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अलीगंज हादसे के बाद सख्ती, ध्येय IAS और चंद्रा IAS समेत कई संस्थानों पर सीलिंग

लखनऊ राजधानी लखनऊ में अलीगंज अग्निकांड के बाद पूरे यूपी में कोचिंग संस्थानों, लाइब्रेरी, स्कूलों और अन्य प्रतिष्ठानों पर लगातार ऐक्शन हो रहा है। लखनऊ में 22 जून को हुए कांड में 15 बच्चों की मौत के बाद से ही कार्रवाई हो रही है। शनिवार को ध्येय आईएएस और चंद्रा आईएएस समेत 50 से अधिक कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी, गेमिंग जोन और अन्य संस्थानों को सील कर दिया गया। दिनभर चली कार्रवाई से शहर के विभिन्न इलाकों में हड़कंप की स्थिति रही। वहीं, कोचिंग संचालकों और पुलिस के बीच आयोजित कार्यशाला में भी इसे लेकर हंगामा मच गया। पुलिस और संचालकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। गोमतीनगर में ध्येय और चंद्रा आईएएस पर ताला एलडीए के प्रवर्तन दस्ते ने गोमतीनगर के जीवन प्लाजा में संचालित ध्येय आईएएस कोचिंग सेंटर को सील कर दिया। जोनल अधिकारी देवांश त्रिवेदी के नेतृत्व में टीम ने मौके पर पहुंचकर संस्थान में ताला लगवा दिया। इसी प्रकार विजयंत खंड में संचालित चंद्रा आईएएस कोचिंग सेंटर पर भी कार्रवाई की गई और उसे सील कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार दोनों संस्थान भवन उपयोग संबंधी नियमों के विपरीत संचालित पाए गए। गोमतीनगर क्षेत्र में ही एक दर्जन से अधिक अन्य कोचिंग संस्थानों पर भी सीलिंग की कार्रवाई की गई। अलीगंज में 11 कोचिंग सस्थान सील अलीगंज क्षेत्र में एलडीए ने विशेष अभियान चलाकर 11 अवैध कोचिंग संस्थानों को सील किया। अधिकारियों का मानना है कि हालिया अग्निकांड के बाद सुरक्षा और भवन मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है। एलडीए की टीम उस भवन से जुड़े अन्य परिसरों और संपत्तियों की भी जांच कर रही है, जहां हाल में भीषण आग की घटना हुई थी। अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कर दी है। एक स्कूल भी प्राधिकरण के रडार पर रहा है, जिसके अभिलेख व स्वीकृतियों की जांच की जा रही है। 50 से ज्यादा प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी एलडीए ने शनिवार को शहर के विभिन्न इलाकों के 50 से ज्यादा प्रतिष्ठानों को सीलिंग की नोटिस जारी कर दी है। नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद इन्हें भी सील किया जाएगा। संचालक बोले कार्रवाई के नाम पर उत्पीड़न अलीगंज के कोचिंग कॉम्प्लेक्स में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद शुरू हुई एलडीए की कार्रवाई अब बड़े विवाद का रूप लेने लगी है। शनिवार को कोचिंग सेंटर, स्कूल, लाइब्रेरी व अन्य शिक्षण संस्थानों के संचालकों के साथ इन्दिरागांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यशाला में माहौल उस समय गरमा गया जब व्यापारियों व स्कूल संचालकों ने सीलिंग अभियान को लेकर खुलकर विरोध दर्ज कराया। कई बार स्थिति ऐसी बनी कि अधिकारियों व संचालकों के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी। एलडीए की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में बड़ी संख्या में कोचिंग संचालक, स्कूल प्रबंधक व भवन मालिक पहुंचे थे। अधिकारियों ने सभी को एक शपथ पत्र भरकर जमा करने के निर्देश दिए, लेकिन कई संचालकों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह शपथ पत्र भवन मालिकों के लिए तैयार किया गया है, जबकि कार्रवाई का सामना उन्हें करना पड़ रहा है। मानक पूरे हैं फिर भी सील क्यों? सबसे ज्यादा सवाल उन संस्थानों की ओर से उठे जिन्हें सभी सुरक्षा मानक पूरे होने के बावजूद सील किए जाने का दावा किया गया। सेंच्यूरियन अकादमी, आलमबाग के आदित्य ने सवाल किया, ‘हमारे यहां सभी मानक पूरे हैं, फिर भी संस्थान सील कर दिया गया। अब अभिभावकों व छात्रों को क्या जवाब दें? इस पर एलडीए सचिव विवेक श्रीवास्तव ने कहा,यदि सभी मानक पूरे हैं तो एलडीए मुख्यालय में हेल्प डेस्क पर आवेदन दें। 24 से 72 घंटे के भीतर सत्यापन कर निर्णय लिया जाएगा। फिजिक्स वाला ने भी उठाए सवाल फिजिक्स वाला के गौरव श्रीवास्तव ने भी पूछा कि सभी मानक पूरे होने के बावजूद उनके कार्यालय को सील क्यों किया गया और सील कैसे खुलेगी। सचिव ने जवाब दिया कि सोमवार से ऐसे मामलों की समीक्षा शुरू की जाएगी। अफसरों पर भड़के संचालक स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब गोमतीनगर स्थित अनएकेडमी के विनय दीक्षित ने कहा कि उनके पास 2027 तक वैध फायर एनओसी है, इसके बावजूद संस्थान को अपमानजनक तरीके से सील कर दिया गया। इस पर कई संचालकों ने एक साथ खड़े होकर कार्रवाई पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। व्यापारियों और स्कूल संचालकों ने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त सुनवाई के प्रतिष्ठानों को बंद किया जा रहा है। कई लोगों ने कहा कि एलडीए की टीम पहले नोटिस देने और सुधार का मौका देने के बजाय सीधे सीलिंग कर रही है। छोटे संस्थानों की भी पीड़ा अंग्रेजी की छोटी कोचिंग चलाने वाली प्रियंका पाठक ने बताया कि उनके यहां केवल 25 से 40 बच्चे पढ़ते हैं और सात अग्निशमन यंत्र भी लगे हैं। फायर एनओसी न मिलने से पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। वहीं एसपी. सिंह ने कहा कि जब वे बिजली व नगर निगम को व्यावसायिक दरों पर शुल्क दे रहे हैं तो भवन को व्यावसायिक श्रेणी में क्यों नहीं माना जाता। इस पर सचिव ने कहा, बिजली कनेक्शन या टैक्स देने से भवन व्यावसायिक नहीं हो जाता, भवन उपविधियों का पालन जरूरी है। सील कोचिंग को खोलने के लिए हेल्प डेस्क बनेगी अवैध रूप से सील हुए संस्थानों को राहत देने के लिए एलडीए 29 जून से प्राधिकरण के कमेटी हॉल में विशेष हेल्प डेस्क शुरू करेगा। कार्यशाला में एलडीए सचिव विवेक श्रीवास्तव ने कहा कि सुरक्षा मानकों का पालन करने वाले संस्थानों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। यहां संस्थान संचालक भवन मानचित्र, अग्नि सुरक्षा और अन्य जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत कर सील खोलने के लिए आवेदन कर सकेंगे। आवेदनों की जांच न्यूनतम 24 घंटे और अधिकतम 72 घंटे के भीतर पूरी की जाएगी। जिम्मेदारी से नहीं बच सकते कुछ संचालकों ने तर्क दिया कि वे किराये के भवनों में संस्थान संचालित करते हैं, सुरक्षा मानकों की जिम्मेदारी भवन मालिकों की होनी चाहिए। इस पर अफसरों ने कहा कि विद्यार्थियों व कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। संस्थान संचालक अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते हैं।

श्री अकाल तख्त साहिब में पेशी से पहले CM भगवंत मान और सिसोदिया ने की रणनीतिक चर्चा

अमृतसर. श्री अकाल तख्त साहिब पर सोमवार को प्रस्तावित पेशी से एक दिन पहले आम आदमी पार्टी (आप) की 11:30 बजे अमृतसर के सर्किट हाउस में अपने सभी विधायकों व मंत्रियों की विशेष बैठक होगी। बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत मान भी शामिल होंगे। बैठक में पार्टी धार्मिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस पूरे घटनाक्रम पर अपना रुख स्पष्ट करने के साथ ही साथ आगे की रणनीति तय करेगी। हालांकि मुख्यमंत्री भगवंत मान को अब तक कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। बावजूद इसके उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से उन्हें बुलाया जाता है, तो वे वह सम्मानपूर्वक उपस्थित होंगे। श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश होने से पहले रविवार स्तरीय अमृतसर में बैठक रखी है, जिसमें विशेष तौर पर भाग लेने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल व पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया भी पहुंच चुके हैं।

दुर्ग को मिलेगा नया DEO कार्यालय, 100 वर्ष पुराने भवन की जगह बनेगा आधुनिक परिसर

दुर्ग. दुर्ग जिला मुख्यालय स्थित लगभग 100 वर्ष पुराने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय भवन का शीघ्र ही नवनिर्माण किया जाएगा। लंबे समय से जिले की शिक्षा व्यवस्था के संचालन का केंद्र रहे इस ऐतिहासिक भवन को आधुनिक सुविधाओं युक्त नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा। जर्जर हो चुके वर्तमान भवन के स्थान पर बनने वाला नया कार्यालय शिक्षा प्रशासन को अधिक व्यवस्थित, प्रभावी, पारदर्शी एवं जनसुविधा के अनुरूप बनाएगा। शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय केवल एक प्रशासनिक भवन नहीं, बल्कि जिले की संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था का प्रमुख केंद्र होता है। यहीं से विद्यालयों के संचालन, शिक्षकों की व्यवस्थाओं, विद्यार्थियों के हितों, शैक्षणिक गुणवत्ता, नवाचारों तथा शासन की शिक्षा संबंधी योजनाओं का प्रभावी संचालन और अनुश्रवण किया जाता है। इसलिए इस कार्यालय का आधुनिक, सुरक्षित और सुव्यवस्थित होना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नया भवन राशि स्वीकृति होने के बाद निर्माण प्रारंभ होगा। आज इंजीनियर के साथ पुराना भवन का निरीक्षण कर जल्द ही ड्राइंग डिज़ाइन तैयार करने निर्देश दिए।

सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव! शिक्षकों के साथ अब अधिकारी भी ऑनलाइन दर्ज करेंगे उपस्थिति

भोपाल. मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने उपस्थिति व्यवस्था को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। अब तक ई-अटेंडेंस (E-Attendance Mandatory) केवल शिक्षकों के लिए लागू थी, लेकिन अब विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करेंगे। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आयुक्त अभिषेक सिंह ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से स्कूल शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी हमारे शिक्षक प्रणाली के माध्यम से अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करेंगे। इसके साथ ही अवकाश संबंधी जानकारी भी ऑनलाइन माध्यम से दर्ज करना अनिवार्य होगा। सभी स्तरों पर लागू होगी ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था नए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि E-Attendance प्रणाली अब स्कूल शिक्षा विभाग के सभी स्तरों पर समान रूप से लागू होगी। इसका उद्देश्य विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों की उपस्थिति की बेहतर निगरानी करना है। एक जुलाई 2026 से पूरी व्यवस्था डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएगी। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी और व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इन कार्यालयों में लागू होगा नया नियम DPI के आदेश के अनुसार, यह व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी कार्यालयों में लागू रहेगी। इसमें लोक शिक्षण संचालनालय (DPI), राज्य शिक्षा केंद्र, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय, जिला शिक्षा केंद्र और विभिन्न प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर कार्यरत अधिकारी और कर्मचारियों को नियमित रूप से हमारे शिक्षक एप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करनी होगी। साथ ही अवकाश से जुड़ी जानकारी भी इसी प्रणाली में अपडेट करनी होगी। कार्यालय प्रमुखों की तय की गई जिम्मेदारी डीपीआई ने आदेश में संबंधित कार्यालय प्रमुखों और प्रशिक्षण संस्थान प्रमुखों को भी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधीन कार्यरत सभी अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करें। यदि किसी स्तर पर व्यवस्था के पालन में लापरवाही सामने आती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय प्रमुख की होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करना सभी संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी। शिक्षक संगठनों ने फैसले का किया स्वागत इस निर्णय का शिक्षक संगठनों ने स्वागत किया है। शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि संगठन लंबे समय से मांग कर रहा था कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन की ओर से आदेश जारी होने के बाद विभागीय व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी स्तरों पर जवाबदेही तय होगी।

डीटीसी की नई योजना: बसों की लाइव लोकेशन और टाइमिंग मोबाइल ऐप और डिजिटल बोर्ड पर दिखेगी

नई दिल्ली  मेट्रो की तरह बस स्टॉप पर खड़े यात्रियों को भी पता चलेगा कि अगली आने वाली बस किस रूट नंबर की है और वह कितनी देर में बस स्टॉप पर पहुंचेगी। यात्रियों को यह जानकारी न सिर्फ मोबाइल पर ऐप के जरिए बल्कि बस स्टॉप पर लगने वाले डिजिटल पब्लिक इन्फर्मेशन बोर्ड पर भी मिलेगी। डीटीसी इसके लिए आईआईटी कानपुर की भी मदद लेगा। पिछले सप्ताह डीटीसी बसों को लेकर हुई बैठक में इस पर फैसला हुआ है। सरकार डीटीसी बसों के रूटों के बेहतर रेशनलाइजेशन और टाइम-टेबल पर काम करना चाहती है। ताकि यात्री जिस रूट की बस पकड़ना चाहते हैं। उसे लाइव ट्रैक कर सकें। अधिकारियों ने कहा कि इसे लागू करने के लिए तकनीकी मदद आईआईटी कानपुर से लेंगे। इन्फ्रास्ट्रक्चर लेवल पर 3500 से अधिक बस स्टॉप को पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा। यात्रियों को होगी आसानी बस स्टॉप पर खड़े यात्री जान सकेंगे कि अगली आने वाली बस किस रूट नंबर की है। बसों की लाइव ट्रैकिंग सेवा शुरू करने से पहले आईआईटी दिल्ली और DTIDC (दिल्ली परिवहन अवसंरचना विकास निगम) मिलकर एक स्टडी भी कर रहे है, ताकि दिल्ली के बस नेटवर्क को मजबूत, डेटा-आधारित और बेहतर तरीके से फिर से डिजाइन किया जा सके। वर्तमान में दिल्ली में ईस्ट दिल्ली में 121, वेस्ट जोन में 181 और नॉर्थ जोन में 194 बस रूट्स रेशनलाइजेशन पर भी काम चल रहा है। कैसे बेहतर होगी बसों की लाइव ट्रैकिंग ? पिछली सरकार में भी बसों की लाइव ट्रैकिंग व्यवस्था की शुरुआत की गई थी, लेकिन यह सिर्फ एनडीएमसी एरिया के बस स्टॉप और चार्टर ऐप, वन दिल्ली ऐप पर उपलब्ध थी। मगर तब डीटीसी और क्लस्टर स्कीम के तहत दो बसों में लगे जीपीएस का रखरखाव ठीक नहीं होने के कारण योजना पटरी से उतर गई। अब मौजूदा सरकार में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाई गई है। अब दिल्ली में क्लस्टर स्कीम को खत्म करके सिर्फ डीटीसी के पास बसों का परिचालन है। बसें ओपेक्स मॉडल पर चलाई जा रही है, यानी परिचालन से लेकर रखरखाव की जिम्मेदारी निजी कंपनी के पास है। इसके अलावा डीटीसी ने अपना खुद का एक कमांड कंट्रोल सेंटर बनाया है, जहां पर सभी बसों की जीपीएस के जरिए निगरानी की जा रही है। आईआईटी कानपुर से तकनीकी मदद ली जाएगी। इसके अलावा अब सिर्फ एनडीएमसी एरिया ही नहीं बल्कि पूरी दिल्ली में 3500 से अधिक बस स्टॉप को पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है।  

मुख्यमंत्री सैनी का निर्देश: वर्टिकल स्कूल बिल्डिंग और बेहतर सुविधाओं पर जोर

 चंडीगढ़ हरियाणा में सरकारी स्कूलों के खस्ताहाल भवनों को गिराकर नए भवन का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही टेंडर जारी किए जाएंगे। नया भवन बनने तक इन स्कूलों को पास के सरकारी भवन या दूसरे स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा। व्यवस्थाएं जांचने के लिए प्रथम श्रेणी अधिकारियों को स्कूलों का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी (सीएमजीजीए) के साथ बैठक में कहा कि नए बनने वाले भवन न सिर्फ आकर्षक हों, बल्कि वर्टिकल रूप में हों। बाकी जगह का इस्तेमाल बच्चों के लिए प्ले ग्राउंड के रूप में किया जाए। स्कूलों में उपलब्ध साइंस लैब, कंप्यूटर लैब तथा अन्य सुविधाएं बच्चों को सुचारू रूप से मिलनी चाहिए। स्कूलों में ड्यूल डेक्स जल्द उपलब्ध कराने तथा पुराने हो चुके कंप्यूटर व अन्य उपकरणों की एक माह के अंदर नीलामी कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के समक्ष सीएमजीजीए द्वारा दिखाई गई रिपोर्ट के आधार पर जिन स्कूलों में खामियां मिली हैं, उनकी रिपोर्ट तलब की गई है। जिला शिक्षा अधिकारियों से लेकर प्रिंसिपल अथवा मुख्य अध्यापकों की जवाबदेही तय की जाएगी। अगर किसी स्कूल में खामी मिलती है तो उस संबंध में तुरंत एक्शन लिया जाए। बैठक में मुख्यमंत्री के समक्ष ग्रामीण इलाकों में महाग्राम योजना के तहत हो रहे कार्यों के अलावा अमृत सरोवर के मूल्यांकन और जलघरों की स्थिति संबंधित रिपोर्ट दिखाई गई। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि हरियाणा में जिन गांवों में महाग्राम योजना के कार्य चल रहे हैं, उनमें एसटीपी पर मुख्य रूप से फोकस किया जाए।

80 हजार करोड़ की रिफाइनरी परियोजना को रफ्तार, राजस्थान में 300 से अधिक नए पेट्रोल पंप खुलेंगे

जयपुर राजस्थान में करीब 80 हजार करोड़ रुपए के रिफाइनरी परियोजना के तहत हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) प्रथम चरण में 300 से अधिक नये पेट्रोल पंप खोलेगा। राज्य के मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने शनिवार को सचिवालय में एक उच्च स्तरीय बैठक लेकर एचपीसीएल और एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड के अधिकारियों के साथ चर्चा कर सरकारी भूमि को पट्टे पर देकर 300 से ज्यादा स्थानों पर पेट्रोल पंप लगाने के मामले में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की। उल्लेखनीय है कि राजस्थान रिफाइनरी राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है। 80 हजार करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से राज्य में नए निवेश, उद्योग और रोजगार को बड़ा बूस्ट मिलेगा। इस योजना के तहत 304 स्थानों की पहचान की जा चुकी है। इन नए रिटेल आउटलेट्स की स्थापना के लिए एचपीसीएल लगभग 400 करोड़ रुपए का निवेश करेगा। एक नई नीति तैयार की जाएगी बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 31 जुलाई तक इस संबंध में एक नई नीति तैयार की जाएगी, जिसके तहत सरकारी भूमि एचपीसीएल को पट्टे पर उपलब्ध कराई जाएगी ताकि नए पेट्रोल पंप स्थापित किए जा सकें। एक नई नीति तैयार की जाएगी पीएम चार जुलाई को रिफाइनरी का उद्घाटन करेंगे इसके अलावा एचपीसीएल और एचआरआरएल ने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि आरटीपीपी अधिनियम के तहत सरकारी विभागों द्वारा ईंधन खरीद में उन्हें प्रेफरेंशियल सप्लायर का दर्जा दिया जाए। इसका उद्देश्य राजस्थान में स्थित एचआरआरएल रिफाइनरी की क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार जुलाई को रिफाइनरी का उद्घाटन करेंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने क्या-क्या कहा? मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य की आर्थिक प्रगति, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता के आधार हैं।'अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस' पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 'राज्य सरकार युवाओं को एंटरप्रेन्योरशिप के लिए बढ़ावा दे रही है, स्थानीय प्रोडक्ट्स को दुनियाभर में पहचान दिलाना चाहते हैं। हम विकास के साथ-साथ विरासत को भी बचाना चाहते हैं। के समन्वय के साथ राजस्थान को देश का अग्रणी औद्योगिक राज्य बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। राजस्थान देश में सबसे आगे रहने वाला इंडस्ट्रियल राज्य बने इसके लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की पॉलिसी, कोशिशों और एंटरप्रेन्योर के साहस और मेहनत की वजह से राजस्थान आज देशा का चौथा सबसे बड़ा एमएसएमई राज्य बन चुका है जहां 33 लाख से ज्यादा एमएसएमई इंडस्ट्री काम कर रही है।

पंजाब के मोगा में दिल दहला देने वाली घटना, खूंखार कुत्तों के हमले में मजदूर की दर्दनाक मौत

मोगा. थाना मेहना के गांव कपूरे में गत रात्रि खूंखार कुत्तों द्वारा खेत से काम करके वापस लौट रहे एक मजदूर को बुरी तरह नोच डाला है। जिसकी मौका पर मौत हो गई घटना का पता सुबह परिवार को लगा तो परिवार ने सूचना पुलिस को दी पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोगा के सिविल अस्पताल में पहुंचा दिया है। सिविल अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार 50 वर्षीय सरबजीत सिंह पुत्र भजन सिंह निवासी कपूरे गांव के ही एक किसान के पास मेहनत मजदूरी करता था। वह गत रात्रि खेत में फसल को पानी लगाने के लिए गया था पानी लगाने के बाद वह पैदल वापस लौट रहा था तो रास्ते में खूंखार कुत्तों के झुंड ने सरबजीत सिंह को घेर लिया और बुरी तरह नोच डाला। जिसकी मौका पर ही मौत हो गई सूचना मिलते ही शव को कब्जे में लेकर आगामी जांच शुरू कर दी है। पहले भी हो चुकी है ऐसी घटनाएं शव को लेकर सिविल अस्पताल में पहुंचे गांव वासियों ने बताया कि उनके गांव में खूंखार कुत्तों का झुंड अक्सर ही लोगों को अपना शिकार बना लेता है गांव में बहुत ज्यादा गिनती में खूंखार कुत्ते घूमते हैं इससे पहले भी खूंखार कुत्तों के झुंड ने गांव के कई लोगों को अपना शिकार बना लिया यह कोई पहली घटना नहीं है इससे पहले भी लगभग 6-7 लोग काट कर घायल किया जा चुके हैं।

दुर्ग: BSP ने 119 कार्मिकों को किया सम्मानित, उत्कृष्ट प्रदर्शन पर दिए गए पुरस्कार

भिलाई नगर. सेल – भिलाई इस्पात संयंत्र की ऐतिहासिक नेहरू अवार्ड योजना के अंतर्गत वर्ष 2025 के लिए नेहरू पुरस्कार वितरण समारोह का प्रथम चरण शनिवार को आयोजित किया गया। दो दिवसीय इस पुरस्कार वितरण समारोह के प्रथम दिन संयंत्र के कुल 119 पुरस्कारों को तीन श्रेणियों-जवाहर पुरस्कार, नेहरू पुरस्कार तथा जवाहर लाल नेहरू समूह पुरस्कार से सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि कार्यकारी निदेशक प्रभारी (बीएसपी) एवं कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन) अजय कुमार चक्रवर्ती रहें व विशिष्ट अतिथि के तौर पर कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) प्रवीण निगम, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार, कार्यकारी कार्यपालक निदेशक (संकार्य) तुषार कांत, कार्यपालक निदेशक (माइंस) कमल भास्कर तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ। विनीता द्विवेदी उपस्थित रहीं। नेहरू पुरस्कार वितरण समारोह के प्रथम दिवस जवाहर पुरस्कार श्रेणी में 33 अधिकारियों को उनके व्यक्तिगत योगदान के लिए सम्मानित किया गया। नेहरू पुरस्कार श्रेणी में 63 कमर्चारियों को व्यक्तिगत उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि जवाहर लाल नेहरू समूह पुरस्कार श्रेणी में 23 समूहों को उनके सामूहिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। प्रथम चरण में कुल 119 पुरस्कारों से अधिकारियों एवं कमर्चारियों को संयंत्र की प्रगति एवं उत्कृष्ट कार्य निष्पादन में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में ए।के। चक्रवर्ती ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि ये पुरस्कार उनके समर्पण, प्रतिबद्धता तथा संगठन की प्रगति में दिए गए उत्कृष्ट योगदान का सम्मान हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि ये पुरस्कार व्यक्तिगत रूप से प्रदान किए जाते हैं, किंतु वे पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों के भी प्रतीक हैं। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (मानव संसाधन) जे एन ठाकुर ने अतिथियों, पुरस्कार विजेताओं एवं उपस्थित जनों का स्वागत करते हुए नेहरू पुरस्कार योजना की रूपरेखा एवं वर्ष 2025 के पुरस्कारों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने संयंत्र की सतत प्रगति एवं उत्कृष्ट निष्पादन के लिए निरंतर योगदान देने का आह्वान किया। समारोह में कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ प्रबंधक (मानव संसाधन) सुश्री प्रियंका मीणा ने किया व धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ प्रबंधक (मानव संसाधन) श्री निवेश विजयन ने दिया। प्रशस्ति पत्र हेतु विजेताओं के नाम का वाचन सहायक प्रबंधक (मानव संसाधन) मिहिर मनोहर तथा उप प्रबंधक (मानव संसाधन) समायला अंसारी ने किया। इस अवसर पर इस्पात बिरादरी के सदस्य एवं पुरस्कार विजेताओं के परिजन उपस्थित रहे।

कटनी वन्यजीव त्रासदी! जहरीला तालाब बना काल, 14 चीतल-सांभर मरे, टाइगरों की सुरक्षा पर सवाल

कटनी. जिले में वन्य प्राणियों की लगातार संख्या बढ़ रही है। वन्य प्राणियों से जहां आमजन को खतरा है तो वहीं वन्य प्राणी भी आमजन से सुरक्षित नहीं है। इसका एक उदाहरण सामने आया है कि विजयराघगढ़ क्षेत्र में करौंदी-घुघरी के पास तालाब में जहर मिलाकर 14 निर्दोष वन्य प्राणियों (चीतल व सांभर) का शिकार किया गया। जिले के बरही क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांव में बाघों का ठिकाना है, तो इसके साथ ही शाहडार के जंगल में बाघ और तेंदुए सहित वन्य प्राणियों की उपस्थिति लगातार बनी हुई है। घटना सामने आने के बाद अब बाघों और अन्य प्राणियों के जीवन को भी खतरा बना हुआ है। जलस्त्रोतों की बढ़ा दी गई है सुरक्षा जिले में सक्रिय शिकारी वन विभाग के जल स्रोतों के आसपास निगरानी न रखने का फायदा उठाकर इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। विजयराघवगढ़ की घटना से पहले भी जिले में एक बार जलस्त्रोत में जहर मिलाने की घटना हो चुकी है। ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र में कुंड में जहर मिलाने से तेंदुए सहित अन्य वन्यप्राणियों की जान गई थी। घटना सामने आने के बाद अब वन विभाग अलर्ट हुआ है। जिले में जलस्त्रोतों के आसपास सुरक्षा व गश्त बढ़ाई गई है। दूसरी ओर शिकार करने वाले पकड़े गए तीनों आरोपियों को वन विभाग ने 14 दिन की रिमांड पर लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है कि घटना के पीछे कोई संगठित गिरोह तो शामिल नहीं है। बरही, शाहडार का जंगल स्थाई ठिकाना जिले के जंगलों में भी बाघों की मौजूदगी है, जिसमें विशेष रूप से बड़वारा वन परिक्षेत्र के बरही के करौंदीकला, खितौली, झिरिया, सलैया, कुआं सहित अन्य कई गांवों हैं, जिनके जंगलों में वनराज का ठिकाना है। विशेष रूप से कुआं बीट में बाघों की स्थाई मौजूदगी है और लगभग आठ बाघों का मूवमेंट यहां रहता है। इसके साथ ही बगल से लगे बांधवगढ़ के जंगल से भी बाघों का आना-जाना रहता है। दूसरी ओर ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र का शाहडार का घना जंगल भी वन्य प्राणियों का पसंद का ठिकाना है। यहां पर भी बाघ का स्थाई ठिकाना है और उसके साथ तेंदुए, चीतल, मोर सहित अन्य वन्य प्राणी बड़ी संख्या में हैं। गर्मी के दिनों में वन्य प्राणी रात को प्यास बुझाने के लिए जंगल के किनारे से लगे गांवों के जलस्त्रोतों तक पहुंचते रहे हैं। विजयराघवगढ़ की घटना सामने आने के बाद अब बड़े वन्य प्राणियों पर जान का खतरा मंडराने लगा है। ढीमरखेड़ा में सामने आई थी घटना विजयराघवगढ़ के करौंदी-घुघरी में तालाब के पानी में जहर मिलाकर वन्य प्राणियों के शिकार की घटना जिले में पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी जिले में ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वर्ष 2010-11 में भी जिले के ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र के करौंदी बीट के पास ऐसी घटना सामने आई थी, जिसमें एक प्राकृतिक जलस्त्रोत में शिकारियों ने जहर मिलाया था। उसका पानी पीने से तेंदुए, चीतल, मोर सहित अन्य वन्य प्राणियों की मौत हुई थी। ढीमरखेड़ा क्षेत्र में ही इस साल अप्रैल माह में वन विभाग की टीम ने तीन शिकारियों को वन्य प्राणियों को मारने लगाए गए करंट के तार के साथ पकड़ा था तो उमरियापान, ढीमरखेड़ा, बड़वारा क्षेत्र में करंट लगाकर शिकार करने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। घटना के बाद जागा वन अमला विजयराघवगढ़ के करौंदी-घुघरी में शुक्रवार की सुबह तालाब के किनारे 12 चीतल व दो सांभर मृत अवस्था में मिले थे। बड़ी संख्या में वन्य प्राणियों की मौत से वन विभाग सकते में आ गया था। आनन-फानन में डॉग स्क्वाड बुलाकर आरोपियों की तलाश शुरू की गई, जिसमें वन विभाग ने शिकार करने वाले तीन शिकारियों को गिरफ्तार किया है। घटना के बाद सामने आया कि जंगल की सीमा से लगे जलस्त्रोतों के आसपास शिकारी सक्रिय न हों, इसको लेकर वन विभाग का फील्ड का अमला नजर नहीं रख रहा है और उसी का नतीजा था कि 14 निर्दोष वन्य प्राणियों की जान चली गई। घटना के बाद विभाग ने जहां तालाब का पानी खाली करा दिया है तो वहीं जलस्त्रोतों की सुरक्षा बढ़ाई गई है और अब नजर रखी जा रही है। अमले को दिया प्रशिक्षण वन्य प्राणियों की मौत के बाद अब वन विभाग के वनरक्षकों व अधिकारियों को जिले भर में ऐसे जलस्त्रोत जहां पर वन्य प्राणियों का आना-जाना रहता है, वहां पर तैनात करने के साथ गश्त करने और निगरानी रखने को लगाया गया है। शनिवार को डीएफओ सहित अन्य अधिकारियों ने फील्ड के अमले को पानी में जहर की जांच करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया, जिससे गश्त करते समय कर्मचारी पता लगा सकें कि पानी कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं घोला गया है। वन विभाग की टीम बड़वारा के बांधवगढ़ की सीमा से लगे गांवों, बाघ, तेंदुए सहित अन्य वन्य प्राणियों के ठिकानों के आसपास, ढीमरखेड़ा के शाहडार व अन्य वन क्षेत्रों में भी लगातार निगरानी कर रही है। इनका कहना है विजयराघवगढ़ की घटना के बाद आरोपितों को पकड़ा गया है और उनसे रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की जा रही है। जिले में बाघों का ठिकाना है और ऐसे क्षेत्रों में विशेष निगरानी कराई जा रही है। जंगलों से लगे जलस्त्रोतों के आसपास गश्त बढ़ाने के साथ ही अमले को पानी की जांच करने के लिए भी जानकारी दी गई है। – गर्वित गंगवार, जिला वनमंडल अधिकारी