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OHE लाइन टूटने से दर्जनों ट्रेनें प्रभावित, यात्री परेशान

सोनीपत. दिल्ली-अंबाला रेलमार्ग पर राजलू गढ़ी रेलवे स्टेशन के पास ओवरहेड इलेक्ट्रिक (ओएचई) टूटने से शुक्रवार रात रेल यातायात बाधित हो गया। लाइन टूटने और ट्रिपिंग होने के कारण अप और डाउन लाइन पर ट्रेनों का आवागमन बाधित हो गया। रेल यातायात बाधित होने से करीब आधा दर्जन मेल, एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेन अलग अलग स्टेशनों पर खड़ी रही। जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। OHE लाइन टूटने से यात्री परेशान दिल्ली से चलकर अंबाला जाने वाली गाड़ी संख्या 64453 पैसेंजर ट्रेन रात 8.20 बजे जब राजलू गढ़ी स्टेशन पर पहुंची, तभी ओएचई टूट गई, इससे अप लाइन पर चार पैसेंजर ट्रेनें राजलू गढ़ी, सांदल कलां, सोनीपत और हरसाना स्टेशनों पर खड़ी रही। वहीं, सूबेदारगंज से चलकर कतरा जाने वाली जम्मू मेल को नरेला स्टेशन पर रोकना पड़ा।

फसल बचाने ट्रांसफॉर्मर सुधार रहे थे, 3 की मौत

बेमेतरा. बेमेतरा जिले के दाढ़ी थाना क्षेत्र के ग्राम हेमाबंद खार में ट्रांसफार्मर फटने से गर्म तेल की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलसे पिता-पुत्र एवं एक अन्य किसान की हादसे के छठवें दिन उपचार के दौरान मौत हो गई। तीनों घायलों को रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में भर्ती किया गया था। घटना 20 सितंबर की सुबह करीब 9 बजे के बीच हुई थी। हादसे में हुई ग्रामीणों की मौत पर स्थानीय विधायक और मंत्री दयालदास बघेल ने शोक जताया है। मिली जानकारी के अनुसार, बिजली बंद होने के कारण ग्राम मोहतरा निवासी किसान राधेश्याम चंद्राकर (50), उनके पुत्र छन्नू चंद्राकर (32) और किसान ईश्वर पटेल ट्रांसफार्मर देखने के लिए पहुंचे थे। वे ट्रांसफार्मर में डीओ (ड्रॉप आउट फ्यूज) चढ़ाने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान ट्रांसफार्मर फट गया। तेज धमाके के साथ निकला गर्म तेल किसानों के ऊपर गिर गया, जिससे तीनों गंभीर रूप से झुलस गए। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन व ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्हें बेमेतरा जिला अस्पताल ले गए। यहां प्राथमिक उपचार के बाद तीनों को रायपुर रेफर कर दिया गया। इस पर परिजन उन्हें रायपुर के निजी अस्पताल ले गए। दो दिनों तक चले इलाज के बाद भी आशाजनक सुधार नहीं होने पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने उन्हें आंबेडकर अस्पताल में शिफ्ट करा दिया था। यहां 25 सितंबर की सुबह राधेश्याम चंद्राकर और छन्नू चंद्राकर की मौत हो गई। वहीं किसान ईश्वर पटेल ने इसी दिन दोपहर में दम तोड़ दिया। फसल बचाने बिजली चालू करने पहुंचे थे ग्रामीण ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में अटल ज्योति योजना के तहत दी गई बिजली लंबे समय से बंद थी। इससे सिंचाई प्रभावित हो रही थी। ग्रामीणों ने विद्युत कंपनी के अधिकारियों को बिजली बंद होने की जानकारी देकर आपूर्ति बहाल करने की मांग की थी। इसके बाद भी बिजली चालू नहीं होने पर किसान परेशान थे। किसान रामकुमार पटेल ने बताया कि इसके चलते ही तीनों खुद बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने का प्रयास कर रहे थे, इसी दौरान हादसा हो गया। मृतक पिता-पुत्र बहुत गरीब परिवार के हैं। राधेश्याम के तीन पुत्र हैं, जिनमें से एक की मौत हो गई। मृतक छन्नू के भी दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। अधिकारी ने शिकायत से झाड़ा पल्ला सीएसपीडीसीएल उप संभाग दाढ़ी में पदस्थ सहायक यंत्री चंद्रकांत साहू ने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर घटनास्थल पर कनिष्ठ यंत्री को भेजा गया था। विद्युत कंपनी ने उसी दिन घटना की सूचना दाढ़ी थाने में लिखित में दे दी थी। मुआवजे के लिए प्रकरण तैयार कर विद्युत कंपनी की उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि लाइन बंद होने की सूचना ऑफलाइन अथवा लिखित में नहीं दी गई थी। कॉल सेंटर में भी किसी भी प्रकार की शिकायत नहीं है। ग्राम बटार में पदस्थ लाइन की देखरेख प्रेम साहू करते हैं। किसानों द्वारा बिजली बंद होने की शिकायत या सूचना विद्युत कंपनी उप संभाग दाढ़ी कार्यालय में दर्ज नहीं है। 

AI और नए कानूनों पर मंथन: ग्वालियर पहुंचे चार राज्यों के न्यायिक अधिकारी, जस्टिस मिश्रा ने जताई चिंता

ग्वालियर  ग्वालियर में मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी की ओर से क्षेत्रीय न्यायिक सम्मेलन का शनिवार को शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि न्यायदान केवल कानून की धाराओं को जानने तक सीमित नहीं है। न्याय की उम्मीद लेकर अदालत पहुंचने वाले लोगों और उनकी वास्तविक परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है। उनके अनुसार, केवल जानना अमूर्त है, जबकि समझना उस ज्ञान का वास्तविक उपयोग है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, यूट्यूब और डीपफेक तकनीक के कारण वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया है। सम्मेलन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र (बॉम्बे), गुजरात और राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश, राज्य न्यायिक अकादमियों के निदेशक, रजिस्ट्री के अधिकारी और चारों राज्यों के अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। अनुभव से ज्यादा जरूरी नई परिस्थितियों को समझना न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि न्यायिक शिक्षा किसी निश्चित पाठ्यक्रम या सिलेबस तक सीमित नहीं है। इसका दायरा न्यायाधीश की सोच और समझ पर निर्भर करता है। वर्षों का अनुभव यह बताता है कि अतीत में क्या देखा है, लेकिन सच्ची शिक्षा यह सिखाती है कि अब तक सामने नहीं आई परिस्थितियों से कैसे निपटना है। उन्होंने कहा कि समाज लगातार बदल रहा है, इसलिए न्यायपालिका को भी अपने वैचारिक दायरे का विस्तार करते रहना होगा। डीपफेक के दौर में असली-नकली साक्ष्य पहचानना चुनौती तकनीक के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि आज अदालतों के सामने ऐसी चुनौतियां हैं, जिनका सामना अधिकांश न्यायिक अधिकारियों ने अपने करियर की शुरुआत में नहीं किया था। सोशल मीडिया, यूट्यूब और डीपफेक तकनीक के कारण वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि साक्ष्य कृत्रिम हो सकते हैं और उन्हें अदालत में पेश करने वाले भी तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में न्यायपालिका को आधुनिक डिजिटल साक्ष्यों की जटिलताओं को समझना होगा। पुराने कानूनों की नई व्याख्या की जरूरत न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि अपराधी जब तकनीक के इस्तेमाल में अधिक सक्षम और शातिर हो रहे हैं, तो न्यायाधीशों को भी दशकों पुराने कानूनों की व्यावहारिक और वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप व्याख्या तलाशनी होगी। उन्होंने भारतीय न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश और समाज के सामने जब भी नई चुनौतियां आई हैं, न्यायपालिका ने मजबूती से उनका सामना किया है और लोकतंत्र की रक्षा में अपनी भूमिका निभाई है। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश, मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक दिनेश चंद्र लाल सहित जिला एवं पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और चारों राज्यों के न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे। इन मुद्दों पर चल रहा मंथन     न्यायिक शिक्षा को बदलती कानूनी और तकनीकी जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर जोर।     जजों को कानून के साथ सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को समझने की जरूरत।     न्यायिक प्रशिक्षण में निष्पक्षता, समानता और संवेदनशीलता को शामिल करने की बात।     जजों को अपनी सीमाओं और पूर्वाग्रहों को पहचानकर लगातार सीखते रहने की जरूरत।     न्यायिक शिक्षा में Ethics, Logic और Psychology को शामिल करने पर जोर।     DNA रिपोर्ट, वॉयस सैंपल और डिजिटल सबूतों की समझ के लिए तकनीकी प्रशिक्षण जरूरी।     डिजिटल दौर में अपराधों की जांच में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल फुटप्रिंट अहम सबूत।     इलेक्ट्रॉनिक सबूत की विश्वसनीयता समझने के लिए जांच और न्यायिक अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण जरूरी।     फॉरेंसिक लैब, पुलिस जांच और जेल व्यवस्था समझने के लिए ज्यूडिशियल अधिकारियों की फील्ड ट्रेनिंग का सुझाव।     मध्य प्रदेश में तीनों नए आपराधिक कानूनों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की पहल का उल्लेख।     Judicial Academy में पारंपरिक प्रशिक्षण से आगे 360 डिग्री और इमर्सिव लर्निंग पर जोर।     ADR और Mediation को बढ़ावा देने की जरूरत।

मैस में इल्लियां और फंगस लगी ब्रेड मिली, 70 किलो सामान मौके पर नष्ट

अलवर स्वास्थ्य विभाग की ओर से राजकीय और निजी अस्पतालों के अंदर और आसपास चल रहे रेस्टोरेंट व अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की लगातार जांच की जा रही है। इसी अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शुक्रवार को जेल सर्किल स्थित राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय की मैस का निरीक्षण किया। जांच के दौरान मैस में रखी खाद्य सामग्री की स्थिति देखकर टीम भी हैरान रह गई। सीएमएचओ डॉ. योगेन्द्र शर्मा ने बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी दल ने मैस में रखे खाने-पीने के सामान की जांच की। इस दौरान करीब 70 किलो आटा, मैदा, बेसन, अरहर दाल और मूंग दाल में इल्लियां मिलीं। खाद्य सामग्री में इल्लियां मिलने के बाद टीम ने इन सभी सामान को मौके पर ही नष्ट करवा दिया, ताकि इनका इस्तेमाल खाने में न किया जा सके। फंगस लगी ब्रेड भी मिली जांच के दौरान मैस में फंगस लगी पुरानी ब्रेड और पाव भी मिले। टीम ने इन्हें भी मैस से हटवाया और मौके पर ही नष्ट करा दिया। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने वहां इस्तेमाल किए जा रहे सोयाबीन तेल और मसाले के एक-एक नमूने लिए। दोनों नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर स्थिति और साफ होगी। निरीक्षण के दौरान मैस में साफ-सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली। खाद्य सुरक्षा टीम ने इस पर मैस संचालक को नोटिस जारी किया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों और उनके आसपास खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर इस तरह की जांच आगे भी जारी रहने की बात कही गई है। रेस्टोरेंट और ढाबों से भी लिए नमूने टेल्को सर्किल के समीप एक रेस्टोरेंट की किचन में भी साफ-सफाई ठीक नहीं मिली। संचालक को नोटिस देने के साथ रेस्टोरेंट से सर्विलांस के तहत दो नमूने लिए गए। भगत सिंह सर्किल के पास एक रसोई से सोयाबीन तेल तथा आसपास के ढाबों से लाल मिर्च पाउडर और दही के नमूने जांच के लिए लिए गए। संबंधित प्रतिष्ठानों को साफ-सफाई सुधारने के लिए इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी किए गए। इस दौरान केशव गोयल, विश्व बंधु गुप्ता, जय सिंह यादव, अशोक लखेरा, नीरज रावत, अंजली मीणा, अलका, नितेश और राजेश पूनिया मौजूद रहे।  

ग्रामीण परिवारों को मिलेगा 125 दिनों का काम, मजदूरी भुगतान में देरी पर मुआवजा

रांची  झारखंड सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी को लेकर 'विकसित भारत – 2047' के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप 'विकसित भारत – गारंटी फार रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना, झारखंड 2026' को अधिसूचित कर दिया है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलने लगेगी। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी इस अधिसूचना के अनुसार, राज्य के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में यह योजना लागू होगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन ग्रामीण परिवारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वैधानिक मजदूरी रोजगार की गारंटी प्रदान करना है, जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं। योजना की मुख्य विशेषताएं परिवार के प्रत्येक वयस्क सदस्य को 125 दिनों का गारंटीकृत रोजगार मिलेगा। मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर किया जाएगा और कार्य पूरा होने की तिथि से अधिकतम 15 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। यदि 15 दिनों के भीतर काम नहीं मिलता है, तो आवेदक बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा। मजदूरी में देरी होने पर 16वें दिन से 0.05% प्रतिदिन की दर से मुआवजा दिया जाएगा। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना होगी, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार 60:40 के अनुपात में वित्त पोषण करेंगे। चार प्रमुख कार्य क्षेत्र योजना के तहत मुख्य रूप से चार प्रकार के कार्य किए जाएंगे जल सुरक्षा : जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, तालाब निर्माण, चेक डैम आदि। मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढांचा : सड़क, पुलिया, आंगनवाड़ी केंद्र, पंचायत भवन, स्कूल भवन आदि के निर्माण से संबंधित निर्णय और कार्यान्वयन। आजीविका संबंधी बुनियादी ढांचा : कौशल विकास केंद्र, ग्रामीण हाट, कोल्ड स्टोरेज, मत्स्य पालन ढांचा आदि का निर्माण किया जा सकेगा। आपदा प्रबंधन : चक्रवात/बाढ़ आश्रय स्थल, तटबंध, वृक्षारोपण आदि। योजना के क्रियान्वयन में बायोमेट्रिक उपस्थिति, जीपीएस निगरानी, एमआइएस डैशबोर्ड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जाएगा। सामाजिक अंकेक्षण हर छह महीने में अनिवार्य होगा। ठेकेदारों के बिना सीधे कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा कार्य कराए जाएंगे।  

पंचायत सरकार भवन होंगे सुविधायुक्त, स्थानीय बढ़ई बनाएंगे टेबल-कुर्सियां

पटना  नए पंचायत सरकार भवनों को सिर्फ भवन बनाकर छोड़ने के बजाय अब उन्हें पूरी तरह सुविधायुक्त बनाने की तैयारी है। पंचायती राज विभाग पंचायत सरकार भवनों के लिए टेबल, कुर्सी, अलमारी, बेंच समेत जरूरी फर्नीचर की खरीद स्थानीय कारपेंटरों से कराने की योजना पर काम कर रहा है। इससे पंचायतों को जरूरत के मुताबिक फर्नीचर मिलेगा और स्थानीय कारीगरों को भी काम का अवसर मिलेगा। पहले चरण में 3200 पंचायत भवनों पर फोकस योजना के तहत राज्य की 8041 पंचायतों को चरणबद्ध तरीके से फर्नीचर उपलब्ध कराने की तैयारी है। पहले चरण में नव निर्मित करीब 3200 पंचायत सरकार भवनों के लिए हर पंचायत को 12 लाख रुपये के फर्नीचर की खरीद का प्रस्ताव है। विभागीय बैठक में इस व्यवस्था पर सहमति बनने के बाद अब कैबिनेट की मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। भवन के साथ जरूरी संसाधन भी होंगे उपलब्ध सरकार का जोर पंचायत सरकार भवनों को पंचायत स्तर पर प्रशासनिक कामकाज और जनसुविधाओं का केंद्र बनाने पर है। इसके लिए भवनों में जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना भी जरूरी माना जा रहा है। कई जगह भवन तैयार होने के बावजूद फर्नीचर और अन्य सुविधाओं की कमी के कारण उनका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। पंचायत की जरूरत के हिसाब से तैयार होगा फर्नीचर स्थानीय कारपेंटरों से फर्नीचर तैयार कराने से पंचायत भवन की जरूरत के अनुसार टेबल और कुर्सियों का आकार तय किया जा सकेगा। कर्मचारियों व जनप्रतिनिधियों के लिए कुर्सियां, दस्तावेज रखने के लिए अलमारी और ग्रामीणों के बैठने के लिए बेंच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे फर्नीचर को स्थानीय जरूरत के मुताबिक तैयार कराने में मदद मिलेगी। गांव के कारीगरों को मिलेगा काम इस योजना का एक अहम पहलू स्थानीय रोजगार से भी जुड़ा है। पंचायत स्तर पर फर्नीचर का काम मिलने से बढ़ई और दूसरे स्थानीय कारीगरों को रोजगार का अवसर मिल सकता है। सरकार की मंशा है कि पंचायत सरकार भवनों पर होने वाला खर्च अधिक से अधिक स्थानीय स्तर तक पहुंचे और उसका आर्थिक लाभ गांव के कारीगरों को मिले। गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी रहेगा जोर फर्नीचर खरीद में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाएगा। पंचायत सरकार भवन की जरूरत के आधार पर फर्नीचर की सूची और संख्या तय की जाएगी। प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद चरणबद्ध तरीके से नवनिर्मित और पहले से बने पंचायत सरकार भवनों में जरूरी फर्नीचर उपलब्ध कराने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।  

चिरायु योजना से जन्मजात समस्या से मिली राहत, तीन बच्चों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

चिरायु योजना से जन्मजात समस्या से मिली राहत, तीन बच्चों के चेहरों पर लौटी मुस्कान बीजापुर के दूरस्थ गांवों से अयान, अंजलि और सविता का रायपुर में हुआ उपचार परिवारों को मिली राहत, बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद हुई मजबूत रायपुर, गंगालूर के संतोष साहनी अपने सवा साल के बेटे अयान के जन्म से कटे होंठ की समस्या को लेकर काफी चिंतित थे। गांव में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चिरायु टीम ने अयान की समस्या पहचानी। आवश्यक जांच और प्रक्रिया पूरी कर उसे उपचार के लिए रायपुर भेजा गया। जहां श्री मेडिशाइन अस्पताल में अयान का सफल उपचार होने के बाद परिवार को अब बड़ी राहत मिली है। बीजापुर जिले के दूरस्थ अंचलों में रहने वाले दो अन्य परिवारों के बच्चे जो इसी प्रकार की समस्या से पीड़ित थे उनका उपचार चिरायु योजना के माध्यम से हुआ। इशूलनार की आठ वर्षीय अंजलि हापका और तोड़का की तीन वर्षीय सविता ताती भी जन्मजात कटे होंठ की समस्या से प्रभावित थीं। चिरायु टीम ने दोनों बच्चियों की भी पहचान कर उन्हें विशेषज्ञ उपचार के लिए रायपुर भेजा, जहां योजना के तहत उनका निःशुल्क उपचार कराया गया। चिरायु योजना के तहत बच्चों में जन्मजात समस्याओं, बीमारियों, पोषण संबंधी कमियों और विकास संबंधी समस्याओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाता है। अयान, अंजलि और सविता के उपचार ने उनके परिवारों को बच्चों के भविष्य के लिए हो रही चिंता को दूर किया है।  अयान के परिवार को मिली नई उम्मीद अयान की समस्या की पहचान चिरायु टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान की थी। इसके बाद टीम ने आवश्यक जांच कराई और रायपुर में उपचार की प्रक्रिया पूरी की। बेटे का उपचार हो जाने से उनके पिता संतोष साहनी और उनके पूरे परिवार की चिंता कम हुई है। अयान के चेहरे में आया बदलाव पूरे परिवार के लिए मुस्कान की सौगात लेकर आया है। अंजलि और सविता के परिवारों को भी मिली बड़ी राहत इशूलनार निवासी अंजलि के पिता सुखमा हापका भी बेटी के उपचार को लेकर चिंतित थे। चिरायु टीम ने अंजलि को चिन्हांकित किया और रायपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उसका ऑपरेशन कराया। उपचार के बाद परिवार को उसके बेहतर स्वास्थ्य की उम्मीद मिली है। इसी तरह तोड़का निवासी सविता के पिता बीजू ताती के लिए भी बेटी का उपचार होना बड़ी राहत है। चिरायु योजना के माध्यम से सविता की पहचान और उपचार संबंधी प्रक्रिया पूरी की गई। रायपुर के श्री मेडिशाइन अस्पताल में उसका सफल उपचार हुआ। परिवार ने बेटी को मिली इस सहायता पर खुशी व्यक्त की है।

आत्मा की अफवाह के बाद हंगामा, छात्रों से पुलिस की झड़प

पटियाला. पंजाब के पटियाला (बनूड़) स्थित एक नामी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में 25 सितंबर की मध्य रात्रि उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया, जब कैंपस में 'भूत' होने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद देर रात सैकड़ों छात्र सड़कों पर उतर आए और यूनिवर्सिटी कैंपस में तोड़फोड़ करते हुए उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का दावा था कि कैंपस में पूर्व में एक छात्रा ने कथित तौर पर आत्महत्या की थी, जिसकी आत्मा हास्टल में रहने वाले छात्रों को परेशान कर रही है। हालांकि, मौके पर पहुंचे सुरक्षा कर्मियों और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने छात्रों को समझाने की कोशिश की कि परिसर में ऐसी कोई खुदकुशी की घटना नहीं हुई है। अधिकारियों ने कहा शरारती तत्वों का है ये काम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कुछ शरारती तत्व जानबूझकर दूसरे कमरों के दरवाजे खटखटाकर भाग जाते हैं। इसके बावजूद छात्र शांत होने को तैयार नहीं हुए और विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ लगातार नारेबाजी करते रहे।

रायपुर आएंगे चिराग पासवान और बॉलीवुड एक्टर

रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 4 अक्टूबर को ROLBOL का तीसरा यूथ कॉन्क्लेव का मंच सजने वाला है. जहां पांचवे ROLBOL Talks का आयोजन किया जाएगा. कार्यक्रम में सिनेमा, पत्रकारिता, उद्योग और डिजिटल जगत की हस्तियां शामिल होंगी. जेल रोड स्थित मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में 4 अक्टूबर को दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक ROLBOL Youth Conclave 2026 का आयोजन होगा. इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को नई सोच, नेतृत्व और सकारात्मक जीवन परिवर्तन से जोड़ना है. यूथ कॉनक्लेव में पांचवा ROLBOL Talks काफी खास होने वाला है. केंद्रीय मंत्री पासवान, बॉलीवुड एक्टर समेत कई दिग्गज होंगे शामिल इस वर्ष केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान, ‘मैरी कॉम’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ फेम बॉलीवुड अभिनेता दर्शन कुमार, अंतरराष्ट्रीय एवं सामरिक मामलों के वरिष्ठ पत्रकार आदित्य राज कौल और निलॉन्स के प्रबंध निदेशक दीपक सांघवी युवाओं से संवाद करेंगे. विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाली ये हस्तियां अपने जीवन के अनुभव, संघर्ष और सफलता की यात्रा साझा करेंगी ROLBOL Creators Award में जुटेंगी देश की चर्चित हस्तियां ROLBOL Youth Conclave के तहत 3 अक्टूबर को कीपीएस स्कूल में प्रदेशभर के सोशल मीडिया कंटेंटे क्रिएटर्स के लिए ROLBOL Creators Award आयोजित किया जाएगा. इसमें बॉलीवुड संगीतकार मोंटी शर्मा, Foodie Incarnate के अमर सिरोही, Shikshit Talks के शिखर चौधरी, लग्जरी कंटेंट क्रिएटर देवांश जी. सेठी, फिल्म निर्देशक दीपक गर्ग और Auriea London के सह-संस्थापक शौनक शर्मा शामिल होंगे. अवॉर्ड के विजेताओं को 4 अक्टूबर को कॉन्क्लेव के मुख्य मंच पर सम्मानित किया जाएगा. वहीं छत्तीसगढ़ की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिष्ठित ROLBOL Changemaker Award से राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्देशक मनोज वर्मा, लोकप्रिय गायक अनुराग शर्मा और उभरते एंकर आरजे नमित को सम्मानित किया जाएगा. रायपुर से देशभर में विस्तार की तैयारी ‘Rest Of Life, Best Of Life’ के विचार के साथ संस्थापक दर्शन सांखला द्वारा शुरू की गई ROLBOL Community आठ वर्षों से व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से लोगों को बेहतर जीवन की दिशा में प्रेरित कर रही है. इसके मंच पर पूर्व में भी देश की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियां युवाओं से संवाद कर चुकी हैं. रायपुर में ROLBOL Aspire और ROLBOL Blaze के बाद अब समुदाय देशभर में नए चैप्टर स्थापित करने की तैयारी में है. इस अवसर पर गगन बरड़िया को संगठन का प्रथम सेक्रेटरी जनरल और नेहा शालमोन को प्रथम एपेक्स काउंसिल में चेयर–ग्रोथ घोषित किया जाएगा. संस्थापक दर्शन सांखला एवं सह-संस्थापक वीरेन नागवंशी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कॉन्क्लेव की जिम्मेदारी संयोजक राकेश नवलखा, सह-संयोजक आकाश साहू, नमन कोरी, यश कुकरेजा एवं कोर टीम के सदस्य संभाल रहे हैं. ROLBOL का उद्देश्य केवल युवाओं को प्रेरित करना नहीं, बल्कि उन्हें अपनी क्षमताओं को पहचानने, आगे बढ़ने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करना है.

केंद्रीय मंत्री प्रसाद बोले- उत्तर प्रदेश देश का अगला ग्रोथ इंजन बनने की ओर, डबल इंजन सरकार के समन्वय से तेज हो रहा बदलाव

इलेक्ट्रॉनिक्स से एआई और सेमीकंडक्टर तक, यूपी बनेगा देश का नंबर-1 टेक्नोलॉजी हब: जितिन प्रसाद केंद्रीय मंत्री बोले- उत्तर प्रदेश देश का अगला ग्रोथ इंजन बनने की ओर, डबल इंजन सरकार के समन्वय से तेज हो रहा बदलाव वह दिन दूर नहीं जब देश और दुनिया में निवेश की चर्चा के दौरान उत्तर प्रदेश का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा: जितिन प्रसाद ग्रेटर नोएडा  उत्तर प्रदेश अब केवल इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का केंद्र बनने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एआई, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश देश का अगला ग्रोथ इंजन बनने की ओर अग्रसर है। यह बात केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 'यूपीज जर्नी फ्रॉम इलेक्ट्रॉनिक्स लीडर टू एआई एंड सेमीकंडक्टर पावरहाउस’ सत्र को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब देश और दुनिया में निवेश की चर्चा के दौरान उत्तर प्रदेश का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख हब बनाना है और इसके लिए राज्य में तेजी से जरूरी इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। जितिन प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में परिवर्तन स्पष्ट दिखाई दे रहा है। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय वाली डबल इंजन सरकार इस बदलाव को गति दे रही है। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी और ट्रेड देश की विकास यात्रा के दो महत्वपूर्ण इंजन हैं और उत्तर प्रदेश इनके माध्यम से नई ऊंचाइयों को हासिल कर सकता है। नोएडा से आगे पूरे यूपी में टेक्नोलॉजी का विस्तार केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब प्रयास केवल नोएडा तक निवेश सीमित रखने का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी के अवसर पैदा करने का है। इसका सीधा लाभ राज्य के युवाओं को मिलेगा। उन्होंने कहा कि सैमसंग और योटा जैसे बड़े निवेश, डाटा सेंटर्स, एआई लैब्स तथा अन्य टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर उत्तर प्रदेश में बन रहे नए इकोसिस्टम की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। सरकार का प्रयास है कि राज्य में डिजाइन से लेकर सेमीकंडक्टर कॉम्पोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट तक पूरी वैल्यू चेन विकसित हो। असेंबली से कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ेगा यूपी जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत अब केवल उत्पादों की असेंबली करने वाला देश नहीं रहेगा। इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम जैसी पहल के जरिए देश कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की डिजाइन क्षमता और प्रतिभा को दुनिया पहले से पहचानती है। अब इसी ताकत के साथ मैन्युफैक्चरिंग क्षमता जोड़ने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माण तथा उन्हें घरेलू और वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना इस विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकारी मदद का लाभ लें, लेकिन आत्मनिर्भर बनें उद्योग केंद्रीय मंत्री ने उद्योग जगत को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी प्रोत्साहन और सब्सिडी विकास को गति देने का माध्यम हैं, लेकिन उद्योगों की दीर्घकालिक सफलता उनकी अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर निर्भर करेगी। सरकार जमीन, नीतियां, मंजूरियां और सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उद्योगों को अंततः कॉम्पिटेटिव और सेल्फ सस्टेनिंग बनना होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकार उद्योगों की जरूरतों को समझते हुए सक्रिय और गुड गवर्नेंस के साथ काम कर रही है। निवेशकों को सुरक्षित और स्थिर नीतिगत वातावरण देना जरूरी है, ताकि वे लंबी अवधि के फैसले ले सकें। एआई से बढ़ेगी एमएसएमई की उत्पादकता जितिन प्रसाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एआई का इस्तेमाल केवल तकनीक अपनाने के लिए नहीं, बल्कि प्रोडक्टिविटी, एफिशिएंसी और कॉस्ट कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाने के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि एआई के माध्यम से कोई एमएसएमई अपनी लागत कम करता है या उत्पादकता बढ़ाता है तो यही तकनीक का वास्तविक लाभ होगा। उन्होंने युवाओं को एआई इनोवेटर्स, रिसचर्स और एडॉप्टर्स के रूप में तैयार करने की जरूरत बताई। साथ ही आईआईटी कानपुर  समेत शोध संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत तालमेल पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लिए अवसर का यह महत्वपूर्ण दौर है। आने वाले वर्षों की योजना आज से बनानी होगी, ताकि राज्य की युवा पीढ़ी को एक ऐसा इकोसिस्टम मिल सके जो उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग पावर हाउस के रूप में स्थापित करे। नोएडा के साथ लखनऊ और कानपुर में भी बढ़ेगा जीसीसी का विस्तार: आलोक कुमार उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स आलोक कुमार ने कहा कि राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास के साथ मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) पर विशेष फोकस किया जा रहा है। नोएडा में पहले से जीसीसी मौजूद हैं, जबकि कुछ जीसीसी ने लखनऊ में भी काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि नई जीसीसी पालिसी और आईटी पॉलिसी के जरिए अब नोएडा के साथ लखनऊ और कानपुर क्षेत्र में भी अधिक जीसीसी आकर्षित करने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि लखनऊ में आईबीएम समेत कई आईटी और टेक्नोलॉजी कंपनियां मौजूद हैं। राज्य की जीसीसी और आईटी नीतियों को अन्य राज्यों की नीतियों के अनुरूप मजबूत बनाया गया है तथा आईटी और आईटी एनेबल्ड सर्विसेज (आईटीईएस) को पहले ही इंडस्ट्री स्टेटस प्रदान किया जा चुका है।