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पंजाब में आउटसोर्स कर्मचारियों को हाई कोर्ट ने रेगुलर करने के दिए आदेश

चंडीगढ़. पंजाब में सालों से आउटसोर्स बेसिस पर काम कर रहे चौकीदारों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को उन्हें रेगुलर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि लंबे समय से लगातार सर्विस के बावजूद कर्मचारियों को अस्थायी दर्जे पर रखना अनुचित लेबर प्रथा है और यह संविधान के बराबरी के सिद्धांत के खिलाफ है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने मनक सिंह और अन्य समेत कई पटीशनों पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि 15 अक्टूबर, 2020 के ऑर्डर के जरिए कर्मचारियों को रेगुलर करने की मांग को खारिज करना कानून की नजर में टिकने लायक नहीं है। आखिरी ऑर्डर में कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित डिपार्टमेंट को ऑर्डर की कॉपी मिलने के 6 हफ्ते के अंदर सभी पटीशनर्स को रेगुलर करने का निर्देश दिया। अगर तय समय में ऑर्डर का पालन नहीं किया जाता है, तो कर्मचारी अपने आप रेगुलर माने जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों के पिछले सर्विस पीरियड को भी गणना में शामिल किया जाए और उन्हें सभी संबंधित सर्विस लाभ दिए जाएं। यह फैसला राज्य में आउटसोर्स और अस्थायी कर्मचारियों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे ऐसे ही हालात में काम कर रहे दूसरे कर्मचारियों को भी कानूनी राहत मिलने का रास्ता खुल सकता है। पटीशनर्स ने कोर्ट को बताया कि वे 2008 से अलग-अलग डिपार्टमेंट्स में चौकीदार के तौर पर काम कर रहे हैं और असली कंट्रोल डिपार्टमेंट के पास है, जबकि उन्हें एक ठेकेदार जरिए नियुक्त दिखाया गया है। उन्होंने बराबर काम के लिए बराबर सैलरी, मिनिमम उजरत और नियमत करने की मांग करते हुए कहा कि उनसे भी उतना ही काम लिया जाता है जितना रेगुलर कर्मचारियों से लिया जाता है। डिपार्टमेंट कॉन्ट्रैक्टर को हर कर्मचारी के हिसाब से करीब 14,000 रुपये देता था लेकिन कर्मचारियों को इससे बहुत कम सैलरी मिलती थी, जिससे वे कम से कम तनख्वाह से भी नीचे रह गए थे। इस स्थिति को गलत बताते हुए कोर्ट ने बराबर काम के लिए 'बराबर काम के लिए बराबर सैलरी' पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का ज़िक्र किया और कहा कि एक आदर्श नियोक्ता के तौर पर राज्य कर्मचारियों के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं कर सकता। हाई कोर्ट ने कहा कि जब कर्मचारी लंबे समय से लगातार सर्विस दे रहे हैं और उनका काम स्थायी है, तो उन्हें बस आउटसोर्स करना या अस्थायी कैटेगरी में रखना संविधान के अनुछेद 14, 16 और 21 की भावना के खिलाफ है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारी डिपार्टमेंट सालों तक अस्थायी लेबर लेने के बाद उन्हें रेगुलर करने से मना नहीं कर सकते हैं। 

मेहनत और जज़्बे की मिसाल: मुंगेली की सुप्रिया का भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में चयन

बिलासपुर मुंगेली जिले के ग्राम टेढ़ाधौरा की रहने वाली सुप्रिया ठाकुर का चयन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद के लिए हुआ है. सुप्रिया का चयन SSC (W) Tech-66 Entry के माध्यम से हुआ है. उन्हें 17 एसएसबी बोर्ड, बेंगलुरु से रिकमेंडेशन मिला है. खास बात यह है कि सुप्रिया ने इलेक्ट्रॉनिक्स वैकेंसी में ऑल इंडिया रैंक-4 हासिल कर देशभर में शानदार प्रदर्शन किया है. सुप्रिया ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जोसेफ कॉन्वेंट हायर सेकेंड्री स्कूल, तारबहार, बिलासपुर से पूरी की. इसके बाद उन्होंने चौकसे इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की. सुप्रिया एनसीसी ‘C’ सर्टिफिकेट भी प्राप्त कर चुकी हैं, और इसी दौरान उन्हें भारतीय सेना का एक्सपोजर मिला, जिससे उनके भीतर देशसेवा का सपना और मजबूत हुआ. सुप्रिया ने बताया कि बचपन से ही उनके मन में सेना में ऑफिसर बनकर देश की सेवा करने की इच्छा थी. इस सफलता में उनके माता-पिता और भाई का बड़ा योगदान रहा, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया. सुप्रिया के पिता वैदेही शरण सिंह श्रीनेत और माता संतोषी सिंह श्रीनेत हैं. परिवार मूल रूप से मुंगेली जिले के ग्राम टेढ़ाधौरा का निवासी है, जबकि सुप्रिया की पढ़ाई बिलासपुर में हुई. सुप्रिया की इस उपलब्धि पर पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है. वहीं उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भी सुप्रिया ठाकुर को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद पर चयनित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं. मुंगेली की यह बेटी अब ट्रेनिंग एकेडमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में देशसेवा का संकल्प पूरा करेंगी. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, लगन और सपने बड़े हों, तो गांव से निकलकर भी देश की शान बना जा सकता है.

आठ मुख, अद्भुत आस्था: नेपाल से भी विशिष्ट मंदसौर का पशुपतिनाथ मंदिर

 मंदसौर मंदसौर में शिवना तट पर विराजे अष्टमुखी श्री पशुपतिनाथ महादेव की प्रतिमा का सौंदर्य अपने-आप में अनूठा है। नेपाल के पशुपतिनाथ में चार मुख की मूर्ति है, जबकि मंदसौर में मूर्ति अष्टमुखी है और अभी तक ज्ञात इतिहास में यह विश्व की एकमात्र अष्टमुखी मूर्ति है। पशुपतिनाथ महादेव की मूर्ति लगभग 1500 वर्ष पुरानी है। और 85 बरस पहले शिवना नदी से ही निकली थी। 19 जून 1940 को शिवना नदी से बाहर आने के बाद 21 साल तक भगवान पशुपतिनाथ की मूर्ति नदी के तट पर ही रखी रही। मूर्ति को नदी से बाहर निकलने के बाद चैतन्य आश्रम के स्वामी प्रत्यक्षानंदजी महाराज ने 23 नवंबर 1961 को प्राण प्रतिष्ठा की। 27 नवंबर को मूर्ति का नामकरण श्री पशुपतिनाथ महादेव किया गया। इसके बाद मंदिर निर्माण हुआ। सावन में यहां डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु आते हैं। मुख्य आकर्षण श्रावण में पूरे माह होने वाला मनोकामना अभिषेक है। और अब तो यहां पशुपतिनाथ लोक बनने से पूरा परिसर आकर्षक बन गया है। 101 फीट ऊंचे मंदिर शिखर पर 100 किलो वजनी कलश स्थापित है जिस पर 51 तोला सोने की परत चढ़ाई गई है। शैव धर्म की 6 प्रमुख परंपराओं में से एक मंदसौर का पशुपतिनाथ महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित हिंदू मंदिर है। यह पशुपतिनाथ परंपरा से संबंधित है जो शैव धर्म के भीतर 6 प्रमुख परंपराओं में से एक है। शिलालेखों के आधार पर मंदिर की मूर्ति 5वीं या 6ठी शताब्दी की है। प्राचीन समय में इस स्थल को दशपुर कहते थे। यह मालवा के ऐतिहासिक क्षेत्र में राजस्थान की सीमा के पास इंदौर से लगभग 200 किमी, उदयगिरि गुफाओं से लगभग 340 किमी पश्चिम में और शामलाजी प्राचीन स्थलों से लगभग 220 किलोमीटर पूर्व में है। दोनों ही गुप्त साम्राज्य युग की पुरातात्विक खोजों के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। शिवना से प्रकटे अष्टमुखी महादेव माना जाता है कि प्रतिमा का निर्माण विक्रम संवत 575 ई. में सम्राट यशोधर्मन की हूणों पर विजय के आसपास का है। संभवत: मूर्ति भंजकों से रक्षा के लिए इसे शिवना नदी में दबा दिया गया था। अनुमान के अनुसार अज्ञात कलाकार ने प्रतिमा के ऊपर के चार मुख पूरी तरह बना दिए थे, जबकि नीचे के चार मुख निर्माणाधीन थे। श्री पशुपतिनाथ महादेव मूर्ति की तुलना नेपाल के काठमांडू स्थित श्री पशुपतिनाथ से की जाती है। मंदसौर स्थित पशुपतिनाथ मूर्ति अष्टमुखी है। जबकि नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मूर्ति चार मुखी है। मूर्ति में बाल्यावस्था, युवावस्था, अधेड़ावस्था व वृद्धावस्था के दर्शन होते हैं। इसमें चारों दिशाओं में एक के ऊपर एक दो शीर्ष हैं। प्रतिमा में गंगावतरण जैसी दिखाई देने वाली सफेद धारियां हैं। प्रतिमा की विशेषता मुख 8, ऊंचाई 7.3 फीट, गोलाई 11.3 फीट, वजन 6 क्विंटल अष्टमुख की विशेषता प्रतिमा के आठों मुखों का नामकरण भगवान शिव के अष्ट तत्व के अनुसार है। हर मुख के भाव व जीवन काल भी अलग-अलग हैं। 1 – शर्व, 2 – भव, 3 – रुद्र, 4 – उग्र, 5 – भीम, 6 – पशुपति, 7 – ईशान और 8 – महादेव। कैसे पहुंचें मंदसौर रेल सेवाएं – जयपुर-इंदौर रेलमार्ग पर मंदसौर प्रमुख स्टेशन है। और मुंबई, इंदौर, दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, बड़ौदा, सूरत, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे, उदयपुर, मथुरा, भोपाल, नागपुर, हिसार, जोधपुर सहित अन्य प्रमुख शहरों से सीधी रेल सेवा उपलब्ध है। बस सेवाएं – मंदसौर महू-नसीराबाद राजमार्ग पर स्थित है। मंदसौर से महज 30 किमी दूर से मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस वे भी निकल रहा है। सभी प्रमुख शहरों से सीधी बस सेवाएं भी उपलब्ध हैं। निकटतम हवाई अड्डा – इंदौर (220 किमी), उदयपुर (190 किमी) मंदसौर में 25 करोड़ से 'पशुपतिनाथ लोक' तैयार श्री पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में पशुपतिनाथ लोक का प्रथम चरण पूरा हो चुका है। मंदिर के सभा हाल से लेकर पुराने पार्किंग स्थल तक पूरे परिसर में 25 करोड़ रुपये में पर्यटन विकास निगम ने कायाकल्प कर दिया है। मंदिर परिसर में पुराने खंभों पर भी लाल पत्थर का कार्य हो चुका है। माली धर्मशाला व उसके आस-पास बने भवन भी तोड़कर यहां ओपन थियेटर बना दिया गया है। मंदिर के आसपास दीवारों पर लगे लाल पत्थरों पर शिव लीलाएं उकेरी गई हैं।

हरियाणा में जनगणना कार्य के चलते शिक्षकों के तबादले पर रोक

चंडीगढ़. जनगणना से जुड़ी तैयारियों को लेकर हुई बैठक में अहम फैसले लिए गए है। जनगणना कार्य के दौरान शिक्षकों के तबादलों पर रोक रहेगी। निदेशक जनगणना ने बताया कि कर्मियों को व्यापक प्रशिक्षण दिया जाएगा और उनका डाटा सीएमएमएस पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। जनगणना अवधि में इन कर्मियों का तबादला न किया जाना जरूरी है। बैठक में तय हुआ कि शिक्षकों के तबादले 15 जून 2026 तक नहीं किए जाएंगे। साथ ही अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि फील्ड ट्रेनर्स की सूची स्कूल शिक्षा विभाग को भेजी जाए ताकि प्रशिक्षण अवधि के दौरान उन्हें परीक्षा या अन्य किसी ड्यूटी में न लगाया जाए। अधिकारियों ने कहा कि इन फैसलों से जनगणना कार्य समयबद्ध और व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सकेगा।

‘पति-पत्नी का विवाद आत्महत्या का उकसावा नहीं’: हाईकोर्ट

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने (धारा 306 आईपीसी) के एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 4 साल की सजा को निरस्त कर दिया है. न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकलपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष आत्महत्या के लिए उकसावे के आवश्यक तत्व साबित करने में असफल रहा है. यह मामला जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा थाना क्षेत्र का है. आरोपी बसंत कुमार सतनामी के खिलाफ आरोप था कि उसकी पत्नी टिकैतिन बाई ने विवाह के करीब चार वर्ष बाद कथित प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली. ट्रायल कोर्ट (द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, एफटीसी जांजगीर) ने 31 जुलाई 2007 को आरोपी को धारा 306 आईपीसी के तहत दोषी ठहराते हुए 4 वर्ष का सश्रम कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण अज्ञात बताया गया. डॉक्टर ने जिरह में स्वीकार किया कि मृत्यु का कारण उल्टी-दस्त से हुई एस्फिक्सिया भी हो सकता है. एफएसएल रिपोर्ट पेश नहीं की गई. गवाहों के बयानों में विरोधाभास रहे. कुछ ने जहर, कुछ ने शराब सेवन और कुछ ने उल्टी-दस्त से मौत की बात कही. अदालत ने कहा कि केवल पति-पत्नी के बीच विवाद या सामान्य कलह को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता, जब तक कि स्पष्ट रूप से उकसावे या साजिश का प्रमाण न हो. सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि धारा 306 के तहत दोषसिद्धि के लिए स्पष्ट आपराधिक मंशा और प्रत्यक्ष उकसावे का प्रमाण आवश्यक है. मात्र प्रताड़ना या पारिवारिक विवाद पर्याप्त नहीं हैं. हाई कोर्ट ने कहा कि, अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि मृतका की मौत आत्महत्या थी या आरोपी ने उसे आत्महत्या के लिए उकसाया. ऐसे में ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई दोषसिद्धि टिकाऊ नहीं है. अदालत ने आरोपी को बरी करते हुए उसकी सजा रद्द कर दी.

CM साय ने की सिरीमकेला में सामुदायिक भवन बनाने की घोषणा

जशपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दुलदुला विकासखंड में ग्राम सिरीमकेला में नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए. मुख्यमंत्री ने सिरीमकेला में सामुदायिक भवन बनाने की घोषणा की. मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कल हम सब महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाएंगे. इस अवसर पर आज नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होना मेरे लिए परम सौभाग्य की बात है. यहाँ आकर मुझे आध्यात्मिक अनुभूति हो रही है. इस दौरान मुख्यमंत्री ने श्री राम लला दर्शन योजना के तहत प्रदेश के 42000 से ज्यादा तीर्थ यात्रियों को अयोध्या धाम के दर्शन करवाने के बाद भी कहीं. सभी श्रद्धालुओं को उन्होंने महाशिवरात्रि पर्व की बधाई भी 

आज झारखंड में निकलेगी शिव बारात: ट्रैफिक रहेगा डायवर्ट, इन रास्तों पर नहीं मिलेगी एंट्री

रांची राजधानी रांची में आज 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। शहर के प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हैं। शिव बारात को लेकर प्रशासन ने विशेष सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था की है, ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। रांची में शिव बारात, ट्रैफिक में बदलाव महाशिवरात्रि के अवसर पर आज शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच शिव बारात निकाली जाएगी। जुलूस को देखते हुए शहर में कई जगह बैरिकेडिंग की गई है। पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। ट्रैफिक एसपी ने नागरिकों से अपील की है कि जुलूस वाले रास्तों से बचें और यातायात व्यवस्था में सहयोग करें। सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक बड़े वाहनों का शहर में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। बड़े मालवाहक वाहन तय स्थानों तक ही जा सकेंगे। छोटे वाहन निर्धारित मार्गों से ही अपने गंतव्य तक पहुंच पाएंगे। कांके की ओर जाने वाले छोटे वाहन राम मंदिर मोड़, हॉटलिप्स चौक और न्यू मार्केट चौक से होकर जा सकेंगे। जुलूस के दौरान शनि मंदिर, दुर्गा मंदिर, मिनाक्षी गली, सुखदेवनगर, बालाजी मंदिर, सुलभ शौचालय और गौशाला कटिंग से पहाड़ी मंदिर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग रहेगी। शिव बारात का रूट शिव बारात इंद्रपुरी शिव मंदिर से शुरू होकर रातू रोड, मेट्रो गली, रानी सती मंदिर, पहाड़ी मंदिर, बानो मंजिल मार्ग, गाड़ीखाना, कार्ट सराय रोड, जेजे रोड, शहीद चौक, पुस्तक पथ, ज्योति संगम, गांधी चौक, मारवाड़ी टोला, महावीर चौक, प्यादा टोली होते हुए आरआर स्पोर्टिंग दुर्गा पूजा समिति के प्रांगण में समाप्त होगी। क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि? महाशिवरात्रि का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकला विष भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए पी लिया था। इसी कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, रात भर जागरण करते हैं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित की जाती है। “ॐ नमः शिवाय” का जाप कर लोग सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। झारखंड सहित देशभर के प्रमुख शिव मंदिरों में आज भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है और पूरा माहौल भक्तिमय बना हुआ है।  

CM साय ने महाशिवरात्रि पर श्री सत्यनारायण बाबा धाम में की पूजा-अर्चना

रायगढ़/रायपुर. महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ रायगढ़ प्रवास के दौरान देर रात एक बजे ग्राम कोसमनारा स्थित श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा धाम पहुंचे. उन्होंने भगवान भोलेनाथ एवं श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पूरे प्रदेश वासियों को महाशिवरात्रि पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दी. इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने जिला खनिज न्यास मद के अंतर्गत 1 करोड़ 20 लाख रुपए की लागत से विभिन्न विकास कार्यों का विधिवत शिलान्यास किया. प्रस्तावित कार्यों में मुख्य भवन के सामने ग्रेनाइट फर्श सहित शेड निर्माण, आगंतुकों के विश्राम एवं भोजन के लिए शेड निर्माण, शौचालय परिसर भवन का निर्माण तथा पार्किंग क्षेत्र के लिए सीमेंट कांक्रीट सड़क निर्माण शामिल हैं. उन्होंने इन कार्यों के लिए क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि कोसमनारा स्थित यह धाम श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा समाज को सकारात्मक दिशा और आत्मबल प्रदान करती है. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गुरुजनों के आशीर्वाद और जनता के विश्वास के साथ जनकल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ रही है. उल्लेखनीय है कि रायगढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित यह धाम वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा एवं भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा वर्ष 1998 से कठोर तपस्या में लीन हैं. वर्ष 2003 में उन्हें ‘श्री श्री 108’ की उपाधि प्राप्त हुई, जिसके बाद धाम की ख्याति और अधिक बढ़ी. बताया जाता है कि बाबा ने पत्थरों को एकत्र कर शिवलिंग का स्वरूप निर्मित किया और उसी स्थान को अपनी तपोभूमि बनाया. वर्षा, ग्रीष्म और शीत—तीनों ऋतुओं में खुले स्थान पर रहकर भगवान भोलेनाथ की साधना करना उनकी तपस्या की विशेष पहचान बन चुकी है. इस अवसर पर महापौर जीवर्धन चौहान, नगर निगम सभापति डिग्रीलाल साहू, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, सरपंच, गणमान्य नागरिक, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे.

मासूम बच्चियों को डायल 112 के जवानों ने परिजनों से मिलाया

ऑटो से उतरने के बाद मां से बिछड़ गई थी एक और तीन साल की बच्चियां भोपाल सागर जिले के थाना मोतीनगर क्षेत्र में डायल-112 जवानों की सतर्कता, मानवीय संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही ने दो मासूम बच्चियों को सुरक्षित उनके माता-पिता से मिलाया है। सड़क पर लावारिस अवस्था में भटकती लगभग 1 वर्ष एवं 3 वर्ष आयु की दो बच्चियों को सुरक्षित संरक्षण में लेकर, डायल-112 टीम ने जिस धैर्य, समझदारी और जिम्मेदारी के साथ कार्य किया, वह सेवा और करुणा का अनुकरणीय उदाहरण है।  जानकारी के अनुसार इस संबंध में राज्य स्तरीय डायल-112 कंट्रोल रूम भोपाल को सूचना प्राप्त हुई, जिसके तत्काल बाद थाना मोतीनगर क्षेत्र में तैनात एफआरव्ही वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक अभय विनोदिया एवं पायलट अनिकेत दुबे ने मौके पर पहुंचकर दोनों मासूम बच्चियों को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। टीम द्वारा अत्यंत संवेदनशीलता, धैर्य और अपनत्व के साथ बच्चियों से संवाद किया गया।जिसके परिणामस्वरूप 3 वर्षीय बच्ची ने अपने परिजन का नाम बताया। इस जानकारी के आधार पर डायल-112 टीम ने आसपास के क्षेत्र में सक्रियता से पूछताछ करते हुए परिजनों की तलाश प्रारंभ की। लगातार प्रयासों और सतर्क खोज के बाद बच्चियों के माता-पिता का पता लगाया और उन्हें तत्काल मौके पर बुलाया। पूछताछ में परिजनों ने बताया कि बच्चियां अपनी माता के साथ थीं, लेकिन ऑटो में पर्स छूट जाने के कारण वे उसे लेने पीछे चली गई।इसी दौरान बच्चियां ठेले वाले के पास खड़ी रहीं और मां को तलाशते हुए आगे निकल गईं, जिससे वे एक-दूसरे से बिछड़ गईं। जवानों ने पहचान एवं सत्यापन उपरांत दोनों बच्चियों को सुरक्षित उनके माता-पिता के सुपुर्द किया। डायल 112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना संदेश देती है कि मध्यप्रदेश पुलिस केवल कानून-व्यवस्था की प्रहरी नहीं, बल्कि हर संकट में आमजन की सुरक्षा, संवेदनशीलता और भरोसे की मजबूत ढाल है।

इंदौर में आईईटी में रैगिंग के लिए उकसाने वाले प्रथम वर्ष के चार विद्यार्थी होंगे निष्कासित

इंदौर. इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) ने रैगिंग को लेकर रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसमें प्रथम वर्ष के चार विद्यार्थियों पर सख्त कार्रवाई की गई है। इन्हें सीनियर को रैगिंग दिए जाने को लेकर सहपाठियों पर दबाव बनाने का दोषी पाया गया है। एंटी रैगिंग कमेटी (एआरसी) ने चार विद्यार्थियों को कोर्स से बाहर करने का फैसला लिया है। रिपोर्ट में निष्कासन की अनुशंसा की गई है। जबकि 11 विद्यार्थियों को हॉस्टल से बाहर कर दिया गया है। इन पर अर्थदंड भी लगाया गया है। रैगिंग की रिपोर्ट कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई को भेज दी गई। करीब दो सप्ताह पहले प्रथम वर्ष के कुछ विद्यार्थियों ने रैगिंग की शिकायत दर्ज कराई थी। बताया गया था कि डी हॉस्टल में कुछ छात्र जूनियर्स पर दबाव बनाते हैं। आरोप था कि उन्हें सीनियर्स के पास जाकर जबरन परिचय देने के लिए उकसाया जाता है। इतना ही नहीं, सिगरेट पीने के लिए भी मजबूर किया जाता है। बैच आउट कर दिया जाता है इन्कार करने पर विद्यार्थियों को ‘बैच आउट’ कर दिया जाता है। 'बैच आउट' यानी ऐसे विद्यार्थियों को सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों से दूर रखा जाता है। उन्हें सीनियर्स के सामने सिर झुकाकर और हाथ जोड़कर बात करने को कहा जाता है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संस्थान ने तुरंत जांच शुरू कर दी। शिकायत के अलावा एंटी रैगिंग कमेटी ने ऑडियो रिकॉर्डिंग की भी जांच की। इसमें प्रथम वर्ष के कुछ विद्यार्थी अपने सहपाठियों को रैगिंग देने के लिए उकसाते हुए पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी भी इस पूरे मामले में शामिल थे। करीब दो सप्ताह की जांच के बाद कमेटी ने करीब 15 विद्यार्थियों को दोषी पाया। इनमें से चार प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों पर गंभीर आरोप साबित हुए। कमेटी ने इन्हें बीटेक कोर्स से बाहर करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई को भेज दी गई है। अगले सप्ताह इस मुद्दे पर बैठक बुलाई गई है, जिसमें अंतिम फैसला लिया जाएगा। जुर्माना भी लगाया बीटेक के प्रथम व द्वितीय वर्ष के आठ विद्यार्थी ऐसे हैं, जो रैगिंग का समर्थन करते हैं। इन पर भी कमेटी ने सख्त कार्रवाई की है। भले ही इन्हें कोर्स से बाहर नहीं किया गया है, मगर इन विद्यार्थियों को हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है। साथ ही दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर विद्यार्थियों को अर्थदंड की राशि जमा करना है। समयावधि निकलने के बाद विद्यार्थियों पर अर्थदंड के साथ ही जुर्माना भी लगाया जाएगा। प्रतिदिन 100 रुपये रखा गया है। तीन विद्यार्थियों को पूर्व में भी रैगिंग में शामिल होना पाया गया था। इन पर दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है और कैम्पस प्लेसमेंट की गतिविधियों से बाहर कर दिया गया है। यूजीसी को भी भेजी रिपोर्ट आईईटी के निदेशक डॉ. प्रतोष बसंल का कहना है कि रैगिंग को लेकर कमेटी ने रिपोर्ट तैयार की है। चार विद्यार्थियों को कोर्स से बाहर करने की अनुशंसा की है। कुछ विद्यार्थियों को हॉस्टल और प्लेसमेंट से बाहर किया गया है। कुलगुरु और यूजीसी को रिपोर्ट भेज दी गई है। विश्वविद्यालय के अब फैसले के बाद कार्रवाई की जाएगी।