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योगी सरकार का बड़ा फैसला: पुलिस भर्ती में आयु सीमा में तीन साल की राहत, 32,679 पदों पर होगी भर्ती

योगी सरकार का बड़ा फैसला, पुलिस भर्ती में आयु सीमा पर तीन साल की राहत 32,679 पदों पर सीधी भर्ती में सभी वर्गों को आयुसीमा में छूट उत्तर प्रदेश में युवाओं के हित में फिर आगे आई योगी सरकार लखनऊ उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ी राहत दी है। अभ्यर्थियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस में आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर प्रस्तावित सीधी भर्ती-2025 के लिए अधिकतम आयु सीमा में एकमुश्त तीन वर्ष का शिथिलीकरण प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है। लाखों युवाओं को होगा लाभ सीधी भर्ती-2025 के अंतर्गत कुल 32,679 पदों को भरे जाने के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। शासनादेश के अनुसार आरक्षी नागरिक पुलिस (पुरुष/महिला), आरक्षी पीएसी/सशस्त्र पुलिस (पुरुष), आरक्षी विशेष सुरक्षा बल (पुरुष), महिला बटालियन हेतु महिला आरक्षी, आरक्षी घुड़सवार पुलिस (पुरुष) तथा जेल वार्डर (पुरुष एवं महिला) पदों पर भर्ती प्रक्रिया में सम्मिलित होने वाले सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को यह आयु शिथिलीकरण एक बार के लिए प्रदान किया जाएगा। सरकार द्वारा यह निर्णय उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती के लिए आयु सीमा का शिथिलीकरण) नियमावली-1992 के नियम-3 के आलोक में लिया गया है। यह फैसला 31 दिसंबर 2025 को जारी भर्ती विज्ञप्ति के अनुक्रम में 5 जनवरी 2026 को जारी शासनादेश के माध्यम से लागू किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों को अवसर मिलेगा जो आयु सीमा के कारण अब तक भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे थे। युवाओं के हित में योगी आदित्यनाथ सरकार योगी सरकार का यह कदम साफ संदेश देता है कि प्रदेश की सरकार युवाओं की वास्तविक समस्याओं को समझती है और समाधान के लिए ठोस फैसले लेने से पीछे नहीं हटती। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को न्यायसंगत अवसर देना, रोजगार के अधिक से अधिक विकल्प उपलब्ध कराना और प्रशासनिक निर्णयों में संवेदनशीलता बनाए रखना योगी सरकार की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है। पुलिस भर्ती में आयु सीमा शिथिलीकरण का यह निर्णय न केवल लाखों युवाओं की उम्मीदों को नया बल देगा, बल्कि यह भी दर्शाता है कि योगी आदित्यनाथ सरकार में युवाओं का भविष्य नीति निर्धारण के केंद्र में है।

ईडी का बड़ा एक्शन: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में IAS निरंजन दास और 31 आबकारी अधिकारियों की संपत्ति कुर्क

रायपुर  छत्तीसगढ़ में चर्चित शराब घोटाले में ईडी ने आईएएस निरंजन दास समेत 30 आबकारी अधिकारियों की 38.21 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है। ईडी, रायपुर आंचलिक कार्यालय ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की चल रही जांच के तहत 2002 के पीएमएलए के तहत आईएएस निरंजन दास (तत्कालीन आबकारी आयुक्त) और 30 अन्य आबकारी अधिकारियों की 38.21 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।  इस घोटाले में राज्य के खजाने को 2,800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ (आगे के खुलासों के आधार पर संशोधित गणना)। इसमें 78 अचल संपत्तियां शामिल हैं जिनमें आलीशान बंगले, प्रीमियम कॉम्प्लेक्स में फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें और विशाल कृषि भूमि शामिल हैं। इसके अलावा, 197 चल संपत्तियां भी शामिल हैं जिनमें उच्च मूल्य की सावधि जमा (एफडी), कई बैंक खातों में शेष राशि, जीवन बीमा पॉलिसियां ​​और इक्विटी शेयर और म्यूचुअल फंड का एक विविध पोर्टफोलियो शामिल है।  ईडी का दावा है कि इस घोटाले से राज्य के राजस्व को 2,800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है, जिसकी राशि आगे की जांच में और बढ़ सकती है। 275 संपत्तियां ईडी के रडार पर ईडी द्वारा कुर्क की गई कुल 275 संपत्तियों में 78 अचल और 197 चल संपत्तियां शामिल हैं। अचल संपत्तियों की अनुमानित कीमत 21.64 करोड़ रुपये है, जिनमें आलीशान बंगले, प्रीमियम रिहायशी कॉलोनियों में फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें और बड़े पैमाने पर कृषि भूमि शामिल है। 16.56 करोड़ रुपये मूल्य की चल संपत्तियों में एफडी, बैंक खातों में जमा राशि, जीवन बीमा पॉलिसियां, इक्विटी शेयर और म्यूचुअल फंड में निवेश शामिल हैं। समानांतर आबकारी व्यवस्था का खुलासा ईडी की जांच में सामने आया है कि वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों से जुड़ा एक आपराधिक सिंडिकेट छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग को नियंत्रित कर रहा था। तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास और तत्कालीन सीईओ अरुण पति त्रिपाठी ने मिलकर एक समानांतर आबकारी व्यवस्था खड़ी की, जिसके जरिए सरकारी नियमों को दरकिनार कर अवैध कमाई की गई। 38.21 करोड़ रुपये मूल्य की अटैच की गई संपतियों की जानकारी ''अचल संपतियां (21,64,65,015 रुपये): 78 संपत्तियां जिनमें आलीशान बंगले, प्रीमियम कॉम्प्लेक्स में फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें और विस्तृत कृषि भूमि शामिल हैं। चल संपत्तियां (16,56,54,717 रुपये): 197 वस्तुएं जिनमें उच्च मूल्य की सावधि जमा (एफडी), कई बैंक खातों में शेष राशि, जीवन बीमा पॉलिसियां और इक्विटी शेयरों और म्यूचुअल फंडों का विविध पोर्टफोलियो शामिल है। ईडी द्वारा की गई जांच से पता चला है कि वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनीतिक हस्तियों से जुड़े एक आपराधिक सिंडिकेट ने छतीसगढ़ आबकारी विभाग को पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया था। निरंजन दास (तत्कालीन आबकारी आयुक्त) और अरुण पति त्रिपाठी (तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सीएसएमसीएल) ने एक समानांतर आबकारी प्रणाली चलाई, जिसने राज्य के नियंत्रणों को दरकिनार करते हुए भारी मात्रा में अवैध कमाई की। इस सिंडिकेट ने सरकारी दुकानों के जरिए अवैध, गैर-कानूनी देसी शराब बनाने और बेचने की "पार्ट-बी" योजना चलाई। इस अवैध शराब का उत्पादन और बिक्री नकली होलोग्राम और गैर-कानूनी बोतलों का इस्तेमाल करके की जाती थी और इसे सरकारी गोदामों को दरकिनार करते हुए सीधे शराब बनाने की भ‌ट्टियों से दुकानों तक पहुंचाया जाता था। यह धोखाधड़ी उक्त उत्पाद शुल्क अधिकारियों की सक्रिय मिलीभगत और साजिश से की गई थी। जांच में यह साबित हुआ कि आबकारी अधिकारियों को उनके अधिकार क्षेत्र में पार्ट-बी शराब की बिक्री की अनुमति देने के लिए प्रति मामले 140 रुपये का निश्चित कमीशन दिया जाता था। अकेले निरंजन दास ने ही 18 करोड़ रुपये से अधिक की पीओसी अर्जित की, जिसके लिए उसे इस घोटाले को अंजाम देने में मदद करने के लिए प्रति माह 50 नाख रुपये की रिश्वत मिलती थी। कुल मिलाकर, 31 आबकारी अधिकारियों ने 89.56 करोड़ रुपये की पीओसी बटोरी/अर्जित की। रायपुर स्थित एसीबी ईओडब्ल्यू द्वारा आईपीसी, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने अपनी जांच शुरू की। पुलिस जांच में पता चला है कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ और आरोपियों को इसके बराबर लाभ मिला। वर्तमान कुकर्की राज्य के राजस्व की रक्षा करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की गहरी मिलीभगत को उजागर करती है।'' ‘पार्ट-बी’ योजना से अवैध शराब बिक्री जांच के अनुसार, सरकारी शराब दुकानों के जरिए ‘पार्ट-बी’ योजना चलाई गई। इसके तहत अवैध देसी शराब का निर्माण और बिक्री की गई। नकली होलोग्राम, गैर-कानूनी बोतलों का उपयोग किया गया और सरकारी गोदामों को बायपास कर सीधे भट्टियों से दुकानों तक शराब पहुंचाई गई। यह पूरी प्रक्रिया आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से संचालित होती थी। कमीशन सिस्टम से करोड़ों की कमाई ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों को प्रति केस 140 रुपये का कमीशन दिया जाता था। अकेले निरंजन दास ने 18 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय हासिल की, जबकि कुल 31 अधिकारियों ने मिलकर करीब 89.56 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की।

भोपाल एम्स की प्रोफेसर रश्मि वर्मा की आत्महत्या के प्रयास के बाद मौत, टॉक्सिक वर्क कल्चर पर उठे सवाल

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में इमरजेंसी एवं ट्रॉमा विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ रश्मि वर्मा की सोमवार को मौत हो गई। वह पिछले 24 दिनों से एम्स के एम्स के आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट में भर्ती थीं। जानकारी के अनुसार, डॉ रश्मि वर्मा ने सोमवार की सुबह 10 करीब अंतिम सांस ली। परिजनों को शव सौंप दिया गया है। बीते दिनों पहले उन्होंने एनेस्थीसिया का हाई डोज ले लिया था। जिसके बाद उनके पति ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन शाक्य उन्हें बेहोशी की हालत में लेकर एम्स पहुंचे थे। 11 दिसंबर को एम्स भोपाल में कराया था भर्ती दरअसल, डॉ. रश्मि वर्मा को 11 दिसंबर को गंभीर हालत में एम्स भोपाल में भर्ती कराया गया था। एनेस्थीसिया का ओवरडोज लेकर खुदकुशी की कोशिश की थी। परिजनों के मुताबिक, उन्हें घर पर अचेत अवस्था में पाया गया, जिसके बाद उनके पति उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने उन्हें सीपीआर देकर रिवाइव किया। बताया गया कि उस समय करीब 7 मिनट तक उनकी दिल की धड़कन बंद रही थी। इसके बाद से डॉ. रश्मि का इलाज एम्स के आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर चल रहा था। एम्स के अनुसार, 5 जनवरी की सुबह करीब 11 बजे डॉ. रश्मि वर्मा ने अंतिम सांस ली। उनका शव परिजनों को सौंप दिया गया। डॉ. रश्मि वर्मा ने बेहोशी की दवा (एनेस्थीसिया) का हाई डोज लिया था। उनके पति ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन शाक्य उन्हें बेहोशी की हालत में एम्स लेकर पहुंचे थे। 7 मिनट तक रुकी थी दिल की धड़कन एम्स पहुंचने से पहले करीब 25 मिनट का वक्त निकल चुका था। डॉक्टरों के मुताबिक, इस दौरान डॉ. रश्मि का दिल लगभग 7 मिनट तक धड़कना बंद कर चुका था। इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों ने तुरंत सीपीआर शुरू किया और तीन बार रेससिटेशन के बाद उनकी हार्टबीट वापस लाई जा सकी थी। हालांकि, इतने लंबे समय तक ब्रेन को ऑक्सीजन नहीं मिलने से मस्तिष्क को गंभीर क्षति पहुंच चुकी थी। एमआरआई रिपोर्ट में सामने आया गंभीर ब्रेन डैमेज घटना के 72 घंटे बाद कराई गई एमआरआई रिपोर्ट में ‘ग्लोबल हाइपोक्सिया ब्रेन’ की पुष्टि हुई थी। इसका मतलब था कि उनके पूरे मस्तिष्क को लंबे समय तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिली। डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति अकसर कार्डियक अरेस्ट के बाद होती है। इसमें रिकवरी की संभावना बेहद कम रहती है। डॉ. रश्मि वर्मा 24 दिनों से एम्स के मेन आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थीं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए थी। हर दिन उम्मीद की किरण तलाशने की कोशिश की गई, लेकिन ब्रेन डैमेज इतना गंभीर था कि सुधार नहीं हो सका। कई बार इलाज का खर्च खुद उठाती थीं डॉ. रश्मि डॉ. रश्मि वर्मा ने प्रयागराज के एमएलएन मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर से एमडी (जनरल मेडिसिन) किया था। वे एम्स भोपाल के अलावा एलएन मेडिकल कॉलेज और पीएमएस भोपाल में भी सेवाएं दे चुकी थीं। पांच साल का टीचिंग अनुभव रखने वाली डॉ. रश्मि गरीब मरीजों की मदद के लिए जानी जाती थीं और कई बार इलाज का खर्च भी खुद उठाती थीं। वर्तमान में सीपीआर ट्रेनिंग प्रोग्राम की नोडल अधिकारी भी थी। घटना के बाद हुई थी आपात बैठक, कई फैसले लिए गए थे डॉ. रश्मि की मौत के बाद एम्स के भीतर के कथित टॉक्सिक वर्क कल्चर, प्रशासनिक दबाव और नोटिस सिस्टम को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं। घटना के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स प्रबंधन की आपात बैठक हुई थी, जिसमें ट्रॉमा एंड इमरजेंसी विभाग के एचओडी को हटाने और विभाग को दो हिस्सों में बांटने जैसे बड़े फैसले लिए गए थे। इस पूरे मामले की गोपनीय जांच के लिए हाई लेवल कमेटी गठित भी की गई थी, जिसकी अब तक रिपोर्ट सामने नहीं आई है। तमाम कोशिशों के बावजूद नहीं बची जान बीते 23 दिनों तक डॉक्टरों की टीम ने लगातार प्रयास किए, लेकिन लंबा इलाज और तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। एम्स प्रशासन ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सहकर्मियों और स्टाफ के बीच शोक की लहर है। डॉ. रश्मि वर्मा एक समर्पित चिकित्सक के रूप में जानी जाती थीं और इमरजेंसी व ट्रॉमा विभाग में उनकी सेवाओं को सराहा जाता रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, इमरजेंसी एंड ट्रॉमा विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा 11 दिसंबर 2025 को ड्यूटी पूरी करने बाद शाम को घर लौट आईं थी। रश्मि के पति ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. रतन वर्मा रात करीब साढ़े 10 बजे उनको बेहोशी की हालत में एम्स लेकर आए। डॉ. रतन ने बताया कि घर पर सब नॉर्मल था। सब अपना-अपना काम कर रहे थे। डॉ. रश्मि के पास पहुंचे तो वो बेहोश मिलीं थीं। जिसके बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था। 7 मिनट तक बंद रहा था दिल डॉ रश्मि का दिल करीब 7 मिनट तक बंद रहा, जिससे उनके दिमाग को गंभीर नुकसान पहुंचा । एमआरआई रिपोर्ट में ग्लोबल हाइपोक्सिया ब्रेन डैमेज की पुष्टि हुई थी। डॉ. रश्मि वर्मा बीते कई दिनों से वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी। इलाज में जुटे चिकित्सकों की मानें तो उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी।

पटना में मौर्य लोक के बकायेदार दुकानदारों का कटेगा कनेक्शन

पटना. राजधानी के हृदयस्थल मौर्य लोक काम्प्लेक्स में वर्षों से लंबित बकाया वसूली को लेकर नगर निगम ने अब सख्ती शुरू कर दी है। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने लंबे समय से ग्राउंड रेंट व मेंटेनेंस शुल्क नहीं देने वालों को नोटिस के साथ सख्त चेतावनी दी है कि वे सात दिन में बकाया भुगतान कर दें। ऐसा नहीं करने पर बिना बताए उनके प्रतिष्ठान की बिजली व पानी का कनेक्शन काट दिया जाएगा। साथ ही अनुबंध के अनुसार उन पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। हाल में मौर्य लोक काम्प्लेक्स स्थित 278 दुकानों-कार्यालयों पर बकाया मेंटिनेंस शुल्क व ग्राउंड रेंट की समीक्षा की गई थी। इसमें पाया गया कि लंबे समय से अधिसंख्य लोग इसका भुगतान नहीं कर रहे हैं। इस कारण दुकानदारों व कार्यालय स्वामियों को 3 करोड़ 66 लाख 15 हजार चार रुपये बकाया हो गया है। दोनों माध्यमों से जमा कर सकते हैं टैक्स इस गंभीर स्थिति को देखते हुए नगर आयुक्त ने सभी बकायेदारों को अंतिम चेतावनी के रूप में नोटिस जारी की है। नगर आयुक्त ने कहा कि दुकानदार व कार्यालय संचालक ऑनलाइन या ऑफलाइन, दोनों तरह से बकाया भुगतान कर सकते हैं। मौर्य लोक काम्प्लेक्स में अवस्थित सभी दुकानदार व कार्यालय संचालक नगर निगम की की वेबसाइट पीएमसी डाट बिहार डाट जीओवी डाट इन के पीआरडीएशाप्स डाट एएसपीएक्स से आनलाइन या निगम कार्यालय में बकाया राशि जमा करा सकते हैं। उन्होंने सभी दुकानदारों व कार्यालय स्वामियों से अपील की है कि वे समयसीमा के भीतर बकाया राशि का भुगतान कर कार्रवाई से बचें। 1998 से मासिक मेंटेनेंस शुल्क जमा नहीं मौर्य लोक काम्प्लेक्स के अधिसंख्य दुकानदारों व कार्यालय संचालकों ने अप्रैल 1998 से मासिक मेंटेनेंस शुल्क जमा नहीं किया है। इसके अलावा वर्ष 1999-2000 से वार्षिक ग्राउंड रेंट भी बकाया है। यह स्थिति लगभग 27 वर्षों से बनी हुई है। निगम प्रशासन के अनुसार समय-समय पर कई बार स्मारपत्र व नोटिस जारी किए गए, लेकिन बकाया राशि जमा नहीं कराई गई। निगम की आय का बड़ा हिस्सा ऐसे व्यावसायिक परिसरों से आता है।

भावांतर योजना में सोयाबीन का मॉडल रेट 4458 रुपए जारी, किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा

भावांतर योजना में सोयाबीन का मॉडल रेट 4458 रुपए जारी भोपाल भावांतर योजना 2025 के अंतर्गत  सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए मॉडल रेट प्रतिदिन जारी किया जा रहा है। सोमवार 5 जनवरी को 4458 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपनी सोयाबीन की उपज मंडी प्रांगणों में विक्रय की है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी। मॉडल रेट और न्यूनतम समर्थन मूल्य के भावांतर की राशि राज्य सरकार द्वारा दी जा रही है। सोयाबीन का पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया था। इसी तरह 8 नवंबर को 4033 रुपए, 9 और 10 नवंबर को 4036 रुपए, 11 नवंबर को 4056 रुपए, 12 नवंबर को 4077 रुपए, 13 नवंबर को 4130 रुपए, 14 नवंबर को 4184 रुपए, 15 नवंबर को 4225 रुपए, 16 नवंबर को 4234 रुपए, 17 नवंबर को 4236 रुपए, 18 नवंबर को 4255 रुपए, 19 नवंबर को 4263 रुपए, 20 नवंबर को 4267 रुपए, 21 नवंबर को 4271 रुपए, 22 नवंबर को 4285 रुपए, 23 एवं 24 नवंबर को 4282 रुपए, 25 नवंबर को 4277 रुपए, 26 नवंबर को 4265 रुपए, 27 नवंबर को 4252 रुपए, 28 नवंबर को 4260 रुपए, 29 नवंबर को 4240 रुपए और 30 नवंबर को 4237 रुपए प्रति क्विंटल  का मॉडल रेट जारी किया गया था। इसी तरह 1 दिसंबर को 4239 रुपए, 2 दिसंबर को 4235 रुपए, 3 दिसंबर को 4240 रुपए, 4 दिसंबर को 4235 रुपए, 5 दिसंबर को 4230 रुपए, 6 दिसंबर को 4217 रुपए, 7 दिसंबर को 4222 रुपए, 8 दिसंबर को 4219 रुपए, 9 दिसंबर को 4217 रुपए और 10 दिसंबर को 4210 रुपए प्रति क्विंटल  का मॉडल रेट जारी हुआ था। इसी प्रकार 11 दिसंबर को 4207 रुपए, 12 दिसंबर को 4202 रुपए, 13 दिसंबर को 4204 रुपए, 14 दिसंबर को 4208 रुपए, 15 दिसंबर को 4208 रुपए, 16 दिसंबर को 4209 रुपए, 17 दिसंबर को 4205 रुपए, 18 दिसंबर को 4195 रुपए, 19 दिसंबर को 4201 रुपए, 20 दिसंबर को 4191 रुपए, 21 दिसंबर को 4193 रुपए, 22 दिसंबर को 4194 रुपए, 23 दिसंबर को 4209 रुपए और 24 दिसंबर को 4213 रुपए, 25 दिसंबर को 4235 रुपए, 26 दिसंबर को 4257 रुपए, 27 और 28 दिसंबर को 4271 रुपए, 29 दिसंबर को 4267 रुपए, 30 दिसंबर को 4296 रुपए, 31 दिसंबर को 4345 रुपए, 1 जनवरी को 4380 रुपए, 2 जनवरी को 4432 रुपए, 3 जनवरी को 4439 रुपए और 4 जनवरी को 4459 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया था। राज्य सरकार की गारंटी है कि किसानों को हर हाल में सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य की 5328 रुपए  प्रति क्विंटल की राशि मिलेगी। भावांतर राशि का भुगतान भावांतर राशि का भुगतान विक्रय दिनांक से 15 दिवस के भीतर किसान के आधार लिंक्ड बैंक खाते में किया जा रहा है जो कि मॉडल रेट गणना पर निर्भर है। दिनांक 24 अक्टूबर 2025 से 6 नवंबर 2025 तक लगभग 1.33 लाख पंजीकृत किसानों को 233 करोड़ का प्रथम भुगतान 13 नवंबर, 2025 को किया गया। इसके बाद 7 नवंबर 2025 से 17 नवंबर 2025 तक लगभग 1.34 लाख पंजीकृत किसानों को 249 करोड़ का द्वितीय भुगतान  26 नवंबर, 2025 को किया गया। तृतीय चरण में 17 नवंबर 2025 से 19 दिसंबर 2025 तक विक्रय करने वाले लगभग 3.77 लाख पंजीकृत किसानों को 810 करोड़ का भुगतान 28 दिसंबर, 2025 को किया गया। इस प्रकार अभी तक 6.54 लाख पंजीकृत किसानों को भावांतर की 1292 करोड़ की राशि का भुगतान किया गया है।  

सुषील मोदी की प्रतिमा का मुख्यमंत्री नीतीश ने किया अनावरण

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज राजेन्द्र नगर स्थित सुषील मोदी स्मृति पार्क में पूर्व उप मुख्यमंत्री पद्मभूषण स्व0 सुषील कुमार मोदी की जयंती समारोह में शामिल हुये। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्व0 सुषील कुमार मोदी जी की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया और पुष्प अर्पित कर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री सम्राट चैधरी, बिहार विधान सभा अध्यक्ष डाॅ0 प्रेम कुमार, बिहार विधान परिषद् के सभापति अवधेष नारायण सिंह, जल संसाधन सह संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चैधरी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डे, कृषि मंत्री रामकृपाल यादव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री संजय कुमार सिंह, सहकारिता मंत्री डाॅ0 प्रमोद कुमार, सांसद रविषंकर प्रसाद, भाजपा के प्रदेष अध्यक्ष संजय सरावगी, विधायक प्रमोद कुमार, विधायक संजीव चैरसिया, विधायक संजय गुप्ता, विधायक रत्नेष कुषवाहा, विधान पार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी, विधान पार्षद कुमुद वर्मा, स्व. सुषील कुमार मोदी की धर्मपत्नी जेसी जाॅर्ज, पूर्व विधान सभा अध्यक्ष नंद किषोर यादव, पूर्व विधायक अरूण कुमार सिन्हा, जदयू के राष्ट्रीय महासचिव मनीष कुमार वर्मा, अन्य जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य व्यक्ति तथा राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी। इसके पष्चात् मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण मेमोरियल हाॅल में आयोजित स्व0 सुषील कुमार मोदी के जयंती कार्यक्रम में शामिल हुये। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्व0 सुषील कुमार मोदी के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने द्वीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, उप मुख्यमंत्री सम्राट चैधरी, बिहार विधान सभा अध्यक्ष डाॅ0 प्रेम कुमार, जल संसाधन सह संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चैधरी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डे, उद्योग मंत्री डाॅ0 दिलीप कुमार जायसवाल, सांसद राधा मोहन सिंह, भाजपा के प्रदेष अध्यक्ष संजय सरावगी, भाजपा के संगठन महामंत्री भीखू भाई दलसानिया, बिहार भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े, विधायक संजय गुप्ता, विधान पार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी, स्व0 सुषील कुमार मोदी की धर्मपत्नी जेसी जाॅर्ज, अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य व्यक्ति तथा राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी।

जितेंद्र 224 मत से जीते, 340 मतदाताओं ने चुना अहीरयादव समाज का नया अध्यक्ष

जितेंद्र 224 मत से जीते,340 मतदाताओं ने चुना अहीरयादव समाज का नया अध्यक्ष भोपाल  राजधानी भोपाल के बरखेड़ी क्षेत्र में अहीर यादव समाज के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव रविवार का संपन्न्प हुई। चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई, जिसमें समाज के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। जितेंद्र यादव ने 224 मतों से जीत दर्ज की।  मतगणना के बाद घोषित परिणामों में जितेंद्र यादव को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ। जीत के बाद समर्थकों में उत्साह का माहौल रहा और दोनों प्रत्याशियों कस फूल-मालाओं से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जितेंद्र यादव ने समाज के सभी मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे यादव समाज के हित, एकता और विकास के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे। वहीं समाज के विशाल यादव, एकवोकेट विनोद यादव, गेंदा पहलवान, श्याम यादव सहित सभी समाजनों ने बधाई दी। चुनाव अधिकारी बीडी यादव यादव ने बताया कि 359 में से 340 लोगों ने मतदान किया। जिसमें 5 मत निरस्त किए। जिसमें 224 मत विजय प्रत्याशी और 111 प्रतिद्वंद्वी को मिले।

पीएम सूर्यघर योजना से रोशन हुआ शिक्षक राजेश साहू का घर

रायपुर. बलौदा बाजार भाटापारा जिले के संजय नगर कॉलोनी निवासी और पेशे से शिक्षक राजेश साहू के जीवन में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना एक नई रोशनी लेकर आई है। सोशल मीडिया के माध्यम से इस योजना के विज्ञापन से प्रेरित होकर राजेश ने बिजली विभाग के कार्यालय में जाकर विस्तृत जानकारी प्राप्त की और इस योजना की महत्ता को समझते हुए तत्काल अपने घर की छत पर 3 किलोवाट का सोलर पैनल सिस्टम लगवाने का निर्णय लिया। शासन की इस जनकल्याणकारी योजना के तहत उन्हें न केवल सुलभ किस्तों में सिस्टम लगाने की सुविधा मिली, बल्कि नियमानुसार सरकार से आकर्षक सब्सिडी का लाभ भी प्राप्त हुआ। सोलर पैनल स्थापित होने के बाद अब राजेश साहू का घर पूरी तरह सौर ऊर्जा से ऊर्जित हो रहा है, जिससे उन्हें हर महीने आने वाले भारी-भरकम बिजली बिल की चिंता से हमेशा के लिए छुटकारा मिल गया है। इस सकारात्मक बदलाव और आर्थिक राहत से उत्साहित होकर शिक्षक राजेश साहू ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त किया है। उनका मानना है कि यह योजना न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि मध्यमवर्गीय परिवारों को महंगाई के दौर में बिजली खर्च से बचाने का एक बेहतरीन माध्यम भी है।

उत्तर बस्तर कांकेर में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की प्रचार वैन को कलेक्टर ने किया रवाना

उत्तर बस्तर कांकेर. खेल एवं युवा कल्याण विभाग के तत्वावधान में ‘खेलो इंडिया‘ ट्राइबल गेम्स के लिए चयन ट्रायल 6 से 8 जनवरी को रायपुर और बिलासपुर में किया जाएगा। इसके व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु वैन को कांकेर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने आज हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने इसके लिए जिले के अधिकाधिक युवक-युवतियों को पंजीयन कराने के निर्देश दिए हैं। जिला खेल अधिकारी ने बताया कि ‘खेलो इंडिया‘ ट्राइबल गेम्स में हिस्सा लेने के लिए क्यूआर कोड और रजिस्ट्रेशन लिंक से किया जा सकता है। ऑनलाइन पंजीयन, ट्रायल स्थल पर ऑफलाइन पंजीयन भी होगा। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के मूल निवासी जनजातीय खिलाड़ी इसमें भाग ले सकते हैं। चयन ट्रायल में हिस्सा लेने हेतु अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र और आधार कॉर्ड की मूल कॉपी के साथ उपस्थित होना होगा। देश में पहली बार छत्तीसगढ़ की मेजबानी में हो रहे है। यह भी बताया गया कि खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स में राज्य की ओर से खेलने वाली टीमों के चयन के लिए ट्रायल 6 जनवरी से 8 जनवरी तक रायपुर और बिलासपुर में आयोजित किए जा रहे हैं। सात खेल विधाओं में किया जाएगा ट्रायल इस संबंध में बताया गया कि नेशनल ट्राइबल गेम्स में सात खेलों को शामिल किया गया है। इसमें भागीदारी के लिए वेट-लिफ्टिंग, कुश्ती, फुटबॉल और हॉकी के खिलाड़ियों का ट्रायल रायपुर में आयोजित किया गया है। वहीं तीरंदाजी, एथलेटिक्स और तैराकी के खिलाड़ियों के ट्रायल बिलासपुर में होंगे। चयन ट्रायल में शामिल होने के लिए खिलाड़ी अपना ऑनलाइन पंजीयन क्यूआर कोड और रजिस्ट्रेशन लिंक से कर सकते हैं। सभी ट्रायल स्थलों पर ऑफलाइन पंजीयन भी किए जाएंगे। छत्तीसगढ़ के स्थायी निवासी अनुसूचित जनजाति वर्ग के खिलाड़ी ही चयन ट्रायल में भाग लेने के पात्र होंगे। महिला एवं पुरूष दोनों वर्गों में पात्र खिलाड़ियों के लिए आयु सीमा का कोई बंधन नहीं है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने ट्रायल में हिस्सा लेने पहुंचने वाले सभी खिलाड़ियों से अपने अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र और आधार कॉर्ड/स्थानीय प्रमाण पत्र की मूल कॉपी साथ लाने कहा है। रायपुर में वेट-लिफ्टिंग, कुश्ती, फुटबॉल और हॉकी के ट्रायल रायपुर के स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा में 6 जनवरी को सवेरे 9 बजे से वेट-लिफ्टिंग, 7 जनवरी को सवेरे 9 बजे से कुश्ती तथा 7 जनवरी और 8 जनवरी को सवेरे नौ बजे से फुटबॉल के लिए ट्रायल होंगे। इसी प्रकार 7 जनवरी और 8 जनवरी को सवेरे 09 बजे से रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में हॉकी खिलाड़ियों का ट्रायल होगा। बिलासपुर में 7 से 8 जनवरी तक एथलेटिक्स, तीरंदाजी एवं तैराकी खेलो के लिए चयन ट्रायल होंगे।

टी.आई.ई समिट से मध्यप्रदेश और राजस्थान के युवाओं को मिलेंगे बेहतर रोजगार अवसर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

टी.आई.ई समिट से मध्यप्रदेश और राजस्थान के युवाओं को मिलेंगे रोजगार के बेहतर अवसर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जयपुर विमानतल पर मीडिया से की चर्चा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आईटी सहित सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश भी सभी सेक्टर में विकास कार्यों को गति देते हुए भारत सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है मध्यप्रदेश और राजस्थान भाई-भाई हैं। दोनों राज्य अपनी साझा विरासत का संरक्षण करते हुए साझा विकास के लिए निरंतर प्रगतिशील हैं। तकनीक के इस समय में आईटी का विशेष महत्व है। इसके दृष्टिगत दोनों राज्यों में युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलें, इस उद्देश्य से स्टार्ट-अप, इनोवेटर्स और उद्योगपतियों से संवाद के लिए जयपुर में टी.आई.ई. ग्लोबल समिट आयोजित की जा रही है। मध्यप्रदेश सरकार ने पड़ौसी राज्य राजस्थान के साथ वर्षों पुराने विवाद को खत्म कर पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को जयपुर विमानतल पर मीडिया से चर्चा में यह विचार व्यक्त किए। स्टार्टअप्स, इनोवेटर्स एवं उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद समिट में मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश के प्राथमिकता प्राप्त प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों की विस्तृत जानकारी वैश्विक निवेशकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े हितधारकों के साथ साझा करेंगे। वे इनोवेशन एक्सपो का भ्रमण करने के साथ-साथ मध्यप्रदेश पवेलियन का दौरा करेंगे और वहां मौजूद स्टार्टअप्स, इनोवेटर्स एवं उद्योग प्रतिनिधियों से सीधा संवाद भी करेंगे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सीईओ, निवेशकों और वैश्विक उद्योग प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन बैठकें कर मध्यप्रदेश में रणनीतिक निवेश के अवसरों और दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। गौरतलब है कि टीआईई ग्लोबल समिट-2026 में मध्यप्रदेश का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सिल्वर स्टेट पार्टनर के रूप में सक्रिय भागीदारी कर रहा है। यह सहभागिता 27 नवंबर 2025 को आयोजित एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 के दौरान द इंडस एंटरप्रेन्योर्स (टीआईई) राजस्थान के साथ हुए समझौते के अनुरूप है। समिट के माध्यम से मध्यप्रदेश अपनी नवस्थापित और प्रगतिशील नीतिगत व्यवस्था का प्रभावी प्रदर्शन करेगा, जो राज्य को अगली सेपीढ़ी की तकनीक, डिजिटल इनोवेशन और उच्च-मूल्य वाले रोजगार सृजन के लिए पसंदीदा गंतव्य बनाने की दिशा में केंद्रित है। साथ ही यह पहल भारत के टियर-2 शहरों में प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।