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चिकित्सा खर्च में बढ़ोतरी पर सवाल, कुमारी सैलजा ने सरकार को घेरा

चंडीगढ़ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने हरियाणा सरकार की स्वास्थ्य नीतियों पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा है कि सरकार की उपेक्षा और अव्यवस्थित प्रणाली के कारण गरीब वर्ग विशेष रूप से ग्रीन कार्ड धारक तथा आयुष्मान भारत योजना से जुड़े मरीज भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण आमजन को घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है, जबकि उन्हें नि:शुल्क और सहज स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए थीं। सरकारी अस्पतालों में कही आर्थोपेडिक सर्जन नहीं है तो कहीं पर बवासीर, हर्निया और अपेंडिक्स के ऑपरेशन की सुविधा तक नहीं है। मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार ने खर्च घटाने और नीतिगत सुधार के नाम पर जो कदम उठाए हैं, वे वास्तव में गरीब और मध्यम वर्ग की पीड़ा बढ़ाने वाले साबित हो रहे हैं।  उन्होंने कहा कि सिरसा सहित राज्य के अधिकांश जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं, अनेक विभागों में तकनीशियन नहीं हैं, और आवश्यक उपकरण या तो अनुपलब्ध हैं या खराब अवस्था में पड़े हैं। स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती हैं, लेकिन मौजूदा सरकार ने इसे पूरी तरह उपेक्षित कर दिया है। गरीब मरीज अपने अधिकार के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। सांसद ने कहा कि आयुष्मान योजना का मूल उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को निशुल्क उपचार प्रदान करना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह योजना अपने मकसद से भटक चुकी है। उन्होंने कहा कि कई अस्पताल इस योजना के तहत मरीजों का इलाज करने से कतराते हैं, जबकि सरकार की ओर से उनके बकाया भुगतान का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया। सांसद कुमारी सैलजा ने सरकार से मांग की कि सभी सिविल अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, आवश्यक मशीनों की उपलब्धता, और जीवनरक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक तुरंत सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जिला अस्पतालों में एक अलग ग्रीन हेल्प डेस्क बनाई जाए, जहां आयुष्मान और ग्रीन कार्ड धारक मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर पर्ची, परामर्श और उपचार की सुविधा दी जा सके। कुमारी सैलजा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़कों तक उठाएगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि जनहित के लिए लड़ी जाएगी। जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस जनता के साथ खड़ी है और गरीबों को उनका हक दिलाकर रहेगी। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर गरीब मरीजों से हो रहा है मजाक सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश में एक करोड़ 30 लाख गरीब लोग आयुष्मान और चिरायु योजना के दायरे में आते हैं। प्रदेश की भाजपा सरकार ने अनेक रोगों के उपचार को प्राइवेट अस्पतालों की सूची से हटाते हुए कहा है कि इन रोगों का उपचार और ऑपरेशन की सुविधा सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध करवाई जाएगी। सरकार को सबसे पहले सरकारी अस्पताल में सभी प्रबंध करने के बाद ही प्राइवेट अस्पतालों की सूची से रोगों को हटाना चाहिए था पर एक ओर सूची से रोगों का उपचार और ऑपरेशन बंद कर दिए तो दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में सुविधा नहीं है। कूल्हे और घुटने बदलने की सुविधा बहुत कम अस्पतालों में है, कहा आर्थोपेडिक सर्जन है को ट्रांसप्लांट की सुविधा नहीं है, इतना ही नहीं अनेक सरकार अस्पताल तो ऐसे है जहां पर बवासीर, हर्निया और अपेंडिक्स के ऑपरेशन तक की सुविधा नहीं है।

हरियाणा पुलिस का एक्शन मोड: जींद में दबोचा गया गैंगस्टर, अवैध हथियार बरामद

जींद  हरियाणा पुलिस के ऑपरेशन ट्रैकडाउन के तहत जींद में एवीटी स्टाफ ने एक बदमाश को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके कब्जे से अवैध हथियार भी बरामद किया है। मामले की जानकारी देते हुए एवीटी स्टाफ के इंचार्ज एसआई कमल सिंह ने बताया कि हरियाणा पुलिस ने प्रदेश में  अवैध गतिविधियों के खिलाफ ऑपरेशन ट्रैकडाउन चलाया है। इसके तहत एवीटी स्टाफ की टीम  HC जितेन्द्र सिहं की अगुवाई में जींद से कैथल रोड पर गश्त कर रहे थे। इस दौरान टीम ने गांव कंडेला में रजवाहा के पास एक नौजवान को देखकर नजरे चुराकर भागने लगा, जिसको शक के आधार पर पकड़ा। जब पुलिस ने उसे पकड़ा तो उसने अपना नाम नरेश वासी कंडेला बताया।  पुलिस ने तलाशी के दौरान उसके कब्जे से एक पिस्तौल और 32 बोर नाजायज बरामद हुए। पुलिस ने युवक से हथियार का कोई लाइसेंस और परमिट मांगा, तो वह पेश नहीं कर सका, जिस पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। बता दें जींद के पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह के कुशल मार्गदर्शन में लगातार ऑपरेशन ट्रैकडाउन के तहत कार्रवाई की जा रही है।  

द्वारका एक्सप्रेसवे पर अब लगेगा टोल टैक्स: दिल्ली से गुरुग्राम आने-जाने वालों की जेब पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली दिल्ली और गुरुग्राम के बीच अब सफर करना अब महंगा हो गया है। दोनों शहरों को जोड़ने वाले द्वारका एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही खेड़की दौला टोल प्लाजा की दरें भी बढ़ाई गई हैं। रविवार से इन नई दरों को लागू कर दिया गया। वहीं दिल्ली और गुरुग्राम से एनएच-48 के रास्ते एयरपोर्ट जाने वाली गाड़ियों के चालकों को अब टोल नहीं देना होगा, क्योंकि एयरपोर्ट के पास स्थित टोल प्लाजा को बंद कर दिया गया है। इस बदलाव के बाद एनएचएआई ने खेड़की दौला टोल प्लाजा की दरों में बढ़ोतरी की गई है। स्थानीय लोगों ने इसे गलत बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि पिछले छह सालों से टोल हटाने का वादा किया जा रहा है। वहीं अब दरें 19 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई हैं, जो आम लोगों के साथ अन्याय है। हालांकि, 20 किलोमीटर के दायरे के लिए मासिक पास की सुविधा दी गई है। गुरुग्राम के 10 किलोमीटर लंबे हिस्से में फैले द्वारका एक्सप्रेसवे का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल किया था। हालांकि अब तक यहां टोल नहीं लिया जा रहा था। एनएचएआई का कहना है कि टोल प्रणाली लागू होने से सड़क रखरखाव और यातायात प्रबंधन को मजबूत करने में मदद मिलेगी। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन दीपक मैनी ने कहा कि सरकार को बढ़ी हुई दरों को वापस लेना चाहिए, क्योंकि सड़कों पर सुविधाएं बढ़ नहीं रहीं, जबकि टोल चार्ज लगातार बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे औद्योगिक क्षेत्र पर ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ेगा और सरकार को उद्यमियों के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना चाहिए। खेड़की दौला टोल प्लाजा पर टैक्स की दरें खेड़की दौला टोल प्लाजा पर कार, जीप, वैन या हल्के मोटर के लिए सिंगल ट्रिप- 95, डबल ट्रिप- 145, मासिक यानी 50 ट्रिप के लिए 3240 शुल्क है। हल्के व्यावसायिक, हल्के मालवाहक वाहनों के लिए सिंगल ट्रिप- 155, डबल ट्रिप- 235, मासिक यानी 50 ट्रिप के लिए 5230 शुल्क, बस या ट्रक (दो एक्सेल) के लिए सिंगल ट्रिप- 330, डबल ट्रिप- 495, मासिक यानी 50 ट्रिप के लिए 10960 शुल्क, तीन एक्सेलवाले व्यावसायिक वाहन के लिए सिंगल ट्रिप- 360, डबल ट्रिप- 540, मासिक यानी 50 ट्रिप के लिए 11955 शुल्क, भारी निर्माण मशीनरी के लिए सिंगल ट्रिप- 515, डबल ट्रिप- 775, मासिक यानी 50 ट्रिप के लिए 17190 शुल्क रहेगा और चार से ज्यादा एक्सेल वाले वाहनों के लिए सिंगल ट्रिप- 630, डबल ट्रिप- 940, मासिक यानी 50 ट्रिप पर 20925 शुल्क लगेगा। बिजवासन टोल प्लाजा (द्वारका एक्सप्रेसवे) वहीं बिजवासन टोल प्लाजा (द्वारका एक्सप्रेसवे) पर कार, जीप, वैन या हल्के मोटर के लिए सिंगल ट्रिप- 220, डबल ट्रिप- 330, मासिक यानी 50 ट्रिप के लिए 3240 शुल्क है। हल्के व्यावसायिक, हल्के मालवाहक वाहनों के लिए सिंगल ट्रिप- 355, डबल ट्रिप- 335, मासिक यानी 50 ट्रिप के लिए 11890 शुल्क, बस या ट्रक (दो एक्सेल) के लिए सिंगल ट्रिप- 745, डबल ट्रिप- 1120, मासिक यानी 50 ट्रिप के लिए 24915 शुल्क, तीन एक्सेल वाले व्यावसायिक वाहन के लिए सिंगल ट्रिप- 815, डबल ट्रिप- 1225, मासिक यानी 50 ट्रिप के लिए 27180 शुल्क, भारी निर्माण मशीनरी के लिए सिंगल ट्रिप- 815, डबल ट्रिप- 1225, मासिक यानी 50 ट्रिप के लिए 27180 शुल्क रहेगा और चार से अधिक एक्सेल वाले वाहनों के लिए सिंगल ट्रिप- 1425, डबल ट्रिप- 2140, मासिक यानी 50 ट्रिप पर 47565 शुल्क लगेगा।

बदमाशों पर पुलिस का शिकंजा कसा, अधिकारी बोले- धरती भी छोटी पड़ जाएगी

चंडीगढ़  हरियाणा पुलिस के एसपीओ (Special Police Officer) अनुराग लथवाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे प्रदेश के बदमाशों को 20 नवंबर तक आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दे रहे हैं। वीडियो में अनुराग लथवाल कहते हैं कि सभी टॉप अपराधी नजदीकी थानों या चौकियों में सरेंडर कर लें, वरना पुलिस पाताल से भी ढूंढ निकालेगी। अब बदमाशों को धरती और समुद्र भी छोटे पड़ जाएंगे। दरअसल, डीजीपी ओपी सिंह ने राज्य में अपराधियों पर नकेल कसने के लिए “ऑपरेशन ट्रैकडाउन” शुरू किया है। इस अभियान के तहत गंभीर अपराधों में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। पुलिस का यह सख्त संदेश प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 

50 हजार से 7 करोड़ तक का सफर: यादविंदर की मशरूम खेती की सफलता कहानी

कुरुक्षेत्र  मशरूम फार्मिंग हरियाणा सहित पूरे भारत में काफी लोकप्रिय होती जा रही है। मशरूम एक पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर फफूंद  है, जिसे सब्जी और औषधि दोनों रूपों में इस्तेमाल किया जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन B, D, पोटेशियम, सेलेनियम और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। मशरूम में वसा और कोलेस्ट्रॉल बहुत कम होता है, जिससे यह हृदय के लिए लाभकारी माना जाता है।    दुनिया भर में 10,000 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से कुछ ही खाने योग्य हैं, जैसे बटन मशरूम, ऑयस्टर मशरूम और मिल्की मशरूम। भारत में मशरूम की खेती अब तेजी से लोकप्रिय हो रही है क्योंकि यह कम जगह, कम समय और कम लागत में अधिक लाभ देती है। ऐसी ही एक कहानी हम आज को बता रहे हैं कि एक किसान ने कैसे मशरूम के बारे में नए आयाम स्थापित किए हैं।   8वीं पास किसान ने 50000 से शुरू की मशरूम फार्मिंग  अगर मशरूम की खेती में किसान थोड़ी मेहनत करें तो वह इसमें अच्छा मुनाफा ले सकता है और यह एक ऐसी खेती है जो सर्दियों के समय में की जा लेकिन 12 महीने इसका प्रयोग किया जाता है। मशरूम की खेती में मेहनत करके किसान अपनी नई कहानी लिखकर हजारों लाखों लोगों को प्रेषित कर रहे हैं। ऐसी ही एक किसान यादविंदर सिंह हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के गांव तल्हेरी की संघर्ष भरी कहानी है जिन्होंने मशरूम की खेती में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। यादविंदर केवल आठवीं पास है लेकिन उन्होंने 2014 में अपने बंद पड़े पोल्ट्री फार्म में 50000 पर लगाकर मशरूम फार्मिंग शुरू की थी लेकिन अब उनका सालाना टर्नओवर  साढ़े 7 करोड़ का है। ₹3200 महीना दूसरे मशरूम फार्म पर करते थे नौकरी  यादविंदर सिंह ने कहा कि 2008 में उन्होंने अपने ही गांव में एक मशरूम फार्म पर नौकरी करना शुरू की थी और उनकी तनख्वाह ₹3200 रुपए प्रति महीना थी। वहां पर काम करते-करते मशरूम फार्मिंग में वह इतना एक्सपर्ट हो गए कि वह एक छोटे से कर्मचारियों से सुपरवाइजर के पद पर पहुंच गए लेकिन फिर उन्होंने अपना खुद का काम शुरू करने की सोची और 2014 में उन्होंने 50000 रुपए लगाकर मशरूम फार्मिंग शुरू की। वह साथ में नौकरी भी करते थे और अपनी मशरूम फार्मिंग भी संभाल रहे थे। किसी दूसरे फार्म पर ₹3200 प्रति महीना नौकरी करना और फिर अपना काम नौकरी के साथ शुरू करना और उसको 7 करोड रुपए टर्नओवर तक लेकर जाना यादविंदर के लिए काफी चुनौती भरा रहा है।  2016 में नौकरी छोड़ अपने काम का किया विस्तार उन्होंने बताया कि 2016 में उन्होंने मशरूम फार्मिंग शुरू करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी हालांकि पहले वह 2014 से छोटे लेवल पर मशरूम फार्मिंग कर रहे थे लेकिन फिर उन्होंने अपना ही काम आगे बढ़ाने की सोची और फिर 2016 के बाद से ही उनका एक सफर शुरू हुआ जहां उन्होंने कड़ी मेहनत करके अपने मशरूम फार्मिंग के काम को करोड़ों रुपए के टर्नओवर तक पहुंचाने का काम किया।  डोंकी से जाना चाहते थे विदेश लेकिन नहीं पहुंच पाए  उन्होंने बताया था कि एक समय वह भी था जब 2006 में वह काम की तलाश में अपना देश छोड़ने को मजबूर हो गए और विदेश में डोंकी से जाने की सोची, वह कोरिया जाना चाहते थे लेकिन डोंकी से बीच रास्ते काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा जिसके चलते वह बीच रास्ते से ही वापस अपने वतन लौट आए। आज यादविंदर काफी खुश है कि अगर वह विदेश में भी होते तो इतना पैसा नहीं कमा पाते वहां भी वह मेहनत करते लेकिन फिर भी कभी इतने अमीर नहीं बन पाए और उनका भारत आने का फैसला उनके लिए काफी अच्छा साबित हुआ उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से मशरूम फार्मिंग में अपना पूरे भारत में नाम किया है।  15 एकड़ में कर रहे मशरूम फार्मिंग  उन्होंने बताया कि वह मशरूम का कंपोस्ट बनाने का काम करते हैं और साथ में मशरूम फार्मिंग करते हैं मशरूम का कंपोस्ट बनाने के लिए जो पक्का प्लांट है वह तीन एकड़ में बना हुआ है जबकि 12 से 15 एकड़ में वह मशरूम की खेती कर रहे हैं यह खेती शेड बनाकर की जा रही है। उन्होंने बताया कि वह 90 फीट वाले साइड बनाते हैं जिसमें करीब ढाई लाख रुपया खर्च आता है और एक साइड से मशरूम का उत्पादन होता है जिसमें मेहनत और मौसम के हिसाब से एक से ₹200000 आसानी से एक सेड से बचत हो जाती है। Usa से मंगवाया मशरूम का बीज तैयार करने वाला कल्चर  उन्होंने बताया कि वह अपने काम को और आगे लेकर जाना चाहते थे जिसके लिए वह ऊंच गुणवत्ता का मशरूम का बीज तैयार करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने एक मशरूम उत्पादक किसान से संपर्क किया जिन्होंने उनका usa से मशरूम का बीज तैयार करने वाला कलर मुहैया करवाया। अब वह मशरूम का बीज usa के कलर के साथ उच्च गुणवत्ता का तैयार कर रहे हैं। उनका हर रोज करीब 3 टन कंपोस्ट फार्म से निकलता है जो किसानों तक पहुंचता है। दूसरे राज्यों में मशरूम होती है सप्लाई  उन्होंने बताया कि जो मशरूम का कंपोस्ट और बीज तैयार करते हैं वह उनका हरियाणा में ही बिक जाता है काफी डिमांड उसकी रहती है जो मुश्किल से पूरी होती है लेकिन जो उनकी मशरूम होती है वह दूसरे राज्यों में जैसे दिल्ली पंजाब उत्तर प्रदेश जम्मू कश्मीर जैसे आसपास के राज्यों में सप्लाई होती है हालांकि शुरुआती समय में जब उन्होंने फॉर्म की शुरुआत की थी तब उनको मशरूम सेल करने में थोड़ी समस्या होती थी लेकिन अब उनके पास दूसरे राज्यों से आर्डर आते हैं और वह उनको दूसरे राज्यों में ऑर्डर के आधार पर सप्लाई करते हैं। 

26 करोड़ की लागत से हरियाणा को मिलेंगे 30 आयुष्मान हेल्थ सेंटर, ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों को बड़ा फायदा

चंडीगढ़ हरियाणा के गुरुग्राम में 30 शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनेंगे। इन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के निर्माण पर 26.20 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इसके अलावा प्रदेश के सभी सभी सिविल अस्पतालों के लिए 4.64 करोड़ रुपए की लागत से 87 डिफाइब्रिलेटर, 1.01 करोड़ की लागत से 40 मोबाइल एक्स-रे मशीनें, 4 करोड़ की लागत से 11 वीडियो ब्रोंकोस्कोप, और 7.19 करोड़ रुपए की लागत से जीआई वीडियो एंडोस्कोपी सिस्टम की खरीद को स्वीकृति दी गई। यह निर्णय गत दिवस स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री आरती राव की अध्यक्षता में उच्च अधिकारियों के साथ हुई एसएचपीपीएच बैठक में लिए गए। समिति ने हिस्टोपैथोलॉजी विभागों के लिए 1.60 करोड़ रुपए में 9 स्वचालित स्लाइड स्टेनर, दंत विभागों के लिए 2.20 करोड़ में 4 मोबाइल डेंटल वैन की मंजूरी दी। लैब विभागों के लिए 1.47 करोड़ में 70 एबीजी बेंचटॉप मशीनें, नेत्र विभागों के लिए 3.94 करोड़ में 15 हाई-एंड आॅपरेटिंग माइक्रोस्कोप (आंख) और टीबी रोगियों के परीक्षण हेतु 6 करोड़ की लागत से 40 ट्रूनेट मशीनें खरीदने की भी स्वीकृति दी। जीवनरक्षक दवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगभग 60 करोड़ रुपए की 44 आवश्यक दवाओं को भी दो वर्ष की अवधि के दर एग्रीमेंट के तहत मंजूरी प्रदान की गई।   बैठक में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने कहा कि इन स्वीकृतियों से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में आमूलचूल सुधार होगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों और तृतीयक स्वास्थ्य संस्थानों तक मरीजों को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी।  

महिलाओं के सम्मान पर चोट की सजा: माहवारी प्रूफ मांगने वाले अफसरों पर गिरी गाज

रोहतक महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में महिलाओं के कपड़े उतरवाने और उनकी महावारी की पुष्टि करने के लिए फोटो करने जैसे आरोपों के मामले में विवि की ओर से दो सेनेटरी सुपरवाइजर वितेंद्र और विनोद हुड्डा की सेवाओं को बर्खास्त कर दिया है। वहीं मामले में आरोपित सहायक कुलसचिव श्याम सुंदर शर्मा को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ये आदेश वीरवार देर शाम को जारी किए गए। इस दौरान स्पष्ट किया गया है कि श्याम सुंदर रोहतक मुख्यालय में ही रहेंगे। बता दें कि इससे पहले दो सुपरवाइजर को सप्ताहभर पहले निलंबित किया गया था। वहीं हरियाणा राज्य महिला आयोग की ओर से स्वत: संज्ञान लिए जाने के बाद विवि प्रशासन ने भी प्राथमिक रिपोर्ट तैयार कर हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया के पास भेजी जा चुकी है। इसके अलावा मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग भी संज्ञान ले चुका है। बता दें कि 26 अक्टूबर को घटना उस समय घटी जब राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष, जो विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं, विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में उपस्थित थे। उन्हें भी घटना की जानकारी दी गई, जिसके बाद उन्होंने तत्काल जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। 

पानी पर परचम: करनाल के खिलाड़ियों ने नौकायन में दिखाया दम, दिलाए जिले को 18 मेडल

करनाल हरियाणा ओलंपिक संघ की ओर से चंडीगढ़ में 27वीं नौकायान प्रतियोगिता 2 नवंबर से 7 नवंबर तक आयोजित की गई थी। प्रतियोगिता में करनाल के खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। 13 साल बाद हुई इस प्रतियोगिता में करनाल के 40 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जिनमें से 25 खिलाड़ियों ने मेडल जीतकर अपने शहर और परिजनों का नाम रोशन किया है।  पढ़ाई के साथ साथ खेलो में भी अपनी प्रतिभाओं का लोहा इन खिलाड़ियों में मनवा दिया है। जिनका आज अपने शहर पहुँचने पर जोरदार स्वागत किया गया। इन खिलाड़ियों ने रजत और कांस्य मेडल जीते हैं। हालांकि एक छोटी गलती से गोल्ड मेडल जीतने से ये खिलाड़ी चूक गए, लेकिन आने वाली प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने का वादा भी किया है। नौकायान मेडल विजेता खिलाड़ी वंशिका ने बताया पिछले 2-3 महीने से हम इस टूर्नामेंट की तैयारी कर रहे थे। 2 नवंबर से लेकर 7 नवंबर तक ये प्रतियोगिता चंडीगढ़ में थी। परिवार और कोच का हमें काफी सहयोग मिला। साथ-साथ खेल के साथ अपनी पढ़ाई को भी जारी रखा। इन सब परिस्थितियों के बीच आज हम तभी मेडल लेकर अपने शहर में पहुंचे है। उन्होंने कहा बताया मैंने इंटरनेशनल और अब स्टेट में भी मेडल हासिल किया है। आज छोटी सी गलती की वजह से गोल्ड छुटा है। आने वाली नेशनल प्रतियोगिता में मेहनत करके गोल्ड लेकर आने का प्रयास किया जाएगा।  टीम के कोच परवीन ने बताया कि हरियाणा ओलंपिक संघ की ओर से चंडीगढ़ में 27वीं नौकायान प्रतियोगिता 2 नवंबर से 7 नवंबर तक आयोजित की गई थी। प्रतियोगिता 13 साल बाद हुई थी। इस प्रतियोगिता में  करनाल के 40 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जिनमें से  25 खिलाड़ी मेडल जीते हैं। जिनमें 7 रजत मेडल और 11 कांस्य पदक जीते हैं। गोल्ड मेडल हम माइक्रो सेकंड से चूक गए। 

भिवानी दौरे पर राज्यपाल अशिम कुमार घोष, TITS को बताया तकनीकी और औद्योगिक शिक्षा में मिसाल

भिवानी  द टेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्सटाइल एंड साइंसेज भिवानी में शनिवार को दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें हरियाणा के राज्यपाल प्रो. अशिम कुमार घोष मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। एमडी. यूनिवर्सिटी रोहतक के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। जबकि सीबीएलयू भिवानी की कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी विशिष्ट आमंत्रित अतिथि रहीं। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के लगभग 300 स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। साथ ही उद्योग जगत में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पांच विशिष्ट पूर्व छात्रों आई एमजेएस सिद्धू (अध्यक्ष, वर्धमान टेक्सटाइल्स, बद्दी), अनिल जैन (चेयरमैन, जैन कॉर्ड्स), हरीश सराफ (संस्थापक एवं सीईओ, निप्पॉन डेटा सिस्टम्स), सुभाष भार्गव (प्रबंध निदेशक, कलरेंट) को प्रतिष्ठित पूर्व छात्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया। संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष आरके डालमिया तथा निदेशक प्रो  बीके बेहेरा भी समारोह में उपस्थित रहे। राज्यपाल प्रो. अशिम कुमार घोष ने कहा कि टीआईटीएस जैसी संस्थाएं तकनीकी और औद्योगिक शिक्षा के भविष्य की दिशा निर्धारित कर रही हैं। यहां का अनुशासन, अनुसंधान भावना और उद्योग से जुड़ाव इसे अद्वितीय बनाता है। मैं चाहता हूं कि हमारे विद्यार्थी केवल रोजगार के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की भावना से कार्य करें। यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्ति नहीं, बल्कि ज्ञान को कर्म में रूपांतरित करने का अवसर है।

धार्मिक उत्साह में डूबी फरीदाबाद: बाबा बागेश्वर की पदयात्रा में मंत्री मनोहर लाल सहित अनेक श्रद्धालु शामिल

 फरीदाबाद बाबा बागेश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की 'सनातन हिन्दू एकता पदयात्रा' शनिवार सुबह फरीदाबाद में प्रवेश कर गई। सनातन हिंदू एकता पदयात्रा में केंद्रीय मंत्री व हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी पहुंचे। पदयात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने स्वामी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री व अन्य संतों से बातचीत की। वहीं, क्रिकेटर उमेश यादव और शिखर धवन, रेसलर खली समेत कई प्रसिद्ध लोग इस यात्रा में शामिल हुए। इस यात्रा को लेकर शहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।। पुलिस से लेकर प्रशासन और धार्मिक-सामाजिक संगठनों तक सभी ने अपने स्तर पर व्यवस्था मजबूत की है। शाम तक यह पदयात्रा एनआईटी दशहरा मैदान पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम और भव्य सत्संग कार्यक्रम होगा। संयुक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि पुलिस पूरी तरह से मुस्तैद है। वहीं फरीदाबाद में पुलिस की तरफ से सुरक्षा की तैयारी पूरी कर ली गई है। निगम की तरफ से सड़कों की सफाई की का चुकी है। दशहरा मैदान में स्थानीय लोगों को भीड़ एकत्रित होनी शुरू हो गई है। लोग जयकारे लगाकर एक दूसरे का उत्साह बढ़ा रहे हैं। भारत एक हिंदू राष्ट्र बनेगा: धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपनी सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2025 के दौरान बागेश्वर धाम सरकार आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, 'यह अच्छी बात है कि विभिन्न क्षेत्रों के लोग इसमें भाग ले रहे हैं। राष्ट्र एकजुट हो रहा है। हिंदू जाग रहा है और सड़कों पर आ रहा है। राष्ट्र जागेगा। भारत एक हिंदू राष्ट्र बनेगा। भारत जातिवाद से मुक्त होगा। राष्ट्रवाद की विचारधारा प्रबल होगी।' पूर्व क्रिकेटर शिखर धवन ने कहा, 'मुझे यहां आकर बहुत खुशी हो रही है। इस पदयात्रा के पीछे आचार्य धीरेंद्र शास्त्री का विचार हिंदुओं को जाति-पाति से ऊपर उठाकर हिंदुत्व को बढ़ावा देना है। एकता में बहुत ताकत है। हिंदुओं को एकजुट होकर एक मजबूत राष्ट्र के लिए मजबूत बनना चाहिए।' यह एक बहुत अच्छी पहल, सभी को इसका समर्थन करना चाहिए: उमेश यादव क्रिकेटर उमेश यादव ने कहा, 'यह सब ईश्वर की कृपा से है। हम तो बस ईश्वर का काम कर रहे हैं। सभी को अपने धर्म और ईश्वर के प्रति जागरूक होना चाहिए। यह पदयात्रा हिंदुओं को एकजुट करने के लिए है। महाराज द्वारा की गई यह एक बहुत अच्छी पहल है और सभी सनातनी भाइयों को इसका समर्थन करना चाहिए। इसीलिए मैं यहां आया हूं। ईश्वर की इच्छा से ही मैं यहां आ पाया हूं।' रेसलर खली भी पदयात्रा में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि सभी को इस पदयात्रा में शामिल होना चाहिए और इसे सफल बनाना चाहिए। पदयात्रा 16 नवंबर तक चलेगी बता दें कि बाबा बागेश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने दिल्ली से वृंदावन के लिए 10 दिनों की पदयात्रा शुरू की है। 7 नवंबर से प्रारंभ ये पदयात्रा 16 नवंबर तक चलेगी। यह यात्रा दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के छह जिलों के लगभग 422 ग्राम पंचायतों से गुजरेगी। यात्रा की कुल दूरी 150 किलोमीटर होगी।