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प्रधानमंत्री मोदी गरीबों का दुख और उनकी जरूरतें समझते हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

संबल योजना सच्चे अर्थों में श्रमिक भाई-बहनों का सहारा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी गरीबों का दुख और उनकी जरूरतें समझते हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने 7,953 हितग्राहियों के खातों में 175 करोड़ की राशि सिंगल क्लिक से की अंतरित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी संस्कृति में मान्यता है कि 'परहित सरिस धर्म नहिं भाई' यानी दूसरों की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है और संबल योजना दूसरों की सेवा करने की इसी भावना को चरितार्थ करने का मार्ग है। राज्य सरकार की इस पहल का ही परिणाम है कि संबल योजना सच्चे अर्थों में श्रमिक भाई-बहनों का सहारा बनी हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय से संबल योजना के 7 हजार 953 हितग्राहियों के खातों में 175 करोड़ रुपये अंतरित कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि यह राशि श्रमिक भाई-बहनों के लिए बड़ी मदद साबित होगी। प्रदेश में 1 करोड़ 77 लाख से अधिक श्रमिक इस योजना में पंजीकृत हैं। पंजीयन की प्रक्रिया लगातार जारी है। इस अवसर पर पंचायत और ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल उपस्थित थे। कार्यक्रम से सभी जिले वर्चुअली रूप से जुड़े। श्रमिकों के कल्याण के लिए "श्रीपहल" को मंजूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संबल योजना की शुरूआत वर्ष 2018 में हुई थी, तब से अब तक कुल 7 लाख 60 हजार 886 प्रकरणों में 7 हजार करोड़ रूपए से अधिक की राशि हितग्राहियों को वितरित की जा चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गरीबी देखी है, इसलिए वे गरीबों का दुख और उनकी जरूरतें समझते हैं। संबल योजना उसी मुश्किल वक्त के साथी का नाम है। इसी क्रम में श्रमिकों के स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार में मदद के लिए को "श्रीपहल" को मंजूरी प्रदान की गई है। इसका एक और उद्देश्य श्रमिकों के जीवन स्तर को उन्नत करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। गिग एवं प्लेटफार्म श्रमिकों की नई श्रेणी बनाकर संबल योजना में किया शामिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार सबका साथ और सबका विकास की राह पर अग्रसर है। मार्च 2024 से घर-घर जाकर सामान और सेवायें देने वाले गिग एवं प्लेटफार्म श्रमिकों की नई श्रेणी बनाकर संबल योजना में शामिल किया गया है। अब ये श्रमिक भाई-बहन अधिकाधिक संख्या में संबल योजना में रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं और सभी आर्थिक हितलाभ ले रहे हैं। इसी क्रम में पत्थर तोड़ने वाले, ईंट बनाने वाले, पापड़-अचार बनाने वाले, खाना बनाने वाले, घरों में काम करने वाले मजदूर या तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले सभी श्रमिक और उनके परिवार इस योजना से जुड़कर आर्थिक मदद पा रहे हैं। संबल योजना के जरिए श्रमिक भाई-बहनों और उनके परिवार के जीवन को आसान और बेहतर बनाने तथा उनका बेहतर भविष्य गढ़ने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संबल योजना में रजिस्टर्ड श्रमिकों के आंशिक स्थाई रूप से अपंग होने पर 01 लाख रुपये और स्थाई रूप से अपंग होने पर 02 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। दुर्घटना में संबल हितग्राही भाई-बहन की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को 4 लाख रुपये और सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये अनुग्रह सहायता दिये जाने का प्रावधान है। संबल हितग्राही के परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए 5 हजार रुपये की अंत्येष्टि सहायता राशि देने का भी प्रावधान है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामय योजना का लाभ भी दिया जा रहा है। इसमें पांच लाख रुपये तक निःशुल्क इलाज की सुविधा का प्रावधान किया गया है। कम से कम समय में प्रभावितों को उपलब्ध कराया जाएगा हितलाभ : मंत्री पटेल पंचायत और ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि 5वीं बार श्रमिकों के खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से सीधे राशि अंतरित की जा रही है। आज अंतरित हुई राशि में 28 दिसम्बर 2024 तक के सभी प्रकरणों का निराकरण हो गया है। दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में कम से कम समय में संबंधित श्रमिक या उनके परिजन को हितलाभ अंतरित कराने की दिशा में विभाग निरंतर प्रयासरत है। इस अवसर पर सचिव रघुराज राजेन्द्रन सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। 

CM डॉ. यादव का बड़ा बयान- स्वच्छता व पर्यावरण में मध्यप्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य

स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने फिर रचा इतिहास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव CM डॉ. यादव का बड़ा बयान- स्वच्छता व पर्यावरण में मध्यप्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 में इंदौर प्रथम, जबलपुर द्वितीय और श्रेणी-3 में देवास प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी प्रदेशवासियों को बधाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में इंदौर, जबलपुर और देवास को 'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण- 2025" सम्मान प्राप्त होने पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने फिर इतिहास रचा है। संपूर्ण भारत के लिए यह सफलता अत्यंत प्रेरणादायी है। मध्यप्रदेश के इन शहरों के नागरिकों की स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता, अटूट संकल्प और अद्वितीय जनभागीदारी सराहनीय है। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में "स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025" के पुरस्कार समारोह में श्रेणी-1 के अंतर्गत इंदौर को प्रथम पुरस्कार (पुरस्कार राशि 1.5 करोड़ रुपए), जबलपुर को द्वितीय पुरस्कार (पुरस्कार राशि एक करोड़) और श्रेणी -3 के अंतर्गत देवास को प्रथम पुरस्कार (पुरस्कार राशि 37.50 लाख रुपए) देकर सम्मानित किया। राष्ट्रीय स्तर के इस सर्वेक्षण में इंदौर ने 200 में से 200 अंक, जबलपुर ने 199 अंक और देवास ने 193 अंक प्राप्त किए हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नव निवार्चित उप राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन को दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ नेता श्री सी.पी. राधाकृष्णन को देश के 15वें उप राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने पर बधाई दी है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्री राधा कृष्णन का जीवन जनकल्याण के लिए समर्पित रहा है। निश्चित ही वे उप राष्ट्रपति पद की गरिमा को बढ़ाने का कार्य करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में राष्ट्र प्रगति की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। नवनिर्वाचित उप राष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन का मार्गदर्शन भी हमारे राष्ट्र को प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री राधाकृष्णन को मध्यप्रदेश की समस्त 9 करोड़ जनता की ओर से बधाई और अनंत शुभकामनाएं दी हैं।

रांची में जाम से मिलेगी राहत, जल्द तैयार होंगे 3 फ्लाईओवर – जानें कब होगा उद्घाटन

रांची झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सोमवार कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित रांची शहर के तीन महत्वपूर्ण फ्लाईओवर के कार्य योजना एवं इसके डिजाइन से संबंधित प्रेजेंटेशन पर पथ निर्माण विभाग के वरीय अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया।         हरमू फ्लाईओवर को रातू रोड फ्लाईओवर से जोड़ने के निर्देश मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित हरमू (सहजानंद चौक) से एसीबी कार्यालय तक बनने वाले फ्लाईओवर परियोजना का विस्तृत प्रेजेंटेशन देखा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि हरमू फ्लाईओवर का निर्माण ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हरमू बाईपास रोड पर अक्सर लगने वाले जाम से लोगों को काफी परेशानी होती है। इस फ्लाईओवर के निर्माण से लोगों को आवागमन में काफी सुविधा होगी और उनका समय भी बचेगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस फ्लाईओवर को रातू रोड फ्लाईओवर से जोड़ें ताकि आमजनमानस को आवागमन में सुविधा हो सके। मुख्यमंत्री के समक्ष पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से यह जानकारी दी कि प्रस्तावित हरमू (सहजानंद चौक) से एसीबी कार्यालय तक बनने वाले फ्लाईओवर परियोजना का टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर लिया गया है। CM हेमंत ने फ्लाईओवर परियोजना का विस्तृत प्रेजेंटेशन देखा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अरगोड़ा चौक से कटहल मोड़ एवं करम टोली चौक से साइंस सिटी तक बनने वाले फ्लाईओवर निर्माण परियोजना से संबंधित प्रेजेंटेशन की विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की एवं इन फ्लाईओवर की महत्ता को देखते हुए कई आवश्यक दिशा-निर्देश भी अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जल्द उक्त फ्लाईओवर निर्माण के लिए एक बेहतर कार्य योजना बनाते हुए डीपीआर तैयार की जाए तथा इस परियोजना को मूर्त रूप देने की दिशा में अग्रतर कार्यवाही करें। मुख्यमंत्री ने अरगोड़ा चौक के ऊपर गोल चक्कर बनाने का दिया निर्देश मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित फ्लाईओवर अरगोड़ा चौक के ऊपर गोलचक्कर (रोटरी) बनाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अरगोड़ा चौक में गोलचक्कर निर्माण से कई महत्वपूर्ण सड़कें आपस में कनेक्ट हो जाएगी जिससे लोगों को आवागमन में काफी सुविधा होगी। मुख्यमंत्री ने करम टोली चौक से साइंस सिटी तक एलिवेटेड फ्लाईओवर (4 लेन) परियोजना का प्रेजेंटेशन देखा।इस फ्लाईओवर निर्माण तथा प्रस्तावित डॉक्टर्स कॉलोनी से हिल व्यू बरियातू रोड तक सड़क निर्माण योजना पर भी अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया।         मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रस्तावित उक्त सभी फ्लाईओवर निर्माण कार्य परियोजना एवं इससे जुड़ी डिजाइन में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर इन परियोजनाओं को मूर्त रूप देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है, अतएव सभी कार्य पूरी तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ किए जाएं। इस अवसर पर पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार, अभियंता प्रमुख, पथ निर्माण विभाग प्रवीण भेंगरा, मुख्य अभियंता विजय रंजन एवं कंसल्टेंट कंपनी स्पर्श इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड के सुधीर कुमार सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

युवा बनेंगे प्रोफेशनल: छत्तीसगढ़ में मुफ्त होटल मैनेजमेंट कोर्स की सुविधा

रायपुर युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू करने जा रही है है. पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने युवाओं को होटल मैनेजमेंट का निःशुल्क प्रशिक्षण देने की घोषणा की है. ये कोर्स छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के युवाओं के लिए होगा और कोर्स का खर्च बस्तर और सरगुजा विकास प्राधिकरण वहन करेगा. मंत्री ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं. विभागीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने छत्तीसगढ़ रजत जयंती समारोह की तैयारियों का जायजा लिया और इसे भव्य बनाने के लिए अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए. इसके साथ ही उन्होंने श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना की प्रगति की जानकारी ली. आगामी चक्रधर समारोह, बस्तर पंडुम, और रामगढ़ महोत्सव को और बेहतर ढंग से आयोजित करने पर भी चर्चा हुई. मंत्री ने स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन देने और उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए मंच प्रदान करने के निर्देश दिए. बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव, संचालक संस्कृति विवेक आचार्य सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे. यह पहल न केवल युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और पर्यटन क्षमता को भी बढ़ावा देगी.

लिटरेचर का त्योहार लौट रहा जयपुर: 15 जनवरी से शुरू होगा फेस्टिवल, नए आयोजनों के साथ

जयपुर जयपुर। दुनिया का सबसे बड़ा साहित्यिक उत्सव, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF), 15 से 19 जनवरी 2026 तक राजधानी जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित होगा। यह फेस्टिवल अपने 19वें संस्करण में प्रवेश कर रहा है और इस दौरान साहित्य, राजनीति, विज्ञान, कला और विचार जगत के दिग्गज एक मंच पर जुटेंगे। वैश्विक मुद्दों पर सार्थक विमर्श और संवाद की यह परंपरा हर वर्ष की तरह इस बार भी नए दृष्टिकोण और कहानियों को सामने लाएगी। दुनिया का सबसे बड़ा साहित्यिक उत्सव, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 15 से 19 जनवरी 2026 तक राजधानी जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित होगा। यह फेस्टिवल अपने 19वें संस्करण में प्रवेश कर रहा है और इस दौरान साहित्य, राजनीति, विज्ञान, कला और विचार जगत के दिग्गज एक मंच पर जुटेंगे। वैश्विक मुद्दों पर सार्थक विमर्श और संवाद की यह परंपरा हर वर्ष की तरह इस बार भी नए दृष्टिकोण और कहानियों को सामने लाएगी। खास बात यह है कि इस बार फेस्टिवल जनवरी के मध्य में आयोजित हो रहा है, जबकि पिछले दो वर्षों से यह फरवरी के शुरुआती हफ्तों में समाप्त होता था। वर्ष 2025 में यह 30 जनवरी से 3 फरवरी तक और 2024 में 1 से 5 फरवरी तक आयोजित हुआ था। आयोजकों ने बताया कि फेस्टिवल को लेकर फ्रेंड्स ऑफ फेस्टिवल (एफओएफ) पैकेज की शुरुआत की गई है। इन पैकेजों की शुरुआती कीमत 14,000 रुपए रखी गई है। पैकेज धारकों को जेएलएफ म्यूजिक स्टेज, गाला डिनर और प्रतिष्ठित राइटर्स बॉल जैसे विशेष आयोजनों में शामिल होने का अवसर मिलेगा। हालांकि इसमें होटल स्टे शामिल नहीं है और सभी कार्यक्रमों में सीटें पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर ही मिलेंगी। पैकेज को और आकर्षक बनाने के लिए डिस्काउंट ऑफर भी रखे गए हैं। पांच दिन बुकिंग कराने पर 20% छूट, चार दिन पर 15% और 2–3 दिन पर 10% की छूट दी जाएगी। साथ ही 31 दिसंबर 2025 तक कैंसलेशन करने पर 75% तक रिफंड मिल सकेगा। फेस्टिवल के दौरान भारत और विदेश के नामी लेखक, कलाकार और वक्ताओं से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। 15 से 17 जनवरी को जेएलएफ म्यूजिक स्टेज पर विश्वभर के कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। 18 जनवरी को गाला डिनर के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी, जबकि 19 जनवरी को प्रतिष्ठित राइटर्स बॉल का आयोजन होगा। इसमें साहित्य, विचार, संगीत और संवाद के साथ सितारों भरी शाम का अविस्मरणीय अनुभव मिलेगा। आयोजकों के अनुसार जेएलएफ केवल साहित्य का उत्सव नहीं है, बल्कि विचारों और संस्कृतियों का वैश्विक संगम है, जो नई सोच और दृष्टिकोणों को जन्म देता है।

यात्रियों को मिलेगा जाम से निजात: एबी रोड पर 622 करोड़ से बनेंगे 9 फ्लायओवर

इंदौर  प्राधिकरण द्वारा कराए गए सर्वे के आधार पर कलेक्टर ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग को पत्र भेजा है। इसमें जिलास्तरीय यातायात समिति की रिपोर्ट भी संलग्न की गई है। पत्र में एबी रोड पर 9 फ्लायओवरों के निर्माण को मंजूरी देने का अनुरोध किया गया है। कुल 622 करोड़ रुपए की लागत से इन फ्लायओवरों का निर्माण प्रस्तावित है। नीरंजनपुर से लेकर राजीव गांधी चौराहा तक इनका निर्माण होगा। बीआरटीएस हटाने की कवायद के बीच फ्लायओवर योजना वर्तमान में एबी रोड पर बीआरटीएस को हटाने का कार्य शुरू हो चुका है। निगम ने लगभग ढाई करोड़ रुपए के टेंडर को मंजूरी दी है और ठेकेदार फर्म द्वारा रेलिंग हटाने का कार्य प्रारंभ किया जा सकता है। साथ ही लगभग 13 करोड़ रुपए की राशि डिवाइडर निर्माण के लिए भी स्वीकृत कर दी गई है। ऐसे में फ्लायओवर योजना को लेकर प्राधिकरण का सर्वे और कलेक्टर का पत्र नई दिशा देता है। अधूरे एलिवेटेड कॉरिडोर पर भी सवाल नीरंजनपुर और सत्यसांई चौराहे पर एमपीआरडीसी द्वारा फ्लायओवर निर्माण का कार्य पहले से ही जारी है। वहीं एलआईजी से नवलखा तक एलिवेटेड कॉरिडोर का टेंडर लोक निर्माण विभाग ने कुछ वर्ष पूर्व मंजूर किया था, लेकिन काम अब तक शुरू नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इस परियोजना से असहमति जताई, जिसके चलते यह अधर में है। हाईकोर्ट के आदेश पर बीआरटीएस को हटाया जा रहा है और अब एबी रोड के प्रमुख चौराहों पर फ्लायओवर बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। 622 करोड़ में होगा 9 फ्लायओवरों का निर्माण कलेक्टर ने पहले चरण में एलआईजी चौराहा, शिवाजी वाटिका और गीता भवन चौराहा पर फ्लायओवर बनाने का अनुरोध किया है। इन तीन फ्लायओवरों की अनुमानित लागत 283.56 करोड़ रुपए बताई गई है। इसके अलावा अन्य 11 चौराहों में से पांच फ्लायओवर—जंजीरवाला चौराहा, टॉवर, चाणक्यपुरी, गौपुर और अग्रसेन चौराहा पर निर्माण प्रस्तावित है, जिन पर 380 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस तरह कुल 9 फ्लायओवरों पर 622 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 

यात्रियों की सुरक्षा पर जोर: शताब्दी एक्सप्रेस में लागू हुआ वंदे भारत जैसा डोर सिस्टम

ग्वालियर नई दिल्ली से रानी कमलापति के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस अब हाईटेक हो गई है। इस ट्रेन में मेट्रो, वंदे भारत और तेजस एक्सप्रेस की तर्ज पर अब ऑटोमेटिक डोर लगा दिए गए हैं। इसका ट्रायल भी हो चुका है और अब वंदे भारत की तरह इसके गेट खुलने भी लगे हैं। कोच के दरवाजों पर इंडिकेटर और अलार्म भी लगाए गए हैं। यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और आपराधिक घटनाओं को रोकने में यह ऑटोमेटिक डोर कारगर साबित होंगे। शताब्दी के चलने से 10 सेकंड पहले इसके सभी दरवाजे अपने आप बंद होने लगे हैं। इस ट्रेन में अभी हाल ही में इस व्यवस्था को शुरू किया गया है। चेन पुलिंग पर भी नहीं खुलेंगे गेट शताब्दी एक्सप्रेस के डोर लॉकिंग सिस्टम को वंदे भारत एक्सप्रेस की तर्ज पर विकसित किया गया है। वंदे भारत एक्सप्रेस में अगला स्टेशन आने की सूचना के साथ यह भी बताया जाता है कि दरवाजे किस ओर खुलेंगे। इसी तरह की व्यवस्था शताब्दी एक्सप्रेस में की गई है। कई बार लोग परिजनों के छूट जाने या अन्य किसी कारण से ट्रेन में चेन पुलिंग कर देते थे। अब ऐसा नहीं होगा। अब चेन पुलिंग करने पर भी दरवाजे नहीं खुलेंगे। चोटिल होने से भी बचेंगे अभी तक देखने में आ रहा है कि ट्रेनों के चलते समय प्लेटफॉर्म पर यात्री चढऩे और उतरने के प्रयास में चोटिल हो जाते हैं। कभी- कभी तो यात्रियों की मौत तक हो जाती है, लेकिन अब इस नई व्यवस्था से शताब्दी में इस तरह की घटनाएं नहीं हो सकेंगी। क्योंकि दरवाजे अपने आप ही बंद हो जाएंगे। चोरी, छीना-झपटी की घटनाओं से मिलेगी राहत शताब्दी एक्सप्रेस में सफर के दौरान यात्रियों को चोरी छीना-झपटी की घटनाओं से भी इस व्यवस्था के शुरू होने से राहत मिल जाएगी। इसके पहले शताब्दी एक्सप्रेस के दरवाजों को मैन्युअल तरीके से बंद किया जाता था। ट्रेन के चलने के दौरान रास्ते में आमतौर पर दोनों तरफ के दरवाजे खुले रहते थे और इसका फायदा शरारती तत्व उठा लेते थे, जिस नई प्रणाली से ट्रेन को लैस किया गया है। वह इसके स्टेशन पहुंचने और चलने के समय ही कार्य करेंगे। शताब्दी एक्सप्रेस में ऑटोमेटिक डोर लगाए गए हैं। यह ट्रेन उत्तर रेलवे मंडल की है। उन्हीं के द्वारा इसे नया रूप दिया है।– शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ उत्तर मध्य रेलवे

क्राइम कंट्रोल का नया तरीका: हरियाणा की जेलों में हाई-टेक सिस्टम से अपराधियों पर नजर

चंडीगढ़  अब अपराधियों की पहचान को और अधिक सटीक व आधुनिक बनाने के लिए हरियाणा की 20 जेलों में मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट (एमसीयू) और फिंगर एनरोल्ड डिवाइस (एफईडी) लगाए जाएंगे। इससे अपराधियों की यूनिक पहचान तैयार होगी जिसमें उंगलियों के निशान, चेहरे की विशेषताएं, डीएनए नमूने और रेटिना स्कैन शामिल होंगे।  महानिदेशक कारागार आलोक कुमार राय ने बताया कि अपराधियों के पुराने परंपरागत पहचान के तरीकों से आगे बढ़ते हुए ये तकनीक अपराधियों पर कड़ी निगरानी रखने, उनकी ट्रैकिंग और गतिविधियों का पता लगाने में मददगार साबित होगी। एमसीयू से जुटाए गए आंकड़े स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एससीआरबी) के पास सुरक्षित रहेंगे और इन्हें राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के साथ भी साझा किया जाएगा। यह जानकारी 75 साल तक संग्रहित रखी जा सकेगी। आसानी से ट्रैक होंगे अपराधियों के नेटवर्क इन यूनिट्स से मिलने वाले अपराधियों के फिंगर प्रिंट्स और रेटिना स्कैन सीधे नेशनल ऑटोमेटिक फिंगर प्रिंट्स इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एनएएफआईएस) में अपलोड होंगे। नेशनल ऑटोमेटेड फिंगर प्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (नैफिस) में देशभर के अपराधियों, बंदियों और संदिग्धों का डेटा दर्ज होता है, जिससे अपराधियों का नेटवर्क ट्रैक करना और आसान होगा।  पंचकूला सेक्टर-14 स्थित दफ्तर में महानिदेशक कारागार ने कहा कि ये पहल आपराधिक न्याय प्रणाली को और मजबूत करेगी। अपराधियों का विस्तृत यूनिक डेटा उपलब्ध होने से न केवल उनकी पहचान पुख्ता होगी बल्कि लंबे समय तक उनकी गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी। यह कदम प्रदेश में अपराध पर अंकुश लगाने और कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।  

मुक्ता सिंह का कमाल: चंबल की बेटी ने रचा इतिहास, बनीं सेना में पहली महिला लेफ्टिनेंट

ग्वालियर  चंबल की धरती को वीरों की भूमि कहा जाता है। अब इसी धरती की एक बेटी ने देश का नाम रोशन किया है। ग्वालियर की मुक्ता सिंह भारतीय थल सेना में लेफ्टिनेंट बन गई हैं। बिहार के गया स्थित ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) में आयोजित पासिंग आउट परेड में उन्होंने ओवरऑल ऑर्डर ऑफ मेरिट में तीसरा स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक हासिल किया। विशेष बात यह है कि वे ओटीए गया से कांस्य पदक पाने वाली पहली महिला ऑफिसर कैडेट बनी हैं। ग्वालियर की रहने वाली हैं मुक्ता सिंह मुक्ता सिंह मूल रूप से ग्वालियर की रहने वाली हैं, हालांकि उनका जन्म भिंड स्थित ननिहाल में हुआ। उनके पिता राजबीर सिंह भारतीय वायुसेना में अधिकारी रह चुके हैं, जबकि उनकी मां बृजमोहिनी यादव खेल जगत से जुड़ी रहीं। देशभक्ति का जज़्बा परिवार में पहले से ही था, जिसका असर मुक्ता के जीवन पर भी पड़ा। पिता ने बेटी के जन्म के समय ही तय कर लिया था कि वह डिफेंस में जाएगी और नामकरण के समय ही उसका नाम ‘मुक्ता’ रखा गया। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया मुक्ता ने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन ग्वालियर से पूरी की और मालनपुर की एक फैक्ट्री में कुछ समय नौकरी भी की। लेकिन बचपन से ही डिफेंस फोर्सेज में जाने का सपना उन्हें प्रेरित करता रहा। फिजिकल ट्रेनिंग के लिए उन्होंने अपने ननिहाल भिंड में मामा राधे गोपाल यादव से तैराकी व अन्य ट्रेनिंग ली। उनके नाना हरबीर सिंह यादव का सपना था कि घर से कोई आर्मी में जाए, जो अब मुक्ता ने पूरा किया। तीसरी बार में मिली सफलता वहीं, मुक्ता सिंह सफर आसान नहीं था। शुरुआती दो प्रयासों में मेरिट में जगह नहीं मिली, लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमीशन टेक्निकल महिला-32 कोर्स में ऑल इंडिया-1 रैंक हासिल कर सफलता पाई। शुरुआत में प्रशिक्षण चेन्नई ओटीए में हुआ, बाद में कोर्स बिहार के गया ओटीए में ट्रांसफर कर दिया गया। यहां पर उनकी मेहनत ने उन्हें लीडरशिप के कई मौके दिलाए। अकादमी अंडर ऑफिसर (AUO), जूनियर अंडर ऑफिसर (JUO) और बटालियन अंडर ऑफिसर (BUO) जैसे पदों पर रहते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की। तीन बार चोट भी लगी तीन बार चोटों के कारण कोर्स दोबारा शुरू करने के बावजूद उसने हार नहीं मानी। आखिरकार 6 सितंबर को आयोजित पासिंग आउट परेड में अपनी मेहनत और लगन के दम पर तीसरा स्थान हासिल कर इतिहास रच दिया। उन्हें 118 इंजीनियर रेजिमेंट में कमीशन मिला है। ग्वालियर और चंबल की यह बेटी आज पूरे देश का गर्व बनी हुई है और जल्द ही अपने गृह नगर ग्वालियर लौटने वाली हैं।