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पंचायत चुनाव से पहले राजस्थान में बड़ा स्वास्थ्य प्लान, 600 नए सब-सेन्टर खुलेंगे

जयपुर राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में जहां एक तरफ आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है, वहीं दूसरी तरफ भजनलाल सरकार ने ग्रामीण अंचलों की सूरत बदलने के लिए एक बड़ी प्रशासनिक कवायद शुरू कर दी है। राज्य के गांवों और दूरदराज की ढाणियों में रहने वाले आम नागरिकों को अब छोटी-मोटी बीमारी या प्राथमिक जांच के लिए मीलों दूर कस्बों या जिला अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। भारत सरकार के सहयोग से राजस्थान सरकार प्रदेश के हर 10 किलोमीटर के दायरे में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ कराने जा रही है जिसके तहत अब ग्रामीण इलाकों में 600 नए सब-सेन्टर (छोटे स्वास्थ्य केंद्र) स्थापित किए जा रहे हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सोमवार को जयपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, मानव संसाधन के प्रभावी प्रबंधन, दवा व जांच सुविधाओं के साथ-साथ मौसमी बीमारियों की रोकथाम पर विस्तार से चर्चा की गई। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस कदम को रणनीतिक रूप से देखा जा रहा है। ग्रामीण मतदाताओं और जमीनी स्तर के आम आदमी को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाले स्वास्थ्य सेक्टर में यह कवायद ऐसे समय पर तेज हुई है जब राज्य में पंचायत चुनावों की सुगबुगाहट जोरों पर है। सरकार यह संदेश देने की पूरी कोशिश में है कि ग्रामीण विकास के साथ-साथ बुनियादी चिकित्सा ढांचे को मजबूत करना उसकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है, ताकि चुनाव से ठीक पहले हर गांव तक गवर्नेंस और राहत का सीधा असर पहुंच सके। 50 हजार नई नियुक्तियों के बाद अब ग्राउंड पर एक्शन सरकार का यह फैसला केवल कागजी घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत प्रशासनिक तैयारी नजर आ रही है। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न संवर्गों में लगभग 50 हजार पदों पर नई नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। अब सरकार का पूरा फोकस इस बात पर है कि इन तमाम डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल प्रोफेशनल्स को सही जगह पर तैनात किया जाए। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने हाल ही में बुलाई गई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में साफ निर्देश दिए हैं कि मानव संसाधन का उपयोग केवल कागजी पदों के आधार पर नहीं, बल्कि उस इलाके की वास्तविक जरूरत, भौगोलिक स्थिति और मरीजों के भार को देखकर किया जाना चाहिए। इस नई व्यवस्था के तहत सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले हर नागरिक को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ज्यादा दूर न भटकना पड़े। 600 नए सब-सेन्टर: भारत सरकार के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में नए सब-सेन्टर खोले जाएंगे, जिन्हें एक तरह से स्थानीय स्तर पर छोटे अस्पतालों के रूप में विकसित किया जाएगा। विशेष जरूरत वाले केंद्र: ट्रोमा सेंटर, प्रसव की सुविधा वाले स्वास्थ्य केंद्र और दूरदराज के ग्रामीण अस्पतालों में विशेष तौर पर प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती अनिवार्य की जाएगी। सुरक्षा और पारदर्शिता: चिकित्सा संस्थानों के भवनों की सुरक्षा और जवाबदेही तय करने के साथ-साथ आगामी तीन महीनों में सभी अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जमीनी स्तर पर कामकाज की नियमित मॉनिटरिंग हो सके। क्या होते हैं सब-सेंटर्स सामान्य बोलचाल की भाषा में 'सब-सेन्टर' को ग्रामीण स्तर का छोटा अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ही माना जाता है। सब-सेन्टर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की सबसे शुरुआती और जमीनी इकाई होती है, जो अमूमन ग्रामीण इलाकों में बस्तियों या गांवों के पास बनाई जाती है। यहाँ डॉक्टर नहीं बल्कि प्रशिक्षित एएनएम (ANM) या स्वास्थ्य कार्यकर्ता बैठते हैं। यहाँ गर्भवती महिलाओं की जांच, टीकाकरण, बच्चों के टीके, सामान्य बीमार जैसी बुनियादी और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं मुफ्त मिलती हैं। इसलिए, जब हर 10 किलोमीटर पर नए सब-सेन्टर खोलने की बात कही जा रही है, तो इसका सीधा मतलब यही है कि सरकार गांवों के पास छोटे स्वास्थ्य केंद्र (अस्पताल) स्थापित कर रही है ताकि ग्रामीणों को छोटी-मोटी बीमारी या जांच के लिए दूर शहर न जाना पड़े। प्रशासनिक कसावट और भविष्य की तैयारी स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने भी स्पष्ट किया है कि आरयूएचएस के माध्यम से हजारों चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और दिसंबर में होने वाली नई परीक्षाओं के जरिए महकमे को और मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, जिन स्वास्थ्य केंद्रों के नए भवन बनकर तैयार हो चुके हैं, वहां तत्काल प्रभाव से सेवाएं शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आम जनता को तुरंत फायदा मिल सके। गांवों की चौखट तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का यह कदम निश्चित रूप से राजस्थान के चिकित्सा ढांचे की तस्वीर बदलने वाला साबित हो रहा है।  

पंचायत चुनाव में पोलिंग एजेंट के नियम बदले, जानें कौन बन सकेगा एजेंट

जयपुर पंचायत चुनावों के लिए लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वाचन विभाग ने प्रदेश सहित जयपुर जिले में चुनाव की तैयारियां तेज कर दी है। इसी कड़ी में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए मतदान अभिकर्ताओं (पोलिंग एजेंट) की नियुक्ति को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पंच पद के लिए कोई पोलिंग एजेंट नियुक्त नहीं किया जाएगा। वहीं सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने वाला प्रत्येक अभ्यर्थी या उसका चुनाव एजेंट हर मतदान केंद्र पर एक मतदान अभिकर्ता नियुक्त कर सकेगा। निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद जयपुर जिले की बस्सी, तूंगा, चाकसू, कोटखावदा जमवारामगढ़ और आंधी पंचायत समितियों में चुनाव लड़ने वाल संभावित प्रत्याशियों ने भी अपनी गतिविधियां तेज कर दी है। पंच पद के लिए नहीं होगा अलग एजेंट मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजेश वर्मा ने बताया कि पंच पद के लिए अलग से कोई मतदान अभिकर्ता नियुक्त नहीं होगा, बल्कि अभ्यर्थी स्वयं यह जिम्मेदारी निभाएगा। वहीं सरपंच पद के लिए कोई पृथक निर्वाचन अभिकर्ता नहीं होगा। आयोग के निर्देशों के बाद उम्मीदवारों और उनके एजेंटों को समय रहते नियमों के अनुरूप मतदान अभिकर्ताओं की नियुक्ति करनी होगी, ताकि मतदान दिवस पर किसी प्रकार की असुविधा न हो। वैध फोटो पहचान पत्र होना अनिवार्य पंचायत क्षेत्र का कोई भी मतदाता मतदान अभिकर्ता यानी पोलिंग एजेंट नियुक्त किया जा सकता है, लेकिन उसके पास वैध फोटो पहचान पत्र होना अनिवार्य है। इसके लिए पासपोर्ट, वोटर आइडी या आयोग की ओर से मान्य अन्य दस्तावेज स्वीकार किए जाएंगे। मतदान केंद्र के अंदर रहते समय अभिकर्ता को नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र साथ रखना होगा और मांगने पर प्रस्तुत करना होगा। किसी दूसरी पंचायत के मतदाता को पोलिंग एजेंट नहीं बनाया जा सकता। ये नहीं बन सकेंगे पोलिंग एजेंट निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आयोग ने कुछ श्रेणियों के लोगों को मतदान अभिकर्ता बनने से प्रतिबंधित किया है। इनमें केंद्र या राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, स्थानीय निकायों के निर्वाचित पदाधिकारी, सरकारी या अर्द्धसरकारी संस्थानों के कर्मचारी, सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारी, मानदेय प्राप्त करने वाले व्यक्ति, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पैरामेडिकल व हेल्थ केयर स्टाफ, उचित मूल्य की दुकान के डीलर व सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान में कार्यरत व्यक्ति शामिल हैं। चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारी भी मतदान अभिकर्ता नहीं बन सकेंगे।

CM भजनलाल का कांग्रेस पर हमला, EVM से नौकरी तक कई मुद्दों पर घेरा

जयपुर नौकरियों के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि विधानसभा में जब उनकी सरकार ने राजस्थान के 4 लाख युवाओं को नौकरी देने की बात कही थी, तब कांग्रेस के लोगों ने सवाल उठाया था कि ये कैसे होगा। राजस्थान के खैरथल में CM भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पर जमकर तंज कसे। चुनावी हार से लेकर EVM, सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, सहकारिता, पेपर लीक और बच्चों की ड्रेस तक के मुद्दे पर उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार को घेरा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के लोग हवा-हवाई बातें करते हैं और जहां चुनाव हारते हैं, वहां EVM को दोष देने लगते हैं। ‘हार गए तो EVM दोषी!’ CM ने कसा तंज खैरथल के होटल ग्रीनलैंड में सभा को संबोधित करते हुए भजनलाल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के लोगों ने जनता से जुड़कर काम नहीं किया। अगर जनता से जुड़कर काम किया होता तो ऐसी दुर्गति नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का काम करती है। CM ने कहा कि कांग्रेस के लोग सेना पर भी आरोप लगाते हैं, सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग पर भी आरोप लगाते हैं। जहां चुनाव हारते हैं, वहां EVM को दोष देते हैं ‘गणित कमजोर है तो ट्यूशन लगा लो’ नौकरियों के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि विधानसभा में जब उनकी सरकार ने राजस्थान के 4 लाख युवाओं को नौकरी देने की बात कही थी, तब कांग्रेस के लोगों ने सवाल उठाया था कि ये कैसे होगा। भजनलाल ने कहा कि अब तक 1.89 लाख नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं, 1.22 लाख के पेपर हो चुके हैं और 1.25 लाख की वैकेंसी निकाली जा चुकी हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा- ‘अगर इनका गणित कमजोर हो तो ट्यूशन लगा लें।’ ड्रेस में भी ‘कांटा’… CM का कांग्रेस पर हमला बच्चों की ड्रेस और छात्राओं की स्कूटी को लेकर भी CM ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बहनों को स्कूटी और बच्चों को ड्रेस दे रही है, लेकिन कांग्रेस के समय ड्रेस और स्कूटी में भी ‘कांटा’ लगाया जाता था। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह तय किया जाता था कि सामान कहां से खरीदना है और कहां से नहीं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अब स्कूटी और ड्रेस का पैसा सीधे लाभार्थियों के खाते में डाल रही है। सहकारिता पर भी घेरा भजनलाल शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सहकारिता को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया था। उनके मुताबिक पहले सहकारिता की सदस्यता के लिए पोर्टल सीमित समय के लिए खोला जाता था और अपने लोगों को सदस्य बनाया जाता था। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने सहकारिता की सदस्यता खोल दी है और हर ग्राम पंचायत में सहकारिता की समिति बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अब तक राजस्थान में 10 लाख लोग सहकारिता के सदस्य बन चुके हैं। गहलोत-डोटासरा-जूली को भी घेरा हरियाणा से हुए समझौते को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हरियाणा में चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में राजस्थान-हरियाणा समझौता रद्द करने की बात कही थी। CM ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने हरियाणा में उस घोषणा पत्र को लॉन्च किया था। भजनलाल ने सवाल उठाया कि अब कांग्रेस राजस्थान की जनता से किस मुंह से वोट मांग रही है। भूपेंद्र यादव बोले- ‘कांग्रेस को उम्मीदवार तक नहीं मिले’ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव के दौरान कांग्रेस भाजपा की जीत को लेकर सवाल उठा रही थी, लेकिन अलवर के भिवाड़ी, किशनगढ़बास, गोविंदगढ़ और खेड़ली में उसे उम्मीदवार तक नहीं मिले। यादव ने कहा कि इन जगहों पर भाजपा के अध्यक्ष निर्विरोध चुने गए। उन्होंने सहकारिता बैंक का मुद्दा उठाते हुए भी कांग्रेस पर निशाना साधा। 117 करोड़ के 95 कामों का लोकार्पण-शिलान्यास इससे पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अलवर, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ के लिए 117 करोड़ रुपए के 95 कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। खैरथल में CM ने ईआरसीपी के तहत नीमराणा बांध के काम की शुरुआत, 45 मीटर मास्टर प्लान सड़क का विकास, तिजारा से फिरोजपुर हरियाणा सीमा तक सड़क सुदृढ़ीकरण और जिला मुख्यालय पर PHED के नए अधिशासी अभियंता पद सहित कई घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री बनने के बाद खैरथल-तिजारा जिले में भजनलाल शर्मा का यह तीसरा दौरा है। भाजपा का बोर्ड बनने के बाद खैरथल में यह उनका पहला दौरा रहा।  

सरमथुरा में पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी जारी, 12 सीटें सामान्य तो 6 ST के लिए आरक्षित

सरमथुरा (धौलपुर)  पंचायती राज चुनाव को लेकर प्रशासन की ओर से निकाली गई आरक्षण की लॉटरी ने ग्रामीण राजनीति का पूरा गणित बदल कर रख दिया है। लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरमथुरा में सीटों का आरक्षण स्पष्ट हो गया है, जिससे चुनावी सरगर्मी अचानक तेज हो गई है। नई आरक्षण स्थिति सामने आने से कई पुराने दिग्गजों के समीकरण गड़बड़ा गए हैं, वहीं नए चेहरों में उत्साह नजर आने लगा है। आंकड़ों के अनुसार, इस बार पंचायतों में विभिन्न श्रेणियों के लिए सीटों का निर्धारण रोस्टर नियमों के तहत किया गया है। अनारक्षित (सामान्य) श्रेणी में महिला सहित कुल 12 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इनमें लीलौठी, बीलौनी, झिरी, बीझौली, बरौली, धौंध, खरौली, आंगई, डौमई, गौलारी, मदनपुर और पवैनी शामिल हैं। इसी प्रकार अनुसूचित जनजाति श्रेणी के लिए महिला सहित छह ग्राम पंचायतों को आरक्षित किया गया है। इनमें नवगठित बड़ागांव, ददरौनी, भंमपुरा, सुनकई, सुरारीकलां पंचायतों के साथ ग्राम पंचायत पिपरेंट शामिल हैं। वहीं, अनुसूचित जाति श्रेणी के लिए महिला सहित पांच ग्राम पंचायतों को आरक्षित किया गया है। इनमें रहरई, मड़ासिल, खुर्दिया, चंद्रावली और बटीकरा शामिल हैं। इसी प्रकार 24 ग्राम पंचायतों में से एक ग्राम पंचायत भरकुंजरा को ओबीसी के लिए आरक्षित किया गया है। इस नई व्यवस्था से चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। पिछले चुनाव की तुलना में इस बार कई पंचायतों का परिसीमन व वर्ग बदलने से राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों ने अपनी रणनीति पर नए सिरे से काम करना शुरू कर दिया है। आरक्षण की यह तस्वीर साफ होने के बाद अब गांवों में चौपालों पर चुनावी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सरमथुरा में प्रधान पद ओबीसी होने से सरपंची पर दिग्गजों की निगाहें आरक्षण लॉटरी में पंचायत समिति सरमथुरा में प्रधान पद ओबीसी श्रेणी के लिए आरक्षित होने के बाद दिग्गजों के सामने सरपंची का विकल्प बचा है। हालांकि, ग्राम पंचायतों का परिसीमन होने के कारण गणित गड़बड़ा रहा है। नवीन परिसीमन के अनुसार, ग्राम पंचायत बीझौली में हर पांच साल बाद समीकरण बदल जाते हैं। इस बार बीझौली व पवैनी पंचायत में से सुरारीकलां को नवीन पंचायत का दर्जा दिया गया है। इसी प्रकार बरौली व बटीकरा ग्राम पंचायतों में से सुनकई, खरौली व बीलौनी ग्राम पंचायत में से बड़ागांव, डौमई ग्राम पंचायत में से ददरौनी और झिरी ग्राम पंचायत में से भंमपुरा को नवीन ग्राम पंचायत बनाया गया है।

जैसलमेर-बाड़मेर बन रहे ग्रीन एनर्जी हब, 1.50 लाख हेक्टेयर में परियोजनाओं की तैयारी

जैसलमेर/बाड़मेर  थार की तेज धूप और लगातार चलने वाली हवाएं अब पश्चिमी राजस्थान की अर्थव्यवस्था का नया आधार बन रही हैं। अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के साथ निवेश, तकनीकी सेवाओं, परिवहन, निर्माण, रख-रखाव, सुरक्षा और स्थानीय रोजगार की नई अर्थव्यवस्था आकार ले रही हैं। जैसलमेर में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में करोड़ों रुपए के निवेश की संभावनाएं हैं। प्रस्तावित परियोजनाओं में करीब 60 हजार मेगावाट क्षमता की सौर, पवन, बैटरी भंडारण और जैवभार आधारित परियोजनाओं का उल्लेख है। इन परियोजनाओं के लिए करीब 1.50 लाख हेक्टेयर भूमि चिन्हित किए जाने की जानकारी है। इससे पश्चिमी राजस्थान में ऊर्जा उत्पादन के साथ इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। राजस्थान में करीब 4913 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता है। इसमें जैसलमेर-बाड़मेर क्षेत्र की हिस्सेदारी 4000 मेगावाट से अधिक बताई जाती है। फतेहगढ़, लाठी, नेड़ान-मूलाना और नोख क्षेत्र में सौर ऊर्जा विस्तार की गतिविधियां इस ऊर्जा पट्टी को और बड़ा आधार दे रही हैं। वहीं, बाड़मेर में 1000 से अधिक कृषि कुओं पर सौर संयंत्र संचालित होने की जानकारी है। बालोतरा के पॉपलीन उद्योग में भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने की उम्मीद है। पोकरण में 3500 एकड़ में सौर परियोजना पोकरण क्षेत्र के रामपुरिया, भिणाजपुरा, हस्तिनापुर और मसूरिया में रिन्यू की सौर परियोजना करीब 3500 एकड़ में फैली है। परियोजना की क्षमता को लेकर उपलब्ध विवरणों में 975 मेगावाट और 1.3 गीगावॉट, दोनों आंकड़े सामने आ रहे हैं। परियोजना से सालाना करीब 2490 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है। इस परियोजना से करीब पांच लाख परिवारों की बिजली जरूरतों को लाभ मिलने और हर साल करीब 23 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान जताया जा रहा है। इससे क्षेत्र में बड़े स्तर पर अक्षय ऊर्जा उत्पादन के साथ पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की दिशा में भी काम होने की बात सामने आती है। स्थानीय उद्योग और रोजगार शृंखला भी जरूरी पश्चिमी राजस्थान की ताकत केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। ऊर्जा आधारित स्थानीय उद्योग और रोजगार शृंखला भी इसके आर्थिक प्रभाव को बढ़ा सकती है। पारेषण, भंडारण, कौशल विकास और सहायक उद्योगों का विस्तार साथ हुआ तो अक्षय ऊर्जा क्षेत्र से होने वाले निवेश का स्थानीय आर्थिक प्रभाव व्यापक हो सकता है। जितेंद्र थानवी, ऊर्जा विशेषज्ञ, के अनुसार पश्चिमी राजस्थान में अक्षय ऊर्जा का विस्तार केवल बिजली उत्पादन का विषय नहीं है, बल्कि इससे जुड़े स्थानीय उद्योग और रोजगार के अवसर भी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं।  

किसान आईडी में राजस्थान की बड़ी उपलब्धि, उत्तर भारत में 100% लक्ष्य पाने वाला पहला राज्य

जयपुर  राजस्थान ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश ने केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से निर्धारित 90.19 लाख किसान आईडी के लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा कर लिया है। इसके साथ राजस्थान उत्तर भारत में 100 प्रतिशत किसान आईडी लक्ष्य हासिल करने वाला पहला और देश का छठा राज्य बन गया है। वर्ष 2015-16 की कृषि गणना में प्रदेश में 76.54 लाख परिचालित जोत दर्ज थीं। इनके मुकाबले किसान आईडी की उपलब्धि करीब 118 प्रतिशत पहुंच गई है। इस आधार पर राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर है। किसान आईडी को आधार और भूमि अभिलेखों से जोड़ने के साथ जन आधार से भी जोड़ा गया है। करीब 83 लाख किसान जन आधार में किसान आईडी के साथ जुड़े हैं। राज्य में लगभग 99 प्रतिशत गांवों का भू-संदर्भीकरण पूरा हो चुका है। वहीं रबी 2025-26 के दौरान 2.72 करोड़ से अधिक भू-खण्डों पर डिजिटल फसल सर्वे किया गया। प्रदेश के कुल बोए गए क्षेत्र का करीब 62 प्रतिशत हिस्सा किसान आईडी के दायरे में आ चुका है। प्रधानमंत्री किसान योजना के लगभग 50 लाख लाभार्थियों को भी किसान आईडी से जोड़ा गया है। किसान आईडी के जरिए किसान की डिजिटल पहचान को उसकी कृषि भूमि और फसल संबंधी जानकारी से जोड़ा जा रहा है। इससे कृषि योजनाओं में पात्र लाभार्थियों की पहचान, उर्वरक और बीज वितरण, सूक्ष्म सिंचाई, कृषि उपकरण, फसल बीमा तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद जैसी व्यवस्थाओं को अधिक लक्षित बनाने में मदद मिलेगी। राज्य में एग्रीस्टैक आयुक्तालय की स्थापना की जा रही है। एग्रीस्टैक के आंकड़ों को विभिन्न विभागीय योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इससे किसानों को बार-बार समान दस्तावेज देने की जरूरत कम होने और सरकारी सेवाओं की पहुंच आसान होने की संभावना है। क्रम    उपलब्धि                                                    स्थिति 1    किसान आईडी का लक्ष्य                                90.19 लाख का शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा 2    राष्ट्रीय स्थिति                                                उत्तर भारत में पहला, देश में छठा राज्य 3    परिचालित जोत के मुकाबले उपलब्धि             करीब 118 प्रतिशत 4    किसान आईडी से पीएम-किसान लाभार्थी         करीब 50 लाख 5    बोया गया क्षेत्र                                               करीब 62 प्रतिशत क्षेत्र कवर 6    गांवों का भू-संदर्भीकरण                                   करीब 99 प्रतिशत पूरा 7    डिजिटल फसल सर्वे                                        2.72 करोड़ से अधिक भू-खण्ड 8    जन आधार से जुड़ाव                                        करीब 83 लाख किसान 9    डिजिटल एकीकरण                                          आधार, भूमि रिकॉर्ड, पीएम-किसान व अन्य कृषि योजनाओं से जुड़ाव 10    विशेष अभियान    1 से 30 सितंबर 2026 तक छूटे किसानों को जोड़ने का अभियान कृषि विभाग के अनुसार, छूटे हुए पात्र किसानों को किसान आईडी से जोड़ने के लिए 1 से 30 सितंबर तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में कृषि पर्यवेक्षकों की भागीदारी, पीएम-किसान लाभार्थियों को सूचना और अन्य स्तरों पर सत्यापन की व्यवस्था की गई है।

गल्ले में 500 के नोट, लेकिन 5-10-20 के सिक्कों और नोटों के लाले; बाजार में बढ़ी परेशानी

निम्बाहेड़ा  पितृपक्ष के बाद अब नवरात्र और दीपावली का त्योहारी सीजन सिर पर है। आम तौर पर इन दिनों बाजारों में चहल-पहल बढ़ जाती है, लेकिन निम्बाहेड़ा के छोटे बाजारों से लेकर मुख्य किराना और फल-सब्जी मंडियों तक इस समय एक अजीब सी माथापच्ची चल रही है। ग्राहक की जेब में 200 या 500 का नोट है, उसे 20 या 30 रुपए का सामान चाहिए, लेकिन दुकान पर पहुंचते ही सबसे पहला और बड़ा सवाल यही गूंज रहा है भाई साहब, 10 का छुट्टे देना; छुट्टे हैं क्या? त्योहारी सीजन के मुहाने पर खड़े इस दौर में छोटे नोटों और सिक्कों की किल्लत ने रोजमर्रा के लेन-देन को बड़ा सिरदर्द बना दिया है। डिजिटल दौर की अपनी मजबूरियां और यूपीआई का भ्रम आज के समय में डिजिटल भुगतान (यूपीआई) को नकदी का सबसे बड़ा विकल्प माना जाता है, लेकिन निम्बाहेड़ा के स्थानीय बाजारों की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है। हर ग्राहक डिजिटल नहीं: बुजुर्ग, छोटे बच्चे, ग्रामीण इलाकों से आने वाले खरीदार और ठेले-पटरियों से रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने वाले लोग आज भी पूरी तरह कैश पर निर्भर हैं।     यूपीआई चार्ज का डर: हाल ही में यूपीआई ट्रांजैक्शन पर संभावित शुल्क लगने की चर्चाओं और भ्रम ने आम जनता के मन में एक मनोवैज्ञानिक डर पैदा कर दिया है। इसके चलते लोग अपने पास मौजूद छोटे नोटों को खर्च करने के बजाय होल्ड (संचित) करने लगे हैं।     तकनीकी अड़चनें: त्योहारों के सीजन में लोड बढ़ने पर सर्वर डाउन होना या नेटवर्क फेल होना आम बात है। ऐसे में इंटरनेट या स्कैनर धोखा दे जाते हैं और मौके पर केवल छुल्ले पैसे ही काम आते हैं। आपसी जुगाड़ से चल रहा काम, आगे और बिगड़ेगी स्थिति जब आधिकारिक बैंकिंग व्यवस्था से कोई ठोस समाधान नहीं मिल रहा, तो निम्बाहेड़ा के छोटे व्यापारियों ने खुद ही इसका तोड़ निकाल लिया है। व्यापारी आपस में ही एक-दूसरे को बड़े नोट देकर चिल्लर और छोटे नोटों का जुगाड़ कर रहे हैं। लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है। अब सबसे बड़ा सवाल आने वाले नवरात्र और दीपावली के पीक सीजन को लेकर है। जब त्योहारी खरीदारी का दौर परवान चढ़ेगा, तब छोटे मूल्यवर्ग की जरूरत सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ जाएगी। यदि समय रहते बैंकों और स्थानीय स्तर पर छोटे नोटों की यह किल्लत दूर नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में छुट्टा है क्या? सिर्फ एक दुकानदार का सवाल नहीं, बल्कि पूरे बाजार की सबसे बड़ी रुकावट बन जाएगा। गल्ले में 500 के नोट, पर चिल्लर के लाले दुकानदारों की परेशानी यह है कि दिनभर की बिक्री में बड़े नोट तो धड़ल्ले से आ रहे हैं और गल्ले में जमा होते जा रहे हैं, लेकिन ग्राहकों को खुले पैसे या खुल्ले लौटाने के लिए 5, 10, 20 और 50 रुपए के नोट या सिक्के ढूंढे नहीं मिल रहे। बाजार की तस्वीर यह है कि एक दुकानदार के पास यदि गलती से सिक्के आ गए, तो आस-पास के दूसरे दुकानदार उससे चिल्लर मांगने पहुंच जाते हैं। यानी बाजार में कुल नकदी तो घूम रही है, लेकिन वह उस छोटे मूल्यवर्ग में नहीं है जिसकी रोजमर्रा के खुदरा कारोबार को सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

ज्ञान भारतम मिशन: राजस्थान की 23 लाख पांडुलिपियां होंगी डिजिटल, जिला स्तर पर बनेंगे संरक्षण केंद्र

जयपुर संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित "ज्ञान भारतम मिशन" के तहत राजस्थान राज्य में "पाण्डुलिपि डिजिटलीकरण कार्यशाला" का आयोजन सोमवार को जयपुर के झालाना संस्थानिक क्षेत्र स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन तथा कला एवं संस्कृति मंत्री  दिया कुमारी के मुख्य आतिथ्य में किया गया। इस अवसर पर राज्य के मुख्य सचिव वी.निवास उपस्थित रहे। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि पांडुलिपियां केवल पुराने कागज या ग्रन्थ नहीं हैं, ये भारत के हजारों वर्षों के साहित्य, परम्परा, इतिहास और दर्शन की धरोहर हैं। इनमें हमारे पूर्वजों के अनुभव, शोध और ज्ञान का भण्डार सुरक्षित है। एक पाण्डुलिपि केवल अतीत की कहानी नहीं कहती, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए नए मार्ग खोलती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में "ज्ञान भारतम मिशन" इसी संकल्प को नई तकनीक से जोड़ रहा है। मोदी जी का विजन है कि हमारा प्राचीन ज्ञान अलमारियों में बंद न रहे, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से दुनिया तक पहुंचे और विकसित भारत की शक्ति बने। प्रधानमंत्री जी की सोच को केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत जी के मार्गदर्शन में साकार किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के मार्गदर्शन में राजस्थान में पाण्डुलिपियों को संरक्षित करने के लिए निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान के तहत राजकीय व निजी संग्रह, पुस्तकालयों, मंदिर, मठों आदि से लगभग 23 लाख पांडुलिपियों का सर्वे किया गया है, जिसमें से लगभग एक लाख चौबीस हजार को डिजिटाइज्ड किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि राजस्थान की प्रत्येक पाण्डुलिपि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाए ताकि युवा शोधार्थी, विद्यार्थी और आम जन भी हमारे शास्त्रों, आयुर्वेद, ज्योतिष और साहित्य के ज्ञान से जुड़ सकें। इसके लिए जिला स्तर पर भी संरक्षण केन्द्र विकसित किए जाएंगे और निजी संग्रहकर्ताओं को भी इस मिशन से जोड़ा जाएगा। प्राचीन ग्रंथ और दस्तावेज देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर -मुख्य सचिव  मुख्य सचिव वी.निवास ने कहा कि प्राचीन ग्रंथ और दस्तावेज देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर हैं और ज्ञान भारतम मिशन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। राजस्थान का इतिहास और सभ्यता बहुत समृद्ध है। मिशन को और सफल बनाने के लिए सभी विश्वविद्यालयों के संस्कृत विभागों को साथ लेकर तालपत्रों के संरक्षण और संस्कृत शब्दावली तैयार करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए और युवाओं को इस क्षेत्र में शोध के लिए प्रेरित किया जाए। पाण्डुलिपियों में छिपा ज्ञान यदि तकनीक के माध्यम से सहज रूप से उपलब्ध होगा तो यह न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश की ज्ञान परम्परा को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाएगा। उक्त कार्यशाला में संस्कृति मंत्रालय नई दिल्ली से संयुक्त सचिव समीर नंदा, निदेशक इंद्रजीत सिंह , आयुक्त पर्यटन विभागमती रुक्मणी रियार, शासनउप सचिव, कला एवं संस्कृति विभाग, अनुपम कायल, निदेशक राजस्थान संस्कृत अकादमी, डॉ. लतामाली, सयुंक्त निदेशक, पुरातत्व संग्रहालय विभाग,मती कृष्णकांता शर्मा, प्रबंधक रविन्द्र मंच, कविता गोदारा, सहायक नोडल अधिकारी ज्ञानभारतम, रजनीश हर्ष एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। ज्ञानभारतम मिशन के राजस्थान समन्वयक डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने राजस्थान का प्रजेंटेशन दिया और सभी राज्य से आये हुए अधिकारीगणों को अवगत कराया कि राजस्थान किस प्रकार इस मिशन में रोल मॉडल बनकर उभरा है।

शिकायतों के समाधान में नहीं चलेगी खानापूर्ति, राजस्थान संपर्क पर ACS ने दिए सख्त निर्देश

जयपुर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता व प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दिनेश कुमार ने सोमवार को शासन सचिवालय स्थित 181 हैल्पलाइन कॉल सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कॉल सेंटर की कार्यप्रणाली, सम्पर्क एआई, विभागवार प्राप्त परिवादों, उनके निस्तारण, परिवादियों की संतुष्टि एवं शिकायत समाधान की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने 15 से अधिक परिवादियों से स्वयं विडियो कॉल पर  संवाद कर उनकी समस्याएं जानीं तथा संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक कार्यवाही करते हुए परिवादों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अधिकारियों के साथ बैठक में विभागवार शिकायतों की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि राजस्थान सम्पर्क पर प्राप्त परिवादों के निस्तारण में केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि परिवादी की संतुष्टि को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) पंकज कुमार ओझा, को निर्देश दिए कि प्रत्येक सोमवार को संबंधित विभागों से 15 असंतुष्ट प्रकरण चयनित कर परिवादियों से स्वयं संवाद किया जाए। परिवादी के असंतुष्ट रहने के कारण की जानकारी लेकर संबंधित विभाग से समन्वय करते हुए समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने इन प्रकरणों की मासिक प्रगति रिपोर्ट तैयार कर नियमित रूप से समीक्षा करने के भी निर्देश दिए। परिवादियों से संवाद कर जानी समस्याएं निरीक्षण के दौरान एसीएस दिनेश कुमार ने विभिन्न जिलों के परिवादियों से बातचीत की। सवाई माधोपुर के रिंकू कुमार ने वर्ष 2025-26 की उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति के आवेदन का बिल जनरेट नहीं होने की समस्या बताई। चित्तौड़गढ़ के सुरेंद्र ने छात्रवृत्ति आवेदन में बार-बार आ रहे आपत्ति संबंधी प्रकरण एवं जन आधार में जाति प्रमाण-पत्र व मूल निवास अपडेट होने के बावजूद पुनः आपत्ति आने की समस्या बताई। जोधपुर के कान सिंह ने पालनहार योजना की राशि पिछले दो वर्षों से खाते में लंबित होने की शिकायत रखी। बारां के महेश ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के आवेदन पर बार-बार आपत्ति लगाए जाने के कारण स्वीकार नहीं किए जाने की समस्या बताई। वहीं सीकर के प्रभाकर ने अनुप्रति कोचिंग योजना के लिए आवेदन करते समय जन आधार से संबंधित तकनीकी समस्या के कारण आवेदन सबमिट नहीं होने की जानकारी दी। भरतपुर के लक्समी कुमार ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में बच्चे की माता का जाति प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं होने से उत्पन्न समस्या से अवगत कराया। इसी प्रकारगंगानगर के कमल सोनी ने रीना रानी के नाम से पेंशन बंद करवाने के लिए दिए गए आवेदन पर अभी तक कार्यवाही नहीं होने की शिकायत की। जयपुर के विकास मेवाड़ा ने विद्या संबल योजना के तहत देवनारायण राजकीय आवासीय विद्यालय, देवडूंगरी, पाली में अंग्रेजी व्याख्याता पद पर नियुक्ति संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश की पालना नहीं होने का प्रकरण रखा। बूंदी के एजाज अहमद ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के ऑनलाइन आवेदन में आ रही समस्या तथा पोर्टल के सुचारू संचालन की मांग रखी। बीकानेर की मंजू देवी ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के आवेदन में ई-मित्र स्तर पर दर्ज गलत विवरण को सही करवाने एवं आवेदन पर लगी आपत्तियों का निस्तारण कर योजना का लाभ दिलाने का अनुरोध किया। वहीं जालोर के रवेंद्र ने छात्रावास वरीयता फॉर्म में संशोधन का विकल्प नहीं खुलने से संबंधित तकनीकी समस्या से अवगत कराया। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने परिवादियों की समस्याएं सुनने के बाद संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण की नियमानुसार जांच कर समयबद्ध एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 181 सम्पर्क कॉल सेंटर शासन और आमजन के बीच महत्वपूर्ण सेतु है। इसके माध्यम से प्राप्त शिकायतों का संवेदनशीलता के साथ समाधान करते हुए परिवादी को वास्तविक राहत मिलना सुनिश्चित किया जाए।  

राजस्थान और डेनमार्क के बीच नए एक्शन प्लान पर काम, ग्रीन एनर्जी से जल प्रबंधन तक सहयोग

जयपुर  मुख्य सचिव वी.निवास की अध्यक्षता में सोमवार को शासन सचिवालय में राजस्थान तथा डेनमार्क के द्विपक्षीय सहयोग को लेकर बैठक आयोजित हुई, जिसमें भारत में डेनमार्क के राजदूत रासमस अबील्डगार्ड क्रिस्टेंसन ने भाग लिया। बैठक में दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों तथा 'इंडिया-डेनमार्क ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' के अंतर्गत विभिन्न सहयोगात्मक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। नई कार्ययोजना पर होगा आगे काम मुख्य सचिव ने कहा कि वर्ष 2020 में स्थापित 'ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' का प्रथम पाँच-वर्षीय कार्यकाल सफलतापूर्वक पूर्ण होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि से उत्साहित होकर अब अगले पाँच वर्षों के लिए एक नए एवं उन्नत एक्शन प्लान पर कार्य किया जा रहा है, जिससे राजस्थान व डेनमार्क के बीच सहयोग के नए आयाम खुलेंगे। ऊर्जा व जल प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग पर जोर बैठक के दौरान बताया गया कि ऊर्जा संरक्षण व नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में पंपिंग स्टेशनों पर ऊर्जा बचत, तकनीकी नवाचार तथा ग्रिड फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया गया। जल प्रबंधन व नदी पुनर्जीवन के संदर्भ में जल संरक्षण, वेस्ट वाटर प्रबंधन, जल आपूर्ति की मॉनिटरिंग तथा नदियों के पुनर्जीवन के क्षेत्र में डेनमार्क के अनुभवों का लाभ उठाए जाने पर सहमति बनी। खाद्य प्रसंस्करण व आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर चर्चा इसके साथ ही कृषि व खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में साझेदारी को और मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया गया। वाटर सप्लाई मॉनिटरिंग एवं शहरी विकास के विभिन्न आयामों में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिए जाने पर भी सहमति बनी। बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने डेनमार्क प्रतिनिधिमंडल के साथ अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर विचार साझा किए।