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जगदलपुर में सोमवार से शुरू होगा खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का एथलेटिक्स रोमांच

जगदलपुर में सोमवार से शुरू होगा 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' का एथलेटिक्स रोमांच जगदलपुर  छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक धरोहर के केंद्र बस्तर में सोमवार से खेलों का एक नया इतिहास लिखा जाने वाला है। 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026' के प्रथम संस्करण के तहत रायपुर में हुए भव्य उद्घाटन के बाद अब खेल प्रेमियों की नजरें जगदलपुर के धरमपुरा स्थित क्रीड़ा परिसर पर टिकी हैं, जहाँ 30 मार्च से एथलेटिक्स की रोमांचक स्पर्धाएं शुरू होने जा रही हैं। इस आयोजन का शुभंकर 'मोर वीर' जनजातीय युवाओं के अदम्य साहस और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व कर रहा है। केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में शुरू हुआ यह महाकुंभ अब अपने सबसे प्रतीक्षित चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसमें देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 443 प्रतिभावान खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे। बस्तर में आयोजित होने वाली एथलेटिक्स स्पर्धाओं में कुल 17 विधाएं शामिल हैं, जिनमें 100 मीटर की फर्राटा दौड़ से लेकर 10,000 मीटर की लंबी दूरी की रेस, हर्डल्स, रिले रेस, और ऊँची व लंबी कूद जैसी श्रेणियाँ आकर्षण का केंद्र रहेंगी। पहले ही दिन डिस्कस थ्रो, लॉन्ग जंप और 110 मीटर हर्डल्स जैसे फाइनल मुकाबले देखने को मिलेंगे। शाम होते-होते 400 मीटर और रिले रेस के रोमांच के बीच विजेता खिलाड़ियों को पदक प्रदान किए जाएंगे। इस पूरे आयोजन के दौरान एथलेटिक्स में कुल 102 पदकों के लिए खिलाड़ी पसीना बहाएंगे, जिनमें छत्तीसगढ़ के 33 स्थानीय खिलाड़ी भी राज्य का मान बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।  प्रशासनिक स्तर पर इस आयोजन को 'खेलो इंडिया' के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में खिलाड़ियों के आवास के लिए शहर के 13 प्रमुख होटलों को चिन्हित किया गया है, जबकि उनके आवागमन के लिए एसी वाहनों की सुविधा सुनिश्चित की गई है। सुरक्षा, चिकित्सा और अग्निशमन की पुख्ता व्यवस्था के साथ-साथ पर्यटन विभाग द्वारा आगंतुक खिलाड़ियों और ऑफिशियल्स को बस्तर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि वे खेल के साथ-साथ यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य और अनूठी संस्कृति से भी रूबरू हो सकें। भारतीय खेल प्राधिकरण के मार्गदर्शन में आयोजित यह स्पर्धा न केवल जनजातीय प्रतिभाओं को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगी, बल्कि बस्तर की वैश्विक छवि को एक खेल गंतव्य के रूप में भी स्थापित करेगी।

राम की पैड़ी पर आयोजित कार्यक्रम का ग्राम्य विकास आयुक्त व डीएम एवं सीडीओ ने किया शुभारंभ

अयोध्या में सरस मेले के साथ साकेत संध्या का आगाज राम की पैड़ी पर आयोजित कार्यक्रम का ग्राम्य विकास आयुक्त व डीएम एवं सीडीओ ने किया शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से ग्रामीण विकास को नई दिशा राम की पैड़ी पर सजा ग्रामीण विकास और संस्कृति का अनूठा संगम अयोध्या राम की नगरी अयोध्या में ग्रामीण विकास और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से ग्राम्य विकास विभाग द्वारा राम की पैड़ी पर 30 मार्च तक आयोजित होने वाले सरस मेले व साकेत संध्या अयोध्या का रविवार की शाम स्थानी कलाकारों को मंच देने का मंच देने का मौका भी मिलेगा।   उत्तर प्रदेश सरकार के ग्राम्य विकास आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी व जिलाधिकारी निखिल टीकाराम और मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने शुभारंभ किया। इसी के साथ साकेत संध्या का भी आगाज हुआ। इस अवसर पर श्रद्धा, संस्कृति और ग्रामीण विकास का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। उत्तर प्रदेश सरकार के ग्राम्य विकास आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी, जिलाधिकारी निखिल टीकाराम एवं मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह उपाध्यक्ष आकांक्षा समिति अयोध्या की प्रियंका ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके उपरांत स्वर सती जी के चित्र पर दीपप्रज्वलित व माल्यार्पण कर विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया। सरस मेला साबित होगा बड़ा मंच  मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि सरस मेला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए एक बड़ा मंच साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को नई पहचान मिलेगी। इन उत्पादों की बिक्री से महिलाओं की आय, आत्मविश्वास और आजीविका में वृद्धि होगी। साथ ही, उन्हें आत्मनिर्भर बनने के नए अवसर प्राप्त होंगे। सरयू आरती के बाद सप्ताह के हर शनिवार व रविवार को साकेत संध्या का आयोजन किया जाएगा।उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच के तहत ऐसे मेले ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और महिलाओं को सशक्त बनाने का माध्यम बन रहे हैं। विभिन्न जनपदों के लगे लगभग 47 स्टॉल अयोध्या सहित देवीपाटन मंडल के विभिन्न जनपदों से लगभग 47 स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए विविध उत्पाद प्रदर्शित एवं विक्रय के लिए उपलब्ध हैं। आकर्षण का केंद्र बने उत्पादों में अचार, राम मंदिर के मॉडल, गोलगप्पे, गाय के गोबर से निर्मित धूपबत्ती, टोकरी एवं सजावटी सामान, जैविक खाद, पापड़, फर्नीचर, सिलाई-कढ़ाई के उत्पाद तथा दुग्ध उत्पाद शामिल हैं। ये उत्पाद न केवल स्थानीय कौशल को प्रदर्शित करते हैं, बल्कि ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को भी सुदृढ़ करते हैं। मंडल के सभी जनपदों से उत्कृष्ट स्वयं सहायता समूहों को मेले में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। मेले में लाइटिंग और साउंड शो की समुचित व्यवस्था मेले में व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। मंच, टेंटेज, साउंड सिस्टम, मैनपावर, लाइटिंग और साउंड शो की समुचित व्यवस्था की गई है। राम की पैड़ी का वातावरण सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गुंजायमान है, जहां साकेत संध्या के माध्यम से अयोध्या की प्राचीन सांस्कृतिक झलकियां प्रस्तुत की जा रही हैं। मेले का उद्देश्य केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण कारीगरों और महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ना तथा पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति से परिचित कराना भी है। स्थानीय कलाकारों द्वारा ‘साकेत संध्या’ में भक्ति भजनों की प्रस्तुति दी गई, साथ ही उन्हें अपनी कला को मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर भी मिला। आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का उत्कृष्ट उदाहरण यह मेला महिलाओं की आजीविका संवर्धन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का उत्कृष्ट उदाहरण है। हजारों श्रद्धालु और पर्यटक राम की पैड़ी पर पहुंचकर इन उत्पादों को देख रहे हैं और खरीदारी कर रहे हैं। सरस मेला न केवल आर्थिक रूप से उपयोगी साबित हो रहा है, बल्कि अयोध्या को सांस्कृतिक और ग्रामीण विकास के केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ग्रामीण भारत के सामर्थ्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रतीक मेले के दौरान सभी नागरिकों और पर्यटकों से अपील की गई है कि वे स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करें और स्वदेशी को बढ़ावा दें। यह आयोजन राम मंदिर की पावन भूमि पर ग्रामीण भारत के सामर्थ्य और महिलाओं की मेहनत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रतीक बन गया है। इस मौके पर में विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष अनुराज जैन,नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार, श्रीमती सरिता वर्मा, उपायुक्त रोजगार सरिता गुप्ता, जिला मिशन प्रबन्धक सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहें।

मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम ने मध्यप्रदेश शासन को ₹8 करोड़ का लाभांश किया भुगतान

भोपाल  मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम मर्यादित के संचालक मण्डल की बैठक में निगम के अंशधारी मध्यप्रदेश शासन को वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक के अंतरिम लाभांश के रूप में राशि रू. 8.00 करोड़ का भुगतान किये जाने का निर्णय लिया गया है ।  तदानुसार मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रम में माननीय मंत्री, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय म.प्र. शासन एवं माननीय अध्यक्ष, मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम चेतन्य काश्यप द्वारा मध्यप्रदेश शासन के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय डॉ. मोहन यादव जी को राशि रू. 8.00 करोड़ अंतरिम लाभांश का चेक प्रदान किया गया।  इस अवसर पर सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम विभाग के प्रमुख सचिव राघवेन्द्र कुमार सिंह तथा आयुक्त, एम.एस.एम.ई, प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम दिलीप कुमार एवं निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

महिलाओं को आर्थिक सहारा: पंजाब सरकार की ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ को हरी झंडी

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ शुरू करने को मंजूरी दे दी। इस योजना के तहत 18 वर्ष या अधिक आयु की अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये व शेष महिलाओं को 1,000 रुपये सम्मान राशि मिलेगी। परिवार में अगर ऐसी महिलाओं की संख्या एक से ज्यादा है तो सभी को पैसे मिलेंगे। शर्त केवल यह है कि उनके पास पंजाब निवासी होने का आधार कार्ड व वोटर कार्ड होना चाहिए। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से दावा किया गया है कि इस योजना से राज्य की 97 प्रतिशत से अधिक महिलाओं को लाभ होगा। योजना का सामाजिक सुरक्षा पेंशनभोगियों को भी लाभ मिलेगा। हर महिला तक लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए सरकार ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की महिलाओं के लिए दस्तावेज पूरे करने, बैंक खाते सक्रिय करने व निर्बाध रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने में सहायता करेगी। योजना के लिए बजट में 9,300 करोड़ रुपये मंजूर किए जा चुके हैं। मानव शक्ति एवं सहायक नियुक्त करने को मंजूरी कैबिनेट ने झारखंड में पछवाड़ा केंद्रीय कोयला खदान (पीसीसीएम) के संचालन व रखरखाव के लिए ठेके के आधार पर मानव शक्ति और सहायक स्टाफ नियुक्त करने को भी मंजूरी दी। इसके लिए एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें प्रबंधकीय सचिव को चेयरमैन और चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर व डायरेक्टर/जनरेशन, पीएसपीसीएल को सदस्य शामिल किया जाएगा।

अलर्ट के बीच बड़ा सवाल: बर्ड फ्लू के समय ट्रेन से बिलासपुर पहुंचे हजारों चूजे

बिलासपुर. जिले में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद भी जूओं की सप्लाई जारी है. रविवार को दिल्ली से भारी मात्रा में चूजो की खेप बिलासपुर स्टेशन पहुंचा. स्टेशन परिसर में सभी चूजों को एकत्रित रखा गया है. वहां से चूजें कहां सप्लाई होगा. इसके बारे में किसी ने कोई जानकारी नहीं दी हैं. दूसरी ओर जिला प्रशासन ने मुर्गियों की बिक्री पर रोक लगा दी है. इसके बाद भी चूजों की खुलेआम सप्लाई होना चिंता का विषय बन गया है. बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में चूजों की खेप पहुंची. यह खेप दिल्ली से मंगाई गई थी. चूजों को स्टेशन पर खुले तौर पर उतारा गया, जहां न तो किसी प्रकार की विशेष सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम किया गया और न ही प्रशासन के अफसर मौजूद रहे. चूजों की खेप को देखते ही स्टेशन परिसर में यात्रियों के बीच हडकंप मच गया. आसपास बर्ड फ्लू की चर्चाएं तेज हो गईं. शहर के समीप कोनी स्थित शासकीय कुक्कुट पालन केंद्र में 30 हजार से अधिक मुर्गियों और पक्षीयों की बर्ड फ्लू की वजह से एकाएक मौत हो चुकी हैं. तब से कलेक्टर संजय अग्रवाल ने हाई अलर्ट जारी करते हुए मुर्गियों की बिक्री और सप्लाई पर रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं. शहर व ग्रामीण क्षेत्र के मुर्गी फार्म को बंद कराया गया है. कहीं भी खुलेआम मुर्गियों की बिक्री नहीं हो रही हैं. इस बीच अचानक रेलवे स्टेशन में भारी संख्या में चूजों की खेप पहुंचने से संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई है. तखतपुर में भी फैला बर्ड फ्लू बर्ड फ्लू संक्रमण का असर शहर से अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है. रविवार को तखतपुर क्षेत्र में भी मुर्गियों की मौत होने की पुष्टि हुई है. मुर्गी फार्म संचालक द्वारा लापरवाही पूर्वक मृत मुर्गियों को एक बोरी में भरकर खुले जगह में फेंक दिया गया है. जिसे कुत्ते नोच-नोच कर खाते नजर आए. मृत मुर्गियां इधर-उधर फैल रही हैं. जिला प्रशासन की ओर से मृत मुर्गियों को फेंकने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है. बर्ड फ्लू नियंत्रण के लिए कंट्रोल रूम, फायदा नहीं जिले में बर्ड फ्लू की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने कंट्रोल रूम की स्थापना की है. कलेक्टोरेट बिल्डिंग के कक्ष क्रमांक 25 में स्थित यह कंट्रोल रूम आम नागरिकों और संबंधित विभागों के बीच सूचना के आदान-प्रदान का प्रमुख माध्यम बनेगा. कंट्रोल रूम का लैंडलाइन नंबर (07752-251000)जारी किया गया है, जिस पर नागरिक बर्ड फ्लू से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी, शिकायत या सूचना दे सकेंगे. यह कंट्रोल रूम दिन-रात 24 घंटे सक्रिय है. इसके बाद भी चूजों की खुलेआम सप्लाई जारी है.

छत्तीसगढ़ को मिली बड़ी सौगात: बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट से शुरू हुई रात्रि हवाई सेवा

बिलासपुर. बिलासपुर के बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट से आज रात्रि उड़ान सेवा की ऐतिहासिक शुरुआत हो गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नाइट ऑपरेशन्स का लोकार्पण किया और इसी दौरान स्वयं रात में पहली उड़ान से रायपुर के लिए रवाना हुए। विधायक धर्मजीत सिंह भी मुख्यमंत्री के साथ रात्रिकालीन उड़ान में रायपुर गए। उल्लेखनीय है कि एयरपोर्ट को 3सी वीएफआर से 3सी आईएफआर श्रेणी में उन्नत करने के लिए कुल 31 करोड़ 1 लाख रुपए की लागत से कार्य किया गया है। इस उन्नयन के बाद डीजीसीए ने 6 फरवरी 2026 को 3सी आईएफआर एवं रात्रि संचालन की अनुमति प्रदान की थी। समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने की। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में इस उपलब्धि को योजनाकारों, तकनीकी टीम, एयरपोर्ट कर्मियों और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि रात्रिकालीन उड़ान सेवा शुरू होने से बिलासपुर की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी हो गई है। इसके लिए यहां के जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने काफी संघर्ष किया है। उन्होंने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सुविधा बिलासपुर के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। रात्रि उड़ान सेवा शुरू होने से अब निर्धारित और अनिर्धारित उड़ानों के साथ-साथ आपातकालीन एवं मेडिकल फ्लाइट्स भी रात में संचालित हो सकेंगी, जिससे जीवनरक्षक सेवाएं और अधिक प्रभावी होंगी। बेहतर हवाई संपर्क से व्यापार, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से इस नई सुविधा का अधिकतम लाभ उठाने की अपील करते हुए सभी यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुखद यात्रा की कामना की। यह ऐतिहासिक पहल बिलासपुर को प्रदेश के प्रमुख हवाई केंद्रों में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। समारोह को केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने भी संबोधित किया। उन्होंने बिलासपुर की जनता को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। श्री साहू ने कहा कि बिलासपुर एयरपोर्ट में तमाम सुविधाएं विकसित हो रही हैं। रक्षा मंत्रालय से जमीन मिल चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई यात्रा करेगा” का सपना साकार हो रहा है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: यूपी में विकास की नई मिसाल, अब घोषणाओं का नहीं, परिणामों का समय

यूपी में विकास अब घोषणा नहीं बल्कि परिणाम है, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट साबित हुआ सफल उदाहरण शिलान्यस से उद्घाटनों तक पहुंची यूपी की विकास यात्रा, वर्ष 2017 के बाद से अनेक परियोजनाएं उतरीं धरातल पर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को साकार करती परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन ने बदली उत्तर प्रदेश की तस्वीर लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और दृढ़ संकल्प से वर्ष 2017 के बाद विकास की जो कहानी लिखी गई, वह अब केवल योजनाओं तक सीमित न रहकर, ज़मीन पर दिखने वाले परिणामों में बदल चुकी है। उत्तर प्रदेश में ‘डबल इंजन’ सरकार ने बड़े प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास ही नहीं किया, बल्कि तय समय में उनका उद्घाटन कर यह साबित किया कि यूपी में विकास अब घोषणा नहीं, बल्कि परिणाम है। इसका सबसे जीवंत उदाहरण जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन साबित हुआ। इस परियोजना का शिलान्यास 25 नवंबर 2021 को हुआ था और एयरपोर्ट के पहले फेज का उद्घाटन 28 मार्च 2026 को किया गया। यूपी का पांचवां इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के बढ़ते हवाई यातायात का दबाव कम करने के साथ पश्चिमी यूपी की विकास यात्रा को नए पंख प्रदान करेगा। जेवर और अयोध्या में रिकॉर्ड समय में बना इंटरनेशनल एयरपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के सफल क्रियान्वयन से आज उत्तर प्रदेश केवल घोषणाओं का नहीं, बल्कि धरातल पर उतरने वाली विकास परियोजनाओं का राज्य बन चुका है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर इसका एकमात्र उदाहरण नहीं है। एविएशन क्षेत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नौ वर्षों के शासनकाल में अयोध्या में फरवरी 2022 से बनना शुरू हुआ महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हुआ। 30 दिसंबर 2023 में उद्घाटन के बाद इस एयरपोर्ट ने अयोध्या को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर मजबूती से स्थापित किया। वहीं, प्रदेश के एविएशन सेक्टर में 10 मार्च 2024 की तारीख भी अहम रही, जब एक साथ आजमगढ़, अलीगढ़, चित्रकूट, मुरादाबाद और श्रावस्ती के हवाई अड्डों का उद्घाटन किया गया। इससे प्रदेश की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिली है। पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे की मिला सौगात, जल्द पूरा होगा गंगा एक्सप्रेस-वे सड़क नेटवर्क और कनेक्टिविटी की बात करें तो सीएम योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में 14 जुलाई 2018 को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास हुआ और 16 नवंबर 2021 को इसका उद्घाटन किया गया। इसी क्रम में बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्र में आर्थिक बदलाव की नई उम्मीद साबित हुआ। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की आधारशिला फरवरी 2020 में रखी गई थी और जुलाई 2022 में इसे जनता को समर्पित किया गया। यही नहीं, पश्चिम से पूर्व यूपी को जोड़ने वाला राज्य का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट गंगा एक्सप्रेसवे भी 18 दिसंबर 2021 को बनना शुरू हुआ है, जिसका उद्घाटन भी जल्द ही होने वाला है। देश की पहली रैपिड रेल, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस का हुआ शुभारंभ प्रदेश में रैपिड रेल और मेट्रो परियोजनाओं की बात करें तो देश की पहली रैपिड रेल नमो भारत, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस का शिलान्यास 8 मार्च 2019 को हुआ था। इसके पहले खंड का शुभारंभ 2023 में ही हो गया था, जबकि फरवरी 2026 तक यह पूरी तरह संचालित होने लगी है। इसी क्रम में 7 दिसंबर 2020 को आगरा मेट्रो की नींव रखी गई और मार्च 2024 में इसका उद्घाटन हुआ। वहीं, 22 फरवरी 2026 को मेरठ मेट्रो का शुभारंभ हुआ, जिसने शहरी परिवहन को नई पहचान दी। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में बन रही है ब्रह्मोस मिसाइल औद्योगिक और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करते हुए वर्ष 2019 में यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) की नींव रखी गई और वर्ष 2023 से इसका संचालन शुरू हो गया। इसके तहत कानपुर में दक्षिण एशिया के सबसे बड़े गोला-बारूद और मिसाइल संयंत्र अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस में फरवरी 2024 से उत्पादन कार्य शुरू हो चुका है। वहीं, प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट का उद्घाटन मई-जून 2025 में हुआ। वर्तमान में यूपीडीआईसी के छह नोड्स अलीगढ़, आगरा, कानपुर, लखनऊ, झांसी और चित्रकूट में लाखों करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है और रक्षा उत्पादों का निर्माण हो रहा है। योट्टा डेटा सेंटर और सैमसंग मोबाइल फैक्ट्री लाए आईटी क्रांति डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में सहायक ग्रेटर नोएडा में संचालित हीरानंदानी ग्रुप का योट्टा डेटा सेंटर डिजिटल सेवाओं और क्लाउड स्टोरेज में एशिया के बड़े डेटा केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है। इसका शिलान्यास वर्ष 2019 में किया गया था, जिसमें उत्पादन 2022 में शुरू हो गया था। इसी क्रम में जुलाई 2018 में नोएडा में सैमसंग मोबाइल फैक्ट्री के उद्घाटन से आज यूपी देश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में नंबर वन बन चुका है। यही नहीं, नोएडा, जेवर में जल्द ही सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का उत्पादन शुरू होने वाला है, जो यूपी को सेमीकंडक्टर हब के रूप में नई पहचान प्रदान करेगा, साथ ही आईटी सेक्टर में निवेश और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करेगा। अयोध्या में राम मंदिर और काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण से बढ़ा देश का गौरव  विरासत से विकास के विजन को साकार करते हुए उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक परियोजनाओं का विकास भी ऐतिहासिक बन चुका है। इस क्रम में 13 दिसंबर 2021 को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के उद्घाटन से वाराणसी में तीर्थयात्रियों के अनुभव को पूरी तरह बदल दिया गया है। वहीं, 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में भव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या वैश्विक धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर उभरकर सामने आई है। साथ ही, योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश के प्रमुख तीर्थ स्थलों के लिए तीर्थ विकास परिषद का निर्माण कर उनका विकास किया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश में 100 से अधिक प्राचीन विरासत के मंदिरों का जीर्णोद्धार किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को साकार करती इन परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन ने वर्तमान में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल दी है। बेहतर कनेक्टिविटी, बढ़ते निवेश, नए रोजगार और पर्यटन के विस्तार ने उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य की श्रेणी से निकालकर देश की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कर दिया है। यही नहीं,  उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री के वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनामी के विजन को साकार करने की दिशा में तेज गति से बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान की बड़ी पहल से पंजाब की 97 प्रतिशत महिलाओं को मिलेगा सीधा आर्थिक लाभ

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब कैबिनेट ने पूरे पंजाब में ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ को मंजूरी देकर इस योजना को शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया है। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए और बाकी सभी महिलाओं को 1000 रुपए सम्मान राशि मिलेगी। इस योजना से पंजाब की 97 प्रतिशत से अधिक महिलाओं को लाभ पहुंचेगा। यह फैसला मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान लिया गया। इस संबंध में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा, ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ योजना पूरे राज्य में शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1500 रुपए और बाकी सभी महिलाओं को 1000 रुपए प्रतिमाह सम्मान राशि दी जाएगी। यह योजना महिलाओं को स्वतंत्र और सशक्त बनाकर उनकी प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देगी। यह स्कीम महिलाओं को वित्तीय रूप से मजबूत करेगी, जिससे वे बचत और निवेश कर सकेंगी तथा घर-परिवार के लिए जरूरी इच्छाओं को पूरा करने में सक्षम बनेंगी।” इस पहल के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने आगे कहा, “इस योजना से 97 प्रतिशत से अधिक महिलाओं को लाभ मिलने की संभावना है, जो इसे देश की सबसे महिला-हितैषी सामाजिक सुरक्षा पहलों में शामिल करता है। यह योजना राज्य भर में महिलाओं को सीधी आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और महिलाओं के सशक्तिकरण के तहत उनके लिए वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के प्रति सरकार के विजन को दर्शाती है।” यह योजना सीधा लाभ प्रदान करने के लिए तैयार की गई है, जिसमें वित्तीय सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इस स्कीम के तहत एक परिवार में योग्य महिलाओं की संख्या पर कोई पाबंदी नहीं होगी और एक ही परिवार की कई महिलाएं इस योजना का लाभ ले सकेंगी। मौजूदा सामाजिक सुरक्षा पेंशनभोगियों को भी इस योजना के तहत अपनी पेंशन के अलावा पूरा वित्तीय लाभ मिलेगा, जिससे इसकी पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ेगी। पंजाब में 18 साल या उससे अधिक उम्र की महिलाएं, जो वोटर के रूप में रजिस्टर्ड हैं, जिनके पास पंजाब निवास वाला आधार कार्ड और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी वोटर कार्ड है, इस योजना के तहत लाभार्थी के रूप में रजिस्टर होने के योग्य होंगी। इस पहल को और मजबूत करते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में पहले ही 9,300 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की जा चुकी है और योजना के पैमाने व पहुंच को देखते हुए यह पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई सबसे बड़ी महिला-हितैषी सामाजिक कल्याण पहलों में से एक होने की उम्मीद है। योजनाबंदी विभाग में सीधी भर्ती के तहत 70 पद भरने को मंजूरी कैबिनेट ने योजनाबंदी विभाग में सीधी भर्ती के तहत 70 पद भरने की मंजूरी दे दी है। आर्थिक नीति एवं योजना बोर्ड और सांख्यिकी विभाग, पंजाब के विलय की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। इस अभ्यास को देखते हुए भरे जाने वाले रिक्त पदों की आवश्यकता को संशोधित किया गया है। इसलिए अधिकारियों की कमेटी द्वारा सीधी भर्ती के 70 पद भरने की मंजूरी दी गई है। पी.एस.पी.सी.एल. और पी.एस.टी.सी.एल. के सी.एम.डी. तथा डायरेक्टर्स की नियुक्ति के लिए शर्तों में संशोधन कैबिनेट ने पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) और पंजाब स्टेट ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ट्रांसको) के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (सी.एम.डी.) तथा डायरेक्टर्स की नियुक्ति के लिए जरूरी योग्यताओं और अनुभव संबंधी शर्तों में संशोधन करने की भी मंजूरी दे दी है। पछवाड़ा कोयला खदान में मानव शक्ति एवं सहायक स्टाफ नियुक्त करने को मंजूरी कैबिनेट ने झारखंड के जिला पाकुड़ स्थित पछवाड़ा केंद्रीय कोयला खदान (पीसीसीएम) के संचालन और रखरखाव के लिए पी.एस.पी.सी.एल. द्वारा ठेके के आधार पर मानव शक्ति और सहायक स्टाफ नियुक्त करने को भी हरी झंडी दे दी है। इसके लिए एक अधिकृत कमेटी बनाने का फैसला किया गया है, जिसमें प्रबंधकीय सचिव को चेयरमैन और चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर तथा डायरेक्टर/जनरेशन, पी.एस.पी.सी.एल. को सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। इस कमेटी को पछवाड़ा केंद्रीय कोयला खदान, पाकुड़ के संचालन और रखरखाव के लिए सक्षम मानव शक्ति/सहायक स्टाफ की ठेके पर भर्ती और विस्तार संबंधी सभी मंजूरियां देने के लिए अधिकृत किया गया है। लीजहोल्ड औद्योगिक प्लॉटों को फ्रीहोल्ड में बदलने के लिए नीति में संशोधन कैबिनेट ने लीजहोल्ड औद्योगिक प्लॉटों/शेडों को फ्रीहोल्ड में बदलने के लिए नीति में संशोधनों को भी मंजूरी दे दी है। इन संशोधनों के अनुसार बैंकों या वित्तीय संस्थाओं के पास गिरवी रखे गए औद्योगिक प्लॉट फ्रीहोल्ड में बदले जा सकते हैं, बशर्ते संबंधित बैंक द्वारा प्राप्त ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ जमा करवाया गया हो और निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन किया गया हो। ऐसे मामलों में जहां मौजूदा टाइटल दस्तावेजों में अनार्जित वृद्धि संबंधी कोई धारा नहीं है (भले ही यह पहले के टाइटल दस्तावेजों में मौजूद हो), 5 प्रतिशत की कन्वर्जन फीस लागू होगी। पंजाब कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर (रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस) (संशोधन) बिल-2026 कैबिनेट ने पंजाब कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर (रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस) (संशोधन) बिल, 2026 को पेश करने की मंजूरी दे दी है ताकि राज्य भर में औद्योगिक क्षेत्रों के बेहतर प्रबंधन के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (एस.पी.वी.) की प्रभावशीलता, पारदर्शिता और वित्तीय स्थिरता को मजबूत किया जा सके। प्रस्तावित संशोधन औद्योगिक पार्कों के विस्तार और औद्योगिक एस्टेटों से बाहर नए औद्योगिक क्लस्टरों के विस्तार के कारण वर्षों में उभरी प्रशासनिक और क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों को हल करेंगे। इसके तहत औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कें, स्ट्रीट लाइटें, पार्क, सुरक्षा, ड्रेनेज सिस्टम और अन्य साझा सुविधाओं जैसे साझा बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए सेवा शुल्क वसूलने और इनके उपयोग के लिए सुचारू प्रणाली विकसित की जाएगी। सभी औद्योगिक क्षेत्रों में एस.पी.वी. तैयार किए जाएंगे जो सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत रजिस्टर्ड होंगे। ये एस.पी.वी. औद्योगिक क्षेत्रों में साझे बुनियादी ढांचे के संचालन और रखरखाव के लिए बिना लाभ-बिना नुकसान के आधार पर काम करेंगे। साथ ही एस.पी.वी. के कार्यों की निगरानी और विवादों के समाधान के लिए संस्थागत व्यवस्था प्रदान करने हेतु जिला निगरानी प्राधिकरण स्थापित किया जाएगा। एन.एच.ए.आई. प्रोजेक्ट्स के लिए सतलुज नदी से गाद निकालने को मंजूरी कैबिनेट ने राज्य में विभिन्न हाईवे प्रोजेक्ट्स के निर्माण के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी (एन.एच.ए.आई.) को साधारण मिट्टी देने के लिए सतलुज नदी से … Read more

ग्रेटर नोएडा में शुरू हुआ स्किल महाकुंभ, राष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिता 2025-26 का भव्य उद्घाटन

ग्रेटर नोएडा में सजा स्किल का महाकुंभ, राष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिता 2025-26 का भव्य आगाज 650 प्रतिभागी, 63 स्किल्स और सभी राज्यों की भागीदारी योगी सरकार की स्किल पहल को मिला राष्ट्रीय मंच लखनऊ/ग्रेटर नोएडा स्किल इंडिया मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिता 2025-26 का भव्य शुभारंभ रविवार को गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा में हुआ। इस आयोजन में देशभर से आए करीब 650 प्रतिभागी 63 विभिन्न कौशलों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी ने इसे “स्किल भारत” के विज़न का जीवंत उदाहरण बना दिया है। योगी सरकार की स्किल नीति को मिला बल उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार लगातार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़कर उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करने पर विशेष जोर दे रही है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से प्रदेश के लाखों युवाओं को ट्रेनिंग, अप-स्किलिंग और रोजगार से जोड़ा गया है। ग्रेटर नोएडा में आयोजित यह राष्ट्रीय प्रतियोगिता प्रदेश की स्किल इकोनॉमी को मजबूत करने और यूपी को “स्किल हब” के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्किलिंग से बनेगा ‘स्किल नेशन’: देबाश्री मुखर्जी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने कहा कि स्किलिंग एक निरंतर प्रक्रिया है, जो अभ्यास और समर्पण से विकसित होती है। उन्होंने प्रतिभागियों को “स्किल आइकॉन” बताते हुए कहा कि उनका यह सफर ही एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि कौशल विकास केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, बल्कि देश के समग्र विकास से जुड़ा हुआ है और युवा भारत को वैश्विक स्तर पर “स्किल नेशन” बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। भारत की वैश्विक रैंकिंग में सुधार का लक्ष्य कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की वरिष्ठ सलाहकार मनीषा शर्मा ने बताया कि भारत वर्तमान में वर्ल्ड स्किल्स रैंकिंग में 13वें और एशिया में 8वें स्थान पर है। उन्होंने कहा कि स्किलिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग के जरिए युवाओं को भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम ने युवाओं को किया प्रेरित कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण कुमार पिल्लई के उद्घाटन भाषण से हुई। उन्होंने कौशल विकास को देश की प्रगति का आधार बताते हुए युवाओं को उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित किया। अंत में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के मुख्य परिचालन अधिकारी प्रशांत सिन्हा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। मार्च पास्ट और सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे आकर्षण विभिन्न राज्यों की टीमों द्वारा प्रस्तुत मार्च पास्ट ने “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को प्रदर्शित किया। वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन में उत्साह और रंग भर दिए। उत्तर प्रदेश की साधना ने दिलाई शपथ कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण शपथ ग्रहण समारोह रहा, जिसमें उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की प्रतिभागी साधना ने सभी प्रतिभागियों को निष्पक्षता, ईमानदारी और समर्पण के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने की शपथ दिलाई।

कन्या सुमंगला योजना: अमेठी की 23 स्नातक छात्राओं को मिली आखिरी किश्त

कन्या सुमंगला योजनाः अमेठी की स्नातक की 23 छात्राओं को आखिरी किश्त जारी सरकार की पहल से बेटियों को मिली नई उड़ान बदलती सोच, मजबूत कदम: आर्थिक सहयोग से सशक्त अमेठी की बेटियां लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी कन्या सुमंगला योजना आज बेटियों के भविष्य को मजबूत बनाने का सशक्त माध्यम बन चुकी है। इसी कड़ी में अमेठी जिले की 23 छात्राओं को स्नातक स्तर पर प्रवेश लेने के बाद योजना की अंतिम किश्त जारी की गई, जिससे उनके सपनों को नई दिशा और मजबूती मिली है। इन छात्राओं के लिए यह सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। पहले जहां कई परिवार आर्थिक तंगी के कारण बेटियों की पढ़ाई बीच में ही रुकवा देते थे, वहीं अब इस योजना ने उनकी सोच को बदल दिया है। आज वे बेटियां उच्च शिक्षा की ओर बढ़ते हुए अपने परिवार और समाज के लिए प्रेरणा बन रहीं हैं। शिक्षा के हर पड़ाव पर साथ: जन्म से स्नातक तक सरकार का सहयोग कन्या सुमंगला योजना के तहत बेटियों को उनके जीवन के महत्वपूर्ण शैक्षिक चरणों पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। जन्म से लेकर स्नातक स्तर तक 6 चरणों में दी जाने वाली इस राशि को 2024-25 में इसे बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है, जो सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। इस पहल का उद्देश्य न केवल बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करना है, बल्कि परिवारों पर आर्थिक बोझ कम कर उन्हें बेटियों के उज्ज्वल भविष्य में निवेश के लिए प्रेरित करना भी है। बदलती सोच, सशक्त होती बेटियां अमेठी की इन 23 छात्राओं की सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब सही समय पर सही सहायता मिलती है, तो बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहतीं। अब ये छात्राएं अपने करियर को लेकर अधिक जागरूक हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहीं हैं। परिवारों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है जहां पहले बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाती थी, वहीं अब यह सोच बदली है और बेटियों को पढ़ने और आगे बढ़ने के लिए सरकार की तरफ से प्रोत्साहित किया जा रहा है। योगी सरकार की पहल से बेटियों के सपनों को मिल रहा संबल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चलाई जा रही कन्या सुमंगला योजना बेटियों को सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है। कन्या सुमंगला योजना ने न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा दिया है। अमेठी की इन 23 बेटियों की कहानी यह संदेश देती है कि यदि अवसर और सहयोग मिले, तो हर बेटी अपने सपनों को साकार कर सकती है। यह योजना केवल एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि एक मजबूत, शिक्षित और आत्मनिर्भर समाज की नींव है।