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तीन साल बाद रांची में क्रिकेट का जलवा, भारत और साउथ अफ्रीका आमने-सामने

रांची झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम रांची में 30 नवंबर को भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेला जाएगा। यह मुकाबला झारखंड के क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक बड़ी खुशी का मौका है। अक्टूबर 2022 के बाद यह पहला मैच है जो रांची के मैदान पर खेला जा रहा है। उस समय भी भारत ने दक्षिण अफ्रीका को सात विकेट से हराया था। अब इसी इतिहास को दोहराने के लिए दोनों टीमें तैयार हैं। झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के एक अधिकारी ने बताया कि इसके बाद जनवरी 2026 में भारत दौरे पर आने वाली न्यूजीलैंड टीम के लिए भी रांची को एक अंतरराष्ट्रीय मैच मिलने की संभावना है। ज्ञातव्य है कि झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन मैदान में अब तक कुल 6 वनडे मैच हो चुके हैं, जिनमें भारत ने 3 मैच जीते, 2 मैच हारे और 1 मैच रद्द रहा। इसके अलावा यहां 3 टेस्ट मैच और 4 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले भी हो चुके हैं। महिला क्रिकेट में भी यह मैदान खास रहा है, जहां 3 वनडे और 3 टी20 मैच खेलाए गए हैं। साउथ अफ्रीका के इस भारत दौरे में टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों प्रारूपों के मैच होंगे। वनडे सीरीज में पहला मैच 30 नवंबर को रांची में होगा, दूसरा 3 दिसंबर को रायपुर में और तीसरा 6 दिसंबर को विशाखापट्टनम में।  

मोबाइल छोड़ने में नाकाम बच्चा? AIIMS की ये रणनीति कर सकती है मदद

रायपुर मोबाइल एडिक्शन के कारण हिंसक और असंतुलित व्यवहार करने वाले बच्चे अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। एम्स के मनोरोग विभाग में 5 से 6 सेशन थैरेपी और दवा के साथ पैरेंट्स के सहयोग से बच्चों में सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है। इससे न केवल माता-पिता को राहत मिली है, बल्कि स्कूल में सहपाठियों और शिक्षकों के बीच भी माहौल सुधरा है। एम्स मनोरोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 100 मरीजों का इलाज किया जाता है। इनमें से 8 से 10 बच्चे मोबाइल एडिक्शन, एंजाइटी और ऑटिज्म से संबंधित होते हैं। मोबाइल एडिक्शन के दौरान बच्चे सहपाठियों से मारपीट, गाली-गलौज और अन्य हिंसक व्यवहार करने लगते थे। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल दवा ही पर्याप्त नहीं है। परिवार के सपोर्टिव व्यवहार और समय पर निगरानी से बच्चे बेहतर तरीके से ठीक हो पाते हैं। परिवारिक सहयोग के बिना दवा केवल शांत रखती है, लेकिन व्यवहार में सुधार नहीं ला पाती। इंडियन एसोसिएशन ऑफ पीडियाट्रिक्स ने कोरोनाकाल से पहले गाइडलाइन जारी की थी कि बच्चों की उम्र के अनुसार मोबाइल फोन उपयोग की सीमा तय करनी चाहिए। मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल बदलने के बाद भी बच्चों का व्यवहार बदल सकता है। प्राइमरी क्लास के बच्चों को सीमित समय के लिए मोबाइल दिया जाता है, जबकि मिडिल और हाई स्कूल में उनके पास अधिक स्वतंत्रता होती है। इस प्रकार, मोबाइल एडिक्शन से प्रभावित बच्चों का सही इलाज, थैरेपी और परिवारिक सहयोग से व्यवहार में सुधार हो रहा है और वे सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।

चिकनगुनिया का कहर: डेंगू को पीछे छोड़ते हुए केस बढ़े, सावधान रहें!

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में डेंगू के साथ ही चिकनगुनिया के रोगी बढ़ रहे हैं। अब तक डेंगू के 104 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, डेंगू से 4 गुना कम जांच होने के बावजूद चिकनगुनिया की पॉजिटिव दर डेंगू से दो प्रतिशत से अधिक रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में अब तक कुल 7971 लोगों की डेंगू की जांच हुई। इनमें से 104 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। डेंगू पॉजिटिव दर 1.31 प्रतिशत है। इसी तरह अब तक 2006 लोगों की चिकनगुनिया की जांच की गई है, जिसमें से 70 लोगों चिकनगुनिया से पीड़ित पाए गए। चिकनगुनिया की पॉजिटिव दर 3.49 प्रतिशत रही है। विशेषज्ञों के अनुसार राजधानी में डेंगू से अधिक चिकनगुनिया तेजी से पैर पसार रहा है। लक्षण दिखे तो कराएं जांच डॉक्टरों के अनुसार, किसी को बुखार के साथ सर्दी लगे और मांसपेशियों और आंखों के पीछे दर्द हो तो 24 घंटे में डेंगू की जांच करा लेना चाहिए। जेपी अस्पताल, हमीदिया, बीएमएचआरसी और एम्स के साथ ही सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों में मुफ्त जांच की सुविधा है। सितंबर में सर्वाधिक डेंगू के मामले स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सबसे अधिक डेंगू के मामले सितंबर में आए। जनवरी से अगस्त तक आठ महीने में कुल डेंगू के 68 मरीज आए थे। अकेले सितंबर माह में 36 से अधिक डेंगू के मरीज मिले हैं। वहीं, अगस्त माह तक भोपाल में डेंगू सेंसेटिव जोन की संख्या बहुत कम थी।   यहां हालात ज्यादा खराब टीटी नगर, बागसेवनियां, शाहजहांनाबाद और इब्राहिमपुरा में हालात अधिक खराब हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में डेंगू के मामले और बढ़ सकते हैं। ऐसे करें बचाव चिकनगुनिया एक तीव्र जोड़ों के दर्द का कारण बनता है जो हफ्तों या महीनों तक रह सकता है, इसलिए रोकथाम ही सबसे अच्छा उपाय है। आप मच्छरों के काटने से बचकर, अपने आस-पास सफाई रखकर, और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनकर अपना बचाव कर सकते हैं।

गुरुग्राम तक सफर हुआ आसान: चंडीगढ़ और पंचकूला से नया रूट, अब 6 घंटे में पहुँचें

नई दिल्ली हरियाणा रोडवेज की बसों से चंडीगढ़ और पंचकूला से गुरुग्राम जाने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें इन शहरों से आने-जाने में दिल्ली में लगने वाले ट्रैफिक जाम को नहीं झेलना पड़ेगा। लोग आठ से नौ घंटे में पहुंचने की बजाय केवल छह घंटे में गुरुग्राम पहुंच सकेंगे और गुरुग्राम से वापस चंडीगढ़ या पंचकूला आ सकेंगे। हरियाणा रोडवेज ने अपनी बसों को दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आइएसबीटी) से होकर चलाने की बजाय दिल्ली से सोनीपत को जोड़ने वाले अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (यूईआर-2) से चलाने का निर्णय लिया है। इस रूट से बसों को दिल्ली को पार करने से डेढ़ से दो घंटे का अतिरिक्त समय नहीं लगेगा।   दिल्ली में जाम लगने की वजह से रोडवेज बस को राजधानी को पार करने में ही करीब दो घंटे लग जाते हैं। पीक आवर्स में तो दो से तीन घंटे भी लग जाते हैं। यूईआर-2 से जाने पर समय की बचत होगी और बसें सही गति से भी चल सकेंगी। हरियाणा रोडवेज ने इस रूट से चलाने के लिए नई बसें गुरुग्राम तथा पंचकूला और अन्य डिपो को दी हैं। नई बसों का ट्रायल के रूप में संचालन आरंभ भी कर दिया गया है।

दिवाली तोहफा: यूपी के छात्र-छात्राओं की स्कॉलरशिप जल्द ही बैंक अकाउंट में, पढ़ें पूरी डिटेल

लखनऊ समाज कल्याण विभाग ने वर्ष 2024-25 की दशमोत्तर छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना की नई समय-सारिणी जारी की है। जिन छात्रों को पिछली बार छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई थी, उन्हें अब 27 से 31 अक्टूबर तक दोबारा आवेदन का मौका मिलेगा। पात्र छात्रों के बैंक खातों में 28 नवंबर को छात्रवृत्ति की राशि भेजी जाएगी। समय सारिणी के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों को 10 से 14 अक्टूबर तक मास्टर डाटा लाक करना होगा। इसके बाद 15 से 18 अक्टूबर के बीच विश्वविद्यालय या संबंध संस्था द्वारा मास्टर डाटा का सत्यापन किया जाएगा। 26 अक्टूबर तक जिला समाज कल्याण अधिकारी सीटों और शुल्क की जांच कर लाकिंग प्रक्रिया पूरी करेंगे। छात्र 27 से 31 अक्टूबर तक आनलाइन आवेदन और रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। आवेदन पत्र का प्रिंट निकालकर संस्थान में एक नवंबर तक जमा करना अनिवार्य होगा। संस्थान द्वारा आनलाइन सत्यापन दो नवंबर तक किया जाएगा, जबकि विश्वविद्यालय या एजेंसी तीन से छह नवंबर तक डाटा की जांच करेगी। जिन छात्रों के आवेदन में कोई गलती रह जाएगी, उन्हें आठ से 11 नवंबर तक संशोधन का अवसर मिलेगा। संशोधित आवेदन 12 नवंबर तक संस्थान द्वारा अग्रसारित किए जाएंगे। इसके बाद 25 नवंबर तक जिला स्तर पर डेटा सत्यापन और विभागीय अधिकारियों द्वारा डिजिटल सिग्नेचर लाकिंग की जाएगी। विभाग ने सभी शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और छात्रों से निर्धारित तिथियों का कड़ाई से पालन करने की अपील की है ताकि कोई भी पात्र छात्र छात्रवृत्ति से वंचित न रह जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज प्रतिभा सम्मान समारोह में विद्यार्थियों को करेंगे सम्मानित

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज जबलपुर में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय महाकोशल महाविद्यालय के 13 करोड़ 37 लाख रुपये की लागत से निर्मित नवीन शैक्षणिक भवन और शासकीय विज्ञान महाविद्यालय के 10.05 करोड़ रुपये से बने नये शैक्षणिक भवन का भी लोकार्पण करेंगे। साथ ही महाकोशल महाविद्यालय में 3 करोड़ 67 लाख रुपये से बनने वाले भवन का भूमि-पूजन भी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव महाविद्यालय में प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में शैक्षणिक उत्कृष्टता, खेल, सांस्कृतिक, नवाचार एवं सामाजिक सेवा क्षेत्रों में विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी करेंगे। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, राज्य सभा सदस्य श्रीमती सुमित्रा बाल्मीकि, सांसद श्री आशीष दुबे, महापौर श्री जगत बहादुर सिंह अन्नु, क्षेत्रीय विधायक श्री अशोक रोहाणी, नगर निगम अध्यक्ष श्री रिकुंज विज और जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष श्री आशीष राव विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के प्राचार्य प्रो. अलकेश चतुर्वेदी ने बताया कि प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस महाकोशल कॉलेज के नवीन शैक्षणिक भवन में कुल 19 व्याख्यान कक्ष, प्रशासनिक ब्लॉक, स्मार्ट कक्षाएँ, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएँ एवं कॉमन रूम जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। यह भवन महाविद्यालय को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता योजना के अनुरूप प्रदेश के अग्रणी शिक्षण संस्थानों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि यह अवसर महाकौशल महाविद्यालय के गौरवपूर्ण इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ेगा। लगभग 1500 विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षाविद एवं नागरिक इस अवसर के साक्षी बनेंगे। यह आयोजन जबलपुर की शिक्षा और युवा ऊर्जा का प्रतीक बनकर प्रदेश में उत्कृष्टता और नवाचार के नये मानक स्थापित करेगा।  

उज्जवल भविष्य की ओर कदम: चंबल के बीहड़ में सौर ऊर्जा का नया अध्याय

भोपाल थर्मल पावर पर निर्भरता कम करने के लिए सौर ऊर्जा की ओर बढ़ रही मध्य प्रदेश सरकार अब चंबल के बीहड़ में सोलर प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए बीहड़ की 60 हजार हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। इस भूमि पर सोलर प्लांट लगाने की संभावनाओं का आइआइटी रुड़की से अध्ययन कराया जा रहा है। इस अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञ करेंगे अध्ययन बीहड़ की भूमि कभी डकैतों के लिए प्रसिद्ध रही है, लेकिन इसका उपयोग अब सौर ऊर्जा बनाने में किया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट में चंबल नदी, जलीय जीवों के संरक्षण और पर्यावरण का भी ध्यान रखा जाएगा। सरकार इस दिशा में भी विचार कर रही है कि क्यों न बीहड़ की भूमि का उपयोग ग्रीन हाइड्रोजन के लिए भी किया जाए। आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञ इस पहलू से भी अध्ययन करेंगे।   कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य बता दें कि ग्रीन हाइड्रोजन एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है, जो नवीकरणीय ऊर्जा से पानी को इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया द्वारा विभाजित करके बनाया जाता है, जिसमें कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य होता है। यह भारी उद्योगों, परिवहन और ऊर्जा भंडारण जैसे मुश्किल क्षेत्रों को कार्बन-मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत 2030 तक पांच मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन के वार्षिक उत्पादन का लक्ष्य रखा है। कितनी भूमि उबड़ खाबड़ और कितनी समतल मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक अमनवीर सिंह बैंस ने बताया कि हमारे पास बीहड़ क्षेत्र की सेटेलाइट इमेज है, इसका पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के भूमि का डाटा से मिलान कराया जा रहा है। इससे यह पता लग जाएगा कि कितनी भूमि उबड़ खाबड़ है और कितनी भूमि समतल। भूमि का वर्गीकरण कर मैपिंग की जा रही है और यह निर्णय लिया जाएगा कि कितनी भूमि का सोलर प्लांट लगाने में उपयोग किया जा सकता है। काफी कुछ आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञों की ओर से किए जाने वाले अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा।  

22 नवंबर से पहले ही होंगे बिहार के चुनाव, नए वोटर कार्ड धारकों को मतदान का मौका

पटना बिहार विधानसभा चुनाव से पहले हुए मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद आम मतदाताओं के मन में बड़ा सवाल था कि वोटर कार्ड बदल दिए जाएंगे? पहले वाले वोटर कार्ड बेकार हो जाएंगे? ऐसा सवाल इसलिए भी था क्योंकि विशेष गहन पुनपरीक्षण में 2003 के बाद मतदाता सूची में शामिल वोटरों को अपने कागज और तस्वीर भी देनी थी। कहा भी गया था कि उनका डाटा उसी हिसाब से अपडेट किया जाएगा। अब देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ किया है कि जिन मतदाताओं की जानकारी में किसी तरह का अपडेट या बदलाव हुआ है, उन्हें नया वोटर कार्ड जारी किया जाएगा। बाकी को इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने बताया कि प्रावधान के तहत 22 नवंबर से पहले नई सरकार के लिए चुनाव हो जाना है और इसी हिसाब से आयोग काम कर रहा है। बाकी दस्तावेजों के आधार भी डाल सकते हैं बिहार चुनाव में वोट दो दिवसीय दौरे के बाद पटना से लौटने के पहले मीडिया से बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त ने साफ कहा- "जिनके वोटर कार्ड के डाटा में कोई परिवर्तन होगा, उन्हें 15 दिनों के अंदर ईपिक, यानी वोटर कार्ड मिल जाएगा। जिनके पास पुराने वोटर कार्ड हैं और डाटा में कोई बदलाव नहीं है, वह उसी को सही मानेंगे। मतदान करने के लिए बाकी जिन दस्तावेजों को पहले से मान्य रखा गया था, वह आगे भी कायम रहेंगे।" मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि अयोग्य वोटरों को हटाने और योग्य वोटरों को शामिल करने के लिए चलाए गए गहन विशेष पुनरीक्षण का परिणाम बहुत स्पष्ट और संतोषजनक रहा है। अब भी कोई अयोग्य जुड़ा हुआ है या योग्य छूटा हुआ है तो उसका नाम हटाने-जोड़ने की प्रकिया चलती रहेगी। चुनाव के बाद यह प्रक्रिया अगले आदेश तक के लिए बंद हो जाएगी। आधार कार्ड की मान्यता पर भी मुख्य चुनाव आयोग ने खुलकर की बात मुख्य चुनाव आयुक्त ने वोटर पुनरीक्षण की प्रक्रिया में आधार को रखने और नहीं रखने को लेकर विवाद पर भी स्पष्ट जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने मतदाता सूची के लिए नामांकन भरा होगा, वह आधार देने के लिए बाध्य नहीं थे और न हैं। चुनाव आयोग या आधार अथॉरिटी के नियम और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत आधार न जन्मतिथि और न नागरिकता का प्रमाणपत्र है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया तो आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण में आधार कार्ड लेने की व्यवस्था दी। उन्होंने नागरिकता को लेकर पूछे गए सवाल पर भी सीधा जवाब देते हुए कहा- संविधान के तहत भारत का मतदाता बनने के लिए भारत का नागरिक होना जरूरी है। वोटर जहां रहता है, उसके आसपास के बूथ का मतदाता हो सकता है। उन्होंने कहा कि सभी चिह्नित अयोग्य मतदाताओं का नाम हटाया गया है। उसका कारण भी बताया गया है।

MP सरकार की तैयारी: जनवरी से बदलेंगे भर्ती और अवकाश-पेंशन के नियम, कैशलेस सुविधा भी नई

भोपाल मध्य प्रदेश में शासकीय कर्मचारियों की सेवा शर्तों और सुविधाओं को लेकर नए साल यानी वर्ष 2026 में बड़े परिवर्तन की तैयारी है। इनमें सरकारी पदों के लिए होने वाली भर्ती प्रक्रिया, कर्मचारियों का कैशलेस उपचार, अवकाश और पेंशन नियम शामिल हैं। भर्ती नियमों में यह प्रविधान किया जा रहा है कि चयन परीक्षाएं वर्षभर में चार-पांच बार ही होंगी। इसमें जो चयन सूची बनेगी, उसके अनुसार विभाग भर्ती करेंगे। इसी तरह कर्मचारियों को उपचार के लिए पहले राशि खर्च कर उसकी प्रतिपूर्ति के दावा नहीं करना होगा। उनके कैशलेस उपचार की व्यवस्था रहेगी। पेंशन नियम भी भारत सरकार के नियमों की तरह बनाए जा रहे हैं। प्रारूप तैयार हो चुका है। अवकाश निर्धारण के लिए भी समिति बना दी गई है, जो सभी संबंधित पक्षों से चर्चा करने के बाद अंतिम निर्णय लेगी।   एक मेरिट सूची से होगी नियुक्तियां प्रदेश में अगले तीन वर्ष में ढाई लाख से अधिक रिक्त पदों को भरने की तैयारी है। अभी वर्ष भर परीक्षाएं चलती रहती हैं। कर्मचारी चयन मंडल 20 से अधिक परीक्षाएं कराता है। इसमें समय के साथ-साथ संसाधन भी अधिक लगते हैं। इसी तरह राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं होती हैं। मौजूदा पैटर्न से सरकार ने भर्ती का जो लक्ष्य रखा है, वह प्रभावित हो सकता है, इसलिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सामान्य प्रशासन विभाग ने भर्ती नियमों में परिवर्तन का प्रारूप तैयार किया। नई व्यवस्था में वर्ष भर में पांच-छह परीक्षाएं होंगी और समूह परीक्षा की एक चयन प्रावीण्य सूची बनेगी। इसके हिसाब से विभाग नियुक्तियां करेंगे। इसे लेकर मुख्य सचिव अनुराग जैन के साथ विभागीय अधिकारियों की दो दौर की बैठक हो चुकी है। कर्मचारियों के लिए आयुष्मान जैसी योजना राज्य सरकार उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान सरकार की तरह सरकारी कर्मचारियों को उपचार के लिए आयुष्मान जैसी योजना लाने की तैयारी में है। इसमें पांच लाख रुपये तक सामान्य और 10 लाख रुपये तक गंभीर बीमारियों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके लिए कर्मचारियों से अंशदान लिया जाएगा, जो उनके वेतन से काटा जाएगा। अंशदान का निर्धारण होना शेष है। पेंशनरों को भी यह सुविधा दी जा सकती है। ऐच्छिक अवकाश का नए सिरे से होगा निर्धारण प्रदेश में अधिकारियों-कर्मचारियों को वर्ष भर में तीन ऐच्छिक अवकाश दिए जाते हैं। सरकार ने वर्षभर के लिए सामाजिक, धार्मिक एवं अन्य आधारों पर 53 ऐच्छिक अवकाश चिह्नित किए हैं। कलेक्टर जिले की स्थितियों को देखते हुए इन्हें घोषित करते हैं। सरकार ने अब सामान्य, सार्वजनिक और ऐच्छिक अवकाश के निर्धारण के लिए समीक्षा कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए सामान्य प्रशासन, गृह, वित्त और राजस्व विभाग के अधिकारियों की समिति गठित की है। यह इस बात का भी परीक्षण कर रही है कि कोरोना महामारी के समय सप्ताह में पांच दिन कार्यालय लगाए जाने की व्यवस्था को जारी रखा जाए या पहले की तरह व्यवस्था बनाई जाए। इसके साथ ही नौकरी में आने के बाद तीसरी संतान होने पर सेवा से बाहर करने और सेवा आचरण नियम में संशोधन पर भी समिति काम कर रही है। केंद्र और राज्य के एक जैसे होंगे पेंशन नियम भारत सरकार ने वर्ष 2011 में 25 वर्ष से अधिक की अविवाहित बेटी, विधवा, परित्यक्ता बेटी को पेंशन देने की पात्रता देने की जो व्यवस्था बनाई, उसे यहां भी लागू किया जाएगा। नियम में यह प्रविधान किया जा रहा है कि अविवाहित पुत्री की स्थिति में आयु 25 साल से अधिक होने के बाद भी जब तक उसका विवाह नहीं होता, तब तक उसे परिवार पेंशन मिलती रहेगी।  

जान जोखिम में डालकर बचाई चार की जिंदगी: एमपी डैम में फंसी कार का रोमांचक रेस्क्यू

शिवपुरी  मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले से बड़ी खबर सामने आ रही है यहां एक कार को ट्रक ने टक्कर मार दी। ट्रक की टक्कर के बाद कार सिंध डैम में जा गिरी, कार में पति-पत्नी व दो बच्चे सवार थे। गनीमत रही की हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद लोग अपनी जान खतरे में डालकर डैम में कूदे और कार में सवार पति-पत्नी व दोनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना अमोला थाना इलाके की है। बताया जा रहा है कि कार में सवार परिवार सत्संग में शामिल होने के लिए जा रहा था।   कार की टक्कर से डैम में गिरी कार शिवपुरी जिले के अमोला थाना इलाके में रविवार को सिंध डैम पर एक बड़ा हादसा होते होते टल गया। यहां एक कार को पीछे से आ रहे ट्रक ने टक्कर मार दी। टक्कर के बाद कार अनियंत्रित होकर सिंध डैम में जा गिरी। कार के डैम में गिरते ही मौके पर मौजूद गोपाल परिहार, सुखदेव लोधी, मनोज कलावत और राकेश मिस्त्री ने बिना अपनी जान की परवाह किए डैम में छलांग लगाई और पानी में डूब रही कार में फंसे पति-पत्नी व दोनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। कार में कोटा निवासी शैलेन्द्र सिंह हांडा, उनकी पत्नी रेखा हांडा और बच्चे नोदिघ हांडा व देवदत्त हांडा सवार थे। पुलिस ट्रक की तलाश में जुटी घटना का पता चलते ही पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन तब तक कार में सवार सभी लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था। कार को टक्कर मारने के बाद ट्रक चालक ट्रक लेकर मौके से फरार हो गया है जिसकी पुलिस तलाश कर रही है। बताया गया है कि कोटा के रहने वाले शैलेन्द्र हांडा अपने परिवार के साथ कार से उरई में बाबा जयगुरूदेव के सत्संग में शामिल होने के लिए जा रहे थे तभी रास्ते में ये हादसा हुआ। जान बचने के बाद पीड़ित परिवार ने जान बचाने वाले लोगों और भगवान का शुक्रिया अदा किया है।