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मनरेगा की जगह नई योजना: 125 दिन रोजगार और साप्ताहिक भुगतान का प्रावधान

 जयपुर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सोच और गरीब कल्याण की भावना को साकार करते हुए विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू होने जा रहा है। मनरेगा के स्थान पर लाई गई वीबी-जीरामजी योजना पूरे देश के साथ-साथ राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी आत्मनिर्भर, समावेशी और सशक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने इस योजना में 95 हजार 692 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन किया है, जो ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए अब तक का सर्वाधिक आवंटन है। राज्यों के राज्यांश सहित इस कार्यक्रम का कुल परिव्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। राजस्थान के लिए केंद्र सरकार ने इस योजना में 7 हजार 581 करोड़ रुपये से अधिक का अंतरिम आवंटन निर्धारित किया है। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा 4 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया जाएगा, जिसे आवश्यकता एवं मांग के अनुसार बढ़ाया भी जा सकेगा। इस प्रकार राजस्थान में इस योजना के लिए कुल 11 हजार 581 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध होगी, जो प्रदेश में ग्रामीण रोजगार गांरटी के लिए अब तक का सर्वाधिक आवंटन है। नई व्यवस्था, नया अधिकार विभिन्न विभागों की योजनाओं में संसाधनों का कन्वर्जेन्स करते हुए दोहराव रोकने, गुणवत्तायुक्त निर्माण सुनिश्चित करने और ग्रामीण श्रमिकों को वैधानिक रोजगार सुरक्षा देने के उद्देश्य से यह अधिनियम लाया गया है। मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा इस योजना का प्रदेश में सफल क्रियान्वयन करते हुए सुनिश्चित किया जाएगा कि राजस्थान का कोई भी पात्र ग्रामीण परिवार इस योजना के लाभ से वंचित न रहे। 125 दिन रोजगार, साप्ताहिक भुगतान ग्रामीण क्षेत्र के ऐसे प्रत्येक पात्र परिवार को अब एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिनों की रोजगार गारंटी का वैधानिक अधिकार दिया गया है, जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं। पहले श्रमिकों को 15 दिनों में भुगतान किया जाता था, अब साप्ताहिक भुगतान का प्रावधान किया गया है। भुगतान डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक अथवा डाकघर खातों में जाएगा, जिससे पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित होंगी। वहीं, निर्धारित समयावधि में रोजगार उपलब्ध न होने पर बेरोजगारी भत्ते का तथा मजदूरी भुगतान में देरी होने पर क्षतिपूर्ति का वैधानिक प्रावधान किया गया है। यह निर्णय ग्रामीण आय में वृद्धि और आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है। जिन मौजूदा मनरेगा जॉब कार्ड के लिए ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वे वीबी-जीरामजी अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अनुसार नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक वैध बने रहेंगे।

जैसलमेर में कॉल सेंटर निरीक्षण: पेयजल और बिजली शिकायतों का तुरंत समाधान

जयपुर राज्य सरकार द्वारा आमजन की शिकायतों के त्वरित एवं प्रभावी समाधान के लिए संचालित राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग एवं निस्तारण व्यवस्था की समीक्षा के क्रम में सोमवार को आपदा प्रबंधन एवं राहत विभाग के विशिष्ट शासन सचिव एवं जैसलमेर जिले के प्रभारी सचिव महावीर प्रसाद मीणा ने राजस्थान संपर्क कॉल सेंटर का सघन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभाग से संबंधित शिकायतों, उनके निस्तारण की प्रगति, संतुष्टि स्तर तथा लंबित प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को प्रकरणों का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं संतोषजनक निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शिकायतों के सही श्रेणीकरण और समयबद्ध निस्तारण पर विशेष जोर निरीक्षण के दौरान मीणा ने बाढ़, अतिवृष्टि, प्राकृतिक आपदाओं से हुई क्षति, राहत सहायता तथा अन्य आपदा संबंधी शिकायतों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतों का विषयानुसार उचित श्रेणीकरण सुनिश्चित किया जाए। इससे संबंधित मामलों का प्रभावी और त्वरित निस्तारण संभव हो सकेगा। उन्होंने निर्देश दिए कि कर्मचारियों से जुड़े मामलों को एम्प्लोई श्रेणी में दर्ज किया जाए तथा आवश्यकता अनुसार शिकायतों का तार्किक पुनः श्रेणीकरण किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि अर्जेंट श्रेणी में दर्ज सभी शिकायतों का निस्तारण निर्धारित समय सीमा के भीतर प्राथमिकता के आधार पर किया जाना सुनिश्चित किया जाए। शिकायत निस्तारण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर समीक्षा के दौरान विशिष्ट शासन सचिव श्री महावीर प्रसाद मीणा ने शिकायत निस्तारण व्यवस्था की समग्र प्रगति का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि आमजन को त्वरित राहत प्रदान करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिकायतकर्ताओं के संतुष्टि प्रतिशत को और अधिक बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाएं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बुनकर संघ से संबंधित शिकायतों की भी अलग से समीक्षा करते हुए उनके प्रभावी समाधान के निर्देश प्रदान किए। कॉल सेंटर से परिवादियों के अभाव-अभियोग सुने, त्वरित समाधान के दिए निर्देश निरीक्षण के दौरान उन्होंने राजस्थान संपर्क कॉल सेंटर के माध्यम से विभाग एवं जैसलमेर जिले से संबंधित विभिन्न परिवादियों से दूरभाष पर संवाद कर उनकी समस्याओं एवं शिकायतों की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को परिवादों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही शिकायतकर्ताओं को राहत प्रदान करने के लिए संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करने को कहा। पेयजल समस्या के समाधान के लिए तत्काल कार्रवाई जैसलमेर निवासी सत्तार खान ने क्षेत्र में स्थित सरकारी ट्यूबवेल के लंबे समय से खराब होने के कारण उत्पन्न पेयजल संकट की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशिष्ट शासन सचिव ने तत्काल जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिशाषी अभियंता से दूरभाष पर संपर्क कर आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ट्यूबवेल की मरम्मत पूर्ण होने तक प्रभावित क्षेत्र में अतिरिक्त टैंकरों के माध्यम से नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा खराब ट्यूबवेल को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र दुरुस्त किया जाए। एक वर्ष से खराब रोड लाइट हुई दुरुस्त, परिवादी को मिली राहत जैसलमेर निवासी श्री गीगाराम ने क्षेत्र में पिछले एक वर्ष से रोड लाइट खराब होने के कारण अंधकार एवं आवागमन में हो रही परेशानी की शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर विशिष्ट शासन सचिव ने संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर संपर्क कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। अधिकारियों द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए रोड लाइट को दुरुस्त कराया गया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार आमजन की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए सभी विभागों के सचिव निर्धारित तिथियों पर राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) कंट्रोल रूम में उपस्थित होकर परिवादियों से सीधे संवाद कर रहे हैं। इस पहल के माध्यम से नागरिक घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कर शीघ्र समाधान प्राप्त कर रहे हैं।

प्री-मानसून की दस्तक: राजस्थान के कई हिस्सों में तेज हवाएं और बारिश, तापमान में बड़ी गिरावट

जयपुर प्रदेश में आंधी-बारिश का दौर लगातार जारी है. बरसात के बीच लोगों को गर्मी से राहत मिल रही है. राजस्थान में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं और रविवार (15 जून) दोपहर बाद कई जिलों में मौसम ने अचानक करवट ली. जयपुर, चित्तौड़गढ़ समेत कई क्षेत्रों में तेज आंधी के बाद बारिश हुई. कुछ जगहों पर करीब एक इंच तक वर्षा दर्ज की गई. जयपुर, अलवर, दौसा और टोंक में बारिश से पहले तेज हवाएं चलीं. फलोदी राज्य का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 42.8 डिग्री दर्ज किया गया. पश्चिमी राजस्थान में राहत नहीं मौसम में आए इस बदलाव से पूर्वी राजस्थान के साथ-साथ पश्चिमी जिलों में भी भीषण गर्मी से राहत मिली है. पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों को छोड़कर राज्य के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया. मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है. सोमवार (15 जून) के लिए 15 जिलों में आंधी और बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. अलवर-दौसा समेत इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट ऑरेंज अलर्ट के तहत श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अलवर, दौसा और भरतपुर शामिल हैं, जबकि येलो अलर्ट में सीकर, झुंझुनूं, जयपुर, करौली, धौलपुर, सवाई माधोपुर, टोंक, कोटा, बारां और झालावाड़ जिले हैं. राजधानी जयपुर में भी रविवार दोपहर तक मौसम साफ और धूप हल्की रही, लेकिन दोपहर बाद अचानक घने बादल छा गए. शाम होते-होते तेज आंधी चली और कई इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे उमस भरी गर्मी से राहत मिली. 10 दिन बाद मानसून की एंट्री होगी प्रदेश में 24 से 25 जून के बीच मानसून की एंट्री की संभावना है. इससे पहले, लगातार  बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नम हवाओं के कारण प्रदेश में आंधी-बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार मानसून के दौरान बारिश थोड़ी कम होने की संभावना है. इससे पहले 17 जून तक आंधी-बारिश जारी रहने की संभावना है.

जयपुर में शहरी सेवा शिविर: 327 प्रकरणों का हुआ निस्तारण

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा की सोच को धरातल पर लागू करने के उद्देश्य से चल रहे “शहरी सेवा शिविर–2026” का सोमवार को मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जयपुर विकास प्राधिकरण परिसर स्थित नागरिक सेवा केंद्र में निरीक्षण किया। इस दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव (नगरीय विकास एवं आवासन विभाग) आलोक गुप्ता भी मौजूद रहे। मुख्य सचिव ने शिविर में पहुंचे नागरिकों से संवाद किया और विभिन्न प्रकरणों के निस्तारण की प्रक्रिया की जानकारी ली। उन्होंने टोकन व्यवस्था, आवेदन पंजीकरण, ई-मित्र काउंटर, प्रतीक्षालय और अभिलेख संधारण जैसी व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर नागरिक को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि ये शिविर केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम हैं। नागरिकों को इन शिविरों के जरिए संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन का अनुभव मिलना चाहिए। इस दौरान आलोक गुप्ता ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण और समय पर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए ताकि अधिकतम लोगों को राहत मिल सके। जयपुर विकास आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने मुख्य सचिव को शिविरों की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिविरों में भू-प्रबंधन, लीज, नामांतरण, पट्टा, आवंटन और भवन निर्माण स्वीकृति सहित विभिन्न मामलों का प्राथमिकता से निस्तारण किया जा रहा है। आयुक्त ने बताया कि पहले दिन आयोजित सुनवाई में कुल 327 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। साथ ही शिविर अवधि में लंबित प्रकरणों का तेजी से समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। शिविरों में नागरिकों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क, ई-मित्र काउंटर और जोनवार बैठने की व्यवस्था की गई है, जबकि आवेदकों को मोबाइल संदेश और कॉल के जरिए समय स्लॉट की जानकारी दी जा रही है। शिविर का आयोजन 12 जून से 15 जुलाई 2026 तक विभिन्न जोनों में चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।

वन विभाग का सफल ऑपरेशन, भरतपुर से ट्रेंकुलाइज कर KP-3 को कूनो में शिफ्ट किया गया

भरतपुर भरतपुर जिले के बांध बारेठा अभयारण्य में 2 सप्ताह से डेरा जमाए चीता KP-3 को कूनो वापस भेज दिया है. वन विभाग की टीम KP-3 को सुरक्षित रूप से कूनो नेशनल पार्क लेकर पहुंची. KP-3 के बांध बारेठा क्षेत्र में रुकने से स्थानीय लोगों में डर का माहौल था. वन विभाग की निगरानी भी लगातार जारी थी. अब उसके सुरक्षित कूनो वापसी से स्थिति सामान्य हो गई है. वन विभाग के साथ कूनो नेशनल पार्क के लिए भी यह राहतभरी खबर है. 15 दिन पहले भरतपुर पहुंचा था चीता 15 दिन पहले मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से चीता भरतपुर पहुंचा था. लगभग 200 किमी का सफर तय कर जिले के बंध बारेठा वन्यजीव अभयारण्य पहुंच गया था. इसके बाद से ही उसकी मॉनिटरिंग की जा रही थी. KP-3 को ट्रैक करते हुए ट्रेंकुलाइज करके कूनो नेशनल पार्क के निर्धारित क्षेत्र में छोड़ा गया है. दोनों टीमों के समन्वय से मिशन सफल रहा. कूनो के चीतों को भा रहा राजस्थान दरअसल, कूनो के चीतों को राजस्थान काफी भा रहा है. इससे पहले KP-2 का मूवमेंट भी राजस्थान में रहा. वन विभाग के अनुसार KP-3 नर चीता कूनो से भटककर बारां और झालावाड़ जिले तक पहुंच गया था. वहां से विशेषज्ञ टीम ने इसे ट्रेंकुलाइज कर करीब 800 KM दूर कूनो नेशनल पार्क के कोर एरिया में रिलीज किया था. दूसरी बार कूनो से पहुंचा KP-3 लेकिन KP-3 दोबारा कूनो से निकलकर भरतपुर जिले की सीमा में आ गया था. करीब 2 सप्ताह तक इसका मूवमेंट रहा. स्थानीय लोगों में दहशत को देखते हुए भरतपुर वन विभाग और कूनो नेशनल पार्क की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन चलाकर KP-3 को फिर से रेस्क्यू किया.

पेयजल संकट से राहत: एक दिन में 3 हजार से ज्यादा शिकायतों का निस्तारण

जयपुर प्रदेशवासियों को पेयजल संकट से राहत दिलाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार लगातार सक्रिय और संवेदनशील रूप से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों, प्रभावी मॉनिटरिंग और जनहित सर्वोपरि की सोच के अनुरूप जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) द्वारा संचालित विशेष राज्यव्यापी अभियान प्रदेशभर में राहत का मजबूत आधार बनकर उभरे हैं। इन अभियानों के माध्यम से न केवल हजारों पेयजल समस्याओं का त्वरित समाधान किया गया है, बल्कि गर्मी के इस चुनौतीपूर्ण दौर में लाखों लोगों तक निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाने में भी उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। एक ही दिन में 3 हजार से अधिक समस्याओं का निस्तारण, टीमों ने दिखाई असाधारण तत्परता शनिवार को आयोजित आठवें विशेष अभियान के दौरान विभागीय टीमों ने शहरों से लेकर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक जल स्रोतों, पाइपलाइन नेटवर्क और जलापूर्ति व्यवस्थाओं का व्यापक निरीक्षण किया। अभियान के तहत 718 खराब हैंडपंपों को पुनः चालू किया गया, 612 पाइपलाइन लीकेज दुरुस्त किए गए, 226 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान किया गया तथा 265 क्षेत्रों में बाधित जलापूर्ति बहाल की गई। इसके अतिरिक्त कम अवधि की जलापूर्ति, कम सप्लाई और प्रदूषित जल संबंधी शिकायतों का भी त्वरित निस्तारण किया गया। कुल मिलाकर एक ही दिन में 3,010 पेयजल संबंधी कार्य पूर्ण कर विभाग ने अपनी प्रतिबद्धता और कार्यकुशलता का परिचय दिया। तकनीकी टीमों की तत्परता से 2987 शिकायतों का मौके पर समाधान आठवें अभियान के दौरान तकनीकी टीमों ने समन्वित एवं त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 2987 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया। विभाग की सक्रियता के कारण आमजन को तत्काल राहत मिली और पेयजल संबंधी समस्याओं का शीघ्र समाधान संभव हो सका। विशेष अभियानों से पेयजल व्यवस्था में आया व्यापक बदलाव 5 अप्रैल से 13 जून तक संचालित आठ विशेष राज्यव्यापी अभियानों के दौरान प्रदेशभर में कुल 22 हजार 396 पेयजल संबंधी कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किए गए। इनमें 4 हजार 484 हैंडपंपों की मरम्मत, 2 हजार 848 पाइपलाइन लीकेज की दुरुस्ती, 1 हजार 445 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान तथा 1 हजार 655 बाधित जलापूर्ति मामलों का निस्तारण शामिल है। इसके अलावा 8 हजार 238 अन्य सुधारात्मक कार्यों के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं भरोसेमंद बनाया गया है। अवैध जल कनेक्शनों पर सख्ती से जल संरक्षण को मिला नया संबल जल संरक्षण और संसाधनों के समुचित प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने अवैध जल उपयोग के खिलाफ भी व्यापक अभियान चलाया। विशेष कार्रवाई के तहत 359 अवैध जल कनेक्शन हटाए गए, जिनमें होटल, ढाबे तथा कृषि कार्यों में उपयोग किए जा रहे कनेक्शन शामिल थे। अब तक आठ अभियानों में कुल  2 हजार 186 अवैध जल कनेक्शन हटाए जा चुके हैं, जिससे जल की बर्बादी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है और आमजन के लिए उपलब्ध जल संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। ग्रामीण अंचलों में मजबूत हुई जलापूर्ति, हजारों परिवारों को राहत हैंडपंपों और पाइपलाइनों की मरम्मत के साथ-साथ  आठवें अभियान में 578 अन्य सुधारात्मक कार्यों ने ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान की है। इन प्रयासों से हजारों परिवारों को गर्मी के इस कठिन दौर में राहत मिली है तथा जलापूर्ति की गुणवत्ता और उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। 30 जून तक जारी रहेगा विशेष राहत अभियान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेशभर में पेयजल व्यवस्थाओं को मजबूत बनाए रखने के लिए विशेष राज्यव्यापी अभियान 30 जून तक निरंतर संचालित किए जाएंगे। इन अभियानों का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ, पर्याप्त और निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराना तथा गर्मी के मौसम में किसी भी नागरिक को पेयजल संकट का सामना न करने देना है।

स्वच्छता और सौंदर्यीकरण पर फोकस, जयपुर के विकास की समीक्षा में सीएम के बड़े निर्देश

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जयपुर के सुव्यवस्थित विकास, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इसे देश के मॉडल शहर के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए उन्होंने संबंधित विभागों को समन्वित कार्ययोजना के साथ मिशन मोड पर कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर जयपुर के विकास, स्वच्छता एवं सौंदर्यीकरण को लेकर विभागीय अधिकारियों की बैठक ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी की स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए कचरा संग्रहण, परिवहन एवं वैज्ञानिक निस्तारण के लिए बेहतर कार्ययोजना बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने स्वच्छता व्यवस्था को अनुशासित बनाने के लिए खुले में कचरा फेंकने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। इसलिए जनभागीदारी को बढ़ावा देते हुए जनजागरूकता अभियान चलाएं तथा सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं भामाशाहों को भी इस अभियान से जोड़े। उन्होंने आधुनिक तकनीक पर बल देते हुए कहा कि मशीनीकृत सफाई व्यवस्था को बढ़ावा तथा मैनुअल व्यवस्था पर निर्भरता को कम करने के निर्देश दिए। मानसून सीजन की तैयारियों को दें अंतिम रूप मानसून सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को समयबद्ध तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नालों की व्यापक सफाई समय रहते पूर्ण की जाए। इससे जलभराव की संभावित समस्याओं वाले क्षेत्रों की विशेष निगरानी करते हुए सुगम जल निकासी सुनिश्चित होगी। साथ ही, उन्होंने मानसून सीजन के दौरान नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए संबंधित विभागों को समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राजधानी में विशेष स्वच्छता अभियान चलाकर पूरे शहर को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया जाए। इसके लिए उन्होंने पर्याप्त संख्या में डस्टबिन उपलब्ध कराने तथा कचरा निस्तारण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जयपुर केवल प्रदेश की राजधानी ही नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन पहचान का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने निर्देश दिए कि पर्यटन स्थलों, प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थलों को विशेष रूप से स्वच्छ, आकर्षक और पर्यटन अनुकूल बनाया जाए, ताकि जयपुर की वैश्विक पहचान और अधिक सुदृढ़ हो सके राजधानी के सौंदर्यीकरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने शहर की एक प्रमुख सड़क को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ‘मॉडल रोड’ विकसित करने के निर्देश दिए। इस मॉडल रोड पर स्वच्छता, हरियाली, प्रकाश व्यवस्था, सौंदर्यीकरण, यातायात प्रबंधन, पैदल यात्री सुविधाएं एवं अन्य नागरिक सुविधाओं के उच्च मानक विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की सफलता के आधार पर अन्य प्रमुख मार्गों पर भी इसी मॉडल को लागू किया जाएगा। बैठक के दौरान जयपुर विकास प्राधिकरण, राजस्थान आवासन मंडल एवं नगर निगम द्वारा राजधानी में संचालित विकास कार्यों तथा आगामी कार्ययोजना पर आधारित विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी लेते हुए गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री कार्यालय, शहरी विकास विभाग, राजस्थान आवासन मंडल, जयपुर विकास प्राधिकरण, जयपुर नगर निगम, जिला प्रशासन सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अलवर: केंद्र-राज्य योजनाओं और विकास कार्यों की मंत्री ने दी जानकारी

 जयपुर 12 साल विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के विषय पर आधारित तीन दिवसीय प्रदर्शनी का जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने सूचना एवं जन सम्पर्क कार्यालय, धौलपुर में प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी न केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों को भी जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की व्यापकता एवं प्रभावशीलता को समझने का अवसर प्रदान करती है। प्रदर्शनी के माध्यम से यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि सरकार की विभिन्न योजनाओं ने समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, डिजिटल इंडिया, किसान सम्मान निधि सहित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं तथा राज्य सरकार की जनहितकारी पहल, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों, शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सुधारों तथा विकास परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदर्शित की गई। इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास, कौशल विकास, रोजगार संवर्धन तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से संबंधित उपलब्धियों को भी प्रमुखता से दर्शाया गया। उन्होंने प्रदर्शनी के सफल आयोजन के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आमजन एवं प्रशासन के बीच संवाद स्थापित करने तथा विकास यात्रा को समझने का प्रभावी माध्यम हैं। उल्लेखनीय है कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी केंद्र एवं राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों तथा सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। प्रदर्शनी के माध्यम से नागरिकों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इस दौरान जिला कलक्टर निधि बी टी, जिला अध्यक्ष राजवीर सिंह राजावत, गिर्राज सिंह, डॉ. शिवचरण कुशवाह, नीरजा शर्मा, मोतीलाल मीणा सहित अन्य जनप्रतिनिधि व कर्मचारी उपस्थित रहे।

नमक उत्पादकों के लिए नए नियम, लीज नवीनीकरण और 6 माह की छूट मंजूर

जयपुर राजस्‍थान सरकार द्वारा नमक उत्‍पादकों के हित को ध्‍यान में रखते हुए भूखंड आवंटन से संबंधित नियमों में संशोधन किया गया है। राज्य में नमक उद्योग को बढावा देने के लिए वतर्मान में प्रचलित नियमों में संशोधन कर राजस्‍थान (लवण क्षेत्रों में भूखंड आवटंन) संशोधन नियम, 2026 जारी किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार, अब नमक उद्योग के लिए भूखंड आवंटन ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जाएगा। पूर्व में यह प्रक्रिया लॉटरी आधारित थी। साथ ही, नियमों में अपील किए जाने, नमक इकाइयों के वर्गीकरण संबंधी प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। जिन जिलो में नमक उत्‍पादन हेतु लवणीय भूमि उपलब्‍ध है, उनमें अब  सर्वे सीमांकन और भूखंडो के मापन के बाद आवंटन की कार्यवाही की जा सकेगी। इन नियमों की लंबे समय से नमक उत्‍पादको द्वारा  मांग की जारी रही थी। वर्तमान में लीज नवीनीकरण से वंचित नमक उत्‍पादक इकाइयों का नवीनीकरण किए जाने से नमक उद्यमियों को राहत मिलेगी।  नए लवण क्षेत्रों मे आवंटन की राह खुलेगी, जिससे इस क्षेत्र में और अधिक निवेश होगा। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा। 300 इकाइयां नवीनीकरण से थी वचिंत, अब 6 माह की छूट मिलेगी पूर्व के नियमों में लीज समाप्‍त होने के चार वर्ष पश्‍चात नवीनीकरण करने को कोई प्रावधान नही होने से लगभग 300 नमक उत्‍पादक इकाइयां लीज नवीनीकरण से वंचित थी, जिसके कारण नमक उत्‍पादक काफी परेशान थे। राज्‍य सरकार द्वारा ऐसी इकाईयों को 6 माह की एकमुश्‍त छूट प्रदान कर नमक उत्‍पादकों को काफी राहत प्रदान की है। इस छूट से नमक उत्‍पादक इकाईयों का लीज नवीनीकरण हो सकेगा और राज्‍य सरकार को राजस्‍व में भी लाभ मिलेगा ।

ग्राम पंचायत स्तर पर बड़े बदलाव, IAS–RAS अधिकारियों को मिली विशेष शक्तियां

 जयपुर राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों की समस्याओं, विशेषकर जमीन से जुड़े मामलों का मौके पर ही त्वरित निस्तारण करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। जनकल्याण शिविर के अन्तर्गत प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर दिनांक 12 जून से 15 जुलाई तक 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' का वृहद स्तर पर आयोजन किया जा रहा है। संभागीय आयुक्त और जिला कलक्टरों को मिले विशेष अधिकार इस महा-अभियान के प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए राजस्व विभाग ने प्रशासनिक शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया है। अभियान की अवधि के लिए समस्त संभागीय आयुक्तों और जिला कलक्टरों को विशेष रूप से प्राधिकृत किया गया है। इसके तहत वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार में 'नॉन-फील्ड' (कार्यालयों/गैर-क्षेत्रीय पदों पर) कार्यरत तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों को तुरंत प्रभाव से तहसीलों या उप-तहसीलों के रिक्त पदों पर पदस्थापित कर सकेंगे राज्यभर में 12 जनवरी से शुरू हो रहे 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' अभियान में मौके पर ही समस्या समाधान के लिए राज्य सरकार ने कई अधिकारियों की शक्तियों को शिविर प्रभारियों व अन्य अधिकारियों को डेलीगेट कर दी है। ये आदेश 12 जून से 15 जुलाई तक प्रभावी होंगे। शिविर प्रभारी आईएएस, आरएएस को मिली ये शक्तियां आदेशों के अनुसार राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 92 के अंतर्गत आबादी विस्तार हेतु भूमि आरक्षित किये जाने एवं राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 92 के अंतर्गत आबादी विस्तार हेतु भूमि आरक्षित किये जाने की जिला कलक्टर की शक्तियां 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' के लिये शिविर प्रभारी बनाए गए भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को दे दी गई हैं।   राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के अंतर्गत उपखण्ड अधिकारी की शक्तियां भी इन अधिकारियों को दी गई हैं। राजस्थान काश्ताकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम सख्यां 3, वर्ष 1955) की धारा 251-ए व उसके अन्तर्गत बने नियमों के तहत अन्य खातेदार की जोत में से होकर भूमिगत पाइपलाइन बिछाने या नया मार्ग खोलने या विद्यमान मार्ग को चौड़ा करने के लिये उपखण्ड अधिकारियों को प्रदत्त शक्तियां भी इन अधिकारियों को दी गई हैं। राजस्व अभिलेख की त्रुटियों के शुद्धिकरण के प्रकरणों के निस्तारण हेतु उपखण्ड अधिकारी की  शक्तियां भी शिविर प्रभारी बनाए गए भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को दी गई हैं। शिविरों में नियुक्त तहसीलदार/नायब तहसीलदार को मिली शक्तियां राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 (संख्या 3, वर्ष 1955) की धारा 53 की उप-धारा (1) व (2) एवं उसके अन्तर्गत बने नियमों के तहत भूमि के बंटवारे की तहसीलदार की शक्तियां 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' के लिये नियुक्त तहसीलदार/ नायब तहसीलदार को दी गई हैं। राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम संख्या 3, वर्ष 1955) की धारा 251 (1) के तहत रास्ते तथा अन्य निजी सुखाचार के अधिकार के तहत तहसीलदार की शक्तियां शिविरों के लिए नियुक्त  समस्त नायब तहसीलदारों को प्रदान की गई हैं। नामान्तरकरण के मामलों की ग्राम पंचायत की शक्तियां और राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के नियम 18 के अन्तर्गत तहसीलदार की शक्ति व राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 (अधिनियम संख्या 15, वर्ष 1956) की धारा 128 के परन्तुक एवं अधिसूचना क्रमांक 5 (21) राज-4/80/36 दिनांक 04.09.1982 के तहत अविवादित सीमा ज्ञान के मामलो को निर्णित करने की ग्राम पंचायत की शक्तियां शिविर में नियुक्त तहसीलदार/ नायब तहसीलदार को प्रदत्त की गई हैं। ऐसे तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों को  राज्य सरकार राजस्थान काश्ताकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम सख्यां 3, वर्ष 1955) की धारा 251 एवं अधिसूचना क्रमांक 5 (21) राज-4/80/34 दिनांक 14.09.1982 के तहत मार्गाधिकार या अन्य सुखाचार के वास्तविक उपयोग में विघ्न डाले जाने के मामलों को निर्णित करने की ग्राम पंचायत की शक्तियां भी दे दी गई हैं। समय अवधि 15 दिन से 7 दिन की राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के नियम के खण्ड (ख) के द्वितीय परन्तुक में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये भूमि आवंटन के लिये आवेदन प्रस्तुत किये जाने के लिये जारी उद्घोषणा के लिये निर्धारित पन्द्रह दिवस की कालावधि को कम कर सात दिन कर दिया गया है। भूमि आवंटन की राज्य सरकार की पॉवर कलेक्टर को राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 102क के अन्तर्गत आबादी विस्तार हेतु आरक्षित भूमि को स्थानीय निकायों के अधीन किये जाने की राज्य सरकार को प्रदत्त शक्तियां  जिला कलक्टर को दी गई है।