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कांकेर के कलेक्टर बोले-आधार बॉयोमेट्रिक उपस्थिति की राज्य स्तर से हो रही मॉनिटरिंग

उत्तर बस्तर कांकेर. कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने आज समय-सीमा की साप्ताहिक बैठक लेकर विभिन्न विषयों एवं योजनाआंे के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए अधिकारियांे को आवश्यक निर्देश दिए। 01 जनवरी 2026 से सभी कार्यालयों में लागू आधार बेस्ड बॉयोमेट्रिक अटेंडेंस के संबंध में उन्होंने निर्देशित किया कि सभी अधिकारी-कर्मचारी निर्धारित समय में उपस्थित होकर अपनी ऑनलाइन अटेंडेंस अनिवार्य रूप से दर्ज करें। इसकी मॉनिटरिंग राज्य स्तर से की जा रही है तथा इसमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है, अतः इसे गंभीरता से लेते हुए शासन के निर्देशों का अनिवार्यतः पालन करें। इसके अलावा कलेक्टर ने ई-ऑफिस, धान खरीदी, लंबित निर्माण कार्य, एसआईआर, बस्तर पण्डुम के आयोजन से संबंधित एजेण्डों पर चर्चा कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आज सुबह 10.30 से आयोजित बैठक में कलेक्टर ने कहा कि एसआईआर के तहत मतदाता सूची अद्यतीकरण के संबंध में अंतागढ़ विकासखण्ड में संबंधितों को नोटिस डिलीवर नहीं हो पा रहा है। उन्होंने एसडीएम अंतागढ़ को निर्देशित किया चंूकि इसमंे समय-सीमा निर्धारित है, इसलिए आगे की कार्यवाही पूर्ण करने के लिए इसमें तेजी लाएं, जिससे दावा-आपत्तियों का निराकरण निर्वाचन आयोग द्वारा तय समय पर किया जा सके। इसी तरह ई-ऑफिस के माध्यम से सभी कार्यालयों को क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए। विशेष रूप से ब्लॉक स्तर पर ई-ऑफिस से कार्य नहीं किए जा रहे हैं, सभी जनपद सीईओ इसे गंभीरता से लें। राज्य शासन के निर्देशानुसार आगामी दिनों में बस्तर संभाग में आयोजित होने वाले बस्तर पण्डुम की तैयारियों के संबंध में कलेक्टर ने समाज प्रमुखों की बैठक लेकर पारंपरिक परिधान, संस्कृति, वेशभूषा तथा प्राचीन सामाजिक गतिविधियों की जानकारी लेकर प्रत्येक विधा पर विकासखण्डवार टीम गठित करने के निर्देश सभी अनुविभागीय अधिकारियों को दिए। इसके अलावा कलेक्टर ने जिले में धान खरीदी की वर्तमान स्थिति की जानकारी खाद्य अधिकारी से ली। बैठक में कलेक्टर ने विभिन्न योजनाओं के तहत विभागों में निष्क्रिय खातों को बंद कर एक खाते में राशि समायोजित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। इसी तरह पुल-पुलिया, सड़क, भवन आदि निर्माण कार्यों के लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए जल्द से जल्द गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। इसके अतिरिक्त उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, विशेष केन्द्रीय सहायता मद, राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम, पीएम किसान सम्मान, आयुष्मान वय वंदना सहित विभिन्न विभागों में समय-सीमा के लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए निराकरण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। इस अवसर पर डीएफओ श्री हेमचंद पहारे, जिला पंचायत सीईओ श्री हरेश मंडावी, अपर कलेक्टर श्री जितेन्द्र कुर्रे एवं श्री ए.एस. पैकरा, श्री अरूण वर्मा सहित सभी अनुविभागीय अधिकारी और विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे। गणतंत्र दिवस की तैयारियों को लेकर की समीक्षा समय-सीमा बैठक के दौरान कलेक्टर क्षीरसागर ने आगामी 26 जनवरी को आयोजित होने वाले राष्ट्रीय पर्व पर गणतंत्र दिवस की तैयारियों को लेकर अधिकारियों को सौंपे गए दायित्वों की जानकारी दी। उन्हांेने सभी अधिकारियों को सफलतापूर्वक आयोजन के लिए दायित्वों का निर्वहन उच्च अधिकारियों सेे समन्वय स्थापित कर बेहतर ढंग से करने के निर्देश दिए। अपर कलेक्टर श्री कुर्रे ने विभागवार सौंपे गए दायित्वों के बारे में बताया।

छत्तीसगढ़ पुलिस में बड़ा फेरबदल, 17 सहायक उप निरीक्षकों को मिली SI पदोन्नति

रायपुर छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में सोमवार को बड़े पैमाने पर पदोन्नति की गई है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, विभाग में लंबे समय से कार्यरत 17 सहायक उप निरीक्षकों (ASI) को उप निरीक्षक (SI) के पद पर पदोन्नत किया गया है। यह निर्णय पुलिस बल की कार्यक्षमता बढ़ाने और अनुभवी अधिकारियों को उच्च पदों पर जिम्मेदारी सौंपने के उद्देश्य से लिया गया है। वरिष्ठता और विभागीय मापदंडों के आधार पर चयन पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, यह पदोन्नति अधिकारियों की वरिष्ठता, उनके सेवा अनुभव और कड़े विभागीय मापदंडों के आधार पर दी गई है। जारी की गई सूची में चयनित सभी 17 अधिकारियों के नाम, उनके वर्तमान पदस्थापन और पदोन्नति की प्रभावी तारीख का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इस घोषणा के बाद विभाग में हर्ष का माहौल है।   पदोन्नत अधिकारियों की सूची पदोन्नति पाने वाले प्रमुख अधिकारियों में बालोद से पुनउ राम साहू, जीआरपी रायपुर से गिरिजाशंकर मिश्रा, रायपुर से अतुलेश राय, और नारायणपुर से परसूराम ठाकुर शामिल हैं। इसके अलावा सारंगढ़-बिलाईगढ़ से पुरेंद्र मल्होत्रा और रायपुर जिले से बड़ी संख्या में अधिकारियों को पदोन्नति मिली है, जिनमें हरीशचंद्र द्विवेदी, राजेंद्र प्रसाद गौतम, दीपक कुमार साहू, झाम सिंह राजपूत, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, राधेश्याम सोनबेर (साहू), चंद्रिका प्रसाद साहू और देवकुमार वर्मा के नाम शामिल हैं। वहीं बलौदाबाजार जिले से सुरेंद्र सिंह ठाकुर और विजय सिंह कोसरिया को भी सब इंस्पेक्टर बनाया गया है।   नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन सब इंस्पेक्टर के रूप में पदोन्नत इन अधिकारियों को अब पुलिसिंग के क्षेत्र में अधिक चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभानी होंगी। उनकी नई जिम्मेदारियों में प्रमुख रूप से थानों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, संगीन अपराधों का नियंत्रण और उनकी गहराई से विवेचना (Investigation) करना शामिल रहेगा। इसके साथ ही, वे अब अधीनस्थ स्टाफ का नेतृत्व करेंगे और प्रशासनिक कार्यों के बेहतर समन्वय में अपनी भूमिका निभाएंगे।

रायपुर में 8 को जनदर्शन में मुख्यमंत्री साय करेंगे लोगों से संवाद

रायपुर. मुख्यमंत्री निवास कार्यालय रायपुर में 8 जनवरी गुरुवार को जनदर्शन का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इस अवसर पर प्रदेशवासियों से सीधे संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं का निराकरण करेंगे। मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनदर्शन में प्राप्त प्रत्येक आवेदन का त्वरित और संवेदनशील निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को समयबद्ध समाधान मिल सके। महासमुंद : अस्पृश्यता निवारणार्थ सद्भावना शिविर 30 जनवरी को ग्राम घोड़ारी में होगा आयोजित महासमुंद. अनुसूचित जातियों के हित में शासन द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आदिवासी विकास विभाग द्वारा अस्पृश्यता निवारणार्थ एवं प्रचार-प्रसार सद्भावना शिविर का आयोजन किया जा रहा है। सहायक आयुक्त आदिवासी विकास शिल्पा साय ने बताया कि यह शिविर 30 जनवरी 2026 को महासमुंद विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम घोड़ारी में प्रातः 10 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित होगा। शिविर में जिले के विभिन्न विभागों द्वारा सहभागिता करते हुए अपने-अपने विभागीय योजनाओं, सुविधाओं एवं लाभों की विस्तृत जानकारी आम नागरिकों को प्रदान की जाएगी। शिविर के दौरान अनुसूचित जाति वर्ग के लिए संचालित छात्रवृत्ति योजनाएं, आवास, स्वरोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। साथ ही पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों एवं आवेदन संबंधी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही शिविर में स्कूली एवं महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिए निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। जिसमें प्रथम पुरस्कार राशि 500 रुपए, द्वितीय 300 रुपए एवं तृतीय पुरस्कार राशि 200 रुपए निर्धारित है। उन्होंने क्षेत्र के नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक संख्या में शिविर में उपस्थित होकर शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें एवं इसका लाभ उठाएं।

रामगढ़ में सांसद ने NHAI अधिकारियों को ‘एक झांप मारेंगे’ की दी धमकी

रामगढ़. रामगढ़ के कुल्ही चौक के पास उस वक्त माहौल गरमा गया, जब सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी एनएचएआई के अधिकारियों पर भड़क गए। पूछा-ये किसका रोड है, आपको पता भी है? बिना रोड ट्रांसफर हुए सड़क को कैसे ब्लॉक किया जा रहा है? एनएचएआई के अधिकारियों ने जवाब नहीं दिया। तब गुस्साए सांसद बोले- अक्कल है? एक झांप मारेंगे न… किसका रोड है, ये भी नहीं पता। सांसद ने कहा कि पीडब्ल्यूडी का कौन है। आपको रोड ट्रांसफर नहीं हुआ है, तो कैसे काम कर रहे हैं। जबतक फार्मेलिटी पूरा नहीं हो जाता कैसे काम कर रहे हैं। आप लोग गुंडा बन रहे है क्या? गुंडा गर्दी मत करो? आपलोग प्रशासन के लोग हैं। ऐसा मत करिए। रोड ट्रांसफर नहीं हुआ तो कैसे हो रहा काम एनएचआईए के अधिकारियों ने कहा कि इसमें गुंडागर्दी की क्या बात है। सांसद ने कहा कि आप जवाब क्यों नहीं दे रहे है। आप कैसे काम करने के लिए आ गए। रोड ट्रांसफर नहीं हुआ तो कैसे काम हो रहा। एप्रोच रोड जो पीडब्ल्यूडी का है, उसका पेमेंट भी ले लिए हो। लूटने नहीं देंगे। बिना पीडब्ल्यूडी के पूछे आप रोड कैसे काट दिए। बताया गया कि भारत माला परियोजना के तहत इसी सड़क से निर्माण कार्य चल रहा है। सड़क की घेराबंदी को लेकर लोगों ने शिकायत की थी, जिसके बाद सांसद पहुंचे थे। सांसद की सफाई: गड़बड़ियां दिखीं, इसलिए सख्त बोला सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने बाद में कहा कि एनएचएआई के अधिकारी गड़बड़ी कर रहे हैं। बिना पीडब्ल्यूडी के अनुमति के काम हो रहा है। कई जगहों पर खामियां मिली हैं। एप्रोच रोड को ब्लॉक कर दिया गया है। पहाड़ काट कर पत्थर का उपयोग कर लिया जा रहा है। जब अधिकारियों से गड़बड़ियों का जवाब मांगा गया, तो वे जवाब नहीं दे पाए। इसलिए उन्होंने ऐसा कहा।

सरगुजा ओलंपिक में आदिवासी अंचल की खेल प्रतिभाओं को 12 खेल प्रतियोगिताओं में मिलेगा नया मंच

रायपुर. सरगुजा संभाग अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है, यह क्षेत्र खेल प्रतिभाओं से परिपूर्ण माना जाता है। यहां के युवाओं में खेलों के प्रति स्वाभाविक रुचि और अपार क्षमता को पहचानकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सरगुजा ओलंपिक 2025-26 का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप तथा खेल मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री (खेल एवं युवा कल्याण विभाग) अरुण साव के मार्गदर्शन में आयोजित यह प्रतियोगिता आदिवासी अंचल के युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगी। सरगुजा ओलंपिक 2025-26 निश्चित रूप से क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। इस आयोजन का उद्देश्य शासन और जनता के बीच मजबूत एवं प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करते हुए युवाओं की रचनात्मक और खेल प्रतिभा को निखारना है। सरगुजा ओलंपिक में कुल 12 खेलों की प्रतियोगिताएं विकासखण्ड, जिला एवं संभाग स्तर पर आयोजित की जाएंगी। आयोजन की प्रमुख तिथियां – सरगुजा ओलंपिक में खेल के 12 विधाओं में पंजीयन अवधिः 28 दिसम्बर 2025 से 12 जनवरी 2026 तक किया जा सकता है l विकासखण्ड स्तरीय आयोजनः 15 जनवरी 2026 से 18 जनवरी 2026 जिला स्तरीय आयोजनः 22 जनवरी 2026 से 25 जनवरी 2026 संभाग स्तरीय आयोजनः 28 जनवरी से 31 जनवरी 2026 (उक्त तिथियां खेल एवं युवा कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ की अनुमति के पश्चात परिवर्तनीय हो सकती हैं।) सरगुजा ओलंपिक हेतु ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पंजीयन की सुविधा प्रदान की गई है। ऑनलाइन पंजीयन लिंक https://rymc.cg.gov.in/sargujaOlympic2025/ के माध्यम से तथा ऑफलाइन पंजीयन कार्यालयों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। कलेक्टरों ने विकासखण्ड, जिला एवं प्रत्येक गांव से अधिक से अधिक युवाओं का पंजीयन सुनिश्चित करने, समुचित आयोजन संचालन तथा जिला स्तर पर कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। सरगुजा ओलंपिक में कुल 12 खेल प्रतियोगिताओं में व्यक्तिगत खेल अंतर्गत एथलेटिक्स (100 मी., 200 मी., 400 मी., लंबी कूद, ऊंची कूद, शॉटपुट, डिस्कस थ्रो, जैवेलिन थ्रो, 400 मी. रिले) तीरंदाजी (इंडियन राउंड), बैडमिंटन, कुश्ती एवं कराते शामिल हैं। इसके अलावा दलीय खेल में फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, बॉलीबॉल, रस्साकसी और बास्केटबॉल शामिल हैं। इस ओलंपिक में सरगुजा संभाग के सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर एवं जशपुर जिले के खेल में रुचि रखने वाले प्रतिभागी भाग ले सकेंगे l

छत्तीसगढ़ को नई रफ्तार: मुख्यमंत्री साय का 15 वर्षीय विज़न, बिलासपुर को बनाया जाएगा ग्रोथ हब

रायपुर  छत्तीसगढ़ की डबल इंजन सरकार ने आज यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि आने वाले दशक में बिलासपुर राज्य का अगला ग्रोथ इंजन बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक ने बिलासपुर के समग्र विकास के लिए एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक अभियान का स्वरूप ग्रहण कर लिया है। बैठक में जिस प्रकार केंद्र और राज्य के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी दर्ज हुई, उसने यह साबित कर दिया कि बिलासपुर का विकास केवल स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में प्राथमिकता का विषय बन चुका है। बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, विधायक अमर अग्रवाल , विधायक सुशांत शुक्ला, विधायक धरमलाल कौशिक, महापौर पूजा विधानी, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह तथा विभिन्न विभागों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारीगण सभी एक ही मंच पर उपस्थित थे। इस संयुक्त उपस्थिति ने यह शक्तिशाली संदेश दिया कि बिलासपुर का विकास दिल्ली और रायपुर दोनों स्तरों के बीच प्रत्यक्ष समन्वय से आगे बढ़ेगा और योजनाओं की स्वीकृति, वित्तीय प्रावधान और क्रियान्वयन में गति लाने के लिए राजनीतिक तथा प्रशासनिक इच्छा-शक्ति पूरी तरह सक्रिय है। मुख्यमंत्री साय ने बैठक में स्वयं बिलासपुर के अगले 10–15 वर्षों के शहरी विकास का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने केवल वर्तमान समस्याओं पर नहीं, बल्कि भविष्य की जनसंख्या वृद्धि, शहरी विस्तार, ट्रैफिक प्रबंधन, आवास, जल आपूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज और समग्र नगर नियोजन पर व्यापक चर्चा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि “नाली से लेकर नगर नियोजन तक” कोई भी विषय चर्चा से बाहर नहीं छोड़ा गया। यही संदेश यह स्थापित करता है कि सरकार केवल घोषणाएँ नहीं कर रही, बल्कि बारीकी से जमीन पर लागू होने योग्य योजना बना रही है। इस दृष्टिकोण ने मुख्यमंत्री की छवि एक दूरदर्शी शहरी विकास नेता के रूप में और सुदृढ़ की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह भी संकेत दिया कि बिलासपुर को सिर्फ एक बड़े शहर के रूप में नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के नए आर्थिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य हब विकसित किया जाएगा। लॉजिस्टिक सपोर्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और निवेश के नए अवसरों के साथ बिलासपुर को मध्य भारत का प्रमुख शहरी केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है।आने वाले वर्षों में बिलासपुर को मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ आधुनिक नगरीय सुविधाएं, स्वच्छता व्यवस्था, सस्टेनेबल शहरी ढांचा और रोजगार सृजन के नए अवसर साथ-साथ आगे बढ़ेंगे। इससे न केवल बिलासपुर, बल्कि पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ क्षेत्र को नई आर्थिक दिशा मिलेगी। बैठक में जनप्रतिनिधियों की व्यापक भागीदारी ने समावेशी राजनीति का स्पष्ट संदेश दिया। विधायक, महापौर और अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने यह स्थापित किया कि बिलासपुर का विकास किसी एक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि शहर के भविष्य का सामूहिक संकल्प है। सरकार ने यह भी संकेत दिया कि विकास के प्रश्न पर दलगत राजनीति को पीछे छोड़ दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। इससे यह संदेश गया कि बिलासपुर विकास रोडमैप केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने आवश्यक बजट प्रावधान और दीर्घकालिक निवेश योजना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। केंद्र और राज्य समन्वय के इस मॉडल ने यह सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ की शहरी विकास योजनाएं अब सीधे राष्ट्रीय मिशनों से जुड़ चुकी हैं। स्मार्ट सिटी, अमृत मिशन, हाउसिंग, नगरीय परिवहन और आधारभूत संरचना से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी, जिससे बिलासपुर को विशेष लाभ मिलेगा। बैठक के बाद मीडिया में प्रमुखता से यह संदेश उभरा कि बिलासपुर आने वाले समय में छत्तीसगढ़ का अगला ग्रोथ इंजन बनेगा। औद्योगिक निवेश, शहरी रोजगार, रियल एस्टेट, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से यहाँ विकास की नई लहर उत्पन्न होने जा रही है। बिलासपुर के विकास का यह अभियान प्रदेश की समग्र राजनीति में भी महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। शहरी विकास, रोजगार सृजन और आधारभूत संरचना पर केंद्रित यह एजेंडा डबल इंजन सरकार की विकासोन्मुखी राजनीति की पहचान बनेगा। आज की बैठक ने यह स्थापित कर दिया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिलासपुर का विकास केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संकल्प है। डबल इंजन सरकार की ताकत के साथ बिलासपुर अब राष्ट्रीय शहरी विकास मानचित्र पर अपनी निर्णायक उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

5142 करोड़ की अमृत 2.0 योजना फेल? MP के बड़े शहरों में आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर लोग

भोपाल मध्य प्रदेश के चार बड़े शहरों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए केंद्र सरकार ने पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक धनराशि उपलब्ध कराई लेकिन यहां के नगरीय निकाय लोगों को शुद्ध पानी नहीं दे सके। अमृत 2.0 (अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन 2.0) योजना के तहत पेयजल आपूर्ति पर 5,142 करोड़ रुपये खर्च कर दिए, फिर भी दूषित जल से इंदौर में 17 लोगों की मौत अलग ही कहानी कह रही है। पेयजल की पाइपलाइन और सीवरेज लाइन का क्रॉस कनेक्शन इन शहरों में जमीन के नीचे बिछी वर्षों पुरानी पेयजल की पाइपलाइन और सीवरेज लाइन का क्रॉस कनेक्शन है। कहीं-कहीं तो पेयजल की लाइन नाले-नालियों से होकर गुजर रही है। चार साल पहले शुरू हुई अमृत 2.0 योजना के तहत न तो जलप्रदाय का काम पूरा हुआ और न ही सीवरेज परियोजनाएं पूरी हो पाई हैं। इस वर्ष अमृत 2.0 की समयावधि समाप्त हो जाएगी लेकिन काम की गति को देखकर नहीं लगता कि इस वर्ष लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा।   अमृत 2.0 योजनाः एक नजर में एक अक्टूबर, 2021 से प्रारंभ, अवधि पांच वर्ष प्रदेश के समस्त 413 नगरीय निकाय एवं पांच छावनी परिषद सम्मिलित ये कार्य लंबित 4585.91 करोड़ रुपये के 253 जलप्रदाय के कार्य 205.88 करोड़ रुपये के 273 वॉटर बॉडी रिजुविनेशन के कार्य 52.11 करोड़ रुपये के हरित क्षेत्र विकास के कार्य 1941.72 करोड़ रुपये के सीवरेज के कार्य ये कार्य पूर्ण 29.88 करोड़ रुपये के जलप्रदाय के आठ कार्य 66.69 करोड़ रुपये के वाटर बाडी रिजुविनेशन के 118 कार्य 39.07 करोड रुपये के हरित क्षेत्र विकास के 182 कार्य बड़े शहरों का यह है हाल इंदौर: नगर निगम ने 550 किमी पुरानी पेयजल लाइन को चिह्नित कर बदलने की योजना अमृत 2.0 प्रोजेक्ट के तहत बनाई लेकिन अभी तक इस कार्य के लिए कोई एजेंसी निर्धारित नहीं की गई है। इसी तरह पाइप लाइन और टंकी निर्माण के तीन पैकेज के लिए टेंडर जारी किए गए हैं, लेकिन इसमें भी एजेंसी का चयन नहीं किया जा सका है। जबलपुर: शहर में 80 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति लाइन नाले-नालियों के नीचे से होकर गुजर रही है। पानी की डिस्ट्रीब्यूशन लाइन की उम्र 40 से 50 वर्ष तक हो चुकी है। सालों से लगातार नाली-नालियों के क्षारीय पानी, धूल, मिट्टी के संपर्क में रहने से पाइपलाइनों में क्षरण चुका है। जिससे जल वितरण पाइपलाइन में लीकेज के कारण गंदगी घुल रही है। ग्वालियर: जिले के ग्रामीण अंचल में करीब 410 नल-जल योजनाओं में से 115 ही चालू हैं। पानी के ट्रीटमेंट के लिए क्लोरीन डालने का प्रावधान है, लेकिन पंचायत स्तर पर इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं है। उज्जैन: जिले में जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 569 नल-जल योजनाओं में से 561 योजनाएं पूर्ण बताई जा रही हैं, जबकि 489 योजनाओं का पंचायतों को हस्तांतरण हो चुका है। इसके बावजूद कई गांवों में नियमित जल सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। नर्मदा-गंभीर समूह जल प्रदाय परियोजना की देरी से जिले के 914 गांवों को नर्मदा जल मिलने में कम से कम एक साल और लगेगा। तकनीकी बाधाएं और अधूरा टी-कनेक्शन कार्य मिशन की गति पर भारी पड़ रहा है। देवास: जिले में जल जीवन मिशन के तहत 645 एकल ग्राम योजना में से 418 योजनाएं ग्राम पंचायतों को सौंपी जा चुकी हैं। इन कार्यों में भी ठेकेदारों द्वारा लेटलतीफी की गई। गुणवत्ताहीन कार्य की शिकायतें आई। अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। इस कारण योजना अब तक पूर्ण नहीं हो सकी।  

‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ अभियान की टीम ने नदी-नाले पार कर बचाया भविष्य

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” अभियान जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से साकार होता नजर आ रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग एवं जिला प्रशासन की सतर्कता और संवेदनशीलता के चलते दुर्गम एवं पहुँचविहीन क्षेत्र में नदी-नाले पार कर 12 वर्षीय बालिका का बाल विवाह समय रहते रोका गया। इस त्वरित कार्रवाई से न केवल एक मासूम का भविष्य सुरक्षित हुआ, बल्कि समाज में बाल विवाह जैसी कुप्रथा के विरुद्ध सशक्त संदेश भी गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार 02 जनवरी 2026 को प्रशासन को सूचना मिली कि सुकमा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रामाराम के सुदूर गांव नाड़ीगुफा में एक नाबालिक बालिका का विवाह किया जा रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर के मार्गदर्शन में तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके पश्चात जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी के नेतृत्व में जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन तथा विभागीय अमले की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने उफनते नदी-नालों और अत्यंत दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद पैदल यात्रा कर गांव तक पहुँच बनाई और समय रहते विवाह प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया। मौके पर यह पाया गया कि पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह की सभी तैयारियां पूर्ण हो चुकी थीं। अधिकारियों द्वारा संवेदनशीलता के साथ परिजनों एवं ग्रामीणों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों, कानूनी दायित्वों तथा इसके गंभीर सामाजिक दुष्परिणामों की जानकारी दी गई। प्रशासन की समझाइश का सकारात्मक प्रभाव पड़ा और परिजनों ने स्वेच्छा से बाल विवाह रोकने का निर्णय लिया। ग्रामीणों की उपस्थिति में विधिवत पंचनामा तैयार कर कार्रवाई को औपचारिक रूप दिया गया। कार्रवाई के दौरान बालिका को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने तथा उसके सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य के लिए परिजनों को प्रेरित किया गया। साथ ही शासन की विभिन्न बाल संरक्षण एवं शिक्षा से संबंधित योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा 10 मार्च 2024 को “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” अभियान का शुभारंभ किया गया था। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 16 के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा 13,823 बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों को अधिसूचित किया गया है। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप नवंबर 2025 तक प्रदेश में 189 बाल विवाह रोके जा चुके हैं। राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों एवं जनसहभागिता के चलते बालोद जिला पूर्णतः बाल विवाह मुक्त जिला घोषित किया जा चुका है, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत है। वर्ष 2025-26 के लिए राज्य शासन ने 31 मार्च 2026 तक राज्य की 50 प्रतिशत ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने तथा 31 मार्च 2029 तक छत्तीसगढ़ को पूर्णतः बाल विवाह मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने स्पष्ट किया है कि बच्चों का सुरक्षित, शिक्षित एवं गरिमामय भविष्य सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथाओं के उन्मूलन हेतु प्रशासनिक सतर्कता, जनजागरूकता एवं त्वरित कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

इंदौर की घटनाओं का असर दिल्ली तक: BJP नेता बोले—आम जनता को मुफ्त बोतल वाला पानी दिया जाए

नई दिल्ली इंदौर में दूषित जल पीने से कई लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के बीमार होने की घटना के बीच दिल्ली सरकार से भी लोगों को बोतलबंद पानी आपूर्ति की मांग की गई है। यह मांग किसी और ने नहीं खुद भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व विधायक सरदार आरपी सिंह की है। उन्होंने दिल्ली सरकार को शहरवासियों को बोतलबंद पानी उपलब्ध कराने की सलाह दी है। उनका कहना है कि सीवर का पानी पाइपलाइन में मिल जाने की आशंका बनी रहती है। आरपी सिंह ने कहा कि उन्होंने दिल्ली सरकार के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह को पत्र लिखकर उनसे इस सलाह पर विचार करने का आग्रह किया है। भाजपा के प्रवक्ता और राष्ट्रीय राजधानी में राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक सिंह ने मुफ्त पानी देने का तरीका भी सुझाया है। उन्होंने कहा कि मुफ्त बोतलबंद पानी की आपूर्ति बोतलों पर विज्ञापनों और सुरक्षित पेयजल बुक करने संबंधी ऐप के जरिए प्रायोजित की जा सकती है। आरपी सिंह ने कहा- हमेशा रहती है आशंका उन्होंने कहा, ‘पानी की पाइपलाइन की मरम्मत पर चाहे जितना भी ध्यान दिया जाए, मलजल लाइन और अन्य स्रोतों से इसके दूषित होने की आशंका हमेशा बनी रहती है। बोतलबंद पानी से यह सुनिश्चित होगा कि लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पानी मिले।’ सिंह ने यह भी तर्क दिया कि राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की आपूर्ति को भी घरों में आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) मशीनों के जरिए और शुद्ध किया जाता है। उन्होंने कहा, ‘हालांकि, गरीब लोगों का स्वास्थ्य दांव पर है क्योंकि वे महंगी आरओ मशीन नहीं लगवा सकते और असुरक्षित पेयजल पर निर्भर रहते हैं या निजी निर्माताओं का वह बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं जिसकी गुणवत्ता संदिग्ध होती है।’  

जन्मदिन पर अनोखा उपहार! बृजभूषण शरण सिंह ने ऋतेश्वर महाराज को भेंट की करोड़ों की दुर्लभ गाय

गोंडा यूपी के गोंडा जिले में नंदिनी नगर में चल रहे राष्ट्रकथा महोत्सव के दौरान सदगुरु ऋतेश्वर महाराज के जन्मदिन पर पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने उन्हें दुर्लभ 20 लाख रुपए कीमत वाली श्यामा गाय भेंट की। हरियाणा से लाई गई काले रंग की इस दुर्लभ गाय को देखते ही महाराज उसे दुलार करने लगे। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि ये उपहार उनके एक मित्र ने भेजा है। इस मौके पर ऋतेश्वर महाराज ने श्रोताओं से आह्वान किया कि हमें राष्ट्र, धर्म और अपनी आत्मा की पुकार को सुनना चाहिए। आज हमें अपने महापुरुषों द्वारा बताए गए कर्तव्यों पर गंभीरता से विचार करना होगा। परिवार, समाज और राष्ट्र के सशक्त निर्माण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को आगे आना चाहिए।   भोजपुरी स्टार पवन सिंह, बृजभूषण ने भी साधा सुर राष्ट्रकथा में रविवार की शाम भोजपुरी गानों के पावर स्टार पवन सिंह भी पहुंचे। दो भजन भी गाए। बृजभूषण ने स्टेज से खुद ही आज नंदिनी नगरिया निहार सखियां… गीत गाया। इस दौरान राष्ट्र कथा के भंडारे में परोसे जा रहे बथुए के सगपहिते पर कहा बथुआ अब राष्ट्रीय ब्रांड हो गया है। अब इसे नेशनल फूड घोषित किया जाना चाहिए। स्टेडियम में पहलवानों से मिले सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज सदगुरु रविवार के देर शाम पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, ऋतेश्वर महाराज को लेकर नंदिनी नगर कुश्ती स्टेडियम पहुंचे। कुश्ती सीखने आए खिलाड़ियों से मुलाकात कराई। दांव-पेंच बताए। इस दौरान तलवार बाजी का प्रदर्शन भी किया गया। पूर्व सांसद ने अपने मालिश करने वाले नेशनल पदक विजेता खिलाड़ी और अपने नाई से मुलाकात कराकर कहा जब नाऊ इतने तगड़े हैं नेताजी का तो दबदबा तो रहेगा ही भैया। यह सुनकर सद्‌गुरु ऋतेश्वर महाराज जोर से हंसे और दोनों को आशीर्वाद दिया।