सेवा आयोग के कलैंडर के अनुसार भर्ती परीक्षाएं जारी है। अक्टूबर में केवल एक भर्ती परीक्षा होगी। नवम्बर-दिसम्बर सबसे अहम रहेगा। इनमें करीब 6 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी परीक्षाएं देंगे। आयोग ने जनवरी-2026 से नवम्बर तक 12 हजार 143 पदों की भर्ती परीक्षाओं का कैलेंडर पिछले साल दिसम्बर में जारी किया था इसके तहत बीते सितम्बर तक डिप्टी कमांडेंट और लेक्चरर आयुष, कनिष्ठ रसायनज्ञ, सहायक विद्युत निरीक्षक सहायक अभियंता संयुक्त भर्ती (मुख्य) परीक्षा, सब इंस्पेक्टर/प्लाटून कमांडर-2025, सब इंस्पेक्टर भर्ती पुनः परीक्षा-2021, सहायक अभियोजन अधिकारी (प्रा.) परीक्षा, कारखाना एवं बॉयलर और केमिकल निरीक्षक, पशु चिकित्सा अधिकारी, सहायक कृषि अभियंता और प्राध्यापक, प्राध्यापक कृषि एवं कोच (माध्यमिक शिक्षा विभाग) वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा (माध्यमिक शिक्षा), कनिष्ठ विधि अधिकारी परीक्षा का आयोजन हो चुका है। नई भर्तियों का इंतजार आरपीएससी को नई भर्तियों का भी इंतजार है। इस साल जनवरी से सितम्बर तक आयोग को मात्र 1102 पदों की भर्ती मिली है। बड़ी भर्तियों में आरएएस-अधीनस्थ सेवा भर्ती शामिल है। स्कूल-कॉलेज शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कृषि सहित अन्य विभागों की भर्ती नहीं मिली है। इन संसाधनों की होगी दरकार     500 से ज्यादा: केंद्र परीक्षा     1000: वीडियोग्राफर, सीसीटीवी कैमरे     2000 से ज्यादा: शिक्षक-कर्मचारी     1000 से ज्यादा: पुलिसकर्मी     500 से ज्यादा: वाहन और अन्य साधन अक्टूबर, नवम्बर और दिसम्बर में होगी ये परीक्षाएं     सहायक निदेशक, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी प्रतियोगी परीक्षा, एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी (विधि विज्ञान) 28 पद: 13 से 16 अक्टूबर     संरक्षण अधिकारी (महिला-बाल विकास) 12 पद: 15 नवम्बर     आरएएस-प्रारंभिक परीक्षा 607 पद : 6 दिसम्बर     प्राध्यापक विशेष शिक्षा (मा. शिक्षा) 121 पद : 8 दिसम्बर     सहायक अभियोजन अधिकारी (मुख्य परीक्षा) 371 पद : 27 दिसम्बर 2027 में फिलहाल आरएएस मुख्य परीक्षा आयोग के कैलेंडर में वर्ष 2027 के लिए फिलहाल आरएएस मुख्य परीक्षा-2026 निर्धारित है। यह परीक्षा 1 और 2 मई 2027 को आयोजित की जाएगी। ऐसे में आरएएस प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए दिसंबर की परीक्षा के बाद मुख्य परीक्षा की तैयारी का अगला चरण महत्वपूर्ण रहेगा।

नारी शक्ति सम्मेलन में CM भजनलाल का बड़ा ऐलान, महिलाओं को मिली करोड़ों की सौगात और योजनाओं का लाभ

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि महिलाएं समाज का अभिन्न हिस्सा ही नहीं बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण का आधार हैं। महिलाओं का सम्मान और सशक्तीकरण किसी भी सभ्य समाज की पहचान है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में हमेशा से नारी शक्ति का सम्मान रहा है और यहां तो कहा भी गया है कि जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं।   मुख्यमंत्री शनिवार को यूनिवर्सिटी कॉमर्स कॉलेज में आयोजित नारी शक्ति सम्मेलन एवं संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारे यहां शक्ति, ज्ञान और समृद्धि की प्रतीक मां दुर्गा, मां सरस्वती और मां लक्ष्मी के रूप में नारी शक्ति की पूजा की जाती है। भारत का इतिहास महिलाओं के साहस, वीरता, त्याग और बलिदान की अनगिनत गाथाओं से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति की सफलता की कहानियों में संघर्ष, साहस, आत्मविश्वास और संकल्प की वह शक्ति दिखाई देती है, जो किसी भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के कुशल प्रशासन, न्याय-परायणता एवं कल्याणकारी कार्यों का आज भी गुणगान किया जाता है। रानी लक्ष्मीबाई का साहस, मातृभूमि के लिए उनका बलिदान, आज भी हम सभी देशवासियों के हृदय में प्रेरणा का दीप जलाता है। वहीं, सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा की ज्योति जलाई, उसका प्रकाश आज देश के कोने-कोने को आलोकित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की अनेक नारियों ने त्याग, समर्पण, भक्ति और बलिदान की मिसाल कायम की हैं। भक्त शिरोमणि मीराबाई ने कृष्ण-भक्ति और आध्यात्मिक साधना से राजस्थान की धरती को गौरवान्वित किया और पन्नाधाय ने अपने पुत्र का बलिदान देकर स्वामीभक्ति एवं कर्तव्यनिष्ठा का दुर्लभ उदाहरण प्रस्तुत किया। वहीं, हाड़ी रानी ने मातृभूमि की रक्षा और अपने कर्तव्य के लिए अद्वितीय साहस और बलिदान का परिचय दिया तथा वीर बाला कालीबाई ने अपने गुरु की रक्षा के लिए सर्वाेच्च बलिदान देकर गुरु भक्ति की अमर गाथा लिखी। उन्होंने कहा कि अमृता देवी ने प्रकृति और वृक्षों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल कायम की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि माताएं, बहनें और बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी अद्भुत प्रतिभा और कौशल से मां भारती का गौरव बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में महिला सशक्तीकरण की दिशा में नई सोच और संकल्प के साथ अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने महिलाओं के जीवन को आसान बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण सुविधा मिल रही है तथा लखपति दीदी योजना ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। वहीं, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना महिलाओं के स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में महिलाओं को नेतृत्व का अवसर प्रदान करने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसी महत्वपूर्ण पहल की गई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पिछले पौने तीन साल में महिलाओं के कल्याण के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की राशि 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 6 हजार 500 रुपये की गई है। मा वाउचर योजना के तहत सोनोग्राफी के लिए 5 लाख 74 हजार कूपन जारी किए जा चुके हैं तथा पात्र परिवारों को 450 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध करवा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 13 लाख 85 हजार साइकिलों एवं कालीबाई उच्च शिक्षा स्कूटी योजना एवं देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना के तहत लगभग 46 हजार स्कूटियों का वितरण किया गया है। वहीं, मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान पेंशन योजना के तहत करीब 19 लाख पेंशनर्स को 8 हजार 866 करोड़ रुपए की पेंशन राशि दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि लाडो प्रोत्साहन योजना के तहत गरीब परिवारों को बालिकाओं के जन्म पर डेढ़ लाख रुपये का सेविंग बॉण्ड दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, शिशु पालना गृह कार्यकर्ताओं और साथिनों के मानदेय में पिछले तीन वर्षों में हर वर्ष 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। राज्य की 1 करोड़ 22 लाख महिलाओं एवं बालिकाओं को हर माह 12 सैनेटरी नैपकिन निशुल्क दिए जा रहे हैं। वहीं, लखपति दीदी योजना के तहत 26 लाख से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी का प्रशिक्षण प्रदान कर लगभग 20 लाख महिलाओं को लखपति दीदी की श्रेणी में लाया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति की प्रतिबद्धता, परिश्रम और सामूहिक शक्ति राजस्थान को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से समृद्ध राज्य बनाएगी तथा उनकी सक्रिय भागीदारी ही वर्ष 2047 तक विकसित भारत और विकसित राजस्थान का संकल्प साकार करने की शक्ति बनेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की योजनाएं प्रदेश की महिलाओं में नया आत्मविश्वास और जीवन में नई ऊंचाइयां हासिल करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में विभिन्न लाभार्थी महिलाओं से संवाद किया और योजनाओं के लाभ से उनके जीवन में आए सकारात्मक परिवर्तन को जाना। इससे पहले मुख्यमंत्री ने राजीविका की प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा विभिन्न उत्पादों की जानकारी ली। संवाद कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री लाभार्थी महिलाओं के बीच पहुंचे और आत्मीयतापूर्ण बातचीत की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चन्द बैरवा, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी, सांसद मंजू शर्मा, विधायक गोपाल शर्मा, महेन्द्रपाल मीणा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही तथा वीसी के जरिए सभी जिलों से भी महिलाएं जुड़ीं। इस कार्यक्रम से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल भी वीसी के जरिए जुड़े। मुख्यमंत्री की लाभार्थियों को बड़ी सौगातें कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एनएचएम के तहत 60 एम्बुलेंस, 9 आर्टिकुलेटिंग वाटर टावर तथा 185 ऑटो टिपर को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा लखपति दीदियों को स्कूटी की चाबी वितरित की। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थियों को मकानों की चाबी एवं 27 हजार से अधिक लाभार्थियों को 150 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी की। वहीं, 29 हजार 222 लाभार्थियों को मुख्यमंत्री मातृत्व पोषण योजना … Read more

Rajasthan Panchayat Election 2026: 13 अक्टूबर से शुरू होगी वोटिंग, 4 चरणों में पूरा होगा चुनाव

जयपुर  राजस्थान में निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब पंचायत चुनाव का ऐलान हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने मीडिया से रूबरू होकर पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव का पूरा शेड्यूल जारी किया। चुनाव की तिथियों का ऐलान होने के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई है। अगले दो महीने तक चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक आचार संहिता प्रभावी रहेगी। नामांकन 8 अक्टूबर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया कि पंच सरपंच और जिला परिषद सदस्यों के लिए 8 अक्टूबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 अक्टूबर है। 15 अक्टूबर तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे। जिला प्रमुख के चुनाव 25 नवंबर को होंगे। पंचायती राज संस्थाओं की चुनावी प्रक्रिया 28 नवंबर को पूरी हो जाएगी। जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य चुनाव कार्यक्रम चरण / प्रक्रिया अधिसूचना (Notification) नामांकन अंतिम तिथि नाम वापसी व प्रतीक आवंटन मतदान तिथि (सुबह 7 से शाम 6 बजे) प्रथम चरण 08.10.2026 (गुरुवार) 13.10.2026 (दोपहर 3 बजे) 15.10.2026 23.10.2026 (शुक्रवार) द्वितीय चरण 13.10.2026 (मंगलवार) 16.10.2026 (दोपहर 3 बजे) 19.10.2026 29.10.2026 (गुरुवार) तृतीय चरण 19.10.2026 (सोमवार) 23.10.2026 (दोपहर 3 बजे) 26.10.2026 04.11.2026 (बुधवार) चतुर्थ चरण 31.10.2026 (शनिवार) 04.11.2026 (दोपहर 3 बजे) 06.11.2026 14.11.2026 (शनिवार)   पंच एवं सरपंच चुनाव कार्यक्रम (बैलेट पेपर से) चरण अधिसूचना नामांकन, जांच व प्रतीक आवंटन मतदान व मतगणना तिथि उपसरपंच चुनाव प्रथम चरण 08.10.2026 24.10.2026 (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे) 25.10.2026 (रविवार) 26.10.2026 द्वितीय चरण 13.10.2026 30.10.2026 (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे) 31.10.2026 (शनिवार) 01.11.2026 तृतीय चरण 19.10.2026 05.11.2026 (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे) 06.11.2026 (शुक्रवार) 07.11.2026 चतुर्थ चरण 31.10.2026 15.11.2026 (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे) 16.11.2026 (सोमवार) 17.11.2026 सरपंच और पंच पद की मतगणना मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद उसी दिन होगी। Playing Picture-in-picture Diwali Special Train 2026: दिवाली पर मिलेगा कंफर्म टिकट, रेलवे ने 10 स्पेशल ट्रेन की शुरू मतगणना एवं शीर्ष पदों के चुनाव की तिथियां जिला परिषद व पंचायत समिति मतगणना: 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) प्रातः 8:00 बजे से प्रधान का चुनाव: 25 नवंबर 2026 (बुधवार) उप प्रधान का चुनाव: 26 नवंबर 2026 (गुरुवार) जिला प्रमुख का चुनाव: 27 नवंबर 2026 (शुक्रवार) उप जिला प्रमुख का चुनाव: 28 नवंबर 2026 (शनिवार) इसी के साथ चुनावी प्रक्रिया संपन्न होगी   महिला आरक्षण और वर्गवार समीकरण  पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू होने से ग्रामीण निकायों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी रहेगी। महिला सरपंच: कुल 14,403 ग्राम पंचायतों में से 7,201 ग्राम पंचायतों में महिलाएं सरपंच बनेंगी। महिला वार्ड पंच: 1,30,584 वार्डों में से 65,000 से अधिक वार्ड पंच महिलाएं होंगी। महिला प्रमुख व प्रधान: 41 जिलों में से 20 जिलों में महिला जिला प्रमुख और 457 पंचायत समितियों में से 227 महिला प्रधान चुनी जाएंगी। एसटी आरक्षित जिले: बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों में सरपंच के सभी पद अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित हैं। वर्गवार सरपंच पद आरक्षण: ST – 3,058 | SC – 2,493 | OBC – 1,961 पद। मुख्य बिंदु और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश मतदाता संख्या: कुल मतदाता संख्या में 2.08 करोड़ पुरुष मतदाता शामिल हैं। जयपुर जिला परिषद में सबसे अधिक, जबकि जैसलमेर में सबसे कम मतदाता हैं। खंडेला सबसे बड़ी पंचायत समिति है। मतदान केंद्र व स्टाफ: कुल 45,384 मतदान केंद्रों पर 3.17 लाख कर्मचारी चुनाव संपन्न कराएंगे। बुजुर्ग और दिव्यांग वोटरों के लिए घर से लाने-ले जाने की व्यवस्था होगी। पहचान पत्र: मतदान के लिए मतदाता पहचान पत्र (EPIC) के अलावा 11 वैकल्पिक दस्तावेज़ मान्य होंगे। चुनावी खर्च सीमा: जिला परिषद सदस्य हेतु रुपये 3 लाख, पंचायत समिति सदस्य हेतु रुपये 1.50 लाख तथा सरपंच पद हेतु रुपये 1 लाख की खर्च सीमा तय की गई है। कड़े नियम: नामांकन के दौरान रैली निकालने और जीत के बाद विजय जुलूस निकालने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सरकारी स्तर पर नए कार्यादेश जारी करने पर रोक रहेगी।   महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण निकाय चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिला था जबकि पंचायती राज संस्थाओं में 50 फीसदी आरक्षण का नियम है। ऐसे में गांव की सरकार में महिलाओं का बोलबाला होगा। वार्ड पंच, सरपंच, उप सरपंच, प्रधान और प्रमुख की कुर्सियों में ज्यादातर जगह महिलाएं ही नजर आने वाली है क्योंकि उन्हें 50 फीसदी आरक्षण प्राप्त है और कई अन्य ग्राम पंचायतों और जिलों में भी महिलाओं नेत्रियां राजनीति में सक्रिय हैं। वे भी चुनाव मैदान में उतरने वाली हैं। 7201 गांवों में महिलाएं बनेंगी सरपंच प्रदेश में कुल 14,403 ग्राम पंचायतें हैं जहां सरपंच और उपसरपंच के चुनाव होने हैं। पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण का नियम लागू है। ऐसे में 14,403 में से 7201 ग्राम पंचायतों में महिलाएं सरपंच बनने वाली हैं। इन ग्राम पंचायतों में कुल 1 लाख 30 हजार 584 वार्ड हैं जहां पंच चुने जाएंगे। आरक्षण के हिसाब से करीब 65 हजार से ज्यादा महिलाएं वार्ड पंच बनने वाली हैं। 20 जिलों में प्रमुख बनेंगी महिलाएं राजस्थान में कुल 41 जिले हैं। इनमें से 20 जिलों में महिलाएं जिला प्रमुख बनेंगी। जिला परिषद सदस्यों के कुल 1,403 पदों पर और पंचायत समिति के सदस्य के 8,245 पदों पर चुनाव होने हैं। आरक्षण व्यवस्था के मुताबिक जिस तरह से 20 जिलों में महिलाएं प्रमुख बनेंगी। उसी तरह 457 प्रधानों में से 227 पंचायतों में महिला प्रधान बनेंगी। 4 जिलों में सरपंच के सभी पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में महिलाओं के साथ अन्य वर्गों को आरक्षण प्राप्त है। सरपंचों के कुल पदों में से अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 3058, अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 2,493 और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 1,961 पद आरक्षित हैं। इसी तरह से वार्ड पंचों के कुल पदों में से 21,962 पद एससी, 19,117 पद एसटी और करीब 15 हजार पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर ऐसे जिले हैं जहां सरपंच के सभी पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है।    

सरकारी योजनाओं में साइबर फ्रॉड पर सख्ती, DBT और PM-KISAN प्लेटफॉर्म की सुरक्षा बढ़ेगी

झालावाड़ जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म की साइबर सुरक्षा को लेकर शासन सचिवालय में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में झालावाड़ एसपी अमित कुमार ने साइबर अपराध के खिलाफ जिले में की जा रही कार्रवाई और ‘ऑपरेशन शटर डाउन’ के निष्कर्षों पर प्रस्तुतीकरण दिया। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने प्रस्तुतीकरण की सराहना करते हुए राजस्थान पुलिस को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी झालावाड़ एसपी के प्रयासों की प्रशंसा की। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दिए गए प्रस्तुतीकरण में एसपी अमित कुमार ने ‘ऑपरेशन शटर डाउन’ के दौरान साइबर अपराध से जुड़े मामलों में की गई कार्रवाई, आरोपियों के तौर-तरीकों (Modus Operandi) और जांच के दौरान सामने आई प्रणालीगत कमियों की जानकारी दी। साथ ही, भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए संबंधित विभागों के साथ किए जा रहे समन्वय और निवारक उपायों पर भी चर्चा की गई। प्रस्तुतीकरण में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), आपदा प्रबंधन सूचना प्रणाली (DMIS), सामाजिक सुरक्षा पेंशन और जन आधार से जुड़ी व्यवस्थाओं में साइबर सुरक्षा के पहलुओं को भी शामिल किया गया। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत करना जरूरी है। मुख्य सचिव ने सोशल मीडिया पर की तारीफ मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने 1 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर झालावाड़ एसपी के प्रस्तुतीकरण को “brilliant presentation” बताया। उन्होंने डीबीटी से जुड़ी व्यवस्थाओं में साइबर अपराध से मुकाबले के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए राजस्थान पुलिस को बधाई दी। उन्होंने संबंधित विभागों को डिजिटल प्लेटफॉर्म की नियमित सुरक्षा समीक्षा करने और सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए आवश्यक तकनीकी अपडेट सुनिश्चित करने पर जोर दिया। एसओजी को सौंपी गई सरकारी योजनाओं में धोखाधड़ी की जांच बैठक के एजेंडे में सरकारी योजनाओं में हुई धोखाधड़ी की जांच और उसकी प्रभावी निगरानी भी शामिल रही। सरकारी योजनाओं से संबंधित धोखाधड़ी के मामलों की जांच एसओजी को सौंपी गई है। बैठक में जांच की प्रभावी निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय को लेकर चर्चा की गई। DMIS और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की भी समीक्षा आपदा प्रबंधन, राहत एवं नागरिक सुरक्षा विभाग की ओर से संचालित DMIS योजना के तहत ‘ऑपरेशन शटर डाउन’ के दौरान बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का पता चला है। बैठक में इस मामले से सामने आए अनुभवों और अन्य योजनाओं की सुरक्षा के लिहाज से उनके उपयोग पर चर्चा की गई। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से संचालित विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं में धोखाधड़ी की स्थिति और उसके निराकरण के उपायों पर भी विचार-विमर्श हुआ। IT सिस्टम और PM-KISAN पर भी चर्चा सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के तहत विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं के पोर्टल और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रबंधन एवं रखरखाव से जुड़े सुधारात्मक उपायों पर चर्चा हुई। वहीं, सहकारिता विभाग, जो PM-KISAN योजना के क्रियान्वयन में नोडल प्राधिकरण है, से जुड़ी धोखाधड़ी वाली दावों की स्थिति पर भी विचार किया गया। बैठक में साइबर अपराध के बदलते तौर-तरीकों के अनुरूप सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा मजबूत करने, तकनीकी कमियों की पहचान करने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया।

देशी घी के भाव में फिर आया उछाल, दूध की कीमतों ने बढ़ाई गर्मी; गाय का घी भी ₹30 महंगा

 जयपुर  देशी घी की कीमतों में इन दिनों निरंतर तेजी का रुख देखा जा रहा है। त्योहारी डिमांड एवं डेयरियों के पास स्टॉक नगण्य होने से देशी घी के भावों में फिलहाल मंदी का रुख समाप्त हो गया है। 2 सप्ताह के अंतराल में ही देशी घी 15 रुपए प्रति किलो महंगा हो गया है। दूध के भाव लगातार उछलने से भी घी के भावों को मजबूती मिली है। स्थानीय राजधानी जयपुर मंडी कूकरखेड़ा स्थित ब्रोकर आर. मूंदड़ा एंड कंपनी के रामनिवास मूंदड़ा ने बताया कि ब्याह शादी होने एवं फैस्टिव डिमांड के चलते देशी घी में आगे भी तेजी ही बनी रहेगी। उधर साउथ में दूध की कमी होने के कारण गाय का घी काफी महंगा हो गया है। इसमें 30 रुपए प्रति किलो की मजबूती दर्ज की गई है। मूंदड़ा ने बताया कि सोनई एवं तिरूमाला ब्रांड गाय का घी वर्तमान में 725 रुपए प्रति किलो होलसेल में बिकने लगा है। बता दें देश में घी और बटर की घरेलू मांग बहुत अधिक है। लगभग 73 फीसदी घी का उपयोग घरेलू स्तर पर होता है। त्योहारी सीजन और सर्दियों के महीनों के दौरान देशी घी निर्माताओं द्वारा बटर का बड़ा स्टॉक खपा दिया जाता है। जबकि गर्मियों में स्टॉक कम हो जाता है। भारत में कुल बटर का उत्पादन बढ़कर लगभग 7.44 लाख टन होने का अनुमान लगाया गया है। जयपुर- स्थानीय मंडियों में खाद्य जिंसों के थोक बाजार भाव इस प्रकार रहे:- अनाज-दालें गेहूं दड़ा मिल डिलीवरी नैट 2800, सरसों 42 प्रतिशत तेल कंडीशन 8650, ग्वार गम जयपुर डिलीवरी 13100, ग्वार जयपुर डिलीवरी 6450 से 6500, मूंग साबुत 8000, मूंग मोगर 10600, चना मिल डिलीवरी 7050 रुपए प्रति क्विंटल। ब्रांडेड देशी घी- नंद कृष्णा 9200, कृष्णा 9750, बिलौना 9350, डेयरी फ्रैश 9200, महान 9980, श्रीसरस 9175, श्रद्धा ब्रांड 9150, गोकुल 9150 रुपए प्रति 15 किलो। स्किम्ड मिल्क पाउडर- बंगाल टाइगर 380, अमूल 335, सागर 340 रुपए प्रति किलो। वनस्पति घी- अशोका 2165 रुपए जीएसटी पेड। सरसों तेल (कच्ची घाणी, एगमार्क ग्रेड-1)- अशोका 3000, ज्योति किरण 2990, कबीरा 3010, नेताजी 3015, कबीरा ब्रांड कोल्ड प्रैस्ड् सरसों तेल 3025 रुपए प्रति 15 किलो जीएसटी पेड। सोयाबीन रिफाइंड तेल– नेताजी 2470, दीपज्योति 2460, चंबल 2500 रुपए प्रति 15 किलो जीएसटी पेड। मूंगफली रिफाइंड तेल- गोल्ड मैजिक 2800, नेताजी 2900, कबीरा 2925 रुपए प्रति 15 लीटर जीएसटी पेड। मूंगफली फिल्टर तेल- गोल्ड मैजिक 3000, नेताजी 2975, स्वदेशी 2970, अग्रसेन 2960, कबीरा 2900 रुपए प्रति 15 किलो जीएसटी पेड। तिल्ली तेल- कबीरा 3750 रुपए प्रति 15 किलो जीएसटी पेड। किराना मेवा- सौंफ डायमंड 200, मधुबाला अजवायन 185, मधुबाला पोस्तदाना 1800, पोहा लाल गणेश 55, पोहा मधुबाला 57 रुपए प्रति किलो। कैटलफीड- ग्वाला डायमंड 3000, ग्वाला सुपर फैट प्रो 3400, महाराजा सुपर 2975, महाराजा मोहनभोग 2925, महाराजा राजभोग 2875, आशीर्वाद गोल्ड 2925, एस्सार मिल्क स्पेशल 3175 रुपए। भैंस ब्रांड बिनौला खल 5400 रुपए प्रति क्विंटल। भैंस पशु आहार 1135 रुपए प्रति बैग। सरिया प्रति टन जीएसटी पेड। कृष्णा 8 एमएम 61200, 10 एमएम 59100, 12 एमएम 57600 रुपए। प्रीमियर 8 एमएम 61100, 10 एमएम 59000, 12 एमएम 57500 रुपए। जैमिनी 8 एमएम 61000, 10 एमएम 58800, 12 एमएम 57300 रुपए। शर्मा 8 एमएम 61000, 10 एमएम 58800, 12 एमएम 57200 रुपए। शर्मा गर्डर 125 से 150 एमएम 59500 रुपए। बिरला टीएमटी सरिया 8 एमएम 411, 10 एमएम 628, 12 एमएम 887, 16 एमएम 1578, 20 एमएम 2466, 25 एमएम 3844 रुपए प्रति नग।

राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले सरकार की तैयारी तेज, CM ने सरपंचों से योजनाओं पर की चर्चा

जयपुर राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले बीजेपी ने गांवों पर अपना फोकस बढ़ा दिया है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को जयपुर के माहेश्वरी पब्लिक स्कूल स्थित तक्षशिला ऑडिटोरियम में पंचायती राज जनप्रतिनिधियों से संवाद किया। प्रदेश के अलग-अलग जिला मुख्यालयों से भी जनप्रतिनिधि वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण विकास, जनसेवा और पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सरपंचों से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांव मजबूत होंगे तो विकसित भारत का संकल्प भी मजबूत होगा। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं को ग्रामीण विकास और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। सीएम ने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। नवाचार करने वाले सरपंचों का सम्मान कार्यक्रम में अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य और नवाचार करने वाले पंचायती राज जनप्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। सरपंचों ने गांवों में किए जा रहे अलग-अलग प्रयोगों और विकास कार्यों की जानकारी मुख्यमंत्री के साथ साझा की। इनमें स्वच्छता, बालिका शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण और सामुदायिक स्तर पर पारंपरिक त्योहारों के आयोजन जैसे प्रयास शामिल रहे। आदिवासी क्षेत्र के एक सरपंच ने बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हॉस्टल निर्माण और आसपास के गांवों की छात्राओं को शिक्षा से जोड़ने की पहल बताई। वहीं झुंझुनूं जिले की एक सरपंच ने गांव में शुरू किए गए बर्तन बैंक के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने ऐसे स्थानीय नवाचारों को ग्रामीण विकास में उपयोगी बताया। 'सरपंच साहब' वाली पहचान का किया जिक्र मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सरपंचों की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि सरपंच बनने के बाद यह पहचान लंबे समय तक लोगों के साथ जुड़ी रहती है। उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि आज भी जब वे अपने गांव जाते हैं तो वहां के लोग उन्हें मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि 'सरपंच साहब' कहकर बुलाते हैं। उन्होंने कहा कि यह पहचान बताती है कि पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों की गांव के लोगों के बीच कितनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कांग्रेस पर भी साधा निशाना पंचायत चुनाव के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से विकास कार्यों की गति प्रभावित होती है और सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त खर्च होता है। सीएम ने कहा कि उनकी सरकार ने पंचायतों में विकास की निरंतरता बनाए रखने के लिए सरपंचों पर भरोसा किया और ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास किया, जिससे गांवों के विकास कार्य बाधित न हों। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग होटल में बंद रहकर सरकार चलाते थे, वे आम लोगों की समस्याओं को कैसे समझेंगे। उन्होंने रोजगार के मुद्दे पर सरकार के काम का उल्लेख करते हुए दावा किया कि अब तक 1 लाख 94 हजार युवाओं को नियुक्तियां दी जा चुकी हैं, जबकि 1 लाख 22 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर सीएम ने सरपंचों से कहा कि गांव में उनके आसपास रहने वाला कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने 'दिया तले अंधेरा नहीं होना चाहिए' का संदेश देते हुए जनप्रतिनिधियों से लोगों की समस्याएं सुनने और उनके समाधान के लिए सक्रिय रहने को कहा। उन्होंने कहा कि किसी समस्या के समाधान में सरकारी स्तर पर परेशानी आ रही हो तो उसकी जानकारी सरकार तक पहुंचाई जाए। कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग के राज्य मंत्री ओटाराम देवासी समेत अन्य जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे। पंचायत चुनाव से पहले हुए इस संवाद में सरकार ने ग्रामीण विकास और पंचायत स्तर पर जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को प्रमुखता दी।

टोंक रोड पर फिल्मी अंदाज में चोरी, चादरें लगाकर Rado शोरूम से लाखों की घड़ियां ले गए चोर

  जयपुर जयपुर में गुरुवार तड़के करीब साढ़े चार बजे जब शहर सो रहा था और टोंक रोड पर राडो लग्जरी घड़ियों के शोरूम में चोरी का पूरा 'ऑपरेशन' चल रहा था। छह-सात नकाबपोश आए, शटर के बाहर दो चादरें तानीं और फिर शुरू हुआ घड़ियां समेटने का सिलसिला। महज 36 मिनट में बदमाश 251 घड़ियां बैगों में भरकर निकल गए। चोरी गई घड़ियों की शुरुआती कीमत करीब 6 करोड़ रुपए बताई जा रही है। पूरी वारदात शोरूम में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। सूत्रों के मुताबिक, चोरी की गई घड़ियों की कीमत 90 हजार से लेकर सात लाख रुपए तक है। आधा घंटे तक अंदर…क्या पहले से था 'नक्शा'? पुलिस को आशंका है कि चोरों को शोरूम की अंदरूनी व्यवस्था और महंगी घड़ियों के डिस्प्ले की पहले से जानकारी थी। हालांकि, यह भी जांच की जा रही है कि घड़ियों का चयन पहले से तय था या मौके पर किया गया। बदमाशों ने पहले आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी। मौका देखकर शटर के बाहर कपड़े की दो चादरें आड़ी लगाईं, ताकि अंदर चल रही गतिविधियां सड़क से दिखाई न दें। घटना के बाद जांच करती पुलिस इसके बाद शटर तोड़कर उसे ऊपर उठाया और एक-एक कर अंदर दाखिल हो गए। अंदर पहुंचते ही उनका निशाना तय था। महंगी घड़ियों वाले शोकेस और काउंटरों तक पहुंचे और बैगों में घड़ियां भरने लगे। सीसीटीवी फुटेज में नकाब पहने बदमाश टॉर्च की रोशनी में लगातार घड़ियां समेटते नजर आ रहे हैं। कोई शोकेस खंगाल रहा था तो कोई बैग भरने में जुटा था। चार राज्यों में पहले भी इसी कंपनी के शोरूम बने निशाना शुरुआती जांच में सामने आया है कि देश के अन्य राज्यों में भी राडो घड़ियों के शोरूम चोरों के निशाने पर रहे हैं। जयपुर पुलिस अब इन पुरानी वारदातों के पैटर्न और आरोपियों के तौर-तरीकों का बारीकी से मिलान कर रही है। जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस तेलंगाना में पकड़े गए उस अंतरराज्यीय गिरोह के बारे में भी पता लगा रही है, जिसने 11 राज्यों में ऐसे शोरूम को निशाना बनाने की बात कबूल की थी। कुल 251 घड़ियां चोरी होना बताया गया है। सड़क पर लोग गुजरते रहे पुलिस को आशंका है कि बदमाश बाइक या चौपहिया वाहन से आए थे। वाहन शोरूम से कुछ दूरी पर खड़ा करने या किसी साथी के उन्हें नजदीक छोड़ने की भी संभावना है। वारदात के दौरान सुबह की सैर करने वाले लोग और वाहन वहां से गुजरते रहे, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पड़ताल शुरू कर दी है। सुबह 8 बजे खुला चोरी का राज दुर्गापुरा की चंद्रकला कॉलोनी निवासी शोरूम मालिक ने बजाज नगर थाने में मामला दर्ज कराया। सुबह करीब 8 बजे पड़ोसी दुकानदार ने शटर ऊंचा देखा तो मालिक को सूचना दी। अंदर जाकर देखा तो शोरूम में घड़ियों का बड़ा स्टॉक गायब था। शुरुआती जांच में 251 घड़ियां चोरी होना सामने आया है। मॉडल, कीमत और स्टॉक रिकॉर्ड का मिलान जारी है। इसके बाद चोरी गए माल की अंतिम कीमत स्पष्ट होगी। कई लग्जरी मॉडल लाखों रुपए कीमत के हैं। कैमरे बंद मिलने और लाइव मॉनिटरिंग न होने से खुली पोल पॉश और व्यस्त सड़कों में शुमार टोंक रोड पर चोरों ने सुरक्षा तंत्र को ठेंगा दिखाते हुए सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। चोरों ने लग्जरी घड़ी के शोरूम को आधे घंटे से अधिक समय तक इत्मीनान से खंगाला और करोड़ों रुपए की घड़ियां समेटकर फरार हो गए। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी वारदात हो गई, लेकिन किसी को इसकी भनक नहीं लगी। शोरूम में न तो कोई अलार्म सिस्टम था और न ही कोई ऐसा अलर्ट तंत्र, जो चोरी की भनक लगते ही मालिक या पुलिस को सतर्क कर सके। अगले दिन सुबह जब पड़ोस का दुकानदार शोरूम पर पहुंचा, तब चोरी का खुलासा हुआ और उसने शोरूम मालिक लितेश को इसकी सूचना दी। गश्त व्यवस्था पर सवाल जिस जगह पर यह चोरी हुई, वहां से बजाज नगर थाना महज सवा किलोमीटर की दूरी पर है। इसके बावजूद बदमाशों का इतनी देर तक बेखौफ होकर शोरूम के भीतर रहना पुलिस की रात्रिकालीन गश्त और खुफिया तंत्र पर सवाल खड़े करता है। यदि रात के वक्त पुलिस की चौकसी मजबूत होती, तो चोरों के लिए इस तरह आसानी से वारदात को अंजाम देना मुश्किल होता। सुरक्षा के दावे कागजी शहर में अभय कमांड सेंटर के जरिए हजारों कैमरों से पैनी नजर रखने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन इस घटना ने उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शोरूम के आसपास लगे कई सीसीटीवी कैमरे या तो बंद मिले या फिर उन पर किसी की नजर ही नहीं पड़ी। कैमरों के होने के बावजूद लाइव मॉनिटरिंग का फेल होना बड़ी नाकामी है। एडिशनल डीसीपी ईस्ट पारस जैन ने भी इस बात की पुष्टि की है कि शोरूम में सुरक्षा के नाम पर अलार्म और अलर्ट सिस्टम दोनों ही नदारद थे। ये सवाल ताकि शहर रहे सुरक्षित बजाज नगर थाना इलाके में करोड़ों के सामान वाले इस शोरूम में हुई चोरी ने शहर के अन्य महंगे आभूषण, घड़ी और इलेक्ट्रॉनिक शोरूमों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पुलिस को ऐसे प्रतिष्ठानों एवं शहर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना भी जरूरी हो गया है। क्या जयपुर में सुरक्षा का मतलब सिर्फ वारदात के बाद सीसीटीवी फुटेज खंगालना रह गया है? टोंक रोड जैसे व्यस्त मार्ग पर चोर आधे घंटे से ज्यादा सक्रिय रहे, तो पुलिस गश्त कहां थी? बजाज नगर थाने से महज सवा किलोमीटर दूर वारदात हुई, फिर पुलिस की मौजूदगी का असर क्यों नहीं दिखा? रात में बंद रहने वाले शोरूमों की सुरक्षा पुलिस गश्त में क्यों नहीं है? क्या हजारों कैमरों के होने के बावजूद लाइव मॉनिटरिंग फेल हो रही है? क्या कमांड सेंटर के पास कैमरों के बंद होने या तकनीकी खराबियों का कोई रियल-टाइम डैशबोर्ड है? सेंधमारी होने पर मालिक को तुरंत सूचना देने वाला ऑटोमैटिक अलार्म सिस्टम क्यों नहीं था? क्या ऐसे संवेदनशील प्रतिष्ठानों के लिए यह अनिवार्य किया जाना चाहिए? अपराध रोकने के लिए पुलिस, कमांड सेंटर और व्यापारियों के बीच कोई एकीकृत सुरक्षा तंत्र काम कर … Read more

जयपुर में उचित मूल्य दुकानों के लिए फिर शुरू हुई आवेदन प्रक्रिया, 116 दुकानें खाली

जयपुर जिले में उचित मूल्य की दुकान लेने के इच्छुक लोगों के लिए बड़ा मौका है। जिला कलक्टर (रसद) कार्यालय ने 29 सितंबर को जारी विज्ञप्ति को निरस्त करते हुए 116 रिक्त उचित मूल्य दुकानों के आवंटन के लिए संशोधित विज्ञप्ति जारी की है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, राजस्थान के दिशा-निर्देशों और आरक्षण व्यवस्था के तहत जिला रसद अधिकारी, जयपुर द्वितीय के क्षेत्राधिकार में आने वाली इन दुकानों के प्राधिकार पत्र जारी करने के लिए पात्र एवं इच्छुक आवेदकों से आवेदन मांगे गए हैं। जिला कलक्टर (रसद) संदेश नायक ने बताया कि वर्ष 2023 की पुरानी विज्ञप्ति भी समाप्त कर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की गई है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। सामान्य श्रेणी में इन क्षेत्रों की दुकानें सामान्य श्रेणी में बस्सी तहसील की नगर पालिका बस्सी के वार्ड संख्या 9, 12, 21, मनोहरपुरा, दूधली, पडासोली, टहटडा टहटडा (दौपुर) तथा लालगढ़ शामिल हैं। तुंगा तहसील में खतेपुरा एवं बराला, फागी तहसील में मण्डोर, रोटवाड़ा, चकवाड़ा, नारेड़ा (छापरी), कंवरपुरा, माधोराजपुरा में भांकरोटा एवं रेनवाल मांजी तथा हीरापुर शामिल हैं। जॉबनेर तहसील में जोरपुरा जॉबनेर, आसलपुर, आईदान का बास, भैंसावा तथा नगर पालिका जोबनेर के वार्ड संख्या 3, 9 एवं 10 शामिल हैं। किशनगढ़-रेनवाल तहसील में मुंडियागढ़, लुनियावास, सुण्डो का बास, रामजीपुरा कलां, जुनसिया, काबरो का बास, मलिकपुर, बाघावास, भैंसलाना तथा नगर पालिका किशनगढ़-रेनवाल के वार्ड संख्या 20 एवं 3 शामिल हैं। फुलेरा तहसील में चैनपुरा (पीथावास), चैनपुरा (भावसा), सुरसिंहपुरा, आकोदा, रोजड़ी, श्रीरामपुरा तथा नगर पालिका सांभर के वार्ड संख्या 1, 4, 18, 1, 8 एवं नगर पालिका फुलेरा के वार्ड संख्या 10, 14 शामिल हैं। आंधी तहसील में महंगी, डांगरवाड़ा, थली एवं फूटोलाव, आमेर तहसील में रूण्डल तथा जालसू तहसील में चतरपुरा, नांगल सिरस एवं रामपुरा डाबड़ी शामिल हैं। सांगानेर तहसील में देहमीकलां (देहमीखुर्द), कपूरावाला, भम्भोरिया, वाटिका तथा नगर पालिका बगरू के वार्ड संख्या 1 एवं 2 शामिल हैं। दूदू तहसील में उरसेवा, बींगोलाव (हटुपुरा), साखून (जाखड़ों की ढाणी) एवं नानण तथा मौजमाबाद तहसील में गाडोता एवं धमाणा शामिल हैं। जयपुर ग्रामीण तहसील में मुण्डिया रामसर, मण्डाभोपावास एवं चकरामसर, शाहपुरा तहसील में छापड़ा खुर्द, नायन (त्रिलोकपुरा), नवलपुरा तथा नगर पालिका शाहपुरा के वार्ड संख्या 11, 13 एवं 14 शामिल हैं। चौमूं तहसील में गोविन्दगढ़ (कालू का बास), हस्तैड़ा, कालाडेरा, गोविन्दगढ़ तथा नगर पालिका चौमूं के वार्ड संख्या 12 एवं 9 शामिल हैं। चाकसू तहसील में नगर पालिका चाकसू के वार्ड संख्या 17 (पुराना), 15 एवं 5 (पुराना) तथा कादेड़ा शामिल हैं। सामान्य महिला श्रेणी सामान्य महिला श्रेणी में बस्सी तहसील में रामरतनपुरा, माधोराजपुरा में मोहब्बतपुरा एवं झाड़ला, जॉबनेर तहसील में डेहरा, बस्सी झाझड़ा एवं करणसर (खिजूरियां) शामिल हैं। किशनगढ़-रेनवाल तहसील में नगर पालिका किशनगढ़-रेनवाल का वार्ड संख्या 5, बासड़ी खुर्द, भांदवा (डोगी वालों का बास), डूंगरसी का बास एवं हरसोली शामिल हैं। फुलेरा तहसील में सिनोदिया, हिरनोदा, तेज्या का बास तथा नगर पालिका नरेना का वार्ड संख्या 10 शामिल है। जमवारामगढ़ तहसील में नायला (रामजीपुरा) एवं ताला तथा आमेर तहसील में लखेर शामिल हैं। जालसू तहसील में रायथल (विजयपुरा), सांगानेर तहसील में पवालिया (टिलावाला) एवं देवलियां तथा जयपुर ग्रामीण तहसील में फतेहपुरा एवं निमेड़ा शामिल हैं। शाहपुरा तहसील में नगर पालिका शाहपुरा के वार्ड संख्या 4, 12 एवं 17 शामिल हैं। चौमूं तहसील में गुडलिया (कीरत सिंह का बास), खेजरोली, इटावा भोपजी तथा नगर पालिका चौमूं के वार्ड संख्या 19, 23, 24 एवं 20 शामिल हैं। चाकसू तहसील में सवाई माधोसिंहपुरा, कोटखावदा एवं काठावाला शामिल हैं।

सेवानिवृत्ति से पहले पूर्व जज संजीव शर्मा का बड़ा बयान, बोले- मुझे मुख्य न्यायाधीश बनने से रोका गया

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने सेवानिवृत्ति से पहले उन पर लगाए गए आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वे न्यायिक गरिमा के कारण कई सवालों पर टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन गंभीर आरोपों से जुड़ी एक याचिका न्यायाधीश मेहता के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश कैसे बनाया गया? इस पर न्यायाधीश मेहता ने कहा कि इसका जवाब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ही दे सकते हैं। अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में शर्मा ने कहा कि उन्हें योजनाबद्ध तरीके से मुख्य न्यायाधीश बनने से रोका गया। इससे पेशेवर रूप से कोई परेशानी नहीं हुई, लेकिन व्यक्तिगत रूप से दुख हुआ। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में न्यायिक गरिमा का उल्लंघन हुआ और न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचा। शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए सीजेआई को जवाब सौंपा है और मानहानि का मुकदमा करने की अनुमति भी मांगी है। उन्होंने जवाब और दस्तावेज सार्वजनिक करने से इनकार करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई को आरोपों तथा गोपनीयता भंग होने के पूरे मामले की तह में जाकर जांच करनी चाहिए। आरोपों पर यह बोले शर्मा न्यायिक अधिकारी पर कार्रवाई प्रकरण: डीजे अजय शुक्ला ने स्वयं स्वीकार किया कि वे अस्पताल जाने के कारण देरी से कोर्ट आए। उन्हें शुरू में एपीओ किया गया था, लेकिन जवाब आने पर दूसरी जगह लगा दिया गया। आईपीएस आनंद शर्मा के मामले से इस कार्रवाई का कोई संबंध नहीं है। वैसे भी आनंद शर्मा दूर के रिश्तेदार हैं। यदि किसी कार्रवाई में दखल करना होता तो मेरी मां और भाई के केस लंबित हैं, उन पर दखल करता, लेकिन उन पर ही दखल नहीं किया। शर्मा ने मौजूदा कॉलेजियम सिस्टम पर भी उठाए सवाल शर्मा ने मौजूदा कॉलेजियम व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें संबंधित हाईकोर्ट के पूर्व सीजे रह चुके जजों को शामिल किया जाना चाहिए। शर्मा ने हाईकोर्ट भवन निर्माण, रामगढ़ बांध और अन्य मामलों में लगाए गए आरोपों से कोई सरोकार होने से इनकार किया। जजों के कामकाज के लिए एसओपी की जरूरत पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के कामकाज व आचरण को लेकर स्पष्ट एसओपी या गाइडलाइन होनी चाहिए, ताकि किसी हाईकोर्ट के कामकाज में हस्तक्षेप की स्थिति भविष्य में मिसाल न बने। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और लोगों का विश्वास बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। जाति आधारित रवैये के आरोपों पर भी उन्होंने चिंता जताई।

वागड़ में नकली करेंसी का जाल! 4.95 लाख के जाली नोट से लेकर करोड़ों की बरामदगी तक, सामने आई पूरी कहानी

बांसवाड़ा  गुजरात और मध्यप्रदेश से सीधी कनेक्टिविटी दक्षिणी राजस्थान के बांसवाड़ा-डूंगरपुर के कारोबार को बढ़ाने में मददगार साबित होने के साथ ही अपराध की डगर को भी आसान बना रही है। शराब और पशुओं के अवैध परिवहन के बाद अब वागड़ के इन दोनों जिलों के तार नकली करेंसी से भी सीधे जुड़ रहे हैं। गत वर्षों में सामने आए जाली नोटों के मामलों को जोड़कर देखें तो बांसवाड़ा-डूंगरपुर में नकली करेंसी का खेल यहां रच-बस गया है। हर साल वागड़ के किसी न किसी कस्बे में युवा नकली करेंसी को खपाने की जुगत में पुलिस के हत्थे चढ़ रहे हैं। हालांकि, पुलिस के हत्थे अब तक मास्टरमाइंड नहीं आ पाए हैं। पेट्रोल पंप : आसान निशाना नकली नोट खपाने के लिए पेट्रोल-डीजल पंप बदमाशों के लिए आसान जरिया बन रहे हैं। भीड़भाड़ और लगातार होने वाले नकदी लेनदेन के बीच हर नोट की बारीकी से जांच नहीं हो पाती। यही नकली नोट आगे बाजार और बैंक के कैश काउंटर तक पहुंच जाते हैं। 2026 : डूंगरपुर में 4.95 लाख के नकली नोट सितंबर 2026 में रामसागड़ा थाना क्षेत्र में दो आरोपियों से 4 लाख 95 हजार 500 रुपए के 991 नकली नोट बरामद हुए। पुलिस ने प्रिंटर, कागज, लेमिनेशन मशीन, नोट गिनने की मशीन, मोबाइल, कार और स्कूटी भी जब्त की। आरोपियों ने सोशल मीडिया के जरिए नोट बनाना सीखने की बात सामने आई। 2025 : आनंदपुरी में अंतरराज्यीय गिरोह आनंदपुरी पुलिस ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात तक जुड़े जाली नोट गिरोह का पर्दाफाश कर मुख्य आरोपी सहित 17 से अधिक आरोपियों को पकड़ा। 500, 200 और 100 रुपए के नोट बनाने के उपकरण मिले। दाहोद से लाकर बाजार में खपाने की बात सामने आई। 2024 : कुशलगढ़ में दो करोड़ के बदले नकली नोट मार्च 2024 में लोगों को पैसा दोगुना करने का लालच देकर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ। पुलिस ने आरोपियों से करीब 2 करोड़ 90 लाख रुपए के नकली नोट बरामद किए। 2023 : सागवाड़ा के युवकों का अजमेर कनेक्शन अक्टूबर 2023 में दिल्ली क्राइम ब्रांच ने अजमेर में चल रहे नकली नोट गिरोह का पर्दाफाश किया। इसमें सागवाड़ा के दो युवकों का कनेक्शन सामने आया। दोनों करीब छह लाख रुपए की नकली करेंसी लेकर दिल्ली पहुंचे थे। 2022 : सरकारी क्वार्टर में छप रहे थे नोट अगस्त 2022 में बांसवाड़ा शहर की विद्युत निगम कॉलोनी में पुलिस ने कार्रवाई कर सरकारी विभाग के लेखाकार सहित तीन लोगों को पकड़ा। मौके से 79 हजार रुपए के नकली नोट बरामद हुए। दो राज्यों से सीधा जुड़ाव, निगरानी बड़ी चुनौती गुजरात बॉर्डर : डूंगरपुर से महज 35 और बांसवाड़ा से 142 किमी एमपी बॉर्डर : बांसवाड़ा से 128 और डूंगरपुर से 228 किमी ये 3 प्रमुख कारण 1. गुजरात-एमपी का जुड़ाव : राष्ट्रीय राजमार्ग और लगातार परिवहन की सुविधा के चलते बाहरी क्षेत्रों से यहां पहुंचना आसान है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग नोट की कागज की मोटाई, छपाई और सुरक्षा चिह्नों पर ध्यान नहीं देते। इसका फायदा उठाकर नकली नोट आसानी से चल जाते हैं। गिरोह युवाओं को लालच देकर पेडलर के रूप में इस्तेमाल करते हैं। ये युवक सार्वजनिक परिवहन के जरिए बड़े शहरों से नकली नोट लाकर स्थानीय बाजार में खपा देते हैं। पुलिस लेती है एक्शन वागड़ गुजरात और एमपी बॉर्डर के नजदीक है। ऐसे में पुलिस को विशेष ध्यान देना पड़ता है और पुलिस आरोपियों की समय-समय पर धरपकड़ भी कर रही है। पुलिस ने अंदरूनी रास्तों पर भी सघन निरीक्षण दल बनाए हैं। वहीं, इन राज्यों की पुलिस से मिलने वाले इनपुट पर भी एक्शन लेते हैं। -सुधीर जोशी, जिला पुलिस अधीक्षक, बांसवाड़ा