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फर्जी ऑनलाइन नौकरी का लालच, मेडिकल छात्र से 11.50 लाख रुपए हड़पे

रायपुर पंडरी मोवा क्षेत्र में रहने वाली एक मेडिकल स्टूडेंट पाखी वर्मा को घर बैठे ऑनलाइन टॉस्क के जरिये अच्छा मुनाफा होने का झांसा देकर ठगों ने पहले तीन किस्तों में 2 हजार रुपए उनके एकाउंट में ट्रांसफर किए. इसके बाद उनसे पांच हजार, 50 हजार और डेढ़ लाख रुपए जमा करा लिए गए. फिर उन्हें टॉस्क में गलती होने की बात कहकर फाइन के रूप में साढ़े चार लाख रुपए जैसी बड़ी जमा कराई गई और भुगतान करने से पहले और रुपए मांगे जाते रहे. फ्रॉड का अहसास होने तक मेडिकल छात्रा साढ़े 11 लाख रुपए ठगों के संदिग्ध एकाउंट में ट्रांसफर कर चुकी थी. पंडरी पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. रिपोर्ट आदर्श कॉलोनी निवासी पाखी वर्मा पिता संतोष वर्मा ने लिखाई है. जानकारी के मुताबिक, 30 मई से लेकर एक डेढ़ महीने तक छात्रा के साथ ठगी की गई है. उनके मोबाइल फोन पर वॉट्सएप मैसेज भेजकर वेलफेयर टास्क वर्क फार्म होम ग्रुप से जोड़ा गया. टॉस्क मिलने पर स्क्रीनशॉट भेजना होता था. शुरू में दस से ज्यादा टॉस्क पूरा करने पर 30 मई 2025 को 1850 रुपये 3 किस्तों में भेजे गए. इसके बाद वेलफेयर टास्क में अत्यधिक लाभ की बात कहते हुए 5 हजार रुपए जमा कराए गए. फिर 15 हजार और 50 हजार जमा कराकर टॉस्क दिए गए. फिर टॉस्क में गलती बताकर साढ़े चार लाख मांगे गए. इसी तरह उन्हें बातों में उलझाकर साढ़े 11 लाख रुपए जमा करा लिये गए.

रोशना पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 231.33 लीटर विदेशी शराब के साथ तीन तस्कर दबोचे

कटिहार,  रोशना थाना पुलिस ने अवैध शराब के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए एक चार पहिया वाहन से कुल 231.33 लीटर विदेशी शराब के साथ तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर वाहन जांच की और तस्करों को पकड़ लिया। गिरफ्तार तस्करों में मोनू कुमार (25 वर्ष) पिता मनोज राय, निर्भय कुमार यादव (35 वर्ष) और विकास कुमार (18 वर्ष) शामिल हैं। ये सभी आरोपी समस्तीपुर जिले के निवासी हैं। पुलिस ने इनके पास से 231.33 लीटर विदेशी शराब और एक चार पहिया वाहन बरामद किया है। पुलिस ने कांड दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है और गिरफ्तार तस्करों से पूछताछ कर रही है।  

सैनिक कल्याण कोष में 22 लाख रूपए का योगदान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादवने कहा कि राज्य सरकार भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी स्मृतियों को संजोने और उनसे जुड़े स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के लिये अनुकूल समय है, जब राष्ट्र के हित में सही निर्णय हो रहे हैं। विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को वृंदावन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे भगवान कृष्ण कन्हैया की पावन धरा पर पहुंचे हैं। यहां पहुंचने पर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं याद आती हैं जो आज भी समसामयिक हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने विशाल दृष्टिकोण और गरीबों के प्रति उदार भाव रखने की शिक्षा दी। मध्यप्रदेश की धरती पर सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने से लेकर सुदामा के साथ मैत्री, रुकमणी से विवाह और भगवान परशुराम से सुदर्शन चक्र प्राप्त करने के प्रसंग घटित हुए। इस नाते मध्यप्रदेश भी गौकुल का आनंद प्रदान करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृंदावन धाम स्थित केशव नगर पहुंचकर साध्वी सरस्वती दीदी की श्रीमद भागवत कथा का श्रवण किया और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। साध्वी सरस्वती दीदी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा मध्यप्रदेश में गौवंश संरक्षण, कृष्ण पाथेय के विकास के लिए की गई पहल और वैदिक घड़ी की स्थापना, भारतीय संस्कृति से युवा पीढ़ी को अवगत करवाने के प्रयासों की सराहना की। साध्वी सरस्वती दीदी ने सैनिक सहायता कोष के लिए साध्वी सरस्वती फाउंडेशन, वृंदावन की ओर से 11 लाख रुपए की राशि का चेक मुख्यमंत्री डॉ यादव को प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सैनिक सहायता कोष के लिए मध्यप्रदेश सरकार की ओर से 11 लाख रुपए की राशि शामिल करते हुए कोष में कुल 22 लाख रुपए देने को कहा। मुख्यमंत्री डॉ. यावदव ने स्व. जनक सिंह के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगरा के निकट ग्राम बाकंदा पहुंचकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मध्यक्षेत्र के "क्षेत्र सेवा प्रमुख" श्री ओम प्रकाश सिसोदिया के पिता श्री जनक सिंह सिसोदिया के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री जनक सिंह सिसोदिया की बाकंदा आगरा स्थित समाधि परिसर में पौध रोपण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आगरा एयरपोर्ट पर उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री द्वय श्री केशव प्रसाद मौर्य एवं श्री ब्रजेश पाठक ने आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उप मुख्यमंत्री द्वय का हृदय से आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के वृंदावन पहुंचने पर उत्तर प्रदेश के जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया।  

आम आदमी के लिए राहत! पंजाब सरकार ने डेयरी उत्पादों के दाम घटाए

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता आम आदमी का हित और रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाना है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने वेरका के दूध और अन्य दुग्ध उत्पादों की कीमतों में बड़ी कटौती का फैसला लिया है, वह न केवल उपभोक्ताओं को राहत देता है बल्कि राज्य की सहकारी व्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगा. यह कदम पंजाब के हर घर की जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया है. वेरका, जो पंजाब की किसान सहकारी संस्था मिल्कफेड का एक भरोसेमंद ब्रांड है, अब और भी अधिक सुलभ होगा. दूध, घी, मक्खन, पनीर और आइसक्रीम जैसे रोजाना इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की कीमतों में की गई कमी सीधे उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाएगी. उदाहरण के लिए, घी 30-35 रुपये प्रति लीटर/किलोग्राम सस्ता हो जाएगा, पनीर की कीमत 15 रुपये प्रति किलोग्राम कम होगी और टेबल बटर व अनसाल्टेड बटर की कीमतें भी घटा दी गई हैं. इस तरह का सीधा आर्थिक लाभ हर घर की थाली तक पहुंचेगा.   महंगाई के इस दौर में जब आम आदमी का बजट लगातार दबाव में है, यह निर्णय जीवनयापन की लागत को कम करने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए यह राहत बड़ी अहमियत रखती है. अब उपभोक्ता सस्ते और शुद्ध डेयरी उत्पादों तक आसानी से पहुंच सकेंगे, जिससे उनका पोषण स्तर भी बेहतर होगा. इसके साथ ही, इससे उपभोक्ताओं की मांग और बिक्री में बढ़ोतरी होगी, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को और मजबूत करेगी. यह पहल सिर्फ उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है. वेरका उत्पादों की बिक्री में बढ़ोतरी का सीधा लाभ पंजाब के डेयरी किसानों तक पहुंचेगा. किसानों की आमदनी बढ़ेगी और सहकारी संस्थाएं मजबूत होंगी. यह कदम किसानों और उपभोक्ताओं के बीच एक संतुलन बनाने का बेहतरीन उदाहरण है. पंजाब सरकार का यह निर्णय किसानों और जनता दोनों के हितों की रक्षा करता है, जिससे सहकारी मॉडल और अधिक सशक्त होगा. मुख्यमंत्री मान ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पहल से राज्य की वित्तीय स्थिति को भी मजबूती मिलेगी. उत्पादों की कीमतें घटने से मांग और खपत में वृद्धि होगी, जिससे कर वसूली बढ़ेगी. इसका उपयोग राज्य के विकास, गुणवत्तापूर्ण सेवाओं और बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने में होगा. इस प्रकार, यह कदम एक व्यापक और दूरदर्शी नीति का हिस्सा है जो उपभोक्ताओं, किसानों और राज्य की अर्थव्यवस्था, सभी को लाभ पहुंचाता है. पंजाब सरकार की यह पहल महज कीमतों में कटौती नहीं है, बल्कि आम आदमी को केंद्र में रखकर बनाई गई एक ठोस नीति है. यह पंजाब को उपभोक्ता-हितैषी और किसान-हितैषी राज्य के रूप में और मजबूत करेगी. वेरका जैसे ब्रांड की कीमतों में की गई कमी आने वाले समय में “रंगला पंजाब” की नींव को और मजबूत बनाएगी. इससे न केवल हर घर तक राहत पहु.चेगी, बल्कि पंजाब के लोगों के चेहरे पर मुस्कान भी आएगी.  

भाईजान’ नहीं आएंगे MP के गरबा में, MLA ने रखी हिंदू रीति से ही प्रवेश की शर्त

भोपाल भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने गैर हिंदुओं को गरबा आयोजन से दूर रहने की चेतावनी दी है। राजधानी में पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कहा कि गैर हिंदू गरबा में आ सकते हैं, शर्त यह है कि उन्हें सनातन धर्म अपनाना होगा। तुलसी पत्र खिलाकर और एक चम्मच गंगाजल पिलाकर उनका हिंदू धर्म में स्वागत करने को तैयार हैं। गैर हिंदूओं को गरबा से दूर रहने की चेतावनी सोमवार से नवरात्रि शुरू हो रही है। शहर में कई जगह गरबा का आयोजन हो रहा है। इस आयोजन में गैर हिंदुओं के प्रवेश को लेकर पिछले कुछ वर्षों से माहौल एकदम बदला हुआ है। विश्व हिंदू परिषद और उससे जुड़े कई हिंदूवादी संगठन मतांतरण और लव जिहाद की कोशिशों का आरोप लगाकर गैर हिंदुओं का इस आयोजन में उग्र विरोध करते रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से इन संगठनों ने अलग-अलग चेतावनियां दी हैं। प्रशासन को भी पत्र सौंपे हैं। इस संदर्भ में हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा एक कदम और आगे बढ़े हैं।   'हिंदू बनना चाहते हैं, तो उन्हें गरबा में आएं' पत्रकारों से औपचारिक चर्चा में विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि अगर कुछ लोगों को लगता है कि उनके माता-पिता ने धर्म छोड़कर गलती की है और वे गलत धर्म में पैदा हुए हैं। वे हिंदू बनना चाहते हैं, तो उन्हें गरबा में आना चाहिए। माथे पर तिलक लगाना चाहिए। देवी का प्रसाद खाना चाहिए। आरती करनी चाहिए और धोती-कुर्ता पहनना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर तुम राम बनकर आ रहे हो, तो गरबा खेलने के लिए तुम्हारा स्वागत है। अगर तुम हमारी बहन-बेटियों को परेशान करने आए, तो तुम्हारे साथ ऐसा सलूक किया जाएगा जिसे तुम कभी नहीं भूल पाओगे।

बस्तर संभाग के दूरस्थ क्षेत्र अबूझमाड़ से लगे ग्राम कोंडे तक पहुँची स्वास्थ्य सेवाएँ

इंद्रावती नदी में स्वयं नाव चलाकर गाँव पहुँचे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की जांच और परामर्श नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच रायपुर  छत्तीसगढ़ में जब बस्तर के दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने की बात होती है तो सबसे पहले दुर्गम जंगलों और उफनती इंद्रावती नदी का ख्याल आता है। बरसात के मौसम में दुर्गम गाँवों तक पहुँचना बेहद जोखिमपूर्ण माना जाता है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में प्रदेश का प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हुए लोगों की जान बचाने की प्राथमिकता के साथ कार्य कर रहा है। नक्सल प्रभावित जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। कांकेर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ अब आमजन तक पहुँच रहा है। यह मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन का परिणाम है, जिसने बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया और आयुक्त-सह-संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार हेतु प्रतिबद्ध हैं। इसी क्रम में प्रदेशव्यापी “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” अभियान ने बीजापुर जिले के सबसे दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित की है। बीते शनिवार को स्वास्थ्य दल ने स्वयं नाव चलाकर उफनती इंद्रावती नदी पार की और अबूझमाड़ से लगे ग्राम कोंडे में शिविर लगाया। इस शिविर में कुल 132 मरीजों की जांच की गई, जिनमें मलेरिया, सर्दी-खाँसी और त्वचा रोग से पीड़ित रोगी प्रमुख रहे। विशेष रूप से 10 गर्भवती महिलाओं की संपूर्ण स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और परामर्श प्रदान किया गया। मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत महिलाओं को पोषण, एनीमिया से बचाव और सुरक्षित मातृत्व संबंधी विस्तृत जानकारी भी दी गई। बीजापुर जिले में बीते तीन दिनों के दौरान अभियान की गति उल्लेखनीय रही है। इस अवधि में हजारों लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई, जिनमें उच्च रक्तचाप के 3,177 मामले सामने आए। इसके अतिरिक्त, महिलाओं में मुख, स्तन और सर्वाइकल कैंसर की 2,823 स्क्रीनिंग की गई तथा उन्हें आवश्यक परामर्श उपलब्ध कराया गया। साथ ही 314 गर्भवती महिलाओं को जांच, टीकाकरण और परामर्श का लाभ मिला। अभियान के अंतर्गत दूरस्थ अंचलों में आयोजित शिविरों के माध्यम से अब तक 1,200 से अधिक लोगों की टीबी स्क्रीनिंग और 800 से अधिक व्यक्तियों की सिकल सेल जांच भी की जा चुकी है। ये आँकड़े केवल संख्याएँ नहीं, बल्कि उस संकल्प का प्रमाण हैं जिसके तहत प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि बीजापुर जिले के दूरस्थ और दुर्गम अंचलों में भी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बाधित न हो। यही कारण है कि स्वास्थ्य कर्मी नदी, पहाड़ और जंगल पार करके महिलाओं और बच्चों तक जीवन रक्षक सेवाएँ पहुँचा रहे हैं। प्रदेश सरकार का यह प्रयास इस विचार को सशक्त करता है कि “स्वस्थ नारी ही सशक्त परिवार की आधारशिला है।” इसी दिशा में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर पहुँच इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता है। बस्तर संभाग में स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे ये सुधार न केवल स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर को ऊँचा उठा रहे हैं, बल्कि यह भी प्रमाणित कर रहे हैं कि सुशासन और समर्पित प्रयासों से सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव संभव है।

विजयादशमी उत्सव को लेकर पंजाबी-हिन्दू दशहरा कमेटी की CM हेमंत से मुलाकात

रांची झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से पंजाबी- हिन्दू बिरादरी दशहरा कमेटी, मोरहाबादी तथा दुर्गा पूजा एवं रावण दहन समिति अरगोड़ा के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार मुलाकात की। मौके पर मुख्यमंत्री हेमन्त ने मुख्यमंत्री सोरेन को आगामी 2 अक्टूबर को रांची के मोरहाबादी मैदान एवं अरगोड़ा में आयोजित होने वाले रावण दहन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि सह परिवार सहित सम्मिलित होने के लिए सादर आमंत्रित किया। मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 'विजयादशमी' का यह आयोजन न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है, बल्कि यह सामाजिक एकता, भाईचारे और सामूहिक उत्सव का भी प्रतीक है। ऐसे अवसर समाज में समरसता, सौहार्द और सकारात्मक वातावरण का निर्माण करते हैं। मुख्यमंत्री ने आयोजकों को उत्सव की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं और राज्य वासियों के जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर पंजाबी- हिन्दू बिरादरी दशहरा कमेटी, मोरहाबादी के अध्यक्ष सुधीर उग्गल, पूर्व अध्यक्ष राजेश खन्ना, महासचिव राजेश मेहरा, वरीय उपाध्यक्ष रणदीप आनंद एवं दुर्गा पूजा एवं रावण दहन समिति, अरगोड़ा के अध्यक्ष पंकज कुमार साहू, कोषाध्यक्ष नरेंद्र प्रसाद साहू, वरीय उपाध्यक्ष पंचानंद कुमार, कंचन साहू, रवि साहू मौजूद रहे।  

पिपरहवा अवशेषों की घर वापसी से उत्तर प्रदेश को मिला वैश्विक गौरव

127 साल बाद पवित्र अवशेषों की हुई घर वापसी जल्द होगा सार्वजनिक प्रदर्शन, सुदृढ़ होगा सांस्कृतिक पर्यटन शांति और करुणा का संदेश समेटे हैं पिपरहवा अवशेष प्रधानमंत्री मोदी ने बताया था राष्ट्र के लिए गर्व का क्षण शाक्य वंश से जुड़ा है पिपरहवा स्तूप लखनऊ/नई दिल्ली उत्तर प्रदेश एक बार फिर वैश्विक बौद्ध धरोहर के केंद्र में आ गया है। 127 वर्षों बाद पवित्र पिपरहवा अवशेष, जो सिद्धार्थनगर जिले के पिपरहवा स्तूप से 1898 में खोजे गए थे, भारत वापस लौट आए हैं। औपनिवेशिक काल में विदेश ले जाए गए ये अवशेष मई 2025 में हांगकांग की एक अंतरराष्ट्रीय नीलामी में रखे गए थे। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और गॉदरेज इंडस्ट्रीज़ ग्रुप के संयुक्त प्रयास से नीलामी रुकवाई गई और 30 जुलाई 2025 को इन्हें भारत वापस लाया गया। जल्द होगा सार्वजनिक प्रदर्शन पिपरहवा अवशेषों की वापसी सिर्फ भारत की नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की भूमि के उस गौरवशाली इतिहास की पुनः स्थापना है, जिसने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से पूरी दुनिया को आलोकित किया। इन अवशेषों का सार्वजनिक प्रदर्शन शीघ्र ही आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन उत्तर प्रदेश को वैश्विक बौद्ध धरोहर का केंद्र बनाने और राज्य की सांस्कृतिक पर्यटन संभावनाओं को नई ऊंचाई देने वाला साबित होगा। उत्तर प्रदेश: बुद्ध की धरोहर सिद्धार्थनगर का पिपरहवा स्तूप, जहां भगवान बुद्ध के अवशेष खोजे गए; वाराणसी का सारनाथ, जहां उन्होंने प्रथम उपदेश दिया और कुशीनगर, जहां उन्होंने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया—यह पावन त्रिकोण उत्तर प्रदेश को विश्वभर के करोड़ों बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ा और अद्वितीय तीर्थस्थल बनाता है। उत्तर प्रदेश की पावन धरती भगवान बुद्ध की तपोभूमि है। पिपरहवा अवशेषों की घर वापसी न केवल भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक महत्ता को भी पुनः स्थापित करती है। यह प्रदेश आज भी पूरी दुनिया को शांति, करुणा और सहअस्तित्व का संदेश देता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी 127 वर्षों बाद भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भारत वापसी का स्वागत किया था और इसे राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर के लिए एक गर्व का क्षण बताया था। अवशेषों का महत्व इन अवशेषों में भगवान बुद्ध की अस्थियां, क्रिस्टल की पेटिकाएं, स्वर्णाभूषण और रत्न, बलुआ पत्थर का संदूक शामिल हैं। ब्राह्मी लिपि के अभिलेख इन्हें सीधे शाक्य वंश से जोड़ते हैं। गॉदरेज इंडस्ट्रीज़ ग्रुप के कार्यकारी उपाध्यक्ष, पिरोजशा गॉदरेज ने कहा कि पिपरहवा अवशेषों की वापसी केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए शांति और करुणा का संदेश है।

आदि कर्मयोगी अभियान के तहत ग्राम स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम

जिला पंचायत अध्यक्ष और कलेक्टर हुए शामिल बिलासपुर कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में जिले में आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2025 तक ग्राम स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस अभियान के दौरान गांव का मानचित्रीकरण, वी.डी.पी. (ग्राम विकास योजना) तैयार करने तथा ट्रांजिट वॉक जैसी गतिविधियां की जा रही हैं।      जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों में सेवा, संकल्प और समर्पण की भावना जागृत कर वर्ष 2030 तक अपने गांव को समग्र विकास की दिशा में अग्रसर करना है। इसी कड़ी में बेलपान ग्राम में आयोजित शिविर में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी एवं कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। अभियान के दौरान ग्रामीणों और आदि कर्मयोगी सहयोगियों को शपथ दिलाई गई कि वे अपने गांव के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।       उल्लेखनीय है कि आदि कर्मयोगी अभियान जिले के आदिवासी बहुल 102 ग्रामों में संचालित किया जा रहा है, जो जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने और उत्तरदायी शासन को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया एक राष्ट्रीय आंदोलन है। अभियान के माध्यम से देश भर के 20 लाख से अधिक "आदि कर्मयोगियों" (जमीनी स्तर के नेताओं) को प्रशिक्षित किया जाएगा जो 1 लाख जनजातीय गांवों में 11 करोड़ से अधिक लोगों के लिए सरकारी योजनाओं और सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करेंगे। यह अभियान ग्रामीण नेतृत्व और सामुदायिक भागीदारी पर केंद्रित है,जिसका अंतिम लक्ष्य भारत के विकास में जनजातीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ाना है,और गांवों में सामाजिक उत्थान, आत्मनिर्भरता और सतत विकास सुनिश्चित करना है।

ट्रैफिक सिस्टम फेल! इंदौर में पुलिसकर्मी गायब, रास्ते जाम में फंसे लोग

इंदौर नगरीय सीमा में ट्रैफिक बल की कमी का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। तीन लोगों की मौत के बाद यातायात प्रबंधन की चर्चाएं हो रही हैं। अफसर तो खुलकर भले ही न बोलें, मुख्यालय को इसकी रिपोर्ट भेजी गई है। सबसे बड़ी कमी ट्रैफिक निरीक्षकों की है। शासन ने 53 पद स्वीकृत तो कर दिए पर पोस्टिंग सात निरीक्षकों की है। यातायात प्रबंधन अभी भी 46 निरीक्षकों की कमी से जूझ रहा है। शिक्षक नगर (एरोड्रम) से बड़ा गणपति (मल्हारगंज) के बीच हुआ ट्रक हादसा पुलिस की गैर मौजूदगी के कारण हुआ था। अफसरों के रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि जिन पुलिसकर्मियों को चौराहे पर मौजूद रहना था वो धार्मिक गुरु के कार्यक्रम में गए थे।   46 निरीक्षक अभी भी कम अफसरों का दावा है कि एक कार्यक्रम की व्यवस्था संभालने के लिए किसी एक चौराहे का बल कम करना ही पड़ता है। कमिश्नोरेट में शासन ने जिन पदों की स्वीकृति दी, उनकी पूर्ति ही नहीं की गई। सूत्रों के अनुसार दिसंबर 2021 में कमिश्नर प्रणाली लागू करने के साथ यातायात प्रबंधन के लिए निरीक्षकों के 53 पद स्वीकृत किए गए थे। इसमें सिर्फ सात की पोस्टिंग हुई। 46 निरीक्षक अभी भी कम है। प्रधान आरक्षक 105 चाहिए। 850 की जरूरत, मगर 679 ही पदस्थ: इसी तरह 19 चालकों की जगह अभी भी खाली है। कुल मिलाकर यातायात प्रबंधन के लिए 850 पुलिसकर्मी व अधिकारियों की आवश्यकता है जिनमें 679 ही पदस्थ हैं। विभाग को 193 लोगों की आज भी जरूरत है। इसी तरह आठ सूबेदार, दो एएसआई, 13 आरक्षकों की भी आवश्यकता है।