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सामाजिक बहिष्कार का आरोप: महिला सरपंच सहित चार जनप्रतिनिधि पहुंचे कलेक्टर के दरबार

बालोद. जिले के डौंडीलोहारा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत किसना में पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। गांव की महिला सरपंच, उपसरपंच और दो पंचों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पिछले छह से सात महीनों से उन्हें गांव में लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया गया है, जिससे पंचायत के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ग्राम पंचायत किसना की सरपंच डोमेश्वरी यादव, उपसरपंच और दो पंचों ने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में बताया कि पंचायत चुनाव में पराजित हुए कुछ लोगों द्वारा लगातार उनके कामकाज में बाधा डाली जा रही है। आरोप है कि उन्हें मनरेगा सहित अन्य शासकीय योजनाओं के कार्यों का संचालन नहीं करने दिया जा रहा, जिसके कारण गांव में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि गांव में उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है, जिससे उन्हें दैनिक जीवन में भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य पंचों को भी ग्रामसभा और पंचायत बैठकों में शामिल होने से रोका जा रहा है, ताकि पंचायत के आवश्यक कार्यों का संचालन न हो सके। पंचों को मंदिर में दिलाई जा रही कसम! सरपंच डोमेश्वरी यादव ने आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोग पंचों को गांव के शीतला मंदिर में ले जाकर यह शपथ दिलाते हैं कि वे पंचायत की बैठकों में शामिल नहीं होंगे। इतना ही नहीं, बैठक में शामिल होने पर सामाजिक बहिष्कार और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने की धमकी भी दी जाती है। इसी डर के कारण कई पंच बैठकों में शामिल नहीं हो रहे हैं, जिससे कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अविश्वास प्रस्ताव के बाद बढ़ा विवाद सरपंच डोमेश्वरी यादव ने बताया कि कुछ समय पहले उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन वह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। उन्हें चार वोटों का समर्थन मिला और वे अपने पद पर बनी रहीं। उनका आरोप है कि इसके बाद से विरोधी पक्ष के लोगों ने उनके अलावा उपसरपंच और दो पंचों का भी बहिष्कार कर दिया है। उनका कहना है कि जिन लोगों ने अविश्वास प्रस्ताव के दौरान उनका समर्थन किया, उन्हें भी निशाना बनाया जा रहा है। पुलिस से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं सरपंच ने बताया कि इस पूरे मामले की शिकायत पहले भी देवरी थाने में की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि प्रशासनिक हस्तक्षेप के अभाव में गांव का माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा है और पंचायत के विकास कार्य लगभग ठप पड़ गए हैं। अब सरपंच, उपसरपंच और पंचों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा पंचायत के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

सायबर धोखाधड़ी होने पर अविलंब 1930 पर करें शिकायत

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सायबर खतरा एक ऐसा अदृश्य दुश्मन है , जो बिना दस्तक दिए हमारे घरों तक पहुंच रहा है। सायबर खतरों को समझना ही उनसे बचने का सबसे बड़ा रास्ता है। सावधानी ही सुरक्षा है और जानकारी ही बचाव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, डीप-फेक, फेक प्रोफाइल, हैकिंग, डेटा ब्रीचिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, ओटीपी धोखाधड़ी, ऑनलाइन शॉपिंग ठगी, रैनसमवेयर हमले और फर्जी निवेश लिंक जैसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को सतर्क रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की जनता को सायबर सुरक्षा के तीन महत्वपूर्ण सूत्र 'जागरूकता, सावधानी और सहभागिता' के बारे में बताकर कहा कि जो लोग सायबर सुरक्षा की जानकारी रखते हैं, वे दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को रवीन्द्र भवन में आयोजित ‘राज्य व्यापी सायबर जागरूकता अभियान’ के तहत "सेफ क्लिक 2.0'' के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह अभियान 24 जून से शुरू होकर 8 जुलाई तक प्रदेश के 10 संभाग, 55 जिलों और 50 हजार से अधिक गांव में एक साथ चलेगा। इस अभियान के तहत सायबर ठगी और अन्य अपराधों से बचने के लिए जागरूक किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सायबर जागरूकता अभियान के पोस्टर, स्कूली बच्चों के लिए तैयार की गई सायबर जागरूकता बुकलेट्स तथा अभियान के ऑफिशियल वीडियो का विमोचन किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सायबर जागरूकता रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। समापन पर प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान के संचालन के लिए मध्यप्रदेश पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि संकट के समय मध्यप्रदेश पुलिस हमेशा संकटमोचक हनुमान की भूमिका में रहती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2025 में प्रदेश में विभिन्न सायबर जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से 33 लाख से अधिक नागरिकों को जागरूक किया गया। अब अभियान का विस्तार पंचायतों, स्कूलों, बैंकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों और सरकारी कार्यालयों तक किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार के 56 विभागों की लगभग 1700 सेवाएं एकीकृत पोर्टल पर उपलब्ध हैं और इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से सायबर सुरक्षा को जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में सायबर खतरे अदृश्य रूप में हमारे जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन और कंप्यूटर के माध्यम से होने वाले सायबर अपराधों से बचाव के लिए सावधानी और जागरूकता ही सबसे प्रभावी हथियार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सायबर अपराधों के प्रति प्रदेशवासियों को जागरुक करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस का "सेफ क्लिक 2.0'' सायबर जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अभियान से प्रदेश के सभी नागरिक जागरूक होंगे। उन्होंने कहा कि सायबर अपराधी एक प्रकार से डिजिटल दौर के राक्षस हैं, जो दबे पाँव लैपटॉप, कम्प्यूटर और मोबाइल के जरिए हमारे साथ सेंधमारी और डकैती करते हैं। आजकल डिजिटल अरेस्ट, डीप फेक, डेटा ब्रीजिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, रेनसमवेयर अटैक जैसे अनेक प्रकार के सायबर अपराध संचालित हैं। लेकिन सायबर अपराधों के मामले में सावधानी ही बचाव है। मध्यप्रदेश पुलिस ने देश में पहली बार सायबर डकैती का लाइव पर्दाफाश किया था। इसके लिए मध्यप्रदेश पुलिस बधाई की पात्र है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश पुलिस ने पिछले वर्ष अपने सायबर जागरुकता अभियान के माध्यम से लगभग 33 लाख से अधिक नागरिकों को सतर्क किया था। इस वर्ष 15 दिन तक चलने वाले "सेफ क्लिक 2.0'' अभियान में हर दिन अलग थीम रखी गई है। इस दौरान लोगों को बैंकिंग, महिला सुरक्षा, ग्रामीण इलाकों में जागरुकता के बारे में बताया। यह अभियान बैंकों, बाजारों, स्कूलों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थलों पर संचालित किया जाएगा। इसके लिए लोकरंजन के रुचिकर कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। सायबर सुरक्षा को जागरूकता, सावधानी और सहभागिता के माध्यम से प्रभावी बनाया जाएगा। सायबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के बारे में लोगों को बताया जा रहा है। यह नंबर सायबर अपराध के मामले में सबसे पहले पीड़ितों की ढ़ाल बनता है। लालच और जल्दबाजी कर सकती है आर्थिक नुकसान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों को सचेत करते हुए कहा कि अगर आपको कोई अनजान लिंक मिले या डराने धमकाने की कॉल आए तो "रुको, सोचो और फिर एक्शन लो''। लालच और जल्दबाजी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। पुलिस के अभियान को जन जागरुकता अभियान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में हम सभी सहभागी बनें। राज्य सरकार ने सायबर अपराध के विरुद्ध मजबूत फ्रेमवर्क तैयार किया है। नागरिकों के डेटा संरक्षण के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा एक्ट को भारत सरकार ने लागू किया है। प्रदेश में कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम का गठन किया गया है। राज्य शासन के 56 विभागों की 1700 से अधिक सेवाओं को एक पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है। यह एक प्रशंसनीय पहल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि "सेफ क्लिक 2.0'' अभियान में बैकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों सबको जोड़ा गया है। अभियान को शुरू करने का यही सही समय है, क्योंकि हमारी युवा पीढ़ी उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालयों में प्रवेश ले रही है। जागरुकता ही सायबर क्राइम से बचने का है सुरक्षा कवच : डीजीपी मकवाना पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 24 जून से 8 जुलाई तक सेफ क्लिक 2.0 सायबर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज सायबर अपराध केवल एक आर्थिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह समाजिक विश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा के भी जुड़ा गंभीर विषय है। पिछले कुछ वर्षों में सायबर अपराधों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और करीब 80 प्रतिशत शिकायतें वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित होती हैं। डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक, फर्जी प्रोफाइल, फर्जी सिमकार्ड, म्यूल बैंक अकाउंट, महिला एवं बच्चों के जुड़े अपराधों की संख्या भी बढ़ी है। मध्यप्रदेश पुलिस सायबर अपराध पर काबू पाने की कोशिश कर रही है। हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है- रोकथाम, अनुसंधान और जागरुकता। इसी दिशा में 25 दिसंबर 2025 से प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर की शुरुआत की गई है। वर्तमान में 1 लाख रुपए तक की सायबर धोखाधड़ी की … Read more

JSCA स्टेडियम में अव्यवस्था बनी हादसे की वजह, 4 में से सिर्फ एक गेट खुलने से भगदड़

रांची. जेएससीए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में जेपीएल-20 फाइनल मुकाबला देखने पहुंचे क्रिकेट प्रेमियों को भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। फाइनल मैच को लेकर उमड़ी अप्रत्याशित भीड़ और जेएससीए और पुलिस-प्रशासन की कमजोर तैयारी के कारण नॉर्थ गेट पर अफरातफरी मच गई। पहले लोगों को नॉर्थ गेट से प्रवेश कराया जा रहा था। भीड़ अधिक हो जाने से लोगों को साउथ गेट से प्रवेश करने के लिए बोल दिया गया। इसी को लेकर भगदड़ हो गई। हालात इतने बिगड़ गए कि गेट पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। नाराज दर्शकों ने बाद में वेस्ट गेट को तोड़ दिया।  बच्चे, महिलाएं और युवा हुए चोटिल प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्टेडियम में प्रवेश के दौरान हजारों दर्शक एक साथ नॉर्थ गेट की ओर पहुंच गए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल और बैरिकेडिंग की व्यवस्था नहीं थी। इसी दौरान धक्का-मुक्की शुरू हुई और लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे। भगदड़ में बच्चे, महिलाएं और युवा भी चोटिल हो गए। इस बीच स्टेडियम के बाहर लगे लोहे की बैरिकेडिंग टूट गई। इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन के तमाम आला पदाधिकारी घटना स्थल पहुंचे और पूरे मामले को जानने का प्रयास में लगे रहें। दजनों लोग हुए घायल आठ गंभीर रूप से हुए जख्मी घटना में कम से कम आठ क्रिकेट प्रेमियों के घायल होने की पुष्टि हुई है। इनमें से पांच घायलों को राज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि दो घायलों को सदर अस्पताल और एक को पारस अस्पताल पहुंचाया गया। दर्जनों घायलों को निजी अस्पतालों में प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। राज अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि सभी घायल खतरे से बाहर हैं और उनका उपचार किया गया है। हालांकि एक लड़की के पेट में गंभीर चोट लगी है, जिसके कारण उसे निगरानी में रखा गया है। सिर्फ एक गेट खोला गया घटना के बाद पुलिस और स्टेडियम प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फाइनल मुकाबले को लेकर बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की संभावना पहले से थी, बावजूद इसके भीड़ प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था नहीं दिखी। कई दर्शकों ने आरोप लगाया कि गेट पर न तो पर्याप्त सुरक्षा कर्मी मौजूद थे और न ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था थी। स्टेडियम में प्रवेश के लिए चार गेट है लेकिन एक ही गेट खोला गया जिससे भगदड़ मच गई। इसमें भी जब भीड़ अधिक होने लगी तो गेट बंद कर दिया गया और लोग बेकाबू हो गए। जबकि अंदर स्टेडियम में काफी जगह थी। चारों ओर बिखरे पड़े हैं चप्पल-जूता स्टेडियम के बाहर और अंदर लोगों के अफरा-तफरी के दौरान चप्पल-जूता बिखरा पड़ा है। हालांकि घंटों प्रयास के बाद स्थिति पर काबू पाया गया लेकिन इस बीच महिला, बच्चे व युवाओं को काफी चोट लगी। दर्जनों लोग हल्के चोट लगने के बाद किसी तरह वापस अपने घर को चले गए लेकिन अधिक घायलों को अस्पताल ले जाया गया। दर्जनों एंबुलेंस भेजी गईं रांची के सिविल सर्जन डा. प्रभात कुमार ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही स्टेडियम परिसर में देर रात तक लगातार 108 एंबुलेंस भेजी जाती रही। रात 11.30 बजे तक सदर अस्पताल में दो, पारस अस्पताल में एक और राज अस्पताल में पांच घायलों को इलाज के लिए लाया गया। उन्होंने बताया कि सभी घायलों का इलाज कराया जा रहा है और प्रशासन के साथ लगातार समन्वय बना हुआ है। आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को सदर अस्पताल में भी शिफ्ट किया जा सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि देर रात तक कुछ और घायल इलाज के लिए पहुंच सकते हैं। बड़े आयोजन में सुरक्षा प्रबंधन पर फिर सवाल जेपीएल फाइनल जैसे बड़े आयोजन में हुई इस घटना ने एक बार फिर राजधानी में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। खेल प्रेमियों का कहना है कि मैच का रोमांच देखने पहुंचे लोगों को स्टेडियम प्रबंधन की ओर से अव्यवस्था और लापरवाही की कीमत चोट खाकर चुकानी पड़ी। अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई और घटना की जांच पर टिकी है। लोगों ने स्टेडियम प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों के अंदर काफी गुस्सा भरा हुआ था।

पंजाब में निकाय चुनाव की सरगर्मी तेज, 30 उम्मीदवारों ने भरा नामांकन, 5 जुलाई को वोटिंग

चंडीगढ़. पंजाब में निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य चुनाव आयोग द्वारा चार निकायों में होने वाले चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पहले दिन उम्मीदवारों की ओर से कुल 30 नामांकन पत्र दाखिल किए गए, जिससे चुनावी माहौल धीरे-धीरे गर्म होता दिखाई दे रहा है। इन चुनावों के तहत होशियारपुर नगर निगम, गुरु हरसहाय नगर परिषद, जलालाबाद नगर परिषद और ममदोट नगर पंचायत में मतदान कराया जाएगा। कुल 95 वार्डों में होने वाले इन चुनावों के लिए उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पेश करनी शुरू कर दी है। चुनाव आयोग के अनुसार नामांकन प्रक्रिया 25 जून तक जारी रहेगी। दोपहर 3 बजे तक होते हैं नामांकन दाखिल नामांकन पत्र प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक स्वीकार किए जा रहे हैं। इसके बाद 25 जून को ही नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। 26 जून को सभी नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि 27 जून को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उम्मीदवारों को दोपहर 3 बजे तक नाम वापस लेने का अवसर मिलेगा। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान प्रक्रिया पांच जुलाई को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित की जाएगी। मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के माध्यम से कराया जाएगा, जिससे प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मतदान समाप्त होने के बाद उसी दिन सभी मतदान केंद्रों पर मतगणना भी संपन्न कराई जाएगी। संबंधित क्षे9ों में आचार संहिता लागू चुनाव आयोग ने कहा है कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं ताकि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सकें। सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। चुनाव की घोषणा के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके चलते राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनावी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। प्रशासन की ओर से सभी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

रायगढ़ स्टील प्लांट में बड़ा हादसा, फर्नेस विस्फोट में 4 श्रमिक झुलसे

रायगढ़. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से बड़ी खबर सामने आई है। पूंजी पथरा स्थित रायगढ़ इस्पात संयंत्र में फर्नेस ब्लास्ट हुआ है, जिसकी चपेट में आने से करीब 4 मजदूर घायल हो गए हैं। सभी घायलों को तत्काल अपेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। जानकारी के अनुसार, फर्निश में अधिक नमी (मॉइश्चर) जमा हो जाने के कारण ब्लास्ट होने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक सभी घायलों की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। घायलों में अमरेश कुमार, फिरोज आलम खान और रामनाथ सूर्यवंशी (जांजगीर-चांपा) शामिल हैं, जबकि एक अन्य घायल की पहचान अभी नहीं हो सकी है। सभी घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है, हालांकि इनमें से दो घायलों को बेहतर उपचार के लिए रेफर करने की तैयारी है। ब्लास्ट होने की बात से इस्पात के जीएम ने किया इनकार रायगढ़ इस्पात के जीएम सुनील पांडा ने कहा कि बरसात के समय में फर्नेस में रॉ मैटेरियल के कारण नमी (मॉइश्चर) आ जाता है। नमी आने की वजह से जब फर्नेस हिट होता है तो कभी-कभी उसमें गैस का फॉर्मेशन हो जाता है। गैस ऊपर निकलने के कारण धुआं काफी फैल गया और आसपास मौजूद मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान ऊपर कार्य कर रहे कुछ मजदूरों ने घबराहट में इधर-उधर छलांग लगा दी, जिसकी वजह से उन्हें चोटें आई हैं। उन्होंने ब्लास्ट होने की बात से इनकार किया है और कहा कि यह घटना अफरा-तफरी के कारण हुई है। इस घटना में करीब चार लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद उद्योग प्रबंधन के अधिकारी अपेक्स अस्पताल में मौजूद हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं मौके पर औद्योगिक स्वास्थ्य विभाग की टीम और पुलिस भी पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है।

गुणवत्ता की निगरानी के लिए मानक मापदंड तय किए जाएं: राज्यपाल पटेल

गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड किए जाए निर्धारित : राज्यपाल पटेल  राज्यपाल ने सिकल सेल उन्मूलन अभियान की प्रगति पर हर्ष व्यक्त किया लोक भवन में जनजातीय कार्य विभाग समीक्षा बैठक हुई भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि योजनाओं की मंशा और क्रियान्वयन की व्यवहारिकता में संवेदनशीलता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन मुख्यतः तकनीकी विषय है, इसलिए हितग्राहियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। निर्माण सामग्री एवं कार्य की गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड निर्धारित किए जाए। अधिकारियों द्वारा निगरानी मापदंड के अनुसार नियमित गुणवत्ता परीक्षण करना चाहिए।       राज्यपाल पटेल लोक भवन में बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।  राज्यपाल को बैठक में पीएम-जनमन योजना अंतर्गत 9 विभागों की 11 अधोसंरचनात्मक, 7 हितग्राही मूलक योजनाओं और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 17 विभागों की 25 योजनाओं  की प्रगति की जानकारी दी गई। राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजातीय बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता की पहल पीएम-जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजनाएं है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य के लिए निर्धारित समय सीमा तक कार्य की रीति-नीति उचित नहीं है। रणनीति, समय सीमा से पहले कार्य पूरा करने की होनी चाहिए। नए कार्यों के क्रियान्वयन में पूर्व अनुभवों और चुनौतियों को दृष्टिगत रखते हुए कार्य योजना तैयार की जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अति पिछड़ी जनजातियों के विकास और उत्थान के प्रयासों को आवश्यकता और बहुलता की प्राथमिकता के साथ क्रियान्वयन की औपचारिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए। राज्यपाल पटेल ने प्रदेश में सिकल सेल उन्मूलन अभियान के तीव्र गति से क्रियान्वयन पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 से पूर्व वर्ष 2026 तक लक्ष्य का पूरा होना अनुमानित है। उन्होंने सभी संबंधितों को इसके लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष की आयु तक के सिकल सेल रोगी वाहक के स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे उनका भावी जीवन सुरक्षित हो जाएगा। जरूरी है कि सिकल सेल की दवाओं की उपलब्धता सदैव सुनिश्चित रहे। एलोपैथिक उपचार पद्धति के साथ ही आयुर्वेद औषधियों के उपयोग के संबंध में जन जागरण के प्रयासों की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की दवाओं के उपयोग से रक्त की उपलब्धता बढ़ने और थकान में कमी के उत्साह जनक प्रारंभिक परिणाम प्राप्त हुए है। राज्यपाल ने बैठक में जनजातीय बहुल क्षेत्रों की तहसीलवार बुनियादी सुविधाओं का मानचित्र तैयार कर प्रभावी निगरानी, जन औषधि केन्द्रों के संचालन में जनजातीय युवाओं की भागीदारी तथा विद्यालयों में छात्राओं, छात्र के पृथक शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया। समीक्षा बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, जनजातीय प्रकोष्ठ की सदस्य सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, प्रकोष्ठ के सदस्य, लोक भवन और जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।  

कोदो-कुटकी की खेती से बढ़ेगी आय और सेहत, किसानों के लिए बेहतर विकल्प

विशेष लेख कोदो-कुटकी की खेती अपनाएं, पोषण और समृद्धि दोनों पाएं पारंपरिक धरोहर से आधुनिक पहचान तक रायपुर  छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि परंपरा में कोदो और कुटकी का विशेष महत्व रहा है। सदियों से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों के भोजन का अभिन्न हिस्सा रहे ये लघु धान्य आज एक बार फिर किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। बदलती जलवायु परिस्थितियों, पोषण संबंधी चुनौतियों और बेहतर कृषि की आवश्यकता के बीच कोदो-कुटकी जैसी मिलेट फसलें भविष्य की खेती का मजबूत आधार बनकर उभर रही हैं। कोदो (पास्पलम स्क्रोबिकुलेटम) और कुटकी (पैनिकम सुमाट्रेंस) ऐसी फसलें हैं जिन्हें कम पानी, कम लागत और सीमित संसाधनों में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। यही कारण है कि ये छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम बन रही हैं। कम उपजाऊ, पथरीली और ढालू भूमि में भी इनकी खेती संभव है, जहां अन्य फसलें अपेक्षित उत्पादन नहीं दे पातीं। आज जब दुनिया स्वास्थ्यवर्धक भोजन की ओर लौट रही है, तब कोदो और कुटकी का महत्व और बढ़ गया है। कोदो में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, आयरन और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि कुटकी फाइबर, प्रोटीन, फास्फोरस तथा अन्य खनिज तत्वों से भरपूर होती है। विशेषज्ञों के अनुसार इनका नियमित सेवन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और एनीमिया जैसी समस्याओं के नियंत्रण में सहायक हो सकता है। यही वजह है कि आज इन्हें ‘सुपर फूड’ के रूप में पहचान मिल रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वर्ष 2026 में कोदो का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3,200 रुपये प्रति क्विंटल तथा कुटकी का 3,350 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ इन फसलों की खेती के प्रति उत्साह बढ़ा है। विभागीय जानकारी के अनुसार खरीफ वर्ष 2025 में प्रदेश में कोदो फसल 39.02 हेक्टेयर और कुटकी फसल 38.03 हेक्टेयर रकबे में लगाए गए थे। वैसे विगत खरीफ वर्ष में प्रति हेक्टेयर कोदो की उत्पादन 550 किलोग्राम तथा कुटकी की उत्पादन 675 किलोग्राम दर्ज की गई है। यानी कोदो की उत्पादन 21.46 टन थी, वहीं 25.67 टन कुटकी का उत्पादन हुआ था। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी किसानों से धान के साथ-साथ कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलों का उत्पादन बढ़ाने की अपील की है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि उन्नत तकनीकों को अपनाकर कोदो-कुटकी की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। मानसून की शुरुआत के साथ जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम पखवाड़े तक बुवाई, बीजोपचार, कतार पद्धति, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा समय पर खरपतवार नियंत्रण जैसे उपाय किसानों को बेहतर उत्पादन दिला सकते हैं। बढ़ती बाजार मांग, मिलेट आधारित उत्पादों का विस्तार और सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं इन फसलों के व्यावसायिक महत्व को लगातार बढ़ा रही हैं। एक समय केवल ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक सीमित रहने वाली कोदो-कुटकी आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रही हैं। पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए कोदो और कुटकी अत्यंत महत्वपूर्ण फसलें हैं। आवश्यकता इस बात की है कि किसान आधुनिक तकनीकों के साथ इन पारंपरिक फसलों का उत्पादन बढ़ाएं और उपभोक्ता इन्हें अपने दैनिक भोजन का हिस्सा बनाएं। कोदो-कुटकी केवल अनाज नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, उत्तम कृषि और समृद्ध भविष्य की आधारशिला हैं। (एल.डी. मानिकपुरी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

आर्द्रा स्नान पर बक्सर के घाटों पर जुटे 20 हजार श्रद्धालु, गंगा स्नान के लिए उमड़ी भीड़

बक्सर. प्रसिद्ध रामरेखा घाट पर बुधवार तड़के से ही आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। घाट के पुजारियों के अनुसार, आद्रा नक्षत्र के अवसर पर 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में स्नान किया। बड़ी संख्या में लोग मुंडन संस्कार कराने के लिए भी घाट पहुंचे। पंडित धनजी तिवारी ने कहा कि गुरुवार को पड़ने वाली भीमसेनी निर्जला एकादशी के कारण गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। ज्योतिषाचार्य नरोत्तम द्विवेदी ने बताया कि ग्रहों के राजा सूर्य 22 जून की रात 8:27 बजे मृगशिरा नक्षत्र से निकलकर राहु के स्वामित्व वाले आद्रा नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं। सूर्य का यह गोचर छह जुलाई तक रहेगा। ज्योतिष एवं कृषि की दृष्टि से आद्रा नक्षत्र को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसे मानसून के आगमन का संकेतक माना जाता है। उन्होंने बताया कि पंचांग के अनुसार जून के अंतिम दिनों तथा जुलाई के प्रथम सप्ताह में वर्षा होने की संभावना व्यक्त की गई है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, आद्रा नक्षत्र के प्रारंभिक तीन-चार दिनों तक धरती को 'रजस्वला' अवस्था में माना जाता है, इसलिए किसान इस अवधि के बाद ही खेतों की जुताई शुरू करते हैं। कोच-बकसड़ा गांव के किसान बांके बिहारी मिश्र ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इस परंपरा का पालन किया जाता है। वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. देवकरण ने बताया कि जिले में 26 और 27 जून को क्रमशः आठ और छह मिलीमीटर वर्षा होने की संभावना है। हालांकि इस दौरान तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बने रहने का अनुमान है। भीमसेनी निर्जला एकादशी व्रत:  भीमसेनी निर्जला एकादशी व्रत गुरुवार को रखा जाएगा। आचार्यों के अनुसार, इस व्रत का फल वर्ष भर की सभी 24 एकादशियों के व्रत के बराबर माना गया है। एकादशी तिथि बुधवार रात्रि से प्रारंभ होकर गुरुवार रात 9:14 बजे तक रहेगी। श्रद्धालु गुरुवार को व्रत रखकर शुक्रवार को सूर्योदय के बाद सुविधा अनुसार पारण कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों में बलशाली भीमसेन को अत्यधिक भूख लगती थी, जिसके कारण वे वर्ष भर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते थे। तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी का व्रत करने का परामर्श दिया था। इसी कारण यह व्रत 'भीमसेनी एकादशी' के नाम से भी प्रसिद्ध है। इस अवसर पर जल से भरा घड़ा, मौसमी फल, छाता, वस्त्र तथा अन्य उपयोगी सामग्री का दान विशेष पुण्यदायी माना गया है।

ऑब्जर्वेशन होम के बच्चों के लिए बड़ी पहल, पंजाब सरकार देगी स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग

फरीदकोट. किसी कारणवश गलत रास्ते पर चलकर कानून के दायरे में पहुंचे बच्चों को अब नई जिंदगी और नई पहचान देने की दिशा में पंजाब सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से राज्य के आब्जर्वेशन होम में रहने वाले बच्चों के लिए कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य बच्चों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस पहल की शुरुआत फरीदकोट स्थित आब्जर्वेशन होम से की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने किया। इस अवसर पर स्थानीय विधायक गुरदित सिंह सेखों सहित कई अधिकारी और विभागीय प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि पहले चरण में पंजाब के पांच आब्जर्वेशन होम में कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। फरीदकोट के बाद लुधियाना, होशियारपुर और अन्य स्थानों के आब्जर्वेशन होम में भी जल्द यह योजना लागू की जाएगी। इसके बाद इसे राज्य के सभी आब्जर्वेशन होम तक विस्तारित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे परिस्थितियों, गलत संगत या अन्य कारणों से ऐसे कदम उठा लेते हैं, जिससे वे अपराध की दुनिया में पहुंच जाते हैं। ऐसे बच्चों को केवल दंडित करना समाधान नहीं है, बल्कि नया अवसर देना भी जरूरी है। यही सोच इस योजना के पीछे है। 211 बच्चे प्रारंभिक चरण में जुड़े डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि प्रारंभिक चरण में 211 बच्चों को इन पाठ्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है। इनमें फरीदकोट के 31 बच्चे शामिल हैं। सबसे पहले हेयर ड्रेसिंग का प्रशिक्षण शुरू किया गया है। इसके बाद मोबाइल मरम्मत जैसे अन्य रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे। इससे बच्चे व्यावसायिक कौशल सीखकर भविष्य में रोजगार प्राप्त कर सकेंगे और सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य बच्चों को उनका अतीत भुलाकर नई पहचान बनाने का अवसर देना है। कौशल और आत्मविश्वास के बल पर ये बच्चे अपने जीवन को नई दिशा दे सकेंगे और समाज में सकारात्मक योगदान दे पाएंगे। सीएम की वायरल वीडियो गिरी राजनीति का परिणाम इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान की कथित वायरल वीडियो से जुड़े सवाल पर डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि वर्तमान समय में राजनीति का स्तर काफी नीचे चला गया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने और चरित्र हनन की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जब तक किसी मामले की पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक उस पर की जा रही टिप्पणियां और बयान विवाद का विषय बने रहते हैं। सरकार की यह नई पहल बच्चों के पुनर्वास और उनके भविष्य निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे अनेक बच्चों को जीवन में नई शुरुआत करने का अवसर मिलेगा।

बस्तर के छात्रों को बड़ी सौगात, IIT मद्रास में सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग पाएंगे 30 प्रतिभाशाली विद्यार्थी

जगदलपुर. बस्तर संभाग के युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में एक नई उम्मीद की किरण जगी है। पहली बार बस्तर के 30 मेधावी छात्रों को देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास में सेमीकंडक्टर चिप मैन्युफैक्चरिंग की विशेष ट्रेनिंग लेने का अवसर मिलेगा। यह पहल न केवल छात्रों को अत्याधुनिक तकनीकों से परिचित कराएगी, बल्कि उन्हें भविष्य के हाई-टेक रोजगार बाजार के लिए भी तैयार करेगी। जानकारी के अनुसार, IIT मद्रास में 12 जुलाई से 24 जुलाई तक आयोजित होने वाले विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए बस्तर विश्वविद्यालय के छात्रों का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इंटरनल टेस्ट की मेरिट सूची के आधार पर पूरी होगी। इसमें चयनित 30 छात्र पहली बार हवाई यात्रा कर चेन्नई पहुंचेंगे और देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में से एक IIT मद्रास में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन भी उत्साहित है। चयनित छात्रों को राज्यपाल की मौजूदगी में रवाना किया जाएगा। खास बात यह है कि छात्रों की हवाई यात्रा का पूरा खर्च दंतेवाड़ा जिला प्रशासन वहन करेगा, जबकि इस पहल को सफल बनाने में बस्तर कलेक्टर का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। बस्तर विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को सेमीकंडक्टर चिप निर्माण, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, एडवांस डेटा ट्रांसफर सिस्टम और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यह प्रशिक्षण छात्रों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों और उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल विकसित करने में मदद करेगा। प्रशिक्षण का एक बड़ा लाभ रोजगार के अवसरों के रूप में भी सामने आ सकता है। रायपुर में स्थापित हो रही गैलियम नाइट्राइड (GaN) आधारित 5G और 6G डेटा ट्रांसफर टेक्नोलॉजी कंपनी में प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बनने की उम्मीद है। ऐसे में यह कार्यक्रम बस्तर के छात्रों को सीधे उभरती हुई सेमीकंडक्टर और दूरसंचार उद्योग से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बस्तर के लिए यह पहल एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल क्षेत्र के युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों और उद्योगों तक उनकी पहुंच भी मजबूत होगी। बस्तर विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन की यह संयुक्त पहल क्षेत्र के प्रतिभाशाली युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकती है।