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जैसलमेर-बाड़मेर बन रहे ग्रीन एनर्जी हब, 1.50 लाख हेक्टेयर में परियोजनाओं की तैयारी

जैसलमेर/बाड़मेर  थार की तेज धूप और लगातार चलने वाली हवाएं अब पश्चिमी राजस्थान की अर्थव्यवस्था का नया आधार बन रही हैं। अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के साथ निवेश, तकनीकी सेवाओं, परिवहन, निर्माण, रख-रखाव, सुरक्षा और स्थानीय रोजगार की नई अर्थव्यवस्था आकार ले रही हैं। जैसलमेर में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में करोड़ों रुपए के निवेश की संभावनाएं हैं। प्रस्तावित परियोजनाओं में करीब 60 हजार मेगावाट क्षमता की सौर, पवन, बैटरी भंडारण और जैवभार आधारित परियोजनाओं का उल्लेख है। इन परियोजनाओं के लिए करीब 1.50 लाख हेक्टेयर भूमि चिन्हित किए जाने की जानकारी है। इससे पश्चिमी राजस्थान में ऊर्जा उत्पादन के साथ इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। राजस्थान में करीब 4913 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता है। इसमें जैसलमेर-बाड़मेर क्षेत्र की हिस्सेदारी 4000 मेगावाट से अधिक बताई जाती है। फतेहगढ़, लाठी, नेड़ान-मूलाना और नोख क्षेत्र में सौर ऊर्जा विस्तार की गतिविधियां इस ऊर्जा पट्टी को और बड़ा आधार दे रही हैं। वहीं, बाड़मेर में 1000 से अधिक कृषि कुओं पर सौर संयंत्र संचालित होने की जानकारी है। बालोतरा के पॉपलीन उद्योग में भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने की उम्मीद है। पोकरण में 3500 एकड़ में सौर परियोजना पोकरण क्षेत्र के रामपुरिया, भिणाजपुरा, हस्तिनापुर और मसूरिया में रिन्यू की सौर परियोजना करीब 3500 एकड़ में फैली है। परियोजना की क्षमता को लेकर उपलब्ध विवरणों में 975 मेगावाट और 1.3 गीगावॉट, दोनों आंकड़े सामने आ रहे हैं। परियोजना से सालाना करीब 2490 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है। इस परियोजना से करीब पांच लाख परिवारों की बिजली जरूरतों को लाभ मिलने और हर साल करीब 23 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान जताया जा रहा है। इससे क्षेत्र में बड़े स्तर पर अक्षय ऊर्जा उत्पादन के साथ पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की दिशा में भी काम होने की बात सामने आती है। स्थानीय उद्योग और रोजगार शृंखला भी जरूरी पश्चिमी राजस्थान की ताकत केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। ऊर्जा आधारित स्थानीय उद्योग और रोजगार शृंखला भी इसके आर्थिक प्रभाव को बढ़ा सकती है। पारेषण, भंडारण, कौशल विकास और सहायक उद्योगों का विस्तार साथ हुआ तो अक्षय ऊर्जा क्षेत्र से होने वाले निवेश का स्थानीय आर्थिक प्रभाव व्यापक हो सकता है। जितेंद्र थानवी, ऊर्जा विशेषज्ञ, के अनुसार पश्चिमी राजस्थान में अक्षय ऊर्जा का विस्तार केवल बिजली उत्पादन का विषय नहीं है, बल्कि इससे जुड़े स्थानीय उद्योग और रोजगार के अवसर भी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं।  

किसान आईडी में राजस्थान की बड़ी उपलब्धि, उत्तर भारत में 100% लक्ष्य पाने वाला पहला राज्य

जयपुर  राजस्थान ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश ने केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से निर्धारित 90.19 लाख किसान आईडी के लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा कर लिया है। इसके साथ राजस्थान उत्तर भारत में 100 प्रतिशत किसान आईडी लक्ष्य हासिल करने वाला पहला और देश का छठा राज्य बन गया है। वर्ष 2015-16 की कृषि गणना में प्रदेश में 76.54 लाख परिचालित जोत दर्ज थीं। इनके मुकाबले किसान आईडी की उपलब्धि करीब 118 प्रतिशत पहुंच गई है। इस आधार पर राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर है। किसान आईडी को आधार और भूमि अभिलेखों से जोड़ने के साथ जन आधार से भी जोड़ा गया है। करीब 83 लाख किसान जन आधार में किसान आईडी के साथ जुड़े हैं। राज्य में लगभग 99 प्रतिशत गांवों का भू-संदर्भीकरण पूरा हो चुका है। वहीं रबी 2025-26 के दौरान 2.72 करोड़ से अधिक भू-खण्डों पर डिजिटल फसल सर्वे किया गया। प्रदेश के कुल बोए गए क्षेत्र का करीब 62 प्रतिशत हिस्सा किसान आईडी के दायरे में आ चुका है। प्रधानमंत्री किसान योजना के लगभग 50 लाख लाभार्थियों को भी किसान आईडी से जोड़ा गया है। किसान आईडी के जरिए किसान की डिजिटल पहचान को उसकी कृषि भूमि और फसल संबंधी जानकारी से जोड़ा जा रहा है। इससे कृषि योजनाओं में पात्र लाभार्थियों की पहचान, उर्वरक और बीज वितरण, सूक्ष्म सिंचाई, कृषि उपकरण, फसल बीमा तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद जैसी व्यवस्थाओं को अधिक लक्षित बनाने में मदद मिलेगी। राज्य में एग्रीस्टैक आयुक्तालय की स्थापना की जा रही है। एग्रीस्टैक के आंकड़ों को विभिन्न विभागीय योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इससे किसानों को बार-बार समान दस्तावेज देने की जरूरत कम होने और सरकारी सेवाओं की पहुंच आसान होने की संभावना है। क्रम    उपलब्धि                                                    स्थिति 1    किसान आईडी का लक्ष्य                                90.19 लाख का शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा 2    राष्ट्रीय स्थिति                                                उत्तर भारत में पहला, देश में छठा राज्य 3    परिचालित जोत के मुकाबले उपलब्धि             करीब 118 प्रतिशत 4    किसान आईडी से पीएम-किसान लाभार्थी         करीब 50 लाख 5    बोया गया क्षेत्र                                               करीब 62 प्रतिशत क्षेत्र कवर 6    गांवों का भू-संदर्भीकरण                                   करीब 99 प्रतिशत पूरा 7    डिजिटल फसल सर्वे                                        2.72 करोड़ से अधिक भू-खण्ड 8    जन आधार से जुड़ाव                                        करीब 83 लाख किसान 9    डिजिटल एकीकरण                                          आधार, भूमि रिकॉर्ड, पीएम-किसान व अन्य कृषि योजनाओं से जुड़ाव 10    विशेष अभियान    1 से 30 सितंबर 2026 तक छूटे किसानों को जोड़ने का अभियान कृषि विभाग के अनुसार, छूटे हुए पात्र किसानों को किसान आईडी से जोड़ने के लिए 1 से 30 सितंबर तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में कृषि पर्यवेक्षकों की भागीदारी, पीएम-किसान लाभार्थियों को सूचना और अन्य स्तरों पर सत्यापन की व्यवस्था की गई है।

गल्ले में 500 के नोट, लेकिन 5-10-20 के सिक्कों और नोटों के लाले; बाजार में बढ़ी परेशानी

निम्बाहेड़ा  पितृपक्ष के बाद अब नवरात्र और दीपावली का त्योहारी सीजन सिर पर है। आम तौर पर इन दिनों बाजारों में चहल-पहल बढ़ जाती है, लेकिन निम्बाहेड़ा के छोटे बाजारों से लेकर मुख्य किराना और फल-सब्जी मंडियों तक इस समय एक अजीब सी माथापच्ची चल रही है। ग्राहक की जेब में 200 या 500 का नोट है, उसे 20 या 30 रुपए का सामान चाहिए, लेकिन दुकान पर पहुंचते ही सबसे पहला और बड़ा सवाल यही गूंज रहा है भाई साहब, 10 का छुट्टे देना; छुट्टे हैं क्या? त्योहारी सीजन के मुहाने पर खड़े इस दौर में छोटे नोटों और सिक्कों की किल्लत ने रोजमर्रा के लेन-देन को बड़ा सिरदर्द बना दिया है। डिजिटल दौर की अपनी मजबूरियां और यूपीआई का भ्रम आज के समय में डिजिटल भुगतान (यूपीआई) को नकदी का सबसे बड़ा विकल्प माना जाता है, लेकिन निम्बाहेड़ा के स्थानीय बाजारों की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है। हर ग्राहक डिजिटल नहीं: बुजुर्ग, छोटे बच्चे, ग्रामीण इलाकों से आने वाले खरीदार और ठेले-पटरियों से रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने वाले लोग आज भी पूरी तरह कैश पर निर्भर हैं।     यूपीआई चार्ज का डर: हाल ही में यूपीआई ट्रांजैक्शन पर संभावित शुल्क लगने की चर्चाओं और भ्रम ने आम जनता के मन में एक मनोवैज्ञानिक डर पैदा कर दिया है। इसके चलते लोग अपने पास मौजूद छोटे नोटों को खर्च करने के बजाय होल्ड (संचित) करने लगे हैं।     तकनीकी अड़चनें: त्योहारों के सीजन में लोड बढ़ने पर सर्वर डाउन होना या नेटवर्क फेल होना आम बात है। ऐसे में इंटरनेट या स्कैनर धोखा दे जाते हैं और मौके पर केवल छुल्ले पैसे ही काम आते हैं। आपसी जुगाड़ से चल रहा काम, आगे और बिगड़ेगी स्थिति जब आधिकारिक बैंकिंग व्यवस्था से कोई ठोस समाधान नहीं मिल रहा, तो निम्बाहेड़ा के छोटे व्यापारियों ने खुद ही इसका तोड़ निकाल लिया है। व्यापारी आपस में ही एक-दूसरे को बड़े नोट देकर चिल्लर और छोटे नोटों का जुगाड़ कर रहे हैं। लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है। अब सबसे बड़ा सवाल आने वाले नवरात्र और दीपावली के पीक सीजन को लेकर है। जब त्योहारी खरीदारी का दौर परवान चढ़ेगा, तब छोटे मूल्यवर्ग की जरूरत सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ जाएगी। यदि समय रहते बैंकों और स्थानीय स्तर पर छोटे नोटों की यह किल्लत दूर नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में छुट्टा है क्या? सिर्फ एक दुकानदार का सवाल नहीं, बल्कि पूरे बाजार की सबसे बड़ी रुकावट बन जाएगा। गल्ले में 500 के नोट, पर चिल्लर के लाले दुकानदारों की परेशानी यह है कि दिनभर की बिक्री में बड़े नोट तो धड़ल्ले से आ रहे हैं और गल्ले में जमा होते जा रहे हैं, लेकिन ग्राहकों को खुले पैसे या खुल्ले लौटाने के लिए 5, 10, 20 और 50 रुपए के नोट या सिक्के ढूंढे नहीं मिल रहे। बाजार की तस्वीर यह है कि एक दुकानदार के पास यदि गलती से सिक्के आ गए, तो आस-पास के दूसरे दुकानदार उससे चिल्लर मांगने पहुंच जाते हैं। यानी बाजार में कुल नकदी तो घूम रही है, लेकिन वह उस छोटे मूल्यवर्ग में नहीं है जिसकी रोजमर्रा के खुदरा कारोबार को सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

ज्ञान भारतम मिशन: राजस्थान की 23 लाख पांडुलिपियां होंगी डिजिटल, जिला स्तर पर बनेंगे संरक्षण केंद्र

जयपुर संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित "ज्ञान भारतम मिशन" के तहत राजस्थान राज्य में "पाण्डुलिपि डिजिटलीकरण कार्यशाला" का आयोजन सोमवार को जयपुर के झालाना संस्थानिक क्षेत्र स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन तथा कला एवं संस्कृति मंत्री  दिया कुमारी के मुख्य आतिथ्य में किया गया। इस अवसर पर राज्य के मुख्य सचिव वी.निवास उपस्थित रहे। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि पांडुलिपियां केवल पुराने कागज या ग्रन्थ नहीं हैं, ये भारत के हजारों वर्षों के साहित्य, परम्परा, इतिहास और दर्शन की धरोहर हैं। इनमें हमारे पूर्वजों के अनुभव, शोध और ज्ञान का भण्डार सुरक्षित है। एक पाण्डुलिपि केवल अतीत की कहानी नहीं कहती, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए नए मार्ग खोलती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में "ज्ञान भारतम मिशन" इसी संकल्प को नई तकनीक से जोड़ रहा है। मोदी जी का विजन है कि हमारा प्राचीन ज्ञान अलमारियों में बंद न रहे, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से दुनिया तक पहुंचे और विकसित भारत की शक्ति बने। प्रधानमंत्री जी की सोच को केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत जी के मार्गदर्शन में साकार किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के मार्गदर्शन में राजस्थान में पाण्डुलिपियों को संरक्षित करने के लिए निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान के तहत राजकीय व निजी संग्रह, पुस्तकालयों, मंदिर, मठों आदि से लगभग 23 लाख पांडुलिपियों का सर्वे किया गया है, जिसमें से लगभग एक लाख चौबीस हजार को डिजिटाइज्ड किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि राजस्थान की प्रत्येक पाण्डुलिपि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाए ताकि युवा शोधार्थी, विद्यार्थी और आम जन भी हमारे शास्त्रों, आयुर्वेद, ज्योतिष और साहित्य के ज्ञान से जुड़ सकें। इसके लिए जिला स्तर पर भी संरक्षण केन्द्र विकसित किए जाएंगे और निजी संग्रहकर्ताओं को भी इस मिशन से जोड़ा जाएगा। प्राचीन ग्रंथ और दस्तावेज देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर -मुख्य सचिव  मुख्य सचिव वी.निवास ने कहा कि प्राचीन ग्रंथ और दस्तावेज देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर हैं और ज्ञान भारतम मिशन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। राजस्थान का इतिहास और सभ्यता बहुत समृद्ध है। मिशन को और सफल बनाने के लिए सभी विश्वविद्यालयों के संस्कृत विभागों को साथ लेकर तालपत्रों के संरक्षण और संस्कृत शब्दावली तैयार करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए और युवाओं को इस क्षेत्र में शोध के लिए प्रेरित किया जाए। पाण्डुलिपियों में छिपा ज्ञान यदि तकनीक के माध्यम से सहज रूप से उपलब्ध होगा तो यह न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश की ज्ञान परम्परा को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाएगा। उक्त कार्यशाला में संस्कृति मंत्रालय नई दिल्ली से संयुक्त सचिव समीर नंदा, निदेशक इंद्रजीत सिंह , आयुक्त पर्यटन विभागमती रुक्मणी रियार, शासनउप सचिव, कला एवं संस्कृति विभाग, अनुपम कायल, निदेशक राजस्थान संस्कृत अकादमी, डॉ. लतामाली, सयुंक्त निदेशक, पुरातत्व संग्रहालय विभाग,मती कृष्णकांता शर्मा, प्रबंधक रविन्द्र मंच, कविता गोदारा, सहायक नोडल अधिकारी ज्ञानभारतम, रजनीश हर्ष एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। ज्ञानभारतम मिशन के राजस्थान समन्वयक डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने राजस्थान का प्रजेंटेशन दिया और सभी राज्य से आये हुए अधिकारीगणों को अवगत कराया कि राजस्थान किस प्रकार इस मिशन में रोल मॉडल बनकर उभरा है।

शिकायतों के समाधान में नहीं चलेगी खानापूर्ति, राजस्थान संपर्क पर ACS ने दिए सख्त निर्देश

जयपुर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता व प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दिनेश कुमार ने सोमवार को शासन सचिवालय स्थित 181 हैल्पलाइन कॉल सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कॉल सेंटर की कार्यप्रणाली, सम्पर्क एआई, विभागवार प्राप्त परिवादों, उनके निस्तारण, परिवादियों की संतुष्टि एवं शिकायत समाधान की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने 15 से अधिक परिवादियों से स्वयं विडियो कॉल पर  संवाद कर उनकी समस्याएं जानीं तथा संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक कार्यवाही करते हुए परिवादों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अधिकारियों के साथ बैठक में विभागवार शिकायतों की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि राजस्थान सम्पर्क पर प्राप्त परिवादों के निस्तारण में केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि परिवादी की संतुष्टि को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) पंकज कुमार ओझा, को निर्देश दिए कि प्रत्येक सोमवार को संबंधित विभागों से 15 असंतुष्ट प्रकरण चयनित कर परिवादियों से स्वयं संवाद किया जाए। परिवादी के असंतुष्ट रहने के कारण की जानकारी लेकर संबंधित विभाग से समन्वय करते हुए समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने इन प्रकरणों की मासिक प्रगति रिपोर्ट तैयार कर नियमित रूप से समीक्षा करने के भी निर्देश दिए। परिवादियों से संवाद कर जानी समस्याएं निरीक्षण के दौरान एसीएस दिनेश कुमार ने विभिन्न जिलों के परिवादियों से बातचीत की। सवाई माधोपुर के रिंकू कुमार ने वर्ष 2025-26 की उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति के आवेदन का बिल जनरेट नहीं होने की समस्या बताई। चित्तौड़गढ़ के सुरेंद्र ने छात्रवृत्ति आवेदन में बार-बार आ रहे आपत्ति संबंधी प्रकरण एवं जन आधार में जाति प्रमाण-पत्र व मूल निवास अपडेट होने के बावजूद पुनः आपत्ति आने की समस्या बताई। जोधपुर के कान सिंह ने पालनहार योजना की राशि पिछले दो वर्षों से खाते में लंबित होने की शिकायत रखी। बारां के महेश ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के आवेदन पर बार-बार आपत्ति लगाए जाने के कारण स्वीकार नहीं किए जाने की समस्या बताई। वहीं सीकर के प्रभाकर ने अनुप्रति कोचिंग योजना के लिए आवेदन करते समय जन आधार से संबंधित तकनीकी समस्या के कारण आवेदन सबमिट नहीं होने की जानकारी दी। भरतपुर के लक्समी कुमार ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में बच्चे की माता का जाति प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं होने से उत्पन्न समस्या से अवगत कराया। इसी प्रकारगंगानगर के कमल सोनी ने रीना रानी के नाम से पेंशन बंद करवाने के लिए दिए गए आवेदन पर अभी तक कार्यवाही नहीं होने की शिकायत की। जयपुर के विकास मेवाड़ा ने विद्या संबल योजना के तहत देवनारायण राजकीय आवासीय विद्यालय, देवडूंगरी, पाली में अंग्रेजी व्याख्याता पद पर नियुक्ति संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश की पालना नहीं होने का प्रकरण रखा। बूंदी के एजाज अहमद ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के ऑनलाइन आवेदन में आ रही समस्या तथा पोर्टल के सुचारू संचालन की मांग रखी। बीकानेर की मंजू देवी ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के आवेदन में ई-मित्र स्तर पर दर्ज गलत विवरण को सही करवाने एवं आवेदन पर लगी आपत्तियों का निस्तारण कर योजना का लाभ दिलाने का अनुरोध किया। वहीं जालोर के रवेंद्र ने छात्रावास वरीयता फॉर्म में संशोधन का विकल्प नहीं खुलने से संबंधित तकनीकी समस्या से अवगत कराया। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने परिवादियों की समस्याएं सुनने के बाद संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण की नियमानुसार जांच कर समयबद्ध एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 181 सम्पर्क कॉल सेंटर शासन और आमजन के बीच महत्वपूर्ण सेतु है। इसके माध्यम से प्राप्त शिकायतों का संवेदनशीलता के साथ समाधान करते हुए परिवादी को वास्तविक राहत मिलना सुनिश्चित किया जाए।  

राजस्थान और डेनमार्क के बीच नए एक्शन प्लान पर काम, ग्रीन एनर्जी से जल प्रबंधन तक सहयोग

जयपुर  मुख्य सचिव वी.निवास की अध्यक्षता में सोमवार को शासन सचिवालय में राजस्थान तथा डेनमार्क के द्विपक्षीय सहयोग को लेकर बैठक आयोजित हुई, जिसमें भारत में डेनमार्क के राजदूत रासमस अबील्डगार्ड क्रिस्टेंसन ने भाग लिया। बैठक में दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों तथा 'इंडिया-डेनमार्क ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' के अंतर्गत विभिन्न सहयोगात्मक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। नई कार्ययोजना पर होगा आगे काम मुख्य सचिव ने कहा कि वर्ष 2020 में स्थापित 'ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' का प्रथम पाँच-वर्षीय कार्यकाल सफलतापूर्वक पूर्ण होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि से उत्साहित होकर अब अगले पाँच वर्षों के लिए एक नए एवं उन्नत एक्शन प्लान पर कार्य किया जा रहा है, जिससे राजस्थान व डेनमार्क के बीच सहयोग के नए आयाम खुलेंगे। ऊर्जा व जल प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग पर जोर बैठक के दौरान बताया गया कि ऊर्जा संरक्षण व नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में पंपिंग स्टेशनों पर ऊर्जा बचत, तकनीकी नवाचार तथा ग्रिड फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया गया। जल प्रबंधन व नदी पुनर्जीवन के संदर्भ में जल संरक्षण, वेस्ट वाटर प्रबंधन, जल आपूर्ति की मॉनिटरिंग तथा नदियों के पुनर्जीवन के क्षेत्र में डेनमार्क के अनुभवों का लाभ उठाए जाने पर सहमति बनी। खाद्य प्रसंस्करण व आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर चर्चा इसके साथ ही कृषि व खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में साझेदारी को और मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया गया। वाटर सप्लाई मॉनिटरिंग एवं शहरी विकास के विभिन्न आयामों में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिए जाने पर भी सहमति बनी। बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने डेनमार्क प्रतिनिधिमंडल के साथ अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर विचार साझा किए।

चीनी के भाव में ₹22 की बड़ी गिरावट, त्योहारों से पहले आम लोगों को राहत

सवाईमाधोपुर  त्योहारों का दौर शुरू होने से पहले ही बाजार ने आमजन को राहत की खबर दी है। कभी 72 रुपए प्रति किलो तक पहुंची चीनी अब करीब 50 रुपए किलो में बिक रही है। करीब एक पखवाड़े में ही चीनी के भाव में लगभग 22 रुपए प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की है। ऐसे में त्योहारों पर घरों में बनने वाली मिठाइयों से लेकर बाजार में बिकने वाली मिठाई और अन्य खाद्य सामग्री की लागत पर भी इसका असर पड़ने की उम्मीद है। पिछले कुछ समय में चीनी के दाम लगातार बढ़ते हुए 48 रुपए से 50, 55, 60, 65, 68, 70 और 72 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए थे। बढ़ते भाव के कारण घरेलू रसोई का बजट प्रभावित होने के साथ ही मिठाई कारोबारियों की लागत भी बढ़ गई थी। अब अचानक भाव में आई कमी से बाजार में खरीदारों को राहत मिली है। मिठाई कारोबारियों को भी राहत की उम्मीद त्योहारों के दौरान चीनी की खपत बढ़ जाती है। मिठाई, पेठा, बर्फी, रसगुल्ला सहित कई उत्पादों में चीनी प्रमुख कच्चा माल है। ऐसे में कीमतों में आई कमी से मिठाई कारोबारियों की उत्पादन लागत घट सकती है। वहीं इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने पर त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य चीनी आधारित उत्पादों के दामों में भी राहत की संभावना रहेगी। आपूर्ति बढ़ी तो भाव पर पड़ा असर कारोबारियों के अनुसार चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से स्टॉक सीमा और बिक्री व्यवस्था को लेकर किए गए नियंत्रण का असर बाजार में दिखाई देने लगा है। इसके साथ ही सरकार की ओर से चीनी के आयात को लेकर दिए गए संकेतों से भी बाजार में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद बनी, जिसका दबाव भाव पर पड़ा। पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने से तेजी पर अंकुश लगा और कीमतें नीचे आने लगीं। मासिक बिक्री कोटा भी बढ़ाया चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए मासिक बिक्री कोटा 22 लाख टन से बढ़ाकर 26.50 लाख टन किया गया है। इसके तहत महीने की 15 तारीख तक 13 लाख टन तथा 16 से 30 तारीख तक 13.50 लाख टन चीनी की बिक्री का प्रावधान किया गया है। स्टॉक का समय पर निस्तारण और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने की व्यवस्था का सीधा असर अब खुदरा बाजार के भाव पर दिखाई दे रहा है। 72 से 50 रुपए किलो तक पहुंचा भाव समय                            चीनी का भाव करीब पखवाड़े पहले    72 रुपए प्रति किलो वर्तमान भाव करीब            50 रुपए प्रति किलो गिरावट करीब                     22 रुपए प्रति किलो इनका कहना है चीनी के भाव में पिछले दिनों तेजी से बढ़ोतरी हुई थी और भाव 72 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए थे। अब सरकार की ओर से स्टॉक सीमा तय करने और बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के बाद भाव में लगातार गिरावट आई है। वर्तमान में चीनी करीब 50 रुपए किलो बिक रही है। त्योहारों के सीजन में चीनी की मांग बढ़ने के बावजूद भाव कम होने से आम उपभोक्ताओं के साथ मिठाई कारोबारियों को भी राहत मिलेगी। — मोहन मंगल, संरक्षक, खाद्य व्यापार मंडल, बजरिया  

पर्यटन से आगे बढ़ेगा जैसलमेर, रेल कनेक्टिविटी और 5.5 GW ऊर्जा निकासी से बदलेगी तस्वीर

जैसलमेर थार की अर्थव्यवस्था अब केवल किले, रेगिस्तान और पर्यटन तक सीमित नहीं है। रेल नेटवर्क का विस्तार, सीमा तक मजबूत होती सड़कें, बड़े स्तर पर अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं और बिजली निकासी का ढांचा जैसलमेर की आर्थिक भूमिका को नया आकार दे रहा है। जैसलमेर पर्यटन केंद्र के साथ परिवहन, ऊर्जा और सीमा कनेक्टिविटी के बड़े क्षेत्रीय नेटवर्क का हिस्सा बन रहा है। रेल : पर्यटन केंद्र से परिवहन नेटवर्क तक जैसलमेर रेलवे स्टेशन का करीब 140 करोड़ रुपए की लागत से पुनर्विकास पूरा हो चुका है। स्टेशन पर 36 मीटर चौड़ा एयर कॉनकोर्स, छह मीटर चौड़ा ऊपरी पैदल पुल, पार्किंग, प्लेटफॉर्म शेल्टर, लिफ्ट और एस्केलेटर जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। करीब 67 करोड़ रुपए के कोच केयर कॉम्प्लेक्स का भी शुभारंभ हो चुका है। रेल मंत्रालय के अनुसार इससे ट्रेनों की रखरखाव क्षमता बढ़ेगी और अधिक ट्रेनों के संचालन में मदद मिलेगी। साबरमती-जोधपुर एक्सप्रेस का जैसलमेर तक विस्तार किया गया और 23 मई 2026 से साबरमती-जैसलमेर दैनिक सुपरफास्ट सेवा शुरू हुई। वहीं रामदेवरा-पोकरण के बीच 13.38 किलोमीटर नई रेल लाइन की स्वीकृत लागत 189.21 करोड़ रुपए है और परियोजना की लक्ष्य तिथि मार्च 2028 है। यह रामदेवरा-पोकरण क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली नई कड़ी है। ऊर्जा : थार की जमीन से बड़े बिजली बाजार तक जैसलमेर-पोकरण क्षेत्र में अक्षय ऊर्जा विस्तार आर्थिक बदलाव का दूसरा बड़ा आधार है। राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार फलोदी-पोकरण सोलर पार्क की कुल क्षमता 750 मेगावाट है, जिसमें 450 मेगावाट कमीशन हो चुकी है। फतेहगढ़ फेज-1बी की क्षमता 1,500 मेगावाट है, जिसमें 1,496 मेगावाट कमीशन हो चुकी है। इस तरह दोनों परियोजनाओं की कुल परियोजना क्षमता 2,250 मेगावाट और कमीशन क्षमता 1,946 मेगावाट है। बिजली उत्पादन के साथ उसे ग्रिड तक पहुंचाने का ढांचा भी महत्वपूर्ण है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के दस्तावेज में राजस्थान अक्षय ऊर्जा क्षेत्र फेज-4 के 5.5 गीगावाट जैसलमेर-बाड़मेर कॉम्प्लेक्स से बिजली निकासी से जुड़ी ट्रांसमिशन व्यवस्था दर्ज है। इसलिए 5.5 गीगावाट को ट्रांसमिशन क्षमता कहना सही नहीं होगा; यह इतनी अक्षय ऊर्जा की निकासी से जुड़ी व्यवस्था है। सीमा : रणनीतिक सड़क से आर्थिक कनेक्टिविटी तक म्याजलार-जैसलमेर और सुंदर-म्याजलार-अंबासिंह की ढाणी मार्ग के 134 किलोमीटर हिस्से के दो-लेन पेव्ड-शोल्डर उन्नयन की आधारशिला रखी गई है। वहीं तनोट-रामगढ़-जैसलमेर और मोकल-सरकारितला मार्ग के 191 किलोमीटर हिस्से का दो-लेन पेव्ड-शोल्डर उन्नयन पूरा हो चुका है। एनएचएआई के अनुसार इन परियोजनाओं से सीमा तक रक्षा पहुंच मजबूत होने के साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और परिवहन में भी सुधार होगा। असली सवाल : जैसलमेर की अर्थव्यवस्था में कितना पैसा रहेगा? बड़े प्रोजेक्ट आर्थिक बदलाव की शुरुआत हैं, अंतिम परिणाम नहीं। असली असर तब दिखेगा, जब निर्माण और संचालन से स्थानीय युवाओं को रोजगार, परिवहन कारोबार को काम, होटल-रेस्तरां को ग्राहक, मरम्मत-आपूर्ति कारोबार को बाजार और छोटे उद्यमों को नई मांग मिले। बेहतर रेल पहुंच पर्यटन कारोबार का दायरा बढ़ा सकती है। ऊर्जा परियोजनाएं तकनीकी सेवाओं, रखरखाव और आपूर्ति क्षेत्र में अवसर बना सकती हैं। सीमा सड़कें परिवहन और लॉजिस्टिक्स को गति दे सकती हैं। इन तीनों का साझा असर जैसलमेर की अर्थव्यवस्था को पर्यटन से आगे ले जाने की क्षमता रखता है। विकास का दूसरा गणित : पानी, जमीन और पर्यावरण विस्तार के साथ चुनौतियां भी बढ़ेंगी। ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि, बिजली निकासी के लिए मजबूत ग्रिड और संचालन के लिए कुशल मानव संसाधन जरूरी होंगे। पर्यटन और शहरी गतिविधियां बढ़ने पर पानी, कचरा प्रबंधन और विरासत संरक्षण का दबाव भी बढ़ सकता है।

नागौर-जोधपुर फोरलेन डेढ़ साल से अटका, बीकानेर हिस्से का टेंडर अब जारी

नागौर  बीकानेर से जोधपुर के बीच एनएच-62 के फोरलेन में तब्दील होने पर 100 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से वाहनों को दौड़ने वाली सड़क मिलने में अभी लम्बा इंतजार करना पड़ेगा। केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने जोधपुर से नागौर के हिस्से के लिए डेढ़ साल पहले स्वीकृति जारी की, लेकिन वर्क ऑर्डर अभी तक नहीं हुआ है। वहीं तीन महीने पहले मंत्रालय ने नागौर से बीकानेर तक के हिस्से की भी वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी, लेकिन कुछ विशेष होता दिख नहीं रहा। जबकि अधिकारी इस मार्ग से अतिक्रमण हटाने सहित अन्य कार्य शुरू होने की बात कह रहे हैं। कुल 212 किलोमीटर फोरलेन पर 2752 करोड़ 65 लाख रुपए खर्च होंगे। फोरलेन के इस हिस्से में 20 से अधिक ओवरब्रिज होने से इस पर आने वाले कस्बों और गांवों को पार करने की राह सुगम होगी और वाहन नागौर शहर में आने की बजाय बाईपास से ही निकल सकेंगे। पत्रिका ने उठाया मुद्दा नागौर-जोधपुर फोरलेन के साथ नागौर शहर के चारों तरफ रिंग रोड की जरूरत को लेकर पत्रिका ने लगातार मुद्दा उठाया। समाचारों के जरिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर दिलाया गया कि शहर से होकर गुजरने वाले दो राष्ट्रीय राजमार्गों पर दिन-रात भारी वाहनों का दबाव रहता है। इसके चलते दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। इसके बाद मामला केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री तक पहुंचा और दोनों परियोजनाओं व नागौर में रिंग रोड को मंजूरी मिली। नागौर टू जोधपुर डेढ़ साल से काम अटका नागौर-जोधपुर रोड पर नेतड़ा तक 87 किमी और बीकानेर रोड से लाडनूं रोड को मिलाने वाले 16 किमी के बाईपास की स्वीकृति सड़क परिवहन मंत्रालय ने मार्च 2025 में जारी की। इस पर कुल 1393.34 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। डेढ़ साल से प्रोजेक्ट अटका है। बीकानेर टू नागौर टेंडर प्रक्रिया शुरू वर्तमान में दो लेन एनएच-62 का 109.24 किमी नागौर से बीकानेर तक फोरलेन बनेगा। केन्द्रीय मंत्रालय ने जून 2026 में 1359.31 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी की। यहां प्रतिदिन 14 हजार पीसीयू (पैसेंजर कार यूनिट) वाहनों का आवागमन है। विभाग ने 24 सितंबर को 1100.69 करोड़ रुपए का टेंडर निकाला है। कार्य शीघ्र शुरू होगा नागौर-जोधपुर फोरलेन निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और स्वीकृति पत्र (एलओए) की प्रक्रिया चल रही है। प्रयास है कि इस कार्य को यथाशीघ्र शुरू करवाया जाए। -अनिल धौलिया, एक्सईएन, एनएच, नागौर खंड

CM भजनलाल का आज भरतपुर दौरा, 8 जिलों को 1,109 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आज भरतपुर और खैरथल-तिजारा जिले के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे पूर्वी राजस्थान के 8 जिलों को कई बड़ी सौगात देंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 1,109 करोड़ रुपए की लागत वाले 345 विकास कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण करेंगे। इनमें भरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, अलवर, कोटपुतली-बहरोड़ और खैरथल-तिजारा जिले शामिल हैं। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासन की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सुबह 11.50 बजे जयपुर से हेलीकॉप्टर से बयाना पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री दोपहर 12 बजे उपखण्ड बयाना की ग्राम पंचायत बिडयारी पहुंचकर नायरा पेट्रोल पंप के पास विकास कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण करेंगे। साथ ही जनसभा को संबोधित करेंगे। इस मौके पर सीएम भजनलाल शर्मा 8 जिलों को 1,109 करोड़ की सौगात देंगे। वे 345 विकास कार्यों का शिलान्यास-लोकार्पण करेंगे। दोपहर 1 से 2 बजे तक वे कार्यकर्ताओं के साथ संवाद भी करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री दोपहर 2.45 बजे हेलीकॉप्टर से खैरथल-तिजारा के लिए रवाना होंगे। यहां इस्माइलपुर रोड स्थित होटल ग्रीनलैंड में भाजपा के 'कार्यकर्ता-संवाद' कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान वे पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करेंगे। पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री का सम्मान भी किया जाएगा। इस दौरान केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव भी मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहेंगे। इन विकास कार्यों का करेंगे शिलान्यास सवयार्ड ग्राम निठार, भुसावर में भूमि समतलीकरण एवं चारदीवारी तथा किसान पथ नगला गुठाकर से नयागाँव की सीमा तक कृषि उपज मण्डी समिति, वैर के निर्माण कार्य (लागत राशि 2.15 करोड़ रुपए) सार्वजनिक निर्माण विभाग के 125 कार्य (लागत राशि 185.20 करोड़ रुपए) ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के 7 कार्य (लागत राशि 1.56 करोड़ रुपए) स्कूल शिक्षा विभाग के 13 कार्य (लागत राशि 27.72 करोड़ रुपए) यूडब्ल्यूएसएस नदबई का विस्तार कार्य (लागत राशि 6.47 करोड़ रुपए) जल संसाधन विभाग के 6 कार्य (लागत राशि 44.35 करोड़ रुपए) चुली एवं अनियाला में 33 केवी सब स्टेशन के निर्माण कार्य (लागत राशि 2.55 करोड़ रुपए) ट्रोमा सेन्टर एवं MCH अस्पताल का निर्माण कार्य (लागत राशि 160.15 करोड़ रुपए) चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के 20 कार्य (लागत राशि 96.58 करोड़ रुपए) नगरीय विकास विभाग के 3 कार्य (लागत राशि 13.43 करोड़ रुपए) पशु चिकित्सा उपकेन्द्रों बिचपुरी गुजरान, दरगमां एवं बालौती के भवन निर्माण कार्य नवीनीकरण एवं सौंर्दीकरण सड़क, भिवाड़ी से खिजुरीवास टोल, भिवाड़ी (लागत राशि 40 करोड़ रुपए) कठूमर से डेहरा मोड (वाया मसारी, भरीथल होते हुए अटारी) सड़क का चौड़ाईकरण (18 किमी.) (कठूमर, नदबई) -अलवर, भरतपुर (लागत राशि 11 करोड़ रुपए) विधानसभा क्षेत्र थानागाजी में मिसिंग लिंक सड़कों के 16 कार्य (लागत राशि 9 करोड़ रुपए) नयागाँव बोलका से धौलान टहला, राजगढ़ SH-25 तक 11 किमी सड़क निर्माण कार्य (थानागाजी) – अलवर (लागत राशि 5 करोड़ रुपए) इन विकास कार्यों का होगा लोकार्पण     ऊर्जा विभाग के 14 कार्य (लागत राशि 273.48 करोड़ रुपए) जल संसाधन विभाग के 11 कार्य (लागत राशि 128.20 करोड़ रुपए) चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के 11 कार्य (लागत राशि 11.96 करोड़ रुपए) सार्वजनिक निर्माण विभाग के 6 कार्य (लागत राशि 24.84 करोड़ रुपए) उच्च प्राथमिक विद्यालय, नागला केवाल के निर्माण कार्य (लागत राशि 1.10 करोड़ रुपए) ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के 10 कार्य (लागत राशि 1.24 करोड़ रुपए) राजकीय कन्या महाविद्यालय, बाडी में निर्माण कार्य (लागत राशि 7.50 करोड़ रुपए) राजकीय आयुर्वेद औषधालय धौर एवं कासिमपुर के भवन निर्माण कार्य वन विभाग के 5 कार्य बायो परीक्षण प्रयोगशाला एवं संयुक्त निदेशक कार्यालय के भवन निर्माण कार्य (लागत राशि 2.42 करोड़ रुपए) पशु चिकित्सालय उदई खुद एवं अनियाला के नवीन भवन के निर्माण कार्य सीसी अटल पथ का निर्माण, ईशाक हाउस से सरकारी अस्पताल ग्राम इस्माइलपुर तक (लागत राशि 2 करोड़ रुपए) सीसी अटल पथ का निर्माण, SH-14 राय मोड़ से हरी टेलर से भावनी बड़सिवा, ग्राम ततरपुर (लागत राशि 2 करोड़ रुपए) बी.टी. सड़क निर्माण कार्य, अलावपुर बासवा से चम्मुनी ढाणी से धनियों सैयद रोड अटल प्रगति पथ का निर्माण, नाई हाउस से टाइल ग्राम गुवालड़ा (लागत राशि 2 करोड़ रुपए)