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भजनलाल सरकार का बड़ा एक्शन, तय समय में पूरे होंगे सभी प्रोजेक्ट

 जयपुर राजस्थान की भजनलाल सरकार विकास कार्यों में किसी भी तरह की देरी नहीं चाहती है. ऐसे में अब प्रदेश के अधिकारी-पदाधिकारी और कर्मचारी सभी नपेंगे. राजस्थान में विकास कार्यों की रफ्तार को लेकर सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने साफ कर दिया है कि तय समय पर काम नहीं हुआ तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय है. मुख्यमंत्री कार्यालय में आज ‘राज उन्नति' की चौथी बैठक में प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समीक्षा की गई और अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए. शुक्रवार (24 अप्रैल) को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री कार्यालय में ‘राज उन्नति' की चतुर्थ बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में राज्य सरकार की चयनित परियोजनाओं, विभिन्न कार्यक्रमों और परिवेदनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी प्रोजेक्ट्स को तय समय सीमा में पूरा करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर निर्देश दिए कि कार्यों में देरी या लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय करते हुए संबंधित अधिकारियों और कार्मिकों की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए. साथ ही, जहां भी ढिलाई सामने आए, वहां सख्त कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए. ‘राज उन्नति' कार्यक्रम के जरिए कार्यों की मॉनिटरिंग बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आमजन से जुड़ी योजनाओं और परिवेदनाओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंचे. ‘राज उन्नति' कार्यक्रम के जरिए सरकार अब विकास कार्यों की मॉनिटरिंग को और सख्त करने के संकेत दे रही है.

मंडप में रोती रहीं बच्चियां, प्रशासन ने पहुंचकर बचाया बचपन

  बूंदी राजस्थान के बूंदी जिले में मासूम बचपन को कुचलने की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है. यहां नीम का खेड़ा गांव में 10 से 13 साल की 7 बच्चियों को 'नए घर' ले जाने का लालच देकर मंडप में बैठा दिया गया. सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली इन बच्चियों को जब एहसास हुआ कि उनका बाल विवाह कराया जा रहा है तो वे फूट-फूट कर रोने लगीं. मंडप में गूंजी मासूमों की सिसकियां बच्चियों ने काउंसलिंग में अधिकारियों को बताया कि परिजनों ने उन्हें कुछ दिन के लिए दूसरे घर जाने की बात कही थी. लेकिन जब मंडप में पंडित ने फेरे शुरू कराए और उन्हें एक अजनबी युवक के साथ बैठाया गया तो उनके होश उड़ गए. खुशी से सजाए गए मंडप में मासूमों की सिसकियां गूंजने लगीं. समाज की भीड़ के आगे उनकी आवाज दब रही थी लेकिन तभी प्रशासन वहां देवदूत बनकर पहुंच गया. टीम का एक्शन और 50 शादियों पर रोक सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की टीम ने मौके पर पहुंचकर इन सात बाल विवाह को तुरंत रुकवा दिया. बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने बताया कि हाल ही में चलाए गए अभियान के तहत 14 बाल विवाह रोके गए हैं. नैनवा, हिंडोली, दबलाना जैसे गांवों में दबिश दी गई. पिछले 4 महीनों में ही बूंदी प्रशासन ने 50 मासूमों की शादियां रुकवाकर उनकी जिंदगी बर्बाद होने से बचाई है. परंपरा के नाम पर बचपन की बलि यह मामला भील समाज से जुड़ा है जहां बच्चों के रिश्ते जन्म के समय ही तय कर दिए जाते हैं और आखातीज जैसे मौकों पर एक साथ कई शादियां कर दी जाती हैं. प्रशासन की सख्त कार्रवाई के बाद अब समाज में डर का माहौल है. सभी मामलों में कोर्ट से स्टे प्राप्त कर लिया गया है जिससे आगे इन शादियों को नहीं कराया जा सकेगा. "हमें शादी नहीं करनी, हमें पढ़ना है" जब बाल कल्याण समिति के सामने माता-पिता अपनी बच्चियों को वापस ले जाने के लिए गिड़गिड़ाने लगे तो बच्चियों ने गजब की हिम्मत दिखाई. डरी-सहमी होने के बावजूद उन्होंने साफ कह दिया कि वे अपने परिजनों के साथ नहीं जाना चाहतीं. बच्चियों का सिर्फ एक ही सपना था कि उन्हें आगे पढ़ना है. प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बाल विवाह करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी और समाज को भी इस कुरीति के खिलाफ जागरूक होना होगा.

फर्जी लिंक पर क्लिक करते ही खाली हुआ बैंक अकाउंट, चार ट्रांजैक्शन में उड़े पैसे

अजमेर डॉक्टर का अपॉइंटमेंट लेने के चक्कर में अजमेर के एक शख्स ने 3.50 लाख रुपए से भी ज्यादा की रकम गंवा दी. एक अज्ञात नंबर से आए फोन कॉल के चक्कर में यह शख्स ठगी का शिकार हो गया. साइबर ठगी का यह मामला वाकई चौंकाने वाला है. जानकारी के अनुसार, पुष्कर रोड निवासी मुकेश के पास एक अज्ञात नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को मेडिकल सेवा से जुड़ा व्यक्ति बताते हुए किसी नामी डॉक्टर से जल्द अपॉइंटमेंट दिलाने का भरोसा दिलाया. आरोपी ने बातों में फंसाकर मुकेश से कुल 3.66 लाख रुपए ठग लिए. एक लिंक पर क्लिक और अकाउंट खाली ठग ने पीड़ित को एक लिंक भेजा और उसे ओपन करने को कहा. उसके बताए अनुसार मुकेश ने निजी और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी भर दी. जैसे ही मुकेश ने लिंक पर क्लिक कर मांगी गई डिटेल्स दर्ज की, कुछ ही समय में उसके बैंक खाते से चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 3 लाख 66 हजार रुपए निकाल लिए गए. उसके खाते से अमाउंट कटने का मैसेज आया, जिसके बाद उसे ठगी का अहसास हुआ. साइबर पुलिस ने शुरू की जांच पीड़ित ने तुरंत साइबर थाने में शिकायत दर्ज करवाई. मामले में साइबर थाना प्रभारी शमशेर खान के नेतृत्व में जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस उन खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ठगों ने फर्जी लिंक के जरिए मोबाइल और बैंकिंग डिटेल्स तक पहुंच बनाई. पुलिस ने आमजन से अपील की, "किसी भी अनजान कॉल, लिंक या ऑफर पर भरोसा न करें. अपनी बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा करने से बचें."

मकान मालिक से 20 लाख की फिरौती मांगने वाला गिरोह गिरफ्तार, पीजी के नाम पर चलता था खेल

 जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक ऐसा शातिर गिरोह सक्रिय है जो किराए पर बिल्डिंग लेकर उस पर अवैध कब्जा कर लेता है और फिर मकान मालिक से ही लाखों की फिरौती मांगता है. जयपुर की मानसरोवर थाना पुलिस ने इस 'कब्जा गैंग' का पर्दाफाश करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. मोटा किराया और फिर घर पर कब्जा पुलिस गिरफ्त में आया आरोपी कृष्ण कुमार कोटपूतली का रहने वाला है. जांच में सामने आया कि यह गिरोह पीजी चलाने के नाम पर ऐसी बिल्डिंग्स को निशाना बनाता है जिनका किराया ज्यादा हो. शुरुआत में ये लोग मकान मालिक को मोटा किराया देने का भरोसा दिलाते हैं और अनुबंध कर लेते हैं. कुछ महीनों तक तो किराया समय पर दिया जाता है लेकिन इसके बाद असली खेल शुरू होता है. ये लोग किराया देना बंद कर देते हैं और मकान खाली करने के बजाय कानूनी दांव-पेंच में मालिक को ही उलझा देते हैं. सबलेट का खेल और फर्जी विवाद इस गिरोह का मास्टरमाइंड रोहित गुर्जर बताया जा रहा है जो अपने साथियों के नाम पर एग्रीमेंट करवाता है. मकान लेने के बाद ये लोग किसी तीसरे पक्ष (सबलेट होल्डर) को मकान किराए पर दे देते हैं और खुद को संपत्ति का मालिक बताते हैं. जब मूल मकान मालिक अपना हक मांगने पहुँचता है तो ये तीसरे पक्ष के साथ बनावटी विवाद खड़ा कर देते हैं और कोर्ट से स्टे ले आते हैं. इसके बाद न तो किराया दिया जाता है और न ही बिल्डिंग खाली की जाती है. मकान वापस मांगने पर 20 लाख की डिमांड एक पीड़िता ने आपबीती बताते हुए कहा कि गोपालपुरा बाईपास स्थित उनका मकान मनोज स्वामी नामक व्यक्ति ने किराए पर लिया था. जब वह मकान संभालने पहुँची तो उन्हें भीतर तक नहीं जाने दिया गया. आरोपियों ने उनका मकान आगे किसी और को दे दिया और खुद को मालिक घोषित कर दिया. हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने मकान खाली करने के बदले 20 लाख रुपये की मोटी डिमांड कर डाली. जयपुर के कई इलाकों में दर्ज हैं मुकदमे पुलिस जांच में पता चला है कि इस गिरोह के खिलाफ शिप्रापथ और महेश नगर समेत विभिन्न थानों में करीब आधा दर्जन मुकदमे दर्ज हैं. पुलिस अब इस गिरोह के अन्य साथियों की तलाश कर रही है. जयपुर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि अगर किसी अन्य के साथ भी इस तरह की धोखाधड़ी हुई है तो वे तुरंत थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज करवाएं.

खंडपीठ का बड़ा फैसला: आरती डोगरा के खिलाफ जांच कार्यवाही स्थगित

जयपुर राजस्थान कैडर की चर्चित आईएएस अधिकारी आरती डोगरा को राजस्थान हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. हाई कोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश को स्थगित कर दिया है, जिसमें आरती डोगरा के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से जांच कराने के निर्देश दिए गए थे. खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर लगाई रोक मामले में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शोभा मेहता की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. कोर्ट ने न केवल एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाई बल्कि उस आदेश से जुड़ी सभी प्रोसीडिंग्स (कार्यवाहियों) को भी आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया है. जानें क्या था मामला दरअसल, इससे पहले एकल पीठ ने विभागीय जांच में हो रही अत्यधिक देरी और डीपीसी (DPC) से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए आईएएस आरती डोगरा के खिलाफ एसीबी जांच के आदेश दिए थे. इसी आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी गई थी. सीनियर एडवोकेट आर.एन. माथुर ने रखी दलीलें आरती डोगरा और डिस्कॉम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एन. माथुर ने कोर्ट में पैरवी की. उन्होंने बेंच को बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ पहले से ही तीन विभागीय जांचें लंबित हैं और उन पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा. वकील ने स्पष्ट किया कि यह मामला भ्रष्टाचार की श्रेणी में नहीं आता है. कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश पर रोक लगा दी है. कौन है IAS आरती डोगरा आरती डोगरा वैसे तो उत्तराखंड के देहरादून की रहने वाली है. लेकिन वह राजस्थान कैडर की 2006 बैच की IAS अधिकारी है. वह राजस्थान में विभिन्न पदों पर सेवाएं दे चुकी है जिसकी काफी चर्चा रही हैं. डोगरा ने कई जिलों में कलेक्टर पद की कमान संभाली और बदलाव के कई नए मॉडल पेश किये. आरती डोगरा बूंदी, अजमेर और बीकानेर की कलेक्टर की रहीं हैं. कई जिलों में अतिरिक्त जिला कलेक्टर रहीं हैं. बीकानेर जिला कलेक्टर रहते हुए उन्होंने खुले में शौच के खिलाफ शानदार अभियान चलाया था. 'बंको बिकाणों' के नाम से मशहूर इस अभियान ने देश भर में मिसाल कायम की थी. अशोक गहलोत जब तीसरी बार मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने आरती डोगरा को अपना सचिव बनाया था.

भू-माफिया का खेल उजागर: फर्जी दस्तावेजों से बेचे गए प्लॉट, लोग परेशान

जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर में इन दिनों एक बड़ा सवाल हर आम आदमी के सामने खड़ा है- क्या सपनों का घर भी कभी अचानक “अवैध” घोषित हो सकता है? शहर के बाहरी इलाकों में लगातार चल रही कार्रवाई और जयपुर विकास प्राधिकरण के बुलडोजर ने हजारों परिवारों की नींद उड़ा दी है. दरअसल, इसी महीने 17 अप्रैल को हाउसिंग बोर्ड की टीम ने बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक फैली करीब 42 बीघा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी. इस जमीन का अधिग्रहण साल 1989 में हाउसिंग बोर्ड ने कर लिया था, लेकिन बावजूद इसके यहां भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यहां कॉलोनी विकसित कर दी और प्लॉट बेच दिए. खरीददारों का कहना है कि जमीन के कागज देखकर भुगतान किया और जमीन का सौदा किया, हमारी क्या गलती. वहीं, प्रशासन की सलाह है कि खरीददारों को जमीन सौदे के वक्त लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. इस मामले में NDTV ने खरीददार, एक्सपर्ट्स और प्रशासन से बात की और हकीकत जानी. साथ ही जाना कि घर खरीदते वक्त क्या सावधानियां रखी जाएं. लोगों का दर्द- अब हम कहां जाएं? असल कहानी सिर्फ अवैध कॉलोनियों की नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम की है, जहां कई स्तरों पर चूक दिखाई देती है. जयपुर के आसपास तेजी से बस रही कॉलोनियां किसी एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि भू-माफिया, प्रॉपर्टी डीलर्स और प्रशासनिक ढील का नतीजा है. नियमों के मुताबिक, जमीन का उपयोग बदलने के लिए 90-A के तहत भू-रूपांतरण जरूरी होता है. ऐसे में भू-माफिया बिना किसी दस्तावेज के प्लॉटिंग कर देते हैं तो प्रशासन पर भी सवाल खड़े होते हैं.     प्रेम और पार्वती जैसे कई लोगों की परेशानी यह है, "वो अपनी आंखों के सामने आशियान उजड़ता देख रही है. उन्होंने कहा कि कई पीढ़ियों से हम रह रहे हैं और जेडीए नोटिस चस्पा कर घरों को तोड़ने की तैयारी कर रहा है. अब हम कहां जाएं?"   प्रशासन की सलाह भी जान लीजिए वहीं, इस पूरे मामले की जानकारी हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर अरविंद पोसवाल ने भी दी. उन्होंने कहा कि वहीं रजिस्ट्री को वैध मान लेता है, इसके लिए पहले जो लैंड कन्वर्जन हो रखा है या नहीं, ये संबंधित विभाग में जाकर चेक करे. जेडीए या हाउसिंग बोर्ड से उस भूमि की जानकारी लेने के बाद जमीन का सौदा करे. क्या कहते हैं एक्सपर्ट? जमीन से संबंधित मामलों के जानकार और अधिकक्ता कुलदीप शर्मा ने बताया कि कोई भी प्रॉपर्टी या घर लेने से पहले जेडीए या RERA की वेबसाइट पर चेक करें. वेबसाइट पर जानकारी चेक करने के साथ ही उसके वैध डॉक्यूमेंट संबंधित ऑथोरिटी के मास्टरप्लान से वैरिफाई करवाएं.

स्वास्थ्य विभाग का अल्टीमेटम: 5 दिन में अनुपस्थित डॉक्टरों पर कार्रवाई रिपोर्ट

जयपुर राजस्थान में सरकार ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा एक्शन लिया है. जिसमें राज्य सरकार ने उन 697 'लापता' डॉक्टरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है जो कागजों में तो तैनात हैं लेकिन सालों से अस्पताल की चौखट तक नहीं पहुंचे. स्वास्थ्य विभाग अब इन 'घोस्ट डॉक्टर्स' (Ghost Doctors) की सेवाएं स्थायी रूप से समाप्त करने की तैयारी में है. 5 दिन का अल्टीमेटम, CMHO को सख्त निर्देश स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) को कड़ा फरमान जारी किया है. अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे आगामी 5 दिनों के भीतर गायब डॉक्टरों के खिलाफ अलग-अलग अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार कर भेजें. यह पूरी प्रक्रिया CCA नियमों के तहत अमल में लाई जाएगी ताकि लापरवाह सिस्टम को सुधारा जा सके. कोई 15 साल से गायब तो कोई 22 साल से 'लापता' रिकॉर्ड खंगालने पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. कुछ डॉक्टर तो ऐसे हैं जिन्होंने पिछली दो दशकों से अस्पताल का चेहरा नहीं देखा. उदयपुर में एक बाल रोग विशेषज्ञ जुलाई 2004 से और एक स्त्री रोग विशेषज्ञ 2013 से ड्यूटी से नदारद हैं. वहीं अजमेर के जेएलएन अस्पताल में सर्जरी विशेषज्ञ 2007 से गायब हैं. अजमेर जिला इस सूची में 41 गायब डॉक्टरों के साथ सबसे ऊपर है जबकि राजधानी जयपुर में भी 29 डॉक्टर वर्षों से गायब हैं. लापरवाही मिली तो होगी कड़ी कार्रवाई इस मामले को लेकर चिकित्सा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि विभागीय जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि बड़ी संख्या में डॉक्टर बिना सूचना के अनुपस्थित हैं. इस पूरे मामले पर सीएमएचओ को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी अनुपस्थित चिकित्सकों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई जाए. इसमें पांच दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट पेश करने को कहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अनुपस्थिति के पीछे क्या कारण हैं. रिपोर्ट आने के बाद जो भी कारण सामने आएंगे उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. यदि लापरवाही या अनुशासनहीनता पाई जाती है तो संबंधित चिकित्सकों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है. मरीजों के हक पर डाका और नई भर्तियों में अड़ंगा इन डॉक्टरों की इस हरकत ने दोहरा नुकसान किया है. पहली बात तो यह कि स्त्री रोग, सर्जरी और रेडियोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में विशेषज्ञों की कमी हो गई है और दूसरी यह कि कागजों में पद भरे होने के कारण सरकार नई भर्तियां नहीं कर पा रही थी. कई डॉक्टर पीजी करने के बाद विदेश चले गए या निजी प्रैक्टिस में मशगूल हो गए लेकिन सरकारी इस्तीफा नहीं दिया. बांड राशि की वसूली और सेवा समाप्ति सरकार अब सिर्फ नौकरी से नहीं निकालेगी बल्कि रिकवरी भी करेगी. जिन डॉक्टरों ने सरकारी कोटे से पीजी की पढ़ाई की और बांड की शर्तें पूरी नहीं की उनसे करोड़ों रुपये की बांड राशि वसूली जाएगी. विभाग ने साफ किया है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और ड्यूटी से भागने वालों पर सख्त एक्शन लेकर नए डॉक्टरों के लिए रास्ते खोले जाएंगे.

RAS Result 2024: राजस्थान आरएएस फाइनल रिजल्ट जारी, बाड़मेर के दिनेश विश्नोई ने किया टॉप

जयपुर  राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने राज्य की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक परीक्षा, RAS-2024 का परिणाम घोषित कर दिया है। जो कैंडिटे्स 17 अप्रैल 2026 तक आयोजित हुए RPSC RAS Interview में उपस्थित हुए थे, वे आयोग की आधिकारिक वेबसाइट rpsc.rajasthan.gov.in पर जाकर अपना सरकारी रिजल्ट चेक कर सकते हैं। आरपीएससी आरएएस 2024 की परीक्षा में कुल 2,391 उम्मीदवारों को सफल घोषित किए गया है। आरपीएससी ने 18 अप्रैल 2026 को राज. राज्य एवं अधीनस्थ सेवाएं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (मुख्य) 2024 में सफल उम्मीदवारों की मेरिट लिस्ट जारी कर दी है। कंबाइंड मेरिट लिस्ट इंटरव्यू राउंड के बाद जारी की गई है। साथ ही TSP-Non TSP में सफल उम्मीदवारों के रोल नंबर की pdf लिस्ट ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी की है। टॉप 20 कैंडिडेट्स की लिस्ट रैंक नाम जिला रोल नंबर जेंडर 1 दिनेश विश्नोई बाड़मेर 1010371 पुरुष 2 वीरेंद्र चारण जैसलमेर 1006165 पुरुष 3 नवनीत शर्मा भीलवाड़ा 1007118 पुरुष 4 रविंद्र सिंह ब्यावर 1004694 पुरुष 5 विकास सियाग बीकानेर 1011057 पुरुष 6 ऐश्वर्या कंवर बीकानेर 1003725 महिला 7 दिनेश जोधपुर ग्रामीण 1009388 पुरुष 8 शालू अनूपगढ़ 1004455 महिला 9 भूपेंद्र सिंह बालोतरा 1005670 पुरुष 10 राम सिंह गुर्जर प्रतापगढ़ 1003279 पुरुष 11 यशवंत सांदू जोधपुर 1003525 पुरुष 12 कुलदीप शर्मा जयपुर 1014093 पुरुष 13 कैलाश कुमार बालोतरा 1003098 पुरुष 14 चानन सिंह इंदा जोधपुर 1010427 पुरुष 15 अभय सिंह आंजना प्रतापगढ़ 1007854 पुरुष 16 कैलाश रणवा डीडवाना-कुचामन 1012002 पुरुष 17 हरियश राजपुरोहित अजमेर 1003015 पुरुष 18 उमंग रावल डूंगरपुर 1007916 पुरुष 19 तनीषा यादव जयपुर 1013609 महिला 20 वृंदा शेखावत जयपुर 1018607 महिला         How to Check RPSC RAS Result 2024 PDF : यहां देखें तरीका     सबसे पहले आरपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट rpsc.rajasthan.gov.in पर जाएं।     होमपेज पर 'News and Events' में 'Combined Merit List (After Intv.) For Raj. State And Sub. Services Comb. Comp. Exam – 2024' लिंक पर क्लिक करें।     स्क्रीन पर सफल उम्मीदवारों के रोल नंबर और नाम की लिस्ट खुल जाएगी। इसमें CTRL+F टाइप करके अपना रोल नंबर या नाम चेक कर सकते हैं।     आगे के लिए पीडीएफ डाउनलोड करें व प्रिंटआउट लेकर अपने पास रख लें। RPSC RAS 2024 PDF में अभी अपना नाम और रोल नंबर चेक करने के लिए यहां क्लिक करें- आरएएस 2024 की परीक्षा में दिनेश विश्नोई ने 351.50 नंबर (कंबाइंड) लाकर मेरिट लिस्ट में पहला स्थान प्राप्त किया है। विरेंद्र चरण ने 351 नंबर लाकर राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त किया। यहां देखें टॉप 10 उम्मीदवारों के नाम और मेन्स व इंटरव्यू में प्राप्त अंक।

राजस्थान में ‘बहू-बेटी’ का फर्क खत्म, नौकरी पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

जयपुर राजस्थान में अब अनुकंपा नियुक्ति को लेकर 'बहू और बेटी' के बीच का कानूनी फर्क खत्म हो गया है. हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक आदेश में स्पष्ट कर दिया कि ससुर की मौत के बाद उनकी बहू भी उतनी ही हकदार है, जितनी एक बेटी होती है. जस्टिस रवि चिरानियां की एकल पीठ ने सुंदरी देवी की याचिका पर फैसला सुनाते हुए विभाग की उन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया, जो बहू को परिवार का हिस्सा मानने से कतरा रही थीं. कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग की सुस्ती और आपत्तियों पर सख्त नाराजगी जताते हुए साफ कहा कि बहू को नौकरी से रोकना कानून की मूल भावना के खिलाफ है. डिवीजन बेंच के फैसले का दिया हवाला सुनवाई के समय अदालत ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली को आइना दिखाया. कोर्ट ने याद दिलाया कि साल 2023 में ही डिवीजन बेंच यह तय कर चुकी है कि बहू को बेटी के समान ही माना जाए. जब कानूनी रूप से बहू अनुकंपा नियुक्ति के लिए पूरी तरह योग्य है, तो विभाग का तकनीकी अड़ंगे लगाना समझ से परे है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब न्यायपालिका पहले ही इस मुद्दे पर स्थिति साफ कर चुकी है, तो प्रशासन को इसमें नई आपत्ति करने का कोई अधिकार नहीं है. बेटे की बीमारी और मौत ने बढ़ाई मुश्किलें इस मामले के पीछे एक परिवार के संघर्ष की लंबी कहानी है. याचिकाकर्ता के वकील आरसी गौतम ने कोर्ट को बताया कि सुंदरी देवी के ससुर सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) में तैनात थे और 19 नवंबर 2016 को ड्यूटी के दौरान ही उनकी मौत हो गई. उस समय मृतक के इकलौते बेटे यानी सुंदरी के पति एक गंभीर हादसे का शिकार होकर बिस्तर पर थे. ऐसे में बहू ने ही परिवार को संभालने के लिए अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन किया, जिसे विभाग ने ठंडे बस्ते में डाल दिया. इस बीच 25 मई 2020 को सुंदरी के पति का भी निधन हो गया, जिससे पूरे परिवार के गुजर-बसर का संकट खड़ा हो गया. 30 दिन की नियुक्ति पत्र सौंपने के आदेश हाईकोर्ट ने सुंदरी देवी के हक में फैसला देते हुए पीडब्ल्यूडी विभाग को अल्टीमेटम दिया है. अदालत ने कहा कि विभाग बिना किसी बहानेबाजी के अगले 30 दिनों में याचिकाकर्ता को नियुक्ति पत्र सौंपे. कोर्ट ने कड़ी हिदायत दी है कि अब किसी भी तरह की तकनीकी अड़चन नहीं आनी चाहिए और प्रक्रिया में एक दिन की भी देरी बर्दाश्त नहीं होगी. 45 दिन में पेश करनी होगी रिपोर्ट अदालत ने इस मामले में सीधे अधिकारियों की जवाबदेही तय की है. कोर्ट ने आदेश दिया कि 45 दिनों के भीतर इस फैसले पर अमल की रिपोर्ट (Compliance Report) पेश की जाए. जस्टिस चिरानियां ने सख्त चेतावनी दी कि यदि आदेश लागू करने में लापरवाही हुई, तो जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी. इस फैसले ने उन हजारों महिलाओं के लिए उम्मीद जगाई है जो ससुराल में रहकर पूरे परिवार का सहारा बनी हुई हैं.

बकाया भुगतान नहीं करने पर सरकारी दफ्तर में कुर्की, मचा हड़कंप

 करौली राजस्थान के करौली कलेक्ट्रेट में  उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कोर्ट की एक टीम अचानक सामान जब्त करने पहुंच गई. मामला इतना बढ़ गया कि टीम ने अल्प बचत अधिकारी के कार्यालय में रखी उनकी कुर्सी तक कुर्क कर ली. सरकारी दफ्तर में हुई इस कार्रवाई को देख वहां मौजूद कर्मचारी और अधिकारी दंग रह गए. दरअसल, यह पूरा मामला एक पुराने वित्तीय विवाद का नतीजा है, जिसमें अदालत के आदेश की पालना न होने पर यह सख्त कदम उठाना पड़ा. आखिर क्या है पूरा मामला? यह पूरी कहानी हिण्डौन के रहने वाले राजेश कुमार गुप्ता से जुड़ी है. राजेश ने अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (ADJ Court) में एक शिकायत दर्ज कराई थी. उनका दावा था कि अल्प बचत योजना के तहत उनके 1.91 लाख रुपये विभाग के पास बकाया हैं. सिर्फ पैसा ही नहीं, राजेश ने 780 ग्राम चांदी और 33 ग्राम सोने के आभूषणों का भी दावा कोर्ट के सामने रखा था. अदालत में लंबी सुनवाई चली, लेकिन जब विभाग की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कुर्की का वारंट जारी कर दिया. कलेक्ट्रेट में कुर्सी की जब्ती हिण्डौन कोर्ट के आदेश पर करौली कोर्ट की टीम कलेक्ट्रेट स्थित अल्प बचत अधिकारी के दफ्तर पहुंची. टीम का नेतृत्व सेल अमीन तस्लीम हसन कर रहे थे. उस समय वहां जिला कोषाधिकारी अवधेश कुमार भी मौजूद थे. कोर्ट की टीम ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए दफ्तर का सामान समेटना शुरू किया. देखते ही देखते अधिकारी की कुर्सी को भी जब्त कर लिया गया. सरकारी दफ्तर से अधिकारी की कुर्सी उठाकर ले जाना विभाग की बड़ी किरकिरी माना जा रहा है. 'हक के लिए लड़ता रहूंगा' इस कार्रवाई के बाद परिवादी राजेश कुमार गुप्ता ने बताया कि वे लंबे समय से न्याय के लिए भटक रहे थे. उन्होंने कहा कि कोर्ट का यह फैसला उनके हक में आया है और फिलहाल अधिकारी की कुर्सी को कुर्क किया गया है. राजेश के मुताबिक, यह तो बस शुरुआत है, यदि उनका बकाया पैसा और सोना-चांदी नहीं मिला, तो आगे की कार्रवाई भी न्यायालय के निर्देशानुसार ही की जाएगी.