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बिहार में राशन कार्ड की सूची पर हो रही है छंटनी, 54 लाख से ज्यादा नाम हटाए जाने की संभावना

पटना  बिहार सरकार ने पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) में पारदर्शिता और पात्र लोगों तक ही लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अब तक की सबसे बड़ी वेरिफिकेशन ड्राइव शुरू कर दी है. राज्यभर में पहले चरण में 54.20 लाख से अधिक नामों को राशन कार्ड सूची से हटाने की तैयारी है. यह कार्रवाई तब तेज हुई जब राशन कार्डों को आधार से लिंक किया गया और कई विभागों के रिकॉर्ड मिलान में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आईं. राज्यभर में बड़े आंकड़े सामने आए ऑफिशियल रिपोर्ट बताती है कि सीतामढ़ी में करीब 99 हजार, मुजफ्फरपुर में 2.34 लाख और पूर्वी चंपारण में लगभग 1.5 लाख ऐसे लाभार्थी चिह्नित किए गए हैं, जो पात्रता के मानकों पर खरे नहीं उतरते. इन जिलों ने विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. पटना में 10.33 लाख एक्टिव राशन कार्ड हैं, जिनमें शहरी क्षेत्र के 2.30 लाख कार्ड शामिल हैं. चल रहे E-KYC वेरिफिकेशन के दौरान अनुमान लगाया गया है कि करीब 65 से 70 हजार नाम गलत दस्तावेजों या अयोग्य श्रेणी के कारण हटाए जा सकते हैं. डेटा मिलान में खुली गड़बड़ियां सप्लाई विभाग ने राशन कार्ड डेटा को रेवेन्यू एवं लैंड रिफॉर्म्स, ट्रांसपोर्ट, इनकम टैक्स और सिविल रजिस्ट्रेशन डेटाबेस से मैच किया. इसमें चौंकाने वाली विसंगतियां सामने आईं.     कई लाभार्थियों के पास 2.5 एकड़ से अधिक जमीन पाई गई.     कई लोग चार पहिया वाहन के मालिक निकले.     इनकम टैक्स रिटर्न भरने वाले भी राशन सूची में शामिल मिले.     सरकारी रिकॉर्ड में मृत व्यक्तियों के नाम भी अब तक सक्रिय थे. इसके बाद जिलों के सप्लाई अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी नाम को हटाने से पहले फील्ड वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से किया जाए. केंद्र के निर्देश के बाद प्रक्रिया में आई तेजी वन नेशन, वन राशन कार्ड स्कीम के लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से अपडेटेड और साफ डेटा मांगा. इसके बाद बिहार में वेरिफिकेशन की रफ्तार और बढ़ गई. गलत दस्तावेज जमा करने वालों को विभाग नोटिस भेजेगा. 90 दिनों के भीतर उनकी पात्रता की दोबारा जांच होगी. अगर उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित नामों को स्थायी रूप से सूची से हटा दिया जाएगा. 

बच्‍चों की लघु नाटिका प्रस्‍तुत: अंगुलियों और अंगूठें की लड़ाई में हथेली की समझाइश

भोपाल लघु नाटिका की शुरुआत पांच उंगलियों से हुई जो आपस में बहस कर रही थीं, प्रत्येक कह रही थी कि मैं महान हूँ। "मैं महान हूँ!" "नहीं, मैं महान हूँ!" उंगलियाँ अपनी सामूहिक शक्ति से अनजान, बहस करती रहीं। तभी हथेली वहाँ आई और इस हलचल को देखकर मुस्कराई। नर्म मुस्कान के साथ, हथेली ने उंगलियों को धीरे से समझाया कि वे व्यक्तिगत रूप से महान नहीं हैं, बल्कि एक साथ मिलकर एक शक्तिशाली मुट्ठी बनाती हैं। "तुम साथ में काम करने पर मजबूत हो, अलग-अलग नहीं," इस बात पर जोर दिया। उंगलियों ने अपनी गलती का एहसास किया और अपनी सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक साथ जुड़ गईं। दर्शकों ने ताली बजाई जब छोटे कलाकारों ने एकता की शक्ति का प्रदर्शन किया। यह लघु नाटिका मंचित की गई रातीबड मार्ग स्थित शारदा विद्या मंदिर परिसर में, जहां स्‍कूल के केजी टू-बी के छोटे बच्चों ने अंगुलियों और हथेलियों के माध्‍यम से यह विचारोत्तेजक लघु नाटिका प्रस्तुत की और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। "एकता में शक्ति" नामक इस प्रदर्शन ने एक टीम के रूप में मिलकर काम करने के महत्व पर प्रकाश डाला। लघु नाटिका ने प्रभावी ढंग से यह संदेश दिया कि जब व्यक्ति अपने मतभेदों को अलग रखकर एक साथ काम करते हैं, तो वे महान चीजें हासिल कर सकते हैं। केजी 2-बी के छात्रों ने अपनी रचनात्मकता, टीम वर्क और इस मूल्यवान सबक की समझ का प्रदर्शन किया। ऐसी अर्थपूर्ण और मनोरंजक लघु नाटिका प्रस्तुत करने के लिए सभी बच्‍चों और उनके मेंटर्स को बधाई दी गई.   

पीएमसी के एमडी गढ़पाले जब कन्ट्रोल रूम में निरीक्षण कर रहे थे तब बिजली की मांग 19000 मेगावॉट के शीर्ष पर पहुंची

भोपाल मध्यप्रदेश के ऊर्जा सचिव व एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध संचालक श्री विशेष गढ़पाले ने आज शक्तिभवन में पावर मैनेजमेंट कंपनी के कन्ट्रोल रूम का सुबह 11 बजे जिस वक्त निरीक्षण कर रहे थे उसी समय मध्यप्रदेश के इतिहास में सर्वाधिक बिजली की मांग 19113 मेगावाट दर्ज हुई। मध्यप्रदेश में बिजली की मांग पहली बार 19000 मेगावॉट की शीर्ष मांग पर पहुंची है। ऊर्जा सचिव ने कन्ट्रोल रूम में रियल टाइम में बिजली की मांग और उसकी शतप्रतिशत सप्लाई को मॉनीटर पर देखा। एमडी श्री गढ़पाले ने भविष्य में बिजली की मांग 20 हजार मेगावॉट तक पहुंचने की संभावना को देखते हुए निर्देश दिया कि बिजली की इस प्रकार शेड्यूलिंग की जाए जिससे कि ऐसी स्थि‍ति‍में प्रदेश में शतप्रतिशत बिजली की सप्लाई संभव हो। इस अवसर पर पावर मैनेजमेंट कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक श्री पी.के. जैन व मुख्य महाप्रबंधक मानव संसाधन व प्रशासन राजीव गुप्ता सहित अभियंता उपस्थि‍त थे। एमडी श्री गढ़पाले ने कन्ट्रोल रूम की कार्यप्रणाली का गहन निरीक्षण करते हुए प्रत्येक बिन्दु का विश्लेषण किया। उन्होंने मेरिट आर्डर सिद्धांत के आधार पर किस प्रकार बिजली की शेड्यूलिंग की जाती है उसे प्रत्यक्ष तौर पर देखा। ऊर्जा सचिव ने रियल टाइम में पॉवर मैनेजमेंट की कार्यपणाली को देख कर उचित निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनी में हो रही विद्युत सप्लाई को मॉनीटर पर अवलोकन किया।  

रेल सुरक्षा रिकॉर्ड सुधार में वृद्धि : वार्षिक दुर्घटनाएं 2004-14 के औसत 171 से घटकर 2025-26 में अब तक 11 रह गई हैं

सुरक्षा बजट लगभग तीन गुना बढ़कर 2013-14 के 39,463 करोड़ रूपए से चालू वित्त वर्ष में 1,16,470 करोड़ रूपए हो गया है अश्विनी वैष्णव ने कहा- कोहरे से बचाव के उपकरणों की संख्या 288 गुना बढ़ी है — 2014 के 90 से बढ़कर 2025 में 25,939 हो गई है जबलपुर भारतीय रेल में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। किसी भी असामान्य घटना की रेलवे प्रशासन द्वारा गहन जांच की जाती है। तकनीकी कारणों के अलावा किसी अन्य कारण की आशंका होने पर राज्य पुलिस की सहायता ली जाती है।    कुछ मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से भी मार्गदर्शन लिया जाता है। हालांकि, जांच का प्राथमिक माध्यम राज्य पुलिस ही है। यह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है। इसके अंतर्गत आपराधिक गतिविधियों की जांच, कानून व्यवस्था बनाए रखना और पटरियों, पुलों, सुरंगों आदि रेलवे के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।    वर्ष 2023 और 2024 में रेलवे ट्रैक से छेड़छाड़/तोड़फोड़ की सभी घटनाओं में, राज्यों की पुलिस/जीआरपी और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा मामले दर्ज किए गए। इसके बाद जांच, अपराधियों की गिरफ्तारी की गई और उन पर मुकदमा चलाया गया।    रेलवे द्वारा राज्य पुलिस/जीआरपी के साथ बेहतर समन्वय, ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए समन्वित कार्रवाई और निगरानी के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं: * चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों और असुरक्षित इलाकों में रेलकर्मियों, रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ), जीआरपी और सिविल पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से लगातार गश्त की जा रही है। * उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों, असुरक्षित इलाकों में गश्त करने और खतरों को प्रभावी ढंग से कम करने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने हेतु विशेष दल गठित किए गए हैं। * रेलवे पटरियों के पास पड़ी सामग्री को हटाने के लिए नियमित अभियान चलाए जा रहे हैं। इसका उपयोग शरारती तत्व रेलवे ट्रैक पर रखकर अवरोध उत्पन्न करने के लिए कर सकते हैं। * रेलवे ट्रैक के पास रहने वाले लोगों को ट्रैक पर अवांछित सामग्री रखने, रेल घटकों को हटाने के बाद होने वाली संभावित घटनाओं के परिणामों के बारे में जागरूक किया जा रहा है और उनसे सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने का अनुरोध किया जा रहा है। * रेलवे राज्य स्तरीय सुरक्षा समिति (एसएलएससीआर) की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इनका गठन प्रत्येक राज्य में सम्बंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के पुलिस महानिदेशक/पुलिस आयुक्त की अध्यक्षता में किया गया है। इसमें रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ), जीआरपी और खुफिया इकाइयों के प्रतिनिधि शामिल हैं। अपराध पर नियंत्रण, मामलों के पंजीकरण, उनकी जांच और रेलवे परिसर के साथ-साथ चलती ट्रेनों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आरपीएफ द्वारा राज्य पुलिस/जीआरपी अधिकारियों के साथ सभी स्तरों पर सक्रिय रूप से घनिष्ठ संपर्क स्थापित किया जाता है। इसमें तोड़फोड़ की घटनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है और खुफिया जानकारी साझा की जाती है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। उपरोक्त के अलावा, स्थिति के अनुसार एनआईए और सीबीआई जैसी विशेष एजेंसियां ​​भी शामिल हैं। * केंद्रीय और राज्य खुफिया एजेंसियों के अलावा, आरपीएफ की खुफिया इकाइयां, यानी सीआईबी और एसआईबी को नियमित रूप से जागरूक किया जाता है और उन्हें निर्देश दिए जाते हैं कि वे खुफिया जानकारी एकत्र करें और पुलिस अधिकारियों के समन्वय से तोड़फोड़ के प्रयासों का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें।    ट्रेन संचालन में सुरक्षा सुधारने के लिए भारतीय रेल द्वारा कई उपाय किए गए हैं। पिछले कुछ वर्षों में उठाए गए विभिन्न सुरक्षा उपायों के परिणामस्वरूप, दुर्घटनाओं की संख्या में भारी कमी आई है। नीचे दिए गए ग्राफ में दर्शाए अनुसार, परिणामी ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 2014-15 में 135 से घटकर 2024-25 में 31 हो गई है।  गौरतलब है कि 2004-14 की अवधि के दौरान परिणामी रेल दुर्घटनाओं की संख्या 1711 थी (औसतन 171 प्रति वर्ष), जो 2024-25 में घटकर 31 और 2025-26 में (नवंबर 2025 तक) और भी घटकर 11 रह गई। रेल संचालन में सुरक्षा बढ़ाने के लिए अपनाए गए विभिन्न सुरक्षा उपाय इस प्रकार हैं:- 1) भारतीय रेल में सुरक्षा सम्‍बंधी गतिविधियों पर व्यय में पिछले कुछ वर्षों में वृद्धि हुई है। 2) मानव विफलता के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने के लिए 31.10.2025 तक 6,656 स्टेशनों पर बिंदुओं और संकेतों के केंद्रीकृत संचालन के साथ विद्युत/इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाए गए हैं 3) लेवल क्रॉसिंग (एलसी) गेटों पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए 31.10.2025 तक 10,098 लेवल क्रॉसिंग गेटों पर इंटरलॉकिंग की व्यवस्था की गई है। 4) विद्युत माध्यम से ट्रैक की उपलब्धता की पुष्टि करके सुरक्षा बढ़ाने के लिए 31.10.2025 तक 6,661 स्टेशनों पर पूर्ण ट्रैक सर्किटिंग की व्यवस्था की गई है। 5) कवच एक अत्यंत तकनीकी रूप से उन्नत प्रणाली है। इसके लिए उच्चतम स्तर के सुरक्षा प्रमाणन की आवश्यकता होती है। कवच को जुलाई 2020 में राष्ट्रीय एटीपी प्रणाली के रूप में अपनाया गया था। कवच को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। प्रारंभ में, कवच संस्करण 3.2 को दक्षिण मध्य रेलवे के 1465 आरकेएम और उत्तर मध्य रेलवे के 80 आरकेएम पर तैनात किया गया था। कवच विनिर्देश संस्करण 4.0 को आरडीएसओ द्वारा 16.07.2024 को मंजूरी दी गई थी। व्यापक और विस्तृत परीक्षणों के बाद, कवच संस्करण 4.0 को दिल्ली-मुंबई मार्ग पर पलवल-मथुरा-कोटा-नागदा खंड (633 किमी) और दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर हावड़ा-बर्दवान खंड (105 किमी) पर सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया है।  

रायपुर : प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना ने बदली किसानों की किस्मत

रायपुर  प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY)  2025-26 से शुरू की गई, जिसका लक्ष्य 100 कम प्रदर्शन वाले कृषि जिलों में 1.7 करोड़ किसानों की आय और कृषि उत्पादकता बढ़ाना है, जिसके लिए 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं को समन्वित किया गया है। इसे सिंचाई, भंडारण, आसान ऋण तथा फसल विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है, ताकि किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी            खेती-किसानी आधारित जिले जशपुर में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की कृषि-उन्मुख नीतियों और प्रदेश में योजनाओं की तेज गति से क्रियान्वयन के कारण किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज, सिंचाई सहायता और कृषि विभाग के निरंतर मार्गदर्शन का व्यापक लाभ मिल रहा है। इससे किसान अब कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। जिले के बगीचा विकासखंड के किसान श्री सुधीर लकड़ा (उरांव) इस योजना के प्रत्यक्ष लाभार्थी के रूप में सामने आए हैं। उत्पादकता में हुआ सुधार           श्री सुधीर लकड़ा के पास कुल 3.400 हेक्टेयर भूमि है, जिसमें उन्हें समय-समय पर शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला है। आत्मा योजना के तहत ग्रीष्मकालीन मक्का कार्यक्रम, डीएमएफ मद से ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों की उपलब्धता तथा सौर सुजला योजना के अंतर्गत सोलर सिंचाई सुविधा ने उनकी खेती को सुगम और कम लागत वाला बनाया है। कृषि विभाग के सहयोग से उन्हें खेती के आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाने का अवसर मिला, जिससे उनकी उत्पादकता में सुधार हुआ। किसान की आय में हुई बढ़ोत्तरी           प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत स्थानीय कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा उन्हें धान के स्थान पर प्री-बीज ग्रेड मक्का की खेती करने की सलाह दी गई। विभाग द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराए गए 08 किलोग्राम मक्का बीज से उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल लगाई। उचित देखरेख, पोषक तत्व खाद, दवाइयों और तकनीकी मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप उन्हें लगभग 10 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ, जिससे उनकी कुल आय करीब 15,000 रुपये तक पहुँची। कृषि में आधुनिक तकनीक के उपयोग को  मिल रहा बढ़ावा         (PMDDKY)योजना के माध्यम से क्षेत्र में फसल उत्पादन में वृद्धि, सिंचाई सुविधाओं में सुधार, भंडारण क्षमता विकास तथा कृषि में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है। यह योजना अनाज, दलहन, तिलहन में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के साथ ही मशीनीकरण, जैविक खेती और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। फसल की गुणवत्ता सुधारने में मदद           श्री सुधीर लकड़ा बताते हैं कि इस योजना ने उनकी खेती का स्वरूप बदल दिया है। विभाग से प्राप्त प्रशिक्षण, उन्नत बीज और समय पर सलाह ने उनकी फसल की गुणवत्ता सुधारने में मदद की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई यह किसान-हितैषी योजना और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र को मिल रहा समर्थन उनकी आमदनी बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है। कृषि आधारित रोजगार से जोड़ने पर भी विशेष ज़ोर           प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को आधुनिक और सशक्त बनाते हुए किसानों की आय को वर्ष 2030 तक दोगुना करना है। योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण बीज और तकनीक के माध्यम से उत्पादन में 20-30 प्रतिशत की बढ़ोतरी, अनाज-दलहन- तिलहन में आत्मनिर्भरता, ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई से मानसून पर निर्भरता में कमी, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को 5 प्रतिशत तक घटाने हेतु भंडारण क्षमता का विस्तार, जैविक कृषि और मशीनीकरण को बढ़ावा देने जैसे कदम शामिल हैं। साथ ही महिलाओं और युवाओं को डेयरी, मत्स्य पालन और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों में सहयोग देकर उन्हें कृषि आधारित रोजगार से जोड़ने पर भी विशेष ज़ोर दिया गया है।

रायपुर : डबरी निर्माण से ग्रामीण आजीविका को मिल रही नई दिशा

रायपुर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनती जा रही है। इसी कड़ी में डबरी निर्माण कार्य न सिर्फ ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध करा रहा है, बल्कि उनकी आजीविका का सशक्त जरिया भी बन रहा है। वर्तमान में जल संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देते हुए  कोंडागांव जिले में डबरी निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण परिवार कई तरह से लाभान्वित हो रहे हैं। डबरी निर्माण से जल भराव की सुविधा बढ़ती है, जिससे वर्षभर कृषि कार्य, सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन और बतख पालन जैसे आयमूलक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। यह स्थानीय स्तर पर जल संचयन को मजबूत करता है और ग्रामीणों को अतिरिक्त आजीविका स्रोत प्रदान करता है। मनरेगा के तहत नवीन डबरी निर्माण ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव एवं मांग के आधार पर स्वीकृत किए जा रहे हैं। निर्माण से पूर्व वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप भूमि की जांच की जा रही है, ताकि निर्माण उपरांत पानी का पर्याप्त भराव सुनिश्चित हो सके। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अविनाश भोई ने जानकारी दी कि जिले में इस वर्ष अब तक कुल 384 डबरियों की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि प्रति ग्राम पंचायत 5 से 10 डबरी निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जो मांग एवं उपलब्ध स्थल के आधार पर स्वीकृत किए जाएंगे। इस पहल से ग्रामीणों की आय में वृद्धि होगी तथा “मोर गाँव-मोर पानी” महाभियान का उद्देश्य भी पूरा होगा।

डॉक्टरों की हड़ताल खत्म, मरीजों को राहत: सरकार–डॉक्टरों की बैठक में बनी सहमति

चंडीगढ़  सरकार के साथ सहमति बनने के बाद डॉक्टरों ने बृहस्पतिवार रात को हड़ताल खत्म करने की घोषणा कर दी। शुक्रवार से सभी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू हो जाएंगी। स्वास्थ्य मंत्री आरती राव और विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल के साथ डॉक्टरों की अढ़ाई घंटे चली बैठक में पहले तो काफी देर तक एश्योर्ड करियर प्रमोशन (ए.सी.पी.) पर पेंच फंसा रहा। हरियाणा सिविल मेडीकल सर्विसेज एसोसिएशन (एच.सी.एम.एस.ए.) की एश्योर्ड करियर प्रमोशन (ए.सी.पी.) में संशोधन की मांग पर विचार कर रही सरकार ने फिलहाल बीच का रास्ता निकाला है। डॉक्टरों को आयुष्मान इंसेंटिव दिया जाएगा जिसके लिए जल्द कमेटी गठित कर दी जाएगी। इस कमेटी में सरकारी अधिकारियों के साथ एसोसिएशन का एक पदाधिकारी भी शामिल होगा। एसोसिएशन के राज्य प्रधान डा. राजेश ख्यालिया ने कहा कि वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों (एस.एम. ओ.) की सीधी भर्ती रोकने पर सरकार सहमत है लेकिन ए.सी.पी. पर भी स्थिति स्पष्ट की जाए। जब तक ए.सी.पी. की मांग पूरी नहीं होती तब तक हड़ताल जारी रहेगी। हरियाणा के डॉक्टरों को पूरे करियर में 3 ए.सी.पी. मिलती हैं। एसोसिएशन 3 पर ही राजी है, मगर वह इस पर अपग्रेडेशन चाहते हैं। 10 साल पर उन्हें अभी 7600 ग्रेड पे मिलता है जबकि उनकी मांग 8 हजार की है। तीसरे ग्रेड पे पर 8700 मिलते हैं, एसोसिएशन की मांग 9500 रुपए की है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि दूसरे राज्यों की तर्ज पर सरकार डॉक्टरों को आयुष्मान इंसेंटिव देने पर विचार कर रही है। जल्द इसके लिए कमेटी गठित कर दी जाएगी। ए.सी.पी. पर इसके बाद कोई फैसला लिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन पर डाक्टर हड़ताल खत्म करने को राजी हो गए। हड़ताल खत्म होने की घोषणा होते ही देर रात को डाक्टरों ने एमरजैंसी सेवाएं बहाल कर दीं। अब शुक्रवार से सभी स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से चलेंगी।

रायपुर : बुजुर्गों को अब पेंशन राशि सीधे आश्रम में ही उपलब्ध होगी

रायपुर : बुजुर्गों को अब पेंशन राशि सीधे आश्रम में ही उपलब्ध होगी आशा निकेतन के बुजुर्गों के लिए बड़ी राहत रायपुर वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक और सहज जीवन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहल की है। वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन के लिए अब वरिष्ठ नागरिकों को बैंक तक जाने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि सीएससी प्रबंधक आश्रम आकर उन्हे पेंशन की राशि का भुगतान करेंगें। रायगढ़ जिले के राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित पेंशन योजनाओं का लाभ आशा निकेतन वृद्धाश्रम, कौहाकुण्डा में निवासरत पात्र बुजुर्गों को नियमित रूप से मिलता है, लेकिन पेंशन राशि प्राप्त करने के लिए उन्हें अब तक बैंक जाकर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था। बढ़ती उम्र, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ और आवागमन की कठिनाइयाँ इस प्रक्रिया को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना रही थीं। सीएससी प्रबंधक द्वारा आधार आधारित भुगतान व्यवस्था            वरिष्ठ नागरिकों के इन कठिनाइयों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर रायगढ़ के मार्गदर्शन में समाज कल्याण विभाग ने तत्काल पहल करते हुए सीएससी प्रबंधक को निर्देशित कर पत्र जारी किया कि प्रतिमाह 10 तारीख तक आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से ही वृद्धाश्रम परिसर में पेंशन राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। निर्देश मिलते ही सीएससी प्रबंधक एवं संबंधित वीएलई द्वारा आधार आधारित भुगतान व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू कर दिया गया है।   आश्रम परिसर में ही उपलब्ध करा दी जाएगी पेंशन की राशि          नई व्यवस्था लागू होने के साथ ही अब वृद्धाश्रम के वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन निकालने के लिए बैंक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। हर माह निर्धारित तिथि पर पेंशन राशि सीधे आश्रम परिसर में ही उपलब्ध करा दी जाएगी। यह व्यवस्था न केवल समय और ऊर्जा की बचत करेगी, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा और सुरक्षा को भी प्राथमिकता देगी। समाज कल्याण विभाग के उप संचालक श्री शिवशंकर पांडे ने बताया कि विभाग का उद्देश्य वरिष्ठजनों को सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सरल, सुरक्षित और बिना किसी परेशानी के उपलब्ध कराना है। पेंशन भुगतान की यह नई व्यवस्था उसी दिशा में उठाया गया एक प्रभावी कदम है, जो बुजुर्गों के जीवन में राहत और सकारात्मक बदलाव सुनिश्चित होगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया प्रतिनिधियों को दी सरकार की दो साल की उपलब्धियों की जानकारी

मध्यप्रदेश हुआ नक्सल मुक्त 42 दिन में 42 नक्सलवादियों ने किया सरेंडर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वेच्छा से सेवाएं देने वाले बहादुर पुलिस अधिकारियों को दी बधाई नदी जोड़ो अभियान का क्रियान्वयन तेज अगले पांच साल में 100 लाख हेक्टेयर रकबे को सिंचित करने का लक्ष्य प्रदेश का बदला औद्योगिक परिदृश्य हम वेस्ट को वैल्यू में बदल रहे हैं, मध्यप्रदेश में कचरे और पराली से हो रहा है ऊर्जा उत्पादन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में हुए विकास कार्यां की जनता साक्षी है। मात्र दो वर्ष के अल्प कार्यकाल में राज्य सरकार ने प्रदेश के विकास का परिदृश्य बदल दिया है। इन दो सालों में प्रदेश में हुआ विकास अद्भुत है, अकल्पनीय है। दो साल में ही मध्यप्रदेश दशकों से चली आ रही नक्सलवाद की समस्या से पूरी तरह मुक्त हो गया है। इससे प्रदेश के विकास की एक बड़ी बाधा दूर हो गई है। नक्सलवादियों के एमएमसी जोन (महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़) 42 दिन में 42 नक्सलवादियों ने समर्पण कर विकास की धारा से जुड़कर जीवन को चुना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लाल सलाम के खात्मे के लिए हमारे बहादुर पुलिस अधिकारियों ने जो प्रतिबद्धता दिखाई है, वह नि:संदेह अद्भुत है। उन्होंने स्वयं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ड्यूटी मांगी और अपना टारगेट तय कर उसे अचीव भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने सभी क्षेत्रों में कार्य करने का प्रयास किया। सभी विभागों के दो साल के कार्यों की समीक्षा और आगामी 3 साल के टारगेट पर चर्चा की गई है। सभी मंत्रियों ने अपने विभाग के प्रेजेंटेशन दिए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में विकास और सेवा का संकल्प लिए हम आगे बढ़ रहे हैं। दुनिया में वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां और अवसर भी हमारे लिए अनुकूल होते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में विकास और सेवा के दो साल (सरकार की उपलब्धियां) पर केन्द्रित प्रेस वार्ता में मीडिया प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है। केन-बेतवा, पीकेसी के बाद ताप्ती मेगा ग्राउण्ड वाटर रिचार्ज परियोजना की ओर हम तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा परियोजना के अंतर्गत ही मंदाकिनी-चित्रकूट के नाम पर उप परियोजना का नया प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इससे चित्रकूट धाम के आसपास भी पर्याप्त जल उपलब्ध होगा, साथ ही बिजली उत्पादन भी होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत सरकार अगले पांच साल में 100 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि रकबे को सिंचित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 1988-90 से नक्सलियों की गतिविधियों की शुरुआत हुई थी। कभी ऐसी भी स्थिति रही कि राज्य में पुलिस की बसों को आग के हवाले कर दिया गया। उन्हीं के एक मंत्री की नक्सलियों ने हत्या कर दी। जबकि केंद्र और राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। आज हमें गर्व है कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में तय की गई डेडलाइन के अंदर ही राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश की भूमि से नक्सलियों को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। मध्यप्रदेश 35 साल बाद नक्सल मुक्त हुआ। इस अभियान में कुछ जवानों को शहादत भी हुई। पिछले साल प्रमोशन मिलने के बाद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा शहीद हुए। कल दो नक्सलियों के सरेंडर के साथ मध्य प्रदेश में नक्सलियों की संख्या शून्य हो गई है। राज्य सरकार ने नक्सलियों के पुनर्वास के लिए योजना बनाई। पिछले 42 दिन में 42 सरेंडर हुए और 10 नक्सलियों को ढेर किया गया है। हम ऐसा तंत्र विकसित करेंगे, जिससे दोबारा नक्सलवादी मूवमेंट स्थापित न हो पाए। राज्य सरकार ने सभी पड़ोसी राज्यों के साथ आवश्यक समन्वय किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के माध्यम से प्रदेश में जल संरक्षण का बड़ा अभियान शुरू हुआ है। पार्वती-कालीसिंध और चंबल परियोजना के समझौते के बाद अब मध्यप्रदेश और राजस्थान को पर्याप्त जल मिल रहा है। महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर ताप्ती वॉटर रीचार्ज परियोजना पर भी कार्य हो रहा है। एक लाख करोड़ की पीकेसी परियोजना में 90 हजार करोड़ भारत सरकार दे रही है। इसी प्रकार ताप्ती परियोजना के लिए भी 70 हजार करोड़ केंद्र सरकार दे रही है। उज्जैन में पहले सिंहस्थ हुए, लेकिन श्रद्धालुओं को गंभीर नदी के जल से स्नान कराया गया। वर्ष 2016 में नर्मदा के जल से स्नान का प्रबंध कराया, लेकिन आगामी 2028 के सिंहस्थ के लिए हमने 800 करोड़ लागत से नई योजना बनाई है। अब श्रद्धालु क्षिप्रा के जल से स्नान करेंगे। राज्य के अंदर पहली बार दो नदियों- गंभीर और कान्ह को अंडर डक्ट के माध्यम से लिंक किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले भोपाल में जीआईएस नहीं होती थी। भूतो न भविष्यति इसी साल फरवरी में भोपाल में पहली बार ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (जीआईएस) हुई। रीजनल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव के माध्यम से भी निवेश आया है। इसी का परिणाम है कि निवाड़ी जैसे छोटे जिले में इस्पात कारखाना खुल रहा है। झाबुआ में खाद बनाया जा रहा है। नीमच में भारत ही नहीं दुनिया का पंप स्टोरेज बना है, जिसका कार्य दो साल में पूर्ण कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश में स्वीकृत 7 पीएम मित्र पार्क में से पहला पार्क का अपने जन्मदिन के अवसर पर मध्यप्रदेश के धार में भूमिपूजन किया है। राज्य सरकार ने इसमें भूमि आवंटन भी कर दिया है। विक्रम उद्योगपुरी में दवा कंपनियों ने इंडस्ट्री लगाकर उत्पादन शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से 55 पीएम एक्सीलेंस कॉलेज खोले गए हैं। प्रदेश में मेडिकल कॉलेज की संख्या निरंतर बढ़ाई जा रही है। अब प्रदेश में सरकारी-निजी कुल मिलाकर 52 मेडिकल कॉलेज हो गए हैं। राज्य सरकार पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज और चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने के लिए 1 रुपए लीज पर जमीन दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन दो सालों में ही हमने हुकुमचंद मिल के मजदूरों के बकाये का विवाद खत्म कराया। भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को न्याय दिलाते हुए जहरीले कचरे का निष्पादन कराया। … Read more

नक्सलवाद मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प तेजी से हो रहा साकार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

सुकमा में 10 माओवादी कैडरों ने किया आत्मसमर्पण, पुनर्वास से पुनर्जीवन की नई शुरुआत रायपुर  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज सुकमा जिले में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के तहत दरभा डिवीजन कमेटी सहित विभिन्न नक्सली संगठनों से जुड़े 10 माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण को ऐतिहासिक और सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक बताया। उल्लेखनीय है कि इनमें 6 महिला माओवादी भी शामिल हैं, जिन पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सलवाद मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प अब केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि तेजी से साकार होती वास्तविकता बन रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सशक्त नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर है। मुख्यमंत्री  श्री साय ने कहा कि यह आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि बस्तर में अब हिंसा, भय और भटकाव की विचारधारा कमजोर पड़ रही है, जबकि विकास, विश्वास और संवाद की राह मजबूत हो रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हिंसा के रास्ते पर न वर्तमान सुरक्षित होता है और न ही भविष्य। छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष पुनर्वास नीति आत्मसमर्पण करने वालों को सम्मान, सुरक्षा, आजीविका और समाज में पुनर्स्थापना की ठोस गारंटी देती है। मुख्यधारा में लौटकर ये लोग अपने परिवारों के साथ एक स्थायी, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत कर सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य पूरी तरह स्पष्ट है— छत्तीसगढ़ को पूर्णतः नक्सलवाद मुक्त बनाना और बस्तर को विकास, विश्वास और अवसरों की नई पहचान देना। मुख्यमंत्री श्री साय ने आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के निर्णय का स्वागत करते हुए अन्य भटके युवाओं से भी अपील की कि वे हिंसा का मार्ग छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की मुख्यधारा से जुड़ें। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार के समन्वित प्रयासों से सुरक्षा बलों की सशक्त कार्रवाई, विकास योजनाओं का विस्तार और पुनर्वास आधारित मानवीय दृष्टिकोण—तीनों मिलकर बस्तर में परिवर्तन की नई कहानी लिख रहे हैं।