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बड़े भाई के दही-चूड़ा भोज से नदारद रहे तेजस्वी, तेज प्रताप का आया हल्का-फुल्का बयान

पटना बिहार के पूर्व मंत्री एवं जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया, जिसमें कई नेताओं ने शिरकत की। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी अपने बेटे के आवास पहुंचे और उन्हें आशीर्वाद दिया। हालांकि, तेज प्रताप के छोटे भाई एवं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। पिता के भोज में आने पर तेज प्रताप खुश नजर आए, तो भाई के नहीं आने पर उन्होंने चुटकी ले ली।   पटना में अपने आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान बुधवार को तेज प्रताप यादव ने कहा कि उनके दही-चूड़ा भोज में पिता (लालू) और राज्यपाल आए। दोनों ने आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि बड़े-बुजुर्ग से आशीर्वाद लेते हुए कुछ नया काम करना है। इसके बाद पूरे बिहार में यात्रा निकालेंगे। खबर लिखे जाने तक तेजस्वी यादव अपने बड़े भाई के घर भोज में नहीं पहुंचे। जब तेज प्रताप से इस बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा- तेजस्वी को न्योता भेज दिया, छोटे भाई हैं, थोड़ा लेट से सोकर उठते हैं। घर जाकर तेजस्वी को न्योता दिया था न्योता एक दिन पहले तेज प्रताप अपनी मां राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर गए थे और मां-पिता के साथ ही अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को भी दही-चूड़ा भोज का न्योता दिया था। दरअसल, अनुष्का यादव से रिलेशन की बात सामने आने के बाद पिछले साल तेज प्रताप यादव को लालू ने आरजेडी और अपने परिवार से बेदखल कर दिया था। इसके बाद तेज प्रताप ने जनशक्ति जनता दल नाम से नई पार्टी बनाई और अकेले बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा। हालांकि, वह खुद महुआ सीट से चुनाव हार गए और उनकी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई। अब तेज प्रताप अपनी बिहार समेत अन्य राज्यों में अपनी राजनीतिक जड़ें मजबूत करने में जुटे हैं। इसी क्रम में दही-चूड़ा भोज में उन्होंने एनडीए, महागठबंधन समेत सभी दलों के प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया।  

तीसरी पारी पर ब्रेक! दिग्विजय सिंह राज्यसभा से बाहर—राजनीतिक मोहभंग या कांग्रेस का मास्टरप्लान?

भोपाल 2 बार राज्यसभा के सांसद रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने तीसरी बार अपर हाउस में जाने से मना कर दिया है। उनका मौजूदा कार्यकाल अप्रैल 2026 में खत्म होने वाला है। एमपी में कांग्रेस विधायकों की संख्या को देखें तो वो आसानी से तीसरी बार राज्यसभा जा सकते हैं, लेकिन उन्होंने कहा है- 'मैं अपनी सीट खाली कर रहा हूं।' दिग्विजय सिंह के ऐलान के बाद कई सवाल बन रहे हैं, जिनमें से दो की चर्चा तेजी से हो रही है। पहला- अगर दिग्विजय सिंह नहीं तो कौन जा रहा है राज्यसभा? दूसरा- क्या उनका राज्यसभा से मोहभंग हो गया है या फिर कांग्रेस में कोई सीक्रेट प्लान बन रहा है?   उनकी जगह कौन जा रहा है राज्यसभा? उनकी जगह या फिर कौन राज्यसभा जा रहा है, इसका जवाब दिग्विजय सिंह ने गोल-मोल करते हुए दिया है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान, जब उनसे पूछा गया- 'मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने आपको पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि राज्यसभा सीट से अनुसूचित जाति के किसी सदस्य को भेजा जाना चाहिए'- इस पर आपका क्या कहना है? इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा- “ये मेरे हाथ में नहीं है।” कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति की तरफ इशारा अब दूसरा सवाल उठ रहा है क्या दिग्विजय सिंह का मोहभंग हो गया है या कांग्रेस और राहुल गांधी कोई सीक्रेट प्लान पर काम कर रहे हैं? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिग्विजय सिंह द्वारा अपना नाम पीछे खींच लेना 'व्यक्तिगत निर्णय नहीं' है। ये 'कांग्रेस आलाकमान की सोची समझी रणनीति' है बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस केवल सदन में सरकार को घेरने की बजाय धरातल पर अपनी पकड़ को मजबूत बनाने की कोशिश में जुटी है। इसी क्रम में युवाओं को आगे लाने की तैयारी हो रही है। वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी दी जा रही हैं। विधानसभा चुनाव की चल रही है तैयारी? साल 2017-18 में दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में नर्मदा परिक्रमा का आयोजन किया गया था। ये परिक्रमा करीब 3300 किलोमीटर लंबी थी। इसे कांग्रेस के लिए मजबूती के तौर पर देखा गया था। जैसे राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के द्वारा कार्यकर्ताओं और लोगों पहुंच बनाई थी, ठीक ऐसा ही प्रभाव नर्मदा परिक्रमा का देखने को मिला था। इसका प्रभाव 2018 के एमपी विधानसभा चुनाव में देखने को मिला था। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार फिर दिग्विजय सिंह से कोई बड़ा जनसंपर्क अभियान कराया जा सकता है। ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में संगठन और नए नेताओं को मजबूत दिशा दे सके। दिग्विजय सिंह की हार-जीत का सफर आपको बताते चलें कि दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा नाम हैं। वो 1993 से 2003 तक लगातार 2 बार एमपी के सीएम रहे हैं। हालांकि 2003 में कांग्रेस की सत्ता गई तो उनकी राजनीति में विराम सा लग गया था। लेकिन एक दशक की शांति के बाद 2013 में उनकी फिर वापसी हुई और 2014 से राज्यसभा के सांसद हैं। इस बीच 2019 और 2024 में लोकसभा का चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।  

लालू से मिलने और तेजस्वी के नहीं पहुंचने पर पर गदगद दिखे तेज प्रताप

पटना. मकर संक्रांति के अवसर पर जनशक्ति जनता दल के मुखिया और लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप की दही-चूड़ा पार्टी से बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस पार्टी में न सिर्फ सभी पार्टियों के नेता शिरकत कर रहे हैं, बल्कि लालू परिवार भी एक होता दिखाई दे रहा है। खास बात ये थी कि इस भोज में राजद के प्रमुख लालू यादव शामिल हुए और उन्होंने तेज प्रताप को आशीर्वाद दिया, तो तेज प्रताप ने भी अपनी भावना व्यक्त की। तेज प्रताप ने कहा कि अगर तेजू भैया की दावत सुपर डुपर हिट नहीं होगी, तो किसकी होगी। दही-चूड़ा की शानदार दावत का आयोजन किया गया था। हमारे माता-पिता हमारे लिए भगवान हैं, इसलिए मुझे उनका आशीर्वाद मिलता रहेगा। सब लोग आएंगे। वो थोड़ा लेट सोकर उठते हैं: तेज प्रताप भाई तेजस्वी के अभी तक नहीं पहुंचने पर तेज प्रताप ने कहा कि हमने निमंत्रण पत्र दे दिया है, हमारे छोटे भाई हैं वो थोड़ा लेट सोकर उठते हैं। वह भी आएंगे। तेज प्रताप के इस बयान से यह भी साफ हो गया है कि इस भोज में नेता प्रतिपक्ष और तेज प्रताप के छोटे भाई तेजस्वी यादव भी शिरकत करेंगे। इसको लेकर तेज प्रताप के बड़े मामा प्रभुनाथ यादव ने भी बयान दिया है। प्रभुनाथ यादव ने कहा, "मैं अपने भांजे को आशीर्वाद देने दही-चूड़ा की दावत में आया हूं ताकि वह तरक्की करे और लोगों की सेवा करे। मैं अपने बड़े भांजे को आशीर्वाद देने आया हूं। पूरा परिवार इकट्ठा होगा।"

अयोध्या के साधु-संत भड़के राहुल गांधी पर, कहा— कालनेमि जैसा आचरण

अयोध्या लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के राम मंदिर में दर्शन को लेकर चल रही अटकलों पर अयोध्या के संतों और महंतों ने प्रतिक्रिया दी। हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत राजू दास ने कहा कि जो व्यक्ति हिंदुओं को हिंसक कहे, जो यह कहे कि युवा मंदिर लड़कियों को छेड़ने के लिए जाते हैं, जिनकी पार्टी राम मंदिर के विरोध में 17 वकील खड़े कर दे, जो हमेशा सनातन की संस्कृति की अवहेलना करे, लेकिन राम मंदिर का विरोध करने वाली पार्टी के नेता आते हैं तो स्वागत है। कालनेमि से सचेत होने की जरूरत है। जब ये सत्ता में होते हैं तो सनातन पर प्रहार करते हैं। हनुमानगढ़ी के देवेशाचार्य महाराज ने कहा कि देखिए, सूचना मिली है कि वे आ सकते हैं। स्वागत योग्य है। देर ही सही, राम की शरण में आ रहे हैं, कल्याण होगा। रामलला का दर्शन कर रहे हैं तो उनकी पार्टी का भी कल्याण होगा। किसी भी राजनीतिक दल को राम के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। महामंडलेश्वर विष्णु दास ने कहा कि राहुल गांधी तो भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे। सद्बुद्धि कहां से आ गई कि वे राम मंदिर आ रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राम पर सवाल उठाने वाले क्यों आ रहे हैं। यह राहुल गांधी की मानसिकता को दिखाता है कि वे राम विरोधी हैं। कभी कहते हैं हिंदू हिंसा फैलाता है, राम के वजूद पर सवाल उठाते हैं। वे राजनीति से प्रेरित होकर आ रहे हैं। सीताराम दास महाराज ने कहा कि राहुल गांधी के डीएनए में खोट है। समय-समय पर गिरगिट की तरह रूप बदलने वाले शुद्ध कालनेमी हैं। यूपी चुनाव को देखते हुए राम मंदिर आ रहे हैं। मैं पूछता हूं कि वे राम प्राण प्रतिष्ठा में क्यों नहीं आए। वे राम सेतु के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे। भगवान राम का दर्शन करने से उनका कल्याण नहीं होगा। इनकी पार्टी के लोग साधु-संतों पर अभद्र टिप्पणी करते हैं। इन्हें सनातन कभी स्वीकार नहीं करेगा। ये मजार पर चादर चढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि जो राम को काल्पनिक कहते थे, जो राम सेतु को काल्पनिक मानते हैं, अब राम की शरण में जाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है?

गोपालगंज में जल-जीवन-हरियाली अभियान में 230 पुराने तालाबों का होगा जीर्णोद्धार

गोपालगंज. जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत इस साल 230 तालाबों का जीर्णाेद्धार कराया जाएगा। जिले में पूर्व में चिह्नित किए गए 887 तालाबों में से पहले चरण में 198 तालाबों की दशा को सुधारने का कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। दूसरे चरण में इन तालाबों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के बाद उनका जीर्णोद्धार कराया जाएगा। इस संबंध में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई है। लगातार गिरते जलस्तर में सुधार की पहल के बाद जिले में जल जीवन हरियाली योजना के तहत जिले में 3100 तालाबों को चिह्नित कर उनका जीर्णोद्धार करने का निर्णय लिया गया था। पहले चरण में एक एकड़ से अधिक 887 तालाबों को चिह्नित कर उनका जीर्णोद्धार करने का काम बीते साल में शुरू किया गया। अब 198 तालाबों के जीर्णोद्धार का काम अंतिम दौर में पहुंच गया है। अब इन तालाबों में पानी भी मौजूद रहने लगा है। इस साल शेष बचे 693 तालाबों में से 230 तालाबों के जीर्णोद्धार करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। सभी पंचायत में एक-एक मॉडल तालाब निर्माण की योजना मनरेगा के तहत जिले की सभी 230 पंचायतों में एक-एक मॉडल तालाब बनाने की योजना पर भी काम प्रारंभ किया गया है। इन तालाबों में साल के 12 माह तक लगातार पानी का स्तर सामान्य बनाए रखने के लिए विद्युत चालित पंप लगाए जाने की योजना है, ताकि तालाबों में कभी भी पानी की कमी जैसी समस्या पैदा नहीं हो। इस योजना के तहत 13 पंचायत में तालाब निर्माण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। पानी भरने के लिए लगेगा विद्युत चालित पंप वैसे तालाब जिनका जीर्णोद्धार किया जा रहा है, वहां गर्मी के दिन भी पानी की कमी नहीं होगी। इसके तहत संबंधित तालाब के आसपास मोटर चालित पंप लगाए जाएंगे। पंप के सहारे ऐसे तालाब में गर्मी के दिन में पानी भरने की व्यवस्था होगी। ताकि इन तालाबों में सालों भर पानी भरा रह सके। भव्य दिखेंगे चिह्नित किए गए पुराने तालाब पुराने तालाबों के जीर्णोद्धार के दौरान इस बात का भी ख्याल रखने का निर्देश दिया गया है कि तालाब की भव्यता कहीं से भी कम नहीं दिखे। इसके लिए तालाब के चारों ओर पौधों को लगाने की भी योजना है, ताकि पेड़ की छाया के साथ पर्यावरण को भी स्वच्छ रखा जा सके।

सहरसा में 52 करोड़ की लागत से क्वालिटी और टाइम लिमिट में बनाएं सड़क: सांसद

सहरसा. खगड़िया लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजेश वर्मा ने मंगलवार को सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने सबसे पहले निर्माणाधीन एसएच-95 और 412 करोड़ की लागत से बन रहे डेंगराही घाट पुल का निरीक्षण किया। इसके बाद, महिषी प्रखंड के झाड़ा पंचायत में 52 करोड़ की लागत से बनने वाली बहोरबा से बेलडाबर सड़क का जायजा लिया। सांसद ने खगड़िया जिले के प्रसिद्ध मां कात्यायनी मंदिर में पूजा अर्चना की और फिर एसएच-95 का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यस्थल पर मौजूद इंजिनियरों से कार्य की प्रगति की जानकारी ली। सांसद ने कहा कि इस सड़क के बन जाने से खगड़िया और सहरसा का सीधा जुड़ाव होगा। निरीक्षण के दौरान साम्हरखुर्द पंचायत के मुखिया दारा सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सांसद से एसएच-95 को साम्हरखुर्द से जोड़ने की मांग की। सांसद ने इस पर अपने निधि से सड़क देने का आश्वासन दिया। इसके बाद, सांसद का काफिला डेंगराही घाट पहुंचा, जहां पुल निर्माण कर रहे कंपनी के कर्मियों से बातचीत की। ग्रामीणों ने पुल की गुणवत्ता और नक्शे पर आपत्ति जताई, जिस पर सांसद ने पटना में इंजिनियरों से चर्चा करने का आश्वासन दिया। झाड़ा पंचायत में ग्रामीणों ने बहुरबा-बेलडाबर सड़क का मुद्दा उठाया, जिस पर सांसद ने कहा कि यह सड़क एक वर्ष में पूरी कर ली जाएगी।

राजस्थान में 12 लाख लखपति दीदी के बाद अब युवाओं को बनाएगी आर्थिक संपन्न

जयपुर. राजस्थान की सियासत और अर्थव्यवस्था के बीच मंगलवार को एक ऐसी तस्वीर उभरी, जिसने आने वाले वर्षों की दिशा का संकेत दे दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई एक बैठक में जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बोलना शुरू किया, तो यह सिर्फ आंकड़ों की प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि एक बड़े सामाजिक बदलाव की झलक थी। मुख्यमंत्री ने कहा- प्रदेश में 19 लाख से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर 12 लाख से ज्यादा महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है। अब ये लखपति दीदी मिलेनियर दीदी बनने की ओर अग्रसर हैं। यह सुनते ही साफ हो गया कि सरकार की नजर अब केवल योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि महिला आर्थिक सशक्तिकरण को अगले स्तर तक ले जाने की है। अपराध में कमी, भरोसे में बढ़ोतरी मुख्यमंत्री ने चर्चा के दौरान एक और अहम संकेत दिया। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार के अंतिम दो वर्षों (फरवरी 2022 से दिसंबर 2023) की तुलना में मौजूदा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में अपराधों में करीब 12 प्रतिशत तक की कमी आई है। राजस्थान जैसे बड़े और विविधतापूर्ण राज्य में यह आंकड़ा केवल प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था में जनता के बढ़ते भरोसे का भी संकेत माना जा रहा है। बजट 2026-27 पर टिकी निगाहें इस पूरे कार्यक्रम का असली मकसद था— बजट पूर्व चर्चा। मुख्यमंत्री ने महिलाओं, युवाओं, उद्योग जगत, व्यापारियों, सेवा क्षेत्र, कर सलाहकारों और युवा प्रोफेशनल्स से सीधे संवाद किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि महिला प्रतिनिधियों और विभिन्न वर्गों से मिले सुझावों को बजट 2026-27 में यथासंभव शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस बयान ने यह साफ कर दिया कि आने वाला बजट केवल सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ का प्रतिबिंब बनने की कोशिश करेगा। उद्योग और निवेश: राजस्थान की नई पहचान उद्योग, सेवा क्षेत्र और युवा प्रोफेशनल्स के साथ हुई चर्चा में मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों की समृद्धि से ही विकास को नई गति मिलती है। उन्होंने एमएसएमई, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और तकनीकी सेवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में उद्यमशीलता ने राजस्थान के आर्थिक परिदृश्य को तेजी से बदला है। मुख्यमंत्री के शब्दों में— “आज राजस्थान निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।” यह बयान उस समय आया जब राज्य सरकार लगातार निवेश प्रस्तावों और औद्योगिक विस्तार को लेकर सक्रिय दिखाई दे रही है। वागड़ क्षेत्र पर विशेष फोकस कार्यक्रम का एक अहम पड़ाव तब आया जब मुख्यमंत्री ने डूंगरपुर जिले से आए युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और राजस्थान का गौरव भी। वागड़ क्षेत्र, जो आदिवासी बहुल माना जाता है, वहां सरकार लगातार सशक्तिकरण के फैसले ले रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वागड़ क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं, जो आने वाले समय में पूरे दक्षिण राजस्थान की तस्वीर बदल सकते हैं। बेणेश्वर धाम का सौंदर्यीकरण कार्यक्रम के दौरान बेणेश्वर धाम के सौंदर्यीकरण को लेकर एक प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। इसे धार्मिक पर्यटन और स्थानीय विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। इस मौके पर सागवाड़ा विधायक शंकरलाल डेचा भी मौजूद रहे। सत्ता, समाज और संकेत इस बैठक में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, प्रमुख सचिव वित्त वैभव गालरिया, प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास भवानी सिंह देथा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने इस चर्चा को और खास बना दिया। राजस्थान में लखपति दीदी से मिलेनियर दीदी तक का सफर, अपराध में कमी, निवेशकों का भरोसा और आदिवासी क्षेत्रों पर फोकस— ये सभी संकेत एक ही ओर इशारा करते हैं। प्रदेश अब सिर्फ योजनाओं की बात नहीं कर रहा, बल्कि भविष्य की तस्वीर गढ़ने की कोशिश में जुटा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का निर्देश: संकल्प से समाधान अभियान से हर पात्र हितग्राही को मिले लाभ

प्रत्येक पात्र हितग्राही को संकल्प से समाधान अभियान का मिले लाभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने प्रदेश में संचालित संकल्प से समाधान अभियान के संबंध में ली बैठक भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संकल्प से समाधान अभियान जनसामान्य को कल्याणकारी हितग्राही मूलक योजनाओं का सुगमता से लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आरंभ किया गया है। अभियान के अंतर्गत समय-सीमा में पारदर्शी तरीके से गतिविधियां सुनिश्चित की जाएं। किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बरदार्शत नहीं किया जाएगा, दोषियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में संकल्प से समाधान अभियान की बुधवार को समीक्षा के लिए आयोजित संभागायुक्तों की बैठक में दिए। मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई सहित संभागायुक्त बैठक में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियान के अंतर्गत योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जाए। हमारा प्रयास है कि सभी हितग्राहियों को योजनाओं की आवश्यक जानकारी हो। संभागीय अधिकारी जिला, विकासखण्ड और ग्राम स्तर तक भ्रमण कर अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य परीक्षण, स्वच्छता तथा शिक्षा के लिए प्रेरित करने पर केंद्रित गतिविधियां भी संचालित की जाएं। संकल्प से समाधान अभियान के क्रियान्वयन में सामाजिक और स्वयं सेवी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाए।  

भजनलाल सरकार का बड़ा कदम, 3 बच्चों के माता-पिता को निकाय-पंचायत चुनाव में उम्मीदवार बनने का मिलेगा मौका

जयपुर राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने के संकेत मिल रहे हैं. भजनलाल सरकार दो संतान बाध्यता वाले पुराने कानून में संशोधन की दिशा में आगे बढ़ रही है. सूत्रों के मुताबिक करीब 30 साल पुराने इस प्रावधान में बदलाव के लिए आगामी विधानसभा बजट सत्र में विधेयक पेश किया जा सकता है. संशोधन के बाद तीन संतान होने पर भी पंचायत और निकाय चुनाव लड़ने की पात्रता मिल सकती है. जानकारी के अनुसार पहले 1994 के पंचायती राज अधिनियम और 2009 के नगरपालिका अधिनियम में अध्यादेश के जरिए संशोधन की योजना थी, लेकिन वह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी. अब सरकार सीधे विधानसभा में विधेयक लाकर बदलाव करने की तैयारी में है. पंचायती राज विभाग और नगरीय विकास विभाग अपने-अपने स्तर पर ड्राफ्ट तैयार कर विधि विभाग को भेज चुके हैं, जिन्हें जल्द अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है. क्या है वर्तमान प्रावधान राज्य में 27 नवंबर 1995 से लागू कानून के तहत तीन या उससे अधिक संतान वाले माता-पिता पंचायत और निकाय चुनावों में प्रत्याशी नहीं बन सकते. इस नियम के दायरे में पंच, सरपंच, उपसरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य, प्रधान, प्रमुख, पार्षद, सभापति और महापौर जैसे पद शामिल हैं. नियम का उल्लंघन कर गलत जानकारी देकर चुनाव जीतने पर प्रत्याशी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और जेल तक का प्रावधान भी है. यह शर्त राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 24 और पंचायती राज अधिनियम में दर्ज है. पहले देश के कई राज्यों में इस तरह की दो संतान नीति लागू थी, लेकिन समय के साथ अधिकतर राज्यों ने इसे खत्म कर दिया है. राजस्थान में हालांकि यह नियम अब तक पंचायत और निकाय चुनावों के लिए जारी है. सरकारी कर्मचारियों के मामले में राज्य सरकार पहले ही दो संतान के नियमों में शिथिलता दे चुकी है. पहले जहां दो से अधिक संतान होने पर वेतनवृद्धि और पदोन्नति पर रोक लगती थी, वहां अब कुछ राहत दी जा चुकी है. लेकिन जनप्रतिनिधियों के लिए पंचायत-निकाय चुनाव लड़ने पर लगी पाबंदी अभी भी लागू है, जिसे हटाने के लिए अब सरकार कानूनी बदलाव की तैयारी कर रही है.

RPSC में डिप्टी कमांडेंट भर्ती में बिना वैकेंसी के करवाया एग्जाम

जयपुर. RPSC की ओर से 11 जनवरी 206 को डिप्टी कमांडेंट (गृह रक्षा विभाग) की भर्ती परीक्षा आयोजित हुई थी। इसमें 17 सेंटर बनाए गए थे। जहां 255 कैंडिडेट्स ही शामिल हुए थे। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से डिप्टी कमांडेंट (गृह रक्षा विभाग) की भर्ती पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। आयोग ने 4 पदों के लिए भर्ती निकाली थी, जिसमें ओबीसी और एसटी के 1-1 और एससी के दो पद थे। इस भर्ती के लिए आर्मी का एक्स कैप्टन होना जरूरी है। एक्स सर्विस मैन वर्ग के जिन 34 लोगों ने आवेदन किए, वे भी एक्स आर्मी कैप्टन हैं या नहीं, एग्जाम भी देने आए या नहीं, इस पर फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। वहीं, करीब 4 हजार से ज्यादा ऐसे अभ्यर्थी थे, जिन्होंने न तो फॉर्म विड्रॉ किया और न ही एग्जाम देने गए। इस कारण सिर्फ 255 लोगों ने एग्जाम दिया। जबकि आवेदन करने वालों में एक्स आर्मी मैन 34 ही हैं। अब यदि इन 34 लोगों ने आरपीएससी की क्वालिफिकेशन पूरी नहीं की तो भर्ती के सभी पद खाली रह जाएंगे। खास बात यह भी रही कि जिस वर्ग के लिए भर्ती में पद ही नहीं थे, उनमें भी सैकड़ों लोगों ने इस भर्ती के लिए फॉर्म भर दिए और कई लोगों ने एग्जाम भी दिए। बता दें, आयोग की चेतावनी के बाद 6 हजार लोगों ने आवेदन विड्रॉ कर लिए, उसके बाद भी ये स्थिति है। भर्ती और एग्जाम के यह रोचक तथ्य EWS, जनरल और MBC में कोई वैकेंसी ही नहीं थी। इसके बावजूद कैंडिडेट्स ने आवेदन किए। ST का एक पद है और 791 ने आवेदन किए, जबकि एक्स सर्विस मेन केवल एक ही है। SC के दो पद है, लेकिन आवेदन एक हजार लोगों ने किए, जबकि एक्स सर्विस मेन 3 ही है। भर्ती निकालने पर 10 हजार से ज्यादा आवेदन हुए, चेतावनी के बाद 6 हजार विड्रॉ कर लिए। RPSC ने 4 हजार 221 कैंडिडेट्स के एग्जाम की व्यवस्था की, लेकिन एग्जाम में 255 ही आए। एग्जाम एक सेंटर पर ही हो सकता था, लेकिन फॉर्म ज्यादा भरने के कारण 17 सेंटर बनाए गए। एग्जाम एक लाख के खर्चे में हो सकता था, उसके लिए आयोग को 20 लाख खर्चा करना पड़ा। मार्च 2025 में निकाली वैकेंसी – RPSC ने 18 मार्च 2025 को गृह रक्षा विभाग में डिप्टी कमाडेंट के 4 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। इसके लिए 24 मार्च से 22 अप्रैल 2025 तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। वैकेंसी में आवेदन करने के लिए केवल सेना के कैप्टन स्तर के सेवानिवृत्त/त्यागपत्र देने वाले भूतपूर्व अधिकारी अथवा इमरजेंसी और शॉर्ट सर्विस कमीशन से मुक्त/विमुक्त कैंडिडेट्स ही योग्य थे। बिना योग्यता वालों ने बड़ी संख्या में भरे फॉर्म इस भर्ती में बिना योग्यता वाले कई लोगों ने भी आवेदन कर दिए। ऐसे में 10 हजार से ज्यादा लोगों ने आवेदन आए, जिनकी जांच में कई अयोग्य पाए गए। इन्हें फॉर्म वापस लेने का मौका दिया गया। आयोग ने फॉर्म विड्रॉ नहीं करने पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 217 के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी दी। विज्ञापन के मुताबिक, योग्यताधारी अभ्यर्थियों को भी अपना सेवानिवृत्ति प्रमाण-पत्र ऑनलाइन आवेदन पत्र के साथ अपलोड करने के निर्देश दिए। इसके बाद करीब 6 हजार कैंडिडेट्स ने आवेदन फॉर्म विड्रो कर लिए।