samacharsecretary.com

एमएसपी पर धान, ज्वार एवं बाजरा की उपार्जन नीति जारी : खाद्य मंत्री राजपूत

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से की जाएगी औसत अच्छी गुणवत्ता की फसल खरीदी एक दिसम्बर से शुरू होगी धान की खरीदी भोपाल  खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार द्वारा समय – समय पर घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर औसत अच्छी गुणवत्ता की धान, ज्वार एवं बाजरा का उपार्जन किसानों से किया जाएगा। राज्य शासन ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा की उपार्जन नीति घोषित कर दी है। समर्थन मूल्य पर ज्वार एवं बाजरा की 24 नवम्बर से 24 दिसम्बर तक और धान की खरीदी एक दिसम्बर से 20 जनवरी, 2026 तक की जायेगी। खरीदी सोमवार से शुक्रवार तक की जायेगी। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश के समस्त कलेक्टर्स, नागरिक आपूर्ति निगम तथा वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि उपार्जन नीति का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराएं, जिससे किसानों को लाभ पहुंचाने की सरकार की मंशा पूरी हो सके। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही मिलने पर उपार्जन कार्य से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि निर्धारित अवधि में उपार्जन किया जाएगा। समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा के उपार्जन के लिए मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज़ कार्पोरेशन नोडल एजेंसी होगी। इसके अलावा विभाग द्वारा केन्द्र एवं राज्य सरकार की अन्य एजेन्सी अथवा उनके द्वारा अधिकृत संस्था को भी उपार्जन एजेन्सी घोषित किया जा सकेगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य धान कॉमन का 2369 रूपये, धान ग्रेड-ए का 2389, ज्वार मालदण्डी का 3749 हजार, ज्वार हाइब्रिड का 3699 और बाजरा का 2775 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। किसानों की सुविधा अनुसार होगा उपार्जन केन्द्रों का निर्धारण मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि उपार्जन केन्द्र के स्थान का निर्धारण किसानों की सुविधा अनुसार किया जाएगा। उपार्जन केन्द्र प्राथमिकता से गोदाम/केप परिसर में स्थापित किए जाएंगे। गोदाम/केप उपलब्ध न होने पर समिति एवं अन्य स्तर पर उपार्जन केन्द्र स्थापित किए जा सकेंगे। जिले में उपार्जन केन्द्रों की संख्या का निर्धारण किसान पंजीयन, पंजीयन में दर्ज बोया गया रकबा एवं विगत वर्ष निर्धारित उपार्जन केन्द्रों के आधार पर राज्य उपार्जन समिति द्वारा किया जाएगा। बारदाना व्यवस्था समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिये 46 प्रतिशत पुराने और 54 प्रतिशत नवीन जूट बारदाने उपयोग किये जायेंगे। बारदानों की व्यवस्था उपार्जन एजेंसी द्वारा की जायेगी। ज्वार एवं बाजरे का उपार्जन नवीन जूट बारदानों में किया जायेगा। केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा धान, ज्वार एवं बाजरा के समर्थन मूल्य पर उपार्जन के लिये निर्धारित यूनिफार्म स्पेसिफिकेशन्स के अनुसार एवं समय-समय पर इसमें दी गई शिथिलता के अनुसार उपार्जन किया जायेगा। गुणवत्ता परीक्षण का दायित्व उपार्जन केन्द्र में उपार्जन करने वाली संस्था और भण्डारण स्थल पर उपार्जन एजेंसी का होगा। कृषि उपज मण्डियों में एफएक्यू मानक की धान, ज्वार एवं बाजरा की खरीदी समर्थन मूल्य से कम पर क्रय नहीं किया जायेगा। नॉन एफएक्यू उपज का सैम्पल कृषि उपज मण्डी द्वारा संधारित किया जायेगा। किसान पंजीयन में दर्ज फसल के रकबे एवं राजस्व विभाग द्वारा तहसीलवार निर्धारित उत्पादकता के आधार पर कृषक द्वारा खाद्यान्न की विक्रय योग्य अधिकतम मात्रा का निर्धारण किया जायेगा। कृषक द्वारा उपज बेचने के लिये उपार्जन केन्द्र एवं विक्रय दिनांक के चयन के लिये स्लॉट बुकिंग करानी होगी। उपार्जित खाद्यान्न का उपार्जन केन्द्र से गोदाम तक परिवहन का दायित्व उपार्जन एजेंसी का और धान को उपार्जन केन्द्र/गोदाम से सीधे मिलर्स तक परिवहन का दायित्व मिलर्स का होगा। 

योगी सरकार की नीतियों का उत्कृष्ट परिणाम, छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार में उत्तर प्रदेश का दबदबा

जल संक्षरण और जल संचय के लिए मुख्यमंत्री की नीति रंग लायी 6 वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों में यूपी ने मारी बाजी उत्तरी क्षेत्र में पहला दूसरा और तीसरा तीनो स्थान उत्तर प्रदेश को मिला पहला स्थान मीरजापुर, दूसरा वाराणसी तो जालौन को तीसरा स्थान मिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रदान किया पुरस्कार जल संचय जन भागीदारी केटेगरी में गोरखपुर नगर निगम को मिला तीसरा पुरस्कार जल संचय जन भागीदारी केटेगरी में देश के टॉप 10 नगर निगम में गोरखपुर को तीसरा स्थान वाराणसी उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध डबल इंजन सरकार की नीतियां पूरे देश में विशिष्ट पहचान बना रही है। प्रदेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल क्रियान्वयन में जल संरक्षण की दिशा में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है, जिसे अब राष्ट्रीय पटल पर भी मान्यता मिल गई है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को को छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार (2024) समारोह में जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिलों का सम्मान किया। उत्तरी क्षेत्र में पहला स्थान मीरजापुर, दूसरा वाराणसी तो तीसरा स्थान  जालौन को मिला इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले ने उत्तरी क्षेत्र में 'सर्वश्रेष्ठ जिला' के रूप में द्वितीय स्थान प्राप्त किया।          इस उपलब्धि के लिए जिले को ₹2 करोड़ का नकद पुरस्कार भी प्रदान किया गया। वहीं, जल संचय जन भागीदारी केटेगरी में देश के टॉप-10 नगर निगम में गोरखपुर को तीसरा पुरस्कार मिला है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान यह स्पष्ट करता है कि योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियां और स्थानीय प्रशासन की कुशल पहलें जल संरक्षण व सतत विकास के क्षेत्र में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। जल संचयन व नदी कायाकल्प में वाराणसी का सराहनीय प्रदर्शन वाराणसी जिले में जल संरक्षण के क्षेत्र में प्रमुख पहलें विशेष रूप से सराहनीय रही हैं। जनपद में 25,000 से अधिक जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया, जिससे भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ। इसके साथ ही नदी कायाकल्प परियोजनाओं और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण की दिशा में जन जागरूकता बढ़ाई गई। इन पहलों ने जिले को उत्तर भारत में जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित किया। योगी सरकार की नीतियों का प्रभाव यह पुरस्कार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सशक्त और प्रभावी जल नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है, जिन्होंने जिले में जल संरक्षण और जल उपयोग की श्रेष्ठ प्रथाओं को बढ़ावा दिया। इसी श्रेणी में मीरजापुर को प्रथम स्थान और जालौन को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। यह सम्मान न केवल जल संरक्षण की दिशा में प्रदेश के विभिन्न जिलों की प्रतिबद्धता को मान्यता देता है, बल्कि प्रदेश समेत देश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन रहा है।

शक्तिशाली राष्ट्र निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका : मंत्री सारंग

विविध संस्कृति का परिचायक राज्य स्तरीय युवा उत्सव का रंगारंग समापन विभिन्न कलाओं में निपूर्ण युवा हुए सम्मानित भोपाल खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि शक्तिशाली राष्ट्र के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। वैभवशाली राष्ट्र बनाने में युवाओं का योगदान जरूरी है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि प्रदेश के निर्माण, समाज कल्याण और राष्ट्र को अग्रसर बनाने में अपना सर्वस्व लगायें। मंत्री श्री सारंग रवीन्द्र भवन में आयोजित 29वें राज्य स्तरीय युवा उत्सव के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं को सम्मानित किया। युवा उत्सव प्रदेश की संस्कृति को सहेजने में सहायक मंत्री श्री सारंग ने कहा कि देश का भविष्य युवा शक्ति ही है, जो दिशा और दशा तय करती है। हर परिवर्तन और क्रांति के पीछे युवा ही हैं। युवाओं को अपनी शक्ति सही दिशा में लगानी चाहिये। युवा ही देश की पूँजी एवं सम्पदा हैं। उन्हीं से देश का भविष्य तय होता है। युवा उत्सव प्रदेश की संस्कृति को सहेजने में सहायक है। युवा उत्सव के माध्यम से युवाओं ने प्रदेश और देश की संस्कृति को सहेज कर रखा है और अन्य लोगों को इससे अवगत करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा अपनी संस्कृति को बचाकर रखें। इससे बड़ा और कोई योगदान नहीं है। युवा केवल अपने लिये नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिये जियें। श्री सारंग ने कहा कि जिसने राष्ट्र और समाज के लिये काम किया, उसका ही नाम हुआ है। इसलिये अच्छा काम करें, जिससे उनका नाम हो और लोग उन्हें याद रखें। आकर्षक प्रस्तुतियों ने युवा उत्सव को बनाया अविस्मरणीय खेल संचालक श्री राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि युवा उत्सव में सभी प्रतियोगिताओं को देखने के बाद लगा कि युवा अपनी संस्कृति को नहीं भूला है। युवाओं की ऊर्जा से भरी मनमोहक और आकर्षक प्रस्तुतियों ने युवा उत्सव को अविस्मरणीय बना दिया है। उन्होंने बताया कि राज्य स्तरीय युवा उत्सव में प्रस्तुति देने वाले 30 युवा राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल होंगे और प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी प्रस्तुति देंगे। 7 विधाओं के युवा और निर्णायक हुए सम्मानित राज्य स्तरीय युवा उत्सव में भाषण विधा में प्रथम ग्वालियर संभाग के सोमेश, द्वितीय भोपाल संभाग के तनिष जैन और तृतीय इंदौर संभाग के सजल जैन रहे। कहानी लेखन में प्रथम शहडोल संभाग की कृति शुक्ला, द्वितीय उज्जैन संभाग के गोपाल मालवीय और तृतीय सागर संभाग की मायरा सिंघानिया, पेंटिंग में प्रथम ग्वालियर संभाग की अमृता धाकड़, द्वितीय इंदौर संभाग की संस्कृति श्रीवास्तव और तृतीय जबलपुर संभाग के सुयांश निखरे, कविता लेखन में प्रथम सागर संभाग के नकुल तिवारी, द्वितीय जबलपुर संभाग की काजल चक्रवर्ती और तृतीय नर्मदापुरम संभाग की वैशाली को सम्मानित किया गया। विज्ञान मेले में प्रथम सागर संभाग के समीर अहिरवार, द्वितीय नर्मदापुरम संभाग की प्रतिष्ठा सिंह ठाकुर और तृतीय रीवा संभाग के उत्कर्ष नामदेव रहे। इसी प्रकार समूह लोक गीत में प्रथम स्थान पर सागर संभाग, द्वितीय पर भोपाल संभाग और तृतीय स्थान पर शहडोल संभाग के युवा समूह रहे। समूह लोकनृत्य में प्रथम स्थान पर सागर संभाग, द्वितीय पर जबलपुर संभाग और तृतीय स्थान पर उज्जैन संभाग के युवा समूह को पुरस्कृत किया गया। युवा उत्सव में प्रतियोगिताओं के निर्णायकों को भी स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उप सचिव श्री अजय श्रीवास्तव, संयुक्त संचालक श्री बी.एस. यादव और खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारी सहित युवा शक्ति उपस्थित थी।  

भोपाल एक जीवित विरासत वाला नगर, यहां अतीत और वर्तमान संवाद के साथी : पर्यटन मंत्री लोधी

हिस्टोरिक सिटी सीरीज की भोपाल कार्यशाला-सह-संवाद कार्यक्रम भोपाल  भोपाल की ऐतिहासिक विरासत, स्थापत्य, साहित्यिक धरोहर, सांस्कृतिक बहुलता तथा यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क में “सिटी ऑफ लिट्रेचर” के रूप में अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से पर्यटन विभाग द्वारा स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्ट सहयोग से कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में मंगलवार को कार्यशाला-सह-संवाद कार्यक्रम का आयोजन हुआ। पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। राज्य मंत्री श्री लोधी ने कहा कि भारत के चयनित ऐतिहासिक नगरों की परंपरा, सांस्कृतिक विरासत, स्थापत्य और वैचारिक दर्शन से देश की युवा पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स द्वारा यह श्रृंखला आयोजित की जा रही है। यह गर्व का विषय है कि इस प्रतिष्ठित आयोजन में मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक नगरों ग्वालियर, ओरछा एवं भोपाल तीनों को शामिल किया गया है। राज्य मंत्री श्री लोधी ने कहा कि भोपाल केवल एक शहर नहीं, बल्कि समय, स्मृति, साहित्य, कला और मानव अन्वेषण की अनेक परतों से निर्मित एक जीवंत विरासत है। उन्होंने कहा कि भोपाल की झीलों, पहाड़ियों, बस्तियों और सांस्कृतिक धरोहरों में वह गहराई और दर्शन छिपा है, जो किसी नगर को सिर्फ भौतिक संरचना नहीं, बल्कि एक सामूहिक चेतना बनाता है। भोपाल यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क में “सिटी ऑफ लिट्रेचर” के रूप में अपनी पहचान बनाने का प्रयास कर रहा है, जो शहर की साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक समृद्धि का वैश्विक सम्मान है। अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति, गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक है। ओरछा, ग्वालियर और भोपाल के साथ–साथ प्रदेश के अन्य ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगरों को भी संस्थाओं और जनभागीदारी के माध्यम से पर्यटकों के अनुकूल विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। व्यापक सहयोग और योजनाबद्ध पहल से प्रदेश के पर्यटन परिदृश्य को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई जा सकती है। पैलन डिस्कशन में डॉ. अभय अरविंद बेड़ेकर, अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने कहा कि सिटी ऑफ लिटरेचर के रूप में भोपाल का नामांकन उसकी अद्वितीय विरासत को सम्मानित करता है। यहां हिंदी और उर्दू समान रूप से पल्लवित होती हैं, जहां अकादमियां और विश्वविद्यालय समृद्ध सांस्कृतिक संवाद के वाहक हैं और जहां विरासत की पहचान केवल स्मारकों से नहीं, बल्कि यहां के लोगों से भी तय होती है। यहां साहित्य केवल संरक्षित नहीं किया जाता, बल्कि उसे जिया जाता है और समुदाय द्वारा निरंतर आकार दिया जाता है।   श्री प्रशांत बघेल, संयुक्त संचालक (प्लानिंग), मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने कहा कि भोपाल में सिटी ऑफ लिटरेचर के रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की अत्यंत मजबूत संभावनाएं हैं। शहर की सांस्कृतिक बनावट, उसकी समृद्ध भाषाई विरासत और सक्रिय साहित्यिक समुदाय इसे इस श्रेणी के लिए विशिष्ट बनाते हैं। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2026 तक हम यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क के लिए एक और अधिक सशक्त, सुविचारित और प्रमाणित नामांकन प्रस्तुत करने के लिए पूर्णतः तैयार होंगे।   इस अवसर पर डॉ. अभय अरविंद बेड़ेकर, अपर प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, भोपाल के डायरेक्टर प्रोफेसर कैलासा राव, मैनिट की एसोसिएट प्रोफेसर श्रीमती सविता राजे, एनएमए के रीजनल डायरेक्टर डॉ. टी. अरुण राज,  द्रोणा फाउंडेशन से सुश्री तपस्या एवं सुश्री मल्लिका, प्रोफेसर रचना खरे उपस्थित थे।  हेरिटेज वॉक में जाना भोपाल का सांस्कृतिक महत्व भोपाल में एक विशेष हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया, जिसने शहर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कराने का अवसर प्रदान किया। यह वॉक गौहर महल से प्रारंभ होकर इक़बाल मैदान होते हुए भव्य मोती महल तक आयोजित की गई। प्रतिभागियों ने इन स्थलों की वास्तुकला, इतिहास और सांस्कृतिक महत्व के बारे में विस्तार से जाना। इसमें प्रतिभागियों को भोपाल के ऐतिहासिक विकास, सामाजिक विरासत और स्थापत्य विशेषताओं से अवगत कराया गया। हिस्टोरिक सिटी सीरीज नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) द्वारा देश के चयनित ऐतिहासिक एवं जीवित नगरों की विरासत, पारम्परिक शहरी योजना और सांस्कृतिक विशेषताओं से आमजन को परिचित कराने के लिये हिस्टोरिक सिटी सीरीज (Historic City Series–2025) का आयोजन किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय पहल में मध्यप्रदेश के तीन ऐतिहासिक नगरों ग्वालियर, ओरछा और भोपाल को चुना गया है। श्रृंखला के अंतर्गत 11 नवंबर को ग्वालियर और 13 नवंबर को ओरछा में कार्यक्रम आयोजित किए गए।  

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किश्त का होगा वितरण

प्रधानमंत्री श्री मोदी करेंगे वर्चुअली संबोधित कृषि उपज मण्डी समिति करोंद भोपाल में होगा राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किश्त का वितरण देश के किसानों को बुधवार 19 नवम्बर को किया जा रहा है। कार्यक्रम को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअली संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किश्त का वितरण राज्य स्तरीय कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम कृषि उपज मण्डी समिति, करोंद, भोपाल में दोपहर 12:25 से आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा सहित जन-प्रतिनिधि और कृषक बंधु शामिल होंगे।  

मेला संस्कृति ही भोपाल की पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री ने किया भोपाल उत्सव मेले का शुभारंभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल और मेले एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। शहर में जिधर भी नजर जाए, मेलों की जीवंतता दिखाई देती है। इसी वजह से भोपाल को मेला संस्कृति की दृष्टि से देश के बेहतर शहरों में शामिल किया जाता है। उन्होंने कहा कि ये मेले शहर की पहचान को मजबूत करने के साथ ही स्थानीय समाज, परंपराओं और सामुदायिक संबंधों को भी जीवित रखते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेला संस्कृति को प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक समरसता बढ़ाने में सहायक है। ऐसे आयोजन स्थानीय कलाकारों, कारीगरों और उद्यमियों के हुनर को मंच प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री ने मंगलवार शाम टी.टी. नगर के दशहरा मैदान में 33वें भोपाल उत्सव मेले का दीप प्रज्ज्वलन, गणेश पूजा एवं फीता काटकर विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने आयोजन समिति को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि यह मेला इस वर्ष भी व्यापार, मनोरंजन और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि झीलों की नगरी और देश के ह्रदय प्रदेश की राजधानी में शुरू हो रहे भोपाल उत्सव मेला आज 32 वर्ष की लंबी यात्रा को सफलतापूर्ण पार करते हुए 33 वे वर्ष में प्रवेश कर रहा है। वर्ष 1991–92 में स्व. श्री रमेशचन्द्र अग्रवाल द्वारा लगाया गया ‘भोपाल उत्सव मेला’ का बीज आज विशाल वट वृक्ष हो चुका है, जिसका लाभ भोपालवासियों के साथ ही दूर-दराज से आने वाले सैलानियों को हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेले प्राचीन समय से ही हमारी सनातन संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहे हैं, ये व्यापार को विस्तार देने का साधन थे, साथ ही हमारे धर्म, परंपरा, और संस्कृति के भी वाहक थे। उन्होंने कहा कि जो समाज अपनी परंपरा और संस्कृति को भूल जाता है, वह राह से भटक जाता है या नष्ट हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि हम अपनी मेला संस्कृति को जीवित रखें। संस्कृति, परंपरा, विरासत किसी भी समुदाय की पहचान और स्मृति के प्रमुख घटक हैं। सांस्कृतिक प्रथाएं, परंपराएं समुदायों को एक साथ लाती हैं। सामाजिक एकता के लिए ये आवश्यक हैं, इसलिए मेलों को जीवित बनाये रखें। भोपाल उत्सव मेला समिति के अध्यक्ष श्री मनमोहन अग्रवाल ने कहा कि वर्ष 1991-92 में मात्र 70 स्टाल-दुकानों से प्रारंभ हुआ यह मेला, पिछले 3 दशकों से लगातार अपने ध्येय वाक्य ‘उत्सव, व्यापार, मनोरजंन एवं सेवा’ को सार्थक कर रहा है। भोपाल उत्सव मेला अब एक ‘ब्रांड’ बन गया है। मेले का उद्देश्य राजधानी के उपभोक्ताओं एवं व्यापारियों को एक मंच पर लाना था। धीरे-धीरे भोपाल के अतिरिक्त आसपास के कस्बों-शहरों के लोग भी मेले से जुड़ते चले गये। आज ‘भोपाल उत्सव मेला’ इतना लोकप्रिय हो चुका है कि निकटवर्ती राज्यों के व्यापारी भी इस मेले में शामिल होने लगे हैं। मेले में फर्नीचर, ब्रान्डेड इलेक्ट्रॉनिक्स शॉप, मीना बाजार, फूड, आधुनिक झूले, आटोमोबाइल, कपड़े, हैण्डलूम, होम एप्लाइंसेस आदि के स्टॉल लगते हैं। भोपाल उत्सव मेला लोगों को रोजगार और व्यापार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ ही कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने में एक सेतु की भूमिका निभा रहा है। इस मेले में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। भोपाल मेला उत्सव समिति समाज कल्याण की दिशा में भी प्रभावी काम कर रही है। मेला समिति द्वारा प्रतिवर्ष शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सद्भाव से जुड़े कई कार्य किए जा रहे हैं। मेले के शुभारंभ कार्यक्रम में विधायक श्री भगवानदास सबनानी, भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, श्री आशीष ऊषा अग्रवाल, श्री चंद्रशेखर सोनी, श्री सुनील जैन, श्री अजय सोमानी सहित नागरिक उपस्थित थे।  

मरीजों को मिलेगा बेहतर इलाज: हरियाणा सरकार करने जा रही 550 डॉक्टरों की नियुक्ति

चंडीगढ़ हरियाणा स्वास्थ्य विभाग जल्द ही प्रदेश में 550 डॉक्टरों की भर्ती करेगा। यह डॉक्टर सिविल अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात होंगे। मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक स्वीकृति के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसकी फाइल तैयार की जा रही है। यह भर्ती अगले साल मार्च तक पूरी होने की संभावना है। इन डॉक्टरों के आने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। मालूम हो कि हरियाणा सरकार ने 2024 में 777 डॉक्टरों की भर्तियां निकालीं थीं। इनमें से 747 डॉक्टरों की नियुक्ति कर दी गई थी। बाकी सीटों पर उम्मीदवार नहीं आए थे। इन डॉक्टरों की सिविल अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में तैनाती भी कर दी गई थी। कुछ सीटों पर ज्वाइनिंग के बाद भी डॉक्टर स्टेशन पर नहीं पहुंचे थे।   हरियाणा के स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की कमी नहीं रहने दी जाएगी। जिन जगहों पर डॉक्टरों के खाली पद पड़े हैं वहां जल्द ही डॉक्टरों की नियुक्ति करने के निर्देश दिए हैं। सरकार इस बात को लेकर प्रतिबद्ध है कि मरीजों को सरकारी अस्पतालों में ही सारी सुविधाएं दी जाएं। आरती सिंह राव, स्वास्थ्य मंत्री से गैरहाजिर चल रहे 68 डॉक्टरों की सेवाएं भी समाप्त कर दी थीं। इन सभी खाली पदों को भरने के लिए अब सरकार फिर से 550 डॉक्टरों की भर्ती करने जा रही है। यह पद मेडिकल ऑफिसर के होंगे। हरियाणा में मेडिकल ऑफिसर के 3969 पद हैं जिनमें से करीब 550 पद खाली हैं। सीनियर मेडिकल ऑफिसर के 644 पद हैं जिनमें से 219 पद खाली हैं।

मुख्यमंत्री ने हनुमानगढ़ी में प्रभु हनुमान के समक्ष टेका माथा, पूजा-अर्चना के साथ की अयोध्या दौरे की शुरुआत

रामकथा पार्क हेलीपैड पर मुख्यमंत्री का हुआ भव्य स्वागत अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे। उन्होंने अपने कार्यक्रम की शुरुआत संकट मोचन हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन से की, जहां उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। हनुमानगढ़ी में किया पूजन, प्रदेश के लिए मांगा कल्याण हनुमानगढ़ी में प्रभु हनुमान के समक्ष शीश नवाने तथा पूजन-दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीधे श्रीरामलला विराजमान के दरबार पहुंचे। यहां आरती के बाद उन्होंने प्रभु श्रीराम के चरणों में शीश झुकाया और परिक्रमा करते हुए मंदिर निर्माण की प्रगति का बारीकी से निरीक्षण किया। मंदिर निर्माण कार्यों की प्रगति पर ट्रस्ट ने दी विस्तृत जानकारी दर्शन-पूजन के उपरांत राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने उन्हें मंदिर निर्माण की वर्तमान स्थिति और आगामी चरणों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने सभी बिंदुओं पर गंभीरता से जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। श्रद्धालुओं ने किया स्वागत, सीएम ने भी स्वीकारा अभिवादन श्रीरामलला के दर्शन के बाद जब मुख्यमंत्री बाहर निकले तो बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री योगी ने भी हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन स्वीकार किया। इस दौरान जय श्रीराम के नारे से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। हेलीपैड पर हुआ भव्य स्वागत, जनप्रतिनिधियों ने किया अभिनंदन अयोध्या आगमन पर रामकथा पार्क स्थित हेलीपैड पर मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया गया। प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही, महापौर गिरीशपति त्रिपाठी, जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह, विधायकगण वेद प्रकाश गुप्ता, अमित सिंह चौहान, रामचंद्र यादव, अभय सिंह, चंद्रभानु पासवान, बीजेपी जिलाध्यक्ष संजीव सिंह, महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी का यह नवंबर माह का पहला अयोध्या दौरा है।

गरियाबंद जिला को जोन-1, केटेगरी-2 में मिला जल संचय, जन भागीदारी के कार्य के लिए मिला देश में तीसरा स्थान

राष्ट्रीय सम्मान से देश में बढ़ा गरियाबंद का गौरव जिले को मिला एक करोड़ रूपये का पुरस्कार महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के हाथों गरियाबंद जिले के कलेक्टर श्री बी एस उइके ने ग्रहण किया पुरस्कार  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दी बधाई और शुभकामनाएं रायपुर  जल संचय और जन भागीदारी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिला को जोन-1, केटगरी-2 में देश में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के कर कमलों से यह सम्मान प्रदान किया गया। इस पुरस्कार के तहत गरियाबंद जिले को विभिन्न विकास कार्यों के लिए एक करोड़ रूपए की राशि मिली है। इससे न सिर्फ गरियाबंद जिला, बल्कि पूरा छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जिले को इस उपलब्धि के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी है। इस दौरान केंद्रिय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल, जल शक्ति एवं रेल मंत्रालय के राज्यमंत्री श्री वी. सोमन्ना एवं जल शक्ति मंत्रालय के राज्यमंत्री श्री राज भूषण चौधरी उपस्थित थे। यह पुरस्कार जिले के कलेक्टर श्री बी एस उइके, जलसंसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता श्री एस के बर्मन एवं सहायक अभियंता श्री मनोज ताण्डिल्य ने प्राप्त किया। राष्ट्रीय जल संचय एवं जलभागीदारी कार्य के लिए तीसरा पुरस्कार के रूप में गरियाबंद जिले को एक करोड़ रूपये का पुरस्कार प्राप्त हुआ। गौरतलब है कि गरियाबंद जिला, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय जल पुरस्कार प्रतियोगिता में विभिन्न चरणों के निरीक्षण, पर्यवेक्षण एवं मूल्यांकन के बाद ईस्ट जोन का तृतीय बेस्ट जिला चुना गया।  उल्लेखनीय है कि जिले में संबंधित विभागों के माध्यम से 26,025 सतही जल के बेहतर रख-रखाव एवं जनभागीदारी के क्षेत्र में किए गए सराहनीय प्रयासों के लिए गरियाबंद को छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के साथ एक करोड़ रूपए का पुरस्कार भी प्रदान किया गया। यह उपलब्धि जिले के विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों के क्रियान्वयन का परिणाम रहा है, जिसमें जिले के नागरिकों, महिलाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिले में तेजी से गिरते जल स्तर को देखते हुए जिले ने व्यापक रणनीति के साथ जल शक्ति अभियान – कैच द रेन मोर गांव मोर पानी के अंतर्गत मिशन जल रक्षा – नारी शक्ति से जल शक्ति की शुरूआत की गई है। भू-जल रिचार्ज के लिए तकनीकी नवाचार  जिले में किए गए प्रमुख नवाचार-रिचार्ज सॉफ्ट बोरवेल एवं सेंड फिल्टर तकनीक द्वारा असफल बोरों मे रिचार्ज का प्रयास, परकुलेशन टैंक में इंजेक्शन वेल तैयार कर वर्षाजल को सीधे वाटर टेबल से जोडऩा, नए बोरवेल के साथ इंजेक्शन वेल का निर्माण, पहाड़ी क्षेत्रों में रिचार्ज संरचनाएं और लो-लाइन क्षेत्रों में जल संरक्षण संरचनाएं, संरचनाओं की मरम्मत, संधारण एवं जीआईएस-आधारित योजना निर्माण, कार्य किए गए है।

खाया-पिया और फिर कर गया कांड! मेहमान की हरकत से उड़ गए सबके होश

ग्वालियर  दोस्ती में विश्वास और भरोसा बेहद मायने रखते हैं लेकिन मध्य प्रदेश के ग्वालियर में मेहमान बनकर आए एक दोस्त ने इसी भरोसे का कत्ल कर दिया। जहां दोस्त ने दोस्त की गैरहाजिरी में बड़ा कांड कर दिया। हालांकि वह रंगे हाथों पकड़ा गया और पिटाई के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। घटना जिले के मोतीझील इलाके की है। जानकारी के मुताबिक, मुरैना निवासी 30 वर्षीय महिला अपने पति, दो बेटों और देवर के साथ मोतीझील क्षेत्र में रहती है। महिला के पति का दोस्त सुनील कुमार पिछले काफी समय से घर पर आता-जाता रहा है।  महिला का पति किसी काम से गांव गया हुआ था, जिससे घर पर महिला और उसके बच्चे ही मौजूद थे। सुनील घर आया। खाना खाने के बाद उसने कमरे में ही सोने की बात कही। पुराने परिचय और भरोसे के चलते महिला ने उसे रात वहीं रुकने की अनुमति दे दी। सुबह महिला के दोनों बेटे सैर पर निकल गए। इसी दौरान सुनील उसके कमरे में पहुंचा और उससे जबरदस्ती करने लगा। विरोध करने पर उसने महिला को लात घूंसों और थप्पड़ों से पीटकर काबू किया और उसके साथ रेप किया। वारदात के बाद उसने धमकी दी कि यदि किसी को बताया तो वह उसे और बच्चों को जान से मार देगा। मारपीट के बीच महिला ने शोर मचाया। आवाज सुनकर देवर और बेटा कमरे में पहुंचे। उन्होंने आरोपी को पकड़ लिया और उसकी पिटाई करने के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया। पुरानी छावनी थाना पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर आरोपी सुनील कुशवाह के खिलाफ रेप, मारपीट और धमकी देने की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। मेडिकल और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।