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NHM के तहत CHO, नर्स और टेक्नीशियन समेत 87 पदों पर भर्ती

बलौदा बाजार. रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के लिए सुनहरा अवसर है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत कुल 87 रिक्त संविदा पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 28 फरवरी 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) के 17 पद, नर्सिंग ऑफिसर 4 पद, स्टॉफ नर्स 36 पद, एएनएम 2 पद, काउंसलर 2 पद, सपोर्ट स्टॉफ 3 पद जूनियर सेक्रेट्रीयल असिस्टेंट 6 पद, लैब असिस्टेंट 2, साइकोलॉजिस्ट 5 पद, काउंसलर 2 पद, फिजियोथेरेपिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट, लैब टेक्नीशियन, डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (डेटा), फीडिंग डिमांस्ट्रेटर, अटेंडेंट, कुक कम केयर टेकर,एवं सिक्योरीटी गार्ड के 1-1 के पदों पर संविदा भर्ती की जाएगी। संविदा पदों पर नियुक्ति के लिए समस्त अर्हताधारी इच्छुक छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासी अभ्यर्थियों से आवेदन पत्र निर्धारित प्रपत्र में कार्यालय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा (छ.ग.) को दिनांक 28 फ़रवरी 2026 शाम 5 बजे तक केवल पंजीकृत डाक अथवा स्पीड पोस्ट के माध्यम् से प्रेषित कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए https://balodabazar.gov.in/ का अवलोकन किया जा सकता है।

किसानों को बड़ा तोहफा: जमीन की रजिस्ट्री फ्री, सरकार भरेगी शुल्क और स्टांप ड्यूटी, CM मोहन की घोषणा

 ग्वालियर किसान सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पट्टाधारी किसानों के लिए बड़ी घोषणा की है। सीएम मोहन ने कहा कि, जिन किसानों के पास पट्टे की जमीन है, जल्द ही उन जमीनों की रजिस्ट्री उन किसानों के नाम कराई जाएगी, इससे वो अपनी कर्मभूमि की गारंटी पर लोन भी ले सकेंगे। सीएम ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए कहा, रजिस्ट्री शुक्ल के खर्च को लेकर घबराने की जरूरत नहीं, क्योंकि रजिस्ट्री का पूरा खर्च भी राज्य सरकार वहन करेगी, जिसपर करीब 3500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। कार्यक्रम में 87 करोड़ 21 लाख रुपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण हुआ। सीएम मोहन यादव ने मुख्यमंत्री मोहन यादव ने  कुलैथ गांव में आयोजित किसान सम्मेलन के दौरान कहा कि, प्रदेश सरकार पट्टे वाली जमीन की रजिस्ट्री किसान के नाम करेगी।। इससे किसानों को अपनी जमीन पर बैंक से लोन लेने में सुविधा होगी। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्री पर होने वाला पूरा खर्च सरकार वहन करेगी और इस योजना पर करीब 3500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बजट MP Budget 2026 को समृद्ध, सुखद और सम्पन्न मध्यप्रदेश के सपने को पूरा करनेवाला करार दिया है। बजट में जरूरतमंदों के लिए अनेक घोषणाएं की गई हैं। सीएम मोहन यादव ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में जमीन के मालिकाना अधिकार के लिए नवाचार किया गया है। इसके अंतर्गत मुद्रांक एवं पंजीयन शुल्‍क राज्‍य सरकार वहन करेगी। प्रदेश के बजट में उज्जैन में होनेवाले सिंहस्‍थ 2028 महापर्व के लिए बड़ी राशि रखी गई है। सिंहस्थ से संबंधित 13 हजार 851 करोड़ के कार्य स्‍वीकृत किए गए हैं, जिसके लिए वर्ष 2026-27 के बजट में 3 हजार 60 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। बच्चों को बेहतर पोषण मिले, इसके लिए यशोदा दुग्‍ध प्रदाय योजना बनाई गई है बजट में इसके लिए 700 करोड़ रूपए का प्रावधान है। इस योजना के अंतर्गत आगामी पांच वर्षों में 6 हजार 600 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। बजट में विकसित भारत-गांरटी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए 10 हजार 428 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मुद्रांक एवं पंजीयन शुल्‍क वहन करेगा राज्‍य शासन बजट के संबंध में सीएम मोहन यादव ने अहम योजना का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में आबादी भूमि पर मालिकाना अधिकार के लिए नई योजना बनाई गई है। इसमें मुद्रांक एवं पंजीयन का समस्‍त शुल्‍क राज्‍य शासन वहन करेगा। सीएम मोहन यादव ने कहा कि यह देश में अपने तरह का पहला नवाचार है। इसके लिए प्रदेश के बजट में 3 हजार 800 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। गरीब कल्याण योजनाओं पर खासा फोकस प्रदेश सरकार ने बजट में गरीब कल्याण योजनाओं पर खासा फोकस किया है। इसके लिए 15 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि का प्रावधान है। असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल 2.0) योजना में 600 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसी तरह से प्रदेश में गरीबों को आवास देने की प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी एवं ग्रामीण) के लिए वित्त मंत्री ने 4500 करोड़ रुपए रखे हैं। विकास कार्यों का भूमिपूजन सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने 87 करोड़ 21 लाख रुपये की लागत के विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। कार्यक्रम में सांसद भारत सिंह कुशवाह, प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक मोहन सिंह राठौर सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कुलैथ के लोगों द्वारा प्रस्तुत मांग पत्र को भी स्वीकार करते हुए सभी कार्यों को पूरा कराने ता वादा किया। प्रोत्साहन राशि की घोषणाएं कार्यक्रम स्थल पर कन्हैया गायन करने वाली प्रत्येक टीम को पांच-पांच हजार रुपये देने की घोषणा की गई। साथ ही बैलगाड़ी दौड़ में शामिल प्रत्येक किसान को भी पांच-पांच हजार रुपये दिए जाने की बात कही गई। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले किसान को 21 हजार रुपये और द्वितीय स्थान पर रहने वाले किसान को 11 हजार रुपये देने की घोषणा की गई। कुलैथ के लिए ये घोषणाएं भी हुईं -महेश्वरा खदान को चालू करने के लिए भारत सरकार से अनुमति दिलाने का प्रयास करेंगे। -डांडेवाले बाबा मंदिर तक सड़क को बनाया जाएगा व ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। -जगन्नाथ भगवान मंदिर पर आने वाले यात्रियों के रुकने के लिए भवन बनाया जाएगा और सड़क भी बनाई जाएगी। -गांव में खेल का मैदान भी बनाया जाएगा। -गांव के आसपास के क्षेत्र में उद्योग भी लगाए जाएंगे।

सुरक्षाबलों के रडार पर चार शीर्ष कमांडर समेत 300 माओवादी

रायपुर. नरेंद्र मोदी सरकार 31 मार्च 2026 तक पूर देश से नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म करने की तिथि निर्धारित की थी। नक्सलवाद खात्मे की डेडलाइन अब करीब आ गई है। इसे देखते हुए सरकार ने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ एक बार फिर से बड़ा अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सभी नक्सल प्रभावित राज्यों में सघन अभियान चलाय़ा जा रहा है। सुरक्षाबलों के रडार पर चार शीर्ष कमांडर समेत 300 नक्सली हैं। सुरक्षाबलों के निशाने पर प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की शीर्ष चार केंद्रीय समिति (सीसी) के सदस्यों में मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, देवजी उर्फ कुंभा दादा उर्फ चेतन, राममन्ना उर्फ गणपति उर्फ लक्ष्मण राव और मल्लाह राजा रेड्डी उर्फ सागर शामिल हैं। इधर गृह मंत्रालय (Ministry Of Home Affairs) ने एक बयान में कहा है कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित जिलों की संख्या 18 से घटकर 11 हो गई है। चार शीर्ष कमांडर समेत 300 नक्सलियों की तलाश सुरक्षाबलों को इन चार शीर्ष कमांडर समेत करीब 300 नक्सलियों की तलाश है. अधिकारियों ने कहा कि या तो वे आत्मसमर्पण कर दें, अन्यथा मार्च 2026 की समयसीमा तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए सघन अभियानों के दौरान सुरक्षाबल उन्हें खत्म कर देंगे. नक्सलवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटी गृह मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में कहा था कि नक्सलवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों की संख्या घटकर छत्तीसगढ़ के तीन रह गई है, जिसमें बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर शामिल हैं. मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित जिलों की संख्या 18 से घटकर 11 हो गई है. मंत्रालय ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खतरे को पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है. मंत्रालय ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार 31 मार्च 2026 तक पूर देश से नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। देवजी और उसके सहयोगी केसा सोढ़ी के इलाके में मौजूद होने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद मंगलवार को छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर एक सघन अभियान चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि रेड्डी को छोड़कर बाकी सभी शीर्ष कमांडर इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। रेड्डी के बारे में कहा जाता है कि वह ओडिशा में छिपा हुआ है। सुरक्षाबलों को इन चार शीर्ष कमांडर समेत करीब 300 नक्सलियों की तलाश है। अधिकारियों ने कहा कि या तो वे आत्मसमर्पण कर दें, अन्यथा मार्च 2026 की समयसीमा तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए सघन अभियानों के दौरान सुरक्षाबल उन्हें खत्म कर देंगे। नक्सलवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटी गृह मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में कहा था कि नक्सलवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों की संख्या घटकर छत्तीसगढ़ के तीन रह गई है। जिसमें बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर शामिल हैं। मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित जिलों की संख्या 18 से घटकर 11 हो गई है।

व्यापमं घोटाला: हाईकोर्ट ने कोर्ट में दी कड़ी टिप्पणी, अधिकारियों पर जताई नाराजगी

भोपाल  हाईकोर्ट की एक सुनवाई में ऐसा मोड़ आया जिसने सबको चौंका दिया। अदालत में दाखिल एक याचिका पर अचानक उठे सवालों ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। जजों की सख्त टिप्पणी और नाराजगी ने माहौल गरमा दिया। दरअसल, फर्जी लोगों से परीक्षा दिलवाने वाले और व्यापमं घोटाले के मुख्य आरोपी डॉ. जगदीश सगर और उनकी पत्नी सुनीता सगर को हाईकोर्ट ने फटकार लगाई है। सगर दंपती ने एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में अपनी अपील लंबित होने की बात छिपाते हुए याचिका दायर की थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान यह बात सामने आने पर जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट ने नाराजगी जताई।  याचिका पर कोर्ट ने जताई नाराजगी डॉ. जगदीश सगर और उनकी पत्नी की संपत्तियां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सीज की थी, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई शुरू होते ही सगर दंपती के वकील ने याचिका वापस लेने की गुजारिश की। इस दौरान ईडी की ओर से पेश हुए वकीलों ने कोर्ट को बताया कि इस याचिका में उनकी संपत्ति अटैच करने को चुनौती दी गई थी, लेकिन याचिका में यह बात छिपाई गई कि इस अटैचमेंट के खिलाफ उनकी अपील ट्रिब्यूनल में लंबित है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए जवाब तलब किया तो सगर दंपती के वकील ने बताया कि याचिका किसी अन्य वकील ने ड्रॉफ्ट कर हाईकोर्ट में दायर की थी, इसलिए इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई। दंपत्ति का व्यवहार गलत- हाईकोर्ट कोर्ट ने अपने आदेश में भी लिखा है कि दूसरे वकील द्वारा पीटिशन ड्रॉफ्ट करने की दलील अपील के पेंडिंग होने के बारे में न बताने पर विचार करने का आधार नहीं हो सकती। कोर्ट ने सगर दंपती के व्यवहार को गलत बताते हुए टिप्पणी में इसकी बुराई भी की है। कोर्ट ने लिखा है कि याचिका वापस लेने की याचना की गई है, इसलिए हम याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई प्रोसिडिंग शुरू नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने उनकी याचिका को वापस मानकर खारिज कर दिया। 

राजस्व विभाग में भूचाल: कलेक्टर ने लिया बड़ा एक्शन, पटवारी सस्पेंड और अधिकारियों को नोटिस

सिंगरौली  मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में कलेक्टर गौरव बैनल ने राजस्व विभाग की लापरवाही पर बड़ा और सख्त एक्शन लिया है। औचक निरीक्षण के दौरान उज्जैनी, बड़ोखर और बरगवा तहसीलदार कोर्ट में लंबित प्रकरणों के निराकरण में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर एक तहसीलदार और दो प्रभारी नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि एक पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई से पूरे राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है। औचक निरीक्षण में खुली लापरवाही की पोल कलेक्टर गौरव बैनल देवसर तहसील अंतर्गत उज्जैनी, बड़ोखर और बरगवा तहसीलदार न्यायालय का औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान नामांतरण, सीमांकन और बंटवारा जैसे सैकड़ों राजस्व प्रकरण लंबित पाए गए। कई मामलों में महीनों से सुनवाई नहीं होने और फाइलों में पटवारी रिपोर्ट तक संलग्न नहीं होने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई।  राजस्व प्रकरणों के समय पर निराकरण में लापरवाही बरतने पर प्रभारी नायब तहसीलदार बरगवा नागेश्वर पनिका और प्रभारी नायब तहसीलदार बड़ोखर दिनेश कुमार पनिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। दोनों अधिकारियों को तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर आगे और सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। पटवारी सस्पेंड, कड़ा संदेश राजस्व प्रकरणों में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर हल्का देवरा के पटवारी अजमेर सिंह को निलंबित कर दिया गया है। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि प्रारंभिक सुनवाई नियमित होनी चाहिए और जिन मामलों में पटवारी रिपोर्ट लंबित है, वहां तुरंत बैठक कर समय-सीमा में रिपोर्ट पेश कराई जाए। लापरवाही जारी रहने पर आगे और निलंबन व विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सिस्टम में सुधार का अल्टीमेटम कलेक्टर ने अधिकारियों को चेताया कि जनता से जुड़े राजस्व मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर प्रकरण की समय-सीमा तय कर नियमित मॉनिटरिंग होगी। आने वाले दिनों में अन्य तहसीलों में भी औचक निरीक्षण किए जाने की संभावना है।

MD यूनिवर्सिटी के कुलसचिव को राज्यपाल ने किया बहाल

रोहतक. महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में कुलपति का कार्यकाल समाप्त होने से ठीक दो दिन पहले हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। सरकार की स्पष्ट मनाही के बावजूद कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक बुलाकर भर्तियों को अंतिम मंजूरी देने की कोशिश, फिर कुलसचिव और वरिष्ठ प्रोफेसर का निलंबन और उसके बाद राज्यपाल की ओर से कुलसचिव की बहाली, इन घटनाओं ने रोहतक से लेकर चंडीगढ़ तक हलचल मचा दी। शिक्षक व छात्र संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और विवादित भर्तियों को खारिज करने की मांग की है। दरअसल, 20 फरवरी को कुलपति प्रो.राजबीर सिंह का कार्यकाल पूरा होना है। इससे पहले 302वीं ईसी बैठक बुलाई गई। 14 जनवरी को उच्चतर शिक्षा विभाग, हरियाणा सरकार ने निर्देश जारी कर बैठक को पुनर्निर्धारित करने और बिना सरकारी अनुमति कोई नियुक्ति आदेश जारी न करने को कहा था। 17 फरवरी को किया था निलंबित इसके बावजूद बैठक हुई और नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ी। 17 फरवरी को अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्चतर शिक्षा विभाग ने पत्र जारी कर 302वीं बैठक को सरकार के निर्देशों का उल्लंघन बताया और प्रस्तावित 304वीं ईसी बैठक को भी स्थगित करने के निर्देश दिए। इस बैठक में 302वीं बैठक की पुष्टि कर भर्तियों पर अंतिम मुहर लगनी थी। इसके बाद 17 फरवरी की रात करीब 11 बजे कुलपति ने उन्हें निलंबित कर दिया। आदेश उनके निवास पर भेजे गए। इसी बीच कुलसचिव डा. कृष्ण कांत गुप्ता ने आदेश जारी कर शाखा अधिकारियों को बैठक में भाग न लेने के निर्देश दिए। वरिष्ठ प्रोफेसर डा. नसीब सिंह गिल को भी उसी रात निलंबित किया गया, जबकि उस समय उनके बेटे की शादी का कार्यक्रम चल रहा था। इसे अमानवीय बताते हुए शिक्षकों ने कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस बल को भी बुलाना पड़ा। मामला तब पलटा जब बुधवार सुबह 11:40 बजे राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने डा. कृष्ण कांत की बहाली के आदेश जारी कर दिए और 304वीं बैठक को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया। इस मामले में जनसंपर्क निदेशक प्रो. आशीष दहिया ने बताया कि कार्यकारी परिषद की बुधवार को निर्धारित बैठक स्थगित कर दी गई है। कुलाधिपति ने निलंबन निरस्त किया – सरकार सर्वोपरि है। आदेशों का पालन होना चाहिए। कुलाधिपति ने निलंबन निरस्त किया। सरकार के निर्देश मानते हुए ईसी बैठक स्थगित कर दी गई है। मैं कुलपति का सम्मान करता हूं और राज्यपाल का आभार व्यक्त करता हूं। – डा. कृष्ण कांत गुप्ता, कुलसचिव, एमडीयू।

‘जिनकी लंगोटियां फटी, वो हमारी पगड़ी उछाल रहे’: नवजोत सिद्धू

चंडीगढ़. पंजाब की सियासत के दिग्गज और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू एक बार फिर अपनी 'शायराना स्ट्राइक' को लेकर चर्चा में हैं। सिद्धू ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक फोटो शेयर करते हुए अपने विरोधियों पर कड़ा तंज कसा है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जो लोग उनकी कमियां ढूंढ रहे हैं, उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्होंने स्टोरी पर लिखा… वो एक समंदर खंगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियां निकालने में लगे हुए हैं…. जिनकी अपनी लंगोटियां तक फटी हुई हैं, वो हमारी पगड़ी उछालने में लगे हुए हैं, ओ जाओ यार…. क्या कहना चाहते हैं सिद्धू? सिद्धू की इस शायरी के गहरे राजनीतिक और व्यक्तिगत मायने हैं। उन्होंने अपनी शायरी के जरिए उन लोगों पर निशाना साधा है जो बीते समय या वर्तमान में उनके कामों या उनमें कमियां तलाश रहे हैं। लंगोट्टियां फटे होना एक ठेठ मुहावरा है जिसका मतबल है कि सामने वाले की अपनी हालत खराब है, उसका खुद का दामन साफ नहीं है। लेकिन बावजूद इसके वह दूसरों की छवि को ठेस पहुंचाकर नैतिकता का पाठ सिखा रहे हैं। नवजोत कौर सिद्धू को पार्टी से निकाला बता दें कि सिद्धू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वे अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं और विपक्षी दलों के निशाने पर रहे हैं। कुछ दिन पहले सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू को कांग्रेस ने पार्टी से निकाल दिया है। इस फैसले की पुष्टि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अमृतसर में मीडिया से बातचीत के दौरान की थी। वहीं, विवादों के कारण सिद्धू पहले ही कांग्रेस छोड़ चुके हैं।

छत्तीसगढ़ की 2 राज्यसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा

रायपुर. भारत निर्वाचन आयोग ने बुधवार को अप्रैल-2026 में सेवानिवृत्त होने वाले राज्यसभा सदस्यों की रिक्त सीटों को भरने के लिए द्विवार्षिक चुनाव की घोषणा कर दी गई है. (Rajya Sabha Election 2026) इसके माध्यम से देश के 10 राज्यों में कुल 37 राज्यसभा सदस्यों का निर्वाचन किया जाएगा. छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की कुल 5 सीटों में से 2 सदस्यों, कवि तेजपाल सिंह तुलसी और फूलो देवी नेताम का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को पूर्ण हो रहा है. इन दोनों सीटों के रिक्त होने के कारण निर्वाचन की कार्यवाही प्रारंभ करते हुए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राज्यसभा के द्विवार्षिक निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा की गई है. आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार राज्यसभा सदस्यों के निर्वाचन के लिए 26 फरवरी को अधिसूचना जारी की जाएगी. नाम-निर्देशन पत्र 5 मार्च तक दाखिल किए जा सकेंगे. 6 मार्च को नामांकन पत्रों की संवीक्षा की जाएगी. अभ्यर्थी 9 मार्च तक अपना नाम वापस ले सकेंगे. 16 मार्च को सुबह 9 बजे से सायं 4 बजे तक मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना प्रारंभ की जाएगी. संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया 20 मार्च 2026 शुक्रवार तक पूर्ण कर ली जाएगी. राज्यसभा निर्वाचन के लिए अभ्यर्थी अपना नाम-निर्देशन पत्र 26 फरवरी से 5 मार्च तक सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक सार्वजनिक अवकाश को छोड़कर छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन में निर्धारित स्थान पर रिटर्निंग ऑफिसर संचालक, छत्तीसगढ़ विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे. राज्यसभा द्विवार्षिक निर्वाचन में राज्य के कुल 90 विधानसभा सदस्य अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें भारतीय जनता पार्टी के 54, इंडियन नेशनल कांग्रेस के 35 तथा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के एक सदस्य शामिल हैं. सभी विधायक मतपत्र के माध्यम से मतपेटी में अपना मत प्रदान करेंगे. मतपत्र पर वरीयता अंकित करने के लिए केवल निर्वाचन अधिकारी द्वारा प्रदान किए गए बैंगनी रंग के स्केच पेन का उपयोग किया जाएगा. किसी अन्य पेन का उपयोग मान्य नहीं होगा. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया की कड़ी निगरानी की जाएगी. निर्वाचन की संपूर्ण प्रक्रिया आयोग के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप संपादित की जाएगी. अप्रैल 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले सदस्यों का राज्यवार विवरण अनुलग्नक ‘A’ में पृथक रूप से संलग्न है.

सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण: ‘सेवा एक नई पहल’ द्वारा अंतिम संस्कार में की सेवा

मानवीय मूल्यों को पुनर्जीवित करती ‘सेवा एक नई पहल’ — अंतिम संस्कार में निभाया सामाजिक दायित्व निराश्रित बुजुर्ग मातुश्री के निधन पर संस्था ने खरे परिवार के सहयोग से किया अंतिम संस्कार, समाज में सद्भाव और समानता की नई चेतना का संदेश बिलासपुर  जोरा पारा स्थित सुवाणी सुखाश्रम में निवासरत एक निराश्रित बुजुर्ग मातुश्री के निधन पर सामाजिक संस्था सेवा एक नई पहल ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए अंतिम संस्कार का दायित्व निभाया। इस पुण्य कार्य में शहर के लब्धप्रतिष्ठित खरे परिवार का भी सराहनीय सहयोग रहा। मृतात्मा को मुखाग्नि संस्था की सक्रिय कार्यकर्ता सिमरन तलरेजा ने दी। श्रद्धांजलि सभा में नगर के गणमान्य नागरिकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही। इस अवसर पर वृन्दावन परिसर व्यवसायी संघ के अध्यक्ष मनोज सरवानी, सुखाश्रम संचालक श्याम तिवारी, सिंधी समाज के युवा समाजसेवी राम हिंदुजा, संस्था के संयोजक माधव मुजुमदार एवं सतराम जेठमलानी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभा को संबोधित करते हुए ‘ऑक्सीजन मैन’ के नाम से प्रसिद्ध समाजसेवी राजेश खरे ने कहा कि वर्तमान परिवेश में जब समाज जाति, वर्ग और आर्थिक विषमताओं से जूझ रहा है, ऐसे समय में सेवा एक नई पहल जैसे संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि निराश्रितों के लिए अंतिम संस्कार जैसे दायित्व को निभाना केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना है। राजेश खरे ने आगे कहा कि इस प्रकार की पहल समाज में सद्भाव, समानता और करुणा की नई जागृति लाएगी तथा टूटते सामाजिक संबंधों को फिर से जोड़ने का कार्य करेगी। उन्होंने संस्था के सदस्यों और सहयोगी परिवारों की खुले मन से सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। कार्यक्रम के अंत में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया तथा उपस्थित सभी लोगों ने सेवा एक नई पहल के इस मानवीय प्रयास को आगे भी निरंतर जारी रखने का संकल्प।

यीडा ने शासन को भेजी सूचना, सेक्टर-5ए में जापानी सिटी, सेक्टर-7 में सिंगापुर सिटी का प्रस्ताव

यमुना एक्सप्रेस-वे : जापान सिटी और सिंगापुर सिटी के लिए 500-500 एकड़ भूमि प्रस्तावित यीडा ने शासन को भेजी सूचना, सेक्टर-5ए में जापानी सिटी, सेक्टर-7 में सिंगापुर सिटी का प्रस्ताव दोनों सेक्टर मल्टीपर्पज औद्योगिक क्षेत्र के रूप में होंगे विकसित प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह ने कहा कि भूमि अधिग्रहण को लेकर तैयारी पूरी   लखनऊ,   यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने जापान सिटी और सिंगापुर सिटी के विकास को लेकर औपचारिक प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। 18 फरवरी 2026 को जारी पत्र में प्राधिकरण ने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, उत्तर प्रदेश शासन को अवगत कराया है कि प्राधिकरण क्षेत्र में इन दोनों प्रस्तावित सिटीज के लिए भूमि चिन्हित कर ली गई है। प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह ने बताया कि इन दोनों सिटी को लेकर भूमि अधिग्रहण से संबंधित योजना तैयार कर ली गई है। पत्र के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आधिकारिक प्रस्तावित जापान और सिंगापुर यात्रा के संदर्भ में प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत जापान सिटी और सिंगापुर सिटी हेतु क्षेत्र चिन्हित कर सूचना उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गई थी। इसी क्रम में प्राधिकरण ने सेक्टर-5ए और सेक्टर-7 को इन परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित किया है। प्राधिकरण की महायोजना के अंतर्गत सेक्टर-7 और सेक्टर-5ए मल्टीपर्पज औद्योगिक क्षेत्र के रूप में नियोजित हैं। इन क्षेत्रों में औद्योगिक उपयोग न्यूनतम 70 प्रतिशत निर्धारित है। इसके साथ ही आवासीय उपयोग अधिकतम 12 प्रतिशत, वाणिज्यिक उपयोग अधिकतम 13 प्रतिशत तथा संस्थागत सुविधाएं न्यूनतम 5 प्रतिशत तक निर्धारित हैं। पत्र में कहा गया है कि इन सेक्टरों को एक इंटीग्रेटेड औद्योगिक सिटी के रूप में विकसित किया जा सकता है। जापानी सिटी के लिए सेक्टर-5ए  ग्रेटर नोएडा में 500 एकड़ क्षेत्र प्रस्तावित है। इसी प्रकार सिंगापुर सिटी के लिए सेक्टर-7, ग्रेटर नोएडा में 500 एकड़ भूमि प्रस्तावित की गई है। दोनों ही परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है। इन सेक्टरों का विकास ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) मोड पर किए जाने का प्रस्ताव है।