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30 साल सेवा के बाद भी शून्य पेंशन, 1998 के शिक्षकों का फूटा गुस्सा, अब ‘करो या मरो’ आंदोलन की चेतावनी

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ के उपप्रांत अध्यक्ष दिनेश सिंह एवं संभाग अध्यक्ष हजरत अली ने संयुक्त रूप से शासन के खिलाफ तीखी नाराजगी जताते हुए कहा है कि वर्ष 1998 के शिक्षकों के साथ शुरू से ही “सौतेला व्यवहार” किया गया है। संघ नेताओं ने बताया कि वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है, साल 2028 तक लगभग 90-92% शिक्षक सेवानिवृत्त हो जाएंगे, लेकिन उन्हें एक रुपए की भी पेंशन नहीं मिल रही। वहीं 2035 तक सभी शिक्षक रिटायर हो जाएंगे, जिनमें से अधिकांश को बेहद कम या नगण्य पेंशन मिलेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि 30 वर्षों तक सेवा देने के बाद 62 वर्ष की उम्र में एक शिक्षक बिना पेंशन के सम्मानजनक जीवन कैसे जी सकता है? नियुक्ति से लेकर सिविलियन तक उठाए सवाल संघ ने बताया कि उनकी नियुक्ति शिक्षा विभाग के रिक्त पदों पर हुई थी, वेतन भी शिक्षा विभाग द्वारा दिया जाता था, लेकिन पंचायत के माध्यम से भर्ती होने के कारण उन्हें पंचायत कर्मचारी माना गया। 2018 में “सिविलियन” किए जाने के बाद भी उनकी पूर्व सेवा को शून्य मान लिया गया, जिससे शिक्षकों को भारी नुकसान हुआ। संघ का कहना है कि जब कार्य और वेतन शिक्षा विभाग का था, तो उन्हें पंचायत कर्मचारी मानना अन्यायपूर्ण है। पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग संघ ने स्पष्ट किया कि वे सभी 2004 से पूर्व नियुक्त शिक्षक हैं, इसलिए उन्हें पेंशन सेवा अधिनियम 1976 के तहत पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलना चाहिए। नेताओं ने यह भी बताया कि पूर्व में मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थानीय निकाय कर्मचारियों को सिविलियन के बाद नियुक्ति तिथि से पेंशन दी गई थी, उसी आधार पर 1998 से सेवा गणना जोड़कर पुरानी पेंशन लागू करने की मांग की जा रही है। आश्वासन बहुत, समाधान शून्य संघ का आरोप है कि उन्होंने कई बार विधायकों, मंत्रियों और मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी समस्याएं रखीं, ज्ञापन सौंपे और चर्चा की। कई बार आश्वासन भी मिले, लेकिन न तो मामला मंत्रिमंडल में लाया गया, न ही संघ को चर्चा के लिए बुलाया गया, और न ही कोई ठोस निर्णय लिया गया। अब आर-पार की लड़ाई की चेतावनी संघ नेताओं ने कहा कि अब स्थिति “करो या मरो” जैसी हो गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो शिक्षक बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। “हमने कभी हड़ताल या आंदोलन का रास्ता नहीं चुना, लेकिन अब शासन की उदासीनता हमें सड़कों पर उतरने को मजबूर कर रही है।” सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार मांग रहे शिक्षक संघ ने अंत में कहा कि वे छत्तीसगढ़ के मूल निवासी हैं और उन्हें भी समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है। उनका आरोप है कि शासन की नीतियों के कारण उनके अधिकारों का हनन हो रहा है और अब वे अपने हक के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।

दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में रामलला का दर्शन किया, बोले – “राम मंदिर का विरोध मैंने कभी नहीं किया

भोपाल  वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आज यानी गुरुवार 26 मार्च को अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। इस अवसर पर उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब प्रभु का बुलावा आता है तो हर व्यक्ति आ जाता है, इसलिए जब मुझे बुलावा आया, तो मैं उपस्थित हो गया। प्रभु के दर्शन करके अच्छा लगा। दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रभु के दर्शन करके अच्छा लगा। जब उनसे मंदिर के कंस्ट्रक्शन को लेकर प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसमें हम लोगों का भी योगदान है, हमने भी पैसा दिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में राम लला के दर्शनों के साथ ही उन्होंने हनुमानगढ़ी जाकर भगवान हनुमान का भी आशीर्वाद लिया। जब उनसे कांग्रेस नेताओं के अयोध्या न आने पर प्रश्न किया गया तो उन्होंने कहा, 'कांग्रेस में हर व्यक्ति अपनी आस्था अनुसार धर्म का पालन करता है। हम धर्म का दुरुपयोग ना तो व्यवसाय के लिए करते हैं और ना राजनीति के लिए करते हैं।'उन्होंने कहा हमारी आस्था, जो भी जिस धर्म का व्यक्ति हो चाहे वह हिंदू हो, मुसलमान हो, सिक्ख, ईसाई, पारसी हो, हर व्यक्ति अपने धर्म का अपने अनुसार पालन करता है।इस दौरान दिग्विजय सिंह से वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व पार्टी अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के अयोध्या आने पर भी प्रश्न पूछा गया। इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा, 'जब उनको बुलावा आएगा तो वो भी जरूर आएंगे। क्यों नहीं आएंगे? प्रभु का बुलावा आता है तो हर व्यक्ति आता है दर्शन-पूजन के बाद मंदिर प्रांगण से बाहर आए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि जब प्रभु का बुलावा आता है तो हर व्यक्ति आ जाता है इसलिए जब मुझे बुलावा आया, तो मैं उपस्थित हो गया। उन्होंने कहा कि प्रभु के दर्शन करके अच्छा लगा। कांग्रेस में तो हर व्यक्ति अपनी आस्था अनुसार धर्म का पालन करता है। हम धर्म का दुरुपयोग ना तो व्यवसाय के लिए करते हैं और ना राजनीति के लिए करते हैं। कभी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया नेता दिग्विजय सिंह ने हनुमान गढ़ी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की और उन्होंने कहा कि मैंने तो कभी भी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया। मैंने कभी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया है। मैं अयोध्या राजनीति करने नहीं आया हूं। मैंने राम मंदिर निर्माण के दौरान चंदा भी दिया था। सभी पर श्रीराम की कृपा बनी रहे। रामलला के दर्शन करने के बाद उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि रामलला के दर्शन कर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने प्रभु राम से कामना की कि पूरे देश में खुशहाली फैले, तरक्की हो और सभी लोगों के बीच सद्भाव बना रहे। राम मंदिर के निर्माण और उसकी भव्यता को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर तो मैं विस्तार से बाद में चर्चा करूंगा। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद पहली बार कांग्रेस के किसी बड़े नेता ने रामलला का दर्शन कर आशीर्वाद लिया। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह गुरुवार को अयोध्या पहुंचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन किया। उनसे पहले यूपी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय भी रामलला का दर्शन कर चुके हैं।  

दो दिवसीय सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स का आयोजन

दो दिवसीय सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स का आयोजन सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के हुआ पीटीआरआई में प्रशिक्षण भोपाल सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं यातायात की नवीन तकनीकों से परिचय कराने के लिये इलेक्ट्रॉनिक इनफोर्समेंट इन एमपी एण्ड टाइम बाउंड इनवेस्टीगेशन फोर रोड़ विषय पर आधारित दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेक शर्मा के निर्देशानुसार पुलिस परिवहन शोध संस्थान (पीटीआरआई) भोपाल में किया गया। मध्यप्रदेश में सड़क पर होने वाली वाहन दुर्घटनाओं एवं दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्या में कमी लाने के उद्देश्य से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से उप निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स के माध्यम से दो दिवसीय प्रशिक्षण सत्र में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु में कमी लाने के लिये पीएम राहत योजना (कैशलेस), राहवीर योजना, हिट एण्ड रन पीड़ित प्रतिकर योजना का व्यापक प्रयोग एवं प्रचार-प्रसार करने पर बल दिया गया। साथ ही यातायात प्रवर्तन की नई तकनीकों जैसे पीओएस, आईटीएमएस, ई-चालन जैसे नव प्रयोगों के बारे में व्यापक अद्यतन रूप से विषय-विशेषज्ञों द्वारा सेमिनार में उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों को बताया गया। साथ ही संस्थान के प्रमुख अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेक शर्मा द्वारा मोटर व्हीकल एक्ट-1988, सीएमवीआर-1989, मध्यप्रदेश मोटर व्हीकल रूल्स-1994 के अद्यतन नवीन प्रावधान तथा वर्तमान में यातायात प्रबंधन में प्रचलित ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ई-डार प्रणाली के बारे में व्यापक रूप से अवगत कराया गया। सड़क सुरक्षा प्रबंधन का उद्देश्य सड़क उपयोगकर्ताओं को एक सुरक्षित सड़क नेटवर्क उपलब्ध कराना, जिसमें पदयात्रियों तथा साइकिल, वाहन चालकों को प्राथमिकता दी गयी है और भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या एवं सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्या में कमी लाने के लक्ष्य को प्राप्त करना है। प्रशिक्षण सत्र के शुभारंभ पर उप पुलिस महानिरीक्षक पीटीआरआई टी.के. विद्याथी द्वारा 4-ई के प्रमुख स्तंभ जैसे एजुकेशन ,इंजीनियरिंग, इनफोर्समेंट एवं इमरजेंसी-केयर की तथा सड़क दुर्घटनाओं की भयावहता को प्रशिक्षणार्थियों के समक्ष रखा। उनके द्वारा यातायात प्रवर्तन को दृष्टिगत रखते हुए ई-इनफोर्समेंट पर जोर दिया। साथ ही ओवर स्पीडिंग से निवारण के लिये इंटरसेप्टर व्हीकल की उपयोगिता को बढ़ाए जाने का अनुरोध किया। वर्तमान में भारत सरकार की योजनाओं राहगीर एवं कैशलेस उपचार के साथ-साथ गोल्डन ऑवर की अवधारणा से प्रशिक्षणार्थियों को अवगत कराया गया। सेमिनार में पीटीआरआई के सहायक पुलिस महानिरीक्षक अभिनीत कुमार रंजन, राजेश मिश्रा, विक्रम सिंह रघुवंशी, उप पुलिस अधीक्षक मनोज खत्री, हिमांशु कार्तिकेय एवं प्रशिक्षण टीम के अधिकारी भी उपस्थित रहे। कोर्स के समापन में प्रशिक्षणार्थियों को पीटीआरआई द्वारा प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये।  

सरकारी योजना को मिलेगा बूस्ट: झारखंड के सभी जिलों में प्लानिंग फेलो की नियुक्ति

रांची. झारखंड के सभी 24 जिलों में योजनाओं के क्रियान्वयन, अनुश्रवण और मूल्यांकन को लेकर राज्य सरकार संविदा के आधार पर प्लानिंग फेलो तैनात करने जा रही है। इनका मुख्य दायित्व होगा जिलों में प्रशासनिक अधिकारियों का सहयोग करना। आंकड़ों के आधार पर योजनाओं को मूर्त रूप देने में ये अधिकारी जिलों के प्रशासनिक अफसरों को सहयोग प्रदान करेंगे। योजना कार्यालयों में होगी नियुक्ति राज्य में सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सभी विभागों में पीएमयू बनाने के प्रस्ताव पर भी सहमति प्रदान कर दी गई है। इसके पूर्व सभी जिला योजना कार्यालयों में एक-एक प्लानिंग फेलो की नियुक्ति होगी। इसके माध्यम से जिलास्तर पर योजनाओं के सतत अनुश्रवण और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप परिणाम के लिए कार्यालयों में एक-एक फेलो की सेवा संविदा के आधार पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। योजनाओं की कठिनाइयों को दूर करने में होंगे सहायक विभागीय तैयारियों के अनुसार, ये पदाधिकारी जिला योजना कायालयों में योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों को दूर करने में सहायक होंगे। इनके द्वारा जिला स्तर पर अधिकृत डाटा बैंक तैयार होगा जिसके आधार पर जिलाें में अंतर विभागीय समन्वय कर जिलों का डिस्ट्रिक्ट प्रोफाइल तैयार करेंगे। इन कर्मियों की सेवा शर्त आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम के आधार पर तैयार की जाएगी। सरकार ने यह भी तय किया है कि इन कर्मियों की की सेवा बाह्य स्रोत (आउट सोर्सिंग) से ली जाएगी। शीघ्र ही इनकी नियुक्ति को लेकर विभाग के स्तर से दिशानिर्देश तय करते हुए पूरी प्रक्रिया परिभाषित की जाएगी। राज्य सरकार ने इनकी नियुक्ति के लिए 50 लाख रुपये का अनुमानित बजट तैयार किया है, जो योजना विभाग को दिया जा चुका है।

5-5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा

रायपुर राज्यपाल  डेका से धमतरी के सुदूर वनांचल क्षेत्र के प्रतिभाशाली बच्चों ने की आत्मीय मुलाकात राज्यपाल  रमेन डेका से आज लोकभवन में धमतरी जिले के सुदूर आदिवासी एवं वनांचल  विकासखंड नगरी के विशेष प्रतिभावान स्कूली बच्चों ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान बच्चों की प्रतिभा और उपलब्धियों पर राज्यपाल ने  प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस समूह में शामिल 22 बच्चों का चयन नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा 2026 के लिए हुआ है, जबकि पांच बच्चों ने स्पोकन इंग्लिश में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।  क्षेत्र की विशेष प्रतिभा   एआई वीडियो क्रिएटर सातवीं कक्षा की छात्रा कुमारी गरिमा साहू द्वारा तैयार  वीडियो का प्रदर्शन भी किया गया, जिसकी राज्यपाल  डेका ने सराहना की और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। राज्यपाल ने इन बच्चों की सफलता में योगदान देने वाले शिक्षकों को भी सम्मानित किया और कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों को आगे बढ़ाने में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। राज्यपाल ने बच्चों से बातचीत करते हुए कहा कि जीवन में लक्ष्य निर्धारित करना बहुत आवश्यक है। लक्ष्य को सामने रखकर निरंतर मेहनत और लगन से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने सरकारी स्कूलों के बच्चों की उपलब्धियों पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि यह सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायी है। राज्यपाल ने उपस्थित सभी  बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए 5-5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। उन्होंने बच्चों से कहा कि इस राशि का उपयोग अपनी पढ़ाई और आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में करें। साथ ही, उन्हें गुल्लक भी प्रदान किए गए, ताकि उनमें नियमित बचत की आदत विकसित हो सके। इस अवसर पर राज्यपाल की उपसचिव मती निधि साहू सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, ग्राम सरपंच, संबंधित स्कूलों के प्रधान पाठक, शिक्षक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सपत्नीक अंगारेश्वर महादेव का पूजन-दर्शन कर अभिषेक किया

उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरूवार को उज्जैन स्थित अंगारेश्वर महादेव मंदिर में सपत्नीक पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंगारेश्वर महादेव का पंचामृत से अभिषेक कर प्रदेश की जनता की सुख-समृद्धि की कामना की।  

प्रशासनिक बदलाव: बठिंडा निगम की कमान लवजीत के हाथ, विकास कार्यों में आएगी तेजी

बठिंडा. बठिंडा नगर निगम को नई कमिश्नर मिल गई हैं। पंजाब सरकार ने पीसीए अधिकारी लवजीत क्लसी को नगर निगम का नया कमिश्नर नियुक्त किया है। वह शुक्रवार यानी आज या फिर सोमवार को अपना कार्यभार संभाल सकती हैं। उनकी नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उन्हें शहर के कामकाज का पहले से अच्छा अनुभव है। लवजीत क्लसी इससे पहले बठिंडा में अतिरिक्त उपायुक्त ग्रामीण और बीडीए में सहायक प्रशासक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। इस कारण उन्हें स्थानीय स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था, विकास कार्यों और लोगों की समस्याओं की अच्छी समझ है। अधिकारियों का मानना है कि उनके अनुभव का सीधा लाभ नगर निगम के कामकाज को मिलेगा और लंबे समय से लंबित पड़े कार्यों में तेजी आएगी। सरकार ने मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करते हुए कंचन से नगर निगम कमिश्नर का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया है। पिछले कई महीनों से कंचन के पास यह जिम्मेदारी अतिरिक्त रूप से थी और वह अपनी नियमित ड्यूटी के साथ निगम का काम भी देख रही थीं। अब इस बदलाव के बाद प्रशासनिक जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है। स्थायी कमिश्नर की नियुक्ति से योजनाएं जल्द पूरी होंगी नई व्यवस्था के तहत अतिरिक्त उपायुक्त सामान्य और अतिरिक्त उपायुक्त ग्रामीण को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से चलते रहें और किसी प्रकार की बाधा न आए। अधिकारियों का कहना है कि स्थायी कमिश्नर की नियुक्ति से नगर निगम के कामकाज में स्थिरता आएगी और योजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। शहर में लंबे समय से स्थायी कमिश्नर की नियुक्ति का इंतजार किया जा रहा था। ऐसे में अब नई नियुक्ति से लोगों को उम्मीद है कि सफाई व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि योजनाओं को सही दिशा में लागू किया गया, तो शहर के विकास को नई गति मिल सकती है। अब सभी की नजरें नई कमिश्नर के कार्यभार संभालने और उनकी प्राथमिकताओं पर टिकी हैं।

धार्मिक आयोजन की धूम: हनुमान जयंती पर 5 दिन चलेगी रामकथा, बड़े नेता होंगे शामिल

रायपुर. हनुमान जयंती के अवसर पर राम जानकी मंदिर, नर्मदा कुंड, निर्वाणी अखाड़ा में इस वर्ष 5 दिवसीय भव्य रामकथा आयोजन किया जाएगा. कार्यक्रम में शामिल होने राज्यपाल रमेन डेका के साथ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को भी आमंत्रण पत्र सौंपा गया, जिसे उन्होंने स्वीकार करते हुए उपस्थित रहने की सहमति प्रदान की है. पांच दिवसीय भव्य आयोजन का निमंत्रण पत्र देने दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर राजीव लोचन दास एवं धर्म स्तंभ काउंसिल छत्तीसगढ़ के सभापति डॉ सौरव निर्वाणी राजभवन में राज्यपाल से भेंट की. इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री निवास पहुँच मुख्यमंत्री साय को निमंत्रण पत्र सौंपा. बताया कि आयोजन के दौरान राजीव लोचन दास द्वारा रामकथा का वाचन किया जाएगा, वहीं प्रतिदिन छत्तीसगढ़ के मानस मर्मज्ञ संत भी श्रद्धालुओं को प्रवचन देंगे. इसी क्रम में डॉ संदीप अखिल द्वारा राम रसायन का विशेष श्रवण भी कराया जाएगा. कार्यक्रम की शुरुआत भव्य कलश यात्रा से होगी, जिसमें मातृशक्ति नगर भ्रमण करेगी,मंदिर के महंत सुरेंद्र दास ने बताया कि प्रतिदिन कथा के बाद श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था रहेगी. हनुमान जयंती के दिन नर्मदा कुंड में भव्य महाआरती का आयोजन किया जाएगा, जो इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहेगा. धर्म स्तंभ काउंसिल के अनुसार, कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्रिमंडल के सदस्य, निगम-मंडल के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है. 

MP में तीसरी बार बारिश का अनुमान, आंधी के साथ; 27-29 मार्च को उज्जैन और ग्वालियर-चंबल में अलर्ट

भोपाल  भोपाल में आज का मौसम. मध्य प्रदेश में मार्च के महीने में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है. मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में इस महीने तीसरी बार मौसम का मिजाज बदलेगा. जिससे तेज गर्मी के बजाय अब अगले 3 दिनों तक झमाझम बारिश और आंधी का दौर देखने को मिलेगा. जहां सक्रिय ‘वेस्टर्न डिस्टरबेंस’ के चलते कल 27, 28 और 29 मार्च को प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है।  मौसम विभाग की मानें तो इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के जिलों में देखने को मिलेगा. जहाँ तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ सकती हैं. इससे पहले मार्च महीने में ही आंधी और बारिश के दो दौर पहले ही प्रदेश को झकझोर चुके हैं. पिछला दौर लगातार 4 दिनों तक चला था, जिसने मध्य प्रदेश के 45 से ज्यादा जिलों को अपनी चपेट में लिया था. इस दौरान 17 जिलों में भारी ओलावृष्टि भी दर्ज की गई थी।  मार्च में आंधी-बारिश के दो दौर आ चुके हैं। एक दौर लगातार 4 दिन तक रहा। इस दौरान 45 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश हुई। वहीं, 17 जिलों में ओले भी गिरे। इससे गेहूं, पपीता और केले की फसलें बर्बाद हुई है। अब तीसरा दौर 27 मार्च से शुरू होने की संभावना है। इससे पहले गुरुवार को तेज गर्मी का असर रह सकता है। खासकर उज्जैन, भोपाल, सागर और नर्मदापुरम संभाग में गर्मी ज्यादा रहेगी। एमपी के 5 शहरों में पारा 38 डिग्री के पार, भोपाल से गर्म उज्जैन मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार को प्रदेश के कई शहरों में गर्मी का असर तेज रहा। 5 शहर ऐसे रहे, जहां तापमान 38 डिग्री के पार पहुंच गया। 5 बड़े शहरों की बात करें तो सबसे गर्म उज्जैन रहा। यहां अधिकतम तापमान 36.5 डिग्री दर्ज किया गया। जबलपुर में 36.1 डिग्री, इंदौर में 36 डिग्री, भोपाल में 35.8 डिग्री और ग्वालियर में तापमान 35.1 डिग्री दर्ज किया गया। नर्मदापुरम में प्रदेश में सबसे ज्यादा तापमान रहा। यहां पारा 38.8 डिग्री दर्ज किया गया। रतलाम में 38.6 डिग्री, खंडवा में 38.5 डिग्री, खरगोन-रायसेन में 38 डिग्री, धार-मंडला में 36.8 डिग्री, गुना में 36.5 डिग्री, खजुराहो में 36.4 डिग्री और बैतूल में तापमान 36.2 डिग्री रहा। भोपाल, उज्जैन, सागर और नर्मदापुरम संभाग में तेज गर्मी फिलहाल कल 27 मार्च से शुरू हो रहे इस तीसरे दौर ने किसानों की धड़कनें फिर से बढ़ा दी हैं, क्योंकि फसलों पर बर्बादी का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है.हालांकि, बारिश के इस दौर से ठीक पहले आज गुरुवार को प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज गर्मी अपना असर दिखाएगी. मौसम विभाग के अनुसार खासकर उज्जैन, भोपाल, सागर और नर्मदापुरम संभाग में तापमान में बढ़ोतरी देखी जा सकती है और यहाँ गर्मी का प्रभाव ज्यादा रहेगा. लेकिन शुक्रवार से शुरू होने वाला पश्चिमी विक्षोभ एक बार फिर तापमान में गिरावट लाएगा और पूरे प्रदेश के मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा. वहीं पिछले 24 घंटे में प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान खंडवा में 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान नर्मदापुरम के पचमढ़ी में 12.8 डिग्री सेल्सियस रहा। फरवरी में 4 बार ओले गिरे, मार्च में तीन बार इस बार फरवरी में मौसम का मिजाज चार बार बदला। शुरुआत में ही प्रदेश में दो बार ओले, बारिश और आंधी का दौर रह चुका है। इससे फसलों को खासा नुकसान हुआ था। इसके बाद सरकार ने प्रभावित फसलों का सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार प्रदेश भीग गया है। 19, 20 और 21 फरवरी को भी असर रहा। फिर चौथी बार 23-24 फरवरी को भी ओले-बारिश का दौर रहा। मार्च में गर्मी के सीजन की शुरुआत हो गई। पहले पखवाड़े में तेज गर्मी वाला मौसम रहा। इसी बीच अब मौसम का मिजाज बदल रहा है। मौसम विभाग की माने तो इस सीजन मार्च में पहली बार स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। जिसका असर चार दिन तक बना रहा। इसकी वजह से लगातार तीन दिन तक ओले गिर चुके हैं। अब नया सिस्टम एक्टिव होगा। 28 मार्च की रात से एक और सिस्ट मौसम विभाग ने 28 मार्च की रात से एक और सिस्टम एक्टिव होने की संभावना जताई है। यह पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है। इसके चलते अप्रैल की शुरुआत भी आंधी-बारिश से हो सकती है। अप्रैल-मई में तेज गर्मी का अनुमान मौसम विभाग ने इस साल अप्रैल और मई में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ने का अनुमान जताया है। इन दो महीने के अंदर ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में पारा 45 डिग्री के पार पहुंच सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग भी गर्म रहेंगे। मार्च में तीनों मौसम का असर मध्यप्रदेश में पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च महीने में रातें ठंडी और दिन गर्म रहते हैं। बारिश का ट्रेंड भी है। इस बार भी ऐसा ही मौसम है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में बारिश का दौर रह चुका है। वहीं, रात का तापमान स्थिर है। भोपाल में दिन में तेज गर्मी के साथ बारिश भोपाल में मार्च महीने में दिन में तेज गर्मी पड़ने के साथ बारिश का ट्रेंड भी है। मौसम विभाग के अनुसार, मार्च महीने में गर्मी के सीजन की शुरुआत हो जाती है। इसके चलते दिन-रात के तापमान में बढ़ोतरी होने लगती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 30 मार्च 2021 को अधिकतम तापमान रिकॉर्ड 41 डिग्री पहुंच चुका है। वहीं, 45 साल पहले 9 मार्च 1979 की रात में पारा 6.1 डिग्री दर्ज किया गया था। वर्ष 2014 से 2023 के बीच दो बार ही अधिकतम तापमान 36 डिग्री के आसपास रहा। बाकी सालों में पारा 38 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है।   27 मार्च को इन जिलों में बारिश का येलो अलर्ट ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और सतना।  28 मार्च को इन जिलों में बारिश का येलो अलर्ट ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा और मऊगंज।  29 मार्च को इन जिलों में बारिश का येलो अलर्ट ग्वालियर, उज्जैन, आगर मालवा, राजगढ़, गुना, रतलाम, मंदसौर, नीमच, शिवपुरी, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर।  … Read more

जेपी अस्पताल में प्रसव सुविधा बंद, डिप्टी सीएम ने सीएमएचओ से तलब की रिपोर्ट; तीन साल से कार्रवाई का इंतजार

भोपाल  भोपाल के जेपी अस्पताल में तीन साल से बंद प्रसव सुविधा का मामला अब सरकार के उच्च स्तर तक पहुंच गया है। डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सीएमएचओ से इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट एक सप्ताह में मांगी है।  मामला सामने आने के बाद डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने सीएमएचओ से पूरी जानकारी तलब की है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि एक सप्ताह के भीतर पूरे प्रकरण की समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में है और जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट मिलने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी, जिससे अब इस लंबे समय से लंबित विवाद पर फैसला होने की उम्मीद बढ़ गई है। तीन साल पहले बंद हुई प्रसव सुविधा जेपी अस्पताल, जिसे प्रदेश का मॉडल जिला अस्पताल माना जाता है, वहां वर्ष 2022 में बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग और शिशु रोग विभाग को यहां से हटाकर काटजू सिविल अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद से जेपी अस्पताल में प्रसव सुविधा पूरी तरह बंद हो गई। यही निर्णय विवाद की जड़ बना। खास बात यह है कि जिला अस्पताल होने के बावजूद यहां प्रसव सुविधा का बंद होना आईपीएचएस गाइडलाइन के भी विपरीत माना जा रहा है। कर्मचारियों और संगठनों के पत्र, फिर भी नहीं हुई सुनवाई इस फैसले के बाद जेपी अस्पताल के कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों ने कई बार पत्र लिखकर इस निर्णय को निरस्त करने की मांग की। इन पत्रों में अस्पताल की उपयोगिता, मरीजों की परेशानी और नियमों का हवाला दिया गया, लेकिन विभाग स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। लगातार पत्राचार के बावजूद कार्रवाई न होने से कर्मचारियों में असंतोष भी बढ़ा है। रोज 50 से ज्यादा मरीज, फिर भी सुविधा नहीं जेपी अस्पताल में आज भी रोजाना 50 से अधिक महिलाएं जांच के लिए पहुंचती हैं। लेकिन इमरजेंसी की स्थिति में उन्हें काटजू अस्पताल रेफर करना पड़ता है। इस दौरान देरी होने से कई मामलों में मरीजों की हालत बिगड़ने का खतरा रहता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। पहले 30 डिलीवरी रोज, अब संसाधन बेकार पहले जेपी अस्पताल में रोजाना करीब 30 डिलीवरी होती थीं और 150 बिस्तरों का स्त्री एवं प्रसूति विभाग संचालित था। शिशु रोग विभाग में भी 60 बेड की सुविधा थी। वर्तमान में ये संसाधन मौजूद होने के बावजूद उपयोग नहीं हो पा रहे हैं, जिससे अस्पताल की क्षमता प्रभावित हो रही है। काटजू अस्पताल पर बढ़ा दबाव, सीमित क्षमता दूसरी ओर काटजू अस्पताल में मेटरनल एंड चाइल्ड केयर यूनिट विकसित की गई है, लेकिन वहां प्रतिदिन केवल 20 डिलीवरी ही हो पा रही हैं। 300 बेड की योजना पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है और ब्लड बैंक जैसी सुविधाओं की कमी भी सामने आई है। ऐसे में पूरा दबाव वहां शिफ्ट होने से व्यवस्था प्रभावित हो रही है।