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हर पंचायत में होगा खेल मैदान, गांवों में बनेंगे अटल ज्ञान केंद्र; CM भजनलाल का बड़ा ऐलान

बाड़मेर बाड़मेर जिले के बाछड़ाऊ में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को 2 हजार 824 करोड़ रुपए के 1 हजार 013 विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया। सभा को संबोधित करते हुए सीएम ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राजस्थान की हालत टूटे-फूटे मकान जैसी कर दी थी। कांग्रेस नेताओं को स्वार्थी बताते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग किसी के नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार गांवों के विकास और लोगों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि हर गांव में पक्की सड़क हो। उन्होंने कहा कि राजस्थान अब बिजली लेने वाला नहीं, बल्कि बिजली देने वाला राज्य बन गया है। पेपर लीक को लेकर कांग्रेस पर निशाना सीएम ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उस समय युवा परेशान थे और लगातार पेपर लीक के मामले सामने आते थे। उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से पूछा कि अब पेपर लीक होता है क्या? इस पर लोगों ने नहीं में जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार जन-जन के लिए काम कर रही है और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हर पंचायत में खेल मैदान और गांवों में अटल ज्ञान केंद्र मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि ऐसी कोई पंचायत नहीं होगी, जहां खेल मैदान नहीं हो। उन्होंने राजस्थान के गांवों में अटल ज्ञान केंद्र बनाए जाने की भी घोषणा की। सीएम ने कहा कि सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के साथ शिक्षा, खेल और अन्य सुविधाओं को मजबूत करना है 2,824 करोड़ के 1,013 कामों का शिलान्यास-लोकार्पण बाछड़ाऊ पहुंचने पर मुख्यमंत्री का मंत्री केके विश्नोई, विधायक आदूराम मेघवाल, बाड़मेर विधायक प्रियंका चौधरी, सिवाना विधायक हमीर सिंह, जैसलमेर विधायक छोटूसिंह, पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी और किसान आयोग अध्यक्ष सीआर चौधरी सहित जनप्रतिनिधियों ने स्वागत किया। जिला कलेक्टर चिन्मयी गोपाल और पुलिस अधीक्षक चुनाराम ने भी सीएम की अगवानी की। पारंपरिक गैर नृत्य के जरिए मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान 2,824 करोड़ रुपए की लागत के 1,013 विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इसके अलावा जोधपुर संभाग के आठ जिलों के लिए करीब 2,700 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात देने की बात भी कही गई। मुख्यमंत्री का बाड़मेर दौरा पंचायती राज चुनाव से पहले राजनीतिक और संगठनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा। कार्यक्रम में उन्होंने बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा जिले के पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद कर संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की तैयारियों को लेकर चर्चा की।

NCR में डीजल ऑटो पर सख्ती, अलवर के 583 ऑटो 31 दिसंबर तक होंगे बाहर

अलवर एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन वाहनों के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं। इसी के तहत अलवर में भी डीजल से चलने वाले ऑटो रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। प्रादेशिक परिवहन कार्यालय, अलवर के क्षेत्राधिकार में वर्तमान में 583 डीजल ऑटो रिक्शा पंजीकृत हैं। इन सभी वाहनों को 31 दिसंबर 2026 तक प्रचलन से बाहर करना अनिवार्य है। परिवहन विभाग की ओर से डीजल ऑटो रिक्शा के वाहन मालिकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इसमें उन्हें तय समय सीमा से पहले अपने वाहन को स्वच्छ ईंधन विकल्प में बदलने या अपग्रेड करने के लिए कहा जा रहा है। वाहन मालिक डीजल ऑटो को सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहन में बदल सकते हैं। एनसीआर क्षेत्र में नए डीजल ऑटो रिक्शा के पंजीयन पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है। 1 जनवरी 2023 से एनसीआर में नए डीजल ऑटो का पंजीयन प्रतिबंधित है। अब पुराने डीजल ऑटो को भी 31 दिसंबर 2026 तक पूरी तरह हटाना होगा। इसके बाद 1 जनवरी 2027 से एनसीआर क्षेत्र में केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक ईंधन से चलने वाले ऑटो रिक्शा के संचालन की अनुमति होगी। ऐसे में अलवर में चल रहे 583 डीजल ऑटो रिक्शा के मालिकों को आने वाले समय में अपने वाहन बदलने या स्वच्छ ईंधन विकल्प अपनाने होंगे। मंडी मोड़ पर ऑटो चालकों को दी जानकारी परिवहन कार्यालय की ओर से मंडी मोड़ स्टैंड, अलवर पर ऑटो रिक्शा संचालकों को नियमों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने ऑटो चालकों को बताया कि 31 दिसंबर 2026 तक डीजल से चलने वाले ऑटो रिक्शा को कार्यालय के क्षेत्राधिकार से बाहर करना होगा। ऑटो संचालकों को यह भी समझाया गया कि तय समय सीमा के बाद डीजल ऑटो चलाने पर विभाग की ओर से नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। परिवहन विभाग अब पंजीकृत डीजल ऑटो मालिकों तक नियमों की जानकारी पहुंचाने में जुटा है। प्रदूषण कम करने के लिए नियम एनसीआर क्षेत्र में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए सार्वजनिक परिवहन के वाहनों को स्वच्छ ईंधन की ओर ले जाने की योजना के तहत यह व्यवस्था लागू की जा रही है। डीजल ऑटो की जगह सीएनजी और इलेक्ट्रिक ऑटो को बढ़ावा मिलने से परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन को कम करने का लक्ष्य है। अलवर एनसीआर का हिस्सा होने के कारण यहां भी इन नियमों को लागू किया जा रहा है। अब डीजल ऑटो मालिकों के पास 31 दिसंबर 2026 तक अपने वाहन को बदलने या स्वच्छ ईंधन विकल्प अपनाने का समय है। 1 जनवरी 2027 के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले डीजल ऑटो के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी।

बीकानेर में सेना का बड़ा अभ्यास, NH-911 पर उतरे रुद्र-ध्रुव और चेतक हेलीकॉप्टर

बीकानेर भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी भूभाग में मंगलवार को एक अनूठा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नजारा देखने को मिला। बीकानेर जिले के दंतौर क्षेत्र में आम दिनों की तरह दौड़ने वाला नेशनल हाइवे-911 कुछ समय के लिए पूरी तरह से एक अस्थायी मिलिट्री रनवे में तब्दील हो गया। भारतीय सेना की एविएशन इकाइयों ने इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर विशेष हाईवे लैंडिंग अभ्यास को अंजाम दिया। इस दौरान देश के आधुनिक सैन्य बेड़े में शामिल रुद्र, ध्रुव और चेतक हेलीकॉप्टरों ने निर्धारित हाईवे स्ट्रेच पर न केवल सफलतापूर्वक लैंडिंग की, बल्कि सटीक टेकऑफ प्रक्रिया भी पूरी की। सीमावर्ती रेगिस्तान में इस तरह का प्रशिक्षण भारतीय सेना की ऑपरेशनल तैयारियों और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का एक बड़ा प्रमाण माना जा रहा है। रेगिस्तानी वातावरण और सामरिक चुनौतियों के बीच अभ्यास दंतौर का यह क्षेत्र भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के काफी करीब स्थित है। पश्चिमी राजस्थान के इस रेगिस्तानी इलाके में लंबी दूरियां, गर्म और शुष्क मौसम, धूलभरी आंधियां और तेज हवाएं सैन्य अभियानों के सामने हमेशा से एक अलग तरह की चुनौतियां पेश करती रही हैं। ऐसे कठिन भौगोलिक वातावरण में सैन्य एविएशन इकाइयों के लिए पारंपरिक एयरबेस या हेलीपैड के अलावा वैकल्पिक लैंडिंग क्षेत्रों की पहचान करना और उनका सुरक्षित उपयोग करना बेहद जरूरी होता है। इसी सामरिक जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह अभ्यास किया गया, ताकि युद्ध या आपातकालीन परिस्थितियों में पारंपरिक रनवे उपलब्ध न होने की स्थिति में इन वैकल्पिक स्थानों से भी सुरक्षित संचालन किया जा सके। अभ्यास की मुख्य विशेषताएं और तकनीकी प्रक्रिया सड़क पर हेलीकॉप्टर उतारना केवल पायलट की व्यक्तिगत दक्षता का मामला नहीं होता, बल्कि इसके लिए बेहद सटीक योजना और तकनीकी समन्वय की आवश्यकता होती है। इस अभ्यास के दौरान निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया। सतह और दृश्यता का आकलन: लैंडिंग से पहले एयरक्रू द्वारा हाईवे की सतह, आसपास के दायरे, हवा की गति और दृश्यता का बारीकी से मूल्यांकन किया गया। सटीक समन्वय: सुरक्षित लैंडिंग से लेकर दोबारा उड़ान भरने तक हवा में मौजूद एयरक्रू और जमीन पर तैनात ग्राउंड क्रू के बीच तालमेल बिठाया गया। विविध प्लेटफार्मों की भूमिका: अभ्यास में शामिल रुद्र, ध्रुव और चेतक हेलीकॉप्टरों ने अलग-अलग सैन्य भूमिकाओं—जैसे सैनिकों की आवाजाही, लॉजिस्टिक सहायता और निगरानी—के तहत अपनी दक्षता का प्रदर्शन किया। ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी और सैन्य गतिशीलता आधुनिक सैन्य अभियानों में किसी एक स्थायी बुनियादी सुविधा पर निर्भरता को कम करना और परिस्थितियों के अनुसार तुरंत वैकल्पिक विकल्पों का इस्तेमाल करना सबसे अहम माना जाता है। हेलीकॉप्टरों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि वे बेहद सीमित स्थानों से भी सुगमता से संचालित हो सकते हैं। हाईवे लैंडिंग जैसे प्रशिक्षण एयरक्रू को गैर-पारंपरिक और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने का अमूल्य अनुभव प्रदान करते हैं। बीकानेर के इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए इस सैन्य अभ्यास ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय सेना हर परिस्थिति में देश की रक्षा और त्वरित कार्रवाई के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

लोहावट की 3 ढाणियों में पेयजल व्यवस्था मजबूत, ₹1.50 करोड़ से बने जलाशय और पाइपलाइन

जयपुर कभी पानी का इंतजार रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। जरूरत के पानी के लिए व्यवस्था पर निर्भरता थी और हर किसी की उम्मीद यही रहती थी कि पानी की सुविधा बेहतर हो और समय पर मिले। फलोदी जिले के लोहावट क्षेत्र की सुथारों की ढाणी (इन्द्रनगर), डूडियो की ढाणी (सदरी) और पुनियों की ढाणी (नौसर) में अब इसी इंतजार की तस्वीर बदलती नजर आ रही है। इन ढाणियों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत करीब 1.50 करोड रुपये की लागत से किए गए कार्यों ने ग्रामीण पेयजल तंत्र को नया आधार दिया है। तीन उच्च जलाशयों के निर्माण, पाइपलाइन बिछाने सहित अन्य आवश्यक कार्य पूरे होने के बाद इन क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था में सुधार आया है। आज 2,805 ग्रामीण इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। बजट में घोषणा हुई और गांव तक पहुंचा बदलाव किसी गांव के लिए पानी की सुविधा केवल एक सरकारी परियोजना नहीं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जरूरत है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए इन तीनों ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल तंत्र को सुदृढ़ करने का कार्य किया गया। 15 जनवरी, 2025 को कार्यादेश जारी होने के बाद प्रस्तावित कार्यों को पूरा किया गया। उच्च जलाशयों के निर्माण के साथ पाइपलाइन संबंधी जरूरी कार्य किए गए ताकि पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत आधार मिल सके। तीन ढाणियां, हजारों ग्रामीणों की बदली तस्वीर सुथारों की ढाणी, डूडियो की ढाणी और पुनियों की ढाणी – नाम भले तीन हों लेकिन इनसे जुड़ी जरूरत एक ही थी – बेहतर और मजबूत पेयजल व्यवस्था। आज जब इन क्षेत्रों में पेयजल तंत्र पहले से मजबूत हुआ है और 2,805 ग्रामीणों तक योजना का लाभ पहुंच रहा है तो यह बदलाव सिर्फ बने हुए जलाशयों या बिछी पाइपलाइनों में नहीं बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई देता है। मुख्यमंत्री बजट घोषणा से विकास की असली तस्वीर बड़े शहरों की इमारतों में ही नहीं, बल्कि गांव की उन ढाणियों में भी दिखाई देती है, जहां एक बेहतर पेयजल सुविधा लोगों के लिए सुविधा, राहत और भरोसे का आधार बन जाती है।  

निवेशकों के लिए खुशखबरी, राजस्थान में 4700 से ज्यादा औद्योगिक भूखंडों की ई-लॉटरी

जयपुर राजस्थान में उद्योग लगाने की तैयारी कर रहे निवेशकों के लिए बड़ी खबर है। रीको की प्रत्यक्ष आवंटन योजना-2025 का 14वां चरण शुरू हो गया है। राइजिंग राजस्थान के तहत शुरू किए गए इस चरण में प्रदेश के 94 औद्योगिक क्षेत्रों में 4700 से अधिक औद्योगिक और लॉजिस्टिक भूखंड निवेशकों के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। इच्छुक निवेशक 12 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। भूखंडों का आवंटन 15 अक्टूबर को ई-लॉटरी के जरिए किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य निवेशकों को बिना लंबी प्रक्रिया के औद्योगिक भूखंड उपलब्ध कराना है। राइजिंग राजस्थान के तहत राज्य सरकार के साथ एमओयू करने वाले निवेशक योजना का लाभ ले सकेंगे। जिन निवेशकों ने अभी तक एमओयू नहीं किया है, वे भी ईएमडी की अंतिम तिथि तक एमओयू कर पात्र बन सकते हैं। भूखंडों का इस तरह से होगा वर्गीकरण इस चरण में 4,116 भूखंड अनारक्षित श्रेणी में रखे गए हैं। इसके अलावा 27 लॉजिस्टिक भूखंड उपलब्ध हैं। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लिए 168, महिला वर्ग के लिए 167, भूतपूर्व सैनिकों के लिए 95, बेंचमार्क दिव्यांगजनों के लिए 124 तथा सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों के मृतकों के आश्रितों के लिए 59 भूखंड आरक्षित किए गए हैं। एक आवेदन तो सीधा आवंटन, ज्यादा आवेदन पर ई-लॉटरी रीको की योजना में आवंटन की प्रक्रिया भी स्पष्ट रखी गई है। किसी भूखंड के लिए केवल एक आवेदन प्राप्त होने पर उसे सीधे आवंटित किया जाएगा। वहीं एक ही भूखंड के लिए एक से अधिक आवेदन आने की स्थिति में ई-लॉटरी के माध्यम से आवंटन होगा। इससे आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने का प्रयास किया गया है। 13 चरणों में 2335 भूखंड आवंटित, 21 हजार करोड़ का निवेश प्रत्यक्ष आवंटन योजना के 13 चरण पहले ही पूरे हो चुके हैं। इन चरणों में 2,335 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन किया गया। रीको के अनुसार, इन भूखंडों के माध्यम से प्रदेश में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और 46 हजार से ज्यादा लोगों के लिए रोजगार सृजन का रास्ता तैयार हुआ है। इसके अलावा 444 भूखंडों का आवंटन अभी प्रक्रियाधीन है, जिनसे 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त निवेश की संभावना है निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण तारीखें योजना का 14वां चरण 28 सितंबर 2026 से शुरू हो चुका है। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर है। इसके बाद 15 अक्टूबर 2026 को ई-लॉटरी आयोजित की जाएगी। रीको का कहना है कि योजना के जरिए प्रदेश में औद्योगिक आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करने के साथ निवेश और रोजगार के नए अवसरों को गति देने का प्रयास किया जा रहा है।

राजस्थान के सरकारी स्कूलों का बदलेगा समय, 1 अक्टूबर से सुबह 10 से शाम 4 बजे तक

जयपुर  राजस्थान में एक अक्टूबर 2026 से सरकारी स्कूलों के समय में बदलाव होने जा रहा है। शिविरा पंचांग के अनुसार प्रदेश के स्कूलों में एक अक्टूबर से नया समय लागू होगा। एक पारी में संचालित होने वाले स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित किया गया है। स्कूल समय में यह बदलाव हर वर्ष शिविरा पंचांग में निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार किया जाता है। गर्मी के मौसम में तापमान और विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव रहता है। वहीं अक्टूबर की शुरुआत के साथ मौसम में बदलाव को देखते हुए स्कूलों का समय सामान्य किया जाता है। तेज गर्मी के कारण पिछले चार साल में से तीन साल शिक्षा विभाग एक अक्टूबर के स्थान पर 16 अक्टूबर से स्कूलों का समय परिवर्तन किया था। हालांकि पिछले वर्ष शिक्षा विभाग ने शिविरा पंचाग के अनुसार ही एक अक्टूबर को ही स्कूलों का समय परिवर्तन किया था। इस बार भी कई शिक्षक संघ एकल पारी के स्कूलों का समय परिवर्तन एक अक्टूबर के स्थान की अपेक्षा 16 अक्टूबर से ही करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन तीस सितम्बर तक शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं हुए हैं। शिविरा पंचांग के अनुसार होता है निर्धारण राजस्थान के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों और स्कूल संचालन से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय शिविरा पंचांग के अनुसार किए जाते हैं। इसी के तहत मौसम के अनुसार विद्यालयों के समय में भी परिवर्तन किया जाता है। एक अक्टूबर से नया समय लागू होने के बाद एक पारी वाले स्कूल सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होंगे।

दिवाली से पहले हवाई किराए में उछाल, जयपुर से कई रूट पर 3 गुना तक बढ़े दाम

जयपुर त्योहारों पर घर जाना है? जाइए जरूर, बस टिकट बुक करने से पहले जेब को समझा दीजिए कि इस बार सफर थोड़ा 'भावुक' करने वाला है। दिवाली अभी दूर हैं, लेकिन उसकी महंगाई ने जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहले ही दस्तक दे दी है। श्राद्ध, नवरात्र, दशहरा, करवाचौथ, दिवाली और छठ… लगातार त्योहारों ने हवाई यात्रा की मांग बढ़ाई तो एयरलाइंस ने किराए का मीटर भी तेज कर दिया। जयपुर से कई रूट पर सामान्य दिनों की तुलना में किराया डेढ़ से तीन गुना तक बढ़ गया है। यानी त्योहारों की खरीदारी शुरू होने से पहले ही टिकट ने बजट बिगाड़ दिया। ट्रैवल एजेंट्स के अनुसार इस बार त्योहारों का सिलसिला लगातार बना हुआ है। श्राद्ध, नवरात्र, दशहरा, दिवाली और छठ के दौरान देशभर में रह रहे प्रवासी राजस्थानियों का घर आना-जाना बढ़ेगा। पर्यटकों की आवाजाही भी तेज रहेगी। ज्यादातर प्रमुख ट्रेनें पैक, स्पेशल ट्रेनों में भी वेटिंग उधर, त्योहारी सीजन में जयपुर से संचालित होने वाली ज्यादातर प्रमुख ट्रेनें अभी से पैक हो चुकी हैं। कई रूटों पर नो रूम की स्थिति बन गई है। रेलवे की ओर से घोषित स्पेशल ट्रेनों में भी अब लंबी वेटिंग शुरू हो गई है। छह से आठ नवंबर के बीच किराए की पड़ताल में सामने आई तस्वीर जयपुर-मुंबईः जयपुर से मुंबई का हवाई किराया 14 हजार रुपए तक पहुंच गया है। वहीं 5 नवंबर को मुंबई से जयपुर का न्यूनतम किराया 14 हजार और अधिकतम 18 हजार रुपए से अधिक है। सामान्य दिनों में यह किराया 6 से 7 हजार रुपए के बीच रहता है। जयपुर-पुणेः जयपुर से पुणे का किराया 10,559 रुपए से शुरू होकर 12 हजार रुपए तक पहुंच गया है। वहीं पुणे से जयपुर का किराया 20 हजार रुपए तक पहुंच गया। 9 नवंबर को दोपहर 3 बजे रवाना होने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट का किराया 20,230 रुपए दर्ज किया गया। अन्य फ्लाइट्स भी 13 हजार रुपए तक किराया वसूल रही हैं। जयपुर-कोलकाताः 6 नवंबर की बुकिंग पर जयपुर से कोलकाता का न्यूनतम किराया 10 हजार है, जो 17 हजार रुपए तक पहुंच गया है। कोलकाता से जयपुर आने वाले यात्रियों को किराए में कुछ राहत मिल रही है। जयपुर-दिल्लीः 5 नवंबर की बुकिंग पर जयपुर से दिल्ली का अधिकतम हवाई किराया 14 हजार रुपए तक पहुंच गया है, जो सामान्य किराए से करीब चार गुना अधिक है। गत वर्ष की तुलना में महंगा हुआ सफर गत वर्ष की तुलना में इस बार हवाई किराया अधिक महंगा है। पिछले वर्ष इन दिनों जयपुर से मुंबई का सामान्य किराया 5,190 से 5,506 रुपए के बीच था, जबकि वर्तमान में सामान्य किराया 6,744 रुपए तक पहुंच चुका है। जयपुर से कोलकाता, पुणे, अहमदाबाद समेत कई रूटों पर भी किराए में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रमुख वजह एयर ट्रैफिक फ्यूल की बढ़ी हुई दरों को माना जा रहा है।

रात में सफर पड़ा भारी! राजस्थान जा रही लग्जरी बस ट्रक से भिड़ी, 7 की मौत

जयपुर गुजरात के अहमदाबाद-वडोदरा एक्सप्रेसवे पर बुधवार, 30 सितंबर 2026 की तड़के एक भीषण सड़क हादसा सामने आया है। सूरत से यात्रियों को लेकर राजस्थान की ओर आ रही एक निजी लग्जरी बस की एक ट्रक के साथ जबरदस्त भिड़ंत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब बस में सवार अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय पुलिस के अनुसार, इस भयानक दुर्घटना में 5 से 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4 से 6 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस अप्रत्याशित हादसे के बाद से यात्रियों के परिजनों में कोहराम मच गया है। ओवरटेकिंग लेन में हुआ हादसा प्राप्त प्रामाणिक जानकारी के अनुसार, यह हादसा आज सुबह करीब 4 बजे आणंद और नडियाद के बीच अहमदाबाद-वडोदरा एक्सप्रेसवे पर घटित हुआ। बस 'साईं दर्शन ट्रेवल्स' की थी, जो सूरत से चलकर राजस्थान की तरफ बढ़ रही थी। एक्सप्रेसवे की ओवरटेकिंग लेन पर आगे चल रहे या खड़े ट्रक से बस की टक्कर इतनी भयानक थी कि बस का अगला और एक तरफ का हिस्सा पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कई यात्री बस के भीतर ही फंस गए और उन्हें बाहर निकालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। घायलों को अस्पतालों में कराया गया भर्ती दर्दनाक हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और आणंद ग्रामीण पुलिस की टीम फौरन मौके पर पहुंची। राहत और बचाव कार्य शुरू करते हुए पुलिस ने स्थानीय प्रशासन की मदद से घायलों को तुरंत 108 एम्बुलेंस सेवा के जरिए नडियाद सिविल अस्पताल और आणंद के नजदीकी चिकित्सा केंद्रों में पहुंचाया। हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए 4 से 6 लोगों का इलाज जारी है। वहीं, दुर्घटना के कारण सुबह के वक्त एक्सप्रेसवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ, जिसे पुलिस और पेट्रोलिंग टीम ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटवाकर सुचारू कराया। मृतकों की पहचान और प्रशासनिक कार्रवाई जारी हादसे के बाद पुलिस ने दुर्घटनास्थल और अस्पतालों दोनों जगहों पर मोर्चा संभाल लिया है। बस में सवार मृतकों और घायलों के बारे में पूरी जानकारी जुटाई जा रही है तथा उनके स्वजनों से संपर्क करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इस दुखद घटना ने एक बार फिर एक्सप्रेसवे पर होने वाली तेज रफ्तार और नाइट ट्रैवलिंग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राजस्थान सरकार का नया बैंकिंग पैकेज, कर्मचारियों-पेंशनर्स को ₹3.50 करोड़ तक दुर्घटना बीमा

जयपुर राजस्थान सरकार ने राजकीय कार्मिकों, 70 वर्ष तक की आयु के पात्र पेंशनर्स तथा राज्य स्वायत्तशासी निकायों एवं सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों के लिए कम्पोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज (सीएसएपी) लागू किया है। इस पैकेज के माध्यम से लाभार्थियों को एकीकृत एवं सुगम बैंकिंग सेवाओं के साथ वित्तीय एवं बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। इस पैकेज के माध्यम से लाभार्थियों को एकीकृत एवं सुगम बैंकिंग सेवाओं के साथ वित्तीय एवं बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। सीएसएपी के लिए 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सूचीबद्ध किया गया है। राजस्थान सरकार का महत्वपूर्ण कदम पात्र कार्मिक एवं पेंशनर्स अपनी सुविधा और पसंद के अनुरूप एम्पैनल्ड बैंकों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं। इसके लिए वे अपने मौजूदा बैंक खाते को सीएसएपी खाते में परिवर्तित करा सकते हैं अथवा नया खाता खुलवाकर पैकेज का लाभ ले सकते हैं। राजस्थान सरकार की यह पहल कार्मिकों एवं पात्र पेंशनर्स के वित्तीय कल्याण, सामाजिक सुरक्षा तथा सुविधाजनक बैंकिंग सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जीरो बैलेंस खाते से लेकर रियायती ऋण तक की सुविधाएं वित्त विभाग के संयुक्त शासन सचिव हरीश लड्ढा ने कहा कि सीएसएपी के तहत उन्नत बैंकिंग सुविधाओं से युक्त जीरो बैलेंस सैलरी अकाउंट उपलब्ध होगा। एनईएफटी, आरटीजीएस, आईएमपीएस एवं यूपीआई के माध्यम से धन हस्तांतरण की सुविधा निःशुल्क रहेगी। इसके अतिरिक्त आवास, शिक्षा, वाहन एवं व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए ऋण पर रियायती ब्याज दर, ऋण प्रसंस्करण शुल्क में छूट तथा लॉकर किराए में रियायत जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध होंगी। पारिवारिक बैंकिंग सहित अन्य बैंकिंग सुविधाओं का लाभ भी पैकेज के अंतर्गत मिलेगा। दुर्घटना एवं जीवन बीमा के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा वित्त विभाग के संयुक्त शासन सचिव हरीश लड्ढा ने कहा कि पैकेज में लाभार्थियों के लिए व्यापक बीमा सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 3.50 करोड़ रुपए तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, 4.00 करोड़ रुपए तक का एयर दुर्घटना बीमा तथा 20 लाख रुपए तक का टर्म लाइफ इंश्योरेंस उपलब्ध होगा। इसके साथ ही स्वयं एवं परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस तथा अतिरिक्त टॉप-अप सुविधा भी प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि सीएसएपी के अंतर्गत उन्नत सुविधाओं वाले डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए जाएँगे। लाभार्थियों को एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस, रिवॉर्ड प्रोग्राम एवं कैशबैक जैसी सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा। इसके साथ कार्ड से संबंधित बेहतर डिजिटल सेवाएँ और अन्य बैंकिंग सुविधाएं भी पैकेज का हिस्सा होंगी। सूचीबद्ध बैंकों के नाम जानिए हरीश लड्ढा ने बताया कि इस कार्य के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, कैनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र एवं पंजाब एंड सिंध बैंक को सूचीबद्ध किया गया है।

RCA चुनाव में बड़ा ट्विस्ट, वोटिंग जारी लेकिन नतीजों के ऐलान पर रोक

जयपुर राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के बहुचर्चित चुनावों के दौरान एक बेहद नाटकीय और सनसनीखेज मोड़ सामने आया है। जयपुर स्थित आरसीए एकेडमी में जब एक तरफ मंगलवार को कड़े मुकाबले और सरगर्मी के बीच मतदान की प्रक्रिया चल रही थी, ठीक उसी समय देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा आदेश जारी हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने आरसीए चुनाव के परिणामों की घोषणा पर रोक लगा दी है। अदालत के इस नए निर्देश के बाद अब चुनाव प्रक्रिया के तहत डाले गए वोट और नतीजे सीधे तौर पर सीलबंद लिफाफे में बंद कर दिए जाएंगे, और कोर्ट के आगामी आदेश के बाद ही परिणामों से पर्दा उठेगा। वोटिंग के ऐन वक्त पर आया सुप्रीम कोर्ट का निर्देश मंगलवार सुबह निर्धारित समय के अनुसार 11:30 बजे से आरसीए के 6 प्रमुख पदों और 11 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करने के लिए 38 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे थे। एक तरफ जहां बृजकिशोर उपाध्याय पैनल और धनंजय सिंह गुट के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा था, वहीं दूसरी तरफ अदालती हलकों से आए इस निर्देश ने पूरी चुनावी तस्वीर को अचानक बदलकर रख दिया है। मतदान तो तय कार्यक्रम के अनुसार जारी है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के सख्त रुख के चलते अब परिणामों के ऐलान पर ब्रेक लग गया है। लिफाफे में बंद होंगे नतीजे, अदालत करेगी तय सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद चुनाव संपन्न होने के बाद भी विजयी उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा नहीं की जाएगी। मतपेटियों में बंद हुए वोटों के नतीजे अब सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रख दिए जाएंगे। अदालत के अगले निर्देश और कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि आरसीए की नई कार्यकारिणी की कमान आधिकारिक रूप से किसके हाथों में सौंपी जाएगी। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अचानक आए इस कानूनी मोड़ ने खेल और राजनीतिक गलियारों में हलचल को और अधिक तेज कर दिया है। जानिए क्या है विवाद की वजह ? इस पूरे विवाद के केंद्र में मुख्य रूप से तीन नए जिलों—बालोतरा, खैरथल-तिजारा और डीडवाना-कुचामन—को मतदाता सूची में शामिल करने और उन्हें वोटिंग राइट्स दिए जाने का गंभीर मुद्दा है, जिसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही है। तीन नए जिलों की वोटर लिस्ट और वोटिंग राइट्स का पेंच इस पूरे विवाद की मुख्य वजह आरसीए की अंतिम मतदाता सूची में कुछ नए जिलों का नाम जुड़ना और उन्हें मतदान का अधिकार दिया जाना है। सवाई माधोपुर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष और आरसीए एडहॉक कमेटी के पूर्व कन्वीनर डीडी कुमावत (D.D. Kumawat) की तरफ से इस मामले में याचिका दायर की गई थी। याचिका में आपत्ति जताई गई थी कि जिन जिलों को लेकर प्रक्रिया विवादित है, उन्हें मताधिकार देना नियमों के विपरीत है। आरसीए की आधिकारिक वेबसाइट पर 22 सितंबर को अंतिम वोटर लिस्ट जारी किए जाने की जानकारी सामने आई थी, जिसके बाद से ही अंदरूनी विरोध के सुर उठने लगे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) को भी इस मामले में हस्तक्षेप करने और पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। पहले से लंबित हैं लोकपाल और प्रशासक के मामले आरसीए से जुड़े मामलों में यह पहली बार नहीं है जब कानूनी दांवपेंच सामने आए हों। इससे पहले भी आरसीए में लोकपाल की नियुक्ति, प्रशासक के अधिकार क्षेत्र और अन्य संगठनात्मक बदलावों से जुड़े कई मामले विभिन्न अदालतों में लंबित चल रहे हैं। खेल संस्था के भीतर चल रही इन प्रशासनिक और कानूनी खींचतान के बीच नए जिलों के वोटिंग राइट्स का मुद्दा सबसे बड़ा अड़चन बनकर उभरा। कौन बनेगा नया अध्यक्ष, सस्पेंस बढ़ा राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) की सियासी पिच पर सुलह-समझौते की तमाम कोशिशें सोमवार को नाकाम हो गईं। सत्ता-संगठन के करीब माने जा रहे बृजकिशोर उपाध्याय पैनल के सामने मंत्री, सांसद और विधायक पुत्रों ने मोर्चा खोल दिया है। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के पुत्र धनंजय खींवसर और उनके पैनल में शामिल राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी के पुत्र आशीष तिवाड़ी और भाजपा विधायक जसवंत यादव के पुत्र मोहित यादव ने चुनाव मैदान में डटे रहकर सत्ता-संगठन को सीधी चुनौती दी है। इससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है और इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं वहीं, दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ के पुत्र पराक्रम सिंह और उनके पैनल के नाम वापस लेकर सत्ता समर्थित पैनल को समर्थन दिए जाने को लेकर राठौड़ की छवि को पार्टी में और मजबूती मिली है। वहीं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के पुत्र पवन दिलावर ने भी नामांकन वापिस ले लिया। हालांकि, पराक्रम गुट से कार्यकारी सदस्य पद के लिए नामांकन करने वाले धर्मवीर सिंह शेखावत मैदान में बने हुए है और अब उनके धनंजय गुट के साथ जाने की चर्चा है। 6 पद… 11 प्रत्याशी… 38 मतदाता बृजकिशोर पैनल- अध्यक्ष: बृजकिशोर उपाध्याय कोषाध्यक्ष: विष्णू अग्रवाल संयुक्त सचिव: राजेश सारस्वत कार्यकारी सदस्य: अरिष्ट सिंघव धनंजय पैनल- अध्यक्ष: धनंजय सिंह सचिव व उपाध्यक्ष: मोहित यादव कोषाध्यक्ष: आशीष तिवाड़ी संयुक्त सचिव: विनोद सहारन कार्यकारी सदस्य: धर्मवीर सिंह शेखावत