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UP International Trade Show: योगी सरकार काशी के पारंपरिक हुनर को दे रही वैश्विक बाजार, कारीगरों को मिलेगा बड़ा मंच

योगी सरकार काशी के पारंपरिक हुनर को यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के माध्यम से दिला रही वैश्विक बाजार   ॐ और मंत्र मुद्रित योग स्कार्फ़, शॉल व गाउन से लेकर बनारसी सिल्क साड़ियों तक, दुनिया देखेगी काशी की विरासत यूपीआईटीएस में काशी के परंपरागत उत्पादों और आधुनिक उत्पादों का संगम दिखाई देगा  25 से 29 सितंबर तक आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में वाराणसी के एक्सपोर्ट को मिलेगा इंटरनेशनल मंच  वाराणसी,  अध्यात्म और संस्कृति की नगरी काशी की पहचान केवल धर्म और परंपराओं तक सीमित नहीं है। सदियों पुरानी हस्तशिल्प और बुनकरी की समृद्ध परंपरा के साथ काशी ने अपने पारंपरिक और आधुनिक उत्पादों के दम पर देश-दुनिया में अलग पहचान बनाई है। योगी सरकार द्वारा 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में आयोजित किए जा रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में इस बार काशी की इसी समृद्ध विरासत, हुनर और उत्पादों को एक बार फिर वैश्विक मंच मिलने जा रहा है।    जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के उपायुक्त अभिषेक प्रियदर्शी ने बताया कि वाराणसी से 8 निर्यातकों ने ट्रेड शो में अपने उत्पाद प्रदर्शित करने के लिए पंजीकरण कराया है। उन्होंने कहा कि यूपीआईटीएस में काशी के पारंपरिक और आधुनिक उत्पादों का संगम देखने को मिलेगा। सहायक आयुक्त उद्योग केशव यादव ने बताया कि योगी सरकार यूपीआईटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने के साथ ही इसमें प्रतिभाग करने वाले निर्यातकों को सब्सिडी भी प्रदान कर रही है।   ॐ और मंत्र मुद्रित योग शॉल और गाउन से लेकर सजावट के सामान तक होंगे प्रदर्शित काशी की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भूमि एक बार फिर अपने अनूठे और पारंपरिक उत्पादों के साथ वैश्विक पटल पर चमकने के लिए तैयार है। यहां के उद्यमी अपनी सदियों पुरानी कला और परंपरा को आधुनिक बाजार की जरूरतों के साथ खूबसूरती से जोड़ते नजर आयेंगे। शिवम् आर्ट्स एक्सपोर्ट के निदेशक अभिषेक केशरी ने बताया कि योगी सरकार द्वारा एक बड़ा प्लेटफार्म दिया जा रहा है। ट्रेड शो में  विशेष रूप से  डिजाइन किए गए ॐ और मंत्र मुद्रित योग शॉल ,स्कार्फ़ और गाउन भी प्रदर्शित किए जाएंगे। इन शॉल को योग और ध्यान के अनुभव को अधिक आध्यात्मिक एवं सहज बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।  इसके अलावा निर्यातक सिल्क ब्रोकेड कुशन कवर, टेबल रनर, वाल हैंगिंग और आकर्षक बेड कवर भी प्रदर्शित करेंगे, जो घर की सजावट और पारंपरिक परिधान प्रेमियों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र होगा। अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता वाले 100 प्रतिशत रिसाइकिल बैग उत्पादों की भी होगी प्रदर्शनी आर.ए.एस पॉलीटेक्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से फ्लेक्सिबल इंटरमीडिएट बल्क कंटेनर्स (एफ.आई.बी.सी) बैग ,मल्टीफिलामेंट यार्न और अन्य उत्पादों प्रदर्शित किए जायेंगे। एफ.आई.बी.सी को जंबो बैग, बल्क बैग,बिग बैग या टनल बैग के नाम से भी जाना जाता है। यह पी.पी. कपड़े से बना औद्योगिक बैग है, जिसका उपयोग विभिन्न वस्तुओं के भंडारण और परिवहन के लिए किया जाता है। यह उत्पाद  लगभग 100 प्रतिशत रिसाइकिल  उपयोग करके उत्पाद तैयार किया जाता है। वर्जन  पिछले वर्ष यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में कंपनी को अच्छा व्यवसाय और सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। इसी अनुभव के कारण इस वर्ष भी कंपनी ने ट्रेड शो में भाग लेने का निर्णय लिया है। योगी सरकार यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के द्वारा काशी के उद्यमियों और निर्यातकों के लिए अपने उत्पादों को देश-दुनिया के खरीदारों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच बना रही है। आर.के. चौधरी, डायरेक्टर, आर.ए.एस पॉलीटेक्स प्राइवेट लिमिटेड  वर्जन  यूपीआईटीएस में पहले भाग ले चुके निर्यातकों ने बताया कि इस आयोजन से अच्छा व्यापार मिलता है। हम पहली बार इस ट्रेड शो में शामिल होंगे, यहां स्टॉल किफायती है और खरीदारों से सीधे संपर्क का अवसर मिलेगा। बिचौलियों के न होने से लाभ अधिक होगा। योगी सरकार हम जैसे उद्यमियों को अपने उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का अवसर दे रही है।    असरार अहमद, निदेशक, असरार अहमद साड़ीज़

युवाओं के बीच CM योगी, सुभारती विश्वविद्यालय में होगा सीधा संवाद; नितिन नबीन-पंकज चौधरी भी रहेंगे मौजूद

युवाओं के बीच योगी, क्रांतिधरा से गूंजेगा संवाद – सुभारती विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे युवाओं से सीधा संवाद, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी रहेंगे मौजूद – युवा सम्मेलन के बाद पश्चिमी क्षेत्र के शक्ति केंद्र संयोजकों का सम्मेलन, संगठन की जमीनी तैयारियों पर भी मंथन मेरठ  सोमवार को क्रांतिधरा मेरठ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के युवा संवाद की साक्षी बनेगी। सुभारती विश्वविद्यालय के मांगल्य प्रेक्षागृह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ युवाओं के बीच पहुंचकर उनसे सीधे संवाद करेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री का करीब पांच घंटे का मेरठ प्रवास प्रस्तावित है। युवा सम्मेलन के बाद इसी परिसर में पश्चिमी क्षेत्र के शक्ति केंद्र संयोजकों का सम्मेलन होगा। युवा संवाद को लेकर सुभारती विश्वविद्यालय परिसर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कार्यक्रम में युवाओं के साथ संवाद के जरिए उनके सवालों और प्रदेश में शिक्षा, रोजगार, कौशल, उद्यमिता व भविष्य के अवसरों से जुड़े विषयों पर चर्चा की संभावना है। मुख्यमंत्री के संबोधन का विस्तृत एजेंडा हालांकि अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, इसलिए उनके संबोधन के विषयों को लेकर अंतिम दावा नहीं किया जा सकता। नितिन नबीन भी युवाओं से संवाद करेंगे। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार युवा सम्मेलन के बाद शक्ति केंद्र सम्मेलन प्रस्तावित है। युवा शक्ति के बीच मुख्यमंत्री की मौजूदगी मुख्यमंत्री के युवा संवाद को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में विशेष तैयारियां की गई हैं। युवाओं के बीच मुख्यमंत्री की मौजूदगी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेगी। युवा सम्मेलन के बाद भाजपा के पश्चिमी क्षेत्र की संगठनात्मक गतिविधियां भी इसी परिसर में आगे बढ़ेंगी। इसके लिए अलग जर्मन हैंगर तैयार किया गया है, जहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शक्ति केंद्र संयोजकों और मंडल अध्यक्षों की भागीदारी होगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मेरठ प्रवास के दौरान युवा संवाद के साथ संगठनात्मक बैठकों का भी कार्यक्रम है। रिपोर्टों के अनुसार पश्चिमी क्षेत्र के करीब पांच हजार शक्ति केंद्र संयोजकों से संवाद प्रस्तावित है। बूथ स्तर की सक्रियता, संगठन की तैयारियों और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कार्ययोजना पर चर्चा होगी। पांच घंटे में युवा संवाद से संगठन तक मुख्यमंत्री का मेरठ प्रवास करीब पांच घंटे का प्रस्तावित है। वह सुबह करीब 11 बजे सुभारती विश्वविद्यालय पहुंचेंगे और युवा सम्मेलन तथा शक्ति केंद्र सम्मेलन में शामिल होंगे। इसके बाद शाम करीब चार बजे उनके लौटने का कार्यक्रम बताया गया है। वहीं नितिन नबीन का मेरठ प्रवास करीब 24 घंटे का रहेगा। युवा संवाद और शक्ति केंद्र सम्मेलन के बाद वह पश्चिमी क्षेत्र के सांसदों, विधायकों, पूर्व जनप्रतिनिधियों और संगठन पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। होटल ब्रावुरा में भी संगठनात्मक बैठकें प्रस्तावित हैं। अगले दिन उनका सहारनपुर जाने का कार्यक्रम है। इस तरह सोमवार को मेरठ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यक्रम युवा संवाद के साथ शुरू होकर संगठनात्मक संवाद तक पहुंचेगा। सुभारती विश्वविद्यालय का परिसर दिनभर युवा शक्ति और संगठनात्मक गतिविधियों का केंद्र बना रहेगा।

मोदीनगर की शिकंजी से लखनऊ के कबाब तक, UP ट्रेड शो में सजेगी प्रदेश की खास ‘खाऊ गली’

लखनऊ  उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में प्रदेश की औद्योगिक, कारोबारी और उद्यमशील ताकत के साथ ही उत्तर प्रदेश की समृद्ध खानपान परंपरा भी देश-दुनिया के सामने दिखाई देगी। ट्रेड शो के फूड कोर्ट में प्रदेश के अलग-अलग जनपदों और क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजनों को एक ही स्थान पर प्रस्तुत किया जाएगा। इसके माध्यम से आगंतुकों को उत्तर प्रदेश के विभिन्न अंचलों के विशिष्ट स्वाद का अनुभव एक ही परिसर में मिलेगा। ‘यूपी का स्वाद’ में दिखेगी प्रदेश की खानपान विरासत फूड कोर्ट में ‘यूपी का स्वाद’ के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध व्यंजनों को स्थान दिया गया है। यहां मोदीनगर की जैन शिकंजी, खुर्जा की खुरचन, मुरादाबाद की मुरादाबादी दाल और बिस्कुट रोटी, नोएडा की गुर्जरी थाली, लखनऊ के गलौटी कबाब, टुंडे कबाब और लखनवी बिरयानी तथा वाराणसी का बनारसी पान, टमाटर चाट और कुल्हड़ चाय उपलब्ध रहेगी। इसी क्रम में कानपुर की दही-जलेबी और समोसा चाट, आगरा का पेठा और बेढ़ई संग आलू सब्जी और दालमोट, मथुरा का पेड़ा, प्रयागराज की तहरी, लस्सी और चाट, गोरखपुर का ठेकुआ, बलिया की लिट्टी-चोखा, झांसी का पोहा और बालूशाही, बरेली की आलू टिक्की और सींक कबाब, मेरठ की रेवड़ी और गजक, अयोध्या की गुझिया तथा देसी घी की मिठाइयां, इटावा के मठा के आलू, मुजफ्फरनगर की गजक और गन्ने से जुड़े उत्पाद तथा बरेली की आलू टिक्की और सींक कबाब जैसे स्थानीय स्वाद भी आकर्षण का केंद्र होंगे। ‘यूपी की खाऊ गली’ में दिखेगा क्षेत्रीय स्वाद ट्रेड शो में ‘यूपी की खाऊ गली’ भी विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। इसमें बनारस का स्वाद, कानपुर का स्वाद, इलाहाबाद का स्वाद, अवध के व्यंजन, जौनपुर का स्वाद, लखीमपुर का स्वाद, अलीगढ़ का स्वाद, आगरा का स्वाद, मुरादाबाद का स्वाद, खुर्जा का स्वाद, नोएडा का स्वाद, बरेली का स्वाद, गाजियाबाद का स्वाद, बलिया का स्वाद, गोरखपुर का स्वाद और गाजीपुर का स्वाद सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के खानपान को प्रस्तुत किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की विशिष्ट खानपान परंपराओं को एक बड़े मंच पर प्रदर्शित करने के साथ ही स्थानीय उत्पादों और उनसे जुड़े कारोबार को भी व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास किया गया है। ग्रामीण आजीविका से जुड़े उत्पादों को भी मिलेगा मंच फूड कोर्ट में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का विशेष फूड स्टॉल भी होगा। यहां ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार किए जाने वाले व्यंजनों को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर आजीविका से जुड़े समूहों को अपने उत्पादों को बड़े मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही फूड कोर्ट में विभिन्न लोकप्रिय खाद्य प्रतिष्ठानों के स्टॉल भी लगाए जाएंगे। इनमें डोमिनोज, वॉव मोमोज, सबवे, वॉव चाइना, केवेंटर, चायोस, टैको बेल, केएफसी, बीकानेरवाला, कोक, बर्गर किंग, सीजन्स कैफे, डोसा किचन, बिटवीन द ब्रेड, बरिस्ता कॉफी, फैट रोल और फ्रूट जूस बार शामिल हैं। उद्योग और निवेश के साथ दिखेगी यूपी की सांस्कृतिक पहचान योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को निवेश, उद्योग और निर्यात के साथ-साथ अपनी स्थानीय पहचान को बड़े बाजार से जोड़ने की दिशा में भी आगे बढ़ाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो इसी व्यापक प्रयास का महत्वपूर्ण मंच है, जहां प्रदेश की औद्योगिक क्षमता के साथ स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, खानपान और उद्यमिता को भी प्रदर्शित किया जाता है। फूड कोर्ट में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के व्यंजनों को एक साथ प्रस्तुत किए जाने से उत्तर प्रदेश की विविधता में एकता और समृद्ध खानपान परंपरा भी सामने आएगी। देश-विदेश से आने वाले खरीदारों, निवेशकों, उद्यमियों और आगंतुकों के लिए यह प्रदेश की आर्थिक क्षमता के साथ उसकी सांस्कृतिक और स्थानीय पहचान से परिचित होने का अवसर भी बनेगा। स्थानीय स्वाद को वैश्विक मंच से जोड़ने की पहल उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में उद्योग, निवेश और कारोबार के साथ प्रदेश के स्थानीय स्वाद को शामिल करना ‘स्थानीय से वैश्विक’ की अवधारणा को विस्तार देता है। एक ही परिसर में पूर्वांचल, अवध, बुंदेलखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य उत्तर प्रदेश के अलग-अलग स्वादों की मौजूदगी प्रदेश की खानपान विविधता को रेखांकित करेगी। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में जहां उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और कारोबारी क्षमता दुनिया के सामने प्रस्तुत होगी, वहीं ‘यूपी का स्वाद’ और ‘यूपी की खाऊ गली’ के माध्यम से प्रदेश की मिट्टी से जुड़े स्वाद और परंपराओं की खुशबू भी देश-दुनिया तक पहुंचेगी।  

बिहार बना मशरूम उत्पादन का देश में नंबर-1 राज्य, गरीबों और महिलाओं के लिए बढ़ी कमाई की राह

पटना  बिहार इन दोनों के उत्पादन में देश में अग्रणी है, लेकिन मखाना मुखर है और मशरूम मौन। इसीलिए मशरूम की बातें तनिक कम सुनी जा रहीं। हालांकि, इसके भरोसे निम्न आय वर्ग वाले लोगों की कमाई दिन-प्रति-दिन बढ़ती जा रही। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ताजा रिपोर्ट बता रही कि वर्ष 2013-14 में बिहार में मात्र 0.06 हजार टन मशरूम होता था, जो बढ़कर अब 42.19 हजार टन हो चुका है। 12.84% की दर से बढ़ेगा मशरूम का बाजार इसके उत्पादन में अभी आगे भी जोरदार वृद्धि की संभावना है, जबकि मखाना उत्पादन के उच्चतम स्तर को छूने लगा है। हालांकि, 2030 तक मखाने का रकबा 70000 हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य है। कृषि-अर्थव्यवस्था में मखाना वस्तुत: 'मैक्रो-इकोनमिक सुपरफूड' है, जो वैश्विक स्तर पर बिहार की ब्रांडिंग कर रहा और विदेशी मुद्रा जुटा रहा है। इसके विपरीत, मशरूम एक 'माइक्रो-इकोनमिक गेमचेंजर' है, जो गरीबी उन्मूलन, पोषण सुरक्षा और महिला सशक्तीकरण का प्रभावी और कम लागत वाला जरिया सिद्ध हो रहा है। मशरूम उत्‍पादन में 2022 में अग्रणी बना था ब‍िहार इन दोनों उत्पादों के साथ एक संयोग वर्ष 2022 से जुड़ा है। उस वर्ष दूसरे राज्यों को पीछे छोड़ते हुए बिहार मशरूम के उत्पादन में अग्रणी राज्य बना। तब से वह पहले क्रमांक पर कायम है। मिथिला मखाने को भौगोलिक प्रतिदर्श-चिह्न (जीआइ टैग) भी उसी वर्ष मिला। उसके बाद निर्यात की संभावना में आशातीत वृद्धि हुई। हालांकि, सर्वाधिक खपत आज भी घरेलू स्तर पर ही है। मखाना का उत्पादन मुख्य रूप से तालाबों और जलजमाव वाले क्षेत्रों तक सीमित है। इसके उत्पादन में अत्यधिक श्रम और लागत की आवश्यकता होती है और इसमेंं समुदाय विशेष के लोग दक्ष हैं। मशरूम के लिए उपजाऊ भूमि या विशेष मौसम की आवश्यकता नहीं होती। बेहद कम लागत (भूसा, कंपोस्ट और स्पान के जरिये) से इसे झोपड़ियों या बंद कमरों में रैक बनाकर उगाया जाता है। बहरहाल यह राज्य में एक नई ''इनडोर कृषि क्रांति'' का नेतृत्व कर रहा है। यदि प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और मार्केट लिंकेज बेहतर हो, तो बिहार की अर्थव्यवस्था मेंं इसका महत्वपूर्ण योगदान होगा। उत्पादन और निर्यात : विश्व में 80% मखाना भारत में होता है और भारत का 80% बिहार में। मखाने के कुल निर्यात में बिहार की हिस्सेदारी भी लगभग इतनी ही है। मशरूम के वैश्विक उत्पादन में भारत चौथे स्थान पर है। हालांकि, निर्यात अभी मामूली है, लेकिन कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी अभी 12.02% है, जो 2020 में 10.82% हुआ करती थी। बाजार और अनुमान : मार्केट एंड रिसर्च के अनुसार, भारत में मखाना का बाजार 2025 में 92900 करोड़ रुपये था। 8.85% की चक्रवृद्धि दर से बढ़कर 2034 तक यह 19950 करोड़ रुपये का होगा। मशरूम का बाजार 2024 में लगभग 11992 करोड़ रुपये का था। 2030 तक यह बढ़कर 24753 करोड़ रुपये हो जाएगा। यह 12.84% की वृद्धि होगी।  

शिक्षा व्यवस्था सुधारने की नई पहल, बिहार के मॉडल स्कूलों में अधिकारी निभाएंगे शिक्षक की भूमिका

पटना बिहार में अब जिला स्तरीय अधिकारी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ शिक्षक की भूमिका में भी नजर आएंगे. राज्य के 700 मॉडल स्कूलों में अधिकारियों को संबद्ध किया जा रहा है. ये अधिकारी स्कूलों में पढ़ाई और प्रशासनिक व्यवस्था की निगरानी करेंगे. साथ ही हर सप्ताह कम से कम एक कक्षा खुद भी लेंगे. इस संबंध में सभी जिलों के डीएम को निर्देश दिया गया है. शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रोशन की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि प्रत्येक सरस्वती विद्या निकेतन यानी मॉडल स्कूल से एक जिला स्तरीय पदाधिकारी को संबद्ध किया जाए. हर सप्ताह अधिकारी खुद लेंगे कक्षा संबद्ध किए गए अधिकारी नियमित रूप से मॉडल स्कूलों का निरीक्षण करेंगे. वे स्कूल की शैक्षणिक और आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा भी करेंगे. जरूरत के अनुसार अधिकारियों को सुधार के लिए दिशा-निर्देश देना होगा. अधिकारी हर सप्ताह अपनी रुचि के विषय के अनुसार एक या उससे अधिक कक्षाएं खुद लेंगे. इसके अलावा वे पाठ्य-टीका, गृहकार्य और क्लासरूम ट्रांजेक्शन का भी अवलोकन करेंगे. अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि स्कूल में निर्धारित पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो. आधुनिक सुविधाओं का सही इस्तेमाल हो. विद्यार्थियों की उपस्थिति भी बेहतर रहे. पढ़ाई से लेकर अनुशासन तक पर नजर अधिकारी विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास और अनुशासन की स्थिति की समीक्षा करेंगे. वे नियमित उपस्थिति पर भी नजर रखेंगे. शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी होगी. स्कूल की मूलभूत सुविधाओं की भी जांच की जाएगी. इसमें बिजली, रंग-रोगन, शौचालय और पेयजल जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. प्रधानाध्यापक और शिक्षकों के साथ बैठक भी होगी. इसमें स्कूल के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी कदमों पर चर्चा की जाएगी. स्कूलों में नवाचार को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा. अंग्रेजी कौशल पर भी रहेगा फोकस मॉडल स्कूलों में विद्यार्थियों के अंग्रेजी कौशल को बेहतर बनाने के लिए विशेष कक्षाएं चलेंगी. अधिकारियों को डिबेट, लेखन और व्याकरण जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है. कक्षा लेने वाले अधिकारी स्कूल की स्थिति और अपनी गतिविधियों की रिपोर्ट शिक्षा विभाग को देंगे. इस रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा पदाधिकारी स्कूल की व्यवस्था में जरूरी सुधार करेंगे. ई-शिक्षा कोष पर होगी स्कूलवार निगरानी संबद्ध अधिकारियों को ई-शिक्षा कोष पर स्कूलवार पंजीकृत किया जाएगा. अधिकारियों से मिलने वाली रिपोर्ट को जिला शिक्षा पदाधिकारी राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक में प्रस्तुत करेंगे. इस व्यवस्था के जरिए मॉडल स्कूलों में पढ़ाई, अनुशासन, शिक्षकों की उपस्थिति और आधारभूत सुविधाओं की नियमित निगरानी की जाएगी.

किसानों के लिए नई योजना, ₹6 लाख तक कर्ज पर सरकार देगी 5% ब्याज अनुदान

लखनऊ  किसानों के बहुउपयोगी योजना के रूप में उभर कर सामने आई किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ प्रदेश के लाखों किसानों ने उठाया, लेकिन केसीसी का लाभ लेने वालों में डिफाल्टरों की संख्या बढ़ गई, जो बैंक और शासन दोनों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा था। ऐसे में योगी सरकार ने इसके समाधान और किसानों को सुविधा के लिए मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना की शुरूआत की है, जिससे किसानों को बड़ा लाभ मिल सकता है। क्या है मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना की घोषणा की थी, जिसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की ओर से किसानों को कम ब्याज पर लोन दिया जाता है। सरकार का मानना है रियायती ब्याज दर पर ऋण प्राप्त होने से किसान ऋणमाफी की मानसिकता से बाहर निकलेंगे और दीर्घकालीन पूंजी निवेश कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित होंगे। ऋण पर पांच प्रतिशत का अनुदान मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के अंतर्गत किसानों को छह लाख रुपये तक का ऋण सिर्फ छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से दिया जाएगा। राज्य सरकार ऋणों पर पांच प्रतिशत अनुदान देगी। यह अनुदान उन्हीं किसानों को मिलेगा, जो निर्धारित अवधि के अंदर किस्तें अदा कर रहे हैं। बता दें कि नाबार्ड उच्च ब्याज दर (11 से 11.50 प्रतिशत) पर ऋण देता है, जिसका भुगतान कई बार किसान नहीं कर पाते थे। ऐसे में प्रस्तावित योजना के अंतर्गत लघु किसानों को छह लाख रुपये तक का ऋण छह प्रतिशत रियायती वार्षिक ब्याज की दर से दिया जाएगा मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना की पात्रता योगी सरकार किसानों को कर्ज के बोझ से मुक्ति दिलाने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी क्रम में ही यह योजना लॉन्च की गई। योजना का लाभ लेने के लिए किसान को उत्तर प्रदेश का निवासी होना अनिवार्य है ओर साथ ही उसके पास कृषि योग्य भूमि होनी चाहिए और सरकारी रिकॉर्ड में जमीन का का दस्तावेज हों। पांच साल से अधिक ऋण अवधि का विकल्प ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के माध्यम से चलाई जाएगी। बैंक द्वारा किसानों को दीर्घकालिक ऋण न्यूनतम ब्याज पर दिया जाएगा। इस योजना के तहत प्रदेश सरकार ब्याज पर अनुदान देगी, जिससे खेती किसानी के लिए लिया जाने वाला यह ऋण काफी सस्ता पड़ेगा। ऋण पांच साल और उससे अधिक अवधि के लिए दिया जाएगा। बता दें कि 15 सितंबर 2026 को हुई कैबिनेट की बैठक में लघु एवं सीमांत किसानों के लिए दीर्घकालिक ऋण की विशेष सुविधा देने के लिए बनाई मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना संबंधी प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी गई है।

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की तैयारी, गांवों में लगे सोलर सिस्टम के आधार पर तय होंगे ‘सोलर विलेज’

पटना  बिजली कंपनी अब सोलर विलेज योजना को आगे लाने की तैयारी में है। किसी गांव में कितनी संख्या मे सोलर सिस्टम काम रहे उनकी संख्या के आधार पर गांवों की रैंकिंग की जाएगी। रैकिंग के आधार पर सोलर विलेज यानी सौर ग्राम तय होंगे। शीर्ष के सोलर विलेज को बिजली कंपनी के स्तर से इंसेंटिव यानी प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। सोलर सिस्टम की होगी गणना इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार गांवों में स्थित स्कूल, घर की छतों और अगर स्वास्थ्य केंद्र है तो वहां लगे सोलर सिस्टम की गिनती सोलर विलेज तय किए जाने को लेकर होगी। प्रधानमंत्री मुफ्त बिजली सूर्य घर योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में भी घर की छतों पर सोलर सिस्टम लगने शुरू हुए हैं। इनकी गिनती सोलर विलेज तय करने में महत्वपूर्ण होगी। सभी सिस्टम अब ग्रिड कनेक्टेड हैं। वर्तमान में प्राय: सभी गांवों में सोलर स्ट्रीट लाइट काम कर रहे हैं इसलिए सोलर विलेज योजना में इसकी गणना नहीं होगी। अधिक से अधिक लगे सोलर सिस्टम बिजली कंपनी के संबंधित अधिकारी ने बताया कि किसी गांव को पूरी तरह से सोलर विलेज के रूप में विकसित करना संभव नहीं है। पर यह कोशिश है कि गांव में अधिक से अधिक सोलर सिस्टम लगे। अब जो भी सिस्टम लग रहा वह ग्रिड कनेक्टेड लग रहा। धरनई गांव को बनाया गया था पहला सोलर विलेज वर्ष 2014 में बिहार के एक गांव को सोलर विलेज के रूप में विकसित किए जाने का प्रयोग किया गया था। उस समय लोग सौर ऊर्जा को नकली बिजली कहते थे। जहानाबाद जिले के धरनई गांव में कुछ संस्थाओं के माध्यम से सोलर माइक्रो ग्रिड की स्थापना की गयी थी। पर बाद के सालों में रख रखाव के अभाव में यह प्रोजेक्ट बंद हो गया इसके अलावा हाल ही में नालंदा जिले के नूरसराय प्रखंड स्थित डोईया गांव को साेलर माडल गांव के रूप में विकसित किया गया है। गुजरात में है देश का पहला सोलर विलेज गुजरात का मोढेरा गांव देश का पहला सोलर विलेज है। यहां 24 घंटे सौर ऊर्जा से बिजली की आपूर्ति होती है। सोलर इनर्जी की तकनीक ग्राउंड माउंटेड सोलर पावर प्लांट और बैट्री इनर्जी स्टोरेज सिस्टम यहां लगा है। सभी घरों की छत पर सोलर पैनल लगे हुए हैं।  

25 करोड़ बच्चों के सपनों को भारत हर बच्चों को अवसर, हर सपनों को उड़ान: विकसित भारत का संकल्प

रायपुर किसी बच्चे की आंखों में देखें तो वहां केवल बचपन नहीं दिखाई देगा, बल्कि वहां आने वाले भारत की तस्वीर दिखाई देगी। किसी की आंखों में अंतरिक्ष तक पहुंचने का सपना है, कोई डॉक्टर बनकर गांव के लोगों की सेवा करना चाहता है, कोई वैज्ञानिक बनकर नई खोज करना चाहता है, तो कोई अपने गांव में ऐसा काम करना चाहता है जिससे उसके साथ दूसरे लोगों को भी रोजगार का अवसर मिले और भविष्य सुनिश्चित हो सके। वहीं किसी बच्चे का सपना खेल के मैदान से जुड़ा है तो किसी का खेत, तकनीक, शिक्षा, कला या उद्यमिता से। भारत के करोड़ों बच्चों की आंखों में पल रहे यही अनगिनत सपने मिलकर वर्ष 2047 के विकसित भारत की नींव रख रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा और राष्ट्रनिर्माण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ की दूसरी पहल ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ इसी भविष्य को समझने और उसे आकार देने का संकल्प है। यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि उस पीढ़ी के प्रति विश्वास का संदेश है, जो वर्ष 2047 में विकसित भारत की जिम्मेदारी संभालेगी। आज जो बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, वही कल भारत के वैज्ञानिक, चिकित्सक, इंजीनियर, शिक्षक, सैनिक, खिलाड़ी, उद्यमी, शोधकर्ता और नीति-निर्माता होंगे। विकसित भारत की यात्रा की शुरुआत इसलिए स्कूल की कक्षा से होती है। एक बच्चे के हाथ में किताब होती है, लेकिन उसी किताब के पन्नों में उसके भविष्य की पूरी दुनिया छिपी होती है। शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित रखने के बजाय बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, कौशल, तकनीकी समझ और नवाचार की भावना विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयास आने वाले भारत की तस्वीर बदल रहे हैं। पीएम श्री स्कूल इसी बदलती सोच का उदाहरण हैं, जहां विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ प्रयोग, खेल, कला, तकनीक और अनुभव के माध्यम से सीखने का वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन भारत के सपनों की असली ताकत तब सामने आएगी, जब विकास की रोशनी उन बच्चों तक भी पहुंचेगी, जिनके घर दूरस्थ गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और वनांचलों में हैं। छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल राज्य में यह जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। एकलव्य आवासीय विद्यालयों ने जनजातीय समाज के अनेक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अवसर दिए हैं। जिन बच्चों के लिए कभी बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई करना दूर का सपना था, उनके लिए आवासीय विद्यालय शिक्षा और बेहतर भविष्य की नई राह बन रहे हैं। इन विद्यालयों की कक्षाओं में बैठा कोई बच्चा जब पहली बार बड़े लक्ष्य के बारे में सोचता है, तो उसके साथ केवल उसका अपना सपना नहीं होता। उसके पीछे माता-पिता की उम्मीदें होती हैं, परिवार की वर्षों पुरानी आकांक्षाएं होती हैं और पूरे समाज की बदलती तस्वीर होती है। एक बच्चे की सफलता उसके परिवार को यह विश्वास देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, प्रतिभा को अवसर मिले तो मंजिल हासिल की जा सकती है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रयास आवासीय विद्यालय भी विद्यार्थियों के सपनों को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। स्कूली शिक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर और दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों के सामने उच्च शिक्षा के नए रास्ते खुल रहे हैं। जेईई, नीट, क्लैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन और तैयारी का वातावरण इन विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास देता है। यह बदलाव केवल शिक्षा व्यवस्था का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह उस सोच का विस्तार है जिसमें बच्चे की प्रतिभा को उसके गांव, परिवार या आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसकी क्षमता और मेहनत से पहचाना जाता है। वर्ष 2047 के भारत की तस्वीर केवल ऊंची इमारतों, आधुनिक शहरों और नई तकनीकों से नहीं बनेगी। उसकी असली पहचान उस बच्चे के आत्मविश्वास से होगी, जो कह सके कि मैं अपने सपने को पूरा कर सकता हूं। विकसित भारत का अर्थ तब और व्यापक होगा, जब देश का युवा रोजगार की तलाश करने के साथ रोजगार पैदा करने की क्षमता भी रखेगा। शिक्षा के साथ कौशल, नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी दक्षता युवाओं को अपने पैरों पर खड़े होने और दूसरों के लिए भी अवसर पैदा करने की शक्ति देगी। आज का विद्यार्थी कल का केवल नौकरी तलाशने वाला युवा नहीं, बल्कि नया विचार देने वाला शोधकर्ता, नई तकनीक बनाने वाला नवाचारी, अपना व्यवसाय खड़ा करने वाला उद्यमी और समाज की समस्याओं का समाधान खोजने वाला परिवर्तनकारी नागरिक बन सकता है। यही वह सोच है जो विकसित भारत के संकल्प को व्यापक अर्थ देती है। ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ इसलिए केवल बच्चों के भविष्य की बात नहीं करता, यह पूरे देश के भविष्य की बात करता है। आज किसी स्कूल की प्रयोगशाला में प्रयोग करता बच्चा, किसी एकलव्य विद्यालय में पढ़ता जनजातीय विद्यार्थी, प्रयास आवासीय विद्यालय में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता युवा और अपने गांव में भविष्य का कोई नया रास्ता तलाशता विद्यार्थी-ये सभी 2047 के भारत की बदलती तस्वीर के गवाह होंगे। इन बच्चों के सपनों को अवसर देना ही राष्ट्रनिर्माण की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है। क्योंकि किसी देश की वास्तविक शक्ति उसके संसाधनों में नहीं, उसकी नई पीढ़ी की कल्पनाशक्ति और सामर्थ्य में होती है। जब करोड़ों बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी, उनके भीतर सवाल पूछने की हिम्मत होगी, प्रयोग करने की स्वतंत्रता होगी और आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे, तब भारत की विकास यात्रा और अधिक मजबूत होगी। वर्ष 2047 का विकसित भारत आज से ही बनना शुरू हो चुका है। उसकी नींव आज की कक्षाओं में रखी जा रही है, उसकी उम्मीदें बच्चों की आंखों में पल रही हैं और उसकी दिशा युवाओं के सपनों से तय होगी। इसलिए जरूरी है कि देश का कोई बच्चा अवसर के अभाव में अपने सपने को छोटा न करे। उसके सपनों की उड़ान जितनी ऊंची हो, भारत का आकाश उतना ही खुला हो। क्योंकि 25 करोड़ बच्चों के सपने केवल 25 करोड़ व्यक्तिगत सपने नहीं हैं। ये 25 करोड़ संभावनाएं हैं, 25 करोड़ नई दिशाएं हैं और 25 करोड़ ऐसे भविष्य हैं, … Read more

सेवा सेतु के जरिए घर के पास ही राशन कार्ड में जुड़ा बच्चे का नाम

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के विजन के अनुरूप शासकीय सेवाओं को आम नागरिकों के घर के नजदीक, सरल, पारदर्शी और सुगम तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में सेवा सेतु पोर्टल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी क्रम में कोंडागांव जिले में डिजिटल माध्यम से नागरिकों को विभिन्न शासकीय सेवाओं का लाभ स्थानीय स्तर पर ही मिल रहा है। ग्राम पंचायत सिंगनपुर निवासी  उमेश कुमार नाग का राशन कार्ड में नाम जुड़वाना सेवा सेतु से आसान हुआ।  नाग ने सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से अपने राशन कार्ड में बच्चे का नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया। अटल डिजिटल सुविधा केंद्र मुलमुला के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की गई और उनका कार्य बहुत ही कम समय में सफलतापूर्वक पूरा हो गया। पहले ऐसे कार्यों के लिए नागरिकों को संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने और अलग से समय निकालना पड़ता था। अब सेवा सेतु के माध्यम से ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध होने से अब नागरिकों को अपने क्षेत्र के नजदीक ही आवश्यक शासकीय सेवाओं का लाभ मिल रहा है। इससे समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है। हितग्राही  नाग ने इस त्वरित एवं जनहितकारी सेवा के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय तथा खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। सेवा सेतु के माध्यम से उपलब्ध हो रही ऐसी सुविधाएं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के उस संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जिसमें शासकीय सेवाओं को नागरिकों तक पहुंचाकर उन्हें सरल और सहज गांव और आसपास के क्षेत्र में ही आवश्यक सेवाओं का लाभ मिल रहा है।

रटगा की सोनू देवी अपने हुनर से परिवार की आर्थिक मजबूती में निभा रहीं भूमिका

रायपुर  गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत रटगा की मती सोनू देवी के हाथों में हुनर पहले से था, जरूरत थी तो बस उस हुनर को आगे बढ़ाने के लिए थोड़े से आर्थिक संबल की। घर पर ही सिलाई का काम करने वाली सोनू देवी परिवार और आसपास के लोगों के कपड़े सिलकर अपनी आमदनी में सहयोग करती थीं। मेहनत और हुनर के बावजूद सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण उनके काम का दायरा छोटा था और वह अपनी सिलाई कला को बड़े स्तर पर नहीं ले जा पा रही थीं। सोनू देवी के लिए सिलाई केवल एक काम नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक जरूरतों में हाथ बंटाने और अपने पैरों पर खड़े होने का माध्यम रही है। वह उपलब्ध संसाधनों में ही लगातार मेहनत करती रहीं। इसी बीच महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके लिए बदलाव की शुरुआत बनी। महतारी वंदन योजना बना आर्थिक संबल महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली एक हजार रुपये की मासिक आर्थिक सहायता ने सोनू देवी को अपने हुनर को आगे बढ़ाने का अवसर दिया। उन्होंने योजना से मिलने वाली राशि और अपनी टेलरिंग मशीन का बेहतर उपयोग करते हुए सिलाई के काम को और गति दी। धीरे-धीरे उनके काम का दायरा बढ़ने लगा और घर से संचालित होने वाला उनका सिलाई कार्य आय के बेहतर साधन के रूप में विकसित होने लगा। सोनू देवी बताती हैं कि नियमित रूप से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने काम को जारी रखने और आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में सहारा दिया। इससे उन्हें अपने सिलाई कार्य पर ध्यान केंद्रित करने और अपने हुनर को और बेहतर तरीके से उपयोग करने का अवसर मिला। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत सोनू देवी के बैंक खाते में 31वीं किस्त की राशि भी पहुंच चुकी है। योजना के माध्यम से लगातार मिल रही आर्थिक सहायता उनके लिए नियमित संबल का काम कर रही है। इस सहयोग से उन्हें अपने काम को आगे बढ़ाने के साथ-साथ परिवार की जरूरतों में योगदान देने का अवसर मिल रहा है। सिलाई से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम आज सोनू देवी के लिए सिलाई का काम महज घर तक सीमित गतिविधि नहीं रह गया है। उनका हुनर अब आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ता माध्यम बन रहा है। अपनी मेहनत, लगन और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए वह अपने काम को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रही हैं। महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने हुनर पर आगे काम करने और जरूरत के अनुसार संसाधनों का उपयोग करने का अवसर दिया है। इससे परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग मिलने के साथ ही उनके आत्मविश्वास को भी मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार मती सोनू देवी महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने उनके सिलाई कार्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। उनका कहना है कि नियमित आर्थिक सहायता से उन्हें अपने काम को जारी रखने का संबल मिला है और अब वह अपने हुनर के माध्यम से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। सोनू देवी की कहानी यह दर्शाती है कि नियमित आर्थिक सहयोग जब मेहनत और हुनर के साथ जुड़ता है, तो छोटे स्तर पर किया जा रहा काम भी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकता है। महतारी वंदन योजना उनके लिए आर्थिक सहायता के साथ-साथ अपने हुनर को नई पहचान देने का माध्यम बन रही है।