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दो आईएएस जॉइंट सेक्रट्री के लिए इम्पैनल, रीवा के अपर कलेक्टर का 8 महीने बाद हुआ रिलीव

भोपाल मध्यप्रदेश कैडर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को केंद्र स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी मिलने की दिशा में अहम कदम सामने आया है। 2009 बैच की आईएएस अधिकारी प्रियंका दास को भारत सरकार में संयुक्त सचिव (Joint Secretary) के पद के लिए बनाए गए पैनल में शामिल किया गया है। इसी क्रम में 2009 बैच के ही मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी S. तेजस्वी नाइक का नाम भी संयुक्त सचिव पद के लिए पैनल में शामिल किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए इस पैनल में शामिल होना अधिकारियों के अनुभव, कार्यक्षमता और प्रशासनिक दक्षता का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। पैनल में शामिल अधिकारियों को भविष्य में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में संयुक्त सचिव के रूप में नियुक्ति दी जा सकती है। मध्यप्रदेश कैडर के दो वरिष्ठ अधिकारियों का इस पैनल में शामिल होना राज्य के प्रशासनिक तंत्र के लिए भी गौरव की बात माना जा रहा है। इससे प्रदेश के अधिकारियों की क्षमता और कार्यशैली को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने का संकेत मिलता है। तबादले के बाद जारी किए आदेश त्रिपाठी के पदोन्नति के सवा साल बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 4 अगस्त 2025 को जारी तबादला सूची में उन्हें सिंगरौली जिले का अपर कलेक्टर बनाया गया। तब से लेकर अब तक रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल ने त्रिपाठी को सिंगरौली के लिए रिलीव नहीं किया। अब जबकि 9 अप्रैल को जारी आदेश में शासन ने रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल का तबादला सागर कलेक्टर के पद पर किया है तो रिलीव होने से पहले राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी प्रभाशंकर त्रिपाठी को कलेक्टर पाल ने सिंगरौली में अपर कलेक्टर के पद के लिए रिलीव किए जाने का आदेश जारी किया है। प्रियंका और तेजस्वी अब केंद्र में जॉइंट सेक्रेट्री इधर डीओपीटी ने अलग-अलग आदेश जारी कर एस तेजस्वी नायक 2009 बैच तथा प्रियंका दास 2009 बैच को केंद्र में जॉइंट सेक्रेट्री के पद पर इम्पैनल किए जाने के बाद इसके आधार पर वेतनमान और पदस्थापना के आदेश किए हैं। इसी हफ्ते जारी आदेश में दोनों ही अधिकारियों को जॉइंट सेक्रेट्री के लिए इम्पैनल किया गया है। दोनों ही अधिकारी भोपाल नगर निगम आयुक्त रह चुके हैं। केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय (डीओपीटी) ने दोनों ही अधिकारियों के जॉइंट सेक्रेट्री के लिए इम्पैनल किए जाने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके पहले एमपी कैडर के आईएएस रवि सिहाग को विवाह के आधार पर एमपी कैडर से मुक्त किए जाने के आदेश भी केंद्र सरकार ने जारी किए हैं।

रोजगारोन्मुखी नवीन कोर्स करें डिजाइन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में प्रदेश की उपलब्धि अन्य राज्यों से बेहतर है। उन्होंने योजना से अधिक से अधिक युवाओं को लाभान्वित करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ऐसे नए उपयोगी कोर्स भी डिजाइन किए जाएं, जो प्रशिक्षण के बाद युवाओं को तत्काल रोजगार दिलवाने में सहायक हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश समत्व भवन में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक में दिये। बैठक में तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल उपस्थित रहे। बैठक में जाकनारी दी गई कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर आईटीआई की ग्रेडिंग जारी की है, इसमें मध्यप्रदेश 5वें स्थान पर है। प्रदेश की 47 शासकीय आईटीआई को 10 में से 9 प्लस ग्रेडिंग स्कोर प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को स्किल कैपिटल बनाने की दिशा में अनेक प्रयत्न किए हैं। देश में युवाओं की जनसंख्या के दृष्टिगत उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों और डेयरी विकास कार्यक्रमों से भी युवाओं को जोड़ने के निर्देश दिए। इसके लिए कौशल विकास और रोजगार विभाग से समन्वय कर समुचित कदम उठाए। मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना में लगभग 20 हजार से व्यक्तियों के प्रशिक्षण की उपलब्धि को दोगुना किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि वर्ष-2026 में विभिन्न गतिविधियों से युवाओं को जोड़ने और रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए समुचित प्रयास करने को कहा। तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास में मध्यप्रदेश की उपलब्धियां बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में देश में सर्वाधिक 11 हजार 400 प्रशिक्षणार्थियों का नामांकन मध्यप्रदेश में हुआ। साथ ही युवा संगम के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 2 लाख 68 हजार से अधिक आवेदकों को लाभान्वित किया गया। मध्यप्रदेश के एक लाख 32 हजार युवाओं को स्व-रोजगार का लाभ मिला है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क भोपाल द्वारा इस वर्ष 3 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। इनमें 1500 प्रशिक्षणार्थी लाँग टर्म और इतने ही शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग का लाभ प्राप्त करेंगे। युवाओं को पूर्व में जिन उद्योगों में प्रशिक्षण दिलवाया गया है, उनमें रिलायंस, ट्राइडेंट, जिंदल समूह के जेबीएम आदि शामिल हैं। प्रदेश में 290 शासकीय और 644 प्रायवेट आईटीआई संचालित हैं। शासकीय आईटीआई में 3484 सीटों की वृद्धि की गई, जिसके फलस्वरूप कुल सीट 52 हजार 248 हो गई हैं। प्रायवेट आईटीआई में कुल 61 हजार 32 सीट हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि परम फाउंडेशन द्वारा धार जिले में सरदारपुर आईटीआई में मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन कोर्स में प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। पीएम सेतु के अंतर्गत मध्यप्रदेश में 20 हब और 81 स्पोक आईटीआई उन्नयन का कार्य हुआ है। इंडिया स्किल्स प्रतियोगिता 2025-26 में मध्यप्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा।  

किसान रजिस्ट्री के लिए सरकार की सख्त रणनीति, मिशन मोड में 100% लक्ष्य पूरा करने की योजना

किसान रजिस्ट्री के लिए सरकार की सख्त रणनीति, मिशन मोड में 100% लक्ष्य हासिल करने की तैयारी हर ग्राम पंचायत में कैंप, कम कवरेज वाले गांवों पर विशेष फोकस जनजागरूकता के लिए मीडिया, लाउडस्पीकर और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी 15 मई से योजनाओं के लाभ हेतु फार्मर आईडी अनिवार्य, प्रशासन अलर्ट लखनऊ  राज्य सरकार ने किसान रजिस्ट्री को 100 प्रतिशत पूर्ण करने के लिए मिशन मोड में व्यापक रणनीति लागू कर दी है। तय योजना के अनुसार 30 अप्रैल 2026 तक किसान रजिस्ट्री का लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके लिए प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय कर दी गई है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार 15 अप्रैल तक प्रत्येक ग्राम पंचायत में किसान रजिस्ट्री कैंप स्थापित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक किसानों को मौके पर ही पंजीकरण की सुविधा मिल सके। इसके साथ ही जिलों को निर्देशित किया गया है कि वे ऐसे गांवों की पहचान करें जहां रजिस्ट्री का कवरेज कम है और 6 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच विशेष अभियान चलाकर वहां 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करें। प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी भूमि धारक किसान, चाहे वे पीएम किसान सम्मान निधि योजना से जुड़े हों या नहीं, किसान रजिस्ट्री में शामिल किए जाएं। इसका उद्देश्य यह है कि कोई भी पात्र किसान सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। जागरूकता को अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाते हुए जिलों को निर्देश दिया गया है कि अखबारों में विज्ञापन, लाउडस्पीकर के माध्यम से घोषणाएं और स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही ग्राम प्रधानों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि अभियान को जन-जन तक पहुंचाया जा सके।   राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि 15 मई 2026 से उर्वरक, बीज और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य कर दी जाएगी। इस निर्णय के बाद प्रशासनिक स्तर पर तेजी और बढ़ गई है, ताकि समय सीमा के भीतर अधिकतम किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जा सके। अधिकारियों के अनुसार, यह पहल न केवल योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन में मदद करेगी, बल्कि किसानों के लिए एकीकृत डेटाबेस तैयार कर भविष्य की कृषि नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में भी सहायक सिद्ध होगी।

IDFC बैंक में सरकारी फंड गबन मामले में CBI जांच तेज

चंडीगढ़ आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हरियाणा सरकार के खातों से 550 करोड़ रुपये के गबन के आरोपी दो आईएएस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। इस मामले में आईएएस अधइकारी राम कुमार सिंह और प्रदीप कुमार आरोपी हैं। सिंह 2012 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक उनके पास 3.22 करोड़ रुपये की संपत्तियां हैं। इससे उन्हें 19 लाख रुपये की सालाना कमाई होती है। वहीं प्रदीप कुमार के पास पत्नी की संपत्ति के साथ कुल 7.03 करोड़ की संपत्ति है। कई जगहों पर संपत्तियां सिंह के 29 जनवरी 2026 को फाइल किए गए एनुअल प्रॉपर्टी रिटर्न के मुताबिक उन्होंने कुल 3.22 करोड़ की संपत्ति की बात बताई थी जो कि पट्टनी अफगान, गोहना और सोनीपत में है। यहां उनका एक 710 व्ग गज का प्लॉट है जिसकी कीमत 58 लाख रुपये, एक 77 लाख की कीमत वाला प्लॉट है। इसकेअलावा एक प्लॉट की कीमत 12 लाख रुपये है। गोहाना में भी 60 लाख की कीमत का प्लॉट है। इसके अलावा 6 रिहाइशी संपत्तियां हैं। सिंह का कहना है कि उनकी पत्नी कई बिजनेस करती हैं। उनके पास पेट्रोल पंप, माइक्रोब्रीवरी, रेस्तरां, किराए पर घर देने, प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने का काम भी है। उन्होंने बताया था कि उनका पैतृक घऱ हिंदू अनडिवाइडेट फैमिली के तहत सबका की है। आईएएस प्रदीप कुमार ने एपीआर में बताया था कि उनकी पत्नी के पास 3181.5 वर्ग गज की जमीन है। इसकी कीमत 1.25 करोड़ के करीब है। उन्होंने बताया कि यह जमीन पत्नी को उनके पिता ने उपहार में दी थी। उन्होंने बताया था कि गुरुग्राम सेक्टर 28 में उनके दो फ्लैट हैं जिन की कीमत 2.4 करोड़ के आसपास है। इसके अलावा गुरुग्राम में एक और फ्लैट है जो कि उनकी पत्नी के साथ उनके नाम पर है। इसकी कीमत 3.34 करोड़ रुपये है। हरियाणा सरकार को बड़ा नुकसान हरियाणा के सतर्कता विभाग ने इस मामले को संबंधित एजेंसी को सौंपते हुए कहा, ''यह मामला धोखाधड़ीपूर्ण बैंकिंग गतिविधियों और फर्जी लेनदेन से जुड़ा है, जिन्हें कथित तौर पर सरकारी धन को स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट, एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड, कैप को फिनटेक सर्विसेज, आर.एस. ट्रेडर्स और अन्य संबंधित फर्म/व्यक्तियों सहित फर्जी संस्थाओं (शेल) के खातों में अंतरित करने के लिए व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया गया था, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।' सूत्रों ने बताया कि पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आरोपों के अनुसार, हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा राज्य के कोष को बैंक में 'सावधि जमा' (एसएफडी) के रूप में जमा किया जाना था, लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर इसे अपने निजी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर लिया। सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि विभिन्न फर्जी (शेल) कंपनियों और छोटी आभूषण कंपनियों में भारी मात्रा में धनराशि अंतरित की गई है तथा अंततः सोने की खरीद और रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश के बहाने उसे निकाल लिया गया है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कहा था कि उसने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को मूलधन और ब्याज का 100 प्रतिशत भुगतान कर दिया है, जो कि 583 करोड़ रुपये बनता है।

पलामू में संस्कृति और एकता पर केंद्रित होगा हिंदू सम्मेलन

  पलामू पलामू प्रमंडल मुख्यालय मेदिनीनगर में 12 अप्रैल को एक विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है. इसको लेकर शुक्रवार को शहर के होटल आरडीएस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें आयोजन से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की गई. सम्मेलन को लेकर स्थानीय स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं और जनसंपर्क अभियान भी जोर-शोर से चलाया जा रहा है. तैलिक साहू महासभा ने पेश की रूपरेखा तैलिक साहू महासभा के पलामू प्रमंडलीय अध्यक्ष सह हिंदू सम्मेलन के अध्यक्ष रामदास साहू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि यह सम्मेलन सनातन संस्कृति की रक्षा और समाज को एकजुट करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि धर्म और संस्कृति की मजबूती से ही समाज और राष्ट्र सशक्त बनता है. इस आयोजन के माध्यम से समाज में एकता और समरसता का संदेश दिया जाएगा. स्कृति और एकता पर रहेगा मुख्य फोकस रामदास साहू ने कहा कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करना और परंपराओं के संरक्षण को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज में बढ़ती दूरियों को समाप्त कर एकजुटता स्थापित करना बेहद जरूरी है. इस सम्मेलन के जरिए लोगों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा. देशभर के 1.08 लाख स्थानों पर आयोजन समिति के सचिव कुमार गौरव ने बताया कि यह कार्यक्रम केवल मेदिनीनगर तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के एक लाख आठ स्थानों पर इस तरह के सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं. इसका उद्देश्य व्यापक स्तर पर समाज को जोड़ना और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना है. उन्होंने सभी लोगों से आपसी एकता और सामाजिक समरसता बनाए रखने की अपील की. प्रमुख संत और वक्ता होंगे शामिल सम्मेलन में धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र के कई प्रमुख व्यक्तित्व शामिल होंगे. मुख्य वक्ता के रूप में वृंदावन से 1008 सीताराम शरण जी, साध्वी शरण जी और कार्यवाहक दिनेश जी के शामिल होने की संभावना है. ये सभी वक्ता धर्म, संस्कृति और समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे, जिससे लोगों को प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा. जनसंपर्क अभियान से लोगों को जोड़ा जा रहा सम्मेलन को सफल बनाने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है. समिति के सदस्य घर-घर जाकर लोगों को आमंत्रित कर रहे हैं और अधिक से अधिक संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील कर रहे हैं. आयोजकों का कहना है कि यह सम्मेलन सभी वर्गों को एक मंच पर लाने का प्रयास है, जिससे आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत हो सके. शिवाजी मैदान में होगा भव्य आयोजन यह विराट हिंदू सम्मेलन 12 अप्रैल, रविवार को शाम चार बजे मेदिनीनगर के शिवाजी मैदान में आयोजित किया जाएगा. कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, पारंपरिक कला का प्रदर्शन और प्रबुद्धजनों के संबोधन मुख्य आकर्षण होंगे. आयोजकों ने आम नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस आयोजन को सफल बनाने की अपील की है. समिति के पदाधिकारी रहे मौजूद प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सह संयोजक सतीश तिवारी, उपाध्यक्ष विकास सिंह, प्रचार प्रमुख रोहित पाठक, श्वेत रंजन, कोषाध्यक्ष विकास तिवारी, विनीत पांडेय और सूर्यकांत पासवान सहित कई अन्य सदस्य मौजूद रहे. सभी ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई.

खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने टूर्नामेंट आवश्यक : अरुण साव

रायपुर.  उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव आज रायपुर के जोरा स्थित इंटरनेशनल टेनिस स्टेडियम में आयोजित गोंडवाना कप ऑल इंडिया टेनिस टूर्नामेंट-2026 के समापन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने मिश्रित और एकल के विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार प्रदान किए। उप मुख्यमंत्री साव ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में गोंडवाना कप का आयोजन अनेक वर्षों से हो रहा है। प्रदेश में लगातार खेल प्रतियोगिताएं होने से खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिलता है और अच्छे खिलाड़ी निकल कर आते हैं। टूर्नामेंट में 20 राज्यों के 120 खिलाड़ियों का भाग लेना इसकी सफलता को बताता है। साव ने कहा कि खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए खिलाड़ी टूर्नामेंट आवश्यक हैं। इसके बिना खेल और खिलाड़ी दोनों आगे नहीं बढ़ सकते। गोंडवाना कप जैसी प्रतियोगिताएं लगातार होने चाहिए।  इन विजेता खिलाड़ियों को प्रदान की ट्रॉफी महिला डबल्स के फाइनल मुकाबले में शताक्षी चौधरी और अनन्या जैन (उत्तर प्रदेश) की जोड़ी ने स्निग्धा पाटिबंडला और इरम जैदी को 3-6, 6-3, 10-7 से हराकर खिताब जीता। वहीं पुरुष डबल्स में निरव शेट्टी और अनुप बंगार्गी (महाराष्ट्र) की जोड़ी ने प्रसाद इंगाले और परितोष पवार को 6-2, 6-4 से हराया। वहीं महिला एकल में राजस्थान की आयुषी तनवार ने उत्तरप्रदेश की शताक्षी चौधरी को 2-6, 6-2, 6-2 से हराकर खिताब अपने नाम किया। पुरुष एकल में तेलंगाना के नैशिक रेड्डी गनागामा ने महाराष्ट्र के प्रसाद इंगाले को 7-6 (7-4), 6-3 से हराकर विजेता बने। उप मुख्यमंत्री साव ने सभी विजेता खिलाड़ियों को ट्रॉफी प्रदान की। समापन समारोह में एआईटीए (AITA) के महासचिव अनिल धुपर, स्टेट टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष और हरिभूमि के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी, गुरुचरण सिंह होरा, उपाध्यक्ष नरेश गुप्ता और आशीष सराफ सहित बड़ी संख्या में खिलाड़ी एवं खेलप्रेमी मौजूद थे। 24-26 अप्रैल तक खेल मंत्रियों का चिंतन शिविर साव ने बताया कि 24 अप्रैल से 26 अप्रैल तक श्रीनगर में चिंतन शिविर का आयोजन हो रहा है। इसमें सभी राज्यों के खेल मंत्री और भारत सरकार के मंत्री व अधिकारी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि 2047 में जब देश आजादी के 100 वर्ष पूरा करे तो देश विकसित बने, इसके साथ ही खेल के क्षेत्र में भी भारत दुनिया में अग्रणी देश बने, इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए योजना बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में काम हो रहा है। निश्चित रूप से इस चिंतन शिविर से बड़ा लाभ होगा।

नौकरी दिलाने के नाम पर ठग सक्रिय, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

चतरा झारखंड के चतरा जिले में चल रही होम गार्ड बहाली प्रक्रिया के बीच ठग सक्रिय हो गए हैं. जिला प्रशासन को मिली शिकायतों के बाद अभ्यर्थियों को सतर्क रहने की अपील की गई है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी तरह के पैसे या सिफारिश का इसमें कोई स्थान नहीं है. 1 अप्रैल से चल रही है बहाली प्रक्रिया चतरा जिले के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 1 अप्रैल 2026 से होम गार्ड बहाली प्रक्रिया संचालित की जा रही है. बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस प्रक्रिया में शामिल हो रहे हैं. इसी बीच कुछ असामाजिक तत्वों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए ठगी का जाल फैलाना शुरू कर दिया है. मोबाइल कॉल के जरिए ठगी का प्रयास जिला प्रशासन के अनुसार, कई अभ्यर्थियों ने शिकायत की है कि अज्ञात मोबाइल नंबरों से कॉल कर उन्हें होम गार्ड में नौकरी दिलाने का झांसा दिया जा रहा है. इसके बदले उनसे अवैध रूप से पैसे की मांग की जा रही है. ऐसे मामलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. उपायुक्त कीर्तिश्री का सख्त संदेश चतरा की उपायुक्त श्रीमती कीर्तिश्री ने इस मामले में स्पष्ट बयान जारी करते हुए कहा है कि बहाली प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और निर्धारित मानकों के अनुसार हो रही है. उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की सिफारिश, बिचौलिया या पैसे का कोई स्थान नहीं है. ऐसे सभी दावे पूरी तरह फर्जी और गैरकानूनी हैं. अभ्यर्थियों और अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील उपायुक्त ने अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी फोन कॉल, संदेश या व्यक्ति के झांसे में न आएं. यदि कोई व्यक्ति नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे की मांग करता है, तो उसकी जानकारी तुरंत प्रशासन या पुलिस को दें. इससे ऐसे ठगों के खिलाफ समय पर कार्रवाई संभव हो सकेगी. साइबर सेल और पुलिस को सूचना देने की सलाह प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ठगी से संबंधित किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी थाना, साइबर सेल या जिला प्रशासन को दी जानी चाहिए. इससे दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी. प्रशासन कर रहा है सतत निगरानी जिला प्रशासन ने बताया कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है. बहाली प्रक्रिया के दौरान लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता या धोखाधड़ी को रोका जा सके. संबंधित अधिकारियों को भी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं. अफवाहों से दूर रहने की अपील जिला प्रशासन ने अभ्यर्थियों से यह भी कहा है कि वे केवल आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें और किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक जानकारी से दूर रहें. सोशल मीडिया या अनजान स्रोतों से मिलने वाली जानकारी पर विश्वास करने से बचने की सलाह दी गई है.

नक्सल उन्मूलन के बाद बालाघाट जिले में तेज करें विकास की गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के बालाघाट जिले में नक्सल उन्मूलन के बाद विकास की गति को और तेज किया जाएं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा दिए गए निर्देश एवं प्रचार की गई कार्य योजना के फलस्वरूप प्रदेश से नक्सल तत्वों पर पूर्ण नियंत्रण में सफलता मिली है। नक्सलवाद की समस्या से बरसों प्रभावित रहे बालाघाट जिले सहित अन्य प्रभावित स्थानों पर अब तीव्र गति से कार्य करने की आवश्यकता है। मध्यप्रदेश सरकार विकास कार्यों की गति तेज करने को प्राथमिकता दे रही है। जनजातीय समाज की प्रतिभाओं को भी विभिन्न महोत्सवों से मंच देने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में शुक्रवार को समत्व भवन में आगामी माह बालाघाट में होने वाले जनजातीय महोत्सव के संबंध में विचार-विमर्श हुआ। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव आदि बैठक में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय महोत्सव में सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों के साथ ही विभिन्न विभाग स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप शिविर आयोजित करें। धरती आबा अभियान में हितग्राहियों को लाभान्वित करने और स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्षेत्र में मेगा स्वास्थ्य शिविर और सिकल सेल स्क्रीनिंग का कार्य किया जाए। शिक्षा सुविधाओं के विस्तार, महिलाओं और बच्चों के कल्याण, रोजगार प्रदान करने, दिव्यांग नागरिकों को हित लाभ प्रदान करने और पूर्व वर्षों में नक्सल गतिविधियों के कारण प्रभावित हुए परिवारों की आवश्यक सहायता के लिए कार्य किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "एक बगिया मां के नाम" कार्यक्रम अंतर्गत गतिविधियों के आयोजन, आराधना स्थलों पर सुविधाओं के विकास के कार्य भी किए जाएं। जनजातीय संस्कृति विशेषकर बैगा समुदाय से जुड़े लोक नृत्यों, खेतों में बोवनी के कार्य से पूर्व आयोजित किए जाने वाले बिदरी, बीज पंडूम और बड़ा देव पूजा के कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा। महोत्सव में जनजातीय संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बोरा दौड़, मटका रेस, तीरंदाजी स्पर्धाएं भी होंगी। बैगा महिलाओं की विशिष्ट गोदाना कला के प्रदर्शन और कार्यशाला के साथ कोदो कुटकी और महुआ आदि से बने पारम्परिक व्यंजनों के फूड स्टॉल भी लगाए जाएंगे। पारम्परिक जड़ी-बूटियों की जानकारों और औषधीय ज्ञान रखने वालों का सम्मेलन भी प्रस्तावित है। स्व-सहायता समूहों के सदस्यों द्वारा निर्मित उत्पादों के स्टॉल लगाए जाएंगे। बालाघाट के साथ ही निकटवर्ती जिलों और छत्तीसगढ़ से भी जनजातीय समाज इस महोत्सव में भागीदारी करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय महोत्सव में होने जाने वाली गतिविधियों और विभागों की सहभागिता की जानकारी प्राप्त की। बैठक में बताया गया कि जनजातीय महोत्सव में स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य, उच्च शिक्षा, वन, महिला एवं बाल विकास, किसान कल्याण एवं कृषि विकास, नवीन और नवकरणीय ऊर्जा, कौशल विकास एवं रोजगार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम, सहकारिता, संस्कृति, पर्यटन, खनिज साधन, गृह और जनसम्पर्क विभाग द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया जाएगा।  

प्रकृति में जनजातीयों की अटूट आस्था, देवी-देवताओं के वास से जल जंगल का हो रहा संरक्षण व संवर्धन: मंत्री रामविचार नेताम

रायपुर.  आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि देश के लगभग सभी राज्यों में जनजातीय समुदाय के लोग निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 10 करोड़ से अधिक जनजातीय समुदाय हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीयों का जल, जंगल, जमीन, नदी-नालों और पहाड़ों में अटूट आस्था है। जनजातीय समुदाय पेड़ पौधों, नदी-नालों में देवी-देवताओं का वास मानते हैं और इन्ही संस्कृति और परंपराओं के कारण वनवासी समुदाय प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन में पहले पायदान पर है।  छत्तीसगढ़ कॉमन्स क्विनिंग’ के समापन समारोह में शामिल हुए मंत्री नेताम मंत्री नेताम ने आज नवा रायपुर स्थित जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित दो दिवसीय राज्य-स्तरीय संवाद सम्मेलन ’छत्तीसगढ़ कॉमन्स क्विनिंग’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए गहन मंथन हुआ है। इस मंथन में जो भी तथ्य निकलकर आएंगे उसकी उपयोगिता नीति निर्माण और जनहित में कैसी होगी इसके लिए हमारी सरकार तत्परता के साथ काम करेगी।  मंत्री नेताम कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समुदायों के विभिन्न समस्याओं और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन करने जा रही है। इस टास्क फोर्स की संवेदनशीलता और महत्व को देखते हुए इसकी कमान स्वयं मुख्यमंत्री संभालेंगे, जो इसके अध्यक्ष होंगे। नीतिगत निर्णयों के धरातल पर प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को मिलाकर एक विशेष कार्यान्वयन समिति भी बनाई जाएगी, जो बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगी । नेताम ने कहा कि पेसा (पंचायत उपबंध अधिनियम) और एफआरए (वनाधिकार अधिनियम) के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, विशेष रूप से सीमाओं के निर्धारण (डिमार्केशन ऑफ बॉउंड्रिस) जैसी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की बात कही। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के प्रति उत्तरदायित्व का भाव जागृत करते हुए कहा, “हम केवल इन साझा संसाधनों के उपयोगकर्ता ही नहीं, बल्कि इनके संरक्षक भी हैं, और हमारा उपभोग केवल अपनी वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति तक ही सीमित होना चाहिए”। इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य राज्य भर में जनजातीय कल्याण से जुड़ी नीतियों के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करना और समुदायों को उनके अधिकार दिलाना है । आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि यह टास्क फोर्स विशेष रूप से पेसा और वनाधिकार अधिनियम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी विरासत में जनजातीय बोली, भाषा, समुदायिक नेतृत्व समृद्ध है। जल, जंगल, जमीन के संरक्षण व संवर्धन में इन जनजातीयों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति उनके ज्ञान, उनका उद्देश्य, जल जंगल से जुड़े हुए हैं। उनका रिश्ता प्रकृति से है। वे प्रकृति को मां के रूप में, देवता के रूप में पूजते हैं। उनके दैनिक क्रियाकलापों से लेकर मृत्यु तक के उत्सव प्रकृति के संरक्षण में सहायक सिद्ध होती है। प्रमुख सचिव बोरा ने कहा कि इन दो दिनों तक चले अधिवेशन में छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के 300 से अधिक प्रतिभागियों, नीति विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और ग्राम प्रमुखों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र राज्य की 70 लाख एकड़ ’कॉमन्स’ भूमि (जंगल, चारागाह और जल निकाय) रही, जो ग्रामीण और जनजातीय आबादी की जीवन रेखा है। उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना, धरतीआबा ग्राम उत्कर्ष अभियान, नियद नेल्ला नार जैसे विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों एवं जनजातीय समुदाय के सम्पूर्ण विकास के साथ ही प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में काम कर रहे हैं। आगे भी सामुदायिक सहयोग से बेहतर दिशा में काम किया जाएगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वी. श्रीनिवास राव ने जोर दिया कि सामुदायिक सहयोग के बिना विशाल वनों और जैव विविधता की रक्षा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य की वन नीतियां प्रतिबंधात्मक नहीं, बल्कि विनियामक हैं। मनरेगा आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा ने कहा कि जल संरक्षण जनजातीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने मनरेगा के माध्यम से वंचित समुदायों को जल प्रबंधन में जोड़ने पर बल दिया। रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह ने रेखांकित किया कि जल संरक्षण कोई ’रॉकेट साइंस’ नहीं है, बल्कि यह सदियों के अनुभव से उपजा सामुदायिक ज्ञान है। संवाद सम्मेलन में यह बात उभर कर आई कि कॉमन्स केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आधार हैं। इस अवसर पर सोनमणि बोरा ने जनजातीय लोक गीतों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के दस्तावेजीकरण और कॉपीराइट संरक्षण के लिए एक विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना साझा की। सम्मेलन में नेल्सन मंडेला पुरस्कार विजेता शेर सिंह आंचला, पद्म पांडी राम मंडावी, पद्मजगेेश्वर यादव और गौर मारिया कलाकार सुलक्ष्मी सोरी, इंदु नेताम ने भी अपने अनुभव साझा किए और संसाधनों के संरक्षण की अपील की।  कार्यक्रम को सफल बनाने में अपर संचालक संजय गौड़, टीआरटीआई की संयुक्त संचालक श्रीमती गायत्री नेताम की विशेष योगदान रही। यह कार्यक्रम आदिम जाति विकास विभाग, टीआरटीआई और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी द्वारा प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स पहल के तहत संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इसमें यूएनडीपीए आईआईटी-भिलाई, बीआरएलएफ, एक्सिस बैंक फाउंडेशन और अन्य प्रमुख संस्थान सहयोगी रहे।

झारखंड सरकार की बड़ी पहल, 500 बच्चों के हृदय रोग की होगी निःशुल्क जांच

 रांची झारखंड की राजधानी रांची स्थित सदर अस्पताल में शुक्रवार को जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) से पीड़ित बच्चों के लिए एक विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया. कांगेनिटल हार्ट डिजीज बीमारी की पहचान और जांच के लिए आयोजित यह शिविर 10 और 11 अप्रैल तक चलेगा. इसका उद्देश्य भारत में हर साल दो लाख से ज्यादा जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) से ग्रसित बच्चों की शीघ्र पहचान और उनका निःशुल्क इलाज करना है. इस शिविर में जांच (स्क्रीनिंग), परामर्श और चिह्नित बच्चों के हृदय ऑपरेशन (सर्जरी) की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क है. गिफ्ट ऑफ लाइफ के तहत लगाया गया शिविर झारखंड सरकार के शिविर स्वास्थ्य विभाग के “गिफ्ट ऑफ लाइफ” कार्यक्रम के तहत आयोजित किया जा रहा है. इसमें शिशुरोग विशेषज्ञ चिकित्सकों को “केयरिंग फॉर चिल्ड्रन विद हार्ट डिजीज : एसेंशियल फैक्ट्स” विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित किया जा रहा है. इस विशेष शिविर के पहले दिन राज्य के विभिन्न जिलों से हृदय में जन्मजात छेद वाले चिह्नित बच्चों को इस शिविर में अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बच्चों की जांच की गई. इस दौरान अभिभावकों को आवश्यक परामर्श उपलब्ध कराया गया. इस पहल का उद्देश्य जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की समय पर पहचान एवं बेहतर उपचार सुनिश्चित करना है. नन्हें मासूमों का हृदय रोग परीक्षण इस विशेष शिविर में विशेषज्ञों द्वारा इको एवं अन्य जांच के माध्यम से बच्चों के हृदय रोग का परीक्षण किया जाएगा एवं जांच के बाद जिन बच्चों में सर्जरी की आवश्यकता पाई गई उनका निशुल्क ऑपरेशन (सर्जरी ) अमृता हॉस्पिटल, कोच्ची में कराया जायेगा. सर्जरी के बाद फॉलोअप भी किया जाएगा. 500 बच्चों के इलाज का लक्ष्य इस शिविर में लगभग 500 बच्चों के स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया है. यह पूरी प्रक्रिया निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है. बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी आने जाने ठहरने आदि की निशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. महत्वपूर्ण जानकारी     जन्म के बाद उभरने लगती है परेशानी: कुछ दोष बहुत मामूली होते हैं जो अपने आप ठीक हो सकते हैं, जबकि कुछ गंभीर होते हैं जिनके लिए तुरंत सर्जरी की आवश्यकता होती है.     लक्षण: सांस लेने में तकलीफ, दूध पीते समय हांफना, त्वचा का नीला पड़ना, बहुत पसीना आना और वजन न बढ़ना इसके मुख्य लक्षण हैं.     निदान और उपचार : इसका पता गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड या जन्म के बाद इकोकार्डियोग्राफी (इको) से लगाया जा सकता है. इसका मुख्य उपचार दवाएं, कैथीटेराइजेशन या ओपन-हार्ट सर्जरी है. बच्चों में किन लक्षणों के बाद डॉक्टर को दिखाएं     त्वचा, होंठ या नाखूनों का नीला या पीला पड़ना (साइनोसिस)     कम वजन, ग्रोथ में कमी, दूध पीते-पीते हांफना या सांसें तेज होना – थक जाना     वजन न बढ़ना या शारीरिक विकास रुकना,     तेज धड़कन या सांस लेने में तकलीफ नवजात में क्यों होती है बीमारी कांगेनिटल हार्ट डिजीज (सीएचडी), जिसे जन्मजात हृदय रोग भी कहते हैं, जन्म के समय हृदय की संरचना (स्ट्रक्चर) में खराबी या दोष को कहते हैं. यह समस्या तब पैदा होती है, जब गर्भावस्था के दौरान बच्चे का दिल सामान्य रूप से विकसित नहीं हो पाता है. यह बच्चों में जन्मजात दोषों का सबसे आम प्रकार है, जो लगभग 100 में से 1 या 2 शिशुओं को प्रभावित करता है. भारत में हर साल करीब 2,00000 लाख बच्चे इस बीमारी की परेशानियों से गुजरते हैं. क्या कहते हैं अभियान निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि झारखंड के सुदूरवर्ती इलाकों के लोगों में जागरूकता नहीं रहने के चलते रोग का सही समय पर चिन्हित नहीं हो पाता है. निःशुल्क ऑपरेशन के लिए मां अमृता हॉस्पिटल के साथ नॉन फाइनेंशियल एमओयू किया गया है. सत्य साईं अस्पताल भी अलग से उपचार कर रहा है. झारखंड में यह दूसरा कैंप है. रोटरी सहित अन्य एनजीओ मरीजों परिजनों को आने-जाने के खर्च में मदद कर रहे हैं, यह उनकी ओर से बड़ा सहयोग है.