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338 गांवों को मिलेगा सिंचाई जल, किसानों को बड़ा लाभ

 जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व एवं जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा ‘अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना‘ को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए युद्धस्तर पर कार्य करवाए जा रहे हैं। वागड़ अंचल के किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही इस परियोजना से जनजाति बहुल क्षेत्र में कृषि व्यवस्था एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। लगभग 2 हजार 500 करोड़ रुपए लागत की परियोजना से बांसवाड़ा जिले की 3 विधानसभा क्षेत्रों (बांसवाड़ा, बागीदौरा एवं कुशलगढ़) की 6 तहसीलों बांसवाड़ा, बागीदौरा, कुशलगढ़, सज्जनगढ़, आनंदपुरी एवं गांगड़तलाई के 338 गांवों की लगभग 42 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को लिफ्ट सिंचाई प्रणाली से जल उपलब्ध होगा। परियोजना से लगभग 3.5 लाख आबादी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होगी। 102 किमी मुख्य नहर लम्बाई, 22.50 किमी सुरंगें परियोजना में आधुनिक इंजीनियरिंग टेक्नोलाॅजी से नहर नेटवर्क एवं विभिन्न संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना की कुल मुख्य नहर लंबाई 102 किलोमीटर है। इसमें 22.50 किलोमीटर लंबाई में सुरंगे/कट एंड कवर संरचनाएं, एक्वाडक्ट तथा नदी को पार करते हुए साइफन निर्मित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही लगभग 230 अन्य नहरी महत्वपूर्ण संरचनाए यथा सुपरपासेज, ड्रेनेज साइफन, रोड ब्रिज, एस्केप कम क्रॉस रेगुलेटर, हेड रेगुलेटर इत्यादि भी परियोजना में शामिल हैं। प्रेशर प्रणाली आधारित कमांड क्षेत्र होगा विकसित परियोजना के तहत अत्याधुनिक प्रेशर प्रणाली आधारित कमांड क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। इससे खेत तक वैज्ञानिक एवं नियंत्रित सिंचाई स्काड़ा प्रणाली से सुनिश्चित हो सकेगी। सिंचित क्षेत्र में प्रत्येक 200 हेक्टेयर के ‘चक स्तर‘ पर लगभग 200 डिग्गियों का निर्माण प्रस्तावित है। मुख्य नहर प्रणाली से इन डिग्गियों तक पानी एमएस व डीआई पाइपलाइन पहुंचाया जाएगा। इसके बाद डिग्गियों से लगभग 5 हजार कि.मी. लंबाई का भूमिगत एचडीपीई पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे प्रेसराइज्ड इरिगेशन प्रणाली से खेतों तक पानी पहुंचेगा। इस आधुनिक सिंचाई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक लगभग 1.25 से 1.50 हेक्टेयर क्षेत्र पर हाइड्रेंट विकसित किए जाएंगे। इन हाइड्रेंट पॉइंट्स तक भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क बिछेगा, जहां से किसान सीधे सिंचाई के लिए जल प्राप्त कर सकेंगे। इस प्रणाली से खेत स्तर तक समान जल वितरण, न्यूनतम जल हानि तथा अधिक दक्ष सिंचाई सुनिश्चित होगी। आधुनिक माइक्रो एवं प्रेसराइज्ड इरिगेशन प्रणाली के जरिए कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव हो सकेगी। किसानों को निरंतर बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। स्काडा प्रणाली से ऑटोमाइज होगी माॅनिटरिंग परियोजना में अत्याधुनिक स्काड़ा (पर्यवेक्षक नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण) प्रणाली भी विकसित की जा रही है। इससे सम्पूर्ण प्रेशर प्रणाली आधारित तंत्र का संचालन एवं मॉनिटरिंग पूर्णतः ऑटोमाइज्ड होगी। इस प्रणाली से जल वितरण को समान रूप से सुनिश्चित करने, दबाव एवं प्रवाह को स्वचालित रूप से नियंत्रित करने तथा रियल टाइम डेटा मॉनिटरिंग एवं संचालन नियंत्रण की सुविधा उपलब्ध होगी। इस प्रणाली से पम्पिंग स्टेशन, रिलीफ वाल्व, हाइड्रेंट एवं विभिन्न शाखाओं में जल प्रवाह की सतत निगरानी संभव होगी। वर्तमान में नहर की 42 किलोमीटर में काम किया जा रहा है। इनटेक स्ट्रक्चर एवं स्लूइस बैरल का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। टनल कार्य, एक्वाडक्ट, साइफन, कट एंड कवर के साथ नहर से डिग्गी तक भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क निर्माण कार्य भी विभिन्न स्थानों पर निरंतर जारी है। नियमित माॅनिटरिंग से मिली गति परियोजना की नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जा रही है। समयबद्ध और पारदर्शिता से कार्यों को पूर्ण करने के लिए निर्माण एजेंसियों को विभागीय निर्देश दिए गए हैं। इस परियोजना के लिए 78 गांवों की लगभग 270 हेक्टेयर निजी भूमि का नियमानुसार अधिग्रहण किया जा रहा है। अब तक 67 गांवों की 211 हेक्टेयर भूमि के लिए लगभग 47 करोड़ रुपए राशि के अवार्ड पारित हो चुके हैं। लगभग 15 करोड़ रुपए मुआवजा राशि वितरित की गई है। शेष अधिग्रहण एवं वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रियाएं भी तेजी से हो रही हैं। सिंचाई के लिए वर्षभर मिलेगा जल जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि आगामी वर्षों में यह परियोजना बांसवाड़ा जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली मुख्य सिंचाई परियोजनाओं में शामिल होगी। इसके पूर्ण होने के बाद क्षेत्र के किसानों को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी। मक्का, गेहूं, दलहन, तिलहन एवं बागवानी फसलों का रकबा बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि इससे भू-जल स्तर सुधार, जल संरक्षण एवं ग्रामीण क्षेत्र के समग्र विकास को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही, यह परियोजना वागड़ क्षेत्र के जनजाति बहुल इलाकों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी।

राजस्थान के वरिष्ठ नागरिकों की विशेष सोमनाथ यात्रा सफल, ज्योतिर्लिंग के दिव्य दर्शन से भाव-विभोर श्रद्धालु

जयपुर सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत राजस्थान सरकार की वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के तहत राजस्थान से गए 1008 वरिष्ठ नागरिक श्रद्धालुओं ने शनिवार को श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य-भव्य दर्शन किए। सोमनाथ मंदिर दर्शन के दौरान श्रद्धालु संध्या आरती में सम्मिलित हुए तथा लाइट एंड साउंड शो का आनंद लिया। लाइट एंड साउंड शो में सोमनाथ महादेव मंदिर की पौराणिक और ऐतिहासिक गाथा का वर्णन किया गया। शो में बताया गया कि भारत भूमि पर स्थित बारह ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ प्रथम ज्योतिर्लिंग है। इस मंदिर पर आतताइयों ने बार-बार आक्रमण किया, लूटा और खंडित किया किन्तु धर्मरक्षकों द्वारा इस मंदिर का बार-बार पुन: निर्माण करवाया गया। यह भारतीय संस्कृति है जो अटल, अमिट और अद्वितीय है। सोमनाथ मंदिर देश की इसी आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। कई बार मंदिर को तोड़ने और लूटने के बाद भी शक्ति, स्‍वाभिमान के साथ यह मंदिर पुनः स्थापित हुआ। देश के स्वतंत्र होने पर तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों से इस मंदिर का पुनः निर्माण करवाया गया। आतताइयों की तलवार ओमकार को हरा नहीं सकी। आस्था, विश्वास जीत गया। अरब सागर की छाती पर भारत की धर्म ध्वजा गौरव, मान-सम्मान और स्वाभिमान से आज भी लहरा रही है। मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की पहल की है, जो हमारी सांस्कृतिक चेतना का महापर्व है। इसी सांस्कृतिक चेतना को गुंजायमान करते हुए राजस्थान के एक हजार आठ वरिष्ठ नागरिक श्रद्धालुओं के गुजरात के वेरावल रेलवे स्टेशन पर 6 जून को आगमन पर गुजरात सरकार द्वारा भव्य स्वागत किया गया। वरिष्ठ नागरिकों को पुष्प-गुच्छ भेंट किए गए, स्वागत स्वरूप गुजराती लोक संस्कृति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वरिष्ठ नागरिकों में उत्साह और उमंग का संचार किया। वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रियों को वेरावल से एसी बसों से गिर सोमनाथ स्थित थ्री स्टार होटल में ठहराया गया, जहाँ गुणवत्तापूर्ण रिफ्रेशमेंट, लंच और डिनर की समुचित व्यवस्था की गई। राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग द्वारा गुजरात सरकार के सहयोग से संचालित इस यात्रा में शनिवार और रविवार को गिर सोमनाथ में गोलकधाम, राम मंदिर, बाणगंगा, भालका तीर्थ के दर्शन करवाए गए। इसी के साथ सोमनाथ स्वाभिमान पर्व गैलरी एवं हाट बाजार का भ्रमण भी करवाया गया। वरिष्ठ नागरिकों को सोमनाथ बीच दर्शन भी करवाए गए। आगे का कार्यक्रम यात्रा प्रभारी आशुतोष गुप्ता ने बताया कि 5 जून को जयपुर से विशेष ट्रेन से वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रियों को वेरावल तक और एसी बसों से सोमनाथ लाया गया। 6 और 7 जून को सोमनाथ में विभिन्न धार्मिक स्थानों के दर्शन के पश्चात रविवार रात्रि 10 बजे वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्री विशेष ट्रेन से द्वारका एवं नागेश्वर धाम के दर्शन हेतु रवाना होंगे। वहाँ से 9 जून को विशेष ट्रेन से जयपुर वापसी होगी। आशुतोष गुप्ता ने बताया कि राज्य सरकार का उद्देश्य है अधिकाधिक वरिष्ठ नागरिकों को तीर्थ यात्रा का लाभ दिया जाए। वरिष्ठ नागरिकों को धार्मिक तीर्थाटन करवाने के राजस्थान सरकार के संकल्प को देवस्थान विभाग द्वारा पूरा किया जा रहा है। इसके लिए एसी ट्रेन, ठहरने, भोजन व परिवहन की समुचित व्यवस्था की गई है।

जेडीए की अभिनव पहल ‘संवाद’: जनभागीदारी और पारदर्शिता से मई माह में कुल 65 ले-आउट एवं बिल्डिंग प्लान को मिली त्वरित स्वीकृति

जयपुर जयपुर विकास प्राधिकरण शहर के सुनियोजित विकास के साथ-साथ अपनी कार्यप्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। जयपुर विकास आयुक्त श्री सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि जेडीए द्वारा एक अभिनव पहल करते हुए अब बैठकों में संबंधित आवेदकों और हितधारकों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। संवाद कार्यक्रम के तहत आवेदकों को बुलाकर उनकी आपत्तियों, समस्याओं और सुझावों को आमने-सामने सुनकर हाथों-हाथ निस्तारण किया जा रहा है। इसी पारदर्शी और जन-हितैषी कार्यप्रणाली के सकारात्मक प्रभाव से जेडीए ने मई-2026 माह में ले-आउट और बिल्डिंग प्लान के कुल 65 प्रकरणों एवं परियोजनाओं को त्वरित गति से स्वीकृति प्रदान की है। बीपीसी-एलपी समिति द्वारा 48 प्रकरणों का अनुमोदन जेडीए की बीपीसी-एलपी समिति की मई-2026 माह में आयोजित की गई बैठकों में कुल 58 प्रकरण समिति के समक्ष प्रस्तुत किये गए, जिनमें से 48 प्रकरणों में बीपीसी-एलपी समिति द्वारा त्वरित अनुमोदन की कार्यवाही की गई जिसमे पुनर्गठन / उपविभाजन के 13 प्रकरण,आवासीय एकल भूखंड के 11 प्रकरण ,आवासीय योजनाओं के 7 प्रकरण, गैर-आवासीय एकल भूखंड के 4 प्रकरण एवं अन्य प्रकार के 13 प्रकरण शामिल हैं । बीपीसी-बीपी समिति द्वारा 17 परियोजनाओं को स्वीकृति शहर में विभिन्न आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं के निर्माण को सुगम बनाने के लिए बीपीसी-बीपी समिति द्वारा मई 2026 में कुल 17 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है: आवासीय: 08 परियोजनाएं संस्थागत: 04 परियोजनाएं मिश्रित-उपयोग: 02 परियोजनाएं व्यावसायिक: 01 परियोजना होटल: 01 परियोजना रिसॉर्ट: 01 परियोजना जेडीए द्वारा 'संवाद' के माध्यम से प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने का यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा, ताकि आमजन को समयबद्ध तरीके से राहत मिल सके और जयपुर के विकास को नई ऊंचाइयां मिलें।

CM भजनलाल शर्मा की पहल रंग लाई, गर्मी के बीच राजस्थान में पेयजल आपूर्ति हुई सुदृढ़

विशेष राज्यव्यापी अभियानों से 19 हजार से अधिक पेयजल समस्याओं का समाधान, हजारों परिवारों को मिली राहत जयपुर भीषण गर्मी के बीच प्रदेशवासियों को स्वच्छ, पर्याप्त एवं निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संवेदनशील नेतृत्व एवं दूरदर्शी निर्देशों का सकारात्मक असर पूरे राजस्थान में दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता के अनुरूप जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) द्वारा संचालित विशेष राज्यव्यापी अभियानों ने पेयजल व्यवस्थाओं को नई मजबूती प्रदान की है तथा हजारों परिवारों को राहत पहुंचाई है। सात विशेष अभियानों में 19 हजार से अधिक कार्य, पेयजल व्यवस्थाओं में ऐतिहासिक सुधार 5 अप्रैल से 6 जून तक आयोजित सात विशेष राज्यव्यापी अभियानों के दौरान प्रदेशभर में कुल 19,072 पेयजल संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए। इनमें 3,766 हैंडपंपों की मरम्मत, 2,236 पाइपलाइन लीकेज की दुरुस्ती, 1,219 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान, 1,390 बाधित जलापूर्ति मामलों का निस्तारण, 290 कम अवधि की जलापूर्ति, 688 कम सप्लाई, 181 प्रदूषित जल तथा 29 समय-सारणी संबंधी शिकायतों का समाधान शामिल है। इसके अतिरिक्त 7,466 अन्य सुधारात्मक कार्यों के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया गया। एक दिन में 3 हजार से अधिक कार्य, विशेष टीमों ने दिखाई तत्परता शनिवार को आयोजित सातवें विशेष अभियान के दौरान विभागीय विशेष टीमों ने जिलों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों, पाइपलाइन नेटवर्क और जलापूर्ति व्यवस्थाओं का व्यापक निरीक्षण कर समस्याओं का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया। अभियान के तहत 689 खराब हैंडपंप पुनः चालू किए गए, 592 पाइपलाइन लीकेज दुरुस्त किए गए, 241 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान किया गया तथा 246 क्षेत्रों में बाधित जलापूर्ति बहाल की गई। इसके अलावा 60 कम अवधि की जलापूर्ति, 144 कम सप्लाई और 60 प्रदूषित जल संबंधी शिकायतों का भी त्वरित निस्तारण किया गया। कुल मिलाकर एक ही दिन में 3,077 पेयजल संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए गए। अवैध जल कनेक्शनों पर सख्त कार्रवाई, जल संरक्षण को मिला नया बल जल संसाधनों के संरक्षण एवं प्रभावी प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने अवैध जल उपयोग के खिलाफ भी व्यापक कार्रवाई की। सातवें अभियान के दौरान 426 अवैध जल कनेक्शन हटाए गए, जिनमें होटल, ढाबे, सरस डेयरी बूथ एवं कृषि कार्यों में उपयोग किए जा रहे अवैध कनेक्शन शामिल थे। गौरतलब है कि सात अभियानों के दौरान अब तक कुल 1,827 अवैध जल कनेक्शन हटाए जा चुके हैं, जिससे जल की बर्बादी पर प्रभावी अंकुश लगा है और आमजन के लिए उपलब्ध पेयजल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को मिली नई मजबूती हैंडपंपों एवं पाइपलाइनों की मरम्मत के साथ-साथ 619 अन्य पेयजल सुधार कार्यों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया गया है। इन प्रयासों से हजारों परिवारों को गर्मी के इस कठिन दौर में राहत मिली है और पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता एवं उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। 30 जून तक जारी रहेंगे विशेष अभियान उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेशभर में पेयजल व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए विशेष राज्यव्यापी अभियान लगातार संचालित किए जा रहे हैं। आमजन को बेहतर पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा गर्मी के मौसम में जलापूर्ति व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से ये अभियान 30 जून तक निरंतर जारी रहेंगे।

रसोई गैस पर महंगाई का वार, सालभर में LPG सिलेंडर 89 रुपये तक महंगा

जयपुर राजस्थान में आम जनता की रसोई पर महंगाई का एक और बड़ा बोझ आ गया है। तेल और गैस कंपनियों ने देर रात 12 बजे घरेलू उपयोग के एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला किया है, जिसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। कंपनियों द्वारा की गई इस मासिक समीक्षा (रिव्यू) के तहत आज 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में 29 रुपए प्रति सिलेंडर का इजाफा किया गया है। जयपुर में अब कितने का सिलेंडर राजस्थान एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने कीमतों में बढ़ोतरी की पुष्टि करते हुए नई रेट लिस्ट जारी की है। इस नई सूची के अनुसार, राजधानी जयपुर में अब 14.2 किलोग्राम वाला रसोई गैस सिलेंडर 916.50 रुपए के स्थान पर 945.50 रुपए में मिलेगा। केवल बड़ा सिलेंडर ही नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम सिलेंडरों के दाम भी बढ़ाए गए हैं। अब 5 किलोग्राम वाला छोटा घरेलू सिलेंडर 341.50 रुपए के बजाय 352 रुपए में मिलेगा, जबकि 10 किलोग्राम वाला कम्पोजिट सिलेंडर (पारदर्शी प्लास्टिक बॉडी वाला) 655 रुपए से बढ़कर 675 रुपए का हो गया है। इस साल अब तक ₹89 की भारी बढ़ोतरी आम उपभोक्ताओं के लिए यह बढ़ोतरी इसलिए भी परेशान करने वाली है क्योंकि तेल कंपनियों ने इससे पहले 7 मार्च को भी घरेलू सिलेंडरों के दाम में ₹60 की बड़ी बढ़ोतरी की थी। इस तरह देखा जाए तो चालू वर्ष के भीतर ही घरेलू रसोई गैस के दाम कुल मिलाकर 89 रुपए तक बढ़ चुके हैं। हालांकि बाजार विशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध और तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है। इसी अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण घरेलू बाजार में भी लगातार कीमतें बढ़ रही हैं। पहले बढ़ी थी कमर्शियल सिलेंडर की रेट इसके अलावा, कंपनियों ने महज 7 दिन पहले ही कॉमर्शियल (व्यावसायिक) उपयोग वाले सिलेंडरों की कीमतों में भी 42 रुपए का इजाफा किया था। वैश्विक संकट के कारण इस साल के भीतर कॉमर्शियल उपयोग का सिलेंडर रिकॉर्ड 1532 रुपए तक महंगा हो चुका है, जिससे अब घरेलू बजट भी पूरी तरह बिगड़ गया है।  

खेतों में जानलेवा खतरा, 189 कीटनाशक सैंपल फेल, विधानसभा में पेश हुआ डेटा

जयपुर  दो साल में 535 किसानों की मौत, 5.1 करोड़ रुपये का मुआवजा और 189 घटिया कीटनाशक सैंपल… आंकड़े थोड़े चौकाने वाले हैं लेकिन राजस्थान में सवाल उठा रहे हैं। विधानसभा में पेश किए गए ये आंकड़े केमिकल-आधारित खेती के खतरनाक पहलू और सुरक्षा में कमी व नियमों के पालन पर सवाल उठा रहे हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2024 और जनवरी 2026 के बीच खेतों में काम करते समय कीटनाशकों के संपर्क में आने से किसानों की मौत हुई। बीकानेर में सबसे ज्यादा 57 मौतें हुईं, इसके बाद चुरू (56), हनुमानगढ़ (42) और झालावाड़ (42) का नंबर आता है। जोधपुर में 38 मौतें हुईं। श्रीगंगानगर और ब्यावर में 31-31 मौतें हुईं। मुआवजे में भी सामने आई कमी इस दौरान राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों को मुआवजे के तौर पर 5.1 करोड़ रुपये दिए। हालांकि, अलग-अलग जिलों में मुआवजे की रकम में काफी अंतर था और इससे मौतों की रिपोर्ट और मंजूर किए गए दावों के बीच की कमियां सामने आईं। बीकानेर को मुआवजे के तौर पर 92 लाख रुपये, चुरू को 72 लाख रुपये, जोधपुर को 58 लाख रुपये और हनुमानगढ़ को 48 लाख रुपये मिले। श्रीगंगानगर को 18 लाख रुपये मिले। झालावाड़ में 42 मौतें होने के बावजूद, वहां भी सिर्फ 18 लाख रुपये ही मिले। डीग में आठ मौतें हुईं लेकिन कोई मुआवजा नहीं मिला, जबकि कोटा में 11 मौतें हुईं और 2 लाख रुपये मिले। अधिकारियों ने इस अंतर की वजह दावों की जांच और मंजूरी की प्रक्रियाओं को बताया। नहीं बताई हर मौत की सटीक वजह कृषि विभाग के रिकॉर्ड में हर मौत की सटीक वजह नहीं बताई गई थी। इस डेटा में कीटनाशकों के इस्तेमाल से जुड़े खेती के कामों के दौरान हुई मौतें शामिल थीं और इसमें सिर्फ वही मामले थे जिनकी रिपोर्ट अधिकारियों ने दी थी और जिनकी पुष्टि की थी। किशनपोल के विधायक अमीन कागजी ने कहा, "अगर रोजमर्रा के खेती के कामों के दौरान सैकड़ों किसान मर रहे हैं तो सरकार सिर्फ मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती। हमें जवाबदेही, कीटनाशकों के लिए सख्त नियम और पूरे राजस्थान में किसानों के लिए एक व्यापक सुरक्षा कार्यक्रम की जरूरत है।" कीटनाशक के सैंपल क्वालिटी टेस्ट में फेल मौतों के इन आंकड़ों के साथ विधानसभा से एक और चिंताजनक जानकारी सामने आई। उसी दो साल की अवधि में 189 कीटनाशक के नमूने क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गए। पूरे राजस्थान से इकट्ठा किए गए 5,570 कीटनाशक के नमूनों में से 5,521 का विश्लेषण किया गया। जहां 5,332 नमूने तय मानकों पर खरे उतरे, वहीं 189 घटिया क्वालिटी के पाए गए। क्वालिटी की जांच के बाद अधिकारियों ने 282 नोटिस जारी किए, 14 कोर्ट केस दर्ज किए, 14 लाइसेंस सस्पेंड किए और 22 लाइसेंस रद कर दिए। घटिया क्वालिटी वाले कीटनाशक नमूनों की सूची में श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ सबसे ऊपर रहे, जहां हर जगह 17-17 नमूने खराब पाए गए। इसके बाद बीकानेर (13), कोटा (10) और भीलवाड़ा (9) का नंबर आता है। श्रीगंगानगर में सबसे ज्यादा 34 नोटिस भी जारी किए गए, जिसके बाद बीकानेर (20), हनुमानगढ़ (19) और चूरू (17) का स्थान रहा। 14 मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई, जिनमें बीकानेर में पांच और श्रीगंगानगर में तीन मामले शामिल थे। कीटनाशक को लेकर खड़े होते सवाल ये आंकड़े भारत में कीटनाशकों से जुड़े खतरों की एक गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। ज्यादा पैदावार वाली खेती में लंबे समय से केमिकल वाले कीटनाशकों पर बहुत ज्यादा निर्भरता रही है, लेकिन जानकारों ने बार-बार चेतावनी दी है कि सुरक्षा के अपर्याप्त साधनों, असुरक्षित तरीके से इस्तेमाल, जरूरत से ज्यादा छिड़काव और खराब क्वालिटी के एग्रोकेमिकल्स की वजह से खेत जहरीली जगहों में बदल सकते हैं। इंसानी सेहत को होने वाले खतरों के अलावा, कीटनाशकों के बहुत ज्यादा इस्तेमाल का संबंध मिट्टी की क्वालिटी खराब होने, पानी के दूषित होने, जैव-विविधता के नुकसान और परागण करने वाले व फायदेमंद कीड़ों की आबादी घटने से भी जोड़ा गया है। इससे केमिकल पर बहुत ज्यादा निर्भर खेती के टिकाऊपन को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

अच्छी शिक्षा और नैतिक मूल्यों पर दें जोर: राज्यपाल बागडे

 जयपुर राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि अच्छी शिक्षा देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता कैसे बढ़े, इस पर भी विशेष रूप से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों में नैतिकता और सहनशीलता के गुण विकसित करने पर विशेष ध्यान दे।  उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के प्रकाश पुंज होते है। ज्ञान का पूरे समाज में प्रसार यहीं से होता है। इसलिए उन्हें उत्कृष्ट बनाने लिए सभी मिलकर कार्य करें। राज्यपाल श्री बागडे रविवार को लोकभवन से महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के 23 वें स्थापना दिवस पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज का स्मरण करते हुए कहा कि वह विरले संत थे। उनके नाम पर विश्वविद्यालय में भवन निर्माण अच्छी पहल है। वह ऐसे संत थे जो प्रचार प्रसार से दूर रहते थे। उन्होंने कभी अपनी फोटो तक नहीं खिंचवाई। अपने चरण छूने से भी वह मना करते थे। ऐसे आदर्श संतों से प्रेरणा लेनी चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि ऐसे ही एक महापुरुष गीता प्रेस के जरिए देश में संस्कृति और संस्कारों के प्रसार की अभूतपूर्व भूमिका निभाने वाले  हनुमान प्रसाद पोद्दार जी थे।  गोविंद वल्लभ पंत जी उन्हें भारत रत्न पुरस्कार देना चाहते थे और परन्तु उन्होंने लेने से मना कर दिया। श्री बागडे ने विश्वविद्यालय भवनों का नाम संत, महात्माओं के नाम पर किए जाने की सराहना की परंतु यह भी कहा कि जिन महापुरुषों, संतों के नाम पर भवनों के नाम रखे गये हैं, उनके बारे में संक्षिप्त और सार्थक परिचय पुस्तिका भी प्रकाशित हो ताकि नई पीढ़ी को उनके बारे में निरंतर जानकारी मिलती रहे। उन्होंने कहा कि बीकानेर में महाराजा गंगासिंह जी के समय खेजड़ी को काटने पर रोक का कानून बना था। राज्य सरकार ने भी खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून बनाया है। लोकभवन स्तर पर पिछले वर्ष सर्वपल्ली राधाकृष्ण आयुर्वेद विश्वविद्यालय में 300 से अधिक खेजड़ी के पेड़ लगाए गए। हमारा प्रयास है कि खेजड़ी का एक ऐसा पार्क विकसित किया जाए ताकि इस मरुभूमि के कल्पवृक्ष के बारे में जागरूकता का प्रसार हो। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की इस वृक्ष से इसीसे और निकटता होगी। राज्यपाल ने गंग नहर निर्माण शताब्दी वर्ष पर जल संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पानी की बचत ही इसका निर्माण है। पानी बचाने के लिए जागरूकता का प्रसार होना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा राजस्थान के पारंपरिक पेड़ पौधों और जल संरक्षण से जुड़ी संस्कृति से जुड़ी किसी परियोजना पर कार्य करने की भी आवश्यकता जताई। केंद्रीय विधि एवं कानून मंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल ने स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा का आदर्श केंद्र बने। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का जो संकल्प देश के प्रधानमंत्री की पहल पर लिया गया है, उसकी पूर्ति युवाओं के कंधों पर है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में ज्ञान परंपरा के आलोक में भारतीय संस्कृति से जुड़े मूल्यों पर कार्य करने की आवश्यकता जताई। उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि  गंगनहर योजना के शताब्दी वर्ष पर जल संरक्षण के महती काम आरंभ हुए हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा में राजस्थान में किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकारी दी और कहा कि सरकार का प्रयास है कि उच्च शिक्षा गुणवत्ता और प्रसार में राजस्थान अग्रणी बने। इससे पहले कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित ने विश्वविद्यालय गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री बागडे ने विश्वविद्यालय में परीक्षा केंद्र, आचार्य तुलसी भवन, विज्ञान भवन, करणी भवन, कला भवन, रामसुखदास जी भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने राजस्थान नॉलेज कॉर्पोरेशन के साथ विश्वविद्यालय के हुए एमओयू के लिए बधाई दी और कहा कि इससे विद्यार्थियों को सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के नवीनतम ज्ञान, कौशल विकास का लाभ मिलेगा।

सीकर-बीकानेर में बदला मौसम, तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश

 जयपुर राजस्थान में शन‍िवार देर शाम हुई बारिश ने लोगों को गर्मी और उमस से राहत दिलाई. आज से प्रदेश का मौसम करवट लेने वाला है. मौसम विभाग के मुताबिक राज्य में सक्रिय परिसंचरण तंत्र के कारण जारी आंधी बारिश का दौर अब थमने की संभावना है. हालांकि आज प्रदेश के कई इलाकों में हल्की बारिश की संभावना है. बारिश ने गर्मी से दिलाई राहत सीकर और बीकानेर में दोपहर बाद मौसम का मिजाज अचानक बदल गया. दिनभर की तेज धूप और भीषण गर्मी के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. दोपहर के समय जहां तापमान बढ़ने से सड़कों पर आवाजाही कम नजर आई और लोग गर्मी से बचने के लिए घरों में रहने को मजबूर रहे. शाम होते-होते मौसम ने अचानक करवट ली और आसमान में बादल छा गए. तेज हवाओं के साथ फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, सीकर शहर, धोद सहित इलाकों में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया। अचानक बदले मौसम से लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिली. शहर के विभिन्न क्षेत्रों में हुई बारिश से मौसम सुहावना हो गया और लोगों ने लंबे समय बाद गर्मी से राहत महसूस की. मौसम विभाग की ओर से भी आज प्रदेश के कई इलाकों में तेज हवाओं और बारिश की चेतावनी दी गई है. इन जिलों में बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने अलवर, भरतपुर, दौसा,डीग, धौलपुर, झुंझुनूं, करौली, खैरथल तिजारा, कोटपुतली बहरोड़,सवाईमाधोपुर, सीकर,चूरू, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिले में आंधी बारिश का अलर्ट जारी किया है.   कल से गर्मी से मिलेगी राहत सोमवार से आंधी बारिश की गतिविधियों में कमी आएगी. इस दौरान तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने की संभावना है. यानी 8 जून के बाद गर्मी से मिली राहत खत्म होने वाली है और एक बार फिर हिटवेव की चेतावनी है.  कल प्रदेश में बीकानेर और श्रीगंगानगर जिलों में हीटवेव का येलो अलर्ट है.   46 डिग्री सेल्सियस पहुंचा तापमान पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में 8 से 11 जून के बीच कुछ स्थानों पर अधिकतम तापमान 44 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, तथा कहीं-कहीं लू चलने की भी संभावना है.

भारत-पाक सीमा पर सख्ती तेज, दीपावली से पहले अवैध ढांचे गिराने की तैयारी

जैसलमेर भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर देश की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह अभेद्य और चाक-चौबंद करने के लिए बीएसएफ और आईबी एक्शन मोड में हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कड़े निर्देशों के बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने एक संयुक्त रणनीति के तहत भारत-पाक बॉर्डर के 15 किलोमीटर के दायरे में एक विशेष सर्वे अभियान छेड़ दिया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन क्लीन’ नाम दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक हुए सभी प्रकार के अवैध निर्माणों की पहचान करना, उन्हें पूरी तरह ध्वस्त करना और इन निर्माणों में इस्तेमाल की गई संदिग्ध फंडिंग का पर्दाफाश करना है। अमित शाह की हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद एक्शन शुरू जैसलमेर की जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बीकानेर दौरे के दौरान एक हाई-प्रोफाइल सुरक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सीमावर्ती इलाकों में हो रही संदिग्ध गतिविधियों और अवैध निर्माणों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई थी, जिसके तुरंत बाद इस बड़े ऑपरेशन को जमीन पर उतारा गया। सीमा क्षेत्र में किसी भी तरह के अवैध कब्जे या निर्माण को पूरी तरह रोकने के लिए राजस्व विभाग की विशेष टीमों का गठन कर उन्हें फील्ड में तैनात किया गया है। ये टीमें मौके पर जाकर जमीनों और इमारतों का भौतिक सत्यापन कर रही हैं। इस अत्यंत गोपनीय और संयुक्त विशेष सर्वे को शुरू हुए करीब एक सप्ताह का समय बीत चुका है। दीपावली से पहले अवैध निर्माणों होंगे ध्वस्त! अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार सुरक्षा मामलों से जुड़े उच्चाधिकारियों द्वारा इस विशेष सर्वे को अक्टूबर महीने तक हर हाल में पूरा करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त योजना है कि सर्वे और जांच की फाइनल रिपोर्ट तैयार होते ही, आगामी दीपावली त्योहार से पहले-पहले सभी चिन्हित अवैध अतिक्रमणों और अवैध ढांचों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और कार्रवाई को तेजी से अंजाम देने के लिए पुलिस, राजस्व और स्थानीय प्रशासन सहित सभी संबंधित महकमों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए जा चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर इस पूरे अभियान का सबसे संवेदनशील और अहम हिस्सा सुरक्षा जांच तथा वित्तीय फंडिंग की स्क्रूटनी होगी। सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान विशेष रूप से उन बड़े और भारी निवेश वाले व्यावसायिक या निजी निर्माणों पर केंद्रित है, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा के बिल्कुल नजदीक खड़े किए गए हैं। आलीशान निर्माणों की होगी अलग से जांच प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, यदि सीमावर्ती क्षेत्र के भीतर कोई भी ऐसा निर्माण पाया जाता है जिसमें मोटी रकम खर्च की गई है, तो उसकी वित्तीय जांच अलग से की जाएगी। इस काम में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), सीमा सुरक्षा बल (BSF) और मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) जैसी देश की सर्वोच्च सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। ये एजेंसियां गहराई से यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन आलीशान या बड़े निर्माणों के पीछे वास्तविक चेहरे कौन से हैं और इस पैसे का असली स्रोत क्या है। सीमा के इतने नजदीक इस प्रकार की संदिग्ध गतिविधियां और भारी निवेश राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं, इसलिए एजेंसियां किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं।  

जयपुर एयरपोर्ट पर हड़कंप: 19 वर्षीय युवती में इबोला जैसे लक्षण, सैंपल पुणे भेजा गया

जयपुर  राजस्थान की राजधानी जयपुर में इबोला संक्रमण का एक संदिग्ध मामला सामने आने से चिकित्सा महकमे में हड़कंप मच गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शारजाह से जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची एक 19 वर्षीय युगांडा की युवती में इबोला से मिलते-जुलते लक्षण पाए गए हैं। राजस्थान में इस खतरनाक बीमारी का यह पहला संदिग्ध मामला है। रूटीन स्क्रीनिंग में सामने आया मामला स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, युवती शुक्रवार को एयर अरबिया की फ्लाइट से शारजाह से जयपुर पहुंची थी। एयरपोर्ट पर रूटीन थर्मल और मेडिकल स्क्रीनिंग के दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों को उसमें संदिग्ध लक्षण दिखे। एहतियात के तौर पर युवती को तुरंत राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे विशेष रूप से तैयार आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों का कहना संक्रमण की पुष्टि नहीं, केवल संदेह RUHS के प्रिंसिपल डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने स्पष्ट किया है कि अभी तक युवती में इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। मरीज की ट्रेवल हिस्ट्री और शुरुआती लक्षणों को देखते हुए इसे केवल एक संदिग्ध मामला मानकर इलाज और निगरानी की जा रही है। एहतियात के तौर पर मानक आइसोलेशन, निगरानी और कांटेक्ट-ट्रेसिंग (संपर्क में आए लोगों की पहचान) से जुड़े सभी प्रोटोकॉल एक्टिव कर दिए गए हैं। महीने भर से बीमार है युवती स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि युवती ने पिछले करीब एक महीने से पेट दर्द और भूख न लगने (लॉस ऑफ ऐपेटाइट) की शिकायत की है। इसके अलावा वह सिरदर्द से भी पीड़ित है। फिलहाल उसे अस्पताल के क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा गया है। RUHS अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा, "मरीज के लक्षण इबोला की ओर इशारा जरूर करते हैं, लेकिन सिर्फ लक्षणों के आधार पर बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।" जांच के लिए पुणे भेजे गए सैंपल डॉक्टरों के मुताबिक, प्रोटोकॉल के तहत मरीज का पहला ब्लड सैंपल जांच के लिए पुणे की एक विशेष प्रयोगशाला (NIV) में भेज दिया गया है। वहीं, दूसरा सैंपल नियम के अनुसार 48 घंटे बाद भेजा जाएगा। दोनों जांच रिपोर्ट आने तक युवती को सख्त क्वारंटाइन में ही रखा जाएगा। पहली रिपोर्ट शनिवार शाम या रविवार सुबह तक आने की उम्मीद है। सह-यात्रियों के लिए भी एडवाइजरी जारी प्रशासन अब उन मेडिकल स्क्रीनिग की भी जांच कर रहा है, जो युवती की शारजाह से रवानगी के वक्त हुई थी। इसके साथ ही, उक्त फ्लाइट में युवती के साथ यात्रा करने वाले अन्य यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी गई है। उनसे अपने स्वास्थ्य की निगरानी करने और किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत रिपोर्ट करने को कहा गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भारत में अब तक इबोला का एक भी कन्फर्म मामला सामने नहीं आया है, इसलिए लोग पैनिक (घबराएं) न करें और जांच रिपोर्ट का इंतजार करें। यदि रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो युवती को 21 दिनों तक पूरी तरह आइसोलेशन में रखकर निर्धारित गाइडलाइंस के तहत इलाज दिया जाएगा।