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चार राज्यों से 4 संदिग्ध गिरफ्तार, पाकिस्तानी कनेक्शन की जांच तेज; डिजिटल सबूत खंगाल रही एजेंसियां

भोपाल  मध्य प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) की जांच में देश विरोधी गतिविधियों के आरोपितों से जुड़े नए और चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इंटरनेट मीडिया और वाट्सएप के जरिए संपर्क में रहने वाला पाकिस्तानी हैंडलर आरोपित युवकों को नियमित रूप से जिम जाने, शारीरिक रूप से फिट रहने और पासपोर्ट बनवाने का निर्देश दे रहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि उन्हें भविष्य में प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भेजने की तैयारी की जा रही थी। एटीएस सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर युवकों को कथित तौर पर “लड़ाके” बनने के लिए शारीरिक रूप से तैयार रहने की सलाह देता था। इसी क्रम में पासपोर्ट बनवाने पर भी विशेष जोर दिया गया था। अब तक गिरफ्तार आरोपितों में केवल भोपाल निवासी फराज के पास पासपोर्ट मिलने की पुष्टि हुई है। चार राज्यों से चार आरोपित गिरफ्तार इस मामले में एटीएस अब तक चार आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें भोपाल से फराज, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से नईम अब्दुल्ला, राजस्थान के अलवर से शाकिर मेव और बिहार के मधुबनी से इजहार उल हक को पकड़ा गया है। सबसे पहले गिरफ्तार किए गए फराज को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। आतंकी संगठनों से संबंधों की जांच जारी एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपितों के संबंध किसी आतंकी संगठन से थे या नहीं। हालांकि प्रारंभिक पूछताछ में सभी आरोपित किसी बड़े संगठन से जुड़े होने से इन्कार करते रहे हैं। इसके बावजूद जांच एजेंसियां इस दावे की गहन पड़ताल कर रही हैं। डिजिटल सबूतों की होगी फोरेंसिक जांच जांच का फोकस अब आरोपितों से जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों पर है। एटीएस इन डिवाइसों से डेटा रिकवर कर उनके ऑनलाइन नेटवर्क, सोशल मीडिया संपर्कों और चैटिंग रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। इसके साथ ही उन लोगों की पहचान भी की जा रही है, जो इन आरोपितों के संपर्क में थे। सूत्रों का मानना है कि डिजिटल जांच के बाद इस मामले में और लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है, जिससे गिरफ्तार आरोपितों की संख्या बढ़ने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। फंडिंग के सबूत अभी नहीं मिले जांच एजेंसियों के मुताबिक अब तक किसी संस्था, संगठन या व्यक्ति द्वारा देश विरोधी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता दिए जाने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि आरोपितों के बैंक खातों और लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है, ताकि किसी संभावित फंडिंग नेटवर्क का पता लगाया जा सके।  

चुनावी रण से पहले कांग्रेस में हलचल, पंजाब इकाई में बड़े बदलाव की चर्चा तेज

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. पार्टी नेतृत्व को चिंता है कि गुटबाजी, कई पावर सेंटर और अंदरूनी खींचतान का फायदा विरोधी दल उठा सकते हैं. यही वजह है कि कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब पर फोकस बढ़ा दिया है।  कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के साथ पंजाब के वरिष्ठ नेताओं की बैठक की है. इस बैठक का मकसद संगठन की स्थिति, चुनावी तैयारियों और नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं का आकलन करना है।  इसके बाद पार्टी ने अजय माकन समेत तीन सदस्यों की एक ऑब्जर्वर कमेटी गठित कर दी है. इस कमेटी को पंजाब की स्थिति का मूल्यांकन करने और भविष्य की रणनीति पर सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है. कमेटी की रिपोर्ट से पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष का नाम तय होगा।  हाईकमान ने हलचल बढ़ाई पंजाब को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की गंभीरता लगातार बढ़ती बैठकों से साफ दिखाई दे रही है. पिछले दो सप्ताह में ही पार्टी ने पंजाब मामलों पर चार महत्वपूर्ण बैठकें की हैं. इससे ये संकेत मिलता है कि हाईकमान चुनाव से काफी पहले संगठनात्मक कमियों को दूर करना चाहता है।  ऑब्जर्वर कमेटी ने करीब 70 नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया है. इनमें सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं. चर्चाओं का केंद्र संगठनात्मक पुनर्गठन, लंबित चुनावी समितियां और नेतृत्व में संभावित बदलाव है।  सूत्रों के मुताबिक, ऑब्जर्वर कमेटी ने नेताओं से मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष पर भी राय मांगी है. उनसे पूछा गया कि क्या वर्तमान नेतृत्व को जारी रखा जाना चाहिए या बदलाव की जरूरत है. कमेटी अगले दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है. इसके बाद संगठनात्मक बदलाव हो सकते हैं।  PCC में बदलाव की बहस तेज स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने पंजाब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की बहस को तेज कर दिया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजा अमरिंदर सिंह वारिंग को अपने राजनीतिक गढ़ गिद्दड़बाहा में बड़ा झटका लगा. यहां आम आदमी पार्टी ने 19 में से 17 नगर निकाय वार्डों में जीत दर्ज की थी।  इस प्रदर्शन के बाद पार्टी के भीतर कई नेताओं ने नेतृत्व में बदलाव पर जोर देना शुरू कर दिया है. उनका मानना है कि यदि कांग्रेस को 2027 में मजबूत चुनौती पेश करनी है, तो संगठन को नए सिरे से खड़ा करना होगा. दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का पलड़ा भारी हुआ है।  चन्नी स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन के बाद अधिक मजबूत होकर उभरे हैं. चमकौर साहिब में कांग्रेस के अच्छे नतीजों ने उनके राजनीतिक कद को बढ़ाया है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि चन्नी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी की संभावनाओं को लेकर सक्रिय हैं. उनके साथ कई नाम चर्चा में हैं।  चन्नी की महत्वाकांक्षा और चुनौती इसमें सुखजिंदर सिंह रंधावा और विजेंदर सिंगला के नाम भी संभावित PCC चीफ के तौर पर चर्चा में हैं. इससे साफ है कि नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर कई दावेदार मौजूद हैं. चन्नी की बढ़ती सक्रियता ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. वो अभी भी पंजाब में बड़े चेहरे हैं।  उनकी गिनती कांग्रेस के सबसे बड़े दलित चेहरे के रूप में होती है. लेकिन पार्टी नेतृत्व 2022 विधानसभा चुनाव के अनुभव को भी नजरअंदाज नहीं कर सकता. कांग्रेस ने तब उनको पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया था. इसके बावजूद पार्टी सत्ता बरकरार नहीं रख सकी।  यही कारण है कि संगठन के भीतर इस बात पर अलग-अलग राय है कि क्या चन्नी को फिर से पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाया जाना चाहिए. चन्नी समर्थकों का तर्क है कि उनके पास दलित समाज में मजबूत जनाधार है. इतना ही नहीं वो पार्टी को सामाजिक संतुलन देने की क्षमता रखते हैं।  जट्ट और दलित सिख समीकरण वहीं विरोधी खेमे का मानना है कि कांग्रेस को किसी एक चेहरे पर निर्भर होने की बजाय संगठन को मजबूत करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. पंजाब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती जट्ट और दलित सिख के बीच संतुलन बनाए रखने की है. दोनों बेहद प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं।  फिलहाल पार्टी के दो सबसे अहम पद जट्ट सिख नेताओं के पास हैं. राजा अमरिंदर सिंह वारिंग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं, जबकि प्रताप सिंह बाजवा कांग्रेस विधायक दल का नेतृत्व कर रहे हैं. ऐसे में चन्नी समर्थक दलित नेताओं का एक वर्ग संगठन में अधिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहा है।  यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब देश का वह राज्य है, जहां अनुसूचित जाति की आबादी सबसे अधिक है. हालांकि, इसके साथ ही कांग्रेस के सामने एक और चुनौती है. पिछले कुछ वर्षों में चुनाव के दौरान दलित वोट बैंक का बड़ा हिस्सा आम आदमी पार्टी की ओर शिफ्ट हुआ है।  कमेटी की रिपोर्ट पर टिकीं निगाहें ऐसे में नेतृत्व से जुड़ा कोई भी फैसला केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं होगा, बल्कि उसका सीधा असर पार्टी के सामाजिक और चुनावी समीकरणों पर भी पड़ेगा. फिलहाल पंजाब कांग्रेस की राजनीति का केंद्र अजय माकन की अगुवाई वाली ऑब्जर्वर कमेटी की रिपोर्ट बन गई है।  ये रिपोर्ट तय कर सकती है कि कांग्रेस पार्टी नेतृत्व में बड़ा बदलाव होगा या मौजूदा टीम को ही 2027 चुनाव तक मौका दिया जाएगा. राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और भूपेश बघेल की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि कांग्रेस पंजाब को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। 

आंधी-तूफान प्रभावित 474 परिवारों को 69 लाख रुपये से अधिक की राहत सहायता

रायपुर प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाओं से प्रभावित नागरिकों को राज्य आपदा मोचन निधि के तहत तत्काल अनुग्रह राशि और राहत सामग्री प्रदान की जाती है। जनहानि, गंभीर चोट, और घर या संपत्ति के नुकसान की स्थिति में प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में दी जाती है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की मंशानुरूप प्रभारी मंत्री  केदार कश्यप के निर्देशानुसार सुकमा जिले में हाल ही में आए भीषण आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली की घटना के बाद जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाई। प्राकृतिक आपदा की सूचना मिलते ही कलेक्टर  अमित कुमार के निर्देशन में प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिए गए। प्रभावित परिवारों तक पहुंची त्वरित राहत            राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के प्रावधानों के तहत आपदा प्रभावित नागरिकों को शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। प्रशासन द्वारा विशेष अभियान चलाकर जिले के 474 प्रभावित हितग्राहियों को कुल 69 लाख 32 हजार 700 रुपये की राहत राशि वितरित की गई। सबसे अधिक प्रभावित तोंगपाल क्षेत्र के परिवारों को प्राथमिकता देते हुए लगभग 36 लाख रुपये की तात्कालिक सहायता राशि प्रदान की गई, जिससे संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत मिली। पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा रहा प्रशासन            आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार भ्रमण कर प्रभावित परिवारों की स्थिति का जायजा लिया। जनहानि और पशुधन हानि से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी जरूरतमंद परिवार राहत और सहायता से वंचित न रहे। प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया गया कि संकट की इस घड़ी में शासन और प्रशासन उनके साथ खड़ा है। क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण की दिशा में पहल           आंधी-तूफान से जिले में 1,407 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रशासन द्वारा क्षति का सर्वेक्षण कर पुनर्निर्माण और मरम्मत की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इसके साथ ही लगभग 2.5 करोड़ रुपये मूल्य की क्षतिग्रस्त सार्वजनिक संपत्तियों के सुधार और बहाली के लिए भी आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। तेजी से सामान्य हो रहा जनजीवन            प्रशासन की त्वरित कार्रवाई, सतत निगरानी और मानवीय दृष्टिकोण के कारण प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन तेजी से सामान्य हो रहा है। राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि प्रभावित परिवार जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौट सकें। सुकमा जिला प्रशासन की यह पहल दर्शाती है कि आपदा की कठिन घड़ी में संवेदनशील शासन और त्वरित राहत व्यवस्था लोगों के लिए भरोसे और संबल का मजबूत आधार बन सकती है।

पत्नी को प्रताड़ित कर बाल काटे, कालिख पोती और मारपीट की; पुलिस ने आरोपी को दबोचा

अंबिकापुर कोरिया जिले के पटना थाना क्षेत्र में चरित्र शंका को लेकर पत्नी के साथ अमानवीय क्रूरता करने वाले आरोपी पति जितेंद्र सारथी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी मूलतः सूरजपुर जिले के ग्राम रुनियाडीह का रहने वाला है। पुलिस ने पहले बीएनएस की धारा 115(2), 351(2) और 85 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी, लेकिन हैवानियत का वीडियो सामने आने और पीड़िता को बच्चे से पेशाब कराने व खुद का पेशाब पिलाने की पुष्टि के बाद पुलिस पर दबाव बढ़ा। इसके बाद प्रकरण में धारा-123 भी जोड़ दी गई। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक के कठोर कारावास का प्रावधान है। वीडियो क्लिप सामने आने के बाद पुलिस की त्वरित कार्रवाई पटना थाना प्रभारी प्रमोद पांडेय ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। इस बीच आरोपी द्वारा बनाई गई क्रूरता की वीडियो क्लिप सामने आ गई। वीडियो में पीड़िता के साथ हुई हैवानियत साफ दिख रही थी। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। मोबाइल भी जब्त किया गया है। क्या है पूरा मामला 20 वर्ष पहले प्रेम विवाह करने वाले दंपती के चार बच्चे हैं। पिछले 11 महीने से चरित्र शंका को लेकर विवाद चल रहा था। पति उसे छोड़कर बाहर चला गया था। पीड़िता मायके में रह रही थी। आर्थिक कठिनाइयों में साथ देने वाले व्यक्ति के घर बीते 14 जून को गई थी। आरोपी जितेंद्र सारथी, चारों बच्चों को लेकर वहां पहुंचा। आरोप है कि आरोपी ने बच्चों के सामने ही पत्नी के कपड़े फाड़कर मारपीट की। आधे बाल काट दिए। सिर पर ग्रीस-मोबिल ऑयल डालकर मुंडन कर दिया। चेहरे और शरीर पर कालिख पोती। इसके बाद एक बच्चे से महिला के ऊपर पेशाब कराया और खुद का पेशाब भी गिलास में लेकर बलपूर्वक पिलाया। पूरी वारदात का वीडियो बनाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। लगातार गाली-गलौज कर पत्नी को मर जाने के लिए दुष्प्रेरित किया। पीड़िता के मायके पहुंचकर शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी।  

रतलाम के डायल-112 हीरो परित्यक्त अवस्था में मिली नवजात बच्ची को सुरक्षित संरक्षण देकर पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  रतलाम जिले के थाना औद्योगिक क्षेत्र जावरा में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं त्वरित कार्यवाही से रेलवे ब्रिज के नीचे परित्यक्त अवस्था में मिली एक नवजात बच्ची को सुरक्षित संरक्षण प्रदान करते हुए समय पर अस्पताल पहुँचाया गया। पुलिस की मानवीय पहल से नवजात को तत्काल चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई जा सकी। 18 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना औद्योगिक क्षेत्र जावरा अंतर्गत रेलवे ब्रिज के नीचे एक नवजात बच्ची परित्यक्त अवस्था में मिली है, जिसे कोई अज्ञात व्यक्ति छोड़कर चला गया है। तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया तथा वरिष्ठ अधिकारियों को भी घटना से अवगत कराया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक  हीरालाल दांगी एवं पायलट  अशोक सेन तत्काल घटनास्थल पर पहुँचे और नवजात बच्ची को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। इसके उपरांत डायल-112 टीम ने बच्ची को डायल-112 वाहन से शासकीय चिकित्सालय जावरा पहुँचाकर भर्ती कराया। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों एवं जरूरतमंद नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य निरंतर कर रही है।  

विद्युत वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी आधुनिक और उपभोक्ता हितैषी बनने की पहल

रायपुर स्मार्ट मीटर किसी राज्य सरकार की अलग योजना नहीं, बल्कि भारत सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना के तहत पूरे देश में लागू की गई राष्ट्रीय पहल है। इसी योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और निर्धारित मानकों के अनुसार छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। राज्य सरकार इस केंद्रीय योजना का क्रियान्वयन करते हुए विद्युत वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और उपभोक्ता हितैषी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। केंद्र सरकार ने जुलाई 2021 में देशभर में स्मार्ट मीटरिंग योजना लागू करने का निर्णय लिया था। इसका उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाना, तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों में कमी लाना, बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता सुधारना तथा उपभोक्ताओं को सटीक बिलिंग की सुविधा उपलब्ध कराना है। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर परियोजना लागू करने का निर्णय  पूर्ववर्ती सरकार वर्ष 2022 में लिया गया था। परियोजना के लिए टेंडर जारी होने और कार्यादेश दिए जाने के बाद फरवरी 2024 से स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य प्रारंभ हुआ। वर्तमान में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पूर्व में जारी निविदाओं, अनुबंधों और कार्यादेशों के आधार पर ही परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रदेश में लगभग 55 लाख उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जाने का लक्ष्य है, जिनमें से करीब 40 लाख मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को कई सुविधाएं मिल रही हैं। बिजली की खपत का आंकड़ा हर 30 मिनट में उपलब्ध होता है, जिससे उपभोक्ता अपने उपयोग पर बेहतर निगरानी रख सकते हैं। मीटर रीडर द्वारा गलत रीडिंग दर्ज होने की संभावना समाप्त हो जाती है और बिलिंग अधिक सटीक होती है। इसके अलावा स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली भार, वोल्टेज और ऊर्जा खपत सहित अन्य तकनीकी आंकड़े वास्तविक समय में प्राप्त होते हैं। इससे विद्युत वितरण कंपनी को नेटवर्क की स्थिति का लगातार विश्लेषण करने, ओवरलोडिंग, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव अथवा आपूर्ति संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने में सुविधा मिलती है। इसका लाभ अंततः उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति के रूप में मिलता है। ऊर्जा विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटरिंग का उद्देश्य उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं, बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाना है। यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार की योजना और उसके दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित की जा रही है।

विकसित भारत रोजगार योजना के तहत 2,400 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित, युवाओं और नियोक्ताओं को मिलेगा सीधा लाभ

रायपुर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में रोजगार सृजन, गरीब कल्याण और आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। प्रधानमंत्री के 12 वर्षों के कार्यकाल में भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। यह बात प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में कही। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डीबीटी के माध्यम से प्रोत्साहन राशि वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका सीधा प्रसारण रायपुर स्थित एम्स ऑडिटोरियम में देखा गया। इस अवसर पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे। रोजगार सृजन को नई गति देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत आज 2,400 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की। योजना के माध्यम से अब तक 15 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ है। विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया तथा केंद्रीय राज्य मंत्री सुशोभा करांदलाजे भी उपस्थित रहीं। योजना के अंतर्गत पहली बार नौकरी प्राप्त करने वाले युवाओं को एक माह के वेतन के बराबर अधिकतम 15,000 रुपये तक की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वहीं अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को प्रत्येक नई नियुक्ति पर अधिकतम 3,000 रुपये प्रतिमाह तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी, जिससे उद्योगों और संस्थानों में भर्ती को बढ़ावा मिलेगा। श्रम मंत्री देवांगन ने कहा कि 99 हजार 446 करोड़ रुपये के कुल व्यय वाली इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य अगले दो वर्षों में देशभर में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार का सृजन करना है। इनमें लगभग 1.92 करोड़ ऐसे लाभार्थी होंगे, जिन्हें पहली बार औपचारिक रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के नेतृत्व में श्रम एवं रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। मंत्री देवांगन ने बताया कि राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति को उद्योग जगत का व्यापक समर्थन मिला है और इसके परिणामस्वरूप अब तक 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इससे प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल में रोजगार, गरीबी उन्मूलन और आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल हुई हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू नई औद्योगिक नीति में युवाओं को बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है। लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री मोदी लगातार नवाचार आधारित योजनाएं लागू कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में एनआईटी, आईआईटी, आईआईएम और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान मौजूद हैं। उद्योग विभाग को इन संस्थानों के युवाओं को कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने के लिए विशेष पहल करनी चाहिए। नगरनार और बैलाडीला जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में भी प्रशिक्षित युवाओं के लिए व्यापक रोजगार संभावनाएं उपलब्ध हैं। कार्यक्रम में कर्मचारी भविष्य संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय के प्रमुख जयवर्धन इंगले ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उपस्थित अतिथियों ने विज्ञान भवन, नई दिल्ली से प्रसारित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन भी सुना।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय समिति गठित

भोपाल  राज्य शासन द्वारा सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय एम.ओ.एस.पी.आई एवं राज्य सरकार के मध्य सांख्यिकीय गतिविधियों के प्रभावी समन्वय एवं केंद्रीय क्षेत्रीय अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी के सम्बन्ध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया गया है। समिति में अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, वित्त, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उप महानिदेशक, भारत सरकार, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, (क्षेत्र संकार्य प्रभाग) तथा सम्बंधित केंद्रीय मंत्रालयों/राज्य के विभागों/केंद्रीय या राज्य पीएसयू के प्रतिनिधि (एजेंडा अनुसार) सदस्य होंगे। आयुक्त, आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय, म.प्र को सदस्य-सचिव नामित किया गया है। राज्य स्तरीय समन्वय समिति कार्यक्षेत्र राज्य स्तरीय समन्वय समिति का कार्यक्षेत्र एम.ओ.एस.पी.आई और उसके क्षेत्रीय कार्यालयों तथा राज्य के सांख्यिकी विभाग के बीच नियमित संवाद को सुगम बनाना जिससे प्रमुख राष्ट्रीय सर्वेक्षणों जैसे एन.एस.एस, ए.एस.एल, आर्थिक जनगणना एएसयूएसई, पीएलएफएस, एचसीईएस अलावा अन्य सांख्यिकी गतिविधियों का योजनाबद्ध क्रियान्वयन किया जा सके। आगामी अखिल भारतीय सर्वेक्षणों, सेंपल फ्रेम्, सैंपल मिलान तथा इनमें राज्य की भागीदारी से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाना, एम.ओ.एस.पी.आई द्वारा जारी मानकों जैसे राष्ट्रीय मेटाडाटा संरचना (एन.एम.डी.एस) 2.0, सांख्यिकी गुणवत्ता मूल्यांकन ढांचा (एस.क्यू.ए.एफ) आदि के राज्य सांख्यिकी प्रणाली में अपनाना तथा समीक्षा एवं निगरानी करना तथा एम.ओ.एस.पी.आई तथा राज्य सरकार के सांख्यिकी विभाग के बीच समन्वय के लिए मंच के रूप में कार्य करने जैसे कार्य किए जाएंगे। सांख्यिकी की गुणवत्ता, समयबद्धता एवं तुलनीयता अंतर्गत राज्य एवं जिला स्तर के सांख्यिकीय उत्पादों जैसे जीएसओपी/जीडीडीपी, औद्योगिक उत्पादन सूबकांक, मूल्य सूचकांक आदि की राष्ट्रीय मानकों, समयबद्धता एवं नीति प्रासंगिकता के अनुरूप समीक्षा की जायेगी। साथ ही राज्य स्तर पर सांख्यिकीय कार्यों में अंतराल ओवरलेप या दोहराव की पहचान कर सुधारात्मक उपाय सुझाना तथा आधुनिक एवं आईटी-सक्षम सांख्यिकीय विधियों को अपनाने को प्रोत्साहित करना एवं उनकी निगरानी जैसे कार्यों का संपादन करेगी। डेटा प्रसार, उपयोगकर्ता सहभागिता एवं नीति प्रासंगिकता अंतर्गत राज्य सांख्यिकीय उत्पादों का समय पर प्रसार सुनिश्चित करना तथा एम.ओ.एस.पी.आई के राष्ट्रीय डेटा प्रसार मानकों अग्रिम रिलीज कैलेंडर एवं मेटाडाटा सहित अनुरूप सुगम बनाना, उपयोगकर्ता आवश्यकताओं, राज्य प्राथमिकताओं एवं उभरते क्षेत्रों पर एम.ओ.एस.पी.आई को फीडबेक प्रदान करना तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, कार्यक्रमों की निगरानी एवं मूल्यांकन में सांख्यिकी के उपयोग को बढ़ावा देने जैसे कार्यों का संपादन करेगी। क्षमता निर्माण एवं संस्थागत सुदृढ़ीकरण अंतर्गत एम.ओ.एस.पी.आई के अंतर्गत नेशनल स्टैटिस्टिकल सिस्टम ट्रेनिंग के सहयोग से राज्य एवं जिला सांख्यिकी संवर्ग की क्षमता का विकास, संस्थागत सुदृढ़ीकरण के लिए सुझाव जैसे सांख्यिकीय संवर्ग की स्थापना, डीईएस का उन्नयन, सर्वेक्षण एवं आईटी संसाधनों में सुधार तथा राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं एवं नवाचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने जैसे कार्यों का संपादन करेगी। संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना एमपीएलएडीएस के अंतर्गत भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की निगरानी तथा लंबित मुद्दों का समाधान कार्यों का संपादन भी करेगी।  केंद्रीय क्षेत्र की अवसंरचना परियोजनाऐं अंतर्गत 150 करोड़ रूपये से अधिक लागत वाली प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र की अवसंरचना परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी एवं अंतर विभागीय समन्वय से जुड़े मुद्दों का समाधान तथा राज्य स्तरीय समन्वय समिति द्वारा सांख्यिकी की गुणवत्ता क्षमता निर्माण एवं अन्य गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा एवं समन्वय के लिए वर्ष में कम से कम दो बार बैठक का आयोजन किया जाएगा।  

नर्सिंग कॉलेजों के विद्यार्थियों का इंतजार खत्म, हाईकोर्ट के आदेश से परीक्षा का रास्ता साफ

 जबलपुर  हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले में सीबीआई जांच में उपयुक्त (सूटेबल) पाए गए नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए लंबित परीक्षाओं और परीक्षा परिणामों का रास्ता साफ कर दिया है। मामले में याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा और विशाल बघेल उपस्थित रहे, जबकि राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने पक्ष रखा। हाई कोर्ट ने लाॅ-स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल को शैक्षणिक सत्र 2022-23 के जीएनएम प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम घोषित करने व सत्र 2021-22 के करीब 9,000 विद्यार्थियों के लिए जीएनएम तृतीय वर्ष की परीक्षा आयोजित करने की अनुमति प्रदान की। सुनवाई के दौरान काउंसिल ने लंबित परीक्षाएं व परिणाम जारी करने की अनुमति मांगी, जबकि याचिकाकर्ता ने सीबीआई जांच में अनुपयुक्त पाए गए कॉलेजों के छात्रों को राहत दिए जाने का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने केवल उन संस्थानों को राहत दी जो जांच में मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआई जांच के दायरे में आए 695 कॉलेजों में से 156 सूटेबल कॉलेजों व कमियां दूर कर उपयुक्त घोषित किए गए 89 कॉलेजों के लिए ही परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। शेष संस्थानों से संबंधित परीक्षाओं पर फिलहाल रोक जारी रहेगी।  

5 लाख से कम पासपोर्ट सत्यापन श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त कर रचा कीर्तिमान

भोपाल  नागरिक सेवाओं को सरल, त्वरित और पारदर्शी बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस के निरंतर प्रयासों को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान किए गए पासपोर्ट आवेदनों के पुलिस सत्यापन के प्रदर्शन के आधार पर मध्यप्रदेश पुलिस को 5 लाख से कम पासपोर्ट आवेदन श्रेणी में देश में प्रथम स्थान प्रदान किया गया है। विदेश मामलों के माननीय मंत्री डॉ. एस. जयशंकर द्वारा 19 जून 2026 (शुक्रवार) को "सीबी मुथम्मा हॉल", 'सी' विंग, जवाहरलाल नेहरू भवन, विदेश मंत्रालय, नई दिल्ली" में मध्यप्रदेश पुलिस को वर्ष 2025-26 के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए “Institutional Performance Award for State Police” से सम्मानित किया गया।उपरोक्त कार्यकम में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व उप पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था श्री तरूण नायक एवं सहायक पुलिस महानिरीक्षक विशेष शाखा सुरक्षाश्रीमती रश्मि मिश्रा ने किया। इस उपलब्धि के लिए पुलिस महानिदेशकश्री कैलाश मकवाणा ने प्रदेश के सभी जिलों, विशेष शाखा, पासपोर्ट सत्यापन से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान पूरी मध्यप्रदेश पुलिस के सामूहिक प्रयासों, समर्पण और सेवा भावना का परिणाम है। उन्होंने भविष्य में भी नागरिकों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ प्रदान करने के लिए इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल 3लाख 35हजार 647 पासपोर्ट सत्यापनसमयबद्ध एवं गुणवत्ता पूर्ण तरीके से संपादित किए गए। उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश को इस श्रेणी में प्रथम पुरस्कार (Citation) प्रदान किया गया है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पुलिस ने पिछले वर्ष भी पहली बार यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किया था और अब लगातार दूसरे वर्ष यह उपलब्धि अर्जित कर प्रदेश पुलिस ने अपनी कार्यकुशलता, जवाबदेही और नागरिक सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः सिद्ध किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों, समयबद्ध सत्यापन प्रक्रिया तथा तकनीक आधारित कार्यप्रणाली का परिणाम है।