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राज्यसभा की 10 सीटों पर यूपी में सियासी हलचल, सपा को 2 सीटों की उम्मीद

लखनऊ यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों और विधान परिषद की 11 सीटों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. अगले दो महीने में इन सीटों के लिए चुनाव और चयन की पूरी प्रक्रिया पूरी होगी. राज्यसभा की इन 10 सीटों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है, जिनमें बीजेपी की 8, सपा की 1 और बसपा की 1 सीट शामिल है. बसपा के राज्यसभा से पूरी तरह खाली होने के बीच अब सबकी नजर बीजेपी और एनडीए के अतिरिक्त वोटों पर टिकी है, जबकि सपा के खाते में 2 सीटों का गणित बनता दिख रहा है।  लखनऊ से मिली जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर और नवंबर में त्योहारों के साथ-साथ सियासी समीकरण भी तेजी से बदलेंगे. जिन बीजेपी सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें पूर्व डीजीपी बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और बीएल वर्मा शामिल हैं. डॉ. दिनेश शर्मा का कार्यकाल भी 25 नवंबर तक था, लेकिन अंडमान-निकोबार के एलजी बनने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया, इसलिए उनकी सीट पर भी अब चुनाव होगा. इसके अलावा सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।  सूत्रों की मानें तो अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो सकता है. आमतौर पर अधिसूचना जारी होने से लेकर मतगणना तक पूरी प्रक्रिया में करीब 20 दिन का समय लगता है. यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन पिछले एक साल में 6 विधायकों के निधन के बाद अभी विधायकों की संख्या 397 रह गई है. मौजूदा गणित के हिसाब से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए करीब 37 विधायकों के वोट चाहिए होंगे।  बसपा विधानसभा में पहले ही शून्य हो चुकी है और रामजी गौतम का कार्यकाल खत्म होते ही पार्टी राज्यसभा में भी शून्य हो जाएगी. सपा के पास 101 विधायक हैं, जिससे उसे 2 सीटें मिलने का रास्ता बनता है और करीब 7 वोट अतिरिक्त बच जाएंगे. वहीं बीजेपी के पास 256 विधायक हैं और सहयोगी दलों को जोड़कर एनडीए का आंकड़ा करीब 289 बताया जा रहा है।  तीन निर्दलीय विधायकों और राजा भैया की पार्टी के 2 विधायकों के समर्थन से यह आंकड़ा 294 तक पहुंच जाता है, हालांकि सुभासपा के 2 विधायकों के सपा की तरफ झुकाव के चलते एनडीए की असल ताकत करीब 292 ही मानी जा रही है. इस हिसाब से बीजेपी और उसके सहयोगी दल 7 सीटें आसानी से जीत सकते हैं, लेकिन उसके बाद भी एनडीए के पास वोट बचेंगे जिससे दूसरी पसंद के वोट 10वीं सीट का फैसला कर सकते हैं। 

इंदौर जू में दिखेगी पानी के भीतर की दुनिया, 35 करोड़ में बनेगा आधुनिक एक्वेरियम

इंदौर इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में प्रदेश का पहला अंडरवाॅटर फिश एक्ववेरियम का काम शुरू हो चुका है। यह करीब डेढ़ एकड़ में बनेगा। इसके लिए प्राणी संग्रहालय में पांच फीट गहराई में खुदाई भी हो चुकी है। डेढ़ साल में इसके निर्माण को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। दस करोड़ रुपये से अधिक पहले चरण में खर्च किए जाएंगे। दर्शक जब अंडरवाॅटर फिश एक्वेरियम में प्रवेश करेंगे तो उन्हें अपने सिर के उपर से मछलियां और समुद्री जीव तैरते हुए दिखाई देंगे। इसकी योजना चार साल पहले नगर निगम ने बनाई थी, लेकिन अब उसे मूर्त रुप दिया जा रहा है। नगर निगम के बजट में भी इसकी घोषणा की गई है। मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने कहा कि अंडरवाॅटर फिश एक्वेरियम के बनने से चिडि़याघर के प्रति शहरवासियों का आकर्षण और बढ़ेगा। मनोरंजन शहवासियों को मिलेगा और नगर निगम की आय भी इससे बढ़ेगी। इसके अलावा नगर निगम में 14 डी थिएटर का निर्माण भी जल्दी शुरू होगा। इंदौर के प्राणी संग्रहालय (जू) में घूमने का मजा अब दोगुना होने वाला है। जल्द ही शहरवासियों को यहां समुद्र जैसी गहरी और खूबसूरत जलीय दुनिया का अहसास होगा। शहर के जू में एक आधुनिक अंडरवॉटर टनल एक्वेरियम बनाने की रुकी हुई योजना ने अब फिर से रफ्तार पकड़ ली है। नगर निगम इसे पीपीपी (PPP) मॉडल पर तैयार करने जा रहा है। करीब 35 करोड़ रुपये के बजट वाले इस भव्य प्रोजेक्ट के जरिए लोगों को सिर्फ रंग-बिरंगी मछलियां ही नहीं, बल्कि पेंगुइन, टच पूल और स्नॉर्कलिंग जैसे रोमांचक अनुभव भी मिलेंगे। पानी के बीच से गुजरती पारदर्शी टनल     इस पूरे प्रोजेक्ट की जान इसका 'अंडरवॉटर टनल' होगा, जिसके डिजाइन के लिए लगभग 128 वर्गमीटर की जगह तय की गई है। जब दर्शक इस पारदर्शी टनल से गुजरेंगे, तो उन्हें ऐसा लगेगा जैसे वे खुद पानी के भीतर चल रहे हों और मछलियां उनके चारों ओर तैर रही हों।     टनल में स्पष्ट रूप से देखने के लिए खास एक्रेलिक पैनल वाली खिड़कियां लगाई जाएंगी। जलीय जीवों को उनके अनुकूल माहौल देने के लिए पानी को लगातार फिल्टर करने, ऑक्सीजन की सप्लाई, और तापमान नियंत्रित करने वाले बेहद आधुनिक सिस्टम यहां काम करेंगे। मनोरंजन के साथ शिक्षा का भी बनेगा केंद्र     नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट और बाद में इसके रखरखाव व संचालन के लिए किसी अनुभवी एजेंसी की तलाश शुरू कर दी है। जू प्रभारी उत्तम यादव के मुताबिक, इस बार नियमों को थोड़ा लचीला बनाया गया है ताकि काम करने वाली एजेंसी आसानी से मिल सके।     इस पूरे प्रोजेक्ट को एक से डेढ़ साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि यह एक्वेरियम सिर्फ मछलियां देखने की जगह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे मीठे और समुद्री पानी के जीवों के बारे में जानकारी देने वाले एक बड़े मनोरंजन और शिक्षा केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा। पेंगुइन से लेकर स्नॉर्कलिंग तक, मिलेंगी ये शानदार सुविधाएं इस नए कॉम्प्लेक्स में पर्यटकों के लिए कई विश्वस्तरीय सुविधाएं मौजूद होंगी:     5 एक्वेरियम हॉल: यहां अलग-अलग प्रजातियों की मछलियों और जलीय जीवों को करीब से निहारने की सुविधा होगी।     पेंगुइन प्रदर्शनी: 75 वर्गमीटर के एक खास क्षेत्र में पेंगुइन देखने की व्यवस्था की जाएगी।     टच पूल और स्नॉर्कलिंग जोन: जलीय दुनिया को छूकर महसूस करने के लिए 'टच पूल' और पानी के भीतर का जीवन देखने के लिए 'स्नॉर्कलिंग जोन' भी बनाया जाएगा।     अन्य आकर्षण: इसके अलावा परिसर में 125 वर्गमीटर का एक पूल वाला तालाब, बेहतरीन तस्वीरों के लिए 'सेल्फी पॉइंट', आगंतुकों के खाने-पीने के लिए 'रेस्टोरेंट' और यादगार तोहफे खरीदने के लिए 'सुवेनियर शॉप' भी मौजूद रहेगी।  

किशाऊ समझौते से पंजाब बाहर, यमुना के पानी पर सरकार ने उठाए सवाल

चंडीगढ़  किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर विवाद बढ़ गया है। पंजाब सरकार अब इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। छह राज्यों के बीच हुए समझौते से पंजाब को बाहर रखा गया है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता नील गर्ग ने यह जानकारी दी। गर्ग ने कहा कि पंजाब इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ेगा। उनका कहना है कि यमुना के पानी में पंजाब के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। 15 सितंबर को नई दिल्ली में यह समझौता हुआ था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल मौजूद थे। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए। पंजाब इस समझौते का हिस्सा नहीं बना। पंजाब को इस प्रक्रिया से बाहर रखना स्वीकार्य नहीं है। 1954 में पंजाब के यमुना संबंधी अधिकार स्वीकार किए गए थे। पंजाब पुनर्गठन के बाद भी ये अधिकार खत्म नहीं माने जा सकते। पंजाब की आपत्ति और कानूनी आधार गर्ग ने बताया कि पंजाब की गैरमौजूदगी में उसके हितों को प्रभावित करने वाला फैसला नहीं हो सकता। पंजाब को यमुना में उसके हिस्से का पानी मिलना चाहिए। 1954 के समझौते की अनदेखी का कोई कानूनी आधार नहीं है। पंजाब को विश्वास में नहीं लेना आपत्तिजनक है। यह मामला अब नए कानूनी विवाद का रूप ले सकता है। क्या है किशाऊ बांध परियोजना किशाऊ परियोजना हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस यमुना की एक प्रमुख सहायक नदी है। इस परियोजना में 1,562 दस लाख घन मीटर जल भंडारण की क्षमता होगी। समझौते के तहत हरियाणा को 633 एमसीएम पानी मिलेगा। उत्तर प्रदेश को 411 एमसीएम, राजस्थान को 124 एमसीएम और दिल्ली को 80 एमसीएम पानी आवंटित किया गया है। परियोजना के लाभ और केंद्र का सहयोग परियोजना की बिजली उत्पादन क्षमता 422 मेगावाट होगी। इससे सालाना करीब 1,476 दस लाख यूनिट स्वच्छ बिजली पैदा होने का अनुमान है। लगभग 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा विकसित करने का लक्ष्य है।  केंद्र सरकार ने इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है। इसके वित्तीय बोझ का करीब 90 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार उठाएगी। यह परियोजना लंबे समय से अंतरराज्यीय जल बंटवारे के मतभेदों के कारण अटकी हुई थी।  किस राज्य को कितना पानी मिलेगा? परियोजना के तहत हरियाणा को 836 क्यूसेक पानी मिलने का प्रस्ताव है। वहीं, उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी मिलेगा। इस लिहाज से परियोजना केवल एक राज्य की जल जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के कई राज्यों के लिए जल उपलब्धता और अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत करने वाली पहल बन सकती है। क्या है किशाऊ परियोजना     किशाऊ परियोजना उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर टोंस नदी पर निर्मित की जाने वाली एक राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है।     टोंस नदी यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदी है।     इस परियोजना के तहत 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट का गुरुत्व बांध बनाया जाएगा।     निर्माण कार्य पूरा होने पर यह टिहरी बांध के बाद एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा बांध बन जाएगा।     इस बांध से 660 मेगावॉट हरित ऊर्जा क्षमता का सृजन होगा।     करीब 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली किशाऊ परियोजना की जल भंडारण क्षमता 1561.91 मिलियन घन मीटर है।     परियोजना में जल भंडारण के साथ बहुउद्देशीय उपयोग का प्रविधान है।     राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद निर्माण से जुड़ी आगे की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। क्या है किशाऊ परियोजना का उद्देश्य? हर साल लगभग 1,379 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। यह बिजली उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच समान रूप से बांटी जाएगी। इसकी जल भंडारण क्षमता 1,324 मिलियन घन मीटर होगी। परियोजना का उद्देश्य जल संरक्षण, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और बिजली उत्पादन जैसे बहुउद्देशीय लाभ सुनिश्चित करना है। यमुना को कैसे मिलेगा लाभ? किशाऊ बांध से बिजली और पानी के अलावा यमुना की सफाई करने में भी मदद मिलेगी। इससे मानसून के दौरान बाढ़ की विभीषिका को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। गर्मी के मौसम में टोंस और आगे चलकर यमुना नदी में निरंतर जल प्रवाह बनाए रखा जा सकेगा, जिससे यमुना नदी को साफ करने के अभियान में मदद मिल सकेगी। छह दशक से क्यों अटका था किशाऊ? किशाऊ परियोजना स्थापित करने की योजना करीब छह दशक पहले बनी। परियोजना को लेकर शुरुआती स्तर पर स्थल, भूगर्भीय परिस्थितियों और तकनीकी पहलुओं का अध्ययन हुआ। इसके बाद डीपीआर, लागत, जल बंटवारे और छह राज्यों की वित्तीय हिस्सेदारी जैसे मुद्दे सामने आते गए। परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा भी मिला, लेकिन अंतरराज्यीय सहमति का पेंच नहीं सुलझ पाया। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश ने आगे बढ़कर संयुक्त उपक्रम बनाया, मगर परियोजना को वास्तविक गति देने के लिए छह राज्यों के बीच व्यापक सहमति जरूरी थी। अब यही सबसे बड़ा अड़ंगा दूर होता दिखाई दे रहा है। किशाऊ में कितना पानी जमा होगा? नई डीपीआर ने परियोजना की तस्वीर काफी बदल दी है। बांध की ऊंचाई घटाकर 232.6 मीटर की गई है, लेकिन जलाशय की जीवंत भंडारण क्षमता बढ़ाकर 1561.91 एमसीएम कर दी गई है। पहले यह क्षमता करीब 1324 एमसीएम थी। यानी नई व्यवस्था में लगभग 237.81 एमसीएम अतिरिक्त पानी संग्रहित किया जा सकेगा। लीटर में समझें तो यह करीब 23,781 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी है। यही अतिरिक्त भंडारण मानसून के दौरान पानी को रोकने और गैर-मानसूनी महीनों में उसका इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाएगा। किशाऊ के आंकड़े एक नजर में बांध की ऊंचाई : 232.6 मीटर जीवंत भंडारण क्षमता : 1561.91 एमसीएम अतिरिक्त भंडारण : 237.81 एमसीएम स्थापित बिजली क्षमता : 422 मेगावाट औसत वार्षिक बिजली उत्पादन : 1457 मिलियन यूनिट पुराने मुकाबले अतिरिक्त उत्पादन : 78 मिलियन यूनिट प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र : लगभग 97,076 हेक्टेयर एमओयू में राज्य : छह

सेवा संकल्प अभियान के तहत विद्यार्थियों को दिया कैरियर मार्गदर्शन

रायपुर सेवा संकल्प अभियान के तहत विद्यार्थियों को दिया कैरियर मार्गदर्शन सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत रायगढ़ जिले के  शासकीय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, चक्रधरनगर रायगढ़ में कैरियर मार्गदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र के तत्वावधान में किया गया।   कार्यक्रम में विद्यार्थियों को शिक्षा के बाद उपलब्ध विभिन्न कैरियर विकल्पों, रोजगार की संभावनाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया। विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप कैरियर का चयन करने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने कैरियर से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य की पढ़ाई और रोजगार के अवसरों को लेकर सही दिशा प्रदान करना रहा। इस अवसर पर संबंधित अधिकारी, स्कूल के प्राचार्य एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

सेवा की कहानी: श्रमिक परिवारों को मिल रहा योजनाओं का सीधा लाभ

रायपुर लैलूंगा की महिला श्रमिक देववंती सिदार को मिली 20 हजार रुपए की मातृत्व सहायता शासन के निर्देशानुसार एवं रायगढ़ जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद और पात्र हितग्राहियों तक सीधे पहुंचाया जा रहा है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शिविरों और मैदानी स्तर पर हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें संबंधित योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इससे श्रमिक और ग्रामीण परिवारों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनावश्यक परेशानी नहीं उठानी पड़ रही है।  इसी क्रम में रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के ग्राम कोडकेल की पंजीकृत महिला श्रमिक देववंती सिदार को श्रम विभाग के भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की मिनीमाता महतारी जतन योजना का लाभ मिला। प्रसव के बाद उनके आवेदन का त्वरित निराकरण करते हुए 20 हजार रुपए की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से अंतरित की गई। सेवा की कहानी में देववंती सिदार ने बताया कि उन्हें योजना की जानकारी आसानी से मिली और आवेदन की प्रक्रिया भी सरल रही। राशि सीधे खाते में मिलने से उन्हें काफी राहत मिली। प्रसव के बाद यह राशि मेरे और मेरे नवजात शिशु के स्वास्थ्य और पोषण की देखभाल में बहुत बड़ा सहारा बनी है। उन्होंने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी और सहायता आसानी से मिलना हम जैसे श्रमिक परिवारों के लिए बहुत उपयोगी है।

ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और बहुमंजिला भवनों के फायर सेफ्टी ऑडिट को मिली मंजूरी

रायपुर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की 87वीं बैठक में लिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णय छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की 87वीं मंडल सम्मिलन बैठक मंडल मुख्यालय, नवा रायपुर अटल नगर में मंडल अध्यक्ष  अनुराग सिंह देव की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में प्रदेश में आवासीय एवं व्यावसायिक सुविधाओं के विस्तार, नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने, भवनों की सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने, पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने तथा हितग्राहियों को राहत देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। *ईवी चार्जिंग स्टेशन के लिए चिन्हित भूमि के उपयोग की प्रक्रिया को मंजूरी* मंडल अध्यक्ष  अनुराग सिंह देव ने बताया कि पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में मंडल की चिन्हित एवं स्वामित्व वाली भूमियों पर इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए चार्जिंग स्टेशनों के डिजाइन, वित्त पोषण, आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण, कमीशनिंग, संचालन एवं रखरखाव की व्यवस्था के लिए लाइसेंस फीस मॉडल के तहत एजेंसी को भूमि उपयोग का अधिकार प्रदान करने की प्रक्रिया को मंजूरी दी गई है। इस निर्णय से मंडल की विभिन्न आवासीय योजनाओं और प्रमुख क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे ईवी उपयोगकर्ताओं को आवश्यक सुविधा उपलब्ध होने के साथ प्रदेश में स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। *बहुमंजिला भवनों में फायर सेफ्टी ऑडिट होगा, योग्य फर्मों का होगा एम्पेनलमेंट* बैठक में मंडल की बहुमंजिला आवासीय एवं व्यावसायिक इमारतों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके अंतर्गत भवनों में उपलब्ध अग्नि सुरक्षा उपकरणों, आपातकालीन व्यवस्थाओं और निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुपालन की नियमित जांच सुनिश्चित की जाएगी। फायर सेफ्टी ऑडिट के लिए नेशनल बिल्डिंग कोड-2016 के भाग-4 तथा छत्तीसगढ़ अग्निशमन एवं आपात सेवा अधिनियम, 2018 के अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए योग्य फायर सेफ्टी ऑडिटरों एवं फर्मों के एम्पेनलमेंट की प्रक्रिया को भी मंजूरी प्रदान की गई है। इससे भवनों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा और कमियों के समयबद्ध निराकरण की दिशा में व्यवस्था मजबूत होगी। *बकाया राशि एकमुश्त जमा करने वाले हितग्राहियों को राहत* मंडल अध्यक्ष  अनुराग सिंह देव ने बताया कि हितग्राहियों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से बकाया राशि एकमुश्त जमा करने वाले हितग्राहियों के लिए विलंबित अवधि के ब्याज तथा वाटर चार्ज के सरचार्ज में 50 प्रतिशत की छूट दिए जाने का निर्णय लिया गया है। इससे बकाया राशि का एकमुश्त भुगतान करने वाले हितग्राहियों को आर्थिक राहत मिलेगी और लंबित देयताओं के निराकरण को प्रोत्साहन मिलेगा। *आवासीय योजनाओं के विकास कार्यों के लिए लगभग 55 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति* बैठक में प्रदेश की विभिन्न आवासीय योजनाओं के अंतर्गत विकास एवं निर्माण कार्यों के लिए लगभग 55 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इससे विभिन्न क्षेत्रों में आवासीय सुविधाओं के विस्तार के साथ आवश्यक अधोसंरचना एवं निर्माण कार्यों को गति मिलेगी। *भूमि आवंटन, क्वींस क्लब और नामांतरण शुल्क से जुड़े भी लिए गए निर्णय* बैठक में शैक्षणिक प्रयोजन के लिए आरक्षित भूखंडों के आवंटन संबंधी निर्देश-2026 में विकसित भूमि के प्रीमियम में आंशिक संशोधन को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इसी प्रकार क्वींस क्लब ऑफ इंडिया, रायपुर के विकास, संचालन एवं रखरखाव के लिए लाइसेंस आधार पर पीपीपी मोड के तहत एजेंसी नियुक्त करने की स्वीकृति प्रदान की गई। मंडल की आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों के हस्तांतरण से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए बिना विक्रय अनुमति के आवासीय भवन/भूखंड अथवा व्यावसायिक भवन/भूखंड का विक्रय किए जाने की स्थिति में हस्तांतरण/नामांतरण शुल्क दोगुना भारित कर हस्तांतरण/नामांतरण किए जाने की स्वीकृति भी प्रदान की गई। बैठक में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष  अनुराग सिंह देव, मंडल आयुक्त  अवनीश कुमार शरण, वित्त संचालक  ऋषभ पाराशर, विशेष सचिव आवास एवं पर्यावरण  देवेन्द्र भारद्वाज, नगर तथा ग्राम निवेश के  संदीप बांगड़े,  जी.आर. रावटे, मुख्य अभियंता पीडब्ल्यूडी  हितेश बोराड तथा क्षेत्रीय प्रमुख हुडको सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।  

युवाओं के समग्र विकास के लिए योजनाओं में समन्वय और विश्वसनीय डाटा जरूरी : सचिव रघुराज एम आर

भोपाल  युवाओं को शिक्षा, कौशल, रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए विभागीय योजनाओं में बेहतर समन्वय, विश्वसनीय डाटा और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन को युवाओं के समग्र विकास का प्रभावी समन्वित मंच बनाया जाए। यह निर्देश तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के सचिव  रघुराज एम आर ने मंगलवार को मंत्रालय में मिशन की अंतरविभागीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। बैठक में भा-वाणी (BhaVANI), युवा संवाद, एनसीसी (NCC), एनएसएस (NSS), एनवाईके (NYK), पर्यावरण संरक्षण, एकलव्य एवं कन्या शिक्षा परिसर, पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस और सांदीपनि विद्यालय सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति, लक्ष्यों एवं डाटा की समीक्षा की गई। सचिव  रघुराज ने सभी विभागों को योजनाओं की अद्यतन एवं प्रमाणिक प्रगति का डाटा समय पर उपलब्ध कराने तथा ऑनलाइन डाटा को निरंतर अद्यतन रखने के लिए एपीआई की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल डाटा के प्रभावी उपयोग से योजनाओं की निगरानी और उनके परिणामों का आकलन अधिक सटीकता से किया जा सकेगा।  रघुराज ने ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा प्रत्येक वालंटियर को युवाओं से जोड़कर साक्षरता और क्षमता विकास को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। पंचायत, ग्रामीण विकास एवं नगरीय विकास विभाग के सहयोग से ‘युवा संवाद’ और ‘युवा संगम’ जैसी गतिविधियों को प्रभावी रूप से संचालित करने पर भी जोर दिया गया। सचिव  रघुराज ने विभागीय आईईसी (IEC) गतिविधियों में समन्वय स्थापित कर योजनाओं और अवसरों की जानकारी युवाओं तक पहुंचाने तथा स्कूल छोड़ चुके (ड्रॉप आउट) बच्चों को पुनः शिक्षा एवं कौशल विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक में 13 जनवरी 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के अनुपालन प्रतिवेदन की समीक्षा की गई। लंबित बिंदुओं पर समयबद्ध कार्रवाई तथा मिशन के प्रमुख कार्य-प्रदर्शन संकेतकों (KPI) को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप अद्यतन कर अधिक परिणामोन्मुख बनाने के निर्देश दिए गए। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं एवं अवसरों को एकीकृत करते हुए युवा शक्ति मिशन को परिणामोन्मुख और प्रभावी मंच के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।  

मंत्री परमार की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल की सामान्य परिषद की बैठक हुई संपन्न

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल की सामान्य परिषद की बैठक हुई। बैठक में विद्यार्थियों के हित, शैक्षणिक गुणवत्ता, संस्थान की अधोसंरचना तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों से जुड़े विषयों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, सुरक्षित परिसर और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक के प्रारंभ में पिछली बैठक का पालन प्रतिवेदन एवं कार्यवाही विवरण प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों की सुविधाओं और सुरक्षा को प्राथमिकता बैठक में मंत्री  परमार ने संस्थान में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अग्निशमन उपकरण स्थापित करने का विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए। विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से संबंधित गतिविधियों को सामान्य बजट भाग-1 में शामिल करते हुए वार्षिक गतिविधियों के लिए 50 हजार रुपए का प्रावधान किया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 के विशेष अन्य आकस्मिक व्यय में भी 10 लाख रुपए की वृद्धि की गई, जिससे संस्थान की विभिन्न गतिविधियों का सुचारु संचालन किया जा सकेगा। विद्यार्थियों के अध्ययन की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय भवन की व्यवस्थाओं में सुधार तथा अध्ययन कक्ष को वातानुकूलित करने का निर्णय लिया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत संचालित पाठ्यक्रमों में मेजर एवं माइनर विषयों के स्वैप तथा डबल मेजर के लिए विद्यार्थियों से लिए जाने वाले शुल्क के प्रस्ताव को भी सामान्य परिषद ने मान्यता प्रदान की। बीबीए एवं एमबीए प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों से नियमानुसार विश्वविद्यालय नामांकन शुल्क लिए जाने को भी स्वीकृति दी गई। नवाचार, कौशल और रोजगार के अवसरों पर जोर विद्यार्थियों के नवाचार एवं रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए संस्थान के इनक्यूबेशन सेंटर में मानसेवी रूप से सीईओ अथवा मैनेजर नियुक्त करने की अनुमति दी गई। यह अधिकारी इनक्यूबेशन गतिविधियों के साथ प्लेसमेंट संबंधी कार्यों में भी सहयोग करेगा। संस्थान में रिमोट पायलट एवं ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव पर भोपाल स्थित आईआईएसईआर तथा चित्रकूट में संचालित इसी प्रकार के केंद्रों का अध्ययन करने और उनके अनुरूप विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को बजट स्वीकृति के लिए भेजने के निर्देश दिए गए। संस्थान के कृषि विभाग के लिए पर्याप्त कक्षाओं, सेमिनार हॉल तथा विभागाध्यक्ष एवं शिक्षकों के लिए आवश्यक स्थान की व्यवस्था हेतु विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए गए। शैक्षणिक गुणवत्ता और NAAC सुझावों पर निरंतर कार्रवाई संस्थान द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) द्वारा दिए गए सुझावों के अनुरूप निरंतर कार्रवाई की जा रही है। सामान्य परिषद ने इन बिंदुओं पर गंभीरता से कार्य करते हुए संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता एवं व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शिक्षकों और कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय संस्थान में कार्यरत मानसेवी शिक्षकों की मांगों पर संवेदनापूर्वक विचार करते हुए सामान्य परिषद ने निर्णय लिया कि अब इन्हें ‘अतिथि विद्वान’ के नाम से संबोधित किया जाएगा। उन्हें 13 आकस्मिक अवकाश एवं 3 ऐच्छिक अवकाश दिए जाने के निर्देश भी दिए गए। संस्थान में कार्यरत मानसेवी कर्मचारियों के मानदेय में प्रतिवर्ष 7.5 प्रतिशत वृद्धि करने तथा यह वृद्धि आगामी तीन वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया गया। कन्या छात्रावास की मैनेजर का मानदेय 22 हजार 374 रुपए से बढ़ाकर 30 हजार 287 रुपए प्रतिमाह करने की भी स्वीकृति दी गई। संस्थान में आमंत्रित विशेषज्ञों को व्याख्यान अथवा बैठक के लिए 1,500 रुपए प्रति व्याख्यान/बैठक तथा कार्यालयीन परामर्श के लिए 700 रुपए प्रति बैठक मानदेय दिए जाने को भी स्वीकृति दी गई। आउटसोर्स कर्मचारियों की सामान्य आवश्यकता की पूर्ति सेडमैप के माध्यम से तथा उच्च कुशलता से अधिक योग्यता एवं विशेष दक्षता वाले कर्मचारियों के लिए संस्थान स्तर पर विज्ञापन जारी कर नियुक्ति करने के निर्देश दिए गए। संस्थान की कार्यक्षमता बढ़ाने प्रशासनिक निर्णय संस्थान में 15 लाख रुपए तक के बजट एवं खरीदी संबंधी प्रस्तावों पर निर्णय लेने के लिए संचालक को अधिकृत किया गया। इससे संस्थान की आवश्यक गतिविधियों और व्यवस्थाओं से संबंधित निर्णयों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा। बैठक के प्रारंभ में संस्थान द्वारा प्रकाशित वार्षिक पत्रिका ‘एक्सेल एसेंस’ का विमोचन किया गया। बैठक में उच्च शिक्षा के अपर मुख्य सचिव  अनुपम राजन, आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा, माधव साइंस कॉलेज उज्जैन के प्राचार्य डॉ. हरीश व्यास, संस्थान के संचालक डॉ. प्रज्ञेश अग्रवाल सहित सामान्य परिषद के अन्य सदस्य एवं विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

जबलपुर-भोपाल-इंदौर कॉरिडोर में बनेगी इंडस्ट्रियल टाउनशिप, 2 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

भोपाल  जबलपुर से भोपाल और भोपाल से इंदौर कॉरिडोर (एक्सप्रेस-वे) बनाए जा रहे हैं। 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक के इस प्रोजेक्ट को सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के तौर पर तैयार कर रही है। कॉरिडोर पर चार बड़े औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। इससे आने वाले समय में दो लाख से अधिक रोजगार सृजित होंगे। कॉरिडोर पर स्किल सिटी बनाई जाएगी इसके साथ इंडस्ट्रियल टाउनशिप भी बनाई जाएगी। प्रदेश के युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए इस कॉरिडोर पर स्किल सिटी बनाई जाएगी। यह जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक से पहले मंत्रियों को दी।  

निःशुल्क चिकित्सा शिविर में 458 मरीजों को मिला परामर्श, 100 औषधीय पौधों का किया गया रोपण

रायपुर सेवा संकल्प अभियान एवं 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर रायगढ़ जिले के शासकीय आयुर्वेद औषधालय बुनगा द्वारा ‘स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद’ थीम पर विभिन्न जनजागरूकता एवं स्वास्थ्य गतिविधियों का आयोजन किया गया।  आयोजन के तहत निःशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा शिविर, काढ़ा वितरण, नशामुक्ति शपथ एवं जागरूकता, स्वच्छता जागरूकता, मितानिन प्रशिक्षण, योग शिविर तथा औषधीय पौधारोपण जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। छिछोर उमरिया, सिहा, ठाकुरपाली, गोतमा एवं स्कूल पारा बुनगा में लगाए गए चिकित्सा शिविरों में कुल 458 मरीजों को आयुर्वेद चिकित्सा परामर्श प्रदान कर निःशुल्क औषधियों का वितरण किया गया।   शिविरों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, वातरोग, ऋतुचर्या एवं योगाभ्यास सहित विभिन्न आयुर्वेदिक विषयों पर आधारित पाम्पलेट वितरित कर लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी गई। साथ ही आयुर्वेद और प्रकृति के समन्वय का संदेश देते हुए 100 औषधीय पौधों का रोपण किया गया तथा उनके संरक्षण का संकल्प लिया गया। गांव के सामुदायिक भवनों एवं चौक-चौराहों पर आयोजित इन गतिविधियों में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम में डॉ. जागृति पटेल, फार्मासिस्ट भोज मालाकार, वर्षा ठेठवार, योग प्रशिक्षक दुलामनी रजक, सरपंच एवं मितानिनों का सक्रिय योगदान रहा।