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संस्कृति विभाग ने राज्य सम्मान 2026 के लिए आमंत्रित की प्रविष्टियां

संस्कृति विभाग ने राज्य सम्मान 2026 के लिए आमंत्रित की प्रविष्टियां साहित्य, लोककला, संगीत, नृत्य, सिनेमा और रंगकर्म सहित 13 क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रतिभाओं को मिलेगा सम्मान, 5 अक्टूबर तक पंजीकृत डाक से भेज सकेंगे आवेदन रायपुर  संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विभिन्न कला, साहित्य, संस्कृति एवं सामाजिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को प्रदान किए जाने वाले राज्य सम्मान 2026 के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। विभाग द्वारा स्थापित 12 राज्य स्तरीय सम्मान एवं 1 राष्ट्रीय सम्मान के लिए निर्धारित प्रारूप में 5 अक्टूबर 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। चयनित प्रतिभाओं को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित ‘राज्योत्सव 2026’ के राज्य अलंकरण समारोह में सम्मानित किया जाएगा। राज्य सम्मान के लिए इच्छुक पात्र व्यक्ति निर्धारित प्रारूप में अपनी प्रविष्टियां प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन में आवेदक का नाम, पता, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि एवं आयु के साथ प्रस्तावक का विवरण तथा आवेदक की उपलब्धियों का संक्षिप्त ब्यौरा देना होगा। आवेदक द्वारा पूर्व में प्राप्त सम्मान एवं पुरस्कारों की जानकारी भी निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत करनी होगी। इसमें अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, प्रदेश एवं जिला स्तर पर प्राप्त सम्मान एवं पुरस्कारों का विवरण शामिल किया जाना है। शासकीय सेवा में कार्यरत आवेदकों को सामान्य प्रशासन विभाग से अनुमति पत्र संलग्न करने का प्रावधान भी रखा गया है। सम्मान की नियमावली एवं आवेदन का निर्धारित प्रारूप विभागीय वेबसाइट www.cgculture.in पर उपलब्ध है। 13 प्रमुख क्षेत्रों में मिलेगा सम्मान संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2026 के लिए विभिन्न विधाओं और क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित किया जाएगा। पं. सुन्दरलाल शर्मा सम्मान हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में, दाऊ मंदराजी सम्मान लोक नाट्य एवं लोक शिल्प के क्षेत्र में तथा चक्रधर सम्मान शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य के क्षेत्र में प्रदान किया जाएगा। देवदास बंजारे स्मृति पुरस्कार लोक नृत्य के क्षेत्र में तथा लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार आंचलिक साहित्य एवं लोक कविता के क्षेत्र में दिया जाएगा। हबीब तनवीर सम्मान समकालीन रंगकर्म के लिए प्रदान किया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ी, हिन्दी एवं अन्य भाषाओं के नाटक शामिल हैं। इसी क्रम में देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार पंथी नृत्य के क्षेत्र में, लक्ष्मण मस्तुरिया सम्मान छत्तीसगढ़ी लोकगीत के क्षेत्र में और खुमान साव सम्मान छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के क्षेत्र में प्रदान किया जाएगा। सिनेमा के क्षेत्र में भी प्रतिभाओं को सम्मान किशोर साहू सम्मान हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी सिनेमा में रचनात्मक लेखन, निर्देशन, अभिनय एवं पटकथा निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा। वहीं किशोर साहू राष्ट्रीय अलंकरण हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी सिनेमा में निर्देशन के क्षेत्र में प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान देश के बाहर रहकर सामाजिक कल्याण, मानव संसाधन विकास, कला, साहित्य अथवा आर्थिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अप्रवासी भारतीयों को प्रदान किया जाएगा। डॉ. तीजन बाई राज्य सम्मान पंडवानी के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदान किया जाएगा। दीर्घ साधना और उपलब्धियों के आधार पर होगा चयन संबंधित क्षेत्रों में उपलब्धि, योगदान एवं दीर्घ साधना को ध्यान में रखते हुए पात्र प्रतिभाओं का चयन किया जाएगा। चयनित प्रतिभाओं को ‘राज्योत्सव 2026’ के राज्य अलंकरण समारोह में राज्य सम्मान से विभूषित किया जाएगा। प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं, साहित्य, संगीत, नृत्य, रंगमंच एवं सिनेमा के क्षेत्र में निरंतर योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करने की यह पहल राज्य की कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी। 5 अक्टूबर तक पंजीकृत डाक से भेजें आवेदन संस्कृति विभाग ने संबंधित क्षेत्र के पात्र कलाकारों, साहित्यकारों, सांस्कृतिक कर्मियों एवं अन्य प्रतिभाओं से निर्धारित प्रारूप में अपनी प्रविष्टियां 5 अक्टूबर 2026 तक पंजीकृत डाक से भेजने का आग्रह किया है। आवेदन इस पते पर भेजे जा सकते हैं: संचालक, संस्कृति एवं राजभाषा द्वितीय तल, व्यावसायिक परिसर, सेक्टर-27, नवा रायपुर अटल नगर, छत्तीसगढ़ आवेदन निर्धारित प्रारूप में आवश्यक दस्तावेजों एवं उपलब्धियों के विवरण के साथ निर्धारित समय-सीमा के भीतर भेजना होगा। सम्मान से संबंधित विस्तृत जानकारी, नियमावली एवं आवेदन का निर्धारित प्रारूप संस्कृति विभाग की वेबसाइट www.cgculture.in पर उपलब्ध है।

जल जीवन मिशन की समीक्षा, लापरवाही करने वाले संवेदकों पर होगी कार्रवाई

रांची पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अबु इमरान ने गुरुवार को देवघर में संताल परगना प्रमंडल के छह जिलों, देवघर, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज, जामताड़ा और पाकुड़ में जल जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा की। पेयजल योजनाओं तथा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की समीक्षा करते हुए सचिव ने निर्देश दिया कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय स्थापित कर समस्याओं का निराकरण करें। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को टोल फ्री नंबर हमेशा एक्टिव रखने का निर्देश दिया। खनन और बालू उठाव पर पूर्ण रूप से रोक सचिव ने कहा कि पेयजल योजनाओं में लापरवाही बरतने वाले संवेदकों पर कार्रवाई होगी। विभागीय सचिव अबू इमरान ने जल जीवन मिशन के तहत दो अक्टूबर को जल अर्पण दिवस के रूप में मनाने और सभी पूर्ण हो चुकी योजनाओं के लिए हर घर जल सर्टिफिकेशन के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। जल स्रोतों की सुरक्षा को देखते हुए उन्होंने इंटेकवेल के आसपास किसी भी प्रकार के खनन और बालू उठाव पर पूर्ण रूप से रोक लगाने का निर्देश अधिकारियों को दिया। समीक्षा बैठक के दौरान स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही गई। सचिव ने शौचालय निर्माण एवं उनकी स्वीकृति की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश भी दिया।  

सीएम हेल्पलाइन के लंबित मामलों में लापरवाही नहीं: श्रम सचिव

सीएम हेल्पलाइन एवं संबल योजना के लंबित प्रकरणों के निराकरण में लापरवाही स्वीकार्य नहीं : श्रम सचिव रघुराज राजेन्द्रन सीएम हेल्पलाइन एवं मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना से जुड़े प्रकरणों की मंत्रालय में की समीक्षा भोपाल सीएम हेल्पलाइन एवं मुख्यमंत्री जनकल्याण  संबल योजना से जुड़े प्रकरणों की समीक्षा के दौरान श्रम सचिव रघुराज राजेन्द्रन ने लंबित प्रकरणों के समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा है कि प्रकरणों के निराकरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा विलंब स्वीकार्य नहीं होगा। राज्य स्तर पर सीएम हेल्पलाइन एवं मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना से संबंधित लंबित शिकायतों एवं प्रकरणों की सतत रूप से बारीकी से समीक्षा की जा रही है। शासन द्वारा शिकायतों के त्वरित निराकरण तथा पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। हाल ही में हुई समीक्षा में सामने आए लंबित प्रकरणों को लेकर छिंदवाड़ा, हरदा एवं बालाघाट जिलों के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस के माध्यम से संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा लंबित मामलों में तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। श्रम सचिव राजेन्द्रन ने कहा कि शासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ समय पर मिले। उनकी शिकायतों का त्वरित एवं संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित हो।  

अखिलेश के रथ पर राजभर का तंज- ‘दलित-पिछड़ों को अछूत मानते हैं, सत्ता में जनता स्पेस नहीं देगी’

‘दलित-पिछड़ों को अछूत मानते हैं अखिलेश’, ओमप्रकाश राजभर ने सपा की रथयात्रा पर साधा निशाना अखिलेश के रथ पर राजभर का तंज- ‘दलित-पिछड़ों को अछूत मानते हैं, सत्ता में जनता स्पेस नहीं देगी’ ‘फाइव स्टार रथ में घूम रहे, दलित-पिछड़ों से हाथ नहीं मिलाते’, अखिलेश पर ओमप्रकाश राजभर का हमला ‘2027 का सपना देखिए, 2032 तक संघर्ष कीजिए’, अखिलेश की रथयात्रा पर राजभर का तीखा तंज 'संघर्ष के नाम पर लग्जरी का पूरा इंतजाम', अखिलेश की रथयात्रा पर राजभर का तंज लखनऊ सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की रथयात्रा पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव के रथ को लेकर तंज कसा और दलितों-पिछड़ों से उनके जुड़ाव पर सवाल उठाए। 'रथ में कितने दलितों-पिछड़ों से हाथ मिलाया?' ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा, 'महाराज, आपका रथ तो एकदम फाइव स्टार है। ये बताइए कल रथ में बैठकर कितने दलितों और कितने पिछड़ों से आपने हाथ मिलाया?'उन्होंने आगे तंज कसते हुए लिखा कि अखिलेश यादव दलितों और पिछड़ों से हाथ नहीं मिलाना चाहते और उन्हें अछूत मानते हैं। 'संघर्ष के नाम पर लग्जरी का पूरा इंतजाम' राजभर ने अखिलेश यादव के रथ को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि अखिलेश यादव रथ के नाम पर 'हॉलीवुड वाली वैनिटी वैन' या 'पहियों पर बने फाइव स्टार सुइट' में घूम सकते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश की दलित, अति पिछड़ी और गरीब जनता उन्हें सत्ता में कोई 'स्पेस' नहीं देने वाली। उन्होंने आगे लिखा कि उन्होंने अखिलेश यादव को रथयात्रा के दौरान देखा कि वह 'लग्जरी रथ' में सवार थे और हाइड्रोलिक ट्रॉली से निकलकर हाथ हिला रहे थे। राजभर ने इसे लेकर तंज किया कि संघर्ष के नाम पर लग्जरी का पूरा इंतजाम था, लेकिन सत्ता में स्पेस का इंतजाम नहीं हो पा रहा। '2027 का सपना देखिए, 2032 तक संघर्ष कीजिए' ओमप्रकाश राजभर ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी कटाक्ष किया। उन्होंने लिखा, '2027 का सपना देखिए, 2032 तक संघर्ष कीजिए। उसके बाद भी कुछ होने नहीं वाला है।'

नितिन गडकरी-CM मोहन ने शुरू की सुगम परिवहन सेवा, 351 बसें दौड़ेंगी

भोपाल मध्यप्रदेश में 21 साल बाद सरकारी बस सेवा की वापसी हुई है। भोपाल के भेल दशहरा मैदान से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और CM मोहन यादव ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ किया। 351 बसें 7 शहरों में इंटरसिटी और इंट्रासिटी सेवा देंगी।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी ने भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय "मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा एवं पीएम ई-बस सेवा" कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। CM मोहन यादव ने कहा- नई सेवा के तहत 180 इलेक्ट्रिक बसें भी सड़कों पर उतारी गई हैं। इसका मकसद शहरों के साथ गांवों को भी बेहतर बस कनेक्टिविटी से जोड़ना है। सरकार ने 75% ग्राम पंचायतों तक बस सेवा पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। बसों में आधुनिक सुविधाओं के साथ सुरक्षा और रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी जी को "रोड नेटवर्क ऑफ मध्यप्रदेश विजन-2047" से अवगत कराया।इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में जारी विभिन्न विकास एवं सड़क परियोजनाओं की प्रगति की भी जानकारी दी।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी ने भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय "मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा एवं पीएम ई-बस सेवा" कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा- सरकार ने पहले साल 1,500 बसें चलाने और 2031 तक इनकी संख्या बढ़ाकर 15 हजार करने का लक्ष्य रखा है। सेवा PPP मॉडल पर संचालित होगी, जिसमें निजी ऑपरेटर भी शामिल होंगे। उन्हें विज्ञापन और कार्गो से अतिरिक्त आय के अवसर भी मिलेंगे। – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने आज भोपाल के लालघाटी में अंत्योदय एवं एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता श्रद्धेय स्व. पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की एवं उन्हें नमन किया। – इस अवसर पर उन्होंने पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के राष्ट्रसेवा, समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान एवं मानव कल्याण के प्रति समर्पित विचारों का स्मरण किया। साथ ही पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में प्रदेश के स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा – * प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा के जरिए प्रदेशवासियों का सपना पूरा हो रहा है। * पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी के कर कमलों से 351 इंटरसिटी एवं इंट्रासिटी बसों की सौगात मिली है। * प्रदेश में 21 साल बाद फिर से राज्य परिवहन सेवा की शुरुआत हो रही है। * राज्य परिवहन सेवा की लंबे समय से मांग की जा रही थी, जो आज पूरी हो रही है। * आज का दिन प्रदेश के इतिहास में ऐतिहासिक है। * यह परिवहन सेवा प्रदेश के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी। * मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम, सुरक्षित और आधुनिक बनेगी। * इस सेवा की शुरुआत में बस मालिकों के हितों का भी ध्यान रखा गया है। * मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा प्रदेशवासियों को बेहतर यात्री परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा – – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश कनेक्टिविटी, मोबिलिटी और पर्यावरण संरक्षण के साथ सुगम यातायात सुविधा देने वाले देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। * प्रदेश में परिवहन सुविधा के क्षेत्र में आज स्वर्णिम दिन है। * सर्वसुविधायुक्त बसें प्रदेश के यात्रियों के लिए बड़ी सौगात हैं। * लोक निर्माण विभाग सभी विभागों के साथ समन्वय कर कार्य कर रहा है। * सड़कों के गड्ढे सुधारने के लिए विभाग ने लोकपथ ऐप बनाया है। * लोकपथ ऐप नागरिकों के लिए स्मार्ट ट्रैवल पार्टनर बन चुका है। * लोकपथ ऐप पर मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की बसों की समय-सारणी भी उपलब्ध होगी। * केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने प्रदेश में जारी हाईवे प्रोजेक्ट्स के निर्माण कार्यों की समीक्षा की है। * केंद्रीय मंत्री  गडकरी ने शहपुरा टोल नाके को अस्थायी रूप से बंद करने की मंजूरी दी है। *

हरियाणा हत्याकांड: 5 दोषियों की उम्रकैद पर कोर्ट का फैसला

चंडीगढ़. नारायणगढ़ में करीब 26 वर्ष पहले युवक संजीव कुमार की चाकू से हमला कर हत्या करने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पांच दोषियों को बड़ी राहत देने से इन्कार करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। हालांकि, अदालत ने मृतक के स्वजन की ओर से दायर वह याचिका भी खारिज कर दी, जिसमें दोषियों की उम्रकैद को मृत्युदंड में बदलने की मांग की गई थी। जस्टिस अर्चना पुरी और जस्टिस मनदीप पन्नू की पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए मृत्युदंड देने का आधार नहीं बनता। 26 साल पुराना है मामला मामला 16 सितंबर 2000 का है। अभियोजन के अनुसार संजीव कुमार नारायणगढ़ में खेल देखने के बाद अपने गांव लौट रहा था। हुसैनी रोड पार करते समय उसने देखा कि पांच युवक उसके साथ मारपीट कर रहे थे। गंभीर रूप से घायल संजीव को पहले नारायणगढ़ के सिविल अस्पताल ले जाया गया और वहां से पीजीआइ चंडीगढ़ रेफर किया गया। पीजीआइ में रात करीब 7:45 बजे उसकी मौत हो गई।

बिहार का नया जल निगम संभालेगा रिवर फ्रंट से जल परियोजनाओं तक का काम

पटना  बिहार सरकार के नवगठित बिहार जल संसाधन विकास निगम लिमिटेड को जल परियोजनाओं के साथ राजस्व संग्रह का महत्वपूर्ण आधार बनाने की तैयारी है। निगम गाद प्रबंधन, सतही जल को पेयजल के रूप में उपयोग करने के लिए स्रोत एवं संरचनाओं का विकास और जलस्रोतों के पुनर्स्थापन जैसे काम करेगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद जल संसाधन विभाग ने निगम को सक्रिय करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। रिवर फ्रंट से भूमि-भवन तक संभालेगा निगम निगम को रिवर इंटरलिंकिंग, रिवर फ्रंट डेवलपमेंट और विभागीय भूमि, भवन, निरीक्षण भवन समेत अन्य परिसंपत्तियों के प्रबंधन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी इन गतिविधियों के जरिए निगम सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ आय अर्जित करेगा। लक्ष्य है कि समय के साथ निगम अपने खर्च के लिए खुद राजस्व जुटाने में सक्षम हो। DPR से इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी तक सेवाएं निगम के माध्यम से डीपीआर तैयार करने, इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी, परियोजना प्रबंधन, निर्माण और तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रविधान किया गया है। इन सेवाओं से मिलने वाले राजस्व को निगम की आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ा गया है। कंपनी अधिनियम-2013 के तहत गठित होने वाला निगम पूरे बिहार में काम करेगा और आवश्यकता पड़ने पर राज्य के बाहर भी परियोजनाएं ले सकेगा। सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण से आगे बढ़ेगा दायरा निगम सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी जैसे पारंपरिक कार्यों के साथ गैर-पारंपरिक जल परियोजनाओं पर भी काम करेगा। जल परियोजनाओं के सूत्रीकरण, तकनीकी परामर्श और क्रियान्वयन में भी इसकी भूमिका रहेगी। जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा के बीच जल प्रबंधन को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। 50 करोड़ रुपये होगी अधिकृत पूंजी बिहार जल संसाधन विकास निगम की अधिकृत पूंजी 50 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। शुरुआती स्थापना और संचालन खर्च के लिए राज्य सरकार छह लाख रुपये की सदस्यता पूंजी देगी। प्रारंभिक चरण में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति या पदस्थापन के जरिए निगम में लगाया जाएगा, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार सीमित रखने की योजना है। GIS और रिमोट सेंसिंग से होगा जल प्रबंधन निगम में निजी क्षेत्र की तकनीक और विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा। GIS, रिमोट सेंसिंग और वाटर डाटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों को जल प्रबंधन से जोड़ा जाएगा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से नए प्रयोगों को बढ़ावा देने की योजना है। निगम का संचालन निदेशक मंडल करेगा, जबकि दैनिक कामकाज की जिम्मेदारी प्रबंध निदेशक पर होगी।  

UPITS: आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर यूपी

यूपीआईटीएस: आत्मविश्वास की वैश्विक यात्रा लखनऊ  कोई सोच, कोई दृष्टि या विजन की सार्थकता तब है जब वह विचार से निकलकर व्यवहार में आए, संकल्प से निकलकर परिणाम में आए और संभावना से निकलकर सामर्थ्य में बदल जाए। आज जब हम उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के चौथे संस्करण को साकार रूप में देखते हैं तो इसकी सार्थकता को भी स्वीकार करना होगा। यह इस बात का प्रतीक है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ के रूप में भारत की स्थानीय शक्ति को वैश्विक पहचान देने का जो विजन रखा, उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसे एक मिशन के रूप में आगे बढ़ाया। योगी ने एमएसएमई की उद्यमशीलता, ओडीओपी की स्थानीय विशिष्टता और स्टार्टअप की नवाचार ऊर्जा को एक सूत्र में पिरोकर प्रदेश के आर्थिक सामर्थ्य को एक नई दिशा दी। ग्रेटर नोएडा में शुरू हो रहा उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो राज्य की वह यात्रा है, जिसमें एक सरकार अपनी शक्ति को पहचान कर उसे दुनिया के समक्ष रखने जा रही है। यह राज्य के आत्मविश्वास की वैश्विक यात्रा है।  कौटिल्य ने लिखा था- ‘कोष मूलो दंडः' अर्थात राज्य की समस्त शक्ति उसके कोष यानी संपदा पर टिकी होती है। संपदा के मूल में व्यापार और उद्यम ही हैं। आज विकास का सूत्र यह है कि राज्य अपनी संपदा को विश्व व्यापार तक पहुंचाने में सक्षम हो। इसी कसौटी पर यूपीआईटीएस का महत्व समझा जाना चाहिए। 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में इसका चौथा संस्करण होने जा रहा है। इसके पहले तीन संस्करणों को देखें तो पहला संस्करण एक प्रयोग था, दूसरा और तीसरा उस प्रयोग की सफलता की पुष्टि और अब चौथा संस्करण उत्तर प्रदेश पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत के भरोसे का प्रतीक है।   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ के आह्वान को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस गंभीरता से एक शासकीय मिशन में बदला है,  उसकी शाखाओं में सबसे प्रमुख एमएसएमई का विस्तार है। पिछले नौ सालों में किए गए सरकारी प्रयासों का परिणाम है कि आज प्रदेश की लगभग एक करोड़ एमएसएमई इकाइयां चार करोड़ लोगों को रोजगार दे रही हैं और विश्व बाजार से सीधे जुड़कर उत्तर प्रदेश की आर्थिकी को मजबूत कर रही हैं। ओडीओपी योजना योगी के मिशन की दूसरी और अत्यंत महत्वपूर्ण शाखा है, जिसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उसने विकास की कहानी को लखनऊ, नोएडा या कानपुर जैसे बड़े केंद्रों तक सीमित नहीं रखा। उसने 75 जिलों की अपनी-अपनी आर्थिक पहचान को सामने रखा। बनारस का वस्त्र, मुरादाबाद का पीतल, भदोही का कालीन, कन्नौज का इत्र, फिरोजाबाद का कांच, सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी, आगरा का फुटवियर और लखनऊ की चिकनकारी, अब ये उत्पाद नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक और सांस्कृतिक पूंजी हैं। ये वही स्थानीय उद्योग हैं जो एक दशक पहले के परिदृश्य में दम तोड़ते दिखाई देते थे, लेकिन आज वे पूरे गर्व से इंटरनेशनल ट्रेड शो के भागीदार हैं। हर जिले की पहचान को संगठित और वैश्विक ब्रांड में बदलना योगी सरकार के नीतिगत हस्तक्षेप का प्रतिबिंब है। वस्तुतः यह स्वदेशी-चिंतन की अवधारणा का वह विस्तार है, जिसमें सच्ची स्वतंत्रता को गांव की आत्मनिर्भरता से जोड़ा जाता है। आंकड़ों की दृष्टि से यूपीआईटीएस की वृद्धि-रेखा स्पष्ट है। 2025 के तीसरे संस्करण में 80 देशों से अंतराष्ट्रीय खरीदार आए थे तो चौथे संस्करण में यह संख्या 85 देशों तक पहुंच चुकी है। यह भी स्वीकार करना आवश्यक है कि स्थानीय उत्पाद को वैश्विक बाज़ार तक पहुंचाना केवल एक प्रदर्शनी-स्थल उपलब्ध कराने भर से पूरा नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय व्यापार की अपनी कठोर शर्तें हैं—गुणवत्ता प्रमाणन, पर्यावरणीय व श्रम मानक, वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला में समय पर डिलीवरी की क्षमता, और मुद्रा तथा शुल्क संबंधी जटिलताओं से निपटने की दक्षता। एक कुम्हार या बुनकर, जिसने जीवन भर स्थानीय मंडी के लिए काम किया हो, उसे इन जटिलताओं के लिए तैयार करना आसान नहीं था लेकिन सरकार की दीर्घकालिक, धैर्यपूर्ण और संस्थागत नीतियों ने इसे संभव बनाया। ट्रेड शो के आयोजन की संरचना में इसकी गंभीरता झलकती है। यह अब केवल उत्पाद-प्रदर्शनी नहीं रह गया, बल्कि इसमें व्यापारिक संवाद, नीति-गोष्ठियां, बी2बी वार्ताएं और निवेश-समझौतों की प्रक्रिया शामिल है। नीति-निर्माता, उद्योगपति और छोटे उद्यमियों का एक मंच पर आना ही इसकी सबसे बड़ी सार्थकता है। उत्तर प्रदेश ने अपनी आर्थिक नीति में उत्सवधर्मिता से आगे बढ़कर संस्थागत परिपक्वता प्राप्त की है। आने वाले वर्षों में यह आयोजन वास्तविक निर्यात-मूल्य, स्थायी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और एमएसएमई क्षेत्र की संरचनात्मक क्षमता-वृद्धि में और परिणत होता दिखाई देगा, जो 'लोकल टू ग्लोबल' की मूल सोच है। उत्तर प्रदेश की ‘लोकल’ अवधारणा भी बदल रही है। लोकल का मतलब अब केवल हस्तशिल्प या पारंपरिक उत्पाद नहीं है। किसी जिले का टेक स्टार्टअप भी लोकल है, किसी कस्बे की फूड-प्रोसेसिंग यूनिट भी लोकल है, किसी युवा का एग्रीटेक समाधान भी लोकल है और किसी छोटे शहर की इंजीनियरिंग इकाई भी लोकल है। अब बड़ा सवाल है कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो राज्य को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी तक ले जाने में कितना सहायक होगा? सबसे पहले तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य केवल एक आर्थिक आंकड़ा मात्र नहीं है। राज्य की निर्यात संवर्धन नीति 2025-30 में भी एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को व्यापक आर्थिक परिवर्तन से जोड़ा गया है। इसका सीधा अर्थ है कि ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था केवल बड़े निवेश और बड़े उद्योगों से नहीं बनेगी। उसके लिए प्रदेश के लाखों छोटे उद्यमों को अधिक उत्पादक, अधिक प्रतिस्पर्धी और अधिक निर्यातक्षम बनाना होगा। एक करोड़ के आसपास एमएसएमई इकाइयों और उनसे जुड़े करोड़ों रोजगार की क्षमता को वैश्विक मांग से जोड़ दिया जाए तो यह संख्या अपने आप में एक विशाल आर्थिक शक्ति बन जाती है। एमएसएमई, ओडीओपी, स्टार्टअप तथा पहली बार निर्यात करने वालों को वैश्विक बाजार से जोड़ना ही होगा, जो ग्रेटर नोएडा में हो रहे ट्रेड शो के रूप में एक बड़े मंच के रूप में सामने है। यूपीआईटीएस अब सिर्फ व्यापार का मंच नहीं है। यह उस विचार का मंच है जिसमें ओडीओपी स्थानीय पहचान को वैश्विक ब्रांड में बदलता है, एमएसएमई रोजगार को आर्थिक शक्ति में बदलता है और वैश्विक … Read more

पीर बाबा जुड़वा शाह मेले में हादसा, करंट लगने से 2 की मौत

संगरूर. पंजाब के जिला संगरूर के अंतर्गत आते सुनाम शहर में चल रहे पीर बाबा जुड़वा शाह के वार्षिक मेले में एक बेहद दर्दनाक हादसा हो गया। मेले में लगी एक गोलगप्पे की स्टॉल के पास अचानक बिजली का करंट फैल गया, जिसकी चपेट में आकर दो लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं चार अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पीर बाबा जुड़वा शाह प्रबंधकीय कमेटी की ओर से हर साल की तरह इस बार भी मेले का भव्य आयोजन किया जा रहा था। मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हुए थे। रात के समय लोग गोलगप्पे की स्टॉल के पास खड़े थे कि अचानक लोहे के ढांचे या तारों में बिजली का तेज करंट आ गया। देखते ही देखते करंट ने वहां खड़े कई लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। फिरोजपुर में बिजली तारों की चपेट में आई बच्ची फिरोजपुर में कैंट बोर्ड की जगह पर लगे मेले में मंगलवार को दर्दनाक हादसा हो गया। मेला देखने पहुंची 8 साल की बच्ची बिजली के तार की चपेट में आ गई। हादसे में 8 वर्षीय दिवांशी की मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि मेले में काफी लोग पहुंचे हुए थे। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्ची के शव को सरकारी अस्पताल में रखवाया गया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। नंगे तार की चपेट में आई बच्ची परिवार के मुताबिक, मेले वाली जगह पर बिजली की नंगी तारें मौजूद थीं। बच्ची इन तारों की चपेट में आ गई, जिससे उसे करंट लगा और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार में मातम छा गया। परिजनों का आरोप है कि यदि बिजली की तारों को सुरक्षित तरीके से ढका और व्यवस्थित किया गया होता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

अनफिट इमारतें बनीं अपराधियों का अड्डा, अब होगी कार्रवाई

भिलाई नगर. जिले में असामाजिक तत्वों के सुरक्षित ठिकाने और अपराध के केंद्र बन चुके जर्जर व लावारिस भवनों पर अब जिला प्रशासन का जल्द बुलडोजर चलेगा। एसएसपी की रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने ऐसे खतरनाक, जर्जर और अनुपयोगी भवनों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं। भिलाई-दुर्ग से आसपास के कई स्थानों को चिह्नांकित किया है। जर्जर व असामाजिक गतिविधियों के अड्डे चिन्हित : छावनी थाना क्षेत्र क्वार्टर के बैकुंठधाम, भगत सिंह चौक स्कूल, इस्पात क्लब, सुभाष चौक, मेंटेनेंस ऑफिस, पानी टंकी, रोजगार कार्यालय, शीतला कॉम्प्लेक्स कैंप 2, मदर टेरेसा नगर, पुराना पुलिस क्वार्टर, जवाहर उद्यान (बीएसपी और ननि मिलाई का स्वामित्य), खुर्सीपार थाना क्षेत्र के तेलगु मोहल्ला, जोन 3 स्कूल खंडहर, बापू नगर, उड़िया स्कूल, बापू नगर तीन तालाब परिसर खंडहर (बीएसपी और ननि भिलाई का स्वामित्य), पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र के रायपुर नाका रेलवे क्वार्टर, सुलभ शौचालय के पास खंडहर, पीडब्ल्यूडी क्वार्टर आरटीओ व पीएचई ऑफिस के सामने (बीएसपी और पीडब्ल्यूडी का स्वामित्र), मोहन नगर थाना क्षेत्र के तितुरडीह की पुरानी शराब भट्टी, धमधा नाका सब्जी मंडी स्थित परित्यक्त सुलभ कॉम्प्लेक्स, कातुलबोर्ड 7 मंजिला भवन (ननि दुर्ग, पीडब्ल्यूडी व निजी) व भिलाई नगर थाना क्षेत्र के सेक्टर-6 स्थित इंडियन बैंक, बैंक ऑफइंडिया, पीएनबी, पीएंडटी और आयकर विभाग की कॉलोनियां (बैंक व केंद्रीय विभाग) शामिल है।