samacharsecretary.com

शिवराज ने किसानों की समस्याओं को लेकर लिया कड़ा कदम, फोन पर सुनाया बड़ा फरमान

सीहोर  सीहोर जिले में खराब हुई सोयाबीन फसल को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों को अब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से राहत की उम्मीद जगी है। किसानों की समस्याएं सुनते ही शिवराज ने मौके से ही कलेक्टर को फोन कर खराब फसलों का सर्वे कराने और बीमा योजना का लाभ तुरंत दिलाने के निर्देश दिए। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को सीहोर जिले में किसानों की समस्याएं सुनने पहुंचे। भोपाल-इंदौर हाईवे पर इछावर जोड़ पर रुके मंत्री से जब किसानों ने सोयाबीन की खराब फसल की बात कही, तो उन्होंने तुरंत कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इस दौरान कई किसान सोयाबीन की खराब फसल को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री के पास गुहार लगाने पहुंचे थे। किसानों की शिकायतें सुनने के बाद कृषि मंत्री ने सीहोर कलेक्टर बाला गुरु से मौके पर ही फोन पर बात कर निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खराब फसलों का सर्वे कराया जाए और किसानों को फसल बीमा योजना का पूरा लाभ तुरंत दिलाया जाए। शिवराज ने कहा कि इससे किसानों को आर्थिक राहत मिल सकेगी। पिछले तीन सप्ताह से सीहोर जिले के कई गांवों के किसान आंदोलन कर रहे थे। पीला मोज़ेक और अन्य बीमारियों ने फसल को नुकसान पहुंचाया किसान मांग कर रहे थे कि सोयाबीन की खराब फसल का उचित मुआवजा मिले और बीमा की राशि समय पर दी जाए। किसान नेता एवं समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा ने बताया कि बीते पांच साल से सोयाबीन की फसल लगातार प्रभावित हो रही है। इस बार पीला मोज़ेक और अन्य बीमारियों ने फसल को चौपट कर दिया है। हर साल काटी जाती है फसल बीमा राशि, लेकिन मिलता नहीं लाभ मेवाड़ा ने कहा कि किसानों से हर साल बीमा की राशि काटी जाती है, लेकिन बीमे के नाम पर उन्हें एक चवन्नी भी नहीं मिली। जब सरकार किसानों को राहत नहीं दे रही तो उनसे बीमा राशि काटना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीहोर, शाजापुर और भोपाल जिलों में किसान अलग-अलग तरीकों से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक सुनवाई नहीं हुई थी। इस मौके पर विधायक सुदेश राय, नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर, भाजपा जिला अध्यक्ष नरेश मेवाड़ा और जिला मंत्री पंकज गुप्ता समेत कई भाजपा नेता मौजूद रहे। उन्होंने किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों से जल्द समाधान की बात कही। राजस्व मंत्री भी हुए थे सख्त गौरतलब है कि शुक्रवार को इछावर में आयोजित सेवा पखवाड़ा और स्वस्थ नारी सशक्त परिवार कार्यक्रम में मंत्री करण सिंह वर्मा ने भी इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि सोयाबीन पर पीला मोज़ेक रोग फैल रहा है। वर्मा ने बताया कि उन्होंने खुद सीहोर और सिवनी में जाकर खेतों का निरीक्षण किया। कुछ जगह फसलें ठीक थीं, लेकिन कई जगह रोग ने फसल बर्बाद कर दी थी। इस विषय की जानकारी मुख्यमंत्री तक पहुंचा दी गई है और आने वाली कैबिनेट बैठक में इसे प्रमुखता से रखा जाएगा। किसानों को राहत की उम्मीद किसानों का कहना है कि शिवराज सिंह चौहान के सीधे हस्तक्षेप से अब उन्हें उम्मीद जगी है कि खराब फसल का सही आकलन होगा और बीमा योजना का लाभ जल्द मिलेगा। लंबे समय से आंदोलन कर रहे किसान अब राहत की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

राजधानी में बढ़ी महिला कामगारों की भागीदारी, मजदूरी असमानता दूर करने की तैयारी

दिल्ली  दिल्ली में बीते कई साल के मुकाबले महिला कामगारों की आबादी में इजाफा हुआ है लेकिन मजदूरी पुरुषों से कम है। दिल्ली सरकार की दिल्ली राज्य फ्रेमवर्क इंडिकेटर रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं की श्रम बल भागीदारी बढ़ी है लेकिन उनकी दैनिक मजदूरी पुरुषों से कम बनी हुई है। यह रिपोर्ट सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) की प्रगति पर नजर रखने के लिए डायरेक्टोरेट ऑफ इकोनॉमिक्स एंड स्टैटिस्टिक्स ने जारी की है। दिल्ली राज्य फ्रेमवर्क इंडिकेटर रिपोर्ट सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स की स्थिति पर आधारित है और हाल ही में अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय ने इसे जारी किया है। रिपोर्ट दिखाती है कि 2017-18 में महिलाओं और पुरुषों की श्रम बल भागीदारी दर का अनुपात 0.19 था। यह आंकड़ा 2023-24 में बढ़कर 0.28 हो गया। यह वृद्धि सकारात्मक है लेकिन 0.28 का अनुपात यह भी दिखाता है कि लैंगिक असमानता अभी बनी हुई है। इसके अतिरिक्त रिपोर्ट दिखाती है कि महिला श्रम बल भागीदारी दर 2017-18 में 11.2 फीसदी थी, 2023-24 में बढ़कर 14.5 फीसदी हो गई। यह 2018-19 में 13.7 फीसदी, 2019-20 में 12.8 फीसदी, 2020-21 में 10.7 फीसदी, 2021-22 में 9.4 फीसदी और 2022-23 में 11.3 फीसदी थी। मजदूरी के आंकड़े चिंताजनक गैर-सार्वजनिक कामों में 2017-18 की जुलाई-सितंबर तिमाही में पुरुषों को 403 रुपये हर दिन और महिलाओं को 300 रुपये मिल रहे थे। 2017-18 की अप्रैल-जून तिमाही में पुरुषों को 376 रुपये हर दिन व महिलाओं को 400 हर दिन, 2023-24 में पुरुषों को 556 रुपये हर दिन व महिलाओं को 500 रुपये हर दिन मिल रहे थे। 2023-24 में यह 548 और 500 रुपये मिल रहा था। इसमें दिखता है कि महिलाओं की मजदूरी बढ़ी लेकिन मजदूरी का अंतर 48 से 100 रुपये का बरकरार है। पेशेवर क्षेत्र में महिलाओं की संख्या घटी पेशेवर और तकनीकी क्षेत्र में महिला कामगारों की संख्या घटी है। इस क्षेत्र में 2020-21 में महिलाओं का अनुपात 28.5 फीसदी था, जोकि 2022-23 में 21.3 फीसदी रह गया है। रिपोर्ट में महिलाओं के आर्थिक संसाधनों में हिस्सेदारी का मूल्यांकन किया गया है। इसमें जमीन, संपत्ति, बैंक सेवाएं, उत्तराधिकार और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण को शामिल किया है। लेकिन इसमें ये भी कहा गया है कि महिला कामगारों के लिए दिल्ली सरकार कानूनों में सुधार कर रही है।

बेटियों का सशक्तिकरण: CM योगी बोले, अब वे खुद तय करती हैं अपना भविष्य

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लोकभवन सभागार में नारी की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए समर्पित महत्वाकांक्षी अभियान ‘मिशन शक्ति-5.0’ का भव्य शुभारंभ किया। इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि पहले बेटियां सुरक्षित नहीं थीं, लेकिन आज वे खुद अपने रास्ते बना रही हैं। उन्होंने कहा कि नारी सम्मान उनकी प्राथमिकता है, यही वजह है कि 2017 के बाद से प्रदेश में महिलाओं की स्थिति में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत साफ होती है तो योजनाएं खुद अपना रास्ता बना लेती हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी 1,647 थानों में नवस्थापित मिशन शक्ति केंद्रों का बटन दबाकर उद्घाटन किया। साथ ही, मिशन शक्ति केंद्रों की एसओपी पुस्तिकाओं, बुकलेट और ‘सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश’ फोल्डर का विमोचन भी किया। इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जनपदों के अधिकारीगण और मंत्रीगण इस ऐतिहासिक पल से जुड़े रहे। सीएम योगी ने कार्यक्रम को संबोधन करते हुए कहा कि मिशन शक्ति के पांचवें चरण का शुभारंभ करते हुए उन्हें गर्व और प्रसन्नता हो रही है। पांच साल पहले, 2020 में इस अभियान की शुरुआत के समय लोग संशय में थे कि क्या होगा, कैसे होगा, इसकी थीम क्या होगी? लेकिन मिशन शक्ति को नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन से जोड़कर इसे नारी गरिमा के अनुरूप ढाला गया। आज इसके सकारात्मक परिणाम सबके सामने हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान ने नारी को सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का मार्ग दिखाया है, जिसे तेजी से आगे बढ़ाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद से 2017 तक पुलिस में महिला कार्मिकों की संख्या महज 10,000 थी, लेकिन 2017 से अब तक यह संख्या 44,000 से अधिक हो गई है। हर भर्ती में 20 प्रतिशत महिलाओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जा रहा है और उनकी समय पर ट्रेनिंग सुनिश्चित की जा रही है। हाल ही में संपन्न 60,200 पुलिस कार्मिकों की भर्ती में 12 हजार से अधिक महिलाएं शामिल हुई हैं, जो वर्तमान में ट्रेनिंग ले रही हैं। सीएम योगी ने कहा कि यह ‘मिशन रोजगार’ और बिना भेदभाव के नौजवानों को जोड़ने का परिणाम है कि 2017 से पहले जो ट्रेनिंग क्षमता महज 3,000 थी, उसे बढ़ाकर अब 60,000 से अधिक कर दिया गया है। सीएम योगी ने कहा कि शिक्षा और अन्य विभागों में भी महिला भर्ती को बढ़ावा दिया गया। 2017 से पहले ट्रेनिंग की कमी एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश में ही 60,200 से अधिक पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग संभव हो रही है। इसके अलावा, बेसिक शिक्षा परिषद के 1.60 करोड़ से अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं, जबकि 2017 से पहले 70-75 फीसद बेटियां नंगे पांव और पुराने कपड़ों में स्कूल जाती थीं। एक मार्मिक घटना का जिक्र करते हुए सीएम ने बताया कि बुंदेलखंड दौरे के दौरान उन्होंने एक बच्ची से बात की, जिसने कहा, “मेरे भाई के लिए जूते आए, लेकिन मुझे नहीं, क्योंकि मैं बेटी हूं।” इस घटना ने उन्हें प्रेरित किया और अब हर बच्चे के लिए दो यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते, मोजे और स्वेटर की व्यवस्था की गई, जिसकी लागत 1,200 रुपये प्रति बच्चे है। सीएम योगी ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की चर्चा करते हुए कहा कि बेटी के जन्म से स्नातक तक 25,000 रुपये का पैकेज दिया जाता है। जन्म पर 5,000 रुपये, एक वर्ष पर 2,000 रुपये (टीकाकरण के बाद), पहली और छठी कक्षा में 3,000-3,000 रुपये, नौवीं में 5,000 रुपये और 12वीं पास करने पर 7,000 रुपये दिए जाते हैं। इस योजना से 26 लाख से अधिक बेटियां सीधें लाभान्वित हो रही हैं। इसके अलावा, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में हर बेटी को 1 लाख रुपये की सहायता दी जा रही है, जो पहले चेहरा देखकर दी जाती थी, अब बिना भेदभाव के उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, मातृ वंदना, फिट इंडिया मूवमेंट, स्वच्छ भारत मिशन (12 करोड़ शौचालय) और उज्ज्वला योजना (10 करोड़ कनेक्शन) से महिलाओं को चूल्हे के धुएं से मुक्ति मिली है, महिला स्वस्थ होगी तो परिवार सशक्त होगा। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत (50 करोड़ लाभार्थी) और 80 करोड़ को मुफ्त राशन जैसी योजनाओं को नारी गरिमा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि परिवार में बीमारी के समय नारी अपना आभूषण तक गिरवी रखती है, इसलिए ये योजनाएं उसके सम्मान से जुड़ी हैं। उत्तर प्रदेश ने 3 करोड़ ग्रामीण भू-अभिलेख में 1 करोड़ से अधिक महिलाओं के नाम किए और 60 लाख गरीबों को आवास उपलब्ध कराए गए। सीएम योगी ने कहा कि कोरोना काल में शुरू की गई बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंस सखी योजना से 40,000 से अधिक महिलाएं हजारों करोड़ का लेन-देन कर रही हैं और मुनाफा कमा रही हैं। पोषाहार मिशन में पहले ठेकेदारों की धांधली थी, लेकिन अब 204 टेक होम राशन प्लांट से 60,000 महिलाएं 8,000 रुपये प्रति माह कमा रही हैं और 2 करोड़ बहनें लाभान्वित हो रही हैं। सीएम योगी ने कहा कि साफ नीयत से योजनाएं अपना रास्ता बनाती हैं। सीएम योगी ने महिला सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि 1 जनवरी 2024 से अगर सिर्फ 2024-25 तक के मामले देखें तो 9,513 मामलों में 12,271 अपराधियों को दंडित किया गया, 12 को मृत्युदंड, 987 को आजीवन कारावास, 3,455 को 10 साल से अधिक और 817 को 10 साल से कम सजा दिलाई गई। सीएम योगी ने बरेली की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि बाहरी अपराधियों ने महिला सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की कार्रवाई से वह चिल्लाया, “गलती से उत्तर प्रदेश आ गया, आगे नहीं करूंगा।” यह अपराधियों के लिए चेतावनी है।  

RJD-CONG की परेशानी बढ़ी: राहुल गांधी का बयान बिहार चुनाव में बना तीर

नई दिल्ली  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए माहौल गरमाने लगा है। महागठबंधन के बड़े नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी इस बार पूरे जोर-शोर से ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठा रहे हैं। वे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को संस्थागत वोट चोरी का तरीका बता रहे हैं। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस मुद्दे पर इतनी आक्रामक राजनीति कांग्रेस और उसके सहयोगियों को फायदा देगी, या फिर यह दांव उल्टा भी पड़ सकता है? राहुल गांधी ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि कर्नाटक की एक विधानसभा सीट पर वोट अवैध रूप से हटाए गए, जबकि महाराष्ट्र की एक सीट पर फर्जी तरीके से जोड़े गए। उन्होंने दावा किया कि उनके पास “हाइड्रोजन बम” जैसे बड़े सबूत हैं, जिन्हें वे जल्द सार्वजनिक करेंगे। इससे पहले वे “एटम बम” छोड़ने की बात कह चुके हैं। राहुल लगातार बीजेपी और चुनाव आयोग पर हमलावर हैं। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट में हेरफेर कर चुनाव परिणाम प्रभावित किए जा रहे हैं। हालांकि, अब तक उन्होंने चुनाव आयोग के पास औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। सहयोगियों की बेचैनी महागठबंधन के भीतर ही इस रणनीति को लेकर असहजता दिखाई दे रही है। राजद सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव बेरोजगारी, पलायन, अपराध, सरकारी सेवाओं की बदहाली और पेपर लीक जैसे सीधे मुद्दों पर आक्रामक कैंपेन कर रहे हैं। इसके उलट राहुल गांधी बार-बार सिर्फ ‘वोट चोरी’ की बात कर रहे हैं। इससे संदेश एकतरफा हो रहा है और जनता के असली सरोकारों पर ध्यान कम हो रहा है। कांग्रेस के अंदर भी कुछ नेताओं को आशंका है कि यह आक्रामक रुख न सिर्फ चुनावी रणनीति को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की साख पर भी सवाल खड़े कर सकता है। जमीन पर असर कितना? राहुल गांधी ने हाल ही में वोटर अधिकार यात्रा के दौरान 16 दिन तक मार्च किया और हर सभा में वोट चोरी का मुद्दा उठाया। लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर कितना है? वोट वाइब के बिहार इलेक्शन 2025 सर्वे के मुताबिक, राज्य में सिर्फ 21% लोग SIR प्रक्रिया और वोट चोरी को बड़ा चुनावी मुद्दा मानते हैं। इसके विपरीत बेरोजगारी को 32% लोग सबसे अहम मुद्दा बता रहे हैं। इससे साफ है कि जनता की प्राथमिकताओं में वोट चोरी फिलहाल सबसे ऊपर नहीं है। बड़ा दांव या जोखिम? विश्लेषकों का कहना है कि राहुल गांधी ने अपनी पूरी ताकत ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर केंद्रित कर दी है। अगर यह मुद्दा जनता के बीच उतना असरदार नहीं रहा तो इसका खामियाजा महागठबंधन को भुगतना पड़ सकता है। खासकर तब जब विपक्षी गठबंधन ने हाल के महीनों में तेजी से चुनावी गति पकड़ी थी। अब देखना होगा कि राहुल गांधी का यह “हाइड्रोजन बम” वास्तव में सत्तारूढ़ दल को झटका देता है या फिर कांग्रेस के लिए ही भारी पड़ जाता है।  

पीएम पर केंद्रित विशेष गैलरी: दिल्ली विधानसभा में विभिन्न भाषाओं की किताबों का संग्राहलय

दिल्ली  विधानसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लिखे साहित्य पर सबसे बड़ी किताब गैलरी बनाई गई है। ये पीएम के प्रेरक जीवन, शासनकाल, उपलब्धियों को एक छत के नीचे समेटे हुए है। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सेवा पखवाड़े के तहत इस गैलरी का उद्घाटन किया। दो अक्तूबर तक आम नागरिकों के लिए गैलरी खुली रहेगी। ये युवाओं व शोधकर्ताओं के पास पीएम के विजन से प्रेरणा लेने का खास मौका है। शीर्षक अपने प्रधानमंत्री को जानें किताब गैलरी पीएम के जीवन, शासन व भारत को विकसित बनाने के उनके संकल्प को समर्पित की गई है। विधानसभा पुस्तकालय में इसके लिए खास गैलरी बनाई गई है। इसके उद्घाटन के मौके पर विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट और कई विधायक मौजूद रहे। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह गैलरी पीएम की प्रेरक यात्रा को एक पुस्तकालय में समेटने का अनोखा प्रयास है। यह न केवल उनकी उपलब्धियों को दर्शाती है बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। विज्ञापन 200 से ज्यादा खास किताबें विजेंद्र ने कहा कि यह एक जीवंत दस्तावेज है जो पीएम के विजन और भारत के विकास की कहानी बयां करती है। इस संग्रह को समय के साथ और समृद्ध बनाएंगे। ये छात्रों, शोधकर्ताओं और विधायकों के लिए उपयोगी है। गैलरी में पीएम की लिखी और उनके जीवन पर आधारित करीब 200 से ज्यादा खास किताबें हैं। इनमें एग्जाम वारियर्स, मोदी एट द रेट 20, मन की बात एट द रेट 100, ज्योतिपुंज, सामाजिक समरसता और द मोदी इफैक्ट जैसी किताबें शामिल हैं। ये किताबें देशभर से जुटाई गई हैं और कई भाषाओं में उपलब्ध हैं। अगर दिल्लीवासियों के पास पीएम पर लिखी कोई किताब है तो उसे इस गैलरी में जोड़ा जाएगा।

छात्र राजनीति में करारी हार: NSUI की नाकामी से कांग्रेस के लिए दिल्ली अब भी दूर

नई दिल्ली दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के नतीजों से संकेत मिला है कि राजधानी की राजनीति में कांग्रेस की वापसी की राह अभी लंबी है। एबीवीपी की प्रचंड जीत और एनएसयूआई की कमजोर मौजूदगी से कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली छात्र राजनीति उससे लगभग पूरी तरह छिन चुकी है। इस बार कांग्रेस का छात्र संगठन केवल उपाध्यक्ष पर पर ही जीत सका, जबकि गत वर्ष वह अध्यक्ष व संयुक्त सचिव पद जीतने में सफल हो गया था। डूसू में कभी निर्णायक भूमिका निभाने वाली एनएसयूआई लगातार हाशिये पर जा रही है। इस बार के चुनाव में भी वह छात्रों के बीच प्रभावशाली प्रदर्शन करने में नाकाम रही। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह केवल चुनावी नतीजे नहीं, बल्कि दिल्ली की जमीनी राजनीति का संकेत भी है।  छात्र राजनीति से ही भविष्य के नेता तैयार होते हैं और कांग्रेस के लिए लोकसभा, विधानसभा व एमसीडी चुनाव के बाद इस मोर्चे पर लगातार पराजय चिंता का विषय है। एनएसयूआई की लगातार हार से स्पष्ट है कि कांग्रेस का संगठन युवाओं के बीच पकड़ बनाने में असफल रहा है। दिल्ली में लंबे समय तक सत्ता में रहने के दौरान छात्र राजनीति उसका महत्वपूर्ण सहारा हुआ करती थी। विश्वविद्यालय की राजनीति से ही कांग्रेस ने कई मजबूत चेहरे तैयार किए, लेकिन पिछले एक दशक में उसका यह आधार तेजी से कमजोर हो रहा है। इस पराजय का असर  आने वाले एमसीडी चुनाव में भी देखा जा सकता है। एनएसयूआई के पास    न तो प्रभावी नेतृत्व दिख रहा है न ही कैंपस में सक्रिय संगठनात्मक  ताकत है।  राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस ने समय रहते अपनी छात्र इकाई को पुनर्जीवित करने और युवाओं से जुड़ने की ठोस रणनीति नहीं बनाई तो दिल्ली की राजनीति में उसकी स्थिति सुधरनी मुश्किल है।  ‘आरएसएस-भाजपा के खिलाफ बहादुरी से लड़े’ एनएसयूआई ने कहा कि आरएसएस-भाजपा और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी। डूसू चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर राहुल झांसला ने जीत हासिल की है। यह जीत एक कठिन संघर्ष के बाद मिली है। एनएसयूआई ने केवल एबीवीपी का ही नहीं बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन, दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, आरएसएस-भाजपा और दिल्ली पुलिस जैसी संयुक्त ताकतों का भी डटकर मुकाबला किया। एनएसयूआई के अनुसार भारी पैमाने पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के बावजूद हजारों छात्रों ने एनएसयूआई और उसके उम्मीदवारों का मजबूती से साथ दिया। एनएसयूआई अध्यक्ष वरुण चौधरी ने कहा कि हमें अपने उम्मीदवारों पर गर्व है जिन्होंने यह चुनाव साहस और ईमानदारी के साथ लड़ा। आरएसएस-भाजपा समर्थित एबीवीपी ने चुनाव अधिकारियों की मदद से ईवीएम में गड़बड़ी और प्रोफेसरों को शामिल कर चुनाव चोरी करने की शर्मनाक कोशिश की। अदालत ने विजय जुलूस पर लगा दी थी रोक  अदालत ने अपने 17 सितंबर के आदेश में दिल्ली विश्वविद्यालय के उम्मीदवारों और छात्र संगठनों को डूसू चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद राष्ट्रीय राजधानी में कहीं भी विजय जुलूस निकालने पर रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ता, अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा ने पीठ के सामने कई तस्वीरें और समाचार रिपोर्ट साझा कीं और न्यायिक आदेश और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के उल्लंघन का दावा किया।

675 करोड़ की ई-बस योजना कागजों में फंसी, नोएडा एयरपोर्ट की उड़ान अब भी टिकी

लखनऊ  देश के सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचे में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन 30 अक्टूबर को प्रस्तावित है, लेकिन एयरपोर्ट तक सुगम यातायात सुविधा की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ई-बस सेवा अब भी कागजों में उलझी हुई है. बेहतर कनेक्टिविटी नहीं होने की वजह से यात्रियों का सीधे एयरपोर्ट पहुंचना मुश्किल होगा. 500 बसों की योजना जिले में सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 500 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की योजना तैयार की गई थी जिसमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्रों को शामिल किया गया है. योजना के मुताबिक नोएडा में 300, ग्रेटर नोएडा व यीडा क्षेत्र में 100-100 बसें चलाई जानी है. इसके लिए 25 रूट प्रस्तावित किए गए है.   कंपनी का गठन अधर में लटका अभी तक बस संचालन के लिए आवश्यक जरूरतें जैसे बस स्टैंड, ई-चार्जिंग स्टेशन और वर्कशॉप आदि पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई है. इतना ही नहीं तीनों प्राधिकरणों की सहमति के बावजूद बसों के संचालन के लिए गठित की जाने वाली संयुक्त कंपनी ग्रीन ट्रांसपोर्ट लिमिटेड का औपचारिक गठन भी अधर में लटका हुआ है. करीब 675 करोड़ की लागत इस योजना की लागत लगभग 675 करोड़ रुपये आंकी गई है इसे प्लान करके लागू करने पर विचार किया जा रहा है. शासन स्तर पर दो निजी कंपनियों ट्रैवल टाइम मोबिलिटी इंडिया प्रा. लि. और डेलबस मोबिलिटी का चयन कर लिया गया है, जो बस संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगी. यात्रियों के बिना कैसे चलेंगी बसें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने स्पष्ट किया कि बिना पर्याप्त यात्री संख्या के रूट पर बसें चलाने से तीनों प्राधिकरणों पर फाइनेंशियल बोझ बढ़ सकता है. इसलिए बसों के संचालन से पहले एक बार इस रूट का सर्वे करना जरूरी है. यीडा ने शुरू की तैयारी यीडा ने एयरपोर्ट को ध्यान में रखते हुए अपने ई-बस रूट में एयरपोर्ट को प्रमुख ठहराव बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. ओएसडी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा से यात्रियों की सीधी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए ई-बस रूट की शुरुआत नोएडा एयरपोर्ट से ही की जाएगी. एयरपोर्ट उद्घाटन के 45 दिनों के भीतर विमान सेवाएं शुरू होने की संभावना है. ऐसे में यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने के बेहतर कनेक्टिविटी होनी जरूरी है.

देखिए भविष्य का भारत! UP Trade Show में 2047 की प्रगति का शानदार अनुभव

लखनऊ  ग्रेटर नोएडा के नाॅलेज पार्क स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो की तैयारी पूरी कर ली गई है. इसमें विकसित भारत 2047 का विशेष झलक देखने को मिलेगी. इस शो में 5 लाख दर्शकों के आने की उम्मीद है. यहां 2500 एक्जीबिटर अलग-अलग उत्पाद प्रदर्शित करेंगे. कारोबारियों को यहां पर बड़ा कारोबार होने की उम्मीद है. शो में विदेशी खरीदार भी आएंगे। इससे यूपी को आर्थिक रूप से मजबूती मिलेगी. शो में यह होगा खास इस बार यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025 में राज्य की सांस्कृतिक धरोहर, पर्यटन निवेश, आर्थिक प्रगति को प्रमुखता से दर्शाया जाएगा. एयरपोर्ट का एक विशेष स्टाॅल होगा. इसके अलावा 100 से अधिक नए स्टार्टअप को स्टाॅल आवंटित किया गया है. यहां पर छात्रों को बुलाया जाएगा. पहली बार शो में फैशन शो अलग स्तर का होगा. इस बार रूस कंट्री पार्टनर के रूप में यूपी ट्रेड शो में हिस्सा ले रहा है। यहां पर मुरादाबाद की कारीगरी से लेकर मुंबई तक के पकवान प्रदर्शित होंगे.   वन ट्रिलियन डाॅलर अर्थव्यवस्था है लक्ष्य यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो से यूपी की अर्थव्यवस्था को उड़ान मिलेगी. वन ट्रिलियन डाॅगर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को पूरा करने में यह शो अहम साबित होगा. नीति निर्माता, वैश्विक निवेश, कारोबारी, शैक्षणिक प्रतिनिधि सहित पर्यटन क्षेत्र की कई नामी हस्ती इस शो में पहुंचेंगी. पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए विशेष पवेलियन तैयार किए गए है. आम जनता के लिए फ्री एंट्री शो का उद्घाटन 25 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे. 26 से 29 सितंबर के लिए यह शो आम जनता के लिए ओपन रहेगा. शो में जनता की एंट्री फ्री रहेगी. किसी तरह की कोई फीस नहीं लगेगी। लोगों को 2500 स्टाॅल पर घूमने का मौका मिलेगा.

निगम कर्मचारी संघ के नए पदाधिकारी 22 को लेंगे शपथ, समारोह की धूम

गाजियाबाद नगर निगम कर्मचारी संघ का शपथ समारोह 22 सितंबर को कराया जाएगा। नेहरू नगर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में दोपहर तीन बजे शपथ समारोह होगा। मुख्य चुनाव अधिकारी ब्रज मोहन सिंघल ने बताया कि निगम कर्मचारी संघ चुनाव में अनुराग गुट ने जीत दर्ज की है।  अनुराग को कर्मचारी संघ का अध्यक्ष चुना गया है। शपथ ग्रहण कराने की सभी तैयारी पूरी हो गई है। उन्होंने बताया कार्यक्रम में महापौर सुनीता दयाल मुख्य अतिथि मौजूद रहेंगी। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक विशिष्ट अतिथि रहेंगे।

आपातकालीन सेवा में आगे: मान सरकार की एम्बुलेंस लोगों के लिए हमेशा तैयार

पंजाब  पंजाब में भगवंत मान सरकार ने बड़ी पहल कर लोगों की जान बचाने का काम किया है. आपात स्थिति हो या आपदा, पंजाब की एम्बुलेंस सेवा हर समय लोगों की जिंदगी बचाने के लिए तैयार है. पिछले साल से अब तक प्रदेश में बड़ी संख्या में आधुनिक, GPS एनेबल एम्बुलेंस को सेवा में उतारा है. हाई टेक एम्बुलेंस सर्विस जुलाई 2024 में CM मान ने 58 नई हाई-टेक एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाई थी, जबकि इसी साल जून 2025 में 46 और अत्याधुनिक एम्बुलेंस राज्य के बेड़े में जोड़ी गई हैं. इससे पंजाब में कुल 371 सरकारी एम्बुलेंस हर जिले और कस्बे में मरीजों को तुरंत मदद पहुंचा रही हैं. 80 बच्चों का सुरक्षित जन्म सरकार ने तय समय सीमा भी सख्ती से लागू की है. शहरी क्षेत्रों में 15 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 मिनट के भीतर एम्बुलेंस पहुंच रही है. आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-जुलाई 2024 के बीच ही 1 लाख से ज्यादा मरीजों को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया गया है. जिनमें 10,737 दिल के मरीज और 28,540 गर्भवती महिलाएं शामिल रहीं. इन एम्बुलेंसों में 80 बच्चों का सुरक्षित जन्म भी हुआ.    मददगार बनीं बोट एम्बुलेंस सरकार की संवेदनशीलता का बड़ा उदाहरण हाल ही में आए बाढ़ संकट के दौरान देखने को मिला. जब पानी ने सड़कों और गांवों को डुबा दिया, तब सरकार ने नावों, ट्रेक्टरों और अस्थायी फ्लोट्स को भी बोट एम्बुलेंस में तब्दील कर दिया. इनसे गांव-गांव तक दवाइयां पहुंचाईं गईं, जबकि जरूरतमंद मरीजों को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया गया. ऐसे कठिन हालातों में भी चार बच्चों का सुरक्षित जन्म हुआ. कईं लोगों की जान समय रहते बचाई गई. मिल रही है भरोसेमंद सेवा जीपीएस आधारित आधुनिक एम्बुलेंस, सड़क सुरक्षा बल और 108 हेल्पलाइन के साथ मिलकर अब पंजाब वासियों को हर आपात स्थिति में तुरंत और भरोसेमंद सेवा मिल रही है. मुख्यमंत्री मान ने कहा है कि हमारी सरकार का मकसद एक ही है- हर पंजाबी की जान की रक्षा. पंजाब की एम्बुलेंस सेवा हर कठिन घड़ी में जनता के साथ है.